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Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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बहुत ही शानदार और लाज़वाब अपडेट है सुयश के टैटू का तो राज खुल गया लेकिन एक और राज सामने आ गया सबकी हैप्पी न्यू ईयर की जगह bad न्यू ईयर हो गई शैफाली के पास एक सिक्का मिला है वह शैफाली के पास कौन व क्यों रख के गया है जिसका पता किसी को भी नहीं है अल्बर्ट के हिसाब से यह सिक्का अटलांटिस सभ्यता का है ये सच हो सकता है और शैफाली का उनके साथ कुछ तो संबंध हो सकता है???

Yuganda 🤣

I don't know ,aap padhakar batana kaisi lagi ,

Awesome update

Badhiya update bhai

To Toffik hi tha jisne sab kiya tha lekin loren ko kyun mar diya usne wo to usse pyar karta tha na or bechari loren bhi uske pyar me andhi hoker uski baten man rahi thi or jis jenith se badla lena chahta tha use abhi tak jinda rakha ha usne usse pyar ka natak karta ja raha ha Jenith ki sab sachhai pata pad gayi ha dekhte han kab tak Toffik babu apni sachhai chhupa pate han waise bure karm ki saja milti hi ha or jis jagah ye sab han usse lagta ha jaise Aslam miya ko saja mili usi prakar Toffik ka bhi number lag sakta ha

moka hi nahi mil raha kuchh v pardne ka😞

चौदह वर्ष पूर्व कलिका - जो दिल्ली के एक मैग्जीन की संपादक थी - ने यक्षलोक के प्रहरी युवान के कठिन सवालों का जो जवाब दिया वह बिल्कुल महाभारत के एक प्रसंग ( युधिष्ठिर और यक्ष संवाद ) की तरह था ।
क्या ही कठिन सवाल थे और क्या ही अद्भुत जवाब थे ! यह सब कैसे कर लेते है आप शर्मा जी ! पहले तो दिमाग मे कठिन सवाल लाना और फिर उस सवाल का जवाब ढूंढना , यह कैसे कर लेते है आप !
यह वाकई मे अद्भुत था । इस अपडेट के लिए आप की जितनी तारीफ की जाए कम है ।

शायद सम्राट शिप से चौदह साल पहले जो शिप बरमूडा ट्राइंगल मे डुब गया था , उस शिप मे ही कलिका की बेटी सफर कर रही होगी । वह लड़की आकृति हो सकती है । वह आकृति जो शलाका का क्लोन धारण कर रखी है ।

दूसरी तरफ सामरा प्रदेश मे व्योम साहब पर कुदरत बहुत ही अधिक मेहरबान हो रखा है । वगैर मांगे छप्पर फाड़ कर कृपा बरसा रहा है । पहले अमृत की प्राप्ति हुई और अब राजकुमारी त्रिकाली का दिल उनपर धड़क गया है ।
मंदिर मे जिस तरह दोनो ने एक दूसरे को रक्षा सूत्र पहनाया , उससे लगता है यह रक्षा सूत्र नही विवाह सूत्र की प्रक्रिया थी ।


इन दो घटनाक्रम के बाद तीसरी तरफ कैस्पर का दिल भी मैग्ना पर मचल उठा है और खास यह है कि यह धड़कन हजारों वर्ष बाद हुआ है । लेकिन सवाल यह है कि मैग्ना है कहां !
कहीं शैफाली ही मैग्ना तो नही ! शैफाली कहीं मैग्ना का पुनर्जन्म तो नही !

कुकुरमुत्ता को छाते की तरह इस्तेमाल करते हुए सुयश साहब और उनकी टीम का तेजाबी बारिश से खुद को रक्षा करना एक और खुबसूरत अपडेट था । पांच लोग बचे हुए हैं और एलेक्स को मिला दिया जाए तो छ लोग । तौफिक साहब की जान जाते जाते बची , लेकिन लगता नही है यह साहब अधिक दिन तक जीवित रह पायेंगे ।
कुछ मिलाकर पांच प्राणी ही सम्राट शिप के जीवित बचेंगे , बशर्ते राइटर साहब ने कुछ खुराफाती न सोच रखा हो ।
ये मिश्रित पांडव जीवित रहने चाहिए पंडित जी ! :D

सभी अपडेट बेहद खुबसूरत थे ।
रोमांच से भरपूर ।
एक अलग तरह की कहानी , एक अद्भुत कहानी ।
और आउटस्टैंडिंग राइटिंग ।

अद्भुत अंक भाई

Nice update ...lambe gap ke karan thoda confusion hai kuch ...lekhak mahodaya ho sake to iska answer dijiyega ...
Gurutva shakti

Ab s
समझ आया आकृति के चेहरा नहीं बदल पाने के कारण.... इसलिए आर्यन भी जल्दी नहीं पहचान पाया उसको....


बहुत ही सुंदर अपडेट

अदभुद अकल्पनीय इससे अधिक शब्द नहीं हैं व्याख्यान के लिए

Shandar update bhai

अच्छी बात यह है कि अल्बर्ट बच गया है और अपनी ख़ुराफ़ात जारी रख रहा है।
पढ़ कर ऐसा लगा कि सुपर कमाण्डो ध्रुव वाली एक बेहद पुरानी कहानी - 'आदमखोरों का स्वर्ग' जैसा कुछ होगा।
लेकिन निराशा हाथ लगी :) हा हा!

इस अपडेट से एक और बात सूझती है कि क्या पुराने 'मर गए' किरदार भी वापस आ सकते हैं?

इस अपडेट में इक्यावन प्रश्न हैं - इतने तो एग्जाम में भी नहीं हल किए।
लिहाज़ा प्रश्नों को पढ़ने की ज़हमत नहीं उठाई मैंने।

अब तो सीधे अगले अपडेट में मिलेंगे जहाँ दिव्यास्त्रों की बातें होंगी - जैसे अभी कोई कम दिव्य शक्तियों की बातें हो रही थीं।
:tongue: :tongue: :tongue:

रिव्यू की शुरुआत की जाए
इंटरेस्टिंग इंटरेस्टिंग

Raj_sharma
आर्केडिया यहाँ वो जगह थी जहाँ शलाका अपने भाइयों के साथ बर्फ़ में विश्राम कर रहे थे। आर्गस का कैरेक्टर किसने नोटिस नहीं किया, लेकिन अगर याद हो तो मैंने कहा था आर्गस से रिलेटेड कुछ आगे होने को है।

एक और जगह जहाँ मेरा ध्यान गया है वो है लिडिया भी आरियन गैलेक्सी से रिश्ता रखती हैं, यानी अटलांटिक और आरियन के संबंध न सिर्फ़ अलेना की वजह से जुड़े हैं बल्कि एटलस की वाइफ़ लिडिया की वजह से भी ये लोग संबंधी हैं।

अब देखा जाए तो आरियन और फोरेना दोनों अलग-अलग आकाशगंगा हैं। इसका मतलब अगर मेरा अनुमान सही जाता है तो एक आकाशगंगा के लोग शलाका के समर्थन में होना चाहिए। देखो मुझे अब लगने लगा है शलाका का रोल हम लोग अटलांटिक के संदर्भ में देखते थे लेकिन जिस तरह कहानी में मोड़ आ रहे हैं उससे ये लगता है शलाका का रोल हमें आकाशगंगा के लोगों के बीच में होना चाहिए।
क्योंकि कहानी की मुख्य नायिका शेफ्फाली है जो कि अटलांटिक क्षेत्र में भूमिका निभाएगी। दूसरी मुख्य नायिका शलाका है जो कि आकाशगंगा में। ऐसे में दोनों के बीच न्याय होगा, वरना शलाका अटलांटिक तक रहती तब उसका उद्देश्य इतना महत्वपूर्ण नज़र नहीं आता।

वैसे अब एक और लक्ष्य मुझे नज़र आता है वो है शलाका का आर्गस को ढूँढना कि वह कहाँ है। कहीं आर्गस के इन लोगों से संपर्क तोड़ने की वजह कुछ और तो नहीं, क्योंकि सिर्फ़ रहने की जगह निर्धारण में संबंध तोड़ना थोड़ा फ़िल्मी टाइप लगता है।

आगे देखना टाइटन (आरियन) बनाम एंडोरस (फोरेना) के लोग भी भिड़ेंगे एक-दूसरे से। यहाँ भी एक पक्ष अच्छाई के साथ तो दूसरा ग़लत के साथ मिलेगा।

(इनकी लड़ाई समय चक्र के लिए होने वाली है)
इसको बुकमार्क करना पड़ेगा, ये आगे मुझे फ़्लेक्स मारने में काम आएगा कि देखो मैंने क्या प्रेडिक्ट किया था।

वैसे किस्मत देखो जेम्स की एलियन स्पेस शिप उड़ाएगा, दूसरा विलमार बेचारा अब जानवरों वाली ज़िंदगी जीने वाला है।

वैसे मैं एक बात को लेकर कन्फ्यूज़ हूँ कि जो दिव्य जोड़ें हैं उन्हें एक-एक शक्ति मिली, इसका मतलब क्या? उदाहरण लें तो मयूर और धारा दोनों के पास एक तरह की कॉमन शक्तियाँ हैं, और सुयश और शलाका के पास अलग-अलग तरह की दो शक्तियाँ हैं, ऐसा ही ना? या सिर्फ़ इन दोनों की और भी शक्तियाँ उजागर होना बाकी हैं।

अब यहाँ एक पहले जो मुझे संदेह था जिसका मैंने ज़िक्र भी किया था कि अगर तत्व शक्ति शलाका के भाइयों के पास हैं तो वही शक्तियाँ दिव्य जोड़ें के पास कैसे और अग्नि, वायु का कहाँ रोल रहेगा ऐसे में खैर अब समझ आ गया क्या था वो।

आगे देखने में बहुत सी चीज़ें हुईं, सबसे बड़ी बात शीट हृतु तिलिस्म पूरा हुआ। एक समय लगा कि वो आँक गिर रहे हैं, कहीं इन लोगों का द एंड तो नहीं लिख दिया गया।

तिलिस्म की मुसीबत से बाहर निकलने की घटना रोचक थी। इस बार का तिलिस्म वाक़ई ख़तरनाक था, सच में मृगन मछली ने दिमाग़ खपा दिया।

लेकिन एक रोचक घटना ने मेरा ध्यान खींच लिया। वो जलपरी का शुरू में मुझे लगा सच में तिलिस्म से बाहर से कोई आ तो नहीं गया वो भी इतना जल्दी।

अब केश्वर को पहले हल्के में ले रहा था मैं, लेकिन मुझे लगता है केश्वर आगे चलकर बहुत बड़ा खलनायक बनेगा। केश्वर अगर एक प्राणी में भावना डाल सकता है तो वह भगवान ही बन गया एक तरह से। वो चाहे तो तिलिस्म में अपनी खुद की सेना तैयार कर दे।

एक बात कुछ अपडेट में ये भी सामने आई कि तिलिस्म से कुछ जीव बाहर भी गए। सोचो ऐसे अगर भावना वाले जीव तिलिस्म के बाहर चले गए तो आम लोगों का क्या हश्र होगा। इन जीवों के पास तो मैजिकल पावर्स भी हैं।

मुझे लगता है कहानी यहाँ से एक स्तर और ऊपर चली गई है, कहानी का स्केल अब एकदम ग्रैंड लग रहा है।

आगे चलते हैं।
त्रिकाली और व्योम का दृश्य बहुत समय के उपरांत आया है। शुरू में मुझे लगा क्या ये विधुम्न का अध्याय इतना जल्दी समाप्त हो गया, पर मैं ग़लत था। संदेह था ज़रूर यहाँ कि ऐसा कैसे इतना जल्दी, अभी तो बस झलकियाँ दिखीं, ऐसे में ख़त्म इतना जल्दी।

खैर महावृक्ष की प्रशिक्षण इतनी ख़तरनाक थी, विधुम्न कितने ख़तरनाक होने वाले हैं। वैसे भी उसे महादेव का वरदान प्राप्त है तो चुनौती और कठिन।
वैसे मुझे साइंस आती तो नहीं है लेकिन गुरुत्व आकर्षण के नियम ज़रूर समझ आए।

मुझे बस इस चीज़ का समझ नहीं आ रहा कि विधुम्न, त्रिशल, कालिका, व्योम ये लोग अटलांटिक से और स्टोरी के नज़रिए से कनेक्टेड कैसे होंगे, क्योंकि इनका रोल सिर्फ़ वो नीमा गुरुजी का बदला लेने तक तो सीमित नहीं होगा।

आगे मेरे लीजेंडरी प्रेडिक्शन “अल्बर्ट ज़िंदा है शायद” वाली कन्फर्म हो गई।

वैसे क्या पेच डाला है कि अल्बर्ट को पकड़ा ही नहीं पकड़ी तो उसकी जैकेट थी, और गिराया भी पेड़ पर मान गए गुरु।

अब ऐसे ही ब्रैंडन और ब्रूनो मिल जाएँ मज़ा आ जाए।
वैसे ये काली बिल्ली की देवी क्या चीज़ थी। उस द्रव्य में तो कुछ था या नहीं लेकिन उस ब्रैसलेट में ज़रूर कुछ पावर है। वैसे लगता तो नहीं अल्बर्ट काली बिल्ली बन जाएगा क्योंकि उसे लाया गया है मतलब आगे लंबा कुछ काम होगा, इसलिए जहाँ तक लगता है उसको बिल्ली वाली शक्ति मिली होगी, शायद बिल्ली का रूप धारण करने की शक्ति मिल गई।
वैसे अभी अल्बर्ट अगर मयावन में है मतलब वो सम्रा या सेनोर जा सकता है, क्योंकि मयावन तो ख़तरे से खाली नहीं है।

कुल मिलाकर अच्छा अपडेट था।
आगे की प्रतीक्षा।

Raj_sharma next update kab aaraha hain

राज भाई
सेक्स नहीं कहानी पढ़ने का शौक रहा है मेरा हमेशा से
सेक्स पढ़ने देखने की जरूरत सिर्फ कुछ नया, अनोखा, अलग जानने के लिए समझता हूं
आनन्द या मनोरंजन सेक्स लिखने, पढ़ने, सुनने या देखने से नहीं 'करने' में ही होता है

Nice update....

Awesome update and nice story.

यह अध्याय 'काली बिल्ली' अलबर्ट के साहसिक और रहस्यमयी सफर का एक रोमांचक मोड़ है।

आपने इस भाग में अलबर्ट के चरित्र को बहुत ही चतुराई से पेश किया है। शुरुआत में टेरोसोर (Pterosaur) के चंगुल से बचने वाला दृश्य रोंगटे खड़े कर देने वाला है।👍

अलबर्ट का अपनी जैकेट की ज़िप खोलकर गिरना उसकी सूझबूझ और "जोखिम उठाने वाली" प्रवृत्ति को बखूबी दर्शाता है।😎

The Mystery of the Cat Goddess
इस अपडेट का सबसे बड़ा आकर्षण वह सूखा कुआँ और उसके भीतर छिपी बिल्ली के मुख वाली गुफा है। यहाँ लेखक ने 'इण्डियाना जोन्स' या 'लारा क्रॉफ्ट' जैसी एडवेंचर फिल्मों वाला माहौल बनाया है।🙄

अर्द्धचंद्राकार दरवाजे और जलधारा: बिना जमीन पर गिरे गायब होने वाला पानी गुफा की जादुई और उन्नत तकनीक की ओर इशारा करता है।👌🏻

अलबर्ट का बिना डरे उस रहस्यमयी जल को पी लेना और ब्रेसलेट पहनना कहानी में एक बड़ा 'टर्निंग पॉइंट' हो सकता है। भले ही अभी उसे कोई बदलाव महसूस नहीं हुआ, पर यह तय है कि भविष्य में यह जल उसे काली बिल्ली की तरह शक्तियां या रूप प्रदान करेगा।👍

प्रश्नावली का प्रभाव
अपडेट के अंत में दी गई 50 प्रश्नों की सूची पाठकों के लिए एक "मेमोरी रिफ्रेशर" का काम करती है। यह दिखाता है कि इस कहानी का कैनवास कितना विशाल है। इतने सारे रहस्यों को एक साथ जोड़ना लेखक की कल्पनाशक्ति की गहराई को दर्शाता है। यह प्रश्नावली पाठकों की उत्सुकता को चरम पर ले जाती है कि क्या 'अद्भुत दिव्यास्त्र' में इन सवालों के जवाब मिलेंगे?🤔

अंत में दी गई कविता—"कृति का संकलन हूं, नये शब्दों का संचार हूं मैं"—लेखक के आत्मविश्वास और उनकी कला के प्रति समर्पण को दर्शाती है। यह कहानी को एक दार्शनिक टच देती है।👌🏻👌🏻

यह अपडेट ऐक्शन, थ्रिलर और फैंटेसी का एक बेहतरीन मिश्रण है। अलबर्ट का 'काली बिल्ली' वाले मंदिर में जाना और वह दिव्य जल पीना आने वाले संकटों या शक्तियों की आहट है। 'अद्भुत दिव्यास्त्र' की घोषणा ने अगले भाग के लिए बेसब्री बढ़ा दी है। 🫠
एक बार फिर से शानदार अपडेट भाई 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥💥

Kuch lines padh kar and dekh kar hi samajh gaya ki bawaal kaate ho aap, let me see first, kitna bawaal kiya hai 😁

lovely update.indr apni chal me to nakamiyab ho gaya par uska chhadyantrakari dimag kuch to soch raha hai .
sabhi devo ne apni apni ek ek shakti maya ko de di .
gamnesh ke saath maya ki chhedlhani karna ekdam majedar tha .
inme se kuch shaktiyo ki jhalak hum pehle bhi kahani me dekh chuke hai .sab ekdam abhyas karke likha gaya hai jisme koi bhi galti nahi hai isliye kahani ko padhne ka maja hi kuch aur hai ..

Bhut hi jabardast update bhai
To ye thi sabhi devtao ke dvara di gayi shaktiya

nice update

Shaandar update

Nice update....

Gurutva sakti Vyom aur Hanuka ke paas hai, let's see aur kiske kiske paas ye power hai, wonderful update brother, let's see Vyom ka mission kab pura hota hai.

अद्भुत अपडेट❤❤❤

Bahut hee badhiya update hai !

बहुत ही शानदार अपडेट

Behad shandar update he Raj_sharma Bhai

Hanuka ne galti se hi sahi lekin gurutav shakti ka varan kar liya he.............

Mahadev ke kahe anusar ab maya ne sabhi shaktiyo ko adrishay kar diya he........

Dekhte he aage kya kya hota he

Keep rocking bro

फिर से एक अप्रतिम अद्भुत और रोमांचक विस्मयकारी अपडेट हैं भाई मजा आ गया

शैफाली का किरदार बिल्कुल असाधारण ऊँचाई पर है। जिस तरह वह बारूद की खुशबू के समय में फर्क पकड़ती है और उससे धुएँ पर फूँक मारने की आदत तक पहुँचती है, और फिर जले हुए रुमाल व संदल की खुशबू जैसा सूक्ष्म विवरण देती है, वह सिर्फ बुद्धिमत्ता नहीं, बल्कि लेखन की गहराई भी दिखाता है। एक अंधी बच्ची का इस तरह संवेदनाओं के सहारे अपराध की परतें खोलना बेहद प्रभावशाली लगा।

नीली रोशनी, अजीब ध्वनि, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम का ब्लास्ट होना यह हिस्सा पूरी तरह सिनेमैटिक और रहस्य से भरा लगा। ऐसा लगा जैसे कहानी अब केवल मर्डर मिस्ट्री नहीं रही, बल्कि किसी बड़े, अज्ञात, रहस्यमय और अलौकिक एडवेंचर की ओर बढ़ रही है।

कुल मिलाकर यह अपडेट कहानी को नए स्तर पर ले जाता है। भावनात्मक गहराई, वैज्ञानिक तर्क, रहस्य और अलौकिक संकेत सब एक साथ इतने संतुलित तरीके से आए हैं कि अब आगे क्या होगा, यह जानने की उत्सुकता और भी बढ़ गई है।

मजेदार अपडेट, कहानी ने दिलचस्प मोड ले लिया। मर्डर मिस्ट्री से बरमूडा ट्रेंगल की और। हम्ममम🤔🤔

Besabari se intezaar rahega next update ka Raj_sharma bhai....

Update posted friends :declare:
 

Ajju Landwalia

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#182.

चैपटर-2

वसंत ऋतु:
(तिलिस्मा 4.4)

सुयश सहित सभी लोग अब जमीन पर चमक रहे, ग्रीनलैंड के स्थान पर जाकर खड़े हो गये, जहां वसंत ऋतु से इनका सामना होना था।

सभी अब गायब होकर ग्रीनलैंड के एक स्थान पर पहुंच गये। परंतु उस स्थान पर नजर पड़ते ही, सभी बुरी तरह से हैरान हो गये।

वह एक बहुत सुंदर सी घाटी थी। उस स्थान पर पेड़, पर्वत, झील, परियां, तितली, झरना आदि सबकुछ था, जो कि एक प्रकृति की सुंदरता का कारक होता है, परंतु किसी भी चीज में कोई रंग नहीं था, यानि की सभी चीजें 70 के दशक के टेलीविजन की तरह ब्लैक एण्ड व्हाइट थीं।

इस स्थान को देख क्रिस्टी के मुंह से हंसी छूट गई।

“लगता है यह कैश्वर अब हमें किसी पुराने से टेलीविजन के अंदर ले आया है? जहां कि हर चीज का रंग उड़ गया है।” क्रिस्टी ने हंसते हुए कहा।

“मैं तो समझा था कि वसंत ऋतु में सबकुछ खुशनुमा होगा?” ऐलेक्स ने कहा- “पर यहां का तो अंदाज ही निराला लग रहा है।"

अब सबकी नजर उस बड़ी सी घाटी की ओर गई। सभी देखना चाहते थे कि वहां पर क्या-क्या है? और उस द्वार को किस प्रकार पार किया जा सकता है?

उस स्थान पर एक ओर 4 बड़े से ड्रम रखे थे। 3 ड्रम में लाल, नीला और पीला रंग था। एक ड्रम पूरी तरह से खाली था।

उस स्थान पर हवा में, एक 6 फुट का ड्रोन घूम रहा था, जिसके नीचे एक पिंजरा टंगा था और उस पिंजरे में एक परी बैठी थी, जिसने लाल रंग के वस्त्र पहन रखे थे। वह ड्रोन उस पिंजरे को लिये चारो ओर हवा में उड़ रहा था।

दूसरी ओर एक बड़ी सी चट्टान से, एक पानी का झरना गिर रहा था। उस झरने के पानी के एकत्र होने से, नीचे एक सुंदर परंतु छोटी सी झील बन गई थी।

उस झील के बीच में एक सफेद रंग का बड़ा सा लिली का फूल तैर रहा था। उस फूल के ऊपर दूसरा पिंजरा रखा था, जिसमें नीले रंग के वस्त्र पहने एक दूसरी परी बैठी थी।

तीसरा पिंजरा गायब होकर बार-बार अलग-अलग स्थानों पर दिखाई दे रहा था। तीसरे पिंजरे में पीले रंग के वस्त्र पहने एक परी बैठी थी।

चौथी परी किसी पिंजरे में नहीं थी, बल्कि हवा में उपस्थित 6 फुट ऊंचे, एक सफेद रंग के हीरे में बंद थी।

उस हीरे के नीचे एक संगमरमर के पत्थर का, 4 फुट का वर्गाकार टुकड़ा जमीन में लगा था। चौथी परी ने हरे रंग के वस्त्र पहने थे।

“यहां के माया जाल को तो देखकर ही समझ में आ रहा है, कि हमें यहां करना क्या है?" जेनिथ ने कहा।

“यह एक घाटी है, जिसके सारे रंगों के लिये ये 4 परियां जिम्मेदार हैं, परंतु किसी ने इन 4 परियों को अलग-अलग जगहों पर कैद कर दिया है?” सुयश ने कहा- “हमें इन सभी परियों को छुड़ाकर, प्रकृति के इन रंगों को भरना होगा।

“सही कहा आपने कैप्टेन।" तौफीक ने कहा- “और जैसे ही हम इन रंगों को प्रकृति में भर देंगे, स्वतः ही प्रकृति पर वसंत ऋतु का प्रभाव हो जायेगा।"

“तो फिर देर ना करते हुए इस द्वार को शुरु करते हैं।” सुयश ने कहा- “पहले लाल रंग का ड्रम रखा है, तो हम पहले लाल रंग की परी को छुड़ाने की कोशिश करते हैं।”

“पर कैप्टेन, हवा में उड़ रहे उस ड्रोन की गति बहुत ज्यादा है, ऐसे में हम उस ड्रोन तक कैसे पहुंच पायेंगे?" ऐलेक्स ने कहा।

ऐलेक्स की बात सुनकर सुयश ध्यान से उस ड्रोन की गति का अध्ययन करने लगा। उस ड्रोन की गति कम से कम 60 किलोमीटर प्रति घंटा के आस-पास थी। ऐसे में उसे पकड़ पाना इतना भी आसान नहीं था।

तभी सुयश की नजर एक ऊंची सी चट्टान की ओर गई। ड्रोन बार-बार घूमते हुए उस चट्टान के पास से गुजर रहा था।

उस चट्टान के नीचे की ओर झील का पानी था। यह देख सुयश के दिमाग में एक युक्ति आ गई।

"हममें से किसी को उस चट्टान पर जाकर खड़ा होना होगा?” सुयश ने चट्टान की ओर इशारा करते हुए कहा और जैसे ही ड्रोन नीचे से निकलेगा, चट्टान से कूदकर उस ड्रोन पर सवार होने की कोशिश करनी होगी। क्यों कि ड्रोन पर लगे पंखे, उसके प्लेटफार्म के नीचे हैं, इसलिए वह पंखे हमें, किसी भी प्रकार की हानि नहीं पहुंचा सकते। मुझे तो यह तरीका ही आसान लगा क्यों कि अगर कोई नीचे गिर भी गया? तो नीचे झील का पानी होने की वजह से उसे चोट नहीं लगेगी।"

“ठीक है कैप्टेन, तो मैं चट्टान पर जाकर ड्रोन पर कूदने की कोशिश करती हूं।” क्रिस्टी ने स्वयं से आगे आते हुए कहा और सुयश की स्वीकृति पाकर उस चट्टान की ओर बढ़ गई।

कुछ ही पलों में क्रिस्टी चट्टान पर थी। अब क्रिस्टी की नजर पास आ रहे ड्रोन की ओर थी। कुछ देर तक क्रिस्टी ध्यान से ड्रोन को देखती रही और उसकी गति का पूर्ण अंदाजा लगा लेने के बाद, क्रिस्टी ने ड्रोन पर छलांग लगा दी।

एक पल के लिये ऐसा लगा मानो क्रिस्टी का शरीर, किसी सुपरगर्ल की भांति हवा में उड़ रहा हो।
पर जैसे ही ड्रोन इस बार चट्टान के समीप आया, उसकी गति अचानक से बढ़ गई और वह क्रिस्टी के नीचे से, उसे चिढ़ाता हुआ निकल गया।

एक पल के लिये क्रिस्टी की आँखों में आश्चर्य के भाव उभरे, परंतु इससे पहले कि क्रिस्टी ज्यादा आश्चर्य व्यक्त कर पाती, उसका शरीर ‘छपाक' की तेज आवाज करते हुए झील के पानी में आ गिरा।

क्रिस्टी ने पानी में एक डाइव मारी और झील से निकल कर बाहर आ गई।

क्रिस्टी ने सुयश से कुछ बोलने की कोशिश की, पर सुयश हाथ के इशारे से उसे रोकते हुए बोला- “कुछ बोलने की जरुरत नहीं है क्रिस्टी, हम सभी ने देखा कि कैसे ड्रोन की स्पीड एका एक तेज हो गई थी? अब यह साफ हो गया कि यह एक साधारण ड्रोन नहीं, बल्कि एक स्मार्ट ड्रोन है, जो अपने पर आ रहे खतरों को देख, अपने अंदर स्वयं बदलाव कर सकता है।....क्या अब किसी के पास इस ड्रोन को पकड़ने का कोई दूसरा तरीका है?"

"हां कैप्टेन।” इस बार ऐलेक्स ने अपना हाथ उठाते हुए कहा- “मुझे अभी-अभी यहां सामने की ओर कुछ अदृश्य सीढ़ियां बनी दिखाई दीं हैं, ड्रोन उन सीढ़ियों के नीचे से बार-बार निकल रहा है। जिस चट्टान से क्रिस्टी नीचे कूदी, वह चट्टान काफी ऊंचाई पर थी, जिससे क्रिस्टी को ड्रोन को पकड़ने के लिये, काफी पहले कूदना पड़ा था, पर उन सीढ़ियों और ड्रोन के बीच ज्यादा फासला नहीं है, इसलिये मुझे लगता है कि उन सीढ़ियों के माध्यम से आसानी से ड्रोन को पकड़ा जा सकता है?" यह कहकर ऐलेक्स ने एक दिशा की ओर इशारा करते हुए कहा।

“ठीक है ऐलेक्स, तुम भी कोशिश करके देख लो, हो सकता है कि इस तरीके से ही लाल परी के ड्रोन को पकड़ा जा सके?” सुयश ने ऐलेक्स को आज्ञा देते हुए कहा।

सुयश की बात सुन ऐलेक्स उन सीढ़ियों की ओर बढ़ गया। कुछ ही देर में ऐलेक्स उन सीढ़ियों पर चढ़कर, एक ऐसे स्थान पर खड़ा हो गया, जिसके नीचे से ड्रोन बार-बार निकल रहा था।

शैफाली के सिवा बाकी किसी को, अदृश्य सीढ़ियां दिखाई नहीं दे रहीं थीं, पर ऐलक्स को वह सब, अब हवा में एक स्थान पर खड़े देख रहे थे।

ऐलेक्स ने भी क्रिस्टी की ही भांति, ड्रोन की गति का अवलोकन किया और एक बार जैसे ही ड्रोन सीढ़ियों के एक ओर से नीचे घुसा, ऐलेक्स उसकी गति देख दूसरी ओर की सीढ़ियों से उतर गया।

पर इस बार ड्रोन सीढ़ियों के नीचे कुछ पलों के लिये बहुत धीमा हो गया, जिसकी वजह से ऐलेक्स नीचे धरती पर आ गिरा।

चूंकि सीढ़ियों की ऊंचाई जमीन से ज्यादा नहीं थी और ऐलेक्स की त्वचा शक्ति भी अभी थोड़ी काम कर रही थी, इसलिये ऐलेक्स को चोट नहीं आई।

अब ऐलेक्स अपना मुंह लटकाकर, क्रिस्टी के बगल आकर खड़ा हो गया। ऐलेक्स ने अपना सिर क्रिस्टी के कंधे से टिका लिया।

“कोई बात नहीं शक्ति धारक, तुम दुखी मत हो, ऐसा सबके साथ होता है।" क्रिस्टी ने ऐलेक्स के सिर को बिना अपने कंधे से हटाए, उसे थपकी देते हुए कहा।

ऐलेक्स ने थपकी से भाव विभोर हो, भोलेपन से अपनी आँखें बंद कर ली। क्रिस्टी और ऐलेक्स को देख सबके चेहरे पर मुस्कान आ गई।

“यह प्लान भी फेल हो गया।” सुयश ने बारी-बारी सभी की ओर देखते हुए कहा- “क्या किसी के पास कोई और प्लान है?"

"हां कैप्टेन अंकल, इस बार मैं कोशिश करके देखना चाहती हूं।” शैफाली ने अपना हाथ खड़ा करते हुए कहा।

“क्या तुम्हारे दिमाग में कोई विशेष प्लान है शैफाली?" जेनिथ ने शैफाली की ओर देखते हुए पूछा।

"हां, पर मैं उस प्लान को बताने की जगह करके दिखाना चाहती हूं।” यह कहकर शैफाली उनके पास से हटकर आगे की ओर बढ़ गई।

सभी की नजर अब पूर्णतया शैफाली की ओर थीं।

शैफाली वहां से आगे बढ़कर उस स्थान पर जा पहुंची, जहां बहुत सी बड़ी-बड़ी तितलियां उड़ रहीं थीं।

कुछ देर तक शैफाली वहां खड़ी होकर उड़ती हुई तितलियों को यूं ही निहारती रही और फिर वह उछलकर एक तितली पर सवार हो गई।

सभी आश्चर्य से शैफाली के इस अभूतपूर्व प्रदर्शन को देख रहे थे।

शैफाली ने कुछ ही देर में तितली पर अपने शरीर को पूरी तरह से संतुलित कर लिया। अब शैफाली ड्रोन के पीछे थी।

सभी को शैफाली का यह प्लान काफी अच्छा लगा। अब सभी को यह महसूस होने लगा था कि शैफाली जल्द ही उस लाल परी के ड्रोन को पकड़ लेगी।

शैफाली निरंतर ड्रोन के पास आती जा रही थी, परंतु जैसे ही शैफाली ने ड्रोन के बिल्कुल पास पहुंचकर, अपना हाथ ड्रोन की ओर बढ़ाया, वैसे ही अचानक ड्रोन की गति पहले से दुगनी हो गई।

अब शैफाली के लिये उस तितली पर बैठकर ड्रोन को पकड़ पाना अत्यंत ही मुश्किल हो गया। कुछ देर ऐसे ही प्रयास करने के बाद शैफाली हारकर तितली से उतरकर वापस सुयश के पास आ गई।

“यह ड्रोन तो कुछ ज्यादा ही स्मार्ट है? यह अपनी गति को घटा-बढ़ाकर हमें चकमा दे रहा है।” शैफाली ने मुंह लटकाते हुए कहा।

“नक्षत्रा, क्या तुम्हारे पास इस ड्रोन को पकड़ने का कोई प्लान है?" जेनिथ ने नक्षत्रा से पूछा।

"नहीं जेनिथ, मेरी समय को रोक देने वाली शक्ति अगर यहां काम करती? तो मैं आसानी से उस ड्रोन को पकड़ सकता था, पर अब तो मैं भी यहां मजबूर हूं।" नक्षत्रा ने कहा- “हां____, पर मैं तुम्हें एक सुझाव अवश्य दे सकता हूं।

"तो फिर कहो नक्षत्रा बताओ कि तुम्हारे पास क्या सुझाव है?" जेनिथ ने कहा।

“शायद तुम लोग हेफेस्टस की गुफा वाली घटना को भूल चुके हो, जिसमें तौफीक ने पत्थरों से निशाना लगा कर तेजी से हवा में उड़ रहे गोलों को मार गिराया था।" नक्षत्रा ने कहा।

“पर वह ड्रोन इतना स्मार्ट है कि वह तौफीक के पत्थरों से भी, अपनी गति को घटा या बढ़ाकर बच सकता है।" जेनिथ ने अपना शक जाहिर करते हुए कहा।

"जो तौफीक, हवा में उछाले गये 6 सिक्कों को, जमीन पर गिरने के पहले ही गोली से उड़ा सकता है, वह भला अपनी बुद्धि का प्रयोग कर इस ड्रोन को क्यों नहीं गिरा सकता?" नक्षत्रा के शब्दों में अतीत की यादें भी थीं, जिसे सुनकर एक पल के लिये जेनिथ विचलित हो गई।

“अतीत को भूलकर भावनाओं को नियंत्रित करो दोस्त। यह समय अतीत के सागर में मंथन करने का नहीं है, यह समय है, सभी भावनाओं को भुलाकर तिलिस्मा को पार करने का।” नक्षत्रा ने जेनिथ को समझाते हुए कहा।

नक्षत्रा की बात सुन जेनिथ ने धीरे से अपना सिर हिलाया और अपने चेहरे के बनते-बिगड़ते भावों को नियंत्रित कर लिया।

"तौफीक।” जेनिथ ने एक लंबे अंतराल के बाद तौफीक को संबोधित करते हुए कहा- “नक्षत्रा का कहना है कि तुम यह कार्य आसानी से कर सकते हो।

तौफीक का नाम लेते समय, एक बार को जेनिथ की जुबान लड़खड़ा गई, पर शीघ्र ही उसने स्वयं को नियंत्रित कर लिया।

“नक्षत्रा का?” तौफीक ने अर्थ भरी नजरों से जेनिथ की ओर देखते हुए पूछा।

"नहीं...म.....म....मेरा भी मानना है।" जेनिथ ने तौफीक के चेहरे से नजर हटाते हुए कहा।

जेनिथ की बात सुन तौफीक का चेहरा खुशी से चमकने लगा। अचानक ही उसमें एक गजब का विश्वास नजर आने लगा।

अब तौफीक ने ध्यान से उस ड्रोन को देखा और फिर जमीन से 6 पत्थर उठाकर अपने हाथ में पकड़ लिये। पत्थरों का आकार कंचे से थोड़ा सा ही ज्यादा था।

तौफीक अब लगातार उस ड्रोन को देख रहा था। कुछ देर, ड्रोन की गति का अध्ययन करने के बाद तौफीक की नजर ड्रोन के घूम रहे पंखों पर जम गई।

अब तौफीक ने बिजली की फुर्ती दिखाते हुए एकएक कर सभी पत्थर ड्रोन की ओर उछाल दिये।

तौफीक ने सभी पत्थरों की गति और स्थान को अलग-अलग रखा था।

जैसे ही पहला पत्थर ड्रोन के पास पहुंचा, ड्रोन ने एकाएक अपनी गति बढ़ा दी, पर तौफीक का फेंका हुआ दूसरा पत्थर उसी स्थान की ओर आ रहा था, यह देख ड्रोन ने इस बार अपनी गति को धीमे कर दिया।

बस इसी स्थान पर वह ड्रोन फंस गया, क्यों कि तौफीक का फेंका तीसरा पत्थर, उसी स्थान को केंद्र में रखकर फेंका गया था।

तीसरा पत्थर ड्रोन के एक पंखे पर जाकर लगा, जिसकी वजह से ड्रोन अनियंत्रित होकर, एक चट्टान से टकराकर नीचे आ गिरा।

ड्रोन को नीचे गिरता देख सभी ने तौफीक के नाम का जयकारा लगाया और उस ओर भाग लिये जहां ड्रोन गिरा था।

जेनिथ की आँखों में एक बार फिर तौफीक के लिये तारीफ के भाव उभरे।

इसी पल, बस एक क्षण के लिये तौफीक और जेनिथ की नजरें आपस में टकराईं और फिर जेनिथ ने अपना मुंह फेर लिया।


“अब समझ में आया जेनिथ कि मैंने तौफीक का रहस्य अभी किसी और से बताने को क्यों मना किया था?" नक्षत्रा ने कहा- “क्यों कि हमें इस तिलिस्म में तौफीक की जरुरत है।"

“पर तुम तो इतनी दूर का भविष्य नहीं देख पाते नक्षत्रा, फिर तुम्हें कैसे पता था कि हमें तौफीक की जरुरत इस तिलिस्म में पड़ने वाली है?" जेनिथ ने शक भरे अंदाज में नक्षत्रा से पूछा।

"मैं....मैं...भविष्य नहीं देख सकता ज़े ज़ेनिक्स मैंने तो बस ऐसे ही गणना की थी।" नक्षत्रा ने लड़खड़ाती जुबान में कहा।

"ये तुम मुझे ज़ेनिक्स क्यों कह रहे हो नक्षत्रा?" जेनिथ के चेहरे पर उलझन के भाव उभरे।

"उप्स सॉरी 'ज़ेनिक्स' शब्द गलती से निकल गया।” इतना कह नक्षत्रा चुप हो गया। शायद वह समझ गया था कि इस समय कुछ ना ही बोलना उचित होगा।

नक्षत्रा को अचानक से चुप होते देख जेनिथ, उस ड्रोन की ओर बढ़ गई, जिधर सभी गये थे।

सुयश ने पत्थर मारकर पिंजरे का द्वार खोल दिया।

लाल परी अब निकलकर बाहर आ गई, पर उसने ना तो किसी की ओर देखा? और ना ही किसी से कुछ कहा? लाल परी चलती हुई, वहां रखे, लाल रंग से भरे ड्रम के पास पहुंची।

अचानक ही लाल परी के हाथों में एक पेंट करने वाली कूची दिखाई देने लगी। लाल परी ने अपनी कूची को पेंट से भरे ड्रम में डुबाया और बिजली की तेजी से उस घाटी में मौजूद हर लाल रंग की चीज को रंगना शुरु कर दिया।

कुछ ही देर में लाल परी ने घाटी में उपस्थित, लाल रंग के फलों और फूलों को रंग दिया।

रंगों का कार्य पूर्ण होने के बाद वह लाल परी हवा में कहीं गायब हो गई? अब सभी का ध्यान नीले रंग के वस्त्र पहने परी की ओर गया, जो कि झील के पानी में मौजूद सफेद लिली के फूल पर रखे एक पिंजरे में थी।


जारी रहेगा_____✍️

Bahut hi gazab ki update he Raj_sharma Bhai

Is berang ghati me rang bharne ke liye abhi aur bhi mehnat karni he suyash and company ko

Sirf drone ko pakad lene se inka kaam pura nahi hua he........

Ke-ishwar ab aur bhi jatil task dene wala he

Keep rocking Bro
 

parkas

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चैपटर-2

वसंत ऋतु:
(तिलिस्मा 4.4)

सुयश सहित सभी लोग अब जमीन पर चमक रहे, ग्रीनलैंड के स्थान पर जाकर खड़े हो गये, जहां वसंत ऋतु से इनका सामना होना था।

सभी अब गायब होकर ग्रीनलैंड के एक स्थान पर पहुंच गये। परंतु उस स्थान पर नजर पड़ते ही, सभी बुरी तरह से हैरान हो गये।

वह एक बहुत सुंदर सी घाटी थी। उस स्थान पर पेड़, पर्वत, झील, परियां, तितली, झरना आदि सबकुछ था, जो कि एक प्रकृति की सुंदरता का कारक होता है, परंतु किसी भी चीज में कोई रंग नहीं था, यानि की सभी चीजें 70 के दशक के टेलीविजन की तरह ब्लैक एण्ड व्हाइट थीं।

इस स्थान को देख क्रिस्टी के मुंह से हंसी छूट गई।

“लगता है यह कैश्वर अब हमें किसी पुराने से टेलीविजन के अंदर ले आया है? जहां कि हर चीज का रंग उड़ गया है।” क्रिस्टी ने हंसते हुए कहा।

“मैं तो समझा था कि वसंत ऋतु में सबकुछ खुशनुमा होगा?” ऐलेक्स ने कहा- “पर यहां का तो अंदाज ही निराला लग रहा है।"

अब सबकी नजर उस बड़ी सी घाटी की ओर गई। सभी देखना चाहते थे कि वहां पर क्या-क्या है? और उस द्वार को किस प्रकार पार किया जा सकता है?

उस स्थान पर एक ओर 4 बड़े से ड्रम रखे थे। 3 ड्रम में लाल, नीला और पीला रंग था। एक ड्रम पूरी तरह से खाली था।

उस स्थान पर हवा में, एक 6 फुट का ड्रोन घूम रहा था, जिसके नीचे एक पिंजरा टंगा था और उस पिंजरे में एक परी बैठी थी, जिसने लाल रंग के वस्त्र पहन रखे थे। वह ड्रोन उस पिंजरे को लिये चारो ओर हवा में उड़ रहा था।

दूसरी ओर एक बड़ी सी चट्टान से, एक पानी का झरना गिर रहा था। उस झरने के पानी के एकत्र होने से, नीचे एक सुंदर परंतु छोटी सी झील बन गई थी।

उस झील के बीच में एक सफेद रंग का बड़ा सा लिली का फूल तैर रहा था। उस फूल के ऊपर दूसरा पिंजरा रखा था, जिसमें नीले रंग के वस्त्र पहने एक दूसरी परी बैठी थी।

तीसरा पिंजरा गायब होकर बार-बार अलग-अलग स्थानों पर दिखाई दे रहा था। तीसरे पिंजरे में पीले रंग के वस्त्र पहने एक परी बैठी थी।

चौथी परी किसी पिंजरे में नहीं थी, बल्कि हवा में उपस्थित 6 फुट ऊंचे, एक सफेद रंग के हीरे में बंद थी।

उस हीरे के नीचे एक संगमरमर के पत्थर का, 4 फुट का वर्गाकार टुकड़ा जमीन में लगा था। चौथी परी ने हरे रंग के वस्त्र पहने थे।

“यहां के माया जाल को तो देखकर ही समझ में आ रहा है, कि हमें यहां करना क्या है?" जेनिथ ने कहा।

“यह एक घाटी है, जिसके सारे रंगों के लिये ये 4 परियां जिम्मेदार हैं, परंतु किसी ने इन 4 परियों को अलग-अलग जगहों पर कैद कर दिया है?” सुयश ने कहा- “हमें इन सभी परियों को छुड़ाकर, प्रकृति के इन रंगों को भरना होगा।

“सही कहा आपने कैप्टेन।" तौफीक ने कहा- “और जैसे ही हम इन रंगों को प्रकृति में भर देंगे, स्वतः ही प्रकृति पर वसंत ऋतु का प्रभाव हो जायेगा।"

“तो फिर देर ना करते हुए इस द्वार को शुरु करते हैं।” सुयश ने कहा- “पहले लाल रंग का ड्रम रखा है, तो हम पहले लाल रंग की परी को छुड़ाने की कोशिश करते हैं।”

“पर कैप्टेन, हवा में उड़ रहे उस ड्रोन की गति बहुत ज्यादा है, ऐसे में हम उस ड्रोन तक कैसे पहुंच पायेंगे?" ऐलेक्स ने कहा।

ऐलेक्स की बात सुनकर सुयश ध्यान से उस ड्रोन की गति का अध्ययन करने लगा। उस ड्रोन की गति कम से कम 60 किलोमीटर प्रति घंटा के आस-पास थी। ऐसे में उसे पकड़ पाना इतना भी आसान नहीं था।

तभी सुयश की नजर एक ऊंची सी चट्टान की ओर गई। ड्रोन बार-बार घूमते हुए उस चट्टान के पास से गुजर रहा था।

उस चट्टान के नीचे की ओर झील का पानी था। यह देख सुयश के दिमाग में एक युक्ति आ गई।

"हममें से किसी को उस चट्टान पर जाकर खड़ा होना होगा?” सुयश ने चट्टान की ओर इशारा करते हुए कहा और जैसे ही ड्रोन नीचे से निकलेगा, चट्टान से कूदकर उस ड्रोन पर सवार होने की कोशिश करनी होगी। क्यों कि ड्रोन पर लगे पंखे, उसके प्लेटफार्म के नीचे हैं, इसलिए वह पंखे हमें, किसी भी प्रकार की हानि नहीं पहुंचा सकते। मुझे तो यह तरीका ही आसान लगा क्यों कि अगर कोई नीचे गिर भी गया? तो नीचे झील का पानी होने की वजह से उसे चोट नहीं लगेगी।"

“ठीक है कैप्टेन, तो मैं चट्टान पर जाकर ड्रोन पर कूदने की कोशिश करती हूं।” क्रिस्टी ने स्वयं से आगे आते हुए कहा और सुयश की स्वीकृति पाकर उस चट्टान की ओर बढ़ गई।

कुछ ही पलों में क्रिस्टी चट्टान पर थी। अब क्रिस्टी की नजर पास आ रहे ड्रोन की ओर थी। कुछ देर तक क्रिस्टी ध्यान से ड्रोन को देखती रही और उसकी गति का पूर्ण अंदाजा लगा लेने के बाद, क्रिस्टी ने ड्रोन पर छलांग लगा दी।

एक पल के लिये ऐसा लगा मानो क्रिस्टी का शरीर, किसी सुपरगर्ल की भांति हवा में उड़ रहा हो।
पर जैसे ही ड्रोन इस बार चट्टान के समीप आया, उसकी गति अचानक से बढ़ गई और वह क्रिस्टी के नीचे से, उसे चिढ़ाता हुआ निकल गया।

एक पल के लिये क्रिस्टी की आँखों में आश्चर्य के भाव उभरे, परंतु इससे पहले कि क्रिस्टी ज्यादा आश्चर्य व्यक्त कर पाती, उसका शरीर ‘छपाक' की तेज आवाज करते हुए झील के पानी में आ गिरा।

क्रिस्टी ने पानी में एक डाइव मारी और झील से निकल कर बाहर आ गई।

क्रिस्टी ने सुयश से कुछ बोलने की कोशिश की, पर सुयश हाथ के इशारे से उसे रोकते हुए बोला- “कुछ बोलने की जरुरत नहीं है क्रिस्टी, हम सभी ने देखा कि कैसे ड्रोन की स्पीड एका एक तेज हो गई थी? अब यह साफ हो गया कि यह एक साधारण ड्रोन नहीं, बल्कि एक स्मार्ट ड्रोन है, जो अपने पर आ रहे खतरों को देख, अपने अंदर स्वयं बदलाव कर सकता है।....क्या अब किसी के पास इस ड्रोन को पकड़ने का कोई दूसरा तरीका है?"

"हां कैप्टेन।” इस बार ऐलेक्स ने अपना हाथ उठाते हुए कहा- “मुझे अभी-अभी यहां सामने की ओर कुछ अदृश्य सीढ़ियां बनी दिखाई दीं हैं, ड्रोन उन सीढ़ियों के नीचे से बार-बार निकल रहा है। जिस चट्टान से क्रिस्टी नीचे कूदी, वह चट्टान काफी ऊंचाई पर थी, जिससे क्रिस्टी को ड्रोन को पकड़ने के लिये, काफी पहले कूदना पड़ा था, पर उन सीढ़ियों और ड्रोन के बीच ज्यादा फासला नहीं है, इसलिये मुझे लगता है कि उन सीढ़ियों के माध्यम से आसानी से ड्रोन को पकड़ा जा सकता है?" यह कहकर ऐलेक्स ने एक दिशा की ओर इशारा करते हुए कहा।

“ठीक है ऐलेक्स, तुम भी कोशिश करके देख लो, हो सकता है कि इस तरीके से ही लाल परी के ड्रोन को पकड़ा जा सके?” सुयश ने ऐलेक्स को आज्ञा देते हुए कहा।

सुयश की बात सुन ऐलेक्स उन सीढ़ियों की ओर बढ़ गया। कुछ ही देर में ऐलेक्स उन सीढ़ियों पर चढ़कर, एक ऐसे स्थान पर खड़ा हो गया, जिसके नीचे से ड्रोन बार-बार निकल रहा था।

शैफाली के सिवा बाकी किसी को, अदृश्य सीढ़ियां दिखाई नहीं दे रहीं थीं, पर ऐलक्स को वह सब, अब हवा में एक स्थान पर खड़े देख रहे थे।

ऐलेक्स ने भी क्रिस्टी की ही भांति, ड्रोन की गति का अवलोकन किया और एक बार जैसे ही ड्रोन सीढ़ियों के एक ओर से नीचे घुसा, ऐलेक्स उसकी गति देख दूसरी ओर की सीढ़ियों से उतर गया।

पर इस बार ड्रोन सीढ़ियों के नीचे कुछ पलों के लिये बहुत धीमा हो गया, जिसकी वजह से ऐलेक्स नीचे धरती पर आ गिरा।

चूंकि सीढ़ियों की ऊंचाई जमीन से ज्यादा नहीं थी और ऐलेक्स की त्वचा शक्ति भी अभी थोड़ी काम कर रही थी, इसलिये ऐलेक्स को चोट नहीं आई।

अब ऐलेक्स अपना मुंह लटकाकर, क्रिस्टी के बगल आकर खड़ा हो गया। ऐलेक्स ने अपना सिर क्रिस्टी के कंधे से टिका लिया।

“कोई बात नहीं शक्ति धारक, तुम दुखी मत हो, ऐसा सबके साथ होता है।" क्रिस्टी ने ऐलेक्स के सिर को बिना अपने कंधे से हटाए, उसे थपकी देते हुए कहा।

ऐलेक्स ने थपकी से भाव विभोर हो, भोलेपन से अपनी आँखें बंद कर ली। क्रिस्टी और ऐलेक्स को देख सबके चेहरे पर मुस्कान आ गई।

“यह प्लान भी फेल हो गया।” सुयश ने बारी-बारी सभी की ओर देखते हुए कहा- “क्या किसी के पास कोई और प्लान है?"

"हां कैप्टेन अंकल, इस बार मैं कोशिश करके देखना चाहती हूं।” शैफाली ने अपना हाथ खड़ा करते हुए कहा।

“क्या तुम्हारे दिमाग में कोई विशेष प्लान है शैफाली?" जेनिथ ने शैफाली की ओर देखते हुए पूछा।

"हां, पर मैं उस प्लान को बताने की जगह करके दिखाना चाहती हूं।” यह कहकर शैफाली उनके पास से हटकर आगे की ओर बढ़ गई।

सभी की नजर अब पूर्णतया शैफाली की ओर थीं।

शैफाली वहां से आगे बढ़कर उस स्थान पर जा पहुंची, जहां बहुत सी बड़ी-बड़ी तितलियां उड़ रहीं थीं।

कुछ देर तक शैफाली वहां खड़ी होकर उड़ती हुई तितलियों को यूं ही निहारती रही और फिर वह उछलकर एक तितली पर सवार हो गई।

सभी आश्चर्य से शैफाली के इस अभूतपूर्व प्रदर्शन को देख रहे थे।

शैफाली ने कुछ ही देर में तितली पर अपने शरीर को पूरी तरह से संतुलित कर लिया। अब शैफाली ड्रोन के पीछे थी।

सभी को शैफाली का यह प्लान काफी अच्छा लगा। अब सभी को यह महसूस होने लगा था कि शैफाली जल्द ही उस लाल परी के ड्रोन को पकड़ लेगी।

शैफाली निरंतर ड्रोन के पास आती जा रही थी, परंतु जैसे ही शैफाली ने ड्रोन के बिल्कुल पास पहुंचकर, अपना हाथ ड्रोन की ओर बढ़ाया, वैसे ही अचानक ड्रोन की गति पहले से दुगनी हो गई।

अब शैफाली के लिये उस तितली पर बैठकर ड्रोन को पकड़ पाना अत्यंत ही मुश्किल हो गया। कुछ देर ऐसे ही प्रयास करने के बाद शैफाली हारकर तितली से उतरकर वापस सुयश के पास आ गई।

“यह ड्रोन तो कुछ ज्यादा ही स्मार्ट है? यह अपनी गति को घटा-बढ़ाकर हमें चकमा दे रहा है।” शैफाली ने मुंह लटकाते हुए कहा।

“नक्षत्रा, क्या तुम्हारे पास इस ड्रोन को पकड़ने का कोई प्लान है?" जेनिथ ने नक्षत्रा से पूछा।

"नहीं जेनिथ, मेरी समय को रोक देने वाली शक्ति अगर यहां काम करती? तो मैं आसानी से उस ड्रोन को पकड़ सकता था, पर अब तो मैं भी यहां मजबूर हूं।" नक्षत्रा ने कहा- “हां____, पर मैं तुम्हें एक सुझाव अवश्य दे सकता हूं।

"तो फिर कहो नक्षत्रा बताओ कि तुम्हारे पास क्या सुझाव है?" जेनिथ ने कहा।

“शायद तुम लोग हेफेस्टस की गुफा वाली घटना को भूल चुके हो, जिसमें तौफीक ने पत्थरों से निशाना लगा कर तेजी से हवा में उड़ रहे गोलों को मार गिराया था।" नक्षत्रा ने कहा।

“पर वह ड्रोन इतना स्मार्ट है कि वह तौफीक के पत्थरों से भी, अपनी गति को घटा या बढ़ाकर बच सकता है।" जेनिथ ने अपना शक जाहिर करते हुए कहा।

"जो तौफीक, हवा में उछाले गये 6 सिक्कों को, जमीन पर गिरने के पहले ही गोली से उड़ा सकता है, वह भला अपनी बुद्धि का प्रयोग कर इस ड्रोन को क्यों नहीं गिरा सकता?" नक्षत्रा के शब्दों में अतीत की यादें भी थीं, जिसे सुनकर एक पल के लिये जेनिथ विचलित हो गई।

“अतीत को भूलकर भावनाओं को नियंत्रित करो दोस्त। यह समय अतीत के सागर में मंथन करने का नहीं है, यह समय है, सभी भावनाओं को भुलाकर तिलिस्मा को पार करने का।” नक्षत्रा ने जेनिथ को समझाते हुए कहा।

नक्षत्रा की बात सुन जेनिथ ने धीरे से अपना सिर हिलाया और अपने चेहरे के बनते-बिगड़ते भावों को नियंत्रित कर लिया।

"तौफीक।” जेनिथ ने एक लंबे अंतराल के बाद तौफीक को संबोधित करते हुए कहा- “नक्षत्रा का कहना है कि तुम यह कार्य आसानी से कर सकते हो।

तौफीक का नाम लेते समय, एक बार को जेनिथ की जुबान लड़खड़ा गई, पर शीघ्र ही उसने स्वयं को नियंत्रित कर लिया।

“नक्षत्रा का?” तौफीक ने अर्थ भरी नजरों से जेनिथ की ओर देखते हुए पूछा।

"नहीं...म.....म....मेरा भी मानना है।" जेनिथ ने तौफीक के चेहरे से नजर हटाते हुए कहा।

जेनिथ की बात सुन तौफीक का चेहरा खुशी से चमकने लगा। अचानक ही उसमें एक गजब का विश्वास नजर आने लगा।

अब तौफीक ने ध्यान से उस ड्रोन को देखा और फिर जमीन से 6 पत्थर उठाकर अपने हाथ में पकड़ लिये। पत्थरों का आकार कंचे से थोड़ा सा ही ज्यादा था।

तौफीक अब लगातार उस ड्रोन को देख रहा था। कुछ देर, ड्रोन की गति का अध्ययन करने के बाद तौफीक की नजर ड्रोन के घूम रहे पंखों पर जम गई।

अब तौफीक ने बिजली की फुर्ती दिखाते हुए एकएक कर सभी पत्थर ड्रोन की ओर उछाल दिये।

तौफीक ने सभी पत्थरों की गति और स्थान को अलग-अलग रखा था।

जैसे ही पहला पत्थर ड्रोन के पास पहुंचा, ड्रोन ने एकाएक अपनी गति बढ़ा दी, पर तौफीक का फेंका हुआ दूसरा पत्थर उसी स्थान की ओर आ रहा था, यह देख ड्रोन ने इस बार अपनी गति को धीमे कर दिया।

बस इसी स्थान पर वह ड्रोन फंस गया, क्यों कि तौफीक का फेंका तीसरा पत्थर, उसी स्थान को केंद्र में रखकर फेंका गया था।

तीसरा पत्थर ड्रोन के एक पंखे पर जाकर लगा, जिसकी वजह से ड्रोन अनियंत्रित होकर, एक चट्टान से टकराकर नीचे आ गिरा।

ड्रोन को नीचे गिरता देख सभी ने तौफीक के नाम का जयकारा लगाया और उस ओर भाग लिये जहां ड्रोन गिरा था।

जेनिथ की आँखों में एक बार फिर तौफीक के लिये तारीफ के भाव उभरे।

इसी पल, बस एक क्षण के लिये तौफीक और जेनिथ की नजरें आपस में टकराईं और फिर जेनिथ ने अपना मुंह फेर लिया।


“अब समझ में आया जेनिथ कि मैंने तौफीक का रहस्य अभी किसी और से बताने को क्यों मना किया था?" नक्षत्रा ने कहा- “क्यों कि हमें इस तिलिस्म में तौफीक की जरुरत है।"

“पर तुम तो इतनी दूर का भविष्य नहीं देख पाते नक्षत्रा, फिर तुम्हें कैसे पता था कि हमें तौफीक की जरुरत इस तिलिस्म में पड़ने वाली है?" जेनिथ ने शक भरे अंदाज में नक्षत्रा से पूछा।

"मैं....मैं...भविष्य नहीं देख सकता ज़े ज़ेनिक्स मैंने तो बस ऐसे ही गणना की थी।" नक्षत्रा ने लड़खड़ाती जुबान में कहा।

"ये तुम मुझे ज़ेनिक्स क्यों कह रहे हो नक्षत्रा?" जेनिथ के चेहरे पर उलझन के भाव उभरे।

"उप्स सॉरी 'ज़ेनिक्स' शब्द गलती से निकल गया।” इतना कह नक्षत्रा चुप हो गया। शायद वह समझ गया था कि इस समय कुछ ना ही बोलना उचित होगा।

नक्षत्रा को अचानक से चुप होते देख जेनिथ, उस ड्रोन की ओर बढ़ गई, जिधर सभी गये थे।

सुयश ने पत्थर मारकर पिंजरे का द्वार खोल दिया।

लाल परी अब निकलकर बाहर आ गई, पर उसने ना तो किसी की ओर देखा? और ना ही किसी से कुछ कहा? लाल परी चलती हुई, वहां रखे, लाल रंग से भरे ड्रम के पास पहुंची।

अचानक ही लाल परी के हाथों में एक पेंट करने वाली कूची दिखाई देने लगी। लाल परी ने अपनी कूची को पेंट से भरे ड्रम में डुबाया और बिजली की तेजी से उस घाटी में मौजूद हर लाल रंग की चीज को रंगना शुरु कर दिया।

कुछ ही देर में लाल परी ने घाटी में उपस्थित, लाल रंग के फलों और फूलों को रंग दिया।

रंगों का कार्य पूर्ण होने के बाद वह लाल परी हवा में कहीं गायब हो गई? अब सभी का ध्यान नीले रंग के वस्त्र पहने परी की ओर गया, जो कि झील के पानी में मौजूद सफेद लिली के फूल पर रखे एक पिंजरे में थी।


जारी रहेगा_____✍️
Bahut hi shaandar update diya hai Raj_sharma bhai....
Nice and lovely update....
 

Iron Man

Try and fail. But never give up trying
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वसंत ऋतु:
(तिलिस्मा 4.4)

सुयश सहित सभी लोग अब जमीन पर चमक रहे, ग्रीनलैंड के स्थान पर जाकर खड़े हो गये, जहां वसंत ऋतु से इनका सामना होना था।

सभी अब गायब होकर ग्रीनलैंड के एक स्थान पर पहुंच गये। परंतु उस स्थान पर नजर पड़ते ही, सभी बुरी तरह से हैरान हो गये।

वह एक बहुत सुंदर सी घाटी थी। उस स्थान पर पेड़, पर्वत, झील, परियां, तितली, झरना आदि सबकुछ था, जो कि एक प्रकृति की सुंदरता का कारक होता है, परंतु किसी भी चीज में कोई रंग नहीं था, यानि की सभी चीजें 70 के दशक के टेलीविजन की तरह ब्लैक एण्ड व्हाइट थीं।

इस स्थान को देख क्रिस्टी के मुंह से हंसी छूट गई।

“लगता है यह कैश्वर अब हमें किसी पुराने से टेलीविजन के अंदर ले आया है? जहां कि हर चीज का रंग उड़ गया है।” क्रिस्टी ने हंसते हुए कहा।

“मैं तो समझा था कि वसंत ऋतु में सबकुछ खुशनुमा होगा?” ऐलेक्स ने कहा- “पर यहां का तो अंदाज ही निराला लग रहा है।"

अब सबकी नजर उस बड़ी सी घाटी की ओर गई। सभी देखना चाहते थे कि वहां पर क्या-क्या है? और उस द्वार को किस प्रकार पार किया जा सकता है?

उस स्थान पर एक ओर 4 बड़े से ड्रम रखे थे। 3 ड्रम में लाल, नीला और पीला रंग था। एक ड्रम पूरी तरह से खाली था।

उस स्थान पर हवा में, एक 6 फुट का ड्रोन घूम रहा था, जिसके नीचे एक पिंजरा टंगा था और उस पिंजरे में एक परी बैठी थी, जिसने लाल रंग के वस्त्र पहन रखे थे। वह ड्रोन उस पिंजरे को लिये चारो ओर हवा में उड़ रहा था।

दूसरी ओर एक बड़ी सी चट्टान से, एक पानी का झरना गिर रहा था। उस झरने के पानी के एकत्र होने से, नीचे एक सुंदर परंतु छोटी सी झील बन गई थी।

उस झील के बीच में एक सफेद रंग का बड़ा सा लिली का फूल तैर रहा था। उस फूल के ऊपर दूसरा पिंजरा रखा था, जिसमें नीले रंग के वस्त्र पहने एक दूसरी परी बैठी थी।

तीसरा पिंजरा गायब होकर बार-बार अलग-अलग स्थानों पर दिखाई दे रहा था। तीसरे पिंजरे में पीले रंग के वस्त्र पहने एक परी बैठी थी।

चौथी परी किसी पिंजरे में नहीं थी, बल्कि हवा में उपस्थित 6 फुट ऊंचे, एक सफेद रंग के हीरे में बंद थी।

उस हीरे के नीचे एक संगमरमर के पत्थर का, 4 फुट का वर्गाकार टुकड़ा जमीन में लगा था। चौथी परी ने हरे रंग के वस्त्र पहने थे।

“यहां के माया जाल को तो देखकर ही समझ में आ रहा है, कि हमें यहां करना क्या है?" जेनिथ ने कहा।

“यह एक घाटी है, जिसके सारे रंगों के लिये ये 4 परियां जिम्मेदार हैं, परंतु किसी ने इन 4 परियों को अलग-अलग जगहों पर कैद कर दिया है?” सुयश ने कहा- “हमें इन सभी परियों को छुड़ाकर, प्रकृति के इन रंगों को भरना होगा।

“सही कहा आपने कैप्टेन।" तौफीक ने कहा- “और जैसे ही हम इन रंगों को प्रकृति में भर देंगे, स्वतः ही प्रकृति पर वसंत ऋतु का प्रभाव हो जायेगा।"

“तो फिर देर ना करते हुए इस द्वार को शुरु करते हैं।” सुयश ने कहा- “पहले लाल रंग का ड्रम रखा है, तो हम पहले लाल रंग की परी को छुड़ाने की कोशिश करते हैं।”

“पर कैप्टेन, हवा में उड़ रहे उस ड्रोन की गति बहुत ज्यादा है, ऐसे में हम उस ड्रोन तक कैसे पहुंच पायेंगे?" ऐलेक्स ने कहा।

ऐलेक्स की बात सुनकर सुयश ध्यान से उस ड्रोन की गति का अध्ययन करने लगा। उस ड्रोन की गति कम से कम 60 किलोमीटर प्रति घंटा के आस-पास थी। ऐसे में उसे पकड़ पाना इतना भी आसान नहीं था।

तभी सुयश की नजर एक ऊंची सी चट्टान की ओर गई। ड्रोन बार-बार घूमते हुए उस चट्टान के पास से गुजर रहा था।

उस चट्टान के नीचे की ओर झील का पानी था। यह देख सुयश के दिमाग में एक युक्ति आ गई।

"हममें से किसी को उस चट्टान पर जाकर खड़ा होना होगा?” सुयश ने चट्टान की ओर इशारा करते हुए कहा और जैसे ही ड्रोन नीचे से निकलेगा, चट्टान से कूदकर उस ड्रोन पर सवार होने की कोशिश करनी होगी। क्यों कि ड्रोन पर लगे पंखे, उसके प्लेटफार्म के नीचे हैं, इसलिए वह पंखे हमें, किसी भी प्रकार की हानि नहीं पहुंचा सकते। मुझे तो यह तरीका ही आसान लगा क्यों कि अगर कोई नीचे गिर भी गया? तो नीचे झील का पानी होने की वजह से उसे चोट नहीं लगेगी।"

“ठीक है कैप्टेन, तो मैं चट्टान पर जाकर ड्रोन पर कूदने की कोशिश करती हूं।” क्रिस्टी ने स्वयं से आगे आते हुए कहा और सुयश की स्वीकृति पाकर उस चट्टान की ओर बढ़ गई।

कुछ ही पलों में क्रिस्टी चट्टान पर थी। अब क्रिस्टी की नजर पास आ रहे ड्रोन की ओर थी। कुछ देर तक क्रिस्टी ध्यान से ड्रोन को देखती रही और उसकी गति का पूर्ण अंदाजा लगा लेने के बाद, क्रिस्टी ने ड्रोन पर छलांग लगा दी।

एक पल के लिये ऐसा लगा मानो क्रिस्टी का शरीर, किसी सुपरगर्ल की भांति हवा में उड़ रहा हो।
पर जैसे ही ड्रोन इस बार चट्टान के समीप आया, उसकी गति अचानक से बढ़ गई और वह क्रिस्टी के नीचे से, उसे चिढ़ाता हुआ निकल गया।

एक पल के लिये क्रिस्टी की आँखों में आश्चर्य के भाव उभरे, परंतु इससे पहले कि क्रिस्टी ज्यादा आश्चर्य व्यक्त कर पाती, उसका शरीर ‘छपाक' की तेज आवाज करते हुए झील के पानी में आ गिरा।

क्रिस्टी ने पानी में एक डाइव मारी और झील से निकल कर बाहर आ गई।

क्रिस्टी ने सुयश से कुछ बोलने की कोशिश की, पर सुयश हाथ के इशारे से उसे रोकते हुए बोला- “कुछ बोलने की जरुरत नहीं है क्रिस्टी, हम सभी ने देखा कि कैसे ड्रोन की स्पीड एका एक तेज हो गई थी? अब यह साफ हो गया कि यह एक साधारण ड्रोन नहीं, बल्कि एक स्मार्ट ड्रोन है, जो अपने पर आ रहे खतरों को देख, अपने अंदर स्वयं बदलाव कर सकता है।....क्या अब किसी के पास इस ड्रोन को पकड़ने का कोई दूसरा तरीका है?"

"हां कैप्टेन।” इस बार ऐलेक्स ने अपना हाथ उठाते हुए कहा- “मुझे अभी-अभी यहां सामने की ओर कुछ अदृश्य सीढ़ियां बनी दिखाई दीं हैं, ड्रोन उन सीढ़ियों के नीचे से बार-बार निकल रहा है। जिस चट्टान से क्रिस्टी नीचे कूदी, वह चट्टान काफी ऊंचाई पर थी, जिससे क्रिस्टी को ड्रोन को पकड़ने के लिये, काफी पहले कूदना पड़ा था, पर उन सीढ़ियों और ड्रोन के बीच ज्यादा फासला नहीं है, इसलिये मुझे लगता है कि उन सीढ़ियों के माध्यम से आसानी से ड्रोन को पकड़ा जा सकता है?" यह कहकर ऐलेक्स ने एक दिशा की ओर इशारा करते हुए कहा।

“ठीक है ऐलेक्स, तुम भी कोशिश करके देख लो, हो सकता है कि इस तरीके से ही लाल परी के ड्रोन को पकड़ा जा सके?” सुयश ने ऐलेक्स को आज्ञा देते हुए कहा।

सुयश की बात सुन ऐलेक्स उन सीढ़ियों की ओर बढ़ गया। कुछ ही देर में ऐलेक्स उन सीढ़ियों पर चढ़कर, एक ऐसे स्थान पर खड़ा हो गया, जिसके नीचे से ड्रोन बार-बार निकल रहा था।

शैफाली के सिवा बाकी किसी को, अदृश्य सीढ़ियां दिखाई नहीं दे रहीं थीं, पर ऐलक्स को वह सब, अब हवा में एक स्थान पर खड़े देख रहे थे।

ऐलेक्स ने भी क्रिस्टी की ही भांति, ड्रोन की गति का अवलोकन किया और एक बार जैसे ही ड्रोन सीढ़ियों के एक ओर से नीचे घुसा, ऐलेक्स उसकी गति देख दूसरी ओर की सीढ़ियों से उतर गया।

पर इस बार ड्रोन सीढ़ियों के नीचे कुछ पलों के लिये बहुत धीमा हो गया, जिसकी वजह से ऐलेक्स नीचे धरती पर आ गिरा।

चूंकि सीढ़ियों की ऊंचाई जमीन से ज्यादा नहीं थी और ऐलेक्स की त्वचा शक्ति भी अभी थोड़ी काम कर रही थी, इसलिये ऐलेक्स को चोट नहीं आई।

अब ऐलेक्स अपना मुंह लटकाकर, क्रिस्टी के बगल आकर खड़ा हो गया। ऐलेक्स ने अपना सिर क्रिस्टी के कंधे से टिका लिया।

“कोई बात नहीं शक्ति धारक, तुम दुखी मत हो, ऐसा सबके साथ होता है।" क्रिस्टी ने ऐलेक्स के सिर को बिना अपने कंधे से हटाए, उसे थपकी देते हुए कहा।

ऐलेक्स ने थपकी से भाव विभोर हो, भोलेपन से अपनी आँखें बंद कर ली। क्रिस्टी और ऐलेक्स को देख सबके चेहरे पर मुस्कान आ गई।

“यह प्लान भी फेल हो गया।” सुयश ने बारी-बारी सभी की ओर देखते हुए कहा- “क्या किसी के पास कोई और प्लान है?"

"हां कैप्टेन अंकल, इस बार मैं कोशिश करके देखना चाहती हूं।” शैफाली ने अपना हाथ खड़ा करते हुए कहा।

“क्या तुम्हारे दिमाग में कोई विशेष प्लान है शैफाली?" जेनिथ ने शैफाली की ओर देखते हुए पूछा।

"हां, पर मैं उस प्लान को बताने की जगह करके दिखाना चाहती हूं।” यह कहकर शैफाली उनके पास से हटकर आगे की ओर बढ़ गई।

सभी की नजर अब पूर्णतया शैफाली की ओर थीं।

शैफाली वहां से आगे बढ़कर उस स्थान पर जा पहुंची, जहां बहुत सी बड़ी-बड़ी तितलियां उड़ रहीं थीं।

कुछ देर तक शैफाली वहां खड़ी होकर उड़ती हुई तितलियों को यूं ही निहारती रही और फिर वह उछलकर एक तितली पर सवार हो गई।

सभी आश्चर्य से शैफाली के इस अभूतपूर्व प्रदर्शन को देख रहे थे।

शैफाली ने कुछ ही देर में तितली पर अपने शरीर को पूरी तरह से संतुलित कर लिया। अब शैफाली ड्रोन के पीछे थी।

सभी को शैफाली का यह प्लान काफी अच्छा लगा। अब सभी को यह महसूस होने लगा था कि शैफाली जल्द ही उस लाल परी के ड्रोन को पकड़ लेगी।

शैफाली निरंतर ड्रोन के पास आती जा रही थी, परंतु जैसे ही शैफाली ने ड्रोन के बिल्कुल पास पहुंचकर, अपना हाथ ड्रोन की ओर बढ़ाया, वैसे ही अचानक ड्रोन की गति पहले से दुगनी हो गई।

अब शैफाली के लिये उस तितली पर बैठकर ड्रोन को पकड़ पाना अत्यंत ही मुश्किल हो गया। कुछ देर ऐसे ही प्रयास करने के बाद शैफाली हारकर तितली से उतरकर वापस सुयश के पास आ गई।

“यह ड्रोन तो कुछ ज्यादा ही स्मार्ट है? यह अपनी गति को घटा-बढ़ाकर हमें चकमा दे रहा है।” शैफाली ने मुंह लटकाते हुए कहा।

“नक्षत्रा, क्या तुम्हारे पास इस ड्रोन को पकड़ने का कोई प्लान है?" जेनिथ ने नक्षत्रा से पूछा।

"नहीं जेनिथ, मेरी समय को रोक देने वाली शक्ति अगर यहां काम करती? तो मैं आसानी से उस ड्रोन को पकड़ सकता था, पर अब तो मैं भी यहां मजबूर हूं।" नक्षत्रा ने कहा- “हां____, पर मैं तुम्हें एक सुझाव अवश्य दे सकता हूं।

"तो फिर कहो नक्षत्रा बताओ कि तुम्हारे पास क्या सुझाव है?" जेनिथ ने कहा।

“शायद तुम लोग हेफेस्टस की गुफा वाली घटना को भूल चुके हो, जिसमें तौफीक ने पत्थरों से निशाना लगा कर तेजी से हवा में उड़ रहे गोलों को मार गिराया था।" नक्षत्रा ने कहा।

“पर वह ड्रोन इतना स्मार्ट है कि वह तौफीक के पत्थरों से भी, अपनी गति को घटा या बढ़ाकर बच सकता है।" जेनिथ ने अपना शक जाहिर करते हुए कहा।

"जो तौफीक, हवा में उछाले गये 6 सिक्कों को, जमीन पर गिरने के पहले ही गोली से उड़ा सकता है, वह भला अपनी बुद्धि का प्रयोग कर इस ड्रोन को क्यों नहीं गिरा सकता?" नक्षत्रा के शब्दों में अतीत की यादें भी थीं, जिसे सुनकर एक पल के लिये जेनिथ विचलित हो गई।

“अतीत को भूलकर भावनाओं को नियंत्रित करो दोस्त। यह समय अतीत के सागर में मंथन करने का नहीं है, यह समय है, सभी भावनाओं को भुलाकर तिलिस्मा को पार करने का।” नक्षत्रा ने जेनिथ को समझाते हुए कहा।

नक्षत्रा की बात सुन जेनिथ ने धीरे से अपना सिर हिलाया और अपने चेहरे के बनते-बिगड़ते भावों को नियंत्रित कर लिया।

"तौफीक।” जेनिथ ने एक लंबे अंतराल के बाद तौफीक को संबोधित करते हुए कहा- “नक्षत्रा का कहना है कि तुम यह कार्य आसानी से कर सकते हो।

तौफीक का नाम लेते समय, एक बार को जेनिथ की जुबान लड़खड़ा गई, पर शीघ्र ही उसने स्वयं को नियंत्रित कर लिया।

“नक्षत्रा का?” तौफीक ने अर्थ भरी नजरों से जेनिथ की ओर देखते हुए पूछा।

"नहीं...म.....म....मेरा भी मानना है।" जेनिथ ने तौफीक के चेहरे से नजर हटाते हुए कहा।

जेनिथ की बात सुन तौफीक का चेहरा खुशी से चमकने लगा। अचानक ही उसमें एक गजब का विश्वास नजर आने लगा।

अब तौफीक ने ध्यान से उस ड्रोन को देखा और फिर जमीन से 6 पत्थर उठाकर अपने हाथ में पकड़ लिये। पत्थरों का आकार कंचे से थोड़ा सा ही ज्यादा था।

तौफीक अब लगातार उस ड्रोन को देख रहा था। कुछ देर, ड्रोन की गति का अध्ययन करने के बाद तौफीक की नजर ड्रोन के घूम रहे पंखों पर जम गई।

अब तौफीक ने बिजली की फुर्ती दिखाते हुए एकएक कर सभी पत्थर ड्रोन की ओर उछाल दिये।

तौफीक ने सभी पत्थरों की गति और स्थान को अलग-अलग रखा था।

जैसे ही पहला पत्थर ड्रोन के पास पहुंचा, ड्रोन ने एकाएक अपनी गति बढ़ा दी, पर तौफीक का फेंका हुआ दूसरा पत्थर उसी स्थान की ओर आ रहा था, यह देख ड्रोन ने इस बार अपनी गति को धीमे कर दिया।

बस इसी स्थान पर वह ड्रोन फंस गया, क्यों कि तौफीक का फेंका तीसरा पत्थर, उसी स्थान को केंद्र में रखकर फेंका गया था।

तीसरा पत्थर ड्रोन के एक पंखे पर जाकर लगा, जिसकी वजह से ड्रोन अनियंत्रित होकर, एक चट्टान से टकराकर नीचे आ गिरा।

ड्रोन को नीचे गिरता देख सभी ने तौफीक के नाम का जयकारा लगाया और उस ओर भाग लिये जहां ड्रोन गिरा था।

जेनिथ की आँखों में एक बार फिर तौफीक के लिये तारीफ के भाव उभरे।

इसी पल, बस एक क्षण के लिये तौफीक और जेनिथ की नजरें आपस में टकराईं और फिर जेनिथ ने अपना मुंह फेर लिया।


“अब समझ में आया जेनिथ कि मैंने तौफीक का रहस्य अभी किसी और से बताने को क्यों मना किया था?" नक्षत्रा ने कहा- “क्यों कि हमें इस तिलिस्म में तौफीक की जरुरत है।"

“पर तुम तो इतनी दूर का भविष्य नहीं देख पाते नक्षत्रा, फिर तुम्हें कैसे पता था कि हमें तौफीक की जरुरत इस तिलिस्म में पड़ने वाली है?" जेनिथ ने शक भरे अंदाज में नक्षत्रा से पूछा।

"मैं....मैं...भविष्य नहीं देख सकता ज़े ज़ेनिक्स मैंने तो बस ऐसे ही गणना की थी।" नक्षत्रा ने लड़खड़ाती जुबान में कहा।

"ये तुम मुझे ज़ेनिक्स क्यों कह रहे हो नक्षत्रा?" जेनिथ के चेहरे पर उलझन के भाव उभरे।

"उप्स सॉरी 'ज़ेनिक्स' शब्द गलती से निकल गया।” इतना कह नक्षत्रा चुप हो गया। शायद वह समझ गया था कि इस समय कुछ ना ही बोलना उचित होगा।

नक्षत्रा को अचानक से चुप होते देख जेनिथ, उस ड्रोन की ओर बढ़ गई, जिधर सभी गये थे।

सुयश ने पत्थर मारकर पिंजरे का द्वार खोल दिया।

लाल परी अब निकलकर बाहर आ गई, पर उसने ना तो किसी की ओर देखा? और ना ही किसी से कुछ कहा? लाल परी चलती हुई, वहां रखे, लाल रंग से भरे ड्रम के पास पहुंची।

अचानक ही लाल परी के हाथों में एक पेंट करने वाली कूची दिखाई देने लगी। लाल परी ने अपनी कूची को पेंट से भरे ड्रम में डुबाया और बिजली की तेजी से उस घाटी में मौजूद हर लाल रंग की चीज को रंगना शुरु कर दिया।

कुछ ही देर में लाल परी ने घाटी में उपस्थित, लाल रंग के फलों और फूलों को रंग दिया।

रंगों का कार्य पूर्ण होने के बाद वह लाल परी हवा में कहीं गायब हो गई? अब सभी का ध्यान नीले रंग के वस्त्र पहने परी की ओर गया, जो कि झील के पानी में मौजूद सफेद लिली के फूल पर रखे एक पिंजरे में थी।


जारी रहेगा_____✍️
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वसंत ऋतु:
(तिलिस्मा 4.4)

सुयश सहित सभी लोग अब जमीन पर चमक रहे, ग्रीनलैंड के स्थान पर जाकर खड़े हो गये, जहां वसंत ऋतु से इनका सामना होना था।

सभी अब गायब होकर ग्रीनलैंड के एक स्थान पर पहुंच गये। परंतु उस स्थान पर नजर पड़ते ही, सभी बुरी तरह से हैरान हो गये।

वह एक बहुत सुंदर सी घाटी थी। उस स्थान पर पेड़, पर्वत, झील, परियां, तितली, झरना आदि सबकुछ था, जो कि एक प्रकृति की सुंदरता का कारक होता है, परंतु किसी भी चीज में कोई रंग नहीं था, यानि की सभी चीजें 70 के दशक के टेलीविजन की तरह ब्लैक एण्ड व्हाइट थीं।

इस स्थान को देख क्रिस्टी के मुंह से हंसी छूट गई।

“लगता है यह कैश्वर अब हमें किसी पुराने से टेलीविजन के अंदर ले आया है? जहां कि हर चीज का रंग उड़ गया है।” क्रिस्टी ने हंसते हुए कहा।

“मैं तो समझा था कि वसंत ऋतु में सबकुछ खुशनुमा होगा?” ऐलेक्स ने कहा- “पर यहां का तो अंदाज ही निराला लग रहा है।"

अब सबकी नजर उस बड़ी सी घाटी की ओर गई। सभी देखना चाहते थे कि वहां पर क्या-क्या है? और उस द्वार को किस प्रकार पार किया जा सकता है?

उस स्थान पर एक ओर 4 बड़े से ड्रम रखे थे। 3 ड्रम में लाल, नीला और पीला रंग था। एक ड्रम पूरी तरह से खाली था।

उस स्थान पर हवा में, एक 6 फुट का ड्रोन घूम रहा था, जिसके नीचे एक पिंजरा टंगा था और उस पिंजरे में एक परी बैठी थी, जिसने लाल रंग के वस्त्र पहन रखे थे। वह ड्रोन उस पिंजरे को लिये चारो ओर हवा में उड़ रहा था।

दूसरी ओर एक बड़ी सी चट्टान से, एक पानी का झरना गिर रहा था। उस झरने के पानी के एकत्र होने से, नीचे एक सुंदर परंतु छोटी सी झील बन गई थी।

उस झील के बीच में एक सफेद रंग का बड़ा सा लिली का फूल तैर रहा था। उस फूल के ऊपर दूसरा पिंजरा रखा था, जिसमें नीले रंग के वस्त्र पहने एक दूसरी परी बैठी थी।

तीसरा पिंजरा गायब होकर बार-बार अलग-अलग स्थानों पर दिखाई दे रहा था। तीसरे पिंजरे में पीले रंग के वस्त्र पहने एक परी बैठी थी।

चौथी परी किसी पिंजरे में नहीं थी, बल्कि हवा में उपस्थित 6 फुट ऊंचे, एक सफेद रंग के हीरे में बंद थी।

उस हीरे के नीचे एक संगमरमर के पत्थर का, 4 फुट का वर्गाकार टुकड़ा जमीन में लगा था। चौथी परी ने हरे रंग के वस्त्र पहने थे।

“यहां के माया जाल को तो देखकर ही समझ में आ रहा है, कि हमें यहां करना क्या है?" जेनिथ ने कहा।

“यह एक घाटी है, जिसके सारे रंगों के लिये ये 4 परियां जिम्मेदार हैं, परंतु किसी ने इन 4 परियों को अलग-अलग जगहों पर कैद कर दिया है?” सुयश ने कहा- “हमें इन सभी परियों को छुड़ाकर, प्रकृति के इन रंगों को भरना होगा।

“सही कहा आपने कैप्टेन।" तौफीक ने कहा- “और जैसे ही हम इन रंगों को प्रकृति में भर देंगे, स्वतः ही प्रकृति पर वसंत ऋतु का प्रभाव हो जायेगा।"

“तो फिर देर ना करते हुए इस द्वार को शुरु करते हैं।” सुयश ने कहा- “पहले लाल रंग का ड्रम रखा है, तो हम पहले लाल रंग की परी को छुड़ाने की कोशिश करते हैं।”

“पर कैप्टेन, हवा में उड़ रहे उस ड्रोन की गति बहुत ज्यादा है, ऐसे में हम उस ड्रोन तक कैसे पहुंच पायेंगे?" ऐलेक्स ने कहा।

ऐलेक्स की बात सुनकर सुयश ध्यान से उस ड्रोन की गति का अध्ययन करने लगा। उस ड्रोन की गति कम से कम 60 किलोमीटर प्रति घंटा के आस-पास थी। ऐसे में उसे पकड़ पाना इतना भी आसान नहीं था।

तभी सुयश की नजर एक ऊंची सी चट्टान की ओर गई। ड्रोन बार-बार घूमते हुए उस चट्टान के पास से गुजर रहा था।

उस चट्टान के नीचे की ओर झील का पानी था। यह देख सुयश के दिमाग में एक युक्ति आ गई।

"हममें से किसी को उस चट्टान पर जाकर खड़ा होना होगा?” सुयश ने चट्टान की ओर इशारा करते हुए कहा और जैसे ही ड्रोन नीचे से निकलेगा, चट्टान से कूदकर उस ड्रोन पर सवार होने की कोशिश करनी होगी। क्यों कि ड्रोन पर लगे पंखे, उसके प्लेटफार्म के नीचे हैं, इसलिए वह पंखे हमें, किसी भी प्रकार की हानि नहीं पहुंचा सकते। मुझे तो यह तरीका ही आसान लगा क्यों कि अगर कोई नीचे गिर भी गया? तो नीचे झील का पानी होने की वजह से उसे चोट नहीं लगेगी।"

“ठीक है कैप्टेन, तो मैं चट्टान पर जाकर ड्रोन पर कूदने की कोशिश करती हूं।” क्रिस्टी ने स्वयं से आगे आते हुए कहा और सुयश की स्वीकृति पाकर उस चट्टान की ओर बढ़ गई।

कुछ ही पलों में क्रिस्टी चट्टान पर थी। अब क्रिस्टी की नजर पास आ रहे ड्रोन की ओर थी। कुछ देर तक क्रिस्टी ध्यान से ड्रोन को देखती रही और उसकी गति का पूर्ण अंदाजा लगा लेने के बाद, क्रिस्टी ने ड्रोन पर छलांग लगा दी।

एक पल के लिये ऐसा लगा मानो क्रिस्टी का शरीर, किसी सुपरगर्ल की भांति हवा में उड़ रहा हो।
पर जैसे ही ड्रोन इस बार चट्टान के समीप आया, उसकी गति अचानक से बढ़ गई और वह क्रिस्टी के नीचे से, उसे चिढ़ाता हुआ निकल गया।

एक पल के लिये क्रिस्टी की आँखों में आश्चर्य के भाव उभरे, परंतु इससे पहले कि क्रिस्टी ज्यादा आश्चर्य व्यक्त कर पाती, उसका शरीर ‘छपाक' की तेज आवाज करते हुए झील के पानी में आ गिरा।

क्रिस्टी ने पानी में एक डाइव मारी और झील से निकल कर बाहर आ गई।

क्रिस्टी ने सुयश से कुछ बोलने की कोशिश की, पर सुयश हाथ के इशारे से उसे रोकते हुए बोला- “कुछ बोलने की जरुरत नहीं है क्रिस्टी, हम सभी ने देखा कि कैसे ड्रोन की स्पीड एका एक तेज हो गई थी? अब यह साफ हो गया कि यह एक साधारण ड्रोन नहीं, बल्कि एक स्मार्ट ड्रोन है, जो अपने पर आ रहे खतरों को देख, अपने अंदर स्वयं बदलाव कर सकता है।....क्या अब किसी के पास इस ड्रोन को पकड़ने का कोई दूसरा तरीका है?"

"हां कैप्टेन।” इस बार ऐलेक्स ने अपना हाथ उठाते हुए कहा- “मुझे अभी-अभी यहां सामने की ओर कुछ अदृश्य सीढ़ियां बनी दिखाई दीं हैं, ड्रोन उन सीढ़ियों के नीचे से बार-बार निकल रहा है। जिस चट्टान से क्रिस्टी नीचे कूदी, वह चट्टान काफी ऊंचाई पर थी, जिससे क्रिस्टी को ड्रोन को पकड़ने के लिये, काफी पहले कूदना पड़ा था, पर उन सीढ़ियों और ड्रोन के बीच ज्यादा फासला नहीं है, इसलिये मुझे लगता है कि उन सीढ़ियों के माध्यम से आसानी से ड्रोन को पकड़ा जा सकता है?" यह कहकर ऐलेक्स ने एक दिशा की ओर इशारा करते हुए कहा।

“ठीक है ऐलेक्स, तुम भी कोशिश करके देख लो, हो सकता है कि इस तरीके से ही लाल परी के ड्रोन को पकड़ा जा सके?” सुयश ने ऐलेक्स को आज्ञा देते हुए कहा।

सुयश की बात सुन ऐलेक्स उन सीढ़ियों की ओर बढ़ गया। कुछ ही देर में ऐलेक्स उन सीढ़ियों पर चढ़कर, एक ऐसे स्थान पर खड़ा हो गया, जिसके नीचे से ड्रोन बार-बार निकल रहा था।

शैफाली के सिवा बाकी किसी को, अदृश्य सीढ़ियां दिखाई नहीं दे रहीं थीं, पर ऐलक्स को वह सब, अब हवा में एक स्थान पर खड़े देख रहे थे।

ऐलेक्स ने भी क्रिस्टी की ही भांति, ड्रोन की गति का अवलोकन किया और एक बार जैसे ही ड्रोन सीढ़ियों के एक ओर से नीचे घुसा, ऐलेक्स उसकी गति देख दूसरी ओर की सीढ़ियों से उतर गया।

पर इस बार ड्रोन सीढ़ियों के नीचे कुछ पलों के लिये बहुत धीमा हो गया, जिसकी वजह से ऐलेक्स नीचे धरती पर आ गिरा।

चूंकि सीढ़ियों की ऊंचाई जमीन से ज्यादा नहीं थी और ऐलेक्स की त्वचा शक्ति भी अभी थोड़ी काम कर रही थी, इसलिये ऐलेक्स को चोट नहीं आई।

अब ऐलेक्स अपना मुंह लटकाकर, क्रिस्टी के बगल आकर खड़ा हो गया। ऐलेक्स ने अपना सिर क्रिस्टी के कंधे से टिका लिया।

“कोई बात नहीं शक्ति धारक, तुम दुखी मत हो, ऐसा सबके साथ होता है।" क्रिस्टी ने ऐलेक्स के सिर को बिना अपने कंधे से हटाए, उसे थपकी देते हुए कहा।

ऐलेक्स ने थपकी से भाव विभोर हो, भोलेपन से अपनी आँखें बंद कर ली। क्रिस्टी और ऐलेक्स को देख सबके चेहरे पर मुस्कान आ गई।

“यह प्लान भी फेल हो गया।” सुयश ने बारी-बारी सभी की ओर देखते हुए कहा- “क्या किसी के पास कोई और प्लान है?"

"हां कैप्टेन अंकल, इस बार मैं कोशिश करके देखना चाहती हूं।” शैफाली ने अपना हाथ खड़ा करते हुए कहा।

“क्या तुम्हारे दिमाग में कोई विशेष प्लान है शैफाली?" जेनिथ ने शैफाली की ओर देखते हुए पूछा।

"हां, पर मैं उस प्लान को बताने की जगह करके दिखाना चाहती हूं।” यह कहकर शैफाली उनके पास से हटकर आगे की ओर बढ़ गई।

सभी की नजर अब पूर्णतया शैफाली की ओर थीं।

शैफाली वहां से आगे बढ़कर उस स्थान पर जा पहुंची, जहां बहुत सी बड़ी-बड़ी तितलियां उड़ रहीं थीं।

कुछ देर तक शैफाली वहां खड़ी होकर उड़ती हुई तितलियों को यूं ही निहारती रही और फिर वह उछलकर एक तितली पर सवार हो गई।

सभी आश्चर्य से शैफाली के इस अभूतपूर्व प्रदर्शन को देख रहे थे।

शैफाली ने कुछ ही देर में तितली पर अपने शरीर को पूरी तरह से संतुलित कर लिया। अब शैफाली ड्रोन के पीछे थी।

सभी को शैफाली का यह प्लान काफी अच्छा लगा। अब सभी को यह महसूस होने लगा था कि शैफाली जल्द ही उस लाल परी के ड्रोन को पकड़ लेगी।

शैफाली निरंतर ड्रोन के पास आती जा रही थी, परंतु जैसे ही शैफाली ने ड्रोन के बिल्कुल पास पहुंचकर, अपना हाथ ड्रोन की ओर बढ़ाया, वैसे ही अचानक ड्रोन की गति पहले से दुगनी हो गई।

अब शैफाली के लिये उस तितली पर बैठकर ड्रोन को पकड़ पाना अत्यंत ही मुश्किल हो गया। कुछ देर ऐसे ही प्रयास करने के बाद शैफाली हारकर तितली से उतरकर वापस सुयश के पास आ गई।

“यह ड्रोन तो कुछ ज्यादा ही स्मार्ट है? यह अपनी गति को घटा-बढ़ाकर हमें चकमा दे रहा है।” शैफाली ने मुंह लटकाते हुए कहा।

“नक्षत्रा, क्या तुम्हारे पास इस ड्रोन को पकड़ने का कोई प्लान है?" जेनिथ ने नक्षत्रा से पूछा।

"नहीं जेनिथ, मेरी समय को रोक देने वाली शक्ति अगर यहां काम करती? तो मैं आसानी से उस ड्रोन को पकड़ सकता था, पर अब तो मैं भी यहां मजबूर हूं।" नक्षत्रा ने कहा- “हां____, पर मैं तुम्हें एक सुझाव अवश्य दे सकता हूं।

"तो फिर कहो नक्षत्रा बताओ कि तुम्हारे पास क्या सुझाव है?" जेनिथ ने कहा।

“शायद तुम लोग हेफेस्टस की गुफा वाली घटना को भूल चुके हो, जिसमें तौफीक ने पत्थरों से निशाना लगा कर तेजी से हवा में उड़ रहे गोलों को मार गिराया था।" नक्षत्रा ने कहा।

“पर वह ड्रोन इतना स्मार्ट है कि वह तौफीक के पत्थरों से भी, अपनी गति को घटा या बढ़ाकर बच सकता है।" जेनिथ ने अपना शक जाहिर करते हुए कहा।

"जो तौफीक, हवा में उछाले गये 6 सिक्कों को, जमीन पर गिरने के पहले ही गोली से उड़ा सकता है, वह भला अपनी बुद्धि का प्रयोग कर इस ड्रोन को क्यों नहीं गिरा सकता?" नक्षत्रा के शब्दों में अतीत की यादें भी थीं, जिसे सुनकर एक पल के लिये जेनिथ विचलित हो गई।

“अतीत को भूलकर भावनाओं को नियंत्रित करो दोस्त। यह समय अतीत के सागर में मंथन करने का नहीं है, यह समय है, सभी भावनाओं को भुलाकर तिलिस्मा को पार करने का।” नक्षत्रा ने जेनिथ को समझाते हुए कहा।

नक्षत्रा की बात सुन जेनिथ ने धीरे से अपना सिर हिलाया और अपने चेहरे के बनते-बिगड़ते भावों को नियंत्रित कर लिया।

"तौफीक।” जेनिथ ने एक लंबे अंतराल के बाद तौफीक को संबोधित करते हुए कहा- “नक्षत्रा का कहना है कि तुम यह कार्य आसानी से कर सकते हो।

तौफीक का नाम लेते समय, एक बार को जेनिथ की जुबान लड़खड़ा गई, पर शीघ्र ही उसने स्वयं को नियंत्रित कर लिया।

“नक्षत्रा का?” तौफीक ने अर्थ भरी नजरों से जेनिथ की ओर देखते हुए पूछा।

"नहीं...म.....म....मेरा भी मानना है।" जेनिथ ने तौफीक के चेहरे से नजर हटाते हुए कहा।

जेनिथ की बात सुन तौफीक का चेहरा खुशी से चमकने लगा। अचानक ही उसमें एक गजब का विश्वास नजर आने लगा।

अब तौफीक ने ध्यान से उस ड्रोन को देखा और फिर जमीन से 6 पत्थर उठाकर अपने हाथ में पकड़ लिये। पत्थरों का आकार कंचे से थोड़ा सा ही ज्यादा था।

तौफीक अब लगातार उस ड्रोन को देख रहा था। कुछ देर, ड्रोन की गति का अध्ययन करने के बाद तौफीक की नजर ड्रोन के घूम रहे पंखों पर जम गई।

अब तौफीक ने बिजली की फुर्ती दिखाते हुए एकएक कर सभी पत्थर ड्रोन की ओर उछाल दिये।

तौफीक ने सभी पत्थरों की गति और स्थान को अलग-अलग रखा था।

जैसे ही पहला पत्थर ड्रोन के पास पहुंचा, ड्रोन ने एकाएक अपनी गति बढ़ा दी, पर तौफीक का फेंका हुआ दूसरा पत्थर उसी स्थान की ओर आ रहा था, यह देख ड्रोन ने इस बार अपनी गति को धीमे कर दिया।

बस इसी स्थान पर वह ड्रोन फंस गया, क्यों कि तौफीक का फेंका तीसरा पत्थर, उसी स्थान को केंद्र में रखकर फेंका गया था।

तीसरा पत्थर ड्रोन के एक पंखे पर जाकर लगा, जिसकी वजह से ड्रोन अनियंत्रित होकर, एक चट्टान से टकराकर नीचे आ गिरा।

ड्रोन को नीचे गिरता देख सभी ने तौफीक के नाम का जयकारा लगाया और उस ओर भाग लिये जहां ड्रोन गिरा था।

जेनिथ की आँखों में एक बार फिर तौफीक के लिये तारीफ के भाव उभरे।

इसी पल, बस एक क्षण के लिये तौफीक और जेनिथ की नजरें आपस में टकराईं और फिर जेनिथ ने अपना मुंह फेर लिया।


“अब समझ में आया जेनिथ कि मैंने तौफीक का रहस्य अभी किसी और से बताने को क्यों मना किया था?" नक्षत्रा ने कहा- “क्यों कि हमें इस तिलिस्म में तौफीक की जरुरत है।"

“पर तुम तो इतनी दूर का भविष्य नहीं देख पाते नक्षत्रा, फिर तुम्हें कैसे पता था कि हमें तौफीक की जरुरत इस तिलिस्म में पड़ने वाली है?" जेनिथ ने शक भरे अंदाज में नक्षत्रा से पूछा।

"मैं....मैं...भविष्य नहीं देख सकता ज़े ज़ेनिक्स मैंने तो बस ऐसे ही गणना की थी।" नक्षत्रा ने लड़खड़ाती जुबान में कहा।

"ये तुम मुझे ज़ेनिक्स क्यों कह रहे हो नक्षत्रा?" जेनिथ के चेहरे पर उलझन के भाव उभरे।

"उप्स सॉरी 'ज़ेनिक्स' शब्द गलती से निकल गया।” इतना कह नक्षत्रा चुप हो गया। शायद वह समझ गया था कि इस समय कुछ ना ही बोलना उचित होगा।

नक्षत्रा को अचानक से चुप होते देख जेनिथ, उस ड्रोन की ओर बढ़ गई, जिधर सभी गये थे।

सुयश ने पत्थर मारकर पिंजरे का द्वार खोल दिया।

लाल परी अब निकलकर बाहर आ गई, पर उसने ना तो किसी की ओर देखा? और ना ही किसी से कुछ कहा? लाल परी चलती हुई, वहां रखे, लाल रंग से भरे ड्रम के पास पहुंची।

अचानक ही लाल परी के हाथों में एक पेंट करने वाली कूची दिखाई देने लगी। लाल परी ने अपनी कूची को पेंट से भरे ड्रम में डुबाया और बिजली की तेजी से उस घाटी में मौजूद हर लाल रंग की चीज को रंगना शुरु कर दिया।

कुछ ही देर में लाल परी ने घाटी में उपस्थित, लाल रंग के फलों और फूलों को रंग दिया।

रंगों का कार्य पूर्ण होने के बाद वह लाल परी हवा में कहीं गायब हो गई? अब सभी का ध्यान नीले रंग के वस्त्र पहने परी की ओर गया, जो कि झील के पानी में मौजूद सफेद लिली के फूल पर रखे एक पिंजरे में थी।


जारी रहेगा_____✍️
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DesiPriyaRai

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# 15.

“आप फिलहाल अपने रूम में पहुंचिए मिस्टर अलबर्ट। क्यों कि अभी कुछ देर के लिए शिप की लाइट भी ऑफ हो गई थी। ऐसी स्थिति में शायद मिसेज अलबर्ट भी परेशान हों। मैं आपसे इस टॉपिक के बारे में बाद में बात करूंगा।“

यह कहकर सुयश, जेम्स हुक की तरफ बढ़ गया जो अब लगभग सभी कंट्रोल्स को चेक कर चुका था।

“कैप्टेन! शिप को चलाने वाले सभी मैकेनिकल यंत्र व व्हील तो सही काम कर रहे हैं।“ जेम्स हुक ने सुयश को अपनी तरफ आते देख बताना शुरु किया-

“पर शिप के सारे इलेक्ट्रानिक यंत्र, गेज, मीटर्स व ट्रांसमीटर सेट, पूरी तरह खराब हो चुके हैं। अब आप यह समझ लीजिए कि बाहरी दुनिया से फिलहाल हमारा संपर्क पूर्ण रुप से टूट चुका है। यहां तक कि हमारा दिशा सूचक यंत्र भी काम नहीं कर रहा है। इस समय तो हमें यह भी नहीं पता, कि हम किस दिशा में खड़े हैं।“

उधर रोजर व असलम को भी अब स्थिति की भयानकता का अंदाजा हो गया था। वह दोनों अभी तक, सिर झुकाए, चुपचाप खड़े हो कर बातें सुन रहे थे। सुयश ने ध्यान से जेम्स हुक की सारी बातें सुनी और फिर धीरे से एक हुंकारी भरते हुए, एक नजर रोजर व असलम पर मारी।

“सबसे पहले मैं आप लोगों को वास्तविक स्थिति से अवगत करा देना चाहता हूं।“ सुयश ने गंभीर स्वर में कहा-

“रोजर व असलम, तुम लोगों की एक छोटी सी गलती से, आज जहाज के सैकड़ों यात्रियों की जान खतरे में है। तुम्हें स्वयं नहीं मालूम कि तुम लो गोंने क्या किया है?“

“हम अपने किए की माफी मांगते हैं कैप्टन।“ सुयश की बातें सुनकर, रोजर ने धीरे से सिर उठाते हुए कहा-

“हम महसूस कर रहे हैं, कि हमसे वास्तव में बहुत बड़ी गलती हो गयी है, पर हम आपको यह विश्वास दिलाते हैं, कि भविष्य में फिर कभी ऐसी गलती नहीं करेंगे।“

असलम ने भी सिर उठाते हुए रोजर की हां में हां मिलायी। सुयश समझ गया कि उनको अब कुछ कहने की जरूरत नहीं है क्यों कि वह खुद ही समझ चुके हैं कि उनसे बहुत बड़ी गलती हो चुकी है।

“फिलहाल मैं तुम लोगों से इस बारे में बाद में बात करूंगा।“ सुयश ने कहा- “पहले हमारा काम शिप को, अपने वास्तविक रुट पर वापस लाना है, क्यों कि बारामूडा त्रिकोण का यह क्षेत्र, विश्व के सबसे खतरनाक क्षेत्रों में गिना जाता है। और इस क्षेत्र के रिकार्ड ये कहते हैं कि आज तक जो भी जहाज इस क्षेत्र में आया है, वह वापस नहीं जा सका। इसका एक छोटा सा उदाहरण अभी आपने देखा भी है कि हमारे शिप के ऊपर से कोई उड़नतश्तरी नुमा, अजीब सा यान बहुत तेजी से निकला है। वह क्या था ? अभी इसके बारे में हमें कोई जानकारी नहीं है? पता है तो बस इतना, कि उस चीज के शिप के ऊपर से निकलते ही, हमारे सभी इलेक्ट्रॉनिक यंत्र खराब हो गए।“

“विश्व के अनसुलझे रहस्यों की यदि कोई लिस्ट बनाई जाए तो यह स्थान सबसे ऊपर रहेगा । सैकड़ों बाम्बर यान से लेकर ना जाने कितने शिप, इस रहस्यमयी क्षेत्र का शिकार बन चुके हैं। जितना मैंने इस क्षेत्र के बारे में सुना है, उसके हिसाब से इस पूरे क्षेत्र में, तीव्रतम विद्युत चुंबकीय तरंगे फैली हुई हैं, जो हर इस क्षेत्र में आने जाने वाले, शिप और यानों का संपर्क, दुनिया से काटकर, उनके पूरे इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को ध्वस्त कर देती हैं। यान के यात्रियों का अपने यान पर से, इसी कारण से कंट्रोल खत्म हो जाता है और वह क्षतिग्रस्त हो जाता है। इसलिए दोस्तों इस मुसीबत की घड़ी में, हमें दूसरी अन्य समस्याओं से ध्यान हटाकर, सबसे पहले अपने शिप को इस रहस्यमई व खतरनाक क्षेत्र से निकालकर, अपने वास्तविक रूट पर लाना होगा।“

सुयश की बातें सुनकर हर आदमी तुरंत एक्शन में आ गया। उनके लिए यह विचार ही खतरनाक था, कि वह इस समय विश्व के सबसे खतरनाक क्षेत्र में हैं।

“कैप्टन यह कार्य पहले जितना आसान था, अब उतना ही मुश्किल है।“ रोजर ने अपनी प्रॉब्लम बताते हुए कहा-

“क्यों कि ना तो अब हमारे पास दिशा सूचक यंत्र है और ना ही ट्रांसमीटर सेट और बिना इन दोनों के, अब हम शिप को अपने वास्तविक रुट पर नहीं ला सकते।"

"इसलिए हमें सबसे पहले यह दिमाग लगाना होगा कि हमारा शिप है किस स्थिति में? क्यों कि इस समय बिना शिप की वास्तविक स्थिति जाने हुए, हम शिप को मोड़ेंगे कैसे?“

“और कैप्टेन हमारा दिशा सूचक यंत्र खराब हो जाने के कारण, हमें अपनी वास्तविक दिशा का भी ज्ञान नहीं हो पा रहा है।“ असलम ने अपने माथे पर छलक आए, हल्की पसीने की बूंदों को रुमाल से साफ करते हुए कहा-

“अगर दिन का समय होता तो सूर्य को देखकर, कुछ आइडिया लगाया भी जा सकता था। परंतु अंधेरी रात होने की वजह से तो आज चंद्रमा भी नहीं निकला है। फिर हम अपने जहाज की दिशा कैसे पता कर पायेंगे?“

“आप दिशा ज्ञान के लिए ज्यादा परेशान मत हो इए।“ सुयश ने कहा-
“क्यों कि अंधेरी रात में भी सितारों के द्वारा हमें दिशा ज्ञान हो सकता है। आकाश में जो 7 सितारों का समूह होता है। उसका आखिरी सितारा हमेशा उत्तर दिशा की ओर इशारा करता है और इस तारा मंडल की स्थिति पूरे वर्ष भर, एक ही रहती है। यानि कि इसमें कोई बदलाव नहीं होता। इसलिए आप दिशा ज्ञान को लेकर भ्रमित ना हों। अब रही शिप की इस समय की वास्तविक स्थिति के बारे में जानने की, तो आप लोगों को इसके लिए परेशान होने की कोई जरुरत नहीं है। मेरी अभी फ्लोरिडा के ऑफिसर से, कुछ देर पहले बात हुई थी, जिसमें उसने जहाज की वास्तविक स्थिति मुझे बताई थी।............ लारा ! जरा टेबल पर रखा, कॉपी और पेन तो उठाना।“

लारा ने तुरंत ट्रांसमीटर सेट के बगल में रखा, कॉपी और पेन उठा कर सुयश को दे दिया। सुयश ने पहले एक नजर कॉपी पर लिखे उस को आर्डीनेट्स पर मारी जो उसने स्टीफेन से सुनकर कॉपी पर लिखा था और फिर उस पर एक रेखा चित्र बनाने में व्यस्त हो गया। सभी की निगाहें अब उस कॉपी के पन्ने पर थीं, जिसमे सुयश बहुत तेजी से एक डायग्राम बना रहा था। थोड़ी देर की मेहनत के बाद सुयश ने डायग्राम पूरा कर लिया। उस डायग्राम में सुप्रीम की वास्तविक स्थिति बनी थी। जिसके बीच-बीच में, वह दूरियां और दिशा लिखी थीं, जो स्टीफेन ने कुछ देर पहले सुयश को बतायी थीं।
इतना करके सुयश कुछ देर रुका और फिर कुछ सोचकर उसने दोबारा कलम चलानी शुरु कर दी। इस बार वह कुछ कैलकुलेशन कर रहा था। थोड़ी ही देर में सुयश ने अपना काम पूरा कर लिया। काम पूरा करने के बाद, सुयश ने वह पन्ना, बीच टेबल पर इस तरह रख दिया कि वह अब सभी को दिखायी दे रहा था। रोजर सहित अब सभी की निगाह सिर्फ और सिर्फ उस पन्ने पर थी। उस पन्ने पर सुयश ने ज्यामिती का प्रयोग करके, शिप का एक डायग्राम बनाया था और त्रिकोणमिती के फार्मूले लगा कर कुछ कैलकुलेशन भी की थी। सभी की नजरें, डायग्राम की तरफ देख, सुयश ने कहना शुरु किया-

“इस डायग्राम में मैंने ‘सुप्रीम’ की वास्तविक स्थिति दिखायी है। फ्लोरिडा के द्वारा बताए गए मैसेज के अनुसार, इस समय हमारा शिप 30 डिग्री नॉर्थ ईस्ट में, 80 नॉटिकल माइल, गलत दिशा में जा चुका है। और अब हमारा शिप, अपनी वास्तविक स्थिति से 56 डिग्री पश्चिमी देशांतर रेखाओं के मध्य इस जगह पर है।“ सुयश ने पेन से पेज पर एक जगह निशान लगाते हुए कहा-

“तो फिर मेरी कैलकुलेशन के हिसाब से, अगर हम ‘सुप्रीम’ को 120 डिग्री, दाहिने मोड़ते हैं और फिर 40 नॉटिकल माइल चलकर, 90 डिग्री बायें मोड़ते हैं तो हम अपने असली रास्ते पर आ जाएंगे। और फिर वह स्थिति हमारी पिछली स्थिति से 69 नॉटिकल माइल आगे होगी।“

सभी अब तारीफ वाली नजरों से सुयश को देख रहे थे। इतना स्ट्रांग कैलकुलेशन देखकर सभी समझ गये थे कि क्यूं इतनी छोटी उम्र में सुयश को इस शिप का कैप्टेन बनाया गया था। सुयश ने एक बार फिर सब पर नजर डाली और कह उठा-

“अगर आप लोगों को इस प्लान में किसी प्रकार की कोई दिक्कत हो रही हो, तो आप साफ-साफ शब्दों में मुझे बता सकते हैं। या फिर आपके पास कोई इससे भी अच्छा प्लान हो, तो आपका स्वागत है।“

सुयश की बात सुन रोजर ने वहां खड़े हर इन्सान पर एक नजर मारी और फिर सबको संतुष्ट देख, बोल उठा-
“आप का प्लान बिल्कुल पर्फेक्ट है कैप्टन। हमें इसमें कोई बदलाव नहीं करना है।“

“ओ.के. तो फिर आप लोग अब शिप को, फिलहाल प्लान के मुताबिक मोड़िये। और जब शिप अपने वास्तविक रुट पर आ जाये तो मुझे बता दीजिएगा। उसके आगे क्या करना है? ये मैं आपको बाद में बताता हूं।“

यह कहकर सुयश ने वह कॉपी रोजर को पकड़ा दी। अब सुयश, जेम्स हुक की ओर मुड़कर बोला-

“मिस्टर जेम्स हुक, आपने शिप की खराबियां पता की या नहीं ?“

“यस कैप्टेन!“ जेम्स हुक ने सुयश को जवाब दिया- “हमारे शिप के पूरे इलेक्ट्रॉनिक यंत्र खराब हो चुके हैं। हमें तेजी से वह सारे यंत्र बदलने पड़ेंगे। परंतु पूरी लाइन में खराबी आ जाने के कारण, सारे यंत्र बदलने में बहुत समय लगेगा। जहां तक मेरा अंदाजा है, कि इस क्षेत्र में एका एक तीव्र विद्युत चुंबकीय तरंगे उत्पन्न हो गई थीं। जिसके कारण हमारे सारे इलेक्ट्रॉनिक यंत्र फेल हो गए थे।“

“फेल हो गए थे से क्या मतलब है आपका ?“ असलम जो कि इतनी देर से सिर्फ बातें सुनकर माहौल का जायजा ले रहा था, बोल उठा-

“यह भी तो हो सकता है, कि इस क्षेत्र में अभी तक विद्युत चुंबकीय तरंगे फैली हों, जो कि हमारे द्वारा बदले गई यंत्रों को पुनः खराब कर दें।“

“आगे इस क्षेत्र में यदि पुनः चुंबकीय तरंगे फैल जाएं, तो वह बात अलग है। लेकिन इस बात का तो दावा है, कि इस समय हम लोग जिस क्षेत्र में हैं। वहां पर तो, विद्युत चुंबकीय तरंगे बिल्कुल नहीं हैं।“ जेम्स हुक ने अपना एक हाथ मुक्का बनाते हुए, अपने दूसरे हाथ के पंजे पर मारा-

“क्यों कि हमारी लाइट्स एक बार ऑफ हो जाने के बाद पुनः ऑन हो चुकी हैं। अगर विद्युत चुम्बकीय तरंगें अभी भी यहां होतीं तो यह सारी लाइटें फिर से खराब हो जातीं। जिससे यह पता चलता है कि यह क्षेत्र विद्युत चुंबकीय तरंगों वाला क्षेत्र नहीं है।“

“इसका सीधा सा मतलब निकलता है।“ सुयश ने गहरी सांस छोड़ते हुए कहा- “कि जो अंतरिक्ष यान, अभी-अभी हमारे सिर के ऊपर से निकला । विद्युत चुम्बकीय तरंगे जरुर उसी से निकल रही होंगी, और उसके जाते ही, पूरा क्षेत्र पुनः सामान्य हो गया।“

“मुझे भी कुछ ऐसा ही लगता है।“ जेम्स हुक ने कहा- “फिलहाल हमारे सारे इंजीनियर्स, तेजी से जहाज की खराबी को दूर करने में लगे हैं और हम आशा करते हैं कि जल्द से जल्द वह इसे दूर कर लेंगे।“

“ठीक है। जैसे ही शिप की सारी प्रॉब्लम सही हो जाए, आप मुझे खबर कर दीजिएगा।“ सुयश ने जेम्स हुक से कहा।

सभी को इंसट्रक्शन देने के बाद सुयश वहां पड़ी एक खाली कुर्सी पर बैठ गया।




जारी रहेगा …….....✍️
बहुत ही उम्दा अपडेट था, सुयश न तो गंभीर स्थिति में घबराया बल्कि दिमाग से काम लेकर पूरी स्थिति को समझा और उसके अनुसार ही आगे का प्लान बनाया।

वैसे जिस हिसाब से नीली रोशनी पसार हुई ऐसा लगता नहीं कि कोई अंतरिक्ष यान होगा। हम्ममम देखते हे आगे क्या होता हे
 

DesiPriyaRai

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# 16
1 जनवरी 2002, मंगलवार, 05:30;

सुयश आँख बंदकर कुर्सी पर बैठा था। मगर वह अभी भी बहुत तेजी से कुछ सोच रहा था।कुछ देर सोचते रहने के पश्चात, सुयश ने अपनी आँखें खोलीं। सुयश की नजर रोजर पर पड़ी। रोजर, असलम के साथ शिप के चालक दल को गाइड करने में लगा दिखायी दिया।

लेकिन इससे पहले कि शिप के चालक दल के सदस्य, शिप को स्टार्ट कर, सही रुट पर ला पाते। एक अजीब सी आवाज ने, फिर से सभी को आश्चर्य में डाल दिया।

“झर ....ऽऽ झर.....ऽऽ झर.....ऽऽ झर.....ऽऽ।“

“यह आवाज कैसी है?“ सुयश का व्याकुल स्वर कंट्रोल रूम में गूंज उठा।

सभी के कान अब सिर्फ और सिर्फ उस आवाज को सुनने में लगे थे। धीरे-धीरे वह आवाज तेज होती जा रही थी। एकाएक सुयश सहित सभी के दिमाग में एक स्वर गूंज उठा-“खतरा ऽऽऽऽ।“

“रोजर! तुरंत शिप के आसपास की लाइट्स को ऑन करो । क्विक.....।“ सुयश ने घबराकर कहा।

वह विचित्र आवाज धीरे-धीरे तेज होती जा रही थी और अब उसने तेज होते- होते भयानक रूप ले लिया था। इससे पहले कि यह लोग कुछ और समझ पाते।

शिप को एक तेज झटका लगा और वह बिना स्टार्ट किए ही चल पड़ा। रोजर ने झपट कर तुरंत शिप के बाहर की सारी सर्च लाइट ऑन कर दी।

“कैप्टन! कोई अंजाना खतरा हमारे शिप की ओर तेजी से मंडरा रहा है।“ असलम ने अपनी जुबान को अपने सूख चुके होठों पर फिराते हुए, डरे स्वर में कहा -

“हमारा शिप बिना स्टार्ट किए ही किसी दिशा में जा रहा है।“

अब सभी की निगाहें किसी अंजानी आशंका से, शिप के विंड स्क्रीन पर चिपक गईं। शिप की सर्च लाइट का दायरा सीमित होने के कारण, वह सभी शिप के ज्यादा आगे देख पाने में असमर्थ थे। शिप मंथर गति से आगे बढ़ रहा था और वह आवाज लगातार अभी भी तेज हो रही थी। अचानक शिप की सर्च लाइट ने, इन सभी को जो नजारा दिखाया, उसको देखते ही सभी के हाथ-पैर एका एक फूलते से नजर आए।

“भंवर...............।“ सुयश एका -एक चीख उठा। उन्हें कुछ दूरी पर, एक विशालकाय भंवर बनती नजर आयी। जो अपना दायरा लगातार बढ़ाती जा रही थी।

उसी भंवर के तीव्र बहाव के कारण, समुंदर का पानी भी तेजी से भंवर की ओर खिं च रहा था और उसी के साथ खिंच रहा था ‘सुप्रीम’ भी। इतनी विशालकाय भंवर को देख, एक पल के लिए सभी की सांसे रुक सी गईं। उधर शिप लगातार भंवर की ओर बढ़ रहा था। सभी लोगों के मौत के इस सम्मोहन को सुयश की आवाज ने तोड़ा-

“जल्दी करो........ शिप को स्टार्ट करो..... वरना यह अंजानी मौत हमें निगल जायेगी।“ सुयश के इतना कहते ही, संज्ञा शून्य हो चुके सभी व्यक्ति, अचानक हरकत में आ गए।

रोजर व असलम तेजी से शिप के कंट्रोल्स से छेड़-छाड़ करके उसे स्टार्ट करने की कोशिश करने लगे। अब सभी की निगाहें उस विशालकाय भंवर पर थीं, जो तेजी से शिप के बीच का दायरा कम करने में लगी हुई थी।

तभी ‘घर्र-घर्र‘ की तेज आवाज करते हुए, शिप का इंजन स्टार्ट हो गया। इंजन को स्टार्ट हो ते देख, सुयश चीख उठा-


“मोड़ो ऽऽऽऽऽ...जल्दी से शिप को मोड़ कर, भंवर से दूर जाने की कोशिश करो। ......वरना हम इसमें फंस जाएंगे.......और फंसने के बाद, इतनी बड़ी भंवर से हमारा बचकर निकल पाना असंभव होगा।“ भंवर की धाराएं, किसी शिकारी की तरह तेजी से शिप की ओर बढ़ रहीं थीं।

“कैप्टन!“ रोजर ने चिल्ला कर कहा-
“बिना स्पीड में लाए, इतने बड़े शिप को मोड़ना असंभव है और भंवर भी अब हमसे ज्यादा दूर नहीं है। जल्दी बताइए कैप्टेन अब हम क्या करें?“

लेकिन इससे पहले कि सुयश, रोजर को कोई जवाब दे पाता, जहाज को एक और तेज झटका लगा और वह भंवर की बाहरी कक्षा में प्रवेश कर गया। अब सुप्रीम, भंवर की धाराओं के हिसाब से धीरे-धीरे घूमना शुरू हो गया था। लहरों का शोर अब अपने चरमोत्कर्ष पर था। यह भयावह शोर सुनकर, शिप के अधिकांश यात्री भी जाग चुके थे और इस शोर का मतलब निकालने की चेष्टा कर रहे थे।


रोजर, असलम के साथ, बार-बार शिप को उस भयानक भंवर से निकालने की कोशिश कर रहा था। लेकिन शिप के स्पीड में ना होने के कारण, भंवर धाराएं उसे पुनः अंदर की ओर धकेल रही थीं। इस भयानक स्थिति में शिप, लहरों से अठखेलियां कर रहा था।

“रोजर! शिप को पहले भंवर से निकालने की कोशिश मत करो।“ सुयश इस भयानक परिस्थिति में भी तेजी से अपने दिमाग का इस्तेमाल कर रहा था-


“क्यों कि भंवर से निकलने के चक्कर में, शिप स्पीड नहीं पकड़ पा रहा है। और जब तक शिप स्पीड में नहीं आएगा , तब तक वह इस विशालकाय भंवर से निकल भी नहीं पाएगा। पहले धाराओं के मोड़ के हिसाब से, शिप को मोड़ते हुए, शिप की स्पीड बढ़ाने की कोशिश करो और जब शिप फुल स्पीड में आ जाए तो उसे एक झटके से भंवर से बाहर निकालने की कोशिश करो।“

“लेकिन सर, अगर हमने इस तरीके से शिप की स्पीड को बढ़ाने की कोशिश की तो हम भंवर के और अंदर चले जाएंगे और वहां पर भंवर का खिंचाव केंद्र की ओर, और ज्यादा होगा। फिर शायद यह भी हो जाए कि हम....... उससे निकल ही ना पाएं।“ असलम में मरी-मरी आवाज में कहा।

“मैं जैसा कहता हूं वैसा करो। समय बहुत कम है। इसलिए अपना दिमाग मत लगाओ“ सुयश ने बिल्कुल दहाड़ते हुए स्वर में कहा। तुरंत रोजर व असलम सुप्रीम को भंवर की धाराओं के मोड़ के हिसाब से मोड़ने में जुट गए।

कुछ भंवर के केंद्र की वजह से और कुछ धाराओं के अनुकूल चलते रहने के कारण, शिप की स्पीड लगातार बढ़ती जा रही थी। आखिरकार शिप फुल स्पीड में आ ही गया। लेकिन तब तक वह भंवर के केंद्र के काफी नजदी क पहुंच चुका था।

ए.सी . वाले कमरे में होने के बावजूद भी सभी के चेहरे पसीने से भीग गए थे।

ड्रेजलर जो कि शिप का ‘हेल्मसमैन‘ था और शिप को स्टेयरिंग व्हील के द्वारा चलाता था। उसकी नजरें सुयश के अगले आदेश का इंतजार कर रहीं थीं। सुयश की नजरें सिर्फ और सिर्फ शिप के स्पीडो मीटर पर थीं। जैसे ही स्पीडो मीटर ने फुल का इंडीकेशन दिया, सुयश ने चीख कर कहा-

“टर्न!“ सुयश के ऐसा कहते ही ड्रेजलर ने पूरी ताकत से स्टेयरिंग व्हील घुमाया। फुल स्पीड से चल रहे शिप को एक जोरदार झटका लगा और वह चौथी कक्षा की भंवर धाराओं पर एका एक ऐसे चढ़ गया, मानों वह लहरों पर से छलांग लगा कर उड़ जाना चाहता हो। शिप की स्पीड फुल होने की वजह से, एकदम से मोड़ते ही , वह लहरों से टकरा कर, हवा में उछल सा गया। एक क्षण के लिए सबकी सांसें रुक सी गईं। शिप पूरा का पूरा हवा में था और फिर एक छपाक की आवाज करते हुए दोबारा पानी में गिर गया।

पानी में गिरते ही शिप को इतना जोरदार झटका लगा कि कइयों के मुंह से चीख निकल गई। कई लोग अपने स्थान से गिर पड़े। यहां तक कि ड्रेजलर का हाथ भी स्टेयरिंग व्हील से छूट गया। लेकिन फिर तुरंत ही ड्रेजलर ने अपनी बॉडी को नियंत्रित कर, दोबारा से शिप का कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया।

उधर पूरे शिप पर चीख-पुकार का बाजार गर्म हो गया था। किसी यात्री की समझ में नहीं आ रहा था कि ये सब क्या हो रहा है? इधर सुयश का चेहरा अब किसी चट्टान की तरीके से सख्त हो गया। उसकी निगाहें लगातार, विंडस्क्रीन पर उछल-उछल कर गिर रही लहरों पर पड़ रही थी।

शिप अब भंवर से थोड़ा सा निकलने में कामयाब हो गया था। मगर मुसीबत अभी खत्म नहीं हुई थी। सभी की आंखें फिर से सुयश के चेहरे की ओर थीं। और सुयश की नजरें भंवर की धाराओं की ओर थीं।

एकाएक ही सुयश ने फिर टर्न का इशारा किया। ड्रेजलर ने दोबारा शिप के स्टेयरिंग व्हील को पूरी ताकत से मोड़ा। शिप एक बार फिर तेजी से भंवर धारा पर चढ़ा। लहरों ने सुप्रीम को पुनः ऊपर उछाल दिया। किस्मत ने एक बार फिर उनका साथ दिया और सुप्रीम की सागर की सतह पर सेफ लैडिंग हुई। इसी तरह 1 और कोशिश करने के बाद सुप्रीम, भंवर के तिलस् चक्रव्यूह से बचकर बाहर निकलने में सफल हो गया।

ड्रेजलर लगातार शिप को भंवर से दूर भगाए जा रहा था। मानो उसे डर हो कि शिप फिर से कहीं, भंवर में ना फंस जाए। तिलस्मी भंवर से काफी आगे निकलने के बाद, जब ड्रेजलर को यह महसूस हो गया कि अब वह मौत से दूर हैं, तो उसने ‘सुप्रीम’ को रोक दिया।

ड्रेजलर की सांसें धौंकनी की तरह चल रही थी। वह अपनी सीट से उठा और कंट्रोलरुम के फर्श पर ही जमीन पर लेट गया। वह अपनी सांसें नियंत्रित करने की कोशिश करने लगा। सुयश ने भी अपने माथे पर बह आया पसीना पोंछा और तुरंत जेम्स हुक को शिप पर हुई टूट-फूट को चेक करने के लिए भेज दिया।

एक सहायता दल को छोटे-छोटे ग्रुप बनाकर, शिप के यात्रियों की मरहम पट्टी करने के लिए भेज दिया गया। क्यों कि शिप के बार-बार उछलने के कारण, यात्रियों को काफी चोटें भी आ गई थीं। सुयश ने एक बार पुनः माइक पर एनाउंस करके, सभी यात्रियों को शिप की स्थिति से अवगत करा दिया और उन्हें यह भी बता दिया कि अब वह सभी खतरे से बाहर हैं।

कंट्रोल रूम में अब सभी के चेहरे पर विजयी मुस्कान थी और होती भी क्यों ना ? आखिर उन्होंने मौत पर विजय जो पाई थी।






जारी रहेगा....…..✍️

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ये वाला अपडेट बिल्कुल वैसा लगा मानो कप्तान जैक स्परों अपने जहाज को मूवी भवंडर से बाहर निकलता हे। बहुत ही बेहतरीन तरीके से पूरे सीन की देखाया गया।
 

DesiPriyaRai

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# 17.
1 जनवरी 2002, मंगलवार, 07:30;

विशालकाय भंवर से बच जाने के बाद भी सुयश के चेहरे पर सोच के भाव विद्यमान थे। सुयश को सोच में पड़ा देख, आखिरकार असलम से ना रहा गया और वह बोल उठा-

“क्या बात है कैप्टन? अब तो सारे खतरे टल गए हैं, फिर अब आप इतना परेशान क्यों दिख रहे हैं?“

“एक खतरा टल जाने से इतना खुश होने की जरूरत नहीं है। माना कि फौरी तौर पर अभी खतरा टल गया है। पर हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि हम लोग जिस स्थान पर खड़े हैं, वह दुनिया का सबसे खतरनाक क्षेत्र है। बारामूडा त्रिकोण.....यह नाम अपने आप में मौत का पर्याय है और जब तक हम लोग इस क्षेत्र से निकल नहीं जाते, तब तक खतरा हमारे सिर पर मंडराता रहेगा। वह किसी भी रूप में हम पर अटैक कर सकता है। इसलिए सबसे पहले खुशियां मनाना छोड़, हमें इस खतरनाक क्षेत्र से बाहर निकलने के बारे में सोचना चाहिए।“

“तो इसमें इतना सोचने की क्या जरूरत है?“ रोजर ने गंभीरता की चादर ओढ़ते हुए कहा-

“आपका प्लान तो फुलप्रूफ है। अब हमें शिप को आपके प्लान के मुताबिक मोड़कर अपने वास्तविक रास्ते पर ले आना चाहिए।“

“अब हम सुप्रीम को प्लान के मुताबिक नहीं मोड़ सकते।“ सुयश ने रोजर के चेहरे पर एक गहरी निगाह डालते हुए कहा।

“पर क्यों ? आपका प्लान तो फुलप्रूफ है।“ रोजर ने कहा।

“फुलप्रूफ था ।“ सुयश ने एक गहरी सांस लेते हुए कहा-

“क्यों कि तब हमें अपने शिप की स्थिति का पूर्ण ज्ञान था, कि हम किस जगह पर हैं। लेकिन भंवर में घूमने और उससे बचकर निकलते समय, हम यह नहीं जान पाये कि अब हम अपनी वास्तविक स्थिति से कितना दूर हैं? हमें तो यह भी नहीं पता कि हमने भंवर में पहुंचकर कितने चक्कर लगाए? और जब हम उस भंवर से निकलें तो हमारा शिप किस दिशा में था ?“
यह सुनते ही जैसे सभी को सांप सूंघ गया । एकाएक मुस्कुराते हुए चेहरे डर के कारण सफेद हो गए।

“इसका तो यह भी मतलब हो सकता है, कि हम बारामूडा त्रिकोण के इस रहस्यमय क्षेत्र से निकलने के प्रयास में, इसके और अंदर आ गए हों।“ लारा ने चिंतित स्वर में कहा।

“यकीनन ऐसा हो सकता है।“ सुयश ने जवाब दिया-
“शिप पर बार-बार आने वाले, इन विचित्र खतरों से तो यही जान पड़ता है।“

“अब हमें क्या करना चाहिए?“

रोजर के शब्दों में छिपी व्याकुलता को सभी ने साफ महसूस किया। सुयश एक बार पुनः सोच में पड़ गया। सभी खामोश होकर उसके अगले निर्णय का इंतजार करने लगे।

“हेली कॉप्टर!“ सुयश के मुंह से खुशी भरे स्वर निकले-

“हमें हेलीकॉप्टर का उपयोग करना होगा । शायद हम लोग अपने वास्तविक मार्ग से ज्यादा दूरी पर ना हों और आसपास ही कोई और शिप आ-जा रहा हो, जिससे हमें असली रास्ते का पता चल जाए।“

सुयश के शब्दों को सुनकर, सभी के चेहरे पर हजार वाट का बल्ब जल गया। तब तक जेम्स हुक अपनी टीम को खराबी ढूंढने में लगाकर वापस आ गये थे। तुरंत सुयश, रोजर, असलम, लारा, ब्रैंडन व जेम्स हुक हेली पैड की ओर चल दिए। हेली पैड, शिप के पिछले हिस्से में डेक के पास था।

“कैप्टेन!“ रोजर ने सुयश से सवाल किया- “एक बात समझ में नहीं आई कि हमारे सारे इलेक्ट्रॉनिक यंत्र कैसे ब्लास्ट हो गए?“

“इसको समझने के लिए किसी विज्ञान की जरुरत नहीं है“ जेम्स हुक ने रोजर को देखते हुए कहा-

“जितने भी इलेक्ट्रॉनिक यंत्र होते हैं, वह सभी लो-फ्रीक्वेंसी पर चलते हैं, जबकि विद्युत चुम्बकीय तरंगें हाई-फ्रीक्वेंसी पर चलती हैं। इसलिए जब भी कभी कोई इलेक्ट्रानिक यंत्र, विद्युत चुम्बकीय तरंगों के बीच आता है, वह तीव्र ऊष्मा छोड़ता है। और ऊष्मा अधिक बढ़ जाने के कारण इलेक्ट्रानिक यंत्र जल जाता है।“

“और हमारा दिशा सूचक यंत्र कैसे खराब हो गया ?“ ब्रैंडन ने अपना नॉलेज बढ़ाने के उद्देश्य से जेम्स हुक से पूछा- “वह तो इलेक्ट्रानिक यंत्र नहीं होता।“

“दिशा सूचक यंत्र की चुम्बकीय सुई, पृथ्वी के चुम्बकत्व द्वारा आकर्षित होती है, जिसके कारण वह लगातार उत्तरी ध्रुव दर्शाती है। पर विद्युत चुम्बकीय क्षेत्र के अंदर, दिशा सूचक यंत्र की चुम्बकीय सुई अपना चुम्बकत्व का गुण खो देती है। इसलिए वह हमेशा गलत दिशा बताने लगती है।“ यह कहकर जेम्स हुक ने ब्रैंडन को देखा पर ब्रैंडन उनकी बातों से संतुष्ट था।

“कहीं ऐसा ना हो कि हमारा हेलीकॉप्टर भी खराब हो गया हो।“ रोजर ने शंका भरे स्वर में पूछा-

“क्यों कि वह भी इलेक्ट्रॉनिक यंत्रों से कार्य करता है।“

“जिस समय इस क्षेत्र में तीव्र विद्युत चुम्बकीय तरंगें फैलीं, उस समय हेलीकॉप्टर बंद पड़ा था। इसलिए मैं विश्वास के साथ कह सकता हूं कि हेली कॉप्टर इस समय सही अवस्था में होगा।“
जेम्स हुक ने कहा- “और अब यह क्षेत्र पूर्ण रूप से विद्युत चुंबकीय तरंगों से मुक्त है, यह मैं अभी साबित कर देता हूं।“

कहते-कहते जेम्स हुक ने अपनी जेब से 1 जोड़ी , छोटा वॉकी-टॉकी सेट निकाला और उस सेट का एक पीस रोजर को पकड़ा दिया।

“यह एक वॉकी-टॉकी सेट है। यह भी एक प्रकार का इलेक्ट्रॉनिक यंत्र होता है। यह बहुत ही पॉवरफुल है। खुले समुद्र में इसकी बात करने की क्षमता , लगभग 50 नॉटिकल माइल तक है। जिस समय शिप के ऊपर से वह रहस्यमयी यान निकला, यह मेरी जेब में था, पर ऑफ था। मेरा पूरा विश्वास है कि यह सही काम करेगा और अगर यह सही चल गया तो समझिए कि हेलीकॉप्टर भी सही स्थिति में होगा।“

यह कहकर जेम्स हुक ने वॉकी-टॉकी सेट को ऑन कर दिया। वॉकी-टॉकी सेट चेक करने पर बिल्कुल सही कार्य कर रहा था। तब तक बात करते-करते यह सारे लोग शिप के पिछले डेक पर पहुंच गये।

कुछ आगे बढ़ने पर, लकड़ी का बना एक खूबसूरत सा कॉटेज दिखाई दिया। सभी उस विशालकाय कॉटेज में प्रवेश कर गए। लकड़ी का वह कॉटेज, अंदर से भी खूबसूरत था। कॉटेज के बीचो-बीच में एक हेली पैड बना था, जिस पर लाल रंग का एक छोटा सा, परंतु सुंदर हेलीकॉप्टर खड़ा दिखायी दिया। उस टू-सीटर हेलीकॉप्टर पर, इंग्लिश के बड़े व सुनहरे अक्षरों में “सुप्रीम” लिखा था।

कॉटेज में एक किनारे पर एक बड़ी सीइलेक्ट्रॉनिक मशीन लगी थी, जिसके सामने एक ऑपरेटर खड़ा, उन मशीनों से छेड़छाड़ कर, कुछ चेक करता दिखायी दिया। सुयश को देखते ही, वह तुरंत सावधान की मुद्रा में खड़ा हो गया। लेकिन उसके चेहरे के भाव बता रहे थे कि वह भी कुछ परेशान सा है और निश्चय ही यह परेशानी भी, उस रहस्यमई यान से संबंधित थी। क्यों कि उस इलेक्ट्रॉनिक मशीन के आसपास, बिखरा कांच और टूटे हुए यंत्रों की स्थिति, इस बात का द्योतक थी कि यहां पर भी विद्युत चुंबकीय तरंगों का प्रकोप हुआ था।

“ऑपरेटर!“ रोजर ने ऑपरेटर को देखते हुए पूछा-
“क्या हेलीकॉप्टर उड़ने वाली पोजी शन में है?“

“यस सर!“ ऑपरेटर ने जवाब दिया-
“हेलीकॉप्टर तो रेडी है। पर कुछ यंत्रों में खराबी आ जाने के कारण, कॉटेज की छत व दीवारों को हटाने वाला, रिमोट कंट्रोल सही काम नहीं कर रहा है। इसलिए फिलहाल हेलीकॉप्टर सही होने के बाद भी, उड़ान नहीं भर सकता है।“

“डैम इट!“ सुयश ने सीधे हाथ का मुक्का बना कर, अपने बाएं हाथ के पंजे पर, गुस्से से मारते हुए कहा।

“अब क्या किया जाए सर?“ रोजर ने चिन्तित स्वर में सुयश की ओर देखते हुए कहा। सुयश कुछ देर सोचने के पश्चात, जेम्स हुक की ओर घूमकर बोला-

“मिस्टर जेम्स हुक, हमारे इस कॉटेज की दीवारें व छत फोल्ड होकर, कमल की पंखुड़ी की तरह खुलती हैं। इसकी छत में छोटे-छोटे फोल्डिंग ज्वाइंट्स हैं। आप तुरंत इन फोल्डिंग ज्वाइंट्स को खुलवाकर इसकी छत हटवा दीजिए।“

जेम्स हुक ने तुरंत कुछ लोगों को छत के फोल्डिंग ज्वाइंट्स को खोलने में लगा दिया। लगभग 45 मिनट के अथक परिश्रम के बाद, सभी हेलीपैड के ऊपर की छत खोलने में सफल हो गए।

“रोजर!“ सुयश ने रोजर को संबोधित करते हुए कहा-

“तुम तुरंत एक पायलट के साथ इस हेलीकॉप्टर से जाओ और देखो, शायद आप-पास से जाता हुआ, कोई और शिप दिखाई दे जाए या फिर कोई और सुराग मिल जाए। जिससे यह पता चल जाए कि हम इस समय किस जगह पर हैं? और हां यह वॉकी-टॉकी सेट भी लेते जाओ। इससे मेरे कांटेक्ट में रहना और मुझे सारी सूचना देते रहना ।“

यह कहते हुए सुयश ने जेम्स हुक से, वॉकी-टॉकी सेट लेकर, रोजर को दे दिया। रोजर, सुयश से वॉकी-टॉकी सेट लेकर, पायलट के साथ, हेलीकॉप्टर में प्रवेश कर गया।

हेलीकॉप्टर में बैठने के साथ, रोजर ने एक नजर वहां खड़े सभी लोगों पर मारी और फिर सुयश की तरफ देखते हुए, एक झटके से ‘थम्बस्-अप‘ की स्टाइल में अपना अंगूठा, जोश के साथ झटका देकर उठाया और फिर धीरे से पायलट की ओर देखकर, उसे हेलीकॉप्टर को उड़ाने का इशारा किया।

थोड़ी ही देर में, एक गड़गड़ाहट के साथ, हेलीकॉप्टर रोजर को लेकर आसमान में था।




जारी रहेगा........✍️
🔥
 
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Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Bahut hi gazab ki update he Raj_sharma Bhai

Is berang ghati me rang bharne ke liye abhi aur bhi mehnat karni he suyash and company ko

Sirf drone ko pakad lene se inka kaam pura nahi hua he........

Ke-ishwar ab aur bhi jatil task dene wala he

Keep rocking Bro
Thank you very much for your wonderful review and support bhai :hug:
Abhi kewal ek color ka kaam hua hai dost, baaki ke abhi aur bhi hain, and yess aage har task aur bhi muskil hoti jayegi. Bohot mehanat karne padegi bhai.(mujhe:D)
 
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