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#178.
काली बिल्ली: (5 दिन पहले ...... 12.01.02, शनिवार, 11:30, सीनोर राज्य की सीमा, मायावन, अराका द्वीप)
विशाल टेरोसोर अलबर्ट को उठाये आसमान में उड़ा चला जा रहा था। नीचे कुछ नन्हें टेरोसोर आसमान की ओर अपना मुंह उठाये, उस विशाल टेरोसोर के पीछे-पीछे तेज आवाज करते भाग रहे थे।
अलबर्ट का ध्यान टेरोसोर पर कम और नीचे जमीन की ओर ज्यादा था। उसे ऊंचाई से नीचे गिरने का ज्यादा डर दिख रहा था।
अलबर्ट ने अब एक बार ऊपर टेरोसोर के मुंह की ओर देखा। टेरोसोर अपनी लंबी चोंच में पहले से ही किसी जानवर को पकड़े था।
अब अलबर्ट की नजर टेरोसोर के पंजों की ओर गई, तो अलबर्ट हैरान हो गया क्यों कि इस समय टेरोसोर के पंजों में अलबर्ट के शरीर का कोई हिस्सा नहीं था।
वह टेरोसोर अलबर्ट की जैकेट को अपने पंजे से पकड़े था, यानि कि अगर जैकेट को खोल दिया जाता, तो अलबर्ट नीचे गिर सकता था।
यह देख अलबर्ट तेजी से सोचने लगा- “अगर ये टेरोसोर मुझे अपने घोसले में लेकर पहुंच गया? तो मेरा बचना बिल्कुल असंभव है, मुझे इसके पहले ही इस टेरोसोर की पकड़ से छूटना होगा।... वैसे तो जैकेट खोलते ही मैं आजाद हो जाऊंगा, पर इतनी ऊंचाई से नीचे गिरने पर तो मेरी मौत पक्का हो जायेगी.... इसलिये मुझे टेरोसोर के थोड़ा नीचे आने का इंतजार करना होगा।”
नन्हें टेरोसोर अब बहुत पीछे छूट गये थे, पर अलबर्ट को पता था कि वो पीछे से आ रहे होंगे।
तभी अचानक पता नहीं कहां से एक दूसरा विशाल पक्षी आकर, उस टेरोसोर के मुंह में पकड़े जानवर को छीनने की कोशिश करने लगा।
यह देख टेरोसोर ने एक बड़ी सी डाइव मारी और अब थोड़ा नीचे उड़ने लगा।
अलबर्ट को इस समय नीचे घने पेड़ दिखाई दिये और अब उन घने पेड़ों से अलबर्ट की ऊंचाई भी ज्यादा नहीं थी।
इससे अच्छा मौका अलबर्ट को फिर नहीं मिलता, अतः उसने एक झटके से अपनी जैकेट की ‘जिप’ को खोल दिया और अपने हाथ ऊपर की ओर कर लिये।
एक क्षण में ही अलबर्ट की जैकेट उसके शरीर से अलग हो गई और वह तेजी से नीचे घने पेड़ों की ओर गिरने लगा।
किस्मत अच्छी थी कि अलबर्ट का शरीर एक घने पेड़ की शाखाओं में उलझकर रुक गया और वह जमीन पर गिरने से बच गया।
अलबर्ट ने अपने शरीर का बैलेंस बनाया और पेड़ की शाखाओं से छूटकर वहीं बैठ गया।
अलबर्ट की निगाह अब नीचे की ओर जा रही थी। अलबर्ट का अंदाजा सही निकला, कुछ ही देर में चीखते हुए छोटे टेरोसोर उधर से गुजरे।
अगर अलबर्ट पेड़ से नीचे उतर गया होता, तो पक्का उसे इन नन्हें टेरोसोर का शिकार बन जाना था।
कुछ देर तक अलबर्ट नीचे देखता रहा और फिर कोई खतरा ना देख धीरे से नीचे उतर गया।
अब वह सुयश और बाकी सभी लोगों के बारे में सोचने लगा।
उसे पता था कि सभी लोग अब पोसाईडन पर्वत की ओर चले गये होंगे। अगर उन लोगों से मिलना है तो उसे भी पोसाईडन पर्वत की ओर जाना ही होगा।
अलबर्ट जानता था कि वैसे भी, वह अकेले इस भयानक जंगल में ज्यादा दिन तक सुरक्षित नहीं रह सकता।
यह सोच अलबर्ट अंदाजे से ही, पोसाईडन पर्वत की ओर चल दिया।
नीचे काफी सूखी पत्तियां पड़ी थीं, इसलिये अलबर्ट के चलने से वातावरण में तेज आवाज गूंज रही थी।
कुछ आगे चलते ही अलबर्ट का पैर एक गहरे गड्ढे पर पड़ा और वह अपने शरीर का संतुलन खो, तेजी से गहरे गड्ढे में जा गिरा।
पेड़ों की टहनियां और सूखी पत्तियां, गड्ढे के ऊपर पड़े होने की वजह से अलबर्ट को वह गड्ढा दिखाई नहीं दिया था। भला यही था कि उस गड्ढे में कोई पत्थर नहीं था, नहीं तो अलबर्ट का सिर फट जाना था।
अलबर्ट ने अब उस गड्ढे को ध्यान से देखा, वह एक बड़ा सा सूखा कुंआ था।
अलबर्ट को उस कुंए से निकलने का कोई रास्ता दिखाई नहीं दे रहा था। अभी दिन होने की वजह से सूर्य की थोड़ी रोशनी कुएं में आ रही थी।
तभी अलबर्ट को कुएं में एक दिशा पर एक हल्की रोशनी दिखाई दी। इस रोशनी की किरण ने अलबर्ट के अंदर एक नया उत्साह भर दिया।
वह अब कुएं के उस ओर आ गया, जहां से रोशनी नजर आ रही थी। वहां पहुंचते ही अलबर्ट आश्चर्य से भर गया क्यों कि उस स्थान पर पेड़ों की बेल के पीछे, एक विशाल बिल्ली के मुंह वाली गुफा नजर आ रही थी।
देखने से साफ पता चल रहा था कि यह गुफा किसी इंसान के द्वारा बनायी गई है। अलबर्ट उस बिल्ली वाली गुफा में प्रवेश कर गया।
उस गुफा में चारो ओर पत्थरों से बने अर्द्धचंद्राकार 5 दरवाजे बने थे, जिनके बीच में बहुत से महीन सुराख थे। उन सुराखों से जल की पतली धारा किसी झरने के तरह से गिर रही थी।
पर इस धारा का पानी जमीन पर कहीं दिखाई नहीं दे रहा था। ऐसा लग रहा था कि जैसे वह पानी जमीन पर गिरने के पहले ही कहीं गायब हो जा रहा है।
उन अर्द्धचंद्राकार दरवाजों के बीच, एक बिल्ली जैसे मुंह वाली देवी की मूर्ति खड़ी थी। जिसके दोनों हाथ आगे की ओर थे और उन हाथों के बीच एक सुनहरी धातु का पात्र रखा था।
उस पात्र के ऊपर से हवा में, कुछ पानी की बूंदें स्वतः बन रहीं थीं और वह बूंद एक-एक कर उस पात्र में गिर रही थी। पात्र जल से पूरा भरा था, पर फिर भी उसकी बूंदे, पात्र से बाहर नहीं गिर रहीं थीं।
उस देवी ने अपने दाहिने हाथ में एक सुनहरे रंग का ब्रेसलेट पहन रखा था, जो कि दूर से ही चमक रहा था।
उन अर्द्धचंद्राकार दरवाजों के पीछे, पत्थर से बनी दीवारों पर कुछ चित्रकारी की गई थी।
उस प्रत्येक चित्रकारी में चित्र कोई भी हो, पर एक काली बिल्ली को उस पात्र से जल पीते हुए दिखाया गया था।
यह देख अलबर्ट का खुराफाती दिमाग जाग उठा- “अवश्य ही इस पात्र में कोई ना कोई दिव्य जल है, जिसकी महत्वता दीवारों पर चित्रों के माध्यम से दर्शाई गई है। मुझे अवश्य ही इस जल को पीकर देखना चाहिये, भले ही मैं इसे पीने के बाद मैं काली बिल्ली ही क्यों ना बन जाऊं? और वैसे भी अब मैं अपनी पूरी जिंदगी तो जी चुका, फिर इन छोटे-छोटे प्रयोगों से क्या डरना ?” यह सोच अलबर्ट ने देवी के हाथ से उस पात्र को उठाया और पूरा का पूरा जल पी गया।
अलबर्ट ने पूरा जल पीने के बाद देवी के हाथ में कटोरा पुनः वापस रख दिया और ध्यान से अपने शरीर में हो रहे बदलाव को देखने लगा।
पर जब 10 मिनट के अपार निरीक्षण के बाद भी अलबर्ट को अपने शरीर में कोई बदलाव दिखाई नहीं दिया, तो वह निराश हो गया।
“लगता है सबको बेवकूफ बनाने के लिये दीवारों पर चित्रकारी की गई थी।” अलबर्ट ने गुस्साते हुए कहा।
अब अलबर्ट ने देवी के हाथ से वह ब्रेसलेट भी निकाल कर अपने हाथों में पहन लिया।
पर इसके बाद भी जब कुछ ना हुआ तो खीझकर अलबर्ट उस कुएं से निकलने का रास्ता ढूंढने लगा।
प्रश्नावली:
दोस्तों जैसा कि आप देख रहे हैं कि यह कहानी बहुत तेजी से बढ़ता जा रही है और हर पेज पर आपके दिमाग एक नया प्रश्न खड़ा करता जा रहा है।
प्रश्नों की संख्या अब इतनी ज्यादा हो चुकी है कि अब वह मस्तिष्क में एकत्रित नहीं हो पा रहे हैं। तो क्यों न इन सारे प्रश्नों को एक जगह पर एकत्रित कर लें-
1) ‘अटलांटिस का इतिहास‘ नामक किताब ‘लाइब्रेरी ऑफ़ कांग्रेस में कैसे पहुची ? क्या इसके लेखक वेगा के बाबा कलाट ही थे? क्या इस किताब से और भी राज आगे खुले?
2) माया से विदा लेने के बाद मेरोन और सोफिया का क्या हुआ? क्या माया कैस्पर को उसकी असलियत बता पायी ?
3) क्या जेनिथ सुयश के सामने तौफीक का राज खोल पायी ?
4) क्रिस्टी को नदी की तली से मिली, वह काँच की पेंसिल कैसी थी ?
5) शैफाली को मैग्ना की ड्रेस तक पहुंचाने वाली पेंग्विन और डॉल्फिन क्या थीं ?
6) पंचशूल का निर्माण किसने और क्यों किया था ?
7) ऐमू के अमरत्व का क्या राज है?
8) जैगन का सेवक गोंजालो कौन था ? क्या उसकी मूर्ति में भी कोई राज छिपा था ?
9) क्या सनूरा की शक्तियों का राज एक रहस्यमय बिल्ली है?
10) मैग्ना का ड्रैगन, लैडन नदी की तली में क्यों सो रहा था ? मेलाइट उसे क्यों जगाना चाहती थी ?
11) उड़नतश्तरी के अंदर मौजूद 6 फुट का हरा कीड़ा बाकी कीड़ों से अलग क्यों था? वह इंसानों की तरह कैसे चल रहा था?
12) मकोटा के सर्पदंड का क्या रहस्य था?
13) सागरिका, वेगिका, अग्निका आदि चमत्कारी पुस्तकों का क्या रहस्य था?
14) माया सभ्यता का अंत किस प्रकार हुआ?
15) माया को इतनी सारी देवशक्तियां कहां से प्राप्त हुईं?
16) कौन था ‘ओरस’? जिसे फेरोना ग्रह का राजा एलान्का ढूंढ रहा था।
17) क्या था फेरोना ग्रह के जनक, पेन्टाक्स का रहस्य?
18) क्या थी एण्ड्रोवर्स पावर? जिसके हरे ग्रह पर भेजने से एलान्का गुस्सा रहा था।
19) कौन थी रेने? जिसे एलान्का ने एण्ड्रोनिका का प्रतिनिधित्व करने को कहा था ? उसके पास कैसी शक्तियां थीं?
20) क्या शलाका आर्यन के पुत्र को ढूंढने अवन्ती राज्य गई?
21) कहां था आर्यन का पुत्र? क्या वह अब भी अष्टकोण में बंद था? या किसी ने उसे निकाल लिया था?
22) अष्टकोण के साथ रखी उस अमृत की दूसरी बूंद का क्या हुआ?
23) एण्ड्रोनिका में एलनिको और एनम के सिवा कितनी शक्तियां और थीं?
24) एण्ड्रोनिका में जाने के बाद धरा और मयूर का क्या हुआ?
25) गोंजालो का ऊर्जा द्वार, तिलिस्मा के ऊर्जा द्वार से कैसे टकरा गया?
26) कैश्वर अंतरिक्ष से किसे बुलाना चाह रहा था?
27) माया ने कैस्पर से किस प्रकार से, महाविनाश की तैयारी करने की बात की थी?
28) महावृक्ष के स्वप्नतरु में कितने रहस्य छिपे थे?
29) सुनहरी ढाल और तलवार से ‘आकृति’ देवराज इंद्र से कैसे वरदान मांगना चाहती थी?
30) विक्रम बर्फ के गोले में कैसे पहुंच गया? उसकी स्मृति कैसे चली गई थी? जबकि वह एक अमर योद्धा था।
31) क्या विक्रम आकृति की दी हुई नीली अंगूठी उतारकर वारुणी से सम्पर्क कर सका?
32) क्या ओरैकल से मिलने के बाद आर्टेमिस ने आकृति का पीछा करना बंद कर दिया था?
33) क्या मुफासा और कागोशी को सच में कलाट ने मारा था?
34) कौन था जैगन का गुरु कुवान? क्या मकोटा को वुल्फा उसी से मिला था?
35) तीसरे पिरामिड में कुवान की मूर्ति के नीचे खड़े निष्क्रिय जीव योद्धा कौन थे?
36) क्या मकोटा सुरंग के रास्ते तिलिस्मा में प्रवेश कर सका?
37) क्या जैगन धरा के बेहोश होने की वजह से जाग गया था?
38) कौन था वह विचित्र जीव? जिसने आसमान से सभी पंक्षियों को मारकर वांशिगटन डी.सी. पर गिरा दिया था? क्या समुद्री जीवों को भड़काना भी उसी की हरकत थी?
39) क्या मेलाइट, रोजर को कस्तूरी मृग का रहस्य बता पाई?
40) वेदालय की देवशक्तियों का क्या रहस्य था?
41) सुर्वया के सिंहलोक में ‘चतुर्भुज सिंहराज’, शुभार्जना और दिव्यदृष्टि जैसी शक्तियां कहां से आयीं थीं? सुर्वया ने अपने परिवार के बारे में क्यों नहीं बताया?
42) क्या थी सीनोर द्वीप पर आयी वह अंजानी मुसीबत? जो कि एक विशाल आकृति में समुद्र की लहरों पर मौजूद थी।
43) क्या लुफासा और वीनस को मिलने वाला वह लाल रंग का पत्थर मैग्ना की जीवशक्ति ही थे?
44) क्या था उस रक्त भैरवी की डिबिया के अंदर, जिसे नीलाभ ने हनुका को दिया था?
45) कैश्वर के बनाए प्राणियों में भावनाओं का संचार कैसे शुरु हो गया था?
46) क्या विद्युम्ना की त्रिशक्ति, महावृक्ष के द्वारा बनाये गये भ्रमजाल से भी ज्यादा खतरनाक थीं?
47) बिल्ली वाली देवी के, पात्र के जल और ब्रेसलेट का क्या रहस्य था?
48) कैसा था तिलिस्मा का आगे का मायाजाल? क्या वह आगे और कठिन होता गया?
49) क्या त्रिकाली और व्योम, त्रिशाल और कलिका को विद्युम्ना के भ्रमन्तिका से छुड़ा पाये?
50) क्या तिलिस्मा में घुसे सभी लोग तिलिस्मा को पार कर काला मोती प्राप्त कर सके?
51) क्या था इन अद्भुत देवशक्तियों का रहस्य?
ऐसे ही ना जाने कितने सवाल होंगे जो आपके दिमाग में घूम रहे होंगें।
तो इंतजार कीजिए हमारे अगले भाग का जिसका नाम है-
“अद्भुत दिव्यास्त्र” जिसमें हम आपको ले चलेंगे, देवताओं के एक ऐसे अद्भुत संसार में, जहां पर दिव्यास्त्रों की उत्पत्ति के रहस्य छिपे हैं....................
“कृति का संकलन हूं, नये शब्दों का संचार हूं मैं, अनकही गाथा हूं, या मस्तिष्क का विचार हूं मैं, मेरे कथनों की कल्पना का सागर असीम है,
लफ्जों में बिखरी हुई, वीणा की झंकार हूं मैं, मत दीजिये मेरे अलफाजों को पंक्तियों की चुनौती,
जो रुह को महका दे, फजा में बिखरी वो बयार हूं मैं, मेरा वजूद छाया है अनंत ब्रह्मांड की गहराई में सिमटा संसार हूं मैं”
दोस्तों जिस प्रकार इन्द्रधनुष में सात रंग होते हैं, ठीक उसी प्रकार लेखक की रचनाओं में भी सात रंग पाये जाते हैं। हर रंग अपने आप में एक अलग पहचान रखता है।
दोस्तों आप सबके सपोर्ट और रिव्यू ही मुझे ओर भी अधिक लिखने को प्रेरित करते है। तो अपना कीमती समय निकालकर कुछ शब्द लिखते रहिए। (राज शर्मा)
यह अध्याय 'काली बिल्ली' अलबर्ट के साहसिक और रहस्यमयी सफर का एक रोमांचक मोड़ है।
आपने इस भाग में अलबर्ट के चरित्र को बहुत ही चतुराई से पेश किया है। शुरुआत में टेरोसोर (Pterosaur) के चंगुल से बचने वाला दृश्य रोंगटे खड़े कर देने वाला है।
अलबर्ट का अपनी जैकेट की ज़िप खोलकर गिरना उसकी सूझबूझ और "जोखिम उठाने वाली" प्रवृत्ति को बखूबी दर्शाता है।
The Mystery of the Cat Goddess
इस अपडेट का सबसे बड़ा आकर्षण वह सूखा कुआँ और उसके भीतर छिपी बिल्ली के मुख वाली गुफा है। यहाँ लेखक ने 'इण्डियाना जोन्स' या 'लारा क्रॉफ्ट' जैसी एडवेंचर फिल्मों वाला माहौल बनाया है।
अर्द्धचंद्राकार दरवाजे और जलधारा: बिना जमीन पर गिरे गायब होने वाला पानी गुफा की जादुई और उन्नत तकनीक की ओर इशारा करता है।
अलबर्ट का बिना डरे उस रहस्यमयी जल को पी लेना और ब्रेसलेट पहनना कहानी में एक बड़ा 'टर्निंग पॉइंट' हो सकता है। भले ही अभी उसे कोई बदलाव महसूस नहीं हुआ, पर यह तय है कि भविष्य में यह जल उसे काली बिल्ली की तरह शक्तियां या रूप प्रदान करेगा।
प्रश्नावली का प्रभाव
अपडेट के अंत में दी गई 50 प्रश्नों की सूची पाठकों के लिए एक "मेमोरी रिफ्रेशर" का काम करती है। यह दिखाता है कि इस कहानी का कैनवास कितना विशाल है। इतने सारे रहस्यों को एक साथ जोड़ना लेखक की कल्पनाशक्ति की गहराई को दर्शाता है। यह प्रश्नावली पाठकों की उत्सुकता को चरम पर ले जाती है कि क्या 'अद्भुत दिव्यास्त्र' में इन सवालों के जवाब मिलेंगे?
अंत में दी गई कविता—"कृति का संकलन हूं, नये शब्दों का संचार हूं मैं"—लेखक के आत्मविश्वास और उनकी कला के प्रति समर्पण को दर्शाती है। यह कहानी को एक दार्शनिक टच देती है।
यह अपडेट ऐक्शन, थ्रिलर और फैंटेसी का एक बेहतरीन मिश्रण है। अलबर्ट का 'काली बिल्ली' वाले मंदिर में जाना और वह दिव्य जल पीना आने वाले संकटों या शक्तियों की आहट है। 'अद्भुत दिव्यास्त्र' की घोषणा ने अगले भाग के लिए बेसब्री बढ़ा दी है।
एक बार फिर से शानदार अपडेट भाई


