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Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर

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#175.

“पर कैसे? समुद्री घोड़ा तो अपना काम करके वापस झील में चला गया है।” सुयश ने कहा- “अब इतने बर्फ जैसे पानी में जाकर कौन उसे ढूंढ पायेगा?”

“मैं स्वयं जाऊंगी।” शैफाली ने दृढ़ता से कहा- “मैं इसके पहले भी पेंग्विन के पीछे बर्फ में गई थी, उस समय मुझ पर बर्फ की ठंडक का कोई प्रभाव नहीं पड़ा था।”

यह सुनकर सुयश ने अपना सिर हिलाकर शैफाली को झील के अंदर जाने की इजाजत दे दी।

सुयश की इजाजत मिलते ही शैफाली ने अपने जूते बाहर उतारे और उसी रास्ते से झील के अंदर दाखिल हो गई, जिस रास्ते से वह समुद्री घोड़ा बाहर आया था।

सच में शैफाली को बर्फ से कोई फर्क नहीं पड़ रहा था, वह आसानी से इतने ठंडे पानी में तैर रही थी।

झील में प्रवेश करते ही शैफाली ने एक डुबकी मारी और पानी के अंदर अपनी नजरें घुमाना शुरु कर दिया। शैफाली को अब कुछ दूरी पर एक खूबसूरत परी की एक मूर्ति दिखाई दी।

यह मूर्ति पानी में एक स्थान पर खड़ी थी। यह मूर्ति देखने में बिल्कुल सजीव प्रतीत हो रही थी।

परी के शरीर पर बैंगनी रंग की एक बहुत ही खूबसूरत ड्रेस थी। उसने अपने हाथ में एक लंबा सा राजदंड भी पकड़ रखा था।

उस परी के चारो ओर कुछ जलपरियां, अपने हाथ में त्रिशूल लेकर घूम रहीं थीं।

ऐसा लग रहा था कि जैसे वह उस जलपरी की रक्षा कर रहीं हों या फिर उसकी परिक्रमा लगा रहीं हों। पर उन्होंने शैफाली से कुछ नहीं कहा।

“यह तो पानी के नीचे भी कोई तिलिस्म बना है?” शैफाली ने अपने मन में सोचा- “लगता है उस परी के हाथ में जो राजदण्ड है, उसमें अवश्य ही इस द्वार का कोई राज है, पर पहले मुझे वह कार्य कर लेना चाहिये, जिसके लिये मैं इस स्थान पर आयी हूं।”

अब शैफाली परी को छोड़कर उस समुद्री घोड़े को ढूंढने लगी। कुछ ही देर में शैफाली की निगाह में वह समुद्री घोड़ा आ गया, जो कि मिसगर्न मछली के बीच छिपकर पानी में तैर रहा था।

शैफाली उस समुद्री घोड़े की ओर बढ़ गयी। समुद्री घोड़े के पास पहुंचकर शैफाली ने उसे पकड़ने की कोशिश की, पर शैफाली के आगे बढ़ते ही वह समुद्री घोड़ा 1 फुट पीछे हो गया।

पहले प्रयास में शैफाली नाकाम रही। शैफाली ने फिर से पानी में आगे बढ़कर उस समुद्री घोड़े को पकड़ने की कोशिश की, पर इस बार भी वह समुद्री घोड़ा 1 फुट पीछे हो गया।

अब यह सिलसिला शुरु हो गया था, जब भी शैफाली आगे बढ़ती, वह समुद्री घोड़ा 1 फुट पीछे हो जाता।
यह देख शैफाली ने तेजी से अपना दिमाग लगाना शुरु कर दिया।

तभी शैफाली की नजर उस समुद्री घोड़े के आगे-पीछे घूम रही मिस गर्न मछली की ओर गई।

अब शैफाली के दिमाग में एक आइडिया आ गया था। शैफाली इस बार ध्यान से समुद्री घोड़े को देखती रही, जैसे ही एक मिसगर्न मछली, उस समुद्री घोड़े के ठीक पीछे पहुंची, शैफाली ने ठीक उसी समय पर, समुद्री घोड़े की ओर छलांग लगा दी।

हर बार की तरह इस बार भी समुद्री घोड़ा 1 फुट पीछे जाने के लिये बढ़ा, पर वह पीछे जा नहीं पाया और मिसगर्न मछली से टकराकर वहीं रह गया।

तभी शैफाली ने झपटते हुए उस समुद्री घोड़े को पकड़ लिया। अब शैफाली ने उसकी आँखों को देखा।

समुद्री घोड़े की दोनों आँखें 2 दिशा में थीं, जिसे शैफाली ने अपने हाथों से सही कर दिया और इसके बाद उस समुद्री घोड़े को वहीं झील के पानी में छोड़, वह झील की सतह की ओर चल दी।

झील की सतह पर सभी बेसब्री से शैफाली के आने का इंतजार कर रहे थे। पानी से शैफाली का चेहरा निकलते देख सभी खुश हो गये।

शैफाली ने अपना सिर हिलाकर सभी को काम पूरा होने की खबर दे दी।

शैफाली की बात सुन क्रिस्टी ने एक नजर ऐलेक्स की ओर डाली, ऐलेक्स अब अपने रुप में तो वापस आ गया था, पर वह अब भी बर्फ की
मूर्ति बना दिखाई दे रहा था।

“ये ऐलेक्स तो अब बर्फ का बन गया, अब इसे बर्फ से कैसे सही करें?” क्रिस्टी ने दुखी होते हुए कहा- “हो ना हो इस सेन्टौर में ही कोई चक्कर है, इसी की वजह से ऐलेक्स अभी तक सही नहीं हुआ है।” यह कहकर क्रिस्टी उस सेन्टौर के पास जाकर उसकी मूर्ति को जगह-जगह से हिलाकर देखने लगी।

क्रिस्टी से किसी को ऐसी आशा नहीं थी, इसलिये सभी उसे ऐसा करने से रोकने के लिये भागे।

सभी जानते थे कि क्रिस्टी की एक गलत हरकत उन्हें हमेशा के लिये इस तिलिस्म में कैद कर सकती है।

तभी क्रिस्टी के मूर्ति के हिलाने की वजह से सेन्टौर के हाथ में पकड़ा कंटक जमीन पर गिर गया और इसी के साथ सबके सामने एक मुसीबत और खड़ी हो गई।

सेन्टौर जीवित हो गया था और सबको खूनी नजरों से देख रहा था।

“हो गया काम तमाम, बड़ी मुश्किल से अभी उस समुद्री घोड़े से बचे थे, अब यह सेन्टौर जाग गया।” तौफीक ने क्रिस्टी पर नाराज होते हुए कहा।

क्रिस्टी एक पल में ही अपनी गलती को समझ गयी, पर अब क्या हो सकता था? तभी उस सेन्टौर ने अपने पैर को बर्फ की जमीन पर जोर से पटका, उसके ऐसा करने से एक जोर की आवाज हुई और इसी के साथ झील में मौजूद मिसगर्न मछलियां तेजी से गति करने लगीं।

यह देख शैफाली ने चीखकर सबको आगाह करते हुए कहा- “सब लोग सावधान हो जाओ, भूकंप आने वाला है।” तभी पूरी बर्फ की धरती हिलने लगी और बर्फ के उस हिस्से में मौजूद ऊंची चट्टानें गिरना शुरु हो गईं।

सभी किसी प्रकार उन चट्टानों से बचने की कोशिश कर रहे थे, तभी एक बड़ी चट्टान ऐलेक्स की ओर गिरने लगी, यह देख सभी के मुंह से चीख निकल गई।

इतने कम समय में कोई भी ऐलेक्स को बचा नहीं सकता था। जोर से गड़गड़ाती वह चट्टान ऐलेक्स के ऊपर आकर गिरी, पर तभी एक चमत्कार हुआ, वह भारी चट्टान ऐलेक्स के शरीर से टकराकर उसमें
समा गई।

“यह बर्फ की चट्टान ऐलेक्स के शरीर के अंदर कैसे चली गई।” जेनिथ ने आश्चर्य से ऐलेक्स की ओर देखते हुए कहा।

तभी एक और चट्टान ऐलेक्स के शरीर से टकराई, इसका हस्र भी पहले वाली चट्टान के जैसा हुआ, वह चट्टान भी ऐलेक्स के शरीर में समा गई।

यह देख सुयश ने सबसे चिल्लाकर कहा- “सभी लोग ऐलेक्स के शरीर की ओट में छिप जाओ, नहीं तो यह गिरती हुई चट्टानें हमें पीस देंगी।”

सुयश की बात सुन सभी ऐलेक्स की ओर भागे और उसके पीछे जाकर छिप गये।

ऐलेक्स के आसपास बहुत सी चट्टानें गिर रहीं थीं, परंतु समय पर सुयश का दिमाग काम करने की वजह से सभी सुरक्षित थे।

उधर जोर-जोर से सेन्टौर के पैर पटकने की वजह से झील की बहुत सी मछलियां उछलकर झील के बाहर आ गईं थीं।

“कैप्टेन, हमें जल्द से जल्द इस सेन्टौर का इलाज करना होगा, नहीं तो यह हमें चुटकियों में मसल देगा।” क्रिस्टी ने गुस्साये हुए सेन्टौर की ओर देखते हुए कहा।

तभी तौफीक की निगाह सेन्टौर के गिरे अस्त्र कंटक पर गई। उसे देखकर तौफीक बोला- “अगर सेन्टौर का यह अस्त्र भी हमारे हाथ लग जाये तो कुछ देर तक तो इससे बचा ही जा सकता है? पर वह भी कमबख्त बिल्कुल उसके बगल में ही गिरा पड़ा है।”

तौफीक की बात सुन शैफाली की आँखें सिकुड़ गईं- “कैप्टेन अंकल, कंटक तो सेन्टौर के बगल में ही गिरा पड़ा है, तो फिर यह सेन्टौर उसे उठा क्यों नहीं रहा? उसे उठाने के बाद तो यह और विनाश कर सकता है।”

“इसी कंटक के इसके हाथ से निकलने के बाद ही तो यह जिंदा हुआ था।” क्रिस्टी ने कहा।

“इसका मतलब यदि हम इस कंटक को दोबारा से इसके हाथ में पकड़ा दें, तो यह सेन्टौर फिर से बर्फ का बन सकता है।” शैफाली ने कहा।

शैफाली की बात सुन सुयश ने तौफीक की ओर देखते हुए कहा- “तौफीक, तुम इस सेन्टौर का ध्यान भटकाकर उसे दूसरी दिशा में ले जाओ, तब तक मैं इस कंटक को उठा लूंगा।”

सुयश की बात सुनकर तौफीक ने अपना सिर हिलाया और ऐलेक्स की ओ से बाहर निकल, सेन्टौर से कुछ दूरी पर जाकर दौड़ने लगा।

सामने तौफीक को दौड़ते देख सेन्टौर तौफीक की ओर चल दिया। जैसे ही सेन्टौर का चेहरा दूसरी ओर हुआ, सुयश तेजी से कंटक की ओर भागा।

एक पल में ही सुयश कंटक के पास पहुंच गया, मगर जैसे ही सुयश ने कंटक को उठाया, वह भी बर्फ की मूर्ति में परिवर्तित हो गया।

यह देख शैफाली और तौफीक दोनों ही आश्चर्य से भर उठे। अब दोनों के पास कोई और तरीका नहीं बचा था।


सूर्यपुत्र:
(30 वर्ष पहले.....जनवरी,1972, प्रातः काल, अयोध्या, भारत)

“दादा जी, आप हमेशा बंदूक लेकर क्यों चलते हो?” नन्हें सुयश ने अपने दादा सूर्य नारायण सिंह को सम्बोधित करते हुए पूछा- “क्या आपको बहुत डर लगता है?”

सुयश की बात सुन सूर्य नारायण सिंह के चेहरे पर मुस्कान बिखर गई।

“नहीं हमें डर नहीं लगता, यह हम अपने वंश की शान के लिये, अपने साथ लेकर चलते हैं। हम सूर्यवंशी राजपूत हैं, मेरे दादा जी तो हाथ में तलवार लेकर चलते थे। अंग्रेज भी उन्हें देख थर-थर कांपते थे, पर अब
समय बदलने के साथ तलवारों का चलन खत्म हो गया और तलवारों का स्थान इस अग्नि मारक बंदूक ने ले लिया।”

सुयश से बात करते-करते सूर्य नारायण सिंह, घर के आंगन में खड़ी एक खुली जीप में बैठ गये और सुयश को उन्होंने अपने बगल में बैठा लिया।

“मैं जब बड़ा होऊंगा, तो अपने हाथ में तलवार ही लेकर चलूंगा, बंदूक तो डाकू लोग चलाते हैं।” नन्हें सुयश ने अपने दिल के उद्गार प्रकट किये।

“अच्छा-अच्छा छोटे युवराज, आप तलवार लेकर ही चलना, पर वादा करो कि कुलदेवता के मंदिर में पूजा के समय, आज आप मुझे तंग नहीं करोगे।” सूर्य नारायण सिंह ने सुयश के बालों में हाथ फेरते हुए कहा।

“ठीक है, मैं आपको नहीं परेशान करुंगा, पर आप भी वादा करो कि वापस आने के बाद आप मुझे कैम्पा कोला पिलाओगे।” सुयश ने अपनी जुबान से चटकारा लगाते हुए कहा।

“ठीक है, मैं वादा करता हूं।” सूर्य नारायण सिंह ने अपनी हथेली को सुयश की नन्हीं हथेली से टकराते हुए कहा।

तभी दूसरी जीप में कुछ महिलाएं पूजा की थाली और कुछ पूजा की सामग्री लेकर बैठने लगीं।

“अरे अभय, तुम अपनी जीप चलाओ, बाकी लोग पीछे से आते रहेंगे। अगर हम थोड़ा जल्दी भी मंदिर पहुंच गये, तो कोई परेशानी की बात नहीं।” सूर्य नारायण सिंह ने जीप के ड्राइवर से कहा।

“जी मालिक।” सूर्य नारायण सिंह की बात सुन ड्राइवर ने जीप स्टार्ट करके आगे बढ़ा दी।

“अच्छा दादा जी, आप ये बताओ कि आज आप रात को मुझे कौन सी कहानी सुनाओगे?” सुयश ने अपने दादा जी से पूछा।

“मैं....मैं आज तुम्हारी सबसे प्रिय यति और उड़ने वाले घोड़े की कहानी सुनाऊंगा।” सूर्य नारायण सिंह ने सुयश के गाल खींचते हुए कहा।

“नहीं दादा जी आज मुझे भगवान सूर्य की कहानी सुननी है।....वह कहानी सुने बहुत दिन बीत गये।” सुयश ने अपने दिमाग के कोनों को खंगालते हुए कहा।

“ठीक है, मैं आज तुम्हें अपने कुल -देवता भग…न सूर्य की ही कहानी सुनाऊंगा।” सूर्य नारायण सिंह ने सुयश के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा।

रास्ते भर सुयश ऐसे ही अपने दादा जी से कुछ ना कुछ पूछता रहा। आधा घंटे के ड्राइव के बाद आखिर कुलदेवता का मंदिर आ ही गया।

अभय ने जीप को मंदिर के प्रांगण के बाहर ही रोक दिया। सूर्य मंदिर एक पर्वत की चोटी पर बना था। सुयश अपने दादा जी के साथ मंदिर के प्रांगण में आ गया।

मंदिर के मुख्य द्वार पर 7 घोड़ों के रथ पर बैठे सूर्यदेव की मूर्ति लगी थी। शिखर पर सूर्य के मुख की ज्वाला उगलती आकृति बनी थी।

“अरे दादा जी यह आकृति तो बिल्कुल वैसी ही है, जैसी आपके दाहिने हाथ की कलाई पर बनी है।” सुयश ने आश्चर्य से दादा जी की कलाई देखते हुए कहा।

“हां बेटा, यह हमारे कुलदेवता का चिन्ह है, जिसे मैंने अपनी कलाई पर बनवा लिया था। क्या यह चिन्ह आपको पसंद है?” सूर्य नारायण सिंह ने सुयश से पूछा।

“हां दादा जी मुझे यह चिन्ह बहुत पसंद है, मैं एक दिन यही चिन्ह अपनी पूरी पीठ पर बनवाऊंगा।” सुयश ने दादा जी के हाथ पर बने सूर्य चिन्ह को अपनी नन्हीं हथेली से सहलाते हुए कहा।

“ठीक है, जब तुम बड़े होकर कलेक्टर बन जाओगे, तो मैं यह सूर्य चिन्ह तुम्हारे पीठ पर बनवा दूंगा।” सूर्य नारायण सिंह ने चारो ओर फैले पर्वतों को देखते हुए कहा।

“कलेक्टर? ये कलेक्टर क्या होता है दादा जी?” सुयश ने पूछा।

“कलेक्टर पूरे जिले का सबसे बड़ा ऑफिसर होता है।” सूर्य नारायण सिंह ने सुयश की ओर देखते हुए जवाब दिया।

“नहीं-नहीं दादा जी, मैं कलेक्टर नहीं बनूंगा, मैं तो एक बहुत बड़े से पानी के जहाज का कप्तान बनूंगा और समुद्र की विशाल लहरों में अपना जहाज लेकर घूमूंगा।” सुयश ने अपनी कल्पना को उड़ान देते हुए कहा।

“अरे वाह, छोटे युवराज, आपकी सोच तो कमाल की है।” यह कहकर सूर्य नारायण सिंह ने सुयश को अपनी गोद में उठा लिया और चलते हुए मंदिर के प्रांगण के किनारे आ गये।

उस स्थान से उगते हुए सूर्यदेव बिल्कुल साफ नजर आ रहे थे। सूर्य की लालिमा प्रकाश का रुप ले, संपूर्ण आभा मंडल को दैदीप्यमान कर रही थी।

तभी मंदिर का एक पंडित अपने हाथ में 2 तांबे के लोटे में, जल लेकर आ गया। एक तांबे का लोटा थोड़ा छोटा था, जो कि निश्चित ही सुयश के लिये था।

“चलो बेटा, अब सूर्य को अर्घ्य दो, पर ध्यान रहे, यह पात्र तुम्हारे दोनों हाथों में सिर से ऊपर की ऊंचाई पर होना चाहिये और जल की धार टूटनी नहीं चाहिये। इस प्रकार करने से सूर्य की पहली जीवन दायिनी किरण स्वच्छ जल को पारकर हमारे शरीर से टकराती है और हमें सभी प्रकार के रोग से मुक्त करती है।” यह कहकर सूर्य नारायण सिंह ने छोटा लोटा सुयश की ओर पकड़ा दिया और बड़े लोटे से स्वयं सूर्य को अर्घ्य देने लगे।

सुयश ने भी अपने दादा जी को देखते हुए ठीक उसी प्रकार से किया, जैसा कि दादा जी ने कहा था।

तभी दूसरी जीप भी आ गई। यह देखकर सूर्य नारायण सिंह ने सूर्य को हाथ जोड़कर प्रणाम किया और उन लोगों की ओर बढ़ गये।

सूर्य नारायण सिंह ने अभय को सुयश का ध्यान रखने के कार्य पर लगा दिया।

दादा जी के जाने के बाद नन्हें सुयश ने भगवान सूर्य को देखा, सूर्य की लालिमा सुयश को बहुत भली लग रही थी।

धीरे-धीरे सूर्य का प्रकाश बढ़ता जा रहा था, पर सुयश अभी भी अपनी नजरें सूर्य से नहीं हटा रहा था, ऐसा लग रहा था कि जैसे सूर्य से सुयश का कोई बहुत गहरा रिश्ता हो।

तभी अचानक सुयश को सूर्य, बैंगनी रंग का होता दिखाई दिया। यह देख सुयश अचकचा गया, पर तभी सुयश को अपनी नाक पर बैठी एक नीले रंग की खूबसूरत सी तितली दिखाई दी।

उसी तितली के पंखों की वजह से सुयश को सूर्य का रंग बदलता हुआ दिखा था।

सुयश ने अपने हाथों से उस तितली को पकड़ने की कोशिश की, पर वह तितली सुयश की नाक से उड़कर दूर चली गई।

उस तितली का रंग इतना प्यारा था, कि सुयश का ध्यान अब तितली की ओर आकृष्ट हो गया था।

सुयश अब मंदिर के प्रांगण में तितली के पीछे-पीछे भागकर उसे पकड़ने की कोशिश करने लगा।

उधर अभय को जीप में रखा एक पूजा का सामान याद आ गया, उसने एक बार सुयश को खेलते हुए देखा और फिर बाहर जीप में रखें सामान को लाने के लिये चला गया।

सुयश अभी भी तितली के पीछे-पीछे भाग रहा था। तितली कभी एक स्थान पर बैठती, तो कभी दूसरे स्थान पर।

इस बार तितली मंदिर के प्रांगण के किनारे लगे एक छोटे से पेड़ की शाख पर जा बैठी।

सुयश अपना हाथ बढ़कार तितली को पकड़ने की कोशिश करने लगा, पर वह पेड़ की डाल सुयश के नन्हें हाथों से थोड़ा दूर थी, इसलिये सुयश ने अपना एक पैर मंदिर के प्रांगण की रेलिंग से बाहर निकाल लिया।

पर इससे पहले कि सुयश उस नीले रंग की तितली को पकड़ पाता, उसका पैर फिसला और वह पहाड़ से नीचे की ओर गिरने लगा।

सुयश के मुंह से चीख निकल गई। तभी सूर्य की किरणों की चमक बढ़ गई और सुयश, बिना किसी सहारे के हवा में झूलने लगा।

उसे देखकर ऐसा लग रहा था कि जैसे वह सूर्य की किरणों से बने झूले पर बैठा हो।

नन्हें सुयश को कुछ समझ में नहीं आ रहा था। तभी सुयश को अपने सामने एक दिव्य प्रकाशपुंज स्वरुप एक पुरुष दिखाई दिया।

उसे देख सुयश ने पूछ ही लिया- “आप कौन हो?”

“मैं सूर्यदेव हूं।” सूर्यदेव ने कहा- “मैंने ही तुम्हें इस ऊंचे पर्वत से गिरने से बचाया है।”

“आपने मुझे क्यों बचाया?” सुयश के शब्दों में एक बालरस झलक रहा था।

“क्यों कि मैंने तुम्हें अपने पुत्र रुप में स्वीकार किया है, फिर भला मैं तुम्हें मरने कैसे देता?” सूर्यदेव ने कहा।

“आप इतनी जल्दी उतनी ऊंचाई से मेरे पास कैसे आ गये?” सुयश ने सूर्यदेव की ओर देखते हुए पूछा।

“क्यों कि मेरी किरणों से तेज चलने वाली चीज अभी इस ब्रह्मांड में नहीं है।....अपना ध्यान रखना सुयश।” सूर्यदेव ने कहा और सुयश को उठाकर, मंदिर के प्रांगण के बाहर लगी घनी झाड़ियों पर बैठा दिया। इसी के साथ सूर्यदेव हवा में कहीं गायब हो गये।

उधर अभय जैसे ही मंदिर के प्रांगण में पहुंचा, उसे सुयश कहीं दिखाई नहीं दिया। घबराकर अभय ने मंदिर के प्रांगण के किनारे जाकर नीचे की ओर देखा।

नीचे की ओर देखते ही अभय की जान सूख गई क्यों कि सुयश इस समय नीचे एक झाड़ी में फंसा दिखाई दे रहा था।

अभय ने घबरा कर अपने चारो ओर देखा, पर उसे आसपास कोई नजर नहीं आया, यह देख अभय ने जल्दी से नीचे लटककर, सुयश का एक हाथ पकड़ा और उसे ऊपर खींच लिया।

सुयश को सही सलामत देख अभय की जान में जान आयी, पर उसे यही डर था कि कहीं सुयश, सूर्य नारायण सिंह को यह सारी बात बता ना दे।

“देखो बेटा, तुम यह बात किसी को बताना नहीं, मैं तुम्हें ढेर सारी टॉफियां दूंगा।” अभय ने सुयश को फुसलाते हुए कहा।

टॉफियों की बात सुन सुयश तुरंत मान गया। 2 घंटे के बाद सभी पूजा करके वापस घर की ओर चल दिये।

“तुम्हें भगवान सूर्यदेव कैसे लगे सुयश?” सूर्य नारायण सिंह ने सुयश को अपने से चिपटाते हुए पूछा।

“अच्छे लगे, पर जब उन्होंने मुझे गोद में उठाया, तो मुझे बहुत अच्छा लगा।” सुयश ने भोलेपन से कहा।

“अच्छा, तो भगवान सूर्य ने तुम्हें गोद में उठाकर क्या कहा?” सूर्य नारायण सिंह ने हंसते हुए पूछा।

“उन्होंने कहा कि वो मुझे ढेर सारी टॉफियां देंगे।.....नहीं-नहीं....ये तो अभय अंकल ने कहा था.....उन्होने कहा था.... उन्होने कहा था...... क्या दादा जी आपने तो सब भुलवा दिया?” सुयश ने कहा और दादा जी के सीने से चिपक गया।

“शैतान बच्चा, 2 मिनट में कहानियां बनाकर सुनाने लगता है।” सुयश की बात सुन सूर्य नारायण सिंह मुस्कुराए और फिर से सुयश के सिर पर हाथ फेरने लगे।

सुयश अब दादा जी से ऐसे चिपका था, जैसे कि वह सूर्य नारायण सिंह ना होकर साक्षात सूर्यदेव हों।


जारी रहेगा_____✍️
फिर से एक अप्रतिम अद्भुत और रोमांचक विस्मयकारी अपडेट हैं भाई मजा आ गया
 

Meesa

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# 14.
“कातिल के बारे में तो नहीं बता सकती। पर हां उसकी एक आदत के बारे में जरूर बता सकती हूं।“ शैफाली की बात सुनकर, एक बार फिर सभी का ध्यान शैफाली की तरफ गया। “अंकल, जो पहली गोली चली थी। वह चलाने वाला मेरे 6 मीटर पीछे था। उस हिसाब से गोली चलने के 5 सेकेण्ड के बाद, बारूद की खुशबू, मुझ तक पहुंचनी चाहिए थी। पर बारुद की खुशबू मात्र 3 सेकेण्ड में मुझ तक पहुंच गई थी।“

“क्या मतलब हुआ इसका ?“ सुयश ने व्यग्र स्वर में पूछा।

“इसका साफ मतलब निकलता है, कि गोली चलाने वाली की आदत, गोली चलाने के बाद, रिवाल्वर की नाल से निकलते हुए धुंए को फूंक मारने की है। और ऐसा वही आदमी करता है, जो बहुत अच्छा निशानेबाज होता है और रिवाल्वर हमेशा अपने साथ रखता है।“ शैफाली एक के बाद एक धमाका कर रही थी।

“वेरी गुड!“ सुयश ने शैफाली के तर्कों की तारीफ करते हुए कहा- “क्या दिमाग पाया है!“ सुयश कुछ रुक कर फिर बोला –

“बेटे आप कुछ ऐसा, मर्डर के बारे में बता सकती हो। जिससे हमें कातिल को पकड़ने में कुछ हेल्प मिल सके।“

“यस अंकल! मैं एक बात मर्डर के बारे में और बताना चाहती हूं।“ शैफाली ने धीरे से सांस लेते हुए कहा।

अब सभी का ध्यान सिर्फ और सिर्फ शैफाली की बातों को सुनने में लगा था। पर उन्हें यह एहसास नहीं था, कि कोई दरवाजे के बाहर खड़ा, इन सारी बातों को सुन रहा था।

“अंकल, मेरे पास गोली चलने के बाद, एक अजीब सी खुशबू और आई। जैसे कपड़े पर जब बहुत गर्म प्रेस कर दिया जाता है तो कपड़े से एक अजीब सी, सोंधी सी खुशबू आती है। वह खुशबू ठीक वैसी ही थी। कहने का मतलब यह है कि जिसने भी मेरे पीछे से पहले गोली चलाई थी, उसने रिवाल्वर की नाल पर जरूर कोई कपड़ा रखा था, जो कि निश्चित रूप से को ई रुमाल रहा होगा। जब गोली चली, तो रिवाल्वर की नाल गर्म हो गई होगी, जिससे रुमाल भी हल्का सा जल गया होगा। वह खुशबू जरुर उसी की रही होगी। और उसके साथ में रुमाल से किसी संदल की स्मेल वाले सेंट की, बहुत ही खूबसूरत खुशबू आई।“ यह कहकर शैफाली 1 मिनट के लिए रुकी और फिर बोलना शुरु किया-

“आपने हॉल में खड़े सभी लोगों के रुमाल जमा करवा लिए थे। आप उन सभी रुमालों को ध्यान से देखिए। क्या किसी पर जले का निशान है? और उन सभी रूमालों में से किसमें से संदल स्मेल वाले सेंट की खुशबू आ रही है? इससे आपको कातिल को ढूंढने में आसानी होगी।“

“एक्सीलेंट!“ सुयश ने माइकल की ओर देखते हुए कहा- “आपकी बच्ची बहुत समझदार है। मैंने अपनी पूरी जिंदगी में इतना तेज दिमाग वाला इंसान आज तक नहीं देखा।“

“और हाँ अंकल।“ शैफाली ने पुनः बोलना शुरु किया- “जो व्यक्ति, मेरे 8.5 मीटर बांए था, उसी ने गोली चलाने के बाद, अपनी रिवाल्वर जमीन पर फेंकी थी।“

“यानि की लॉरेन का मर्डर तुम्हारे 6 मीटर पीछे वाले व्यक्ति ने किया है।“ सुयश ने शैफाली की नीली-नीली आँखों में झांकते हुए कहा।

“जी हाँ अंकल! मैं भी यही कहना चाह रही हूं।“ शैफाली ने अपनी बात को समाप्त करते हुए कहा- “और मैं बस इतना ही जानती हूं।“

“थैंक्स बेटा !“ सुयश ने शैफाली को आभार प्रकट करते हुए कहा-

“मैं तुम्हारा ये हेल्प हमेशा याद रखूंगा।“ यह कहकर सुयश ने माइकल और मारथा को भी थैंक्स बोला और फिर वहां से जाने के लिए मुड़ा। तभी शैफाली ने उसे फिर से टोक दिया।

“कैप्टेन अंकल! वैसे आपको अगर ब्रूनो की जरूरत पड़े तो आप जरूर बताइएगा। क्यों कि यह भी आपकी काफी मदद कर सकता है।“

“ठीक है बेटे! अगर हमें ब्रूनो की जरूरत पड़ी, तो हम अवश्य बताएंगे।“ यह कहकर सुयश सभी के साथ दरवाजे की ओर बढ़ा। उधर दरवाजे के बाहर खड़ी आकृति, सभी को बाहर आता देख, धीरे से सरक कर गैलरी में गायब हो गई। सुयश के दरवाजे के बाहर निकलते ही, एक सिक्योरिटी का आदमी भागा भागा वहां पहुंचा और बोला-

“माफी चाहता हूं कैप्टन, पर आपको इसी समय तुरंत कंट्रोल रूम में चलना होगा। वहां शायद कुछ गड़बड़ है?“

सुयश यह सुनते ही, सभी के साथ तेज कदमों से कंट्रोल रूम की ओर चल दिया। लेकिन उसका दिल पुनः किसी अंजानी आशंका से तेजी से धड़क रहा था।

चैपटर-5
1 जनवरी 2002, मंगलवार, 03:00; कंट्रोल रूम के बाहर, सिक्योरिटी के आदमियों और शिफ्ट में काम करने वाले लोगों की भीड़ लगी थी। कुछ लोग कंट्रोल रुम का दरवाजा खुलवाने की कोशिश कर रहे थे।

“क्या हुआ?“ सुयश ने वहां पहुंचकर तेज आवाज में, वहां खड़े लोगों से पूछा।

“पता नहीं कैप्टेन!“ उस भीड़ में से एक व्यक्ति ने आगे निकलकर, सुयश को जवाब दिया - “जब हम लोग शिफ्ट चेंज करने के लिए यहां पहुंचे, तो दरवाजा अंदर से बंद था। ऐसा इसके पहले कभी नहीं हुआ था। हम लोग लगभग 20 मिनट से दरवाजे पर नॉक कर रहे हैं, पर ना तो कोई अंदर से जवाब दे रहा है और ना ही दरवाजा खोल रहा है।“

“तुरंत कंट्रोल रूम का इमरजेंसी डोर खोलो।“ सुयश ने लारा की तरफ मुड़ते हुए, उसे आर्डर दिया।

“यस कैप्टेन!“ लारा तुरंत साइड में लगे इमरजेंसी डोर के कंप्यूटर पर पासवर्ड लगाने लगा।

कुछ ही देर में कंट्रोल रूम का इमरजेंसी डोर खुल चुका था। डोर खुलते ही सुयश ने तेजी से कंट्रोल रूम में प्रवेश किया। उसके साथ लारा भी था। अंदर का नजारा ही कुछ और था।

रोजर व असलम सहित चालक दल के सभी सदस्य, नशे की हालत में धुत इधर-उधर पड़े थे। शराब की कई बोतलें भी फर्श पर बिखरी हुई थीं। लारा ने अंदर आते ही, तुरंत आगे बढ़कर कंट्रोल रूम का मेन दरवाजा खोल दिया

सुयश ने एक नजर पूरे कंट्रोल रुम पर मारी और फिर आगे बढ़ कर रोजर का कॉलर पकड़कर उसे उठाने की कोशिश करने लगा-

“रोजर-रोजर!......उठो। मैंने तुम लोगों को ड्यूटी टाइम में ड्रिंक करने से मना किया था। फिर भी तुम लोगों ने ड्रिंक किया।“

अभी सुयश रोजर को झकझोर ही रहा था, कि तभी कंट्रोल बोर्ड पर लगी, एक लाल बत्ती तेजी सेणस्पार्क करने लगी। जो इस बात का संकेत थी कि ट्रांसमीटर पर कोई मैसेज है। सुयश तुरंत रोजर को छोड़, उस ट्रांसमीटर सेट की ओर भागा और तुरंत वहां रखे हेडफोन को अपने कानों पर चढ़ा कर एक बटन ऑन कर दिया।

“हैलो ! ब्लू क्रॉस कालिंग ‘सुप्रीम’।“ उधर से महीन आवाज सुनाई दी- “कोई हमारी बात सुन रहा है।“

“हैलो ! सुप्रीम कॉलिंग ब्लू क्रॉस।“ मैं सुप्रीम से कैप्टन सुयश बोलरहा हूं।“ सुयश ने कहा।

“कैप्टन! मैं फ्लोरिडा आईलैंड से ‘स्टीफेन‘ बोल रहा हूं।“ दूसरी तरफ से फिर से आवाज आयी-

“थैंक गॉड कि आपने मेरा कॉल रिसीव किया। इससे पहले भी मैंने 4 बार आप लोगों से सम्पर्क स्थापित करने की कोशिश की। पर किसी ने भी हमारा कॉल रिसीव नहीं किया । वहां सब कुछ ठीक तो है ना ? ओवर।“

सुयश ने यह सुनकर एक नजर वहां बेहोश पड़े लोगों पर मारी फिर बोला –


“यस स्टीफेन! एक छोटी सी प्राब्लम थी, पर अब सब ठीक है। आप बताइये आप ने क्यों कॉल किया ? ओवर“

“कैप्टेन! आपका शिप बारामूडा त्रिकोण के डेंजर जोन की ओर, गलत रास्ते पर जा रहा है।“ आवाज पुनः आयी।

“बारामूडा त्रिकोण!“ सुयश के शरीर में बारामूडा त्रिकोण का नाम सुन कर एक झुरझुरी सी हुई। उधर लारा, अब रोजर व असलम सहित बाकी सभी लोगों को होश में ला चुका था। जो अब सिर झुकाये खड़े थे। सुयश ने भी रोजर को खड़ा होते देख, हेडफोन को हटाकर, फोन कॉल को अब स्पीकर मोड पर डाल दिया, जिससे अब सभी लोग इस वार्तालाप को ध्यान से सुनने लगे। अब स्टीफेन की आवाज बिल्कुल साफ कमरे में गूंज रही थी-

“यस कैप्टेन! बारामूडा त्रिकोण, जो कि पृथ्वी का सबसे डेंजर जोन कहलाता है। आपको मालूम भी है, कि आपका शिप, अपने वास्तविक रूट से 30 डिग्री नॉर्थ ईस्ट में, 80 नॉटिकल माइल, गलत दिशा में जा चुका है। और अब आप की वास्तविक स्थिति 56 डिग्री पश्चिमी देशांतर रेखाओं के मध्य है। इसके आगे आज तक जो भी शिप गया है, वह बारामूडा त्रिकोण के भयानक जोन में फंसकर गायब हो गया है और उसके वापस आने की संभावना लगभग ना के बराबर रही है। आप समझ रहे हैं ना मैं क्या कह रहा हूं? ओवर।“

“जी हां ! मैं आपकी बातों का मतलब समझ रहा हूं। ओवर।“ सुयश ने तेजी से रोजर के हाथ से कॉपी-पेन लेते हुए शिप की वास्तविक स्थिति को तुरंत कॉपी पर नोट किया।

“कैप्टेन, तुरंत शिप को मोड़िये। जल्दी करिये कहीं ऐसा ना हो कि आप का शिप भी......... खट्......खट्.........खटाक।“

फ्लोरिडा का संदेशवाहक अभी अपनी बात पूरी भी नहीं कर पाया था, कि उसका संपर्क ‘सुप्रीम’ से टूट गया

“हैलो -हैलो ! .................।“ सुयश पुनः संपर्क स्थापित करने के लिए, तेजी से बटनों से जूझने लगा । लेकिन अभी इससे पहले कि यह लोग कुछ समझ पाते। पूरा शिप एक अजीब सी नीली रोशनी से भर गया और एक बहुत तेज विचित्र सी ध्वनि सुनाई दी।

“जन्न.....न्..........न्ऽऽऽऽऽऽऽऽऽ।“ ऐसा लगा जैसे शिप के ऊपर से कोई चीज बहुत तेजी से, नीली किरणें बिखेरती हुई निकली है। उस चीज की आवाज, सुपर सोनिक जहाज की तरीके से तेज, परंतु महीन थी। उसकी स्पीड इतनी ज्यादा थी, कि उसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल था कि वह चीज क्या थी ?

“धड़ाम ........धड़ाम .......फटाक ....किर्र ..... किर्र ....खटाक।“

तभी सुप्रीम में लगे सभी इलेक्ट्रॉनिक यंत्र ‘धड़ाम-धड़ाम‘ की आवाज करते हुए ब्लास्ट हो गए। यहां तक कि पूरे शिप की लाइट भी चली गई। सभी लोग हक्के-बक्के से खड़े रह गए।

तभी ‘खटाक‘ की आवाज के साथ कंट्रोल रुम की इमरजेंसी लाइट ऑन हो गयी। किसी की भी ये समझ में नहीं आया कि यह क्या हो रहा है? यहां तक कि इनका दिशा सूचक यंत्र भी खराब हो गया । सभी लोग डरकर इधर-उधर देख रहे थे। एका एक सुयश को जैसे होश आया। उसने तुरंत आर्डर जारी किया ।

“तुरंत शिप को रोक दिया जाए। ये इस समय जहां पर है, इससे आगे नहीं बढ़ना चाहिए।“ सुयश की आवाज में बेचैनी और घबराहट साफ नजर आ रही थी। इस बार सुयश, इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर ब्रेव फोर्ड की ओर मुड़ा और उनसे बोला-

“मिस्टर ब्रेव फोर्ड, कंट्रोल रुम की इमरजेंसी लाइट तो अपने आप ऑन हो गयी है, पर पूरे शिप पर, अभी भी अंधेरा है। आप तुरंत पूरे शिप की इमरजेंसी लाइट को ऑन करवा दीजिए।“

“और आप मिस्टर जेम्स हुक!“ सुयश का इशारा इस बार फॉल्ट फाइंडिंग इंजीनियर जेम्स हुक की ओर था- “आप तुरंत अपनी पूरी टीम के साथ जुट जाइये, और ये देखिये कि शिप को कितना नुकसान हुआ है और इसे सही करने की कोशिश कीजिए।“

उधर खतरे को भांप, रोजर ने शिप को रुकवा दिया था। उनका नशा अब पूरी तरह से हिरण हो चुका था। ब्रेव फोर्ड भी आर्डर मिलते ही बाहर निकल गया। जेम्स हुक अपनी पूरी इंजीनियर्स की टीम के साथ, शिप के सारे कंट्रोल्स को चेक करने में लग गया। तभी पूरे शिप की इमरजेंसी लाइट ऑन हो गई। सुयश तुरंत दौड़कर, माइक के पास पहुंच गया।

“दोस्तों ! मैं शिप का कैप्टन, सुयश बोल रहा हूं।“ सुयश ने माइक संभालते हुए, पूरे शिप पर अनाउन्स करना शुरू कर दिया-

“कुछ तकनीकी खराबी आ जाने के कारण, कुछ देर के लिए, हमारी इलेक्ट्रिक लाइन में बाधा आ गई थी। मैं आप सब से इस चीज के लिए माफी मांगता हूं। अब स्थिति सामान्य है अतः कृपया आप लोग अपने-अपने स्थान पर जा कर आराम करें। इनकन्वीनियंस इज रिग्रेटेड।“

सुयश अनाउन्समेंट के बाद अब धीरे-धीरे नॉर्मल हो रहा था। अब उसने शिप की स्थिति पर ध्यान देना शुरू कर दिया। सफाई कर्मचारी तेजी से कंट्रोल रूम में बिखरे कांच को साफ करने में जुटे थे। सुयश इस बार कुछ कहने के लिए लारा की ओर घूमा। पर इससे पहले कि वह उससे कुछ कह पाता, कंट्रोल रूम में भागते हुए, अलबर्ट डिसूजा दाखिल हुए।

“कैप्टेन-कैप्टेन!“ आपने देखा अभी शिप के ऊपर से कोई यान-नुमा चीज, नीली रोशनी बिखेरती हुई, बहुत तेजी से निकली है। क्या वह कोई उड़न तश्तरी थी ?“अलबर्ट ने घबराए अंदाज में सुयश को देखते हुए कहा।

अलबर्ट की बातें सुनकर, सुयश की आंखें सोचने वाली मुद्रा में सिकुड़ गईं। सुयश ने पहले अलबर्ट के पसीने से लथपथ चेहरे को देखा और फिर बोला-

“मिस्टर अलबर्ट, जो भी चीज अभी शिप के ऊपर से निकली है, हम उसके बारे में बाद में बात करेंगे । पर पहले आप यह बताइए कि आपने उस चीज को देखा कहां से?“

“वो....वो...मैं डेक पर खड़ा था। तभी मैंने देखा, कि नीली रोशनी बिखेरता एक तश्तरी नुमा यान, बहुत तेजी से शिप की ओर आया। उसकी स्पीड इतनी तेज थी, कि वह लगभग 1 सेकेण्ड में, शिप के ऊपर से होता हुआ, तेजी से मेरी नजरों से ओझल हो गया। मुझे एक पल के लिए ऐसा लगा, जैसे मेरे सिर के ऊपर से कई सुपर सोनिक यान निकल गए हों। उसके शिप के ऊपर से निकलते ही पूरे शिप की लाइट भी ऑफ हो गई। मैं एकदम से बहुत डर गया। अभी तक मेरे पूरे शरीर के रोंये रोमांच की वजह से खड़े हैं।“

“वो सब तो ठीक है।“ सुयश के माथे पर उभरी सिकुड़न, इस बात का सबूत थी, कि वह कोई चीज, बहुत तेजी से सोच रहा है-

“पर पहले आप यह बताइए, कि आज न्यू ईयर की रात है। रात के लगभग 3:30 बज रहे हैं। शिप पर एक मर्डर भी हो चुका है और आपकी तो आज मैरिज एनिवर्सरी भी है। ऐसी स्थिति में तो आपको इस समय अपने रूम में होना चाहिए था, पर आप इस समय डेक पर क्या कर रहे थे?“

“वो....वो....मैं....सिगरेट पीने के लिए डेक पर गया था।“ अचानक इस तरह का प्रश्न पूछ लेने पर, अलबर्ट थोड़ा हड़बड़ा से गए। पर सुयश को यह महसूस हुआ कि अलबर्ट झूठ बोल रहे हैं। पर क्यों ?.....पता नहीं।






जारी रहेगा.………✍️
शैफाली का किरदार बिल्कुल असाधारण ऊँचाई पर है। जिस तरह वह बारूद की खुशबू के समय में फर्क पकड़ती है और उससे धुएँ पर फूँक मारने की आदत तक पहुँचती है, और फिर जले हुए रुमाल व संदल की खुशबू जैसा सूक्ष्म विवरण देती है, वह सिर्फ बुद्धिमत्ता नहीं, बल्कि लेखन की गहराई भी दिखाता है। एक अंधी बच्ची का इस तरह संवेदनाओं के सहारे अपराध की परतें खोलना बेहद प्रभावशाली लगा।

नीली रोशनी, अजीब ध्वनि, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम का ब्लास्ट होना यह हिस्सा पूरी तरह सिनेमैटिक और रहस्य से भरा लगा। ऐसा लगा जैसे कहानी अब केवल मर्डर मिस्ट्री नहीं रही, बल्कि किसी बड़े, अज्ञात, रहस्यमय और अलौकिक एडवेंचर की ओर बढ़ रही है।

कुल मिलाकर यह अपडेट कहानी को नए स्तर पर ले जाता है। भावनात्मक गहराई, वैज्ञानिक तर्क, रहस्य और अलौकिक संकेत सब एक साथ इतने संतुलित तरीके से आए हैं कि अब आगे क्या होगा, यह जानने की उत्सुकता और भी बढ़ गई है।
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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फिर से एक अप्रतिम अद्भुत और रोमांचक विस्मयकारी अपडेट हैं भाई मजा आ गया
Thank you very much for your valuable review bhai :thanks:
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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शैफाली का किरदार बिल्कुल असाधारण ऊँचाई पर है। जिस तरह वह बारूद की खुशबू के समय में फर्क पकड़ती है और उससे धुएँ पर फूँक मारने की आदत तक पहुँचती है, और फिर जले हुए रुमाल व संदल की खुशबू जैसा सूक्ष्म विवरण देती है, वह सिर्फ बुद्धिमत्ता नहीं, बल्कि लेखन की गहराई भी दिखाता है। एक अंधी बच्ची का इस तरह संवेदनाओं के सहारे अपराध की परतें खोलना बेहद प्रभावशाली लगा।

नीली रोशनी, अजीब ध्वनि, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम का ब्लास्ट होना यह हिस्सा पूरी तरह सिनेमैटिक और रहस्य से भरा लगा। ऐसा लगा जैसे कहानी अब केवल मर्डर मिस्ट्री नहीं रही, बल्कि किसी बड़े, अज्ञात, रहस्यमय और अलौकिक एडवेंचर की ओर बढ़ रही है।

कुल मिलाकर यह अपडेट कहानी को नए स्तर पर ले जाता है। भावनात्मक गहराई, वैज्ञानिक तर्क, रहस्य और अलौकिक संकेत सब एक साथ इतने संतुलित तरीके से आए हैं कि अब आगे क्या होगा, यह जानने की उत्सुकता और भी बढ़ गई है।
Thank you very much for your wonderful review and support madam :thanks:
 

DesiPriyaRai

Royal
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# 14.
“कातिल के बारे में तो नहीं बता सकती। पर हां उसकी एक आदत के बारे में जरूर बता सकती हूं।“ शैफाली की बात सुनकर, एक बार फिर सभी का ध्यान शैफाली की तरफ गया। “अंकल, जो पहली गोली चली थी। वह चलाने वाला मेरे 6 मीटर पीछे था। उस हिसाब से गोली चलने के 5 सेकेण्ड के बाद, बारूद की खुशबू, मुझ तक पहुंचनी चाहिए थी। पर बारुद की खुशबू मात्र 3 सेकेण्ड में मुझ तक पहुंच गई थी।“

“क्या मतलब हुआ इसका ?“ सुयश ने व्यग्र स्वर में पूछा।

“इसका साफ मतलब निकलता है, कि गोली चलाने वाली की आदत, गोली चलाने के बाद, रिवाल्वर की नाल से निकलते हुए धुंए को फूंक मारने की है। और ऐसा वही आदमी करता है, जो बहुत अच्छा निशानेबाज होता है और रिवाल्वर हमेशा अपने साथ रखता है।“ शैफाली एक के बाद एक धमाका कर रही थी।

“वेरी गुड!“ सुयश ने शैफाली के तर्कों की तारीफ करते हुए कहा- “क्या दिमाग पाया है!“ सुयश कुछ रुक कर फिर बोला –

“बेटे आप कुछ ऐसा, मर्डर के बारे में बता सकती हो। जिससे हमें कातिल को पकड़ने में कुछ हेल्प मिल सके।“

“यस अंकल! मैं एक बात मर्डर के बारे में और बताना चाहती हूं।“ शैफाली ने धीरे से सांस लेते हुए कहा।

अब सभी का ध्यान सिर्फ और सिर्फ शैफाली की बातों को सुनने में लगा था। पर उन्हें यह एहसास नहीं था, कि कोई दरवाजे के बाहर खड़ा, इन सारी बातों को सुन रहा था।

“अंकल, मेरे पास गोली चलने के बाद, एक अजीब सी खुशबू और आई। जैसे कपड़े पर जब बहुत गर्म प्रेस कर दिया जाता है तो कपड़े से एक अजीब सी, सोंधी सी खुशबू आती है। वह खुशबू ठीक वैसी ही थी। कहने का मतलब यह है कि जिसने भी मेरे पीछे से पहले गोली चलाई थी, उसने रिवाल्वर की नाल पर जरूर कोई कपड़ा रखा था, जो कि निश्चित रूप से को ई रुमाल रहा होगा। जब गोली चली, तो रिवाल्वर की नाल गर्म हो गई होगी, जिससे रुमाल भी हल्का सा जल गया होगा। वह खुशबू जरुर उसी की रही होगी। और उसके साथ में रुमाल से किसी संदल की स्मेल वाले सेंट की, बहुत ही खूबसूरत खुशबू आई।“ यह कहकर शैफाली 1 मिनट के लिए रुकी और फिर बोलना शुरु किया-

“आपने हॉल में खड़े सभी लोगों के रुमाल जमा करवा लिए थे। आप उन सभी रुमालों को ध्यान से देखिए। क्या किसी पर जले का निशान है? और उन सभी रूमालों में से किसमें से संदल स्मेल वाले सेंट की खुशबू आ रही है? इससे आपको कातिल को ढूंढने में आसानी होगी।“

“एक्सीलेंट!“ सुयश ने माइकल की ओर देखते हुए कहा- “आपकी बच्ची बहुत समझदार है। मैंने अपनी पूरी जिंदगी में इतना तेज दिमाग वाला इंसान आज तक नहीं देखा।“

“और हाँ अंकल।“ शैफाली ने पुनः बोलना शुरु किया- “जो व्यक्ति, मेरे 8.5 मीटर बांए था, उसी ने गोली चलाने के बाद, अपनी रिवाल्वर जमीन पर फेंकी थी।“

“यानि की लॉरेन का मर्डर तुम्हारे 6 मीटर पीछे वाले व्यक्ति ने किया है।“ सुयश ने शैफाली की नीली-नीली आँखों में झांकते हुए कहा।

“जी हाँ अंकल! मैं भी यही कहना चाह रही हूं।“ शैफाली ने अपनी बात को समाप्त करते हुए कहा- “और मैं बस इतना ही जानती हूं।“

“थैंक्स बेटा !“ सुयश ने शैफाली को आभार प्रकट करते हुए कहा-

“मैं तुम्हारा ये हेल्प हमेशा याद रखूंगा।“ यह कहकर सुयश ने माइकल और मारथा को भी थैंक्स बोला और फिर वहां से जाने के लिए मुड़ा। तभी शैफाली ने उसे फिर से टोक दिया।

“कैप्टेन अंकल! वैसे आपको अगर ब्रूनो की जरूरत पड़े तो आप जरूर बताइएगा। क्यों कि यह भी आपकी काफी मदद कर सकता है।“

“ठीक है बेटे! अगर हमें ब्रूनो की जरूरत पड़ी, तो हम अवश्य बताएंगे।“ यह कहकर सुयश सभी के साथ दरवाजे की ओर बढ़ा। उधर दरवाजे के बाहर खड़ी आकृति, सभी को बाहर आता देख, धीरे से सरक कर गैलरी में गायब हो गई। सुयश के दरवाजे के बाहर निकलते ही, एक सिक्योरिटी का आदमी भागा भागा वहां पहुंचा और बोला-

“माफी चाहता हूं कैप्टन, पर आपको इसी समय तुरंत कंट्रोल रूम में चलना होगा। वहां शायद कुछ गड़बड़ है?“

सुयश यह सुनते ही, सभी के साथ तेज कदमों से कंट्रोल रूम की ओर चल दिया। लेकिन उसका दिल पुनः किसी अंजानी आशंका से तेजी से धड़क रहा था।

चैपटर-5
1 जनवरी 2002, मंगलवार, 03:00; कंट्रोल रूम के बाहर, सिक्योरिटी के आदमियों और शिफ्ट में काम करने वाले लोगों की भीड़ लगी थी। कुछ लोग कंट्रोल रुम का दरवाजा खुलवाने की कोशिश कर रहे थे।

“क्या हुआ?“ सुयश ने वहां पहुंचकर तेज आवाज में, वहां खड़े लोगों से पूछा।

“पता नहीं कैप्टेन!“ उस भीड़ में से एक व्यक्ति ने आगे निकलकर, सुयश को जवाब दिया - “जब हम लोग शिफ्ट चेंज करने के लिए यहां पहुंचे, तो दरवाजा अंदर से बंद था। ऐसा इसके पहले कभी नहीं हुआ था। हम लोग लगभग 20 मिनट से दरवाजे पर नॉक कर रहे हैं, पर ना तो कोई अंदर से जवाब दे रहा है और ना ही दरवाजा खोल रहा है।“

“तुरंत कंट्रोल रूम का इमरजेंसी डोर खोलो।“ सुयश ने लारा की तरफ मुड़ते हुए, उसे आर्डर दिया।

“यस कैप्टेन!“ लारा तुरंत साइड में लगे इमरजेंसी डोर के कंप्यूटर पर पासवर्ड लगाने लगा।

कुछ ही देर में कंट्रोल रूम का इमरजेंसी डोर खुल चुका था। डोर खुलते ही सुयश ने तेजी से कंट्रोल रूम में प्रवेश किया। उसके साथ लारा भी था। अंदर का नजारा ही कुछ और था।

रोजर व असलम सहित चालक दल के सभी सदस्य, नशे की हालत में धुत इधर-उधर पड़े थे। शराब की कई बोतलें भी फर्श पर बिखरी हुई थीं। लारा ने अंदर आते ही, तुरंत आगे बढ़कर कंट्रोल रूम का मेन दरवाजा खोल दिया

सुयश ने एक नजर पूरे कंट्रोल रुम पर मारी और फिर आगे बढ़ कर रोजर का कॉलर पकड़कर उसे उठाने की कोशिश करने लगा-

“रोजर-रोजर!......उठो। मैंने तुम लोगों को ड्यूटी टाइम में ड्रिंक करने से मना किया था। फिर भी तुम लोगों ने ड्रिंक किया।“

अभी सुयश रोजर को झकझोर ही रहा था, कि तभी कंट्रोल बोर्ड पर लगी, एक लाल बत्ती तेजी सेणस्पार्क करने लगी। जो इस बात का संकेत थी कि ट्रांसमीटर पर कोई मैसेज है। सुयश तुरंत रोजर को छोड़, उस ट्रांसमीटर सेट की ओर भागा और तुरंत वहां रखे हेडफोन को अपने कानों पर चढ़ा कर एक बटन ऑन कर दिया।

“हैलो ! ब्लू क्रॉस कालिंग ‘सुप्रीम’।“ उधर से महीन आवाज सुनाई दी- “कोई हमारी बात सुन रहा है।“

“हैलो ! सुप्रीम कॉलिंग ब्लू क्रॉस।“ मैं सुप्रीम से कैप्टन सुयश बोलरहा हूं।“ सुयश ने कहा।

“कैप्टन! मैं फ्लोरिडा आईलैंड से ‘स्टीफेन‘ बोल रहा हूं।“ दूसरी तरफ से फिर से आवाज आयी-

“थैंक गॉड कि आपने मेरा कॉल रिसीव किया। इससे पहले भी मैंने 4 बार आप लोगों से सम्पर्क स्थापित करने की कोशिश की। पर किसी ने भी हमारा कॉल रिसीव नहीं किया । वहां सब कुछ ठीक तो है ना ? ओवर।“

सुयश ने यह सुनकर एक नजर वहां बेहोश पड़े लोगों पर मारी फिर बोला –


“यस स्टीफेन! एक छोटी सी प्राब्लम थी, पर अब सब ठीक है। आप बताइये आप ने क्यों कॉल किया ? ओवर“

“कैप्टेन! आपका शिप बारामूडा त्रिकोण के डेंजर जोन की ओर, गलत रास्ते पर जा रहा है।“ आवाज पुनः आयी।

“बारामूडा त्रिकोण!“ सुयश के शरीर में बारामूडा त्रिकोण का नाम सुन कर एक झुरझुरी सी हुई। उधर लारा, अब रोजर व असलम सहित बाकी सभी लोगों को होश में ला चुका था। जो अब सिर झुकाये खड़े थे। सुयश ने भी रोजर को खड़ा होते देख, हेडफोन को हटाकर, फोन कॉल को अब स्पीकर मोड पर डाल दिया, जिससे अब सभी लोग इस वार्तालाप को ध्यान से सुनने लगे। अब स्टीफेन की आवाज बिल्कुल साफ कमरे में गूंज रही थी-

“यस कैप्टेन! बारामूडा त्रिकोण, जो कि पृथ्वी का सबसे डेंजर जोन कहलाता है। आपको मालूम भी है, कि आपका शिप, अपने वास्तविक रूट से 30 डिग्री नॉर्थ ईस्ट में, 80 नॉटिकल माइल, गलत दिशा में जा चुका है। और अब आप की वास्तविक स्थिति 56 डिग्री पश्चिमी देशांतर रेखाओं के मध्य है। इसके आगे आज तक जो भी शिप गया है, वह बारामूडा त्रिकोण के भयानक जोन में फंसकर गायब हो गया है और उसके वापस आने की संभावना लगभग ना के बराबर रही है। आप समझ रहे हैं ना मैं क्या कह रहा हूं? ओवर।“

“जी हां ! मैं आपकी बातों का मतलब समझ रहा हूं। ओवर।“ सुयश ने तेजी से रोजर के हाथ से कॉपी-पेन लेते हुए शिप की वास्तविक स्थिति को तुरंत कॉपी पर नोट किया।

“कैप्टेन, तुरंत शिप को मोड़िये। जल्दी करिये कहीं ऐसा ना हो कि आप का शिप भी......... खट्......खट्.........खटाक।“

फ्लोरिडा का संदेशवाहक अभी अपनी बात पूरी भी नहीं कर पाया था, कि उसका संपर्क ‘सुप्रीम’ से टूट गया

“हैलो -हैलो ! .................।“ सुयश पुनः संपर्क स्थापित करने के लिए, तेजी से बटनों से जूझने लगा । लेकिन अभी इससे पहले कि यह लोग कुछ समझ पाते। पूरा शिप एक अजीब सी नीली रोशनी से भर गया और एक बहुत तेज विचित्र सी ध्वनि सुनाई दी।

“जन्न.....न्..........न्ऽऽऽऽऽऽऽऽऽ।“ ऐसा लगा जैसे शिप के ऊपर से कोई चीज बहुत तेजी से, नीली किरणें बिखेरती हुई निकली है। उस चीज की आवाज, सुपर सोनिक जहाज की तरीके से तेज, परंतु महीन थी। उसकी स्पीड इतनी ज्यादा थी, कि उसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल था कि वह चीज क्या थी ?

“धड़ाम ........धड़ाम .......फटाक ....किर्र ..... किर्र ....खटाक।“

तभी सुप्रीम में लगे सभी इलेक्ट्रॉनिक यंत्र ‘धड़ाम-धड़ाम‘ की आवाज करते हुए ब्लास्ट हो गए। यहां तक कि पूरे शिप की लाइट भी चली गई। सभी लोग हक्के-बक्के से खड़े रह गए।

तभी ‘खटाक‘ की आवाज के साथ कंट्रोल रुम की इमरजेंसी लाइट ऑन हो गयी। किसी की भी ये समझ में नहीं आया कि यह क्या हो रहा है? यहां तक कि इनका दिशा सूचक यंत्र भी खराब हो गया । सभी लोग डरकर इधर-उधर देख रहे थे। एका एक सुयश को जैसे होश आया। उसने तुरंत आर्डर जारी किया ।

“तुरंत शिप को रोक दिया जाए। ये इस समय जहां पर है, इससे आगे नहीं बढ़ना चाहिए।“ सुयश की आवाज में बेचैनी और घबराहट साफ नजर आ रही थी। इस बार सुयश, इलेक्ट्रॉनिक इंजीनियर ब्रेव फोर्ड की ओर मुड़ा और उनसे बोला-

“मिस्टर ब्रेव फोर्ड, कंट्रोल रुम की इमरजेंसी लाइट तो अपने आप ऑन हो गयी है, पर पूरे शिप पर, अभी भी अंधेरा है। आप तुरंत पूरे शिप की इमरजेंसी लाइट को ऑन करवा दीजिए।“

“और आप मिस्टर जेम्स हुक!“ सुयश का इशारा इस बार फॉल्ट फाइंडिंग इंजीनियर जेम्स हुक की ओर था- “आप तुरंत अपनी पूरी टीम के साथ जुट जाइये, और ये देखिये कि शिप को कितना नुकसान हुआ है और इसे सही करने की कोशिश कीजिए।“

उधर खतरे को भांप, रोजर ने शिप को रुकवा दिया था। उनका नशा अब पूरी तरह से हिरण हो चुका था। ब्रेव फोर्ड भी आर्डर मिलते ही बाहर निकल गया। जेम्स हुक अपनी पूरी इंजीनियर्स की टीम के साथ, शिप के सारे कंट्रोल्स को चेक करने में लग गया। तभी पूरे शिप की इमरजेंसी लाइट ऑन हो गई। सुयश तुरंत दौड़कर, माइक के पास पहुंच गया।

“दोस्तों ! मैं शिप का कैप्टन, सुयश बोल रहा हूं।“ सुयश ने माइक संभालते हुए, पूरे शिप पर अनाउन्स करना शुरू कर दिया-

“कुछ तकनीकी खराबी आ जाने के कारण, कुछ देर के लिए, हमारी इलेक्ट्रिक लाइन में बाधा आ गई थी। मैं आप सब से इस चीज के लिए माफी मांगता हूं। अब स्थिति सामान्य है अतः कृपया आप लोग अपने-अपने स्थान पर जा कर आराम करें। इनकन्वीनियंस इज रिग्रेटेड।“

सुयश अनाउन्समेंट के बाद अब धीरे-धीरे नॉर्मल हो रहा था। अब उसने शिप की स्थिति पर ध्यान देना शुरू कर दिया। सफाई कर्मचारी तेजी से कंट्रोल रूम में बिखरे कांच को साफ करने में जुटे थे। सुयश इस बार कुछ कहने के लिए लारा की ओर घूमा। पर इससे पहले कि वह उससे कुछ कह पाता, कंट्रोल रूम में भागते हुए, अलबर्ट डिसूजा दाखिल हुए।

“कैप्टेन-कैप्टेन!“ आपने देखा अभी शिप के ऊपर से कोई यान-नुमा चीज, नीली रोशनी बिखेरती हुई, बहुत तेजी से निकली है। क्या वह कोई उड़न तश्तरी थी ?“अलबर्ट ने घबराए अंदाज में सुयश को देखते हुए कहा।

अलबर्ट की बातें सुनकर, सुयश की आंखें सोचने वाली मुद्रा में सिकुड़ गईं। सुयश ने पहले अलबर्ट के पसीने से लथपथ चेहरे को देखा और फिर बोला-

“मिस्टर अलबर्ट, जो भी चीज अभी शिप के ऊपर से निकली है, हम उसके बारे में बाद में बात करेंगे । पर पहले आप यह बताइए कि आपने उस चीज को देखा कहां से?“

“वो....वो...मैं डेक पर खड़ा था। तभी मैंने देखा, कि नीली रोशनी बिखेरता एक तश्तरी नुमा यान, बहुत तेजी से शिप की ओर आया। उसकी स्पीड इतनी तेज थी, कि वह लगभग 1 सेकेण्ड में, शिप के ऊपर से होता हुआ, तेजी से मेरी नजरों से ओझल हो गया। मुझे एक पल के लिए ऐसा लगा, जैसे मेरे सिर के ऊपर से कई सुपर सोनिक यान निकल गए हों। उसके शिप के ऊपर से निकलते ही पूरे शिप की लाइट भी ऑफ हो गई। मैं एकदम से बहुत डर गया। अभी तक मेरे पूरे शरीर के रोंये रोमांच की वजह से खड़े हैं।“

“वो सब तो ठीक है।“ सुयश के माथे पर उभरी सिकुड़न, इस बात का सबूत थी, कि वह कोई चीज, बहुत तेजी से सोच रहा है-

“पर पहले आप यह बताइए, कि आज न्यू ईयर की रात है। रात के लगभग 3:30 बज रहे हैं। शिप पर एक मर्डर भी हो चुका है और आपकी तो आज मैरिज एनिवर्सरी भी है। ऐसी स्थिति में तो आपको इस समय अपने रूम में होना चाहिए था, पर आप इस समय डेक पर क्या कर रहे थे?“

“वो....वो....मैं....सिगरेट पीने के लिए डेक पर गया था।“ अचानक इस तरह का प्रश्न पूछ लेने पर, अलबर्ट थोड़ा हड़बड़ा से गए। पर सुयश को यह महसूस हुआ कि अलबर्ट झूठ बोल रहे हैं। पर क्यों ?.....पता नहीं।






जारी रहेगा.………✍️
मजेदार अपडेट, कहानी ने दिलचस्प मोड ले लिया। मर्डर मिस्ट्री से बरमूडा ट्रेंगल की और। हम्ममम🤔🤔
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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मजेदार अपडेट, कहानी ने दिलचस्प मोड ले लिया। मर्डर मिस्ट्री से बरमूडा ट्रेंगल की और। हम्ममम🤔🤔
Yess, waise badmuda triangle 🔺️ ke bare me pahle bhi padha hoga aap ne, bohot badi mystery bani hui hai ab tak :dazed:
Thank you very much for your valuable review and support :thanks:
 

Raj_sharma

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Raj_sharma

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#182.

चैपटर-2

वसंत ऋतु:
(तिलिस्मा 4.4)

सुयश सहित सभी लोग अब जमीन पर चमक रहे, ग्रीनलैंड के स्थान पर जाकर खड़े हो गये, जहां वसंत ऋतु से इनका सामना होना था।

सभी अब गायब होकर ग्रीनलैंड के एक स्थान पर पहुंच गये। परंतु उस स्थान पर नजर पड़ते ही, सभी बुरी तरह से हैरान हो गये।

वह एक बहुत सुंदर सी घाटी थी। उस स्थान पर पेड़, पर्वत, झील, परियां, तितली, झरना आदि सबकुछ था, जो कि एक प्रकृति की सुंदरता का कारक होता है, परंतु किसी भी चीज में कोई रंग नहीं था, यानि की सभी चीजें 70 के दशक के टेलीविजन की तरह ब्लैक एण्ड व्हाइट थीं।

इस स्थान को देख क्रिस्टी के मुंह से हंसी छूट गई।

“लगता है यह कैश्वर अब हमें किसी पुराने से टेलीविजन के अंदर ले आया है? जहां कि हर चीज का रंग उड़ गया है।” क्रिस्टी ने हंसते हुए कहा।

“मैं तो समझा था कि वसंत ऋतु में सबकुछ खुशनुमा होगा?” ऐलेक्स ने कहा- “पर यहां का तो अंदाज ही निराला लग रहा है।"

अब सबकी नजर उस बड़ी सी घाटी की ओर गई। सभी देखना चाहते थे कि वहां पर क्या-क्या है? और उस द्वार को किस प्रकार पार किया जा सकता है?

उस स्थान पर एक ओर 4 बड़े से ड्रम रखे थे। 3 ड्रम में लाल, नीला और पीला रंग था। एक ड्रम पूरी तरह से खाली था।

उस स्थान पर हवा में, एक 6 फुट का ड्रोन घूम रहा था, जिसके नीचे एक पिंजरा टंगा था और उस पिंजरे में एक परी बैठी थी, जिसने लाल रंग के वस्त्र पहन रखे थे। वह ड्रोन उस पिंजरे को लिये चारो ओर हवा में उड़ रहा था।

दूसरी ओर एक बड़ी सी चट्टान से, एक पानी का झरना गिर रहा था। उस झरने के पानी के एकत्र होने से, नीचे एक सुंदर परंतु छोटी सी झील बन गई थी।

उस झील के बीच में एक सफेद रंग का बड़ा सा लिली का फूल तैर रहा था। उस फूल के ऊपर दूसरा पिंजरा रखा था, जिसमें नीले रंग के वस्त्र पहने एक दूसरी परी बैठी थी।

तीसरा पिंजरा गायब होकर बार-बार अलग-अलग स्थानों पर दिखाई दे रहा था। तीसरे पिंजरे में पीले रंग के वस्त्र पहने एक परी बैठी थी।

चौथी परी किसी पिंजरे में नहीं थी, बल्कि हवा में उपस्थित 6 फुट ऊंचे, एक सफेद रंग के हीरे में बंद थी।

उस हीरे के नीचे एक संगमरमर के पत्थर का, 4 फुट का वर्गाकार टुकड़ा जमीन में लगा था। चौथी परी ने हरे रंग के वस्त्र पहने थे।

“यहां के माया जाल को तो देखकर ही समझ में आ रहा है, कि हमें यहां करना क्या है?" जेनिथ ने कहा।

“यह एक घाटी है, जिसके सारे रंगों के लिये ये 4 परियां जिम्मेदार हैं, परंतु किसी ने इन 4 परियों को अलग-अलग जगहों पर कैद कर दिया है?” सुयश ने कहा- “हमें इन सभी परियों को छुड़ाकर, प्रकृति के इन रंगों को भरना होगा।

“सही कहा आपने कैप्टेन।" तौफीक ने कहा- “और जैसे ही हम इन रंगों को प्रकृति में भर देंगे, स्वतः ही प्रकृति पर वसंत ऋतु का प्रभाव हो जायेगा।"

“तो फिर देर ना करते हुए इस द्वार को शुरु करते हैं।” सुयश ने कहा- “पहले लाल रंग का ड्रम रखा है, तो हम पहले लाल रंग की परी को छुड़ाने की कोशिश करते हैं।”

“पर कैप्टेन, हवा में उड़ रहे उस ड्रोन की गति बहुत ज्यादा है, ऐसे में हम उस ड्रोन तक कैसे पहुंच पायेंगे?" ऐलेक्स ने कहा।

ऐलेक्स की बात सुनकर सुयश ध्यान से उस ड्रोन की गति का अध्ययन करने लगा। उस ड्रोन की गति कम से कम 60 किलोमीटर प्रति घंटा के आस-पास थी। ऐसे में उसे पकड़ पाना इतना भी आसान नहीं था।

तभी सुयश की नजर एक ऊंची सी चट्टान की ओर गई। ड्रोन बार-बार घूमते हुए उस चट्टान के पास से गुजर रहा था।

उस चट्टान के नीचे की ओर झील का पानी था। यह देख सुयश के दिमाग में एक युक्ति आ गई।

"हममें से किसी को उस चट्टान पर जाकर खड़ा होना होगा?” सुयश ने चट्टान की ओर इशारा करते हुए कहा और जैसे ही ड्रोन नीचे से निकलेगा, चट्टान से कूदकर उस ड्रोन पर सवार होने की कोशिश करनी होगी। क्यों कि ड्रोन पर लगे पंखे, उसके प्लेटफार्म के नीचे हैं, इसलिए वह पंखे हमें, किसी भी प्रकार की हानि नहीं पहुंचा सकते। मुझे तो यह तरीका ही आसान लगा क्यों कि अगर कोई नीचे गिर भी गया? तो नीचे झील का पानी होने की वजह से उसे चोट नहीं लगेगी।"

“ठीक है कैप्टेन, तो मैं चट्टान पर जाकर ड्रोन पर कूदने की कोशिश करती हूं।” क्रिस्टी ने स्वयं से आगे आते हुए कहा और सुयश की स्वीकृति पाकर उस चट्टान की ओर बढ़ गई।

कुछ ही पलों में क्रिस्टी चट्टान पर थी। अब क्रिस्टी की नजर पास आ रहे ड्रोन की ओर थी। कुछ देर तक क्रिस्टी ध्यान से ड्रोन को देखती रही और उसकी गति का पूर्ण अंदाजा लगा लेने के बाद, क्रिस्टी ने ड्रोन पर छलांग लगा दी।

एक पल के लिये ऐसा लगा मानो क्रिस्टी का शरीर, किसी सुपरगर्ल की भांति हवा में उड़ रहा हो।
पर जैसे ही ड्रोन इस बार चट्टान के समीप आया, उसकी गति अचानक से बढ़ गई और वह क्रिस्टी के नीचे से, उसे चिढ़ाता हुआ निकल गया।

एक पल के लिये क्रिस्टी की आँखों में आश्चर्य के भाव उभरे, परंतु इससे पहले कि क्रिस्टी ज्यादा आश्चर्य व्यक्त कर पाती, उसका शरीर ‘छपाक' की तेज आवाज करते हुए झील के पानी में आ गिरा।

क्रिस्टी ने पानी में एक डाइव मारी और झील से निकल कर बाहर आ गई।

क्रिस्टी ने सुयश से कुछ बोलने की कोशिश की, पर सुयश हाथ के इशारे से उसे रोकते हुए बोला- “कुछ बोलने की जरुरत नहीं है क्रिस्टी, हम सभी ने देखा कि कैसे ड्रोन की स्पीड एका एक तेज हो गई थी? अब यह साफ हो गया कि यह एक साधारण ड्रोन नहीं, बल्कि एक स्मार्ट ड्रोन है, जो अपने पर आ रहे खतरों को देख, अपने अंदर स्वयं बदलाव कर सकता है।....क्या अब किसी के पास इस ड्रोन को पकड़ने का कोई दूसरा तरीका है?"

"हां कैप्टेन।” इस बार ऐलेक्स ने अपना हाथ उठाते हुए कहा- “मुझे अभी-अभी यहां सामने की ओर कुछ अदृश्य सीढ़ियां बनी दिखाई दीं हैं, ड्रोन उन सीढ़ियों के नीचे से बार-बार निकल रहा है। जिस चट्टान से क्रिस्टी नीचे कूदी, वह चट्टान काफी ऊंचाई पर थी, जिससे क्रिस्टी को ड्रोन को पकड़ने के लिये, काफी पहले कूदना पड़ा था, पर उन सीढ़ियों और ड्रोन के बीच ज्यादा फासला नहीं है, इसलिये मुझे लगता है कि उन सीढ़ियों के माध्यम से आसानी से ड्रोन को पकड़ा जा सकता है?" यह कहकर ऐलेक्स ने एक दिशा की ओर इशारा करते हुए कहा।

“ठीक है ऐलेक्स, तुम भी कोशिश करके देख लो, हो सकता है कि इस तरीके से ही लाल परी के ड्रोन को पकड़ा जा सके?” सुयश ने ऐलेक्स को आज्ञा देते हुए कहा।

सुयश की बात सुन ऐलेक्स उन सीढ़ियों की ओर बढ़ गया। कुछ ही देर में ऐलेक्स उन सीढ़ियों पर चढ़कर, एक ऐसे स्थान पर खड़ा हो गया, जिसके नीचे से ड्रोन बार-बार निकल रहा था।

शैफाली के सिवा बाकी किसी को, अदृश्य सीढ़ियां दिखाई नहीं दे रहीं थीं, पर ऐलक्स को वह सब, अब हवा में एक स्थान पर खड़े देख रहे थे।

ऐलेक्स ने भी क्रिस्टी की ही भांति, ड्रोन की गति का अवलोकन किया और एक बार जैसे ही ड्रोन सीढ़ियों के एक ओर से नीचे घुसा, ऐलेक्स उसकी गति देख दूसरी ओर की सीढ़ियों से उतर गया।

पर इस बार ड्रोन सीढ़ियों के नीचे कुछ पलों के लिये बहुत धीमा हो गया, जिसकी वजह से ऐलेक्स नीचे धरती पर आ गिरा।

चूंकि सीढ़ियों की ऊंचाई जमीन से ज्यादा नहीं थी और ऐलेक्स की त्वचा शक्ति भी अभी थोड़ी काम कर रही थी, इसलिये ऐलेक्स को चोट नहीं आई।

अब ऐलेक्स अपना मुंह लटकाकर, क्रिस्टी के बगल आकर खड़ा हो गया। ऐलेक्स ने अपना सिर क्रिस्टी के कंधे से टिका लिया।

“कोई बात नहीं शक्ति धारक, तुम दुखी मत हो, ऐसा सबके साथ होता है।" क्रिस्टी ने ऐलेक्स के सिर को बिना अपने कंधे से हटाए, उसे थपकी देते हुए कहा।

ऐलेक्स ने थपकी से भाव विभोर हो, भोलेपन से अपनी आँखें बंद कर ली। क्रिस्टी और ऐलेक्स को देख सबके चेहरे पर मुस्कान आ गई।

“यह प्लान भी फेल हो गया।” सुयश ने बारी-बारी सभी की ओर देखते हुए कहा- “क्या किसी के पास कोई और प्लान है?"

"हां कैप्टेन अंकल, इस बार मैं कोशिश करके देखना चाहती हूं।” शैफाली ने अपना हाथ खड़ा करते हुए कहा।

“क्या तुम्हारे दिमाग में कोई विशेष प्लान है शैफाली?" जेनिथ ने शैफाली की ओर देखते हुए पूछा।

"हां, पर मैं उस प्लान को बताने की जगह करके दिखाना चाहती हूं।” यह कहकर शैफाली उनके पास से हटकर आगे की ओर बढ़ गई।

सभी की नजर अब पूर्णतया शैफाली की ओर थीं।

शैफाली वहां से आगे बढ़कर उस स्थान पर जा पहुंची, जहां बहुत सी बड़ी-बड़ी तितलियां उड़ रहीं थीं।

कुछ देर तक शैफाली वहां खड़ी होकर उड़ती हुई तितलियों को यूं ही निहारती रही और फिर वह उछलकर एक तितली पर सवार हो गई।

सभी आश्चर्य से शैफाली के इस अभूतपूर्व प्रदर्शन को देख रहे थे।

शैफाली ने कुछ ही देर में तितली पर अपने शरीर को पूरी तरह से संतुलित कर लिया। अब शैफाली ड्रोन के पीछे थी।

सभी को शैफाली का यह प्लान काफी अच्छा लगा। अब सभी को यह महसूस होने लगा था कि शैफाली जल्द ही उस लाल परी के ड्रोन को पकड़ लेगी।

शैफाली निरंतर ड्रोन के पास आती जा रही थी, परंतु जैसे ही शैफाली ने ड्रोन के बिल्कुल पास पहुंचकर, अपना हाथ ड्रोन की ओर बढ़ाया, वैसे ही अचानक ड्रोन की गति पहले से दुगनी हो गई।

अब शैफाली के लिये उस तितली पर बैठकर ड्रोन को पकड़ पाना अत्यंत ही मुश्किल हो गया। कुछ देर ऐसे ही प्रयास करने के बाद शैफाली हारकर तितली से उतरकर वापस सुयश के पास आ गई।

“यह ड्रोन तो कुछ ज्यादा ही स्मार्ट है? यह अपनी गति को घटा-बढ़ाकर हमें चकमा दे रहा है।” शैफाली ने मुंह लटकाते हुए कहा।

“नक्षत्रा, क्या तुम्हारे पास इस ड्रोन को पकड़ने का कोई प्लान है?" जेनिथ ने नक्षत्रा से पूछा।

"नहीं जेनिथ, मेरी समय को रोक देने वाली शक्ति अगर यहां काम करती? तो मैं आसानी से उस ड्रोन को पकड़ सकता था, पर अब तो मैं भी यहां मजबूर हूं।" नक्षत्रा ने कहा- “हां____, पर मैं तुम्हें एक सुझाव अवश्य दे सकता हूं।

"तो फिर कहो नक्षत्रा बताओ कि तुम्हारे पास क्या सुझाव है?" जेनिथ ने कहा।

“शायद तुम लोग हेफेस्टस की गुफा वाली घटना को भूल चुके हो, जिसमें तौफीक ने पत्थरों से निशाना लगा कर तेजी से हवा में उड़ रहे गोलों को मार गिराया था।" नक्षत्रा ने कहा।

“पर वह ड्रोन इतना स्मार्ट है कि वह तौफीक के पत्थरों से भी, अपनी गति को घटा या बढ़ाकर बच सकता है।" जेनिथ ने अपना शक जाहिर करते हुए कहा।

"जो तौफीक, हवा में उछाले गये 6 सिक्कों को, जमीन पर गिरने के पहले ही गोली से उड़ा सकता है, वह भला अपनी बुद्धि का प्रयोग कर इस ड्रोन को क्यों नहीं गिरा सकता?" नक्षत्रा के शब्दों में अतीत की यादें भी थीं, जिसे सुनकर एक पल के लिये जेनिथ विचलित हो गई।

“अतीत को भूलकर भावनाओं को नियंत्रित करो दोस्त। यह समय अतीत के सागर में मंथन करने का नहीं है, यह समय है, सभी भावनाओं को भुलाकर तिलिस्मा को पार करने का।” नक्षत्रा ने जेनिथ को समझाते हुए कहा।

नक्षत्रा की बात सुन जेनिथ ने धीरे से अपना सिर हिलाया और अपने चेहरे के बनते-बिगड़ते भावों को नियंत्रित कर लिया।

"तौफीक।” जेनिथ ने एक लंबे अंतराल के बाद तौफीक को संबोधित करते हुए कहा- “नक्षत्रा का कहना है कि तुम यह कार्य आसानी से कर सकते हो।

तौफीक का नाम लेते समय, एक बार को जेनिथ की जुबान लड़खड़ा गई, पर शीघ्र ही उसने स्वयं को नियंत्रित कर लिया।

“नक्षत्रा का?” तौफीक ने अर्थ भरी नजरों से जेनिथ की ओर देखते हुए पूछा।

"नहीं...म.....म....मेरा भी मानना है।" जेनिथ ने तौफीक के चेहरे से नजर हटाते हुए कहा।

जेनिथ की बात सुन तौफीक का चेहरा खुशी से चमकने लगा। अचानक ही उसमें एक गजब का विश्वास नजर आने लगा।

अब तौफीक ने ध्यान से उस ड्रोन को देखा और फिर जमीन से 6 पत्थर उठाकर अपने हाथ में पकड़ लिये। पत्थरों का आकार कंचे से थोड़ा सा ही ज्यादा था।

तौफीक अब लगातार उस ड्रोन को देख रहा था। कुछ देर, ड्रोन की गति का अध्ययन करने के बाद तौफीक की नजर ड्रोन के घूम रहे पंखों पर जम गई।

अब तौफीक ने बिजली की फुर्ती दिखाते हुए एकएक कर सभी पत्थर ड्रोन की ओर उछाल दिये।

तौफीक ने सभी पत्थरों की गति और स्थान को अलग-अलग रखा था।

जैसे ही पहला पत्थर ड्रोन के पास पहुंचा, ड्रोन ने एकाएक अपनी गति बढ़ा दी, पर तौफीक का फेंका हुआ दूसरा पत्थर उसी स्थान की ओर आ रहा था, यह देख ड्रोन ने इस बार अपनी गति को धीमे कर दिया।

बस इसी स्थान पर वह ड्रोन फंस गया, क्यों कि तौफीक का फेंका तीसरा पत्थर, उसी स्थान को केंद्र में रखकर फेंका गया था।

तीसरा पत्थर ड्रोन के एक पंखे पर जाकर लगा, जिसकी वजह से ड्रोन अनियंत्रित होकर, एक चट्टान से टकराकर नीचे आ गिरा।

ड्रोन को नीचे गिरता देख सभी ने तौफीक के नाम का जयकारा लगाया और उस ओर भाग लिये जहां ड्रोन गिरा था।

जेनिथ की आँखों में एक बार फिर तौफीक के लिये तारीफ के भाव उभरे।

इसी पल, बस एक क्षण के लिये तौफीक और जेनिथ की नजरें आपस में टकराईं और फिर जेनिथ ने अपना मुंह फेर लिया।

“अब समझ में आया जेनिथ कि मैंने तौफीक का रहस्य अभी किसी और से बताने को क्यों मना किया था?" नक्षत्रा ने कहा- “क्यों कि हमें इस तिलिस्म में तौफीक की जरुरत है।"

“पर तुम तो इतनी दूर का भविष्य नहीं देख पाते नक्षत्रा, फिर तुम्हें कैसे पता था कि हमें तौफीक की जरुरत इस तिलिस्म में पड़ने वाली है?" जेनिथ ने शक भरे अंदाज में नक्षत्रा से पूछा।

"मैं....मैं...भविष्य नहीं देख सकता ज़े ज़ेनिक्स मैंने तो बस ऐसे ही गणना की थी।" नक्षत्रा ने लड़खड़ाती जुबान में कहा।

"ये तुम मुझे ज़ेनिक्स क्यों कह रहे हो नक्षत्रा?" जेनिथ के चेहरे पर उलझन के भाव उभरे।

"उप्स सॉरी 'ज़ेनिक्स' शब्द गलती से निकल गया।” इतना कह नक्षत्रा चुप हो गया। शायद वह समझ गया था कि इस समय कुछ ना ही बोलना उचित होगा।

नक्षत्रा को अचानक से चुप होते देख जेनिथ, उस ड्रोन की ओर बढ़ गई, जिधर सभी गये थे।

सुयश ने पत्थर मारकर पिंजरे का द्वार खोल दिया।

लाल परी अब निकलकर बाहर आ गई, पर उसने ना तो किसी की ओर देखा? और ना ही किसी से कुछ कहा? लाल परी चलती हुई, वहां रखे, लाल रंग से भरे ड्रम के पास पहुंची।

अचानक ही लाल परी के हाथों में एक पेंट करने वाली कूची दिखाई देने लगी। लाल परी ने अपनी कूची को पेंट से भरे ड्रम में डुबाया और बिजली की तेजी से उस घाटी में मौजूद हर लाल रंग की चीज को रंगना शुरु कर दिया।

कुछ ही देर में लाल परी ने घाटी में उपस्थित, लाल रंग के फलों और फूलों को रंग दिया।

रंगों का कार्य पूर्ण होने के बाद वह लाल परी हवा में कहीं गायब हो गई? अब सभी का ध्यान नीले रंग के वस्त्र पहने परी की ओर गया, जो कि झील के पानी में मौजूद सफेद लिली के फूल पर रखे एक पिंजरे में थी।


जारी रहेगा_____✍️
 
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