• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Thriller कातिल रात

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
Staff member
Moderator
43,967
79,953
304

Shetan

Well-Known Member
17,568
51,913
259
Pistol wahi milegi jaha koi na socha hoga :D
Thank you very much for your valuable review and support shetan ji :thanks:
फिक्र मत कीजिये. हम भी समय से पहले पर्दा उठ जाए. यह नही चाहेंगे. क्यों की ज्यादा चतुराई कहानी पढ़ने का मझा किरकिरा कर देती है.
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
Staff member
Moderator
43,967
79,953
304
फिक्र मत कीजिये. हम भी समय से पहले पर्दा उठ जाए. यह नही चाहेंगे. क्यों की ज्यादा चतुराई कहानी पढ़ने का मझा किरकिरा कर देती है.
Tumhari isi samajhdaari ke to kayal hain hum shetan ji :love:
Hum bhi aapko niraas nahi karenge :shakehands:
 

Shetan

Well-Known Member
17,568
51,913
259

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
Staff member
Moderator
43,967
79,953
304

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
Staff member
Moderator
43,967
79,953
304

Thakur

असला हम भी रखते है पहलवान 😼
Prime
3,416
6,923
159
#01

बारिश: (रात 8 बजे!)

इस बार दिल्ली की सर्दियों में बारिश अपना अलग ही स्यापा कर रही थी।
कहने वाले तो कहने लगे थे कि, दिल्ली भी बारिश के मामले में अब मुम्बई बनती जा रही है।

एक तो जनवरी के पहले सप्ताह की कड़ाके की सर्दी और उस पर ये बारिश का कहर।

मैं उसी सर्दी की मार से बचने के लिए इस वक़्त अपने फ्लैट में अपने बेड पर और अपनी ही रजाई में लिपट कर अपनी सर्दी को दूर भगाने का प्रयास कर रहा था।

अब आप भी सोच रहे होंगे की ये कौन अहमक इंसान है,जो बेवजह दिल्ली के मौसम का आँखों देख़ा हाल सुना रहा है। :D

वैसे तो अभी तक आपने अपने इस सेवक को पहचान ही लिया होगा , लेकिन फिर भी मैं आपको बता दूं कि मैं “रोमेश!” दिल्ली में एक छोटा मोटा जासूसी का धंधा करता हूँ…न न मैं कोई राॅ का एजेंट नही हूँ,मैं तो एक प्राइवेट डिटेक्टिव हूँ, जो सिर्फ कत्ल के केस में ही अपनी टांग घुसाता है। :yo:

जासूसी के बाकी धंधो मसलन, शक धोखा, पीछा, तलाक जैसे सड़क छाप धंधों से मैं दूर ही रहता हूँ।

बन्दे को बचपन से ही जासूसी उपन्यास पढ़ने का शौक इस कदर था, की जिस उम्र में मुझें स्कूल की किताबें पढ़नी चाहिए थी,उस उम्र में मैं दिन रात जासूसी किस्से कहानिया पढ़ा करता था।:dazed:

इसी वजह से अपुन का मन भी सिर्फ जासूसी में ही अपना मुकाम बनाने का करने लगा था।

वैसे तो आपका ये सेवक जासूसी में दिल्ली से लेकर मेरठ आगरा ,मुम्बई और राजस्थान तक अपने झंडे गाड़ चुका था ,और आज किसी परिचय का मोहताज नही था , लेकिन मेरी एक नकचढ़ी सेक्रेटरी है,जिसका नाम रागिनी है, वो बन्दे की इस काबलियत की जरा भी कदर नही करती है,:beee: उसकी नजर में अपन आज भी घर की मुर्गी दाल बराबर है, लेकिन उसकी महिमा का बखान मैं बाद में करूँगा, इस वक़्त आपके इस जिल्ले-इलाही के फ्लैट को कोई बुरी तरह से पीट रहा था।

दरवाजा इतनी बेतरतीबी से पीटा जा रहा था कि, मानो कोई दरवाजा तोड़कर अंदर घुसना चाहता हो, मैं हड़बड़ाकर अपनी रजाई में से निकला और दराज में से अपनी पिस्टल निकालकर अपने बरमूडा में फँसाई और तेज कदमो दरवाजे की ओर बढ़ा और दरवाजे के पास जाकर ठिठक गया।

"कौन है,क्यो दरवाजा तोड़ने पर आमादा हो "मैंने बन्द दरवाजे के पीछे से ही बोला।

"दरवाजा खोलो ! मैं बहुत बड़ी मुसिबत में हूँ" ये किसी लड़की की घबराई हुई आवाज थी।

अब एक तो लड़की और ऊपर से मुसीबतजदा, और ऊपर से गुहार भी उस इंसान से लगा रही थी,जो मुसीबतजदा लड़कियों का सबसे बड़ा खैरख्वाह था,:smarty: तो अब दरवाजा खोलना तो बनता था, सो मैंने दरवाजा खोला और फोरन से पेश्तर खोला।

दरवाजा खोलते ही मुझे यू लगा मानो कोई आंधी तूफान कमरे में घुस आया हो, वो लडकी डेढ़ सौ किलोमीटर की रफ्तार से कमरे में घुसी और सीधा मेरे बेड पर बैठ गई।

मै किंककर्तव्यमूढ़ सा बस उस
लड़की की ओर देखता रहा, उस मोहतरमा में एक बार भी मुझ से अंदर आने के लिए पूछना गवांरा नही समझा था।

"दरवाजा बंद करो न, ऐसे क्या देख रहे हो, कभी कोई लडकी नही देखी क्या" उस लड़की की आवाज जैसे ही मेरे कानो में पड़ी, मैंने हड़बड़ा कर दरवाजे को बन्द कर दिया।

दरवाजा बंद करते ही मेरी नजर उस लड़की पर पहली बार पूरी नजर पड़ी थी। लड़की उची लंबे कद
की बेइंतेहा खूबसूरत थी।

उसके कटीले नैन नक्श पर उसका मक्खन में सिंदूर मिला रंग तो कयामत ही ढा रहा था।

उसे ध्यान से देखते ही मेरे दिल की घण्टिया किसी मंदिर के घड़ियाल की तरह से बजने लगी थी।:love2:

पता नही साला ये अपनी उम्र का तकाजा था या अभी तक कुंवारा रहने का नतीजा था कि,आजकल अपुन को हर लड़की खूबसूरत लगती थी। :loveeyed2:

मुझे इस तरह से कुत्ते की तरह से अपनी तरफ घूरते हुए देखकर वो लड़की अब बेचैनी से अपना पहलू बदलने लगी थी।:D

"हो गया हो तो, अब इधर भी आ जाओ" उस लड़की को शायद ऐसी कुत्ती निग़ाहों का अच्छा खासा तजुर्बा था।

होता भी क्यो नही, जो जलवा उसकी खूबसूरती का था, उसके मद्देनजर तो जिसने भी डाली होगी मेरे जैसी कुत्ति नजर ही डाली होगी।

लेकिन आपके इस सेवक ने लड़की के बोलते ही अपनी इस छिछोरी हरकत पर ब्रेक लगाई,और चहलकदमी करता हुआ उसके सामने आकर खड़ा हो गया।

एक तो साला सर्दी का मौसम, ऊपर से कड़कड़ाती बरसात, और अब ये कहर बरपाती मेरे ही बेड पर बैठी हुई मोहतरमा, मेरी जगह कोई और होता तो अभी तक इस खूबसूरत बला के साथ पूरी रात की योजना अपने ख्यालों में बना चुका होता, लेकिन अपनी नजर भले ही कितनी भी कुत्ती हो, दिल शीशे की तरह से साफ है।:declare:

"कौन हो तुम, और इतनी बरसात में मेरे पास क्यो आई हो" मै अब उसकी सुंदरता के खुमार से कुछ कुछ निकलते हुए बोला।

"मेरी जान खतरे में है,मुझे कोई मारना चाहता है" उस लड़की की आवाज में फिर से घबराहट का पुट आ चुका था।

"लेकिन आपको मेरे बारे में किसने बताया कि मैं मुसीबतजदा हसीनाओं की मदद आधी रात को भी सिर के बल चल कर करता हूँ" मैं अब अपनी जासूस वाली फोम में आता जा रहा था।

"मैं आपको नही जानती, मेरे पीछे तो कुछ लोग लगे हुए थे, मैं तो उनसे बचने के लिए आपके फ्लैट का दरवाजा पीटने लगी थी" उन मोहतरमा ने जो बोला था, वो मेरे लिए अनपेक्षित था ।

ऐसे कोई जबकि सर्दियो के दिनों में आठ बजते ही आधी रात का आलम लगने लगता है, क्यो किसी अंजान के घर मे ऐसे घुसेगा और न सिर्फ घुसेगा बल्कि आकर आराम से आकर बेड पर भी बैठ जाएगा।

"आप हो कौन, और कौन लोग है जो आपकीं जान लेना चाहते है" मैंने एक स्वभाविक सवाल किया।

"मेरा नाम अनामिका है, मै यही आपके इलाके के सेक्टर ग्यारह में रहती हूँ, मैं इधर किसी काम से आई थी, लेकिन जब मैं घर वापिस जा रही थी, तो मैंने देखा कि चार लोग मेरा पीछा कर रहे थे, मैं उन्हें देख कर घबरा गई और भागने लगी, तभी आपके फ्लैट पर नजर पड़ी, आपकी लाइट भी जली हुई थी, तो आपके फ्लैट का दरवाजा पीटने लगी" अनामिका ने बोला।

"उन लोगो को आपने पहले भी कभी अपने पीछे आते हुए देखा है, या आज ही देखा था" मै अब उससे सवाल जवाब करने के मूड में आ गया था।

"उन लोगो को तो मैंने आज ही देखा था, लेकिन मुझे कई दिनों से लग रहा है कि कोई मेरा पीछा कर रहा है" अनामिका ने रहस्यमय तरीके से बोला।

"ऐसा लगने का कोई कारण भी तो होना चाहिए, क्या आपको किसी से अपनी जान का खतरा है" मैंने उसके जवाब में से ही सवाल ढूंढा।

"खतरा तो मेरी जान को बहुत है, मुझे नही पता कि मौत किस पल मेरा शिकार कर ले" अनामिका की आवाज से ही ये बोलते हुए उसका डर झलक रहा था।

"कौन लेना चाहता है तुम्हारी जान" मैंने फिर से उसी सवाल को घुमा फिरा कर पूछा।

"धीरज!पूरा नाम उसका धीरज खत्री है" अनामिका ने मुझे उस बन्दे का नाम बताया।

"आप धीरज को कैसे जानती है" मेरा ये पूछना स्वभाविक था।

"किसी समय वो मेरा बॉयफ्रेंड था, लेकिन जल्दी ही मुझे ये एहसास ही गया कि मैंने गलत आदमी से प्यार कर लिया है, उसके बाद मैंने उससे अपने रिलेशन ख़त्म कर लिये, और दूसरी जगह शादी कर ली, उसके बाद से वो बन्दा मेरी जान का दुश्मन बना हुआ है" अनामिका ने पूरी बात बताई।

"देखिए मैं एक डिटेक्टिव हूँ… मेरा पाला हर रोज ऐसे लोगो से ही पड़ता है, आप मेरा ये कार्ड रख लीजिए, और कल मेरे आफिस आकर मुझे सभी कुछ डिटेल में बताइये, हो सकता है, इसके बाद आपका बॉयफ्रेंड फिर कभी आपको परेशान न करे" मैंने उसको विश्वास दिलवाने वाले शब्दो मे बोला।

"अगर आपने सच मे मेरा उस आदमी से पीछा छुड़ा दिया तो, आपको आपके वजन के बराबर नोट से तोल दूँगी" अनामिका ने उत्साहित स्वर में बोला।

"लेकिन मैडम इतना बता दीजिए कि वो नोट दस के होंगे या दो हजार के होंगे" मैंने उसकी बात का झोल पकड़ते हुए बोला।:D

मेरी बात सुनकर वो नाजनीन न केवल मुस्कराई बल्कि खिलखिलाकर हँस भी पड़ी।

"आप बहुत हाजिर जवाब हो रोमेश साहब" अनामिका ने मेरा नाम मेरे विजिटिंग कार्ड पर पढ़ते हुए बोला।

"चलिये अब मैं आपको आपके घर छोड़ देता हूँ, वैसे भी रात अब गहरी होती जा रही है" मैंने अनामिका की तरफ देख कर बोला।

"काफी शरीफ आदमी मालूम पड़ते हो रोमेश साहब, वरना मौसम तो आशिकाना है" उस जालिम ने एकाएक ऐसी बात बोलकर मेरे दिल के तारों को झंकृत कर दिया।

"इस मौसम की वजह से ही तो बोल रहा हूँ, आपके कपडे गीले हो चुके है, घर आपका पास में ही है, मैं अपको घर छोड़ देता हूँ, ताकि आप इन गीले कपड़ो से छुटकारा पा सको" मैंने अनामिका की बात को एक नया मोड़ दिया।

"लेकिन मैं अभी घर नही जाना चाहती हूँ, मेरे पति भी आज घर पर नही है, और मुझे ऐसे हालात में डर भी बहुत लगेगा"

अनामिका अब सीधे सीधे मेरे गले पड़ रही थी। जबकि मेरी छटी इंद्री मुझे बार बार सचेत कर रही थी।

मुझे न जाने क्यो ये लडकी खुद को जो बता रही थी,वो नही लग रही थी।

लेकिन इस बार उसने जो बहाना बनाया था, उसने मुझे कुछ बोलने लायक नही छोड़ा था।

"लेकिन देवी जी, ये बन्दा यहां अकेला रहता है, कल को किसी को पता चलेगा तो आपकी बदनामी नही होगी" मैने वो बात बोली, जो आजकल के जमाने मे अपनी अहमियत खो चुकी थी।

मेरी इस बात को अनामिका की हँसी ने सही भी साबित कर दिया था।

"किस जमाने मे जी रहे हो रोमेश बाबू, आजकल किसके पास इतनी फुर्सत है कि कोई मेरी रातों का हिसाब रखें कि मैं अपनी रात कहाँ किसके साथ बिताकर आ रही हूँ.. यार अब ये फालतू की बाते बन्द करो, और अगर एक कप कॉफी पिला सकते हो तो पिला दो" अनामिका मेरे गले पड़ने में कामयाब हो चुकी थी।

मैं मरता क्या न करता के अंदाज में अपने किचन की ओर चल दिया।

कॉफी की जरूरत तो मुझे भी थी। इसलिए मैंने कॉफी के लिये कोई आना कानी नही की।

मैंने अपने बरमूडा से अपनी पिस्टस्ल को निकाल कर दराज में डाला और कॉफी बनाने के वास्ते किचन की ओर चल दिया।

मै कोई दस मिनट के बाद काफी बनाकर जब बैडरूम में पहुंचा तो अनामिका वहां नही थी।

मैंने इधर उधर नजर दौड़ाई, लेकिन वो कहीं नजर नही आई। मैंने बाथरूम की तरफ देखा, उसका दरवाजा भी बाहर से ही लॉक था।

मैने दरवाजे पर नजर डाली, दरवाजा इस वक़्त हल्का सा खुला हुआ था। मुझे तत्काल इस बात का ध्यान हो आया कि दरवाजा मैंने अनामिका के घर मे घुसते ही बन्द कर दिया था।

अब दरवाजा खुला होने का मतलब था कि चिड़िया फुर्र हो चुकी थी।

मैंने दोनो कॉफी के कप टेबल पर रखे, और अपने बेड पर धम्म से बैठ गया।

मेरी समझ मे नही आ रहा था की मेरे फ्लैट में आने का उसका मकसद क्या था, और वो जिस तरह से एकाएक गायब हुई है, उसके पीछे उसका उद्देश्य क्या था।

अचानक ही मेरे दिमाग मे एक बिजली सी कौंधी और मै अपनी जगह से उछल कर खड़ा हो गया।

मैंने तत्काल कमरे में अपनी नजर घुमाई। घर की सभी चीजें अपने स्थान पर यथावत थी।

फिर मैंने दराजो को खंगालना शुरू किया। दराज में नजर पड़ते ही मेरे होश फाख्ता हो चुके थे।

आपके इस सेवक की पिस्टल दराज से गायब थी।


जारी रहेगा________✍️
Kahani ki shuruaat achhi he laadle :applause:
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
Staff member
Moderator
43,967
79,953
304

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
Staff member
Moderator
43,967
79,953
304
#15

मैने रिपोर्ट को पढा। रिपोर्ट का हर अक्षर मुझे गुनाहगार साबित कर रहा था।

मुझे एक ऐसी लड़की का हत्यारा ठहराया जा रहा था, जिसका मैं नाम तक नही जा नता था।

जब भगवान सिंह ने मुझें उस लड़की की फ़ाइल दिखाई थी, तब भी मेरा ध्यान उसके नाम से ज्यादा उसकी फ़ोटो को देखने मे ज्यादा था।

"जिस लड़की के कत्ल का इल्जाम मुझ पर लगा रहे हो, उस लड़की का नाम जान सकता हूँ" मेरी बात सुनकर भगवान सिंह ने मेरी ओर अचरज से देखा।

"कमाल है अपनी गर्लफ्रैंड का नाम नही जानते हो" उसकी आवाज में भी हैरानी झलक रही थी।

"मुझे गुमनाम लड़कियों से इश्क लड़ाने में ज्यादा आनंद आता है, इसलिए मैं किसी लड़की से उसका नाम नही पूछता, वैसे भी शेक्सपीयर ने कहा भी है कि" नाम मे क्या रखा है" मैंने एक आहत मुस्कान के साथ बोला।

"संध्या नाम है लड़की का ! और यही विजय विहार में रहती है" भगवान सिंह ने अब उसका नाम और उसका ठिकाना दोनो बता दिया।

"अब उसका ठिकाना इसलिए बता रहे हो, क्यो कि अब मैं जेल जा रहा हूँ" मैंने हल्की सी मुस्कान के साथ बोला।

"अभी दो दिन तो तुम्हारी सेवा मै यही हवालात में ही करूँगा, दो दिन कोर्ट की छुट्टी है, उसके बाद ही तुम्हे रिमांड पर लिया जाएगा, देखते है कोर्ट कितने दिन का तुम्हारा रिमांड देती है, रिमांड पूरा होने के बाद ही जेल जाओगे" भगवान सिंह मेरा पूरा शेड्यूल तैयार भी कर चुका था।

ये थाना ही मेरे लिये मनहूस था। पहले भी इसी थाने में मेरी गिरफ्तारी की नौबत आ गई थी, वो केस भी इन्हीं सौम्या मैडम का था, और आज दूसरी बार भी इसी थाने में मेरी गिरफ्तारी की नौबत आ गई थी। इस बार भी सौम्या ही कहीं न कहीं इस मामले से जुड़ी हुई थी।

लेकिन मेरे सामने सबसे बड़ी पहेली तो ये संध्या नाम की लड़की थी, जिसे मैं न जानता था न पहचानता था, लेकिन मरकर भी मेरी जिंदगी की शाम करनें का सामान कर गई थी।

"फोन तो कर सकता हूँ जहाँ पनाह" मैने भगवान सिंह से पूछा।

"हाँ कर सकते हो भाई, अपनी गिरफ्तारी की सूचना अपने किसी परिजन को देना चाहो तो दे सकते हो, ये तो कानून में भी है" भगवान सिंह ने मुझे बोला।

उसके बोलते ही मैने रागिनी को फोन लगाया।

"तुम्हारे बॉस को रोहिणी थाने की पुलिस ने अरेस्ट कर लिया है, अब तुम्हारी सैलरी कौन देगा" मैने इन हालातों में भी रागिनी से वही मजाक किया, जो वो अक्सर मेरे साथ करती थी।

"उस पिस्टल की रिपोर्ट आ गई है क्या" रागिनी को जैसे पहले से ही अंदाजा था कि ऐसा ही कुछ होने वाला है।

"हाँ रिपोर्ट आ गई है, उस पिस्टल से एक कत्ल की वारदात हुई है और पिस्टल पर मेरी ही उंगलियों के निशान है" मैने संक्षेप में रागिनी को बताया।

"चिंता मत करो, इस महीने की सैलरी तो आपके हाथों से ही लूँगी, मैं और सौम्या अभी आधे घण्टे में थाने पहुंच रहे है" ये बोलकर रागिनी ने फोन काट दिया।

मैं कुछ पल तक उस मोबाइल को घूरता रहा और अभी उस मोबाइल को अपनी जेब के हवाले करनें ही वाला था कि जैसे अचानक मुझे कुछ याद आया हो।

"जनाब ! आपने बोला था कि संध्या के मोबाइल में मेरा नंबर आपको मेरे नाम से सेव किया हुआ मिला था, फिर तो आपने कॉल डिटेल भी निकलवाई होंगी, मेरी उस तथा कथित प्रेयशी ने कितनी बार मुझ से फोन पर बात की थी, ये तो आपको पता चल ही चुका होगा" मैने भगवान सिंह से पूछा।

"अभी वो रिपोर्ट आई नही है, कल दोपहर तक आ जाएगी, अभी तो कई दिनों तक हमारे ही मेहमान रहने वाले हो, वो भी दिखा देंगे, क्यो चिंता कर रहें हो जासूस साहब" भगवान सिंह अब मेरी हर बात का जवाब तंज भरी मुस्कान के साथ दे रहा था।

"आपके केस की बुनियाद बहुत कमजोर है, सिर्फ कॉल डिटेल और ये डायरी का झूठ ही इस बात को सिद्ध कर देगा कि मुझें किसी साजिश का शिकार बनाया जा रहा है" मैने विश्वास भरे स्वर में कहा।

"और पिस्टल के बारे में क्या बोलोगे, मत भूलों की उससे निकली हुई गोली ही संध्या के जिस्म में मिली है, और उस पिस्टल पर फिंगरप्रिंट भी तुम्हारे हैं, ये सबसे ठोस सबूत है तुम्हारे खिलाफ"

भगवान सिंह की बात का जवाब देने के लिये अभी मैंने अपना मुंह खोला ही था कि देवप्रिय ने एक गहरी मुस्कान के साथ कमरे में प्रवेश किया।

××××××××××

घँटे भर में ही रागिनी और सौम्या थाने में आ चुके थे। मैं अभी तक भगवान सिंह के कमरे में ही था, थाना इंचार्ज माहेश्वरी साहब मेरा हालचाल पूछकर जा चुके थे।

"भगवान सिंह जी, उस पिस्टल से चली हुई गोली के अलावा कोई और सबूत भी है आपके पास, जिससे आप रोमेश और उस लड़की की आपस मे जान पहचान सिद्ध कर सकतें हो" पूरी बात सुनने के बाद रागिनी ने सबसे पहला सवाल किया था।

"एक डायरी भी है, जो कि संध्या के कमरे से बरामद हुई है, उसमे उसने खुद रोमेश के साथ उसकी आशनाई का जिक्र किया हुआ है" भगवान सिंह ने बोला।

"इसका मतलब लड़की को डायरी लिखने का शौक रहा होगा, फिर तो आपने उसकी पूरी डायरी पढ़कर ये भी जान लिया होगा कि उस लड़की के साथ रोमेश की आशिकी कब से शुरू हुई थी" रागिनी ने फिर से सवाल किया।

"मैडम! यहां मैं आपके सवालो के जवाब देने के लिये नही बैठा हूँ, बल्कि रोमेश से इन सवालों के जवाब लेने के लिए बैठा हूँ" भगवान सिंह ने उखड़ते हुए बोला।

"लेकिन रोमेश के जवाब के आधार पर तो आप कार्यवाही करोगे नही, कार्यवाही तो आप इसी बुनियाद पर करोगे न कि गोली रोमेश की पिस्टल से चली और उस पर उंगलियों के निशान भी रोमेश के पाये गए, और आपको अपनी इस थ्योरी को मजबूत करने के लिए उस डायरी की सपोर्ट मिल जाती है, यही बात है न सर" रागिनी ने अब बातचीत की कमान खुद ही सम्हाल ली थी, क्यो कि मै तो बोल बोल कर थक चुका था।

"जी अभी तक तो इसी आधार पर कार्यवाही कर रहे है, शायद आपकी नजर में इस हत्या में रोमेश की पिस्टल का प्रयोग होना छोटी बात होगी, लेकिन मेरी नजर में और कानून की नजर में ये बहुत बड़ी बात है" भगवान सिंह ने समझाने वाले स्वर में बोला।

"इसका मतलब मै आपकी पिस्टल चुराकर ले जाऊँ और किसी का कत्ल कर दूँ, तो उसके जिम्मेदार आप ही होगे, मैं तो बेगुनाह ही रहूँगी, क्यो कि पिस्टल आपकीं होंगी, गोली भी आपकी होगी, और इतनी अक्ल तो मैं भी लड़ा लूँगी की आपके हाथों के निशान उस पिस्टल से मिटने न दूँ" रागिनी की बात पर भगवान सिंह मुंह बायें रागिनी की तरफ देखता ही रह गया।

"लेकिन मैडम! रोमेश की पिस्टल की गुमशुदगी की रिपोर्ट झूठी पाई गई थी, पिस्टल उन्ही के घर से बरामद हुई थी" भगवान सिंह भी हार मानने को तैयार नही था।

"किनकी मौजूदगी में वो पिस्टल रोमेश के घर से ही बरामद हुई थी, उन्ही लोगो की मौजूदगी में बरामद हुई थी न, जिन लोगो पर रोमेश ने अपनी पिस्टल चोरी करके ले जाने का आरोप लगाते हुए आपके ही थाने में रिपोर्ट लिखवाई थी, लेकिन आपने इस बात की कोई जांच नही की वे लोग उसी समय वहां पर क्या कर रहे थे, जब पिस्टल चोरी की रिपोर्ट लिखवाई गई, तब क्या आपके सहकर्मी ने घर जाकर एक बार भी तफशिस की क्या सच मे ही पिस्टल चोरी हुई है या नही?, अगर आप उसी वक़्त रोमेश के घर की तलाशी ली होती तो क्या पता उसी दिन दूध का दूध और पानी का पानी हो जाता"

रागिनी अपनी फूल फॉर्म में थी और भगवान सिंह को सूझ नही रहा था।

"मैडम जरूरी तो नही है कि रोमेश ने पिस्टल घर मे ही कहीं छुपाई हो, कहीं और भी छुपा सकता है" भगवान सिंह को अब कुछ न कुछ जवाब तो देना ही था।

"फिर उस लड़की को गोली मारकर खुद ही पिस्टल को अपने घर से बरामद करवाकर अपनी ही पूरी प्लानिंग पर पानी फेर दे, वाह जनाब, बड़ी दूर की सोचते हो आप" रागिनी ने बोला ही था कि तभी सौम्या भी बोल पड़ी।

"सर! एक बार लीक से हटकर सोचिए कि ये सारा बखेड़ा सिर्फ रोमेश को फ़साने के लिये किया जा रहा है, ये तो आपके ऊपर है कि आप इस साजिश रचने वालो को पकड़कर एक बेगुनाह को सजा होने से बचा सकते हो, लेकिन अगर आपने सोच ही लिया है कि आपने रोमेश को ही गुनाहगार मानकर उसे ही सजा दिलवानी है, तो इस ख्याल को दिल से निकाल देना, आपका ये केस कोर्ट में टिकने वाला नही है" सौम्या ने बड़े ही जहीन तरीके से भगवान सिंह को समझाया।

"मैडम! अभी आप लोग घर जाइये, अभी मैं कल अपने सिनियर से इस केस के सभी पहलुओं पर डिसकस करने के बाद ही कोई केस दर्ज करूँगा, लेकिन मैं अभी रोमेश को घर जाने की इजाजत नही दे सकता हूँ, आप समझिए ये कत्ल का मामला है, कोई मामूली लड़ाई झगड़े का नही है" भगवान सिंह ने स्पष्ट शब्दों में बोला।

"कोई नही रागिनी मुझें यही रहने दो, इतने तुम अपने तरीके से अपनी इन्वेस्टिगेशन जारी रखो, मुझे यकीन है, की भगवान सिंह उन लोगो को पकड़े चाहे न पकड़े, लेकिन वे लोग तुमसे नही बच सकते है" मैने रागिनी को बोला, जिसे सुनकर रागिनी तो मुस्करा पड़ी थी, लेकिन भगवान सिंह ने जरूर बुरा सा मुंह बना लिया था।

"तुम खाना खा लो रोमेश, हम घर से तुम्हारा खाना लेकर आये है" सौम्या ने एक टिफिन मेरी ओर बढ़ाते हुए बोला।

"ठीक है खाना तो मैं खा लूंगा, लेकिन तुम लोग अब अपने घर जाओ, रात काफी होने वाली है" मैंने उन दोनो को बोला।

मेरी बात सुनकर रागिनी ने सहमति में सिर हिलाया।

"ठीक है सर! हम लोग सुबह आते है, कल से उन लोगों की भी उल्टी गिनती शुरू होगी, जिन लोगों ने आपके साथ ये खेल खेला है" रागिनी ये बोलकर कुर्सी से खड़ी हो गई।

"मैडम! आप चिंता मत कीजिये! अगर रोमेश बेगुनाह है तो कोई भी इसे फँसा नही पाएगा, लेकिन ये अगर गुनाहगार है तो, कोई इसे बचा भी नही पायेगा" भगवान सिंह ने रागिनी की ओर देख कर बोला।

"भगवान सिंह जी आप सिर्फ नाम के भगवान हो, जो ऊपर असली भगवान बैठे है न, वो भी अगर खुद आकर बोले की रोमेश गुनाहगार है तो मैं उनकी बात पर भी विश्वास नही करूँगी! और आप चिंता मत कीजिये, सिर्फ अड़तालीस घँटे में असली गुनाहगार यही रोमेश की जगह बैठे होगे" रागिनी ने पुरजोर तरीके से भगवान सिंह की बात का जवाब दिया।

उसके बाद रागिनी और सौम्या वहां एक पल के लिये भी नही रुकी थी।

"क्या लड़की है ये यार" रागिनी के जाते ही, भगवान सिंह ने अपना सिर खुजाते हुए बोला।

"इससे बच कर रहना सर! ये मार्शल आर्ट की चैंपियन है, इससे तो मैं भी पंगे नही लेता" मैंने ठिठोली भरे अंदाज में बोला।

"सच मे" भगवान सिंह को मेरी बात का विश्वास ही नही हो रहा था।

"विश्वास नही हो तो ! आप कल सुबह खुद टेस्ट लेकर देख लेना" मैने अपनी चिर-परिचित मुस्कान के साथ बोला।

मेरी बात सुनकर भगवान सिंह के मुंह से कुछ और नही निकला।

अब आपका ये सेवक तो इस वक़्त कानून के शिकंजे में कसा जा चुका था, और रागिनी ने भगवान सिंह को बोल दिया था कि अड़तालीस घँटे में वो असली गुनाहगारों को उसके सामने हाजिर कर देगी।

अब आगे की समूची दास्ताँ आपको रागिनी की जुबानी ही सुनने को मिलेगी, वो अपने गुरू को इस झेमेले से निकाल पाएगी या नही?,

अपना अड़तालीस घँटे का वादा वो कैसे निभाएगी, ये अब आप उसी की जुबानी सुनिए।


जारी रहेगा______✍️
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
Staff member
Moderator
43,967
79,953
304
Bahut hi shandar shuruwat

Superb updates....

Kon fasana chahega Romesh ko? Aur Kyu?

Ye update kaafi mazedaar aur suspense-filled tha.
Soumya–Ragini–Romesh ki nok-jhok ne mood light rakha,
lekin Devika ka track story ko ekdum dark thriller mode me le gaya.

Devika ka Kumar se blackmail hona,
Kumar ki car chura lena,
Romesh ki pistol lekar bhaag jana,
aur car me khoon milna—
ye saari cheezein dikhati hain ki wo koi bada game khel rahi hai.

Romesh bhi dheere-dheere uske trap me fas raha hai,
shayad kisi purane dushman ki chaal ho.

Overall update grippy, fast-paced aur interesting tha.
Next update me toh blast pakka hai.

:congrats: start new story

Awesome update and lovely story

तितली…या … भँवरा … और मधु?

Intresting, kahani har update ke baad aur rochak hoti jaa rahi hai, kamal likh raha hai Raju, ye bc dono choriya to romesh ki lene me lagi hue hai...
Dekhte hai kya hota hai.

Haan! Pahle ye chhichhori harkate kar lo kyoki ye zyada zaruri hai, hat lauda :buttkick:

Dear detective zara explain karoge ki tumhe kaise pata chala ki dono laundiyo ne devpriya ke sath mil kar ye jaal buna hai....matlab kuch bhi :roll:

Aur fir jab ye pata chal hi Gaya to ACP Sharma ki rahnumaai lene kyo chal diye be, saboot ke sath seena chauda kar ke seedhe thane pahuch Jana tha aur devpriya ki aankho me aankhen daal kar unki saari kartoot expose kar deni chahiye thi...kya yaar sahi bol rela tha apan ki ye detective kahlane ke laayak hi nahi hai. Ekdam noob harkate hain iski :D

Ohh really....I mean itna talent hai tumme???? Aur koi talent ho ya na ho lekin joke mast maara hai:lotpot:


Anyway....Kumar Gaurav gayab hai...uske bare me ab kya hi bole apan, matlab ki according to romesh jab ye sara kiya dhara un do laundiyo aur devpriya ka hi hai to zaahir hai Kumar Gaurav ke gayab hone ke pichhe bhi unhi ka hath hoga.... :D

ACP ki maujoodgi me in jaal bunne walo se puchha jaye ki ye sab in logo ne kyo kiya, and one more thing...jab ye khulasa ho hi gaya hai to saumya ko ab kisse aur kis baat khatra??? :roll:

Overall mast funny type update tha ye, keep it up :thumbup:

Super update bhai
Kahani ulzati ja rhi h

1 और नया पंगा fas गया रोमेश बाबु की जान को....


और 1 शायद gaurav के रूप में फैक्ट्री में इंतजार कर रहा है

लगता है रोमेश बाबू ने उस लड़की के साथ मुँह काला किया है... रात भर मज़े किए और फिर रात की बात सुबह भूल गया. चलो ठीक है वो अपने हिसाब से.. "No Strings Attached" वाला बंदा है. दम भर खाना है और डकार भी नहीं लेना है. 😂😅

Btw, very nice writing... Good Update.. Loved it!

रिव्यू की शुरुआत की जाए

कहानी में पुराने हथकंडे खुलते जा रहे हैं, क्या हुआ, किस वजह से, क्या हो रहा धीरे-धीरे सामने आता जा रहा है।

मैंने आख़िरी रिव्यू में कहा था कि जो लाश मिली है, उनसे रोमीश का कनेक्शन कुछ न कुछ ज़रूर होगा, वरना मर्डर के इल्ज़ाम रोमीश पर इतना आसानी से नहीं जाता।

अब वह लड़की जिसकी लाश मिली, वह रोमीश की परिचित तो नहीं लगती है। उसके ही जिस भी डायरी सामने आई, वह भी लग तो फ़ेक रही है। सोचने में कहीं न कहीं कुछ तो मिसिंग लग रहा है कि किसने वह फ़ेक सबूत प्लांट किया।

जिस तरह अभी भगवान सिंह के सुर बदले लग रहे हैं, मुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि दुश्मन खेमे की पहुँच आला अधिकारी तक है। क्योंकि पहले देवप्रिय, अब भगवान सिंह ये लोग किसी के दबाव में रोमीश को धरना चाहते हैं।

कुछ हद तक मेरा मानना है कि कुछ लोग रोमीश की पुलिस के ऊपर तक की पहुँच से जलते हैं। क्योंकि जो काम पुलिस का है, उसमें रोमीश नाम का प्राइवेट डिटेक्टिव आता है और केस सॉल्व कर देता है, जिससे स्वाभाविक है कि उच्च अधिकारी में पुलिस डिपार्टमेंट पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

मेरा एक कंसर्न है जिस तरह अपडेट के बीच में सीन टाइटल दिया गया है, उदाहरण: कुमार गौरव की लाश वह सस्पेंस खत्म कर देता है।

वैसे दिमाग में बात आई है कि जिस महिला की वजह से पूरा कांड हुआ, उसका तो ज़िक्र आया नहीं है। अशोक बंसल की आधी उम्र की लवर क्या सच में मर गई या वह अभी अंडरग्राउंड में ज़िंदा है। वैसे वह महिला 27–28 की होनी चाहिए। मुझे क्या लगता है, यह महिला हमें आगे देखने को मिलेगी, क्योंकि लेखक महोदय बड़ी चालाकी से उस महिला का विस्तार कम शब्दों में निपटा गए, तो इसलिए शक जायज़ है।

अब मुझे माजरा यह समझ नहीं आ रहा है कि रोमीश के ऊपर अगर कुमार की हत्या का इल्ज़ाम लगवाना है, तो वह कैसे लगेगा। क्योंकि रोमीश के अनुसार उसे कुमार ने अभी फ़ोन किया है, वह भी उस समय पुलिस स्टेशन में था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु समय बताया जाएगा और सीसीटीवी की मदद से रोमीश साबित कर देगा कि मैं तो पुलिस स्टेशन में था उस समय। साथ ही रोमीश की पिस्टल पुलिस कस्टडी में है। अगर कुमार की हत्या रोमीश की पिस्टल से की जाती है, तो डिपार्टमेंट पर सवाल उठेगा कि तुम्हारी कस्टडी से पिस्टल कैसे गायब हुई।

कुल मिलाकर बहुत कुछ हो रहा है।
अगले अपडेट का इंतज़ार

Raj_sharma

Shaandar update

Bhut hi badhiya update Bhai
Romesh babu ke to is samay charo taraf se bhut buri tarike se Lage pade hai
Dhekte hai vo is jamele se kese niklate hai

Bahut hi shaandar update diya hai Raj_sharma bhai....
Nice and lovely update....

SARKAR ...

romeshbabu ke to lag gaye ..................... *********** :winkiss:

AAAAAAYYYYYYYEEEEEE
Ye kya ho gya Romesh such me fas gya katal ke iljam me
Jane ab kya hoga kaise suljha payega Romesh ab is paheli ko

Nice update....

Bahut hi gazab ki update he Raj_sharma Bhai,

Jaisa socha tha vaisa hi hua, kumar gaurav ko kisi ne pehle hi nipta diya.........

Devika par shaq ki suyi ghuma rahe he romesh babu......

Lekin forensic report aane ke baad to romesh babu ke hi L lag gaye...........

Keep rocking bro

Nice update....

फिक्र मत कीजिये. हम भी समय से पहले पर्दा उठ जाए. यह नही चाहेंगे. क्यों की ज्यादा चतुराई कहानी पढ़ने का मझा किरकिरा कर देती है.

Kahani ki shuruaat achhi he laadle :applause:

Update posted friends :declare:
 
Top