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Thriller कातिल रात

Ajju Landwalia

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#15

मैने रिपोर्ट को पढा। रिपोर्ट का हर अक्षर मुझे गुनाहगार साबित कर रहा था।

मुझे एक ऐसी लड़की का हत्यारा ठहराया जा रहा था, जिसका मैं नाम तक नही जा नता था।

जब भगवान सिंह ने मुझें उस लड़की की फ़ाइल दिखाई थी, तब भी मेरा ध्यान उसके नाम से ज्यादा उसकी फ़ोटो को देखने मे ज्यादा था।

"जिस लड़की के कत्ल का इल्जाम मुझ पर लगा रहे हो, उस लड़की का नाम जान सकता हूँ" मेरी बात सुनकर भगवान सिंह ने मेरी ओर अचरज से देखा।

"कमाल है अपनी गर्लफ्रैंड का नाम नही जानते हो" उसकी आवाज में भी हैरानी झलक रही थी।

"मुझे गुमनाम लड़कियों से इश्क लड़ाने में ज्यादा आनंद आता है, इसलिए मैं किसी लड़की से उसका नाम नही पूछता, वैसे भी शेक्सपीयर ने कहा भी है कि" नाम मे क्या रखा है" मैंने एक आहत मुस्कान के साथ बोला।

"संध्या नाम है लड़की का ! और यही विजय विहार में रहती है" भगवान सिंह ने अब उसका नाम और उसका ठिकाना दोनो बता दिया।

"अब उसका ठिकाना इसलिए बता रहे हो, क्यो कि अब मैं जेल जा रहा हूँ" मैंने हल्की सी मुस्कान के साथ बोला।

"अभी दो दिन तो तुम्हारी सेवा मै यही हवालात में ही करूँगा, दो दिन कोर्ट की छुट्टी है, उसके बाद ही तुम्हे रिमांड पर लिया जाएगा, देखते है कोर्ट कितने दिन का तुम्हारा रिमांड देती है, रिमांड पूरा होने के बाद ही जेल जाओगे" भगवान सिंह मेरा पूरा शेड्यूल तैयार भी कर चुका था।

ये थाना ही मेरे लिये मनहूस था। पहले भी इसी थाने में मेरी गिरफ्तारी की नौबत आ गई थी, वो केस भी इन्हीं सौम्या मैडम का था, और आज दूसरी बार भी इसी थाने में मेरी गिरफ्तारी की नौबत आ गई थी। इस बार भी सौम्या ही कहीं न कहीं इस मामले से जुड़ी हुई थी।

लेकिन मेरे सामने सबसे बड़ी पहेली तो ये संध्या नाम की लड़की थी, जिसे मैं न जानता था न पहचानता था, लेकिन मरकर भी मेरी जिंदगी की शाम करनें का सामान कर गई थी।

"फोन तो कर सकता हूँ जहाँ पनाह" मैने भगवान सिंह से पूछा।

"हाँ कर सकते हो भाई, अपनी गिरफ्तारी की सूचना अपने किसी परिजन को देना चाहो तो दे सकते हो, ये तो कानून में भी है" भगवान सिंह ने मुझे बोला।

उसके बोलते ही मैने रागिनी को फोन लगाया।

"तुम्हारे बॉस को रोहिणी थाने की पुलिस ने अरेस्ट कर लिया है, अब तुम्हारी सैलरी कौन देगा" मैने इन हालातों में भी रागिनी से वही मजाक किया, जो वो अक्सर मेरे साथ करती थी।

"उस पिस्टल की रिपोर्ट आ गई है क्या" रागिनी को जैसे पहले से ही अंदाजा था कि ऐसा ही कुछ होने वाला है।

"हाँ रिपोर्ट आ गई है, उस पिस्टल से एक कत्ल की वारदात हुई है और पिस्टल पर मेरी ही उंगलियों के निशान है" मैने संक्षेप में रागिनी को बताया।

"चिंता मत करो, इस महीने की सैलरी तो आपके हाथों से ही लूँगी, मैं और सौम्या अभी आधे घण्टे में थाने पहुंच रहे है" ये बोलकर रागिनी ने फोन काट दिया।

मैं कुछ पल तक उस मोबाइल को घूरता रहा और अभी उस मोबाइल को अपनी जेब के हवाले करनें ही वाला था कि जैसे अचानक मुझे कुछ याद आया हो।

"जनाब ! आपने बोला था कि संध्या के मोबाइल में मेरा नंबर आपको मेरे नाम से सेव किया हुआ मिला था, फिर तो आपने कॉल डिटेल भी निकलवाई होंगी, मेरी उस तथा कथित प्रेयशी ने कितनी बार मुझ से फोन पर बात की थी, ये तो आपको पता चल ही चुका होगा" मैने भगवान सिंह से पूछा।

"अभी वो रिपोर्ट आई नही है, कल दोपहर तक आ जाएगी, अभी तो कई दिनों तक हमारे ही मेहमान रहने वाले हो, वो भी दिखा देंगे, क्यो चिंता कर रहें हो जासूस साहब" भगवान सिंह अब मेरी हर बात का जवाब तंज भरी मुस्कान के साथ दे रहा था।

"आपके केस की बुनियाद बहुत कमजोर है, सिर्फ कॉल डिटेल और ये डायरी का झूठ ही इस बात को सिद्ध कर देगा कि मुझें किसी साजिश का शिकार बनाया जा रहा है" मैने विश्वास भरे स्वर में कहा।

"और पिस्टल के बारे में क्या बोलोगे, मत भूलों की उससे निकली हुई गोली ही संध्या के जिस्म में मिली है, और उस पिस्टल पर फिंगरप्रिंट भी तुम्हारे हैं, ये सबसे ठोस सबूत है तुम्हारे खिलाफ"

भगवान सिंह की बात का जवाब देने के लिये अभी मैंने अपना मुंह खोला ही था कि देवप्रिय ने एक गहरी मुस्कान के साथ कमरे में प्रवेश किया।

××××××××××

घँटे भर में ही रागिनी और सौम्या थाने में आ चुके थे। मैं अभी तक भगवान सिंह के कमरे में ही था, थाना इंचार्ज माहेश्वरी साहब मेरा हालचाल पूछकर जा चुके थे।

"भगवान सिंह जी, उस पिस्टल से चली हुई गोली के अलावा कोई और सबूत भी है आपके पास, जिससे आप रोमेश और उस लड़की की आपस मे जान पहचान सिद्ध कर सकतें हो" पूरी बात सुनने के बाद रागिनी ने सबसे पहला सवाल किया था।

"एक डायरी भी है, जो कि संध्या के कमरे से बरामद हुई है, उसमे उसने खुद रोमेश के साथ उसकी आशनाई का जिक्र किया हुआ है" भगवान सिंह ने बोला।

"इसका मतलब लड़की को डायरी लिखने का शौक रहा होगा, फिर तो आपने उसकी पूरी डायरी पढ़कर ये भी जान लिया होगा कि उस लड़की के साथ रोमेश की आशिकी कब से शुरू हुई थी" रागिनी ने फिर से सवाल किया।

"मैडम! यहां मैं आपके सवालो के जवाब देने के लिये नही बैठा हूँ, बल्कि रोमेश से इन सवालों के जवाब लेने के लिए बैठा हूँ" भगवान सिंह ने उखड़ते हुए बोला।

"लेकिन रोमेश के जवाब के आधार पर तो आप कार्यवाही करोगे नही, कार्यवाही तो आप इसी बुनियाद पर करोगे न कि गोली रोमेश की पिस्टल से चली और उस पर उंगलियों के निशान भी रोमेश के पाये गए, और आपको अपनी इस थ्योरी को मजबूत करने के लिए उस डायरी की सपोर्ट मिल जाती है, यही बात है न सर" रागिनी ने अब बातचीत की कमान खुद ही सम्हाल ली थी, क्यो कि मै तो बोल बोल कर थक चुका था।

"जी अभी तक तो इसी आधार पर कार्यवाही कर रहे है, शायद आपकी नजर में इस हत्या में रोमेश की पिस्टल का प्रयोग होना छोटी बात होगी, लेकिन मेरी नजर में और कानून की नजर में ये बहुत बड़ी बात है" भगवान सिंह ने समझाने वाले स्वर में बोला।

"इसका मतलब मै आपकी पिस्टल चुराकर ले जाऊँ और किसी का कत्ल कर दूँ, तो उसके जिम्मेदार आप ही होगे, मैं तो बेगुनाह ही रहूँगी, क्यो कि पिस्टल आपकीं होंगी, गोली भी आपकी होगी, और इतनी अक्ल तो मैं भी लड़ा लूँगी की आपके हाथों के निशान उस पिस्टल से मिटने न दूँ" रागिनी की बात पर भगवान सिंह मुंह बायें रागिनी की तरफ देखता ही रह गया।

"लेकिन मैडम! रोमेश की पिस्टल की गुमशुदगी की रिपोर्ट झूठी पाई गई थी, पिस्टल उन्ही के घर से बरामद हुई थी" भगवान सिंह भी हार मानने को तैयार नही था।

"किनकी मौजूदगी में वो पिस्टल रोमेश के घर से ही बरामद हुई थी, उन्ही लोगो की मौजूदगी में बरामद हुई थी न, जिन लोगो पर रोमेश ने अपनी पिस्टल चोरी करके ले जाने का आरोप लगाते हुए आपके ही थाने में रिपोर्ट लिखवाई थी, लेकिन आपने इस बात की कोई जांच नही की वे लोग उसी समय वहां पर क्या कर रहे थे, जब पिस्टल चोरी की रिपोर्ट लिखवाई गई, तब क्या आपके सहकर्मी ने घर जाकर एक बार भी तफशिस की क्या सच मे ही पिस्टल चोरी हुई है या नही?, अगर आप उसी वक़्त रोमेश के घर की तलाशी ली होती तो क्या पता उसी दिन दूध का दूध और पानी का पानी हो जाता"

रागिनी अपनी फूल फॉर्म में थी और भगवान सिंह को सूझ नही रहा था।

"मैडम जरूरी तो नही है कि रोमेश ने पिस्टल घर मे ही कहीं छुपाई हो, कहीं और भी छुपा सकता है" भगवान सिंह को अब कुछ न कुछ जवाब तो देना ही था।

"फिर उस लड़की को गोली मारकर खुद ही पिस्टल को अपने घर से बरामद करवाकर अपनी ही पूरी प्लानिंग पर पानी फेर दे, वाह जनाब, बड़ी दूर की सोचते हो आप" रागिनी ने बोला ही था कि तभी सौम्या भी बोल पड़ी।

"सर! एक बार लीक से हटकर सोचिए कि ये सारा बखेड़ा सिर्फ रोमेश को फ़साने के लिये किया जा रहा है, ये तो आपके ऊपर है कि आप इस साजिश रचने वालो को पकड़कर एक बेगुनाह को सजा होने से बचा सकते हो, लेकिन अगर आपने सोच ही लिया है कि आपने रोमेश को ही गुनाहगार मानकर उसे ही सजा दिलवानी है, तो इस ख्याल को दिल से निकाल देना, आपका ये केस कोर्ट में टिकने वाला नही है" सौम्या ने बड़े ही जहीन तरीके से भगवान सिंह को समझाया।

"मैडम! अभी आप लोग घर जाइये, अभी मैं कल अपने सिनियर से इस केस के सभी पहलुओं पर डिसकस करने के बाद ही कोई केस दर्ज करूँगा, लेकिन मैं अभी रोमेश को घर जाने की इजाजत नही दे सकता हूँ, आप समझिए ये कत्ल का मामला है, कोई मामूली लड़ाई झगड़े का नही है" भगवान सिंह ने स्पष्ट शब्दों में बोला।

"कोई नही रागिनी मुझें यही रहने दो, इतने तुम अपने तरीके से अपनी इन्वेस्टिगेशन जारी रखो, मुझे यकीन है, की भगवान सिंह उन लोगो को पकड़े चाहे न पकड़े, लेकिन वे लोग तुमसे नही बच सकते है" मैने रागिनी को बोला, जिसे सुनकर रागिनी तो मुस्करा पड़ी थी, लेकिन भगवान सिंह ने जरूर बुरा सा मुंह बना लिया था।

"तुम खाना खा लो रोमेश, हम घर से तुम्हारा खाना लेकर आये है" सौम्या ने एक टिफिन मेरी ओर बढ़ाते हुए बोला।

"ठीक है खाना तो मैं खा लूंगा, लेकिन तुम लोग अब अपने घर जाओ, रात काफी होने वाली है" मैंने उन दोनो को बोला।

मेरी बात सुनकर रागिनी ने सहमति में सिर हिलाया।

"ठीक है सर! हम लोग सुबह आते है, कल से उन लोगों की भी उल्टी गिनती शुरू होगी, जिन लोगों ने आपके साथ ये खेल खेला है" रागिनी ये बोलकर कुर्सी से खड़ी हो गई।

"मैडम! आप चिंता मत कीजिये! अगर रोमेश बेगुनाह है तो कोई भी इसे फँसा नही पाएगा, लेकिन ये अगर गुनाहगार है तो, कोई इसे बचा भी नही पायेगा" भगवान सिंह ने रागिनी की ओर देख कर बोला।

"भगवान सिंह जी आप सिर्फ नाम के भगवान हो, जो ऊपर असली भगवान बैठे है न, वो भी अगर खुद आकर बोले की रोमेश गुनाहगार है तो मैं उनकी बात पर भी विश्वास नही करूँगी! और आप चिंता मत कीजिये, सिर्फ अड़तालीस घँटे में असली गुनाहगार यही रोमेश की जगह बैठे होगे" रागिनी ने पुरजोर तरीके से भगवान सिंह की बात का जवाब दिया।

उसके बाद रागिनी और सौम्या वहां एक पल के लिये भी नही रुकी थी।

"क्या लड़की है ये यार" रागिनी के जाते ही, भगवान सिंह ने अपना सिर खुजाते हुए बोला।

"इससे बच कर रहना सर! ये मार्शल आर्ट की चैंपियन है, इससे तो मैं भी पंगे नही लेता" मैंने ठिठोली भरे अंदाज में बोला।

"सच मे" भगवान सिंह को मेरी बात का विश्वास ही नही हो रहा था।

"विश्वास नही हो तो ! आप कल सुबह खुद टेस्ट लेकर देख लेना" मैने अपनी चिर-परिचित मुस्कान के साथ बोला।

मेरी बात सुनकर भगवान सिंह के मुंह से कुछ और नही निकला।

अब आपका ये सेवक तो इस वक़्त कानून के शिकंजे में कसा जा चुका था, और रागिनी ने भगवान सिंह को बोल दिया था कि अड़तालीस घँटे में वो असली गुनाहगारों को उसके सामने हाजिर कर देगी।

अब आगे की समूची दास्ताँ आपको रागिनी की जुबानी ही सुनने को मिलेगी, वो अपने गुरू को इस झेमेले से निकाल पाएगी या नही?,

अपना अड़तालीस घँटे का वादा वो कैसे निभाएगी, ये अब आप उसी की जुबानी सुनिए।


जारी रहेगा______✍️

Gazab ki update he Raj_sharma Bhai,

Ab sabkuch ragini ki investigation par depend karega........

Ragini 48 gahnte se bhi pehle asli gunahgaar ko pakad legi..........

Aakhir cheli kiski he...........

Keep rocking Bro
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Gazab ki update he Raj_sharma Bhai,

Ab sabkuch ragini ki investigation par depend karega........

Ragini 48 gahnte se bhi pehle asli gunahgaar ko pakad legi..........

Aakhir cheli kiski he...........

Keep rocking Bro
Off course Romesh ki cheli hai, koi kasar na chhodegi wo, and mujhe bhi yahi lagta hai ki wo bacha legi use, thank you very much for your wonderful review and support :hug:
 

Dhakad boy

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मैने रिपोर्ट को पढा। रिपोर्ट का हर अक्षर मुझे गुनाहगार साबित कर रहा था।

मुझे एक ऐसी लड़की का हत्यारा ठहराया जा रहा था, जिसका मैं नाम तक नही जा नता था।

जब भगवान सिंह ने मुझें उस लड़की की फ़ाइल दिखाई थी, तब भी मेरा ध्यान उसके नाम से ज्यादा उसकी फ़ोटो को देखने मे ज्यादा था।

"जिस लड़की के कत्ल का इल्जाम मुझ पर लगा रहे हो, उस लड़की का नाम जान सकता हूँ" मेरी बात सुनकर भगवान सिंह ने मेरी ओर अचरज से देखा।

"कमाल है अपनी गर्लफ्रैंड का नाम नही जानते हो" उसकी आवाज में भी हैरानी झलक रही थी।

"मुझे गुमनाम लड़कियों से इश्क लड़ाने में ज्यादा आनंद आता है, इसलिए मैं किसी लड़की से उसका नाम नही पूछता, वैसे भी शेक्सपीयर ने कहा भी है कि" नाम मे क्या रखा है" मैंने एक आहत मुस्कान के साथ बोला।

"संध्या नाम है लड़की का ! और यही विजय विहार में रहती है" भगवान सिंह ने अब उसका नाम और उसका ठिकाना दोनो बता दिया।

"अब उसका ठिकाना इसलिए बता रहे हो, क्यो कि अब मैं जेल जा रहा हूँ" मैंने हल्की सी मुस्कान के साथ बोला।

"अभी दो दिन तो तुम्हारी सेवा मै यही हवालात में ही करूँगा, दो दिन कोर्ट की छुट्टी है, उसके बाद ही तुम्हे रिमांड पर लिया जाएगा, देखते है कोर्ट कितने दिन का तुम्हारा रिमांड देती है, रिमांड पूरा होने के बाद ही जेल जाओगे" भगवान सिंह मेरा पूरा शेड्यूल तैयार भी कर चुका था।

ये थाना ही मेरे लिये मनहूस था। पहले भी इसी थाने में मेरी गिरफ्तारी की नौबत आ गई थी, वो केस भी इन्हीं सौम्या मैडम का था, और आज दूसरी बार भी इसी थाने में मेरी गिरफ्तारी की नौबत आ गई थी। इस बार भी सौम्या ही कहीं न कहीं इस मामले से जुड़ी हुई थी।

लेकिन मेरे सामने सबसे बड़ी पहेली तो ये संध्या नाम की लड़की थी, जिसे मैं न जानता था न पहचानता था, लेकिन मरकर भी मेरी जिंदगी की शाम करनें का सामान कर गई थी।

"फोन तो कर सकता हूँ जहाँ पनाह" मैने भगवान सिंह से पूछा।

"हाँ कर सकते हो भाई, अपनी गिरफ्तारी की सूचना अपने किसी परिजन को देना चाहो तो दे सकते हो, ये तो कानून में भी है" भगवान सिंह ने मुझे बोला।

उसके बोलते ही मैने रागिनी को फोन लगाया।

"तुम्हारे बॉस को रोहिणी थाने की पुलिस ने अरेस्ट कर लिया है, अब तुम्हारी सैलरी कौन देगा" मैने इन हालातों में भी रागिनी से वही मजाक किया, जो वो अक्सर मेरे साथ करती थी।

"उस पिस्टल की रिपोर्ट आ गई है क्या" रागिनी को जैसे पहले से ही अंदाजा था कि ऐसा ही कुछ होने वाला है।

"हाँ रिपोर्ट आ गई है, उस पिस्टल से एक कत्ल की वारदात हुई है और पिस्टल पर मेरी ही उंगलियों के निशान है" मैने संक्षेप में रागिनी को बताया।

"चिंता मत करो, इस महीने की सैलरी तो आपके हाथों से ही लूँगी, मैं और सौम्या अभी आधे घण्टे में थाने पहुंच रहे है" ये बोलकर रागिनी ने फोन काट दिया।

मैं कुछ पल तक उस मोबाइल को घूरता रहा और अभी उस मोबाइल को अपनी जेब के हवाले करनें ही वाला था कि जैसे अचानक मुझे कुछ याद आया हो।

"जनाब ! आपने बोला था कि संध्या के मोबाइल में मेरा नंबर आपको मेरे नाम से सेव किया हुआ मिला था, फिर तो आपने कॉल डिटेल भी निकलवाई होंगी, मेरी उस तथा कथित प्रेयशी ने कितनी बार मुझ से फोन पर बात की थी, ये तो आपको पता चल ही चुका होगा" मैने भगवान सिंह से पूछा।

"अभी वो रिपोर्ट आई नही है, कल दोपहर तक आ जाएगी, अभी तो कई दिनों तक हमारे ही मेहमान रहने वाले हो, वो भी दिखा देंगे, क्यो चिंता कर रहें हो जासूस साहब" भगवान सिंह अब मेरी हर बात का जवाब तंज भरी मुस्कान के साथ दे रहा था।

"आपके केस की बुनियाद बहुत कमजोर है, सिर्फ कॉल डिटेल और ये डायरी का झूठ ही इस बात को सिद्ध कर देगा कि मुझें किसी साजिश का शिकार बनाया जा रहा है" मैने विश्वास भरे स्वर में कहा।

"और पिस्टल के बारे में क्या बोलोगे, मत भूलों की उससे निकली हुई गोली ही संध्या के जिस्म में मिली है, और उस पिस्टल पर फिंगरप्रिंट भी तुम्हारे हैं, ये सबसे ठोस सबूत है तुम्हारे खिलाफ"

भगवान सिंह की बात का जवाब देने के लिये अभी मैंने अपना मुंह खोला ही था कि देवप्रिय ने एक गहरी मुस्कान के साथ कमरे में प्रवेश किया।

××××××××××

घँटे भर में ही रागिनी और सौम्या थाने में आ चुके थे। मैं अभी तक भगवान सिंह के कमरे में ही था, थाना इंचार्ज माहेश्वरी साहब मेरा हालचाल पूछकर जा चुके थे।

"भगवान सिंह जी, उस पिस्टल से चली हुई गोली के अलावा कोई और सबूत भी है आपके पास, जिससे आप रोमेश और उस लड़की की आपस मे जान पहचान सिद्ध कर सकतें हो" पूरी बात सुनने के बाद रागिनी ने सबसे पहला सवाल किया था।

"एक डायरी भी है, जो कि संध्या के कमरे से बरामद हुई है, उसमे उसने खुद रोमेश के साथ उसकी आशनाई का जिक्र किया हुआ है" भगवान सिंह ने बोला।

"इसका मतलब लड़की को डायरी लिखने का शौक रहा होगा, फिर तो आपने उसकी पूरी डायरी पढ़कर ये भी जान लिया होगा कि उस लड़की के साथ रोमेश की आशिकी कब से शुरू हुई थी" रागिनी ने फिर से सवाल किया।

"मैडम! यहां मैं आपके सवालो के जवाब देने के लिये नही बैठा हूँ, बल्कि रोमेश से इन सवालों के जवाब लेने के लिए बैठा हूँ" भगवान सिंह ने उखड़ते हुए बोला।

"लेकिन रोमेश के जवाब के आधार पर तो आप कार्यवाही करोगे नही, कार्यवाही तो आप इसी बुनियाद पर करोगे न कि गोली रोमेश की पिस्टल से चली और उस पर उंगलियों के निशान भी रोमेश के पाये गए, और आपको अपनी इस थ्योरी को मजबूत करने के लिए उस डायरी की सपोर्ट मिल जाती है, यही बात है न सर" रागिनी ने अब बातचीत की कमान खुद ही सम्हाल ली थी, क्यो कि मै तो बोल बोल कर थक चुका था।

"जी अभी तक तो इसी आधार पर कार्यवाही कर रहे है, शायद आपकी नजर में इस हत्या में रोमेश की पिस्टल का प्रयोग होना छोटी बात होगी, लेकिन मेरी नजर में और कानून की नजर में ये बहुत बड़ी बात है" भगवान सिंह ने समझाने वाले स्वर में बोला।

"इसका मतलब मै आपकी पिस्टल चुराकर ले जाऊँ और किसी का कत्ल कर दूँ, तो उसके जिम्मेदार आप ही होगे, मैं तो बेगुनाह ही रहूँगी, क्यो कि पिस्टल आपकीं होंगी, गोली भी आपकी होगी, और इतनी अक्ल तो मैं भी लड़ा लूँगी की आपके हाथों के निशान उस पिस्टल से मिटने न दूँ" रागिनी की बात पर भगवान सिंह मुंह बायें रागिनी की तरफ देखता ही रह गया।

"लेकिन मैडम! रोमेश की पिस्टल की गुमशुदगी की रिपोर्ट झूठी पाई गई थी, पिस्टल उन्ही के घर से बरामद हुई थी" भगवान सिंह भी हार मानने को तैयार नही था।

"किनकी मौजूदगी में वो पिस्टल रोमेश के घर से ही बरामद हुई थी, उन्ही लोगो की मौजूदगी में बरामद हुई थी न, जिन लोगो पर रोमेश ने अपनी पिस्टल चोरी करके ले जाने का आरोप लगाते हुए आपके ही थाने में रिपोर्ट लिखवाई थी, लेकिन आपने इस बात की कोई जांच नही की वे लोग उसी समय वहां पर क्या कर रहे थे, जब पिस्टल चोरी की रिपोर्ट लिखवाई गई, तब क्या आपके सहकर्मी ने घर जाकर एक बार भी तफशिस की क्या सच मे ही पिस्टल चोरी हुई है या नही?, अगर आप उसी वक़्त रोमेश के घर की तलाशी ली होती तो क्या पता उसी दिन दूध का दूध और पानी का पानी हो जाता"

रागिनी अपनी फूल फॉर्म में थी और भगवान सिंह को सूझ नही रहा था।

"मैडम जरूरी तो नही है कि रोमेश ने पिस्टल घर मे ही कहीं छुपाई हो, कहीं और भी छुपा सकता है" भगवान सिंह को अब कुछ न कुछ जवाब तो देना ही था।

"फिर उस लड़की को गोली मारकर खुद ही पिस्टल को अपने घर से बरामद करवाकर अपनी ही पूरी प्लानिंग पर पानी फेर दे, वाह जनाब, बड़ी दूर की सोचते हो आप" रागिनी ने बोला ही था कि तभी सौम्या भी बोल पड़ी।

"सर! एक बार लीक से हटकर सोचिए कि ये सारा बखेड़ा सिर्फ रोमेश को फ़साने के लिये किया जा रहा है, ये तो आपके ऊपर है कि आप इस साजिश रचने वालो को पकड़कर एक बेगुनाह को सजा होने से बचा सकते हो, लेकिन अगर आपने सोच ही लिया है कि आपने रोमेश को ही गुनाहगार मानकर उसे ही सजा दिलवानी है, तो इस ख्याल को दिल से निकाल देना, आपका ये केस कोर्ट में टिकने वाला नही है" सौम्या ने बड़े ही जहीन तरीके से भगवान सिंह को समझाया।

"मैडम! अभी आप लोग घर जाइये, अभी मैं कल अपने सिनियर से इस केस के सभी पहलुओं पर डिसकस करने के बाद ही कोई केस दर्ज करूँगा, लेकिन मैं अभी रोमेश को घर जाने की इजाजत नही दे सकता हूँ, आप समझिए ये कत्ल का मामला है, कोई मामूली लड़ाई झगड़े का नही है" भगवान सिंह ने स्पष्ट शब्दों में बोला।

"कोई नही रागिनी मुझें यही रहने दो, इतने तुम अपने तरीके से अपनी इन्वेस्टिगेशन जारी रखो, मुझे यकीन है, की भगवान सिंह उन लोगो को पकड़े चाहे न पकड़े, लेकिन वे लोग तुमसे नही बच सकते है" मैने रागिनी को बोला, जिसे सुनकर रागिनी तो मुस्करा पड़ी थी, लेकिन भगवान सिंह ने जरूर बुरा सा मुंह बना लिया था।

"तुम खाना खा लो रोमेश, हम घर से तुम्हारा खाना लेकर आये है" सौम्या ने एक टिफिन मेरी ओर बढ़ाते हुए बोला।

"ठीक है खाना तो मैं खा लूंगा, लेकिन तुम लोग अब अपने घर जाओ, रात काफी होने वाली है" मैंने उन दोनो को बोला।

मेरी बात सुनकर रागिनी ने सहमति में सिर हिलाया।

"ठीक है सर! हम लोग सुबह आते है, कल से उन लोगों की भी उल्टी गिनती शुरू होगी, जिन लोगों ने आपके साथ ये खेल खेला है" रागिनी ये बोलकर कुर्सी से खड़ी हो गई।

"मैडम! आप चिंता मत कीजिये! अगर रोमेश बेगुनाह है तो कोई भी इसे फँसा नही पाएगा, लेकिन ये अगर गुनाहगार है तो, कोई इसे बचा भी नही पायेगा" भगवान सिंह ने रागिनी की ओर देख कर बोला।

"भगवान सिंह जी आप सिर्फ नाम के भगवान हो, जो ऊपर असली भगवान बैठे है न, वो भी अगर खुद आकर बोले की रोमेश गुनाहगार है तो मैं उनकी बात पर भी विश्वास नही करूँगी! और आप चिंता मत कीजिये, सिर्फ अड़तालीस घँटे में असली गुनाहगार यही रोमेश की जगह बैठे होगे" रागिनी ने पुरजोर तरीके से भगवान सिंह की बात का जवाब दिया।

उसके बाद रागिनी और सौम्या वहां एक पल के लिये भी नही रुकी थी।

"क्या लड़की है ये यार" रागिनी के जाते ही, भगवान सिंह ने अपना सिर खुजाते हुए बोला।

"इससे बच कर रहना सर! ये मार्शल आर्ट की चैंपियन है, इससे तो मैं भी पंगे नही लेता" मैंने ठिठोली भरे अंदाज में बोला।

"सच मे" भगवान सिंह को मेरी बात का विश्वास ही नही हो रहा था।

"विश्वास नही हो तो ! आप कल सुबह खुद टेस्ट लेकर देख लेना" मैने अपनी चिर-परिचित मुस्कान के साथ बोला।

मेरी बात सुनकर भगवान सिंह के मुंह से कुछ और नही निकला।

अब आपका ये सेवक तो इस वक़्त कानून के शिकंजे में कसा जा चुका था, और रागिनी ने भगवान सिंह को बोल दिया था कि अड़तालीस घँटे में वो असली गुनाहगारों को उसके सामने हाजिर कर देगी।

अब आगे की समूची दास्ताँ आपको रागिनी की जुबानी ही सुनने को मिलेगी, वो अपने गुरू को इस झेमेले से निकाल पाएगी या नही?,

अपना अड़तालीस घँटे का वादा वो कैसे निभाएगी, ये अब आप उसी की जुबानी सुनिए।


जारी रहेगा______✍️
Bhut hi badhiya update Bhai
Romesh babu to ab jail me bethe hai
Ab sab kuch Ragini ke upar depend karta hai
Aur mujhe lagta hai vah romesh ko is mushibato se jrur nikal legi
 

parkas

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#15

मैने रिपोर्ट को पढा। रिपोर्ट का हर अक्षर मुझे गुनाहगार साबित कर रहा था।

मुझे एक ऐसी लड़की का हत्यारा ठहराया जा रहा था, जिसका मैं नाम तक नही जा नता था।

जब भगवान सिंह ने मुझें उस लड़की की फ़ाइल दिखाई थी, तब भी मेरा ध्यान उसके नाम से ज्यादा उसकी फ़ोटो को देखने मे ज्यादा था।

"जिस लड़की के कत्ल का इल्जाम मुझ पर लगा रहे हो, उस लड़की का नाम जान सकता हूँ" मेरी बात सुनकर भगवान सिंह ने मेरी ओर अचरज से देखा।

"कमाल है अपनी गर्लफ्रैंड का नाम नही जानते हो" उसकी आवाज में भी हैरानी झलक रही थी।

"मुझे गुमनाम लड़कियों से इश्क लड़ाने में ज्यादा आनंद आता है, इसलिए मैं किसी लड़की से उसका नाम नही पूछता, वैसे भी शेक्सपीयर ने कहा भी है कि" नाम मे क्या रखा है" मैंने एक आहत मुस्कान के साथ बोला।

"संध्या नाम है लड़की का ! और यही विजय विहार में रहती है" भगवान सिंह ने अब उसका नाम और उसका ठिकाना दोनो बता दिया।

"अब उसका ठिकाना इसलिए बता रहे हो, क्यो कि अब मैं जेल जा रहा हूँ" मैंने हल्की सी मुस्कान के साथ बोला।

"अभी दो दिन तो तुम्हारी सेवा मै यही हवालात में ही करूँगा, दो दिन कोर्ट की छुट्टी है, उसके बाद ही तुम्हे रिमांड पर लिया जाएगा, देखते है कोर्ट कितने दिन का तुम्हारा रिमांड देती है, रिमांड पूरा होने के बाद ही जेल जाओगे" भगवान सिंह मेरा पूरा शेड्यूल तैयार भी कर चुका था।

ये थाना ही मेरे लिये मनहूस था। पहले भी इसी थाने में मेरी गिरफ्तारी की नौबत आ गई थी, वो केस भी इन्हीं सौम्या मैडम का था, और आज दूसरी बार भी इसी थाने में मेरी गिरफ्तारी की नौबत आ गई थी। इस बार भी सौम्या ही कहीं न कहीं इस मामले से जुड़ी हुई थी।

लेकिन मेरे सामने सबसे बड़ी पहेली तो ये संध्या नाम की लड़की थी, जिसे मैं न जानता था न पहचानता था, लेकिन मरकर भी मेरी जिंदगी की शाम करनें का सामान कर गई थी।

"फोन तो कर सकता हूँ जहाँ पनाह" मैने भगवान सिंह से पूछा।

"हाँ कर सकते हो भाई, अपनी गिरफ्तारी की सूचना अपने किसी परिजन को देना चाहो तो दे सकते हो, ये तो कानून में भी है" भगवान सिंह ने मुझे बोला।

उसके बोलते ही मैने रागिनी को फोन लगाया।

"तुम्हारे बॉस को रोहिणी थाने की पुलिस ने अरेस्ट कर लिया है, अब तुम्हारी सैलरी कौन देगा" मैने इन हालातों में भी रागिनी से वही मजाक किया, जो वो अक्सर मेरे साथ करती थी।

"उस पिस्टल की रिपोर्ट आ गई है क्या" रागिनी को जैसे पहले से ही अंदाजा था कि ऐसा ही कुछ होने वाला है।

"हाँ रिपोर्ट आ गई है, उस पिस्टल से एक कत्ल की वारदात हुई है और पिस्टल पर मेरी ही उंगलियों के निशान है" मैने संक्षेप में रागिनी को बताया।

"चिंता मत करो, इस महीने की सैलरी तो आपके हाथों से ही लूँगी, मैं और सौम्या अभी आधे घण्टे में थाने पहुंच रहे है" ये बोलकर रागिनी ने फोन काट दिया।

मैं कुछ पल तक उस मोबाइल को घूरता रहा और अभी उस मोबाइल को अपनी जेब के हवाले करनें ही वाला था कि जैसे अचानक मुझे कुछ याद आया हो।

"जनाब ! आपने बोला था कि संध्या के मोबाइल में मेरा नंबर आपको मेरे नाम से सेव किया हुआ मिला था, फिर तो आपने कॉल डिटेल भी निकलवाई होंगी, मेरी उस तथा कथित प्रेयशी ने कितनी बार मुझ से फोन पर बात की थी, ये तो आपको पता चल ही चुका होगा" मैने भगवान सिंह से पूछा।

"अभी वो रिपोर्ट आई नही है, कल दोपहर तक आ जाएगी, अभी तो कई दिनों तक हमारे ही मेहमान रहने वाले हो, वो भी दिखा देंगे, क्यो चिंता कर रहें हो जासूस साहब" भगवान सिंह अब मेरी हर बात का जवाब तंज भरी मुस्कान के साथ दे रहा था।

"आपके केस की बुनियाद बहुत कमजोर है, सिर्फ कॉल डिटेल और ये डायरी का झूठ ही इस बात को सिद्ध कर देगा कि मुझें किसी साजिश का शिकार बनाया जा रहा है" मैने विश्वास भरे स्वर में कहा।

"और पिस्टल के बारे में क्या बोलोगे, मत भूलों की उससे निकली हुई गोली ही संध्या के जिस्म में मिली है, और उस पिस्टल पर फिंगरप्रिंट भी तुम्हारे हैं, ये सबसे ठोस सबूत है तुम्हारे खिलाफ"

भगवान सिंह की बात का जवाब देने के लिये अभी मैंने अपना मुंह खोला ही था कि देवप्रिय ने एक गहरी मुस्कान के साथ कमरे में प्रवेश किया।

××××××××××

घँटे भर में ही रागिनी और सौम्या थाने में आ चुके थे। मैं अभी तक भगवान सिंह के कमरे में ही था, थाना इंचार्ज माहेश्वरी साहब मेरा हालचाल पूछकर जा चुके थे।

"भगवान सिंह जी, उस पिस्टल से चली हुई गोली के अलावा कोई और सबूत भी है आपके पास, जिससे आप रोमेश और उस लड़की की आपस मे जान पहचान सिद्ध कर सकतें हो" पूरी बात सुनने के बाद रागिनी ने सबसे पहला सवाल किया था।

"एक डायरी भी है, जो कि संध्या के कमरे से बरामद हुई है, उसमे उसने खुद रोमेश के साथ उसकी आशनाई का जिक्र किया हुआ है" भगवान सिंह ने बोला।

"इसका मतलब लड़की को डायरी लिखने का शौक रहा होगा, फिर तो आपने उसकी पूरी डायरी पढ़कर ये भी जान लिया होगा कि उस लड़की के साथ रोमेश की आशिकी कब से शुरू हुई थी" रागिनी ने फिर से सवाल किया।

"मैडम! यहां मैं आपके सवालो के जवाब देने के लिये नही बैठा हूँ, बल्कि रोमेश से इन सवालों के जवाब लेने के लिए बैठा हूँ" भगवान सिंह ने उखड़ते हुए बोला।

"लेकिन रोमेश के जवाब के आधार पर तो आप कार्यवाही करोगे नही, कार्यवाही तो आप इसी बुनियाद पर करोगे न कि गोली रोमेश की पिस्टल से चली और उस पर उंगलियों के निशान भी रोमेश के पाये गए, और आपको अपनी इस थ्योरी को मजबूत करने के लिए उस डायरी की सपोर्ट मिल जाती है, यही बात है न सर" रागिनी ने अब बातचीत की कमान खुद ही सम्हाल ली थी, क्यो कि मै तो बोल बोल कर थक चुका था।

"जी अभी तक तो इसी आधार पर कार्यवाही कर रहे है, शायद आपकी नजर में इस हत्या में रोमेश की पिस्टल का प्रयोग होना छोटी बात होगी, लेकिन मेरी नजर में और कानून की नजर में ये बहुत बड़ी बात है" भगवान सिंह ने समझाने वाले स्वर में बोला।

"इसका मतलब मै आपकी पिस्टल चुराकर ले जाऊँ और किसी का कत्ल कर दूँ, तो उसके जिम्मेदार आप ही होगे, मैं तो बेगुनाह ही रहूँगी, क्यो कि पिस्टल आपकीं होंगी, गोली भी आपकी होगी, और इतनी अक्ल तो मैं भी लड़ा लूँगी की आपके हाथों के निशान उस पिस्टल से मिटने न दूँ" रागिनी की बात पर भगवान सिंह मुंह बायें रागिनी की तरफ देखता ही रह गया।

"लेकिन मैडम! रोमेश की पिस्टल की गुमशुदगी की रिपोर्ट झूठी पाई गई थी, पिस्टल उन्ही के घर से बरामद हुई थी" भगवान सिंह भी हार मानने को तैयार नही था।

"किनकी मौजूदगी में वो पिस्टल रोमेश के घर से ही बरामद हुई थी, उन्ही लोगो की मौजूदगी में बरामद हुई थी न, जिन लोगो पर रोमेश ने अपनी पिस्टल चोरी करके ले जाने का आरोप लगाते हुए आपके ही थाने में रिपोर्ट लिखवाई थी, लेकिन आपने इस बात की कोई जांच नही की वे लोग उसी समय वहां पर क्या कर रहे थे, जब पिस्टल चोरी की रिपोर्ट लिखवाई गई, तब क्या आपके सहकर्मी ने घर जाकर एक बार भी तफशिस की क्या सच मे ही पिस्टल चोरी हुई है या नही?, अगर आप उसी वक़्त रोमेश के घर की तलाशी ली होती तो क्या पता उसी दिन दूध का दूध और पानी का पानी हो जाता"

रागिनी अपनी फूल फॉर्म में थी और भगवान सिंह को सूझ नही रहा था।

"मैडम जरूरी तो नही है कि रोमेश ने पिस्टल घर मे ही कहीं छुपाई हो, कहीं और भी छुपा सकता है" भगवान सिंह को अब कुछ न कुछ जवाब तो देना ही था।

"फिर उस लड़की को गोली मारकर खुद ही पिस्टल को अपने घर से बरामद करवाकर अपनी ही पूरी प्लानिंग पर पानी फेर दे, वाह जनाब, बड़ी दूर की सोचते हो आप" रागिनी ने बोला ही था कि तभी सौम्या भी बोल पड़ी।

"सर! एक बार लीक से हटकर सोचिए कि ये सारा बखेड़ा सिर्फ रोमेश को फ़साने के लिये किया जा रहा है, ये तो आपके ऊपर है कि आप इस साजिश रचने वालो को पकड़कर एक बेगुनाह को सजा होने से बचा सकते हो, लेकिन अगर आपने सोच ही लिया है कि आपने रोमेश को ही गुनाहगार मानकर उसे ही सजा दिलवानी है, तो इस ख्याल को दिल से निकाल देना, आपका ये केस कोर्ट में टिकने वाला नही है" सौम्या ने बड़े ही जहीन तरीके से भगवान सिंह को समझाया।

"मैडम! अभी आप लोग घर जाइये, अभी मैं कल अपने सिनियर से इस केस के सभी पहलुओं पर डिसकस करने के बाद ही कोई केस दर्ज करूँगा, लेकिन मैं अभी रोमेश को घर जाने की इजाजत नही दे सकता हूँ, आप समझिए ये कत्ल का मामला है, कोई मामूली लड़ाई झगड़े का नही है" भगवान सिंह ने स्पष्ट शब्दों में बोला।

"कोई नही रागिनी मुझें यही रहने दो, इतने तुम अपने तरीके से अपनी इन्वेस्टिगेशन जारी रखो, मुझे यकीन है, की भगवान सिंह उन लोगो को पकड़े चाहे न पकड़े, लेकिन वे लोग तुमसे नही बच सकते है" मैने रागिनी को बोला, जिसे सुनकर रागिनी तो मुस्करा पड़ी थी, लेकिन भगवान सिंह ने जरूर बुरा सा मुंह बना लिया था।

"तुम खाना खा लो रोमेश, हम घर से तुम्हारा खाना लेकर आये है" सौम्या ने एक टिफिन मेरी ओर बढ़ाते हुए बोला।

"ठीक है खाना तो मैं खा लूंगा, लेकिन तुम लोग अब अपने घर जाओ, रात काफी होने वाली है" मैंने उन दोनो को बोला।

मेरी बात सुनकर रागिनी ने सहमति में सिर हिलाया।

"ठीक है सर! हम लोग सुबह आते है, कल से उन लोगों की भी उल्टी गिनती शुरू होगी, जिन लोगों ने आपके साथ ये खेल खेला है" रागिनी ये बोलकर कुर्सी से खड़ी हो गई।

"मैडम! आप चिंता मत कीजिये! अगर रोमेश बेगुनाह है तो कोई भी इसे फँसा नही पाएगा, लेकिन ये अगर गुनाहगार है तो, कोई इसे बचा भी नही पायेगा" भगवान सिंह ने रागिनी की ओर देख कर बोला।

"भगवान सिंह जी आप सिर्फ नाम के भगवान हो, जो ऊपर असली भगवान बैठे है न, वो भी अगर खुद आकर बोले की रोमेश गुनाहगार है तो मैं उनकी बात पर भी विश्वास नही करूँगी! और आप चिंता मत कीजिये, सिर्फ अड़तालीस घँटे में असली गुनाहगार यही रोमेश की जगह बैठे होगे" रागिनी ने पुरजोर तरीके से भगवान सिंह की बात का जवाब दिया।

उसके बाद रागिनी और सौम्या वहां एक पल के लिये भी नही रुकी थी।

"क्या लड़की है ये यार" रागिनी के जाते ही, भगवान सिंह ने अपना सिर खुजाते हुए बोला।

"इससे बच कर रहना सर! ये मार्शल आर्ट की चैंपियन है, इससे तो मैं भी पंगे नही लेता" मैंने ठिठोली भरे अंदाज में बोला।

"सच मे" भगवान सिंह को मेरी बात का विश्वास ही नही हो रहा था।

"विश्वास नही हो तो ! आप कल सुबह खुद टेस्ट लेकर देख लेना" मैने अपनी चिर-परिचित मुस्कान के साथ बोला।

मेरी बात सुनकर भगवान सिंह के मुंह से कुछ और नही निकला।

अब आपका ये सेवक तो इस वक़्त कानून के शिकंजे में कसा जा चुका था, और रागिनी ने भगवान सिंह को बोल दिया था कि अड़तालीस घँटे में वो असली गुनाहगारों को उसके सामने हाजिर कर देगी।

अब आगे की समूची दास्ताँ आपको रागिनी की जुबानी ही सुनने को मिलेगी, वो अपने गुरू को इस झेमेले से निकाल पाएगी या नही?,

अपना अड़तालीस घँटे का वादा वो कैसे निभाएगी, ये अब आप उसी की जुबानी सुनिए।


जारी रहेगा______✍️
Bahut hi badhiya update diya hai Raj_sharma bhai....
Nice and beautiful update....
 

Darkk Soul

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#15

मैने रिपोर्ट को पढा। रिपोर्ट का हर अक्षर मुझे गुनाहगार साबित कर रहा था।

मुझे एक ऐसी लड़की का हत्यारा ठहराया जा रहा था, जिसका मैं नाम तक नही जा नता था।

जब भगवान सिंह ने मुझें उस लड़की की फ़ाइल दिखाई थी, तब भी मेरा ध्यान उसके नाम से ज्यादा उसकी फ़ोटो को देखने मे ज्यादा था।

"जिस लड़की के कत्ल का इल्जाम मुझ पर लगा रहे हो, उस लड़की का नाम जान सकता हूँ" मेरी बात सुनकर भगवान सिंह ने मेरी ओर अचरज से देखा।

"कमाल है अपनी गर्लफ्रैंड का नाम नही जानते हो" उसकी आवाज में भी हैरानी झलक रही थी।

"मुझे गुमनाम लड़कियों से इश्क लड़ाने में ज्यादा आनंद आता है, इसलिए मैं किसी लड़की से उसका नाम नही पूछता, वैसे भी शेक्सपीयर ने कहा भी है कि" नाम मे क्या रखा है" मैंने एक आहत मुस्कान के साथ बोला।

"संध्या नाम है लड़की का ! और यही विजय विहार में रहती है" भगवान सिंह ने अब उसका नाम और उसका ठिकाना दोनो बता दिया।

"अब उसका ठिकाना इसलिए बता रहे हो, क्यो कि अब मैं जेल जा रहा हूँ" मैंने हल्की सी मुस्कान के साथ बोला।

"अभी दो दिन तो तुम्हारी सेवा मै यही हवालात में ही करूँगा, दो दिन कोर्ट की छुट्टी है, उसके बाद ही तुम्हे रिमांड पर लिया जाएगा, देखते है कोर्ट कितने दिन का तुम्हारा रिमांड देती है, रिमांड पूरा होने के बाद ही जेल जाओगे" भगवान सिंह मेरा पूरा शेड्यूल तैयार भी कर चुका था।

ये थाना ही मेरे लिये मनहूस था। पहले भी इसी थाने में मेरी गिरफ्तारी की नौबत आ गई थी, वो केस भी इन्हीं सौम्या मैडम का था, और आज दूसरी बार भी इसी थाने में मेरी गिरफ्तारी की नौबत आ गई थी। इस बार भी सौम्या ही कहीं न कहीं इस मामले से जुड़ी हुई थी।

लेकिन मेरे सामने सबसे बड़ी पहेली तो ये संध्या नाम की लड़की थी, जिसे मैं न जानता था न पहचानता था, लेकिन मरकर भी मेरी जिंदगी की शाम करनें का सामान कर गई थी।

"फोन तो कर सकता हूँ जहाँ पनाह" मैने भगवान सिंह से पूछा।

"हाँ कर सकते हो भाई, अपनी गिरफ्तारी की सूचना अपने किसी परिजन को देना चाहो तो दे सकते हो, ये तो कानून में भी है" भगवान सिंह ने मुझे बोला।

उसके बोलते ही मैने रागिनी को फोन लगाया।

"तुम्हारे बॉस को रोहिणी थाने की पुलिस ने अरेस्ट कर लिया है, अब तुम्हारी सैलरी कौन देगा" मैने इन हालातों में भी रागिनी से वही मजाक किया, जो वो अक्सर मेरे साथ करती थी।

"उस पिस्टल की रिपोर्ट आ गई है क्या" रागिनी को जैसे पहले से ही अंदाजा था कि ऐसा ही कुछ होने वाला है।

"हाँ रिपोर्ट आ गई है, उस पिस्टल से एक कत्ल की वारदात हुई है और पिस्टल पर मेरी ही उंगलियों के निशान है" मैने संक्षेप में रागिनी को बताया।

"चिंता मत करो, इस महीने की सैलरी तो आपके हाथों से ही लूँगी, मैं और सौम्या अभी आधे घण्टे में थाने पहुंच रहे है" ये बोलकर रागिनी ने फोन काट दिया।

मैं कुछ पल तक उस मोबाइल को घूरता रहा और अभी उस मोबाइल को अपनी जेब के हवाले करनें ही वाला था कि जैसे अचानक मुझे कुछ याद आया हो।

"जनाब ! आपने बोला था कि संध्या के मोबाइल में मेरा नंबर आपको मेरे नाम से सेव किया हुआ मिला था, फिर तो आपने कॉल डिटेल भी निकलवाई होंगी, मेरी उस तथा कथित प्रेयशी ने कितनी बार मुझ से फोन पर बात की थी, ये तो आपको पता चल ही चुका होगा" मैने भगवान सिंह से पूछा।

"अभी वो रिपोर्ट आई नही है, कल दोपहर तक आ जाएगी, अभी तो कई दिनों तक हमारे ही मेहमान रहने वाले हो, वो भी दिखा देंगे, क्यो चिंता कर रहें हो जासूस साहब" भगवान सिंह अब मेरी हर बात का जवाब तंज भरी मुस्कान के साथ दे रहा था।

"आपके केस की बुनियाद बहुत कमजोर है, सिर्फ कॉल डिटेल और ये डायरी का झूठ ही इस बात को सिद्ध कर देगा कि मुझें किसी साजिश का शिकार बनाया जा रहा है" मैने विश्वास भरे स्वर में कहा।

"और पिस्टल के बारे में क्या बोलोगे, मत भूलों की उससे निकली हुई गोली ही संध्या के जिस्म में मिली है, और उस पिस्टल पर फिंगरप्रिंट भी तुम्हारे हैं, ये सबसे ठोस सबूत है तुम्हारे खिलाफ"

भगवान सिंह की बात का जवाब देने के लिये अभी मैंने अपना मुंह खोला ही था कि देवप्रिय ने एक गहरी मुस्कान के साथ कमरे में प्रवेश किया।

××××××××××

घँटे भर में ही रागिनी और सौम्या थाने में आ चुके थे। मैं अभी तक भगवान सिंह के कमरे में ही था, थाना इंचार्ज माहेश्वरी साहब मेरा हालचाल पूछकर जा चुके थे।

"भगवान सिंह जी, उस पिस्टल से चली हुई गोली के अलावा कोई और सबूत भी है आपके पास, जिससे आप रोमेश और उस लड़की की आपस मे जान पहचान सिद्ध कर सकतें हो" पूरी बात सुनने के बाद रागिनी ने सबसे पहला सवाल किया था।

"एक डायरी भी है, जो कि संध्या के कमरे से बरामद हुई है, उसमे उसने खुद रोमेश के साथ उसकी आशनाई का जिक्र किया हुआ है" भगवान सिंह ने बोला।

"इसका मतलब लड़की को डायरी लिखने का शौक रहा होगा, फिर तो आपने उसकी पूरी डायरी पढ़कर ये भी जान लिया होगा कि उस लड़की के साथ रोमेश की आशिकी कब से शुरू हुई थी" रागिनी ने फिर से सवाल किया।

"मैडम! यहां मैं आपके सवालो के जवाब देने के लिये नही बैठा हूँ, बल्कि रोमेश से इन सवालों के जवाब लेने के लिए बैठा हूँ" भगवान सिंह ने उखड़ते हुए बोला।

"लेकिन रोमेश के जवाब के आधार पर तो आप कार्यवाही करोगे नही, कार्यवाही तो आप इसी बुनियाद पर करोगे न कि गोली रोमेश की पिस्टल से चली और उस पर उंगलियों के निशान भी रोमेश के पाये गए, और आपको अपनी इस थ्योरी को मजबूत करने के लिए उस डायरी की सपोर्ट मिल जाती है, यही बात है न सर" रागिनी ने अब बातचीत की कमान खुद ही सम्हाल ली थी, क्यो कि मै तो बोल बोल कर थक चुका था।

"जी अभी तक तो इसी आधार पर कार्यवाही कर रहे है, शायद आपकी नजर में इस हत्या में रोमेश की पिस्टल का प्रयोग होना छोटी बात होगी, लेकिन मेरी नजर में और कानून की नजर में ये बहुत बड़ी बात है" भगवान सिंह ने समझाने वाले स्वर में बोला।

"इसका मतलब मै आपकी पिस्टल चुराकर ले जाऊँ और किसी का कत्ल कर दूँ, तो उसके जिम्मेदार आप ही होगे, मैं तो बेगुनाह ही रहूँगी, क्यो कि पिस्टल आपकीं होंगी, गोली भी आपकी होगी, और इतनी अक्ल तो मैं भी लड़ा लूँगी की आपके हाथों के निशान उस पिस्टल से मिटने न दूँ" रागिनी की बात पर भगवान सिंह मुंह बायें रागिनी की तरफ देखता ही रह गया।

"लेकिन मैडम! रोमेश की पिस्टल की गुमशुदगी की रिपोर्ट झूठी पाई गई थी, पिस्टल उन्ही के घर से बरामद हुई थी" भगवान सिंह भी हार मानने को तैयार नही था।

"किनकी मौजूदगी में वो पिस्टल रोमेश के घर से ही बरामद हुई थी, उन्ही लोगो की मौजूदगी में बरामद हुई थी न, जिन लोगो पर रोमेश ने अपनी पिस्टल चोरी करके ले जाने का आरोप लगाते हुए आपके ही थाने में रिपोर्ट लिखवाई थी, लेकिन आपने इस बात की कोई जांच नही की वे लोग उसी समय वहां पर क्या कर रहे थे, जब पिस्टल चोरी की रिपोर्ट लिखवाई गई, तब क्या आपके सहकर्मी ने घर जाकर एक बार भी तफशिस की क्या सच मे ही पिस्टल चोरी हुई है या नही?, अगर आप उसी वक़्त रोमेश के घर की तलाशी ली होती तो क्या पता उसी दिन दूध का दूध और पानी का पानी हो जाता"

रागिनी अपनी फूल फॉर्म में थी और भगवान सिंह को सूझ नही रहा था।

"मैडम जरूरी तो नही है कि रोमेश ने पिस्टल घर मे ही कहीं छुपाई हो, कहीं और भी छुपा सकता है" भगवान सिंह को अब कुछ न कुछ जवाब तो देना ही था।

"फिर उस लड़की को गोली मारकर खुद ही पिस्टल को अपने घर से बरामद करवाकर अपनी ही पूरी प्लानिंग पर पानी फेर दे, वाह जनाब, बड़ी दूर की सोचते हो आप" रागिनी ने बोला ही था कि तभी सौम्या भी बोल पड़ी।

"सर! एक बार लीक से हटकर सोचिए कि ये सारा बखेड़ा सिर्फ रोमेश को फ़साने के लिये किया जा रहा है, ये तो आपके ऊपर है कि आप इस साजिश रचने वालो को पकड़कर एक बेगुनाह को सजा होने से बचा सकते हो, लेकिन अगर आपने सोच ही लिया है कि आपने रोमेश को ही गुनाहगार मानकर उसे ही सजा दिलवानी है, तो इस ख्याल को दिल से निकाल देना, आपका ये केस कोर्ट में टिकने वाला नही है" सौम्या ने बड़े ही जहीन तरीके से भगवान सिंह को समझाया।

"मैडम! अभी आप लोग घर जाइये, अभी मैं कल अपने सिनियर से इस केस के सभी पहलुओं पर डिसकस करने के बाद ही कोई केस दर्ज करूँगा, लेकिन मैं अभी रोमेश को घर जाने की इजाजत नही दे सकता हूँ, आप समझिए ये कत्ल का मामला है, कोई मामूली लड़ाई झगड़े का नही है" भगवान सिंह ने स्पष्ट शब्दों में बोला।

"कोई नही रागिनी मुझें यही रहने दो, इतने तुम अपने तरीके से अपनी इन्वेस्टिगेशन जारी रखो, मुझे यकीन है, की भगवान सिंह उन लोगो को पकड़े चाहे न पकड़े, लेकिन वे लोग तुमसे नही बच सकते है" मैने रागिनी को बोला, जिसे सुनकर रागिनी तो मुस्करा पड़ी थी, लेकिन भगवान सिंह ने जरूर बुरा सा मुंह बना लिया था।

"तुम खाना खा लो रोमेश, हम घर से तुम्हारा खाना लेकर आये है" सौम्या ने एक टिफिन मेरी ओर बढ़ाते हुए बोला।

"ठीक है खाना तो मैं खा लूंगा, लेकिन तुम लोग अब अपने घर जाओ, रात काफी होने वाली है" मैंने उन दोनो को बोला।

मेरी बात सुनकर रागिनी ने सहमति में सिर हिलाया।

"ठीक है सर! हम लोग सुबह आते है, कल से उन लोगों की भी उल्टी गिनती शुरू होगी, जिन लोगों ने आपके साथ ये खेल खेला है" रागिनी ये बोलकर कुर्सी से खड़ी हो गई।

"मैडम! आप चिंता मत कीजिये! अगर रोमेश बेगुनाह है तो कोई भी इसे फँसा नही पाएगा, लेकिन ये अगर गुनाहगार है तो, कोई इसे बचा भी नही पायेगा" भगवान सिंह ने रागिनी की ओर देख कर बोला।

"भगवान सिंह जी आप सिर्फ नाम के भगवान हो, जो ऊपर असली भगवान बैठे है न, वो भी अगर खुद आकर बोले की रोमेश गुनाहगार है तो मैं उनकी बात पर भी विश्वास नही करूँगी! और आप चिंता मत कीजिये, सिर्फ अड़तालीस घँटे में असली गुनाहगार यही रोमेश की जगह बैठे होगे" रागिनी ने पुरजोर तरीके से भगवान सिंह की बात का जवाब दिया।

उसके बाद रागिनी और सौम्या वहां एक पल के लिये भी नही रुकी थी।

"क्या लड़की है ये यार" रागिनी के जाते ही, भगवान सिंह ने अपना सिर खुजाते हुए बोला।

"इससे बच कर रहना सर! ये मार्शल आर्ट की चैंपियन है, इससे तो मैं भी पंगे नही लेता" मैंने ठिठोली भरे अंदाज में बोला।

"सच मे" भगवान सिंह को मेरी बात का विश्वास ही नही हो रहा था।

"विश्वास नही हो तो ! आप कल सुबह खुद टेस्ट लेकर देख लेना" मैने अपनी चिर-परिचित मुस्कान के साथ बोला।

मेरी बात सुनकर भगवान सिंह के मुंह से कुछ और नही निकला।

अब आपका ये सेवक तो इस वक़्त कानून के शिकंजे में कसा जा चुका था, और रागिनी ने भगवान सिंह को बोल दिया था कि अड़तालीस घँटे में वो असली गुनाहगारों को उसके सामने हाजिर कर देगी।

अब आगे की समूची दास्ताँ आपको रागिनी की जुबानी ही सुनने को मिलेगी, वो अपने गुरू को इस झेमेले से निकाल पाएगी या नही?,

अपना अड़तालीस घँटे का वादा वो कैसे निभाएगी, ये अब आप उसी की जुबानी सुनिए।


जारी रहेगा______✍️


Wow..! Nice writing.

Maza aa gaya padh kar.

Bahut badhiya likh rahe ho.

Keep it up.


Waiting for more.
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Bhut hi badhiya update Bhai
Romesh babu to ab jail me bethe hai
Ab sab kuch Ragini ke upar depend karta hai
Aur mujhe lagta hai vah romesh ko is mushibato se jrur nikal legi
ABHI aapko Ragini ki skills dekhne ko milegi, wo dhasu dimaak wali hai , and usme fighting skills bhi hai, thank you very much for your valuable review and support bhai :thanks:
 

Iron Man

Try and fail. But never give up trying
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#15

मैने रिपोर्ट को पढा। रिपोर्ट का हर अक्षर मुझे गुनाहगार साबित कर रहा था।

मुझे एक ऐसी लड़की का हत्यारा ठहराया जा रहा था, जिसका मैं नाम तक नही जा नता था।

जब भगवान सिंह ने मुझें उस लड़की की फ़ाइल दिखाई थी, तब भी मेरा ध्यान उसके नाम से ज्यादा उसकी फ़ोटो को देखने मे ज्यादा था।

"जिस लड़की के कत्ल का इल्जाम मुझ पर लगा रहे हो, उस लड़की का नाम जान सकता हूँ" मेरी बात सुनकर भगवान सिंह ने मेरी ओर अचरज से देखा।

"कमाल है अपनी गर्लफ्रैंड का नाम नही जानते हो" उसकी आवाज में भी हैरानी झलक रही थी।

"मुझे गुमनाम लड़कियों से इश्क लड़ाने में ज्यादा आनंद आता है, इसलिए मैं किसी लड़की से उसका नाम नही पूछता, वैसे भी शेक्सपीयर ने कहा भी है कि" नाम मे क्या रखा है" मैंने एक आहत मुस्कान के साथ बोला।

"संध्या नाम है लड़की का ! और यही विजय विहार में रहती है" भगवान सिंह ने अब उसका नाम और उसका ठिकाना दोनो बता दिया।

"अब उसका ठिकाना इसलिए बता रहे हो, क्यो कि अब मैं जेल जा रहा हूँ" मैंने हल्की सी मुस्कान के साथ बोला।

"अभी दो दिन तो तुम्हारी सेवा मै यही हवालात में ही करूँगा, दो दिन कोर्ट की छुट्टी है, उसके बाद ही तुम्हे रिमांड पर लिया जाएगा, देखते है कोर्ट कितने दिन का तुम्हारा रिमांड देती है, रिमांड पूरा होने के बाद ही जेल जाओगे" भगवान सिंह मेरा पूरा शेड्यूल तैयार भी कर चुका था।

ये थाना ही मेरे लिये मनहूस था। पहले भी इसी थाने में मेरी गिरफ्तारी की नौबत आ गई थी, वो केस भी इन्हीं सौम्या मैडम का था, और आज दूसरी बार भी इसी थाने में मेरी गिरफ्तारी की नौबत आ गई थी। इस बार भी सौम्या ही कहीं न कहीं इस मामले से जुड़ी हुई थी।

लेकिन मेरे सामने सबसे बड़ी पहेली तो ये संध्या नाम की लड़की थी, जिसे मैं न जानता था न पहचानता था, लेकिन मरकर भी मेरी जिंदगी की शाम करनें का सामान कर गई थी।

"फोन तो कर सकता हूँ जहाँ पनाह" मैने भगवान सिंह से पूछा।

"हाँ कर सकते हो भाई, अपनी गिरफ्तारी की सूचना अपने किसी परिजन को देना चाहो तो दे सकते हो, ये तो कानून में भी है" भगवान सिंह ने मुझे बोला।

उसके बोलते ही मैने रागिनी को फोन लगाया।

"तुम्हारे बॉस को रोहिणी थाने की पुलिस ने अरेस्ट कर लिया है, अब तुम्हारी सैलरी कौन देगा" मैने इन हालातों में भी रागिनी से वही मजाक किया, जो वो अक्सर मेरे साथ करती थी।

"उस पिस्टल की रिपोर्ट आ गई है क्या" रागिनी को जैसे पहले से ही अंदाजा था कि ऐसा ही कुछ होने वाला है।

"हाँ रिपोर्ट आ गई है, उस पिस्टल से एक कत्ल की वारदात हुई है और पिस्टल पर मेरी ही उंगलियों के निशान है" मैने संक्षेप में रागिनी को बताया।

"चिंता मत करो, इस महीने की सैलरी तो आपके हाथों से ही लूँगी, मैं और सौम्या अभी आधे घण्टे में थाने पहुंच रहे है" ये बोलकर रागिनी ने फोन काट दिया।

मैं कुछ पल तक उस मोबाइल को घूरता रहा और अभी उस मोबाइल को अपनी जेब के हवाले करनें ही वाला था कि जैसे अचानक मुझे कुछ याद आया हो।

"जनाब ! आपने बोला था कि संध्या के मोबाइल में मेरा नंबर आपको मेरे नाम से सेव किया हुआ मिला था, फिर तो आपने कॉल डिटेल भी निकलवाई होंगी, मेरी उस तथा कथित प्रेयशी ने कितनी बार मुझ से फोन पर बात की थी, ये तो आपको पता चल ही चुका होगा" मैने भगवान सिंह से पूछा।

"अभी वो रिपोर्ट आई नही है, कल दोपहर तक आ जाएगी, अभी तो कई दिनों तक हमारे ही मेहमान रहने वाले हो, वो भी दिखा देंगे, क्यो चिंता कर रहें हो जासूस साहब" भगवान सिंह अब मेरी हर बात का जवाब तंज भरी मुस्कान के साथ दे रहा था।

"आपके केस की बुनियाद बहुत कमजोर है, सिर्फ कॉल डिटेल और ये डायरी का झूठ ही इस बात को सिद्ध कर देगा कि मुझें किसी साजिश का शिकार बनाया जा रहा है" मैने विश्वास भरे स्वर में कहा।

"और पिस्टल के बारे में क्या बोलोगे, मत भूलों की उससे निकली हुई गोली ही संध्या के जिस्म में मिली है, और उस पिस्टल पर फिंगरप्रिंट भी तुम्हारे हैं, ये सबसे ठोस सबूत है तुम्हारे खिलाफ"

भगवान सिंह की बात का जवाब देने के लिये अभी मैंने अपना मुंह खोला ही था कि देवप्रिय ने एक गहरी मुस्कान के साथ कमरे में प्रवेश किया।

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घँटे भर में ही रागिनी और सौम्या थाने में आ चुके थे। मैं अभी तक भगवान सिंह के कमरे में ही था, थाना इंचार्ज माहेश्वरी साहब मेरा हालचाल पूछकर जा चुके थे।

"भगवान सिंह जी, उस पिस्टल से चली हुई गोली के अलावा कोई और सबूत भी है आपके पास, जिससे आप रोमेश और उस लड़की की आपस मे जान पहचान सिद्ध कर सकतें हो" पूरी बात सुनने के बाद रागिनी ने सबसे पहला सवाल किया था।

"एक डायरी भी है, जो कि संध्या के कमरे से बरामद हुई है, उसमे उसने खुद रोमेश के साथ उसकी आशनाई का जिक्र किया हुआ है" भगवान सिंह ने बोला।

"इसका मतलब लड़की को डायरी लिखने का शौक रहा होगा, फिर तो आपने उसकी पूरी डायरी पढ़कर ये भी जान लिया होगा कि उस लड़की के साथ रोमेश की आशिकी कब से शुरू हुई थी" रागिनी ने फिर से सवाल किया।

"मैडम! यहां मैं आपके सवालो के जवाब देने के लिये नही बैठा हूँ, बल्कि रोमेश से इन सवालों के जवाब लेने के लिए बैठा हूँ" भगवान सिंह ने उखड़ते हुए बोला।

"लेकिन रोमेश के जवाब के आधार पर तो आप कार्यवाही करोगे नही, कार्यवाही तो आप इसी बुनियाद पर करोगे न कि गोली रोमेश की पिस्टल से चली और उस पर उंगलियों के निशान भी रोमेश के पाये गए, और आपको अपनी इस थ्योरी को मजबूत करने के लिए उस डायरी की सपोर्ट मिल जाती है, यही बात है न सर" रागिनी ने अब बातचीत की कमान खुद ही सम्हाल ली थी, क्यो कि मै तो बोल बोल कर थक चुका था।

"जी अभी तक तो इसी आधार पर कार्यवाही कर रहे है, शायद आपकी नजर में इस हत्या में रोमेश की पिस्टल का प्रयोग होना छोटी बात होगी, लेकिन मेरी नजर में और कानून की नजर में ये बहुत बड़ी बात है" भगवान सिंह ने समझाने वाले स्वर में बोला।

"इसका मतलब मै आपकी पिस्टल चुराकर ले जाऊँ और किसी का कत्ल कर दूँ, तो उसके जिम्मेदार आप ही होगे, मैं तो बेगुनाह ही रहूँगी, क्यो कि पिस्टल आपकीं होंगी, गोली भी आपकी होगी, और इतनी अक्ल तो मैं भी लड़ा लूँगी की आपके हाथों के निशान उस पिस्टल से मिटने न दूँ" रागिनी की बात पर भगवान सिंह मुंह बायें रागिनी की तरफ देखता ही रह गया।

"लेकिन मैडम! रोमेश की पिस्टल की गुमशुदगी की रिपोर्ट झूठी पाई गई थी, पिस्टल उन्ही के घर से बरामद हुई थी" भगवान सिंह भी हार मानने को तैयार नही था।

"किनकी मौजूदगी में वो पिस्टल रोमेश के घर से ही बरामद हुई थी, उन्ही लोगो की मौजूदगी में बरामद हुई थी न, जिन लोगो पर रोमेश ने अपनी पिस्टल चोरी करके ले जाने का आरोप लगाते हुए आपके ही थाने में रिपोर्ट लिखवाई थी, लेकिन आपने इस बात की कोई जांच नही की वे लोग उसी समय वहां पर क्या कर रहे थे, जब पिस्टल चोरी की रिपोर्ट लिखवाई गई, तब क्या आपके सहकर्मी ने घर जाकर एक बार भी तफशिस की क्या सच मे ही पिस्टल चोरी हुई है या नही?, अगर आप उसी वक़्त रोमेश के घर की तलाशी ली होती तो क्या पता उसी दिन दूध का दूध और पानी का पानी हो जाता"

रागिनी अपनी फूल फॉर्म में थी और भगवान सिंह को सूझ नही रहा था।

"मैडम जरूरी तो नही है कि रोमेश ने पिस्टल घर मे ही कहीं छुपाई हो, कहीं और भी छुपा सकता है" भगवान सिंह को अब कुछ न कुछ जवाब तो देना ही था।

"फिर उस लड़की को गोली मारकर खुद ही पिस्टल को अपने घर से बरामद करवाकर अपनी ही पूरी प्लानिंग पर पानी फेर दे, वाह जनाब, बड़ी दूर की सोचते हो आप" रागिनी ने बोला ही था कि तभी सौम्या भी बोल पड़ी।

"सर! एक बार लीक से हटकर सोचिए कि ये सारा बखेड़ा सिर्फ रोमेश को फ़साने के लिये किया जा रहा है, ये तो आपके ऊपर है कि आप इस साजिश रचने वालो को पकड़कर एक बेगुनाह को सजा होने से बचा सकते हो, लेकिन अगर आपने सोच ही लिया है कि आपने रोमेश को ही गुनाहगार मानकर उसे ही सजा दिलवानी है, तो इस ख्याल को दिल से निकाल देना, आपका ये केस कोर्ट में टिकने वाला नही है" सौम्या ने बड़े ही जहीन तरीके से भगवान सिंह को समझाया।

"मैडम! अभी आप लोग घर जाइये, अभी मैं कल अपने सिनियर से इस केस के सभी पहलुओं पर डिसकस करने के बाद ही कोई केस दर्ज करूँगा, लेकिन मैं अभी रोमेश को घर जाने की इजाजत नही दे सकता हूँ, आप समझिए ये कत्ल का मामला है, कोई मामूली लड़ाई झगड़े का नही है" भगवान सिंह ने स्पष्ट शब्दों में बोला।

"कोई नही रागिनी मुझें यही रहने दो, इतने तुम अपने तरीके से अपनी इन्वेस्टिगेशन जारी रखो, मुझे यकीन है, की भगवान सिंह उन लोगो को पकड़े चाहे न पकड़े, लेकिन वे लोग तुमसे नही बच सकते है" मैने रागिनी को बोला, जिसे सुनकर रागिनी तो मुस्करा पड़ी थी, लेकिन भगवान सिंह ने जरूर बुरा सा मुंह बना लिया था।

"तुम खाना खा लो रोमेश, हम घर से तुम्हारा खाना लेकर आये है" सौम्या ने एक टिफिन मेरी ओर बढ़ाते हुए बोला।

"ठीक है खाना तो मैं खा लूंगा, लेकिन तुम लोग अब अपने घर जाओ, रात काफी होने वाली है" मैंने उन दोनो को बोला।

मेरी बात सुनकर रागिनी ने सहमति में सिर हिलाया।

"ठीक है सर! हम लोग सुबह आते है, कल से उन लोगों की भी उल्टी गिनती शुरू होगी, जिन लोगों ने आपके साथ ये खेल खेला है" रागिनी ये बोलकर कुर्सी से खड़ी हो गई।

"मैडम! आप चिंता मत कीजिये! अगर रोमेश बेगुनाह है तो कोई भी इसे फँसा नही पाएगा, लेकिन ये अगर गुनाहगार है तो, कोई इसे बचा भी नही पायेगा" भगवान सिंह ने रागिनी की ओर देख कर बोला।

"भगवान सिंह जी आप सिर्फ नाम के भगवान हो, जो ऊपर असली भगवान बैठे है न, वो भी अगर खुद आकर बोले की रोमेश गुनाहगार है तो मैं उनकी बात पर भी विश्वास नही करूँगी! और आप चिंता मत कीजिये, सिर्फ अड़तालीस घँटे में असली गुनाहगार यही रोमेश की जगह बैठे होगे" रागिनी ने पुरजोर तरीके से भगवान सिंह की बात का जवाब दिया।

उसके बाद रागिनी और सौम्या वहां एक पल के लिये भी नही रुकी थी।

"क्या लड़की है ये यार" रागिनी के जाते ही, भगवान सिंह ने अपना सिर खुजाते हुए बोला।

"इससे बच कर रहना सर! ये मार्शल आर्ट की चैंपियन है, इससे तो मैं भी पंगे नही लेता" मैंने ठिठोली भरे अंदाज में बोला।

"सच मे" भगवान सिंह को मेरी बात का विश्वास ही नही हो रहा था।

"विश्वास नही हो तो ! आप कल सुबह खुद टेस्ट लेकर देख लेना" मैने अपनी चिर-परिचित मुस्कान के साथ बोला।

मेरी बात सुनकर भगवान सिंह के मुंह से कुछ और नही निकला।

अब आपका ये सेवक तो इस वक़्त कानून के शिकंजे में कसा जा चुका था, और रागिनी ने भगवान सिंह को बोल दिया था कि अड़तालीस घँटे में वो असली गुनाहगारों को उसके सामने हाजिर कर देगी।

अब आगे की समूची दास्ताँ आपको रागिनी की जुबानी ही सुनने को मिलेगी, वो अपने गुरू को इस झेमेले से निकाल पाएगी या नही?,

अपना अड़तालीस घँटे का वादा वो कैसे निभाएगी, ये अब आप उसी की जुबानी सुनिए।


जारी रहेगा______✍️
Shaandar update
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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