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Thriller कातिल रात

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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#08

"बोलो! तुम क्या बोलना चाहती हो! लेकिन कुछ भी बोलने से पहले एक बात का ध्यान रखना की कोई भी झूठ मेरे सामने ज्यादा देर तक ठहरता नही है" मैने देविका को चेतावनी भरें लहजें में बोला।

"मैं खुद कुमार गौरव की ब्लेकमेलिंग का शिकार हूँ, उसने न केवल मुझे ब्लेकमेल करके अपना काम लोगों से निकलवाया, बल्कि जब मैंने उसके लिए और ज्यादा इस्तेमाल होने से इनकार किया तो उसने एक झूठा केस बनवाकर मुझे जेल भिजवा दिया"

देविका बोल रही थी कि कुमार उसे ब्लैकमेल कर रहा था, जबकि कुमार उसकी और ही पिक्चर मुझे दिखा चुका था।

"लेकिन कुमार ने हमे ये तो कभी नही बोला कि तुम उसे ब्लैकमेल कर रही थी, उसने तो हमे इतना बताया था कि तुम अपने हुश्न के जाल में लोगो को फंसाकर उसके पैसे पर जब तक अय्याशी करती थी, जब तक वो बन्दा तुम पर अपने पैसे लुटाता था, उसके बाद जब वो पैसे लुटाना बन्द कर देता था, तो तुम कोई नया बकरा हलाल करने के लिए ढूंढ लेती थी" मैंने कड़े शब्दों में साफगोई से वही बोला, जो मुझे कुमार ने बोला।

"उससे ये भी तो पूछते की उस पैसे के बदले में वो मेरा क्या लूटते थे, उसको अपना पैसा नजर आ गया, लेकिन मेरी लूटी हुई इज्जत उसे नजर नही आई, सिर्फ इस कुमार ने ही अपने फायदे के लिए मुझे दस से ज्यादा लोगो के साथ सुलाया, सिर्फ मेरे जिस्म का इस्तेमाल करके इस हरामी ने कुंडली, और बवाना जैसे इंडस्ट्रियल इलाको में पांच सौ गज में बड़ी बड़ी फैक्ट्री बनाली, और उन्ही पैसो के दम पर मुझें जेल तक भिजवा दिया" देविका ने मेरी ओर देखकर बोला।

"लेकिन जेल तो तुम्हे सौम्या ने भिजवाया था, फ्रॉड तो तुमने सौम्या के साथ किया था" तभी रागिनी ने वाजिब सवाल किया।

"सौम्या को सिर्फ कुमार ने अपने मोहरे के तौर पर इस्तेमाल किया था, मेरी ईमेल और आईडी के इस्तेमाल से मेरे ही खिलाफ ऐसी साजिस रची की उसके कर्मो की सजा भुगतने के लिए मुझे जेल जाना पड़ा, और अभी भी जमानत पर हूँ" देविका ने बोला।

"कुमार ने क्या किया" मैंने देविका से पूछा।

"कुमार ने' ऐनी डेस्क'का इस्तेमाल करके मुझ से सौम्या की कंपनी की डेटा फ़ाइल अपने कंप्यूटर में खुलवा ली, और उन फाइलों को अपने कंप्यूटर में सेव कर लिया, फिर मेरी ईमेल आईडी से उन फ़ाइल को उन लोगों को भेज दिया, जिनसे उसने उस डेटा को बेचने का सौदा किया था, और फिर खुद ही सौम्या को गुमनाम काल करके इस फ्रॉड की जानकारी दे दी, अब क्यो कि डेटा भेजने में मेरी ईमेल आईडी का इस्तेमाल हुआ था, तो मुझे ही दोषी माना गया" देविका ने अपनी कहानी सुनाई।

"तुम्हारी कहानी में बहत्तर छेद है देविका, जब ये केस पुलिस में गया होगा, तब पुलिस ने उस सर्वर को भी तलाश किया होगा, जिस कंप्यूटर से वो मेल की गई थी, उस स्थिति में कुमार भी तो उस केस में तुम्हारा सह-अभियुक्त बनता" रागिनी ने फिर से एक और वाजिब सवाल देविका से किया।

"पुलिस के आगे मैंने कुमार के बारे में बोला था, लेकिन मैंने बोला न कि पैसा बोलता है, पुलिस ने मेरी बातों पर कोई तवज्जो ही नही दी, सिर्फ उस ईमेल आईडी की बुनियाद पर ही मुझ पर केस बना दिया" देविका ने जो बोला था, मैं उससे इंकार नही कर सकता था।

पुलिस में बहुत लोग ऎसे मिल जायेंगे जो पैसा मिलने के बाद रस्सी का सांप और सांप को रस्सी बनाने में माहिर थे।

"चलो मैं एक मिनट को तुम्हारी कहानी पर विश्वास भी कर लूं,तो मैं अभी तक ये नही समझ पाया कि कल रात को तुम मेरे ही घर मे क्यो घुसी, और कुमार की गाड़ी तुम्हारे पास कहां से आ गई, सबसे बड़ी बात, जब तुम गाड़ी से उतरी तो तुम भागते हुए मेरे घर की ओर ही क्यो गई, जबकि सामने ही ढाबा खुला हुआ था, अगर सच मे तुम्हारी जान को खतरा था, तो सबसे पहले तो तुम्हे ढाबे में ही जाना चाहिए था" मैने एक साथ कई सवालो की झड़ी लगा दी थी।

"उस गाड़ी में उस समय भी कुमार अंदर था, वो पिछली सीट पर बैठा हुआ था, जब मैं वापिस आई तब वहां से आगे जानें के बाद उसने उस गाड़ी को अपने कब्जे में दोबारा ले लिया था, उसके बाद उसने मुझें मेरे घर पर छोड़ा और फिर उसी गाड़ी से वापस गया, लेकिन उस गाड़ी के चोरी होने की रिपोर्ट वो शाम को ही थाने में दर्ज करवा चुका था" देविका ने जो बताया, वो कोई बहुत शातिर दिमाग आदमी ही कर सकता था।

"लेकिन मेरा सवाल अभी फिर से वही है कि मेरा पिस्टल कौन लेकर गया, मैने कुमार की उस गाड़ी के आने से लेकर जाने तक की उस ढाबे के सीसी टीवी कैमरे की पूरी फुटेज चेक करी है, लेकिन मुझें तुम्हारे अलावा कोई और शख्स नजर नही आया, जो मेरे घर की तरफ गया हो" मैंने फिर से अपनी बात को दोहराया।

"मैं फिर बोल रही हूँ कि, मैं कोई पिस्टल आपके यहाँ से उठा कर नही लाई हूँ, अब एक बार फिर से अपने घर को अच्छे से चेक कीजिये" देविका अभी भी अपनी बात पर अडिग थी।

मैं अब उसकी बात पर बुरी तरह से झल्ला चुका था।

"इस वक़्त अगर तुम्हें मौका मिले की तुम कुमार को मार सको, तो उसे मार डालोगी न" तभी रागिनी ने एक अजीब सा सवाल देविका से किया।

"बिल्कुल मार दूँगी" देविका ने बेहिचक जवाब दिया।

"ऐसे में जब तुमने रोमेश को अपनी पिस्टल को दराज में रखते हुए देखा, तो स्वभाविक तौर पर तुम्हारे मन में ये ख्याल आया होगा कि काश ये पिस्टल मेरे पास हो तो मैं कुमार की जान ले लू" रागिनी ने उसकी मनस्थिति के बारे में बताया।

"लेकिन ये सब सोचकर अगर मैं पिस्टल लेकर जाती तो, कुमार तो गाड़ी में ही बैठा हुआ था, मैं पहली फुर्सत में ही उसे गोली मार देती" देविका ने रागिनी के सवाल का जवाब दिया।

"उस वक़्त तो नही मार सकती थी, क्यो कि सामने तो ढाबा था, ऐसे सबके सामने गोली मारती तो तुम पकड़ी जाती" रागिनी ने फिर से उसके जवाब की हवा निकाली।

"लेकिन अगर मुझे कुमार को मारना ही होता तो मैं आज रोमेश बाबू को अपने घर क्यो बुलाती, मैंने रोमेश बाबू को इसलिए बुलाया है कि मेघना ने जेल में मुझें रोमेश जी की काबलियत के बारे में बताया था, और इसने बोला था कि अगर मेरी सच्चाई पर रोमेश को विश्वास हो गया तो, रोमेश सौम्या को भी कन्विंस कर लेगा, क्यो कि सौम्या रोमेश की बात कभी नही टाल सकती"

देविका के पास हर सवाल का जवाब था। लेकिन अब जो सवाल मैं पूछने जा रहा था, उस सवाल का जवाब शायद उसके पास नही होता।

"चलो तुम्हारी सारी बात मैने मान ली, तुम अब मेरे सिर्फ एक सवाल का जवाब दे दो, जब तुम खुद कुमार के साथ मेरे घर तक आई थी, तो तुमने अपनी जान खतरे में होने की झूठी खबर क्यो सुनाई, और मेरे घर पर आने का तुम्हरा मकसद क्या था" मैने ये सवाल पूछ कर अपनी तीक्ष्ण निग़ाहों को उसके डूबते हुए सूरज की लालिमा बिखेरते चेहरे पर जमा दिया।

उस लालिमा भरे चेहरे पर पसीने की बूंदे उभर आई थी। उसकी चुप्पी से कमरे में सन्नाटा पसर चुका था।

पिस्टल का मिलना:

"जवाब दो मेरी बात का मेरी लख्तेजिगर" मैने देविका को अपने चिरपरिचित अंदाज में फिर से बोलकर वहां छाये हुए सन्नाटे का अंत किया।

"मैंने झूठ बोला था कि, मुझें जान का खतरा था, मैं बस तुमसे एक बार मिलना चाहती थी, क्यो कि मेघना ने तुम्हारी मेरे सामने बहुत तारीफ की थी, इसलिए मैं तुम्हारा टेस्ट ले रही थी" देविका ने लगे हाथो एक नई कहानी बनाई।

"क्या टेस्ट लेना चाहती थी" मैने पूछा।

"मैं देखना चाहती थी कि तुम सच मे ही इतने हरफनमौला इंसान हो या मेघना बेवजह तुमसे इम्प्रेस है" देविका ने अचानक से उस कमरे के माहौल को एक दम तीन सौ साठ डिग्री के कोण पर घुमा दिया था।

"लगता है तुम्हे कहानियां बनाने में महारत हासिल है देविका, तुम ये बेकार के धंधे छोड़कर उपन्यास लिखना शुरू कर दो, जल्दी पॉपुलर हो जाओगी" रागिनी ने इस बार एक कुटिल मुस्कान के साथ देविका को बोला था।

"मैं कोई कहानी नही बना रही हूँ रागिनी, मेरी बात का यकीन मानो!" देविका ने मुरझाये हुए स्वर में बोला।

"अगर कहानी नही है तो बताओ, तुमने रोमेश का पिस्टल क्यो गायब किया" रागिनी को एक प्रतिशत भी उसकी बात पर विश्वास नही था।

"मैं बार बार बोल रही हूँ, की मैंने आपका पिस्टल गायब नही किया है" देविका ने एक बार फिर पुरजोर लहजें में बोला।

"रोमेश बाबू ! तुम एक बार देविका के सामने ही अपने घर पर फिर से क्यो नही चेक कर लेते" मेघना ने बीच का रास्ता सुझाया।

"अब तो यही करना पड़ेगा, चलो तुम मेरे साथ मेरी गाड़ी में चलो, और रागिनी मेघना के साथ आ जाएगी" मैने उन सभी की तरफ देखते हुए बोला।

मेरी बात सुनते ही वे तीनो भी सोफे से उठ खड़े हुए। कुछ ही देर में हम अपनी अपनी गाड़ियों से मेरे घर की ओर उड़े जा रहा थे।

घर पहुंचने में हमे सिर्फ दस मिनट लगे, देविका के घर से मेरे घर का रास्ता महज दस मिनट का ही था, और पिछले दस मिनट से ही हम अपने घर का चप्पा चप्पा छान रहे थे।

लेकिन अभी तक देविका का दावा फेल होता हुआ हो नजर आ रहा था।

रागिनी इस वक़्त मेघना के साथ मेरे किचन में पिस्टल की तलाश में गई हुई थी। क्यो कि हमारी बातो की रोशनी में ये बात उभर कर आ चुकी थी कि, मैं देविका से बात करते हुए ही किचन में गया था।

कोई पांच मिनट के बाद ही रागिनी की आवाज मेरे कानों में गूंज चुकी थी।

"तुम्हारा पिस्टल तो यहां है रोमेश" उसकी बात सुनते ही मैं किचन की ओर दौड़ा।

"रुको इसे हाथ मत लगाना" मैंने रागिनी को उस पिस्टल को हाथ लगाने से रोका। रागिनी तुरन्त मेरी बात को समझ गई थी।

"हम आज दिन में भी इस किचन में आये थे, तब तो ये पिस्टल यहां नही थी" पिस्टल को वहां देखकर मेरा दिमाग चक्करघिन्नी खा चुका था।

"तुमने ध्यान नही दिया होगा, ये हमे इस गैस के चूल्हे के नीचे से मिला है" मेघना ने रागिनी से पहले बोला।

मैने रागिनी की तरफ देखा, उसने भी सहमती में अपने सिर को हिलाया।

"मैं एसआई देवप्रिय को बुला रहा हूँ, इस पिस्टल के लास्ट फिंगर प्रिंट हर हाल में लेने होगे, क्यो कि मुझे अच्छी तरह से याद है कि मैंने कल रात को कॉफी बनाने के लिये किचन में जाते हुए पिस्टल को अपनी बेड की दराज में ही रखा था"

मैं अभी भी अपनी बात पर कायम था।

जारी रहेगा_____✍️
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Congratulations bro

Intejar hai 1st update ka bhai agar ho sake to background rural rakhna

Always welcome bro

1 लाश से शुरूवात हो गयी .... ab देखो कितनी लाशें मिलती है और किन किन हालातों में????

Achcha hai

WOW iska matlab sahi kaha tha Baba BABU Rao ne
.
Ladki ka CHKKAR bada DANGER hota hai re baba
.
Kitni ko chunnaa laga chuki hai ye ladki lekin ek achi bat ye pata chle ki ye sab karne ke bad Blackmail nahi karti kisi ko
.
Ab sawal ye hai ki Romesh ke ghar aake uski pistol lene ka kya matlab ho sakta hai is ladki ka kafi Interesting hoti ja rahe hai kahani


Bhut hi badhiya update Bhai
Ramesh ne pistol ki complain likha di
Dhekte hai aage kya hota hai

Wonderful update and nice story

Ye story bhi aapki baki stories ki bahut achi h suspense and thrill se bhari .
Dete. Romesh wahi h kya jo pichili story mei tha .
dono story aapas mei link h bhi h kya ya us story ka prequel h ye

Ye update kaafi mazedaar aur suspense-filled tha.
Soumya–Ragini–Romesh ki nok-jhok ne mood light rakha,
lekin Devika ka track story ko ekdum dark thriller mode me le gaya.

Devika ka Kumar se blackmail hona,
Kumar ki car chura lena,
Romesh ki pistol lekar bhaag jana,
aur car me khoon milna—
ye saari cheezein dikhati hain ki wo koi bada game khel rahi hai.

Romesh bhi dheere-dheere uske trap me fas raha hai,
shayad kisi purane dushman ki chaal ho.

Overall update grippy, fast-paced aur interesting tha.
Next update me toh blast pakka hai.

रागिनी-रोमेश 🫢


रागनी तो हरियाणा मैं होवे भाई

Nice update

:congrats: start new story

Bhut hi badhiya update Bhai
Devika akir karna kya chahti hai
Kahi usne pistol ko bina romesh babu ko pata chale vapis uske ghar me to nahi rakh diya
Ye to ab aage hi pata chalega

good one ...................... :happy:

update ka SPEED badhao ...............sarkar ........................ :wink:

Awesome update and lovely story

1 aur nya bomb phoot gya....sala pistol ka chori hona bhi abbi confirm nhi hai....

Nice update.....

Bahut hi badhiya update he Raj_sharma Bhai

Devika to apne aap ko victim bata rahi he........

Lekin romesh itna kachcha khiladi nahi he...........

Jald hi vo uski sacchayi jaan lega

Keep rocking Bro

Update:- 06 and 07 :check:

Ye saumya to sahi laundiya nikli...bole to mard ho ya aurat kisi ke bhi sath :sex: ghapaghap....Bimari ke bahane mast maze karti hai ye hawasi laundiya :D

Dono update read karne ke baad filhal yahi lag raha hai ki parde ke pichhe jo bhi hai wo kaafi tagda khel khelne ki firaak me hai jisme usne romesh ko mukhya roop se target kar rakha hai. Yakeenan wo romesh ka koi aisa ja-nisaar hi hoga jisko romesh ki vajah se kaafi kuch prasad mila hoga. Ab kyoki romesh ek detective hai jiske chalte uske dushmano ki koi ginti nahi hogi....aur is vajah se aise kisi ja-nisaar ko pahchaanna asaan bhi nahi ho sakta. Ye to hui ek baat... :smoking:

Dusri baat ho hairan karne wali dikhi wo ye ki jiski khoj me romesh darbadar bhatak raha tha wo meghna ke dwara badi asaani se mil gayi magar....magar uski baato ne ek alag hi uljhan ko paida kar diya hai. Khud ko innocent dikha kar Kumar Gaurav par ungli utha rahi hai...ye to wahi baat hui ki nau sua choohe kha kar billi haj karne chali....Halaaki kuch bhi ho sakta hai. I mean...mumkin hai ki wo waakai me innocent ho...aur jo kuch usne ab tak kiya tha wo sab Kumar Gaurav ke majboor karne par kiya raha ho...jiske liye use jail tak jana pada. Well ye to hamare kayaas hain....reality to writer hi jaanta hai... :D

Overall...case kaafi ulajh gaya hai ab, ab dekhna ye hoga ki meghna aur devika ke sath Hui is conversation ke baad romesh kis nateeje par pahuchta hai aur wo kaun rukh akhtiyar karta hai??? :approve:

Excellent going bro....keep it up :thumbup:

रिव्यू की स्टार्ट की जाए।
इंट्रेस्टिंग इंट्रेस्टिंग

मेघना और रोमेश दुश्मन तो नहीं लग रहे पक्के वाले, क्योंकि जिस तरह मेघना का अभी रोमेश के साथ बर्ताव है, वो मुझे तो दोस्ताना ही लगा।

जहाँ तक मुझे लगता है कि अनामिका ने रोमेश की गन अभी चुराई नहीं है। अब देखना है कि वो गन रोमेश के घर से मिलती है या नहीं। तो अब सवाल उठता है आख़िर गन को भूत खा गया था क्या?

कुमार गौरव विलेन के रूप में फ्रेम तो हो रहा है। अनामिका के हिसाब से तो कुमार गौरव उसका गुनहगार है।

कुमार गौरव अनामिका के पीछे क्यों पड़ा है? दूसरा क्या कुमार गौरव ही असली क़ातिल है?
मुझे नहीं लगता कि वो इस मर्डर का पूरा क़ातिल होगा। हो सकता है मर्डर में उसका कोई हिस्सा हो, लेकिन असली हत्या किसी और का काम है।

दूसरी बात कुमार गौरव एक तरह से सोनिया का भी दुश्मन है। क्योंकि देविका से काम तो कुमार ने ही करवाया था सोनिया को धोखा दिलवाने का।

एक और चीज सोनिया का जिस तरह का रोल दिखाया गया है, उससे लगता नहीं कि वो कोई छोटा मोटा किरदार है। प्रॉबेबली सोनिया का यहाँ बड़ा और इम्पॉर्टेंट रोल है।
लेकिन एक बात मुझे समझ नहीं आती सोनिया का पति राजीव अपने बाप को क्यों मारेगा? और साथ ही अपनी सौतेली माँ को भी? जबकि असली समस्या तो उसे सोनिया से थी। फिर अपने माँ बाप को क्यों मारा? यहाँ कुछ न कुछ मिसिंग है।

कहीं सोनिया ही तो कोई खेल नहीं खेल रही कुमार के साथ मिलकर?
अपने हज़्बैंड को जेल में डलवाया…
मेघना और देविका को भी जेल में डलवाय
कहीं न कहीं कुछ तो लोचा है।

विलेन वो नहीं है जिसे राज शर्मा हमें हिंट के रूप में दिखा रहा है।
असली विलेन वही निकलेगा जो अनएक्स्पेक्टेड होगा।

रागिनी पर भी मुझे शक है, क्योंकि रोमेश के घर आना जाना उसका भी है। और रिपोर्ट लिखवाने के बाद वो रोमेश के साथ उसके घर तक गई थी।

Raj_sharma

Kamal ka update diya hai Raju, ye Devika to gau banke aa gayi wapas, Romesh isko har jagah dhund raha tha aur madam to khud samne aa gayi....
Ab lagta gun bhi Romesh ko apne ghar me hi mil jaani hai....
Waiting for next update

Shaandar update

To Meghana ki wajh se Devika mil he gyee Romesh Babu se
.
Lekin yaha to kahani jaise ulat rahe hai
Kya such me Romesh ki pistol uske ghar me to kaha rakhi usne , kya Devika ki kahe bat me sacchhai hai , kya Kumar Gaurav ne he koi Apradh kiya hai
.
Are yar ye kahani to ab uljha rahe hai mujhe bhi 😂😂😂
.
Lekin Romesh Babu kab kaam aayge dekhte hai kya karte hai hamare Romesh Babu is bar

Yes mene padh liya

Usne nahi churai ab agar kuch change kardo wo baat alag baki nahi churai hain

No fully but kuch na kuch galt kiya usne

No fully

Mujhe kya pata

🤔

Katil Jiski Umeed kam ho Wahi nikal

Pedhu beera, shuru me thodi boring laagi e liye aage n padhi...
Cc me aa, aapno bhaylo aayodo hai

Besabari se intezaar rahega next update ka Raj_sharma bhai....
Napster
Pratiksha rahegi Bhai

Update posted friends :check:
 

Luckyloda

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"बोलो! तुम क्या बोलना चाहती हो! लेकिन कुछ भी बोलने से पहले एक बात का ध्यान रखना की कोई भी झूठ मेरे सामने ज्यादा देर तक ठहरता नही है" मैने देविका को चेतावनी भरें लहजें में बोला।

"मैं खुद कुमार गौरव की ब्लेकमेलिंग का शिकार हूँ, उसने न केवल मुझे ब्लेकमेल करके अपना काम लोगों से निकलवाया, बल्कि जब मैंने उसके लिए और ज्यादा इस्तेमाल होने से इनकार किया तो उसने एक झूठा केस बनवाकर मुझे जेल भिजवा दिया"

देविका बोल रही थी कि कुमार उसे ब्लैकमेल कर रहा था, जबकि कुमार उसकी और ही पिक्चर मुझे दिखा चुका था।

"लेकिन कुमार ने हमे ये तो कभी नही बोला कि तुम उसे ब्लैकमेल कर रही थी, उसने तो हमे इतना बताया था कि तुम अपने हुश्न के जाल में लोगो को फंसाकर उसके पैसे पर जब तक अय्याशी करती थी, जब तक वो बन्दा तुम पर अपने पैसे लुटाता था, उसके बाद जब वो पैसे लुटाना बन्द कर देता था, तो तुम कोई नया बकरा हलाल करने के लिए ढूंढ लेती थी" मैंने कड़े शब्दों में साफगोई से वही बोला, जो मुझे कुमार ने बोला।

"उससे ये भी तो पूछते की उस पैसे के बदले में वो मेरा क्या लूटते थे, उसको अपना पैसा नजर आ गया, लेकिन मेरी लूटी हुई इज्जत उसे नजर नही आई, सिर्फ इस कुमार ने ही अपने फायदे के लिए मुझे दस से ज्यादा लोगो के साथ सुलाया, सिर्फ मेरे जिस्म का इस्तेमाल करके इस हरामी ने कुंडली, और बवाना जैसे इंडस्ट्रियल इलाको में पांच सौ गज में बड़ी बड़ी फैक्ट्री बनाली, और उन्ही पैसो के दम पर मुझें जेल तक भिजवा दिया" देविका ने मेरी ओर देखकर बोला।

"लेकिन जेल तो तुम्हे सौम्या ने भिजवाया था, फ्रॉड तो तुमने सौम्या के साथ किया था" तभी रागिनी ने वाजिब सवाल किया।

"सौम्या को सिर्फ कुमार ने अपने मोहरे के तौर पर इस्तेमाल किया था, मेरी ईमेल और आईडी के इस्तेमाल से मेरे ही खिलाफ ऐसी साजिस रची की उसके कर्मो की सजा भुगतने के लिए मुझे जेल जाना पड़ा, और अभी भी जमानत पर हूँ" देविका ने बोला।

"कुमार ने क्या किया" मैंने देविका से पूछा।

"कुमार ने' ऐनी डेस्क'का इस्तेमाल करके मुझ से सौम्या की कंपनी की डेटा फ़ाइल अपने कंप्यूटर में खुलवा ली, और उन फाइलों को अपने कंप्यूटर में सेव कर लिया, फिर मेरी ईमेल आईडी से उन फ़ाइल को उन लोगों को भेज दिया, जिनसे उसने उस डेटा को बेचने का सौदा किया था, और फिर खुद ही सौम्या को गुमनाम काल करके इस फ्रॉड की जानकारी दे दी, अब क्यो कि डेटा भेजने में मेरी ईमेल आईडी का इस्तेमाल हुआ था, तो मुझे ही दोषी माना गया" देविका ने अपनी कहानी सुनाई।

"तुम्हारी कहानी में बहत्तर छेद है देविका, जब ये केस पुलिस में गया होगा, तब पुलिस ने उस सर्वर को भी तलाश किया होगा, जिस कंप्यूटर से वो मेल की गई थी, उस स्थिति में कुमार भी तो उस केस में तुम्हारा सह-अभियुक्त बनता" रागिनी ने फिर से एक और वाजिब सवाल देविका से किया।

"पुलिस के आगे मैंने कुमार के बारे में बोला था, लेकिन मैंने बोला न कि पैसा बोलता है, पुलिस ने मेरी बातों पर कोई तवज्जो ही नही दी, सिर्फ उस ईमेल आईडी की बुनियाद पर ही मुझ पर केस बना दिया" देविका ने जो बोला था, मैं उससे इंकार नही कर सकता था।

पुलिस में बहुत लोग ऎसे मिल जायेंगे जो पैसा मिलने के बाद रस्सी का सांप और सांप को रस्सी बनाने में माहिर थे।

"चलो मैं एक मिनट को तुम्हारी कहानी पर विश्वास भी कर लूं,तो मैं अभी तक ये नही समझ पाया कि कल रात को तुम मेरे ही घर मे क्यो घुसी, और कुमार की गाड़ी तुम्हारे पास कहां से आ गई, सबसे बड़ी बात, जब तुम गाड़ी से उतरी तो तुम भागते हुए मेरे घर की ओर ही क्यो गई, जबकि सामने ही ढाबा खुला हुआ था, अगर सच मे तुम्हारी जान को खतरा था, तो सबसे पहले तो तुम्हे ढाबे में ही जाना चाहिए था" मैने एक साथ कई सवालो की झड़ी लगा दी थी।

"उस गाड़ी में उस समय भी कुमार अंदर था, वो पिछली सीट पर बैठा हुआ था, जब मैं वापिस आई तब वहां से आगे जानें के बाद उसने उस गाड़ी को अपने कब्जे में दोबारा ले लिया था, उसके बाद उसने मुझें मेरे घर पर छोड़ा और फिर उसी गाड़ी से वापस गया, लेकिन उस गाड़ी के चोरी होने की रिपोर्ट वो शाम को ही थाने में दर्ज करवा चुका था" देविका ने जो बताया, वो कोई बहुत शातिर दिमाग आदमी ही कर सकता था।

"लेकिन मेरा सवाल अभी फिर से वही है कि मेरा पिस्टल कौन लेकर गया, मैने कुमार की उस गाड़ी के आने से लेकर जाने तक की उस ढाबे के सीसी टीवी कैमरे की पूरी फुटेज चेक करी है, लेकिन मुझें तुम्हारे अलावा कोई और शख्स नजर नही आया, जो मेरे घर की तरफ गया हो" मैंने फिर से अपनी बात को दोहराया।

"मैं फिर बोल रही हूँ कि, मैं कोई पिस्टल आपके यहाँ से उठा कर नही लाई हूँ, अब एक बार फिर से अपने घर को अच्छे से चेक कीजिये" देविका अभी भी अपनी बात पर अडिग थी।

मैं अब उसकी बात पर बुरी तरह से झल्ला चुका था।

"इस वक़्त अगर तुम्हें मौका मिले की तुम कुमार को मार सको, तो उसे मार डालोगी न" तभी रागिनी ने एक अजीब सा सवाल देविका से किया।

"बिल्कुल मार दूँगी" देविका ने बेहिचक जवाब दिया।

"ऐसे में जब तुमने रोमेश को अपनी पिस्टल को दराज में रखते हुए देखा, तो स्वभाविक तौर पर तुम्हारे मन में ये ख्याल आया होगा कि काश ये पिस्टल मेरे पास हो तो मैं कुमार की जान ले लू" रागिनी ने उसकी मनस्थिति के बारे में बताया।

"लेकिन ये सब सोचकर अगर मैं पिस्टल लेकर जाती तो, कुमार तो गाड़ी में ही बैठा हुआ था, मैं पहली फुर्सत में ही उसे गोली मार देती" देविका ने रागिनी के सवाल का जवाब दिया।

"उस वक़्त तो नही मार सकती थी, क्यो कि सामने तो ढाबा था, ऐसे सबके सामने गोली मारती तो तुम पकड़ी जाती" रागिनी ने फिर से उसके जवाब की हवा निकाली।

"लेकिन अगर मुझे कुमार को मारना ही होता तो मैं आज रोमेश बाबू को अपने घर क्यो बुलाती, मैंने रोमेश बाबू को इसलिए बुलाया है कि मेघना ने जेल में मुझें रोमेश जी की काबलियत के बारे में बताया था, और इसने बोला था कि अगर मेरी सच्चाई पर रोमेश को विश्वास हो गया तो, रोमेश सौम्या को भी कन्विंस कर लेगा, क्यो कि सौम्या रोमेश की बात कभी नही टाल सकती"

देविका के पास हर सवाल का जवाब था। लेकिन अब जो सवाल मैं पूछने जा रहा था, उस सवाल का जवाब शायद उसके पास नही होता।

"चलो तुम्हारी सारी बात मैने मान ली, तुम अब मेरे सिर्फ एक सवाल का जवाब दे दो, जब तुम खुद कुमार के साथ मेरे घर तक आई थी, तो तुमने अपनी जान खतरे में होने की झूठी खबर क्यो सुनाई, और मेरे घर पर आने का तुम्हरा मकसद क्या था" मैने ये सवाल पूछ कर अपनी तीक्ष्ण निग़ाहों को उसके डूबते हुए सूरज की लालिमा बिखेरते चेहरे पर जमा दिया।

उस लालिमा भरे चेहरे पर पसीने की बूंदे उभर आई थी। उसकी चुप्पी से कमरे में सन्नाटा पसर चुका था।

पिस्टल का मिलना:

"जवाब दो मेरी बात का मेरी लख्तेजिगर" मैने देविका को अपने चिरपरिचित अंदाज में फिर से बोलकर वहां छाये हुए सन्नाटे का अंत किया।

"मैंने झूठ बोला था कि, मुझें जान का खतरा था, मैं बस तुमसे एक बार मिलना चाहती थी, क्यो कि मेघना ने तुम्हारी मेरे सामने बहुत तारीफ की थी, इसलिए मैं तुम्हारा टेस्ट ले रही थी" देविका ने लगे हाथो एक नई कहानी बनाई।

"क्या टेस्ट लेना चाहती थी" मैने पूछा।

"मैं देखना चाहती थी कि तुम सच मे ही इतने हरफनमौला इंसान हो या मेघना बेवजह तुमसे इम्प्रेस है" देविका ने अचानक से उस कमरे के माहौल को एक दम तीन सौ साठ डिग्री के कोण पर घुमा दिया था।

"लगता है तुम्हे कहानियां बनाने में महारत हासिल है देविका, तुम ये बेकार के धंधे छोड़कर उपन्यास लिखना शुरू कर दो, जल्दी पॉपुलर हो जाओगी" रागिनी ने इस बार एक कुटिल मुस्कान के साथ देविका को बोला था।

"मैं कोई कहानी नही बना रही हूँ रागिनी, मेरी बात का यकीन मानो!" देविका ने मुरझाये हुए स्वर में बोला।

"अगर कहानी नही है तो बताओ, तुमने रोमेश का पिस्टल क्यो गायब किया" रागिनी को एक प्रतिशत भी उसकी बात पर विश्वास नही था।

"मैं बार बार बोल रही हूँ, की मैंने आपका पिस्टल गायब नही किया है" देविका ने एक बार फिर पुरजोर लहजें में बोला।

"रोमेश बाबू ! तुम एक बार देविका के सामने ही अपने घर पर फिर से क्यो नही चेक कर लेते" मेघना ने बीच का रास्ता सुझाया।

"अब तो यही करना पड़ेगा, चलो तुम मेरे साथ मेरी गाड़ी में चलो, और रागिनी मेघना के साथ आ जाएगी" मैने उन सभी की तरफ देखते हुए बोला।

मेरी बात सुनते ही वे तीनो भी सोफे से उठ खड़े हुए। कुछ ही देर में हम अपनी अपनी गाड़ियों से मेरे घर की ओर उड़े जा रहा थे।

घर पहुंचने में हमे सिर्फ दस मिनट लगे, देविका के घर से मेरे घर का रास्ता महज दस मिनट का ही था, और पिछले दस मिनट से ही हम अपने घर का चप्पा चप्पा छान रहे थे।

लेकिन अभी तक देविका का दावा फेल होता हुआ हो नजर आ रहा था।

रागिनी इस वक़्त मेघना के साथ मेरे किचन में पिस्टल की तलाश में गई हुई थी। क्यो कि हमारी बातो की रोशनी में ये बात उभर कर आ चुकी थी कि, मैं देविका से बात करते हुए ही किचन में गया था।

कोई पांच मिनट के बाद ही रागिनी की आवाज मेरे कानों में गूंज चुकी थी।

"तुम्हारा पिस्टल तो यहां है रोमेश" उसकी बात सुनते ही मैं किचन की ओर दौड़ा।

"रुको इसे हाथ मत लगाना" मैंने रागिनी को उस पिस्टल को हाथ लगाने से रोका। रागिनी तुरन्त मेरी बात को समझ गई थी।

"हम आज दिन में भी इस किचन में आये थे, तब तो ये पिस्टल यहां नही थी" पिस्टल को वहां देखकर मेरा दिमाग चक्करघिन्नी खा चुका था।

"तुमने ध्यान नही दिया होगा, ये हमे इस गैस के चूल्हे के नीचे से मिला है" मेघना ने रागिनी से पहले बोला।

मैने रागिनी की तरफ देखा, उसने भी सहमती में अपने सिर को हिलाया।

"मैं एसआई देवप्रिय को बुला रहा हूँ, इस पिस्टल के लास्ट फिंगर प्रिंट हर हाल में लेने होगे, क्यो कि मुझे अच्छी तरह से याद है कि मैंने कल रात को कॉफी बनाने के लिये किचन में जाते हुए पिस्टल को अपनी बेड की दराज में ही रखा था"

मैं अभी भी अपनी बात पर कायम था।

जारी रहेगा_____✍️
Eeee sala... पिस्टल मिल गयी....


अब देखना यह है कि पिस्टल मिलने से पहले किस किस से मिल कर आयी हैं.....


देविका ने तो पूरी कहानी ही बदल दी....


Sala कोई तो फिरकी ले रहा हैं रोमेश बाबु की....


Bhut shandaar update...
 

parkas

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#08

"बोलो! तुम क्या बोलना चाहती हो! लेकिन कुछ भी बोलने से पहले एक बात का ध्यान रखना की कोई भी झूठ मेरे सामने ज्यादा देर तक ठहरता नही है" मैने देविका को चेतावनी भरें लहजें में बोला।

"मैं खुद कुमार गौरव की ब्लेकमेलिंग का शिकार हूँ, उसने न केवल मुझे ब्लेकमेल करके अपना काम लोगों से निकलवाया, बल्कि जब मैंने उसके लिए और ज्यादा इस्तेमाल होने से इनकार किया तो उसने एक झूठा केस बनवाकर मुझे जेल भिजवा दिया"

देविका बोल रही थी कि कुमार उसे ब्लैकमेल कर रहा था, जबकि कुमार उसकी और ही पिक्चर मुझे दिखा चुका था।

"लेकिन कुमार ने हमे ये तो कभी नही बोला कि तुम उसे ब्लैकमेल कर रही थी, उसने तो हमे इतना बताया था कि तुम अपने हुश्न के जाल में लोगो को फंसाकर उसके पैसे पर जब तक अय्याशी करती थी, जब तक वो बन्दा तुम पर अपने पैसे लुटाता था, उसके बाद जब वो पैसे लुटाना बन्द कर देता था, तो तुम कोई नया बकरा हलाल करने के लिए ढूंढ लेती थी" मैंने कड़े शब्दों में साफगोई से वही बोला, जो मुझे कुमार ने बोला।

"उससे ये भी तो पूछते की उस पैसे के बदले में वो मेरा क्या लूटते थे, उसको अपना पैसा नजर आ गया, लेकिन मेरी लूटी हुई इज्जत उसे नजर नही आई, सिर्फ इस कुमार ने ही अपने फायदे के लिए मुझे दस से ज्यादा लोगो के साथ सुलाया, सिर्फ मेरे जिस्म का इस्तेमाल करके इस हरामी ने कुंडली, और बवाना जैसे इंडस्ट्रियल इलाको में पांच सौ गज में बड़ी बड़ी फैक्ट्री बनाली, और उन्ही पैसो के दम पर मुझें जेल तक भिजवा दिया" देविका ने मेरी ओर देखकर बोला।

"लेकिन जेल तो तुम्हे सौम्या ने भिजवाया था, फ्रॉड तो तुमने सौम्या के साथ किया था" तभी रागिनी ने वाजिब सवाल किया।

"सौम्या को सिर्फ कुमार ने अपने मोहरे के तौर पर इस्तेमाल किया था, मेरी ईमेल और आईडी के इस्तेमाल से मेरे ही खिलाफ ऐसी साजिस रची की उसके कर्मो की सजा भुगतने के लिए मुझे जेल जाना पड़ा, और अभी भी जमानत पर हूँ" देविका ने बोला।

"कुमार ने क्या किया" मैंने देविका से पूछा।

"कुमार ने' ऐनी डेस्क'का इस्तेमाल करके मुझ से सौम्या की कंपनी की डेटा फ़ाइल अपने कंप्यूटर में खुलवा ली, और उन फाइलों को अपने कंप्यूटर में सेव कर लिया, फिर मेरी ईमेल आईडी से उन फ़ाइल को उन लोगों को भेज दिया, जिनसे उसने उस डेटा को बेचने का सौदा किया था, और फिर खुद ही सौम्या को गुमनाम काल करके इस फ्रॉड की जानकारी दे दी, अब क्यो कि डेटा भेजने में मेरी ईमेल आईडी का इस्तेमाल हुआ था, तो मुझे ही दोषी माना गया" देविका ने अपनी कहानी सुनाई।

"तुम्हारी कहानी में बहत्तर छेद है देविका, जब ये केस पुलिस में गया होगा, तब पुलिस ने उस सर्वर को भी तलाश किया होगा, जिस कंप्यूटर से वो मेल की गई थी, उस स्थिति में कुमार भी तो उस केस में तुम्हारा सह-अभियुक्त बनता" रागिनी ने फिर से एक और वाजिब सवाल देविका से किया।

"पुलिस के आगे मैंने कुमार के बारे में बोला था, लेकिन मैंने बोला न कि पैसा बोलता है, पुलिस ने मेरी बातों पर कोई तवज्जो ही नही दी, सिर्फ उस ईमेल आईडी की बुनियाद पर ही मुझ पर केस बना दिया" देविका ने जो बोला था, मैं उससे इंकार नही कर सकता था।

पुलिस में बहुत लोग ऎसे मिल जायेंगे जो पैसा मिलने के बाद रस्सी का सांप और सांप को रस्सी बनाने में माहिर थे।

"चलो मैं एक मिनट को तुम्हारी कहानी पर विश्वास भी कर लूं,तो मैं अभी तक ये नही समझ पाया कि कल रात को तुम मेरे ही घर मे क्यो घुसी, और कुमार की गाड़ी तुम्हारे पास कहां से आ गई, सबसे बड़ी बात, जब तुम गाड़ी से उतरी तो तुम भागते हुए मेरे घर की ओर ही क्यो गई, जबकि सामने ही ढाबा खुला हुआ था, अगर सच मे तुम्हारी जान को खतरा था, तो सबसे पहले तो तुम्हे ढाबे में ही जाना चाहिए था" मैने एक साथ कई सवालो की झड़ी लगा दी थी।

"उस गाड़ी में उस समय भी कुमार अंदर था, वो पिछली सीट पर बैठा हुआ था, जब मैं वापिस आई तब वहां से आगे जानें के बाद उसने उस गाड़ी को अपने कब्जे में दोबारा ले लिया था, उसके बाद उसने मुझें मेरे घर पर छोड़ा और फिर उसी गाड़ी से वापस गया, लेकिन उस गाड़ी के चोरी होने की रिपोर्ट वो शाम को ही थाने में दर्ज करवा चुका था" देविका ने जो बताया, वो कोई बहुत शातिर दिमाग आदमी ही कर सकता था।

"लेकिन मेरा सवाल अभी फिर से वही है कि मेरा पिस्टल कौन लेकर गया, मैने कुमार की उस गाड़ी के आने से लेकर जाने तक की उस ढाबे के सीसी टीवी कैमरे की पूरी फुटेज चेक करी है, लेकिन मुझें तुम्हारे अलावा कोई और शख्स नजर नही आया, जो मेरे घर की तरफ गया हो" मैंने फिर से अपनी बात को दोहराया।

"मैं फिर बोल रही हूँ कि, मैं कोई पिस्टल आपके यहाँ से उठा कर नही लाई हूँ, अब एक बार फिर से अपने घर को अच्छे से चेक कीजिये" देविका अभी भी अपनी बात पर अडिग थी।

मैं अब उसकी बात पर बुरी तरह से झल्ला चुका था।

"इस वक़्त अगर तुम्हें मौका मिले की तुम कुमार को मार सको, तो उसे मार डालोगी न" तभी रागिनी ने एक अजीब सा सवाल देविका से किया।

"बिल्कुल मार दूँगी" देविका ने बेहिचक जवाब दिया।

"ऐसे में जब तुमने रोमेश को अपनी पिस्टल को दराज में रखते हुए देखा, तो स्वभाविक तौर पर तुम्हारे मन में ये ख्याल आया होगा कि काश ये पिस्टल मेरे पास हो तो मैं कुमार की जान ले लू" रागिनी ने उसकी मनस्थिति के बारे में बताया।

"लेकिन ये सब सोचकर अगर मैं पिस्टल लेकर जाती तो, कुमार तो गाड़ी में ही बैठा हुआ था, मैं पहली फुर्सत में ही उसे गोली मार देती" देविका ने रागिनी के सवाल का जवाब दिया।

"उस वक़्त तो नही मार सकती थी, क्यो कि सामने तो ढाबा था, ऐसे सबके सामने गोली मारती तो तुम पकड़ी जाती" रागिनी ने फिर से उसके जवाब की हवा निकाली।

"लेकिन अगर मुझे कुमार को मारना ही होता तो मैं आज रोमेश बाबू को अपने घर क्यो बुलाती, मैंने रोमेश बाबू को इसलिए बुलाया है कि मेघना ने जेल में मुझें रोमेश जी की काबलियत के बारे में बताया था, और इसने बोला था कि अगर मेरी सच्चाई पर रोमेश को विश्वास हो गया तो, रोमेश सौम्या को भी कन्विंस कर लेगा, क्यो कि सौम्या रोमेश की बात कभी नही टाल सकती"

देविका के पास हर सवाल का जवाब था। लेकिन अब जो सवाल मैं पूछने जा रहा था, उस सवाल का जवाब शायद उसके पास नही होता।

"चलो तुम्हारी सारी बात मैने मान ली, तुम अब मेरे सिर्फ एक सवाल का जवाब दे दो, जब तुम खुद कुमार के साथ मेरे घर तक आई थी, तो तुमने अपनी जान खतरे में होने की झूठी खबर क्यो सुनाई, और मेरे घर पर आने का तुम्हरा मकसद क्या था" मैने ये सवाल पूछ कर अपनी तीक्ष्ण निग़ाहों को उसके डूबते हुए सूरज की लालिमा बिखेरते चेहरे पर जमा दिया।

उस लालिमा भरे चेहरे पर पसीने की बूंदे उभर आई थी। उसकी चुप्पी से कमरे में सन्नाटा पसर चुका था।

पिस्टल का मिलना:

"जवाब दो मेरी बात का मेरी लख्तेजिगर" मैने देविका को अपने चिरपरिचित अंदाज में फिर से बोलकर वहां छाये हुए सन्नाटे का अंत किया।

"मैंने झूठ बोला था कि, मुझें जान का खतरा था, मैं बस तुमसे एक बार मिलना चाहती थी, क्यो कि मेघना ने तुम्हारी मेरे सामने बहुत तारीफ की थी, इसलिए मैं तुम्हारा टेस्ट ले रही थी" देविका ने लगे हाथो एक नई कहानी बनाई।

"क्या टेस्ट लेना चाहती थी" मैने पूछा।

"मैं देखना चाहती थी कि तुम सच मे ही इतने हरफनमौला इंसान हो या मेघना बेवजह तुमसे इम्प्रेस है" देविका ने अचानक से उस कमरे के माहौल को एक दम तीन सौ साठ डिग्री के कोण पर घुमा दिया था।

"लगता है तुम्हे कहानियां बनाने में महारत हासिल है देविका, तुम ये बेकार के धंधे छोड़कर उपन्यास लिखना शुरू कर दो, जल्दी पॉपुलर हो जाओगी" रागिनी ने इस बार एक कुटिल मुस्कान के साथ देविका को बोला था।

"मैं कोई कहानी नही बना रही हूँ रागिनी, मेरी बात का यकीन मानो!" देविका ने मुरझाये हुए स्वर में बोला।

"अगर कहानी नही है तो बताओ, तुमने रोमेश का पिस्टल क्यो गायब किया" रागिनी को एक प्रतिशत भी उसकी बात पर विश्वास नही था।

"मैं बार बार बोल रही हूँ, की मैंने आपका पिस्टल गायब नही किया है" देविका ने एक बार फिर पुरजोर लहजें में बोला।

"रोमेश बाबू ! तुम एक बार देविका के सामने ही अपने घर पर फिर से क्यो नही चेक कर लेते" मेघना ने बीच का रास्ता सुझाया।

"अब तो यही करना पड़ेगा, चलो तुम मेरे साथ मेरी गाड़ी में चलो, और रागिनी मेघना के साथ आ जाएगी" मैने उन सभी की तरफ देखते हुए बोला।

मेरी बात सुनते ही वे तीनो भी सोफे से उठ खड़े हुए। कुछ ही देर में हम अपनी अपनी गाड़ियों से मेरे घर की ओर उड़े जा रहा थे।

घर पहुंचने में हमे सिर्फ दस मिनट लगे, देविका के घर से मेरे घर का रास्ता महज दस मिनट का ही था, और पिछले दस मिनट से ही हम अपने घर का चप्पा चप्पा छान रहे थे।

लेकिन अभी तक देविका का दावा फेल होता हुआ हो नजर आ रहा था।

रागिनी इस वक़्त मेघना के साथ मेरे किचन में पिस्टल की तलाश में गई हुई थी। क्यो कि हमारी बातो की रोशनी में ये बात उभर कर आ चुकी थी कि, मैं देविका से बात करते हुए ही किचन में गया था।

कोई पांच मिनट के बाद ही रागिनी की आवाज मेरे कानों में गूंज चुकी थी।

"तुम्हारा पिस्टल तो यहां है रोमेश" उसकी बात सुनते ही मैं किचन की ओर दौड़ा।

"रुको इसे हाथ मत लगाना" मैंने रागिनी को उस पिस्टल को हाथ लगाने से रोका। रागिनी तुरन्त मेरी बात को समझ गई थी।

"हम आज दिन में भी इस किचन में आये थे, तब तो ये पिस्टल यहां नही थी" पिस्टल को वहां देखकर मेरा दिमाग चक्करघिन्नी खा चुका था।

"तुमने ध्यान नही दिया होगा, ये हमे इस गैस के चूल्हे के नीचे से मिला है" मेघना ने रागिनी से पहले बोला।

मैने रागिनी की तरफ देखा, उसने भी सहमती में अपने सिर को हिलाया।

"मैं एसआई देवप्रिय को बुला रहा हूँ, इस पिस्टल के लास्ट फिंगर प्रिंट हर हाल में लेने होगे, क्यो कि मुझे अच्छी तरह से याद है कि मैंने कल रात को कॉफी बनाने के लिये किचन में जाते हुए पिस्टल को अपनी बेड की दराज में ही रखा था"

मैं अभी भी अपनी बात पर कायम था।

जारी रहेगा_____✍️
Bahut hi shaandar update diya hai Raj_sharma bhai....
Nice and lovely update....
 

Ajju Landwalia

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#08

"बोलो! तुम क्या बोलना चाहती हो! लेकिन कुछ भी बोलने से पहले एक बात का ध्यान रखना की कोई भी झूठ मेरे सामने ज्यादा देर तक ठहरता नही है" मैने देविका को चेतावनी भरें लहजें में बोला।

"मैं खुद कुमार गौरव की ब्लेकमेलिंग का शिकार हूँ, उसने न केवल मुझे ब्लेकमेल करके अपना काम लोगों से निकलवाया, बल्कि जब मैंने उसके लिए और ज्यादा इस्तेमाल होने से इनकार किया तो उसने एक झूठा केस बनवाकर मुझे जेल भिजवा दिया"

देविका बोल रही थी कि कुमार उसे ब्लैकमेल कर रहा था, जबकि कुमार उसकी और ही पिक्चर मुझे दिखा चुका था।

"लेकिन कुमार ने हमे ये तो कभी नही बोला कि तुम उसे ब्लैकमेल कर रही थी, उसने तो हमे इतना बताया था कि तुम अपने हुश्न के जाल में लोगो को फंसाकर उसके पैसे पर जब तक अय्याशी करती थी, जब तक वो बन्दा तुम पर अपने पैसे लुटाता था, उसके बाद जब वो पैसे लुटाना बन्द कर देता था, तो तुम कोई नया बकरा हलाल करने के लिए ढूंढ लेती थी" मैंने कड़े शब्दों में साफगोई से वही बोला, जो मुझे कुमार ने बोला।

"उससे ये भी तो पूछते की उस पैसे के बदले में वो मेरा क्या लूटते थे, उसको अपना पैसा नजर आ गया, लेकिन मेरी लूटी हुई इज्जत उसे नजर नही आई, सिर्फ इस कुमार ने ही अपने फायदे के लिए मुझे दस से ज्यादा लोगो के साथ सुलाया, सिर्फ मेरे जिस्म का इस्तेमाल करके इस हरामी ने कुंडली, और बवाना जैसे इंडस्ट्रियल इलाको में पांच सौ गज में बड़ी बड़ी फैक्ट्री बनाली, और उन्ही पैसो के दम पर मुझें जेल तक भिजवा दिया" देविका ने मेरी ओर देखकर बोला।

"लेकिन जेल तो तुम्हे सौम्या ने भिजवाया था, फ्रॉड तो तुमने सौम्या के साथ किया था" तभी रागिनी ने वाजिब सवाल किया।

"सौम्या को सिर्फ कुमार ने अपने मोहरे के तौर पर इस्तेमाल किया था, मेरी ईमेल और आईडी के इस्तेमाल से मेरे ही खिलाफ ऐसी साजिस रची की उसके कर्मो की सजा भुगतने के लिए मुझे जेल जाना पड़ा, और अभी भी जमानत पर हूँ" देविका ने बोला।

"कुमार ने क्या किया" मैंने देविका से पूछा।

"कुमार ने' ऐनी डेस्क'का इस्तेमाल करके मुझ से सौम्या की कंपनी की डेटा फ़ाइल अपने कंप्यूटर में खुलवा ली, और उन फाइलों को अपने कंप्यूटर में सेव कर लिया, फिर मेरी ईमेल आईडी से उन फ़ाइल को उन लोगों को भेज दिया, जिनसे उसने उस डेटा को बेचने का सौदा किया था, और फिर खुद ही सौम्या को गुमनाम काल करके इस फ्रॉड की जानकारी दे दी, अब क्यो कि डेटा भेजने में मेरी ईमेल आईडी का इस्तेमाल हुआ था, तो मुझे ही दोषी माना गया" देविका ने अपनी कहानी सुनाई।

"तुम्हारी कहानी में बहत्तर छेद है देविका, जब ये केस पुलिस में गया होगा, तब पुलिस ने उस सर्वर को भी तलाश किया होगा, जिस कंप्यूटर से वो मेल की गई थी, उस स्थिति में कुमार भी तो उस केस में तुम्हारा सह-अभियुक्त बनता" रागिनी ने फिर से एक और वाजिब सवाल देविका से किया।

"पुलिस के आगे मैंने कुमार के बारे में बोला था, लेकिन मैंने बोला न कि पैसा बोलता है, पुलिस ने मेरी बातों पर कोई तवज्जो ही नही दी, सिर्फ उस ईमेल आईडी की बुनियाद पर ही मुझ पर केस बना दिया" देविका ने जो बोला था, मैं उससे इंकार नही कर सकता था।

पुलिस में बहुत लोग ऎसे मिल जायेंगे जो पैसा मिलने के बाद रस्सी का सांप और सांप को रस्सी बनाने में माहिर थे।

"चलो मैं एक मिनट को तुम्हारी कहानी पर विश्वास भी कर लूं,तो मैं अभी तक ये नही समझ पाया कि कल रात को तुम मेरे ही घर मे क्यो घुसी, और कुमार की गाड़ी तुम्हारे पास कहां से आ गई, सबसे बड़ी बात, जब तुम गाड़ी से उतरी तो तुम भागते हुए मेरे घर की ओर ही क्यो गई, जबकि सामने ही ढाबा खुला हुआ था, अगर सच मे तुम्हारी जान को खतरा था, तो सबसे पहले तो तुम्हे ढाबे में ही जाना चाहिए था" मैने एक साथ कई सवालो की झड़ी लगा दी थी।

"उस गाड़ी में उस समय भी कुमार अंदर था, वो पिछली सीट पर बैठा हुआ था, जब मैं वापिस आई तब वहां से आगे जानें के बाद उसने उस गाड़ी को अपने कब्जे में दोबारा ले लिया था, उसके बाद उसने मुझें मेरे घर पर छोड़ा और फिर उसी गाड़ी से वापस गया, लेकिन उस गाड़ी के चोरी होने की रिपोर्ट वो शाम को ही थाने में दर्ज करवा चुका था" देविका ने जो बताया, वो कोई बहुत शातिर दिमाग आदमी ही कर सकता था।

"लेकिन मेरा सवाल अभी फिर से वही है कि मेरा पिस्टल कौन लेकर गया, मैने कुमार की उस गाड़ी के आने से लेकर जाने तक की उस ढाबे के सीसी टीवी कैमरे की पूरी फुटेज चेक करी है, लेकिन मुझें तुम्हारे अलावा कोई और शख्स नजर नही आया, जो मेरे घर की तरफ गया हो" मैंने फिर से अपनी बात को दोहराया।

"मैं फिर बोल रही हूँ कि, मैं कोई पिस्टल आपके यहाँ से उठा कर नही लाई हूँ, अब एक बार फिर से अपने घर को अच्छे से चेक कीजिये" देविका अभी भी अपनी बात पर अडिग थी।

मैं अब उसकी बात पर बुरी तरह से झल्ला चुका था।

"इस वक़्त अगर तुम्हें मौका मिले की तुम कुमार को मार सको, तो उसे मार डालोगी न" तभी रागिनी ने एक अजीब सा सवाल देविका से किया।

"बिल्कुल मार दूँगी" देविका ने बेहिचक जवाब दिया।

"ऐसे में जब तुमने रोमेश को अपनी पिस्टल को दराज में रखते हुए देखा, तो स्वभाविक तौर पर तुम्हारे मन में ये ख्याल आया होगा कि काश ये पिस्टल मेरे पास हो तो मैं कुमार की जान ले लू" रागिनी ने उसकी मनस्थिति के बारे में बताया।

"लेकिन ये सब सोचकर अगर मैं पिस्टल लेकर जाती तो, कुमार तो गाड़ी में ही बैठा हुआ था, मैं पहली फुर्सत में ही उसे गोली मार देती" देविका ने रागिनी के सवाल का जवाब दिया।

"उस वक़्त तो नही मार सकती थी, क्यो कि सामने तो ढाबा था, ऐसे सबके सामने गोली मारती तो तुम पकड़ी जाती" रागिनी ने फिर से उसके जवाब की हवा निकाली।

"लेकिन अगर मुझे कुमार को मारना ही होता तो मैं आज रोमेश बाबू को अपने घर क्यो बुलाती, मैंने रोमेश बाबू को इसलिए बुलाया है कि मेघना ने जेल में मुझें रोमेश जी की काबलियत के बारे में बताया था, और इसने बोला था कि अगर मेरी सच्चाई पर रोमेश को विश्वास हो गया तो, रोमेश सौम्या को भी कन्विंस कर लेगा, क्यो कि सौम्या रोमेश की बात कभी नही टाल सकती"

देविका के पास हर सवाल का जवाब था। लेकिन अब जो सवाल मैं पूछने जा रहा था, उस सवाल का जवाब शायद उसके पास नही होता।

"चलो तुम्हारी सारी बात मैने मान ली, तुम अब मेरे सिर्फ एक सवाल का जवाब दे दो, जब तुम खुद कुमार के साथ मेरे घर तक आई थी, तो तुमने अपनी जान खतरे में होने की झूठी खबर क्यो सुनाई, और मेरे घर पर आने का तुम्हरा मकसद क्या था" मैने ये सवाल पूछ कर अपनी तीक्ष्ण निग़ाहों को उसके डूबते हुए सूरज की लालिमा बिखेरते चेहरे पर जमा दिया।

उस लालिमा भरे चेहरे पर पसीने की बूंदे उभर आई थी। उसकी चुप्पी से कमरे में सन्नाटा पसर चुका था।

पिस्टल का मिलना:

"जवाब दो मेरी बात का मेरी लख्तेजिगर" मैने देविका को अपने चिरपरिचित अंदाज में फिर से बोलकर वहां छाये हुए सन्नाटे का अंत किया।

"मैंने झूठ बोला था कि, मुझें जान का खतरा था, मैं बस तुमसे एक बार मिलना चाहती थी, क्यो कि मेघना ने तुम्हारी मेरे सामने बहुत तारीफ की थी, इसलिए मैं तुम्हारा टेस्ट ले रही थी" देविका ने लगे हाथो एक नई कहानी बनाई।

"क्या टेस्ट लेना चाहती थी" मैने पूछा।

"मैं देखना चाहती थी कि तुम सच मे ही इतने हरफनमौला इंसान हो या मेघना बेवजह तुमसे इम्प्रेस है" देविका ने अचानक से उस कमरे के माहौल को एक दम तीन सौ साठ डिग्री के कोण पर घुमा दिया था।

"लगता है तुम्हे कहानियां बनाने में महारत हासिल है देविका, तुम ये बेकार के धंधे छोड़कर उपन्यास लिखना शुरू कर दो, जल्दी पॉपुलर हो जाओगी" रागिनी ने इस बार एक कुटिल मुस्कान के साथ देविका को बोला था।

"मैं कोई कहानी नही बना रही हूँ रागिनी, मेरी बात का यकीन मानो!" देविका ने मुरझाये हुए स्वर में बोला।

"अगर कहानी नही है तो बताओ, तुमने रोमेश का पिस्टल क्यो गायब किया" रागिनी को एक प्रतिशत भी उसकी बात पर विश्वास नही था।

"मैं बार बार बोल रही हूँ, की मैंने आपका पिस्टल गायब नही किया है" देविका ने एक बार फिर पुरजोर लहजें में बोला।

"रोमेश बाबू ! तुम एक बार देविका के सामने ही अपने घर पर फिर से क्यो नही चेक कर लेते" मेघना ने बीच का रास्ता सुझाया।

"अब तो यही करना पड़ेगा, चलो तुम मेरे साथ मेरी गाड़ी में चलो, और रागिनी मेघना के साथ आ जाएगी" मैने उन सभी की तरफ देखते हुए बोला।

मेरी बात सुनते ही वे तीनो भी सोफे से उठ खड़े हुए। कुछ ही देर में हम अपनी अपनी गाड़ियों से मेरे घर की ओर उड़े जा रहा थे।

घर पहुंचने में हमे सिर्फ दस मिनट लगे, देविका के घर से मेरे घर का रास्ता महज दस मिनट का ही था, और पिछले दस मिनट से ही हम अपने घर का चप्पा चप्पा छान रहे थे।

लेकिन अभी तक देविका का दावा फेल होता हुआ हो नजर आ रहा था।

रागिनी इस वक़्त मेघना के साथ मेरे किचन में पिस्टल की तलाश में गई हुई थी। क्यो कि हमारी बातो की रोशनी में ये बात उभर कर आ चुकी थी कि, मैं देविका से बात करते हुए ही किचन में गया था।

कोई पांच मिनट के बाद ही रागिनी की आवाज मेरे कानों में गूंज चुकी थी।

"तुम्हारा पिस्टल तो यहां है रोमेश" उसकी बात सुनते ही मैं किचन की ओर दौड़ा।

"रुको इसे हाथ मत लगाना" मैंने रागिनी को उस पिस्टल को हाथ लगाने से रोका। रागिनी तुरन्त मेरी बात को समझ गई थी।

"हम आज दिन में भी इस किचन में आये थे, तब तो ये पिस्टल यहां नही थी" पिस्टल को वहां देखकर मेरा दिमाग चक्करघिन्नी खा चुका था।

"तुमने ध्यान नही दिया होगा, ये हमे इस गैस के चूल्हे के नीचे से मिला है" मेघना ने रागिनी से पहले बोला।

मैने रागिनी की तरफ देखा, उसने भी सहमती में अपने सिर को हिलाया।

"मैं एसआई देवप्रिय को बुला रहा हूँ, इस पिस्टल के लास्ट फिंगर प्रिंट हर हाल में लेने होगे, क्यो कि मुझे अच्छी तरह से याद है कि मैंने कल रात को कॉफी बनाने के लिये किचन में जाते हुए पिस्टल को अपनी बेड की दराज में ही रखा था"

मैं अभी भी अपनी बात पर कायम था।

जारी रहेगा_____✍️

Gazab ki update he Raj_sharma Bhai

Devika ki har kahani me to mujhe jhol hi nazar aa rahe he...........

Jis yakin se vo bar bar keh rahi he ki pistol ghar hi milegi, iska matlab ye he ki koi aur bhi jo pistol ko wapis ghar par plant kar raha hoga..........

Ragini ne sahi dimag lagaya, pistol ko hath nahi lagane diya kisiko..........

Lekin pistol ko dobara plant karne wala kyun apne fingerprint choodega

Keep rockig Bro
 

despicable

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तितली…या … भँवरा … और मधु?
 
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