• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Thriller कातिल रात

Sushil@10

Active Member
1,855
2,080
143
#07

जब सौम्या के आफिस से निकले तो शाम के सात बज चुके थे। मैंने गाड़ी में बैठते ही रागिनी की तरफ देखा।

"तुम्हे घर छोड़ दूं क्या "मैने रागिनी को बोला।

"मेरी गाड़ी तुम्हारे फ्लैट पर खड़ी है, मैं वहां से गाड़ी लेकर ही घर चली जाउंगी" रागिनी की बात सुनकर मैने गाड़ी को अपने घर की और दौडा दिया।

मैं अभी मधुबन चौक से सीधा अंबेडकर हॉस्पिटल की तरफ जा रहा था। सेक्टर आठ के मेट्रो स्टेशन को पार करते ही एक लाल बत्ती पर मैने अपनी गाड़ी को रोका।

तभी एक गाड़ी बिल्कुल मेरे करीब आकर रुकी।

अचानक से मेरी उस गाड़ी की तरफ नजर पड़ी तो जो लड़की मेरी ओर देखकर मुस्करा रही थी, उसे देखकर मेरे होश उड़ गए थे। वो मेघना थी। वो मुझे देखकर लगातार मुस्कराए जा रही थी।

मैंने एक गहरी नजर भरकर उसे देखा। मेरी ये समझ मे नही आ रहा था, की वो जेल से बाहर कब आई।

"घर जा रहे हो" तभी मेघना ने मेरी ओर देखकर बोला।

"हां! अभी तो मेरा इराद घर जाने का ही था, लेकिन अब तुम्हे देखकर इरादा बदल दिया है, अब आज की शाम तुम्हारे साथ बिताने का इरादा है" अभी मैने बोला ही था कि वो तीन मिनट की लालबत्ती अब हरी बत्ती में बदल चुकी थी, और मेघना ने गाड़ी को तेजी से आगे बढ़ा दिया था।

मैंने भी उसके पीछे गाड़ी को दौड़ाया, लेकिन उसका इरादा मुझे देखकर भागने का नही था, उसने थोड़ी सी आगे जाकर गाड़ी को साइड में लगा दिया।

मैने भी उसके पीछे ही गाड़ी को रोका और अपनी गाड़ी से उतरकर मेघना की गाड़ी की ओर लपका।

रागिनी लपक कर ड्राइविंग सीट पर आ गई थी। उसने मेरे साथ बाहर आने का कोई प्रयास नही किया था। मैं मेघना की गाड़ी के पास उसकी ड्राइविंग सीट की तरफ पहुंचा।

"तुम मेरे साथ गाड़ी में आओ रोमेश, रागिनी को बोलो वो हमारे पीछे पीछे आ जाये, तुमसे कुछ बहुत जरुरी बात करनी है" मेघना ने मेरी और देखकर बोला।

"बाते तो मुझे भी तुमसे बहुत सारी करनी है, मैं आता हूँ अभी" ये बोलकर मैं रागिनी के पास जाकर उसे गाड़ी को पीछे लेकर आने के लिए बोला और वापिस आकर मैं मेघना की गाड़ी में आकर बैठ गया।

"जेल से कब बाहर आई तुम" मैंने गाड़ी में बैठते ही मेघना से पूछा।

"थोड़ी सेटिंग करके जमानत लेकर आई हूँ" मेघना ने संक्षेप में उत्तर दिया।

"यहां कैसे! इतेफाक से मिली हो, या फिर पीछा कर रही हो" मैंने हल्की सी मुस्कान के साथ पूछा।

"समझ लो पीछा ही कर रही हूँ! एक जरुरी काम था तुमसे" मेघना ने मेरी ओर देखकर बोला।

"मुझ से क्या काम आ गया तुम्हे, और मेरा पीछा क्या सौम्या के आफिस से ही कर रही हो" मैने उसकी तरफ देखकर बोला।

"हॉं ! जब तुम सौम्या के आफिस में जा रहे थे, तो मैं भी सौम्या से मिलने के लिए ही जा रही थी, लेकिन तुम्हे वहां जाते हुए देखकर मैं वापिस पार्किंग में आकर अपनी गाड़ी में बैठ गई थी" मेघना का व्यवहार मेरी समझ में नही आ रहा था।

"तुम्हे मुझ से क्या काम है" मैने अब उससे काम पूछना ही सही समझा।

"मेरी एक फ्रेंड मुसीबत में है, उसे तुम्हारी मदद चाहिए रोमेश" मेघना ने मेरी ओर कातर दृष्टि से देखते हुए बोला।

"तुम्हारी कौन सी फ्रेंड मुसीबत में है" मैंने असमंजस में उसकी ओर देखा।

"मैं उसी से मिलवाने के लिए तुम्हे लेकर जा रही हूँ" मैने देखा कि मेघना रिठालाका मेट्रो स्टेशन भी पार करके सेक्टर चौबीस की ओर अपनी गाड़ी को मोड़ चुकी थी।

मैने एक बार घूमकर देखा। रागिनी बदस्तूर हमारे पीछे ही आ रही थी। कोई दस मिनट उस सेक्टर में ही
गाड़ी को घुमाने के बाद उसने एक फ्लैट के बाहर गाड़ी रोक दी।

"इसी फ्लैट के फर्स्ट फ्लोर पर जाना है" मेघना ने गाड़ी के दरवाजे ओपन करते हुए बोला।

मैंने देखा कि रागिनी भी मेघना की गाड़ी के पीछे गाड़ी लगा चुकी थी, और गाड़ी से उतरकर मेरे नजदीक आकर खड़ी हो गई थी।

मेघना ने भी अपनी गाड़ी को लॉक किया और उस फ्लैट की पहली मंजिल की ओर बढ़ गई। हम दोनों भी उसी के नक्शेकदम पर चल पड़े थे। पहली मंजिल पर पहुंच कर मेघना ने बेल बजाई।

कोई दो मिनट के बाद एक जोडी कदमो की आवाज दरवाजे के करीब आती हुई सुनाई दी।

दरवाजा खुला और दरवाजे पर इस वक़्त मेरी नजर में अनामिका, कुमार गौरव की नजर में मल्लिका और पुलिस फ़ाइल में देविका के नाम से पाई जाने वाली वही खूबसूरत जाॅनिसार, नरगिस ए मस्ताना खड़ी हुई थी, और मेरी ओर देखकर मंद मंद मुस्करा थी।

उसे वहां देखकर मेरे होठो पर भी एक कुटिल मुस्कान थिरकने लगी थी।

उलझती गुत्थी।

देविका की वो मुस्कान कुछ ही पल में लुप्त हो गई और उसने हमारे अन्दर आने के लिए रास्ता छोड़ दिया।

मैं लगातार उसी को घूरते हुए सोफे पर जाकर बैठ गया।

उसकी वही कातिल मुस्कान एक बार फिर से उसके होठो पर थिरकने लगी थी।

"तुम दोनो एक दूसरे को पहले से जानते हो क्या, ये देविका तुम्हे देखकर बहुत मुस्करा रही है" मेघना ने अनजान स्वर में बोला।

"ये तो यही मोहतरमा बतायेगी की ये मुझे कैसे जानती है, लेकिन मैं इतना जरूर जानता हूँ, की ये लड़की मुझे बेवकूफ बनाकर मेरे घर से मेरा पिस्टल चुराकर भागी है" मैने मेघना की ओर देखते हुए ही, ये बोला ही था कि रागिनी अपनी जगह से उठी और अपनी पिस्टल को उसने देविका की कनपटी पर लगा दिया।

"वो पिस्टल निकाल कर लाओ, जहां भी उसे छुपा कर रखा है, वरना यकीन मानो गोली चलाते हुए मेरा हाथ कदापि नही कांपता" रागिनी का इस तरीके से उसके पिस्टल लगाने का उद्देश्य मैं समझ गया था, ये देविका के ऊपर एक मनोवैज्ञानिक दवाव बनाने का तरीका था।

"ये तुम क्या कर रही हो रागिनी, आराम से बैठकर बात करो, अगर सच मे इसके पास रोमेश की पिस्टल है, तो मैं उसे वापिस दिलवा दूँगी" मेघना ने घबराए हुए स्वर में कहा।

वैसे भी मेघना ने रागिनी के जलवो को अपनी आंखों से देखा हुआ था।

"आराम से बात तभी होंगी मेघना, जब ये पहले रोमेश सर का पिस्टल हमारे हवाले कर देगी, और साथ मे ये भी बतायेगी की उस पिस्टल को चुराने के पीछे इसका क्या मन्तव्य था" रागिनी मेघना की बात सुनने के कतई मूड में नही थी।

"मैने कोई पिस्टल नही चुराई, हॉं ये सच है कि मैं उस दिन रोमेश के फ्लैट में गई थी, लेकिन मैं उस वक़्त अपनी जान बचाने के लिए वहाँ घुसी थी" देविका ने सिरे से झूठ बोला।

"मैंने तुम्हारे सामने अपनी पिस्टल को अपनी दराज में डाला था, तुमने मुझे कॉफी बनाने के लिए बोला, जब मैं तुम्हारे लिए कॉफी बनाने के लिए गया तो तुम मुझे बिना बताए वहां से जा चुकी थी, तब मैंने सोचा कि शायद तुम कोई चोर थी, और कुछ चुराने के लिए मेरे घर में घुसी थी, फिर मैंने अपना सामान चेक किया तो दराज में से मुझे अपनी पिस्टल गायब मिली थी" मैने उसे उस रात का एक एक वाक्य याद दिलाया।

"लेकिन अगर मैंने पिस्टल चुराई होती तो मैं खुद तुम्हें अपने घर पर क्यो बुलाती, पूछ लो मेघना से, मैने ही मेघना को तुमसे मिलवाने के लिए फ़ोर्स किया था" देविका ने अपनी बेगुनाही का तर्क रखा।

"तुम दोनो ही सौम्या की कंपनी में काम करती थी, दोनो ने ही सौम्या के साथ कुछ न कुछ गलत किया है, जेल में तुम दोनो ने जरूर सौम्या के खिलाफ कोई नई खिचड़ी पकाई होगी!, अब क्यो कि मेघना तो अच्छी तरह से जानती है कि अगर सौम्या किसी मुसीबत में फंसती है तो वो रोमेश जी को जरूर याद करेगी, इसलिए तुम लोगो ने पहले रोमेश को ही रास्ते से हटाने का प्लान बनाया होगा" सोच के मामले में रागिनी इस वक़्त मुझ से भी चार कदम आगे चल रही थी।

"यार मैं अपने मामले में रोमेश को कोई गुनाहगार मानती ही नही हूँ, मेरे ही कर्म गलत थे, तो मुझे तो सजा मिलनी ही थी, लेकिन मैं हमेशा रोमेश को अपना सबसे अच्छा दोस्त ही समझती हूँ, तभी मैने जेल में भी किसी को कोई मदद की जरूरत होती है तो, रोमेश का नाम ही सभी को बताती हूँ" मेघना ने मेरी दोस्ती का दम भरा।

लेकिन फिलहाल की परिस्थितयो में उसकी इस दोस्ती के दम में कोई दम नही था।

"मैने तुम्हारे सामने अपना पिस्टल अपनी दराज में रखा था, तुम्हारे सामने किसी और आदमी ने मेरे फ्लैट मंर कदम नही रखा था, न तुम्हारे जाने के बाद कोई और मेरे फ़्लैट में आया, फिर अगर मेरी पिस्टल को तुम नही लेकर गई तो उसे जमीन निगल गयी या आसमान खा गया" मैने क्षुब्ध स्वर में बोला।

"तुमने ध्यान से चेक किया है कि वो पिस्टल तुम्हारे घर मे नही है" इस बार मेघना बीच मे बोली।

"इतना बड़ा बेवकूफ तो हूं नही की बिना घर मे चेक किए ही मैं थाने तक मे जाकर रिपोर्ट लिखवा दूंगा" मैने हल्के से गुस्से में मेघना की ओर देखकर बोला।

"एक बार हम लोग जाकर तुम्हारे घर पर ही उस पिस्टल को ढूंढ़े, हो सकता है, पिस्टल वही पर हो और तुम बिना वजह इधर उधर मारे फिर रहे हो" ये बात देविका ने बोली।

मेरे साथ साथ रागिनी ने भी उसे हैरानी से देखा।

"यार इस पिस्टल को हटा लो, इस पिस्टल को देख देख कर मेरी हार्टबीट बढ़ रही है, कहीं ये बेगुनाह बेमौत न मारी जाए" मेघना ने रागिनी की ओर देखते हुए बोला।

इस बार मेघना की रिक्वेस्ट भरी आवाज सुनकर रागिनी ने भी अपनी पिस्टल को देविका की खोपड़ी से हटा लिया।

"रोमेश सर! एक बार इसकी तमन्ना भी इसके सामने अपने घर की तलाशी करवा कर पूरी कर दो, पिस्टल अगर वहाँ नही मिलती है तो, इसको उसी समय पुलिस के हवाले कर दो" रागिनी ने अब देविका के पास से मेरी ओर आते हुए कहा।

"ये तरीका सही रहेगा" मैंने रागिनी की बात से सहमति जताई।

"लेकिन मुझे पुलिस के हवाले क्यो करोगे, तुम मेरी तलाशी ले लो, मेरे पूरे घर की तलाशी ले लो, जब मैंने कुछ किया ही नही तो मैं फिर से जेल क्यो जाऊं" देविका ने पुलिस बुलाने की बात का पुरजोर विरोध किया।

"लेकिन तुम्हारी हिस्ट्री के बारे में अभी तक जो सुना है, उस हिसाब से तो तुम आदतन अपराधी हो" मैने देविका को हिक़ारत से देखते हुए बोला।

"सिर्फ सुना है न, कभी अपनी आंखों से मेरे खिलाफ कोई सबूत देखा है" देविका ने विश्वास भरी दृष्टि से मेरी ओर देखा।

"हमारी गुड बुक में तो अब आई हो तुम देविका, तो अब सबूत भी ढूंढ लेगे" रागिनी ने उसी के अंदाज में उसे जवाब दिया।

"कुछ तो तुम्हारे बारे में कुमार गौरव ने बताया है, कुछ पुलिस फ़ाइल से पता चला है, बाकी बचा खुचा सौम्या ने बता दिया, इसके बाद भी तुम सबूत की बात कर रही हो" मैने हैरानी से देविका को देखा।

"इसी कुमार गौरव के बारे में ही तो तुमसे बात करने के लिए मेघना के जरिये, तुम्हे यहाँ बुलाया है रोमेश बाबू, मैं तो खुद उस कुमार की सताई हुई हूँ! मैं तो खुद पीड़िता हूँ, जिसे एक योजना बद्व तरीक़े से हर किसी की नजर में गुनाहगार बना दिया है" देविका ने विक्टिम कार्ड खेला।

लेकिन अब मेरी दिलचस्पी उसकी बातों में जाग चुकी थी। मैं अब उसका भी सच उसके मुंह से सुनना चाहता था।


जारी रहेगा______✍️
Awesome update and lovely story
 
  • Love
Reactions: Raj_sharma

Luckyloda

Well-Known Member
3,445
9,851
159
#07

जब सौम्या के आफिस से निकले तो शाम के सात बज चुके थे। मैंने गाड़ी में बैठते ही रागिनी की तरफ देखा।

"तुम्हे घर छोड़ दूं क्या "मैने रागिनी को बोला।

"मेरी गाड़ी तुम्हारे फ्लैट पर खड़ी है, मैं वहां से गाड़ी लेकर ही घर चली जाउंगी" रागिनी की बात सुनकर मैने गाड़ी को अपने घर की और दौडा दिया।

मैं अभी मधुबन चौक से सीधा अंबेडकर हॉस्पिटल की तरफ जा रहा था। सेक्टर आठ के मेट्रो स्टेशन को पार करते ही एक लाल बत्ती पर मैने अपनी गाड़ी को रोका।

तभी एक गाड़ी बिल्कुल मेरे करीब आकर रुकी।

अचानक से मेरी उस गाड़ी की तरफ नजर पड़ी तो जो लड़की मेरी ओर देखकर मुस्करा रही थी, उसे देखकर मेरे होश उड़ गए थे। वो मेघना थी। वो मुझे देखकर लगातार मुस्कराए जा रही थी।

मैंने एक गहरी नजर भरकर उसे देखा। मेरी ये समझ मे नही आ रहा था, की वो जेल से बाहर कब आई।

"घर जा रहे हो" तभी मेघना ने मेरी ओर देखकर बोला।

"हां! अभी तो मेरा इराद घर जाने का ही था, लेकिन अब तुम्हे देखकर इरादा बदल दिया है, अब आज की शाम तुम्हारे साथ बिताने का इरादा है" अभी मैने बोला ही था कि वो तीन मिनट की लालबत्ती अब हरी बत्ती में बदल चुकी थी, और मेघना ने गाड़ी को तेजी से आगे बढ़ा दिया था।

मैंने भी उसके पीछे गाड़ी को दौड़ाया, लेकिन उसका इरादा मुझे देखकर भागने का नही था, उसने थोड़ी सी आगे जाकर गाड़ी को साइड में लगा दिया।

मैने भी उसके पीछे ही गाड़ी को रोका और अपनी गाड़ी से उतरकर मेघना की गाड़ी की ओर लपका।

रागिनी लपक कर ड्राइविंग सीट पर आ गई थी। उसने मेरे साथ बाहर आने का कोई प्रयास नही किया था। मैं मेघना की गाड़ी के पास उसकी ड्राइविंग सीट की तरफ पहुंचा।

"तुम मेरे साथ गाड़ी में आओ रोमेश, रागिनी को बोलो वो हमारे पीछे पीछे आ जाये, तुमसे कुछ बहुत जरुरी बात करनी है" मेघना ने मेरी और देखकर बोला।

"बाते तो मुझे भी तुमसे बहुत सारी करनी है, मैं आता हूँ अभी" ये बोलकर मैं रागिनी के पास जाकर उसे गाड़ी को पीछे लेकर आने के लिए बोला और वापिस आकर मैं मेघना की गाड़ी में आकर बैठ गया।

"जेल से कब बाहर आई तुम" मैंने गाड़ी में बैठते ही मेघना से पूछा।

"थोड़ी सेटिंग करके जमानत लेकर आई हूँ" मेघना ने संक्षेप में उत्तर दिया।

"यहां कैसे! इतेफाक से मिली हो, या फिर पीछा कर रही हो" मैंने हल्की सी मुस्कान के साथ पूछा।

"समझ लो पीछा ही कर रही हूँ! एक जरुरी काम था तुमसे" मेघना ने मेरी ओर देखकर बोला।

"मुझ से क्या काम आ गया तुम्हे, और मेरा पीछा क्या सौम्या के आफिस से ही कर रही हो" मैने उसकी तरफ देखकर बोला।

"हॉं ! जब तुम सौम्या के आफिस में जा रहे थे, तो मैं भी सौम्या से मिलने के लिए ही जा रही थी, लेकिन तुम्हे वहां जाते हुए देखकर मैं वापिस पार्किंग में आकर अपनी गाड़ी में बैठ गई थी" मेघना का व्यवहार मेरी समझ में नही आ रहा था।

"तुम्हे मुझ से क्या काम है" मैने अब उससे काम पूछना ही सही समझा।

"मेरी एक फ्रेंड मुसीबत में है, उसे तुम्हारी मदद चाहिए रोमेश" मेघना ने मेरी ओर कातर दृष्टि से देखते हुए बोला।

"तुम्हारी कौन सी फ्रेंड मुसीबत में है" मैंने असमंजस में उसकी ओर देखा।

"मैं उसी से मिलवाने के लिए तुम्हे लेकर जा रही हूँ" मैने देखा कि मेघना रिठालाका मेट्रो स्टेशन भी पार करके सेक्टर चौबीस की ओर अपनी गाड़ी को मोड़ चुकी थी।

मैने एक बार घूमकर देखा। रागिनी बदस्तूर हमारे पीछे ही आ रही थी। कोई दस मिनट उस सेक्टर में ही
गाड़ी को घुमाने के बाद उसने एक फ्लैट के बाहर गाड़ी रोक दी।

"इसी फ्लैट के फर्स्ट फ्लोर पर जाना है" मेघना ने गाड़ी के दरवाजे ओपन करते हुए बोला।

मैंने देखा कि रागिनी भी मेघना की गाड़ी के पीछे गाड़ी लगा चुकी थी, और गाड़ी से उतरकर मेरे नजदीक आकर खड़ी हो गई थी।

मेघना ने भी अपनी गाड़ी को लॉक किया और उस फ्लैट की पहली मंजिल की ओर बढ़ गई। हम दोनों भी उसी के नक्शेकदम पर चल पड़े थे। पहली मंजिल पर पहुंच कर मेघना ने बेल बजाई।

कोई दो मिनट के बाद एक जोडी कदमो की आवाज दरवाजे के करीब आती हुई सुनाई दी।

दरवाजा खुला और दरवाजे पर इस वक़्त मेरी नजर में अनामिका, कुमार गौरव की नजर में मल्लिका और पुलिस फ़ाइल में देविका के नाम से पाई जाने वाली वही खूबसूरत जाॅनिसार, नरगिस ए मस्ताना खड़ी हुई थी, और मेरी ओर देखकर मंद मंद मुस्करा थी।

उसे वहां देखकर मेरे होठो पर भी एक कुटिल मुस्कान थिरकने लगी थी।

उलझती गुत्थी।

देविका की वो मुस्कान कुछ ही पल में लुप्त हो गई और उसने हमारे अन्दर आने के लिए रास्ता छोड़ दिया।

मैं लगातार उसी को घूरते हुए सोफे पर जाकर बैठ गया।

उसकी वही कातिल मुस्कान एक बार फिर से उसके होठो पर थिरकने लगी थी।

"तुम दोनो एक दूसरे को पहले से जानते हो क्या, ये देविका तुम्हे देखकर बहुत मुस्करा रही है" मेघना ने अनजान स्वर में बोला।

"ये तो यही मोहतरमा बतायेगी की ये मुझे कैसे जानती है, लेकिन मैं इतना जरूर जानता हूँ, की ये लड़की मुझे बेवकूफ बनाकर मेरे घर से मेरा पिस्टल चुराकर भागी है" मैने मेघना की ओर देखते हुए ही, ये बोला ही था कि रागिनी अपनी जगह से उठी और अपनी पिस्टल को उसने देविका की कनपटी पर लगा दिया।

"वो पिस्टल निकाल कर लाओ, जहां भी उसे छुपा कर रखा है, वरना यकीन मानो गोली चलाते हुए मेरा हाथ कदापि नही कांपता" रागिनी का इस तरीके से उसके पिस्टल लगाने का उद्देश्य मैं समझ गया था, ये देविका के ऊपर एक मनोवैज्ञानिक दवाव बनाने का तरीका था।

"ये तुम क्या कर रही हो रागिनी, आराम से बैठकर बात करो, अगर सच मे इसके पास रोमेश की पिस्टल है, तो मैं उसे वापिस दिलवा दूँगी" मेघना ने घबराए हुए स्वर में कहा।

वैसे भी मेघना ने रागिनी के जलवो को अपनी आंखों से देखा हुआ था।

"आराम से बात तभी होंगी मेघना, जब ये पहले रोमेश सर का पिस्टल हमारे हवाले कर देगी, और साथ मे ये भी बतायेगी की उस पिस्टल को चुराने के पीछे इसका क्या मन्तव्य था" रागिनी मेघना की बात सुनने के कतई मूड में नही थी।

"मैने कोई पिस्टल नही चुराई, हॉं ये सच है कि मैं उस दिन रोमेश के फ्लैट में गई थी, लेकिन मैं उस वक़्त अपनी जान बचाने के लिए वहाँ घुसी थी" देविका ने सिरे से झूठ बोला।

"मैंने तुम्हारे सामने अपनी पिस्टल को अपनी दराज में डाला था, तुमने मुझे कॉफी बनाने के लिए बोला, जब मैं तुम्हारे लिए कॉफी बनाने के लिए गया तो तुम मुझे बिना बताए वहां से जा चुकी थी, तब मैंने सोचा कि शायद तुम कोई चोर थी, और कुछ चुराने के लिए मेरे घर में घुसी थी, फिर मैंने अपना सामान चेक किया तो दराज में से मुझे अपनी पिस्टल गायब मिली थी" मैने उसे उस रात का एक एक वाक्य याद दिलाया।

"लेकिन अगर मैंने पिस्टल चुराई होती तो मैं खुद तुम्हें अपने घर पर क्यो बुलाती, पूछ लो मेघना से, मैने ही मेघना को तुमसे मिलवाने के लिए फ़ोर्स किया था" देविका ने अपनी बेगुनाही का तर्क रखा।

"तुम दोनो ही सौम्या की कंपनी में काम करती थी, दोनो ने ही सौम्या के साथ कुछ न कुछ गलत किया है, जेल में तुम दोनो ने जरूर सौम्या के खिलाफ कोई नई खिचड़ी पकाई होगी!, अब क्यो कि मेघना तो अच्छी तरह से जानती है कि अगर सौम्या किसी मुसीबत में फंसती है तो वो रोमेश जी को जरूर याद करेगी, इसलिए तुम लोगो ने पहले रोमेश को ही रास्ते से हटाने का प्लान बनाया होगा" सोच के मामले में रागिनी इस वक़्त मुझ से भी चार कदम आगे चल रही थी।

"यार मैं अपने मामले में रोमेश को कोई गुनाहगार मानती ही नही हूँ, मेरे ही कर्म गलत थे, तो मुझे तो सजा मिलनी ही थी, लेकिन मैं हमेशा रोमेश को अपना सबसे अच्छा दोस्त ही समझती हूँ, तभी मैने जेल में भी किसी को कोई मदद की जरूरत होती है तो, रोमेश का नाम ही सभी को बताती हूँ" मेघना ने मेरी दोस्ती का दम भरा।

लेकिन फिलहाल की परिस्थितयो में उसकी इस दोस्ती के दम में कोई दम नही था।

"मैने तुम्हारे सामने अपना पिस्टल अपनी दराज में रखा था, तुम्हारे सामने किसी और आदमी ने मेरे फ्लैट मंर कदम नही रखा था, न तुम्हारे जाने के बाद कोई और मेरे फ़्लैट में आया, फिर अगर मेरी पिस्टल को तुम नही लेकर गई तो उसे जमीन निगल गयी या आसमान खा गया" मैने क्षुब्ध स्वर में बोला।

"तुमने ध्यान से चेक किया है कि वो पिस्टल तुम्हारे घर मे नही है" इस बार मेघना बीच मे बोली।

"इतना बड़ा बेवकूफ तो हूं नही की बिना घर मे चेक किए ही मैं थाने तक मे जाकर रिपोर्ट लिखवा दूंगा" मैने हल्के से गुस्से में मेघना की ओर देखकर बोला।

"एक बार हम लोग जाकर तुम्हारे घर पर ही उस पिस्टल को ढूंढ़े, हो सकता है, पिस्टल वही पर हो और तुम बिना वजह इधर उधर मारे फिर रहे हो" ये बात देविका ने बोली।

मेरे साथ साथ रागिनी ने भी उसे हैरानी से देखा।

"यार इस पिस्टल को हटा लो, इस पिस्टल को देख देख कर मेरी हार्टबीट बढ़ रही है, कहीं ये बेगुनाह बेमौत न मारी जाए" मेघना ने रागिनी की ओर देखते हुए बोला।

इस बार मेघना की रिक्वेस्ट भरी आवाज सुनकर रागिनी ने भी अपनी पिस्टल को देविका की खोपड़ी से हटा लिया।

"रोमेश सर! एक बार इसकी तमन्ना भी इसके सामने अपने घर की तलाशी करवा कर पूरी कर दो, पिस्टल अगर वहाँ नही मिलती है तो, इसको उसी समय पुलिस के हवाले कर दो" रागिनी ने अब देविका के पास से मेरी ओर आते हुए कहा।

"ये तरीका सही रहेगा" मैंने रागिनी की बात से सहमति जताई।

"लेकिन मुझे पुलिस के हवाले क्यो करोगे, तुम मेरी तलाशी ले लो, मेरे पूरे घर की तलाशी ले लो, जब मैंने कुछ किया ही नही तो मैं फिर से जेल क्यो जाऊं" देविका ने पुलिस बुलाने की बात का पुरजोर विरोध किया।

"लेकिन तुम्हारी हिस्ट्री के बारे में अभी तक जो सुना है, उस हिसाब से तो तुम आदतन अपराधी हो" मैने देविका को हिक़ारत से देखते हुए बोला।

"सिर्फ सुना है न, कभी अपनी आंखों से मेरे खिलाफ कोई सबूत देखा है" देविका ने विश्वास भरी दृष्टि से मेरी ओर देखा।

"हमारी गुड बुक में तो अब आई हो तुम देविका, तो अब सबूत भी ढूंढ लेगे" रागिनी ने उसी के अंदाज में उसे जवाब दिया।

"कुछ तो तुम्हारे बारे में कुमार गौरव ने बताया है, कुछ पुलिस फ़ाइल से पता चला है, बाकी बचा खुचा सौम्या ने बता दिया, इसके बाद भी तुम सबूत की बात कर रही हो" मैने हैरानी से देविका को देखा।

"इसी कुमार गौरव के बारे में ही तो तुमसे बात करने के लिए मेघना के जरिये, तुम्हे यहाँ बुलाया है रोमेश बाबू, मैं तो खुद उस कुमार की सताई हुई हूँ! मैं तो खुद पीड़िता हूँ, जिसे एक योजना बद्व तरीक़े से हर किसी की नजर में गुनाहगार बना दिया है" देविका ने विक्टिम कार्ड खेला।

लेकिन अब मेरी दिलचस्पी उसकी बातों में जाग चुकी थी। मैं अब उसका भी सच उसके मुंह से सुनना चाहता था।


जारी रहेगा______✍️
1 aur nya bomb phoot gya....sala pistol ka chori hona bhi abbi confirm nhi hai....
 

dhparikh

Well-Known Member
13,378
15,554
228
#07

जब सौम्या के आफिस से निकले तो शाम के सात बज चुके थे। मैंने गाड़ी में बैठते ही रागिनी की तरफ देखा।

"तुम्हे घर छोड़ दूं क्या "मैने रागिनी को बोला।

"मेरी गाड़ी तुम्हारे फ्लैट पर खड़ी है, मैं वहां से गाड़ी लेकर ही घर चली जाउंगी" रागिनी की बात सुनकर मैने गाड़ी को अपने घर की और दौडा दिया।

मैं अभी मधुबन चौक से सीधा अंबेडकर हॉस्पिटल की तरफ जा रहा था। सेक्टर आठ के मेट्रो स्टेशन को पार करते ही एक लाल बत्ती पर मैने अपनी गाड़ी को रोका।

तभी एक गाड़ी बिल्कुल मेरे करीब आकर रुकी।

अचानक से मेरी उस गाड़ी की तरफ नजर पड़ी तो जो लड़की मेरी ओर देखकर मुस्करा रही थी, उसे देखकर मेरे होश उड़ गए थे। वो मेघना थी। वो मुझे देखकर लगातार मुस्कराए जा रही थी।

मैंने एक गहरी नजर भरकर उसे देखा। मेरी ये समझ मे नही आ रहा था, की वो जेल से बाहर कब आई।

"घर जा रहे हो" तभी मेघना ने मेरी ओर देखकर बोला।

"हां! अभी तो मेरा इराद घर जाने का ही था, लेकिन अब तुम्हे देखकर इरादा बदल दिया है, अब आज की शाम तुम्हारे साथ बिताने का इरादा है" अभी मैने बोला ही था कि वो तीन मिनट की लालबत्ती अब हरी बत्ती में बदल चुकी थी, और मेघना ने गाड़ी को तेजी से आगे बढ़ा दिया था।

मैंने भी उसके पीछे गाड़ी को दौड़ाया, लेकिन उसका इरादा मुझे देखकर भागने का नही था, उसने थोड़ी सी आगे जाकर गाड़ी को साइड में लगा दिया।

मैने भी उसके पीछे ही गाड़ी को रोका और अपनी गाड़ी से उतरकर मेघना की गाड़ी की ओर लपका।

रागिनी लपक कर ड्राइविंग सीट पर आ गई थी। उसने मेरे साथ बाहर आने का कोई प्रयास नही किया था। मैं मेघना की गाड़ी के पास उसकी ड्राइविंग सीट की तरफ पहुंचा।

"तुम मेरे साथ गाड़ी में आओ रोमेश, रागिनी को बोलो वो हमारे पीछे पीछे आ जाये, तुमसे कुछ बहुत जरुरी बात करनी है" मेघना ने मेरी और देखकर बोला।

"बाते तो मुझे भी तुमसे बहुत सारी करनी है, मैं आता हूँ अभी" ये बोलकर मैं रागिनी के पास जाकर उसे गाड़ी को पीछे लेकर आने के लिए बोला और वापिस आकर मैं मेघना की गाड़ी में आकर बैठ गया।

"जेल से कब बाहर आई तुम" मैंने गाड़ी में बैठते ही मेघना से पूछा।

"थोड़ी सेटिंग करके जमानत लेकर आई हूँ" मेघना ने संक्षेप में उत्तर दिया।

"यहां कैसे! इतेफाक से मिली हो, या फिर पीछा कर रही हो" मैंने हल्की सी मुस्कान के साथ पूछा।

"समझ लो पीछा ही कर रही हूँ! एक जरुरी काम था तुमसे" मेघना ने मेरी ओर देखकर बोला।

"मुझ से क्या काम आ गया तुम्हे, और मेरा पीछा क्या सौम्या के आफिस से ही कर रही हो" मैने उसकी तरफ देखकर बोला।

"हॉं ! जब तुम सौम्या के आफिस में जा रहे थे, तो मैं भी सौम्या से मिलने के लिए ही जा रही थी, लेकिन तुम्हे वहां जाते हुए देखकर मैं वापिस पार्किंग में आकर अपनी गाड़ी में बैठ गई थी" मेघना का व्यवहार मेरी समझ में नही आ रहा था।

"तुम्हे मुझ से क्या काम है" मैने अब उससे काम पूछना ही सही समझा।

"मेरी एक फ्रेंड मुसीबत में है, उसे तुम्हारी मदद चाहिए रोमेश" मेघना ने मेरी ओर कातर दृष्टि से देखते हुए बोला।

"तुम्हारी कौन सी फ्रेंड मुसीबत में है" मैंने असमंजस में उसकी ओर देखा।

"मैं उसी से मिलवाने के लिए तुम्हे लेकर जा रही हूँ" मैने देखा कि मेघना रिठालाका मेट्रो स्टेशन भी पार करके सेक्टर चौबीस की ओर अपनी गाड़ी को मोड़ चुकी थी।

मैने एक बार घूमकर देखा। रागिनी बदस्तूर हमारे पीछे ही आ रही थी। कोई दस मिनट उस सेक्टर में ही
गाड़ी को घुमाने के बाद उसने एक फ्लैट के बाहर गाड़ी रोक दी।

"इसी फ्लैट के फर्स्ट फ्लोर पर जाना है" मेघना ने गाड़ी के दरवाजे ओपन करते हुए बोला।

मैंने देखा कि रागिनी भी मेघना की गाड़ी के पीछे गाड़ी लगा चुकी थी, और गाड़ी से उतरकर मेरे नजदीक आकर खड़ी हो गई थी।

मेघना ने भी अपनी गाड़ी को लॉक किया और उस फ्लैट की पहली मंजिल की ओर बढ़ गई। हम दोनों भी उसी के नक्शेकदम पर चल पड़े थे। पहली मंजिल पर पहुंच कर मेघना ने बेल बजाई।

कोई दो मिनट के बाद एक जोडी कदमो की आवाज दरवाजे के करीब आती हुई सुनाई दी।

दरवाजा खुला और दरवाजे पर इस वक़्त मेरी नजर में अनामिका, कुमार गौरव की नजर में मल्लिका और पुलिस फ़ाइल में देविका के नाम से पाई जाने वाली वही खूबसूरत जाॅनिसार, नरगिस ए मस्ताना खड़ी हुई थी, और मेरी ओर देखकर मंद मंद मुस्करा थी।

उसे वहां देखकर मेरे होठो पर भी एक कुटिल मुस्कान थिरकने लगी थी।

उलझती गुत्थी।

देविका की वो मुस्कान कुछ ही पल में लुप्त हो गई और उसने हमारे अन्दर आने के लिए रास्ता छोड़ दिया।

मैं लगातार उसी को घूरते हुए सोफे पर जाकर बैठ गया।

उसकी वही कातिल मुस्कान एक बार फिर से उसके होठो पर थिरकने लगी थी।

"तुम दोनो एक दूसरे को पहले से जानते हो क्या, ये देविका तुम्हे देखकर बहुत मुस्करा रही है" मेघना ने अनजान स्वर में बोला।

"ये तो यही मोहतरमा बतायेगी की ये मुझे कैसे जानती है, लेकिन मैं इतना जरूर जानता हूँ, की ये लड़की मुझे बेवकूफ बनाकर मेरे घर से मेरा पिस्टल चुराकर भागी है" मैने मेघना की ओर देखते हुए ही, ये बोला ही था कि रागिनी अपनी जगह से उठी और अपनी पिस्टल को उसने देविका की कनपटी पर लगा दिया।

"वो पिस्टल निकाल कर लाओ, जहां भी उसे छुपा कर रखा है, वरना यकीन मानो गोली चलाते हुए मेरा हाथ कदापि नही कांपता" रागिनी का इस तरीके से उसके पिस्टल लगाने का उद्देश्य मैं समझ गया था, ये देविका के ऊपर एक मनोवैज्ञानिक दवाव बनाने का तरीका था।

"ये तुम क्या कर रही हो रागिनी, आराम से बैठकर बात करो, अगर सच मे इसके पास रोमेश की पिस्टल है, तो मैं उसे वापिस दिलवा दूँगी" मेघना ने घबराए हुए स्वर में कहा।

वैसे भी मेघना ने रागिनी के जलवो को अपनी आंखों से देखा हुआ था।

"आराम से बात तभी होंगी मेघना, जब ये पहले रोमेश सर का पिस्टल हमारे हवाले कर देगी, और साथ मे ये भी बतायेगी की उस पिस्टल को चुराने के पीछे इसका क्या मन्तव्य था" रागिनी मेघना की बात सुनने के कतई मूड में नही थी।

"मैने कोई पिस्टल नही चुराई, हॉं ये सच है कि मैं उस दिन रोमेश के फ्लैट में गई थी, लेकिन मैं उस वक़्त अपनी जान बचाने के लिए वहाँ घुसी थी" देविका ने सिरे से झूठ बोला।

"मैंने तुम्हारे सामने अपनी पिस्टल को अपनी दराज में डाला था, तुमने मुझे कॉफी बनाने के लिए बोला, जब मैं तुम्हारे लिए कॉफी बनाने के लिए गया तो तुम मुझे बिना बताए वहां से जा चुकी थी, तब मैंने सोचा कि शायद तुम कोई चोर थी, और कुछ चुराने के लिए मेरे घर में घुसी थी, फिर मैंने अपना सामान चेक किया तो दराज में से मुझे अपनी पिस्टल गायब मिली थी" मैने उसे उस रात का एक एक वाक्य याद दिलाया।

"लेकिन अगर मैंने पिस्टल चुराई होती तो मैं खुद तुम्हें अपने घर पर क्यो बुलाती, पूछ लो मेघना से, मैने ही मेघना को तुमसे मिलवाने के लिए फ़ोर्स किया था" देविका ने अपनी बेगुनाही का तर्क रखा।

"तुम दोनो ही सौम्या की कंपनी में काम करती थी, दोनो ने ही सौम्या के साथ कुछ न कुछ गलत किया है, जेल में तुम दोनो ने जरूर सौम्या के खिलाफ कोई नई खिचड़ी पकाई होगी!, अब क्यो कि मेघना तो अच्छी तरह से जानती है कि अगर सौम्या किसी मुसीबत में फंसती है तो वो रोमेश जी को जरूर याद करेगी, इसलिए तुम लोगो ने पहले रोमेश को ही रास्ते से हटाने का प्लान बनाया होगा" सोच के मामले में रागिनी इस वक़्त मुझ से भी चार कदम आगे चल रही थी।

"यार मैं अपने मामले में रोमेश को कोई गुनाहगार मानती ही नही हूँ, मेरे ही कर्म गलत थे, तो मुझे तो सजा मिलनी ही थी, लेकिन मैं हमेशा रोमेश को अपना सबसे अच्छा दोस्त ही समझती हूँ, तभी मैने जेल में भी किसी को कोई मदद की जरूरत होती है तो, रोमेश का नाम ही सभी को बताती हूँ" मेघना ने मेरी दोस्ती का दम भरा।

लेकिन फिलहाल की परिस्थितयो में उसकी इस दोस्ती के दम में कोई दम नही था।

"मैने तुम्हारे सामने अपना पिस्टल अपनी दराज में रखा था, तुम्हारे सामने किसी और आदमी ने मेरे फ्लैट मंर कदम नही रखा था, न तुम्हारे जाने के बाद कोई और मेरे फ़्लैट में आया, फिर अगर मेरी पिस्टल को तुम नही लेकर गई तो उसे जमीन निगल गयी या आसमान खा गया" मैने क्षुब्ध स्वर में बोला।

"तुमने ध्यान से चेक किया है कि वो पिस्टल तुम्हारे घर मे नही है" इस बार मेघना बीच मे बोली।

"इतना बड़ा बेवकूफ तो हूं नही की बिना घर मे चेक किए ही मैं थाने तक मे जाकर रिपोर्ट लिखवा दूंगा" मैने हल्के से गुस्से में मेघना की ओर देखकर बोला।

"एक बार हम लोग जाकर तुम्हारे घर पर ही उस पिस्टल को ढूंढ़े, हो सकता है, पिस्टल वही पर हो और तुम बिना वजह इधर उधर मारे फिर रहे हो" ये बात देविका ने बोली।

मेरे साथ साथ रागिनी ने भी उसे हैरानी से देखा।

"यार इस पिस्टल को हटा लो, इस पिस्टल को देख देख कर मेरी हार्टबीट बढ़ रही है, कहीं ये बेगुनाह बेमौत न मारी जाए" मेघना ने रागिनी की ओर देखते हुए बोला।

इस बार मेघना की रिक्वेस्ट भरी आवाज सुनकर रागिनी ने भी अपनी पिस्टल को देविका की खोपड़ी से हटा लिया।

"रोमेश सर! एक बार इसकी तमन्ना भी इसके सामने अपने घर की तलाशी करवा कर पूरी कर दो, पिस्टल अगर वहाँ नही मिलती है तो, इसको उसी समय पुलिस के हवाले कर दो" रागिनी ने अब देविका के पास से मेरी ओर आते हुए कहा।

"ये तरीका सही रहेगा" मैंने रागिनी की बात से सहमति जताई।

"लेकिन मुझे पुलिस के हवाले क्यो करोगे, तुम मेरी तलाशी ले लो, मेरे पूरे घर की तलाशी ले लो, जब मैंने कुछ किया ही नही तो मैं फिर से जेल क्यो जाऊं" देविका ने पुलिस बुलाने की बात का पुरजोर विरोध किया।

"लेकिन तुम्हारी हिस्ट्री के बारे में अभी तक जो सुना है, उस हिसाब से तो तुम आदतन अपराधी हो" मैने देविका को हिक़ारत से देखते हुए बोला।

"सिर्फ सुना है न, कभी अपनी आंखों से मेरे खिलाफ कोई सबूत देखा है" देविका ने विश्वास भरी दृष्टि से मेरी ओर देखा।

"हमारी गुड बुक में तो अब आई हो तुम देविका, तो अब सबूत भी ढूंढ लेगे" रागिनी ने उसी के अंदाज में उसे जवाब दिया।

"कुछ तो तुम्हारे बारे में कुमार गौरव ने बताया है, कुछ पुलिस फ़ाइल से पता चला है, बाकी बचा खुचा सौम्या ने बता दिया, इसके बाद भी तुम सबूत की बात कर रही हो" मैने हैरानी से देविका को देखा।

"इसी कुमार गौरव के बारे में ही तो तुमसे बात करने के लिए मेघना के जरिये, तुम्हे यहाँ बुलाया है रोमेश बाबू, मैं तो खुद उस कुमार की सताई हुई हूँ! मैं तो खुद पीड़िता हूँ, जिसे एक योजना बद्व तरीक़े से हर किसी की नजर में गुनाहगार बना दिया है" देविका ने विक्टिम कार्ड खेला।

लेकिन अब मेरी दिलचस्पी उसकी बातों में जाग चुकी थी। मैं अब उसका भी सच उसके मुंह से सुनना चाहता था।


जारी रहेगा______✍️
Nice update.....
 
  • Love
Reactions: Raj_sharma

Ajju Landwalia

Well-Known Member
4,501
17,171
159
#07

जब सौम्या के आफिस से निकले तो शाम के सात बज चुके थे। मैंने गाड़ी में बैठते ही रागिनी की तरफ देखा।

"तुम्हे घर छोड़ दूं क्या "मैने रागिनी को बोला।

"मेरी गाड़ी तुम्हारे फ्लैट पर खड़ी है, मैं वहां से गाड़ी लेकर ही घर चली जाउंगी" रागिनी की बात सुनकर मैने गाड़ी को अपने घर की और दौडा दिया।

मैं अभी मधुबन चौक से सीधा अंबेडकर हॉस्पिटल की तरफ जा रहा था। सेक्टर आठ के मेट्रो स्टेशन को पार करते ही एक लाल बत्ती पर मैने अपनी गाड़ी को रोका।

तभी एक गाड़ी बिल्कुल मेरे करीब आकर रुकी।

अचानक से मेरी उस गाड़ी की तरफ नजर पड़ी तो जो लड़की मेरी ओर देखकर मुस्करा रही थी, उसे देखकर मेरे होश उड़ गए थे। वो मेघना थी। वो मुझे देखकर लगातार मुस्कराए जा रही थी।

मैंने एक गहरी नजर भरकर उसे देखा। मेरी ये समझ मे नही आ रहा था, की वो जेल से बाहर कब आई।

"घर जा रहे हो" तभी मेघना ने मेरी ओर देखकर बोला।

"हां! अभी तो मेरा इराद घर जाने का ही था, लेकिन अब तुम्हे देखकर इरादा बदल दिया है, अब आज की शाम तुम्हारे साथ बिताने का इरादा है" अभी मैने बोला ही था कि वो तीन मिनट की लालबत्ती अब हरी बत्ती में बदल चुकी थी, और मेघना ने गाड़ी को तेजी से आगे बढ़ा दिया था।

मैंने भी उसके पीछे गाड़ी को दौड़ाया, लेकिन उसका इरादा मुझे देखकर भागने का नही था, उसने थोड़ी सी आगे जाकर गाड़ी को साइड में लगा दिया।

मैने भी उसके पीछे ही गाड़ी को रोका और अपनी गाड़ी से उतरकर मेघना की गाड़ी की ओर लपका।

रागिनी लपक कर ड्राइविंग सीट पर आ गई थी। उसने मेरे साथ बाहर आने का कोई प्रयास नही किया था। मैं मेघना की गाड़ी के पास उसकी ड्राइविंग सीट की तरफ पहुंचा।

"तुम मेरे साथ गाड़ी में आओ रोमेश, रागिनी को बोलो वो हमारे पीछे पीछे आ जाये, तुमसे कुछ बहुत जरुरी बात करनी है" मेघना ने मेरी और देखकर बोला।

"बाते तो मुझे भी तुमसे बहुत सारी करनी है, मैं आता हूँ अभी" ये बोलकर मैं रागिनी के पास जाकर उसे गाड़ी को पीछे लेकर आने के लिए बोला और वापिस आकर मैं मेघना की गाड़ी में आकर बैठ गया।

"जेल से कब बाहर आई तुम" मैंने गाड़ी में बैठते ही मेघना से पूछा।

"थोड़ी सेटिंग करके जमानत लेकर आई हूँ" मेघना ने संक्षेप में उत्तर दिया।

"यहां कैसे! इतेफाक से मिली हो, या फिर पीछा कर रही हो" मैंने हल्की सी मुस्कान के साथ पूछा।

"समझ लो पीछा ही कर रही हूँ! एक जरुरी काम था तुमसे" मेघना ने मेरी ओर देखकर बोला।

"मुझ से क्या काम आ गया तुम्हे, और मेरा पीछा क्या सौम्या के आफिस से ही कर रही हो" मैने उसकी तरफ देखकर बोला।

"हॉं ! जब तुम सौम्या के आफिस में जा रहे थे, तो मैं भी सौम्या से मिलने के लिए ही जा रही थी, लेकिन तुम्हे वहां जाते हुए देखकर मैं वापिस पार्किंग में आकर अपनी गाड़ी में बैठ गई थी" मेघना का व्यवहार मेरी समझ में नही आ रहा था।

"तुम्हे मुझ से क्या काम है" मैने अब उससे काम पूछना ही सही समझा।

"मेरी एक फ्रेंड मुसीबत में है, उसे तुम्हारी मदद चाहिए रोमेश" मेघना ने मेरी ओर कातर दृष्टि से देखते हुए बोला।

"तुम्हारी कौन सी फ्रेंड मुसीबत में है" मैंने असमंजस में उसकी ओर देखा।

"मैं उसी से मिलवाने के लिए तुम्हे लेकर जा रही हूँ" मैने देखा कि मेघना रिठालाका मेट्रो स्टेशन भी पार करके सेक्टर चौबीस की ओर अपनी गाड़ी को मोड़ चुकी थी।

मैने एक बार घूमकर देखा। रागिनी बदस्तूर हमारे पीछे ही आ रही थी। कोई दस मिनट उस सेक्टर में ही
गाड़ी को घुमाने के बाद उसने एक फ्लैट के बाहर गाड़ी रोक दी।

"इसी फ्लैट के फर्स्ट फ्लोर पर जाना है" मेघना ने गाड़ी के दरवाजे ओपन करते हुए बोला।

मैंने देखा कि रागिनी भी मेघना की गाड़ी के पीछे गाड़ी लगा चुकी थी, और गाड़ी से उतरकर मेरे नजदीक आकर खड़ी हो गई थी।

मेघना ने भी अपनी गाड़ी को लॉक किया और उस फ्लैट की पहली मंजिल की ओर बढ़ गई। हम दोनों भी उसी के नक्शेकदम पर चल पड़े थे। पहली मंजिल पर पहुंच कर मेघना ने बेल बजाई।

कोई दो मिनट के बाद एक जोडी कदमो की आवाज दरवाजे के करीब आती हुई सुनाई दी।

दरवाजा खुला और दरवाजे पर इस वक़्त मेरी नजर में अनामिका, कुमार गौरव की नजर में मल्लिका और पुलिस फ़ाइल में देविका के नाम से पाई जाने वाली वही खूबसूरत जाॅनिसार, नरगिस ए मस्ताना खड़ी हुई थी, और मेरी ओर देखकर मंद मंद मुस्करा थी।

उसे वहां देखकर मेरे होठो पर भी एक कुटिल मुस्कान थिरकने लगी थी।

उलझती गुत्थी।

देविका की वो मुस्कान कुछ ही पल में लुप्त हो गई और उसने हमारे अन्दर आने के लिए रास्ता छोड़ दिया।

मैं लगातार उसी को घूरते हुए सोफे पर जाकर बैठ गया।

उसकी वही कातिल मुस्कान एक बार फिर से उसके होठो पर थिरकने लगी थी।

"तुम दोनो एक दूसरे को पहले से जानते हो क्या, ये देविका तुम्हे देखकर बहुत मुस्करा रही है" मेघना ने अनजान स्वर में बोला।

"ये तो यही मोहतरमा बतायेगी की ये मुझे कैसे जानती है, लेकिन मैं इतना जरूर जानता हूँ, की ये लड़की मुझे बेवकूफ बनाकर मेरे घर से मेरा पिस्टल चुराकर भागी है" मैने मेघना की ओर देखते हुए ही, ये बोला ही था कि रागिनी अपनी जगह से उठी और अपनी पिस्टल को उसने देविका की कनपटी पर लगा दिया।

"वो पिस्टल निकाल कर लाओ, जहां भी उसे छुपा कर रखा है, वरना यकीन मानो गोली चलाते हुए मेरा हाथ कदापि नही कांपता" रागिनी का इस तरीके से उसके पिस्टल लगाने का उद्देश्य मैं समझ गया था, ये देविका के ऊपर एक मनोवैज्ञानिक दवाव बनाने का तरीका था।

"ये तुम क्या कर रही हो रागिनी, आराम से बैठकर बात करो, अगर सच मे इसके पास रोमेश की पिस्टल है, तो मैं उसे वापिस दिलवा दूँगी" मेघना ने घबराए हुए स्वर में कहा।

वैसे भी मेघना ने रागिनी के जलवो को अपनी आंखों से देखा हुआ था।

"आराम से बात तभी होंगी मेघना, जब ये पहले रोमेश सर का पिस्टल हमारे हवाले कर देगी, और साथ मे ये भी बतायेगी की उस पिस्टल को चुराने के पीछे इसका क्या मन्तव्य था" रागिनी मेघना की बात सुनने के कतई मूड में नही थी।

"मैने कोई पिस्टल नही चुराई, हॉं ये सच है कि मैं उस दिन रोमेश के फ्लैट में गई थी, लेकिन मैं उस वक़्त अपनी जान बचाने के लिए वहाँ घुसी थी" देविका ने सिरे से झूठ बोला।

"मैंने तुम्हारे सामने अपनी पिस्टल को अपनी दराज में डाला था, तुमने मुझे कॉफी बनाने के लिए बोला, जब मैं तुम्हारे लिए कॉफी बनाने के लिए गया तो तुम मुझे बिना बताए वहां से जा चुकी थी, तब मैंने सोचा कि शायद तुम कोई चोर थी, और कुछ चुराने के लिए मेरे घर में घुसी थी, फिर मैंने अपना सामान चेक किया तो दराज में से मुझे अपनी पिस्टल गायब मिली थी" मैने उसे उस रात का एक एक वाक्य याद दिलाया।

"लेकिन अगर मैंने पिस्टल चुराई होती तो मैं खुद तुम्हें अपने घर पर क्यो बुलाती, पूछ लो मेघना से, मैने ही मेघना को तुमसे मिलवाने के लिए फ़ोर्स किया था" देविका ने अपनी बेगुनाही का तर्क रखा।

"तुम दोनो ही सौम्या की कंपनी में काम करती थी, दोनो ने ही सौम्या के साथ कुछ न कुछ गलत किया है, जेल में तुम दोनो ने जरूर सौम्या के खिलाफ कोई नई खिचड़ी पकाई होगी!, अब क्यो कि मेघना तो अच्छी तरह से जानती है कि अगर सौम्या किसी मुसीबत में फंसती है तो वो रोमेश जी को जरूर याद करेगी, इसलिए तुम लोगो ने पहले रोमेश को ही रास्ते से हटाने का प्लान बनाया होगा" सोच के मामले में रागिनी इस वक़्त मुझ से भी चार कदम आगे चल रही थी।

"यार मैं अपने मामले में रोमेश को कोई गुनाहगार मानती ही नही हूँ, मेरे ही कर्म गलत थे, तो मुझे तो सजा मिलनी ही थी, लेकिन मैं हमेशा रोमेश को अपना सबसे अच्छा दोस्त ही समझती हूँ, तभी मैने जेल में भी किसी को कोई मदद की जरूरत होती है तो, रोमेश का नाम ही सभी को बताती हूँ" मेघना ने मेरी दोस्ती का दम भरा।

लेकिन फिलहाल की परिस्थितयो में उसकी इस दोस्ती के दम में कोई दम नही था।

"मैने तुम्हारे सामने अपना पिस्टल अपनी दराज में रखा था, तुम्हारे सामने किसी और आदमी ने मेरे फ्लैट मंर कदम नही रखा था, न तुम्हारे जाने के बाद कोई और मेरे फ़्लैट में आया, फिर अगर मेरी पिस्टल को तुम नही लेकर गई तो उसे जमीन निगल गयी या आसमान खा गया" मैने क्षुब्ध स्वर में बोला।

"तुमने ध्यान से चेक किया है कि वो पिस्टल तुम्हारे घर मे नही है" इस बार मेघना बीच मे बोली।

"इतना बड़ा बेवकूफ तो हूं नही की बिना घर मे चेक किए ही मैं थाने तक मे जाकर रिपोर्ट लिखवा दूंगा" मैने हल्के से गुस्से में मेघना की ओर देखकर बोला।

"एक बार हम लोग जाकर तुम्हारे घर पर ही उस पिस्टल को ढूंढ़े, हो सकता है, पिस्टल वही पर हो और तुम बिना वजह इधर उधर मारे फिर रहे हो" ये बात देविका ने बोली।

मेरे साथ साथ रागिनी ने भी उसे हैरानी से देखा।

"यार इस पिस्टल को हटा लो, इस पिस्टल को देख देख कर मेरी हार्टबीट बढ़ रही है, कहीं ये बेगुनाह बेमौत न मारी जाए" मेघना ने रागिनी की ओर देखते हुए बोला।

इस बार मेघना की रिक्वेस्ट भरी आवाज सुनकर रागिनी ने भी अपनी पिस्टल को देविका की खोपड़ी से हटा लिया।

"रोमेश सर! एक बार इसकी तमन्ना भी इसके सामने अपने घर की तलाशी करवा कर पूरी कर दो, पिस्टल अगर वहाँ नही मिलती है तो, इसको उसी समय पुलिस के हवाले कर दो" रागिनी ने अब देविका के पास से मेरी ओर आते हुए कहा।

"ये तरीका सही रहेगा" मैंने रागिनी की बात से सहमति जताई।

"लेकिन मुझे पुलिस के हवाले क्यो करोगे, तुम मेरी तलाशी ले लो, मेरे पूरे घर की तलाशी ले लो, जब मैंने कुछ किया ही नही तो मैं फिर से जेल क्यो जाऊं" देविका ने पुलिस बुलाने की बात का पुरजोर विरोध किया।

"लेकिन तुम्हारी हिस्ट्री के बारे में अभी तक जो सुना है, उस हिसाब से तो तुम आदतन अपराधी हो" मैने देविका को हिक़ारत से देखते हुए बोला।

"सिर्फ सुना है न, कभी अपनी आंखों से मेरे खिलाफ कोई सबूत देखा है" देविका ने विश्वास भरी दृष्टि से मेरी ओर देखा।

"हमारी गुड बुक में तो अब आई हो तुम देविका, तो अब सबूत भी ढूंढ लेगे" रागिनी ने उसी के अंदाज में उसे जवाब दिया।

"कुछ तो तुम्हारे बारे में कुमार गौरव ने बताया है, कुछ पुलिस फ़ाइल से पता चला है, बाकी बचा खुचा सौम्या ने बता दिया, इसके बाद भी तुम सबूत की बात कर रही हो" मैने हैरानी से देविका को देखा।

"इसी कुमार गौरव के बारे में ही तो तुमसे बात करने के लिए मेघना के जरिये, तुम्हे यहाँ बुलाया है रोमेश बाबू, मैं तो खुद उस कुमार की सताई हुई हूँ! मैं तो खुद पीड़िता हूँ, जिसे एक योजना बद्व तरीक़े से हर किसी की नजर में गुनाहगार बना दिया है" देविका ने विक्टिम कार्ड खेला।

लेकिन अब मेरी दिलचस्पी उसकी बातों में जाग चुकी थी। मैं अब उसका भी सच उसके मुंह से सुनना चाहता था।


जारी रहेगा______✍️

Bahut hi badhiya update he Raj_sharma Bhai

Devika to apne aap ko victim bata rahi he........

Lekin romesh itna kachcha khiladi nahi he...........

Jald hi vo uski sacchayi jaan lega

Keep rocking Bro
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
Staff member
Moderator
44,192
80,087
304

TheBlackBlood

Keep calm and carry on...
Supreme
81,223
119,089
354
Update:- 06 and 07 :check:

Ye saumya to sahi laundiya nikli...bole to mard ho ya aurat kisi ke bhi sath :sex: ghapaghap....Bimari ke bahane mast maze karti hai ye hawasi laundiya :D

Dono update read karne ke baad filhal yahi lag raha hai ki parde ke pichhe jo bhi hai wo kaafi tagda khel khelne ki firaak me hai jisme usne romesh ko mukhya roop se target kar rakha hai. Yakeenan wo romesh ka koi aisa ja-nisaar hi hoga jisko romesh ki vajah se kaafi kuch prasad mila hoga. Ab kyoki romesh ek detective hai jiske chalte uske dushmano ki koi ginti nahi hogi....aur is vajah se aise kisi ja-nisaar ko pahchaanna asaan bhi nahi ho sakta. Ye to hui ek baat... :smoking:

Dusri baat ho hairan karne wali dikhi wo ye ki jiski khoj me romesh darbadar bhatak raha tha wo meghna ke dwara badi asaani se mil gayi magar....magar uski baato ne ek alag hi uljhan ko paida kar diya hai. Khud ko innocent dikha kar Kumar Gaurav par ungli utha rahi hai...ye to wahi baat hui ki nau sua choohe kha kar billi haj karne chali....Halaaki kuch bhi ho sakta hai. I mean...mumkin hai ki wo waakai me innocent ho...aur jo kuch usne ab tak kiya tha wo sab Kumar Gaurav ke majboor karne par kiya raha ho...jiske liye use jail tak jana pada. Well ye to hamare kayaas hain....reality to writer hi jaanta hai... :D

Overall...case kaafi ulajh gaya hai ab, ab dekhna ye hoga ki meghna aur devika ke sath Hui is conversation ke baad romesh kis nateeje par pahuchta hai aur wo kaun rukh akhtiyar karta hai??? :approve:

Excellent going bro....keep it up :thumbup:
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
Staff member
Moderator
44,192
80,087
304
good one ...................... :happy:

update ka SPEED badhao ...............sarkar ........................ :wink:
Thank you very much bhai :thanks:

Update ka speed to badha du, lekin 2 story chal rahi hain ek sath, and doosri story bohot badi hai bhai , to usme jyada time lagta hai. Uper se XForum ka kaam bhi dekhna padta hai, and fir office aur personal life bhi 😎
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
Staff member
Moderator
44,192
80,087
304
Top