- 44,166
- 80,083
- 304
Thanks for your valuable review and support Parkas bhaiBahut hi badhiya update diya hai Raj_sharma bhai....
Nice and beautiful update....

Thanks for your valuable review and support Parkas bhaiBahut hi badhiya update diya hai Raj_sharma bhai....
Nice and beautiful update....

100% lagne wali hai jaasoos ki1 और नया पंगा fas गया रोमेश बाबु की जान को....
और 1 शायद gaurav के रूप में फैक्ट्री में इंतजार कर रहा है

Thanks brotherShaandar update

#13
सौम्या बंसल के संपर्क में मैं तब आया था, जब मैं अशोक बंसल हत्या कांड की जांच कर रहा था।
अशोक बंसल दिल्ली शहर की एक नामचीन और अरबपति हस्ती थे। उन्होंने अपने जीवन मे एकमात्र गलती की थी कि अपनी पचपन साल की उम्र में अपनी से आधी उम्र की अपनी सेक्रेटरी के रुपजाल में फंस गए, और उससे शादी कर बैठे, ये उनके जीवन की ऐसी गलती थी, जिसने सिर्फ छह महीने में ही अशोक बंसल के प्राण लील लिए थे।
अशोक बंसल की लाश उन्ही के ड्राइंगरूम में मिली थी, उनकी काफी निर्मम तरीके से हत्या की गई थी। उन्ही अशोक बंसल के एक मात्र सुपुत्र राजीव बंसल उस हत्या कांड में मुख्य अभियुक्त साबित हुए थे, और उसी राजीव बंसल की पत्नी थी सौम्या बंसल।
जब मैं केस की जांच के दौरान सौम्या से मिला तो इस बेपनाह सुंदरी के जीवन मे कितना बड़ा अंधेरा था, वो सौम्या से मिलने के बाद ही पता लग सका।
सौम्या बहुत छोटी उम्र में ही अपने पापा के एक दोस्त और अपने खुद के चाचा की काम वासना का शिकार हो गई थी।
छोटी उम्र में शारीरिक संबंध बन जाने के कारण सौम्या को एक अजीबो गरीब बीमारी हो गई, जिसे हम लोग निम्फोमानियाक नाम की एक सेक्स बीमारी के नाम से जानतें है, ये ऐसी भयावह बीमारी है कि जब इंसान में सेक्स की तलब उठती है तो न वो अपना देखती है और न पराया, उसे बस अपनी कामवासना को शांत करने से मतलब होता है।
मुझे अपनी इस बीमारी के बारे में सौम्या ने खुद नही बताया था, बल्कि इस बारे में मुझें केस की जांच के दौरान ही मेघना से पता चला था। सौम्या की इसी बीमारी के चलते सौम्या का पति राजीव बंसल कई मौकों पर अपमानित हो चुका था, और सौम्या से छुटकारा पाना चाह्ता था।
अपनी सौतेली माँ सोनिया की हत्या के बाद राजीव ने सौम्या को भी मार डालने का षडयंत्र रचा था, लेकिन वो आपके इस सेवक की वजह से अपने इरादो में कामयाब नही हो सका था, और उसे मैंने रंगे हाथो सौम्या की जान लेने की कोशिश करते हुए पकड़ लिया था।
राजीव ने ये साजिश सौम्या को रास्ते से हटाकर मेघना के साथ शादी करने के इरादे से रची थी।
यही वजह थी कि रागिनी ने इस पॉइंट को इंगित किया था कि अरमान सिर्फ राजीव के ही अधूरे नही रहे थे, बल्कि अरमान मेघना के भी पूरे नही हुए थे।
बाद में मेघना ने भी सौम्या को मार डालने की साजिश रची थी, लेकिन इस बार भी मैने ही सौम्या को एक बार फिर से मेघना की साजिश से बचाया और मेघना को जेल भिजवाया था।
लेकिन लगता है कि मेघना ने अभी तक अपनी हार नही मानी थी। वो एक बार फिर से अपने इरादो को अंजाम देने के लिये जेल से बाहर आ गई थी, वो भी देविका के साथ।
मेघना और देविका का एक साथ जमानत पाना ही ये इशारा करता था कि जाल काफी उच्चस्तर पर रचा गया है। लेकिन मेरे मन मे जो ख्याल बार बार कौंध रहा था, वो था कि जेल में बन्द राजीव बंसल की इसमे क्या भूमिका हो सकती थी।
बिना राजीव की मिली भगत के तो अकेली मेघना कुछ भी नही कर सकती थी। वो कौन था जो जेल में बन्द इन दोनों के बीच मे कूरियर का काम कर रहा था। कोई तो था। अब इस कोई को ही सबसे पहले मुझे ढूंढना था।
मुझे कुमार गौरव को भी ढूंढना था, वो यू अचानक से कहाँ गायब हो गया था।
सौम्या रागिनी के साथ ऊपर अपने कमरे में जा चुकी थी और मैं अब अपने घर की ओर रवाना हो चुका था।
मुझें जो सबसे पहला काम करना था, वो था, पिछले दो सालों में जेल में राजीव बंसल से किन लोगो ने मुलाकात की है, उसका पता लगाना उन मुलाकात करने वालो लोगो की लिस्ट में से ही कोई एक चेहरा उभर कर आ सकता था, जिसकी मुझे तलाश है।
बहरहाल फिलहाल तो मैं घर पहुंचते ही सोना चाहता था, क्यो कि पिछले दो दिनों से मेरी नींद उड़ी हुई थी।
अगले दिन मैं अभी तैयार हुआ ही था कि थाने से भगवान सिंह का काल आ गया था। उसने मुझे बड़े ही नम्र स्वर में थाने आने के लिए बोला था।
मैं उसके बुलावे पर बीस मिनट में ही उनके सामने हाजिर हो चुका था।
" रोमेश साहब! जिस लड़की की लाश हमे परसो मिली है, क्या आप उसे जानते है" भगवान सिंह ने मेरे बैठते ही अपना सवाल कर दिया था।
"जी नही! मैंने तो उस लड़की को उस दिन जिंदगी में पहली बार ही देखा था, वो भी मुर्दा" मैंने बोला।
"लेकिन उस लड़की के घर के सामान में एक डायरी मिली है, जिसमे आपके बारे में काफी कुछ लिखा गया है, उसमे उसने लिखा है कि तुम और वो लड़की पिछले तीन साल से रिलेशनशिप में थे, उसके बाद तुम अचानक ही उसकी जिंदगी से गायब हो गए, उसके फोन में आपका फोन नंबर भी आपके ही नाम से सेव किया हुआ मिला है" भगवान सिंह एक के बाद एक बम मेरे सिर पर फोड़े जा रहा था।
"मैं एक बार उस लड़की के जीवित अवस्था मे लिये गए कोई फोटोग्राफ देख सकता हूँ" मैं अब कुछ भी बोलने से पहले उस लड़की को सही से देख लेना चाहता था।
"जी बिल्कुल देख सकते है" ये बोलकर भगवान सिंह ने अपनी दराज से एक फ़ाइल निकाली।
उस फ़ाइल में रोजनामचे की कॉपी के साथ ही उस लड़की की विभिन्न कोण से खींची गई उसकी लाश की तस्वीरे लगी हुई थी, उन तस्वीरो के नीचे ही उसकी जीवित अवस्था की दो तस्वीर लगी हुई थी।
मैंने गौर से उन तस्वीरों को देखा, बहुत ध्यान करने के बाद भी मुझें ध्यान नही आ रहा था कि मैंने इस लड़की को कहां देखा है।
मैंने तस्वीर पर नजर डालकर इनकार में अपनी गर्दन को हिलाया और उस फ़ाइल पर एक ओर सरसरी नजर डालकर भगवान सिंह की तरफ बढ़ा दी।
"मैं इस लड़की से अपनी जिंदगी में कभी नही मिला, और जो उस डायरी में आप लिखा हुआ बता रहे है कि मैं अचानक इस लड़की की जिंदगी से गायब हो गया, ये तो सरासर झूठ है, क्यो कि पिछले पांच सालो से तो मैं अपने इसी रोहिणी वाले घर मे रह रहा हूँ" मैने भगवान सिंह की डायरी वाली बात का भी जवाब दिया।
"लेकिन कोई लड़की अपनी डायरी में झूठ क्यो लिखेगी" भगवान सिंह ने मेरी ओर देखते हुए बोलो।
"आपको यकीन है कि ये डायरी इसी लड़की के हाथ की लिखी हुई है, क्या आप इसकी जाँच कर चुके है" मैने भगवान सिंह से ही प्रश्न किया।
"नही! अभी तो हम सिर्फ इस मिली हुई डायरी के आधार पर आपसे पूछताछ कर रहें है" भगवान सिंह ने बोला।
"जिस लडक़ी से मैं अपनी जिंदगी में कभी मिला नही, जिस लड़की ने अपने जिंदा रहते कभी मुझे देखा नही, ऐसी लड़की के केस में हो सकता है कि ये डायरी किसी ने प्लांट कर दी हो" मैने अपनी शंका जताई।
"फिर तो मुझे पक्का यकीन है कि आपकी पिस्टल की फोरेंसिक रिपोर्ट इस लड़की के जिस्म में पाई जाने वाली गोली की फोरेंसिक रिपोर्ट एक ही मिले, आप अपने बचाव की पूरी तैयारी कर लीजिये रोमेश बाबू, क्यो कि शाम को रिपोर्ट आने तक का ही वक़्त है आपके पास" भगवान सिंह ने मुझे चेतावनी नुमा लहजें में बोला।
"अभी मुझे जाने की इजाजत है या नही, शाम की शाम को देखी जाएगी" मैने भगवान सिंह को बोला।
"जी बिल्कुल इजाजत है, लेकिन एक नेक सलाह है आपके लिए, शाम को अपने साथ एक वकील जरूर लेते आइए, आपको जरूरत पड़ सकती है" भगवान सिंह भी अब देवप्रिय वाली जुबान ही बोल रहा था।
"बेफिक्र रहिये जनाब! अपने लायक वकालत तो मैं खुद भी करना जानता हूँ" ये बोलकर मैं कुर्सी से उठा और तेज कदमो से कमरे से बाहर आ गया।
कुमार गौरव की लाश
थाने से निकलते ही मेरे मोबाइल पर एक अनजान नंबर चमकने लगा था। मैंने उस फोन को गाड़ी में बैठने से पहले ही रिसीव किया। उधर से कोई घबराई हुई आवाज में बोल रहा था।
" रोमेश भाई बोल रहे हो" आवाज बहुत ही धीमी थी।
" रोमेश ही बोल रहा हूँ, तुम कौन हो" मैने उस आवाज को पहचानने की कोशिश की।
" रोमेश! मैं गौरव बोल रहा हूँ" उधर से बोलने वाला गौरव था।
"कहाँ गायब हो भाई, यहां तुम्हारी मम्मी तुम्हे ढूंढ ढूंढ कर परेशान है" मैंने उस बोला।
"मेरे पास ज्यादा लंबी बात करने का समय नही है रोमेश, इन लोगो ने मुझे मेरी ही फैक्ट्री के बेसमेंट में कैद कर रखा है, मुझे बचा लो रोमेश" उधर से गौरव बहुत ही धीमी आवाज में बोल रहा था।
"अपनी फैक्ट्री का पता बताओ, मैं वहां अभी पहुँचता हूँ" मैंने उसे दिलासा दिया। उसने मुझें अपना पता बताया।
"किन लोगों ने तुम्हे अपना कैदी बना कर रखा हुआ है, बताओ मुझे, मैं उन्हें भी पकड़वाने का इंतजाम करता हूँ" मैने गौरव से पूछा।
लेकिन तभी उधर से कोई चीज़ मुझें फर्श पर गिरने की आवाज आई और फिर उसके बाद फोन कट गया।
मैंने तुरन्त फोन को फिर से मिलाया, लेकिन इस बार फोन नेटवर्क एरिया से बाहर बता रहा था। मैं एक पल को वही रुका का रुका रह गया।
इस वक़्त मुझें ये समझ नही आ रहा था कि मैं वहां अकेला जाऊं या पुलिस को अपने साथ लेकर जाऊं। मैने किसी नए झेमेले में फंसने से बचने के लिये पुलिस को ही अपने साथ ले जाना उचित समझा।
मैं वही से उल्टे पाँव भगवान सिंह के कमरे की ओर मुड़ गया। मुझें अपने कमरे के दरवाजे पर देखते ही भगवान सिंह के होठो पर मुस्कान आ गई।
"काफी बेचैन लग रहे हों, इतनी जल्दी लौट आये जासूस साहब, रिपोर्ट आने से पहले तो मैं आपको छुउंगा भी नही" भगवान सिंह मेरी बात सुनने की बजाए सिर्फ अपनी अपनी कहे जा रहा था।
"आप पहले मेरी बात सुनेंगे" मैंने थोड़े तीखे स्वर में बोला तो वो बुरा सा मुंह बनाकर मेरी ओर देखने लगा।
"बोलो क्या बोलना चाहते हो" भगवान सिंह मेरी और देखते हुए बोला।
"मेरे फोन पर अभी एक अज्ञात नंबर से फोन आया है, वो खुद को गौरव बता रहा है, वो बोल रहा है कि उसे उसकी ही फैक्ट्री के बेसमेंट में किसी ने बंधक बनाकर रखा हुआ है" मैने ये बोलकर अपने फोन की कॉल लिस्ट में वो नंबर और काल डिटेल दिखाई।
"ये कैसे मान ले की वो गौरव ही था" भगवान सिंह ने एक बेमतलब सा सवाल पूछा।
"ये तो अब उसकी फैक्ट्री में ही जाकर पता चलेगा" मैने सीधी बात बोली।
"कहाँ है उसकी फैक्ट्री" भगवान सिंह ने लगता है अभी तक गौरव सिंह की गुमशुदगी की रिपोर्ट पढ़ी तक नही थी।
"उसकी फैक्ट्री बवाना में है, पता है मेरे पास" मैने भगवान सिंह को बोला।
"वो इलाक़ा दूसरे थाने के अंतर्गत आता है, मुझे वहां के थाने को भी सूचित करना होगा और वही से सिपाही बुलाने होंगे, तुम यही रुको, मैं साहब से इजाजत लेकर आता हूँ" ये बोलकर भगवान सिंह तेज कदमो से कमरे से बाहर निकल गया।
उसके बाहर जाते ही मैने रागिनी को फोन मिलाकर उसे सारी स्थिति के बारे में बताया।
तभी भगवान सिंह मुझे उतनी ही तेजी से वापिस आता हुआ नजर आया। मैने तुरंत फोन काट दिया।
"चलो मैने अपनी रवानगी दर्ज कर दी है" ये बोलकर भगवान सिंह वापिस मुड़ा और मैं भी उतनी ही तेजी के साथ उसके पीछे लपका। तभी उसके साथ एक कांस्टेबल और चलने लगा।
भगवान सिंह अपनी मोटरसाइकिल की तरफ बढ़ने लगा तो मैने उन्हें अपनी ही गाड़ी में चलने के लिये बोला।
जिसे भगवान सिंह ने थोड़ी सी हिचकिचाहट के बाद वे दोनों मेरी गाड़ी में सवार हो गए।
जारी रहेगा_____![]()
#13
सौम्या बंसल के संपर्क में मैं तब आया था, जब मैं अशोक बंसल हत्या कांड की जांच कर रहा था।
अशोक बंसल दिल्ली शहर की एक नामचीन और अरबपति हस्ती थे। उन्होंने अपने जीवन मे एकमात्र गलती की थी कि अपनी पचपन साल की उम्र में अपनी से आधी उम्र की अपनी सेक्रेटरी के रुपजाल में फंस गए, और उससे शादी कर बैठे, ये उनके जीवन की ऐसी गलती थी, जिसने सिर्फ छह महीने में ही अशोक बंसल के प्राण लील लिए थे।
अशोक बंसल की लाश उन्ही के ड्राइंगरूम में मिली थी, उनकी काफी निर्मम तरीके से हत्या की गई थी। उन्ही अशोक बंसल के एक मात्र सुपुत्र राजीव बंसल उस हत्या कांड में मुख्य अभियुक्त साबित हुए थे, और उसी राजीव बंसल की पत्नी थी सौम्या बंसल।
जब मैं केस की जांच के दौरान सौम्या से मिला तो इस बेपनाह सुंदरी के जीवन मे कितना बड़ा अंधेरा था, वो सौम्या से मिलने के बाद ही पता लग सका।
सौम्या बहुत छोटी उम्र में ही अपने पापा के एक दोस्त और अपने खुद के चाचा की काम वासना का शिकार हो गई थी।
छोटी उम्र में शारीरिक संबंध बन जाने के कारण सौम्या को एक अजीबो गरीब बीमारी हो गई, जिसे हम लोग निम्फोमानियाक नाम की एक सेक्स बीमारी के नाम से जानतें है, ये ऐसी भयावह बीमारी है कि जब इंसान में सेक्स की तलब उठती है तो न वो अपना देखती है और न पराया, उसे बस अपनी कामवासना को शांत करने से मतलब होता है।
मुझे अपनी इस बीमारी के बारे में सौम्या ने खुद नही बताया था, बल्कि इस बारे में मुझें केस की जांच के दौरान ही मेघना से पता चला था। सौम्या की इसी बीमारी के चलते सौम्या का पति राजीव बंसल कई मौकों पर अपमानित हो चुका था, और सौम्या से छुटकारा पाना चाह्ता था।
अपनी सौतेली माँ सोनिया की हत्या के बाद राजीव ने सौम्या को भी मार डालने का षडयंत्र रचा था, लेकिन वो आपके इस सेवक की वजह से अपने इरादो में कामयाब नही हो सका था, और उसे मैंने रंगे हाथो सौम्या की जान लेने की कोशिश करते हुए पकड़ लिया था।
राजीव ने ये साजिश सौम्या को रास्ते से हटाकर मेघना के साथ शादी करने के इरादे से रची थी।
यही वजह थी कि रागिनी ने इस पॉइंट को इंगित किया था कि अरमान सिर्फ राजीव के ही अधूरे नही रहे थे, बल्कि अरमान मेघना के भी पूरे नही हुए थे।
बाद में मेघना ने भी सौम्या को मार डालने की साजिश रची थी, लेकिन इस बार भी मैने ही सौम्या को एक बार फिर से मेघना की साजिश से बचाया और मेघना को जेल भिजवाया था।
लेकिन लगता है कि मेघना ने अभी तक अपनी हार नही मानी थी। वो एक बार फिर से अपने इरादो को अंजाम देने के लिये जेल से बाहर आ गई थी, वो भी देविका के साथ।
मेघना और देविका का एक साथ जमानत पाना ही ये इशारा करता था कि जाल काफी उच्चस्तर पर रचा गया है। लेकिन मेरे मन मे जो ख्याल बार बार कौंध रहा था, वो था कि जेल में बन्द राजीव बंसल की इसमे क्या भूमिका हो सकती थी।
बिना राजीव की मिली भगत के तो अकेली मेघना कुछ भी नही कर सकती थी। वो कौन था जो जेल में बन्द इन दोनों के बीच मे कूरियर का काम कर रहा था। कोई तो था। अब इस कोई को ही सबसे पहले मुझे ढूंढना था।
मुझे कुमार गौरव को भी ढूंढना था, वो यू अचानक से कहाँ गायब हो गया था।
सौम्या रागिनी के साथ ऊपर अपने कमरे में जा चुकी थी और मैं अब अपने घर की ओर रवाना हो चुका था।
मुझें जो सबसे पहला काम करना था, वो था, पिछले दो सालों में जेल में राजीव बंसल से किन लोगो ने मुलाकात की है, उसका पता लगाना उन मुलाकात करने वालो लोगो की लिस्ट में से ही कोई एक चेहरा उभर कर आ सकता था, जिसकी मुझे तलाश है।
बहरहाल फिलहाल तो मैं घर पहुंचते ही सोना चाहता था, क्यो कि पिछले दो दिनों से मेरी नींद उड़ी हुई थी।
अगले दिन मैं अभी तैयार हुआ ही था कि थाने से भगवान सिंह का काल आ गया था। उसने मुझे बड़े ही नम्र स्वर में थाने आने के लिए बोला था।
मैं उसके बुलावे पर बीस मिनट में ही उनके सामने हाजिर हो चुका था।
" रोमेश साहब! जिस लड़की की लाश हमे परसो मिली है, क्या आप उसे जानते है" भगवान सिंह ने मेरे बैठते ही अपना सवाल कर दिया था।
"जी नही! मैंने तो उस लड़की को उस दिन जिंदगी में पहली बार ही देखा था, वो भी मुर्दा" मैंने बोला।
"लेकिन उस लड़की के घर के सामान में एक डायरी मिली है, जिसमे आपके बारे में काफी कुछ लिखा गया है, उसमे उसने लिखा है कि तुम और वो लड़की पिछले तीन साल से रिलेशनशिप में थे, उसके बाद तुम अचानक ही उसकी जिंदगी से गायब हो गए, उसके फोन में आपका फोन नंबर भी आपके ही नाम से सेव किया हुआ मिला है" भगवान सिंह एक के बाद एक बम मेरे सिर पर फोड़े जा रहा था।
"मैं एक बार उस लड़की के जीवित अवस्था मे लिये गए कोई फोटोग्राफ देख सकता हूँ" मैं अब कुछ भी बोलने से पहले उस लड़की को सही से देख लेना चाहता था।
"जी बिल्कुल देख सकते है" ये बोलकर भगवान सिंह ने अपनी दराज से एक फ़ाइल निकाली।
उस फ़ाइल में रोजनामचे की कॉपी के साथ ही उस लड़की की विभिन्न कोण से खींची गई उसकी लाश की तस्वीरे लगी हुई थी, उन तस्वीरो के नीचे ही उसकी जीवित अवस्था की दो तस्वीर लगी हुई थी।
मैंने गौर से उन तस्वीरों को देखा, बहुत ध्यान करने के बाद भी मुझें ध्यान नही आ रहा था कि मैंने इस लड़की को कहां देखा है।
मैंने तस्वीर पर नजर डालकर इनकार में अपनी गर्दन को हिलाया और उस फ़ाइल पर एक ओर सरसरी नजर डालकर भगवान सिंह की तरफ बढ़ा दी।
"मैं इस लड़की से अपनी जिंदगी में कभी नही मिला, और जो उस डायरी में आप लिखा हुआ बता रहे है कि मैं अचानक इस लड़की की जिंदगी से गायब हो गया, ये तो सरासर झूठ है, क्यो कि पिछले पांच सालो से तो मैं अपने इसी रोहिणी वाले घर मे रह रहा हूँ" मैने भगवान सिंह की डायरी वाली बात का भी जवाब दिया।
"लेकिन कोई लड़की अपनी डायरी में झूठ क्यो लिखेगी" भगवान सिंह ने मेरी ओर देखते हुए बोलो।
"आपको यकीन है कि ये डायरी इसी लड़की के हाथ की लिखी हुई है, क्या आप इसकी जाँच कर चुके है" मैने भगवान सिंह से ही प्रश्न किया।
"नही! अभी तो हम सिर्फ इस मिली हुई डायरी के आधार पर आपसे पूछताछ कर रहें है" भगवान सिंह ने बोला।
"जिस लडक़ी से मैं अपनी जिंदगी में कभी मिला नही, जिस लड़की ने अपने जिंदा रहते कभी मुझे देखा नही, ऐसी लड़की के केस में हो सकता है कि ये डायरी किसी ने प्लांट कर दी हो" मैने अपनी शंका जताई।
"फिर तो मुझे पक्का यकीन है कि आपकी पिस्टल की फोरेंसिक रिपोर्ट इस लड़की के जिस्म में पाई जाने वाली गोली की फोरेंसिक रिपोर्ट एक ही मिले, आप अपने बचाव की पूरी तैयारी कर लीजिये रोमेश बाबू, क्यो कि शाम को रिपोर्ट आने तक का ही वक़्त है आपके पास" भगवान सिंह ने मुझे चेतावनी नुमा लहजें में बोला।
"अभी मुझे जाने की इजाजत है या नही, शाम की शाम को देखी जाएगी" मैने भगवान सिंह को बोला।
"जी बिल्कुल इजाजत है, लेकिन एक नेक सलाह है आपके लिए, शाम को अपने साथ एक वकील जरूर लेते आइए, आपको जरूरत पड़ सकती है" भगवान सिंह भी अब देवप्रिय वाली जुबान ही बोल रहा था।
"बेफिक्र रहिये जनाब! अपने लायक वकालत तो मैं खुद भी करना जानता हूँ" ये बोलकर मैं कुर्सी से उठा और तेज कदमो से कमरे से बाहर आ गया।
कुमार गौरव की लाश
थाने से निकलते ही मेरे मोबाइल पर एक अनजान नंबर चमकने लगा था। मैंने उस फोन को गाड़ी में बैठने से पहले ही रिसीव किया। उधर से कोई घबराई हुई आवाज में बोल रहा था।
" रोमेश भाई बोल रहे हो" आवाज बहुत ही धीमी थी।
" रोमेश ही बोल रहा हूँ, तुम कौन हो" मैने उस आवाज को पहचानने की कोशिश की।
" रोमेश! मैं गौरव बोल रहा हूँ" उधर से बोलने वाला गौरव था।
"कहाँ गायब हो भाई, यहां तुम्हारी मम्मी तुम्हे ढूंढ ढूंढ कर परेशान है" मैंने उस बोला।
"मेरे पास ज्यादा लंबी बात करने का समय नही है रोमेश, इन लोगो ने मुझे मेरी ही फैक्ट्री के बेसमेंट में कैद कर रखा है, मुझे बचा लो रोमेश" उधर से गौरव बहुत ही धीमी आवाज में बोल रहा था।
"अपनी फैक्ट्री का पता बताओ, मैं वहां अभी पहुँचता हूँ" मैंने उसे दिलासा दिया। उसने मुझें अपना पता बताया।
"किन लोगों ने तुम्हे अपना कैदी बना कर रखा हुआ है, बताओ मुझे, मैं उन्हें भी पकड़वाने का इंतजाम करता हूँ" मैने गौरव से पूछा।
लेकिन तभी उधर से कोई चीज़ मुझें फर्श पर गिरने की आवाज आई और फिर उसके बाद फोन कट गया।
मैंने तुरन्त फोन को फिर से मिलाया, लेकिन इस बार फोन नेटवर्क एरिया से बाहर बता रहा था। मैं एक पल को वही रुका का रुका रह गया।
इस वक़्त मुझें ये समझ नही आ रहा था कि मैं वहां अकेला जाऊं या पुलिस को अपने साथ लेकर जाऊं। मैने किसी नए झेमेले में फंसने से बचने के लिये पुलिस को ही अपने साथ ले जाना उचित समझा।
मैं वही से उल्टे पाँव भगवान सिंह के कमरे की ओर मुड़ गया। मुझें अपने कमरे के दरवाजे पर देखते ही भगवान सिंह के होठो पर मुस्कान आ गई।
"काफी बेचैन लग रहे हों, इतनी जल्दी लौट आये जासूस साहब, रिपोर्ट आने से पहले तो मैं आपको छुउंगा भी नही" भगवान सिंह मेरी बात सुनने की बजाए सिर्फ अपनी अपनी कहे जा रहा था।
"आप पहले मेरी बात सुनेंगे" मैंने थोड़े तीखे स्वर में बोला तो वो बुरा सा मुंह बनाकर मेरी ओर देखने लगा।
"बोलो क्या बोलना चाहते हो" भगवान सिंह मेरी और देखते हुए बोला।
"मेरे फोन पर अभी एक अज्ञात नंबर से फोन आया है, वो खुद को गौरव बता रहा है, वो बोल रहा है कि उसे उसकी ही फैक्ट्री के बेसमेंट में किसी ने बंधक बनाकर रखा हुआ है" मैने ये बोलकर अपने फोन की कॉल लिस्ट में वो नंबर और काल डिटेल दिखाई।
"ये कैसे मान ले की वो गौरव ही था" भगवान सिंह ने एक बेमतलब सा सवाल पूछा।
"ये तो अब उसकी फैक्ट्री में ही जाकर पता चलेगा" मैने सीधी बात बोली।
"कहाँ है उसकी फैक्ट्री" भगवान सिंह ने लगता है अभी तक गौरव सिंह की गुमशुदगी की रिपोर्ट पढ़ी तक नही थी।
"उसकी फैक्ट्री बवाना में है, पता है मेरे पास" मैने भगवान सिंह को बोला।
"वो इलाक़ा दूसरे थाने के अंतर्गत आता है, मुझे वहां के थाने को भी सूचित करना होगा और वही से सिपाही बुलाने होंगे, तुम यही रुको, मैं साहब से इजाजत लेकर आता हूँ" ये बोलकर भगवान सिंह तेज कदमो से कमरे से बाहर निकल गया।
उसके बाहर जाते ही मैने रागिनी को फोन मिलाकर उसे सारी स्थिति के बारे में बताया।
तभी भगवान सिंह मुझे उतनी ही तेजी से वापिस आता हुआ नजर आया। मैने तुरंत फोन काट दिया।
"चलो मैने अपनी रवानगी दर्ज कर दी है" ये बोलकर भगवान सिंह वापिस मुड़ा और मैं भी उतनी ही तेजी के साथ उसके पीछे लपका। तभी उसके साथ एक कांस्टेबल और चलने लगा।
भगवान सिंह अपनी मोटरसाइकिल की तरफ बढ़ने लगा तो मैने उन्हें अपनी ही गाड़ी में चलने के लिये बोला।
जिसे भगवान सिंह ने थोड़ी सी हिचकिचाहट के बाद वे दोनों मेरी गाड़ी में सवार हो गए।
जारी रहेगा_____![]()
Filhaal to ye samajh lo ki Romesh ke bachne ki ek hi surat hai ki wo apne aap ki nirdosh saabit kare, aur wo tabhi ho sakta hai ki jab wo ye saabit kar paaye ki pistol wakai me chori hua thaGazab ki update he Raj_sharma Bhai,
Bhagwan singh sahi keh raha he, us ladki ka murder romesh ki pistol se hua hoga..........
Ab ye kumar ki bhi lanka lag gayi lagti he.........
Romesh ko ab sabse pehle khud ko bachana he..........
Keep rocking Bro
and filhaal ye ho nahi sakta 

Thank you very much for your valuable review and support bhai , sath bane rahiye, agla Update abhi aayega.लगता है रोमेश बाबू ने उस लड़की के साथ मुँह काला किया है... रात भर मज़े किए और फिर रात की बात सुबह भूल गया. चलो ठीक है वो अपने हिसाब से.. "No Strings Attached" वाला बंदा है. दम भर खाना है और डकार भी नहीं लेना है.
Btw, very nice writing... Good Update.. Loved it!

Bhai pahli baat to ye ki kumaar mar gaya hai, and pulisiye ne poori kosis jaroor ki thi Romesh ko lapetne ki, lekin wo Romesh ko halke me lena uske liye bhaari pad sakta tha, ye baat wo bhi jaanta hai.रिव्यू की शुरुआत की जाए
कहानी में पुराने हथकंडे खुलते जा रहे हैं, क्या हुआ, किस वजह से, क्या हो रहा धीरे-धीरे सामने आता जा रहा है।
मैंने आख़िरी रिव्यू में कहा था कि जो लाश मिली है, उनसे रोमीश का कनेक्शन कुछ न कुछ ज़रूर होगा, वरना मर्डर के इल्ज़ाम रोमीश पर इतना आसानी से नहीं जाता।
अब वह लड़की जिसकी लाश मिली, वह रोमीश की परिचित तो नहीं लगती है। उसके ही जिस भी डायरी सामने आई, वह भी लग तो फ़ेक रही है। सोचने में कहीं न कहीं कुछ तो मिसिंग लग रहा है कि किसने वह फ़ेक सबूत प्लांट किया।
जिस तरह अभी भगवान सिंह के सुर बदले लग रहे हैं, मुझे ऐसा क्यों लग रहा है कि दुश्मन खेमे की पहुँच आला अधिकारी तक है। क्योंकि पहले देवप्रिय, अब भगवान सिंह ये लोग किसी के दबाव में रोमीश को धरना चाहते हैं।
कुछ हद तक मेरा मानना है कि कुछ लोग रोमीश की पुलिस के ऊपर तक की पहुँच से जलते हैं। क्योंकि जो काम पुलिस का है, उसमें रोमीश नाम का प्राइवेट डिटेक्टिव आता है और केस सॉल्व कर देता है, जिससे स्वाभाविक है कि उच्च अधिकारी में पुलिस डिपार्टमेंट पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
मेरा एक कंसर्न है जिस तरह अपडेट के बीच में सीन टाइटल दिया गया है, उदाहरण: कुमार गौरव की लाश वह सस्पेंस खत्म कर देता है।
वैसे दिमाग में बात आई है कि जिस महिला की वजह से पूरा कांड हुआ, उसका तो ज़िक्र आया नहीं है। अशोक बंसल की आधी उम्र की लवर क्या सच में मर गई या वह अभी अंडरग्राउंड में ज़िंदा है। वैसे वह महिला 27–28 की होनी चाहिए। मुझे क्या लगता है, यह महिला हमें आगे देखने को मिलेगी, क्योंकि लेखक महोदय बड़ी चालाकी से उस महिला का विस्तार कम शब्दों में निपटा गए, तो इसलिए शक जायज़ है।
अब मुझे माजरा यह समझ नहीं आ रहा है कि रोमीश के ऊपर अगर कुमार की हत्या का इल्ज़ाम लगवाना है, तो वह कैसे लगेगा। क्योंकि रोमीश के अनुसार उसे कुमार ने अभी फ़ोन किया है, वह भी उस समय पुलिस स्टेशन में था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृत्यु समय बताया जाएगा और सीसीटीवी की मदद से रोमीश साबित कर देगा कि मैं तो पुलिस स्टेशन में था उस समय। साथ ही रोमीश की पिस्टल पुलिस कस्टडी में है। अगर कुमार की हत्या रोमीश की पिस्टल से की जाती है, तो डिपार्टमेंट पर सवाल उठेगा कि तुम्हारी कस्टडी से पिस्टल कैसे गायब हुई।
कुल मिलाकर बहुत कुछ हो रहा है।
अगले अपडेट का इंतज़ार।
Raj_sharma


