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Thriller कातिल रात

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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रिव्यू की शुरुआत की जाए, मेरा आख़िरी वाला रिव्यू जिसने पढ़ा होगा, उसको मालूम चल गया होगा कि ऐसे ही हवा नहीं हैं अपनी मेरी कितनी सारी थ्योरीज़ सच हुई हैं।
:anyone:?
बिज़नेस के सिलसिले में जो ये सब हो रहा था, उसमें बिज़नेस का एक बहुत इम्पॉर्टेंट पार्ट छुपा हुआ है। देखो, देविका का मक़सद बिज़नेस में हेराफेरी करना था, वो भी किसी के कहने पर आई थी।
:approve:
लेकिन मुझे क्या लगता है ये बात सच है कि देविका को इसमें घसीटा गया है। देविका के अनुसार ये सब कुमार ने किया, लेकिन मुझे लगता है इसमें कुछ लोचा ज़रूर है। मुमकिन है कि कुमार का भेस धारण करके किसी और ने ये काम देविका को सौंपा हो।
Kya jaruri hai aisa hi ho? Ye bhibto ho sakta hai ki kumar ko wo faswana chahti ho?:?:
अब मुझे ये समझ नहीं आ रहा कि अगर सौम्या के बिज़नेस में देविका के ज़रिए नुक़सान करवाना किसी का षड्यंत्र है, तो वो कौन हो सकता है। क्योंकि ये राजीव तो नहीं होना चाहिए, क्योंकि टेक्निकली वो भी बिज़नेस का ही हिस्सा होगा।या कहीं ऐसा तो नहीं कि बिज़नेस की CEO सौम्या है, और इसी वजह से राजीव ने सौम्या को फँसा कर बिज़नेस में नुक़सान करवाया हो, ताकि शेयरहोल्डर्स के सामने ये साबित किया जा सके कि सौम्या बिज़नेस ओनरशिप के काबिल नहीं है।
Waah kya dimaak lagaya hai😎
Lekin bandhu apun abhi kuch na bol sakta hai iske baare me.:dazed:
मुख्य बात यहाँ सौम्या की मेडिकल हिस्ट्री का भी इस्तेमाल हो सकता है कि उसकी मेंटल हेल्थ ठीक नहीं है, इसलिए उसे ओनरशिप देना ख़तरे से खाली नहीं। मुझे तो यही लगता है कि सौम्या को मानसिक रूप से अक्षम साबित करके उसकी जायदाद हड़पने का प्लान है।
Saumya koi beemaar nahi, bas usko time per sambhog hona :D
अब आते हैं रोमेश का “इलु-इलु” वाला सीन, जो मेघना से हुआ। रोमेश अगर लड़की के चक्कर में न पड़ता तो ये मुसीबतें आती ही नहीं।
Romesh meghna ke sath ilu ilu kiya?:?:
आने वाले अपडेट में मुझे अंदेशा है कि एक-आध कत्ल होने वाला है। वैसे वो रिपोर्ट अभी तक आई नहीं है, तो मुझे लगता है कांड तो हो चुका है। उस पिस्टल से रोमेश भैया की आने वाली है पुलिस जल्दी।
:claps::claps: Shabaash
वैसे ये सोचने की बात है कि जो लोग मरे हैं, अगर वो रोमेश की पिस्टल से मरे हैं, तो वो ऐसे ही राह चलते लोग नहीं हो सकते। अगर मर्डर का इल्ज़ाम रोमेश पर डालना है, तो किसी को भी मरवा देना काफ़ी नहीं है।
Dekhte hain, kya hota hai? Abhi kya hi bolu 😎
मरने वालों का रोमेश से कोई न कोई कनेक्शन होना ज़रूरी है, ताकि रोमेश पर शक की वजह बने। वरना खुद सोचो रोमेश के पास बचने का सबसे बड़ा हथियार है कि “मुझे इन लोगों के बारे में कुछ पता ही नहीं, तो बिना दुश्मनी के मैं क्यों मारूँगा?”
अगर मरवाना ही था, तो रोमेश के क़रीबी को मरवाना चाहिए था, ताकि शक सीधे रोमेश पर जाता।
एक बड़ा और ख़तरनाक विचार मेरे दिमाग़ में आया है शायद कुमार अब मर चुका है। देखो, जब से वो पिस्टल मिली है, उससे पहले से ही कुमार गायब है। मतलब खेल खेला जा चुका है। शक भी रोमेश पर जाने की पूरी संभावना है, क्योंकि रोमेश कुमार से परिचित था।
Shabaash londe, sahi ja rahe ho, itna dimaak kaha se laate ho? Waise tumhari kuch bate sach ho sakti hain jaldi hi :approve:
रोमेश की पिस्टल के साथ-साथ कुमार की गाड़ी भी गायब हुई थी। ऐसे में केस में रोमेश के साथ “कुमार की गाड़ी” वाला एंगल भी बनना चाहिए था। वैसे उस गाड़ी को चेक किया जाना चाहिए उसमें कुछ न कुछ सबूत ज़रूर होगा, जो आगे चलकर रोमेश के लिए अहम बनेगा। क्योंकि सिर्फ़ कुमार गौरव से मिलने के लिए गाड़ी यूँ ही नहीं घुमाई जाएगी। गाड़ी का घूमना आगे चलकर ज़रूर काम आएगा।
No doubt bhai, kisi bhi angle ko chhoda nahi jayega :roll:
आज के लिए इतना ही। कुल मिलाकर अच्छा अपडेट था।

सिंगल अपडेट पर इतना बड़ा रिव्यू लिखना अपने आप में बहुत ख़तरनाक काम है ज़्यादातर समय एक ही अपडेट पर इतना बड़ा रिव्यू नहीं लिखा
Raj_sharma
brevo :bow::bow:
Thank you very much for your amazing review and support bhai :hug:
 

Raj_sharma

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Raj_sharma

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#13

सौम्या बंसल के संपर्क में मैं तब आया था, जब मैं अशोक बंसल हत्या कांड की जांच कर रहा था।

अशोक बंसल दिल्ली शहर की एक नामचीन और अरबपति हस्ती थे। उन्होंने अपने जीवन मे एकमात्र गलती की थी कि अपनी पचपन साल की उम्र में अपनी से आधी उम्र की अपनी सेक्रेटरी के रुपजाल में फंस गए, और उससे शादी कर बैठे, ये उनके जीवन की ऐसी गलती थी, जिसने सिर्फ छह महीने में ही अशोक बंसल के प्राण लील लिए थे।

अशोक बंसल की लाश उन्ही के ड्राइंगरूम में मिली थी, उनकी काफी निर्मम तरीके से हत्या की गई थी। उन्ही अशोक बंसल के एक मात्र सुपुत्र राजीव बंसल उस हत्या कांड में मुख्य अभियुक्त साबित हुए थे, और उसी राजीव बंसल की पत्नी थी सौम्या बंसल।

जब मैं केस की जांच के दौरान सौम्या से मिला तो इस बेपनाह सुंदरी के जीवन मे कितना बड़ा अंधेरा था, वो सौम्या से मिलने के बाद ही पता लग सका।

सौम्या बहुत छोटी उम्र में ही अपने पापा के एक दोस्त और अपने खुद के चाचा की काम वासना का शिकार हो गई थी।

छोटी उम्र में शारीरिक संबंध बन जाने के कारण सौम्या को एक अजीबो गरीब बीमारी हो गई, जिसे हम लोग निम्फोमानियाक नाम की एक सेक्स बीमारी के नाम से जानतें है, ये ऐसी भयावह बीमारी है कि जब इंसान में सेक्स की तलब उठती है तो न वो अपना देखती है और न पराया, उसे बस अपनी कामवासना को शांत करने से मतलब होता है।

मुझे अपनी इस बीमारी के बारे में सौम्या ने खुद नही बताया था, बल्कि इस बारे में मुझें केस की जांच के दौरान ही मेघना से पता चला था। सौम्या की इसी बीमारी के चलते सौम्या का पति राजीव बंसल कई मौकों पर अपमानित हो चुका था, और सौम्या से छुटकारा पाना चाह्ता था।

अपनी सौतेली माँ सोनिया की हत्या के बाद राजीव ने सौम्या को भी मार डालने का षडयंत्र रचा था, लेकिन वो आपके इस सेवक की वजह से अपने इरादो में कामयाब नही हो सका था, और उसे मैंने रंगे हाथो सौम्या की जान लेने की कोशिश करते हुए पकड़ लिया था।

राजीव ने ये साजिश सौम्या को रास्ते से हटाकर मेघना के साथ शादी करने के इरादे से रची थी।

यही वजह थी कि रागिनी ने इस पॉइंट को इंगित किया था कि अरमान सिर्फ राजीव के ही अधूरे नही रहे थे, बल्कि अरमान मेघना के भी पूरे नही हुए थे।

बाद में मेघना ने भी सौम्या को मार डालने की साजिश रची थी, लेकिन इस बार भी मैने ही सौम्या को एक बार फिर से मेघना की साजिश से बचाया और मेघना को जेल भिजवाया था।

लेकिन लगता है कि मेघना ने अभी तक अपनी हार नही मानी थी। वो एक बार फिर से अपने इरादो को अंजाम देने के लिये जेल से बाहर आ गई थी, वो भी देविका के साथ।

मेघना और देविका का एक साथ जमानत पाना ही ये इशारा करता था कि जाल काफी उच्चस्तर पर रचा गया है। लेकिन मेरे मन मे जो ख्याल बार बार कौंध रहा था, वो था कि जेल में बन्द राजीव बंसल की इसमे क्या भूमिका हो सकती थी।

बिना राजीव की मिली भगत के तो अकेली मेघना कुछ भी नही कर सकती थी। वो कौन था जो जेल में बन्द इन दोनों के बीच मे कूरियर का काम कर रहा था। कोई तो था। अब इस कोई को ही सबसे पहले मुझे ढूंढना था।

मुझे कुमार गौरव को भी ढूंढना था, वो यू अचानक से कहाँ गायब हो गया था।

सौम्या रागिनी के साथ ऊपर अपने कमरे में जा चुकी थी और मैं अब अपने घर की ओर रवाना हो चुका था।

मुझें जो सबसे पहला काम करना था, वो था, पिछले दो सालों में जेल में राजीव बंसल से किन लोगो ने मुलाकात की है, उसका पता लगाना उन मुलाकात करने वालो लोगो की लिस्ट में से ही कोई एक चेहरा उभर कर आ सकता था, जिसकी मुझे तलाश है।

बहरहाल फिलहाल तो मैं घर पहुंचते ही सोना चाहता था, क्यो कि पिछले दो दिनों से मेरी नींद उड़ी हुई थी।

अगले दिन मैं अभी तैयार हुआ ही था कि थाने से भगवान सिंह का काल आ गया था। उसने मुझे बड़े ही नम्र स्वर में थाने आने के लिए बोला था।

मैं उसके बुलावे पर बीस मिनट में ही उनके सामने हाजिर हो चुका था।

" रोमेश साहब! जिस लड़की की लाश हमे परसो मिली है, क्या आप उसे जानते है" भगवान सिंह ने मेरे बैठते ही अपना सवाल कर दिया था।

"जी नही! मैंने तो उस लड़की को उस दिन जिंदगी में पहली बार ही देखा था, वो भी मुर्दा" मैंने बोला।

"लेकिन उस लड़की के घर के सामान में एक डायरी मिली है, जिसमे आपके बारे में काफी कुछ लिखा गया है, उसमे उसने लिखा है कि तुम और वो लड़की पिछले तीन साल से रिलेशनशिप में थे, उसके बाद तुम अचानक ही उसकी जिंदगी से गायब हो गए, उसके फोन में आपका फोन नंबर भी आपके ही नाम से सेव किया हुआ मिला है" भगवान सिंह एक के बाद एक बम मेरे सिर पर फोड़े जा रहा था।

"मैं एक बार उस लड़की के जीवित अवस्था मे लिये गए कोई फोटोग्राफ देख सकता हूँ" मैं अब कुछ भी बोलने से पहले उस लड़की को सही से देख लेना चाहता था।

"जी बिल्कुल देख सकते है" ये बोलकर भगवान सिंह ने अपनी दराज से एक फ़ाइल निकाली।

उस फ़ाइल में रोजनामचे की कॉपी के साथ ही उस लड़की की विभिन्न कोण से खींची गई उसकी लाश की तस्वीरे लगी हुई थी, उन तस्वीरो के नीचे ही उसकी जीवित अवस्था की दो तस्वीर लगी हुई थी।

मैंने गौर से उन तस्वीरों को देखा, बहुत ध्यान करने के बाद भी मुझें ध्यान नही आ रहा था कि मैंने इस लड़की को कहां देखा है।

मैंने तस्वीर पर नजर डालकर इनकार में अपनी गर्दन को हिलाया और उस फ़ाइल पर एक ओर सरसरी नजर डालकर भगवान सिंह की तरफ बढ़ा दी।

"मैं इस लड़की से अपनी जिंदगी में कभी नही मिला, और जो उस डायरी में आप लिखा हुआ बता रहे है कि मैं अचानक इस लड़की की जिंदगी से गायब हो गया, ये तो सरासर झूठ है, क्यो कि पिछले पांच सालो से तो मैं अपने इसी रोहिणी वाले घर मे रह रहा हूँ" मैने भगवान सिंह की डायरी वाली बात का भी जवाब दिया।

"लेकिन कोई लड़की अपनी डायरी में झूठ क्यो लिखेगी" भगवान सिंह ने मेरी ओर देखते हुए बोलो।

"आपको यकीन है कि ये डायरी इसी लड़की के हाथ की लिखी हुई है, क्या आप इसकी जाँच कर चुके है" मैने भगवान सिंह से ही प्रश्न किया।

"नही! अभी तो हम सिर्फ इस मिली हुई डायरी के आधार पर आपसे पूछताछ कर रहें है" भगवान सिंह ने बोला।

"जिस लडक़ी से मैं अपनी जिंदगी में कभी मिला नही, जिस लड़की ने अपने जिंदा रहते कभी मुझे देखा नही, ऐसी लड़की के केस में हो सकता है कि ये डायरी किसी ने प्लांट कर दी हो" मैने अपनी शंका जताई।

"फिर तो मुझे पक्का यकीन है कि आपकी पिस्टल की फोरेंसिक रिपोर्ट इस लड़की के जिस्म में पाई जाने वाली गोली की फोरेंसिक रिपोर्ट एक ही मिले, आप अपने बचाव की पूरी तैयारी कर लीजिये रोमेश बाबू, क्यो कि शाम को रिपोर्ट आने तक का ही वक़्त है आपके पास" भगवान सिंह ने मुझे चेतावनी नुमा लहजें में बोला।

"अभी मुझे जाने की इजाजत है या नही, शाम की शाम को देखी जाएगी" मैने भगवान सिंह को बोला।

"जी बिल्कुल इजाजत है, लेकिन एक नेक सलाह है आपके लिए, शाम को अपने साथ एक वकील जरूर लेते आइए, आपको जरूरत पड़ सकती है" भगवान सिंह भी अब देवप्रिय वाली जुबान ही बोल रहा था।

"बेफिक्र रहिये जनाब! अपने लायक वकालत तो मैं खुद भी करना जानता हूँ" ये बोलकर मैं कुर्सी से उठा और तेज कदमो से कमरे से बाहर आ गया।

कुमार गौरव की लाश

थाने से निकलते ही मेरे मोबाइल पर एक अनजान नंबर चमकने लगा था। मैंने उस फोन को गाड़ी में बैठने से पहले ही रिसीव किया। उधर से कोई घबराई हुई आवाज में बोल रहा था।

" रोमेश भाई बोल रहे हो" आवाज बहुत ही धीमी थी।

" रोमेश ही बोल रहा हूँ, तुम कौन हो" मैने उस आवाज को पहचानने की कोशिश की।

" रोमेश! मैं गौरव बोल रहा हूँ" उधर से बोलने वाला गौरव था।

"कहाँ गायब हो भाई, यहां तुम्हारी मम्मी तुम्हे ढूंढ ढूंढ कर परेशान है" मैंने उस बोला।

"मेरे पास ज्यादा लंबी बात करने का समय नही है रोमेश, इन लोगो ने मुझे मेरी ही फैक्ट्री के बेसमेंट में कैद कर रखा है, मुझे बचा लो रोमेश" उधर से गौरव बहुत ही धीमी आवाज में बोल रहा था।

"अपनी फैक्ट्री का पता बताओ, मैं वहां अभी पहुँचता हूँ" मैंने उसे दिलासा दिया। उसने मुझें अपना पता बताया।

"किन लोगों ने तुम्हे अपना कैदी बना कर रखा हुआ है, बताओ मुझे, मैं उन्हें भी पकड़वाने का इंतजाम करता हूँ" मैने गौरव से पूछा।

लेकिन तभी उधर से कोई चीज़ मुझें फर्श पर गिरने की आवाज आई और फिर उसके बाद फोन कट गया।

मैंने तुरन्त फोन को फिर से मिलाया, लेकिन इस बार फोन नेटवर्क एरिया से बाहर बता रहा था। मैं एक पल को वही रुका का रुका रह गया।

इस वक़्त मुझें ये समझ नही आ रहा था कि मैं वहां अकेला जाऊं या पुलिस को अपने साथ लेकर जाऊं। मैने किसी नए झेमेले में फंसने से बचने के लिये पुलिस को ही अपने साथ ले जाना उचित समझा।

मैं वही से उल्टे पाँव भगवान सिंह के कमरे की ओर मुड़ गया। मुझें अपने कमरे के दरवाजे पर देखते ही भगवान सिंह के होठो पर मुस्कान आ गई।

"काफी बेचैन लग रहे हों, इतनी जल्दी लौट आये जासूस साहब, रिपोर्ट आने से पहले तो मैं आपको छुउंगा भी नही" भगवान सिंह मेरी बात सुनने की बजाए सिर्फ अपनी अपनी कहे जा रहा था।

"आप पहले मेरी बात सुनेंगे" मैंने थोड़े तीखे स्वर में बोला तो वो बुरा सा मुंह बनाकर मेरी ओर देखने लगा।

"बोलो क्या बोलना चाहते हो" भगवान सिंह मेरी और देखते हुए बोला।

"मेरे फोन पर अभी एक अज्ञात नंबर से फोन आया है, वो खुद को गौरव बता रहा है, वो बोल रहा है कि उसे उसकी ही फैक्ट्री के बेसमेंट में किसी ने बंधक बनाकर रखा हुआ है" मैने ये बोलकर अपने फोन की कॉल लिस्ट में वो नंबर और काल डिटेल दिखाई।

"ये कैसे मान ले की वो गौरव ही था" भगवान सिंह ने एक बेमतलब सा सवाल पूछा।

"ये तो अब उसकी फैक्ट्री में ही जाकर पता चलेगा" मैने सीधी बात बोली।

"कहाँ है उसकी फैक्ट्री" भगवान सिंह ने लगता है अभी तक गौरव सिंह की गुमशुदगी की रिपोर्ट पढ़ी तक नही थी।

"उसकी फैक्ट्री बवाना में है, पता है मेरे पास" मैने भगवान सिंह को बोला।

"वो इलाक़ा दूसरे थाने के अंतर्गत आता है, मुझे वहां के थाने को भी सूचित करना होगा और वही से सिपाही बुलाने होंगे, तुम यही रुको, मैं साहब से इजाजत लेकर आता हूँ" ये बोलकर भगवान सिंह तेज कदमो से कमरे से बाहर निकल गया।

उसके बाहर जाते ही मैने रागिनी को फोन मिलाकर उसे सारी स्थिति के बारे में बताया।

तभी भगवान सिंह मुझे उतनी ही तेजी से वापिस आता हुआ नजर आया। मैने तुरंत फोन काट दिया।

"चलो मैने अपनी रवानगी दर्ज कर दी है" ये बोलकर भगवान सिंह वापिस मुड़ा और मैं भी उतनी ही तेजी के साथ उसके पीछे लपका। तभी उसके साथ एक कांस्टेबल और चलने लगा।

भगवान सिंह अपनी मोटरसाइकिल की तरफ बढ़ने लगा तो मैने उन्हें अपनी ही गाड़ी में चलने के लिये बोला।

जिसे भगवान सिंह ने थोड़ी सी हिचकिचाहट के बाद वे दोनों मेरी गाड़ी में सवार हो गए।


जारी रहेगा_____✍️
 

Raj_sharma

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Always welcome bro

Superb updates....

Kon fasana chahega Romesh ko? Aur Kyu?

Ye story bhi aapki baki stories ki bahut achi h suspense and thrill se bhari .
Dete. Romesh wahi h kya jo pichili story mei tha .
dono story aapas mei link h bhi h kya ya us story ka prequel h ye

Ye update kaafi mazedaar aur suspense-filled tha.
Soumya–Ragini–Romesh ki nok-jhok ne mood light rakha,
lekin Devika ka track story ko ekdum dark thriller mode me le gaya.

Devika ka Kumar se blackmail hona,
Kumar ki car chura lena,
Romesh ki pistol lekar bhaag jana,
aur car me khoon milna—
ye saari cheezein dikhati hain ki wo koi bada game khel rahi hai.

Romesh bhi dheere-dheere uske trap me fas raha hai,
shayad kisi purane dushman ki chaal ho.

Overall update grippy, fast-paced aur interesting tha.
Next update me toh blast pakka hai.

:congrats: start new story

Awesome update and lovely story

तितली…या … भँवरा … और मधु?

Raj_sharma tum idhr bhi
Khair
Meri bhi attendance laga do story pr
Review eksath dungi
ummid hai kuch alag ho

dono update lajawab ..................... the sarkar .............. :happy:

Agli KADI ka intazar rahega ........... sarkar Mahoday ...

यार तुम्हे तो वाचक के स्थान पर लेखक होना चाहिए, देव प्रिय आगे से लोला और पीछे से डंडा डालके गपा गप करता रहेगा।

Haan! Pahle ye chhichhori harkate kar lo kyoki ye zyada zaruri hai, hat lauda :buttkick:

Dear detective zara explain karoge ki tumhe kaise pata chala ki dono laundiyo ne devpriya ke sath mil kar ye jaal buna hai....matlab kuch bhi :roll:

Aur fir jab ye pata chal hi Gaya to ACP Sharma ki rahnumaai lene kyo chal diye be, saboot ke sath seena chauda kar ke seedhe thane pahuch Jana tha aur devpriya ki aankho me aankhen daal kar unki saari kartoot expose kar deni chahiye thi...kya yaar sahi bol rela tha apan ki ye detective kahlane ke laayak hi nahi hai. Ekdam noob harkate hain iski :D

Ohh really....I mean itna talent hai tumme???? Aur koi talent ho ya na ho lekin joke mast maara hai:lotpot:


Anyway....Kumar Gaurav gayab hai...uske bare me ab kya hi bole apan, matlab ki according to romesh jab ye sara kiya dhara un do laundiyo aur devpriya ka hi hai to zaahir hai Kumar Gaurav ke gayab hone ke pichhe bhi unhi ka hath hoga.... :D

ACP ki maujoodgi me in jaal bunne walo se puchha jaye ki ye sab in logo ne kyo kiya, and one more thing...jab ye khulasa ho hi gaya hai to saumya ko ab kisse aur kis baat khatra??? :roll:

Overall mast funny type update tha ye, keep it up :thumbup:

Nice update. 👍

अभी के लिए इतना ही कह सकता हूँ.

और निःसंदेह वो जिस किसी भी लाश थी, वो कभी तो किसी का कुछ न कुछ तो रहा ही होगा. सोच कर ही बुरा लग रहा है.
ज़रूरी नहीं की हर लाश रोमेश के केस के साथ जुड़ा हो.. पर, देखते हैं... आगे क्या होता है?

अगले अपडेट की प्रतीक्षा है. जल्दी लाना.

Bahut hi shandar update he Raj_sharma Bhai,

Devpriya to case se hata diya gaya he, jaisa ki ACP sharma ne kha tha..........

Pistol ki forensic report abhi aani baaki he, sara case abhi yahi par atka he.........

Ab ye kumar gaurav bhi lapta ho gaya he........

Shukra he lash kumar ki nahi thi varna romesh ke L lagne pakke the..........

Keep rocking Bro

Kamal ki bat hai mujhe laga nahi tha is khel me SAUMYA hogi lekin abhi ki bat lagane laga hai SAUMYA such me bade khatre me hai lekin sawal abhi bhi whe aaraha hai kya such me Devika or uske sath Wale Ladki (bhai name bhool gya uska) kya in dono ka koi plan hai ya koi bhi shamil hai is khel me

Bhut shandaar update..... कुछ तो खिचड़ी से भी ज्यादा उलझा हुआ पक रहा हैं....


जो अभी रोमेश बाबु की समझ से परे है.....

Nice update.....

Shaandar update

Bhut hi badhiya update Bhai
Abhi tak dekhkar to lag raha hai somya sachme kisi badhe khatre me hai
Dhekte hai romesh babu aage kya karte hai

रिव्यू की शुरुआत की जाए

मेरा आख़िरी वाला रिव्यू जिसने पढ़ा होगा, उसको मालूम चल गया होगा कि ऐसे ही हवा नहीं हैं अपनी मेरी कितनी सारी थ्योरीज़ सच हुई हैं।

बिज़नेस के सिलसिले में जो ये सब हो रहा था, उसमें बिज़नेस का एक बहुत इम्पॉर्टेंट पार्ट छुपा हुआ है। देखो, देविका का मक़सद बिज़नेस में हेराफेरी करना था, वो भी किसी के कहने पर आई थी।

लेकिन मुझे क्या लगता है ये बात सच है कि देविका को इसमें घसीटा गया है। देविका के अनुसार ये सब कुमार ने किया, लेकिन मुझे लगता है इसमें कुछ लोचा ज़रूर है। मुमकिन है कि कुमार का भेस धारण करके किसी और ने ये काम देविका को सौंपा हो।
अब मुझे ये समझ नहीं आ रहा कि अगर सौम्या के बिज़नेस में देविका के ज़रिए नुक़सान करवाना किसी का षड्यंत्र है, तो वो कौन हो सकता है। क्योंकि ये राजीव तो नहीं होना चाहिए, क्योंकि टेक्निकली वो भी बिज़नेस का ही हिस्सा होगा।या कहीं ऐसा तो नहीं कि बिज़नेस की CEO सौम्या है, और इसी वजह से राजीव ने सौम्या को फँसा कर बिज़नेस में नुक़सान करवाया हो, ताकि शेयरहोल्डर्स के सामने ये साबित किया जा सके कि सौम्या बिज़नेस ओनरशिप के काबिल नहीं है।

मुख्य बात यहाँ सौम्या की मेडिकल हिस्ट्री का भी इस्तेमाल हो सकता है कि उसकी मेंटल हेल्थ ठीक नहीं है, इसलिए उसे ओनरशिप देना ख़तरे से खाली नहीं। मुझे तो यही लगता है कि सौम्या को मानसिक रूप से अक्षम साबित करके उसकी जायदाद हड़पने का प्लान है।

अब आते हैं रोमेश का “इलु-इलु” वाला सीन, जो मेघना से हुआ। रोमेश अगर लड़की के चक्कर में न पड़ता तो ये मुसीबतें आती ही नहीं।

आने वाले अपडेट में मुझे अंदेशा है कि एक-आध कत्ल होने वाला है। वैसे वो रिपोर्ट अभी तक आई नहीं है, तो मुझे लगता है कांड तो हो चुका है। उस पिस्टल से रोमेश भैया की आने वाली है पुलिस जल्दी।

वैसे ये सोचने की बात है कि जो लोग मरे हैं, अगर वो रोमेश की पिस्टल से मरे हैं, तो वो ऐसे ही राह चलते लोग नहीं हो सकते। अगर मर्डर का इल्ज़ाम रोमेश पर डालना है, तो किसी को भी मरवा देना काफ़ी नहीं है।

मरने वालों का रोमेश से कोई न कोई कनेक्शन होना ज़रूरी है, ताकि रोमेश पर शक की वजह बने। वरना खुद सोचो रोमेश के पास बचने का सबसे बड़ा हथियार है कि “मुझे इन लोगों के बारे में कुछ पता ही नहीं, तो बिना दुश्मनी के मैं क्यों मारूँगा?”
अगर मरवाना ही था, तो रोमेश के क़रीबी को मरवाना चाहिए था, ताकि शक सीधे रोमेश पर जाता।
एक बड़ा और ख़तरनाक विचार मेरे दिमाग़ में आया है शायद कुमार अब मर चुका है। देखो, जब से वो पिस्टल मिली है, उससे पहले से ही कुमार गायब है। मतलब खेल खेला जा चुका है। शक भी रोमेश पर जाने की पूरी संभावना है, क्योंकि रोमेश कुमार से परिचित था।

रोमेश की पिस्टल के साथ-साथ कुमार की गाड़ी भी गायब हुई थी। ऐसे में केस में रोमेश के साथ “कुमार की गाड़ी” वाला एंगल भी बनना चाहिए था। वैसे उस गाड़ी को चेक किया जाना चाहिए उसमें कुछ न कुछ सबूत ज़रूर होगा, जो आगे चलकर रोमेश के लिए अहम बनेगा। क्योंकि सिर्फ़ कुमार गौरव से मिलने के लिए गाड़ी यूँ ही नहीं घुमाई जाएगी। गाड़ी का घूमना आगे चलकर ज़रूर काम आएगा।

आज के लिए इतना ही।

कुल मिलाकर अच्छा अपडेट था।

सिंगल अपडेट पर इतना बड़ा रिव्यू लिखना अपने आप में बहुत ख़तरनाक काम है ज़्यादातर समय एक ही अपडेट पर इतना बड़ा रिव्यू नहीं लिखा
Raj_sharma

Besabari se intezaar rahega next update ka Raj_sharma bhai....

Update posted friends :declare:
 

parkas

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#13

सौम्या बंसल के संपर्क में मैं तब आया था, जब मैं अशोक बंसल हत्या कांड की जांच कर रहा था।

अशोक बंसल दिल्ली शहर की एक नामचीन और अरबपति हस्ती थे। उन्होंने अपने जीवन मे एकमात्र गलती की थी कि अपनी पचपन साल की उम्र में अपनी से आधी उम्र की अपनी सेक्रेटरी के रुपजाल में फंस गए, और उससे शादी कर बैठे, ये उनके जीवन की ऐसी गलती थी, जिसने सिर्फ छह महीने में ही अशोक बंसल के प्राण लील लिए थे।

अशोक बंसल की लाश उन्ही के ड्राइंगरूम में मिली थी, उनकी काफी निर्मम तरीके से हत्या की गई थी। उन्ही अशोक बंसल के एक मात्र सुपुत्र राजीव बंसल उस हत्या कांड में मुख्य अभियुक्त साबित हुए थे, और उसी राजीव बंसल की पत्नी थी सौम्या बंसल।

जब मैं केस की जांच के दौरान सौम्या से मिला तो इस बेपनाह सुंदरी के जीवन मे कितना बड़ा अंधेरा था, वो सौम्या से मिलने के बाद ही पता लग सका।

सौम्या बहुत छोटी उम्र में ही अपने पापा के एक दोस्त और अपने खुद के चाचा की काम वासना का शिकार हो गई थी।

छोटी उम्र में शारीरिक संबंध बन जाने के कारण सौम्या को एक अजीबो गरीब बीमारी हो गई, जिसे हम लोग निम्फोमानियाक नाम की एक सेक्स बीमारी के नाम से जानतें है, ये ऐसी भयावह बीमारी है कि जब इंसान में सेक्स की तलब उठती है तो न वो अपना देखती है और न पराया, उसे बस अपनी कामवासना को शांत करने से मतलब होता है।

मुझे अपनी इस बीमारी के बारे में सौम्या ने खुद नही बताया था, बल्कि इस बारे में मुझें केस की जांच के दौरान ही मेघना से पता चला था। सौम्या की इसी बीमारी के चलते सौम्या का पति राजीव बंसल कई मौकों पर अपमानित हो चुका था, और सौम्या से छुटकारा पाना चाह्ता था।

अपनी सौतेली माँ सोनिया की हत्या के बाद राजीव ने सौम्या को भी मार डालने का षडयंत्र रचा था, लेकिन वो आपके इस सेवक की वजह से अपने इरादो में कामयाब नही हो सका था, और उसे मैंने रंगे हाथो सौम्या की जान लेने की कोशिश करते हुए पकड़ लिया था।

राजीव ने ये साजिश सौम्या को रास्ते से हटाकर मेघना के साथ शादी करने के इरादे से रची थी।

यही वजह थी कि रागिनी ने इस पॉइंट को इंगित किया था कि अरमान सिर्फ राजीव के ही अधूरे नही रहे थे, बल्कि अरमान मेघना के भी पूरे नही हुए थे।

बाद में मेघना ने भी सौम्या को मार डालने की साजिश रची थी, लेकिन इस बार भी मैने ही सौम्या को एक बार फिर से मेघना की साजिश से बचाया और मेघना को जेल भिजवाया था।

लेकिन लगता है कि मेघना ने अभी तक अपनी हार नही मानी थी। वो एक बार फिर से अपने इरादो को अंजाम देने के लिये जेल से बाहर आ गई थी, वो भी देविका के साथ।

मेघना और देविका का एक साथ जमानत पाना ही ये इशारा करता था कि जाल काफी उच्चस्तर पर रचा गया है। लेकिन मेरे मन मे जो ख्याल बार बार कौंध रहा था, वो था कि जेल में बन्द राजीव बंसल की इसमे क्या भूमिका हो सकती थी।

बिना राजीव की मिली भगत के तो अकेली मेघना कुछ भी नही कर सकती थी। वो कौन था जो जेल में बन्द इन दोनों के बीच मे कूरियर का काम कर रहा था। कोई तो था। अब इस कोई को ही सबसे पहले मुझे ढूंढना था।

मुझे कुमार गौरव को भी ढूंढना था, वो यू अचानक से कहाँ गायब हो गया था।

सौम्या रागिनी के साथ ऊपर अपने कमरे में जा चुकी थी और मैं अब अपने घर की ओर रवाना हो चुका था।

मुझें जो सबसे पहला काम करना था, वो था, पिछले दो सालों में जेल में राजीव बंसल से किन लोगो ने मुलाकात की है, उसका पता लगाना उन मुलाकात करने वालो लोगो की लिस्ट में से ही कोई एक चेहरा उभर कर आ सकता था, जिसकी मुझे तलाश है।

बहरहाल फिलहाल तो मैं घर पहुंचते ही सोना चाहता था, क्यो कि पिछले दो दिनों से मेरी नींद उड़ी हुई थी।

अगले दिन मैं अभी तैयार हुआ ही था कि थाने से भगवान सिंह का काल आ गया था। उसने मुझे बड़े ही नम्र स्वर में थाने आने के लिए बोला था।

मैं उसके बुलावे पर बीस मिनट में ही उनके सामने हाजिर हो चुका था।

" रोमेश साहब! जिस लड़की की लाश हमे परसो मिली है, क्या आप उसे जानते है" भगवान सिंह ने मेरे बैठते ही अपना सवाल कर दिया था।

"जी नही! मैंने तो उस लड़की को उस दिन जिंदगी में पहली बार ही देखा था, वो भी मुर्दा" मैंने बोला।

"लेकिन उस लड़की के घर के सामान में एक डायरी मिली है, जिसमे आपके बारे में काफी कुछ लिखा गया है, उसमे उसने लिखा है कि तुम और वो लड़की पिछले तीन साल से रिलेशनशिप में थे, उसके बाद तुम अचानक ही उसकी जिंदगी से गायब हो गए, उसके फोन में आपका फोन नंबर भी आपके ही नाम से सेव किया हुआ मिला है" भगवान सिंह एक के बाद एक बम मेरे सिर पर फोड़े जा रहा था।

"मैं एक बार उस लड़की के जीवित अवस्था मे लिये गए कोई फोटोग्राफ देख सकता हूँ" मैं अब कुछ भी बोलने से पहले उस लड़की को सही से देख लेना चाहता था।

"जी बिल्कुल देख सकते है" ये बोलकर भगवान सिंह ने अपनी दराज से एक फ़ाइल निकाली।

उस फ़ाइल में रोजनामचे की कॉपी के साथ ही उस लड़की की विभिन्न कोण से खींची गई उसकी लाश की तस्वीरे लगी हुई थी, उन तस्वीरो के नीचे ही उसकी जीवित अवस्था की दो तस्वीर लगी हुई थी।

मैंने गौर से उन तस्वीरों को देखा, बहुत ध्यान करने के बाद भी मुझें ध्यान नही आ रहा था कि मैंने इस लड़की को कहां देखा है।

मैंने तस्वीर पर नजर डालकर इनकार में अपनी गर्दन को हिलाया और उस फ़ाइल पर एक ओर सरसरी नजर डालकर भगवान सिंह की तरफ बढ़ा दी।

"मैं इस लड़की से अपनी जिंदगी में कभी नही मिला, और जो उस डायरी में आप लिखा हुआ बता रहे है कि मैं अचानक इस लड़की की जिंदगी से गायब हो गया, ये तो सरासर झूठ है, क्यो कि पिछले पांच सालो से तो मैं अपने इसी रोहिणी वाले घर मे रह रहा हूँ" मैने भगवान सिंह की डायरी वाली बात का भी जवाब दिया।

"लेकिन कोई लड़की अपनी डायरी में झूठ क्यो लिखेगी" भगवान सिंह ने मेरी ओर देखते हुए बोलो।

"आपको यकीन है कि ये डायरी इसी लड़की के हाथ की लिखी हुई है, क्या आप इसकी जाँच कर चुके है" मैने भगवान सिंह से ही प्रश्न किया।

"नही! अभी तो हम सिर्फ इस मिली हुई डायरी के आधार पर आपसे पूछताछ कर रहें है" भगवान सिंह ने बोला।

"जिस लडक़ी से मैं अपनी जिंदगी में कभी मिला नही, जिस लड़की ने अपने जिंदा रहते कभी मुझे देखा नही, ऐसी लड़की के केस में हो सकता है कि ये डायरी किसी ने प्लांट कर दी हो" मैने अपनी शंका जताई।

"फिर तो मुझे पक्का यकीन है कि आपकी पिस्टल की फोरेंसिक रिपोर्ट इस लड़की के जिस्म में पाई जाने वाली गोली की फोरेंसिक रिपोर्ट एक ही मिले, आप अपने बचाव की पूरी तैयारी कर लीजिये रोमेश बाबू, क्यो कि शाम को रिपोर्ट आने तक का ही वक़्त है आपके पास" भगवान सिंह ने मुझे चेतावनी नुमा लहजें में बोला।

"अभी मुझे जाने की इजाजत है या नही, शाम की शाम को देखी जाएगी" मैने भगवान सिंह को बोला।

"जी बिल्कुल इजाजत है, लेकिन एक नेक सलाह है आपके लिए, शाम को अपने साथ एक वकील जरूर लेते आइए, आपको जरूरत पड़ सकती है" भगवान सिंह भी अब देवप्रिय वाली जुबान ही बोल रहा था।

"बेफिक्र रहिये जनाब! अपने लायक वकालत तो मैं खुद भी करना जानता हूँ" ये बोलकर मैं कुर्सी से उठा और तेज कदमो से कमरे से बाहर आ गया।

कुमार गौरव की लाश

थाने से निकलते ही मेरे मोबाइल पर एक अनजान नंबर चमकने लगा था। मैंने उस फोन को गाड़ी में बैठने से पहले ही रिसीव किया। उधर से कोई घबराई हुई आवाज में बोल रहा था।

" रोमेश भाई बोल रहे हो" आवाज बहुत ही धीमी थी।

" रोमेश ही बोल रहा हूँ, तुम कौन हो" मैने उस आवाज को पहचानने की कोशिश की।

" रोमेश! मैं गौरव बोल रहा हूँ" उधर से बोलने वाला गौरव था।

"कहाँ गायब हो भाई, यहां तुम्हारी मम्मी तुम्हे ढूंढ ढूंढ कर परेशान है" मैंने उस बोला।

"मेरे पास ज्यादा लंबी बात करने का समय नही है रोमेश, इन लोगो ने मुझे मेरी ही फैक्ट्री के बेसमेंट में कैद कर रखा है, मुझे बचा लो रोमेश" उधर से गौरव बहुत ही धीमी आवाज में बोल रहा था।

"अपनी फैक्ट्री का पता बताओ, मैं वहां अभी पहुँचता हूँ" मैंने उसे दिलासा दिया। उसने मुझें अपना पता बताया।

"किन लोगों ने तुम्हे अपना कैदी बना कर रखा हुआ है, बताओ मुझे, मैं उन्हें भी पकड़वाने का इंतजाम करता हूँ" मैने गौरव से पूछा।

लेकिन तभी उधर से कोई चीज़ मुझें फर्श पर गिरने की आवाज आई और फिर उसके बाद फोन कट गया।

मैंने तुरन्त फोन को फिर से मिलाया, लेकिन इस बार फोन नेटवर्क एरिया से बाहर बता रहा था। मैं एक पल को वही रुका का रुका रह गया।

इस वक़्त मुझें ये समझ नही आ रहा था कि मैं वहां अकेला जाऊं या पुलिस को अपने साथ लेकर जाऊं। मैने किसी नए झेमेले में फंसने से बचने के लिये पुलिस को ही अपने साथ ले जाना उचित समझा।

मैं वही से उल्टे पाँव भगवान सिंह के कमरे की ओर मुड़ गया। मुझें अपने कमरे के दरवाजे पर देखते ही भगवान सिंह के होठो पर मुस्कान आ गई।

"काफी बेचैन लग रहे हों, इतनी जल्दी लौट आये जासूस साहब, रिपोर्ट आने से पहले तो मैं आपको छुउंगा भी नही" भगवान सिंह मेरी बात सुनने की बजाए सिर्फ अपनी अपनी कहे जा रहा था।

"आप पहले मेरी बात सुनेंगे" मैंने थोड़े तीखे स्वर में बोला तो वो बुरा सा मुंह बनाकर मेरी ओर देखने लगा।

"बोलो क्या बोलना चाहते हो" भगवान सिंह मेरी और देखते हुए बोला।

"मेरे फोन पर अभी एक अज्ञात नंबर से फोन आया है, वो खुद को गौरव बता रहा है, वो बोल रहा है कि उसे उसकी ही फैक्ट्री के बेसमेंट में किसी ने बंधक बनाकर रखा हुआ है" मैने ये बोलकर अपने फोन की कॉल लिस्ट में वो नंबर और काल डिटेल दिखाई।

"ये कैसे मान ले की वो गौरव ही था" भगवान सिंह ने एक बेमतलब सा सवाल पूछा।

"ये तो अब उसकी फैक्ट्री में ही जाकर पता चलेगा" मैने सीधी बात बोली।

"कहाँ है उसकी फैक्ट्री" भगवान सिंह ने लगता है अभी तक गौरव सिंह की गुमशुदगी की रिपोर्ट पढ़ी तक नही थी।

"उसकी फैक्ट्री बवाना में है, पता है मेरे पास" मैने भगवान सिंह को बोला।

"वो इलाक़ा दूसरे थाने के अंतर्गत आता है, मुझे वहां के थाने को भी सूचित करना होगा और वही से सिपाही बुलाने होंगे, तुम यही रुको, मैं साहब से इजाजत लेकर आता हूँ" ये बोलकर भगवान सिंह तेज कदमो से कमरे से बाहर निकल गया।

उसके बाहर जाते ही मैने रागिनी को फोन मिलाकर उसे सारी स्थिति के बारे में बताया।

तभी भगवान सिंह मुझे उतनी ही तेजी से वापिस आता हुआ नजर आया। मैने तुरंत फोन काट दिया।

"चलो मैने अपनी रवानगी दर्ज कर दी है" ये बोलकर भगवान सिंह वापिस मुड़ा और मैं भी उतनी ही तेजी के साथ उसके पीछे लपका। तभी उसके साथ एक कांस्टेबल और चलने लगा।

भगवान सिंह अपनी मोटरसाइकिल की तरफ बढ़ने लगा तो मैने उन्हें अपनी ही गाड़ी में चलने के लिये बोला।

जिसे भगवान सिंह ने थोड़ी सी हिचकिचाहट के बाद वे दोनों मेरी गाड़ी में सवार हो गए।


जारी रहेगा_____✍️
Bahut hi badhiya update diya hai Raj_sharma bhai....
Nice and beautiful update....
 
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Luckyloda

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#13

सौम्या बंसल के संपर्क में मैं तब आया था, जब मैं अशोक बंसल हत्या कांड की जांच कर रहा था।

अशोक बंसल दिल्ली शहर की एक नामचीन और अरबपति हस्ती थे। उन्होंने अपने जीवन मे एकमात्र गलती की थी कि अपनी पचपन साल की उम्र में अपनी से आधी उम्र की अपनी सेक्रेटरी के रुपजाल में फंस गए, और उससे शादी कर बैठे, ये उनके जीवन की ऐसी गलती थी, जिसने सिर्फ छह महीने में ही अशोक बंसल के प्राण लील लिए थे।

अशोक बंसल की लाश उन्ही के ड्राइंगरूम में मिली थी, उनकी काफी निर्मम तरीके से हत्या की गई थी। उन्ही अशोक बंसल के एक मात्र सुपुत्र राजीव बंसल उस हत्या कांड में मुख्य अभियुक्त साबित हुए थे, और उसी राजीव बंसल की पत्नी थी सौम्या बंसल।

जब मैं केस की जांच के दौरान सौम्या से मिला तो इस बेपनाह सुंदरी के जीवन मे कितना बड़ा अंधेरा था, वो सौम्या से मिलने के बाद ही पता लग सका।

सौम्या बहुत छोटी उम्र में ही अपने पापा के एक दोस्त और अपने खुद के चाचा की काम वासना का शिकार हो गई थी।

छोटी उम्र में शारीरिक संबंध बन जाने के कारण सौम्या को एक अजीबो गरीब बीमारी हो गई, जिसे हम लोग निम्फोमानियाक नाम की एक सेक्स बीमारी के नाम से जानतें है, ये ऐसी भयावह बीमारी है कि जब इंसान में सेक्स की तलब उठती है तो न वो अपना देखती है और न पराया, उसे बस अपनी कामवासना को शांत करने से मतलब होता है।

मुझे अपनी इस बीमारी के बारे में सौम्या ने खुद नही बताया था, बल्कि इस बारे में मुझें केस की जांच के दौरान ही मेघना से पता चला था। सौम्या की इसी बीमारी के चलते सौम्या का पति राजीव बंसल कई मौकों पर अपमानित हो चुका था, और सौम्या से छुटकारा पाना चाह्ता था।

अपनी सौतेली माँ सोनिया की हत्या के बाद राजीव ने सौम्या को भी मार डालने का षडयंत्र रचा था, लेकिन वो आपके इस सेवक की वजह से अपने इरादो में कामयाब नही हो सका था, और उसे मैंने रंगे हाथो सौम्या की जान लेने की कोशिश करते हुए पकड़ लिया था।

राजीव ने ये साजिश सौम्या को रास्ते से हटाकर मेघना के साथ शादी करने के इरादे से रची थी।

यही वजह थी कि रागिनी ने इस पॉइंट को इंगित किया था कि अरमान सिर्फ राजीव के ही अधूरे नही रहे थे, बल्कि अरमान मेघना के भी पूरे नही हुए थे।

बाद में मेघना ने भी सौम्या को मार डालने की साजिश रची थी, लेकिन इस बार भी मैने ही सौम्या को एक बार फिर से मेघना की साजिश से बचाया और मेघना को जेल भिजवाया था।

लेकिन लगता है कि मेघना ने अभी तक अपनी हार नही मानी थी। वो एक बार फिर से अपने इरादो को अंजाम देने के लिये जेल से बाहर आ गई थी, वो भी देविका के साथ।

मेघना और देविका का एक साथ जमानत पाना ही ये इशारा करता था कि जाल काफी उच्चस्तर पर रचा गया है। लेकिन मेरे मन मे जो ख्याल बार बार कौंध रहा था, वो था कि जेल में बन्द राजीव बंसल की इसमे क्या भूमिका हो सकती थी।

बिना राजीव की मिली भगत के तो अकेली मेघना कुछ भी नही कर सकती थी। वो कौन था जो जेल में बन्द इन दोनों के बीच मे कूरियर का काम कर रहा था। कोई तो था। अब इस कोई को ही सबसे पहले मुझे ढूंढना था।

मुझे कुमार गौरव को भी ढूंढना था, वो यू अचानक से कहाँ गायब हो गया था।

सौम्या रागिनी के साथ ऊपर अपने कमरे में जा चुकी थी और मैं अब अपने घर की ओर रवाना हो चुका था।

मुझें जो सबसे पहला काम करना था, वो था, पिछले दो सालों में जेल में राजीव बंसल से किन लोगो ने मुलाकात की है, उसका पता लगाना उन मुलाकात करने वालो लोगो की लिस्ट में से ही कोई एक चेहरा उभर कर आ सकता था, जिसकी मुझे तलाश है।

बहरहाल फिलहाल तो मैं घर पहुंचते ही सोना चाहता था, क्यो कि पिछले दो दिनों से मेरी नींद उड़ी हुई थी।

अगले दिन मैं अभी तैयार हुआ ही था कि थाने से भगवान सिंह का काल आ गया था। उसने मुझे बड़े ही नम्र स्वर में थाने आने के लिए बोला था।

मैं उसके बुलावे पर बीस मिनट में ही उनके सामने हाजिर हो चुका था।

" रोमेश साहब! जिस लड़की की लाश हमे परसो मिली है, क्या आप उसे जानते है" भगवान सिंह ने मेरे बैठते ही अपना सवाल कर दिया था।

"जी नही! मैंने तो उस लड़की को उस दिन जिंदगी में पहली बार ही देखा था, वो भी मुर्दा" मैंने बोला।

"लेकिन उस लड़की के घर के सामान में एक डायरी मिली है, जिसमे आपके बारे में काफी कुछ लिखा गया है, उसमे उसने लिखा है कि तुम और वो लड़की पिछले तीन साल से रिलेशनशिप में थे, उसके बाद तुम अचानक ही उसकी जिंदगी से गायब हो गए, उसके फोन में आपका फोन नंबर भी आपके ही नाम से सेव किया हुआ मिला है" भगवान सिंह एक के बाद एक बम मेरे सिर पर फोड़े जा रहा था।

"मैं एक बार उस लड़की के जीवित अवस्था मे लिये गए कोई फोटोग्राफ देख सकता हूँ" मैं अब कुछ भी बोलने से पहले उस लड़की को सही से देख लेना चाहता था।

"जी बिल्कुल देख सकते है" ये बोलकर भगवान सिंह ने अपनी दराज से एक फ़ाइल निकाली।

उस फ़ाइल में रोजनामचे की कॉपी के साथ ही उस लड़की की विभिन्न कोण से खींची गई उसकी लाश की तस्वीरे लगी हुई थी, उन तस्वीरो के नीचे ही उसकी जीवित अवस्था की दो तस्वीर लगी हुई थी।

मैंने गौर से उन तस्वीरों को देखा, बहुत ध्यान करने के बाद भी मुझें ध्यान नही आ रहा था कि मैंने इस लड़की को कहां देखा है।

मैंने तस्वीर पर नजर डालकर इनकार में अपनी गर्दन को हिलाया और उस फ़ाइल पर एक ओर सरसरी नजर डालकर भगवान सिंह की तरफ बढ़ा दी।

"मैं इस लड़की से अपनी जिंदगी में कभी नही मिला, और जो उस डायरी में आप लिखा हुआ बता रहे है कि मैं अचानक इस लड़की की जिंदगी से गायब हो गया, ये तो सरासर झूठ है, क्यो कि पिछले पांच सालो से तो मैं अपने इसी रोहिणी वाले घर मे रह रहा हूँ" मैने भगवान सिंह की डायरी वाली बात का भी जवाब दिया।

"लेकिन कोई लड़की अपनी डायरी में झूठ क्यो लिखेगी" भगवान सिंह ने मेरी ओर देखते हुए बोलो।

"आपको यकीन है कि ये डायरी इसी लड़की के हाथ की लिखी हुई है, क्या आप इसकी जाँच कर चुके है" मैने भगवान सिंह से ही प्रश्न किया।

"नही! अभी तो हम सिर्फ इस मिली हुई डायरी के आधार पर आपसे पूछताछ कर रहें है" भगवान सिंह ने बोला।

"जिस लडक़ी से मैं अपनी जिंदगी में कभी मिला नही, जिस लड़की ने अपने जिंदा रहते कभी मुझे देखा नही, ऐसी लड़की के केस में हो सकता है कि ये डायरी किसी ने प्लांट कर दी हो" मैने अपनी शंका जताई।

"फिर तो मुझे पक्का यकीन है कि आपकी पिस्टल की फोरेंसिक रिपोर्ट इस लड़की के जिस्म में पाई जाने वाली गोली की फोरेंसिक रिपोर्ट एक ही मिले, आप अपने बचाव की पूरी तैयारी कर लीजिये रोमेश बाबू, क्यो कि शाम को रिपोर्ट आने तक का ही वक़्त है आपके पास" भगवान सिंह ने मुझे चेतावनी नुमा लहजें में बोला।

"अभी मुझे जाने की इजाजत है या नही, शाम की शाम को देखी जाएगी" मैने भगवान सिंह को बोला।

"जी बिल्कुल इजाजत है, लेकिन एक नेक सलाह है आपके लिए, शाम को अपने साथ एक वकील जरूर लेते आइए, आपको जरूरत पड़ सकती है" भगवान सिंह भी अब देवप्रिय वाली जुबान ही बोल रहा था।

"बेफिक्र रहिये जनाब! अपने लायक वकालत तो मैं खुद भी करना जानता हूँ" ये बोलकर मैं कुर्सी से उठा और तेज कदमो से कमरे से बाहर आ गया।

कुमार गौरव की लाश

थाने से निकलते ही मेरे मोबाइल पर एक अनजान नंबर चमकने लगा था। मैंने उस फोन को गाड़ी में बैठने से पहले ही रिसीव किया। उधर से कोई घबराई हुई आवाज में बोल रहा था।

" रोमेश भाई बोल रहे हो" आवाज बहुत ही धीमी थी।

" रोमेश ही बोल रहा हूँ, तुम कौन हो" मैने उस आवाज को पहचानने की कोशिश की।

" रोमेश! मैं गौरव बोल रहा हूँ" उधर से बोलने वाला गौरव था।

"कहाँ गायब हो भाई, यहां तुम्हारी मम्मी तुम्हे ढूंढ ढूंढ कर परेशान है" मैंने उस बोला।

"मेरे पास ज्यादा लंबी बात करने का समय नही है रोमेश, इन लोगो ने मुझे मेरी ही फैक्ट्री के बेसमेंट में कैद कर रखा है, मुझे बचा लो रोमेश" उधर से गौरव बहुत ही धीमी आवाज में बोल रहा था।

"अपनी फैक्ट्री का पता बताओ, मैं वहां अभी पहुँचता हूँ" मैंने उसे दिलासा दिया। उसने मुझें अपना पता बताया।

"किन लोगों ने तुम्हे अपना कैदी बना कर रखा हुआ है, बताओ मुझे, मैं उन्हें भी पकड़वाने का इंतजाम करता हूँ" मैने गौरव से पूछा।

लेकिन तभी उधर से कोई चीज़ मुझें फर्श पर गिरने की आवाज आई और फिर उसके बाद फोन कट गया।

मैंने तुरन्त फोन को फिर से मिलाया, लेकिन इस बार फोन नेटवर्क एरिया से बाहर बता रहा था। मैं एक पल को वही रुका का रुका रह गया।

इस वक़्त मुझें ये समझ नही आ रहा था कि मैं वहां अकेला जाऊं या पुलिस को अपने साथ लेकर जाऊं। मैने किसी नए झेमेले में फंसने से बचने के लिये पुलिस को ही अपने साथ ले जाना उचित समझा।

मैं वही से उल्टे पाँव भगवान सिंह के कमरे की ओर मुड़ गया। मुझें अपने कमरे के दरवाजे पर देखते ही भगवान सिंह के होठो पर मुस्कान आ गई।

"काफी बेचैन लग रहे हों, इतनी जल्दी लौट आये जासूस साहब, रिपोर्ट आने से पहले तो मैं आपको छुउंगा भी नही" भगवान सिंह मेरी बात सुनने की बजाए सिर्फ अपनी अपनी कहे जा रहा था।

"आप पहले मेरी बात सुनेंगे" मैंने थोड़े तीखे स्वर में बोला तो वो बुरा सा मुंह बनाकर मेरी ओर देखने लगा।

"बोलो क्या बोलना चाहते हो" भगवान सिंह मेरी और देखते हुए बोला।

"मेरे फोन पर अभी एक अज्ञात नंबर से फोन आया है, वो खुद को गौरव बता रहा है, वो बोल रहा है कि उसे उसकी ही फैक्ट्री के बेसमेंट में किसी ने बंधक बनाकर रखा हुआ है" मैने ये बोलकर अपने फोन की कॉल लिस्ट में वो नंबर और काल डिटेल दिखाई।

"ये कैसे मान ले की वो गौरव ही था" भगवान सिंह ने एक बेमतलब सा सवाल पूछा।

"ये तो अब उसकी फैक्ट्री में ही जाकर पता चलेगा" मैने सीधी बात बोली।

"कहाँ है उसकी फैक्ट्री" भगवान सिंह ने लगता है अभी तक गौरव सिंह की गुमशुदगी की रिपोर्ट पढ़ी तक नही थी।

"उसकी फैक्ट्री बवाना में है, पता है मेरे पास" मैने भगवान सिंह को बोला।

"वो इलाक़ा दूसरे थाने के अंतर्गत आता है, मुझे वहां के थाने को भी सूचित करना होगा और वही से सिपाही बुलाने होंगे, तुम यही रुको, मैं साहब से इजाजत लेकर आता हूँ" ये बोलकर भगवान सिंह तेज कदमो से कमरे से बाहर निकल गया।

उसके बाहर जाते ही मैने रागिनी को फोन मिलाकर उसे सारी स्थिति के बारे में बताया।

तभी भगवान सिंह मुझे उतनी ही तेजी से वापिस आता हुआ नजर आया। मैने तुरंत फोन काट दिया।

"चलो मैने अपनी रवानगी दर्ज कर दी है" ये बोलकर भगवान सिंह वापिस मुड़ा और मैं भी उतनी ही तेजी के साथ उसके पीछे लपका। तभी उसके साथ एक कांस्टेबल और चलने लगा।

भगवान सिंह अपनी मोटरसाइकिल की तरफ बढ़ने लगा तो मैने उन्हें अपनी ही गाड़ी में चलने के लिये बोला।

जिसे भगवान सिंह ने थोड़ी सी हिचकिचाहट के बाद वे दोनों मेरी गाड़ी में सवार हो गए।


जारी रहेगा_____✍️
1 और नया पंगा fas गया रोमेश बाबु की जान को....


और 1 शायद gaurav के रूप में फैक्ट्री में इंतजार कर रहा है
 

Iron Man

Try and fail. But never give up trying
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