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Thriller कातिल

RagVi Singh

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Raj_sharma tum idhr bhi
Khair
Meri bhi attendance laga do story pr
Review eksath dungi
ummid hai kuch alag ho
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Raj_sharma tum idhr bhi
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Meri bhi attendance laga do story pr
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ummid hai kuch alag ho
Okay, baaki hum to yatra tatra, sarvatra hi hain. And kuch hatke hi padhna hai to meri story supreme and sard raat padhna, alag hi milega 😎
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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#09

"यही सही रहेगा! हमे पुलिस को वैसे भी इस पिस्टल की बरामदगी के बारे में तो सूचना देनी ही होगी" रागिनी ने मेरी तरफ देखते हुए बोला।

"अब तो पिस्टल मिल गई है तुम्हें! अब पुलिस को बुलाने की क्या जरूरत है" देविका को पुलिस का कुछ ज्यादा ही खौफ था।

सुनने में तो यही आया था कि जेल जाने के बाद लोगों के दिलो से पुलिस का खौफ दूर हो जाता है, लेकिन यहां देविका के मामले में दूसरा ही सीन नजर आ रहा था।

"तुम क्यो इतना घबरा रही हो देविका, जब पुलिस में किसी वस्तु के खोने की सूचना दर्ज करवाई जाती है, तो उसके मिलने पर उसकी सूचना देना भी हर नागरिक का दायित्व होता है" रागिनी ने स्पष्ट शब्दों में देविका को समझाया।

"रागिनी सही कह रही हैं देविका, जब तुमने कुछ नही किया है तो, तुम्हे पुलिस के आने से क्या परेशानी है" इस बार मेघना भी देविका को समझाने वाले स्वर में बोला।

मैं एक बात शुरू से ही नोट कर रहा था। मेघना खुद को शुरू से ही खुद को देविका से अलग दिखाने की चेष्टा कर रही थी, उसे अभी तक एक भी बार देविका का पक्ष लेते हुए मैने नही देखा था।

खैर मैंने अभी अपना ध्यान मेघना के ऊपर से हटाया और देवप्रिय को फोन मिलाने लगा।

मैने उसे पांच मिनट तक सारी बातों को समझाया। उसने तत्काल मेरे घर पहुंचने का आश्वासन दिया।

धीरे धीरे रात अब गहराती जा रही थी। कल की रात भी ये देविका नाम की जालिम लोशन मेरे घर में थी, और आज की रात तो इन मोहतरमा के साथ दो और हसीनाएं मेरे घर को रोशन कर रही थी।

रागिनी की खूबसूरती भी कोई देविका के मुकाबले में कहीं से भी कम नही थी। मेघना भी इन दोनों से कहीं भी उन्नीस नही थी।

मैं भी इस वक़्त पता नही क्यो इन तीनो के हुश्न की तुलना करने बैठ गया था। ऊपरवाले कि बनाई हुई किसी भी कलाकृति का तुलनात्मक अध्धयन करने वाला मैं कौन होता हूँ। 😉

मैं इस वक़्त बेताबी से देवप्रिय के आने का इंतजार कर रहा था। एक बार पिस्टल के फोरेंसिक जांच के
लिए जाने के बाद मैं इन सभी को अपने फ्लैट से रुखसत कर सकता था।

"रोमेश एक बार मेरी मुलाकत सौम्या से करवा दो न, मैं उससे अपने गुनाहों की माफी मांगना चाहती हूँ" तभी मेघना ने मेरी ओर देखकर बोला।

"सौम्या से मिलने के लिए मेरी क्या जरूरत है मेघना! उससे तो तुम खुद भी जाकर मिल सकती हो" मैंने मेघना की ओर देखते हुए बोला।

"मैं कोशिश कर चुकी हूँ रोमेश, लेकिन वो मेरा फोन ही नही उठा रही है" मेघना ने रुआंसे स्वर में कहा।

"उसे मालूम है क्या की तुम जेल से बाहर आ चुकी हो" मैने मेघना से पूछा।

"नही! मै उसे नए नम्बर से मिला रही थी, उसने तब भी फोन नही उठाया, उसके बाद मैंने आफिस के नंबर पर भी फोन मिलाया, लेकिन उसने लाइन पर आने से मना कर दिया" मेघना ने निराशा से बोला।

मैं अभी उसकी बात का जवाब देने ही जा रहा था, की मेरे फ्लैट की बेल बज गई।

आने वाला शख्स एसआई देवप्रिय ही था। उसने एक नज़र मुझ पर डाली और एक नजर मेरे कमरे में लगे हुए हसीनाओं के मेले पर डाली।

मैंने बिना कोई भूमिका बांधे ही देवप्रिय को किचन में ले जाकर पिस्टल दिखाया।

"पिस्टल यही पर रखा है, जब से तुमने देखा" देवप्रिय ने मेरी तरफ देखते हुए बोला।

"मुझ से पहले पिस्टल रागिनी ने और मेघना ने देखा था, उन्हें ये पिस्टल इस गैस चूल्हे के नीचे दिखाई दिया था" मैने रागिनी की ओर देखते हुए बोला।

"मुझ से पहले मेघना ने इस पिस्टल को देखा था, क्यो कि मैं तो एक सरसरी नजर डालकर देख रही थी, लेकिन मेघना हर सामान को हटाकर अच्छे से देख रही थी" रागिनी ने भी तुरन्त बोला।

"ये मोहतरमा वही है क्या, जिन पर कल आपने पिस्टल चोरी करके ले जाने का इल्जाम लगाया था" देवप्रिय ने मेघना पर नजर डालते हुए मुझ से पूछा।

"नही वो मैडम तो ये है, देविका! अभी दो दिन पहले ही जमानत पर बाहर आई है" मैंने देविका की ओर इशारा किया।

"मैने पहले ही कहा था कि जासूस हो तो कोई न कोई झोल तो तुम्हारी कहानी में जरूर मिलेगा, पिस्टल आपके घर मे मौजूद है और कल रात से आपने जीना हमारा हराम किया हुआ है" देवप्रिय ने मेरी तरफ देखते हुए बोला।

"कहानी में झोल तो इन मैडम के आने से हो गया है जनाब!" मैने देविका की ओर इशारा करते हुए बोला।

"लेकिन अगर यही पिस्टल लेकर गई होती तो, अभी इस वक़्त ये पिस्टल आपके घर से ही कैसे मिल गया" देवप्रिय ने अनुराग भरी दृष्टि से देविका की ओर देखा।

खूबसूरती का यही फायदा होता है, सामने वाली बन्दी कितनी भी शातिर दिमाग क्यो न हो, लेकिन दिखने मे लगती मासूम ही है, पता नही किस बेवकूफ ने ये कहावत बनाई है कि खूबसूरत औरत का दिमाग उसके घुटनो में होता है, आपके इस सेवक का तो मानना था कि खूबसूरत औरत को देखकर अच्छे भले इंसान का दिमाग उसके टखनों में चला जाता है। :D

कुछ यही हाल इस वक़्त हमारे जनाब एसआई देवप्रिय का था जो, अभी तक देविका को उसी अनुराग भरी दृष्टि से निहार रहे थे।

"जी मैं अब भी ये समझ नही पा रहा हूँ कि मैने इन मोहतरमा के सामने अपना पिस्टल अपने बेड की दराज में रखा था, फिर आज ये पिस्टल मेरे किचन में कैसे मिला" मैंने असमंजस भरे स्वर में कहा।

"मैं बताता हूँ की ये सब कैसे हुआ! बरसात की रात में जब कोई इन जैसी बला की खूबसूरत लड़की एका एक सामने आकर खड़ी हो जाये और वो भी आपके बैडरूम में तो अच्छे खासे बन्दे के होशो हवास न केवल गुम हो जाते है, बल्कि वो कल्पनाओं के सागर में गोते लगाते हुए किसी हिल स्टेशन पर अपने हनीमून की भी प्लानिंग करनें लगता है, ऐसा ही कुछ आपके साथ हुआ है, उसी कल्पना लोक में विचरते हुए आप उस पिस्टल को हाथ मे लिए हुए ही किचन में पहुंच गए, वहां बकौल आपके आपने इन मोहतरमा की फरमाइश पर कॉफी बनाई, अब कॉफी आपने हाथ मे पिस्टल लेकर तो बनाई नही होगी, आपने उस
पिस्टल को वही किचन में गैस के पास रखा होगा, जो किसी चीज़ के लगने की वजह से सरक कर चूल्हे के नीचे चली गई होगी" देवप्रिय एक मिनट में ही अपनी कल्पना शक्ति का पूरा प्रदर्शन कर चुका था, और अपनी बात खत्म करने के बाद बन्दे ने देविका की ओर एक विजयी मुस्कान के साथ देखा।

देविका ने भी मुरीद नजरो से देवप्रिय की ओर देखा। आखिर देखती भी क्यो नही, जनाब ने सिर्फ दो मिनट में मैडम को हर आरोप से बरी जो कर दिया था।

"लेकिन जनाब मैं इतना भुलक्कड़ नही हूँ कि पिस्टल जैसी चीज को लेकर मैं इतना लापरवाह हो जाऊंगा और उसके गुम हो जाने की रिपोर्ट लिखवाने थाने तक चला जाऊँगा" मैने देवप्रिय की बात का पुरजोर विरोध किया।

"लेकिन मैंने तो सुना है कि आप काफी दिलफेंक किस्म के इंसान है, और लड़कियों के मामले में जहाँ देखी तवा परात, वही गुजारी सारी रात वाली कहावत में यकीन रखते है" देवप्रिय ने बड़ी ही अप्रिय सी लगने वाली बात को मुस्कराते हुए बोल डाला था।

"नही सर! रोमेश के बारे में ये बोलना सही नही है, बल्कि बहुत सी लड़कियां है, जो रोमेश को पसंद करती है,लेकिन रोमेश बाबू थोड़ा फ़्लर्ट जरूर करते है, लेकिन आज तक कभी फिसले नही है" इस बार मेघना ने इस मामले में मेरी पुरजोर वकालत की।

मै ऐसे आड़े वक़्त में मेघना का मेरा बचाव करते हुए देखकर उसकी और मुरीद नजरो से देखने लगा।

"चलिये! मै यहां पर कोई आपका चरित्र प्रमाणपत्र बनाने के लिए नही आया हूँ, अब मुद्दे की बात कर लेते है, सबसे पहले तो मामला आपके ही खिलाफ बनता है कि, आपने चोरी की झूठी रपट लिखवाई, अब इसके पीछे आपका उद्देश्य क्या था, जरा उस पर भी रोशनी डाल दो" देवप्रिय ने मेरी ओर देखते हुए बोला।

"देखिए सर! ये एक बहुत बड़ी साजिस है, जिसमे रोमेश सर को फंसाया जा रहा है" रागिनी ने काफी देर के बाद हमारी बातो में दखल दिया था।

"उस साजिस को साबित करनें के लिए आपको थाने आना पड़ेगा! रागिनी जी, अभी रात बहुत हो चुकी है और मैं पिछले छत्तीस घँटे से लगातार ड्यूटी पर हूँ" देवप्रिय ने रागिनी की तरफ़ देखते हुए बोला।

"मतलब आपने इन मैडम को बिल्कुल क्लीन चिट दे दी, आप इनसे इस बारे में कोई पुछताछ नही करेगें, की ये मैडम कल रात को यहां पर करने क्या आई थी, इसका यहाँ आने का उद्देश्य क्या था" रागिनी ने तल्ख स्वर में देवप्रिय से पूछा।

"देखिए मैडम! आप हर बार मुझे, मेरा काम सिखाने की कोशिश मत कीजिये, रोमेश साहब ने रिपोर्ट लिखवाई की पिस्टल इनके घर से चोरी हुआ है, और पिस्टल मिला भी रोमेश साहब के घर से ही है, तो इसका मतलब तो चोरी की रिपोर्ट ही झूठी ही थी, तो पूछताछ इन मोहतरमा से नही बल्कि रोमेश साहब से करना बनता है, ये तो मेरी शराफत समझिए कि मैं इन्हें अभी अपने साथ थाने लेकर नही जा रहा हूँ, आप लोग सुबह आ जाइए, वहाँ पूछताछ भी हो जायेगी और सारे सवालों के जवाब भी मिल जाएंगे" देवप्रिय ने भी उसी तल्ख़ी के साथ रागिनी की बात का जवाब दिया।

"ठीक है माईबाप, बन्दा कल सुबह आपके दरबार मे हाजिर हो जाएगा, लेकिन जाने से पहले इस गरीब की एक इल्तिजा पर भी गौर फरमा लीजिये' मैने देवप्रिय को प्रिय लगने वाले शब्दो से नवाजा।

"कैसी इल्तिजा" देवप्रिय ने मेरी आँखों मे झाँकते हुए बोला।

"इस पिस्टल को फोरेंसिक जांच के लिए अपने साथ ले जाइए, क्यो कि पूरे चौबीस घँटे ये बेजुबान मेरी आंखों से ओझल रहा हैं, बेचारे के साथ पता नही इस दरम्यान क्या क्या बीती होगी, किन किन हाथो ने इसके कानो को उमेठा होगा, तो मेरे हुजूर! इस पिस्टल की फॉरेन्सिक जांच करवा दीजिये" मैने नाटकीय अंदाज में देवप्रिय को बोला।

"तुमने क्या मुझे इतना अहमक समझा है कि मैं इस पिस्टल को तुम्हारे पास ऐसे ही छोड़ जाऊंगा, फोरेंसिक जाँच से ही तो अगर कोई कारनामा तुमने किया होगा, वो सामने आयेगा" देवप्रिय ने पूरी कमीनगी दिखाते हुए बोला।

"हुजूर एक बात और पूछनी थी, कल थाने में सिर्फ मुझे ही आना है या, इन तीन देवीयो को भी बुलाओगे" मैंने एक कुटिल मुस्कान के साथ देवप्रिय की कमीनगी का जवाब दिया।

"आ जाना आप भी तीनो देवियों, वरना साहब को लगेगा कि मैं किसी को बचाने की कोशिश कर रहा हूँ, और साहब की जानकारी हमारे महकमे के बड़े बड़े हाकिमों से है, तो हमे तो वैसे भी इस बार कदम फूंक फूंक कर उठाना पड़ेगा" ये बोलकर देवप्रिय किचन की तरफ पिस्टल को लेने के लिए बढ़ गया।

थाने मे हाजिरी

अगले दिन मैं थोड़ी देर से सोकर उठा था। पता नही रागिनी को मेरे जागने की शायद कोई महक आ गई थी कि, मेरे आँख खोलते ही उसका नंबर मेरे मोबाइल पर चमकने लगा था। मैंने तुरन्त रागिनी का फोन उठाया।

"तुम्हे एक बात बतानी थी, मेघना मुझ से कोई बीस सेकेण्ड पहले किचन में घुसी थी, मेरे साथ नही! मुझे लगता है मेघना ने ही उस पिस्टल को उस चूल्हे के नीचे प्लांट किया था" रागिनी जो मुझे अब बता रही थी, इसका अंदेशा मुझे रात को ही हो चुका था।

"मुझे भी इसी बात का शक है" मैने रागिनी की बात का समर्थन किया।

"मेघना शायद किसी बड़ी फिराक में है, मत भूलो की ये राजीव बंसल के साथ सौम्या को रास्ते से हटाकर शादी करने की फिराक में भी थी" रागिनी ने मुझें पुरानी बात याद दिलाई।

"तुम सही कह रही हो, इसका मतलब है, ये उस पिस्टल से कोई वारदात कर चुके है, और अब कभी भी उस वारदात को सामने लाकर मुझे फ़साने का इंतजाम कर सकते है" मैने एक और अपनी आशंका जाहिर की।

"बिल्कुल सही सोच रहे हो, लेकिन हमे सबसे पहले इस बात का पता लगाना होगा कि इनके निशाने पर कौन हो सकता है, और अभी उसकी क्या हालत है" रागिनी का दिमाग भी जापान की बुलेट ट्रैन से तेज चल रहा था।

"मुझे ऐसा भी लग रहा है कि ये दोनों पहले ही उस देवप्रिय को भी चुग्गा डाल चुकी है, तभी वो कल रात को देविका की ही भाषा बोल रहा था" मैंने रागिनी को बोला।

"मुझे इस वक़्त सौम्या की सबसे ज्यादा चिंता हो रही हैं, कही ये जेल से उसे ही ठिकाने लगाने के इरादे से तो बाहर नही आई है" मैने एक बार फिर अपना अंदेशा जाहिर किया।

"मुझे सौम्या के साथ साथ कुमार गौरव भी इनके निशाने पर लगता है" रागिनी ने अपना शक जाहिर करके शक के दायरे का और विस्तार कर दिया था।

"मैं एक बार सौम्या की खोज ख़बर ले लेता हूँ, तुम सीधा यही आजाओ, फिर कुमार के घर पर भी चलते है, और उस देवप्रिय की भी तो हाजिरी बजानी है" मैने आज के सारे काम रागिनी को गिनवा दिए।

"ठीक है मै दस बजे तक पहुंचती हूँ, तब तक तुम भी तैयार हो जाओ" ये बोलकर रागिनी ने तेजी से फोन काट दिया।

मैं उसे अपने घर से नाश्ता बनाकर लाने के लिए बोलने वाला था, लेकिन अपनी इच्छा तो दिल की दिल मे ही रह गईं थी।

मैने रागिनी के फोन काटते ही सौम्या को फोन लगा दिया था।

"इतनी सुबह सुबह कैसे याद कर लिया मेरे जेम्सबोंड" सौम्या ने चहकती हुई आवाज में बोला।

"बस तुम्हारी खैरियत जानने के लिए फोन किया था, तुम ठीक हो न" मैंने सौम्या को बोला।

"हाँ मैं ठीक हूँ! क्यो मुझे कुछ होने वाला था क्या, जो तुम इतने चिंता जनक लहजें में पूछ रहे हो" सौम्या ने मेरी आवाज की घबराहट को पहचान लिया था।

"वो तुम्हारी हमप्याली, हमनिवाली वाली मेघना भी जेल से बाहर आई हुई है जमानत पर, और देविका के साथ ही है वो, अभी उनके कुछ कुछ मंसूबे तो पता चल चुके है, लेकिन अभी पूरे मंसूबे नही जान पाया हूँ" मैने सौम्या के साथ पहेलियां बुझाई।

"वो क्या मेरी जान लेने के इरादे से जेल से बाहर आये है क्या" अब सौम्या के स्वर में भी उसकी चिंता झलक रही थी।

"मैने तुम्हे अपनी पिस्टल के गायब होने की बात बताई थी न, वो पिस्टल काफी ड्रामेटिक तरीके से मेरे ही घर से मिल गई है, और वो भी मेघना और देविका की उपस्थिति में" मेरी बात सुनते ही सौम्या की तरफ एक खामोशी पसर गई।


जारी रहेगा_____✍️
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Congratulations bro

Intejar hai 1st update ka bhai agar ho sake to background rural rakhna

Congratulations

Bahut hi shandar shuruwat

1 लाश से शुरूवात हो गयी .... ab देखो कितनी लाशें मिलती है और किन किन हालातों में????

Achcha hai

Ab lagata hai Maidaan me asli khel shuru ho chuka hai
Ab dekhte hai Romesh Babu kaise pata lagate hai apni pistol ka
Or sabse badi bat jis ladki ka katal hua hai kya wo such me Romesh ki pistol se hua hai ya nahi
.
JABARDAST UPDATE HAI BHAI
ESE HE SUSPENSE FULL DETE REHNA BHAI

Congratulations 👏 👏. का तिल :winknudge: ke liye

Ye story bhi aapki baki stories ki bahut achi h suspense and thrill se bhari .
Dete. Romesh wahi h kya jo pichili story mei tha .
dono story aapas mei link h bhi h kya ya us story ka prequel h ye

Ye update kaafi mazedaar aur suspense-filled tha.
Soumya–Ragini–Romesh ki nok-jhok ne mood light rakha,
lekin Devika ka track story ko ekdum dark thriller mode me le gaya.

Devika ka Kumar se blackmail hona,
Kumar ki car chura lena,
Romesh ki pistol lekar bhaag jana,
aur car me khoon milna—
ye saari cheezein dikhati hain ki wo koi bada game khel rahi hai.

Romesh bhi dheere-dheere uske trap me fas raha hai,
shayad kisi purane dushman ki chaal ho.

Overall update grippy, fast-paced aur interesting tha.
Next update me toh blast pakka hai.

Bahut hi shaandar update diya hai Raj_sharma bhai....
Nice and lovely update....

waiting for next ...Bro.........

Nice update

:congrats: start new story

good one ...................... :happy:

update ka SPEED badhao ...............sarkar ........................ :wink:

Awesome update and lovely story

Nice update.....

Update:- 06 and 07 :check:

Ye saumya to sahi laundiya nikli...bole to mard ho ya aurat kisi ke bhi sath :sex: ghapaghap....Bimari ke bahane mast maze karti hai ye hawasi laundiya :D

Dono update read karne ke baad filhal yahi lag raha hai ki parde ke pichhe jo bhi hai wo kaafi tagda khel khelne ki firaak me hai jisme usne romesh ko mukhya roop se target kar rakha hai. Yakeenan wo romesh ka koi aisa ja-nisaar hi hoga jisko romesh ki vajah se kaafi kuch prasad mila hoga. Ab kyoki romesh ek detective hai jiske chalte uske dushmano ki koi ginti nahi hogi....aur is vajah se aise kisi ja-nisaar ko pahchaanna asaan bhi nahi ho sakta. Ye to hui ek baat... :smoking:

Dusri baat ho hairan karne wali dikhi wo ye ki jiski khoj me romesh darbadar bhatak raha tha wo meghna ke dwara badi asaani se mil gayi magar....magar uski baato ne ek alag hi uljhan ko paida kar diya hai. Khud ko innocent dikha kar Kumar Gaurav par ungli utha rahi hai...ye to wahi baat hui ki nau sua choohe kha kar billi haj karne chali....Halaaki kuch bhi ho sakta hai. I mean...mumkin hai ki wo waakai me innocent ho...aur jo kuch usne ab tak kiya tha wo sab Kumar Gaurav ke majboor karne par kiya raha ho...jiske liye use jail tak jana pada. Well ye to hamare kayaas hain....reality to writer hi jaanta hai... :D

Overall...case kaafi ulajh gaya hai ab, ab dekhna ye hoga ki meghna aur devika ke sath Hui is conversation ke baad romesh kis nateeje par pahuchta hai aur wo kaun rukh akhtiyar karta hai??? :approve:

Excellent going bro....keep it up :thumbup:

रिव्यू की स्टार्ट की जाए।
इंट्रेस्टिंग इंट्रेस्टिंग

मेघना और रोमेश दुश्मन तो नहीं लग रहे पक्के वाले, क्योंकि जिस तरह मेघना का अभी रोमेश के साथ बर्ताव है, वो मुझे तो दोस्ताना ही लगा।

जहाँ तक मुझे लगता है कि अनामिका ने रोमेश की गन अभी चुराई नहीं है। अब देखना है कि वो गन रोमेश के घर से मिलती है या नहीं। तो अब सवाल उठता है आख़िर गन को भूत खा गया था क्या?

कुमार गौरव विलेन के रूप में फ्रेम तो हो रहा है। अनामिका के हिसाब से तो कुमार गौरव उसका गुनहगार है।

कुमार गौरव अनामिका के पीछे क्यों पड़ा है? दूसरा क्या कुमार गौरव ही असली क़ातिल है?
मुझे नहीं लगता कि वो इस मर्डर का पूरा क़ातिल होगा। हो सकता है मर्डर में उसका कोई हिस्सा हो, लेकिन असली हत्या किसी और का काम है।

दूसरी बात कुमार गौरव एक तरह से सोनिया का भी दुश्मन है। क्योंकि देविका से काम तो कुमार ने ही करवाया था सोनिया को धोखा दिलवाने का।

एक और चीज सोनिया का जिस तरह का रोल दिखाया गया है, उससे लगता नहीं कि वो कोई छोटा मोटा किरदार है। प्रॉबेबली सोनिया का यहाँ बड़ा और इम्पॉर्टेंट रोल है।
लेकिन एक बात मुझे समझ नहीं आती सोनिया का पति राजीव अपने बाप को क्यों मारेगा? और साथ ही अपनी सौतेली माँ को भी? जबकि असली समस्या तो उसे सोनिया से थी। फिर अपने माँ बाप को क्यों मारा? यहाँ कुछ न कुछ मिसिंग है।

कहीं सोनिया ही तो कोई खेल नहीं खेल रही कुमार के साथ मिलकर?
अपने हज़्बैंड को जेल में डलवाया…
मेघना और देविका को भी जेल में डलवाय
कहीं न कहीं कुछ तो लोचा है।

विलेन वो नहीं है जिसे राज शर्मा हमें हिंट के रूप में दिखा रहा है।
असली विलेन वही निकलेगा जो अनएक्स्पेक्टेड होगा।

रागिनी पर भी मुझे शक है, क्योंकि रोमेश के घर आना जाना उसका भी है। और रिपोर्ट लिखवाने के बाद वो रोमेश के साथ उसके घर तक गई थी।

Raj_sharma

Kamal ka update diya hai Raju, ye Devika to gau banke aa gayi wapas, Romesh isko har jagah dhund raha tha aur madam to khud samne aa gayi....
Ab lagta gun bhi Romesh ko apne ghar me hi mil jaani hai....
Waiting for next update

Pedhu beera, shuru me thodi boring laagi e liye aage n padhi...
Cc me aa, aapno bhaylo aayodo hai

Besabari se intezaar rahega next update ka Raj_sharma bhai....

Pratiksha rahegi Bhai

Eeee sala... पिस्टल मिल गयी....


अब देखना यह है कि पिस्टल मिलने से पहले किस किस से मिल कर आयी हैं.....


देविका ने तो पूरी कहानी ही बदल दी....


Sala कोई तो फिरकी ले रहा हैं रोमेश बाबु की....


Bhut shandaar update...

Gazab ki update he Raj_sharma Bhai

Devika ki har kahani me to mujhe jhol hi nazar aa rahe he...........

Jis yakin se vo bar bar keh rahi he ki pistol ghar hi milegi, iska matlab ye he ki koi aur bhi jo pistol ko wapis ghar par plant kar raha hoga..........

Ragini ne sahi dimag lagaya, pistol ko hath nahi lagane diya kisiko..........

Lekin pistol ko dobara plant karne wala kyun apne fingerprint choodega

Keep rockig Bro

तितली…या … भँवरा … और मधु?

Shaandar update

To Devika ke hisab se Kumar Gaurav hai mastermind jisne Devika ko fasaya hai or ab to Devika kahe ek bat or such ho gye ke Romesh ki Pistol uske ghar ke kitchen me hai lekin kaise
.
Ab lagata hai kahani me aaya hai asli twist

Bhut hi jabardast update bhai
Devika ki dal me jrur kuch kala hai
Jis vishvas se vah kar rahi thi ki pistol romesh ke ghar me hi milegi isse se to yahi lagta hai

Raj_sharma tum idhr bhi
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parkas

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"यही सही रहेगा! हमे पुलिस को वैसे भी इस पिस्टल की बरामदगी के बारे में तो सूचना देनी ही होगी" रागिनी ने मेरी तरफ देखते हुए बोला।

"अब तो पिस्टल मिल गई है तुम्हें! अब पुलिस को बुलाने की क्या जरूरत है" देविका को पुलिस का कुछ ज्यादा ही खौफ था।

सुनने में तो यही आया था कि जेल जाने के बाद लोगों के दिलो से पुलिस का खौफ दूर हो जाता है, लेकिन यहां देविका के मामले में दूसरा ही सीन नजर आ रहा था।

"तुम क्यो इतना घबरा रही हो देविका, जब पुलिस में किसी वस्तु के खोने की सूचना दर्ज करवाई जाती है, तो उसके मिलने पर उसकी सूचना देना भी हर नागरिक का दायित्व होता है" रागिनी ने स्पष्ट शब्दों में देविका को समझाया।

"रागिनी सही कह रही हैं देविका, जब तुमने कुछ नही किया है तो, तुम्हे पुलिस के आने से क्या परेशानी है" इस बार मेघना भी देविका को समझाने वाले स्वर में बोला।

मैं एक बात शुरू से ही नोट कर रहा था। मेघना खुद को शुरू से ही खुद को देविका से अलग दिखाने की चेष्टा कर रही थी, उसे अभी तक एक भी बार देविका का पक्ष लेते हुए मैने नही देखा था।

खैर मैंने अभी अपना ध्यान मेघना के ऊपर से हटाया और देवप्रिय को फोन मिलाने लगा।

मैने उसे पांच मिनट तक सारी बातों को समझाया। उसने तत्काल मेरे घर पहुंचने का आश्वासन दिया।

धीरे धीरे रात अब गहराती जा रही थी। कल की रात भी ये देविका नाम की जालिम लोशन मेरे घर में थी, और आज की रात तो इन मोहतरमा के साथ दो और हसीनाएं मेरे घर को रोशन कर रही थी।

रागिनी की खूबसूरती भी कोई देविका के मुकाबले में कहीं से भी कम नही थी। मेघना भी इन दोनों से कहीं भी उन्नीस नही थी।

मैं भी इस वक़्त पता नही क्यो इन तीनो के हुश्न की तुलना करने बैठ गया था। ऊपरवाले कि बनाई हुई किसी भी कलाकृति का तुलनात्मक अध्धयन करने वाला मैं कौन होता हूँ। 😉

मैं इस वक़्त बेताबी से देवप्रिय के आने का इंतजार कर रहा था। एक बार पिस्टल के फोरेंसिक जांच के
लिए जाने के बाद मैं इन सभी को अपने फ्लैट से रुखसत कर सकता था।

"रोमेश एक बार मेरी मुलाकत सौम्या से करवा दो न, मैं उससे अपने गुनाहों की माफी मांगना चाहती हूँ" तभी मेघना ने मेरी ओर देखकर बोला।

"सौम्या से मिलने के लिए मेरी क्या जरूरत है मेघना! उससे तो तुम खुद भी जाकर मिल सकती हो" मैंने मेघना की ओर देखते हुए बोला।

"मैं कोशिश कर चुकी हूँ रोमेश, लेकिन वो मेरा फोन ही नही उठा रही है" मेघना ने रुआंसे स्वर में कहा।

"उसे मालूम है क्या की तुम जेल से बाहर आ चुकी हो" मैने मेघना से पूछा।

"नही! मै उसे नए नम्बर से मिला रही थी, उसने तब भी फोन नही उठाया, उसके बाद मैंने आफिस के नंबर पर भी फोन मिलाया, लेकिन उसने लाइन पर आने से मना कर दिया" मेघना ने निराशा से बोला।

मैं अभी उसकी बात का जवाब देने ही जा रहा था, की मेरे फ्लैट की बेल बज गई।

आने वाला शख्स एसआई देवप्रिय ही था। उसने एक नज़र मुझ पर डाली और एक नजर मेरे कमरे में लगे हुए हसीनाओं के मेले पर डाली।

मैंने बिना कोई भूमिका बांधे ही देवप्रिय को किचन में ले जाकर पिस्टल दिखाया।

"पिस्टल यही पर रखा है, जब से तुमने देखा" देवप्रिय ने मेरी तरफ देखते हुए बोला।

"मुझ से पहले पिस्टल रागिनी ने और मेघना ने देखा था, उन्हें ये पिस्टल इस गैस चूल्हे के नीचे दिखाई दिया था" मैने रागिनी की ओर देखते हुए बोला।

"मुझ से पहले मेघना ने इस पिस्टल को देखा था, क्यो कि मैं तो एक सरसरी नजर डालकर देख रही थी, लेकिन मेघना हर सामान को हटाकर अच्छे से देख रही थी" रागिनी ने भी तुरन्त बोला।

"ये मोहतरमा वही है क्या, जिन पर कल आपने पिस्टल चोरी करके ले जाने का इल्जाम लगाया था" देवप्रिय ने मेघना पर नजर डालते हुए मुझ से पूछा।

"नही वो मैडम तो ये है, देविका! अभी दो दिन पहले ही जमानत पर बाहर आई है" मैंने देविका की ओर इशारा किया।

"मैने पहले ही कहा था कि जासूस हो तो कोई न कोई झोल तो तुम्हारी कहानी में जरूर मिलेगा, पिस्टल आपके घर मे मौजूद है और कल रात से आपने जीना हमारा हराम किया हुआ है" देवप्रिय ने मेरी तरफ देखते हुए बोला।

"कहानी में झोल तो इन मैडम के आने से हो गया है जनाब!" मैने देविका की ओर इशारा करते हुए बोला।

"लेकिन अगर यही पिस्टल लेकर गई होती तो, अभी इस वक़्त ये पिस्टल आपके घर से ही कैसे मिल गया" देवप्रिय ने अनुराग भरी दृष्टि से देविका की ओर देखा।

खूबसूरती का यही फायदा होता है, सामने वाली बन्दी कितनी भी शातिर दिमाग क्यो न हो, लेकिन दिखने मे लगती मासूम ही है, पता नही किस बेवकूफ ने ये कहावत बनाई है कि खूबसूरत औरत का दिमाग उसके घुटनो में होता है, आपके इस सेवक का तो मानना था कि खूबसूरत औरत को देखकर अच्छे भले इंसान का दिमाग उसके टखनों में चला जाता है। :D

कुछ यही हाल इस वक़्त हमारे जनाब एसआई देवप्रिय का था जो, अभी तक देविका को उसी अनुराग भरी दृष्टि से निहार रहे थे।

"जी मैं अब भी ये समझ नही पा रहा हूँ कि मैने इन मोहतरमा के सामने अपना पिस्टल अपने बेड की दराज में रखा था, फिर आज ये पिस्टल मेरे किचन में कैसे मिला" मैंने असमंजस भरे स्वर में कहा।

"मैं बताता हूँ की ये सब कैसे हुआ! बरसात की रात में जब कोई इन जैसी बला की खूबसूरत लड़की एका एक सामने आकर खड़ी हो जाये और वो भी आपके बैडरूम में तो अच्छे खासे बन्दे के होशो हवास न केवल गुम हो जाते है, बल्कि वो कल्पनाओं के सागर में गोते लगाते हुए किसी हिल स्टेशन पर अपने हनीमून की भी प्लानिंग करनें लगता है, ऐसा ही कुछ आपके साथ हुआ है, उसी कल्पना लोक में विचरते हुए आप उस पिस्टल को हाथ मे लिए हुए ही किचन में पहुंच गए, वहां बकौल आपके आपने इन मोहतरमा की फरमाइश पर कॉफी बनाई, अब कॉफी आपने हाथ मे पिस्टल लेकर तो बनाई नही होगी, आपने उस
पिस्टल को वही किचन में गैस के पास रखा होगा, जो किसी चीज़ के लगने की वजह से सरक कर चूल्हे के नीचे चली गई होगी" देवप्रिय एक मिनट में ही अपनी कल्पना शक्ति का पूरा प्रदर्शन कर चुका था, और अपनी बात खत्म करने के बाद बन्दे ने देविका की ओर एक विजयी मुस्कान के साथ देखा।

देविका ने भी मुरीद नजरो से देवप्रिय की ओर देखा। आखिर देखती भी क्यो नही, जनाब ने सिर्फ दो मिनट में मैडम को हर आरोप से बरी जो कर दिया था।

"लेकिन जनाब मैं इतना भुलक्कड़ नही हूँ कि पिस्टल जैसी चीज को लेकर मैं इतना लापरवाह हो जाऊंगा और उसके गुम हो जाने की रिपोर्ट लिखवाने थाने तक चला जाऊँगा" मैने देवप्रिय की बात का पुरजोर विरोध किया।

"लेकिन मैंने तो सुना है कि आप काफी दिलफेंक किस्म के इंसान है, और लड़कियों के मामले में जहाँ देखी तवा परात, वही गुजारी सारी रात वाली कहावत में यकीन रखते है" देवप्रिय ने बड़ी ही अप्रिय सी लगने वाली बात को मुस्कराते हुए बोल डाला था।

"नही सर! रोमेश के बारे में ये बोलना सही नही है, बल्कि बहुत सी लड़कियां है, जो रोमेश को पसंद करती है,लेकिन रोमेश बाबू थोड़ा फ़्लर्ट जरूर करते है, लेकिन आज तक कभी फिसले नही है" इस बार मेघना ने इस मामले में मेरी पुरजोर वकालत की।

मै ऐसे आड़े वक़्त में मेघना का मेरा बचाव करते हुए देखकर उसकी और मुरीद नजरो से देखने लगा।

"चलिये! मै यहां पर कोई आपका चरित्र प्रमाणपत्र बनाने के लिए नही आया हूँ, अब मुद्दे की बात कर लेते है, सबसे पहले तो मामला आपके ही खिलाफ बनता है कि, आपने चोरी की झूठी रपट लिखवाई, अब इसके पीछे आपका उद्देश्य क्या था, जरा उस पर भी रोशनी डाल दो" देवप्रिय ने मेरी ओर देखते हुए बोला।

"देखिए सर! ये एक बहुत बड़ी साजिस है, जिसमे रोमेश सर को फंसाया जा रहा है" रागिनी ने काफी देर के बाद हमारी बातो में दखल दिया था।

"उस साजिस को साबित करनें के लिए आपको थाने आना पड़ेगा! रागिनी जी, अभी रात बहुत हो चुकी है और मैं पिछले छत्तीस घँटे से लगातार ड्यूटी पर हूँ" देवप्रिय ने रागिनी की तरफ़ देखते हुए बोला।

"मतलब आपने इन मैडम को बिल्कुल क्लीन चिट दे दी, आप इनसे इस बारे में कोई पुछताछ नही करेगें, की ये मैडम कल रात को यहां पर करने क्या आई थी, इसका यहाँ आने का उद्देश्य क्या था" रागिनी ने तल्ख स्वर में देवप्रिय से पूछा।

"देखिए मैडम! आप हर बार मुझे, मेरा काम सिखाने की कोशिश मत कीजिये, रोमेश साहब ने रिपोर्ट लिखवाई की पिस्टल इनके घर से चोरी हुआ है, और पिस्टल मिला भी रोमेश साहब के घर से ही है, तो इसका मतलब तो चोरी की रिपोर्ट ही झूठी ही थी, तो पूछताछ इन मोहतरमा से नही बल्कि रोमेश साहब से करना बनता है, ये तो मेरी शराफत समझिए कि मैं इन्हें अभी अपने साथ थाने लेकर नही जा रहा हूँ, आप लोग सुबह आ जाइए, वहाँ पूछताछ भी हो जायेगी और सारे सवालों के जवाब भी मिल जाएंगे" देवप्रिय ने भी उसी तल्ख़ी के साथ रागिनी की बात का जवाब दिया।

"ठीक है माईबाप, बन्दा कल सुबह आपके दरबार मे हाजिर हो जाएगा, लेकिन जाने से पहले इस गरीब की एक इल्तिजा पर भी गौर फरमा लीजिये' मैने देवप्रिय को प्रिय लगने वाले शब्दो से नवाजा।

"कैसी इल्तिजा" देवप्रिय ने मेरी आँखों मे झाँकते हुए बोला।

"इस पिस्टल को फोरेंसिक जांच के लिए अपने साथ ले जाइए, क्यो कि पूरे चौबीस घँटे ये बेजुबान मेरी आंखों से ओझल रहा हैं, बेचारे के साथ पता नही इस दरम्यान क्या क्या बीती होगी, किन किन हाथो ने इसके कानो को उमेठा होगा, तो मेरे हुजूर! इस पिस्टल की फॉरेन्सिक जांच करवा दीजिये" मैने नाटकीय अंदाज में देवप्रिय को बोला।

"तुमने क्या मुझे इतना अहमक समझा है कि मैं इस पिस्टल को तुम्हारे पास ऐसे ही छोड़ जाऊंगा, फोरेंसिक जाँच से ही तो अगर कोई कारनामा तुमने किया होगा, वो सामने आयेगा" देवप्रिय ने पूरी कमीनगी दिखाते हुए बोला।

"हुजूर एक बात और पूछनी थी, कल थाने में सिर्फ मुझे ही आना है या, इन तीन देवीयो को भी बुलाओगे" मैंने एक कुटिल मुस्कान के साथ देवप्रिय की कमीनगी का जवाब दिया।

"आ जाना आप भी तीनो देवियों, वरना साहब को लगेगा कि मैं किसी को बचाने की कोशिश कर रहा हूँ, और साहब की जानकारी हमारे महकमे के बड़े बड़े हाकिमों से है, तो हमे तो वैसे भी इस बार कदम फूंक फूंक कर उठाना पड़ेगा" ये बोलकर देवप्रिय किचन की तरफ पिस्टल को लेने के लिए बढ़ गया।

थाने मे हाजिरी

अगले दिन मैं थोड़ी देर से सोकर उठा था। पता नही रागिनी को मेरे जागने की शायद कोई महक आ गई थी कि, मेरे आँख खोलते ही उसका नंबर मेरे मोबाइल पर चमकने लगा था। मैंने तुरन्त रागिनी का फोन उठाया।

"तुम्हे एक बात बतानी थी, मेघना मुझ से कोई बीस सेकेण्ड पहले किचन में घुसी थी, मेरे साथ नही! मुझे लगता है मेघना ने ही उस पिस्टल को उस चूल्हे के नीचे प्लांट किया था" रागिनी जो मुझे अब बता रही थी, इसका अंदेशा मुझे रात को ही हो चुका था।

"मुझे भी इसी बात का शक है" मैने रागिनी की बात का समर्थन किया।

"मेघना शायद किसी बड़ी फिराक में है, मत भूलो की ये राजीव बंसल के साथ सौम्या को रास्ते से हटाकर शादी करने की फिराक में भी थी" रागिनी ने मुझें पुरानी बात याद दिलाई।

"तुम सही कह रही हो, इसका मतलब है, ये उस पिस्टल से कोई वारदात कर चुके है, और अब कभी भी उस वारदात को सामने लाकर मुझे फ़साने का इंतजाम कर सकते है" मैने एक और अपनी आशंका जाहिर की।

"बिल्कुल सही सोच रहे हो, लेकिन हमे सबसे पहले इस बात का पता लगाना होगा कि इनके निशाने पर कौन हो सकता है, और अभी उसकी क्या हालत है" रागिनी का दिमाग भी जापान की बुलेट ट्रैन से तेज चल रहा था।

"मुझे ऐसा भी लग रहा है कि ये दोनों पहले ही उस देवप्रिय को भी चुग्गा डाल चुकी है, तभी वो कल रात को देविका की ही भाषा बोल रहा था" मैंने रागिनी को बोला।

"मुझे इस वक़्त सौम्या की सबसे ज्यादा चिंता हो रही हैं, कही ये जेल से उसे ही ठिकाने लगाने के इरादे से तो बाहर नही आई है" मैने एक बार फिर अपना अंदेशा जाहिर किया।

"मुझे सौम्या के साथ साथ कुमार गौरव भी इनके निशाने पर लगता है" रागिनी ने अपना शक जाहिर करके शक के दायरे का और विस्तार कर दिया था।

"मैं एक बार सौम्या की खोज ख़बर ले लेता हूँ, तुम सीधा यही आजाओ, फिर कुमार के घर पर भी चलते है, और उस देवप्रिय की भी तो हाजिरी बजानी है" मैने आज के सारे काम रागिनी को गिनवा दिए।

"ठीक है मै दस बजे तक पहुंचती हूँ, तब तक तुम भी तैयार हो जाओ" ये बोलकर रागिनी ने तेजी से फोन काट दिया।

मैं उसे अपने घर से नाश्ता बनाकर लाने के लिए बोलने वाला था, लेकिन अपनी इच्छा तो दिल की दिल मे ही रह गईं थी।

मैने रागिनी के फोन काटते ही सौम्या को फोन लगा दिया था।

"इतनी सुबह सुबह कैसे याद कर लिया मेरे जेम्सबोंड" सौम्या ने चहकती हुई आवाज में बोला।

"बस तुम्हारी खैरियत जानने के लिए फोन किया था, तुम ठीक हो न" मैंने सौम्या को बोला।

"हाँ मैं ठीक हूँ! क्यो मुझे कुछ होने वाला था क्या, जो तुम इतने चिंता जनक लहजें में पूछ रहे हो" सौम्या ने मेरी आवाज की घबराहट को पहचान लिया था।

"वो तुम्हारी हमप्याली, हमनिवाली वाली मेघना भी जेल से बाहर आई हुई है जमानत पर, और देविका के साथ ही है वो, अभी उनके कुछ कुछ मंसूबे तो पता चल चुके है, लेकिन अभी पूरे मंसूबे नही जान पाया हूँ" मैने सौम्या के साथ पहेलियां बुझाई।

"वो क्या मेरी जान लेने के इरादे से जेल से बाहर आये है क्या" अब सौम्या के स्वर में भी उसकी चिंता झलक रही थी।

"मैने तुम्हे अपनी पिस्टल के गायब होने की बात बताई थी न, वो पिस्टल काफी ड्रामेटिक तरीके से मेरे ही घर से मिल गई है, और वो भी मेघना और देविका की उपस्थिति में" मेरी बात सुनते ही सौम्या की तरफ एक खामोशी पसर गई।


जारी रहेगा_____✍️
Bahut hi badhiya update diya hai Raj_sharm bhai....
Nice and beautiful update....
 

dhparikh

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#09

"यही सही रहेगा! हमे पुलिस को वैसे भी इस पिस्टल की बरामदगी के बारे में तो सूचना देनी ही होगी" रागिनी ने मेरी तरफ देखते हुए बोला।

"अब तो पिस्टल मिल गई है तुम्हें! अब पुलिस को बुलाने की क्या जरूरत है" देविका को पुलिस का कुछ ज्यादा ही खौफ था।

सुनने में तो यही आया था कि जेल जाने के बाद लोगों के दिलो से पुलिस का खौफ दूर हो जाता है, लेकिन यहां देविका के मामले में दूसरा ही सीन नजर आ रहा था।

"तुम क्यो इतना घबरा रही हो देविका, जब पुलिस में किसी वस्तु के खोने की सूचना दर्ज करवाई जाती है, तो उसके मिलने पर उसकी सूचना देना भी हर नागरिक का दायित्व होता है" रागिनी ने स्पष्ट शब्दों में देविका को समझाया।

"रागिनी सही कह रही हैं देविका, जब तुमने कुछ नही किया है तो, तुम्हे पुलिस के आने से क्या परेशानी है" इस बार मेघना भी देविका को समझाने वाले स्वर में बोला।

मैं एक बात शुरू से ही नोट कर रहा था। मेघना खुद को शुरू से ही खुद को देविका से अलग दिखाने की चेष्टा कर रही थी, उसे अभी तक एक भी बार देविका का पक्ष लेते हुए मैने नही देखा था।

खैर मैंने अभी अपना ध्यान मेघना के ऊपर से हटाया और देवप्रिय को फोन मिलाने लगा।

मैने उसे पांच मिनट तक सारी बातों को समझाया। उसने तत्काल मेरे घर पहुंचने का आश्वासन दिया।

धीरे धीरे रात अब गहराती जा रही थी। कल की रात भी ये देविका नाम की जालिम लोशन मेरे घर में थी, और आज की रात तो इन मोहतरमा के साथ दो और हसीनाएं मेरे घर को रोशन कर रही थी।

रागिनी की खूबसूरती भी कोई देविका के मुकाबले में कहीं से भी कम नही थी। मेघना भी इन दोनों से कहीं भी उन्नीस नही थी।

मैं भी इस वक़्त पता नही क्यो इन तीनो के हुश्न की तुलना करने बैठ गया था। ऊपरवाले कि बनाई हुई किसी भी कलाकृति का तुलनात्मक अध्धयन करने वाला मैं कौन होता हूँ। 😉

मैं इस वक़्त बेताबी से देवप्रिय के आने का इंतजार कर रहा था। एक बार पिस्टल के फोरेंसिक जांच के
लिए जाने के बाद मैं इन सभी को अपने फ्लैट से रुखसत कर सकता था।

"रोमेश एक बार मेरी मुलाकत सौम्या से करवा दो न, मैं उससे अपने गुनाहों की माफी मांगना चाहती हूँ" तभी मेघना ने मेरी ओर देखकर बोला।

"सौम्या से मिलने के लिए मेरी क्या जरूरत है मेघना! उससे तो तुम खुद भी जाकर मिल सकती हो" मैंने मेघना की ओर देखते हुए बोला।

"मैं कोशिश कर चुकी हूँ रोमेश, लेकिन वो मेरा फोन ही नही उठा रही है" मेघना ने रुआंसे स्वर में कहा।

"उसे मालूम है क्या की तुम जेल से बाहर आ चुकी हो" मैने मेघना से पूछा।

"नही! मै उसे नए नम्बर से मिला रही थी, उसने तब भी फोन नही उठाया, उसके बाद मैंने आफिस के नंबर पर भी फोन मिलाया, लेकिन उसने लाइन पर आने से मना कर दिया" मेघना ने निराशा से बोला।

मैं अभी उसकी बात का जवाब देने ही जा रहा था, की मेरे फ्लैट की बेल बज गई।

आने वाला शख्स एसआई देवप्रिय ही था। उसने एक नज़र मुझ पर डाली और एक नजर मेरे कमरे में लगे हुए हसीनाओं के मेले पर डाली।

मैंने बिना कोई भूमिका बांधे ही देवप्रिय को किचन में ले जाकर पिस्टल दिखाया।

"पिस्टल यही पर रखा है, जब से तुमने देखा" देवप्रिय ने मेरी तरफ देखते हुए बोला।

"मुझ से पहले पिस्टल रागिनी ने और मेघना ने देखा था, उन्हें ये पिस्टल इस गैस चूल्हे के नीचे दिखाई दिया था" मैने रागिनी की ओर देखते हुए बोला।

"मुझ से पहले मेघना ने इस पिस्टल को देखा था, क्यो कि मैं तो एक सरसरी नजर डालकर देख रही थी, लेकिन मेघना हर सामान को हटाकर अच्छे से देख रही थी" रागिनी ने भी तुरन्त बोला।

"ये मोहतरमा वही है क्या, जिन पर कल आपने पिस्टल चोरी करके ले जाने का इल्जाम लगाया था" देवप्रिय ने मेघना पर नजर डालते हुए मुझ से पूछा।

"नही वो मैडम तो ये है, देविका! अभी दो दिन पहले ही जमानत पर बाहर आई है" मैंने देविका की ओर इशारा किया।

"मैने पहले ही कहा था कि जासूस हो तो कोई न कोई झोल तो तुम्हारी कहानी में जरूर मिलेगा, पिस्टल आपके घर मे मौजूद है और कल रात से आपने जीना हमारा हराम किया हुआ है" देवप्रिय ने मेरी तरफ देखते हुए बोला।

"कहानी में झोल तो इन मैडम के आने से हो गया है जनाब!" मैने देविका की ओर इशारा करते हुए बोला।

"लेकिन अगर यही पिस्टल लेकर गई होती तो, अभी इस वक़्त ये पिस्टल आपके घर से ही कैसे मिल गया" देवप्रिय ने अनुराग भरी दृष्टि से देविका की ओर देखा।

खूबसूरती का यही फायदा होता है, सामने वाली बन्दी कितनी भी शातिर दिमाग क्यो न हो, लेकिन दिखने मे लगती मासूम ही है, पता नही किस बेवकूफ ने ये कहावत बनाई है कि खूबसूरत औरत का दिमाग उसके घुटनो में होता है, आपके इस सेवक का तो मानना था कि खूबसूरत औरत को देखकर अच्छे भले इंसान का दिमाग उसके टखनों में चला जाता है। :D

कुछ यही हाल इस वक़्त हमारे जनाब एसआई देवप्रिय का था जो, अभी तक देविका को उसी अनुराग भरी दृष्टि से निहार रहे थे।

"जी मैं अब भी ये समझ नही पा रहा हूँ कि मैने इन मोहतरमा के सामने अपना पिस्टल अपने बेड की दराज में रखा था, फिर आज ये पिस्टल मेरे किचन में कैसे मिला" मैंने असमंजस भरे स्वर में कहा।

"मैं बताता हूँ की ये सब कैसे हुआ! बरसात की रात में जब कोई इन जैसी बला की खूबसूरत लड़की एका एक सामने आकर खड़ी हो जाये और वो भी आपके बैडरूम में तो अच्छे खासे बन्दे के होशो हवास न केवल गुम हो जाते है, बल्कि वो कल्पनाओं के सागर में गोते लगाते हुए किसी हिल स्टेशन पर अपने हनीमून की भी प्लानिंग करनें लगता है, ऐसा ही कुछ आपके साथ हुआ है, उसी कल्पना लोक में विचरते हुए आप उस पिस्टल को हाथ मे लिए हुए ही किचन में पहुंच गए, वहां बकौल आपके आपने इन मोहतरमा की फरमाइश पर कॉफी बनाई, अब कॉफी आपने हाथ मे पिस्टल लेकर तो बनाई नही होगी, आपने उस
पिस्टल को वही किचन में गैस के पास रखा होगा, जो किसी चीज़ के लगने की वजह से सरक कर चूल्हे के नीचे चली गई होगी" देवप्रिय एक मिनट में ही अपनी कल्पना शक्ति का पूरा प्रदर्शन कर चुका था, और अपनी बात खत्म करने के बाद बन्दे ने देविका की ओर एक विजयी मुस्कान के साथ देखा।

देविका ने भी मुरीद नजरो से देवप्रिय की ओर देखा। आखिर देखती भी क्यो नही, जनाब ने सिर्फ दो मिनट में मैडम को हर आरोप से बरी जो कर दिया था।

"लेकिन जनाब मैं इतना भुलक्कड़ नही हूँ कि पिस्टल जैसी चीज को लेकर मैं इतना लापरवाह हो जाऊंगा और उसके गुम हो जाने की रिपोर्ट लिखवाने थाने तक चला जाऊँगा" मैने देवप्रिय की बात का पुरजोर विरोध किया।

"लेकिन मैंने तो सुना है कि आप काफी दिलफेंक किस्म के इंसान है, और लड़कियों के मामले में जहाँ देखी तवा परात, वही गुजारी सारी रात वाली कहावत में यकीन रखते है" देवप्रिय ने बड़ी ही अप्रिय सी लगने वाली बात को मुस्कराते हुए बोल डाला था।

"नही सर! रोमेश के बारे में ये बोलना सही नही है, बल्कि बहुत सी लड़कियां है, जो रोमेश को पसंद करती है,लेकिन रोमेश बाबू थोड़ा फ़्लर्ट जरूर करते है, लेकिन आज तक कभी फिसले नही है" इस बार मेघना ने इस मामले में मेरी पुरजोर वकालत की।

मै ऐसे आड़े वक़्त में मेघना का मेरा बचाव करते हुए देखकर उसकी और मुरीद नजरो से देखने लगा।

"चलिये! मै यहां पर कोई आपका चरित्र प्रमाणपत्र बनाने के लिए नही आया हूँ, अब मुद्दे की बात कर लेते है, सबसे पहले तो मामला आपके ही खिलाफ बनता है कि, आपने चोरी की झूठी रपट लिखवाई, अब इसके पीछे आपका उद्देश्य क्या था, जरा उस पर भी रोशनी डाल दो" देवप्रिय ने मेरी ओर देखते हुए बोला।

"देखिए सर! ये एक बहुत बड़ी साजिस है, जिसमे रोमेश सर को फंसाया जा रहा है" रागिनी ने काफी देर के बाद हमारी बातो में दखल दिया था।

"उस साजिस को साबित करनें के लिए आपको थाने आना पड़ेगा! रागिनी जी, अभी रात बहुत हो चुकी है और मैं पिछले छत्तीस घँटे से लगातार ड्यूटी पर हूँ" देवप्रिय ने रागिनी की तरफ़ देखते हुए बोला।

"मतलब आपने इन मैडम को बिल्कुल क्लीन चिट दे दी, आप इनसे इस बारे में कोई पुछताछ नही करेगें, की ये मैडम कल रात को यहां पर करने क्या आई थी, इसका यहाँ आने का उद्देश्य क्या था" रागिनी ने तल्ख स्वर में देवप्रिय से पूछा।

"देखिए मैडम! आप हर बार मुझे, मेरा काम सिखाने की कोशिश मत कीजिये, रोमेश साहब ने रिपोर्ट लिखवाई की पिस्टल इनके घर से चोरी हुआ है, और पिस्टल मिला भी रोमेश साहब के घर से ही है, तो इसका मतलब तो चोरी की रिपोर्ट ही झूठी ही थी, तो पूछताछ इन मोहतरमा से नही बल्कि रोमेश साहब से करना बनता है, ये तो मेरी शराफत समझिए कि मैं इन्हें अभी अपने साथ थाने लेकर नही जा रहा हूँ, आप लोग सुबह आ जाइए, वहाँ पूछताछ भी हो जायेगी और सारे सवालों के जवाब भी मिल जाएंगे" देवप्रिय ने भी उसी तल्ख़ी के साथ रागिनी की बात का जवाब दिया।

"ठीक है माईबाप, बन्दा कल सुबह आपके दरबार मे हाजिर हो जाएगा, लेकिन जाने से पहले इस गरीब की एक इल्तिजा पर भी गौर फरमा लीजिये' मैने देवप्रिय को प्रिय लगने वाले शब्दो से नवाजा।

"कैसी इल्तिजा" देवप्रिय ने मेरी आँखों मे झाँकते हुए बोला।

"इस पिस्टल को फोरेंसिक जांच के लिए अपने साथ ले जाइए, क्यो कि पूरे चौबीस घँटे ये बेजुबान मेरी आंखों से ओझल रहा हैं, बेचारे के साथ पता नही इस दरम्यान क्या क्या बीती होगी, किन किन हाथो ने इसके कानो को उमेठा होगा, तो मेरे हुजूर! इस पिस्टल की फॉरेन्सिक जांच करवा दीजिये" मैने नाटकीय अंदाज में देवप्रिय को बोला।

"तुमने क्या मुझे इतना अहमक समझा है कि मैं इस पिस्टल को तुम्हारे पास ऐसे ही छोड़ जाऊंगा, फोरेंसिक जाँच से ही तो अगर कोई कारनामा तुमने किया होगा, वो सामने आयेगा" देवप्रिय ने पूरी कमीनगी दिखाते हुए बोला।

"हुजूर एक बात और पूछनी थी, कल थाने में सिर्फ मुझे ही आना है या, इन तीन देवीयो को भी बुलाओगे" मैंने एक कुटिल मुस्कान के साथ देवप्रिय की कमीनगी का जवाब दिया।

"आ जाना आप भी तीनो देवियों, वरना साहब को लगेगा कि मैं किसी को बचाने की कोशिश कर रहा हूँ, और साहब की जानकारी हमारे महकमे के बड़े बड़े हाकिमों से है, तो हमे तो वैसे भी इस बार कदम फूंक फूंक कर उठाना पड़ेगा" ये बोलकर देवप्रिय किचन की तरफ पिस्टल को लेने के लिए बढ़ गया।

थाने मे हाजिरी

अगले दिन मैं थोड़ी देर से सोकर उठा था। पता नही रागिनी को मेरे जागने की शायद कोई महक आ गई थी कि, मेरे आँख खोलते ही उसका नंबर मेरे मोबाइल पर चमकने लगा था। मैंने तुरन्त रागिनी का फोन उठाया।

"तुम्हे एक बात बतानी थी, मेघना मुझ से कोई बीस सेकेण्ड पहले किचन में घुसी थी, मेरे साथ नही! मुझे लगता है मेघना ने ही उस पिस्टल को उस चूल्हे के नीचे प्लांट किया था" रागिनी जो मुझे अब बता रही थी, इसका अंदेशा मुझे रात को ही हो चुका था।

"मुझे भी इसी बात का शक है" मैने रागिनी की बात का समर्थन किया।

"मेघना शायद किसी बड़ी फिराक में है, मत भूलो की ये राजीव बंसल के साथ सौम्या को रास्ते से हटाकर शादी करने की फिराक में भी थी" रागिनी ने मुझें पुरानी बात याद दिलाई।

"तुम सही कह रही हो, इसका मतलब है, ये उस पिस्टल से कोई वारदात कर चुके है, और अब कभी भी उस वारदात को सामने लाकर मुझे फ़साने का इंतजाम कर सकते है" मैने एक और अपनी आशंका जाहिर की।

"बिल्कुल सही सोच रहे हो, लेकिन हमे सबसे पहले इस बात का पता लगाना होगा कि इनके निशाने पर कौन हो सकता है, और अभी उसकी क्या हालत है" रागिनी का दिमाग भी जापान की बुलेट ट्रैन से तेज चल रहा था।

"मुझे ऐसा भी लग रहा है कि ये दोनों पहले ही उस देवप्रिय को भी चुग्गा डाल चुकी है, तभी वो कल रात को देविका की ही भाषा बोल रहा था" मैंने रागिनी को बोला।

"मुझे इस वक़्त सौम्या की सबसे ज्यादा चिंता हो रही हैं, कही ये जेल से उसे ही ठिकाने लगाने के इरादे से तो बाहर नही आई है" मैने एक बार फिर अपना अंदेशा जाहिर किया।

"मुझे सौम्या के साथ साथ कुमार गौरव भी इनके निशाने पर लगता है" रागिनी ने अपना शक जाहिर करके शक के दायरे का और विस्तार कर दिया था।

"मैं एक बार सौम्या की खोज ख़बर ले लेता हूँ, तुम सीधा यही आजाओ, फिर कुमार के घर पर भी चलते है, और उस देवप्रिय की भी तो हाजिरी बजानी है" मैने आज के सारे काम रागिनी को गिनवा दिए।

"ठीक है मै दस बजे तक पहुंचती हूँ, तब तक तुम भी तैयार हो जाओ" ये बोलकर रागिनी ने तेजी से फोन काट दिया।

मैं उसे अपने घर से नाश्ता बनाकर लाने के लिए बोलने वाला था, लेकिन अपनी इच्छा तो दिल की दिल मे ही रह गईं थी।

मैने रागिनी के फोन काटते ही सौम्या को फोन लगा दिया था।

"इतनी सुबह सुबह कैसे याद कर लिया मेरे जेम्सबोंड" सौम्या ने चहकती हुई आवाज में बोला।

"बस तुम्हारी खैरियत जानने के लिए फोन किया था, तुम ठीक हो न" मैंने सौम्या को बोला।

"हाँ मैं ठीक हूँ! क्यो मुझे कुछ होने वाला था क्या, जो तुम इतने चिंता जनक लहजें में पूछ रहे हो" सौम्या ने मेरी आवाज की घबराहट को पहचान लिया था।

"वो तुम्हारी हमप्याली, हमनिवाली वाली मेघना भी जेल से बाहर आई हुई है जमानत पर, और देविका के साथ ही है वो, अभी उनके कुछ कुछ मंसूबे तो पता चल चुके है, लेकिन अभी पूरे मंसूबे नही जान पाया हूँ" मैने सौम्या के साथ पहेलियां बुझाई।

"वो क्या मेरी जान लेने के इरादे से जेल से बाहर आये है क्या" अब सौम्या के स्वर में भी उसकी चिंता झलक रही थी।

"मैने तुम्हे अपनी पिस्टल के गायब होने की बात बताई थी न, वो पिस्टल काफी ड्रामेटिक तरीके से मेरे ही घर से मिल गई है, और वो भी मेघना और देविका की उपस्थिति में" मेरी बात सुनते ही सौम्या की तरफ एक खामोशी पसर गई।


जारी रहेगा_____✍️
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DEVIL MAXIMUM

"सर्वेभ्यः सर्वभावेभ्यः सर्वात्मना नमः।"
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#09

"यही सही रहेगा! हमे पुलिस को वैसे भी इस पिस्टल की बरामदगी के बारे में तो सूचना देनी ही होगी" रागिनी ने मेरी तरफ देखते हुए बोला।

"अब तो पिस्टल मिल गई है तुम्हें! अब पुलिस को बुलाने की क्या जरूरत है" देविका को पुलिस का कुछ ज्यादा ही खौफ था।

सुनने में तो यही आया था कि जेल जाने के बाद लोगों के दिलो से पुलिस का खौफ दूर हो जाता है, लेकिन यहां देविका के मामले में दूसरा ही सीन नजर आ रहा था।

"तुम क्यो इतना घबरा रही हो देविका, जब पुलिस में किसी वस्तु के खोने की सूचना दर्ज करवाई जाती है, तो उसके मिलने पर उसकी सूचना देना भी हर नागरिक का दायित्व होता है" रागिनी ने स्पष्ट शब्दों में देविका को समझाया।

"रागिनी सही कह रही हैं देविका, जब तुमने कुछ नही किया है तो, तुम्हे पुलिस के आने से क्या परेशानी है" इस बार मेघना भी देविका को समझाने वाले स्वर में बोला।

मैं एक बात शुरू से ही नोट कर रहा था। मेघना खुद को शुरू से ही खुद को देविका से अलग दिखाने की चेष्टा कर रही थी, उसे अभी तक एक भी बार देविका का पक्ष लेते हुए मैने नही देखा था।

खैर मैंने अभी अपना ध्यान मेघना के ऊपर से हटाया और देवप्रिय को फोन मिलाने लगा।

मैने उसे पांच मिनट तक सारी बातों को समझाया। उसने तत्काल मेरे घर पहुंचने का आश्वासन दिया।

धीरे धीरे रात अब गहराती जा रही थी। कल की रात भी ये देविका नाम की जालिम लोशन मेरे घर में थी, और आज की रात तो इन मोहतरमा के साथ दो और हसीनाएं मेरे घर को रोशन कर रही थी।

रागिनी की खूबसूरती भी कोई देविका के मुकाबले में कहीं से भी कम नही थी। मेघना भी इन दोनों से कहीं भी उन्नीस नही थी।

मैं भी इस वक़्त पता नही क्यो इन तीनो के हुश्न की तुलना करने बैठ गया था। ऊपरवाले कि बनाई हुई किसी भी कलाकृति का तुलनात्मक अध्धयन करने वाला मैं कौन होता हूँ। 😉

मैं इस वक़्त बेताबी से देवप्रिय के आने का इंतजार कर रहा था। एक बार पिस्टल के फोरेंसिक जांच के
लिए जाने के बाद मैं इन सभी को अपने फ्लैट से रुखसत कर सकता था।

"रोमेश एक बार मेरी मुलाकत सौम्या से करवा दो न, मैं उससे अपने गुनाहों की माफी मांगना चाहती हूँ" तभी मेघना ने मेरी ओर देखकर बोला।

"सौम्या से मिलने के लिए मेरी क्या जरूरत है मेघना! उससे तो तुम खुद भी जाकर मिल सकती हो" मैंने मेघना की ओर देखते हुए बोला।

"मैं कोशिश कर चुकी हूँ रोमेश, लेकिन वो मेरा फोन ही नही उठा रही है" मेघना ने रुआंसे स्वर में कहा।

"उसे मालूम है क्या की तुम जेल से बाहर आ चुकी हो" मैने मेघना से पूछा।

"नही! मै उसे नए नम्बर से मिला रही थी, उसने तब भी फोन नही उठाया, उसके बाद मैंने आफिस के नंबर पर भी फोन मिलाया, लेकिन उसने लाइन पर आने से मना कर दिया" मेघना ने निराशा से बोला।

मैं अभी उसकी बात का जवाब देने ही जा रहा था, की मेरे फ्लैट की बेल बज गई।

आने वाला शख्स एसआई देवप्रिय ही था। उसने एक नज़र मुझ पर डाली और एक नजर मेरे कमरे में लगे हुए हसीनाओं के मेले पर डाली।

मैंने बिना कोई भूमिका बांधे ही देवप्रिय को किचन में ले जाकर पिस्टल दिखाया।

"पिस्टल यही पर रखा है, जब से तुमने देखा" देवप्रिय ने मेरी तरफ देखते हुए बोला।

"मुझ से पहले पिस्टल रागिनी ने और मेघना ने देखा था, उन्हें ये पिस्टल इस गैस चूल्हे के नीचे दिखाई दिया था" मैने रागिनी की ओर देखते हुए बोला।

"मुझ से पहले मेघना ने इस पिस्टल को देखा था, क्यो कि मैं तो एक सरसरी नजर डालकर देख रही थी, लेकिन मेघना हर सामान को हटाकर अच्छे से देख रही थी" रागिनी ने भी तुरन्त बोला।

"ये मोहतरमा वही है क्या, जिन पर कल आपने पिस्टल चोरी करके ले जाने का इल्जाम लगाया था" देवप्रिय ने मेघना पर नजर डालते हुए मुझ से पूछा।

"नही वो मैडम तो ये है, देविका! अभी दो दिन पहले ही जमानत पर बाहर आई है" मैंने देविका की ओर इशारा किया।

"मैने पहले ही कहा था कि जासूस हो तो कोई न कोई झोल तो तुम्हारी कहानी में जरूर मिलेगा, पिस्टल आपके घर मे मौजूद है और कल रात से आपने जीना हमारा हराम किया हुआ है" देवप्रिय ने मेरी तरफ देखते हुए बोला।

"कहानी में झोल तो इन मैडम के आने से हो गया है जनाब!" मैने देविका की ओर इशारा करते हुए बोला।

"लेकिन अगर यही पिस्टल लेकर गई होती तो, अभी इस वक़्त ये पिस्टल आपके घर से ही कैसे मिल गया" देवप्रिय ने अनुराग भरी दृष्टि से देविका की ओर देखा।

खूबसूरती का यही फायदा होता है, सामने वाली बन्दी कितनी भी शातिर दिमाग क्यो न हो, लेकिन दिखने मे लगती मासूम ही है, पता नही किस बेवकूफ ने ये कहावत बनाई है कि खूबसूरत औरत का दिमाग उसके घुटनो में होता है, आपके इस सेवक का तो मानना था कि खूबसूरत औरत को देखकर अच्छे भले इंसान का दिमाग उसके टखनों में चला जाता है। :D

कुछ यही हाल इस वक़्त हमारे जनाब एसआई देवप्रिय का था जो, अभी तक देविका को उसी अनुराग भरी दृष्टि से निहार रहे थे।

"जी मैं अब भी ये समझ नही पा रहा हूँ कि मैने इन मोहतरमा के सामने अपना पिस्टल अपने बेड की दराज में रखा था, फिर आज ये पिस्टल मेरे किचन में कैसे मिला" मैंने असमंजस भरे स्वर में कहा।

"मैं बताता हूँ की ये सब कैसे हुआ! बरसात की रात में जब कोई इन जैसी बला की खूबसूरत लड़की एका एक सामने आकर खड़ी हो जाये और वो भी आपके बैडरूम में तो अच्छे खासे बन्दे के होशो हवास न केवल गुम हो जाते है, बल्कि वो कल्पनाओं के सागर में गोते लगाते हुए किसी हिल स्टेशन पर अपने हनीमून की भी प्लानिंग करनें लगता है, ऐसा ही कुछ आपके साथ हुआ है, उसी कल्पना लोक में विचरते हुए आप उस पिस्टल को हाथ मे लिए हुए ही किचन में पहुंच गए, वहां बकौल आपके आपने इन मोहतरमा की फरमाइश पर कॉफी बनाई, अब कॉफी आपने हाथ मे पिस्टल लेकर तो बनाई नही होगी, आपने उस
पिस्टल को वही किचन में गैस के पास रखा होगा, जो किसी चीज़ के लगने की वजह से सरक कर चूल्हे के नीचे चली गई होगी" देवप्रिय एक मिनट में ही अपनी कल्पना शक्ति का पूरा प्रदर्शन कर चुका था, और अपनी बात खत्म करने के बाद बन्दे ने देविका की ओर एक विजयी मुस्कान के साथ देखा।

देविका ने भी मुरीद नजरो से देवप्रिय की ओर देखा। आखिर देखती भी क्यो नही, जनाब ने सिर्फ दो मिनट में मैडम को हर आरोप से बरी जो कर दिया था।

"लेकिन जनाब मैं इतना भुलक्कड़ नही हूँ कि पिस्टल जैसी चीज को लेकर मैं इतना लापरवाह हो जाऊंगा और उसके गुम हो जाने की रिपोर्ट लिखवाने थाने तक चला जाऊँगा" मैने देवप्रिय की बात का पुरजोर विरोध किया।

"लेकिन मैंने तो सुना है कि आप काफी दिलफेंक किस्म के इंसान है, और लड़कियों के मामले में जहाँ देखी तवा परात, वही गुजारी सारी रात वाली कहावत में यकीन रखते है" देवप्रिय ने बड़ी ही अप्रिय सी लगने वाली बात को मुस्कराते हुए बोल डाला था।

"नही सर! रोमेश के बारे में ये बोलना सही नही है, बल्कि बहुत सी लड़कियां है, जो रोमेश को पसंद करती है,लेकिन रोमेश बाबू थोड़ा फ़्लर्ट जरूर करते है, लेकिन आज तक कभी फिसले नही है" इस बार मेघना ने इस मामले में मेरी पुरजोर वकालत की।

मै ऐसे आड़े वक़्त में मेघना का मेरा बचाव करते हुए देखकर उसकी और मुरीद नजरो से देखने लगा।

"चलिये! मै यहां पर कोई आपका चरित्र प्रमाणपत्र बनाने के लिए नही आया हूँ, अब मुद्दे की बात कर लेते है, सबसे पहले तो मामला आपके ही खिलाफ बनता है कि, आपने चोरी की झूठी रपट लिखवाई, अब इसके पीछे आपका उद्देश्य क्या था, जरा उस पर भी रोशनी डाल दो" देवप्रिय ने मेरी ओर देखते हुए बोला।

"देखिए सर! ये एक बहुत बड़ी साजिस है, जिसमे रोमेश सर को फंसाया जा रहा है" रागिनी ने काफी देर के बाद हमारी बातो में दखल दिया था।

"उस साजिस को साबित करनें के लिए आपको थाने आना पड़ेगा! रागिनी जी, अभी रात बहुत हो चुकी है और मैं पिछले छत्तीस घँटे से लगातार ड्यूटी पर हूँ" देवप्रिय ने रागिनी की तरफ़ देखते हुए बोला।

"मतलब आपने इन मैडम को बिल्कुल क्लीन चिट दे दी, आप इनसे इस बारे में कोई पुछताछ नही करेगें, की ये मैडम कल रात को यहां पर करने क्या आई थी, इसका यहाँ आने का उद्देश्य क्या था" रागिनी ने तल्ख स्वर में देवप्रिय से पूछा।

"देखिए मैडम! आप हर बार मुझे, मेरा काम सिखाने की कोशिश मत कीजिये, रोमेश साहब ने रिपोर्ट लिखवाई की पिस्टल इनके घर से चोरी हुआ है, और पिस्टल मिला भी रोमेश साहब के घर से ही है, तो इसका मतलब तो चोरी की रिपोर्ट ही झूठी ही थी, तो पूछताछ इन मोहतरमा से नही बल्कि रोमेश साहब से करना बनता है, ये तो मेरी शराफत समझिए कि मैं इन्हें अभी अपने साथ थाने लेकर नही जा रहा हूँ, आप लोग सुबह आ जाइए, वहाँ पूछताछ भी हो जायेगी और सारे सवालों के जवाब भी मिल जाएंगे" देवप्रिय ने भी उसी तल्ख़ी के साथ रागिनी की बात का जवाब दिया।

"ठीक है माईबाप, बन्दा कल सुबह आपके दरबार मे हाजिर हो जाएगा, लेकिन जाने से पहले इस गरीब की एक इल्तिजा पर भी गौर फरमा लीजिये' मैने देवप्रिय को प्रिय लगने वाले शब्दो से नवाजा।

"कैसी इल्तिजा" देवप्रिय ने मेरी आँखों मे झाँकते हुए बोला।

"इस पिस्टल को फोरेंसिक जांच के लिए अपने साथ ले जाइए, क्यो कि पूरे चौबीस घँटे ये बेजुबान मेरी आंखों से ओझल रहा हैं, बेचारे के साथ पता नही इस दरम्यान क्या क्या बीती होगी, किन किन हाथो ने इसके कानो को उमेठा होगा, तो मेरे हुजूर! इस पिस्टल की फॉरेन्सिक जांच करवा दीजिये" मैने नाटकीय अंदाज में देवप्रिय को बोला।

"तुमने क्या मुझे इतना अहमक समझा है कि मैं इस पिस्टल को तुम्हारे पास ऐसे ही छोड़ जाऊंगा, फोरेंसिक जाँच से ही तो अगर कोई कारनामा तुमने किया होगा, वो सामने आयेगा" देवप्रिय ने पूरी कमीनगी दिखाते हुए बोला।

"हुजूर एक बात और पूछनी थी, कल थाने में सिर्फ मुझे ही आना है या, इन तीन देवीयो को भी बुलाओगे" मैंने एक कुटिल मुस्कान के साथ देवप्रिय की कमीनगी का जवाब दिया।

"आ जाना आप भी तीनो देवियों, वरना साहब को लगेगा कि मैं किसी को बचाने की कोशिश कर रहा हूँ, और साहब की जानकारी हमारे महकमे के बड़े बड़े हाकिमों से है, तो हमे तो वैसे भी इस बार कदम फूंक फूंक कर उठाना पड़ेगा" ये बोलकर देवप्रिय किचन की तरफ पिस्टल को लेने के लिए बढ़ गया।

थाने मे हाजिरी

अगले दिन मैं थोड़ी देर से सोकर उठा था। पता नही रागिनी को मेरे जागने की शायद कोई महक आ गई थी कि, मेरे आँख खोलते ही उसका नंबर मेरे मोबाइल पर चमकने लगा था। मैंने तुरन्त रागिनी का फोन उठाया।

"तुम्हे एक बात बतानी थी, मेघना मुझ से कोई बीस सेकेण्ड पहले किचन में घुसी थी, मेरे साथ नही! मुझे लगता है मेघना ने ही उस पिस्टल को उस चूल्हे के नीचे प्लांट किया था" रागिनी जो मुझे अब बता रही थी, इसका अंदेशा मुझे रात को ही हो चुका था।

"मुझे भी इसी बात का शक है" मैने रागिनी की बात का समर्थन किया।

"मेघना शायद किसी बड़ी फिराक में है, मत भूलो की ये राजीव बंसल के साथ सौम्या को रास्ते से हटाकर शादी करने की फिराक में भी थी" रागिनी ने मुझें पुरानी बात याद दिलाई।

"तुम सही कह रही हो, इसका मतलब है, ये उस पिस्टल से कोई वारदात कर चुके है, और अब कभी भी उस वारदात को सामने लाकर मुझे फ़साने का इंतजाम कर सकते है" मैने एक और अपनी आशंका जाहिर की।

"बिल्कुल सही सोच रहे हो, लेकिन हमे सबसे पहले इस बात का पता लगाना होगा कि इनके निशाने पर कौन हो सकता है, और अभी उसकी क्या हालत है" रागिनी का दिमाग भी जापान की बुलेट ट्रैन से तेज चल रहा था।

"मुझे ऐसा भी लग रहा है कि ये दोनों पहले ही उस देवप्रिय को भी चुग्गा डाल चुकी है, तभी वो कल रात को देविका की ही भाषा बोल रहा था" मैंने रागिनी को बोला।

"मुझे इस वक़्त सौम्या की सबसे ज्यादा चिंता हो रही हैं, कही ये जेल से उसे ही ठिकाने लगाने के इरादे से तो बाहर नही आई है" मैने एक बार फिर अपना अंदेशा जाहिर किया।

"मुझे सौम्या के साथ साथ कुमार गौरव भी इनके निशाने पर लगता है" रागिनी ने अपना शक जाहिर करके शक के दायरे का और विस्तार कर दिया था।

"मैं एक बार सौम्या की खोज ख़बर ले लेता हूँ, तुम सीधा यही आजाओ, फिर कुमार के घर पर भी चलते है, और उस देवप्रिय की भी तो हाजिरी बजानी है" मैने आज के सारे काम रागिनी को गिनवा दिए।

"ठीक है मै दस बजे तक पहुंचती हूँ, तब तक तुम भी तैयार हो जाओ" ये बोलकर रागिनी ने तेजी से फोन काट दिया।

मैं उसे अपने घर से नाश्ता बनाकर लाने के लिए बोलने वाला था, लेकिन अपनी इच्छा तो दिल की दिल मे ही रह गईं थी।

मैने रागिनी के फोन काटते ही सौम्या को फोन लगा दिया था।

"इतनी सुबह सुबह कैसे याद कर लिया मेरे जेम्सबोंड" सौम्या ने चहकती हुई आवाज में बोला।

"बस तुम्हारी खैरियत जानने के लिए फोन किया था, तुम ठीक हो न" मैंने सौम्या को बोला।

"हाँ मैं ठीक हूँ! क्यो मुझे कुछ होने वाला था क्या, जो तुम इतने चिंता जनक लहजें में पूछ रहे हो" सौम्या ने मेरी आवाज की घबराहट को पहचान लिया था।

"वो तुम्हारी हमप्याली, हमनिवाली वाली मेघना भी जेल से बाहर आई हुई है जमानत पर, और देविका के साथ ही है वो, अभी उनके कुछ कुछ मंसूबे तो पता चल चुके है, लेकिन अभी पूरे मंसूबे नही जान पाया हूँ" मैने सौम्या के साथ पहेलियां बुझाई।

"वो क्या मेरी जान लेने के इरादे से जेल से बाहर आये है क्या" अब सौम्या के स्वर में भी उसकी चिंता झलक रही थी।

"मैने तुम्हे अपनी पिस्टल के गायब होने की बात बताई थी न, वो पिस्टल काफी ड्रामेटिक तरीके से मेरे ही घर से मिल गई है, और वो भी मेघना और देविका की उपस्थिति में" मेरी बात सुनते ही सौम्या की तरफ एक खामोशी पसर गई।


जारी रहेगा_____✍️
Kuch to gadbad ho rahe hai yaha par ye bat to pakki hai ki Devika ne he pistol rakhi hogi tab to ungliyo ke nishan bhi hoge uske pistol me
.
Ab dekhte hai ki Romesh or Ragini ki kahe bat me kuch sacchai sabit hoti hai ki nahi ya Romesh fir fasane wala hai kisi jaal me
 
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Dhakad boy

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"यही सही रहेगा! हमे पुलिस को वैसे भी इस पिस्टल की बरामदगी के बारे में तो सूचना देनी ही होगी" रागिनी ने मेरी तरफ देखते हुए बोला।

"अब तो पिस्टल मिल गई है तुम्हें! अब पुलिस को बुलाने की क्या जरूरत है" देविका को पुलिस का कुछ ज्यादा ही खौफ था।

सुनने में तो यही आया था कि जेल जाने के बाद लोगों के दिलो से पुलिस का खौफ दूर हो जाता है, लेकिन यहां देविका के मामले में दूसरा ही सीन नजर आ रहा था।

"तुम क्यो इतना घबरा रही हो देविका, जब पुलिस में किसी वस्तु के खोने की सूचना दर्ज करवाई जाती है, तो उसके मिलने पर उसकी सूचना देना भी हर नागरिक का दायित्व होता है" रागिनी ने स्पष्ट शब्दों में देविका को समझाया।

"रागिनी सही कह रही हैं देविका, जब तुमने कुछ नही किया है तो, तुम्हे पुलिस के आने से क्या परेशानी है" इस बार मेघना भी देविका को समझाने वाले स्वर में बोला।

मैं एक बात शुरू से ही नोट कर रहा था। मेघना खुद को शुरू से ही खुद को देविका से अलग दिखाने की चेष्टा कर रही थी, उसे अभी तक एक भी बार देविका का पक्ष लेते हुए मैने नही देखा था।

खैर मैंने अभी अपना ध्यान मेघना के ऊपर से हटाया और देवप्रिय को फोन मिलाने लगा।

मैने उसे पांच मिनट तक सारी बातों को समझाया। उसने तत्काल मेरे घर पहुंचने का आश्वासन दिया।

धीरे धीरे रात अब गहराती जा रही थी। कल की रात भी ये देविका नाम की जालिम लोशन मेरे घर में थी, और आज की रात तो इन मोहतरमा के साथ दो और हसीनाएं मेरे घर को रोशन कर रही थी।

रागिनी की खूबसूरती भी कोई देविका के मुकाबले में कहीं से भी कम नही थी। मेघना भी इन दोनों से कहीं भी उन्नीस नही थी।

मैं भी इस वक़्त पता नही क्यो इन तीनो के हुश्न की तुलना करने बैठ गया था। ऊपरवाले कि बनाई हुई किसी भी कलाकृति का तुलनात्मक अध्धयन करने वाला मैं कौन होता हूँ। 😉

मैं इस वक़्त बेताबी से देवप्रिय के आने का इंतजार कर रहा था। एक बार पिस्टल के फोरेंसिक जांच के
लिए जाने के बाद मैं इन सभी को अपने फ्लैट से रुखसत कर सकता था।

"रोमेश एक बार मेरी मुलाकत सौम्या से करवा दो न, मैं उससे अपने गुनाहों की माफी मांगना चाहती हूँ" तभी मेघना ने मेरी ओर देखकर बोला।

"सौम्या से मिलने के लिए मेरी क्या जरूरत है मेघना! उससे तो तुम खुद भी जाकर मिल सकती हो" मैंने मेघना की ओर देखते हुए बोला।

"मैं कोशिश कर चुकी हूँ रोमेश, लेकिन वो मेरा फोन ही नही उठा रही है" मेघना ने रुआंसे स्वर में कहा।

"उसे मालूम है क्या की तुम जेल से बाहर आ चुकी हो" मैने मेघना से पूछा।

"नही! मै उसे नए नम्बर से मिला रही थी, उसने तब भी फोन नही उठाया, उसके बाद मैंने आफिस के नंबर पर भी फोन मिलाया, लेकिन उसने लाइन पर आने से मना कर दिया" मेघना ने निराशा से बोला।

मैं अभी उसकी बात का जवाब देने ही जा रहा था, की मेरे फ्लैट की बेल बज गई।

आने वाला शख्स एसआई देवप्रिय ही था। उसने एक नज़र मुझ पर डाली और एक नजर मेरे कमरे में लगे हुए हसीनाओं के मेले पर डाली।

मैंने बिना कोई भूमिका बांधे ही देवप्रिय को किचन में ले जाकर पिस्टल दिखाया।

"पिस्टल यही पर रखा है, जब से तुमने देखा" देवप्रिय ने मेरी तरफ देखते हुए बोला।

"मुझ से पहले पिस्टल रागिनी ने और मेघना ने देखा था, उन्हें ये पिस्टल इस गैस चूल्हे के नीचे दिखाई दिया था" मैने रागिनी की ओर देखते हुए बोला।

"मुझ से पहले मेघना ने इस पिस्टल को देखा था, क्यो कि मैं तो एक सरसरी नजर डालकर देख रही थी, लेकिन मेघना हर सामान को हटाकर अच्छे से देख रही थी" रागिनी ने भी तुरन्त बोला।

"ये मोहतरमा वही है क्या, जिन पर कल आपने पिस्टल चोरी करके ले जाने का इल्जाम लगाया था" देवप्रिय ने मेघना पर नजर डालते हुए मुझ से पूछा।

"नही वो मैडम तो ये है, देविका! अभी दो दिन पहले ही जमानत पर बाहर आई है" मैंने देविका की ओर इशारा किया।

"मैने पहले ही कहा था कि जासूस हो तो कोई न कोई झोल तो तुम्हारी कहानी में जरूर मिलेगा, पिस्टल आपके घर मे मौजूद है और कल रात से आपने जीना हमारा हराम किया हुआ है" देवप्रिय ने मेरी तरफ देखते हुए बोला।

"कहानी में झोल तो इन मैडम के आने से हो गया है जनाब!" मैने देविका की ओर इशारा करते हुए बोला।

"लेकिन अगर यही पिस्टल लेकर गई होती तो, अभी इस वक़्त ये पिस्टल आपके घर से ही कैसे मिल गया" देवप्रिय ने अनुराग भरी दृष्टि से देविका की ओर देखा।

खूबसूरती का यही फायदा होता है, सामने वाली बन्दी कितनी भी शातिर दिमाग क्यो न हो, लेकिन दिखने मे लगती मासूम ही है, पता नही किस बेवकूफ ने ये कहावत बनाई है कि खूबसूरत औरत का दिमाग उसके घुटनो में होता है, आपके इस सेवक का तो मानना था कि खूबसूरत औरत को देखकर अच्छे भले इंसान का दिमाग उसके टखनों में चला जाता है। :D

कुछ यही हाल इस वक़्त हमारे जनाब एसआई देवप्रिय का था जो, अभी तक देविका को उसी अनुराग भरी दृष्टि से निहार रहे थे।

"जी मैं अब भी ये समझ नही पा रहा हूँ कि मैने इन मोहतरमा के सामने अपना पिस्टल अपने बेड की दराज में रखा था, फिर आज ये पिस्टल मेरे किचन में कैसे मिला" मैंने असमंजस भरे स्वर में कहा।

"मैं बताता हूँ की ये सब कैसे हुआ! बरसात की रात में जब कोई इन जैसी बला की खूबसूरत लड़की एका एक सामने आकर खड़ी हो जाये और वो भी आपके बैडरूम में तो अच्छे खासे बन्दे के होशो हवास न केवल गुम हो जाते है, बल्कि वो कल्पनाओं के सागर में गोते लगाते हुए किसी हिल स्टेशन पर अपने हनीमून की भी प्लानिंग करनें लगता है, ऐसा ही कुछ आपके साथ हुआ है, उसी कल्पना लोक में विचरते हुए आप उस पिस्टल को हाथ मे लिए हुए ही किचन में पहुंच गए, वहां बकौल आपके आपने इन मोहतरमा की फरमाइश पर कॉफी बनाई, अब कॉफी आपने हाथ मे पिस्टल लेकर तो बनाई नही होगी, आपने उस
पिस्टल को वही किचन में गैस के पास रखा होगा, जो किसी चीज़ के लगने की वजह से सरक कर चूल्हे के नीचे चली गई होगी" देवप्रिय एक मिनट में ही अपनी कल्पना शक्ति का पूरा प्रदर्शन कर चुका था, और अपनी बात खत्म करने के बाद बन्दे ने देविका की ओर एक विजयी मुस्कान के साथ देखा।

देविका ने भी मुरीद नजरो से देवप्रिय की ओर देखा। आखिर देखती भी क्यो नही, जनाब ने सिर्फ दो मिनट में मैडम को हर आरोप से बरी जो कर दिया था।

"लेकिन जनाब मैं इतना भुलक्कड़ नही हूँ कि पिस्टल जैसी चीज को लेकर मैं इतना लापरवाह हो जाऊंगा और उसके गुम हो जाने की रिपोर्ट लिखवाने थाने तक चला जाऊँगा" मैने देवप्रिय की बात का पुरजोर विरोध किया।

"लेकिन मैंने तो सुना है कि आप काफी दिलफेंक किस्म के इंसान है, और लड़कियों के मामले में जहाँ देखी तवा परात, वही गुजारी सारी रात वाली कहावत में यकीन रखते है" देवप्रिय ने बड़ी ही अप्रिय सी लगने वाली बात को मुस्कराते हुए बोल डाला था।

"नही सर! रोमेश के बारे में ये बोलना सही नही है, बल्कि बहुत सी लड़कियां है, जो रोमेश को पसंद करती है,लेकिन रोमेश बाबू थोड़ा फ़्लर्ट जरूर करते है, लेकिन आज तक कभी फिसले नही है" इस बार मेघना ने इस मामले में मेरी पुरजोर वकालत की।

मै ऐसे आड़े वक़्त में मेघना का मेरा बचाव करते हुए देखकर उसकी और मुरीद नजरो से देखने लगा।

"चलिये! मै यहां पर कोई आपका चरित्र प्रमाणपत्र बनाने के लिए नही आया हूँ, अब मुद्दे की बात कर लेते है, सबसे पहले तो मामला आपके ही खिलाफ बनता है कि, आपने चोरी की झूठी रपट लिखवाई, अब इसके पीछे आपका उद्देश्य क्या था, जरा उस पर भी रोशनी डाल दो" देवप्रिय ने मेरी ओर देखते हुए बोला।

"देखिए सर! ये एक बहुत बड़ी साजिस है, जिसमे रोमेश सर को फंसाया जा रहा है" रागिनी ने काफी देर के बाद हमारी बातो में दखल दिया था।

"उस साजिस को साबित करनें के लिए आपको थाने आना पड़ेगा! रागिनी जी, अभी रात बहुत हो चुकी है और मैं पिछले छत्तीस घँटे से लगातार ड्यूटी पर हूँ" देवप्रिय ने रागिनी की तरफ़ देखते हुए बोला।

"मतलब आपने इन मैडम को बिल्कुल क्लीन चिट दे दी, आप इनसे इस बारे में कोई पुछताछ नही करेगें, की ये मैडम कल रात को यहां पर करने क्या आई थी, इसका यहाँ आने का उद्देश्य क्या था" रागिनी ने तल्ख स्वर में देवप्रिय से पूछा।

"देखिए मैडम! आप हर बार मुझे, मेरा काम सिखाने की कोशिश मत कीजिये, रोमेश साहब ने रिपोर्ट लिखवाई की पिस्टल इनके घर से चोरी हुआ है, और पिस्टल मिला भी रोमेश साहब के घर से ही है, तो इसका मतलब तो चोरी की रिपोर्ट ही झूठी ही थी, तो पूछताछ इन मोहतरमा से नही बल्कि रोमेश साहब से करना बनता है, ये तो मेरी शराफत समझिए कि मैं इन्हें अभी अपने साथ थाने लेकर नही जा रहा हूँ, आप लोग सुबह आ जाइए, वहाँ पूछताछ भी हो जायेगी और सारे सवालों के जवाब भी मिल जाएंगे" देवप्रिय ने भी उसी तल्ख़ी के साथ रागिनी की बात का जवाब दिया।

"ठीक है माईबाप, बन्दा कल सुबह आपके दरबार मे हाजिर हो जाएगा, लेकिन जाने से पहले इस गरीब की एक इल्तिजा पर भी गौर फरमा लीजिये' मैने देवप्रिय को प्रिय लगने वाले शब्दो से नवाजा।

"कैसी इल्तिजा" देवप्रिय ने मेरी आँखों मे झाँकते हुए बोला।

"इस पिस्टल को फोरेंसिक जांच के लिए अपने साथ ले जाइए, क्यो कि पूरे चौबीस घँटे ये बेजुबान मेरी आंखों से ओझल रहा हैं, बेचारे के साथ पता नही इस दरम्यान क्या क्या बीती होगी, किन किन हाथो ने इसके कानो को उमेठा होगा, तो मेरे हुजूर! इस पिस्टल की फॉरेन्सिक जांच करवा दीजिये" मैने नाटकीय अंदाज में देवप्रिय को बोला।

"तुमने क्या मुझे इतना अहमक समझा है कि मैं इस पिस्टल को तुम्हारे पास ऐसे ही छोड़ जाऊंगा, फोरेंसिक जाँच से ही तो अगर कोई कारनामा तुमने किया होगा, वो सामने आयेगा" देवप्रिय ने पूरी कमीनगी दिखाते हुए बोला।

"हुजूर एक बात और पूछनी थी, कल थाने में सिर्फ मुझे ही आना है या, इन तीन देवीयो को भी बुलाओगे" मैंने एक कुटिल मुस्कान के साथ देवप्रिय की कमीनगी का जवाब दिया।

"आ जाना आप भी तीनो देवियों, वरना साहब को लगेगा कि मैं किसी को बचाने की कोशिश कर रहा हूँ, और साहब की जानकारी हमारे महकमे के बड़े बड़े हाकिमों से है, तो हमे तो वैसे भी इस बार कदम फूंक फूंक कर उठाना पड़ेगा" ये बोलकर देवप्रिय किचन की तरफ पिस्टल को लेने के लिए बढ़ गया।

थाने मे हाजिरी

अगले दिन मैं थोड़ी देर से सोकर उठा था। पता नही रागिनी को मेरे जागने की शायद कोई महक आ गई थी कि, मेरे आँख खोलते ही उसका नंबर मेरे मोबाइल पर चमकने लगा था। मैंने तुरन्त रागिनी का फोन उठाया।

"तुम्हे एक बात बतानी थी, मेघना मुझ से कोई बीस सेकेण्ड पहले किचन में घुसी थी, मेरे साथ नही! मुझे लगता है मेघना ने ही उस पिस्टल को उस चूल्हे के नीचे प्लांट किया था" रागिनी जो मुझे अब बता रही थी, इसका अंदेशा मुझे रात को ही हो चुका था।

"मुझे भी इसी बात का शक है" मैने रागिनी की बात का समर्थन किया।

"मेघना शायद किसी बड़ी फिराक में है, मत भूलो की ये राजीव बंसल के साथ सौम्या को रास्ते से हटाकर शादी करने की फिराक में भी थी" रागिनी ने मुझें पुरानी बात याद दिलाई।

"तुम सही कह रही हो, इसका मतलब है, ये उस पिस्टल से कोई वारदात कर चुके है, और अब कभी भी उस वारदात को सामने लाकर मुझे फ़साने का इंतजाम कर सकते है" मैने एक और अपनी आशंका जाहिर की।

"बिल्कुल सही सोच रहे हो, लेकिन हमे सबसे पहले इस बात का पता लगाना होगा कि इनके निशाने पर कौन हो सकता है, और अभी उसकी क्या हालत है" रागिनी का दिमाग भी जापान की बुलेट ट्रैन से तेज चल रहा था।

"मुझे ऐसा भी लग रहा है कि ये दोनों पहले ही उस देवप्रिय को भी चुग्गा डाल चुकी है, तभी वो कल रात को देविका की ही भाषा बोल रहा था" मैंने रागिनी को बोला।

"मुझे इस वक़्त सौम्या की सबसे ज्यादा चिंता हो रही हैं, कही ये जेल से उसे ही ठिकाने लगाने के इरादे से तो बाहर नही आई है" मैने एक बार फिर अपना अंदेशा जाहिर किया।

"मुझे सौम्या के साथ साथ कुमार गौरव भी इनके निशाने पर लगता है" रागिनी ने अपना शक जाहिर करके शक के दायरे का और विस्तार कर दिया था।

"मैं एक बार सौम्या की खोज ख़बर ले लेता हूँ, तुम सीधा यही आजाओ, फिर कुमार के घर पर भी चलते है, और उस देवप्रिय की भी तो हाजिरी बजानी है" मैने आज के सारे काम रागिनी को गिनवा दिए।

"ठीक है मै दस बजे तक पहुंचती हूँ, तब तक तुम भी तैयार हो जाओ" ये बोलकर रागिनी ने तेजी से फोन काट दिया।

मैं उसे अपने घर से नाश्ता बनाकर लाने के लिए बोलने वाला था, लेकिन अपनी इच्छा तो दिल की दिल मे ही रह गईं थी।

मैने रागिनी के फोन काटते ही सौम्या को फोन लगा दिया था।

"इतनी सुबह सुबह कैसे याद कर लिया मेरे जेम्सबोंड" सौम्या ने चहकती हुई आवाज में बोला।

"बस तुम्हारी खैरियत जानने के लिए फोन किया था, तुम ठीक हो न" मैंने सौम्या को बोला।

"हाँ मैं ठीक हूँ! क्यो मुझे कुछ होने वाला था क्या, जो तुम इतने चिंता जनक लहजें में पूछ रहे हो" सौम्या ने मेरी आवाज की घबराहट को पहचान लिया था।

"वो तुम्हारी हमप्याली, हमनिवाली वाली मेघना भी जेल से बाहर आई हुई है जमानत पर, और देविका के साथ ही है वो, अभी उनके कुछ कुछ मंसूबे तो पता चल चुके है, लेकिन अभी पूरे मंसूबे नही जान पाया हूँ" मैने सौम्या के साथ पहेलियां बुझाई।

"वो क्या मेरी जान लेने के इरादे से जेल से बाहर आये है क्या" अब सौम्या के स्वर में भी उसकी चिंता झलक रही थी।

"मैने तुम्हे अपनी पिस्टल के गायब होने की बात बताई थी न, वो पिस्टल काफी ड्रामेटिक तरीके से मेरे ही घर से मिल गई है, और वो भी मेघना और देविका की उपस्थिति में" मेरी बात सुनते ही सौम्या की तरफ एक खामोशी पसर गई।


जारी रहेगा_____✍️
Bhut hi badhiya update Bhai
Ye Devika aur meghna kisi badi planning me hai
Dhekte hai ab ye kahani aage kya mod leti hai
 
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"यही सही रहेगा! हमे पुलिस को वैसे भी इस पिस्टल की बरामदगी के बारे में तो सूचना देनी ही होगी" रागिनी ने मेरी तरफ देखते हुए बोला।

"अब तो पिस्टल मिल गई है तुम्हें! अब पुलिस को बुलाने की क्या जरूरत है" देविका को पुलिस का कुछ ज्यादा ही खौफ था।

सुनने में तो यही आया था कि जेल जाने के बाद लोगों के दिलो से पुलिस का खौफ दूर हो जाता है, लेकिन यहां देविका के मामले में दूसरा ही सीन नजर आ रहा था।

"तुम क्यो इतना घबरा रही हो देविका, जब पुलिस में किसी वस्तु के खोने की सूचना दर्ज करवाई जाती है, तो उसके मिलने पर उसकी सूचना देना भी हर नागरिक का दायित्व होता है" रागिनी ने स्पष्ट शब्दों में देविका को समझाया।

"रागिनी सही कह रही हैं देविका, जब तुमने कुछ नही किया है तो, तुम्हे पुलिस के आने से क्या परेशानी है" इस बार मेघना भी देविका को समझाने वाले स्वर में बोला।

मैं एक बात शुरू से ही नोट कर रहा था। मेघना खुद को शुरू से ही खुद को देविका से अलग दिखाने की चेष्टा कर रही थी, उसे अभी तक एक भी बार देविका का पक्ष लेते हुए मैने नही देखा था।

खैर मैंने अभी अपना ध्यान मेघना के ऊपर से हटाया और देवप्रिय को फोन मिलाने लगा।

मैने उसे पांच मिनट तक सारी बातों को समझाया। उसने तत्काल मेरे घर पहुंचने का आश्वासन दिया।

धीरे धीरे रात अब गहराती जा रही थी। कल की रात भी ये देविका नाम की जालिम लोशन मेरे घर में थी, और आज की रात तो इन मोहतरमा के साथ दो और हसीनाएं मेरे घर को रोशन कर रही थी।

रागिनी की खूबसूरती भी कोई देविका के मुकाबले में कहीं से भी कम नही थी। मेघना भी इन दोनों से कहीं भी उन्नीस नही थी।

मैं भी इस वक़्त पता नही क्यो इन तीनो के हुश्न की तुलना करने बैठ गया था। ऊपरवाले कि बनाई हुई किसी भी कलाकृति का तुलनात्मक अध्धयन करने वाला मैं कौन होता हूँ। 😉

मैं इस वक़्त बेताबी से देवप्रिय के आने का इंतजार कर रहा था। एक बार पिस्टल के फोरेंसिक जांच के
लिए जाने के बाद मैं इन सभी को अपने फ्लैट से रुखसत कर सकता था।

"रोमेश एक बार मेरी मुलाकत सौम्या से करवा दो न, मैं उससे अपने गुनाहों की माफी मांगना चाहती हूँ" तभी मेघना ने मेरी ओर देखकर बोला।

"सौम्या से मिलने के लिए मेरी क्या जरूरत है मेघना! उससे तो तुम खुद भी जाकर मिल सकती हो" मैंने मेघना की ओर देखते हुए बोला।

"मैं कोशिश कर चुकी हूँ रोमेश, लेकिन वो मेरा फोन ही नही उठा रही है" मेघना ने रुआंसे स्वर में कहा।

"उसे मालूम है क्या की तुम जेल से बाहर आ चुकी हो" मैने मेघना से पूछा।

"नही! मै उसे नए नम्बर से मिला रही थी, उसने तब भी फोन नही उठाया, उसके बाद मैंने आफिस के नंबर पर भी फोन मिलाया, लेकिन उसने लाइन पर आने से मना कर दिया" मेघना ने निराशा से बोला।

मैं अभी उसकी बात का जवाब देने ही जा रहा था, की मेरे फ्लैट की बेल बज गई।

आने वाला शख्स एसआई देवप्रिय ही था। उसने एक नज़र मुझ पर डाली और एक नजर मेरे कमरे में लगे हुए हसीनाओं के मेले पर डाली।

मैंने बिना कोई भूमिका बांधे ही देवप्रिय को किचन में ले जाकर पिस्टल दिखाया।

"पिस्टल यही पर रखा है, जब से तुमने देखा" देवप्रिय ने मेरी तरफ देखते हुए बोला।

"मुझ से पहले पिस्टल रागिनी ने और मेघना ने देखा था, उन्हें ये पिस्टल इस गैस चूल्हे के नीचे दिखाई दिया था" मैने रागिनी की ओर देखते हुए बोला।

"मुझ से पहले मेघना ने इस पिस्टल को देखा था, क्यो कि मैं तो एक सरसरी नजर डालकर देख रही थी, लेकिन मेघना हर सामान को हटाकर अच्छे से देख रही थी" रागिनी ने भी तुरन्त बोला।

"ये मोहतरमा वही है क्या, जिन पर कल आपने पिस्टल चोरी करके ले जाने का इल्जाम लगाया था" देवप्रिय ने मेघना पर नजर डालते हुए मुझ से पूछा।

"नही वो मैडम तो ये है, देविका! अभी दो दिन पहले ही जमानत पर बाहर आई है" मैंने देविका की ओर इशारा किया।

"मैने पहले ही कहा था कि जासूस हो तो कोई न कोई झोल तो तुम्हारी कहानी में जरूर मिलेगा, पिस्टल आपके घर मे मौजूद है और कल रात से आपने जीना हमारा हराम किया हुआ है" देवप्रिय ने मेरी तरफ देखते हुए बोला।

"कहानी में झोल तो इन मैडम के आने से हो गया है जनाब!" मैने देविका की ओर इशारा करते हुए बोला।

"लेकिन अगर यही पिस्टल लेकर गई होती तो, अभी इस वक़्त ये पिस्टल आपके घर से ही कैसे मिल गया" देवप्रिय ने अनुराग भरी दृष्टि से देविका की ओर देखा।

खूबसूरती का यही फायदा होता है, सामने वाली बन्दी कितनी भी शातिर दिमाग क्यो न हो, लेकिन दिखने मे लगती मासूम ही है, पता नही किस बेवकूफ ने ये कहावत बनाई है कि खूबसूरत औरत का दिमाग उसके घुटनो में होता है, आपके इस सेवक का तो मानना था कि खूबसूरत औरत को देखकर अच्छे भले इंसान का दिमाग उसके टखनों में चला जाता है। :D

कुछ यही हाल इस वक़्त हमारे जनाब एसआई देवप्रिय का था जो, अभी तक देविका को उसी अनुराग भरी दृष्टि से निहार रहे थे।

"जी मैं अब भी ये समझ नही पा रहा हूँ कि मैने इन मोहतरमा के सामने अपना पिस्टल अपने बेड की दराज में रखा था, फिर आज ये पिस्टल मेरे किचन में कैसे मिला" मैंने असमंजस भरे स्वर में कहा।

"मैं बताता हूँ की ये सब कैसे हुआ! बरसात की रात में जब कोई इन जैसी बला की खूबसूरत लड़की एका एक सामने आकर खड़ी हो जाये और वो भी आपके बैडरूम में तो अच्छे खासे बन्दे के होशो हवास न केवल गुम हो जाते है, बल्कि वो कल्पनाओं के सागर में गोते लगाते हुए किसी हिल स्टेशन पर अपने हनीमून की भी प्लानिंग करनें लगता है, ऐसा ही कुछ आपके साथ हुआ है, उसी कल्पना लोक में विचरते हुए आप उस पिस्टल को हाथ मे लिए हुए ही किचन में पहुंच गए, वहां बकौल आपके आपने इन मोहतरमा की फरमाइश पर कॉफी बनाई, अब कॉफी आपने हाथ मे पिस्टल लेकर तो बनाई नही होगी, आपने उस
पिस्टल को वही किचन में गैस के पास रखा होगा, जो किसी चीज़ के लगने की वजह से सरक कर चूल्हे के नीचे चली गई होगी" देवप्रिय एक मिनट में ही अपनी कल्पना शक्ति का पूरा प्रदर्शन कर चुका था, और अपनी बात खत्म करने के बाद बन्दे ने देविका की ओर एक विजयी मुस्कान के साथ देखा।

देविका ने भी मुरीद नजरो से देवप्रिय की ओर देखा। आखिर देखती भी क्यो नही, जनाब ने सिर्फ दो मिनट में मैडम को हर आरोप से बरी जो कर दिया था।

"लेकिन जनाब मैं इतना भुलक्कड़ नही हूँ कि पिस्टल जैसी चीज को लेकर मैं इतना लापरवाह हो जाऊंगा और उसके गुम हो जाने की रिपोर्ट लिखवाने थाने तक चला जाऊँगा" मैने देवप्रिय की बात का पुरजोर विरोध किया।

"लेकिन मैंने तो सुना है कि आप काफी दिलफेंक किस्म के इंसान है, और लड़कियों के मामले में जहाँ देखी तवा परात, वही गुजारी सारी रात वाली कहावत में यकीन रखते है" देवप्रिय ने बड़ी ही अप्रिय सी लगने वाली बात को मुस्कराते हुए बोल डाला था।

"नही सर! रोमेश के बारे में ये बोलना सही नही है, बल्कि बहुत सी लड़कियां है, जो रोमेश को पसंद करती है,लेकिन रोमेश बाबू थोड़ा फ़्लर्ट जरूर करते है, लेकिन आज तक कभी फिसले नही है" इस बार मेघना ने इस मामले में मेरी पुरजोर वकालत की।

मै ऐसे आड़े वक़्त में मेघना का मेरा बचाव करते हुए देखकर उसकी और मुरीद नजरो से देखने लगा।

"चलिये! मै यहां पर कोई आपका चरित्र प्रमाणपत्र बनाने के लिए नही आया हूँ, अब मुद्दे की बात कर लेते है, सबसे पहले तो मामला आपके ही खिलाफ बनता है कि, आपने चोरी की झूठी रपट लिखवाई, अब इसके पीछे आपका उद्देश्य क्या था, जरा उस पर भी रोशनी डाल दो" देवप्रिय ने मेरी ओर देखते हुए बोला।

"देखिए सर! ये एक बहुत बड़ी साजिस है, जिसमे रोमेश सर को फंसाया जा रहा है" रागिनी ने काफी देर के बाद हमारी बातो में दखल दिया था।

"उस साजिस को साबित करनें के लिए आपको थाने आना पड़ेगा! रागिनी जी, अभी रात बहुत हो चुकी है और मैं पिछले छत्तीस घँटे से लगातार ड्यूटी पर हूँ" देवप्रिय ने रागिनी की तरफ़ देखते हुए बोला।

"मतलब आपने इन मैडम को बिल्कुल क्लीन चिट दे दी, आप इनसे इस बारे में कोई पुछताछ नही करेगें, की ये मैडम कल रात को यहां पर करने क्या आई थी, इसका यहाँ आने का उद्देश्य क्या था" रागिनी ने तल्ख स्वर में देवप्रिय से पूछा।

"देखिए मैडम! आप हर बार मुझे, मेरा काम सिखाने की कोशिश मत कीजिये, रोमेश साहब ने रिपोर्ट लिखवाई की पिस्टल इनके घर से चोरी हुआ है, और पिस्टल मिला भी रोमेश साहब के घर से ही है, तो इसका मतलब तो चोरी की रिपोर्ट ही झूठी ही थी, तो पूछताछ इन मोहतरमा से नही बल्कि रोमेश साहब से करना बनता है, ये तो मेरी शराफत समझिए कि मैं इन्हें अभी अपने साथ थाने लेकर नही जा रहा हूँ, आप लोग सुबह आ जाइए, वहाँ पूछताछ भी हो जायेगी और सारे सवालों के जवाब भी मिल जाएंगे" देवप्रिय ने भी उसी तल्ख़ी के साथ रागिनी की बात का जवाब दिया।

"ठीक है माईबाप, बन्दा कल सुबह आपके दरबार मे हाजिर हो जाएगा, लेकिन जाने से पहले इस गरीब की एक इल्तिजा पर भी गौर फरमा लीजिये' मैने देवप्रिय को प्रिय लगने वाले शब्दो से नवाजा।

"कैसी इल्तिजा" देवप्रिय ने मेरी आँखों मे झाँकते हुए बोला।

"इस पिस्टल को फोरेंसिक जांच के लिए अपने साथ ले जाइए, क्यो कि पूरे चौबीस घँटे ये बेजुबान मेरी आंखों से ओझल रहा हैं, बेचारे के साथ पता नही इस दरम्यान क्या क्या बीती होगी, किन किन हाथो ने इसके कानो को उमेठा होगा, तो मेरे हुजूर! इस पिस्टल की फॉरेन्सिक जांच करवा दीजिये" मैने नाटकीय अंदाज में देवप्रिय को बोला।

"तुमने क्या मुझे इतना अहमक समझा है कि मैं इस पिस्टल को तुम्हारे पास ऐसे ही छोड़ जाऊंगा, फोरेंसिक जाँच से ही तो अगर कोई कारनामा तुमने किया होगा, वो सामने आयेगा" देवप्रिय ने पूरी कमीनगी दिखाते हुए बोला।

"हुजूर एक बात और पूछनी थी, कल थाने में सिर्फ मुझे ही आना है या, इन तीन देवीयो को भी बुलाओगे" मैंने एक कुटिल मुस्कान के साथ देवप्रिय की कमीनगी का जवाब दिया।

"आ जाना आप भी तीनो देवियों, वरना साहब को लगेगा कि मैं किसी को बचाने की कोशिश कर रहा हूँ, और साहब की जानकारी हमारे महकमे के बड़े बड़े हाकिमों से है, तो हमे तो वैसे भी इस बार कदम फूंक फूंक कर उठाना पड़ेगा" ये बोलकर देवप्रिय किचन की तरफ पिस्टल को लेने के लिए बढ़ गया।

थाने मे हाजिरी

अगले दिन मैं थोड़ी देर से सोकर उठा था। पता नही रागिनी को मेरे जागने की शायद कोई महक आ गई थी कि, मेरे आँख खोलते ही उसका नंबर मेरे मोबाइल पर चमकने लगा था। मैंने तुरन्त रागिनी का फोन उठाया।

"तुम्हे एक बात बतानी थी, मेघना मुझ से कोई बीस सेकेण्ड पहले किचन में घुसी थी, मेरे साथ नही! मुझे लगता है मेघना ने ही उस पिस्टल को उस चूल्हे के नीचे प्लांट किया था" रागिनी जो मुझे अब बता रही थी, इसका अंदेशा मुझे रात को ही हो चुका था।

"मुझे भी इसी बात का शक है" मैने रागिनी की बात का समर्थन किया।

"मेघना शायद किसी बड़ी फिराक में है, मत भूलो की ये राजीव बंसल के साथ सौम्या को रास्ते से हटाकर शादी करने की फिराक में भी थी" रागिनी ने मुझें पुरानी बात याद दिलाई।

"तुम सही कह रही हो, इसका मतलब है, ये उस पिस्टल से कोई वारदात कर चुके है, और अब कभी भी उस वारदात को सामने लाकर मुझे फ़साने का इंतजाम कर सकते है" मैने एक और अपनी आशंका जाहिर की।

"बिल्कुल सही सोच रहे हो, लेकिन हमे सबसे पहले इस बात का पता लगाना होगा कि इनके निशाने पर कौन हो सकता है, और अभी उसकी क्या हालत है" रागिनी का दिमाग भी जापान की बुलेट ट्रैन से तेज चल रहा था।

"मुझे ऐसा भी लग रहा है कि ये दोनों पहले ही उस देवप्रिय को भी चुग्गा डाल चुकी है, तभी वो कल रात को देविका की ही भाषा बोल रहा था" मैंने रागिनी को बोला।

"मुझे इस वक़्त सौम्या की सबसे ज्यादा चिंता हो रही हैं, कही ये जेल से उसे ही ठिकाने लगाने के इरादे से तो बाहर नही आई है" मैने एक बार फिर अपना अंदेशा जाहिर किया।

"मुझे सौम्या के साथ साथ कुमार गौरव भी इनके निशाने पर लगता है" रागिनी ने अपना शक जाहिर करके शक के दायरे का और विस्तार कर दिया था।

"मैं एक बार सौम्या की खोज ख़बर ले लेता हूँ, तुम सीधा यही आजाओ, फिर कुमार के घर पर भी चलते है, और उस देवप्रिय की भी तो हाजिरी बजानी है" मैने आज के सारे काम रागिनी को गिनवा दिए।

"ठीक है मै दस बजे तक पहुंचती हूँ, तब तक तुम भी तैयार हो जाओ" ये बोलकर रागिनी ने तेजी से फोन काट दिया।

मैं उसे अपने घर से नाश्ता बनाकर लाने के लिए बोलने वाला था, लेकिन अपनी इच्छा तो दिल की दिल मे ही रह गईं थी।

मैने रागिनी के फोन काटते ही सौम्या को फोन लगा दिया था।

"इतनी सुबह सुबह कैसे याद कर लिया मेरे जेम्सबोंड" सौम्या ने चहकती हुई आवाज में बोला।

"बस तुम्हारी खैरियत जानने के लिए फोन किया था, तुम ठीक हो न" मैंने सौम्या को बोला।

"हाँ मैं ठीक हूँ! क्यो मुझे कुछ होने वाला था क्या, जो तुम इतने चिंता जनक लहजें में पूछ रहे हो" सौम्या ने मेरी आवाज की घबराहट को पहचान लिया था।

"वो तुम्हारी हमप्याली, हमनिवाली वाली मेघना भी जेल से बाहर आई हुई है जमानत पर, और देविका के साथ ही है वो, अभी उनके कुछ कुछ मंसूबे तो पता चल चुके है, लेकिन अभी पूरे मंसूबे नही जान पाया हूँ" मैने सौम्या के साथ पहेलियां बुझाई।

"वो क्या मेरी जान लेने के इरादे से जेल से बाहर आये है क्या" अब सौम्या के स्वर में भी उसकी चिंता झलक रही थी।

"मैने तुम्हे अपनी पिस्टल के गायब होने की बात बताई थी न, वो पिस्टल काफी ड्रामेटिक तरीके से मेरे ही घर से मिल गई है, और वो भी मेघना और देविका की उपस्थिति में" मेरी बात सुनते ही सौम्या की तरफ एक खामोशी पसर गई।


जारी रहेगा_____✍️


यहाँ तक की कहानी अच्छी है.

सारे करैक्टर भी अच्छे दिखाए गए हैं.

वैसे, कहानी का मेन करैक्टर, यानी की 'रोमेश' हिंदी के प्रसिद्ध रहस्य - रोमाँच लेखक श्री सुरेंद्र मोहन पाठक द्वारा रचित डिटेक्टिव जर्नलिस्ट 'सुनील' से heavily Inspired और उसी तरह तराशा हुआ लग रहा है.

कोई ना, अपेक्षा तो यही है की सुनील की तरह ही ये भी गहरे अँधेरे में भी राह तलाश लेगा.

इस कहानी के लिए ढेर सारी शुभकामनाएँ... ऐसा कहानी लिखो की पढ़ते ही दिल गार्डन - गार्डन हो जाए. 💐
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Bahut hi badhiya update diya hai Raj_sharm bhai....
Nice and beautiful update....
Thank you very much for your valuable review and support bhai :thanks:
 
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