Thanks , papa ne sahi tarike se beti ka seal thora hai.Bahut hi hot update. Prachi ki seal apne papa se tuti. Ufffff mazaa aa gaya.
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Let's see... U can see where story will go in next few updates.Gaand abhi marwana thik nahi Hai baad ke liye bhi kuchh rhne do
Mast chusai ho rahi hai.Update 16:
पापा ने प्राची को आवाज लगाई : बाबू , ओ मेरी रानी , उठ भी जा मेरी दुल्हनिया।
पापा की आवाज के साथ ही प्राची का निद्रा भंग हो गया । प्राची ने धीरे से अपनी आंखें खोली और महसूस किया कि वो नंगी ही अपने पति या पिता ,जो भी कह लो, के सामने पड़ी थी।
वो जरा सा झेप सी गई , रात के अंधेरे में जो भी पापा ने उसके साथ किया वो तो ठीक था , लेकिन दिन के उजाले में उसका शरीर कुछ ज्यादा ही देखने योग्य लग रहा था । प्राची चादर अपने ऊपर ले लिया और थोड़ा उठने की कोशिश की। हायय्ययय..... मेरी गुप्तांग ....प्राची को एक बहुत तेज दर्द महसूस हुआ । उसने अपने चूत की तरफ नजर घुमाई। अरे यार....ये तो पूरा शूज गया है। पापा ने जैसे ही अपने बेटी की मनोदशा देखी उनके दिल में एक शर्मिंदगी सी महसूस हुआ।
पापा: क्या हुआ प्राची।
प्राची : पापा , आह, बहुत तेज दर्द हो रहा है वहां पे ।
पापा: ओह , मुझे माफ के दे बेटी ,मै रात को कुछ जायदा ही भावना में बह गया था , होश ही नहीं रहा कि तू एक कुंवारी लड़की थी कल रात से पहले ओर थोड़ा आराम से करना चाहिए और मुझे इतना देर तक तुम्हारी योनि में घर्षण नहीं करना चाहिए था । एक तो सील टूटी कल तुम्हारी उसका दर्द और फिर आज ये दर्द । सॉरी बेटी मुझे माफ के दे ।
प्राची थोड़ी रूआंसी सी हो के बोली : पापा इसमें आप की गलती थोड़े ना है। आप को किसी स्त्री का स्पर्श बहुत दिनों से नहीं मिला था तो आप मुझे कल जी भर के चोद लेना चाहते थे और अपने किया वो वैसा ही। मैं आप पे गुस्सा भी नहीं हु। मेरा तो कर्तव्य था ,कल रात को आपका साथ देना । आप मेरे पति जो बन गए है अब से।
पापा: वाह बेटी अब तो तू सयानी बिटिया के जैसे बाते करने लगी है। मैं वादा करता हु कि अब से मैं तुझे बहुत प्यार करूंगा बेटी।
प्राची अपने पापा से लिपट जाना चाहती थी मगर चूत की दर्द ने उसे उठाने तक नहीं दिया ।
चल बेटी थोड़ा हिम्मत कर और उठ के नहा ले ।
प्राची अपना सारा दम लगा के उठना चाह रही थी , पर उसे तो ऐसा लग रहा था कि पापा ने उसका बदन तोड़ के रख दिया है कल रात। उसके शरीर में जान ही नहीं है। वो तो रात को पापा का साथ देने में इतना छड़ी थी कि उसका सारा उर्जा ही समाप्त हो गया हो जैसे ।
प्राची : आह , पापा मै उठ ही नहीं पा रही ।
पापा के पास अब कोई रास्ता नहीं था । पापा ने अपने दराज में रखे एक पेन किलर दवाई प्राची को खिला दी और कहा : बेटी तेरा दर्द थोड़े देर में छू मंतर हो जाएगा । अब के लिए चल मेरे साथ मै तेरी फ्रेश होने में मदद करता हु।
प्राची : पापा आप कैसे मेरी मदद कर पाएंगे ।
पापा: अरे मैं तुझे अपनी बाहों में उठा के ले चलता हु बाथरूम ।
प्राची थोड़ा शरमाई और बोला: पापा , नहीं नहीं ये मत करिए मुझे बहुत शर्म आएगी।
पापा : बेटी ,अब मैं तेरा पति हु , रात को तुझे पूरी की पूरी नंगी कर के तेरी आबरू से खेला हु। तेरी गहराई को अपने मर्दानगी से नापा है मैने । तेरे स्तनों का स्वाद चखा हु। तेरी बच्चेदानी ने मेरा आखरी बूंद तक निचोड़ा है और मैने उसे अपने बिज से सींचा है। अब मुझसे क्या शर्माना मेरी रानी ।आ मेरी बाहों में ।
इतना बोल के पापा ने प्राची का चादर हटा के उसके बदन को फिर से नंगा कर दिया।
उसे अपने बाहों में भर के जकड़ लिया और उठा दिया । वो नग्न १९ साल की यौवन से भरी ,शर्माई सी, पापा की बाहों में झूल सी गई।
उसे पापा ने बाथ रूम में ले जा कर कमोड पे बिठा दिया और बोला , बेटी जब तेरा हो जाए तो मुझे बुला लेना , खुद से उठाने की कोशिश न करना ।
पापा बाथ रूम से बाहर निकल गए। वो बाहर तो आ गए पर उनका लन्ड फिर से हिचकोले मार के तन गया । पूरे ८ इंच लंबा विकराल लन्ड।
उधर १० मिनट बाद प्राची ने पापा को आवाज लगाई : पापा मेरा हो गया , आप आ जाइए ।
पापा अंदर गए तो प्राची अपने नित्य क्रिया से निपट चुकी थी और कमोड से उठने की कोशिश कर रही थी , पापा ने एक स्टूल जो रूम में पर था उसे बाथ रूम में लगा दिया और प्राची को उसपे बिठा दिया , उसको ब्रश कराया , और फिर नहाने की तैयारी में लग गए ।
पापा : बेटी आज बरसो बाद मन कर रहा है कि तेरे साथ नहा लु। तेरी मम्मी के साथ वो मैने बहुत दिनों से नहीं नहाया था ।
प्राची की ये बहुत रोमांटिक लगा: जी पापा , आप जैसा ठीक समझे ।
पापा ने प्राची के हामी सुनी और उनका तना हुआ लिंग और ऊफान मरने लगा ।
उन्होंने तौलिया खोल के लन्ड को आजाद कर दिया , अपने पत्नी बनी बेटी के सामने । रात को पापा के साथ सुहागरात तो जरूर हुई थी प्राची की , पर शर्म के मारे रात को वो पापा का औजार ही नहीं देख पाई थी। उसके मुंह से निकल गया : बाप रे......पापा अपने इतना बड़ा घुसाया था मेरी गुप्तांग में।
पापा: हां बेटी ,रात को इसी ने तेरी चूत द्वार तोड़ा था ।
प्राची अपने आप पे विश्वास नहीं कर पा रही थी कि इतना विकराल लण्ङ उसके छोटी से गुप्तांग में गई कैसे ।
पापा को अब नंगी प्राची को देख के बहुत ज्यादा जोश चढ़ गया ,लेकिन वो अभी चाह के भी प्राची में प्रवेश नहीं कर सकते थे । उन्होंने एक अलग उपाय निकाला ।
पापा: प्राची मेरी जान , मेरा फिर से मन कर रहा है , देख रही है न कितना अकड़ के खड़ा है ये तेरे नग्न दर्शन मात्र से । इसे थोड़ा शांत कर दोगी।
प्राची अंदर से दहल गई : पापा...ये कैसे ...नहीं नहीं ,पापा ...रहम करिए मुझ पे ....मेरी ये हालत नहीं है कि ये मै ले पाऊंगी अभी। बहुत दर्द हो रहा है पापा मेरी गुप्तांग में । प्लीज़ पापा...मुझे छोड़ दीजिए ।
पापा: अरे पागल..., इसे हमेशा तेरे गुप्तांग में डाल के ही शान्ति नहीं मिलेगा मुझे । अभी तो मैं इसे अगल तरीके से तेरे अंदर डालूंगा ।
रची : कैसे पापा?
पापा: तेरे दोनों होंठों के बीच से ये तेरे अंदर जायेगा और तू इसे चूस चूस के शान्त कर सकती है।
प्राची के लिए एकदम नया सा बात था। पापा अपना लन्ड उसके मुंह में देने की बात कर रहे थे । पर उसे ये अपने चुत में लेने से ज्यादा आसान लगा ।
प्राची : अच्छा पापा ,तो ये करना चाहते है आप मेरे साथ।
पापा: हा मेरी सैक्सी बेटी , मेरी मदद कर ।
पापा ने वो स्टूल एकदम झरना के नीचे लगा दिया और पानी चला दिया । प्राची का बदन भीगने लगा । पापा भी प्राची के सामने आ गए और अब प्राची का मुंह पापा के लिंग के एकदम सामने था ।
लो बेटी , थोड़ा अपना मुंह खोलो और इसे अंदर अपने मुंह में जाने दो । मुंह में ले के , लॉलीपॉप समझ के इसे वैसे ही चूसना ।
प्राची ने वैसा ही किया । वो पहले अपने जीभ से पापा के लिंग का सुपारा को छुआ।
उसे पापा के लन्ड का स्वाद थोड़ा कसैला सा लगा । मगर लण्ङ से निकल रहा प्री कम का सुगन्ध प्राची को वो पागल कर रहा था । पापा ने प्राची के दोनों चूची अपने हाथों से थाम लिया और दबाने लगे । प्राची धीरे धीरे पापा का लौड़ा को अपने मुंह में इंच बाई इंच अन्दर लेती रही । लण्ङ की मोटाई से प्रज्ञा का मुंह एकदम ज्यादा ज्यादा खुल रहा था । वो आराम से पापा का लिंग का रस पान करने लगी । Sruuuppp...sruuppppp, chapppppppp-chapppp, gooooooo... गोओओप्प की आवाज और झरने से पानी गिरने की आवाज से पूरा बाथ रूम गूंज उठा।
पापा को परम आनंद महसूस होने लगा था । अपनी बेटी से शादी कर के उन्होंने बहुत सही फैसला किया था । एक दम मखमली गुलाब की पंखुड़ी जैसे होंठों से उनकी बेटी पापा का लन्ड अपने मुंह में लिए जा रही थीं।
बहुत अद्भुत नजारा था ये ।
पापा ने धीरे धीरे अपनी रफ्तार बढ़ाई और फुल जोश में अपना लण्ङ अन्दर बाहर प्राची के मुंह में करने लगे । प्राची किसी अल्हड़ लड़की के जैसे लन्ड चूस रही थी , इसे पता चल रहा था कि उसने ऐसा पहली बार किया है । पापा का लिंग अपने बेटी के हलक तक चला जाता कभी ओर बीच बीच में प्राची का सांस तक अटक कर रह जाता था , फिर पापा अपना लौड़ा बाहर खींच लेते थे , और उसके जान में जान आती थी।
गप्प गप्प , गुप्प गुप्प की आवाज से लन्ड अब सटा सट प्राची के मुंह में जा रहा था । लगभग १० मिनट के अंतराल के बाद पापा इतना मखमली एहसास के आगे हार गए और उनका पानी अपनी पुत्री के गले में ही उतर गया। प्राची का मुंह पापा के गरम वीर्य से भर गया । उसे पता नहीं था कि वो उसे क्या करे , बाहर थूक दे या गटक जाए ।
पापा उसकी इशारे को समझते हुए उसे इशारे में ही बोला कि गटक जाओ।
प्राची तो नादान थी , वो पापा के कहे अनुसार एक घुट में सारा पानी पी गई। पापा बहुत खुश हुए क्योंकि उनका लण्ङ का स्वाद अब उनके बेटी को पता चल गया था । कल तो सारा पानी पापा ने प्राची के चूत को ही पिलाई थी । आज सारा पानी प्राची के हलक से नीचे गया था ।
प्राची को पापा का गरम पानी पी के थोड़ा अजीब जरूर लगा। पर अब वो पापा को मन थोड़ी कर सकती थी।
पापा: बेटी ,कैसा लगा प्रेम रस का स्वाद ।
प्राची : पापा , अच्छा लगा । बहुत गर्म था ।
पापा: थैंक यू मेरी बच्ची, तूने मेरे अरमान पूरे के दिए । आ मै तुझे नहा देता हु अब।
पापा ने प्राची का हर अंग रगड़ रगड़ के उसे नहाया । अब उनका हाथ , प्राची के नंगी पीठ पर फिरता, तो कभी चूची की गोलाई नापता । कभी चूत पे उगे हल्के हल्के बालों को सहलाता तो भी चूत के दाने को छेड़ते । पापा का हाथ प्राची की मनोदशा खराब करने लगा , वो परम सुख के तरफ बढ़ने लगी । ५ मिनट के ,पापा के हाथ से , छुअन के बाद ही प्राची के चूत गीली हो के बहने लगीं, उसके मुंह से अचानक की एक लंबी आह निकली , उसका शरीर अकर स गया। पापा समझ गए प्राची झर चुकी है।
अब दोनों बाप बेटी पूरा नहा के एक दूसरे को तौलिया से सूखने लगे । पापा ने प्राची के हर अंग को तौलिया से पोंछा, ओर बाहों में भर के ही बाहर आ गए । प्राची को पापा ने कपड़े खुद के हाथों से पहनाया और प्राची के मांग में सिन्दूर भरा । प्राची ने पापा को प्रणाम किया और पापा के सहार ले के बाहर की ओर चल दी। पेन किलर के कारण ही वो थोड़ा उठ पाई और पापा के सहारा ले के , लड़खड़ा के चल प रही थी।
रूम का गेट खुलते ही दादी पूजा के लिए दोनों को ले के पूजा घर की ओर चल दी। दादी पोती की ये दशा देख के अब चकित नहीं हुई थी ,क्योंकि वो प्राची की हालत उसे सोते हुए ममे ही देख ली थी। गरिमट थी कि वो अब चल प रही है। दादी ने सोचा पूजा के बाद वो प्राची से थोड़ा बात करेगी और उसे थोड़ा आराम मिले उसका वो कुछ उपाय करेगी।
३० मिनट बाद पूजा समाप्त हो चुका था । और घर में सभी नाश्ता करने चल दिए ।
Dadi badi mast hain. Apni poti ko apne bete se chudwa rahi hain.Update 17:
जब प्राची बाहर आई लड़खड़ाते हुए , प्रज्ञा को समझ आ गया कि दीदी की चल पापा ने ही बिगड़ी है।
प्रज्ञा दादी से धीरे से बोली : दादी , दीदी को क्या हुआ ,रात के सेक्स का असर है क्या ?
दादी: अरे बेशर्म अपने मां के बारे में ऐसे बोलती है।
प्रज्ञा हंसने लगी।
उसने मजाक में ही प्राची के कान में जा के बोला : क्यों दीदी, पापा ने ज्यादा मेहनत कर दी क्या रात को।
प्राची : धत् बदमाश।
दोनों थोड़ा हंसने लगे ।
नाश्ता करते टाइम प्रज्ञा अपने दीदी और पापा को बार बार देख रही थी । उसे यकीन नहीं हो रहा था , जिस दीदी और पापा को वो अभी इतने शांति से खाते हुए देख रही थी वो दोनों रात में क्या क्या ,ओर कितना जबर्दस्त गुल खिला रहे थे । कितने वाइल्ड तरीके से रात को दीदी चीख रही थी। पापा को देखो जरा कितने शरीफ बन के खा रहे है। रात को तो दीदी की जान ही निकाल दी थी इन्होंने ।
उधर दादी भी उधेड़ बुन में थी कि प्राची का वो दर्द में कैसे मदद करे ,जिससे वो जल्दी अपने पति और पिता के साथ सहवास में भाग ले पाए और शंभोग कर पाए।
उधर पापा और प्राची चुप चाप खाना खा रहे थे।
खाना के बाद पापा ऑफिस निकल गए । और प्रज्ञा वी अपने रूम में अपना होमवर्क करने चली गई । उसके १२ के एग्जाम जल्दी ही होने वाले थे ।
दादी प्राची के ले के अपने घर ने आ गई ।
दादी : प्राची , मेरी बच्ची। कैसी रही पहली रात पापा के साथ।
प्राची थोड़ा मुस्कुराते हुए : अच्छी रही दादी।
दादी : सच सच बता बेटी ,मेरे सामने कुछ छुपाने की जरूरत नहीं है ,मै ही तुम्हारी दादी और मै ही तुम्हारी मां हु।
प्राची : दादी वो थोड़ा ....
दादी : क्या थोड़ा ?
प्राची : दादी वो थोड़ा दर्द हो रहा है रात के बाद वह पे ।
दादी : कहा पे बेटी ,मैने बोला न खुल के बता ।
प्राची : दादी योनि में ।
दादी : हाय मेरी बेटी , यानी पापा ने मिलन कर ही लिया तेरे साथ।
दादी को तो पता ही था कि पापा ने प्राची के साथ कितना सेक्स किया है ,लेकिन प्राची शर्मिंदा न हो ,इसलिए दादी ये नहीं बताना चाहती थी कि जब प्राची सो रही थी तो दादी ने उसके शरीर का अवलोकन किया था ।
प्राची : हां दादी ,हुआ था हमारा मिलन । मेरी तो हालत खराब कर दी है पापा ने ।
दादी : क्यों मेरी बच्ची, ऐसा क्या हुआ ?
प्राची : पता है दादी , पापा ने तो जबरदस्ती ही मेरी योनि में अपना दाल दिया ,मुझे बहुत दर्द हुआ दादी । मुझे लगा किसी ने चाकू से मेरे योनि को चीर दिया है। पापा का वो ,गरम लोहे का सरिया लग रहा था दादी ।
दादी : देख बाबू , तू अभी- अभी जवान हुई है । पहली बार था ,इसलिए तुझे लगा कि पापा तेरे साथ जबर्दस्ती कर रहे है । लेकिन हर लड़की को पहली बार ऐसे ही कोई पुरुष हो हैंडल करना पड़ता है । क्योंकि पहली बार में थोड़ा दर्द होता है , ओर लड़की उससे डर जाती है। अब सब सही होगा । मुझे पता है तुझे अब वो दर्द होगा वहां। पर तू घबरा मत ,ये सब नॉर्मल बात ही है।
प्राची : ओह ओक दादी।
दादी: अच्छा बेटी ये बता , पापा ने कंडोम तो नहीं पहना था ना।
प्राची इतना पर्सनल सवाल से शर्म से पानी पानी हो गई : नहीं दादी , ऐसे ही किया उन्होंने ।
दादी : चलो , भगवान का लाख लाख शुक्र है कि उसने मेरा कहा मना।
प्राची : दादी ,अपने पापा को कंडोम पहनने से क्यों रोका ।
दादी : तेरे लिए मेरी बच्ची, तेरा पहला संभोग था , तुझे उसका पूरा आनंद मिलना चाहिए था । जब तक नंगा लिंग ,तेरी योनि के दीवारों पे नहीं रगड़ खाता ,तो तुझे असली संभोग का पता कैसे चलता ।
प्राची : अच्छा दादी , थैंक यू।
प्राची दादी का धन्यवाद इसलिए किया क्योंकि वो देख रही थी कि दादी उसका कितना ख्याल करती है।
दादी: हम्ममम...अच्छा , ये बता , वो पापा ने बीज अंदर गिराया ना?
प्राची : जी दादी , उन्होंने सारा अंदर ही गिरा दिया ।
दादी : पांचों बार ?
प्राची : दादी ,आपको कैसे पता पापा ने ५ बार मेरे साथ मिलन किया ?
दादी इस सवाल से पकड़ी गई । अब झूठ बोलना सही नहीं था ।दादी ने सबेरे वाली सारी बात प्राची को बता दिया ।
प्राची दादी से लिपट गई और थोड़ा रोने जैसा मुंह बनाने लगी । दादी आप मेरे कारण पापा को वो डांट सुना दिया । पापा को माफ कर दो दादी । वो कल रात बहुत तड़प रहे थे । मेरे साथ मिलन करने में उनको बहुत सुकून मिल रहा था और वो अपने आप को रोक ही नहीं पा रहे थे । इसलिए मैने भी उनको नहीं रोका । मैने उनका साथ दिया दादी , गलत नहीं किया न मैने ?
दादी : नहीं बेटी बिल्कुल गलत नहीं किया । अच्छी बात इन सब में ये रही कि पापा तेरे गुप्तांग को पांच बार अपना वीर्य पिलाया है। मतलब तेरी प्रेग्नेंसी का संयोग बन सकता है ।
प्राची बस सर झुका के थोड़ा सा मुस्कुरा दी।
दादी : अब शर्मा क्यों रही है , बोल बनेगी न अपने पापा की बच्चे की मां।
प्राची : जी दादी , पापा और आपको जो ठीक लगे ।
दादी : शाबाश मेरी बच्ची, पर ये मत समझ के एक दिन से हो जाएगा ये सब , पापा का तुझे अब हर रात ऐसे ही साथ देना होगा । पापा बार बार प्रयास करेंगे ,फिर जा के कहीं होगा कुदरत का करिश्मा ।
प्राची समझ रही थी दादी किस प्रयास की बात कर रही थी , उसने बस सर हिला के हामी भर दी।
प्राची : दादी , पर मेरे गुप्तांग में बहुत दर्द हो रहा है , पापा ने सबेरे पेन किलर भी दिया था । तभी में यह बैठी हु । मै अब पापा के साथ ये सब नहीं निभा पाऊंगी दादी ।
दादी : हां मैं समझ रही ही बेटी , मै ने तेरे पापा से कह दिया है के तेरे बिल्कुल ही ठीक हो जाने पर ही अगला मिलन होगा।
दादी : रुक बेटी मैं थोड़ा तेरी राहत का जुगार करती हु । एक बार सेक देती हु , तुझे आराम मिलेगा ।
प्राची खुश हो गई ।
दादी ने पानी लाया और फिर दरवाजा बंद कर दिया कि प्रज्ञा को कुछ पता न चले , और दादी ने प्राची से बोला : आ बेटी , थोड़ा अपना साड़ी उठा और पेंटी खोल , सेक देती हु मैं।
दादी प्राची की योनि पहले भी देख चुकी थी तो उसे इस बार इतना शर्म नहीं आया ।
उसने पेंटी तो पहनी भी नहीं थी, इतना दर्द था ।
प्राची : दादी मैने पेंटी नहीं पहनी।
दादी : वाह,फिर जल्दी आ, और साड़ी उठा अपनी ।
प्राची ने वैसा की किया , उसका फूला हुआ चूत दादी के सामने खुल गया ।
दादी ने चूत का अवलोकन किया । योनि द्वार बड़ी हो चुकी थी और पहले से ज़्यादा खुली हुई लग रही थी , योनि के ऊपरी हिस्सा फूला हुआ था और लाल हो गया था । ये सब प्रमाण दे रहा था कि ये योनि अपना पहला चुदाई करवा चुका है।
दादी ने गरम पानी की पट्टी से हल्का हल्का चूत पे फिरने लगी और प्राची को बहुत राहत मिला ।
दादी : आज से ,जब तक तेरा दर्द ठीक नहीं होगा , पापा को इसके पास भी नहीं आने देना। पति को जितना तड़पाएगी वो उतना ही प्यार करेगा , थोड़े नखरे भी करना, हर बात ऐसे ही मत मान जाना ,जैसे रात में मान गई थी , देख पापा ने कैसे तेरी चूत की हालत कर दी है।
प्राची को बहुत सुकून मिल रहा था ।
पूरा दिन दादी ने रह-रह के ४-५ बार ऐसे ही प्राची के योनि की सिकाई करती रही। शाम तक प्राची का योनि का सूजन थोड़ा कम होने लग था।
Ab Prachi tayyar karegi Prgya ko apne papa se chudwane ke liye.Update 18:
शाम को पापा घर आ चुके थे । सबने मिल के डिनर खाया और पापा और प्राची को फिर से एकांत मिल गया । वो दोनों उसी रूम में और बेड पे वापस आ गए थे ,जहां पापा ने कल बेदर्दी से प्राची की गुप्तांग भोगा था।
दादी ने पहले ही बोले था पापा से : बेटा , मेरी बहु के साथ , जैसा मैने बोला था , अभी कुछ दिनों तक कुछ मत करना । तुझे अपने आप पे कंट्रोल करना पड़ेगा बेटा।
पापा एकांत में आते ही एक जिम्मेदार पति की तरह , प्राची का हाथ अपने हाथ में लिए और बोला : बेटी मै कल के लिए अभी वो शर्मिंदा महसूस कर रहा हुआ। काश मैं तुझे कल जानवरों की तरह न पेला होता । तो आज रात वो मै तेरे योनि की प्यास मिटता ।
प्राची : नहीं पापा , आप कल की बाते भूल जाएं । आप बहुत अच्छे पापा और पति दोनों है मेरे लिए । आप अगर जानवर होते तो ,आज मुझे दर्द है ये जानते हुए भी, मेरे ऊपर चढ़ ही जाते। आप अलग है पापा। आप बहुत केयरिंग पति है।
पापा और बेटी प्यार में थे । दोनों की उस रात देर तक रोमांटिक बाते होती रही । ये बाते यह प्रमाण दे रही थी । की प्राची और पापा , अब पति और पत्नी के बंधन अच्छे से बंध रहे है। ओर अपना पुराना रिश्ता भूल के आगे बढ़ गए है।
उस रात पापा ने कुछ व नहीं किया । वो बस प्राची की होठों को चूसते रहे और कपड़े के ऊपर से ही अपने बेटी का गोलाई को दबाते रहे और फिर दोनों बाप बेटी लिपट के नींद के गहराई में खो गए।
अगले दिन प्राची के चाल में थीरा सुधार था । वो अब भी लंगड़ा के ही चल रही थी मगर आज बिना किसी सहारे के ।
दादी आज भी अपने पोती की वैसे ही सिकाई करती रही। और इसी तरह २ दिन बीत गए और अब चूत का सूजन एक दम खत्म सा हो गया था । प्राची की चाल नॉर्मल तो नहीं हुआ था । पर अब बहुत सुधार गया था ।
उस दिन प्राची, प्रज्ञा के कमरे में उसे दूध देने गई ।
प्राची : प्रज्ञा ,ये दूध पी लो , कितना मेहनत कर रही है एग्जाम के लिए ।
प्रज्ञा : जी दीदी....., मेरा मतलब है मां।
प्राची ओर प्रज्ञा का रिश्ता बदल चुका था ।
प्राची कमरे से बाहर जाने ही वाली थी । की प्रज्ञा ने उसे आवाज दिया : मां, जरा इधर आइए न मेरे पास ।
प्राची ने प्रज्ञा के मुंह से मां सुन के गदगद हो गई।
प्राची : हां बोल न प्रज्ञा।
प्रज्ञा: मां , आप ठीक तो है ना।
प्राची : हां बाबू ,मै बिल्कुल ठीक ही । तू ऐसा क्यों पूछ रही है?
प्रज्ञा : वो आप ३ दिन से ऐसे लंगड़ा लंगड़ा के चल रही है।
प्राची : वो तो बस , थोड़ी पैर में चोट लग गई थी ।
प्राची अभी वो सोच रही थी प्रज्ञा वही छोटी बच्ची है जिसे कुछ वी पता नहीं , पर प्रज्ञा तो दादी से अब कुछ जान चुकी थी ।
प्रज्ञा : अच्छा ,पापा ने आपको दर्द आपके वहां ( चूत की तरफ इशारा कर के ) में दिया और चोट आपको पैर में लग गई । ये कैसे मां, सर समझाइए ।
प्राची ये नहीं सोच रही थी कि प्रज्ञा अब ये सब पता होगा । वो आश्चर्य से भर गई।
प्राची : अरे ,तुझे ये सब किसने बताया , तू यही सब पढ़ रही है क्या आज कल।
प्रज्ञा : हां पढ़ तो रही हु ही , पर दादी ने भी सब बताया मुझे ।
प्राची समझ गई दादी ने प्रज्ञा को वो बिगाड़ दिया है। वो अंदर से थोड़ा मुस्कुरा के रह गई।
कहानी अभी जारी रहेगी.....।
Ufff bahut hi sexy hai update.Update:19
प्राची और प्रज्ञा की इसी तरह की बाते थोड़े देर चलती रही ।
लगभग, सोने का समय हो चला था, कि दादी ने आवाज लगाई : प्रज्ञा, बेटी सोने का समय हो चला है , सो जा और दीदी को भी जाने दे पापा के कमरे में ।
प्रज्ञा : (प्राची से मजाक में) दीदी , लगती है दादी पापा की तरफ है , वो बस आपको पापा के सामने रखना चाहती है। ताकि पापा को आप हर समय पत्नी सुख देती रहे ।
प्राची : हट बदमाश , अपने पापा के बारे में कोई ऐसे बोलता है क्या ?
प्रज्ञा : अच्छा , ये मत भूलो दीदी , पापा अब मेरे जीजा जी भी हो चुके है, और साली - जीजा के रिश्ते में तो, थोड़ा मजाक चलता ही है न दीदी।
प्राची : हां हां, बारी आई साली बनाने वाली । चल अब सो जा ।
प्रज्ञा : हा मै तो सो ही रही हु मेरी प्यारी दीदी , पर मां तो पापा को खुश करेगी अब रात भर।
प्राची थोड़ा हसने लगी : अरे तू तो कुछ ज्यादा ही मजाकिया हो गई है। लग रहा है , तेरी इन सब बातों में ज्यादा ही रुचि बढ़ रही है। अभी तू ये सब में ध्यान मत दे , अभी सिर्फ १८ की है , ध्यान लगा के एग्जाम की तैयारी कर ।
प्रज्ञा : आप भी तो १९ की ही है। आपको तो इन सब में रुचि के साथ साथ अनुभव भी हो गया है , पापा.....ओह सॉरी, मेरे जीजा जी का मोटा तोप से जंग लड़ने का ।
प्राची अपने छोटी बहन की इस तरह के डबल मीनिंग बातो से शर्मा के पानी पानी हो गई ।
प्राची : तू पीटेगी किसी दिन मेरे हाथों ,इतनी बेशर्म जैसी बाते की तो । चल अब सो जा चुप चाप , बड़ी आई तोप से जंग लड़ने वाली । एक बार तोप से सामना हो गया, तो वही दम तोड़ देगी ।
अंत का जो वाक्य था, वो अनायास ही निकल गया प्राची के मुंह से ,उसे ये बोलना नहीं चाहिए था। ऐसा प्राची को वो बोलने के बाद महसूस हुआ ।
प्रज्ञा : अरे क्यों दीदी, अपने तो दम नहीं तोड़ा आप तो हर दिन जंग लड़ती होगी पापा के तोप के साथ।
प्राची : (थोड़ा उदास हो के) : नहीं प्रज्ञा , मेरे अंदर, पहले जंग के बाद ही कोई ताकत नहीं बचा है, अब जंग लड़ने का ।
प्रज्ञा : मतलब दीदी , आप कहना क्या चाहते है ? आप पापा के साथ खुश नहीं है?
प्राची : अरे नहीं नहीं , ऐसी बात नहीं है बहना , मै तो अपने आप से खुश नहीं हु।
प्रज्ञा : ऐसा क्या हो गया दीदी? पापा ने कुछ कहा क्या?
प्राची : आरे नहीं बाबा , पापा तो मेरी इतनी केयर करते है, कि मुझे उनको अपने साथ मिलन ना करने देने के लिए, दुख होता है।
प्रज्ञा : मतलब दीदी ?
प्राची : मतलब कुछ नहीं , कद्दू । तू सो जा चुप चाप, मै चली अब , बहुत बाते हो गई इन सब की ।
प्रज्ञा : दीदी , प्लीज, तुम्हे मेरी कसम , पूरी बात बताओ न मुझे , आप खुश क्यों नहीं है पापा के साथ ?
कसम देके प्रज्ञा ने प्राची को सब बताने से मजबूर कर दिया ।
प्राची : अरे यार ,तूने कसम देके सब चौपट कर दिया । दरअसल , तू जो समझ रही है कि मैं हर दिन पापा का तोप के साथ जंग लड़ती हु । वो नहीं हो रहा । पापा ने पहली रात में ही ऐसी चढ़ाई की थी, मेरे किले पे, की उसकी दीवारें ढह गई, जो अभी तक बन नहीं पाई है ।
प्रज्ञा को डबल मतबल वाली बाते समझ नहीं आ रही थी अब । प्रज्ञा : दीदी, ऐसे पहली मत बुझाओ , सच सच बताओ न सही से की क्या हुआ है।
प्राची : अरे मेरी बहन , मतलब मैं पापा के साथ पहली रात के बाद से मिलन नहीं की हु।
प्रज्ञा : चौंकते हुए , ऐसा क्यों दीदी , पति पत्नी हो अब तो अपलोग , अब दूर क्यों रहते हो।
प्राची : अरे पापा ने पहले दिन ही मेरे साथ इतनी जबरदस्त मिलन कर दिया, कि मेरे गुगु का हालात खराब है अभी तक, उसमें बहुत सूजन आ गया था।
प्रज्ञा: मतलब आपके योनि में अब तक दर्द है, पापा के साथ पहली रात के बाद?
प्राची : हां।
प्रज्ञा : अरे दीदी, मैने तो सोचा आपका और पापा का मिलन हर दिन हो रहा है। मुझे पता ही नहीं था कि आप तकलीफ में है।
प्राची : तकलीफ कुछ नहीं , बस एक सप्ताह दादी ने, पापा और मुझे, मिलन से मना किया है ।
प्रज्ञा : ओह , दीदी मै भगवान से मनाऊंगी की आप जल्दी ठीक हो जाओ, और पापा से दुबारा फिर से मिलन कर पाओ।
प्राची छोटी बहन के मुंह से ये सब सुन के एक दम थरथरा गई । उसे बहुत शर्म आने लगा कि उसकी छोटी बहन उसको पापा के साथ चोदाई की दुआ मांग रही है।
प्राची : ठीक है , अब सो जा ।
इतना बोल के प्राची जाने लगी । तभी फिर से प्रज्ञा बोल पड़ी : दीदी, क्या सच में पापा का बहुत मोटा है ? मैने तो अभी तक किसी का देखा भी नहीं है।
प्राची : हंसते हुए , हां तेरी तो बहुत उमर हो गई न कि, तूने अब तक किसी का नहीं देखा ? पागल सो जा चुप चाप , जब शादी होगी तेरी भी, तो देख लेना ।
प्रज्ञा : और दीदी , ये नहीं बताया आपने , की मेरे जीजा जी का ज्यादा मोटा है क्या ? हाहाहाहाहा।
प्राची झेप गई: हट बदमाश ।
बस इतना बोल के भाग गई। प्रज्ञा समझ गई थी कि पापा में कुछ तो बात है। अभी उसे दीदी के लंगड़ा के चलने का राज का पता चल गया था । मतलब , दीदी पापा का लिंग, अपने यौवन द्वार में लेने के कारण, दर्द से लंगड़ा रही थी ? हाय पापा का बहुत मोटा है क्या ? प्रज्ञा के दिल में भी पापा के प्रति, थोड़ी भावना आने लगी ।
वो तो पहली रात को दीदी का चीख सुन के ही आ गया था । लेकिन आज दीदी के द्वारा, पापा का ऐसे वर्णन करना, उसके लिए आग साबित हुआ । वो जलने लगी थी, अपने दीदी से , क्योंकी उसकी दीदी को सेक्स का मजा मिल रहा था, और उसे नही।
मगर अगले ही पल उसके मन में खयाल आया , कि पापा को तो दीदी का ही सहारा मिला है। उनका जीवन कितना कष्टकारी हो गया था । दीदी ने ही उन्हें संभाला है । नहीं नहीं मै पापा के प्रति गंदे खयाल नहीं ला सकती, मेरी दीदी ने बहुत बड़ा बलिदान दिया है, घर को बचाने के लिए , मै दीदी का ही घर नहीं तोड़ सकती । मुझे पापा से इन सब बातों से दूर ही रहना चाहिए । हा मुझे पापा को पापा ही रहने देना चाहिए।
प्रज्ञा ने अपनी सोच को सुलझा लिया और अपने मन से पापा के बारे में जो भी सेक्सी विचार थे, वो उसे हटा चुकी थी।
उधर प्राची पापा के कमरे में पहुंच गई , आज ,५ दिन हो गए थे उन दोनों के मिलन की रात हुए । उस दिन से पापा, कभी प्राची से मुठ मरवा लेते, तो कभी प्राची के मुंह में लिंग प्रवेश कर के मजा लेते थे ।
प्राची अंदर आ गई ,पापा बेड पे लेटे हुए थे पहले से ही। आते हुए प्राची ने दरवाजा लगा दिया और आ के अपने पापा के बांहों में समा गई। पापा से लिपट गई । मगर पापा का तो लिपटने से आग और भड़क गया । बेचारे के पास अब पत्नी तो थी मगर एक रात की गलती के कारण , पत्नी होते हुए भी उसको भोग नहीं सकते थे।
पापा: बेटी , मैं मिलन के लिए तरस रहा हु , प्यास बढ़ती ही जा रही है , मुझसे अब और बर्दाश्त नहीं होता मेरी सजनी । क्या सच में अभी तक तेरी दर्द ठीक नहीं हुई है या तू मुझे बस तड़पा रही है ? अब तो हमारे मिलन को ४ दिन हो गए है।
प्राची : मेरे पतिदेव , और मेरे प्यारे पापा , सच में अभी तक दर्द है , अपने पहले दिन ही, बहुत बेदर्दी कर दी मेरे साथ , अब नुकसान आपका ही है। आपने ही जबरदस्ती की थी । अब उसी का फल है कि आपको प्यासा रहना पड़ेगा ।
पापा दूरी नहीं सह पा रहे थे : बेटी प्लीज, एक काम कर न , थोड़ा लेके देख न अंदर , अब ४ दिन हो चुके है , तुझ उतना दर्द नहीं करेगा ।
प्राची : ना बाबा ना, पापा आपको दादी ने भी बोला है ना कि आपको नहीं करना है १ सप्ताह तक ।
पापा: हां बेटी , पर मन को कैसे काबू करूं। मेरे बस में नहीं है , देख न कितना टाइट खड़ा हो गया है तुझे अपने बांहों में पा के ।
पापा ने अपनी पैंट उतरते हुए बोला ।
पापा एकांत में अपने बीवी के साथ नीच से नग्न रहना पसंद करते थे ।
प्राची : पापा ,मै आपकी तड़प समझ रही हु । मगर मुझे आज भी दर्द हो रहा है पापा अंदर , सूजन भले ही खत्म हो गई हो।
पापा के पास कोई चारा नहीं था । उनका लन्ड ठनक रहा था काम अग्नि से । वो बस प्राची में प्रवेश पाना चाहते थे ।
पापा : प्राची , मै मर जाऊंगा प्राची ,मुझे ये तड़प सही नहीं जा रही । तेरे बदन की गर्मी मुझे पागल बना रहे है , चल अब कुछ नहीं तो थोड़ी चुसाई ही कर दे इस जालिम का।
पापा ने अपना लन्ड प्राची के मुंह की तरफ़ बढ़ते हुए बोला । प्राची के पास कोई चारा नहीं था ,पापा जो अब उसके पति थे,उनकी सेवा तो उसे करना ही पड़ेगा , प्राची पापा का मोटा बमपिलाट लिंग अपने मुंह में लेके चाभने लगी । लॉलीपॉप की तरह उम्मममम...उम्म्मम्म्म्ह कर के चूसने लगी ।
बेटी के मुंह में अपना लन्ड दे के गले तक उतार देना पापा को बहुत भा रहा था । वो आनंद ले रहे थे । प्राची किसी अल्हड़ की तरह लौड़ा चूस रही थी। पापा का हाथ अपने बेटी के सर पे चला गया और वो प्राची के सर पे हाथ फेरते हुए उसके मुंह में अपना लण्ङ पेश रहे थे ।
वो मजे से अब लौड़ा चूसने लगी । प्राची के चूत में इसी लन्ड ने, ४ दिन पहले कोहराम मचा दिया था, इसलिए प्राची को लिंग चूसते हुए, लिंग की मोटाई से थोड़ा डर भी लग रहा था ।
लगभग १० मिनट की लिंग चुसाई के बाद भी पापा को वो मजा, अभी भी नहीं आ रहा था । उनसे रहा नहीं गया प्राची से बोल परे : बाबू , एक काम करेगी ।
प्राची : क्या पापा ?
पापा: जरा अपनी नीचे से पैंटी में कैद समान को तो एक बार देखने दे , आज योनि का हाल देखूं कि अब कैसी है तेरी योनि।
प्राची ने समझा कि पापा बस अवलोकन करना चाहते है कि मेरी योनि का क्या हाल है। उसने पापा के आज्ञा के अनुसार अपना नीचे का सारा वस्त्र उतर दिया ओर उसकी यौवन नंगी हो गई। पापा को फिर से ३ दिन के इंतजार के बाद अपने बेटी का गुप्तांग देखने को मिल रहा थे । पापा उसको देखते ही खो गए , वाह सुजान एकदम गायब था । चूत का चिरान पहली रात के बाद ही चिथर चुका था । और अंदर की पिंक सी चमड़ी पलट के थोड़ा बाहर की ओर निकल गई थी । हालांकि योनि द्वार अंदर भी लाल था पूरा, यानि प्राची का दर्द, जरूर पूरा नहीं खत्म हुआ होगा । और योनि द्वार भी अभी बहुत ढीला नहीं हो पाया था । बेहद मादक चूत थी प्राची की ।
पापा ने अपना लिंग अपने हाथ में लिया और प्राची के योनि छिद्र की ओर बढ़ते चले गए ।
प्राची एकदम से चौंक गई । उसके चौंकने में आज डर था ।
प्राची : पापा ,ये क्या कर रहे है । मेरा दर्द अभी गया नहीं है , मैं नहीं ले पाऊंगी पापा। छोड़ दीजिए न । मैं मर जाऊंगी दर्द से अगर आपने आज मेरे साथ .....
उसने अपने गुप्तांग को अपने हथेली से ढक लिया ,जैसे कि वो पापा के लिंग प्रवेश का विरोध के रही हो।
पापा : अरे मेरी प्यारी बच्ची , डर मत , मै तेरे बाप और पति दोनों हु। मै कोई ऐसा काम नहीं करूंगा, जो तुझे पसंद नहीं हो, या तू नहीं करना चाहती हो। पहले दिन तो तेरी सील तोड़नी थी इसलिए थोड़ा बल प्रयोग किया , आज नहीं करूंगा मेरी बेटी । मैं तो बस , थोड़ा सा, ऊपर ऊपर से, तेरे योनि की गर्मी महसूस करना चाहता हु मेरी जान ।
प्राची थोड़ी कंफ्यूज थी ।
प्राची : मतलब पापा?
पापा: मतलब ,मै बस तेरे योनि द्वार पे ही अपना लिंग सटा के तुम्हारी चुत की गर्मी अपने लिंग में महसूस कर सकता हु । बस थोड़ा साथ दे दे मेरी जान।
प्राची को समझ आ गया, पापा इस बार अपना लन्ड तो नहीं डालेंगे अंदर।
उसने हामी भर दी
पापा अपने लिंग को प्राची की गुप्तांग को स्पर्श करने बढ़ गए।
पापा ने बारे प्यार से अपना लन्ड प्राची के चूत पे सटा दिया, और उसके छिद्र पे लगा के भी वो कोई भी बल प्रयोग नहीं कर रहे थे, ताकि लिंग अंदर चूत में प्रवेश के जाए । वो बस चूत की गर्मी महसूस करते रहे ।
पापा अपना लिंग प्राची के योनि के दरार पे ऊपर से नीचे मलने लगे । प्राची को इससे एक अलग तरह की गुदगुदी जरूर हो रही थी।
पापा , प्राची को कोई दर्द नहीं दे रहे थे, पर बीच-बीच में हल्का सा योनि के मुहाने पे, अपना लन्ड हल्के से दबा भी देते थे । ये पापा की एक अलग सी कला थी, जो वो अब अपने पत्नी बने बेटी को दिखा रहे थे । वो ये जता रहे थे कि प्राची के चूत पे अब उनका ही हक है।
पापा बस मजा ले रहे थे । प्राची भी अब मजा लेने लगी थी , वो भी आंखे मूंदे पापा के लन्ड को अपने योनि द्वार को छेड़ते हुए महसूस कर पा रही थी।
पापा एक टक से प्राची के चेहरे का भाव पढ़ रहे थे, और उनका लण्ङ भी अब कुछ ज्यादा ही टाइट हो गया था ।
उनको अपने पे काबू नहीं रह गया । एक स्त्री का स्पर्श तो किसी को भी गलती करने पे मजबूर कर देता है। पापा का प्राची पे पूरा हक होते हुए भी वो उसकी योनि में प्रवेश नहीं के सकते थे । पर पापा को प्राची के मादक भाव देख के लगा कि एक बार अंदर दबाव बना के देखता हु । कही जोश जोश में प्राची को दर्द न हो तो शायद वो प्राची को आज चोद पाए । वो थोड़ा जोर लगा दिया । योनि द्वार थोड़ा फैल सा गया, और चूत पे लन्ड का वार सीधा द्वार पे था ।
इतना होने के बाद भी प्राची, मजे से आंखे मूंदे लेटी रही , पापा की हिम्मत और बढ़ी, और वो प्राची में प्रवेश कर जाना चाहते थे अब ।
उन्होंने एक और दबाव बनाया । लिंग योनि द्वार को खोल के, थोड़ा अंदर की दीवार पे दस्तक दे ही चुका था ।
की इतने में, प्राची को पापा का इरादा पता चल गया ।
वो हक्का बक्का रह गई । अरे पापा तो अंदर डालने लगे है । वो एकदम चिंहुक सी गई ।
और पापा से बोल पड़ी: पापा, ये आप क्या कर रहे है । नहीं पापा , ये मत कीजिए , मै मर जाऊंगी पापा, आप नहीं समझ रहे है, पर अंदर बहुत दर्द है मेरे योनि में ।
पापा: प्लीज बेटी मै बहुत प्यासा हु । काबू नहीं कर पा रहा हु खुद पे आगे इतनी गीली और सुंदर चूत देख के । देख न, तेरी चूत , मेरे लन्ड लगने से कैसे पनियआ गई है। कैसे लुपलुपा रही है । ये मुझे ललचा रही है बेटी।
प्राची एकदम से रोने लगी । नहीं पापा , मुझे आप नहीं समझेंगे तो कौन समझेगा । मैं ठीक होते ही आपको अपना सबकुछ सौंप दूंगी , आप जी भर के भोग लेना मुझे । मैं उफ्फ तक नहीं करूंगी ,पर पापा आज मुझे छोड़ दीजिए । मेरा भरोसा मत तोड़िए पापा।
पर हवस बहुत बुरी चीज होती है । पापा का मन हो रहा था कि, एकदम किसी रंडी की तरह, अपने बेटी पे भी वो बल प्रयोग कर दे, और अपनी बेटी को पटक के चूत के गहराई, तक एक ही बार में फोर्स के साथ, लण्ङ धंसा दे।
मगर उनके अंदर एक बाप भी था। इस तरह से बल प्रयोग का मतलब, वो जानते थे । एक तरह से,,म वो प्राची के साथ रेप जैसा होता । वो अपने बेटी के नजरों में नहीं गिरना चाहते थे ।
उन्होंने कोई और उपाय न देखते हुए, प्राची के दूध के बीच में अपना लण्ङ फंसा के अपना काम अग्नि को शांत करना चाहा ।
वो प्राची को बोले : ठीक है बेटी तू कहती है तो मैं नहीं डालता ।
प्राची के जान में जान आई।
पापा: पर प्राची आज जो तुमने मुझे रोका है इसकी दुगनी कीमत तुम्हे चुकानी होगी।
प्राची : वो कैसे पापा?
पापा: तुम्हे जब भी अगली बार में चोदूंगा मुझे तुम्हारी सील तोड़ने दोगी ।
प्राची आश्चर्यचकित रह गई , उसकी सील तो पापा पहले ही तोड़ चुके थे ।
प्राची : पापा आप ने तो मेरी सील तोड़ दी थी। पहली रात को ही तो। आपके नाम किया था मैने अपना, सील पैक योनि । योनि में आप प्रवेश कर चुके । फिर अब कौन सी सील ।
पापा: अब भी एक सील बाकी है बेटी ।
प्राची : कौन सी पापा?
पापा: तेरी गांड़ का सील बेटा।
प्राची के आंखे फटी की फटी रह गई । हे राम , कैसे जाएंगा पापा का मोटा मूसल इतनी छोटी सी पीछे की छेद में??
प्राची अब उधेड़-बुन में डूब गई, और उधर पापा प्राची का टीट चोदन, करने को तैयार हो रहे थे ।
Wowww mast boob fucking ki hai Prachi ki.Update 20:
अब पापाजी की तड़प चरम पे था । वे बस प्राची के चूची के बीच अपना लन्ड फसा के बह जाना चाहते थे । जैसे उन्होंने बहुत सारे ब्लू फिल्म में देखा था ,जहां लड़का अपना लिंग लड़की के चूची की बीच डाल के चूची की लौड़ा को आगे पीछे करता था ।
पापा प्राची के सीने पे चढ़ आए और प्राची से बोला : बेटी तू दोनों हाथों से अपने चूचियों को थाम के मेरे लन्ड को जकड़ ले जरा , मन कर रहा है तेरे चूची को सटा सट चोद लू।
प्राची के लिए ये नया था । उसने पापा से कहा : कैसे करू पापा ?
पापा ने अब देर न करते हुए अपना गरम लोहे के सरिया जैसे सख्त लिंग को प्राची के चूची के बीच दरार ने फंसा दिया और फिर प्राची को हाथ से इशारा कर के बताया कि लन्ड को कैसे जकड़ना है चूची के दबाव।
प्राची के चूची तो उतने बड़े नहीं थे , जैसे पापा ब्लू देखा था ।मगर जब प्राची ने लण्ङ को अपने चूचों से जकड़ा। तो पापा को अपने लौड़े के इर्द गिर्द एक मखमली सा एहसास जरूर होने लगा ।
पापा अपने कमर को आगे पीछे करने लगे । लन्ड पहले से ही प्री कम से थोड़ा चिकना हो गया था और सटा सट चूची के बीच फसलें लगा । पापा को चूत जैसा मजा तो नहीं आ रहा था लेकिन नरम एहसास वो अलग था ये ओर इसका अपना अलग मजा था । पापा ने १५ मिनट तक अपने पत्नी बने बेटी का चूची चोदन किया । प्राची को अपने नरम मम्मो के बीच एक गरम सरिया जैसा पापा का लन्ड का एहसास वो अच्छा लग रहा था । पापा अब चुने वाले थे और फ़ज़ाक से उनके लन्ड से एक तेज वीर्य की धार निकला ओर प्राची का पूरा सीना और गर्दन गरम शैलाब से भींगा गया ।
प्राची आज पापा को एक अलग मजा दे चुकी थी । पापा ने आखरी बूंद तक अपना पानी छोड़ने के बाद प्राची के सीने से हट गए ।
पापा के लौड़े पे अब भी वीर्य का कतरा लगा हुआ था । पापा ने प्राची को बोला : आ बेटी,थोड़ा पापा की मलाई चख ले ।
और पापा ने, प्राची का बिना कोई जवाब सुने ही लन्ड को मुंह के तरफ बढ़ा दिया ।
प्राची किसी आज्ञाकारी पत्नी की तरह अपना मुंह खोल दो ओर जीभ बाहर निकाल कर पापा का लौड़े पे लगी मलाई को चाटने लगी।
प्राची ने पापा का लिंग अच्छे से चाट के साफ किया ।
पापा ने भी एक तौलिए से प्राची के सीने पे गिरे अपने माल को पोछा और फिर निढाल हो के प्राची से लिपट गए । और दोनों बाप बेटी ने एक दूसरे को जकड़ के नींद के अघोष में समा गए।
Dadi bhi bahut sahi gyaan de rahi hain Prachi ko.Update 21:
ऐसे ही एक सप्ताह तक बाप बेटी की काम पूर्ति होती रही । पापा बिना चोदे ही अपनी बेटी का मजा लेते रहते थे । दादी को भी इंतजार था, कि कब उनके बेटा का अगला मिलन हो पाएगा । लगभग 9 दिनों बाद प्राची की योनि एक दम सही हो गई । वो थोड़ा खुश भी थी और थोड़ा डरी भी हुई थी । खुश इसलिए कि पापा को, अब वो, बिना ना नुकर किए हुए, प्यार दे पाएगी, और डरी हुई इसलिए कि योनि में फिर से पापा अपनी जगह बनाने वाले थे अपने लन्ड से। ऊपर से पापा की वो बात भी उसे याद थी, कि पापा गांड़ भी मारेगे, क्योंकि पापा ने पहले ही कह दिया था ।
उस दिन सबेरे ही दादी ने प्राची से पूछा : बेटी , वहां का दर्द कैसा है ?
प्राची : दादी अब पूरा छूट गया है। कोई भी दर्द नहीं हो रहा है ।
दादी : वाह, मै इसी दिन का इंतजार कर रही थी बेटी , की कब तेरा दर्द खत्म हो और तू फिर से पापा के साथ सहवास कर पाए । बेचारे मेरे बेटे को मैने पत्नी होते हुए भी तड़पा दिया । तू अभी छोटी है, इसलिए मैने उसे रोक दिया। और वो तुझ से प्यार भी बहुत करता है ,इसलिए उसने संयम रखा ,शायद उसके अंदर का बाप भी जाग गया होगा, और बेटी को तकलीफ में नहीं देख सकता है वो।
प्राची दादी की बाते ध्यान से सुन रही थी ।
दादी : और मेरी लाडो , तैयार है न आज रात के लिए ,पहला दिन तो तेरे पापा ने ही तेरे मजे ले लिए , अब तू वो पुरुष का मजा लेना सिख ले । कोई स्त्री अपने जोश में आ जाए तो अच्छे अच्छे मर्दों का पानी निकाल दे और उसकी हवा टाइट कर दे सेक्स के टाइम । तू तो अभी कच्ची है इस खेल में मगर जिस दिन तू पापा के लिंग को उनके ऊपर बैठ के लेने में कामयाब हो जाएगी उस दिन समझ की सेक्स के दौरान तूने पापा को कंट्रोल कर लिया। अगर किसी मर्द के लिंग पे बैठ जाओ और तुम अपने हिसाब से चूदबाओ, उस दिन समझ जाना कि तुम सेक्स का असली मजा लेना सीख गई हो।
प्राची दादी की बात पे बस हामी भर रही थी: जी दादी ।
More updates will be coming soon...ye thora chota update rh gya.
Kachhi ladkiyan bahut jaldi pani chhod deti hain.Update 23:
पापा का लन्ड टनटनाया हुआ था । वो अपने बेटी से मिलन को तरस रहे थे । गजब की प्यास थी उनके अंदर ।
प्राची को दादी ने दूध का ग्लास थमाया और बोला : बेटी , पापा को आज रात संतुष्ट कर देना । पति का दिल जीतने का दो ही तरीका है , उसे अच्छा खाना खिला और उसकी प्यास मिटा अच्छे से । प्यास का मतलब सेक्स की तलब। वो तुझे अच्छे से मिटाना होगा बेटी । जा बेटी , दिल जीत लेना अपने मर्द का।
प्राची : जी दादी । मुझे थोड़ा डर भी लग रहा है।
दादी : अब डर कहे का । तेरी पहली रात में तो तू ले ही चुकी है, पापा का मोटा लन्ड। अब घबरा मत, सब अच्छे से हो जाएगा आज रात भी।
प्राची को बस आज इसलिए डर लग रहा था, कि कही पापा पीछे गान्ड ना मार ले आज उसकी।
प्राची दूध लेके पापा के कमरे में चल पड़ी ।अंदर जाते ही दरवाजा बंद किया और पापा के बगल में जा के बेड पे बैठ गई ।
पापा: आ गई मेरी जान । आज तड़प कुछ ज्यादा ही है । आ मेरे पास।
प्राची : अजी , पहले ये दूध पी लो ,फिर कोई बात होगी।
पापा ने ग्लास हाथों में थमा और एक बार में ही पूरा खाली कर दिया । ग्लास को बेड के नीच सरका दिया ,और प्राची का बांह पकड़ के अपने तरफ खींच लिया : आजा....मेरी रानी.... ,आज तुझे रात में जन्नत दिखाऊंगा ।
प्राची पापा की ओर खींच सी गई । और उनके बांहों में समा चुकी थी ।
प्राची : आह ,मेरे पापा , थोड़ा प्यार से जन्नत दिखाएगा ,नहीं तो पहले जैसे ही एक दिन सेक्स करेंगे और 7 दिनों तक आपको सुखा ही रहना पड़ेगा ।
प्राची ने पापा को चेतावनी दे दी।
पापा: अरे वाह, मेरी माल तो ताने भी सुनाने लगी अब मुझे। आपकी जैसी मर्जी हुजूर , आराम से करूंगा आज और जन्नत तक का सफर हम ऐसे ही धीरे धीरे पार करेंगे ।
पापा ने उसके बाद अपने लबों को बढ़ा के अपने बेटी के लबों पे रख दिया ,और चूमने लगे ।
म्मम्महाहः, मुआन्ह्ह्हः , चुप्पप्पप , चुप्पप्प.... की आवाज से कमरा गूंजने लगा ।
पापा ओर बेटी का समागम शुरू हो गया और प्राची भी आज इसमें पूरा डूबना चाहती थी । पहले दिन तो घबराहट के कारण उसे फोरप्ले का भी उतना आनंद नहीं मिल पाया था । आज उसका सारा शंका दूर हो चुका था कि पापा का साथ वो कैसे दे । उसने पापा का चुंबन का जवाब भी, अपने चुंबन से देने का फैसला किया, और पापा का खूब साथ देने लगी ।
पापा ने इसकी उम्मीद नहीं की थी । पापा को बहुत ही अच्छा लगने लगा । वो समझ गए कि आज की ये आग दोनों तरफ बराबर लगी है ।
उधर प्राची अपने दादी की बात याद कर के , आज पापा का कमान खुद के हाथ में लेना चाहती थी , वो चाहती थी कि पापा को आज वो जन्नत दिखाए।
पापा ने अब अपने कपड़े अलग करने शुरू कर दिया, और प्राची का भी वस्त्र उतारने लगे । प्राची का ब्लाउस वो उतार चुके थे । अपनी कमीज भी उतर दिया और तन से तन चिपका के अपनी बेटी को चूमियाने लगे ।
प्राची बस ऊपर से ब्रा पहने पापा की बांहों में, पापा के लबों को मखमली एहसास करवा रही थी । पापा आज प्राची का होंठो का रस चूस जाना चाहते थे। बीच बीच में तो पापा इतना जोर से प्राची का होठ को सक करते की उसे थोड़ा दर्द का अनुभव भी होता ।
पापा अब और समय बर्बाद नहीं करना चाहते थे । उन्होंने ठान लिया था, कि जितनी जल्दी हो सके, वो प्राची की चूत का दर्शन करे , उसे गीला करे और अपना लिंग का ठिकाना वहां घुस के बना ले । उन्होंने प्राची को ब्रा उतार फेंकी ।और उसे ऊपर से पूरा नगा कर दिया ।
प्राची के छोटे छोटे संतरे झलक के बाहर आ गए । पापा एकदम से छोटे संतरों पे लपक परे और उसका रस चूसने लगे । प्राची पापा के बांहों में किसी छोटी बच्ची जैसी ही लग रही थी । पापा के हथेली पे उसका पूरा स्तन भर जाता था ।
पापा बेतहाशा प्राची के चूचों को चूसने लगे । प्राची भी आज एक अलग आनंद को महसूस कर रही थी । आज उसे ये पापा का प्यार, पहले दिन से बिल्कुल ही अलग लग रहा था । पहले दिन तो उसे घबराहट , डर , शर्म और चिंता, सब हो रहा था । आज ऐसा नहीं था , आज वो सेक्स की खिलाड़ी बनाना चाहती थी । पापा को उसे पूर्ण संतुष्टि देना था । वो पापा के होंठो का स्पर्श अपने चूचों पे महसूस कर पा रही थी । वो भी मदहोश हो गई । पापा चूची को चूस ही इतना अच्छा रहे थे ।
आज प्राची को पापा की कलाकारी पे बहुत प्यार आ रहा था । पापा बारी बारी दोनों चूचों को मुंह में भरते और बीच बीच में चूची की गुरी को भींच के मसल देते । निप्पलों को पापा जैसे ही मसलते, प्राची के सर से पैर तक एक कंपन सा महसूस होता और उसके चूत में इक टीस सी उठती थी ।
पापा अब निप्पलों को खींच खींच कर पी रहे थे । बेटी के चूचों से दूध नहीं तो नहीं निकल रहा था, लेकिन पापा को उसका रस पीने में जरूर परम सुख मिल रहा था ।
पापा चूची चूसते हुए सोच रहे थे : आह....., क्या मक्खन की तरह सॉफ्ट है मेरे 19 साल की नवविवाहिता नवयौवना बेटी के चूचक।
प्राची भी पापा के इस तरह के मादक कला से बहुत प्रभावित हो रही थी ।
प्राची अपने आप को आज एक खुशकिस्मत बीवी समझ रही थी । उसे पहले दिन तो बहुत संकोच हो रहा था । पर आज बात कुछ अलग सी थी । वो खुल के आज पापा का साथ देना चाहती थी ।
चूची चुसाई करते हुए पापा धीरे से प्राची का होंठों से भी रस पी लेते थे। पापा अब प्राची का होंठ अपने होंठ में भरे , अपने एक हाथ से प्राची के छोटे चूची को मसल रहे थे और दूसरे हाथ से अपने बेटी का चुत मसल रहे थे , मर्दन कर रहे थे । चूत पापा के छुअन से ही टपकाने लगी थी । प्राची आज निहाल हो गई थी पापा के प्यार देख के । वो इनका पूरा साथ दे देना चाहती थी , उनके साथ ही बह जाना चाहती थी ।
पापा अपनी बेटी की चूत अभी भी पैंटी के ऊपर से ही छेड़ रहे थे । उन्हें महसूस हुआ कि योनि द्वार के आगे का पैंटी का पूरा हिस्सा भीग चुका है । वो समझ गए कि अब बेटी का चूत दर्शन करना पड़ेगा कि कितनी गीली हो चुकी है ।
पापा ने अपनी प्यारी बीबी से बोला : अरे मेरी जान ,तेरी चूत तो बेतहाशा टपक रही है । देख कितनी गीली हुई जा रही है मेरे छुते ही । लग रहा है इसे आजाद करना पड़ेगा , मेरी रानी , नहीं तो ये तेरे पैंटी को पूरी तरह भिगो देगी।
प्राची उम्म्म्हः उम्ह्ह्ह करती जा रही थी और धीरे धीरे पापा का लन्ड लेने के लिए जोशिया रही थी ।
प्राची : पापा , आपके लिए ही टपक रही है शायद , आप तो इसे जबरदस्त गरम कर रहे है ।
पापा: हां बेटी , जरा देखूं तो , कितनी गीली हुई है ये ।
पापा अब ये बोल के प्राची की पैंटी को सरकने लगे ।
प्राची को पापा का ये अंदाज भा रहा था । पापा उसे आज बहुत मादक मर्द लग रहे थे । पापा ने पैंटी सरका के पैर के नीचे से उतार चुके थे । और प्राची नीचे से पूरी नंगी हो चुकी थी , योनि खुल के पापा के सामने आ चुका था और प्राची पैंटी के क़ैद से आजाद होने के बाद, हल्की और नीचे से आजाद महसूस कर रही थी । आज उसे स्त्री का असली जोश का पता चल रहा था, कि कितनी गर्मी होती है एक स्त्री के अंदर ।
एक तो प्राची की निगोडी चूत बहने लगी थी , ऊपर से पापा की चुम्बन और चूची चूसने की कला भी उसे मदहोसी से भर रही थी आज। आज वो पापा के साथ पूरी तरह खुल चुकी थी ।
पापा अब अपने पत्नी के पूरे बदन का कमान संभाल चुके थे ऊपर से नीचे तक कुशलता से वो अपने बेटी को चूसते , चाटते , चूमते और मसलते जा रहे थे । आज एक बेटी अपने पिता के आगोश में पूरी नंगी कर आजाद लेटी , जोसियाते जा रही थी ।
प्राची की मदहोशी उसे बहुत बेबस बना रही थी। उसे ऐसा लग रहा था कि वो पापा के बांहों में ही बेहोश हो जाएगी । अपनी बेटी को ,इतना मादक , इतना मदहोश होते देख पापा को भी लग गया था कि आज पहली बार उनकी बेटी मन से उन्हें अपना चुकी है , नहीं तो पहले दिन और उसके बाद भी, वो जबरदस्ती ही प्राची के साथ यौन सम्बन्ध बनाते और उसके शरीर के साथ खिलवाड़ कर पाते थे ।
एक पुरुष को भी पता चल ही जाता है कि कब उसकी स्त्री मन से उसके साथ सेक्स करना चाहती है ।
पापा भी जोश में आ चुके थे ।उनका मोटा लिंग भी उनके कच्छे के अंदर ही ऐंठने लगा था ,और हिचकोले मार रहा था । पापा और बेटी का तन बदन एक दूसरे में रगड़ खा रहा था , और जोश की सारे सीमा को पार कर रहा था । प्राची तो अपना होशो हवाश खो ही चुकी थी । उसे परम आनंद मिलने लगा था ।
प्राची इतना जोशिया गई कि उसका अपने ऊपर काबू ना रहा और वो पापा की बांहों में ही अकड़ने लगी। वो एकदम चरम तक पहुंच गई और एक मादक छटपटाहट के साथ उसकी चूत ने फव्वारा छोड़ दिया । प्राची अब पहली बार पापा के साथ फोरप्ले में ही झड़ चुकी थी । उसके चूत से एक गाढ़ा सफेद पानी, एकदम हल्के से नीचे की ओर रिसने लगा ।
पापा प्राची के थरथराहट से ही समझ गए कि उनकी बेटी उनके कलाकारी को सह नहीं पाई और रास्खलित हो गई है।
वो अपने बेटी का चूतरस का स्वाद चखने के लिए बेताब से हो गए और अपनी सिर को प्राची के योनि के तरफ बढ़ा दिया ।
पापा अपने बेटी के योनि को एक टक से देखने लगे । वो आज एक दम डबल रोटी की तरह फूली हुई थी और उसके बीच से एक सफेद रस का लाइन सा बना हुआ था , जो बह के उसके गांड के छेद तक टपक चुका था । पापा ने झट से अपना जीभ निकल के रस चाट गए और प्राची के चूत को अपने होंठों से कैद के लिया । वो अपनी बेटी का चूत चाट रहे थे ।
कभी ज़ीभ लगा के चाटते,तो कभी होंठो से योनि के बाहरी होंठों को चूसने लगते ।
प्राची का पारा फिर से बढ़ने लगा । वो पापा की चूत चूसने की कला को भी ,अपने मुंह से मादक सिसकारियां निकला के , सराहने लगी थी ।
प्राची :आह्ह्ह....आह्ह्ह्ह...उंह्ह्ह्ह...पापा....
कितने अच्छे है आप.....मै निहाल हो गई ....आपसे बहुत प्यार करती हु मैं पापा.... आह्ह्ह्ह...ऐसे ही चूसिए....आह...
पापा की चूत चुसाई से प्राची निहाल हो गई , पापा लगभग , 10 मिनट ऐसे ही प्राची का योनि रसपान करते रहे । और प्राची फिर से अकड़ने लगी ।प्राची ने , एक गर्म रसदार फव्वारा सा पापा के मुंह में ही छोड़ दिया और चीत्कार मारते हुई पापा के मुंह में ही छड़ गई ।
दूसरी बार झरने के बाद प्राची पता चल गया कि आज वो कितनी बार झड़ेगी उसे इसका अंदाजा वो नहीं है । क्योंकि पापा ने तो लन्ड अभी खोला वो नहीं है और उसकी योनि दो बार रस छोड़ चुकी थी ।