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sexsarkar

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Update 22:

घर का माहौल आज खुशनुमा था । पापा और दादी दोनों खुश थे, क्योंकि आज प्राची फिर से पापा से मिलन के लिए बिल्कुल फिट हो चुकी थी । साथ में प्राची भी अपने दर्द से इजात पा चुकी थी, जो उसे पापा ने दिया था, तो वो भी थोड़ा अच्छा महसूस कर रही थी । प्रज्ञा को भी इसकी भनक तो लग ही गई थी, कि दीदी अब बिल्कुल ठीक लग रही है, और रात को शायद पापा से मिलन फिर से कर पाएगी।

पापा ऑफ़िस से आ चुके थे और चाय पानी कर चुके थे और रात के लिए थोड़ा एक्साइटेड हो रहे थे । और वो थोड़ा TV देखने में मशरूफ थे । उधर दादी और प्राची किचेन में रात का डिनर की तैयारी कर रहे थे । दादी ने फिर से थोड़ा और ज्ञान प्राची को देना तय किया ।

दादी : प्राची , सब्जी काट ले तो बताना, मै चढ़ा दूंगी मसाला डाल के।

प्राची : जी दादी ,ठीक है।

दादी : बेटी रात के लिए तैयारी में हो न ?

प्राची अचानक से दादी के किए सवाल को समझ नहीं सकी, शायद उसका ध्यान उतना नहीं था ।

प्राची : रात के लिए..., कौन सी तैयारी, दादी।

दादी : अरे, देख लो इस लड़की को , उधर तेरा पति और पापा ,इतना बेताब है तेरे लिए, और तुझे उसकी कुछ पड़ी ही नहीं है क्या ? मैं रात के संभोग की बात कर रही हु । रात को होना है ना तुम दोनों के बीच ?

प्राची का ध्यान दादी के बात पे अब पूरा था वो थोड़ा झेंपते हुए बोली : जी दादी ।

दादी : जी दादी क्या ? तैयार है न ?
दादी प्राची के मुंह से स्पष्ट सुनना चाहती थी । वो चाहती थी कि प्राची अब खुल के सारी बात करे उनके साथ।

प्राची : हां दादी तैयार ही हु।

दादी : हां , ये बहुत जरूरी है बेटी की पति को तू खुश रखा कर ।

प्राची : जी दादी , मै पूरी कोशिश करूंगी ।

दादी : चल आज दूसरा दिन जरूर है तेरे और पापा के मिलन का, मगर तूने पहले दिन के बाद संभोग जो नहीं किया , हो सकता है, आज भी थोड़ा दर्द हो तुझे, क्योंकि योनि फिर टाइट हो गई हो।

प्राची : दादी , मतलब आज फिर से उतना ज्यादा दर्द होगा क्या मुझे ?

दादी: ना ना, पहले दिन जैसा तो बिल्कुल नहीं होगा , हा अभी अभी तूने सेक्स शुरू किया है, तो तेरी योनि टाइट ही रहेगी , थोड़ा दर्द तो होगा जब तक तू रेगुलर सेक्स नहीं शुरू कर देती पापा के साथ।

प्राची : रेगुलर से मतलब दादी हर रोज ?

दादी : हर रोज क्यों नहीं , अगर तुम दोनों को अच्छा लगे तो हर रोज या दिन में १० बार भी कर सकते हो तुम दोनों। हाहाहाहाहा.....

प्राची थोड़ा शर्म से नीचे देखने लगी ।

दादी : अरे मेरी बेटी ,अब पापा तेरा पति है । जितना मर्जी हो , वो तेरा मजा ले सकते है , और तुझे जितना मन करे पति के साथ चूदाई कर सकती हो , कोई भी नहीं रोकेगा तुम लोगों को।

प्राची : शर्माते हुए , जी दादी ।

दादी : और एक बात बेटी, मैने पहले भी कहा है , आज भी कहती हु, पापा को अपने अंदर बीज गिराने से मत रोकना । मुझे बड़ा मन है, कि जितनी जल्दी हो सके, तुम दोनों का परिवार बसता देख लु।

प्राची : दादी ,मै तो अभी खुद बच्ची ही हु , मै ये सब कैसे संभाल पाऊंगी अभी ।

दादी : हां जानती हु बेटी, की तेरी उमर थोड़ी कम है अभी ,पर एक बात याद रख ,जितना जल्दी तू इस घर को बच्चा देगी, उतना ही तेरा सम्मान पति के नजर में बढ़ जाएगा । वो तुमसे और ज्यादा प्यार करने लग जाएगा ।

दादी बस प्राची को बच्चा करने के लिए ये सब बाते कर के बहला रही थी।

प्राची : ठीक है दादी ,कोशिश करूंगी मैं ।

दादी : कोशिश नहीं करना है , करना ही है। मुझे बड़ा मन है कि मैं अपने बेटे का एक मुन्ना या मुन्नी को अपने गोद में खिलाऊं ,जैसे तुम दोनों बहनों को खिलाया था ।

प्राची : जी दादी ।

प्राची अभी तो ठीक से चूदाई के मजे वो नहीं लेना सीखी थी और दादी ऐसा प्रैशर बना रही थी बच्चे के लिए ,ये उसे थोड़ा अजीब जरूर लग रहा था ।

लगभग १ घंटे में डिनर तैयार हो गया ओर सब खाना खाने बैठे। सब चुप चाप खाना खा रहे थे।

प्रज्ञा ने शांति भंग करते हुए पापा से बोला : पापा , मेरी एग्जाम शुरू हो रही है बारहवीं की, अगले सोमवार से । और सेंटर यही बगल के विमेन कॉलेज में है ।

पापा: अरे वाह,ये ठीक हो गया , चल मै तुझे ऑफिस जाते हुए ही रस्ते में छोड़ दिया करूंगा ।

दादी : और मेरी बच्ची, तैयारी कैसी है तेरी?

प्रज्ञा : अच्छी है दादी ।

दादी : ठीक है , अच्छे से एग्जाम देना ।

प्राची : ऑल द बेस्ट छुटकी, अच्छे से देना एग्जाम ।

प्रज्ञा थोड़ी मुंहफट थी और कभी कभी , उसके मुंह से कुछ भी, कही भी, निकल जाता था ।

प्रज्ञा : थैंक्स दीदी, आपको भी रात के लिए ऑल थे बेस्ट दीदी।

दादी एक दम से चकित रह गई , पापा थोड़ा झूठा खांसने लगे और प्राची भी शर्मा के लाल हो गई ।

दादी : अरे ,तू कुछ भी, कही भी बोल देती है ? क्या मतलब तेरा रात के लिए ऑल द बेस्ट?

प्रज्ञा को अपनी गलती का एहसास हुआ : अरे नहीं दादी ,मै तो बस दीदी को हिम्मत दे रही थी।
दादी : दीदी को हिम्मत देने के लिए मैं और तेरे पापा है , तू इन अब बातों में ध्यान मत दे , अभी एग्जाम की तैयारी कर।

प्रज्ञा के इस तरह से बोलना पापा को पूरा आश्वस्त कर चुका था कि अब उनकी छोटी बेटी भी छोटी नहीं रह गई है। उसे अब पता है घर में क्या हो रहा है। और शादी के बाद मेरे कमरे में उसकी दीदी के साथ क्या होता है।

पापा: अरे मा , बेकार में ही डांट रही हो तुम इसे, बच्ची है अभी ,थोड़ी समझदार होगी तो थोड़े न ऐसे मुंहफट रहेगी । थोड़ा गम्भीर खुद हो जाएगी ।

प्रज्ञा : पापा से- सॉरी पापा मुझे ऐसे नहीं बोलना चाहिए था ।

पापा: नहीं बाबू , तुम्हारे घर में क्या हो रहा है ,वो सब तो तुम्हे जानना ही चाहिए । और तुम तो अब बड़ी भी हो गई हो। तुम खुल के अपना मत परिवार में रख सकती हो , वैसे तुम्हे तो पता ही है अब प्राची तुम्हारी सिर्फ दीदी ही नहीं ,मा भी है , और मेरी पत्नी भी है । अब प्राची मेरी जिम्मेदारी है बेटी । मैं इसे खुशी देने का कोशिश करूंगा ।

प्रज्ञा : जी पापा , मै समझ रही हु कि आप दीदी के लिए अच्छे हसबैंड बन के जरूर उभरेंगे ।

दादी और प्राची बस चुपचाप खाना खाने लगे ।

पापा: चलो खाना खा लो बेटी , और अपने कमरे में जा के पढ़ाई करना ।

प्रज्ञा : जी पापा ।

सब ने खाना खाया । एक अजीब सी शांति थी अभी। सब शांत खाना खा रहे थे उस प्राची और पापा के संवाद के बाद।

खाना के बाद ,दादी किचेन में बर्तन धो रही थी । पापा ने दादी को जा के बोला : अरे मा , प्रज्ञा इतनी समझदार हो गई ,मै समझा नहीं था ।

दादी : हां बेटे , वो भी अब जानती है कि उसके दीदी के साथ तुम सेक्स करते हो । मुझ से ही उसने सारी बाते पूछी थी ।

पापा: पर अपने बताया क्यों मा?

दादी : तो क्या करती , प्राची की चीख सुन के वो तुम दोनों को पहले दिन ही डिस्टर्ब करती । तो सब कुछ बताना पर की उसके दीदी के साथ क्या हो रहा है और वो बिल्कुल ठीक है।

पापा: ओह , तभी की प्राची को ऑल द बेस्ट बोल रही थी।

दादी : हां बेटा ।

ठीक है मां: मै अपने कमरे में जा रहा हु । प्राची को जल्दी भेज दीजिएगा।

दादी : हां हां , भेज दूंगी तेरे बीवी को तेरे पास, अपने पास थोड़े न रख लूंगी ।

पापा: हाहा...अरे मा बस अब सबर नहीं हो रहा , एक सप्ताह से अपनी पत्नी होते हुए वो नहीं कर पा रहा था , आपके कारण।

दादी : मेरे कारण , खुद क्या किया था तू , मेरी बच्ची का हाल खराब कर दिया था तूने , ये सबक है तेरे लिए , जब तक प्राची सेक्स में पारंगत नहीं हो जाती , अपने हवस की थोड़ा काबू कर के रख और एक या दो राउंड के बाद छोड़ दे उसे , कुछ दिन बाद , जम के वो खुद मजे लेगी।

पापा: ठीक है मां।

पापा पूरा मिज़ाज बना चुके थे आज प्राची से संभोग के लिए । दादी को भी अपने बेटे की तड़प साफ दिख रही थी और उससे पक्का पता था कि आज फिर ये 1 या 2 राउंड कर के रुकने वाला नहीं है।

पापा कमरे में जा चुके थे और प्राची , प्रज्ञा के कमरे में उसे दूध देने गई थी ।

प्रज्ञा : सॉरी दीदी मुझे ऐसे खाने के टाइम नहीं बोलना चाहिए था। पता नहीं पापा क्या सोचेंगे ।

प्राची : हम्ममम, तेरी तो यही दिक्कत है ,कुछ भी बोलने से पहले सोचती बिल्कुल नहीं है । अब पापा को भी पता लग गया होगा कि उनकी छोटी बेटी जवान हो गई है और क्या ।

प्रज्ञा शर्मा गई : धत्त दीदी आप भी न।

प्राची : चल कोई नहीं , थैंक यू , तेरी ऑल द बेस्ट के लिए ।

प्रज्ञा : अरे दीदी वाह पूरी खुश हो आप तो , चलिए अच्छे से बीते आपकी रात आज पापा के बाहों में ।

प्राची : बस हो गया , अब ज्यादा सर में मत चढ़ ।

प्रज्ञा : हां हां , मै सर पे चढ़ू तो आपको दिक्कत हो रही है , ओर रात को पापा जो आप पे चढ़ेंगे उसका क्या ।

प्राची : हाहाहाहाहा, हद कर रही हो तुम भी , ये मत भूलो मैं मां वी हु तेरी अब से ।

प्रज्ञा : ओके मम्मी , सॉरी।

दोनों बहन हंसने लगे । की तभी दादी का आवाज आया । प्राची पापा के लिए भी दूध लेके जा, अगर प्रज्ञा को दूध दे दिया हो तो , पापा के कमरे में इंतजार कर रहे है तेरा।

प्रज्ञा : जाइए मम्मी ,पापा इंतजार कर रहे है आपको प्यार करने के लिए ।

प्राची : बेशरम ,तू नहीं सुधरेगी ।

प्राची इतना बोल के प्रज्ञा के कमरे से खाली दूध का ग्लास लेके निकल गई।
 

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Update 23:
पापा का लन्ड टनटनाया हुआ था । वो अपने बेटी से मिलन को तरस रहे थे । गजब की प्यास थी उनके अंदर ।

प्राची को दादी ने दूध का ग्लास थमाया और बोला : बेटी , पापा को आज रात संतुष्ट कर देना । पति का दिल जीतने का दो ही तरीका है , उसे अच्छा खाना खिला और उसकी प्यास मिटा अच्छे से । प्यास का मतलब सेक्स की तलब। वो तुझे अच्छे से मिटाना होगा बेटी । जा बेटी , दिल जीत लेना अपने मर्द का।
प्राची : जी दादी । मुझे थोड़ा डर भी लग रहा है।
दादी : अब डर कहे का । तेरी पहली रात में तो तू ले ही चुकी है, पापा का मोटा लन्ड। अब घबरा मत, सब अच्छे से हो जाएगा आज रात भी।
प्राची को बस आज इसलिए डर लग रहा था, कि कही पापा पीछे गान्ड ना मार ले आज उसकी।
प्राची दूध लेके पापा के कमरे में चल पड़ी ।अंदर जाते ही दरवाजा बंद किया और पापा के बगल में जा के बेड पे बैठ गई ।
पापा: आ गई मेरी जान । आज तड़प कुछ ज्यादा ही है । आ मेरे पास।
प्राची : अजी , पहले ये दूध पी लो ,फिर कोई बात होगी।
पापा ने ग्लास हाथों में थमा और एक बार में ही पूरा खाली कर दिया । ग्लास को बेड के नीच सरका दिया ,और प्राची का बांह पकड़ के अपने तरफ खींच लिया : आजा....मेरी रानी.... ,आज तुझे रात में जन्नत दिखाऊंगा ।
प्राची पापा की ओर खींच सी गई । और उनके बांहों में समा चुकी थी ।


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प्राची : आह ,मेरे पापा , थोड़ा प्यार से जन्नत दिखाएगा ,नहीं तो पहले जैसे ही एक दिन सेक्स करेंगे और 7 दिनों तक आपको सुखा ही रहना पड़ेगा ।
प्राची ने पापा को चेतावनी दे दी।
पापा: अरे वाह, मेरी माल तो ताने भी सुनाने लगी अब मुझे। आपकी जैसी मर्जी हुजूर , आराम से करूंगा आज और जन्नत तक का सफर हम ऐसे ही धीरे धीरे पार करेंगे ।

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पापा ने उसके बाद अपने लबों को बढ़ा के अपने बेटी के लबों पे रख दिया ,और चूमने लगे ।
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म्मम्महाहः, मुआन्ह्ह्हः , चुप्पप्पप , चुप्पप्प.... की आवाज से कमरा गूंजने लगा ।
पापा ओर बेटी का समागम शुरू हो गया और प्राची भी आज इसमें पूरा डूबना चाहती थी । पहले दिन तो घबराहट के कारण उसे फोरप्ले का भी उतना आनंद नहीं मिल पाया था । आज उसका सारा शंका दूर हो चुका था कि पापा का साथ वो कैसे दे । उसने पापा का चुंबन का जवाब भी, अपने चुंबन से देने का फैसला किया, और पापा का खूब साथ देने लगी ।

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पापा ने इसकी उम्मीद नहीं की थी । पापा को बहुत ही अच्छा लगने लगा । वो समझ गए कि आज की ये आग दोनों तरफ बराबर लगी है ।
उधर प्राची अपने दादी की बात याद कर के , आज पापा का कमान खुद के हाथ में लेना चाहती थी , वो चाहती थी कि पापा को आज वो जन्नत दिखाए।
पापा ने अब अपने कपड़े अलग करने शुरू कर दिया, और प्राची का भी वस्त्र उतारने लगे । प्राची का ब्लाउस वो उतार चुके थे । अपनी कमीज भी उतर दिया और तन से तन चिपका के अपनी बेटी को चूमियाने लगे ।

kissing each other passionately
प्राची बस ऊपर से ब्रा पहने पापा की बांहों में, पापा के लबों को मखमली एहसास करवा रही थी । पापा आज प्राची का होंठो का रस चूस जाना चाहते थे। बीच बीच में तो पापा इतना जोर से प्राची का होठ को सक करते की उसे थोड़ा दर्द का अनुभव भी होता ।
पापा अब और समय बर्बाद नहीं करना चाहते थे । उन्होंने ठान लिया था, कि जितनी जल्दी हो सके, वो प्राची की चूत का दर्शन करे , उसे गीला करे और अपना लिंग का ठिकाना वहां घुस के बना ले । उन्होंने प्राची को ब्रा उतार फेंकी ।और उसे ऊपर से पूरा नगा कर दिया ।
प्राची के छोटे छोटे संतरे झलक के बाहर आ गए । पापा एकदम से छोटे संतरों पे लपक परे और उसका रस चूसने लगे । प्राची पापा के बांहों में किसी छोटी बच्ची जैसी ही लग रही थी । पापा के हथेली पे उसका पूरा स्तन भर जाता था ।

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पापा बेतहाशा प्राची के चूचों को चूसने लगे । प्राची भी आज एक अलग आनंद को महसूस कर रही थी । आज उसे ये पापा का प्यार, पहले दिन से बिल्कुल ही अलग लग रहा था । पहले दिन तो उसे घबराहट , डर , शर्म और चिंता, सब हो रहा था । आज ऐसा नहीं था , आज वो सेक्स की खिलाड़ी बनाना चाहती थी । पापा को उसे पूर्ण संतुष्टि देना था । वो पापा के होंठो का स्पर्श अपने चूचों पे महसूस कर पा रही थी । वो भी मदहोश हो गई । पापा चूची को चूस ही इतना अच्छा रहे थे ।
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आज प्राची को पापा की कलाकारी पे बहुत प्यार आ रहा था । पापा बारी बारी दोनों चूचों को मुंह में भरते और बीच बीच में चूची की गुरी को भींच के मसल देते । निप्पलों को पापा जैसे ही मसलते, प्राची के सर से पैर तक एक कंपन सा महसूस होता और उसके चूत में इक टीस सी उठती थी ।
पापा अब निप्पलों को खींच खींच कर पी रहे थे । बेटी के चूचों से दूध नहीं तो नहीं निकल रहा था, लेकिन पापा को उसका रस पीने में जरूर परम सुख मिल रहा था ।

पापा चूची चूसते हुए सोच रहे थे : आह....., क्या मक्खन की तरह सॉफ्ट है मेरे 19 साल की नवविवाहिता नवयौवना बेटी के चूचक।

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प्राची भी पापा के इस तरह के मादक कला से बहुत प्रभावित हो रही थी ।
प्राची अपने आप को आज एक खुशकिस्मत बीवी समझ रही थी । उसे पहले दिन तो बहुत संकोच हो रहा था । पर आज बात कुछ अलग सी थी । वो खुल के आज पापा का साथ देना चाहती थी ।
चूची चुसाई करते हुए पापा धीरे से प्राची का होंठों से भी रस पी लेते थे। पापा अब प्राची का होंठ अपने होंठ में भरे , अपने एक हाथ से प्राची के छोटे चूची को मसल रहे थे और दूसरे हाथ से अपने बेटी का चुत मसल रहे थे , मर्दन कर रहे थे । चूत पापा के छुअन से ही टपकाने लगी थी । प्राची आज निहाल हो गई थी पापा के प्यार देख के । वो इनका पूरा साथ दे देना चाहती थी , उनके साथ ही बह जाना चाहती थी ।

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पापा अपनी बेटी की चूत अभी भी पैंटी के ऊपर से ही छेड़ रहे थे । उन्हें महसूस हुआ कि योनि द्वार के आगे का पैंटी का पूरा हिस्सा भीग चुका है । वो समझ गए कि अब बेटी का चूत दर्शन करना पड़ेगा कि कितनी गीली हो चुकी है ।
पापा ने अपनी प्यारी बीबी से बोला : अरे मेरी जान ,तेरी चूत तो बेतहाशा टपक रही है । देख कितनी गीली हुई जा रही है मेरे छुते ही । लग रहा है इसे आजाद करना पड़ेगा , मेरी रानी , नहीं तो ये तेरे पैंटी को पूरी तरह भिगो देगी।
प्राची उम्म्म्हः उम्ह्ह्ह करती जा रही थी और धीरे धीरे पापा का लन्ड लेने के लिए जोशिया रही थी ।
प्राची : पापा , आपके लिए ही टपक रही है शायद , आप तो इसे जबरदस्त गरम कर रहे है ।
पापा: हां बेटी , जरा देखूं तो , कितनी गीली हुई है ये ।

पापा अब ये बोल के प्राची की पैंटी को सरकने लगे ।


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प्राची को पापा का ये अंदाज भा रहा था । पापा उसे आज बहुत मादक मर्द लग रहे थे । पापा ने पैंटी सरका के पैर के नीचे से उतार चुके थे । और प्राची नीचे से पूरी नंगी हो चुकी थी , योनि खुल के पापा के सामने आ चुका था और प्राची पैंटी के क़ैद से आजाद होने के बाद, हल्की और नीचे से आजाद महसूस कर रही थी । आज उसे स्त्री का असली जोश का पता चल रहा था, कि कितनी गर्मी होती है एक स्त्री के अंदर ।
एक तो प्राची की निगोडी चूत बहने लगी थी , ऊपर से पापा की चुम्बन और चूची चूसने की कला भी उसे मदहोसी से भर रही थी आज। आज वो पापा के साथ पूरी तरह खुल चुकी थी ।


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पापा अब अपने पत्नी के पूरे बदन का कमान संभाल चुके थे ऊपर से नीचे तक कुशलता से वो अपने बेटी को चूसते , चाटते , चूमते और मसलते जा रहे थे । आज एक बेटी अपने पिता के आगोश में पूरी नंगी कर आजाद लेटी , जोसियाते जा रही थी ।
प्राची की मदहोशी उसे बहुत बेबस बना रही थी। उसे ऐसा लग रहा था कि वो पापा के बांहों में ही बेहोश हो जाएगी । अपनी बेटी को ,इतना मादक , इतना मदहोश होते देख पापा को भी लग गया था कि आज पहली बार उनकी बेटी मन से उन्हें अपना चुकी है , नहीं तो पहले दिन और उसके बाद भी, वो जबरदस्ती ही प्राची के साथ यौन सम्बन्ध बनाते और उसके शरीर के साथ खिलवाड़ कर पाते थे ।

एक पुरुष को भी पता चल ही जाता है कि कब उसकी स्त्री मन से उसके साथ सेक्स करना चाहती है ।

पापा भी जोश में आ चुके थे ।उनका मोटा लिंग भी उनके कच्छे के अंदर ही ऐंठने लगा था ,और हिचकोले मार रहा था । पापा और बेटी का तन बदन एक दूसरे में रगड़ खा रहा था , और जोश की सारे सीमा को पार कर रहा था । प्राची तो अपना होशो हवाश खो ही चुकी थी । उसे परम आनंद मिलने लगा था ।

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प्राची इतना जोशिया गई कि उसका अपने ऊपर काबू ना रहा और वो पापा की बांहों में ही अकड़ने लगी। वो एकदम चरम तक पहुंच गई और एक मादक छटपटाहट के साथ उसकी चूत ने फव्वारा छोड़ दिया । प्राची अब पहली बार पापा के साथ फोरप्ले में ही झड़ चुकी थी । उसके चूत से एक गाढ़ा सफेद पानी, एकदम हल्के से नीचे की ओर रिसने लगा ।
पापा प्राची के थरथराहट से ही समझ गए कि उनकी बेटी उनके कलाकारी को सह नहीं पाई और रास्खलित हो गई है।
वो अपने बेटी का चूतरस का स्वाद चखने के लिए बेताब से हो गए और अपनी सिर को प्राची के योनि के तरफ बढ़ा दिया ।
पापा अपने बेटी के योनि को एक टक से देखने लगे । वो आज एक दम डबल रोटी की तरह फूली हुई थी और उसके बीच से एक सफेद रस का लाइन सा बना हुआ था , जो बह के उसके गांड के छेद तक टपक चुका था । पापा ने झट से अपना जीभ निकल के रस चाट गए और प्राची के चूत को अपने होंठों से कैद के लिया । वो अपनी बेटी का चूत चाट रहे थे ।
कभी ज़ीभ लगा के चाटते,तो कभी होंठो से योनि के बाहरी होंठों को चूसने लगते ।
प्राची का पारा फिर से बढ़ने लगा । वो पापा की चूत चूसने की कला को भी ,अपने मुंह से मादक सिसकारियां निकला के , सराहने लगी थी ।
प्राची :आह्ह्ह....आह्ह्ह्ह...उंह्ह्ह्ह...पापा....
कितने अच्छे है आप.....मै निहाल हो गई ....आपसे बहुत प्यार करती हु मैं पापा.... आह्ह्ह्ह...ऐसे ही चूसिए....आह...

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पापा की चूत चुसाई से प्राची निहाल हो गई , पापा लगभग , 10 मिनट ऐसे ही प्राची का योनि रसपान करते रहे । और प्राची फिर से अकड़ने लगी ।प्राची ने , एक गर्म रसदार फव्वारा सा पापा के मुंह में ही छोड़ दिया और चीत्कार मारते हुई पापा के मुंह में ही छड़ गई ।

दूसरी बार झरने के बाद प्राची पता चल गया कि आज वो कितनी बार झड़ेगी उसे इसका अंदाजा वो नहीं है । क्योंकि पापा ने तो लन्ड अभी खोला वो नहीं है और उसकी योनि दो बार रस छोड़ चुकी थी ।
 
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