Update 22:
घर का माहौल आज खुशनुमा था । पापा और दादी दोनों खुश थे, क्योंकि आज प्राची फिर से पापा से मिलन के लिए बिल्कुल फिट हो चुकी थी । साथ में प्राची भी अपने दर्द से इजात पा चुकी थी, जो उसे पापा ने दिया था, तो वो भी थोड़ा अच्छा महसूस कर रही थी । प्रज्ञा को भी इसकी भनक तो लग ही गई थी, कि दीदी अब बिल्कुल ठीक लग रही है, और रात को शायद पापा से मिलन फिर से कर पाएगी।
पापा ऑफ़िस से आ चुके थे और चाय पानी कर चुके थे और रात के लिए थोड़ा एक्साइटेड हो रहे थे । और वो थोड़ा TV देखने में मशरूफ थे । उधर दादी और प्राची किचेन में रात का डिनर की तैयारी कर रहे थे । दादी ने फिर से थोड़ा और ज्ञान प्राची को देना तय किया ।
दादी : प्राची , सब्जी काट ले तो बताना, मै चढ़ा दूंगी मसाला डाल के।
प्राची : जी दादी ,ठीक है।
दादी : बेटी रात के लिए तैयारी में हो न ?
प्राची अचानक से दादी के किए सवाल को समझ नहीं सकी, शायद उसका ध्यान उतना नहीं था ।
प्राची : रात के लिए..., कौन सी तैयारी, दादी।
दादी : अरे, देख लो इस लड़की को , उधर तेरा पति और पापा ,इतना बेताब है तेरे लिए, और तुझे उसकी कुछ पड़ी ही नहीं है क्या ? मैं रात के संभोग की बात कर रही हु । रात को होना है ना तुम दोनों के बीच ?
प्राची का ध्यान दादी के बात पे अब पूरा था वो थोड़ा झेंपते हुए बोली : जी दादी ।
दादी : जी दादी क्या ? तैयार है न ?
दादी प्राची के मुंह से स्पष्ट सुनना चाहती थी । वो चाहती थी कि प्राची अब खुल के सारी बात करे उनके साथ।
प्राची : हां दादी तैयार ही हु।
दादी : हां , ये बहुत जरूरी है बेटी की पति को तू खुश रखा कर ।
प्राची : जी दादी , मै पूरी कोशिश करूंगी ।
दादी : चल आज दूसरा दिन जरूर है तेरे और पापा के मिलन का, मगर तूने पहले दिन के बाद संभोग जो नहीं किया , हो सकता है, आज भी थोड़ा दर्द हो तुझे, क्योंकि योनि फिर टाइट हो गई हो।
प्राची : दादी , मतलब आज फिर से उतना ज्यादा दर्द होगा क्या मुझे ?
दादी: ना ना, पहले दिन जैसा तो बिल्कुल नहीं होगा , हा अभी अभी तूने सेक्स शुरू किया है, तो तेरी योनि टाइट ही रहेगी , थोड़ा दर्द तो होगा जब तक तू रेगुलर सेक्स नहीं शुरू कर देती पापा के साथ।
प्राची : रेगुलर से मतलब दादी हर रोज ?
दादी : हर रोज क्यों नहीं , अगर तुम दोनों को अच्छा लगे तो हर रोज या दिन में १० बार भी कर सकते हो तुम दोनों। हाहाहाहाहा.....
प्राची थोड़ा शर्म से नीचे देखने लगी ।
दादी : अरे मेरी बेटी ,अब पापा तेरा पति है । जितना मर्जी हो , वो तेरा मजा ले सकते है , और तुझे जितना मन करे पति के साथ चूदाई कर सकती हो , कोई भी नहीं रोकेगा तुम लोगों को।
प्राची : शर्माते हुए , जी दादी ।
दादी : और एक बात बेटी, मैने पहले भी कहा है , आज भी कहती हु, पापा को अपने अंदर बीज गिराने से मत रोकना । मुझे बड़ा मन है, कि जितनी जल्दी हो सके, तुम दोनों का परिवार बसता देख लु।
प्राची : दादी ,मै तो अभी खुद बच्ची ही हु , मै ये सब कैसे संभाल पाऊंगी अभी ।
दादी : हां जानती हु बेटी, की तेरी उमर थोड़ी कम है अभी ,पर एक बात याद रख ,जितना जल्दी तू इस घर को बच्चा देगी, उतना ही तेरा सम्मान पति के नजर में बढ़ जाएगा । वो तुमसे और ज्यादा प्यार करने लग जाएगा ।
दादी बस प्राची को बच्चा करने के लिए ये सब बाते कर के बहला रही थी।
प्राची : ठीक है दादी ,कोशिश करूंगी मैं ।
दादी : कोशिश नहीं करना है , करना ही है। मुझे बड़ा मन है कि मैं अपने बेटे का एक मुन्ना या मुन्नी को अपने गोद में खिलाऊं ,जैसे तुम दोनों बहनों को खिलाया था ।
प्राची : जी दादी ।
प्राची अभी तो ठीक से चूदाई के मजे वो नहीं लेना सीखी थी और दादी ऐसा प्रैशर बना रही थी बच्चे के लिए ,ये उसे थोड़ा अजीब जरूर लग रहा था ।
लगभग १ घंटे में डिनर तैयार हो गया ओर सब खाना खाने बैठे। सब चुप चाप खाना खा रहे थे।
प्रज्ञा ने शांति भंग करते हुए पापा से बोला : पापा , मेरी एग्जाम शुरू हो रही है बारहवीं की, अगले सोमवार से । और सेंटर यही बगल के विमेन कॉलेज में है ।
पापा: अरे वाह,ये ठीक हो गया , चल मै तुझे ऑफिस जाते हुए ही रस्ते में छोड़ दिया करूंगा ।
दादी : और मेरी बच्ची, तैयारी कैसी है तेरी?
प्रज्ञा : अच्छी है दादी ।
दादी : ठीक है , अच्छे से एग्जाम देना ।
प्राची : ऑल द बेस्ट छुटकी, अच्छे से देना एग्जाम ।
प्रज्ञा थोड़ी मुंहफट थी और कभी कभी , उसके मुंह से कुछ भी, कही भी, निकल जाता था ।
प्रज्ञा : थैंक्स दीदी, आपको भी रात के लिए ऑल थे बेस्ट दीदी।
दादी एक दम से चकित रह गई , पापा थोड़ा झूठा खांसने लगे और प्राची भी शर्मा के लाल हो गई ।
दादी : अरे ,तू कुछ भी, कही भी बोल देती है ? क्या मतलब तेरा रात के लिए ऑल द बेस्ट?
प्रज्ञा को अपनी गलती का एहसास हुआ : अरे नहीं दादी ,मै तो बस दीदी को हिम्मत दे रही थी।
दादी : दीदी को हिम्मत देने के लिए मैं और तेरे पापा है , तू इन अब बातों में ध्यान मत दे , अभी एग्जाम की तैयारी कर।
प्रज्ञा के इस तरह से बोलना पापा को पूरा आश्वस्त कर चुका था कि अब उनकी छोटी बेटी भी छोटी नहीं रह गई है। उसे अब पता है घर में क्या हो रहा है। और शादी के बाद मेरे कमरे में उसकी दीदी के साथ क्या होता है।
पापा: अरे मा , बेकार में ही डांट रही हो तुम इसे, बच्ची है अभी ,थोड़ी समझदार होगी तो थोड़े न ऐसे मुंहफट रहेगी । थोड़ा गम्भीर खुद हो जाएगी ।
प्रज्ञा : पापा से- सॉरी पापा मुझे ऐसे नहीं बोलना चाहिए था ।
पापा: नहीं बाबू , तुम्हारे घर में क्या हो रहा है ,वो सब तो तुम्हे जानना ही चाहिए । और तुम तो अब बड़ी भी हो गई हो। तुम खुल के अपना मत परिवार में रख सकती हो , वैसे तुम्हे तो पता ही है अब प्राची तुम्हारी सिर्फ दीदी ही नहीं ,मा भी है , और मेरी पत्नी भी है । अब प्राची मेरी जिम्मेदारी है बेटी । मैं इसे खुशी देने का कोशिश करूंगा ।
प्रज्ञा : जी पापा , मै समझ रही हु कि आप दीदी के लिए अच्छे हसबैंड बन के जरूर उभरेंगे ।
दादी और प्राची बस चुपचाप खाना खाने लगे ।
पापा: चलो खाना खा लो बेटी , और अपने कमरे में जा के पढ़ाई करना ।
प्रज्ञा : जी पापा ।
सब ने खाना खाया । एक अजीब सी शांति थी अभी। सब शांत खाना खा रहे थे उस प्राची और पापा के संवाद के बाद।
खाना के बाद ,दादी किचेन में बर्तन धो रही थी । पापा ने दादी को जा के बोला : अरे मा , प्रज्ञा इतनी समझदार हो गई ,मै समझा नहीं था ।
दादी : हां बेटे , वो भी अब जानती है कि उसके दीदी के साथ तुम सेक्स करते हो । मुझ से ही उसने सारी बाते पूछी थी ।
पापा: पर अपने बताया क्यों मा?
दादी : तो क्या करती , प्राची की चीख सुन के वो तुम दोनों को पहले दिन ही डिस्टर्ब करती । तो सब कुछ बताना पर की उसके दीदी के साथ क्या हो रहा है और वो बिल्कुल ठीक है।
पापा: ओह , तभी की प्राची को ऑल द बेस्ट बोल रही थी।
दादी : हां बेटा ।
ठीक है मां: मै अपने कमरे में जा रहा हु । प्राची को जल्दी भेज दीजिएगा।
दादी : हां हां , भेज दूंगी तेरे बीवी को तेरे पास, अपने पास थोड़े न रख लूंगी ।
पापा: हाहा...अरे मा बस अब सबर नहीं हो रहा , एक सप्ताह से अपनी पत्नी होते हुए वो नहीं कर पा रहा था , आपके कारण।
दादी : मेरे कारण , खुद क्या किया था तू , मेरी बच्ची का हाल खराब कर दिया था तूने , ये सबक है तेरे लिए , जब तक प्राची सेक्स में पारंगत नहीं हो जाती , अपने हवस की थोड़ा काबू कर के रख और एक या दो राउंड के बाद छोड़ दे उसे , कुछ दिन बाद , जम के वो खुद मजे लेगी।
पापा: ठीक है मां।
पापा पूरा मिज़ाज बना चुके थे आज प्राची से संभोग के लिए । दादी को भी अपने बेटे की तड़प साफ दिख रही थी और उससे पक्का पता था कि आज फिर ये 1 या 2 राउंड कर के रुकने वाला नहीं है।
पापा कमरे में जा चुके थे और प्राची , प्रज्ञा के कमरे में उसे दूध देने गई थी ।
प्रज्ञा : सॉरी दीदी मुझे ऐसे खाने के टाइम नहीं बोलना चाहिए था। पता नहीं पापा क्या सोचेंगे ।
प्राची : हम्ममम, तेरी तो यही दिक्कत है ,कुछ भी बोलने से पहले सोचती बिल्कुल नहीं है । अब पापा को भी पता लग गया होगा कि उनकी छोटी बेटी जवान हो गई है और क्या ।
प्रज्ञा शर्मा गई : धत्त दीदी आप भी न।
प्राची : चल कोई नहीं , थैंक यू , तेरी ऑल द बेस्ट के लिए ।
प्रज्ञा : अरे दीदी वाह पूरी खुश हो आप तो , चलिए अच्छे से बीते आपकी रात आज पापा के बाहों में ।
प्राची : बस हो गया , अब ज्यादा सर में मत चढ़ ।
प्रज्ञा : हां हां , मै सर पे चढ़ू तो आपको दिक्कत हो रही है , ओर रात को पापा जो आप पे चढ़ेंगे उसका क्या ।
प्राची : हाहाहाहाहा, हद कर रही हो तुम भी , ये मत भूलो मैं मां वी हु तेरी अब से ।
प्रज्ञा : ओके मम्मी , सॉरी।
दोनों बहन हंसने लगे । की तभी दादी का आवाज आया । प्राची पापा के लिए भी दूध लेके जा, अगर प्रज्ञा को दूध दे दिया हो तो , पापा के कमरे में इंतजार कर रहे है तेरा।
प्रज्ञा : जाइए मम्मी ,पापा इंतजार कर रहे है आपको प्यार करने के लिए ।
प्राची : बेशरम ,तू नहीं सुधरेगी ।
प्राची इतना बोल के प्रज्ञा के कमरे से खाली दूध का ग्लास लेके निकल गई।