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dkpk

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Update 20:

अब पापाजी की तड़प चरम पे था । वे बस प्राची के चूची के बीच अपना लन्ड फसा के बह जाना चाहते थे । जैसे उन्होंने बहुत सारे ब्लू फिल्म में देखा था ,जहां लड़का अपना लिंग लड़की के चूची की बीच डाल के चूची की लौड़ा को आगे पीछे करता था ।
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पापा प्राची के सीने पे चढ़ आए और प्राची से बोला : बेटी तू दोनों हाथों से अपने चूचियों को थाम के मेरे लन्ड को जकड़ ले जरा , मन कर रहा है तेरे चूची को सटा सट चोद लू।

प्राची के लिए ये नया था । उसने पापा से कहा : कैसे करू पापा ?

पापा ने अब देर न करते हुए अपना गरम लोहे के सरिया जैसे सख्त लिंग को प्राची के चूची के बीच दरार ने फंसा दिया और फिर प्राची को हाथ से इशारा कर के बताया कि लन्ड को कैसे जकड़ना है चूची के दबाव।

प्राची के चूची तो उतने बड़े नहीं थे , जैसे पापा ब्लू देखा था ।मगर जब प्राची ने लण्ङ को अपने चूचों से जकड़ा। तो पापा को अपने लौड़े के इर्द गिर्द एक मखमली सा एहसास जरूर होने लगा ।

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पापा अपने कमर को आगे पीछे करने लगे । लन्ड पहले से ही प्री कम से थोड़ा चिकना हो गया था और सटा सट चूची के बीच फसलें लगा । पापा को चूत जैसा मजा तो नहीं आ रहा था लेकिन नरम एहसास वो अलग था ये ओर इसका अपना अलग मजा था । पापा ने १५ मिनट तक अपने पत्नी बने बेटी का चूची चोदन किया । प्राची को अपने नरम मम्मो के बीच एक गरम सरिया जैसा पापा का लन्ड का एहसास वो अच्छा लग रहा था । पापा अब चुने वाले थे और फ़ज़ाक से उनके लन्ड से एक तेज वीर्य की धार निकला ओर प्राची का पूरा सीना और गर्दन गरम शैलाब से भींगा गया ।
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प्राची आज पापा को एक अलग मजा दे चुकी थी । पापा ने आखरी बूंद तक अपना पानी छोड़ने के बाद प्राची के सीने से हट गए ।
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पापा के लौड़े पे अब भी वीर्य का कतरा लगा हुआ था । पापा ने प्राची को बोला : आ बेटी,थोड़ा पापा की मलाई चख ले ।

और पापा ने, प्राची का बिना कोई जवाब सुने ही लन्ड को मुंह के तरफ बढ़ा दिया ।
प्राची किसी आज्ञाकारी पत्नी की तरह अपना मुंह खोल दो ओर जीभ बाहर निकाल कर पापा का लौड़े पे लगी मलाई को चाटने लगी।


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प्राची ने पापा का लिंग अच्छे से चाट के साफ किया ।

पापा ने भी एक तौलिए से प्राची के सीने पे गिरे अपने माल को पोछा और फिर निढाल हो के प्राची से लिपट गए । और दोनों बाप बेटी ने एक दूसरे को जकड़ के नींद के अघोष में समा गए।
Mazza aa gya
 
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sexsarkar

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Update 21:

ऐसे ही एक सप्ताह तक बाप बेटी की काम पूर्ति होती रही । पापा बिना चोदे ही अपनी बेटी का मजा लेते रहते थे । दादी को भी इंतजार था, कि कब उनके बेटा का अगला मिलन हो पाएगा । लगभग 9 दिनों बाद प्राची की योनि एक दम सही हो गई । वो थोड़ा खुश भी थी और थोड़ा डरी भी हुई थी । खुश इसलिए कि पापा को, अब वो, बिना ना नुकर किए हुए, प्यार दे पाएगी, और डरी हुई इसलिए कि योनि में फिर से पापा अपनी जगह बनाने वाले थे अपने लन्ड से। ऊपर से पापा की वो बात भी उसे याद थी, कि पापा गांड़ भी मारेगे, क्योंकि पापा ने पहले ही कह दिया था ।

उस दिन सबेरे ही दादी ने प्राची से पूछा : बेटी , वहां का दर्द कैसा है ?

प्राची : दादी अब पूरा छूट गया है। कोई भी दर्द नहीं हो रहा है ।

दादी : वाह, मै इसी दिन का इंतजार कर रही थी बेटी , की कब तेरा दर्द खत्म हो और तू फिर से पापा के साथ सहवास कर पाए । बेचारे मेरे बेटे को मैने पत्नी होते हुए भी तड़पा दिया । तू अभी छोटी है, इसलिए मैने उसे रोक दिया। और वो तुझ से प्यार भी बहुत करता है ,इसलिए उसने संयम रखा ,शायद उसके अंदर का बाप भी जाग गया होगा, और बेटी को तकलीफ में नहीं देख सकता है वो।

प्राची दादी की बाते ध्यान से सुन रही थी ।

दादी : और मेरी लाडो , तैयार है न आज रात के लिए ,पहला दिन तो तेरे पापा ने ही तेरे मजे ले लिए , अब तू वो पुरुष का मजा लेना सिख ले । कोई स्त्री अपने जोश में आ जाए तो अच्छे अच्छे मर्दों का पानी निकाल दे और उसकी हवा टाइट कर दे सेक्स के टाइम । तू तो अभी कच्ची है इस खेल में मगर जिस दिन तू पापा के लिंग को उनके ऊपर बैठ के लेने में कामयाब हो जाएगी उस दिन समझ की सेक्स के दौरान तूने पापा को कंट्रोल कर लिया। अगर किसी मर्द के लिंग पे बैठ जाओ और तुम अपने हिसाब से चूदबाओ, उस दिन समझ जाना कि तुम सेक्स का असली मजा लेना सीख गई हो।

प्राची दादी की बात पे बस हामी भर रही थी: जी दादी ।

More updates will be coming soon...ye thora chota update rh gya.
 
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DeewanaHuaPagal

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Update 15:

सुबह
की मीठी हल्की धूप खिल चुकी थी। घर में एक सुकून वाला सन्नाटा अब भी पसरा हुआ था । ये शांति एक ऐसी शांति थी जो किसी तूफान के थमने के बाद आती हैं। रात का तूफान था ही इतना जबरदस्त । एक तो प्यासा 40 साल का अधेड़ और कामना से भरा हुआ आदमी , ऊपर से जिसे 2 साल से स्त्री की गर्मी महसूस करने को नहीं मिला हो , उसकी क्या ख़ुशी रही होगी जब उसे एक कच्ची काली और फुल सी लड़की को भोगने का, उसे तो एक सुनहरा मौका मिल गया था , आप सोच सकते है कितना खुश होंगे पापा।

उधर रात को जब पापा ने अपने की बेटी के किले का द्वार तोड़ा था तो घर में कोई भी उससे अपरिचित नहीं रह गया था । दादी को पता चल गया था कि उसके बेटे ने अपनी पत्नी बनी बेटी के साथ अच्छे से सम्भोग की क्रिया की है, रात को। और प्रज्ञा भी इससे एकदम वाक़िफ हो चुकी थी कि आज से उसकी दीदी, सिर्फ दीदी की नहीं, उसकी मां भी बन गई है , जिसे हर रात अब पापा के साथ बिताना होगा, जैसे सुहाग की रात दीदी ने पापा के कमरे में बिताया था ।

प्रज्ञा तो इतना डर गई थी, उस रात जब दीदी की गुटी हुई चीख सूनी थी उसने । वो दादी के पास भाग गई थी और कितना घबरा सी गई थी वो, अपनी दीदी के लिए । वो तो दादी ने समझाया था कि असल में क्या हुआ है, नहीं तो प्रज्ञा तो यही समझती कि पापा ने उसके बहन के साथ कुछ कर दिया है।

जब रात को पापा का मोटा लन्ड अपने प्यारी बेटी प्राची के योनि में धंसा था, और प्राची जब उसे बर्दाश्त नहीं कर पाई थी और, उसकी चीख जो निकली थी, वो दादी के साथ प्रज्ञा के कानों तक भी पहुंचा था ।

प्रज्ञा तो दौड़ते हुए अपनी दादी के पास पहुंच गई थी और उनसे, अपने दीदी के लिए , अपना चिंता, दादी से जाहिर किया था ।
दादी ने उसे अब समझाया की , ये तो होना ही था बेटी , एक लड़का और लड़की का जब शादी होता है तो उसे अपने बीवी को ये दर्द देना ही पड़ता है । वही दर्द तो पापा ने दिया था अपनी फुल सी बेटी को।

प्रज्ञा : अच्छा दादी पापा का नूनू, दीदी के गुगू डालने से इतना दर्द हुआ है दीदी को?

दादी : हां बाबू , पापा ने अपना लिंग तेरे दीदी के गुप्तांग में पहली बार डाला है ना इसलिए ही थोड़ा तेरी चीख पड़ी थी , तू टेंशन मत ले बेटी, तेरी दीदी बिल्कुल ठीक रहेगी।

प्रज्ञा : पर दादी ,क्या ये हर लड़की को करना ही पड़ता है।

दादी : बेटी इंसान के जीवन का ये तो एक जरूरी अध्याय है। शादी होना , शादी होने के बाद बच्चे होना , फिर उस बच्चे को पालना और उसे फलते फूलते देखना , यही तो जीवन का सार है बेटी , ओर उसकी शुरुआत तो सुहागरात से ही होती है। और सुहागरात में हर लड़की को ये करना पड़ता है बेटी , ये दर्द सहना पड़ता है।

प्रज्ञा : हां दादी कही तो सुनी थी मैने कि एक लड़का अगर लड़की के साथ सेक्स करता है, तो लड़की को बच्चा ठहर जाता है। पता है दादी, मै बहुत दिनों से इस गलत फाहमी में थी कि अगर कोई लड़का kiss करता है, किसी लड़की को तो वो प्रेगनेंट हो जाती है। मुझे इसके बारे में बिल्कुल पता नहीं था कि नुनु लड़की के गुगु में घुसने को सेक्स बोलते है।

दादी प्राची के नादानी पे हस पड़ी : हाहाहाहाहा , अरे नहीं बेटी , अब जो पापा और दीदी कर रहे है, उसे सेक्स कहते है , उस से भी बच्चा नहीं होता , बच्चा तो तब ठहरता है जब सेक्स के बाद लड़का अपनी काम रस लड़की के चूत में डाले ।

प्रज्ञा : हांय्ह्ह, दादी काम रस क्या होता है?

दादी अब समझ गई, कि उसे अपनी पोती को आज एक शिक्षिका के तरह अब बताना पड़ेगा ।

ये सब ज्ञान दादी उस टाइम प्रज्ञा को देने वाली थी जब कमरे के अंदर पापा अपनी बेटी के गुप्तांग में, अपने मर्दानगी की निशानी को घुसाए, मजा ले रहे थे और अपनी बेटी को भोग रहे थे।

दादी : प्रज्ञा लग रहा है अब तू भी बारी होने को आतुर हो गई है। चल में तुझे बताती ही की एक पति ओर पत्नी का रिश्ता क्या होता है , और वो कैसे बनता है।

प्रज्ञा एक जियासु बच्चे की तरह दादी की बाते सुनने को तैयार थी।

प्रज्ञा : हां दादी बताइए ।

दादी : देख बेटी , इतना तो तुझे पता चल है कि सेक्स कैसे होता है। लड़का अपना नुनु, यानी कि लिंग या लन्ड या लौड़ा, सभी नुनु के ही नाम है , किसी लड़की के गुगु , यानी चूत या गुप्तांग या बुर या योनि , सभी गुगू के नाम है, उसमें घुसाता है तो उसे सेक्स बोलते है। अब वो घुसाने का भी एक लंबा तरीका होता है , लिंग को लड़की के योनि में डाल के लड़का उसको अंदर-बाहर लगातार करता है, और फिर सेक्स के अंत में लड़के और लड़की को चरम सुख मिलता है ,वो तरीका करने के बाद ही बच्चा पैदा हो सकता है , चरम सुख यानि लड़के के लिंग से एक गाढ़ा सफ़ेद रस निकलता है तो उसे सेक्स करने के टाइम एक दम अंत में आता है। वो, उस लड़का को लड़की के योनि में भरना पड़ता है , तभी वो बच्चेदानी में जा के अंडे की सींचता है और फिर सब सही रहा तो लड़की पेट से हो जाती है।

दादी प्राची को उसी के भाषा में समझा रही थी। वो अपने नादान पोती को सब बता रही थी।
प्रज्ञा का जिज्ञासा और बढ़ गया ।

प्रज्ञा : दादी, यानी पापा, वो अपना लन्ड अभी दीदी के चूत में डाल दिए है, और अब अंदर बाहर कर रहे है, इसीलिए पलंग भी चोई-चोई और दीदी का पायल छन-छन कर रहा है , अब मैं समझी दादी।

दादी : हां बेटी , तू बिलकुल सही है।

प्रज्ञा : तो क्या दादी , पापा दीदी के भी योनि में अपना गढ़ा सफेद पानी डालेंगे ।

दादी : हां बेटी वो डालेंगे , और उस गाढ़े सफेद पानी का नाम ,वीर्य होता है। वो बीज की तरह काम करता है लड़की के बच्चेदानी में ।

दादी ने , अपने पोती को सच में जीवन का परम ज्ञान दिया था आज। प्रज्ञा को अब हर चीज का मतलब समझ आने लगा था ।

प्रज्ञा : दादी पापा कब तक दीदी के योनि में अंदर बाहर करते रहेंगे ।

दादी : बेटी अंदर बाहर करने को चोदना या चूदाई करना बोलते है। पापा तेरी दीदी को तब तक चोदेंगे जब तक अपना वीर्य प्राची के योनि में न डाल दे बेटी।

प्रज्ञा अब हर बात समझ गई । तभी उसे और दादी को महसूस हुआ कि , प्राची के आहे भरना ओर तेज़ हो गया था और पलंग भी और तेज चोई चोई करने लगा था।

प्रज्ञा : दादी , पापा बहुत जोर से दीदी की चूदाई के रहे है ना।

दादी : हां बेटी , पापा अच्छे से चुदाई के रहे है तेरे दीदी का।

प्रज्ञा : दादी ,मुझे भी ये महसूस करना है , मैने अब तक ये कभी अनुभव नहीं किया है। पापा को बोलो न मुझे वो एक बार चोदे ।

दादी प्रज्ञा के नादानी पे हंसी पड़ी : अरे पागल ,तुझे पापा कैसे चोदेंगे, प्राची के तो शादी है पापा के साथ , वो उनकी पत्नी है अब , उसे जी भर के चोद सकते है तेरे पापा। तू बेटी है उनकी, वो तुझे कैसे चोदेंगे।

प्रज्ञा : दादी घर दीदी पापा की घरवाली है ,तो मैं भी पापा की साली हुई ना, यानी आधी घरवाली , पापा ने ही मुझे बोला था ।

दादी उसकी नादानी पे एकदम हस पड़ी : हा हा , धत पहली , किसी वो आदमी की २ बीवी थोड़ी होती है।

प्राची : दादी तो मेरी भी शादी कर दो न पापा से , पहले के राजा के पास तो बहुत सी बीवी होती थी ,फिर क्यों नहीं कर सकते शादी ।

दादी ने बोला: बेटी , तू अपने ही दीदी की सौतन बनाना चाहती है। तेरी दीदी तो तेरे इस तरह के जिद से टूट जाएगी। उसकी नई नई शादी , उसकी नई दुनिया टूट जाएगी मेरी बच्ची ।

प्रज्ञा को अब होश आया कि वो तो अपनी दीदी का ही हक मारना चाह रही थी। उसे तो सेक्स के बारे में सुन के इतना आनंद आया और पापा और दीदी की शादी के बाद पापा जिस तरह से दीदी को चोद रहे थे उसने उसे रोमांचित कर दिया था इसलिए वो ऐसे बोल परी थी । उसे अपनी गलती का एहसास हुआ।

प्रज्ञा : ओह ,दादी मै तो आपकी बातें सुन के इतना रोमांचित हो गई थी कि मैने ऐसी बात कर दी। मुझे माफ कर दो दादी

दादी : कोई नहीं मेरी बच्ची, मै तेरी मनोदशा समझ रही हु।

पापा ओर प्राची का सुखद चीत्कार दोनों दादी और पोती को रात भर सुनाई देता रहा , प्रज्ञा दादी के रूम में ही सो गई थी रात में ।

आज सुबह , सारे घर में एक नए रिश्ते के आगाज के साथ शुरू हुआ है ।

रात के सुहागरात के बाद, पापा की नींद सबेरे 8 बजे जब खुली, उन्होंने अपनी बाहों में नंगी पड़ी अपनी बेटी को सोता हुआ पाया । पापा अपने आप को आज पूरा मर्द महसूस कर रहे थे । रात को वो लम्हा पापा को याद आ गया जब वो बेदर्दी से अपनी बेटी भोग रहे थे। आह कितना मजा दिया मेरी बेटी ने मुझे। पापा अपने आप पे गर्व भी महसूस के रहे थे, क्योंकि वो 5 बार जन्नत का सैर कर चुके थे और बेटी को तो पता नहीं कितनी बार चरम सुख तक पहुंचाया था।

पापा एक टक से रात को चोदी हुई बेटी को देखने लगे।


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अभी उनकी बेटी एक दम शान्त समंदर की तरह लग रही थी । रात को तो पापा ने इस समंदर में इतने गोते मारे थे म, कि ये समंदर रात भर हिलकोरे मरता रहा था ।

पापा अपनी बेटी की मासूमियत भरा चेहरा देखते रहे । उन्हें अपने बेटी पे प्यार आ रहा था । रात को कितना दर्द दिया था उन्होंने अपने सगी बेटी को। प्राची के चूत की तरफ जब पापा का ध्यान गया तो उन्होंने देखा कि योनि का बाहरी हिस्सा डबल रोटी की तरह फूला हुआ था एकदम लाल हो गया था । उसका छिद्र पहले से काफी बड़ा हो गया था यानी कि वो अब कली नहीं फूल बन चुकी थी। उसके गर्दन , चूची ओर पेट हर जगह पे लाल लाल काटे का निशान पापा के बेरहमी का गवाही दे रहा था , कितने लव बाइट दिए थे एक बाप में अपनी बेटी को ,संभोग के संयम ।
अब भी प्राची रात के थकान के बाद पापा के सामने निर्वस्त ऐसे पड़ी हुई थी कि वो पापा की गुलाम हो ।

इधर दादी वी उठी हुई थी और उसको उठे हुए १ घंटा हो चुका था ।

अभी तक नए दूल्हा और दुल्हन का दरवाजा बंद था, जो उनके बेटे ने ,उनकी पोती के साथ, कल रात को सुहागरात मनाने से पहले बंद किया था।

दादी अब ओर इंतज़ार नहीं करना चाहती थी अपने पोती का हाल चल लेने के लिए वो , जानती थी कि उसके योनि में आज कितना दर्द हो रहा होगा और उसको दादी की जरुरत हो सकती है ।

दादी से रहा नहीं गया और वो अपने बेटे और बहू के कमरे की ओर चल दी ।

पापा इधर अपनी बेटी को सोते हुए एक टक से निहारे जा रहे थे, वो उसकी बनावट और सुंदरता के कायल हुए परे थे।

तभी बाहर से दादी ने हल्का सा गेट पे दस्तक किया: बेटा , बेटा ।

पापा - हां मा ।
पापा भी उसी नग्न अवस्था में ही दादी को जवाब दिया ।

दादी : बेटा , दरवाजा खोल न । प्राची ठीक है न तोरा जी घबरा है उसके लिए।

प्राची रात के थकान के बाद थोड़ी गहरी नींद में पड़ी हुई थी।

पापा: मां थोड़ा समय दो , हम थोड़े ऐसे अवस्था में है कि थोड़ा समय लग जाएगा ।

दादी समझ गई कि बेटा ओर पोती अंदर अब वी नंगे ही परे है। दादी लौट के जाने ही वाली थी पर मन में एक विचार आ गया।

दादी - बेटा , कोई बात नहीं मुझे जरा हाल लेने दे अपनी पोती का ,बहुत जी घबरा रहा है मेरा ,रात का चीख सुन के ।

पापा समझ गए रात को जो प्राची की चूत की झिल्ली उन्होंने अपने लिंग से फारी थी और उस वक्त प्राची ने चीखा था वो मां के कानों तक गया था । पापा शर्मिंदा हो गए थोड़ा ।

दादी २ मिनट इंतज़ार के बाद समझ गई बेटा दरवाज़ा खोलने में संकोच कर रहा है ।

उन्होंने थोड़ा दिलासा दिलाते हुए कहा : कोई बात नहीं बेटा ,मै जानती हु तुम दोनों अब नग्न अवस्था में होगे । पर मुझसे क्या शर्माना ।

पापा दादी की बात मान कर , प्राची के ऊपर चादर डाल दिया ताकि वो नंगी न दिखे दादी को और अपने नीचे कमर में एक तौलिया बांध के दरवाजा खोला : जी मां बोलिए ।
अंदर प्राची अब भी बेसुध पड़ी थी।

दादी : बेटे ,रात को सब अच्छे से हुआ न ।

पापा: हां मा , मैने अब अच्छे से किया ।

दादी : मेरी पोती कैसी है बेटे । (ये सवाल करती हुई दादी रूम के अंदर तक आ गई)

पापा : ठीक ही है मां वो भी।

दादी को पता था कि उनकी पोती ने 40 साल के मोटे लिंग को सहा है रात को । वो ठीक नहीं होगी । वो जानती थी जैसा दादी ने कल रात को अपने पोती को ,अपने बेटे के रूम में छोड़ा था, और रात को जैसा वो चीखी थी, वैसा वो बिल्कुल नहीं होगी जैसा वो कल सुहागरात से पहले थी।

दादी ने प्राची के तरफ देखा । वो अब भी बेसुध चादर ओढ़े पड़ी थी। ऐसा लग रहा था कि रात को बहुत थक गई थी और थकान के कारण अभी वी सो रही थी । दादी ने गर्दन पे ध्यान दिया तो उनको पापा का दिया हुआ लव बाइट दिख गया उन्हें । पापा ने ये भाप गए और थोड़ा नज़ारे नीची कर लिया।

दादी ने पापा को बोला- बेटा एक मिनिट के लिए दरवाज सटा दे जरा , अपने पोती को देखना है मुझे । तू आदमी है और एक औरत का तकलीफ तू नहीं समझ सकता । एक बार मैं अवलोकन कर लूंगी तो आश्वस्त हो जाऊंगी ।

पापा दादी को मना नहीं कर सकते थे , आखिर मा ने ही तो उनकी उनके बेटी के साथ मिलन करवाया था । वो उनकी गार्जियन थी।

पापा ने दरवाजा हल्के से भीरा दिया ।

दादी : बेटे , अपनी दुल्हन का जरा चादर हटा तो।

पापा थोड़े झेप से गए । वो समझ गए कि जो कल रात को उन्होंने अपने बेटी के साथ बेदर्दी से शंभोग किया था उसका सबूत उनकी मां को दिख जाएगा ।

दादी ने फिर से कहा : मुझे देखना है बेटे अपने पोती को । चादर हटा तू।

पापा ने प्राची का चादर उठा दिया , दादी के सामने प्राची पूरी नंगी ही पड़ी थी।


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पापा अपनी नजरें नीचे किए हुए वही खड़े थे ।

दादी ने ऊपर से नीचे तक अपने पोती के नंगे बदन का अवलोकन किया । प्राची के शरीर में काफी बदलाव दिख रहे थे दादी को , क्योंकी दादी ने शादी से पहले भी प्राची को नंगी कर के अवलोकन किया था। प्राची के योनि एक दम सुजा हुआ प्रतीत हो रहा था । जगह जगह शरीर पे लाल लाल कटे का निशान गवाही दे रहे थे कि पापा ने रात को शानदार तरीके से बेटी को भोगा है।

दादी 5 min तक अपने बेटे की दुल्हन को देखी और समझ गई कि अब उसे प्राची का ख्याल रखना पड़ेगा कुछ दिनों तक , चूत पे हुईं सूजन को देख के लग रहा था कि शायद वो चल भी ना पाए 1-2 दिन और सेक्स तो 5-6 दिनों तक नहीं ही होना चाहिए ।

दादी ने पापा को बोला : बेटा इसकी तो तूने हालात खराब कर दी है। मैने तुझे बोला था कि आराम से करना,तूने तो इसको बेदर्दी से किया है। देख के लग रहा है तूने मेरी पोती का रेप ही कर दिया है। ये क्या किया तूने ?

पापा: मा, मैने तो बस जैसे करते है वैसे किया था। अब सील तोड़ने के लिए थोड़ा तो बेदर्द बनाना ही पड़ा ,नहीं तो इसे तो इतना दर्द हो रहा था ये तो अंदर ही न प्रवेश करने देती मां।

दादी पापा की बात समझ रही थी , पर पोती पर हुई बेदर्दी से उन्हें पता था कि प्राची की ऐसी हालत सिर्फ़ सील तोड़ने से नहीं हुई है ।

दादी : अच्छा तूने सिर्फ सील तोड़ी ओर इसकी योनि की ये हालत हो गई ? सही सही बता कितनी राउंड किया ?

पापा पकड़े गए थे । अब झूठ नहीं बोल सकते थे ।

पापा: 5 राउंड मा।

दादी : क्या... ?? तुझे पता था न, की ये तेरी 19 साल की बेटी है। मैने मान लिया कि तेरी सुहागरात थी तो सील तोड़ना जरूरी था । लेकिन तू तो स्वार्थी के तरह पूरी रात अपनी फूल सी बेटी को रौंदता रहा । 5 बार करने से पहले तेरा दिल नहीं दहला ? एक बार में सुहागरात हो गया था न पूरा? तो फिर 5 बार करने की क्या जरूरत थी तुझे? में तेरी क्या है?

पापा अब अपनी गलती का एहसास कर रहे थे: मेरी पत्नी और बेटी है मां।

दादी - तो तूने इससे रण्डी समझ के इसके मजा रात भर ले लिया ? अब इसकी इतनी देख भाल करनी पड़ेगी मुझे , शायद ये चल वो ना पाए अभी।

पापा: माफ के दो मुझे मा। मै थोड़ा हवस में बह गया था ।

दादी : अब क्या फायदा , नुकसान तो तेरा ही है, एक बार करता तो आज रात एक दम फिट रहती बेटी तेरी , तू फिर संभोग कर सकता था । इसकी हालत देख के तो अब तू 1 सप्ताह के लिए नई दुल्हन के साथ रात का मिलन भूल ही जा ।

पापा शर्मिंदा थे ।

दादी : चल अब मुंह मत बना । पता है २ साल से तू प्यासा था मेरे बेटे । लेकिन तुझे ऐसे तो नहीं संभोग नहीं करना चाहिए था ना। अपनी बेटी है तेरी , कोई बाजारी औरत नहीं । तेरी पत्नी है । रोज घर में तेरे लिए ही उपलब्ध रहती ना। चल अब मैं चलती ही , इसे नींद से जगा और दोनों जन बाहर आओ फ्रेश होके , तुम दोनों को एक पूजा करनी है। रिवाज है कि शादी के बाद नई दुल्हन और दूल्हा साथ करते है अपना पहला पूजा , सुहागरात के बाद।

पापा : ठीक है मां, आते है , आधे घंटे का समय दीजिए हम दोनों को।

दादी फिर से प्राची पे चादर डाल दिया । और कमरे से बाहर चली गई।

पापा थोड़े स्तब्ध हो गए। पर अब वो अपनी गलती का एहसास कर रहे थे । बेटी को पूरी रात उन्हें नहीं रौंदना चाहिए था ।

खैर दादी के बात को इनको पापा को कोई बुरा नहीं लगा , वो जानते थे दादी पोतियों से और उनसे कितना प्यार करती है। ग़लती करूंगा तो डांटेगी भी ।

वो अब प्राची को उठाने चल दिए ।
Daadi nahi samzi baat ko..
Shikari ko shikar hi mat do fir?
Ab bhuke shikari ke aage koi kamjor shikar dalega toh ab wo to chup rehene se raha!

Nisarg ka santulan bhi hota hai.

Kya gajab ka update hai.
Lastwala conversation best. Kahani aur thodi lambi khinch sakti thi. Khair.
Another feather in Baap-Beti Jodi kahaniya.
 
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DeewanaHuaPagal

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सुबह
की मीठी हल्की धूप खिल चुकी थी। घर में एक सुकून वाला सन्नाटा अब भी पसरा हुआ था । ये शांति एक ऐसी शांति थी जो किसी तूफान के थमने के बाद आती हैं। रात का तूफान था ही इतना जबरदस्त । एक तो प्यासा 40 साल का अधेड़ और कामना से भरा हुआ आदमी , ऊपर से जिसे 2 साल से स्त्री की गर्मी महसूस करने को नहीं मिला हो , उसकी क्या ख़ुशी रही होगी जब उसे एक कच्ची काली और फुल सी लड़की को भोगने का, उसे तो एक सुनहरा मौका मिल गया था , आप सोच सकते है कितना खुश होंगे पापा।

उधर रात को जब पापा ने अपने की बेटी के किले का द्वार तोड़ा था तो घर में कोई भी उससे अपरिचित नहीं रह गया था । दादी को पता चल गया था कि उसके बेटे ने अपनी पत्नी बनी बेटी के साथ अच्छे से सम्भोग की क्रिया की है, रात को। और प्रज्ञा भी इससे एकदम वाक़िफ हो चुकी थी कि आज से उसकी दीदी, सिर्फ दीदी की नहीं, उसकी मां भी बन गई है , जिसे हर रात अब पापा के साथ बिताना होगा, जैसे सुहाग की रात दीदी ने पापा के कमरे में बिताया था ।

प्रज्ञा तो इतना डर गई थी, उस रात जब दीदी की गुटी हुई चीख सूनी थी उसने । वो दादी के पास भाग गई थी और कितना घबरा सी गई थी वो, अपनी दीदी के लिए । वो तो दादी ने समझाया था कि असल में क्या हुआ है, नहीं तो प्रज्ञा तो यही समझती कि पापा ने उसके बहन के साथ कुछ कर दिया है।

जब रात को पापा का मोटा लन्ड अपने प्यारी बेटी प्राची के योनि में धंसा था, और प्राची जब उसे बर्दाश्त नहीं कर पाई थी और, उसकी चीख जो निकली थी, वो दादी के साथ प्रज्ञा के कानों तक भी पहुंचा था ।

प्रज्ञा तो दौड़ते हुए अपनी दादी के पास पहुंच गई थी और उनसे, अपने दीदी के लिए , अपना चिंता, दादी से जाहिर किया था ।
दादी ने उसे अब समझाया की , ये तो होना ही था बेटी , एक लड़का और लड़की का जब शादी होता है तो उसे अपने बीवी को ये दर्द देना ही पड़ता है । वही दर्द तो पापा ने दिया था अपनी फुल सी बेटी को।

प्रज्ञा : अच्छा दादी पापा का नूनू, दीदी के गुगू डालने से इतना दर्द हुआ है दीदी को?

दादी : हां बाबू , पापा ने अपना लिंग तेरे दीदी के गुप्तांग में पहली बार डाला है ना इसलिए ही थोड़ा तेरी चीख पड़ी थी , तू टेंशन मत ले बेटी, तेरी दीदी बिल्कुल ठीक रहेगी।

प्रज्ञा : पर दादी ,क्या ये हर लड़की को करना ही पड़ता है।

दादी : बेटी इंसान के जीवन का ये तो एक जरूरी अध्याय है। शादी होना , शादी होने के बाद बच्चे होना , फिर उस बच्चे को पालना और उसे फलते फूलते देखना , यही तो जीवन का सार है बेटी , ओर उसकी शुरुआत तो सुहागरात से ही होती है। और सुहागरात में हर लड़की को ये करना पड़ता है बेटी , ये दर्द सहना पड़ता है।

प्रज्ञा : हां दादी कही तो सुनी थी मैने कि एक लड़का अगर लड़की के साथ सेक्स करता है, तो लड़की को बच्चा ठहर जाता है। पता है दादी, मै बहुत दिनों से इस गलत फाहमी में थी कि अगर कोई लड़का kiss करता है, किसी लड़की को तो वो प्रेगनेंट हो जाती है। मुझे इसके बारे में बिल्कुल पता नहीं था कि नुनु लड़की के गुगु में घुसने को सेक्स बोलते है।

दादी प्राची के नादानी पे हस पड़ी : हाहाहाहाहा , अरे नहीं बेटी , अब जो पापा और दीदी कर रहे है, उसे सेक्स कहते है , उस से भी बच्चा नहीं होता , बच्चा तो तब ठहरता है जब सेक्स के बाद लड़का अपनी काम रस लड़की के चूत में डाले ।

प्रज्ञा : हांय्ह्ह, दादी काम रस क्या होता है?

दादी अब समझ गई, कि उसे अपनी पोती को आज एक शिक्षिका के तरह अब बताना पड़ेगा ।

ये सब ज्ञान दादी उस टाइम प्रज्ञा को देने वाली थी जब कमरे के अंदर पापा अपनी बेटी के गुप्तांग में, अपने मर्दानगी की निशानी को घुसाए, मजा ले रहे थे और अपनी बेटी को भोग रहे थे।

दादी : प्रज्ञा लग रहा है अब तू भी बारी होने को आतुर हो गई है। चल में तुझे बताती ही की एक पति ओर पत्नी का रिश्ता क्या होता है , और वो कैसे बनता है।

प्रज्ञा एक जियासु बच्चे की तरह दादी की बाते सुनने को तैयार थी।

प्रज्ञा : हां दादी बताइए ।

दादी : देख बेटी , इतना तो तुझे पता चल है कि सेक्स कैसे होता है। लड़का अपना नुनु, यानी कि लिंग या लन्ड या लौड़ा, सभी नुनु के ही नाम है , किसी लड़की के गुगु , यानी चूत या गुप्तांग या बुर या योनि , सभी गुगू के नाम है, उसमें घुसाता है तो उसे सेक्स बोलते है। अब वो घुसाने का भी एक लंबा तरीका होता है , लिंग को लड़की के योनि में डाल के लड़का उसको अंदर-बाहर लगातार करता है, और फिर सेक्स के अंत में लड़के और लड़की को चरम सुख मिलता है ,वो तरीका करने के बाद ही बच्चा पैदा हो सकता है , चरम सुख यानि लड़के के लिंग से एक गाढ़ा सफ़ेद रस निकलता है तो उसे सेक्स करने के टाइम एक दम अंत में आता है। वो, उस लड़का को लड़की के योनि में भरना पड़ता है , तभी वो बच्चेदानी में जा के अंडे की सींचता है और फिर सब सही रहा तो लड़की पेट से हो जाती है।

दादी प्राची को उसी के भाषा में समझा रही थी। वो अपने नादान पोती को सब बता रही थी।
प्रज्ञा का जिज्ञासा और बढ़ गया ।

प्रज्ञा : दादी, यानी पापा, वो अपना लन्ड अभी दीदी के चूत में डाल दिए है, और अब अंदर बाहर कर रहे है, इसीलिए पलंग भी चोई-चोई और दीदी का पायल छन-छन कर रहा है , अब मैं समझी दादी।

दादी : हां बेटी , तू बिलकुल सही है।

प्रज्ञा : तो क्या दादी , पापा दीदी के भी योनि में अपना गढ़ा सफेद पानी डालेंगे ।

दादी : हां बेटी वो डालेंगे , और उस गाढ़े सफेद पानी का नाम ,वीर्य होता है। वो बीज की तरह काम करता है लड़की के बच्चेदानी में ।

दादी ने , अपने पोती को सच में जीवन का परम ज्ञान दिया था आज। प्रज्ञा को अब हर चीज का मतलब समझ आने लगा था ।

प्रज्ञा : दादी पापा कब तक दीदी के योनि में अंदर बाहर करते रहेंगे ।

दादी : बेटी अंदर बाहर करने को चोदना या चूदाई करना बोलते है। पापा तेरी दीदी को तब तक चोदेंगे जब तक अपना वीर्य प्राची के योनि में न डाल दे बेटी।

प्रज्ञा अब हर बात समझ गई । तभी उसे और दादी को महसूस हुआ कि , प्राची के आहे भरना ओर तेज़ हो गया था और पलंग भी और तेज चोई चोई करने लगा था।

प्रज्ञा : दादी , पापा बहुत जोर से दीदी की चूदाई के रहे है ना।

दादी : हां बेटी , पापा अच्छे से चुदाई के रहे है तेरे दीदी का।

प्रज्ञा : दादी ,मुझे भी ये महसूस करना है , मैने अब तक ये कभी अनुभव नहीं किया है। पापा को बोलो न मुझे वो एक बार चोदे ।

दादी प्रज्ञा के नादानी पे हंसी पड़ी : अरे पागल ,तुझे पापा कैसे चोदेंगे, प्राची के तो शादी है पापा के साथ , वो उनकी पत्नी है अब , उसे जी भर के चोद सकते है तेरे पापा। तू बेटी है उनकी, वो तुझे कैसे चोदेंगे।

प्रज्ञा : दादी घर दीदी पापा की घरवाली है ,तो मैं भी पापा की साली हुई ना, यानी आधी घरवाली , पापा ने ही मुझे बोला था ।

दादी उसकी नादानी पे एकदम हस पड़ी : हा हा , धत पहली , किसी वो आदमी की २ बीवी थोड़ी होती है।

प्राची : दादी तो मेरी भी शादी कर दो न पापा से , पहले के राजा के पास तो बहुत सी बीवी होती थी ,फिर क्यों नहीं कर सकते शादी ।

दादी ने बोला: बेटी , तू अपने ही दीदी की सौतन बनाना चाहती है। तेरी दीदी तो तेरे इस तरह के जिद से टूट जाएगी। उसकी नई नई शादी , उसकी नई दुनिया टूट जाएगी मेरी बच्ची ।

प्रज्ञा को अब होश आया कि वो तो अपनी दीदी का ही हक मारना चाह रही थी। उसे तो सेक्स के बारे में सुन के इतना आनंद आया और पापा और दीदी की शादी के बाद पापा जिस तरह से दीदी को चोद रहे थे उसने उसे रोमांचित कर दिया था इसलिए वो ऐसे बोल परी थी । उसे अपनी गलती का एहसास हुआ।

प्रज्ञा : ओह ,दादी मै तो आपकी बातें सुन के इतना रोमांचित हो गई थी कि मैने ऐसी बात कर दी। मुझे माफ कर दो दादी

दादी : कोई नहीं मेरी बच्ची, मै तेरी मनोदशा समझ रही हु।

पापा ओर प्राची का सुखद चीत्कार दोनों दादी और पोती को रात भर सुनाई देता रहा , प्रज्ञा दादी के रूम में ही सो गई थी रात में ।

आज सुबह , सारे घर में एक नए रिश्ते के आगाज के साथ शुरू हुआ है ।

रात के सुहागरात के बाद, पापा की नींद सबेरे 8 बजे जब खुली, उन्होंने अपनी बाहों में नंगी पड़ी अपनी बेटी को सोता हुआ पाया । पापा अपने आप को आज पूरा मर्द महसूस कर रहे थे । रात को वो लम्हा पापा को याद आ गया जब वो बेदर्दी से अपनी बेटी भोग रहे थे। आह कितना मजा दिया मेरी बेटी ने मुझे। पापा अपने आप पे गर्व भी महसूस के रहे थे, क्योंकि वो 5 बार जन्नत का सैर कर चुके थे और बेटी को तो पता नहीं कितनी बार चरम सुख तक पहुंचाया था।

पापा एक टक से रात को चोदी हुई बेटी को देखने लगे।


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अभी उनकी बेटी एक दम शान्त समंदर की तरह लग रही थी । रात को तो पापा ने इस समंदर में इतने गोते मारे थे म, कि ये समंदर रात भर हिलकोरे मरता रहा था ।

पापा अपनी बेटी की मासूमियत भरा चेहरा देखते रहे । उन्हें अपने बेटी पे प्यार आ रहा था । रात को कितना दर्द दिया था उन्होंने अपने सगी बेटी को। प्राची के चूत की तरफ जब पापा का ध्यान गया तो उन्होंने देखा कि योनि का बाहरी हिस्सा डबल रोटी की तरह फूला हुआ था एकदम लाल हो गया था । उसका छिद्र पहले से काफी बड़ा हो गया था यानी कि वो अब कली नहीं फूल बन चुकी थी। उसके गर्दन , चूची ओर पेट हर जगह पे लाल लाल काटे का निशान पापा के बेरहमी का गवाही दे रहा था , कितने लव बाइट दिए थे एक बाप में अपनी बेटी को ,संभोग के संयम ।
अब भी प्राची रात के थकान के बाद पापा के सामने निर्वस्त ऐसे पड़ी हुई थी कि वो पापा की गुलाम हो ।

इधर दादी वी उठी हुई थी और उसको उठे हुए १ घंटा हो चुका था ।

अभी तक नए दूल्हा और दुल्हन का दरवाजा बंद था, जो उनके बेटे ने ,उनकी पोती के साथ, कल रात को सुहागरात मनाने से पहले बंद किया था।

दादी अब ओर इंतज़ार नहीं करना चाहती थी अपने पोती का हाल चल लेने के लिए वो , जानती थी कि उसके योनि में आज कितना दर्द हो रहा होगा और उसको दादी की जरुरत हो सकती है ।

दादी से रहा नहीं गया और वो अपने बेटे और बहू के कमरे की ओर चल दी ।

पापा इधर अपनी बेटी को सोते हुए एक टक से निहारे जा रहे थे, वो उसकी बनावट और सुंदरता के कायल हुए परे थे।

तभी बाहर से दादी ने हल्का सा गेट पे दस्तक किया: बेटा , बेटा ।

पापा - हां मा ।
पापा भी उसी नग्न अवस्था में ही दादी को जवाब दिया ।

दादी : बेटा , दरवाजा खोल न । प्राची ठीक है न तोरा जी घबरा है उसके लिए।

प्राची रात के थकान के बाद थोड़ी गहरी नींद में पड़ी हुई थी।

पापा: मां थोड़ा समय दो , हम थोड़े ऐसे अवस्था में है कि थोड़ा समय लग जाएगा ।

दादी समझ गई कि बेटा ओर पोती अंदर अब वी नंगे ही परे है। दादी लौट के जाने ही वाली थी पर मन में एक विचार आ गया।

दादी - बेटा , कोई बात नहीं मुझे जरा हाल लेने दे अपनी पोती का ,बहुत जी घबरा रहा है मेरा ,रात का चीख सुन के ।

पापा समझ गए रात को जो प्राची की चूत की झिल्ली उन्होंने अपने लिंग से फारी थी और उस वक्त प्राची ने चीखा था वो मां के कानों तक गया था । पापा शर्मिंदा हो गए थोड़ा ।

दादी २ मिनट इंतज़ार के बाद समझ गई बेटा दरवाज़ा खोलने में संकोच कर रहा है ।

उन्होंने थोड़ा दिलासा दिलाते हुए कहा : कोई बात नहीं बेटा ,मै जानती हु तुम दोनों अब नग्न अवस्था में होगे । पर मुझसे क्या शर्माना ।

पापा दादी की बात मान कर , प्राची के ऊपर चादर डाल दिया ताकि वो नंगी न दिखे दादी को और अपने नीचे कमर में एक तौलिया बांध के दरवाजा खोला : जी मां बोलिए ।
अंदर प्राची अब भी बेसुध पड़ी थी।

दादी : बेटे ,रात को सब अच्छे से हुआ न ।

पापा: हां मा , मैने अब अच्छे से किया ।

दादी : मेरी पोती कैसी है बेटे । (ये सवाल करती हुई दादी रूम के अंदर तक आ गई)

पापा : ठीक ही है मां वो भी।

दादी को पता था कि उनकी पोती ने 40 साल के मोटे लिंग को सहा है रात को । वो ठीक नहीं होगी । वो जानती थी जैसा दादी ने कल रात को अपने पोती को ,अपने बेटे के रूम में छोड़ा था, और रात को जैसा वो चीखी थी, वैसा वो बिल्कुल नहीं होगी जैसा वो कल सुहागरात से पहले थी।

दादी ने प्राची के तरफ देखा । वो अब भी बेसुध चादर ओढ़े पड़ी थी। ऐसा लग रहा था कि रात को बहुत थक गई थी और थकान के कारण अभी वी सो रही थी । दादी ने गर्दन पे ध्यान दिया तो उनको पापा का दिया हुआ लव बाइट दिख गया उन्हें । पापा ने ये भाप गए और थोड़ा नज़ारे नीची कर लिया।

दादी ने पापा को बोला- बेटा एक मिनिट के लिए दरवाज सटा दे जरा , अपने पोती को देखना है मुझे । तू आदमी है और एक औरत का तकलीफ तू नहीं समझ सकता । एक बार मैं अवलोकन कर लूंगी तो आश्वस्त हो जाऊंगी ।

पापा दादी को मना नहीं कर सकते थे , आखिर मा ने ही तो उनकी उनके बेटी के साथ मिलन करवाया था । वो उनकी गार्जियन थी।

पापा ने दरवाजा हल्के से भीरा दिया ।

दादी : बेटे , अपनी दुल्हन का जरा चादर हटा तो।

पापा थोड़े झेप से गए । वो समझ गए कि जो कल रात को उन्होंने अपने बेटी के साथ बेदर्दी से शंभोग किया था उसका सबूत उनकी मां को दिख जाएगा ।

दादी ने फिर से कहा : मुझे देखना है बेटे अपने पोती को । चादर हटा तू।

पापा ने प्राची का चादर उठा दिया , दादी के सामने प्राची पूरी नंगी ही पड़ी थी।


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पापा अपनी नजरें नीचे किए हुए वही खड़े थे ।

दादी ने ऊपर से नीचे तक अपने पोती के नंगे बदन का अवलोकन किया । प्राची के शरीर में काफी बदलाव दिख रहे थे दादी को , क्योंकी दादी ने शादी से पहले भी प्राची को नंगी कर के अवलोकन किया था। प्राची के योनि एक दम सुजा हुआ प्रतीत हो रहा था । जगह जगह शरीर पे लाल लाल कटे का निशान गवाही दे रहे थे कि पापा ने रात को शानदार तरीके से बेटी को भोगा है।

दादी 5 min तक अपने बेटे की दुल्हन को देखी और समझ गई कि अब उसे प्राची का ख्याल रखना पड़ेगा कुछ दिनों तक , चूत पे हुईं सूजन को देख के लग रहा था कि शायद वो चल भी ना पाए 1-2 दिन और सेक्स तो 5-6 दिनों तक नहीं ही होना चाहिए ।

दादी ने पापा को बोला : बेटा इसकी तो तूने हालात खराब कर दी है। मैने तुझे बोला था कि आराम से करना,तूने तो इसको बेदर्दी से किया है। देख के लग रहा है तूने मेरी पोती का रेप ही कर दिया है। ये क्या किया तूने ?

पापा: मा, मैने तो बस जैसे करते है वैसे किया था। अब सील तोड़ने के लिए थोड़ा तो बेदर्द बनाना ही पड़ा ,नहीं तो इसे तो इतना दर्द हो रहा था ये तो अंदर ही न प्रवेश करने देती मां।

दादी पापा की बात समझ रही थी , पर पोती पर हुई बेदर्दी से उन्हें पता था कि प्राची की ऐसी हालत सिर्फ़ सील तोड़ने से नहीं हुई है ।

दादी : अच्छा तूने सिर्फ सील तोड़ी ओर इसकी योनि की ये हालत हो गई ? सही सही बता कितनी राउंड किया ?

पापा पकड़े गए थे । अब झूठ नहीं बोल सकते थे ।

पापा: 5 राउंड मा।

दादी : क्या... ?? तुझे पता था न, की ये तेरी 19 साल की बेटी है। मैने मान लिया कि तेरी सुहागरात थी तो सील तोड़ना जरूरी था । लेकिन तू तो स्वार्थी के तरह पूरी रात अपनी फूल सी बेटी को रौंदता रहा । 5 बार करने से पहले तेरा दिल नहीं दहला ? एक बार में सुहागरात हो गया था न पूरा? तो फिर 5 बार करने की क्या जरूरत थी तुझे? में तेरी क्या है?

पापा अब अपनी गलती का एहसास कर रहे थे: मेरी पत्नी और बेटी है मां।

दादी - तो तूने इससे रण्डी समझ के इसके मजा रात भर ले लिया ? अब इसकी इतनी देख भाल करनी पड़ेगी मुझे , शायद ये चल वो ना पाए अभी।

पापा: माफ के दो मुझे मा। मै थोड़ा हवस में बह गया था ।

दादी : अब क्या फायदा , नुकसान तो तेरा ही है, एक बार करता तो आज रात एक दम फिट रहती बेटी तेरी , तू फिर संभोग कर सकता था । इसकी हालत देख के तो अब तू 1 सप्ताह के लिए नई दुल्हन के साथ रात का मिलन भूल ही जा ।

पापा शर्मिंदा थे ।

दादी : चल अब मुंह मत बना । पता है २ साल से तू प्यासा था मेरे बेटे । लेकिन तुझे ऐसे तो नहीं संभोग नहीं करना चाहिए था ना। अपनी बेटी है तेरी , कोई बाजारी औरत नहीं । तेरी पत्नी है । रोज घर में तेरे लिए ही उपलब्ध रहती ना। चल अब मैं चलती ही , इसे नींद से जगा और दोनों जन बाहर आओ फ्रेश होके , तुम दोनों को एक पूजा करनी है। रिवाज है कि शादी के बाद नई दुल्हन और दूल्हा साथ करते है अपना पहला पूजा , सुहागरात के बाद।

पापा : ठीक है मां, आते है , आधे घंटे का समय दीजिए हम दोनों को।

दादी फिर से प्राची पे चादर डाल दिया । और कमरे से बाहर चली गई।

पापा थोड़े स्तब्ध हो गए। पर अब वो अपनी गलती का एहसास कर रहे थे । बेटी को पूरी रात उन्हें नहीं रौंदना चाहिए था ।

खैर दादी के बात को इनको पापा को कोई बुरा नहीं लगा , वो जानते थे दादी पोतियों से और उनसे कितना प्यार करती है। ग़लती करूंगा तो डांटेगी भी ।

वो अब प्राची को उठाने चल दिए ।
Daadi nahi samzi baat ko..
Shikari ko shikar hi mat do fir?
Ab bhuke shikari ke aage koi kamjor shikar dalega toh ab wo to chup rehene se raha!

Nisarg ka santulan bhi hota hai.

Kya gajab ka update hai.
Lastwala conversation best. Kahani aur thodi lambi khinch sakti thi. Khair.
Another feather in Baap-Beti Jodi kahaniya.
Update 15:

सुबह
की मीठी हल्की धूप खिल चुकी थी। घर में एक सुकून वाला सन्नाटा अब भी पसरा हुआ था । ये शांति एक ऐसी शांति थी जो किसी तूफान के थमने के बाद आती हैं। रात का तूफान था ही इतना जबरदस्त । एक तो प्यासा 40 साल का अधेड़ और कामना से भरा हुआ आदमी , ऊपर से जिसे 2 साल से स्त्री की गर्मी महसूस करने को नहीं मिला हो , उसकी क्या ख़ुशी रही होगी जब उसे एक कच्ची काली और फुल सी लड़की को भोगने का, उसे तो एक सुनहरा मौका मिल गया था , आप सोच सकते है कितना खुश होंगे पापा।

उधर रात को जब पापा ने अपने की बेटी के किले का द्वार तोड़ा था तो घर में कोई भी उससे अपरिचित नहीं रह गया था । दादी को पता चल गया था कि उसके बेटे ने अपनी पत्नी बनी बेटी के साथ अच्छे से सम्भोग की क्रिया की है, रात को। और प्रज्ञा भी इससे एकदम वाक़िफ हो चुकी थी कि आज से उसकी दीदी, सिर्फ दीदी की नहीं, उसकी मां भी बन गई है , जिसे हर रात अब पापा के साथ बिताना होगा, जैसे सुहाग की रात दीदी ने पापा के कमरे में बिताया था ।

प्रज्ञा तो इतना डर गई थी, उस रात जब दीदी की गुटी हुई चीख सूनी थी उसने । वो दादी के पास भाग गई थी और कितना घबरा सी गई थी वो, अपनी दीदी के लिए । वो तो दादी ने समझाया था कि असल में क्या हुआ है, नहीं तो प्रज्ञा तो यही समझती कि पापा ने उसके बहन के साथ कुछ कर दिया है।

जब रात को पापा का मोटा लन्ड अपने प्यारी बेटी प्राची के योनि में धंसा था, और प्राची जब उसे बर्दाश्त नहीं कर पाई थी और, उसकी चीख जो निकली थी, वो दादी के साथ प्रज्ञा के कानों तक भी पहुंचा था ।

प्रज्ञा तो दौड़ते हुए अपनी दादी के पास पहुंच गई थी और उनसे, अपने दीदी के लिए , अपना चिंता, दादी से जाहिर किया था ।
दादी ने उसे अब समझाया की , ये तो होना ही था बेटी , एक लड़का और लड़की का जब शादी होता है तो उसे अपने बीवी को ये दर्द देना ही पड़ता है । वही दर्द तो पापा ने दिया था अपनी फुल सी बेटी को।

प्रज्ञा : अच्छा दादी पापा का नूनू, दीदी के गुगू डालने से इतना दर्द हुआ है दीदी को?

दादी : हां बाबू , पापा ने अपना लिंग तेरे दीदी के गुप्तांग में पहली बार डाला है ना इसलिए ही थोड़ा तेरी चीख पड़ी थी , तू टेंशन मत ले बेटी, तेरी दीदी बिल्कुल ठीक रहेगी।

प्रज्ञा : पर दादी ,क्या ये हर लड़की को करना ही पड़ता है।

दादी : बेटी इंसान के जीवन का ये तो एक जरूरी अध्याय है। शादी होना , शादी होने के बाद बच्चे होना , फिर उस बच्चे को पालना और उसे फलते फूलते देखना , यही तो जीवन का सार है बेटी , ओर उसकी शुरुआत तो सुहागरात से ही होती है। और सुहागरात में हर लड़की को ये करना पड़ता है बेटी , ये दर्द सहना पड़ता है।

प्रज्ञा : हां दादी कही तो सुनी थी मैने कि एक लड़का अगर लड़की के साथ सेक्स करता है, तो लड़की को बच्चा ठहर जाता है। पता है दादी, मै बहुत दिनों से इस गलत फाहमी में थी कि अगर कोई लड़का kiss करता है, किसी लड़की को तो वो प्रेगनेंट हो जाती है। मुझे इसके बारे में बिल्कुल पता नहीं था कि नुनु लड़की के गुगु में घुसने को सेक्स बोलते है।

दादी प्राची के नादानी पे हस पड़ी : हाहाहाहाहा , अरे नहीं बेटी , अब जो पापा और दीदी कर रहे है, उसे सेक्स कहते है , उस से भी बच्चा नहीं होता , बच्चा तो तब ठहरता है जब सेक्स के बाद लड़का अपनी काम रस लड़की के चूत में डाले ।

प्रज्ञा : हांय्ह्ह, दादी काम रस क्या होता है?

दादी अब समझ गई, कि उसे अपनी पोती को आज एक शिक्षिका के तरह अब बताना पड़ेगा ।

ये सब ज्ञान दादी उस टाइम प्रज्ञा को देने वाली थी जब कमरे के अंदर पापा अपनी बेटी के गुप्तांग में, अपने मर्दानगी की निशानी को घुसाए, मजा ले रहे थे और अपनी बेटी को भोग रहे थे।

दादी : प्रज्ञा लग रहा है अब तू भी बारी होने को आतुर हो गई है। चल में तुझे बताती ही की एक पति ओर पत्नी का रिश्ता क्या होता है , और वो कैसे बनता है।

प्रज्ञा एक जियासु बच्चे की तरह दादी की बाते सुनने को तैयार थी।

प्रज्ञा : हां दादी बताइए ।

दादी : देख बेटी , इतना तो तुझे पता चल है कि सेक्स कैसे होता है। लड़का अपना नुनु, यानी कि लिंग या लन्ड या लौड़ा, सभी नुनु के ही नाम है , किसी लड़की के गुगु , यानी चूत या गुप्तांग या बुर या योनि , सभी गुगू के नाम है, उसमें घुसाता है तो उसे सेक्स बोलते है। अब वो घुसाने का भी एक लंबा तरीका होता है , लिंग को लड़की के योनि में डाल के लड़का उसको अंदर-बाहर लगातार करता है, और फिर सेक्स के अंत में लड़के और लड़की को चरम सुख मिलता है ,वो तरीका करने के बाद ही बच्चा पैदा हो सकता है , चरम सुख यानि लड़के के लिंग से एक गाढ़ा सफ़ेद रस निकलता है तो उसे सेक्स करने के टाइम एक दम अंत में आता है। वो, उस लड़का को लड़की के योनि में भरना पड़ता है , तभी वो बच्चेदानी में जा के अंडे की सींचता है और फिर सब सही रहा तो लड़की पेट से हो जाती है।

दादी प्राची को उसी के भाषा में समझा रही थी। वो अपने नादान पोती को सब बता रही थी।
प्रज्ञा का जिज्ञासा और बढ़ गया ।

प्रज्ञा : दादी, यानी पापा, वो अपना लन्ड अभी दीदी के चूत में डाल दिए है, और अब अंदर बाहर कर रहे है, इसीलिए पलंग भी चोई-चोई और दीदी का पायल छन-छन कर रहा है , अब मैं समझी दादी।

दादी : हां बेटी , तू बिलकुल सही है।

प्रज्ञा : तो क्या दादी , पापा दीदी के भी योनि में अपना गढ़ा सफेद पानी डालेंगे ।

दादी : हां बेटी वो डालेंगे , और उस गाढ़े सफेद पानी का नाम ,वीर्य होता है। वो बीज की तरह काम करता है लड़की के बच्चेदानी में ।

दादी ने , अपने पोती को सच में जीवन का परम ज्ञान दिया था आज। प्रज्ञा को अब हर चीज का मतलब समझ आने लगा था ।

प्रज्ञा : दादी पापा कब तक दीदी के योनि में अंदर बाहर करते रहेंगे ।

दादी : बेटी अंदर बाहर करने को चोदना या चूदाई करना बोलते है। पापा तेरी दीदी को तब तक चोदेंगे जब तक अपना वीर्य प्राची के योनि में न डाल दे बेटी।

प्रज्ञा अब हर बात समझ गई । तभी उसे और दादी को महसूस हुआ कि , प्राची के आहे भरना ओर तेज़ हो गया था और पलंग भी और तेज चोई चोई करने लगा था।

प्रज्ञा : दादी , पापा बहुत जोर से दीदी की चूदाई के रहे है ना।

दादी : हां बेटी , पापा अच्छे से चुदाई के रहे है तेरे दीदी का।

प्रज्ञा : दादी ,मुझे भी ये महसूस करना है , मैने अब तक ये कभी अनुभव नहीं किया है। पापा को बोलो न मुझे वो एक बार चोदे ।

दादी प्रज्ञा के नादानी पे हंसी पड़ी : अरे पागल ,तुझे पापा कैसे चोदेंगे, प्राची के तो शादी है पापा के साथ , वो उनकी पत्नी है अब , उसे जी भर के चोद सकते है तेरे पापा। तू बेटी है उनकी, वो तुझे कैसे चोदेंगे।

प्रज्ञा : दादी घर दीदी पापा की घरवाली है ,तो मैं भी पापा की साली हुई ना, यानी आधी घरवाली , पापा ने ही मुझे बोला था ।

दादी उसकी नादानी पे एकदम हस पड़ी : हा हा , धत पहली , किसी वो आदमी की २ बीवी थोड़ी होती है।

प्राची : दादी तो मेरी भी शादी कर दो न पापा से , पहले के राजा के पास तो बहुत सी बीवी होती थी ,फिर क्यों नहीं कर सकते शादी ।

दादी ने बोला: बेटी , तू अपने ही दीदी की सौतन बनाना चाहती है। तेरी दीदी तो तेरे इस तरह के जिद से टूट जाएगी। उसकी नई नई शादी , उसकी नई दुनिया टूट जाएगी मेरी बच्ची ।

प्रज्ञा को अब होश आया कि वो तो अपनी दीदी का ही हक मारना चाह रही थी। उसे तो सेक्स के बारे में सुन के इतना आनंद आया और पापा और दीदी की शादी के बाद पापा जिस तरह से दीदी को चोद रहे थे उसने उसे रोमांचित कर दिया था इसलिए वो ऐसे बोल परी थी । उसे अपनी गलती का एहसास हुआ।

प्रज्ञा : ओह ,दादी मै तो आपकी बातें सुन के इतना रोमांचित हो गई थी कि मैने ऐसी बात कर दी। मुझे माफ कर दो दादी

दादी : कोई नहीं मेरी बच्ची, मै तेरी मनोदशा समझ रही हु।

पापा ओर प्राची का सुखद चीत्कार दोनों दादी और पोती को रात भर सुनाई देता रहा , प्रज्ञा दादी के रूम में ही सो गई थी रात में ।

आज सुबह , सारे घर में एक नए रिश्ते के आगाज के साथ शुरू हुआ है ।

रात के सुहागरात के बाद, पापा की नींद सबेरे 8 बजे जब खुली, उन्होंने अपनी बाहों में नंगी पड़ी अपनी बेटी को सोता हुआ पाया । पापा अपने आप को आज पूरा मर्द महसूस कर रहे थे । रात को वो लम्हा पापा को याद आ गया जब वो बेदर्दी से अपनी बेटी भोग रहे थे। आह कितना मजा दिया मेरी बेटी ने मुझे। पापा अपने आप पे गर्व भी महसूस के रहे थे, क्योंकि वो 5 बार जन्नत का सैर कर चुके थे और बेटी को तो पता नहीं कितनी बार चरम सुख तक पहुंचाया था।

पापा एक टक से रात को चोदी हुई बेटी को देखने लगे।


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अभी उनकी बेटी एक दम शान्त समंदर की तरह लग रही थी । रात को तो पापा ने इस समंदर में इतने गोते मारे थे म, कि ये समंदर रात भर हिलकोरे मरता रहा था ।

पापा अपनी बेटी की मासूमियत भरा चेहरा देखते रहे । उन्हें अपने बेटी पे प्यार आ रहा था । रात को कितना दर्द दिया था उन्होंने अपने सगी बेटी को। प्राची के चूत की तरफ जब पापा का ध्यान गया तो उन्होंने देखा कि योनि का बाहरी हिस्सा डबल रोटी की तरह फूला हुआ था एकदम लाल हो गया था । उसका छिद्र पहले से काफी बड़ा हो गया था यानी कि वो अब कली नहीं फूल बन चुकी थी। उसके गर्दन , चूची ओर पेट हर जगह पे लाल लाल काटे का निशान पापा के बेरहमी का गवाही दे रहा था , कितने लव बाइट दिए थे एक बाप में अपनी बेटी को ,संभोग के संयम ।
अब भी प्राची रात के थकान के बाद पापा के सामने निर्वस्त ऐसे पड़ी हुई थी कि वो पापा की गुलाम हो ।

इधर दादी वी उठी हुई थी और उसको उठे हुए १ घंटा हो चुका था ।

अभी तक नए दूल्हा और दुल्हन का दरवाजा बंद था, जो उनके बेटे ने ,उनकी पोती के साथ, कल रात को सुहागरात मनाने से पहले बंद किया था।

दादी अब ओर इंतज़ार नहीं करना चाहती थी अपने पोती का हाल चल लेने के लिए वो , जानती थी कि उसके योनि में आज कितना दर्द हो रहा होगा और उसको दादी की जरुरत हो सकती है ।

दादी से रहा नहीं गया और वो अपने बेटे और बहू के कमरे की ओर चल दी ।

पापा इधर अपनी बेटी को सोते हुए एक टक से निहारे जा रहे थे, वो उसकी बनावट और सुंदरता के कायल हुए परे थे।

तभी बाहर से दादी ने हल्का सा गेट पे दस्तक किया: बेटा , बेटा ।

पापा - हां मा ।
पापा भी उसी नग्न अवस्था में ही दादी को जवाब दिया ।

दादी : बेटा , दरवाजा खोल न । प्राची ठीक है न तोरा जी घबरा है उसके लिए।

प्राची रात के थकान के बाद थोड़ी गहरी नींद में पड़ी हुई थी।

पापा: मां थोड़ा समय दो , हम थोड़े ऐसे अवस्था में है कि थोड़ा समय लग जाएगा ।

दादी समझ गई कि बेटा ओर पोती अंदर अब वी नंगे ही परे है। दादी लौट के जाने ही वाली थी पर मन में एक विचार आ गया।

दादी - बेटा , कोई बात नहीं मुझे जरा हाल लेने दे अपनी पोती का ,बहुत जी घबरा रहा है मेरा ,रात का चीख सुन के ।

पापा समझ गए रात को जो प्राची की चूत की झिल्ली उन्होंने अपने लिंग से फारी थी और उस वक्त प्राची ने चीखा था वो मां के कानों तक गया था । पापा शर्मिंदा हो गए थोड़ा ।

दादी २ मिनट इंतज़ार के बाद समझ गई बेटा दरवाज़ा खोलने में संकोच कर रहा है ।

उन्होंने थोड़ा दिलासा दिलाते हुए कहा : कोई बात नहीं बेटा ,मै जानती हु तुम दोनों अब नग्न अवस्था में होगे । पर मुझसे क्या शर्माना ।

पापा दादी की बात मान कर , प्राची के ऊपर चादर डाल दिया ताकि वो नंगी न दिखे दादी को और अपने नीचे कमर में एक तौलिया बांध के दरवाजा खोला : जी मां बोलिए ।
अंदर प्राची अब भी बेसुध पड़ी थी।

दादी : बेटे ,रात को सब अच्छे से हुआ न ।

पापा: हां मा , मैने अब अच्छे से किया ।

दादी : मेरी पोती कैसी है बेटे । (ये सवाल करती हुई दादी रूम के अंदर तक आ गई)

पापा : ठीक ही है मां वो भी।

दादी को पता था कि उनकी पोती ने 40 साल के मोटे लिंग को सहा है रात को । वो ठीक नहीं होगी । वो जानती थी जैसा दादी ने कल रात को अपने पोती को ,अपने बेटे के रूम में छोड़ा था, और रात को जैसा वो चीखी थी, वैसा वो बिल्कुल नहीं होगी जैसा वो कल सुहागरात से पहले थी।

दादी ने प्राची के तरफ देखा । वो अब भी बेसुध चादर ओढ़े पड़ी थी। ऐसा लग रहा था कि रात को बहुत थक गई थी और थकान के कारण अभी वी सो रही थी । दादी ने गर्दन पे ध्यान दिया तो उनको पापा का दिया हुआ लव बाइट दिख गया उन्हें । पापा ने ये भाप गए और थोड़ा नज़ारे नीची कर लिया।

दादी ने पापा को बोला- बेटा एक मिनिट के लिए दरवाज सटा दे जरा , अपने पोती को देखना है मुझे । तू आदमी है और एक औरत का तकलीफ तू नहीं समझ सकता । एक बार मैं अवलोकन कर लूंगी तो आश्वस्त हो जाऊंगी ।

पापा दादी को मना नहीं कर सकते थे , आखिर मा ने ही तो उनकी उनके बेटी के साथ मिलन करवाया था । वो उनकी गार्जियन थी।

पापा ने दरवाजा हल्के से भीरा दिया ।

दादी : बेटे , अपनी दुल्हन का जरा चादर हटा तो।

पापा थोड़े झेप से गए । वो समझ गए कि जो कल रात को उन्होंने अपने बेटी के साथ बेदर्दी से शंभोग किया था उसका सबूत उनकी मां को दिख जाएगा ।

दादी ने फिर से कहा : मुझे देखना है बेटे अपने पोती को । चादर हटा तू।

पापा ने प्राची का चादर उठा दिया , दादी के सामने प्राची पूरी नंगी ही पड़ी थी।


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पापा अपनी नजरें नीचे किए हुए वही खड़े थे ।

दादी ने ऊपर से नीचे तक अपने पोती के नंगे बदन का अवलोकन किया । प्राची के शरीर में काफी बदलाव दिख रहे थे दादी को , क्योंकी दादी ने शादी से पहले भी प्राची को नंगी कर के अवलोकन किया था। प्राची के योनि एक दम सुजा हुआ प्रतीत हो रहा था । जगह जगह शरीर पे लाल लाल कटे का निशान गवाही दे रहे थे कि पापा ने रात को शानदार तरीके से बेटी को भोगा है।

दादी 5 min तक अपने बेटे की दुल्हन को देखी और समझ गई कि अब उसे प्राची का ख्याल रखना पड़ेगा कुछ दिनों तक , चूत पे हुईं सूजन को देख के लग रहा था कि शायद वो चल भी ना पाए 1-2 दिन और सेक्स तो 5-6 दिनों तक नहीं ही होना चाहिए ।

दादी ने पापा को बोला : बेटा इसकी तो तूने हालात खराब कर दी है। मैने तुझे बोला था कि आराम से करना,तूने तो इसको बेदर्दी से किया है। देख के लग रहा है तूने मेरी पोती का रेप ही कर दिया है। ये क्या किया तूने ?

पापा: मा, मैने तो बस जैसे करते है वैसे किया था। अब सील तोड़ने के लिए थोड़ा तो बेदर्द बनाना ही पड़ा ,नहीं तो इसे तो इतना दर्द हो रहा था ये तो अंदर ही न प्रवेश करने देती मां।

दादी पापा की बात समझ रही थी , पर पोती पर हुई बेदर्दी से उन्हें पता था कि प्राची की ऐसी हालत सिर्फ़ सील तोड़ने से नहीं हुई है ।

दादी : अच्छा तूने सिर्फ सील तोड़ी ओर इसकी योनि की ये हालत हो गई ? सही सही बता कितनी राउंड किया ?

पापा पकड़े गए थे । अब झूठ नहीं बोल सकते थे ।

पापा: 5 राउंड मा।

दादी : क्या... ?? तुझे पता था न, की ये तेरी 19 साल की बेटी है। मैने मान लिया कि तेरी सुहागरात थी तो सील तोड़ना जरूरी था । लेकिन तू तो स्वार्थी के तरह पूरी रात अपनी फूल सी बेटी को रौंदता रहा । 5 बार करने से पहले तेरा दिल नहीं दहला ? एक बार में सुहागरात हो गया था न पूरा? तो फिर 5 बार करने की क्या जरूरत थी तुझे? में तेरी क्या है?

पापा अब अपनी गलती का एहसास कर रहे थे: मेरी पत्नी और बेटी है मां।

दादी - तो तूने इससे रण्डी समझ के इसके मजा रात भर ले लिया ? अब इसकी इतनी देख भाल करनी पड़ेगी मुझे , शायद ये चल वो ना पाए अभी।

पापा: माफ के दो मुझे मा। मै थोड़ा हवस में बह गया था ।

दादी : अब क्या फायदा , नुकसान तो तेरा ही है, एक बार करता तो आज रात एक दम फिट रहती बेटी तेरी , तू फिर संभोग कर सकता था । इसकी हालत देख के तो अब तू 1 सप्ताह के लिए नई दुल्हन के साथ रात का मिलन भूल ही जा ।

पापा शर्मिंदा थे ।

दादी : चल अब मुंह मत बना । पता है २ साल से तू प्यासा था मेरे बेटे । लेकिन तुझे ऐसे तो नहीं संभोग नहीं करना चाहिए था ना। अपनी बेटी है तेरी , कोई बाजारी औरत नहीं । तेरी पत्नी है । रोज घर में तेरे लिए ही उपलब्ध रहती ना। चल अब मैं चलती ही , इसे नींद से जगा और दोनों जन बाहर आओ फ्रेश होके , तुम दोनों को एक पूजा करनी है। रिवाज है कि शादी के बाद नई दुल्हन और दूल्हा साथ करते है अपना पहला पूजा , सुहागरात के बाद।

पापा : ठीक है मां, आते है , आधे घंटे का समय दीजिए हम दोनों को।

दादी फिर से प्राची पे चादर डाल दिया । और कमरे से बाहर चली गई।

पापा थोड़े स्तब्ध हो गए। पर अब वो अपनी गलती का एहसास कर रहे थे । बेटी को पूरी रात उन्हें नहीं रौंदना चाहिए था ।

खैर दादी के बात को इनको पापा को कोई बुरा नहीं लगा , वो जानते थे दादी पोतियों से और उनसे कितना प्यार करती है। ग़लती करूंगा तो डांटेगी भी ।

वो अब प्राची को उठाने चल दिए ।
 
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SamsuSlr

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Update 21:

ऐसे ही एक सप्ताह तक बाप बेटी की काम पूर्ति होती रही । पापा बिना चोदे ही अपनी बेटी का मजा लेते रहते थे । दादी को भी इंतजार था, कि कब उनके बेटा का अगला मिलन हो पाएगा । लगभग 9 दिनों बाद प्राची की योनि एक दम सही हो गई । वो थोड़ा खुश भी थी और थोड़ा डरी भी हुई थी । खुश इसलिए कि पापा को, अब वो, बिना ना नुकर किए हुए, प्यार दे पाएगी, और डरी हुई इसलिए कि योनि में फिर से पापा अपनी जगह बनाने वाले थे अपने लन्ड से। ऊपर से पापा की वो बात भी उसे याद थी, कि पापा गांड़ भी मारेगे, क्योंकि पापा ने पहले ही कह दिया था ।

उस दिन सबेरे ही दादी ने प्राची से पूछा : बेटी , वहां का दर्द कैसा है ?

प्राची : दादी अब पूरा छूट गया है। कोई भी दर्द नहीं हो रहा है ।

दादी : वाह, मै इसी दिन का इंतजार कर रही थी बेटी , की कब तेरा दर्द खत्म हो और तू फिर से पापा के साथ सहवास कर पाए । बेचारे मेरे बेटे को मैने पत्नी होते हुए भी तड़पा दिया । तू अभी छोटी है, इसलिए मैने उसे रोक दिया। और वो तुझ से प्यार भी बहुत करता है ,इसलिए उसने संयम रखा ,शायद उसके अंदर का बाप भी जाग गया होगा, और बेटी को तकलीफ में नहीं देख सकता है वो।

प्राची दादी की बाते ध्यान से सुन रही थी ।

दादी : और मेरी लाडो , तैयार है न आज रात के लिए ,पहला दिन तो तेरे पापा ने ही तेरे मजे ले लिए , अब तू वो पुरुष का मजा लेना सिख ले । कोई स्त्री अपने जोश में आ जाए तो अच्छे अच्छे मर्दों का पानी निकाल दे और उसकी हवा टाइट कर दे सेक्स के टाइम । तू तो अभी कच्ची है इस खेल में मगर जिस दिन तू पापा के लिंग को उनके ऊपर बैठ के लेने में कामयाब हो जाएगी उस दिन समझ की सेक्स के दौरान तूने पापा को कंट्रोल कर लिया। अगर किसी मर्द के लिंग पे बैठ जाओ और तुम अपने हिसाब से चूदबाओ, उस दिन समझ जाना कि तुम सेक्स का असली मजा लेना सीख गई हो।

प्राची दादी की बात पे बस हामी भर रही थी: जी दादी ।

More updates will be coming soon...ye thora chota update rh gya.
Sandarr
 
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sexsarkar

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Daadi nahi samzi baat ko..
Shikari ko shikar hi mat do fir?
Ab bhuke shikari ke aage koi kamjor shikar dalega toh ab wo to chup rehene se raha!

Nisarg ka santulan bhi hota hai.

Kya gajab ka update hai.
Lastwala conversation best. Kahani aur thodi lambi khinch sakti thi. Khair.
Another feather in Baap-Beti Jodi kahaniya.
Really appreciate ur comment, itna accha comment hi mujhe or likhne ka pererit karti hai.
 
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