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Mast update
Very nice.. BAAP to caring bhi Hai.. dadi ka pyar bhi adbhut..
Sabhi ko thank you , mujhe behad accha laga ki ap sb ko story pasand aa rhi hai.Sandarr
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बेटी के मुंह में अपना लन्ड दे के गले तक उतार देना पापा को बहुत भा रहा था । वो आनंद ले रहे थे । प्राची किसी अल्हड़ की तरह लौड़ा चूस रही थी। पापा का हाथ अपने बेटी के सर पे चला गया और वो प्राची के सर पे हाथ फेरते हुए उसके मुंह में अपना लण्ङ पेश रहे थे ।







Badiya update
Bohot din k bad ek story jo k accha chal raha hai.
जबरदस्त कहानी
Jabar dast bha mja a gya .... Bass aage story thoda or erotic or seductive likho taki padte padte hi pani nikl jaye
Waiting for next![]()
सभी का इतना प्यारा कमेंट करने के लिए धन्यवाद। मैं और अच्छा और इरॉटिक बनाने का कोशिश करूंगा इस कहानी को ।Mast update





Bhut hi kamaukUpdate:19
प्राची और प्रज्ञा की इसी तरह की बाते थोड़े देर चलती रही ।
लगभग, सोने का समय हो चला था, कि दादी ने आवाज लगाई : प्रज्ञा, बेटी सोने का समय हो चला है , सो जा और दीदी को भी जाने दे पापा के कमरे में ।
प्रज्ञा : (प्राची से मजाक में) दीदी , लगती है दादी पापा की तरफ है , वो बस आपको पापा के सामने रखना चाहती है। ताकि पापा को आप हर समय पत्नी सुख देती रहे ।
प्राची : हट बदमाश , अपने पापा के बारे में कोई ऐसे बोलता है क्या ?
प्रज्ञा : अच्छा , ये मत भूलो दीदी , पापा अब मेरे जीजा जी भी हो चुके है, और साली - जीजा के रिश्ते में तो, थोड़ा मजाक चलता ही है न दीदी।
प्राची : हां हां, बारी आई साली बनाने वाली । चल अब सो जा ।
प्रज्ञा : हा मै तो सो ही रही हु मेरी प्यारी दीदी , पर मां तो पापा को खुश करेगी अब रात भर।
प्राची थोड़ा हसने लगी : अरे तू तो कुछ ज्यादा ही मजाकिया हो गई है। लग रहा है , तेरी इन सब बातों में ज्यादा ही रुचि बढ़ रही है। अभी तू ये सब में ध्यान मत दे , अभी सिर्फ १८ की है , ध्यान लगा के एग्जाम की तैयारी कर ।
प्रज्ञा : आप भी तो १९ की ही है। आपको तो इन सब में रुचि के साथ साथ अनुभव भी हो गया है , पापा.....ओह सॉरी, मेरे जीजा जी का मोटा तोप से जंग लड़ने का ।
प्राची अपने छोटी बहन की इस तरह के डबल मीनिंग बातो से शर्मा के पानी पानी हो गई ।
प्राची : तू पीटेगी किसी दिन मेरे हाथों ,इतनी बेशर्म जैसी बाते की तो । चल अब सो जा चुप चाप , बड़ी आई तोप से जंग लड़ने वाली । एक बार तोप से सामना हो गया, तो वही दम तोड़ देगी ।
अंत का जो वाक्य था, वो अनायास ही निकल गया प्राची के मुंह से ,उसे ये बोलना नहीं चाहिए था। ऐसा प्राची को वो बोलने के बाद महसूस हुआ ।
प्रज्ञा : अरे क्यों दीदी, अपने तो दम नहीं तोड़ा आप तो हर दिन जंग लड़ती होगी पापा के तोप के साथ।
प्राची : (थोड़ा उदास हो के) : नहीं प्रज्ञा , मेरे अंदर, पहले जंग के बाद ही कोई ताकत नहीं बचा है, अब जंग लड़ने का ।
प्रज्ञा : मतलब दीदी , आप कहना क्या चाहते है ? आप पापा के साथ खुश नहीं है?
प्राची : अरे नहीं नहीं , ऐसी बात नहीं है बहना , मै तो अपने आप से खुश नहीं हु।
प्रज्ञा : ऐसा क्या हो गया दीदी? पापा ने कुछ कहा क्या?
प्राची : आरे नहीं बाबा , पापा तो मेरी इतनी केयर करते है, कि मुझे उनको अपने साथ मिलन ना करने देने के लिए, दुख होता है।
प्रज्ञा : मतलब दीदी ?
प्राची : मतलब कुछ नहीं , कद्दू । तू सो जा चुप चाप, मै चली अब , बहुत बाते हो गई इन सब की ।
प्रज्ञा : दीदी , प्लीज, तुम्हे मेरी कसम , पूरी बात बताओ न मुझे , आप खुश क्यों नहीं है पापा के साथ ?
कसम देके प्रज्ञा ने प्राची को सब बताने से मजबूर कर दिया ।
प्राची : अरे यार ,तूने कसम देके सब चौपट कर दिया । दरअसल , तू जो समझ रही है कि मैं हर दिन पापा का तोप के साथ जंग लड़ती हु । वो नहीं हो रहा । पापा ने पहली रात में ही ऐसी चढ़ाई की थी, मेरे किले पे, की उसकी दीवारें ढह गई, जो अभी तक बन नहीं पाई है ।
प्रज्ञा को डबल मतबल वाली बाते समझ नहीं आ रही थी अब । प्रज्ञा : दीदी, ऐसे पहली मत बुझाओ , सच सच बताओ न सही से की क्या हुआ है।
प्राची : अरे मेरी बहन , मतलब मैं पापा के साथ पहली रात के बाद से मिलन नहीं की हु।
प्रज्ञा : चौंकते हुए , ऐसा क्यों दीदी , पति पत्नी हो अब तो अपलोग , अब दूर क्यों रहते हो।
प्राची : अरे पापा ने पहले दिन ही मेरे साथ इतनी जबरदस्त मिलन कर दिया, कि मेरे गुगु का हालात खराब है अभी तक, उसमें बहुत सूजन आ गया था।
प्रज्ञा: मतलब आपके योनि में अब तक दर्द है, पापा के साथ पहली रात के बाद?
प्राची : हां।
प्रज्ञा : अरे दीदी, मैने तो सोचा आपका और पापा का मिलन हर दिन हो रहा है। मुझे पता ही नहीं था कि आप तकलीफ में है।
प्राची : तकलीफ कुछ नहीं , बस एक सप्ताह दादी ने, पापा और मुझे, मिलन से मना किया है ।
प्रज्ञा : ओह , दीदी मै भगवान से मनाऊंगी की आप जल्दी ठीक हो जाओ, और पापा से दुबारा फिर से मिलन कर पाओ।
प्राची छोटी बहन के मुंह से ये सब सुन के एक दम थरथरा गई । उसे बहुत शर्म आने लगा कि उसकी छोटी बहन उसको पापा के साथ चोदाई की दुआ मांग रही है।
प्राची : ठीक है , अब सो जा ।
इतना बोल के प्राची जाने लगी । तभी फिर से प्रज्ञा बोल पड़ी : दीदी, क्या सच में पापा का बहुत मोटा है ? मैने तो अभी तक किसी का देखा भी नहीं है।
प्राची : हंसते हुए , हां तेरी तो बहुत उमर हो गई न कि, तूने अब तक किसी का नहीं देखा ? पागल सो जा चुप चाप , जब शादी होगी तेरी भी, तो देख लेना ।
प्रज्ञा : और दीदी , ये नहीं बताया आपने , की मेरे जीजा जी का ज्यादा मोटा है क्या ? हाहाहाहाहा।
प्राची झेप गई: हट बदमाश ।
बस इतना बोल के भाग गई। प्रज्ञा समझ गई थी कि पापा में कुछ तो बात है। अभी उसे दीदी के लंगड़ा के चलने का राज का पता चल गया था । मतलब , दीदी पापा का लिंग, अपने यौवन द्वार में लेने के कारण, दर्द से लंगड़ा रही थी ? हाय पापा का बहुत मोटा है क्या ? प्रज्ञा के दिल में भी पापा के प्रति, थोड़ी भावना आने लगी ।
वो तो पहली रात को दीदी का चीख सुन के ही आ गया था । लेकिन आज दीदी के द्वारा, पापा का ऐसे वर्णन करना, उसके लिए आग साबित हुआ । वो जलने लगी थी, अपने दीदी से , क्योंकी उसकी दीदी को सेक्स का मजा मिल रहा था, और उसे नही।
मगर अगले ही पल उसके मन में खयाल आया , कि पापा को तो दीदी का ही सहारा मिला है। उनका जीवन कितना कष्टकारी हो गया था । दीदी ने ही उन्हें संभाला है । नहीं नहीं मै पापा के प्रति गंदे खयाल नहीं ला सकती, मेरी दीदी ने बहुत बड़ा बलिदान दिया है, घर को बचाने के लिए , मै दीदी का ही घर नहीं तोड़ सकती । मुझे पापा से इन सब बातों से दूर ही रहना चाहिए । हा मुझे पापा को पापा ही रहने देना चाहिए।
प्रज्ञा ने अपनी सोच को सुलझा लिया और अपने मन से पापा के बारे में जो भी सेक्सी विचार थे, वो उसे हटा चुकी थी।
उधर प्राची पापा के कमरे में पहुंच गई , आज ,५ दिन हो गए थे उन दोनों के मिलन की रात हुए । उस दिन से पापा, कभी प्राची से मुठ मरवा लेते, तो कभी प्राची के मुंह में लिंग प्रवेश कर के मजा लेते थे ।
प्राची अंदर आ गई ,पापा बेड पे लेटे हुए थे पहले से ही। आते हुए प्राची ने दरवाजा लगा दिया और आ के अपने पापा के बांहों में समा गई। पापा से लिपट गई । मगर पापा का तो लिपटने से आग और भड़क गया । बेचारे के पास अब पत्नी तो थी मगर एक रात की गलती के कारण , पत्नी होते हुए भी उसको भोग नहीं सकते थे।
पापा: बेटी , मैं मिलन के लिए तरस रहा हु , प्यास बढ़ती ही जा रही है , मुझसे अब और बर्दाश्त नहीं होता मेरी सजनी । क्या सच में अभी तक तेरी दर्द ठीक नहीं हुई है या तू मुझे बस तड़पा रही है ? अब तो हमारे मिलन को ४ दिन हो गए है।
प्राची : मेरे पतिदेव , और मेरे प्यारे पापा , सच में अभी तक दर्द है , अपने पहले दिन ही, बहुत बेदर्दी कर दी मेरे साथ , अब नुकसान आपका ही है। आपने ही जबरदस्ती की थी । अब उसी का फल है कि आपको प्यासा रहना पड़ेगा ।
पापा दूरी नहीं सह पा रहे थे : बेटी प्लीज, एक काम कर न , थोड़ा लेके देख न अंदर , अब ४ दिन हो चुके है , तुझ उतना दर्द नहीं करेगा ।
प्राची : ना बाबा ना, पापा आपको दादी ने भी बोला है ना कि आपको नहीं करना है १ सप्ताह तक ।
पापा: हां बेटी , पर मन को कैसे काबू करूं। मेरे बस में नहीं है , देख न कितना टाइट खड़ा हो गया है तुझे अपने बांहों में पा के ।
पापा ने अपनी पैंट उतरते हुए बोला ।
पापा एकांत में अपने बीवी के साथ नीच से नग्न रहना पसंद करते थे ।
प्राची : पापा ,मै आपकी तड़प समझ रही हु । मगर मुझे आज भी दर्द हो रहा है पापा अंदर , सूजन भले ही खत्म हो गई हो।
पापा के पास कोई चारा नहीं था । उनका लन्ड ठनक रहा था काम अग्नि से । वो बस प्राची में प्रवेश पाना चाहते थे ।
पापा : प्राची , मै मर जाऊंगा प्राची ,मुझे ये तड़प सही नहीं जा रही । तेरे बदन की गर्मी मुझे पागल बना रहे है , चल अब कुछ नहीं तो थोड़ी चुसाई ही कर दे इस जालिम का।
पापा ने अपना लन्ड प्राची के मुंह की तरफ़ बढ़ते हुए बोला । प्राची के पास कोई चारा नहीं था ,पापा जो अब उसके पति थे,उनकी सेवा तो उसे करना ही पड़ेगा , प्राची पापा का मोटा बमपिलाट लिंग अपने मुंह में लेके चाभने लगी । लॉलीपॉप की तरह उम्मममम...उम्म्मम्म्म्ह कर के चूसने लगी ।
बेटी के मुंह में अपना लन्ड दे के गले तक उतार देना पापा को बहुत भा रहा था । वो आनंद ले रहे थे । प्राची किसी अल्हड़ की तरह लौड़ा चूस रही थी। पापा का हाथ अपने बेटी के सर पे चला गया और वो प्राची के सर पे हाथ फेरते हुए उसके मुंह में अपना लण्ङ पेश रहे थे ।
वो मजे से अब लौड़ा चूसने लगी । प्राची के चूत में इसी लन्ड ने, ४ दिन पहले कोहराम मचा दिया था, इसलिए प्राची को लिंग चूसते हुए, लिंग की मोटाई से थोड़ा डर भी लग रहा था ।
लगभग १० मिनट की लिंग चुसाई के बाद भी पापा को वो मजा, अभी भी नहीं आ रहा था । उनसे रहा नहीं गया प्राची से बोल परे : बाबू , एक काम करेगी ।
प्राची : क्या पापा ?
पापा: जरा अपनी नीचे से पैंटी में कैद समान को तो एक बार देखने दे , आज योनि का हाल देखूं कि अब कैसी है तेरी योनि।
प्राची ने समझा कि पापा बस अवलोकन करना चाहते है कि मेरी योनि का क्या हाल है। उसने पापा के आज्ञा के अनुसार अपना नीचे का सारा वस्त्र उतर दिया ओर उसकी यौवन नंगी हो गई। पापा को फिर से ३ दिन के इंतजार के बाद अपने बेटी का गुप्तांग देखने को मिल रहा थे । पापा उसको देखते ही खो गए , वाह सुजान एकदम गायब था । चूत का चिरान पहली रात के बाद ही चिथर चुका था । और अंदर की पिंक सी चमड़ी पलट के थोड़ा बाहर की ओर निकल गई थी । हालांकि योनि द्वार अंदर भी लाल था पूरा, यानि प्राची का दर्द, जरूर पूरा नहीं खत्म हुआ होगा । और योनि द्वार भी अभी बहुत ढीला नहीं हो पाया था । बेहद मादक चूत थी प्राची की ।
पापा ने अपना लिंग अपने हाथ में लिया और प्राची के योनि छिद्र की ओर बढ़ते चले गए ।
प्राची एकदम से चौंक गई । उसके चौंकने में आज डर था ।
प्राची : पापा ,ये क्या कर रहे है । मेरा दर्द अभी गया नहीं है , मैं नहीं ले पाऊंगी पापा। छोड़ दीजिए न । मैं मर जाऊंगी दर्द से अगर आपने आज मेरे साथ .....
उसने अपने गुप्तांग को अपने हथेली से ढक लिया ,जैसे कि वो पापा के लिंग प्रवेश का विरोध के रही हो।
पापा : अरे मेरी प्यारी बच्ची , डर मत , मै तेरे बाप और पति दोनों हु। मै कोई ऐसा काम नहीं करूंगा, जो तुझे पसंद नहीं हो, या तू नहीं करना चाहती हो। पहले दिन तो तेरी सील तोड़नी थी इसलिए थोड़ा बल प्रयोग किया , आज नहीं करूंगा मेरी बेटी । मैं तो बस , थोड़ा सा, ऊपर ऊपर से, तेरे योनि की गर्मी महसूस करना चाहता हु मेरी जान ।
प्राची थोड़ी कंफ्यूज थी ।
प्राची : मतलब पापा?
पापा: मतलब ,मै बस तेरे योनि द्वार पे ही अपना लिंग सटा के तुम्हारी चुत की गर्मी अपने लिंग में महसूस कर सकता हु । बस थोड़ा साथ दे दे मेरी जान।
प्राची को समझ आ गया, पापा इस बार अपना लन्ड तो नहीं डालेंगे अंदर।
उसने हामी भर दी
पापा अपने लिंग को प्राची की गुप्तांग को स्पर्श करने बढ़ गए।
पापा ने बारे प्यार से अपना लन्ड प्राची के चूत पे सटा दिया, और उसके छिद्र पे लगा के भी वो कोई भी बल प्रयोग नहीं कर रहे थे, ताकि लिंग अंदर चूत में प्रवेश के जाए । वो बस चूत की गर्मी महसूस करते रहे ।
पापा अपना लिंग प्राची के योनि के दरार पे ऊपर से नीचे मलने लगे । प्राची को इससे एक अलग तरह की गुदगुदी जरूर हो रही थी।
पापा , प्राची को कोई दर्द नहीं दे रहे थे, पर बीच-बीच में हल्का सा योनि के मुहाने पे, अपना लन्ड हल्के से दबा भी देते थे । ये पापा की एक अलग सी कला थी, जो वो अब अपने पत्नी बने बेटी को दिखा रहे थे । वो ये जता रहे थे कि प्राची के चूत पे अब उनका ही हक है।
पापा बस मजा ले रहे थे । प्राची भी अब मजा लेने लगी थी , वो भी आंखे मूंदे पापा के लन्ड को अपने योनि द्वार को छेड़ते हुए महसूस कर पा रही थी।
पापा एक टक से प्राची के चेहरे का भाव पढ़ रहे थे, और उनका लण्ङ भी अब कुछ ज्यादा ही टाइट हो गया था ।
उनको अपने पे काबू नहीं रह गया । एक स्त्री का स्पर्श तो किसी को भी गलती करने पे मजबूर कर देता है। पापा का प्राची पे पूरा हक होते हुए भी वो उसकी योनि में प्रवेश नहीं के सकते थे । पर पापा को प्राची के मादक भाव देख के लगा कि एक बार अंदर दबाव बना के देखता हु । कही जोश जोश में प्राची को दर्द न हो तो शायद वो प्राची को आज चोद पाए । वो थोड़ा जोर लगा दिया । योनि द्वार थोड़ा फैल सा गया, और चूत पे लन्ड का वार सीधा द्वार पे था ।
इतना होने के बाद भी प्राची, मजे से आंखे मूंदे लेटी रही , पापा की हिम्मत और बढ़ी, और वो प्राची में प्रवेश कर जाना चाहते थे अब ।
उन्होंने एक और दबाव बनाया । लिंग योनि द्वार को खोल के, थोड़ा अंदर की दीवार पे दस्तक दे ही चुका था ।
की इतने में, प्राची को पापा का इरादा पता चल गया ।
वो हक्का बक्का रह गई । अरे पापा तो अंदर डालने लगे है । वो एकदम चिंहुक सी गई ।
और पापा से बोल पड़ी: पापा, ये आप क्या कर रहे है । नहीं पापा , ये मत कीजिए , मै मर जाऊंगी पापा, आप नहीं समझ रहे है, पर अंदर बहुत दर्द है मेरे योनि में ।
पापा: प्लीज बेटी मै बहुत प्यासा हु । काबू नहीं कर पा रहा हु खुद पे आगे इतनी गीली और सुंदर चूत देख के । देख न, तेरी चूत , मेरे लन्ड लगने से कैसे पनियआ गई है। कैसे लुपलुपा रही है । ये मुझे ललचा रही है बेटी।
प्राची एकदम से रोने लगी । नहीं पापा , मुझे आप नहीं समझेंगे तो कौन समझेगा । मैं ठीक होते ही आपको अपना सबकुछ सौंप दूंगी , आप जी भर के भोग लेना मुझे । मैं उफ्फ तक नहीं करूंगी ,पर पापा आज मुझे छोड़ दीजिए । मेरा भरोसा मत तोड़िए पापा।
पर हवस बहुत बुरी चीज होती है । पापा का मन हो रहा था कि, एकदम किसी रंडी की तरह, अपने बेटी पे भी वो बल प्रयोग कर दे, और अपनी बेटी को पटक के चूत के गहराई, तक एक ही बार में फोर्स के साथ, लण्ङ धंसा दे।
मगर उनके अंदर एक बाप भी था। इस तरह से बल प्रयोग का मतलब, वो जानते थे । एक तरह से,,म वो प्राची के साथ रेप जैसा होता । वो अपने बेटी के नजरों में नहीं गिरना चाहते थे ।
उन्होंने कोई और उपाय न देखते हुए, प्राची के दूध के बीच में अपना लण्ङ फंसा के अपना काम अग्नि को शांत करना चाहा ।
वो प्राची को बोले : ठीक है बेटी तू कहती है तो मैं नहीं डालता ।
प्राची के जान में जान आई।
पापा: पर प्राची आज जो तुमने मुझे रोका है इसकी दुगनी कीमत तुम्हे चुकानी होगी।
प्राची : वो कैसे पापा?
पापा: तुम्हे जब भी अगली बार में चोदूंगा मुझे तुम्हारी सील तोड़ने दोगी ।
प्राची आश्चर्यचकित रह गई , उसकी सील तो पापा पहले ही तोड़ चुके थे ।
प्राची : पापा आप ने तो मेरी सील तोड़ दी थी। पहली रात को ही तो। आपके नाम किया था मैने अपना, सील पैक योनि । योनि में आप प्रवेश कर चुके । फिर अब कौन सी सील ।
पापा: अब भी एक सील बाकी है बेटी ।
प्राची : कौन सी पापा?
पापा: तेरी गांड़ का सील बेटा।
प्राची के आंखे फटी की फटी रह गई । हे राम , कैसे जाएंगा पापा का मोटा मूसल इतनी छोटी सी पीछे की छेद में??
प्राची अब उधेड़-बुन में डूब गई, और उधर पापा प्राची का टीट चोदन, करने को तैयार हो रहे थे ।