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Sci-FI A Forty Light Years Away

DesiPriyaRai

Royal
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disappointed tv land GIF by YoungerTV

Katil raat ka dekho, last review ab diya hai, us se pahle 6th update pe diya tha :bat:
 
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Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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vihan27

Blood Makes Empire Not Tear
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Wo kya jaane ishq mohabbat,
Pyar wafa sabke baska nahi,
Hum pyar me jeene walo se,
Uska koi vaasta nahi, ye pyar nahi aasaan sahib, hum pyar me jeete marte, ye pyar aise shay hai pyare,
Ke pal pal aahe bharte hain.:dazed:
Wo kya jaane ishq-mohabbat,
Humein toh araam se jeena aata hai.

Pyaar-wafa sabke bas ki baat nahi,
Humein toh akele khush rehna aata hai.

Tum pyaar mein jeete-marte ho,
Hum chain se so kar uth jaate hain.

Ye pyaar aasaan nahi, sahib,
Tum aahein bharte rehte ho,
Hum hans kar chai peene nikal jaate hai.
 

vihan27

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Raj_sharma

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मैं काफी देर तक वहीं पड़ा रहा। मेरी टूटी-फूटी साँसों के साथ प्लेटिंग पर जमी अवशेष की पतली परत थोड़ी ऊपर उठी और फिर वापस बैठ गई। मेरी त्वचा अजीब तरह से कसी हुई लग रही थी, सिकुड़ी हुई नहीं। परफ़्लुओरोकार्बन की छोड़ी हुई एक चिपचिपी परत उस पर जमी हुई थी।

मुझे हिलना ही होगा, मैंने खुद से कहा।

करवट लेने तक में जान निकल रही थी। दिमाग से अंगों तक संदेश पहुँचने में वक्त लग रहा था। जब मैं आखिरकार करवट लेकर लेटा, तो मेरे जोड़ जैसे चीख उठे, अकड़े हुए और जिद्दी। मेरा शरीर अपनी ही हरकतों का साथ नहीं दे रहा था। एहसास गलत था। जैसे अंदर का हर हिस्सा बहुत लंबे समय तक इस्तेमाल ही न हुआ हो।

यहाँ से बाकि के पॉड्स दिख रहे थे।

मैं घिसटते हुए उनकी तरफ बढ़ा, मेरी हथेलियां ठंडे फर्श पर फिसल रही थीं। नीचे से देखने पर पूरा हॉल और बड़ा लग रहा था। वहां एक कतार में पॉड्स खड़े थे लंबे, गोल और बिल्कुल एक जैसे। ठंडे और बेजान।

जिस पॉड से मैं निकला था, उसे पहचानना मुश्किल नहीं था।

उसके काँच पर धारियाँ बनी थीं, जहाँ से तरल बहकर निकला था। अंदर की सतह पर हल्का तरल चिपका हुआ था। भीतर चैंबर खाली था, बस कुछ लटकती लाइनों और केबल्स के अलावा, जो पंप बंद होने के साथ हल्के से हिल रही थीं। पॉड के स्टेटस पैनल पर लिखा हुवा था।

UNIT 1

Name: NATHAN HALE
STATUS: AWAKE

मैं उस नाम को देखता रहा।

यह किसी पहचान जैसा नहीं लगा। यह जानकारी जैसा लगा। कुछ ऐसा जो कही बहोत अंदर दबी हुवी हो।

"नेथन," मैंने फुसफुसाकर कहा।

"हेल।"

शब्द गले में अटक कर रह गए। वे मेरे करीब तो थे, पर मेरे अपने नहीं लग रहे थे।

मैंने नज़रे घुमाकर दूसरी तरफ देखा।

दो पॉड्स ठीक मेरे सामने थे, उनके काँच अंदर भरे तरल से धुंधला था। उनमें इंसानी साये तैर रहे थे, सीधी खड़ी, पारदर्शी तरल में लटकी हुई। हाथ-पैर ढीले, शरीर हार्नेस और रेस्ट्रेंट्स से थामे हुए। ट्यूब्स उनकी छाती और गर्दन में लगी थीं, धीमे, अंदर-बाहर करती हुई। पॉड्स मे हरे रंग की लाइट्स हल्के से धड़क रही थीं।

ये हरकतें धीमी और नियमित थीं। शरीर नहीं, सिस्टम चला रहे थे।

नीचे स्टेटस स्क्रीन चमक रही थीं।

UNIT 3

Name: CLAIRE MORGAN
STATUS: IN STASIS


हार्नेस के नीचे उसकी छाती लगभग न के बराबर उठ रही थी। पॉड के किनारे लगी ट्यूबिंग स्थिर लय में धड़क रही थी।

UNIT 4

Name: LIAM CARTER
STATUS: IN STASIS

उसका सिर एक तरफ झुका हुआ था, आंखें बंद और चेहरा बिल्कुल भावशून्य। सिस्टम ने शरीर को सही स्थिति में रखा हुआ था।

मैंने कहीं और नहीं देखा। अभी हिम्मत नहीं थी।

मैं सहारा लेकर खड़ा हुआ और उन पॉड्स से मुँह फेर लिया।

दूसरे सिरे पर लॉकर लगे थे, उनकी इंडिकेटर लाइट्स मंद थीं, लेकिन सक्रिय। मैं उस लॉकर की तरफ बढ़ा जो मेरे पॉड के सामने था। संतुलन डगमगा रहा था। हर कदम सोच-समझकर रखना पड़ रहा था। जैसे ही मैं करीब पहुँचा, लॉकर की सेंसर लाइट जल उठी।

लॉकर का दरवाजा आसानी से नहीं खुला। वह अटक-अटक कर।

अंदर एक स्पेस सूट था, प्लास्टिक में वैक्यूम-सील किया हुआ।

मैंने उसे फाड़ा, तो बासी गैस और पुराने कपड़े की एक तीखी, बेजान गंध नाक से टकराई।

कपड़े पहनने में उम्मीद से ज़्यादा समय लग गया। कपड़ा त्वचा से चिपक-चिपक कर खिंच रहा था। जब सूट पूरी तरह सील हुआ, तो मेरी बाँहें मेहनत से काँप रही थीं। यह सूट कम और कोई भारी बोझ ज़्यादा लग रहा था।

लॉकर के चमकदार धातु वाले दरवाज़े में मुझे अपनी परछाई दिखी।

मैं उस आदमी को पहचान नहीं पाया।

चेहरा पीला पड़ चुका था, आंखें अंदर धंसी हुई थीं। वह शरीर मेरा नहीं लग रहा था. अधूरा सा, जैसे उसे समय से पहले ही बाहर निकाल लिया गया हो।

मैंने नज़रें हटा लीं।

मेरे पीछे से एक हल्की मशीन की आवाज़ आई।

मैं मुड़ा, तो दीवार से एक पतला मशीनी हाथ बाहर निकला, उसकी हरकतें सटीक थीं। उसकी पकड़ में एक सील किया हुआ पानी के पाउच जैसा था।

मैं ठिठक गया।

ऊपर कहीं से एक आवाज़ आई, बेजान।

“पोस्ट-क्रायो हाइड्रेशन। इसे तुरंत पिएं।”

बाँह ने पाउच मेरी तरफ बढ़ाया और वहीं थमी रही।

मशीनी हाथ ने पाउच मेरी तरफ बढ़ा दिया। मैंने कांपते हाथों से उसे लिया और सील तोड़ दी। पानी ठंडा और थोड़ा खारा था, जैसे उसमें दवाइयां घुली हों। मैंने धीरे-धीरे उसे पिया। गला थोड़ा गीला हुआ, आधे रास्ते में पेट सिकुड़ा, एक सुस्त लहर उठी, जो धीरे-धीरे शांत हो गई।

“और,” मैंने धीमे से कहा। गला जकड़ गया जब दोबारा कोशिश की।
“पानी।”

कोई जवाब नहीं आया।

वह मशीनी हाथ वापस दीवार में समा चुका था, जैसे वहां कुछ था ही नहीं।

मेरे पीछे वे पॉड्स अपना काम कर रहे थे। पंपों की गूँज, चमकती लाइटें, वे उन ज़िन्दगियों को सहेज रहे थे जिन्हें अपनी मौजूदगी का होश तक नहीं था।

मशीनों की धीमी, नियमित गूंज चलती रही जैसे हमेशा चलती आई हो।


मानो कुछ भी न बदला हो। मानो मेरा वहां होना कोई मायने ही न रखता हो।

यह अपडेट अत्यंत प्रभावशाली और वायुमंडलीय है। आपने 'क्रायो-स्लीप' से जागने के बाद की शारीरिक और मानसिक वेदना को बहुत ही बारीकी से चित्रित किया है।:claps:

आपने जिस तरह से परफ़्लुओरोकार्बन की चिपचिपाहट, ठंडे फर्श का अहसास और त्वचा के खिंचाव का वर्णन किया है, वह पाठक को सीधे उस ठंडे, बेजान हॉल में खड़ा कर देता है। "जोड़ जैसे चीख उठे" और "दिमाग से अंगों तक संदेश पहुँचने में वक्त लगना"—यह विवरण विधा (Sci-Fi) को वास्तविकता के करीब लाता है।:approve:
पहचान का संकट: कहानी का सबसे गहरा हिस्सा वह है जहाँ नेथन अपना ही नाम एक 'जानकारी' की तरह देखता है, 'पहचान' की तरह नहीं। लॉकर के दरवाजे में खुद की परछाई न पहचान पाना उसके अस्तित्व के खालीपन को बखूबी दर्शाता है। यह एक मनोवैज्ञानिक गहराई जोड़ता है कि लंबी नींद ने उसे सिर्फ शरीर से ही नहीं, बल्कि उसकी आत्मा से भी दूर कर दिया।:declare:

मशीनी हाथ का आना, पानी देना और बिना किसी संवाद के वापस चले जाना यह स्थापित करता है कि यह जहाज भावनाओं से नहीं, बल्कि प्रोटोकॉल से चलता है। "मानो मेरा वहां होना कोई मायने ही न रखता हो"—यह पंक्ति नेथन के अकेलेपन और उस विशाल मशीनरी के बीच उसकी तुच्छता को बहुत अच्छे से उभारती है।:dazed:

कहानी की गति धीमी और बोझिल रखी गई है, जो एक ऐसे व्यक्ति के लिए बिल्कुल सटीक है जो अभी-अभी लंबी बेहोशी से जागा है। भाषा सरल है लेकिन दृश्य बहुत प्रभावशाली हैं।:claps:

यह एक बेहतरीन 'Hard Sci-Fi' शुरुआत है। क्लायर मॉर्गन और लियाम कार्टर के नाम भविष्य के संघर्ष या संबंधों की नींव रखते हैं। पाठक के मन में यह उत्सुकता बनी रहती है कि वह अकेला क्यों जागा और बाकी सब अभी भी 'Stasis' में क्यों हैं?

कुल मिलाकर ये कहूंगा कि शुरुआत के हिसाब से काफी बढिया लिख रहे हो। और शब्द चुनाव भी अच्छा है। बनाए रखिए। :claps::claps:
 

vihan27

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Are yaar priya ye index kisne banai hai, kaam hi nhi kar rahi hai... Abe Raju kam se kam priya ka kaam to ache se kar diya kar...
 
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