अपडेट 75
ख़ैर, अंत में सोने का समय हो ही गया।
पैट्रिशिया और प्रशांत के रहने का बंदोबस्त प्रशांत के ही कमरे में किया गया था। रूचि स्वतः ही अजय के कमरे में आ गई।
अजय को रूचि की उपस्थिति बहुत अच्छी लगती थी। उसकी सच्चाई जानने के बाद भी वो अजय को अपने से छोटा ही मानती थी और अजय के लिए उसके मन में जो प्रेम था, उसमें कोई परिवर्तन नहीं आया था। बल्कि वो और बढ़ा ही था - उसकी समझ में अजय पहले से भी बेहतर लड़का था, और उसके हिसाब से परफेक्ट! मानसिक और भावनात्मक रूप से वो उसकी ‘असली’ उम्र के जितनी परिपक्व थी। रागिनी को उसके सामने ला कर उसने अजय को अपने ‘वर्स्ट फियर’ का सामना करने की हिम्मत भी दी, और यह संतुष्टि भी कि उसकी पिछली ज़िन्दगी में रागिनी ने जो प्रलय मचाया था, वो इस जीवन में नहीं मचा सकेगी। एक और अच्छी बात हो गई थी - वो यह कि उसको ससुराल के रूप में अजय का घर मिल गया था। जब ईश्वर की ऐसी अनुकम्पा हो, तो कौन लड़की होगी जो अपने आप को सौभाग्यशाली नहीं समझेगी?
रूचि को अपने आलिंगन में भरते हुए अजय बोला, “मेरी जान... देखो न, इतना बिजी हो गया कि तुमसे बात भी नहीं हो सकी इतने दिनों,”
वो मुस्कुराई, “कोई बात नहीं। ... वैसे बहुत बढ़िया बंदोबस्त था दोनों शादियों में!”
अजय संतुष्टि से मुस्कुराया, ‘हाँ - बहुत से काम किये थे उसने इन दोनों शादियों के लिए,’
“मुझको तो हमारी शादी के लिए बहुत से आइडियाज आ रहे हैं,” रूचि बोली।
“फॉर एक्साम्प्ल?”
“बाद में!” रूचि बोली, “कैन यू हेल्प मी इन रिमूविंग माय क्लोथ्स?”
अजय जानता था कि चोली लहँगा उतारने में ऐसी कोई कठिनाई नहीं होती है - लेकिन रूचि का मन था कि अजय उसको निर्वस्त्र करे! तो उसको भी इस काम से क्या परहेज़ हो सकता था?
“पैट्रिशिया भाभी अच्छी हैं,” रूचि बोली।
“हम्म... भैया को लाइन पर रखेंगी,”
“हा हा हा... अरे ऐसा क्यों कहा?”
“नहीं कुछ नहीं! इट इस जस्ट दैट भैया इस ऐन अक्सोरियस पर्सन (ऐसा आदमी जो अपनी बीवी को हद से अधिक प्यार करता है, लेकिन जब तरह के व्यवहार को सकारात्मक दृष्टि से नहीं देखा जा सकता),”
“हम्म्म... कोई बात नहीं! भाभी अच्छी हैं, मतलब घर परिवार को साथ में रखेंगी,”
“हाँ, मुझे तो लगता है कि इंडिया आने का इंस्पिरेशन भी उन्ही से आया है,”
“अच्छा है न!”
“हाँ... अच्छा एक बात बताओ? तुमने डॉक्टर को दिखाया?” अजय ने पूछा।
“हाँ... दिखाया था! आई स्पेशलिस्ट ने कहा कि कोई प्रॉब्लम नहीं है। माइग्रेन या वैसा कुछ हो सकता है...” रूचि ने कहा, “इसलिए, मेरे स्वामी, आप मुझे कुछ कहें, उससे पहले ही मैंने डॉक्टर देशपाण्डे से अपॉइंटमेंट लिया है...”
“ओह?” अजय ने पूछा, “कब का?”
“हाँ... नेक्स्ट वीक! चलोगे साथ में?”
“अरे, ये कोई पूछने वाली बात है?”
तब तक रूचि की चोली उतर गई थी। उसने अंदर कुछ भी नहीं पहना हुआ था। अजय ने रूचि को अपनी तरफ घुमा कर उसके स्तनों को अपनी हथेलियों में भर कर आहिस्ते से दबाया।
“आह्ह्ह...” रूचि के गले से आनंद भरी आह निकल गई।
“क्या हुआ रूचि?” अजय ने चिंतित होते हुए पूछा।
“मेरी जान... दर्द वाली आह और सुख वाली आह में अंतर होता है!” रूचि ने मुस्कुराते हुए शरारत से कहा।
“ओह!”
वो मुस्कुराई, “वैसे एक बात है जो सर दर्द से याद आई... जब भी मैं माँ का दूध पीती हूँ न, बहुत रिलैक्स्ड हो जाती हूँ!”
अजय मुस्कुराया, “आई नो, राइट? मैं भी! ... सच में ऐसा लगता है कि जैसे कोई मेडिसिनल प्रॉपर्टीज़ हैं उनके दूध में,”
रूचि बदमाशी से मुस्कुराई, “अब तो भाभी भी विदा हो गईं... मतलब, उनका शेयर मुझको मिलेगा,”
“हा हा हा हा हा!” अजय दिल खोल कर हँसा और फिर उसका एक चूचक मुँह में ले कर उसको चूसने लगा।
रूचि को भी ये खेल बहुत पसंद आता था।
जब अजय के होंठ उसके स्तनों को छूते चूसते थे, तो वो आनंद सागर में गोते लगाने लगती थी। केवल दो मिनटों में ही उसको छोटी मोटी रति निष्पत्ति का आनंद महसूस होने लगता था। तो दो ही मिनटों में इस बार भी रूचि को छोटी मोटी रति निष्पत्ति का आनंद महसूस होने लगा। ऐसा नहीं था कि अजय को पता नहीं चलता था - अपने अनुभवों से वो रूचि के अंदर होते हुए परिवर्तनों को समझता था। लेकिन वो जानबूझ कर ऐसा करता था कि उसको पता नहीं चल रहा है, जिससे रूचि को शर्म या झिझक महसूस न हो, और वो अपने यौन आनंद का पूरी तरह से आस्वादन कर सके।
“अज्जू?” रूचि ने हाँफते हुए कहा।
“हम्म?” उसका चूचक चूसते हुए अजय बोला।
“ब्बस मेरी जान,” वो बोली, “अब रुक जाओ,”
अजय ने उसके चूचक को छोड़ दिया। दोनों बिस्तर पर लेट गए - रूचि अजय के ऊपर ही टेक लगा कर लेट गई।
“एक बात बताऊँ?” रूचि ने थोड़ा संयत होते हुए कहा।
“हूँ?” अजय ने रूचि के बालों की महक को महसूस करते हुए कहा।
रूचि ने थोड़ा झिझकते हुए बताया, “अज्जू... यार... मैंने कुछ दिनों पहले माँ से कहा था कि क्यों न वो... पापा से... आई मीन, वो दोनों शादी कर लें?”
“व्हाट?”
रूचि ने बड़ी मासूमियत से अपनी पलकें झपकाते हुए कहा, “जान... हम उनको मम्मी पापा कहते ही हैं! भाभी (माया) का कन्यादान दोनों ने मिल कर किया। आज भी प्रशांत भैया के रस्मों को दोनों साथ ही में कर रहे थे! तो... हमारे लिए वो दोनों तो सचमुच के मम्मी पापा हैं ही! अब वो प्रॉपरली शादी कर के हमारे मम्मी पापा बन जाएँ, तो क्या खराबी है?”
अजय हँसने लगा, “अरे यार रूचि! तुम भी न!”
“क्यों? अभी उन दोनों की उम्र ही क्या है?” उसने समझाते हुए बताया, “थोड़ा समझो मेरी बातों को अज्जू... कमल भैया की मम्मी प्रेग्नेंट हैं। मम्मी पापा की शादी हो जाए तो उनके भी बेबी हो सकते हैं न?”
“खड़ी होवो,”
“क्या?”
“अरे यार, गेट अप! तभी तो ये लहँगा उतरेगा,”
“ओह,” कहते हुए रूचि खड़ी हो गई।
अजय ने उसके लहँगे को उसकी चड्ढी समेत उतार दिया।
फिर दोनों वापस अपनी पहले वाली अवस्था में लेट गए।
उसी समय बगल वाले कमरे से प्रशांत और पैट्रिशिया की कामुक आहें सुन कर रूचि ने खिलखिलाते हुए अजय से कहा,
“बाप रे! भैया क्या क्या कर रहे हैं भाभी के साथ… जो वो ऐसी ऐसी आवाज़ें निकाल रही हैं,”
“वही मेरी जान, जो हम तुम साथ में करेंगे… जब हमारी शादी हो जायेगी!” अजय ने उसके एक चूचक को अपनी तर्जनी से छेड़ते हुए कहा।
“हा हा हा... आज ही न करने लग जाना,” रूचि ने हँसते हुए कहा।
“पहले तो ऐसे नंगे हो कर मुझको टीज़ करती हो... फिर ये सब बातें करती हो!”
“हनी, यू विल लव दिस इंतज़ार,” रूचि ने अजय के होंठों को चूमते हुए कहा, “आई प्रॉमिस!”
“यप! आई एग्री,”
“तुम भी तो उतारो... इट इस नॉट फेयर कि मैं ऐसे नंगी नंगी हूँ और तुम पूरे कपड़े पहने हुए हो!”
“क्या रूचि,”
“ओये... बच्चू अपनी लिमिट में रहो,” रूचि ने अजय को प्यार से धमकाया, “क़ायदे से देखो, तो मैं तुम्हारी गार्डियन हूँ!”
“अरे?”
“और नहीं तो क्या! तुमसे बड़ी हूँ... अगर उस दिन मेरे साथ हॉस्पिटल चलते, तो मैं ही गार्डियन की तरह साइन करती!”
“हा हा हा!”
“उस रोज़ हॉस्पिटल में सबके सामने नंगे नंगे घूम रहे थे तब कुछ नहीं,”
“अरे मेरी माँ... उतार रहा हूँ!”
“कोई ज़रुरत नहीं है... मैं कर देती हूँ,” कह कर रूचि उसका चूड़ीदार पजामी उतारने लगती है। कमल अपना कुर्ता खुद उतारने लगता है।
उसी समय माहौल में प्रशांत भैया और पैट्रिशिया भाभी की ऊँची कामुक आवाज़ें गूँज उठीं।
“यार सोचो न,” रूचि अजय की पजामी उतारते हुए बोली, “कुछ दिनों में हमारी भी शादी हो जाएगी... फिर हम भी सेक्स करेंगे... फिर घर में हमारी भी ऐसी ऐसी आवाज़ें आएँगी... सोचो तो, मम्मी पापा के मन पर क्या बीतेगा?”
“हम्म्म,”
“और फिर दोनों कम उम्र ही हैं! वो दोनों बहुत हुआ तो बस फोर्टी टू - फोर्टी थ्री के होंगे?”
अजय ने ‘हाँ’ में सर हिलाया।
अब तक अजय भी रूचि की ही तरह पूरी तरह नग्न हो गया था। उसका लिंग उत्तेजनावश खड़ा हो गया था।
“सो, नो डिफरेंट फ्रॉम माय पेरेंट्स,” वो बोली, “एंड लेट मी टेल यू, मेरे पेरेंट्स की सेक्स लाइफ बहुत एक्टिव है,”
“हाऊ डू यू नो... ओह डोंट आंसर दैट,” अजय बोला, “क्या वो भी प्लान कर रहे हैं बेबीज़?”
“नॉट इन माय नॉलेज,” रूचि ने ऐसे कहा कि जैसे उसको अजय के प्रश्न से कोई फ़र्क़ न पड़ा हो, “लेकिन अगर वो और बच्चे चाहते हैं, तो ऐसी कोई प्रॉब्लम नहीं होनी चाहिए! मम्मी इस जस्ट फोर्टी एंड हाफ, एंड रिप्रोडक्टिवली फर्टाइल ऐस वेल! दोनों लगभग रोज़ सेक्स करते हैं। अगर वो प्रोटेक्शन यूज़ करना बंद कर दें, तो मम्मी विल गेट प्रेग्नेंट! … एंड द न्यू बेबी विल बी एटीन इयर्स ओल्ड, बाय द टाइम शी रिटायर्स,”
“इंटरेस्टिंग! तुमने यह सब उनसे कहा?”
“कितनी बार तो कहा है मैंने कि मुझे एक गुड्डा या गुड़िया दे दो! लेकिन बार बार हँसी में टाल जाते हैं,” वो बताने लगी, “इसीलिए कमल भैया की शादी में मैंने ख़ास कर माँ को आंटी जी से मिलवाया था, और बताया था कि वो प्रेग्नेंट हैं! सोचा कि शायद वो उन्ही से वो थोड़ा इंस्पायर हो जाएँ!”
“हा हा हा हा... रूचि... यू आर अमेज़िंग,”
“आई नो,” रूचि ने बताया, “... अभी कुछ दिनों पहले ही... जब माँ ने ब्रेस्टफीड कराया था न पहली बार, उसके तीन दिन बाद, मैं मम्मी पापा के रूम में गई,”
“ओके!”
“जनरली जाती नहीं क्योंकि उस टाइम के आस पास दोनों सेक्स शुरू करने वाले होते हैं,” रूचि ने बताया, “लेकिन उस रात गई। माँ ने नाईटी पहना हुआ था। मैंने उनकी नाईटी का साइड ढलका कर उनके ब्रेस्ट को पीना शुरू कर दिया। ... माँ वास लाइक एंग्री एंड लाफ़िंग... पापा भी!”
“हा हा हा हा...”
“एनीवे, जब मैंने एनफ डाँट और हँसी सुन ली, तो मुझसे उन्होंने रीज़न पूछा कि मैंने वैसा क्यों किया! तो मैंने दोनों को बताया कि मुझे दूधू पीने का मन है... और मुझे एक लिविंग डॉल चाहिए खेलने के लिए!”
“तो क्या कहा मम्मी पापा ने?”
“कुछ नहीं... देर तक हँसते रहे! शायद सेक्स भी नहीं किया उन्होंने उस रोज़!”
“हा हा हा हा हा,” अजय ज़ोर से हँसने लगा।
“लेकिन अज्जू... क्या ये वाक़ई इतना बुरा थॉट है?” रूचि उसके लिंग को प्यार से सहलाने लगी।
“नहीं मेरी जान,” अजय बोला, “तुम इतनी अच्छी हो... तुम्हारे मन में कोई गलत थॉट्स आ ही नहीं सकते!”
“सो डू यू एग्री, कि माँ और पापा दोनों की शादी हो जानी चाहिए?”
“इन प्रिंसिपल, यस! आई थिंक इट इस गुड! ... लेकिन ये उनका पर्सनल मैटर है न जानू?”
“वो भी है,” रूचि बोली, “लेकिन कम से कम उनको एक बार ये कह देने से ये होगा कि उनको समझ में आ जायेगा कि उनके रिलेशनशिप के लिए हमारी ब्लेसिंग है,”
“यप... बात तो ठीक है,”
रूचि अचानक से अजय का लिंग सहलाना बंद कर के बोली, “आज रात अगर मैं माँ के पास सो जाऊँ तो तुमको बुरा तो नहीं लगेगा?”
“अरे, क्यों बुरा लगेगा?”
“ओके,” कह कर रूचि उठने लगी, “तो मैं माँ के पास जाती हूँ!”
“मैं भी आ जाऊँ?”
“शी इस नॉट ओन्ली माय मदर... ऑफ़ कोर्स यू कैन कम,” रूचि ने चंचल अदा से कहा।
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