• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Romance फ़िर से [चित्रमय]

avsji

Weaving Words, Weaving Worlds.
Supreme
4,572
24,994
159
दोस्तों - इस अपडेट सूची को स्टिकी पोस्ट बना रहा हूँ!
लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि केवल पढ़ कर निकल लें। यह केवल आपकी सुविधा के लिए है। चर्चा बंद नहीं होनी चाहिए :)

अपडेट 1; अपडेट 2; अपडेट 3; अपडेट 4; अपडेट 5; अपडेट 6; अपडेट 7; अपडेट 8; अपडेट 9; अपडेट 10; अपडेट 11; अपडेट 12; अपडेट 13; अपडेट 14; अपडेट 15; अपडेट 16; अपडेट 17; अपडेट 18; अपडेट 19; अपडेट 20; अपडेट 21; अपडेट 22; अपडेट 23; अपडेट 24; अपडेट 25; अपडेट 26; अपडेट 27; अपडेट 28; अपडेट 29; अपडेट 30; अपडेट 31; अपडेट 32; अपडेट 33; अपडेट 34; अपडेट 35; अपडेट 36; अपडेट 37; अपडेट 38; अपडेट 39; अपडेट 40; अपडेट 41; अपडेट 42; अपडेट 43; अपडेट 44; अपडेट 45; अपडेट 46; अपडेट 47; अपडेट 48; अपडेट 49; अपडेट 50; अपडेट 51; अपडेट 52; अपडेट 53; अपडेट 54; अपडेट 55; अपडेट 56; अपडेट 57; अपडेट 58; अपडेट 59; अपडेट 60; अपडेट 61; अपडेट 62; अपडेट 63; अपडेट 64; अपडेट 65; अपडेट 66; अपडेट 67; अपडेट 68; अपडेट 69; अपडेट 70; अपडेट 71; अपडेट 72; अपडेट 73; अपडेट 74; अपडेट 75; अपडेट 76; अपडेट 77; अपडेट 78; अपडेट 79; अपडेट 80; अपडेट 81; अपडेट 82; अपडेट 83; अपडेट 84;
 
Last edited:

RAAZ

Well-Known Member
3,014
7,399
158
रागिनी ने self destruction की राह पर इस समय से चलना शुरू कर दिया था।
लेकिन अभी भी वो वैसी नागिन नहीं बनी है, जैसी पिछले टाइम लाइन में अजय को मिली थी।



देशपाण्डे ने किसी को "मारा" नहीं था - डॉक्टर किसी को मारते नहीं।
एक मेडिकल नेग्लिजेंस के कारण अशोक जी की मृत्यु हो गई थी - क्योंकि देशपाण्डे को पता नहीं था कि अशोक को कैसी कैसी एलर्जी हैं।
Noted with thanks
 
  • Like
Reactions: avsji

RAAZ

Well-Known Member
3,014
7,399
158
अपडेट 66


उस रोज़ अजय को पहली बार पता चला कि कमल/राणा साहब की एक दुकान यहाँ लाजपत नगर में भी थी। दुकानें तो किशोर जी के बड़े भाईयों की भी यहाँ थीं। लेकिन कमल ने जान बूझ कर किसी को बताया नहीं, नहीं तो शॉपिंग न होती, केवल सभी से मिलना मिलाना ही होता रहता। कमल फिलहाल इस बात को अवॉयड करना चाहता था। माया को बाहर ले जाने के अवसर कम ही मिल रहे थे उसको। लिहाज़ा, यह अच्छा अवसर था माया के साथ बाहर आने का और उसकी पसंद नापसंद देखने और समझने का!

लाजपत नगर जाते समय कमल ने अजय को बताया कि जब उसका स्कैन चल रहा था, तब उसने रूचि को कॉल कर के अपनी इसी शॉप पर आने को कहा था। शायद रूचि और रागिनी को आने में देर थी, और तीनों को अब बहुत भूख लग रही थी। वैसे भी रूचि ने बता दिया था कि वो दोनों घर से खाना खा कर आएंगीं। इसलिए तीनों ने बगल के एक ढाबे में बैठ कर छोले कुल्चे का आर्डर दिया, और थोड़ी ही देर में खाने लगे और रूचि और रागिनी के आने का इंतज़ार करने लगे। अजय अपना दिल थामे इनके आने का इंतज़ार कर रहा था। दिवाली के रोज़ की घटना की पुनरावृत्ति न हो, उसकी पूरी कोशिश थी। ख़ैर, कोई पैंतालीस मिनट के बाद दोनों आती हुई दिखाई दीं।

अजय का दिल तेजी से धड़कने लगा, लेकिन उस रोज़ की तरह न तो उसको चक्कर आये और न ही बेहोशी।

रागिनी शायद अजय से मिलने को कुछ अधिक उत्साहित थी... आख़िरी कुछ कदम वो भागते हुए आई और अजय को अपने गले से लगाती हुई बोली,

“जीजा जी, लास्ट टाइम आपने फ़ाउल प्ले खेला था... इस बार नहीं चलेगा! मुझसे मिलिए... मैंने हूँ दूर दूर तक आपकी एकलौती साली, रा...”

“रागिनी,” अजय के मुँह से अस्फुट से स्वर निकले,

“रागिनी,” उसी समय रागिनी ने भी बोला और अजय के मुँह से अपना नाम सुन कर खिलखिला कर हँसने लगी।

“अरे वाह! आपको तो मेरा नाम मालूम है,”

“क्यों नहीं मालूम होगा दीदी,” रूचि बोली, “मैंने बताया है न इनको आपके बारे में!”

फिर रूचि भी अजय के आलिंगन में आती हुई बोली, “माय लव,” और उसके होंठों को चूम कर आगे बोली, “हाऊ आर यू फ़ीलिंग? डॉक्टर ने क्या कहा?”

“एकदम बढ़िया और फ़िट!”

“पक्का न?”

“हाँ... एकदम बढ़िया और फिट है तुम्हारा जानू प्यारी बहना!” कमल ने मज़े लेते हुए कहा, “आज तुमको वहाँ होना चाहिए था! तुमने अपने काम की एक डिलिशियस सीन मिस कर दी,”

“अबे,” अजय ने कमल को धमकाया।

“भैया,” कह कर रूचि कमल के गले से लगी, फिर,

“भाभी,” कह कर रूचि माया के गले से लगी।

“लगता है कि जीजू को मुझसे मिल कर कोई ख़ुशी नहीं हुई,”

“क्यों नहीं होगी दीदी?” रूचि बोली, “तुम एकलौती साली हो इनकी... क्यों ख़ुशी नहीं होगी?”

“रागिनी... दीदी,” अजय ने कहना शुरू किया।

“दीदी?” रागिनी ने इस शब्द पर अपनी अप्रसन्नता दर्शाते हुए कहना शुरू किया, “आप मुझे मेरे नाम से बुलाईये न जीजू... आधी घरवाली हूँ, तो थोड़ा तो हक़ जमाइए अपना,”

अजय मुस्कुराया, लेकिन थोड़ा रूखेपन से बोला, “ठीक है, दीदी नहीं कहूँगा आपको... लेकिन रूचि के रहते मुझे सवा, आधी, पौनी... कैसी भी एक्स्ट्रा घरवाली नहीं चाहिए,”

“अइय्यो... दिल टूट गया मेरा,”

“दीदी, इनसे मिलो,” कह कर रूचि ने बात बदलते हुए उसका कमल और माया से परिचय कराया, “ये हैं मेरे भैया, कमल, और ये हैं मेरी होने वाली प्यारी भाभी... अज्जू की दीदी, माया... और ये हैं रागिनी दीदी,”

“हेलो कमल,” कह कर रागिनी ने कमल को गले से लगाया, और, “हेलो भाभी,” कह कर उसने माया को गले से भी लगाया और चूम भी लिया।

“भाभी, जितना रूचि ने बताया है, आप तो उससे अधिक सुन्दर हैं,” वो बोली।

एक पल को अजय को लगा कि शायद रागिनी माया के साँवलेपन का मज़ाक उड़ा रही है, लेकिन फिर उसको उसकी आवाज़ की सच्चाई सुनाई दी। वो रागिनी की बातों से अच्छी तरह से वाक़िफ़ था। उसको आश्चर्य हुआ कि रागिनी अपने सामने किसी अन्य के गुणों को स्वीकार करने में सक्षम थी। जिस रागिनी को वो जानता था, वो अपने सामने किसी को फटकने भी नहीं देती थी।

शायद रूचि सही कह रही है - अजय ने सोचा, ‘रागिनी में सुधार की गुंजाईश है!’

“रागिनी,” अजय ने कहना शुरू किया, “आई ऍम सॉरी... आज पूरा दिन स्कैन्स और टेस्ट्स करवा करवा कर थक गया, इसलिए थोड़ा क्रैंकी हो गया! आई ऍम सॉरी,”

रागिनी मुस्कुराई, “कोई बात नहीं जीजू... मुझे अच्छा लगा कि आप रूचि को ले कर इतना पोसेसिव हैं,”

“आई लव हर,”

“अच्छी बात है,” उसने फिर से साली वाली छेड़खानी शुरू कर दी, “लेकिन कभी आप दोनों का ब्रेकअप हो जाए... तो मुझे याद ज़रूर करिएगा! बहुत अंतर नहीं है... हम दोनों बहने ही हैं!”

“ज़रूर,” अजय भी खेलने लगा, “लेकिन लगता तो नहीं कि ऐसा कुछ होगा।”

“प्रीटी सीरियस, हम्म?”

“वैरी,”

रागिनी ने आह भरते हुए कहा, “मुझको भी यही चाहिए यार... कोई तो हो जो मुझको ले कर सीरियस हो! बॉयफ्रैंड्स की फ़ौज़ थोड़े न बनानी है! कभी इस काम में मज़ा आता था... अब नहीं। मुझे भी मोहब्बत चाहिए... स्टेबिलिटी चाहिए... रेस्पेक्ट चाहिए,”

अजय ने समझते हुए ‘हाँ’ में सर हिलाया।

“चिंता किस बात की है,” माया ने दोनों की बातों में शामिल होते हुए कहा, “अब हम हैं न तुम्हारे साथ! मिल कर ढूँढेंगे एक अच्छा सा दूल्हा तुम्हारे लिए भी!”

“प्रॉमिस न भाभी?”

“पक्का प्रॉमिस!”

माहौल थोड़ा हल्का हो गया।

“अब बताओ... किस सीन की बात कर रहे थे?” रूचि ने पूछा।

“अरे, आज स्कैन के टाइम...” कमल कहने को हुआ तो माया ने कोहनी मार कर उसको चुप रहने को बोला।

“अच्छा बाद में बताता हूँ,”

“अरे बताओ न,” रूचि ने ज़िद करी।

“अरे बाद में बताता हूँ...” कमल ने कहा, “अच्छा, तुम दोनों ने कुछ खाया है?”

“हाँ,” रागिनी ने बताया, “उसी चक्कर में लेट हो गए... वहाँ से ऑटो भी देर से मिला,”

“बढ़िया है फिर तो,” कमल ने कहा, “चलो, कोशिश कर के जल्दी से शॉपिंग कर लेते हैं,”

“जल्दी से?!” रागिनी ने आँखें नचाते हुए शैतानी से कहा, “अभी तो हमने शुरू ही नहीं किया, और आपको अभी से जल्दी जल्दी चाहिए?”

उसकी बात पर सभी मुस्कुराने लगे।

“अरे नहीं नहीं, मैं तो बस ये कह रहा था कि जल्दी से शॉपिंग शुरू करते हैं,”

“हाँ, ये हुई न बात!” रागिनी ने कहा, “माया, मुझे रूचि का तो थोड़ा थोड़ा पता है, लेकिन आपको क्या क्या लेना है? क्या क्या बचा हुआ है?”

कह कर रागिनी ने ही शॉपिंग का आगाज़ किया।

अजय रागिनी के व्यवहार देख कर वाक़ई अचंभित था - ये ‘वो’ रागिनी नहीं लग रही थी। हाँ - इसका अंदाज़ उसी के जैसा था, लेकिन उसके व्यवहार में अभी भी एक सच्चाई थी। इतने दिन रागिनी के संग और फिर अपराधियों के संग रहते हुए अजय को मनुष्य की समझ तो हो ही गई थी। माया दीदी साँवली थीं, तो रागिनी उनके रंग के अनुकूल कपड़े ट्राई करवा रही थी। फ़ैशन की बहुत बढ़िया समझ थी उसको। कमल और अजय एक तरह से पिछलग्गुओं की ही तरह तीनों लड़कियों के पीछे पीछे चल रहे थे - जाहिर सी बात थी कि तीनों उनकी उपस्थिति को भूल गई थीं, और शॉपिंग करने में मगन हो गई थीं। तीनों को आनंद से, मज़े ले ले कर शॉपिंग करते देख कर अजय को अच्छा लग रहा था। इसके ज़रिए उसको रूचि की पसंद और नापसंद के बारे में भी जानने का मौका मिल रहा था।

रूचि ने अपने लिए चार जोड़ी कपड़े - साड़ियाँ और शलवार सूट - लिए। अपने वायदे के मुताबिक, रागिनी ने रूचि की शॉपिंग का पूरा ख़र्च उठाया। अजय और रूचि के आग्रह पर भी वो मानी नहीं। और तो और, उसने माया के लिए भी एक बढ़िया सा लहँगा लिया, इस ज़िद पर कि वो शादी के बाद होने वाले रिसेप्शन के लिए वही लहँगा पहनेगी। माया ने बहुत ना-नुकुर करी; कमल ने भी! लेकिन रागिनी ने एक न सुनी। वो ऐसी ही थी - अगर किसी बात की ज़िद पकड़ लेती थी, तो वो काम कर के ही छोड़ती थी। किसी भी हद तक चली जाती थी। इस बात पर अजय ने भी ज़िद पकड़ ली कि रागिनी भी अपने लिए कुछ ले... लेकिन रागिनी को कुछ भी लेने का मन नहीं हुआ। वो मॉडर्न कपड़े पहनती थी, और इस तरह के कपड़े उसको बहुत पसंद नहीं थे। इस बात पर अजय ने कहा कि उसको बहुत अच्छा लगेगा अगर रागिनी पारम्परिक वेश-भूषा में उसकी और रूचि की शादी में सम्मिलित हो। इस बात पर उसने एक साड़ी ले ली, जिसका ख़र्चा अजय ने दिया। अजय ने रूचि और माया के लिए भी ख़रीदा। माया ने कुछ और भी कपड़े ख़रीदे।

अंत में कमल और अजय ने अपने लिए पारम्परिक कपड़े लिए। दोनों ने तय किया था कि कमल की शादी में वो धोती पहनेंगे। तो उन्होंने वो लिया। फिर प्रशांत भैया की शादी में सम्मिलित होने के लिए उन्होंने दो और सूट लिए। सारी शॉपिंग लाजपत नगर में ही हो गई, लिहाज़ा और कहीं जाने की कोई आवश्यकता नहीं थी। पाँचों ने शाम को हल्का नाश्ता किया, फिर कमल ने पहले रूचि और रागिनी को उनके घर छोड़ा, फिर माया और अजय को, और फिर वो अपने घर चला गया।

एक बेहद लम्बे दिन का अंत हुआ।


**
Maza aaya to aakhir scan huay aur pata chala ki doctor ki kafi madad Ajay ki behoshi ne kar di jo kaam hosh me nahi ho saktey uske liye hosh ka udna accha hota hai.
Ragni shayad woh nahi hai aya abhi tak us level per giri nahi thee shayad woh bhi ek mauqa deserve karti hain atleast agar gadbad hogi to woh muhawara hai hi kuttey ki dum.
Baqi bohat acche se presentation kari hai aapne har cheez ki even some intimate moments dikhaye magar kahi per bhi unke vurgularity nahi thee aur unko bohat acche se puriya hai aapne shabdo me maza aaya pad ker. Romance story ho to usme sex accha lagta hai but jaisay mai sab story writers ki kehta hoon ki sex uske andar just ek part ki tarah prakashit ho na ki story ka saara saar woh hi reh jaye tab maza nahi aata ek oobao si story ho jaati hai but aapne har words ko badi naal tol se likha hai. Iske liye aap badahayi ke patra hai.
 
  • Love
Reactions: avsji

RAAZ

Well-Known Member
3,014
7,399
158
अपडेट 67


हॉगवर्ट्स :

त्यौहार के बाद कॉलेज खुल गए थे, लेकिन अभी भी सारे स्टूडेंट्स वापस नहीं आये थे। दोपहर का समय था, और इस समय लंच ब्रेक चल रहा था। सूरज की हल्की गर्मी और पेड़ों की छाँव में कॉलेज का माहौल शांत था। ‘कमल और माया’ की शादी के कार्ड छप कर आ गए थे। कमल और अजय, दोनों ही अपने शिक्षकों और प्रिंसिपल को विवाह का निमंत्रण पत्र देने के लिए प्रिंसिपल के ऑफिस की ओर बढ़ रहे थे। कमल के हाथ में सुंदर, सुनहरे और लाल रंग से सजे निमंत्रण पत्रों का एक पुलिंदा था, जिस पर माया और कमल के नाम स्वर्णिम अक्षरों में लिखे थे।

अजय इस समय उत्साह से भरा हुआ था, लेकिन कमल के चेहरे पर हल्की घबराहट थी।

कमल, हल्के से मुस्कुराते हुए बोला, “अज्जू, यार मुझे थोड़ा डर लग रहा है। प्रिंसिपल सर और बाकी टीचर्स क्या कहेंगे? चक्कू सर! ... यार कहीं वो ये न कह दें कि मैं बहुत छोटा हूँ शादी के लिए।”

अजय हँसते हुए बोला, “अरे जीजू, आप टेंशन मत लो! यू आर ऐन एडल्ट! कोई बच्चा थोड़े ही हैं!”

बातें करते हुए दोनों प्रिंसिपल के ऑफिस के बाहर पहुँचे। ऑफिस के अंदर प्रिंसिपल शर्मा अपने टेबल पर कुछ कागजात देख रहे थे। शर्मा सर की छवि एक सख़्त मिज़ाज़ वाले टीचर की थी, लेकिन थे वो बहुत दयालु स्वभाव के व्यक्ति। उनके साथ कमल के दो पसंदीदा शिक्षक, शशि मैम (गणित की शिक्षिका) और चक्कू सर (इंग्लिश के शिक्षक), एक अन्य शिक्षिका, रेखा मैम (हाई स्कूल में उन्होंने हिंदी पढ़ाया था) भी मौजूद थे।

कमल ने दरवाजा खटखटाया।

प्रिंसिपल शर्मा ने अंदर से ही गंभीर स्वर में कहा, “कम इन!”

कमल, थोड़ा घबराते हुए बोला, “सर, आई ऍम कमल... और ही इस अजय। व्ही वॉन्टेड अ फ्यू मिनट्स ऑफ़ योर टाइम,”

चक्कू सर ने दोनों को देखा तो मुस्कुराते हुए आश्चर्यजनक रूप से हिंदी में बोले, “अरे कमल! तूम यहाँ? और अजय, तूम भी? व्हाट आर माय टू फ़ेवरिट मस्कटीयर्स डूइंग? आल वेल?”

कमल ने चक्कू सर के ‘एक्सेंट’ पर हल्के से हँसते हुए कहा, “ऑल इस वेल सर!” फिर निमंत्रण पत्र आगे बढ़ाते हुए बोला, “दिस इस द इनविटेशन ऑफ़ माय वेडिंग… आई वुड लव इफ यू कुड बिकम अ पार्ट ऑफ़ दिस मोस्ट इम्पोर्टेन्ट डे ऑफ़ माय लाइफ,”

रेखा मैम ने आश्चर्य से कहा, “शादी? कमल, तुम तो अभी पढ़ ही रहे हो! इतनी जल्दी शादी? कितने साल के हो तुम?”

कमल ने आत्मविश्वास से कहा, “मैम, मैं उन्नीस साल का हूँ।”

प्रिंसिपल शर्मा ने त्योरियाँ चढ़ाते हुए कहा, “उन्नीस साल? कमल, ये उम्र शादी करने की नहीं, पढ़ाई करने और अपना कैरियर बनाने की है। तुम इतनी जल्दी इतना बड़ा फैसला कैसे ले सकते हो? तुमने इसके बारे में अच्छे से सोचा है?”

चक्कू सर ने भी सहमति में सर हिलाते हुए कहा, “बिल्कुल ठीक कह रहे हैं प्रिंसिपल सर! कमल बेटे… इन द पास्ट फ़्यू मंथ्स आई हैव सीन अमेजिंग चेंजेस इन यू! पढ़ने लिखने में तुम्हारा खूब मन लग रहा है। इन फैक्ट, गोईंग बाय योर परफॉरमेंस, यू आर अमंग आवर मेरिटोरियस स्टूडेंट्स! तुम्हें अपने इंटरमीडिएट की पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए। शादी तो बाद में भी हो सकती है। शादी कर के तुम्हारी जिम्मेदारियाँ बढ़ जाएंगी।”

कमल ने गहरी साँस लेते हुए कहा, “सर, मैम, मैं आपकी बात समझता हूँ। और मैं ये भी मानता हूँ कि मैं उम्र में छोटा हो सकता हूँ। लेकिन माया... वो मेरे लिए सिर्फ मेरी होने वाली पत्नी ही नहीं, बल्कि मेरी ताकत है। हम दोनों एक-दूसरे से बहुत प्यार करते हैं। शी इस वैरी वाइस एंड रेस्पोंसिबल! वो मुझे कभी मेरे रास्ते से भटकने नहीं देंगी। और मेरे अंदर जो बदलाव हैं, वो उन्ही की बदौलत हैं। उनके ही कारण मुझको ढंग से पढ़ने लिखने की इंस्पिरेशन मिलती है!”

रेखा मैम ने उत्सुकता से कहा, “बहुत अच्छी लड़की प्रतीत होती है तुम्हारी माया!”

कमल ने मुस्कुराते हुए कहा, “बहुत अच्छी हैं! और बहुत समझदार भी। वो हमेशा मुझे मेहनत करने के लिए प्रेरित करती हैं। वो चाहती है कि मैं इंटरमीडिएट में अच्छे नंबरों से… अगर हो सके तो डिस्टिंक्शन से, पास होऊँ। उनके साथ होने से मुझे एक मकसद मिला है। वो मेरे लिए एक पॉजिटिव फोर्स हैं।”

शशि मैम ने हल्के से मुस्कुराते हुए कहा, “ये तो बहुत अच्छी बात है, कमल। लेकिन शादी एक बहुत बड़ा कदम है। तुम्हारी उम्र में इतनी बड़ी ज़िम्मेदारी लेना आसान काम नहीं है। मेरी खुद की शादी अभी हाल ही में हुई है। इट इस चैलेंजिंग!”

अजय, इतनी देर में पहली बार सबकी बात काटते हुए बोला, “मैम, माया दीदी मेरी बड़ी बहन है। मैं आपसे कहना चाहता हूँ कि हम दोनों के परिवारों ने इस शादी को पूरी तरह से एक्सेप्ट किया है। कमल और माया दीदी एक-दूसरे के लिए बने हैं। और कमल सही कह रहे हैं… माया दीदी इनको हमेशा सही रास्ते पर रखेंगी!”

शर्मा सर ने गंभीर स्वर में कहा, “फिर भी कमल, उन्नीस साल की उम्र में शादी करना मुझे ठीक नहीं लगता। मैं चाहूँ तो इसकी शिकायत पुलिस में भी कर सकता हूँ। ये चाइल्ड मैरिज के दायरे में आ सकता है।”

अजय, थोड़ा गुस्से भरे लेकिन शांत स्वर में बोला, “सॉरी सर, लेकिन कमल कोई बच्चा नहीं है। ही इस ऐन एडल्ट, नाइनटीन इयर्स ओल्ड! फ़ॉर मेन, द ऐज कुड बी ट्वेंटी वन, लेकिन आप इस बेसिस पर पुलिस और कानून की धमकी नहीं दे सकते। ... कमल और माया दोनों एडल्ट्स हैं और उन दोनों की शादी के लिए हमारे परिवारों की पूरी रज़ामंदी है। अगर आप पुलिस में शिकायत करेंगे, तो आप इस खूबसूरत इवेंट में केवल खटास ही डालेंगे। इससे ज्यादा आपको कुछ हासिल नहीं होगा।”

कमल ने अजय का हाथ पकड़ते हुए शांत स्वर में कहा, “अजय, शांत।” फिर प्रिंसिपल सर की ओर देखते हुए बोला, “सर, मैं समझता हूँ कि आप मेरे भले के लिए चिंतित हैं। लेकिन मैं आपसे विनती करता हूँ कि आप हमें अपना आशीर्वाद दें। माया और मैं एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं। हमने शादी करने का फैसला बहुत सोच-समझकर लिया है।”

रेखा मैम ने बहुत भावुक हो कर कहा, “कमल, तुम्हारी बातों में सच्चाई और प्रेम झलक रहा है। मैं माया को नहीं जानती, लेकिन तुम्हारे शब्दों से लगता है कि वो बहुत खास लड़की है। … अगर तुम्हारे अंदर आए हुए बदलाव माया के कारण हैं, तो तुम दोनों बच्चों को तुम्हारी शादी पर आशीर्वाद देने मैं ज़रूर आऊँगी!”

शशि मैम ने भी हँसते हुए कहा, “हाँ, कमल। अगर तुम्हारी पत्नी के कारण तुम्हें गणित में डिस्टिंक्शन आती है, तो मैं भी इस शादी का पूरा सपोर्ट करूँगी! बट यू मस्ट प्रॉमिस कि तुम शादी के बाद अपनी पढ़ाई लिखाई में कोई कमी नहीं आने दोगे।”

कमल ने हाथ जोड़ते हुए कहा, “मैम, आई प्रॉमिस! और मैं आप सबको हमारी शादी में देखना चाहता हूँ।”

शर्मा सर ने लंबी साँस लेते हुए कहा, “ठीक है, कमल। आई ऍम इम्प्रेस्सड! मैं तुम्हें और माया को आशीर्वाद देने ज़रूर आऊँगा। लेकिन याद रखना, शादी के बाद जिम्मेदारियाँ बढ़ जाती हैं। तुम्हें अपने कैरियर और परिवार दोनों को सम्हालना होगा।”

अजय मुस्कुराते हुए बोला, “सर, आप चिंता न करें। माया दीदी और कमल मिलकर सब सम्हाल लेंगे। और हाँ, आप सबको पूरी फ़ैमिली के साथ शादी में आना है।”

रेखा मैम ने हँसते हुए कहा, “अजय हम ज़रूर आएँगे। कमल, हो सके तो माया को कॉलेज लाओ! मैं उससे मिलना चाहूँगी।”

शशि मैम भी बोलीं, “हाँ… मैं भी!”

शर्मा सर ने मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ, और कमल, अगर तुम इंटरमीडिएट में कॉलेज के टॉप फ़िफ़्टीन स्टूडेंट्स में आए, तो मैं तुम्हें और माया को कॉलेज की तरफ से एक ख़ास तोहफ़ा दूँगा।”

कमल ने बेहद खुश हो कर कहा, “थैंक यू सो मच सर! थैंक यू मैम! आप सबका आशीर्वाद हमारे लिए बहुत मायने रखता है।”

अजय ने उत्साह से कहा, “थैंक यू सर… मैम… ये रहा मेरी बड़ी बहन, माया और कमल की शादी का कार्ड... और ये मेरे बड़े भाई, प्रशांत की शादी का कार्ड!”

“ओह वाओ! थैंक यू कमल! मैनी मैनी हैप्पी न्यूज़ फॉर यू एंड योर फैमिलीज़,”

“यस सर! व्ही विल टेक योर लीव... बाकी दोस्तों को भी इन्वाइट करना है।”

दोनों ने प्रिंसिपल और शिक्षकों को इनविटेशन कार्ड्स दिए और उनके आशीर्वाद लेकर ऑफिस से बाहर निकल आये। कमल के चेहरे पर अब आत्मविश्वास और ख़ुशी के भाव थे। समाज के सामने अपने सम्बन्ध को स्वीकार करना और उसको डिफ़ेंड करने का कमल का पहला अनुभव था।

अजय ने कमल के कंधे पर हाथ रखा और कहा, “देखा न जीजू, मैंने कहा था ना, सब ठीक रहेगा!”



*



अजय की रिपोर्ट्स के बारे में बातें करने के लिए अजय और अशोक जी दोनों साथ में वानप्रस्थ हॉस्पिटल गए। किरण जी भी साथ आना चाहती थीं, लेकिन अजय ने ही उनको मना कर दिया यह कह कर कि उसी दिन डॉक्टर ने बताया कि परेशान होने वाली कोई बात नहीं है, और रिपोर्ट में भी वही बात आएगी। मन मसोस कर किरण जी घर में ही रह गईं।

डॉक्टर देशपाण्डे से मुलाक़ात हुई तो बड़ी गर्मजोशी से हुई। उनको देख कर अशोक जी भी समझ गए कि अजय को कोई परेशानी नहीं है - कम से कम कोई ऐसी परेशानी, जिससे उसको ख़तरा हो। उनको रागिनी के बारे में अच्छी तरह से पता था और उनको यह भी समझ में आ रहा था कि अजय की बेहोशी का ट्रिगर रागिनी से उसकी मुलाकात ही थी। लेकिन शायद वो बस एक शॉक ही रहा हो। यही बातें डॉक्टर देशपाण्डे ने भी बताईं - स्कैन में कोई अनहोनी बात नहीं दिखी। अजय का सारा न्यूरल सिस्टम सुचारु रूप से चल रहा था।

उन्होंने फिर से अजय के साथ ‘कोलैबोरेशन’ की बात दोहराई। उस पर अजय ने कहा कि उसको जो भी पता रहेगा, वो उनके साथ ज़रूर शेयर करेगा। इसी अवसर पर अशोक जी ने डॉक्टर देशपाण्डे को माया और प्रशांत के विवाह उत्सवों में सपरिवार आमंत्रित भी किया। उन्होंने कहा कि वो ज़रूर आएँगे और नव विवाहित जोड़ों को आशीर्वाद भी देंगे।

**
Nice update har qadam ko shuru karne me parehani hoti hai phir to insaan chalta hai aur phir dodney lagta hai aur yahi kamal ke sath bhi hua hai.
 
  • Love
Reactions: avsji

RAAZ

Well-Known Member
3,014
7,399
158
अपडेट 74


प्रशांत और पैट्रिशिया की शादी की गहमागहमी माया की शादी की ही तरह सुबह सुबह ही होने लगी थी।

लिंडा और पीटर जी को भारतीय परंपरा से होने वाली शादियों के बारे में कोई ज्ञान नहीं था। इसलिए प्रशांत ने उनको ‘हम आपके हैं कौन’ फिल्म भी दिखाई थी कि उनको थोड़ा आईडिया हो जाए। फिर कमल और माया की शादी देख कर उनको बहुत कुछ समझ में आ गया, और उन्होंने जो देखा, वो उनको बहुत पसंद भी आया। ख़ास कर, दुल्हन का रंग बिरंगी पोशाक पहनना! उनके देश में, उनकी परम्परानुसार दुल्हनें सफ़ेद गाउन पहन कर तैयार होती हैं और दूल्हे काले सूट पहनते हैं। ऐसा नहीं है कि ब्लैक एंड व्हाइट देख कर बुरा लगता है, लेकिन अपनी एकलौती बेटी पैट्रिशिया को लाल सुनहरे लहँगा चोली पहने, और भारतीय जेवरों में लदी हुई देख कर उनको बड़ा अच्छा लगा।

और तो और, लिंडा जी ने भी किरण जी के ही समान रंग की साड़ी ब्लाउज़ और पीटर ने अशोक जी के ही समान रंग का धोती कुरता पहना हुआ था। अशोक जी ने कहा था कि उन्होंने ऐसा बंदोबस्त इसलिए किया है कि बेटे और बहू के माता पिता में कोई अंतर न दिखाई दे! इस बात से वो दोनों बहुत प्रभावित हो गए थे। यहीं समझ आ गया कि उनकी बेटी के लिए यह सही घर है।

और भी कई अच्छी बातें थीं - जब से उनको प्रशांत के बारे में पता चला था, तब से वो समझ रहे थे कि न केवल प्रशांत अच्छा अच्छा था, बल्कि उसका परिवार भी अच्छा था। अशोक जी, किरण जी, और अजय से बातें कर के उनको इतना तो समझ आ गया कि बेहतर यही है कि पैट्रिशिया और प्रशांत दोनों भारत ही आ कर अपना जीवन आगे बढ़ाएँ। हाल ही में भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक निवेश के लिए खुली थी, और यह एक बड़ा कारण था कि अजय की अमरीकन कंपनी बॉम्बे में ऑफ़िस खोल रही थी। नहीं तो इतनी कम उम्र में इतना ऊँचा ओहदा मिल पाना कठिन था प्रशांत के लिए। पैट्रिशिया को भी अगर एम्बेसी में नौकरी मिल जाए तो डॉलर में उसको सैलरी मिलेगी - प्रशांत की ही तरह! कुल मिला कर आर्थिक रूप से बढ़िया निर्णय था भारत आना। हाँ - उनसे पैट्रिशिया की दूरी अवश्य बढ़ जाती, लेकिन अमरीका में तो बच्चों को सिखाते ही हैं कि वो अपनी राह चुनें और उस पर चलें!

दोनों की शादी के लिए नव-विवाहित युगल - माया और कमल भी बड़े सवेरे ही आ गए थे। दोपहर होते होते रूचि भी आ गई थी। उसके मम्मी पापा बाद में आने वाले थे। पूरा राणा खानदान भी शाम होने तक शामिल होने वाला था। उसी लॉन में, जहाँ माया और कमल की शादी हुई थी, माया की शादी की ही तरह असंख्य रस्में निभाई गईं। अपनी शादी में शादी वाला जोड़ा ‘मस्ती’ - मतलब नाच गाना - नहीं कर पाता, लेकिन दूसरे की शादी में ऐसा कोई प्रतिबन्ध नहीं होता। लिहाज़ा कमल और माया ने भी सौम्य रूप से बाजे की धुन पर नृत्य किया; और अजय और रूचि ने भी! अब तक सभी निकट के सम्बन्धियों और हितैषियों को पता चल गया था कि रूचि अजय की मंगेतर है, और उसकी होने वाली बीवी है! लिहाज़ा सभी उससे उसके पद की गरिमा के अनुरूप मिले, और उसको आशीर्वाद दिए। रूचि आज बहुत ही खूबसूरत लग रही थी - उसने रागिनी की ही दी हुई रस्ट कलर वाली साड़ी ब्लाउज़ पहनी हुई थी जो उस पर बेहतरीन तरीक़े से फ़ब रही थी। अजय ने क्रीम कलर का रेशमी कुर्ता और चूड़ीदार पैजामी पहन रखी थी। देखने में सरल परिधान था, लेकिन उस पर बहुत ही सुन्दर लग रहा था।

भोजन इत्यादि के बाद, पुनः रात में ही विवाह की मुख्य रस्में पूरी हुईं। प्रशांत और पैट्रिशिया के विवाह में भी विधि-विधान में कोई समझौता नहीं किया गया था। सारी रस्में, सारे नियम पूरे किए गए। चूँकि पैट्रिशिया का कोई भाई नहीं था, इसलिए उसकी बारी में कमल ने खील छोड़ कर सम्पन्नता का आशीर्वाद देने की रस्म अदा करी। बड़े बुज़ुर्गों के आशीर्वाद के लम्बे और भावुक दौर के बाद पैट्रिशिया को उसके माता पिता के होटल भेज दिया गया, जहाँ से उसकी विदाई ‘अपने’ घर को होनी थी। सुबह करीब आठ बजे वो रस्म भी पूरी हुई। पैट्रिशिया का पूरे पारम्परिक रीति के अनुसार और बड़े ही उत्साह से घर में स्वागत किया गया। किरण जी ने अच्छी सास होने के नाते उन दोनों को आराम करने को कहा।

प्रशांत ने पैट्रिशिया को भारतीय परंपरा में विवाह के बारे में बहुत कुछ बता रखा था - ख़ास कर यह बात कि बहू से क्या क्या उम्मीदें होती हैं। वैसे भी पैट्रिशिया कोई आलसी प्रवृत्ति की लड़की नहीं थी। विदा हो कर आने और बहू के स्वागत की रस्में पूरी होते ही वो सीधे रसोईघर में प्रविष्ट हो गई। किरण जी को ऐसी उम्मीद ही नहीं थी कि पैट्रिशिया ऐसा कुछ कर देगी! उन्होंने उसको बहुत मना किया यह कह कर कि रसोईये नाश्ता पका रहे हैं। लेकिन पैट्रिशिया ने एक न सुनी। उसने बहुत से भारतीय व्यंजन पकाने सीखे हुए थे। लेकिन जब सासू माँ (किरण जी) ने उसको बहुत समझाया कि ‘बहूरानी, आज कुछ भी पकाने की ज़रुरत नहीं है,’ तो वो मान तो गई, लेकिन उसका चेहरा उतर गया। यह देख कर अशोक जी ने उससे बड़े प्रेम-पूर्वक आग्रह किया कि क्या बढ़िया हो अगर बहू के हाथ से एक कप बढ़िया से चाय पीने को मिले।

उनके आग्रह पर पैट्रिशिया आह्लादित हो गई, और तुरंत चाय बनाने लगी। उसका उत्साह देखने वाला था। मुश्किल से एक सप्ताह ही वो साथ रही थी, लेकिन अब तक वो भी सभी से पूरी तरह घुल मिल गई थी। किरण जी भी ऐसी प्यारी सी बहू पा कर बहुत अच्छा महसूस कर रही थीं - क्योंकि अभी तक उनके अपने ही बेटे ने उनको बहुत निराश कर रखा था। लेकिन नई बहू के आते ही बड़े सुखद परिवर्तन आते हुए दिखाई दे रहे थे। रूचि भी इस समय घर पर ही थी - उसको देख कर किरण जी बहुत प्रसन्न हुईं।

‘मेरी दोनों बहुएँ कितनी प्यारी हैं… कितनी अच्छी हैं,’ उन्होंने मन ही मन सोचा, ‘हे प्रभु, दोनों को हर बुरी नज़र से बचाना और इस परिवार पर अपनी दया बनाए रखना!’

पैट्रिशिया ने अदरक कूट कर मसाला चाय बनाई सभी के लिए। रसोईये की चाय ‘बाहर वालों’ के लिए थी, और बहू की चाय घर वालों के लिए! और क्या बढ़िया चाय! सभी ने पैट्रिशिया की बहुत बढ़ाई करी और बहू को उसकी ‘पहली रसोई’ के लिए रुपए दे कर उसको आशीर्वाद दिया।

उसके बाद किरण जी ने फिर से पैट्रिशिया और प्रशांत को आराम करने को कहा, लेकिन दोनों का वैसा कोई मूड नहीं था। वैसे भी शादी से पहले ही दोनों की बड़ी ही सक्रिय सेक्स लाइफ थी, और वो विवाह की रस्मों की मोहताज नहीं थी। इसलिए उन दोनों के लिए परिवार के संग बैठना, और सभी के साथ बातें करना अधिक महत्त्वपूर्ण था। कुछ घंटों बाद माया और कमल विदा हो गए। उनको जाते जाते बहुत से उपहार भी दिए गए। कल माया और अजय का रिसेप्शन था, और सभी लोग वहाँ वाँछित थे। उत्सव और हर्ष का माहौल कुछ ऐसा था, कि रूचि का अपने घर जाने का मन नहीं था, इसलिए वो यहीं रुक गई थी। उसके घर में उसके माता पिता को बता दिया गया था कि रूचि आज और कल रात यहीं रुकेगी।

शाम होते होते सभी थक कर चूर हो गए।

इतने कम समय में दो दो शादियों की तैयारी करना और फिर उनको संपन्न करना - बेहद थकाऊ काम होता है। किरण जी थक कर चूर हो गई थीं, और अब तो वो कुछ सोच भी नहीं पा रही थीं। इसलिए घर की बड़ी बहू, पैट्रिशिया ने ही निर्णय लिया, कि घर में ही कुछ सामान्य सा खा लेंगे। अजय ने अपनी भाभी को बताया कि रसोईयों ने बहुत कुछ ला कर रख दिया है, उसमें से खाया जा सकता है। वैसे भी बहुत खाना है और अधिकतर लोग जा चुके हैं। उसको यह सुझाव अच्छा लगा। सभी के लिए पैट्रिशिया ने ही खाने की टेबल पर भोजन सजाया और सभी ने साथ में मिल कर खाया। बाहर बैठे मनोहर भैया को भी भीतर ही बुला लिया गया था। घर की कामवाली बाई भी साथ ही हो ली।

रात्रि भोजन देर तक चला।

खाते समय पता चला कि चूँकि पहली बार आना हुआ है, इसलिए लिंडा और पीटर जी कुछ दिन उत्तर भारत की सैर करेंगे। कल माया और अजय का रिसेप्शन अटेंड कर के परसों सवेरे ही वो आगरा को निकल जाएँगे। वहाँ से जयपुर और फिर वापस दिल्ली आ कर दिल्ली की सैर करेंगे। और फिर यह सब कर के वो प्रशांत और पैट्रिशिया के साथ वापस शिकागो चले जाएँगे। अशोक जी और किरण जी को बहुत अच्छा लगा कि इस दौरान उनके बेटे बहू उनके साथ ही रहेंगे। हाँ, अवश्य ही वो बड़ी जल्दी वापस जा रहे थे, लेकिन फिर वो परमानेंटली वापस भारत ही में सेटल होने वाले थे। यह सब अच्छी बातें थीं!

खाने पर ही प्रशांत और पैट्रिशिया ने रूचि और अजय से उनके आगे के प्लान्स के बारे में पूछा और बातें करीं। पैट्रिशिया ने दोनों से कहा कि अगर दोनों आगे पढ़ने के लिए शिकागो शहर जाते हैं, तो उसका अपना एक छोटा सा घर वहाँ है। अगर दोनों चाहें, तो वहीं रह सकते हैं। उसने शिकागो में स्थित चार यूनिवर्सिटीज़ के नाम बताए जहाँ दोनों साथ में अप्लाई कर सकते थे। शिकागो के बारे में उसने दोनों को बहुत कुछ बताया। उसने यह भी सुझाव दिया कि दोनों शादी कर लें, फिर वहाँ जाएँ… या फिर वहाँ जा कर शादी कर लें। अजय को ये सुझाव अच्छा लगा, लेकिन किरण जी ने उसे आँखें तरेर कर हिदायद दी कि अगर उनके बिना उन दोनों ने शादी करी, तो वो उससे बात नहीं करेंगी कभी!

*
Aakhir me do families complete ho gayi aur hopefully inki life me kuch problem nahi hogi. Ab rehta hai to Ajay ka aur ruchi ka aakhir kia banta hai unki life ka.
 
  • Love
Reactions: avsji

RAAZ

Well-Known Member
3,014
7,399
158
अपडेट 75


ख़ैर, अंत में सोने का समय हो ही गया।

पैट्रिशिया और प्रशांत के रहने का बंदोबस्त प्रशांत के ही कमरे में किया गया था। रूचि स्वतः ही अजय के कमरे में आ गई।

अजय को रूचि की उपस्थिति बहुत अच्छी लगती थी। उसकी सच्चाई जानने के बाद भी वो अजय को अपने से छोटा ही मानती थी और अजय के लिए उसके मन में जो प्रेम था, उसमें कोई परिवर्तन नहीं आया था। बल्कि वो और बढ़ा ही था - उसकी समझ में अजय पहले से भी बेहतर लड़का था, और उसके हिसाब से परफेक्ट! मानसिक और भावनात्मक रूप से वो उसकी ‘असली’ उम्र के जितनी परिपक्व थी। रागिनी को उसके सामने ला कर उसने अजय को अपने ‘वर्स्ट फियर’ का सामना करने की हिम्मत भी दी, और यह संतुष्टि भी कि उसकी पिछली ज़िन्दगी में रागिनी ने जो प्रलय मचाया था, वो इस जीवन में नहीं मचा सकेगी। एक और अच्छी बात हो गई थी - वो यह कि उसको ससुराल के रूप में अजय का घर मिल गया था। जब ईश्वर की ऐसी अनुकम्पा हो, तो कौन लड़की होगी जो अपने आप को सौभाग्यशाली नहीं समझेगी?

रूचि को अपने आलिंगन में भरते हुए अजय बोला, “मेरी जान... देखो न, इतना बिजी हो गया कि तुमसे बात भी नहीं हो सकी इतने दिनों,”

वो मुस्कुराई, “कोई बात नहीं। ... वैसे बहुत बढ़िया बंदोबस्त था दोनों शादियों में!”

अजय संतुष्टि से मुस्कुराया, ‘हाँ - बहुत से काम किये थे उसने इन दोनों शादियों के लिए,’

“मुझको तो हमारी शादी के लिए बहुत से आइडियाज आ रहे हैं,” रूचि बोली।

“फॉर एक्साम्प्ल?”

“बाद में!” रूचि बोली, “कैन यू हेल्प मी इन रिमूविंग माय क्लोथ्स?”

अजय जानता था कि चोली लहँगा उतारने में ऐसी कोई कठिनाई नहीं होती है - लेकिन रूचि का मन था कि अजय उसको निर्वस्त्र करे! तो उसको भी इस काम से क्या परहेज़ हो सकता था?

“पैट्रिशिया भाभी अच्छी हैं,” रूचि बोली।

“हम्म... भैया को लाइन पर रखेंगी,”

“हा हा हा... अरे ऐसा क्यों कहा?”

“नहीं कुछ नहीं! इट इस जस्ट दैट भैया इस ऐन अक्सोरियस पर्सन (ऐसा आदमी जो अपनी बीवी को हद से अधिक प्यार करता है, लेकिन जब तरह के व्यवहार को सकारात्मक दृष्टि से नहीं देखा जा सकता),”

“हम्म्म... कोई बात नहीं! भाभी अच्छी हैं, मतलब घर परिवार को साथ में रखेंगी,”

“हाँ, मुझे तो लगता है कि इंडिया आने का इंस्पिरेशन भी उन्ही से आया है,”

“अच्छा है न!”

“हाँ... अच्छा एक बात बताओ? तुमने डॉक्टर को दिखाया?” अजय ने पूछा।

“हाँ... दिखाया था! आई स्पेशलिस्ट ने कहा कि कोई प्रॉब्लम नहीं है। माइग्रेन या वैसा कुछ हो सकता है...” रूचि ने कहा, “इसलिए, मेरे स्वामी, आप मुझे कुछ कहें, उससे पहले ही मैंने डॉक्टर देशपाण्डे से अपॉइंटमेंट लिया है...”

“ओह?” अजय ने पूछा, “कब का?”

“हाँ... नेक्स्ट वीक! चलोगे साथ में?”

“अरे, ये कोई पूछने वाली बात है?”

तब तक रूचि की चोली उतर गई थी। उसने अंदर कुछ भी नहीं पहना हुआ था। अजय ने रूचि को अपनी तरफ घुमा कर उसके स्तनों को अपनी हथेलियों में भर कर आहिस्ते से दबाया।

“आह्ह्ह...” रूचि के गले से आनंद भरी आह निकल गई।

“क्या हुआ रूचि?” अजय ने चिंतित होते हुए पूछा।

“मेरी जान... दर्द वाली आह और सुख वाली आह में अंतर होता है!” रूचि ने मुस्कुराते हुए शरारत से कहा।

“ओह!”

वो मुस्कुराई, “वैसे एक बात है जो सर दर्द से याद आई... जब भी मैं माँ का दूध पीती हूँ न, बहुत रिलैक्स्ड हो जाती हूँ!”

अजय मुस्कुराया, “आई नो, राइट? मैं भी! ... सच में ऐसा लगता है कि जैसे कोई मेडिसिनल प्रॉपर्टीज़ हैं उनके दूध में,”

रूचि बदमाशी से मुस्कुराई, “अब तो भाभी भी विदा हो गईं... मतलब, उनका शेयर मुझको मिलेगा,”

“हा हा हा हा हा!” अजय दिल खोल कर हँसा और फिर उसका एक चूचक मुँह में ले कर उसको चूसने लगा।

रूचि को भी ये खेल बहुत पसंद आता था।

जब अजय के होंठ उसके स्तनों को छूते चूसते थे, तो वो आनंद सागर में गोते लगाने लगती थी। केवल दो मिनटों में ही उसको छोटी मोटी रति निष्पत्ति का आनंद महसूस होने लगता था। तो दो ही मिनटों में इस बार भी रूचि को छोटी मोटी रति निष्पत्ति का आनंद महसूस होने लगा। ऐसा नहीं था कि अजय को पता नहीं चलता था - अपने अनुभवों से वो रूचि के अंदर होते हुए परिवर्तनों को समझता था। लेकिन वो जानबूझ कर ऐसा करता था कि उसको पता नहीं चल रहा है, जिससे रूचि को शर्म या झिझक महसूस न हो, और वो अपने यौन आनंद का पूरी तरह से आस्वादन कर सके।

“अज्जू?” रूचि ने हाँफते हुए कहा।

“हम्म?” उसका चूचक चूसते हुए अजय बोला।

“ब्बस मेरी जान,” वो बोली, “अब रुक जाओ,”

अजय ने उसके चूचक को छोड़ दिया। दोनों बिस्तर पर लेट गए - रूचि अजय के ऊपर ही टेक लगा कर लेट गई।

“एक बात बताऊँ?” रूचि ने थोड़ा संयत होते हुए कहा।

“हूँ?” अजय ने रूचि के बालों की महक को महसूस करते हुए कहा।

रूचि ने थोड़ा झिझकते हुए बताया, “अज्जू... यार... मैंने कुछ दिनों पहले माँ से कहा था कि क्यों न वो... पापा से... आई मीन, वो दोनों शादी कर लें?”

“व्हाट?”

रूचि ने बड़ी मासूमियत से अपनी पलकें झपकाते हुए कहा, “जान... हम उनको मम्मी पापा कहते ही हैं! भाभी (माया) का कन्यादान दोनों ने मिल कर किया। आज भी प्रशांत भैया के रस्मों को दोनों साथ ही में कर रहे थे! तो... हमारे लिए वो दोनों तो सचमुच के मम्मी पापा हैं ही! अब वो प्रॉपरली शादी कर के हमारे मम्मी पापा बन जाएँ, तो क्या खराबी है?”

अजय हँसने लगा, “अरे यार रूचि! तुम भी न!”

“क्यों? अभी उन दोनों की उम्र ही क्या है?” उसने समझाते हुए बताया, “थोड़ा समझो मेरी बातों को अज्जू... कमल भैया की मम्मी प्रेग्नेंट हैं। मम्मी पापा की शादी हो जाए तो उनके भी बेबी हो सकते हैं न?”

“खड़ी होवो,”

“क्या?”

“अरे यार, गेट अप! तभी तो ये लहँगा उतरेगा,”

“ओह,” कहते हुए रूचि खड़ी हो गई।

अजय ने उसके लहँगे को उसकी चड्ढी समेत उतार दिया।

फिर दोनों वापस अपनी पहले वाली अवस्था में लेट गए।

उसी समय बगल वाले कमरे से प्रशांत और पैट्रिशिया की कामुक आहें सुन कर रूचि ने खिलखिलाते हुए अजय से कहा,

“बाप रे! भैया क्या क्या कर रहे हैं भाभी के साथ… जो वो ऐसी ऐसी आवाज़ें निकाल रही हैं,”

“वही मेरी जान, जो हम तुम साथ में करेंगे… जब हमारी शादी हो जायेगी!” अजय ने उसके एक चूचक को अपनी तर्जनी से छेड़ते हुए कहा।

“हा हा हा... आज ही न करने लग जाना,” रूचि ने हँसते हुए कहा।

“पहले तो ऐसे नंगे हो कर मुझको टीज़ करती हो... फिर ये सब बातें करती हो!”

“हनी, यू विल लव दिस इंतज़ार,” रूचि ने अजय के होंठों को चूमते हुए कहा, “आई प्रॉमिस!”

“यप! आई एग्री,”

“तुम भी तो उतारो... इट इस नॉट फेयर कि मैं ऐसे नंगी नंगी हूँ और तुम पूरे कपड़े पहने हुए हो!”

“क्या रूचि,”

“ओये... बच्चू अपनी लिमिट में रहो,” रूचि ने अजय को प्यार से धमकाया, “क़ायदे से देखो, तो मैं तुम्हारी गार्डियन हूँ!”

“अरे?”

“और नहीं तो क्या! तुमसे बड़ी हूँ... अगर उस दिन मेरे साथ हॉस्पिटल चलते, तो मैं ही गार्डियन की तरह साइन करती!”

“हा हा हा!”

“उस रोज़ हॉस्पिटल में सबके सामने नंगे नंगे घूम रहे थे तब कुछ नहीं,”

“अरे मेरी माँ... उतार रहा हूँ!”

“कोई ज़रुरत नहीं है... मैं कर देती हूँ,” कह कर रूचि उसका चूड़ीदार पजामी उतारने लगती है। कमल अपना कुर्ता खुद उतारने लगता है।

उसी समय माहौल में प्रशांत भैया और पैट्रिशिया भाभी की ऊँची कामुक आवाज़ें गूँज उठीं।

“यार सोचो न,” रूचि अजय की पजामी उतारते हुए बोली, “कुछ दिनों में हमारी भी शादी हो जाएगी... फिर हम भी सेक्स करेंगे... फिर घर में हमारी भी ऐसी ऐसी आवाज़ें आएँगी... सोचो तो, मम्मी पापा के मन पर क्या बीतेगा?”

“हम्म्म,”

“और फिर दोनों कम उम्र ही हैं! वो दोनों बहुत हुआ तो बस फोर्टी टू - फोर्टी थ्री के होंगे?”

अजय ने ‘हाँ’ में सर हिलाया।

अब तक अजय भी रूचि की ही तरह पूरी तरह नग्न हो गया था। उसका लिंग उत्तेजनावश खड़ा हो गया था।

“सो, नो डिफरेंट फ्रॉम माय पेरेंट्स,” वो बोली, “एंड लेट मी टेल यू, मेरे पेरेंट्स की सेक्स लाइफ बहुत एक्टिव है,”

“हाऊ डू यू नो... ओह डोंट आंसर दैट,” अजय बोला, “क्या वो भी प्लान कर रहे हैं बेबीज़?”

“नॉट इन माय नॉलेज,” रूचि ने ऐसे कहा कि जैसे उसको अजय के प्रश्न से कोई फ़र्क़ न पड़ा हो, “लेकिन अगर वो और बच्चे चाहते हैं, तो ऐसी कोई प्रॉब्लम नहीं होनी चाहिए! मम्मी इस जस्ट फोर्टी एंड हाफ, एंड रिप्रोडक्टिवली फर्टाइल ऐस वेल! दोनों लगभग रोज़ सेक्स करते हैं। अगर वो प्रोटेक्शन यूज़ करना बंद कर दें, तो मम्मी विल गेट प्रेग्नेंट! … एंड द न्यू बेबी विल बी एटीन इयर्स ओल्ड, बाय द टाइम शी रिटायर्स,”

“इंटरेस्टिंग! तुमने यह सब उनसे कहा?”

“कितनी बार तो कहा है मैंने कि मुझे एक गुड्डा या गुड़िया दे दो! लेकिन बार बार हँसी में टाल जाते हैं,” वो बताने लगी, “इसीलिए कमल भैया की शादी में मैंने ख़ास कर माँ को आंटी जी से मिलवाया था, और बताया था कि वो प्रेग्नेंट हैं! सोचा कि शायद वो उन्ही से वो थोड़ा इंस्पायर हो जाएँ!”

“हा हा हा हा... रूचि... यू आर अमेज़िंग,”

“आई नो,” रूचि ने बताया, “... अभी कुछ दिनों पहले ही... जब माँ ने ब्रेस्टफीड कराया था न पहली बार, उसके तीन दिन बाद, मैं मम्मी पापा के रूम में गई,”

“ओके!”

“जनरली जाती नहीं क्योंकि उस टाइम के आस पास दोनों सेक्स शुरू करने वाले होते हैं,” रूचि ने बताया, “लेकिन उस रात गई। माँ ने नाईटी पहना हुआ था। मैंने उनकी नाईटी का साइड ढलका कर उनके ब्रेस्ट को पीना शुरू कर दिया। ... माँ वास लाइक एंग्री एंड लाफ़िंग... पापा भी!”

“हा हा हा हा...”

“एनीवे, जब मैंने एनफ डाँट और हँसी सुन ली, तो मुझसे उन्होंने रीज़न पूछा कि मैंने वैसा क्यों किया! तो मैंने दोनों को बताया कि मुझे दूधू पीने का मन है... और मुझे एक लिविंग डॉल चाहिए खेलने के लिए!”

“तो क्या कहा मम्मी पापा ने?”

“कुछ नहीं... देर तक हँसते रहे! शायद सेक्स भी नहीं किया उन्होंने उस रोज़!”

“हा हा हा हा हा,” अजय ज़ोर से हँसने लगा।

“लेकिन अज्जू... क्या ये वाक़ई इतना बुरा थॉट है?” रूचि उसके लिंग को प्यार से सहलाने लगी।

“नहीं मेरी जान,” अजय बोला, “तुम इतनी अच्छी हो... तुम्हारे मन में कोई गलत थॉट्स आ ही नहीं सकते!”

“सो डू यू एग्री, कि माँ और पापा दोनों की शादी हो जानी चाहिए?”

“इन प्रिंसिपल, यस! आई थिंक इट इस गुड! ... लेकिन ये उनका पर्सनल मैटर है न जानू?”

“वो भी है,” रूचि बोली, “लेकिन कम से कम उनको एक बार ये कह देने से ये होगा कि उनको समझ में आ जायेगा कि उनके रिलेशनशिप के लिए हमारी ब्लेसिंग है,”

“यप... बात तो ठीक है,”

रूचि अचानक से अजय का लिंग सहलाना बंद कर के बोली, “आज रात अगर मैं माँ के पास सो जाऊँ तो तुमको बुरा तो नहीं लगेगा?”

“अरे, क्यों बुरा लगेगा?”

“ओके,” कह कर रूचि उठने लगी, “तो मैं माँ के पास जाती हूँ!”

“मैं भी आ जाऊँ?”

“शी इस नॉट ओन्ली माय मदर... ऑफ़ कोर्स यू कैन कम,” रूचि ने चंचल अदा से कहा।

*
Ruchi Ashok ji ki shadi karwa ker hi manege shayad. Ab dekhna hai is me safal hotey hai ki nahi. Aur kia Ajay wapas present me jayega agar gaya to beech ka sara accha time kaisay enjoy karega woh.
 
  • Love
Reactions: avsji

RAAZ

Well-Known Member
3,014
7,399
158
अपडेट 76


प्रशांत और पैट्रिशिया अपनी शादी के एक सप्ताह बाद वापस अमेरिका लौट गए।

इतने समय में सभी की दिनचर्या बेहद धीमी रफ़्तार में वापस सामान्य हो रही थी। कमल और माया की दिनचर्या तो बहुत बदल गई थी और होनी भी चाहिए थी। उधर रूचि भी अब अधिकतर समय अजय के घर में ही बिता रही थी। अक्सर ही रात में वो वहीं रुक जाती। अजय के माता पिता ने रूचि के माता पिता - रवि और शोभा जी से इस बात की आज्ञा ले ली थी। किरण जी और अशोक जी को अपनी बहू रूचि का अपने सामने रहना बहुत भाता। उनको माया के अपने ससुराल जाने की कमी खलती, उससे पहले ही रूचि ने वो कमी पूरी कर दी थी। रूचि की सौम्यता, हँसी, और भोली शरारतों से उनके घर में रौनक रहती। रवि और शोभा जी भी समझ रहे थे कि बहुत जल्दी ही अजय और रूचि की भी शादी हो जाएगी। ऐसे में अनावश्यक ही इस नवोदित सम्बन्ध को जटिल बनाने की कोई आवश्यकता नहीं थी।

और तो और, रूचि को वो अपने से अलग भी न मानते थे। इसलिए आज जब रूचि को डॉक्टर को दिखाने की बात आई, तो न केवल रूचि के माता पिता, बल्कि अजय और उसके माता पिता भी आए हुए थे।

“हेल्लो रूचि,” डॉक्टर देशपाण्डे ने बड़ी गर्मजोशी से रूचि से हाथ मिलाते हुए उसका अभिवादन किया, “हाऊ आर व्ही टुडे?”

“आई ऍम गुड, सर” रूचि ने भी उनका अभिवादन गर्मजोशी से किया, “हाऊ आर यू?”

“वैरी वेल... थैंक यू!” फिर उसके माता पिता का अभिवादन करते हुए बोले, “हेल्लो मिस्टर एंड मिसेज़ गुप्ता!”

“नमस्ते डॉक्टर साहब,” रवि जी और शोभा जी ने भी डॉक्टर देशपाण्डे का अभिवादन किया।

डॉक्टर देशपाण्डे ने अजय के माता पिता का अभिवादन करते हुए बोले, “हेल्लो मिस्टर एंड मिसेज़ ठाकुर!”

डॉक्टर देशपाण्डे द्वारा दोनों का इस तरह ‘साथ’ में अभिवादन सुन कर रूचि के होंठों पर एक शरारती मुस्कान आ गई। अजय ने आँखें तरेर कर उसको चुप रहने का इशारा किया।

“एंड हाऊ इस माय फ़ेवरिट यंग मैन?”

अजय ने डॉक्टर देशपाण्डे से हाथ मिलाते हुए कहा, “गुड मॉर्निंग सर! आई ऍम गुड! हाऊ आर यू?”

डॉक्टर देशपाण्डे बोले, “फैंटास्टिक! भई, आप सभी को यूँ साथ में देख कर बहुत अच्छा लगा… बहुत कम ऐसे परिवार देखें हैं जिनमें इस तरह से… जो बड़ी मोहब्बत से रहते हैं। आप लोग जब भी आते हैं, तो साथ में आते हैं… और मज़बूती से एक दूसरे के संग खड़े रहते हैं।”

“डॉक्टर साहब,” अशोक जी बोले, “रूचि भी तो हमारी बेटी है,”

“सो तो है… सो तो है,” वो बोले, फिर रूचि की तरफ़ मुखातिब हो कर, “नाऊ रूचि, प्लीज़ टेल मी, व्हाट इस एलिंग यू?”

“सर,” उसने बताना शुरू किया, “आई समटाइम्स एक्सपीरियंस शूटिंग पेन इन माय हेड।”

“हाऊ आफ्टेन?”

“वीक में कभी कभी... लेकिन कभी कभी एक दिन में दो बार भी एक्सपीरियंस किया है।”

“इंटेंसिटी कितनी होती है - से ऑन अ स्केल ऑफ़ टेन?”

“युसुअलि सिक्स सेवेन...”

“इन मॉर्निंग्स?”

“हाँ! कभी कभी। लेकिन सुबह का पेन अधिक... पेनफुल होता है।”

“ओके! प्लीज डोंट बी अलार्मड, व्हेन आई आस्क यू दिस... बट डू यू एक्सपीरियंस सीज़र्स?”

“मतलब?”

“मतलब कभी बॉडी में अनयुसुअल झटका महसूस हुआ हो कभी?”

“एक बार हुआ था,” रूचि ने चिंतित स्वर में कहा, “एक बार हुआ था... जस्ट वन लिटिल जॉल्ट!”

“हम्म... टायर्डनेस?”

“होती ही है,”

“नहीं, जनरल टायर्डनेस नहीं... हमेशा रहती है क्या?”

“नो... लेकिन कभी कभी पेन के कारण ठीक से सो नहीं पाती, जिसके कारण अगली सुबह थोड़ा सुस्ती रहती है।

“व्हेन डिड यू गेट योर प्रिस्क्रिप्शन ग्लासेस?”

“रीसेंटली... बट दे आर नॉट हेल्पिंग। इन फैक्ट, आई थिंक इनके कारण और दिक्कत हो गई है।”

“टिनिटस (कभी कभी ऐसा होता है कि कानों के अंदर सीटी बजने जैसी आवाजें सुनाई देती हैं, चाहे आप किसी शांत जगह पर ही क्यों न बैठे हों)?”

“नो... उम्, वेल, वो तो सभी को होता है।”

“यस यस... मेरा मतलब अनयूसुअल?

“नो,”

“मितली होती है?”

“क्या हो गया डॉक्टर साहब? आप इतने सारे क्वेश्चंस क्यों पूछ रहे हैं?” रूचि के पिता, रवि गुप्ता जी ने बेहद चिंतित होते हुए पूछा।

“देखिए मिस्टर गुप्ता, आप ऐसे घबराइए नहीं। ये सब क्वेश्चंस मैं एक बेसलाइन इस्टैब्लिश करने के लिए पूछ रहा हूँ। सिम्प्टंप्स ठीक से पता होंगे, तभी कोर्स ऑफ़ एक्शन डिसाइड हो पाएगा।”

“पापा... इट्स ओके! डोंट वरी! ... नहीं सर, कोई मितली नहीं होती है।”

“डू यू टू मेक लव?” डॉक्टर देशपाण्डे ने अचानक से ही शरारतपूर्वक पूछ लिया।

“व्हाट!” अजय अविश्वनीय तरीके से चौंक गया।

“नहीं डॉक्टर साहब,” किरण जी ने कहा, “हमारे बच्चे बहुत अच्छे हैं... इनमें अभी भी भोलापन है!”

किरण जी की बात से रूचि के माता पिता को बड़ी राहत हुई - ख़ास कर उसकी माँ शोभा जी को। उनको तो यही लग रहा था कि दोनों ने अब तक कई बार सेक्स कर लिया होगा। लेकिन किरण जी के मुँह से यह सुन कर उनको अच्छा लगा और राहत हुई। अपनी बेटी की बातों (रूचि हमेशा ही उनसे कहती थी कि वो और अजय बहुत क़रीब हैं, लेकिन वो दोनों सेक्स नहीं करते) पर उनको और भी अधिक विश्वास हो गया, और साथ ही अजय और रूचि की मोहब्बत पर गुमान भी!

“ओके! गुड,” डॉक्टर देशपाण्डे मुस्कुराते हुए बोले, “हाऊ आर योर स्टडीज़? एनी प्रॉब्लम्स विद योर मेमोरी?”

“नो सर,”

“ऑन द कंट्रेरी सर,” अजय बोला, “शी इस द टॉपर... एंड आई ऍम श्योर दैट शी विल बी दिस ईयर्स मेरिट लिस्ट टॉपर ऐस वेल,”

अजय हँसते हुए बताया।

“आई ऍम श्योर! रूचि इस अ शार्प एंड इंटेलीजेंट गर्ल... एंड यू आर अ लकी मैन!”

“दैट आई ऍम,” अजय ने हँसते हुए स्वीकारा, “थैंक यू सर,”

“रूचि बेटे, मैंने पहले से ही आपके लिए एमआरआई स्कैनिंग की बुकिंग कर दी है।”

“सर कोई प्रॉब्लम है क्या?”

“वही बता रहा हूँ,” डॉक्टर देशपाण्डे ने कहा, “एमआरआई स्कैनिंग की रिपोर्ट्स के बाद मैं आपको ठीक ठीक बता सकूँगा!”

“कब तक आ जाएगी रिपोर्ट्स?”

“थ्री डेज़... आई विल कॉल यू विद ऐन अपॉइंटमेंट,” डॉक्टर ने कहा, “अभी आप लोग रूचि का हेड स्कैन करवा लें!”

सभी लोग स्कैन रूम की तरफ़ जाने लगे तो डॉक्टर देशपाण्डे ने अजय से बात करने की गरज़ से उसको दो पल के लिए रोका।

“अजय, तुम कैसे हो?”

“फर्स्ट क्लास, सर!” अजय बोला, “... सर एक बात बताइए? रूचि को कोई सीरियस परेशानी तो नहीं है?”

“अजय... मैं तुमको कोई झूठा दिलासा नहीं दूँगा। सबके सामने कुछ कह नहीं पाया, लेकिन रूचि तुम्हारी मंगेतर है, इसलिए तुमको मेरा इनिशियल असेसमेंट जानने का पूरा हक़ है।” डॉक्टर देशपाण्डे ने गहरी साँस भरी, “आई सस्पेक्ट कि रूचि के ब्रेन में ट्यूमर है,”

“व्हाट?” ट्यूमर शब्द सुनते ही अजय का दिमाग सुन्न हो गया।

कुछ पलों तक उसको समझ ही नहीं आया कि वो क्या कहे। लेकिन फिर स्वयं को समेट कर उसने डॉक्टर देशपाण्डे जो कह रहे थे, वो समझने को कोशिश करी।

डॉक्टर ने ‘हाँ’ में सर हिलाते हुए बताया, “रूचि ब्रेन ट्यूमर के क्लासिक, लेकिन इनिशियल सिम्पटम्स डिस्प्ले कर रही है... आई थिंक अभी शुरू ही हुआ है। ... सर का दर्द ब्रेन ट्यूमर का सबसे कॉमन सिम्पटम है। ट्यूमर के कारण ब्रेन में प्रेशर बनता है, जिसको इंट्राक्रैनियल प्रेशर कहते हैं। उसके कारण हेडेक (सरदर्द) होता है। रूचि के बाकी सिम्पटम्स या तो एब्सेंट हैं या वीक! इसीलिए मैंने कहा कि ट्यूमर अभी शुरू हुआ है,”

“इसका इलाज तो होगा न सर?”

“जैसे बाकी कैंसर्स बहुत टाइप के होते हैं, वैसे ही ब्रेन कैंसर्स में भी वैरायटी होती है। ... एमआरआई स्कैन से क्लैरिटी आएगी कि रूचि को क्या है। उसी के बाद सॉलूशन निकलेगा।”

“ओह गॉड,”

“अजय... प्लीज! ऐसे अपना दिल न हारो। ... यू मस्ट नो दैट इफ डिटेक्टेड अर्ली ऑन, कैंसर ट्रीटमेंट सक्सेस रेट इस वैरी हाई,”

अजय ने समझते हुए ‘हाँ’ में सर हिलाया।

“रूचि अभी छोटी है; हेल्दी है; उसका बॉडी कंस्टीटूशन अच्छा है। आई ऍम श्योर वो पूरी तरह ठीक हो जाएगी!”

अजय सुन भी रहा था, और नहीं भी!

रूचि को ऐसा रोग हो गया लगता है जिसका नाम भी लेने में लोग काँप जाते हैं। किसी के संग सुखपूर्वक जीवन जीने की अभिलाषा क्या हुई, मानो गुनाह हो गया! कहीं ऐसा तो नहीं कि वो अच्छे जीवन जीने की अभिलाषा में स्वार्थी हो गया? तो उसी बात का दण्ड मिल रहा है? लेकिन फिर उसके अपराध का दण्ड किसी अन्य को क्यों मिले? नहीं नहीं... ईश्वर ऐसे निष्ठुर तो नहीं हो सकते! वैसे भी, उन्होंने कुछ सोच कर ही उसको ‘वापस’ भेजा है। माया दीदी और कमल दोनों का कुछ भला हुआ उसके वापस आने से। प्रशांत भैया और पैट्रिशिया भाभी का जीवन भी पटरी पर है। शायद पापा भी सही रहें!

तो क्या... तो क्या... रूचि को इस क्षति से बचाने का निमित्त भी अजय ही है?

संभव है न?

उसने दिमाग पर ज़ोर लगाया।

पिछले जीवन में कॉलेज के बाद उसको रूचि के बारे में पता ही क्या था? कुछ भी तो नहीं। शायद, पिछली ज़िन्दगी में उसको वो स्मृतियाँ कभी याद रही हों? लेकिन अब? अब तो बिल्कुल भी याद नहीं।

संभव है कि पिछले समयकाल में यह ब्रेन कैंसर रूचि को लील गया हो। लेकिन अगर वो वापस आया है, तो वो रूचि को बचाने के लिए जो भी बन पड़ेगा वो करेगा।

“... अजय? क्या हुआ? कहाँ खो गए?”

“कुछ नहीं सर! ... जो भी हो, जस्ट प्लीज़ लेट मी नो?” अजय की आवाज़ में एक तरह की हिम्मत सुनाई दे रही थी।

“बिल्कुल... मुझे सही लगा था कि तुममें बड़ी हिम्मत है। यू आर नॉट आवर जनरल टीनएजर... तुम अलग हो!”

अजय ने एक फीकी मुस्कान दी।

“अजय... दिल न हारो। रूचि को सम्हालने का काम तुम्हारा है। उसको खुश रखो। आगे की ज़िन्दगी के सपने बुनो। ... होप (आशा) बहुत बड़ी चीज़ होती है ऐसे रोगों को हराने में। होप मत छोड़ना! और फिर मैं तो हूँ ही न! आई विल डू माय बेस्ट... आई विल डू एवरीथिंग इन माय पॉवर टू ट्रीट रूचि बैक टू अ परफेक्ट हेल्थ!”

अजय ने गहरी साँस भरी।

हाँ वो भी सब कुछ करेगा रूचि को बचाने की!

उसके होंठों पर एक हल्की सी, लेकिन आशाभरी मुस्कान आ गई।

**
Oh My God jaisa mujhay shak ho raha thaa aur kuch review me bola thaa theek waisa hi ho raha hai ki shayad iska sar dard koi badi bimari ka symptoms ho aur shayad yahi hua hai. Aur jaisa Ajay ne socha hai ki sab kuch theek kar ke to wapas lot jana thaa apni timeline shayad isi ki wajah se woh wapas nahi pohoch paya hai woh. Ab dekhtey hai kia hai inke bhagya me.
 
  • Love
Reactions: avsji

RAAZ

Well-Known Member
3,014
7,399
158
अपडेट 81


“अजय,” डॉक्टर देशपाण्डे बोले, “अब तक हमको जो सब जानना था, वो सब पता चल गया है।”

अजय ने समझते हुए सर हिलाया, “तो क्या समझें डॉक्टर सर?”

“देखो, है तो थोड़ा कठिन, लेकिन मैं तुमको कोशिश कर के सिंपल लेंग्वेज में बताता हूँ,” उन्होंने कहा, “लगभग बीस से पच्चीस परसेंट ह्यूमन्स में ट्यूमर-प्रमोटिंग ड्राइवर म्यूटेशन्स होते हैं… तो उतने लोगों में किसी न किसी तरह के कैंसर्स होने की पॉसिबिलिटी रहती है। क्योरेटिव इंटेंट - मतलब कीमो (कीमोथेरेपी) के बावजूद, और स्टैंडर्ड लोको-रीजनल थेरेपी के बाद भी रिलैप्स (वापस आना) हो सकता। कठिन कैंसर्स, जैसे ग्लिओब्लास्टोमा में यह बात बहुत कॉमन है।”

यह सुन कर अजय का दिल फिर से बैठ गया।

“तो क्या…” अजय ने आशंका से पूछा।

“अरे पूरी बात तो सुन लो! तुमने जिस ब्रेन ट्यूमर सप्रेसर जीन -- लेट्स कॉल इट बी.टी.एस.जी. -- के बारे में बताया, वो विशेष रूप से न्यूरल टिश्यूज (ऊतकों) में सेल प्रोलिफरेशन (बढ़ोत्तरी) और सर्वाइवल (जीवित रहना) को रेगुलेट करता हुआ लगता है। यह एक तरह का क्योर (उपचार) है! यह जीन स्पेशियलि ब्रेन ट्यूमर्स, जैसे ग्लियोमास और मेडुलोब्लास्टोमास की ग्रोथ को रोकता है। जो तुमने बताया है, उसके हिसाब से यह जीन ब्रेन माइक्रो-एनवायरनमेंट में ऑन्कोजेनिक (कैंसर जनक) स्ट्रेस के रिस्पॉन्स में न्यूरल सेल ग्रोथ, डीएनए रिपेयर, और एपोप्टोसिस (कोशिकाओं की मृत्यु) का क्रिटिकल रेगुलेटर के रूप में काम कर सकता है।”

“कैसे?”

“तुमको शायद सब कुछ पूरा समझ में न आए… लेकिन बीटीएसजी बॉडी में एक ख़ास प्रोटीन - हम उसको कन्वीनिएंस के लिए बीटीएसजी-पी कहेंगे - वो एक ख़ास प्रोटीन को एनकोड करता है, जो न्यूरल सेल्स में मल्टीफेसेटेड रेगुलेटर का फंक्शन करता है। इसकी मैकेनिज्म्स सेल साइकल रेगुलेशन करने की है। बीटीएसजी-पी न्यूरल सेल्स में साईक्लीन डिपेंडेंट काइनेज से बाइंड हो कर जी-वन/एस फेज ट्रांजिशन को इनहिबिट करता है, जो कि सेल साइकल प्रोग्रेशन का एक इम्पोर्टेन्ट ड्राइवर है।”

सच में अजय को पूरा समझ में नहीं आ रहा था। लेकिन वो सब कुछ समझने की पूरी कोशिश कर रहा था।

डॉक्टर देशपाण्डे कह रहे थे, “यह न्यूरल-स्पेसिफिक ट्रांसक्रिप्शन फैक्टर्स के साथ इंटरैक्ट करता है, जिससे एक्सेसिव प्रोलिफरेशन में इन्वॉल्व्ड जीन्स, जैसे एमवाईसी और एसओएक्स-टू को डाउनरेगुलेट करे… जो ब्रेन ट्यूमर्स में अक्सर काफ़ी ओवर-एक्सप्रेस्ड होते हैं।”

“ओके,” उसको कुछ भी समझ में नहीं आ रहा था।

“प्लस, ये डीएनए डैमेज रिस्पॉन्स में हेल्प कर सकता है। बीटीएसजी-पी एस्ट्रोसाइट्स (सितारों के आकार वाले ग्लिअल सेल्स) और न्यूरॉन्स में डीएनए रिपेयर को इनहान्स कर सकता है। यह डीएनए रिपेयर प्रोटीन्स को डीएनए के डबल-स्ट्रैंड की ब्रेक्स - मतलब डीएनए स्ट्रैंड्स कैंसर के कारण जहाँ जहाँ टूटते हैं, उन साइट्स पर रिपेयर प्रोटीन्स को रिक्रूट करके, स्ट्रेस रिड्यूस करता है।”

तार्किक रूप से डॉक्टर की बातें अजय को समझ में आ रही थीं।

“शायद ये एक न्यूरल-स्पेसिफिक चेकपॉइंट काइनेज को भी एक्टिवेट कर सकता है, जो डीएनए डैमेज के रिस्पॉन्स में सेल साइकल को हॉल्ट करता है, उनका रिपेयर होने देता है, और अगर डैमेज इर्रेपेरेबल (अपूरणीय) है, तो एपोप्टोसिस ट्रिगर कर सकता है।”

“मतलब ये सब अच्छी बाते हैं?”

“बहुत अच्छी बाते हैं। बीटीएसजी जीन शायद कुछ स्पेसिफ़िक ब्रेन कैंसर का टोटल ट्रीटमेंट कर सकता है। ऑन्कोजेनिक सिग्नल्स, जैसे एम्प्लिफाइड इजीऍफ़आर या पीडीजीऍफ़आरए, जो ग्लियोमास में कॉमन हैं, उनकी प्रेजेंस में, बीटीएसजी-पी न्यूरल सेल्स में प्रो-एपोप्टोटिक प्रोटीन्स जैसे बीएएक्स को अप-रेगुलेट करता है। इससे प्रीकैंसरस सेल्स एलिमिनेट हो सकती हैं।”

“मतलब रीलैप्स के चान्सेस…”

“हाँ… मतलब, रिलैप्स के चांसेस बहुत कम हो सकते हैं,” डॉक्टर ने बताया, “यह माइक्रो-एनवायरनमेंटल स्ट्रेस, जैसे ब्रेन हाइपोक्सिया या इन्फ्लेमेशन, को सेंस करता है और न्यूरल-स्पेसिफिक कैस्पेज कैस्केड के माध्यम से एपोप्टोसिस ट्रिगर करता है।”

“ओह गुड,”

“या… इट इस वैरी एक्साइटिंग!” देशपाण्डे जी ने बड़े उत्साह से कहा, “एक और बात पता चली। ये एंजियोजेनेसिस को सप्रेस कर सकता है। बीटीएसजी-पी ग्लियल सेल्स में वस्कुलर एंडोथेलिअल ग्रोथ फैक्टर के एक्सप्रेशन को इनहिबिट कर सकता है। पोटेंशियल ट्यूमर साइट्स में ब्लड सप्लाई लिमिट कर के और ट्यूमर ग्रोथ के लिए जरूरी वास्कुलराइजेशन को रोक कर ऐसा हो सकता है। यह हाइपोक्सिआ इन्द्युसिबल फैक्टर पाथवे के साथ इंटरैक्ट कर के हाइपॉक्सिक कंडीशन्स में एंजियोजेनेसिस को ब्लॉक कर सकता है। ये एग्रेसिव ब्रेन ट्यूमर्स का एक हॉलमार्क है।”

“नाइस,” अजय को कुछ समझ ने नहीं आ रहा था, लेकिन डॉक्टर देशपाण्डे के उत्साह को देख कर उसको लग रहा था कि यह सब ज़रूर ी अच्छी खबर होगी।

“सच में अज्जू… दिस ऑल इस गोल्ड,” देशपाण्डे जी का उत्साह देखते ही बन रहा था, “... एंड फाइनली, बीटीएसजी-पी एपिजेनेटिक रेगुलेशन में भी बहुत इफेक्टिव हो सकता है। ये न्यूरल टिश्यू स्पेसिफिक ऑन्कोजीन्स को साइलेंस करने के लिए हिस्टोन डीऐसीटयलेसेस को रिक्रूट कर के न्यूरॉन्स और ग्लियल सेल्स में डिफरेंशिएटेड स्टेट को मेंटेन कर सकता है। यह डीएनए मेथिलेशन पैटर्न्स को स्टेबलाइज करके एपिजेनेटिक रीप्रोग्रामिंग को प्रिवेंट कर सकता है! ब्रेन ट्यूमर सेल्स में अक्सर देखी जाने वाली हाइपोमेथिलेशन का काउंटर कर के यह पॉसिबल है,”

“वाओ! सर, आई नो ये सब बहुत कॉम्प्लिकेटेड है... लेकिन जान कर लग रहा है कि रूचि की प्रॉब्लम का क्योर निकल सकता है,”


Ajay-Deshpande-discussion

“यस! देखो - ऑपरेशन के बाद कीमो शुरू होने में तीन महीना लगेगा। शी शुड बी फाइन टिल देन... मेरा सबसे अधिक वरी है कीमो! आई वांट इट टू बी माइल्ड! लेकिन पेन मैनेजमेंट होना चाहिए और रिकवरी भी।”

अजय ने समझते हुए सर हिलाया।

“एक बात बताओ, इस पूरे टाइम रूचि के सर दर्द में किसी चीज़ से आराम मिलता है? तुम्हे कुछ पता है?”

डॉक्टर देशपाण्डे की बात पर वो कुछ देर तक सोच में पड़ गया।

फिर कुछ याद कर के, “सर... एक बात तो है! बट आई डोंट नो हाऊ टू टेल यू,”

“अरे बताओ न! अगर ऐसी कोई भी बात है, जो उसकी हेल्प कर सकती है, तो वो मुझको मालूम होनी चाहिए!”

“ओके,” अजय ने झिझकते हुए बताना शुरू किया, “सर... व्हेनएवर रूचि ब्रेस्टफीड्स फ्रॉम माय मदर, शी टेल्स मी दैट हर पेन रेडूसेस,”

“रूचि स्टिल ब्रेस्फीड्स?”

अजय ने ‘हाँ’ में सर हिलाया।

“फ्रॉम योर मदर?”

अजय ने ‘हाँ’ में सर हिलाया।

“इंटरेस्टिंग! गुड!”

“अपनी माँ का भी पीती है, लेकिन उनको दूध नहीं आता!” बताते हुए अजय हिचक रहा था कि न जाने डॉक्टर क्या सोचेंगे।

“इंटरेस्टिंग,” कुछ समय सोच कर उन्होंने कहा, “वेल, मेडिकल कम्युनिटी तो यही सोचती है कि टीनऐज चिल्ड्रन में मदर्स मिल्क का कोई बेनिफिट नहीं होता… बट लुक्स लाइक, व्ही डोंट नो एनफ! वैरी इंटरेस्टिंग!”

दोनों कुछ देर तक कुछ नहीं बोले।

फिर डॉक्टर देशपाण्डे के ही कहने पर अजय ने उनको किरण जी द्वारा रूचि को स्तनपान कराने का पूरा ब्यौरा दिया - किरण जी के माँ बनने, उसके और माया द्वारा किरण जी का स्तनपान करने, और अब रूचि के भी उस क्रिया में सम्मिलित होने तक।

सब सुन कर उन्होंने कहा,

“तो उसको ब्रेस्ट मिल्क पी कर सर के दर्द में राहत महसूस होती है?”

“यस डॉक्टर,”

“हम्म्म,”

“सर, आपको क्या लगता है? क्या रूचि पेन से रिलीफ़ पाने का बहाना करती है जिससे कि माँ उसको दूध पिलाती रहें, या कि उसको सचमुच में आराम मिलता है?”

“देखो अभी कह नहीं सकते,” डॉक्टर ने समझाया, “इस बात पर रिसर्च कम ही है। लेकिन हमको इतना ज़रूर पता है कि ब्रेस्ट मिल्क का बच्चों के ब्रेन-फंक्शन्स पर पॉजिटिव इफ़ेक्ट होता है। फॉर एक्साम्प्ल, ब्रेस्ट मिल्क में डीहेचए होता है, लेक्टोफेरिन, और अन्य ग्रोथ फैक्टर्स होते हैं, जिससे बच्चों की आईक्यू बढ़ती है। बेटर हेल्थ के लिए भी अच्छा है। क्या पता - शायद इस बात में भी बेनिफिट हो!”

“समझा,” अजय बोला, “सर… एक बात पूछूँ?”

“हाँ हाँ, मुझसे फॉर्मेलिटी मत किया करो,”

“सर मार्च में हमारे बोर्ड एक्साम्स शुरू हो जाएँगे…”

डॉक्टर देशपाण्डे ने समझते हुए कहा, “आई अंडरस्टैंड… उसकी चिंता न करो! दिस ऑपेरशन विल हेल्प रूचि… ट्यूमर निकालने से तुरंत ही पेन से रिलीफ़ मिलेगी,”

“और रिकवरी?”

“जैसा मैंने पहले भी बताया है, ऑपेरशन विल बी मिनिमली इनवेसिव… देयर विल बी इनसीशन, एंड हर हेड नीड्स टू बी शेव्ड! इसलिए थोड़ी एहतियात बरतनी होगी। जितना हो सके, किसी भी इंफेक्शन से बचाने की कोशिश करना। रूचि बहुत यंग है, इसलिए जो भी कट्स होंगे, वो जल्दी भर जाएँगे,”

“ओके,” अजय ने समझते हुए कहा।

“चिंता मत करो! सच में,” डॉक्टर ने अजय को दिलासा देते हुए कहा, फिर आगे जोड़ा, “अजय, क्या मैं किरण जी से इस बारे में थोड़ा बात कर सकता हूँ?”

“आई कैन आस्क हर,” उसने कहा, “लेकिन माँ शायद हिचकिचाएँ।”

“आई थिंक कि अगर वो रूचि को इतना प्यार करती हैं कि उसको अपना दूध पिला सकती हैं, तो वो उसके लिए कुछ भी करेंगी!”

अजय मुस्कुराया, “ठीक है सर! मैं माँ से कहूँगा,”

“थैंक यू,”

“लेकिन सर, एक बात है जो मुझको समझ में नहीं आई,”

“वो क्या?”

“मुझको यह सब जानकारी कैसे मिली? मेरा तो इन सब बातों से कोई लेना देना ही नहीं है! बॉयोलॉजी और वो भी ऐसी एडवांस्ड… कैसे हुआ होगा?”

“यह बात तो मैं भी सोच रहा हूँ!” डॉक्टर बोले, “लेकिन इम्पॉसिबल तो नहीं है। कुछ केसेस हमको पता भी हैं। साइंटिस्ट्स इसको एक्वायर्ड सवांत सिंड्रोम के नाम से जानते हैं। बहुत ही रेयर है। इसमें क्या होता है कि कोई आदमी या औरत, जो पहले किसी ख़ास स्किल में माहिर नहीं होता, अचानक से ही असाधारण प्रतिभा हासिल कर लेता है!”

“ओह?”

“हाँ! जो केसेस हमको पता हैं, उनमें लोगों ने म्यूजिक, इंस्ट्रूमेंट, काम्प्लेक्स मैथ्स, आर्टिस्ट्री, या फिर कैलेंडर कैलकुलेशन… ऐसी मुश्किल स्किल्स अचानक से जान ली हैं। यह आमतौर पर दिमाग़ की चोट, स्ट्रोक, डिमेंशिया, लंबी बीमारी जैसे मेनिन्जाइटिस या मल्टीपल स्क्लेरोसिस, या फिर किसी और न्यूरोलॉजिकल इवेंट्स के बाद देखा गया है। यह कंडीशन बहुत रेयर है। दुनिया भर में बस कुछ ही केसेस रिपोर्टेड हैं!”

“अच्छा?”

“हाँ! ऑरलैंडो सेरेल को दस साल की उम्र में बेसबॉल से सर पर चोट लगी थी। उसके बाद उनको किसी भी तारीख का दिन, मौसम और घटनाएं याद रहने लगे। इसको हम हाइपरथाइमेस्टिक मेमोरी कहते हैं। ऐसे ही अलॉन्जो क्लेमन्स हैं। तीन साल की उम्र में उनको सर पर चोट लगी। इनका आईक्यू शायद पचास था, लेकिन इसके बावजूद, वो केवल फोटो देख कर आधे घण्टे में जानवरों की मूर्तियाँ बनाने में माहिर हो गए!”

लेकिन अजय को लग रहा था कि उसका ज्ञान शायद प्रजापति विश्वकर्मा भगवान का ही कोई योगदान है।

“कैसे होता है यह?”

“साइंटिस्ट मानते हैं कि इसका मुख्य कारण ब्रेन की रीवायरिंग है। ब्रेन दो हिस्सों में बंटा होता है - लेफ्ट हेमिस्फेयर, जो लॉजिकल थिंकिंग, लैंगुएज, और प्रोसेसिंग के लिए रिस्पॉन्सिबल होता है, और राइट हेमिस्फेयर, जो क्रिएटिविटी, आर्ट्स, और पैटर्न रिकग्निशन से असोसिएटेड है। जब लेफ्ट हिस्से में चोट लगती है - से फॉर एक्साम्प्ल, लेफ्ट एंटीरियर टेम्पोरल लोब में, तो यह राइट साइड की छिपी हुई एबिलिटीज को अनलॉक कर देता है।”

“इंटरेस्टिंग,”

“हाँ! बहुत सी थ्योरी हैं इसको ले कर! जैसे बायोलॉजिकल-डेवलपमेंटल थ्योरी, जिसमें जेनेटिक और न्यूरोकेमिकल बदलाव आ जाते हैं, कॉग्निटिव थ्योरी, जिसमें एग्जीक्यूटिव फंक्शन में कमी लेकिन प्रोसीजरल मेमोरी में इनक्रीस हो जाता है, या फिर मॉड्यूलरिटी ऑफ माइंड थ्योरी। जेनेटिक फैक्टर भी हो सकते है। कभी कभी प्रीनेटल टेस्टोस्टेरोन लेवल भी इस बात पर प्रभाव डालते हैं!”

अजय चुप ही रहा।

“लेकिन अच्छी बात है कि कोई भी कारण रहा हो, तुमको पता चला।” डॉक्टर बोले, “ऐसी खतरनाक बीमारी का इलाज़ मिलना बहुत ज़रूरी है,”

“आई ऍम हैप्पी टू हेल्प,”

**
Kia Ajay doosri dimensions me to nahi chala gaya jaha per bohat kuch ulta ho jaisay Ragni itni sahi hai aur ab doctor ka inse milna. But jo bhi story bohat mazedar hai maza aa gaya pad ker.
 
  • Love
Reactions: avsji

KinkyGeneral

Member
347
657
108
उसके एरोला उसके स्तनों के कोई एक तिहाई आकार के थे
एरियोला का अनुपात तो perfect लगता है।

कुछ देर तक अजय बारी बारी से उसके दोनों स्तनों को पीता रहा। उसने ध्यान नहीं दिया, लेकिन इतनी देर तक कामुक रूप से उकसाने से रूचि को रति-निष्पत्ति हो गई।
रूचि को रति-निष्पत्ति हो गई थी... और ये तब था जब अजय ने उसको नीचे छुवा तक भी नहीं!
This has to be the best kind of orgasm.

अजय ने इस बीच उसकी शलवार का नाड़ा खोल दिया था और चूँकि शलवार का कपड़ा चिकना सा था, वो अपने आप ज़मीन पर ढेर हो गया।
🫠

“गंदे हो तुम...”
😊

लेकिन उसको अजय के आश्वासन से राहत मिली। अजय उसकी उम्मीदों पर पूरी तरह खरा उतर रहा था। उसको उम्मीद थी कि जब वो उससे अपने प्यार का इज़हार करेगी, तो अजय उसको स्वीकार कर लेगा। उसको उम्मीद थी कि अजय उसके अंतरंग होने की पहल से बुरा नहीं मानेगा और उसके साथ ही खेल में शामिल हो जाएगा। उसको यह भी उम्मीद थी कि वो रूचि की दी हुई छूट का नाजायज़ फायदा नहीं उठाएगा और उसका सम्मान करेगा... लेकिन वो यह भी चाहती थी कि अजय अपनी तरफ़ से भी पहल करे और उसको वैसे अनुभव दे, जिनसे वो अभी तक अनभिज्ञ थी। फिलहाल वो सब कुछ हो रहा था।

आज सुबह जब वो उठी थी, तब उसने अपने मन में कुछ निर्णय ज़रूर लिए थे। अजय से अपने प्रेम का इज़हार, उसको अपने मन की बात बताना उस प्लान में शामिल था। लेकिन यह सब ऐसा होगा, उसको पता नहीं था। थोड़ा संशय तो था कि उसके मम्मी पापा कैसा व्यवहार करेंगे! लड़की के माँ बाप होना एक बहुत बड़ा भार होता है, जो लोग अपने सर लिए फिरते हैं। लेकिन यहाँ आ कर अपने मम्मी पापा के चेहरे पर संतोष और गर्व के भाव पढ़ कर वो भी संयत हो गई। वो जान गई कि उनको अजय और उसकी फैमिली बहुत पसंद आई है।
कितनी सयानी लड़की! अभी से सब चीज़ों की परख है।🤗
 
  • Love
Reactions: avsji

avsji

Weaving Words, Weaving Worlds.
Supreme
4,572
24,994
159
Nice update
Operation tak tention to sabko rahegi

घर के किसी सदस्य को ऐसी भयंकर बीमारी हो जाए, तो कोई चैन से कैसे रह सकता है।
साथ बने रहने के लिए धन्यवाद उत्कर्ष भाई :)
 

avsji

Weaving Words, Weaving Worlds.
Supreme
4,572
24,994
159
Maza aaya to aakhir scan huay aur pata chala ki doctor ki kafi madad Ajay ki behoshi ne kar di jo kaam hosh me nahi ho saktey uske liye hosh ka udna accha hota hai.

हा हा हा! देखा भाई - रागिनी के आने का कोई लाभ तो हुआ न!

Ragni shayad woh nahi hai aya abhi tak us level per giri nahi thee shayad woh bhi ek mauqa deserve karti hain atleast agar gadbad hogi to woh muhawara hai hi kuttey ki dum.

रागिनी ज़रूर ही self destruction की राह पर चल रही है, लेकिन अभी भी उसके अंदर ज़हर नहीं आया है।
पिछली और इस रागिनी में क़रीब आठ नौ साल का अंतर है - उसके उतना साइकोपैथ हो जाने का कारण हमको भी पता नहीं।
ये राज़ शायद ही पता चले कभी!

Baqi bohat acche se presentation kari hai aapne har cheez ki even some intimate moments dikhaye magar kahi per bhi unke vurgularity nahi thee aur unko bohat acche se puriya hai aapne shabdo me maza aaya pad ker. Romance story ho to usme sex accha lagta hai but jaisay mai sab story writers ki kehta hoon ki sex uske andar just ek part ki tarah prakashit ho na ki story ka saara saar woh hi reh jaye tab maza nahi aata ek oobao si story ho jaati hai but aapne har words ko badi naal tol se likha hai. Iske liye aap badahayi ke patra hai.

धन्यवाद भाई! :)

Nice update har qadam ko shuru karne me parehani hoti hai phir to insaan chalta hai aur phir dodney lagta hai aur yahi kamal ke sath bhi hua hai.

भारत का विवाह कानून हास्यास्पद है।
18 के होने पर "आदमी" को आदमी मान लिया जाता है - आप वोट कर सकते हैं, ड्राइविंग लाइसेंस ले सकते हैं, अपना खुद का सब कर सकते हैं, सेक्स कर सकते हैं...
लेकिन शादी! न न न! शादी के लिए आप अभी भी "बच्चे" हैं! लड़की 18 में शादी कर सकती है लेकिन लड़का नहीं।
यह बेहद बेवकूफ़ी भरा कानून है। दोनों के लिए समान उम्र होनी चाहिए। या तो 18 या फ़िर 21.
मैंने इसीलिए इस विषय पर जानकारी दी - कमल और माया की शादी ग़ैरकानूनी नहीं है।
और यही बात उसके शिक्षकों को बताई गई है।

Aakhir me do families complete ho gayi aur hopefully inki life me kuch problem nahi hogi. Ab rehta hai to Ajay ka aur ruchi ka aakhir kia banta hai unki life ka.

आशा तो यही है कि कमल - माया और प्रशांत - पैट्रिशिया की ज़िन्दगियों में कोई दिक्कत नहीं आएगी।
अजय ने कम से कम चार लोगों का जीवन सुधार दिया है।
शायद अशोक जी की भी किसी मेडिकल नेग्लिजेंस के कारण मृत्यु न होगी!

Ruchi Ashok ji ki shadi karwa ker hi manege shayad. Ab dekhna hai is me safal hotey hai ki nahi. Aur kia Ajay wapas present me jayega agar gaya to beech ka sara accha time kaisay enjoy karega woh.

रूचि भी अजय से कोई अलग व्यक्तित्व की नहीं है। एक बात ठान लेती है तो कर देती है।
अभी अजय की राह लम्बी है।

Oh My God jaisa mujhay shak ho raha thaa aur kuch review me bola thaa theek waisa hi ho raha hai ki shayad iska sar dard koi badi bimari ka symptoms ho aur shayad yahi hua hai. Aur jaisa Ajay ne socha hai ki sab kuch theek kar ke to wapas lot jana thaa apni timeline shayad isi ki wajah se woh wapas nahi pohoch paya hai woh. Ab dekhtey hai kia hai inke bhagya me.

आपने अब तक के सभी अपडेट्स पढ़ लिए हैं तो आप समझ भी गए होंगे।

Kia Ajay doosri dimensions me to nahi chala gaya jaha per bohat kuch ulta ho jaisay Ragni itni sahi hai aur ab doctor ka inse milna. But jo bhi story bohat mazedar hai maza aa gaya pad ker.

पुनः -- रागिनी अभी पूरी तरह से खराब नहीं हुई है।
कहानी समाप्त होने में अभी बहुत देर है। शायद एक तिहाई या आधी ही हुई है।

साथ बने रहिए -- कुछ न कुछ बढ़िया कहते सुनते रहेंगे :)
 
Top