• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Romance फ़िर से [चित्रमय]

avsji

Weaving Words, Weaving Worlds.
Supreme
4,574
24,994
159
दोस्तों - इस अपडेट सूची को स्टिकी पोस्ट बना रहा हूँ!
लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि केवल पढ़ कर निकल लें। यह केवल आपकी सुविधा के लिए है। चर्चा बंद नहीं होनी चाहिए :)

अपडेट 1; अपडेट 2; अपडेट 3; अपडेट 4; अपडेट 5; अपडेट 6; अपडेट 7; अपडेट 8; अपडेट 9; अपडेट 10; अपडेट 11; अपडेट 12; अपडेट 13; अपडेट 14; अपडेट 15; अपडेट 16; अपडेट 17; अपडेट 18; अपडेट 19; अपडेट 20; अपडेट 21; अपडेट 22; अपडेट 23; अपडेट 24; अपडेट 25; अपडेट 26; अपडेट 27; अपडेट 28; अपडेट 29; अपडेट 30; अपडेट 31; अपडेट 32; अपडेट 33; अपडेट 34; अपडेट 35; अपडेट 36; अपडेट 37; अपडेट 38; अपडेट 39; अपडेट 40; अपडेट 41; अपडेट 42; अपडेट 43; अपडेट 44; अपडेट 45; अपडेट 46; अपडेट 47; अपडेट 48; अपडेट 49; अपडेट 50; अपडेट 51; अपडेट 52; अपडेट 53; अपडेट 54; अपडेट 55; अपडेट 56; अपडेट 57; अपडेट 58; अपडेट 59; अपडेट 60; अपडेट 61; अपडेट 62; अपडेट 63; अपडेट 64; अपडेट 65; अपडेट 66; अपडेट 67; अपडेट 68; अपडेट 69; अपडेट 70; अपडेट 71; अपडेट 72; अपडेट 73; अपडेट 74; अपडेट 75; अपडेट 76; अपडेट 77; अपडेट 78; अपडेट 79; अपडेट 80; अपडेट 81; अपडेट 82; अपडेट 83; अपडेट 84;
 
Last edited:

avsji

Weaving Words, Weaving Worlds.
Supreme
4,574
24,994
159
एरियोला का अनुपात तो perfect लगता है।

हा हा हा हा!
पूरी लड़की ही परफेक्ट है।

This has to be the best kind of orgasm.

यह तो लड़कियाँ ही बता सकती हैं।

🫠


😊


कितनी सयानी लड़की! अभी से सब चीज़ों की परख है।🤗

एकलौती है, लेकिन पापा की परी टाइप नहीं है।
उसमें ज़िम्मेदारी का बोध है। अच्छी है।
 

Ajju Landwalia

Well-Known Member
4,480
17,114
159
अपडेट 82


रूचि का मुस्कुराता हुए चेहरा देख कर अचानक से ही शोभा जी के दिल में कचोट सी हो आई। इस बात की संभावना को सोच कर कि शायद एक दिन ऐसा भी आए जब उनकी बेटी की मुस्कराहट सदा सदा के लिए अनंत में विलीन हो जाए, शोभा जी के हृदय में एक हूक सी उठी। एक माँ के दिल की व्यथा केवल एक माँ ही जान सकती है।

“हे भगवान,” शोभा जी अचानक ही फिर से दुःखी होने लगीं, “इतने छोटे-छोटे बच्चे… और उनको क्या-क्या सहना पड़ रहा है!”

उनकी आवाज़ में उनकी व्यथा और निरीहता साफ़ सुनाई दे रही थी।

“मम्मी, ही इज स्ट्रॉन्गर दैन यू थिंक!” रूचि ने उनको सांत्वना देते हुए कहा, “एंड, आई टू ऍम स्ट्रॉन्गर दैन यू थिंक! वैसे भी, आप सभी बड़े लोगों का आशीर्वाद है न! फिर क्या सहना... क्या डर?”

“फिर भी…” शोभा जी ने कहना शुरू किया, लेकिन फिर उन्होंने अपनी बात बदल दी, और जबरदस्ती मुस्कुराती हुई बोलीं, “हाँ तू ठीक कहती है! तुझे कुछ नहीं होगा। … मैं तो बस इतना चाहती हूँ कि तुम दोनों की शादी हो जाए… तुम दोनों के कई बच्चे हों… और तुम दोनों उन बच्चों के भी बच्चे होते देखो...”

शोभा जी ने अप्रत्यक्ष रूप से रूचि और अजय की लंबी आयु और सुखद जीवन की कामना दिखा दी।

“यस मम्मी,” रूचि ने खींसे निपोरते हुए कहा, “उस बात की तो आप चिंता ही न करिएगा... हम दोनों तो कम से कम तीन-चार बच्चे करने के मूड में हैं,”

“हा हा हा हा! तुम दोनों न… बहुत भोले हो,” रूचि की मासूम और चंचल सी बात पर शोभा जी हँसने लगीं, “ठीक हो जाओ तुम जल्दी से, फिर तुम दोनों की शादी बड़ी धूमधाम से करूँगी… फिर करना अपने तीन चार बच्चे!”

“यस मॉम!” कहते हुए रूचि ने शोभा जी को सैल्यूट किया।



Ruchi-Shobha-2

शोभा जी को दुःख तो अवश्य ही था, लेकिन इन बातों से उस दुःख की पीड़ा अवश्य ही कम हो रही थी। कुछ तो बात थी रूचि की विश्वास भरी बातों में, और रूचि और अजय की शादी की सम्भावना में - जिसने शोभा जी के मन में भविष्य के लिए एक नई उम्मीद जगा दी थी! उनके मन से रूचि के रोग की बात गायब हो रही थी, और वो भविष्य की सुन्दर कल्पना के आकाश में उड़ान भरने लगीं थीं। अपनी कल्पना में शोभा जी एक बड़े से सुसज्जित मैरिज हॉल में थीं - वहाँ एक स्टेज पर रूचि दुल्हन के लाल जोड़े में सजी धजी, किसी राजकुमारी के समान लग रही थी; अजय उसके बगल में मुस्कुराता हुआ, किसी राजकुमार के समान लग रहा था। यह कल्पना उनके लिए घाव पर मरहम की तरह महसूस हो रहा था। अब उनके भी मन में यह ख़याल मज़बूती से आ रहा था कि उनकी बेटी पूरी तरह से स्वस्थ हो जाएगी। ईश्वर उनसे इतनी प्यारी सी बच्ची यूँ ही नहीं छीन सकते।

“मम्मी,” रूचि उनका स्तन पीना छोड़ कर शोभा जी से बोली, “शादी की बात से याद आया... मैं तो माँ से भी कहती रहती हूँ कि वो भी पापा से शादी कर लें!”

“किससे कहती हो?” एक पल को शोभा जी को यकीन ही नहीं हुआ कि उनकी बेटी इतने कम समय में, अपनी होने वाली सास की इतनी मुँह-लगी बन जायेगी, “किरण दीदी से?”

रूचि ने उत्साहपूर्वक ‘हाँ’ में सर हिलाया।

रूचि का प्रस्ताव धृष्टतापूर्ण अवश्य था, लेकिन खराब कत्तई नहीं! शोभा और रवि जी को किरण और अशोक जी से अपनी पहली मुलाक़ात में ही बेहद पसंद आ गए थे। कैसे सीधे और सरल थे दोनों। रूचि से तो दोनों ही बेपनाह मोहब्बत करते थे। उन दोनों की सादगी और एक-दूसरे के लिए सम्मान देख कर नहीं लगता था जैसे वो शादी-शुदा न हों। रूचि की बात उनके मन में बैठ गई - अगर किरण जी और अशोक जी शादी कर लें, तो रूचि और उसके होने वाले बच्चों को एक मजबूत परिवार का सहारा मिलेगा। ये विचार उनके मन को और भी सुकून देने वाला था।

“अरे वाह रूचि... सच में... ये तो बहुत अच्छा थॉट है!” शोभा जी अपने विचारों से बाहर आती हुई बोलीं, “जब भी हम अशोक भैया और किरण दीदी से से मिलते हैं, तो कभी हमारे मन में आता ही नहीं है कि वो दोनों हस्बैंड-वाइफ नहीं हैं! ... उनको सच में दीदी को भाई साहब से शादी कर लेनी चाहिए। दोनों बहुत अच्छे हैं! अच्छे लोगों को साथ में होना चाहिए! गुड आईडिया!”

“है न? बोला था मैंने अज्जू को भी!” रूचि बोली, “कितना मस्त रहेगा न मम्मी! देखिए न - सरिता आंटी तो प्रेग्नेंट हैं ही; आप भी ट्राई कर रही हैं तो आप भी हो ही जायेंगी जल्दी ही… और पापा से शादी के बाद माँ भी! तीनों समधिनें प्रेग्नेंट! हा हा हा हा!”

“हट बेशर्म,” शोभा जी उसकी बात पर शर्मा गईं, लेकिन फिर हँसने लगीं, “हा हा हा! हाँ… हम बूढ़े लोग बेशर्मी से बच्चे करें, और हमारे बच्चे…”

“अरे मम्मी, आप और पापा कोई बूढ़े वूढ़े नहीं हुए हैं! फोर्टी कोई एज होती है बूढ़े होने के लिए?” रूचि ने हँसते हुए कहा, “और वैसे भी, आपके बच्चे लोग भी कोई पीछे नहीं हैं! अब देखिये न - प्रशांत भैया और पैट्रिशिया भाभी, और कमल और माया भैया भाभी भी तो हैं न लाइन में! आपको क्या लगता है, वो अपने बच्चे करने के लिए आपका वेट करेंगे?”

“हा हा हा हा! हाँ, वो भी है,”

शोभा जी भी अब पूरी तरह से सामान्य हो कर रूचि से बतिया रही थीं।

कमाल की बात थी कि रूचि की बातों से शोभा जी उसके कैंसर की बात पूरी तरह भूल गईं, और उनको इस बात का एहसास तक न हुआ।

“तो आप भी उनसे कहिए न?”

“किससे? दीदी से?”

रूचि ने ‘हाँ’ में सर हिलाया।

“हम्म्म... कह तो दूँ! लेकिन बड़ी हैं वो हमसे बेटू!” शोभा जी ने कहा, “ऊपर से हमारी समधन भी हैं! रिश्ते की भी मर्यादा होती है न इन बातों में,”

“अरे आपसे इतनी भी बड़ी नहीं हैं! केवल चार साल ही तो?” रूचि बोली, “और अगर उनको लगता है कि वो आपसे बहुत बड़ी भी हैं, तो क्या? अच्छी बात, सच्ची बात कहने में क्या बड़ा छोटा?”

“ठीक है मेरी माँ,” शोभा जी ने हँसते हुए कहा, “कहूँगी उनसे! अब मेरी जान छोड़!”

“थैंक यू मम्मी!” रूचि उत्साह में आ गई, “आपको पता है मम्मी? माँ भी मुझको अपना दुद्धू पिलाती हैं! ... आई मीन, हर मिल्क!”

यह बात सुन कर शोभा जी का मुँह खुला का खुला रह गया, “व्हाट? सच में?”

“हाँ!” रूचि ने बताया, “आपको याद है न? उन्होंने आपसे कहा था कि, ‘शोभा, तुम्हारी बेटी मेरी बेटी बन कर रहेगी’?”

“हाँ! कहा तो था दीदी ने... लेकिन ये तो...”

“क्या ये तो?”

दो पल उनको कुछ कहते नहीं बना। फिर उन्होंने ईश्वर को मन ही मन धन्यवाद करते हुए कहा,

“कुछ नहीं रूचि! आई एम हैप्पी कि तुझको उनके जैसी प्यार करने वाली माँ मिल रही हैं!” शोभा जी ने कृतज्ञता से कहा, “हम सच में खुशकिस्मत हैं कि तेरे लिए अज्जू जैसा हस्बैंड, और किरण दीदी और अशोक भैया जैसे सास-ससुर मिले हैं!”

रूचि मुस्कुराई और वापस स्तनपान में लीन हो गई।

“लेकिन कमाल है न, कि दीदी को अभी भी दूध आता है?” शोभा जी ने आश्चर्य और उत्सुकतावश पूछा।

रूचि ने ‘हाँ’ में सर हिलाते हुए बताया, “इतना सरप्राइसिंग नहीं है मम्मी… माँ हैड अ बेबी थ्री इयर्स एगो! एक एक्सीडेंट में अज्जू की माँ के साथ साथ माँ के हस्बैंड और उनका बेबी… तीनों ही नहीं रहे!”

“ओह, यह मुझे नहीं पता था,”

“कोई बात नहीं मम्मी… बहुत कम लोगों को मालूम है यह बात! बेबी के जाने के बाद अज्जू और माया भाभी ने उनका दूध पीना जो शुरू किया, तो कभी बंद ही नहीं किया!”

“ओह अच्छा... अब समझी!” शोभा जी ने हँसते हुए कहा, “तो अब तू माया बिटिया को रिप्लेस कर के उनकी बेटी बन गई है!”

“हाँ,” रूचि ने सामान्य लहज़े में कहा और फिर उनको किरण जी के बारे में और बताया, “और एक बात... माँ को ये दूसरा बच्चा हुआ व्हेन शी वास फोर्टी वन! ... और पापा से शादी के बाद एक दो बच्चे तो और हो ही जाएँगे न उनको?” रूचि ने बड़ी उम्मीद से पूछा।

शोभा जी मुस्कुराईं, “क्या पता बच्चे! हो भी सकते हैं अगर भगवान ने चाहा!”

“इसीलिए तो मैं आपसे भी कहती रहती हूँ कि एक और बेबी कर ही लो! कोई लेट वेट नहीं हुआ है!”

“हाँ हाँ... अब तू इतनी चिंता मत कर! बताया न, बस तू ठीक हो जा अब जल्दी से! हम ज़रूर एक और बेबी करेंगे। मैं फिर से प्रेग्नेंट होऊँगी, और नन्हे बेबी के साथ साथ तुझको, तेरे अज्जू को, और तुम दोनों के बच्चों को भी अपना दूध पिलाऊँगी! अब हैप्पी हो?”

शोभा जी की बात सुन कर रूचि की आँखों में एक चमक सी आ गई, “सच में मम्मी?”

उन्होंने ‘हाँ’ में सर हिलाया।

रूचि ने शोभा जी के स्तनों में सिमटते हुए कहा, “मम्मी, आप सबसे बेस्ट हो!”

शोभा जी ने भी उसे अपने सीने में भींच लिया। उस पल में, शोभा जी का डर, चिंता, और अनिश्चितता जैसे पिघल कर कहीं गायब हो गए। उनके मन में बस रूचि के लिए ढेर सारा प्यार और ममता शेष रही थी।

“चल अब,” वो गहरी साँस लेती हुई बोलीं, “जल्दी से कपड़े चेंज कर के आ जा! खाना खाते हैं फ़िर!”

“यस मॉम,” कह कर रूचि झट से उनकी गोद से उठी और उनके सामने ही अपने कपड़े उतारने लगी।

“अरे, ये क्या कर रही है?” रूचि की इस हरकत पर वो हैरान रह गईं।

“कपड़े उतार रही हूँ!”

“मेरे सामने ही,”

“तो क्या हुआ?” रूचि कपड़े उतारती हुई बोली, “आप मेरी माँ हैं! … मेरा तो कितना मन होता है कि मैं आपके और पापा के सामने नंगू हो कर आप दोनों की गोद में खेलूँ! लेकिन क्या करूँ! बड़ी हो गई हूँ न… सच में मम्मी, ये बड़ा होना बिल्कुल भी अच्छा नहीं है!” उसने नाटकीय अंदाज़ में कहा।

रूचि के कहने का अंदाज़ कुछ ऐसा था कि शोभा जी को हँसी आने लगी। कुछ परिवारों में माँ-बेटी या सास-बहू का रिश्ता इतना गहरा और विश्वासपूर्ण होता है कि रिश्तों के बीच शारीरिक सीमाएँ धुंधली पड़ जाती हैं। रूचि और उनका सम्बन्ध वैसा ही था - पहले भी वो रूचि की विश्वासपात्र सहेली और मार्गदर्शक थीं। फिर हाल ही में उसको स्तनपान कराने से उस रिश्ते की गहराई और भी बढ़ गई। उनको लग रहा था कि रूचि का उनके सामने कपड़े बदलना, नहाना या नग्न होना - यह होना ही है। उनको समझ में आ रही थी कि रूचि का यह करना इस बात का प्रतीक था कि उसको उन पर अटूट विश्वास और उनसे बहुत प्यार है। लेकिन शोभा जी के मन में यह बात अवश्य आई कि अगर किरण जी भी रूचि को स्तनपान कराती हैं, तो बहुत संभव है कि रूचि उनको भी अपनी माँ की ही तरह देखती और मानती है।

“अरे, बड़े होने पर तो बचपने से अधिक मज़ेदार चीज़ें होती हैं…” शोभा जी ने हँसते हुए कहा, “शादी होती है, गृहस्थी होती है, बच्चे होते हैं, नौकरी धंधा होता है… अपनी मर्ज़ी से जो चाहे कर सकते हो,”

“हाँ वो भी है! लेकिन बड़े होने पर अपनी मम्मी का दूधू नहीं पी सकते, उनके सामने नंगू पंगू नहीं हो सकते!”

“हा हा हा… अरे बिट्टो मेरी, तेरी जो मर्ज़ी हो, वैसा कर,” वो बोलीं, “तुझ पर किसी का कोई रोक टोक है क्या?”



Ruchi-Shobha-1

“सच में मम्मी?”

“हाँ! बिल्कुल... हमारी तरफ से कोई रोक टोक नहीं होगी तुझे!”

रूचि अपनी शर्ट के बटन खोलते हुए बोली, “थैंक यू सो मच, मम्मी!”

फिर रूचि ने चहकते हुए एक और राज़ उजागर किया, “आपको पता है? मैं माँ के सामने भी नंगू नंगू हो जाती हूँ,”

“व्हाट?”

एक और खुलासा! लेकिन उनको कोई आश्चर्य नहीं हुआ - इसका पूर्वाभास उनको था।

“हाँ मम्मी… जब माँ हमको दूध पिलाती हैं तो हम उनके सामने नंगू रह लेते हैं!”

“वो कुछ नहीं कहतीं?”

“नो!” रूचि ने नखरा दिखाते हुए अपना थूथन बनाया।

“और, अशोक भैया?”

“वो भी कुछ नहीं कहते!”

“अरे! तू उनके सामने भी नंगू नंगू हो जाती है?” शोभा जी को घोर आश्चर्य हुआ।

“नहीं, वैसा नहीं है मम्मी... लेकिन एक बार जब मैं माँ के सामने वैसी थी, तो पापा आ गए थे। उसके बाद एकाध बार ही! बस!”

“फिर क्या हुआ?”

“कुछ नहीं... पहले तो मुझको नंगू देख कर ज़ोर से हँसे, फिर मेरा गाल खींच कर मुझको पप्पी दे कर चले गए,”

“हा हा हा हा! वो भी सोचते होंगे कि कैसी बहू मिल गई है!” शोभा जी ने सर हिलाते हुए कहा, “समझदार बहू के बजाए एक नंगू नंगू, दूध पीती बच्ची मिल गई,”

“हा हा हा हा! ऐसा कुछ नहीं है मम्मी! हाँ ठीक है कि वो सभी मुझको अपनी बच्ची जैसा मानते हैं… और मुझको खूब प्यार भी करते हैं! मैं उनकी गोदी में वैसे ही बैठ जाती हूँ, जैसे पापा की गोदी में!”

“नो वंडर तेरा घर आने का मन नहीं होता!”

“ऐसी कोई बात नहीं है मम्मी! इट इस जस्ट दैट आप ऑफ़िस में होती हैं और माँ घर पर… और वो रोज़ हमारे लिए खाना रखती हैं… इसलिए वहाँ जाना अधिक होता है!” उसने बता कर पूछा, “आपको बुरा लगा?”

“नहीं बच्चे... बुरा क्यों लगेगा? इतने अच्छे रिश्ते तो बड़ी किस्मत से मिलते हैं! आई ऍम सो हैप्पी कि तुम वहाँ अपने घर से भी अधिक फ़्रीली रहती हो, और घर से भी अधिक प्यार पाती हो,”

उतने तक रूचि पूर्ण नग्न हो चुकी थी।

“तो अब से मैं अपने घर में भी फ़्रीली रहा करूँगी,”

“बिटिया रानी,” शोभा जी ने बड़े स्नेह से कहा, “सीधी खड़ी तो हो… तुझे मन भर कर देखूँ!”

रूचि तुरंत से शोभा जी के सामने आ कर सीधी खड़ी हो गई। शोभा जी ने देर तक उसके नग्न शरीर को देखा। उसके एक चूचक के बगल एक गहरा निशान देख कर उनके चेहरे पर चिंता वाले भाव आने लगे।

“ये…”

रूचि ने अपनी माँ के चेहरे के भाव पढ़ कर उनको बताया, “कुछ नहीं है मम्मी! ये बस अज्जू की कारस्तानी है! डोंट वरी!”

शोभा जी मुस्कुराती हुई बोलीं, “खूब सुंदर है मेरी बिटिया... नो वंडर तेरा अज्जू तुझसे दूर नहीं रह पाता!”

“थैंक यू मम्मी,” शर्मसार हो गई रूचि बस इतना ही कर सकी।

“तुम दोनों खूब प्यार करते हो न एक दूसरे को?”

“खूब मम्मी,”

“ईश्वर तुम दोनों को खूब खुश रखें! तुम दोनों का प्यार सफ़ल हो। सच में खूब सुंदर है मेरी बिटिया!” उन्होंने अंत में कहा और रूचि के माथे को चूम लिया, “न जाने किसकी नजर लग गई इसको, और ये नासपीटी बीमारी लग गई!”

“कुछ नहीं होगा मुझको मम्मी,” रूचि ने शोभा जी को दिलासा देते हुए और पूरे विश्वास के साथ कहा।

“आई नो,” शोभा जी ने भी बड़े विश्वास से कहा, “अच्छे लोगों के साथ बुरा नहीं हो सकता! भगवान अच्छे लोगों पर कभी अत्याचार नहीं कर सकते!”

उनकी बात पर रूचि को अजय की असलियत याद आ गई।

सच में, भगवान किसी के साथ अत्याचार नहीं कर सकते। अगर किसी के साथ अनावश्यक रूप से अत्याचार होता है, तो उसका उपचार भी वो ही करते हैं। रूचि को मन में यह दृढ़ विश्वास था कि उसके भाग्य में अजय की पत्नी बनना लिखा है। अजय के साथ वो जब भी होती थी, उसको यही लगता था कि वो उसके साथ लम्बा जीवन बिताएगी और उसके बच्चों की माँ भी बनेगी। अगर वो होना है, तो उसको कुछ भी नहीं हो सकता। संभव ही नहीं है।

“हाँ माँ,” रूचि ने कोमलता से कहा, “आई प्रॉमिस यू... भगवान जी की हमारी फैमिलीज़ पर बहुत दया है! ये तो बस एक छोटा सा टेस्ट है! आराम से पास हो जाएगा। अपना विश्वास टूटने नहीं देंगे हम,”

“ओ मेरी बिटिया रानी! तू सच में बहुत अच्छी है!” शोभा जी ने रूचि की पीठ थपथपाते हुए कहा, “इतना मीठा, सच्चा, और भोला व्यवहार है… हर समय मुस्कुराती रहती है, और सबको खुश रखती है। तू कोई परी है... जो हमारे घर में आई है।”

“मम्मी,” कह कर रूचि शोभा जी से लिपट गई।

शोभा जी ने उसको ऐसे सहेज कर अपने से लिपटा लिया कि जैसे वो कोई भंगुर सी वस्तु हो। इतनी बड़ी बीमारी के बावजूद, वो उनको हिम्मत दे रही थी। शोभा जी ने मन ही मन प्रार्थना की कि उनकी बेटी की ये हिम्मत और खुशी हमेशा बनी रहे।

“ऑपेरशन तक अज्जू के साथ रहने का मन है?” उन्होंने पूछा।

“मन तो है… लेकिन आपके साथ भी तो रहने का मन है!”

शोभा जी ने थोड़ा सोच कर कहा, “मैं अभी दीदी से बात करती हूँ! वो कह भी रही थीं आने को! तुम्हारे पापा आ जाएँ… तो हम सभी रात में ही चले चलते हैं वहाँ,”

“सच में मम्मी?”

“हाँ बच्चे,” उन्होंने कहा, “चल, खाना खा लें? भूख लग रही है।”

“यस मॉम,”

इस अंतरंग पल ने दोनों के बीच के बंधन को और मजबूत कर दिया था, और शोभा जी की आँखों में अब आशा की एक नई चमक थी – न केवल अपनी बेटी की सेहत के लिए, बल्कि उनके परिवार के भविष्य के लिए भी।


***


[दोस्तों आज एक बड़ा अपडेट दिया है, करीब 2800+ शब्दों का! थोड़ा ठहराव है, लेकिन ये तूफ़ान के पहले की शांति है। अपना प्रेम बनाए रखें]

Bahut hi manmohak update he avsji Bhai

Shabdo ke to jaadugar ho aap........ Awesome update

Keep rocking Bro
 
  • Like
Reactions: parkas

Iron Man

Try and fail. But never give up trying
45,717
122,746
304
अपडेट 82


रूचि का मुस्कुराता हुए चेहरा देख कर अचानक से ही शोभा जी के दिल में कचोट सी हो आई। इस बात की संभावना को सोच कर कि शायद एक दिन ऐसा भी आए जब उनकी बेटी की मुस्कराहट सदा सदा के लिए अनंत में विलीन हो जाए, शोभा जी के हृदय में एक हूक सी उठी। एक माँ के दिल की व्यथा केवल एक माँ ही जान सकती है।

“हे भगवान,” शोभा जी अचानक ही फिर से दुःखी होने लगीं, “इतने छोटे-छोटे बच्चे… और उनको क्या-क्या सहना पड़ रहा है!”

उनकी आवाज़ में उनकी व्यथा और निरीहता साफ़ सुनाई दे रही थी।

“मम्मी, ही इज स्ट्रॉन्गर दैन यू थिंक!” रूचि ने उनको सांत्वना देते हुए कहा, “एंड, आई टू ऍम स्ट्रॉन्गर दैन यू थिंक! वैसे भी, आप सभी बड़े लोगों का आशीर्वाद है न! फिर क्या सहना... क्या डर?”

“फिर भी…” शोभा जी ने कहना शुरू किया, लेकिन फिर उन्होंने अपनी बात बदल दी, और जबरदस्ती मुस्कुराती हुई बोलीं, “हाँ तू ठीक कहती है! तुझे कुछ नहीं होगा। … मैं तो बस इतना चाहती हूँ कि तुम दोनों की शादी हो जाए… तुम दोनों के कई बच्चे हों… और तुम दोनों उन बच्चों के भी बच्चे होते देखो...”

शोभा जी ने अप्रत्यक्ष रूप से रूचि और अजय की लंबी आयु और सुखद जीवन की कामना दिखा दी।

“यस मम्मी,” रूचि ने खींसे निपोरते हुए कहा, “उस बात की तो आप चिंता ही न करिएगा... हम दोनों तो कम से कम तीन-चार बच्चे करने के मूड में हैं,”

“हा हा हा हा! तुम दोनों न… बहुत भोले हो,” रूचि की मासूम और चंचल सी बात पर शोभा जी हँसने लगीं, “ठीक हो जाओ तुम जल्दी से, फिर तुम दोनों की शादी बड़ी धूमधाम से करूँगी… फिर करना अपने तीन चार बच्चे!”

“यस मॉम!” कहते हुए रूचि ने शोभा जी को सैल्यूट किया।



Ruchi-Shobha-2

शोभा जी को दुःख तो अवश्य ही था, लेकिन इन बातों से उस दुःख की पीड़ा अवश्य ही कम हो रही थी। कुछ तो बात थी रूचि की विश्वास भरी बातों में, और रूचि और अजय की शादी की सम्भावना में - जिसने शोभा जी के मन में भविष्य के लिए एक नई उम्मीद जगा दी थी! उनके मन से रूचि के रोग की बात गायब हो रही थी, और वो भविष्य की सुन्दर कल्पना के आकाश में उड़ान भरने लगीं थीं। अपनी कल्पना में शोभा जी एक बड़े से सुसज्जित मैरिज हॉल में थीं - वहाँ एक स्टेज पर रूचि दुल्हन के लाल जोड़े में सजी धजी, किसी राजकुमारी के समान लग रही थी; अजय उसके बगल में मुस्कुराता हुआ, किसी राजकुमार के समान लग रहा था। यह कल्पना उनके लिए घाव पर मरहम की तरह महसूस हो रहा था। अब उनके भी मन में यह ख़याल मज़बूती से आ रहा था कि उनकी बेटी पूरी तरह से स्वस्थ हो जाएगी। ईश्वर उनसे इतनी प्यारी सी बच्ची यूँ ही नहीं छीन सकते।

“मम्मी,” रूचि उनका स्तन पीना छोड़ कर शोभा जी से बोली, “शादी की बात से याद आया... मैं तो माँ से भी कहती रहती हूँ कि वो भी पापा से शादी कर लें!”

“किससे कहती हो?” एक पल को शोभा जी को यकीन ही नहीं हुआ कि उनकी बेटी इतने कम समय में, अपनी होने वाली सास की इतनी मुँह-लगी बन जायेगी, “किरण दीदी से?”

रूचि ने उत्साहपूर्वक ‘हाँ’ में सर हिलाया।

रूचि का प्रस्ताव धृष्टतापूर्ण अवश्य था, लेकिन खराब कत्तई नहीं! शोभा और रवि जी को किरण और अशोक जी से अपनी पहली मुलाक़ात में ही बेहद पसंद आ गए थे। कैसे सीधे और सरल थे दोनों। रूचि से तो दोनों ही बेपनाह मोहब्बत करते थे। उन दोनों की सादगी और एक-दूसरे के लिए सम्मान देख कर नहीं लगता था जैसे वो शादी-शुदा न हों। रूचि की बात उनके मन में बैठ गई - अगर किरण जी और अशोक जी शादी कर लें, तो रूचि और उसके होने वाले बच्चों को एक मजबूत परिवार का सहारा मिलेगा। ये विचार उनके मन को और भी सुकून देने वाला था।

“अरे वाह रूचि... सच में... ये तो बहुत अच्छा थॉट है!” शोभा जी अपने विचारों से बाहर आती हुई बोलीं, “जब भी हम अशोक भैया और किरण दीदी से से मिलते हैं, तो कभी हमारे मन में आता ही नहीं है कि वो दोनों हस्बैंड-वाइफ नहीं हैं! ... उनको सच में दीदी को भाई साहब से शादी कर लेनी चाहिए। दोनों बहुत अच्छे हैं! अच्छे लोगों को साथ में होना चाहिए! गुड आईडिया!”

“है न? बोला था मैंने अज्जू को भी!” रूचि बोली, “कितना मस्त रहेगा न मम्मी! देखिए न - सरिता आंटी तो प्रेग्नेंट हैं ही; आप भी ट्राई कर रही हैं तो आप भी हो ही जायेंगी जल्दी ही… और पापा से शादी के बाद माँ भी! तीनों समधिनें प्रेग्नेंट! हा हा हा हा!”

“हट बेशर्म,” शोभा जी उसकी बात पर शर्मा गईं, लेकिन फिर हँसने लगीं, “हा हा हा! हाँ… हम बूढ़े लोग बेशर्मी से बच्चे करें, और हमारे बच्चे…”

“अरे मम्मी, आप और पापा कोई बूढ़े वूढ़े नहीं हुए हैं! फोर्टी कोई एज होती है बूढ़े होने के लिए?” रूचि ने हँसते हुए कहा, “और वैसे भी, आपके बच्चे लोग भी कोई पीछे नहीं हैं! अब देखिये न - प्रशांत भैया और पैट्रिशिया भाभी, और कमल और माया भैया भाभी भी तो हैं न लाइन में! आपको क्या लगता है, वो अपने बच्चे करने के लिए आपका वेट करेंगे?”

“हा हा हा हा! हाँ, वो भी है,”

शोभा जी भी अब पूरी तरह से सामान्य हो कर रूचि से बतिया रही थीं।

कमाल की बात थी कि रूचि की बातों से शोभा जी उसके कैंसर की बात पूरी तरह भूल गईं, और उनको इस बात का एहसास तक न हुआ।

“तो आप भी उनसे कहिए न?”

“किससे? दीदी से?”

रूचि ने ‘हाँ’ में सर हिलाया।

“हम्म्म... कह तो दूँ! लेकिन बड़ी हैं वो हमसे बेटू!” शोभा जी ने कहा, “ऊपर से हमारी समधन भी हैं! रिश्ते की भी मर्यादा होती है न इन बातों में,”

“अरे आपसे इतनी भी बड़ी नहीं हैं! केवल चार साल ही तो?” रूचि बोली, “और अगर उनको लगता है कि वो आपसे बहुत बड़ी भी हैं, तो क्या? अच्छी बात, सच्ची बात कहने में क्या बड़ा छोटा?”

“ठीक है मेरी माँ,” शोभा जी ने हँसते हुए कहा, “कहूँगी उनसे! अब मेरी जान छोड़!”

“थैंक यू मम्मी!” रूचि उत्साह में आ गई, “आपको पता है मम्मी? माँ भी मुझको अपना दुद्धू पिलाती हैं! ... आई मीन, हर मिल्क!”

यह बात सुन कर शोभा जी का मुँह खुला का खुला रह गया, “व्हाट? सच में?”

“हाँ!” रूचि ने बताया, “आपको याद है न? उन्होंने आपसे कहा था कि, ‘शोभा, तुम्हारी बेटी मेरी बेटी बन कर रहेगी’?”

“हाँ! कहा तो था दीदी ने... लेकिन ये तो...”

“क्या ये तो?”

दो पल उनको कुछ कहते नहीं बना। फिर उन्होंने ईश्वर को मन ही मन धन्यवाद करते हुए कहा,

“कुछ नहीं रूचि! आई एम हैप्पी कि तुझको उनके जैसी प्यार करने वाली माँ मिल रही हैं!” शोभा जी ने कृतज्ञता से कहा, “हम सच में खुशकिस्मत हैं कि तेरे लिए अज्जू जैसा हस्बैंड, और किरण दीदी और अशोक भैया जैसे सास-ससुर मिले हैं!”

रूचि मुस्कुराई और वापस स्तनपान में लीन हो गई।

“लेकिन कमाल है न, कि दीदी को अभी भी दूध आता है?” शोभा जी ने आश्चर्य और उत्सुकतावश पूछा।

रूचि ने ‘हाँ’ में सर हिलाते हुए बताया, “इतना सरप्राइसिंग नहीं है मम्मी… माँ हैड अ बेबी थ्री इयर्स एगो! एक एक्सीडेंट में अज्जू की माँ के साथ साथ माँ के हस्बैंड और उनका बेबी… तीनों ही नहीं रहे!”

“ओह, यह मुझे नहीं पता था,”

“कोई बात नहीं मम्मी… बहुत कम लोगों को मालूम है यह बात! बेबी के जाने के बाद अज्जू और माया भाभी ने उनका दूध पीना जो शुरू किया, तो कभी बंद ही नहीं किया!”

“ओह अच्छा... अब समझी!” शोभा जी ने हँसते हुए कहा, “तो अब तू माया बिटिया को रिप्लेस कर के उनकी बेटी बन गई है!”

“हाँ,” रूचि ने सामान्य लहज़े में कहा और फिर उनको किरण जी के बारे में और बताया, “और एक बात... माँ को ये दूसरा बच्चा हुआ व्हेन शी वास फोर्टी वन! ... और पापा से शादी के बाद एक दो बच्चे तो और हो ही जाएँगे न उनको?” रूचि ने बड़ी उम्मीद से पूछा।

शोभा जी मुस्कुराईं, “क्या पता बच्चे! हो भी सकते हैं अगर भगवान ने चाहा!”

“इसीलिए तो मैं आपसे भी कहती रहती हूँ कि एक और बेबी कर ही लो! कोई लेट वेट नहीं हुआ है!”

“हाँ हाँ... अब तू इतनी चिंता मत कर! बताया न, बस तू ठीक हो जा अब जल्दी से! हम ज़रूर एक और बेबी करेंगे। मैं फिर से प्रेग्नेंट होऊँगी, और नन्हे बेबी के साथ साथ तुझको, तेरे अज्जू को, और तुम दोनों के बच्चों को भी अपना दूध पिलाऊँगी! अब हैप्पी हो?”

शोभा जी की बात सुन कर रूचि की आँखों में एक चमक सी आ गई, “सच में मम्मी?”

उन्होंने ‘हाँ’ में सर हिलाया।

रूचि ने शोभा जी के स्तनों में सिमटते हुए कहा, “मम्मी, आप सबसे बेस्ट हो!”

शोभा जी ने भी उसे अपने सीने में भींच लिया। उस पल में, शोभा जी का डर, चिंता, और अनिश्चितता जैसे पिघल कर कहीं गायब हो गए। उनके मन में बस रूचि के लिए ढेर सारा प्यार और ममता शेष रही थी।

“चल अब,” वो गहरी साँस लेती हुई बोलीं, “जल्दी से कपड़े चेंज कर के आ जा! खाना खाते हैं फ़िर!”

“यस मॉम,” कह कर रूचि झट से उनकी गोद से उठी और उनके सामने ही अपने कपड़े उतारने लगी।

“अरे, ये क्या कर रही है?” रूचि की इस हरकत पर वो हैरान रह गईं।

“कपड़े उतार रही हूँ!”

“मेरे सामने ही,”

“तो क्या हुआ?” रूचि कपड़े उतारती हुई बोली, “आप मेरी माँ हैं! … मेरा तो कितना मन होता है कि मैं आपके और पापा के सामने नंगू हो कर आप दोनों की गोद में खेलूँ! लेकिन क्या करूँ! बड़ी हो गई हूँ न… सच में मम्मी, ये बड़ा होना बिल्कुल भी अच्छा नहीं है!” उसने नाटकीय अंदाज़ में कहा।

रूचि के कहने का अंदाज़ कुछ ऐसा था कि शोभा जी को हँसी आने लगी। कुछ परिवारों में माँ-बेटी या सास-बहू का रिश्ता इतना गहरा और विश्वासपूर्ण होता है कि रिश्तों के बीच शारीरिक सीमाएँ धुंधली पड़ जाती हैं। रूचि और उनका सम्बन्ध वैसा ही था - पहले भी वो रूचि की विश्वासपात्र सहेली और मार्गदर्शक थीं। फिर हाल ही में उसको स्तनपान कराने से उस रिश्ते की गहराई और भी बढ़ गई। उनको लग रहा था कि रूचि का उनके सामने कपड़े बदलना, नहाना या नग्न होना - यह होना ही है। उनको समझ में आ रही थी कि रूचि का यह करना इस बात का प्रतीक था कि उसको उन पर अटूट विश्वास और उनसे बहुत प्यार है। लेकिन शोभा जी के मन में यह बात अवश्य आई कि अगर किरण जी भी रूचि को स्तनपान कराती हैं, तो बहुत संभव है कि रूचि उनको भी अपनी माँ की ही तरह देखती और मानती है।

“अरे, बड़े होने पर तो बचपने से अधिक मज़ेदार चीज़ें होती हैं…” शोभा जी ने हँसते हुए कहा, “शादी होती है, गृहस्थी होती है, बच्चे होते हैं, नौकरी धंधा होता है… अपनी मर्ज़ी से जो चाहे कर सकते हो,”

“हाँ वो भी है! लेकिन बड़े होने पर अपनी मम्मी का दूधू नहीं पी सकते, उनके सामने नंगू पंगू नहीं हो सकते!”

“हा हा हा… अरे बिट्टो मेरी, तेरी जो मर्ज़ी हो, वैसा कर,” वो बोलीं, “तुझ पर किसी का कोई रोक टोक है क्या?”



Ruchi-Shobha-1

“सच में मम्मी?”

“हाँ! बिल्कुल... हमारी तरफ से कोई रोक टोक नहीं होगी तुझे!”

रूचि अपनी शर्ट के बटन खोलते हुए बोली, “थैंक यू सो मच, मम्मी!”

फिर रूचि ने चहकते हुए एक और राज़ उजागर किया, “आपको पता है? मैं माँ के सामने भी नंगू नंगू हो जाती हूँ,”

“व्हाट?”

एक और खुलासा! लेकिन उनको कोई आश्चर्य नहीं हुआ - इसका पूर्वाभास उनको था।

“हाँ मम्मी… जब माँ हमको दूध पिलाती हैं तो हम उनके सामने नंगू रह लेते हैं!”

“वो कुछ नहीं कहतीं?”

“नो!” रूचि ने नखरा दिखाते हुए अपना थूथन बनाया।

“और, अशोक भैया?”

“वो भी कुछ नहीं कहते!”

“अरे! तू उनके सामने भी नंगू नंगू हो जाती है?” शोभा जी को घोर आश्चर्य हुआ।

“नहीं, वैसा नहीं है मम्मी... लेकिन एक बार जब मैं माँ के सामने वैसी थी, तो पापा आ गए थे। उसके बाद एकाध बार ही! बस!”

“फिर क्या हुआ?”

“कुछ नहीं... पहले तो मुझको नंगू देख कर ज़ोर से हँसे, फिर मेरा गाल खींच कर मुझको पप्पी दे कर चले गए,”

“हा हा हा हा! वो भी सोचते होंगे कि कैसी बहू मिल गई है!” शोभा जी ने सर हिलाते हुए कहा, “समझदार बहू के बजाए एक नंगू नंगू, दूध पीती बच्ची मिल गई,”

“हा हा हा हा! ऐसा कुछ नहीं है मम्मी! हाँ ठीक है कि वो सभी मुझको अपनी बच्ची जैसा मानते हैं… और मुझको खूब प्यार भी करते हैं! मैं उनकी गोदी में वैसे ही बैठ जाती हूँ, जैसे पापा की गोदी में!”

“नो वंडर तेरा घर आने का मन नहीं होता!”

“ऐसी कोई बात नहीं है मम्मी! इट इस जस्ट दैट आप ऑफ़िस में होती हैं और माँ घर पर… और वो रोज़ हमारे लिए खाना रखती हैं… इसलिए वहाँ जाना अधिक होता है!” उसने बता कर पूछा, “आपको बुरा लगा?”

“नहीं बच्चे... बुरा क्यों लगेगा? इतने अच्छे रिश्ते तो बड़ी किस्मत से मिलते हैं! आई ऍम सो हैप्पी कि तुम वहाँ अपने घर से भी अधिक फ़्रीली रहती हो, और घर से भी अधिक प्यार पाती हो,”

उतने तक रूचि पूर्ण नग्न हो चुकी थी।

“तो अब से मैं अपने घर में भी फ़्रीली रहा करूँगी,”

“बिटिया रानी,” शोभा जी ने बड़े स्नेह से कहा, “सीधी खड़ी तो हो… तुझे मन भर कर देखूँ!”

रूचि तुरंत से शोभा जी के सामने आ कर सीधी खड़ी हो गई। शोभा जी ने देर तक उसके नग्न शरीर को देखा। उसके एक चूचक के बगल एक गहरा निशान देख कर उनके चेहरे पर चिंता वाले भाव आने लगे।

“ये…”

रूचि ने अपनी माँ के चेहरे के भाव पढ़ कर उनको बताया, “कुछ नहीं है मम्मी! ये बस अज्जू की कारस्तानी है! डोंट वरी!”

शोभा जी मुस्कुराती हुई बोलीं, “खूब सुंदर है मेरी बिटिया... नो वंडर तेरा अज्जू तुझसे दूर नहीं रह पाता!”

“थैंक यू मम्मी,” शर्मसार हो गई रूचि बस इतना ही कर सकी।

“तुम दोनों खूब प्यार करते हो न एक दूसरे को?”

“खूब मम्मी,”

“ईश्वर तुम दोनों को खूब खुश रखें! तुम दोनों का प्यार सफ़ल हो। सच में खूब सुंदर है मेरी बिटिया!” उन्होंने अंत में कहा और रूचि के माथे को चूम लिया, “न जाने किसकी नजर लग गई इसको, और ये नासपीटी बीमारी लग गई!”

“कुछ नहीं होगा मुझको मम्मी,” रूचि ने शोभा जी को दिलासा देते हुए और पूरे विश्वास के साथ कहा।

“आई नो,” शोभा जी ने भी बड़े विश्वास से कहा, “अच्छे लोगों के साथ बुरा नहीं हो सकता! भगवान अच्छे लोगों पर कभी अत्याचार नहीं कर सकते!”

उनकी बात पर रूचि को अजय की असलियत याद आ गई।

सच में, भगवान किसी के साथ अत्याचार नहीं कर सकते। अगर किसी के साथ अनावश्यक रूप से अत्याचार होता है, तो उसका उपचार भी वो ही करते हैं। रूचि को मन में यह दृढ़ विश्वास था कि उसके भाग्य में अजय की पत्नी बनना लिखा है। अजय के साथ वो जब भी होती थी, उसको यही लगता था कि वो उसके साथ लम्बा जीवन बिताएगी और उसके बच्चों की माँ भी बनेगी। अगर वो होना है, तो उसको कुछ भी नहीं हो सकता। संभव ही नहीं है।

“हाँ माँ,” रूचि ने कोमलता से कहा, “आई प्रॉमिस यू... भगवान जी की हमारी फैमिलीज़ पर बहुत दया है! ये तो बस एक छोटा सा टेस्ट है! आराम से पास हो जाएगा। अपना विश्वास टूटने नहीं देंगे हम,”

“ओ मेरी बिटिया रानी! तू सच में बहुत अच्छी है!” शोभा जी ने रूचि की पीठ थपथपाते हुए कहा, “इतना मीठा, सच्चा, और भोला व्यवहार है… हर समय मुस्कुराती रहती है, और सबको खुश रखती है। तू कोई परी है... जो हमारे घर में आई है।”

“मम्मी,” कह कर रूचि शोभा जी से लिपट गई।

शोभा जी ने उसको ऐसे सहेज कर अपने से लिपटा लिया कि जैसे वो कोई भंगुर सी वस्तु हो। इतनी बड़ी बीमारी के बावजूद, वो उनको हिम्मत दे रही थी। शोभा जी ने मन ही मन प्रार्थना की कि उनकी बेटी की ये हिम्मत और खुशी हमेशा बनी रहे।

“ऑपेरशन तक अज्जू के साथ रहने का मन है?” उन्होंने पूछा।

“मन तो है… लेकिन आपके साथ भी तो रहने का मन है!”

शोभा जी ने थोड़ा सोच कर कहा, “मैं अभी दीदी से बात करती हूँ! वो कह भी रही थीं आने को! तुम्हारे पापा आ जाएँ… तो हम सभी रात में ही चले चलते हैं वहाँ,”

“सच में मम्मी?”

“हाँ बच्चे,” उन्होंने कहा, “चल, खाना खा लें? भूख लग रही है।”

“यस मॉम,”

इस अंतरंग पल ने दोनों के बीच के बंधन को और मजबूत कर दिया था, और शोभा जी की आँखों में अब आशा की एक नई चमक थी – न केवल अपनी बेटी की सेहत के लिए, बल्कि उनके परिवार के भविष्य के लिए भी।


***


[दोस्तों आज एक बड़ा अपडेट दिया है, करीब 2800+ शब्दों का! थोड़ा ठहराव है, लेकिन ये तूफ़ान के पहले की शांति है। अपना प्रेम बनाए रखें]
Shaandar update
 
Top