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Romance फ़िर से [चित्रमय]

avsji

Weaving Words, Weaving Worlds.
Supreme
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दोस्तों - इस अपडेट सूची को स्टिकी पोस्ट बना रहा हूँ!
लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि केवल पढ़ कर निकल लें। यह केवल आपकी सुविधा के लिए है। चर्चा बंद नहीं होनी चाहिए :)

अपडेट 1; अपडेट 2; अपडेट 3; अपडेट 4; अपडेट 5; अपडेट 6; अपडेट 7; अपडेट 8; अपडेट 9; अपडेट 10; अपडेट 11; अपडेट 12; अपडेट 13; अपडेट 14; अपडेट 15; अपडेट 16; अपडेट 17; अपडेट 18; अपडेट 19; अपडेट 20; अपडेट 21; अपडेट 22; अपडेट 23; अपडेट 24; अपडेट 25; अपडेट 26; अपडेट 27; अपडेट 28; अपडेट 29; अपडेट 30; अपडेट 31; अपडेट 32; अपडेट 33; अपडेट 34; अपडेट 35; अपडेट 36; अपडेट 37; अपडेट 38; अपडेट 39; अपडेट 40; अपडेट 41; अपडेट 42; अपडेट 43; अपडेट 44; अपडेट 45; अपडेट 46; अपडेट 47; अपडेट 48; अपडेट 49; अपडेट 50; अपडेट 51; अपडेट 52; अपडेट 53; अपडेट 54; अपडेट 55; अपडेट 56; अपडेट 57; अपडेट 58; अपडेट 59; अपडेट 60; अपडेट 61; अपडेट 62; अपडेट 63; अपडेट 64; अपडेट 65; अपडेट 66; अपडेट 67; अपडेट 68; अपडेट 69; अपडेट 70; अपडेट 71; अपडेट 72; अपडेट 73; अपडेट 74; अपडेट 75; अपडेट 76; अपडेट 77; अपडेट 78; अपडेट 79; अपडेट 80; अपडेट 81; अपडेट 82; अपडेट 83; अपडेट 84;
 
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avsji

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अपडेट 73


दोनों इस भावनात्मक रूप से भारी पल के महत्त्व को समझ रहे थे। जो कार्य उन्होंने अभी अभी सम्पन्न किया था, उसी कार्य से सृष्टि चलती है। उस पल में दोनों अपने बीच एक आश्चर्यजनक कनेक्शन महसूस हुआ - जो उन दोनों के प्यार से भी अधिक मज़बूत था। लेकिन दोनों ही अब थक गए थे और दोनों की साँसें तेजी से चल रही थीं। कमल माया के ऊपर ही था। उसने माया की साँसों के साथ उसके स्तनों को ऊपर नीचे होते देखा, तो अपना लोभ न रोक सका। उसने माया का एक चूचक अपने मुँह में लिया और चूसने चुभलाने लगा।

उसकी इस हरकत पर माया खिलखिला कर हँस दी।

“क्या हुआ?”

“कुछ नहीं मेरे सैयां जी!” माया ने बड़े लाड़ से कहा, “अच्छा सुनिए... आपने अब हमको पूरी तरह से अपना बना लिया है... अब हमको हमारे नाम से बुलाइए?”

“कैसे करें... आप हमसे बड़ी हैं न,”

“तो क्या? आपकी पत्नी हैं हम... और आप हमारे सब कुछ हैं...” माया ने आग्रहपूर्वक कहा, “इसलिए आपको मेरी यह बात माननी ही होगी,”

“माया... मेरी माया,”

“एक बार और...”

कमल मुस्कुराया, “माया... आई लव यू मेरी जान,”

“थैंक यू जानू!” माया बोली, “आई लव यू टू!”

“आप हमको हमारे नाम से नहीं बुलाएँगी?”

माया ने ‘न’ में सर हिलाया, “कभी नहीं!”

“थॉट सो,”

“अच्छा सुनिए...”

“हम्म?”

“अब से हम एक अच्छी पत्नी की तरह, हर सुबह उठ कर, आपके पैर छू कर आपका आशीर्वाद लेंगे...”

“अरे! लेकिन जानू...”

“अभी हमारी बात ख़तम नहीं हुई... हर सुबह हम आपका आशीर्वाद लेंगे और आप हर सुबह हमारी माँग में सिन्दूर भरेंगे,”

“और ये हमको कब तक करना पड़ेगा?”

“अच्छा जी, अभी अभी हमारी शादी हुई है और आप अभी से तंग आ गए?”

“हा हा हा... कभी नहीं माया... कभी नहीं! आई लव यू!” कमल हँसते हुए बोला, “अभी से कैसे तंग आएँगे भला आप से? अभी तो हमको ढेर सारे बच्चे करने हैं, फिर उनको पालना है, उनकी शादी करनी है, उनके भी बच्चे देखने हैं... यह सब करते करते कम से कम साठ सत्तर साल निकल जायेंगे! फिर उसके बाद देखेंगे...”

“बाप रे!” माया उसकी बात पर हँसने लगी।

“सच में माया... हमको मन में होता है कि हम साथ में एक खूबसूरत घर बनाएँ,” कमल ने कहा, “ऐसा घर, जहाँ हमारे बच्चे हँसी-खुशी खेलें... बड़े हों! उनके भी बच्चे हों!”

“ये घर नहीं है?”

“है!”

“फिर?” माया ने कमल के होंठों को चूमा, “हम तो चाहते हैं कि माँ जी और पिता जी हमेशा हमारे साथ रहें! हमको उनकी खूब सेवा करनी है!”

“हम्म्म... गुड गर्ल!” कमल बोला।

माया ने मुस्कुराते हुए पूछा, “अच्छा... एक बात बताइये... आपको कितने बच्चे चाहिए?”

कमल ने बताया, “दो... तीन? [फिर थोड़ा सोच कर] ओके, दो - एक प्यारी सी बेटी, जो आपकी तरह हो... सुंदर, समझदार, काइंड एंड क्यूट! और एक बेटा, जो थोड़ा शरारती हो, जैसे कि हम।”

माया ने हँसते हुए कहा, “और अगर दो बेटियाँ हों गईं, या दोनों बेटे हो गए तो?”

कमल ने माया के दूसरे स्तन को चूमते हुए कहा, “तो क्या? हमको तो हर हाल में ख़ुशी ही रहेगी, क्योंकि हमारे बच्चे हमारे प्यार की निशानी होंगे।”

कह कर वो उस स्तन के चूचक को चूसने लगा।

“आपको अच्छा लगता है?” माया ने कुछ देर बाद पूछा।

“क्या?” कमल ने पूछा, “बच्चे?”

माया ने ‘हाँ’ में सर हिलाया, “बच्चे भी... लेकिन हमने दूध पीने को ले कर पूछा था!”

“बच्चे तो चाहिए ही न! ... और हाँ... बहुत पसंद है दूध पीना! आई ऍम हैप्पी कि माँ प्रेग्नेंट हैं!” कमल बोला, “वैसे... शायद आपको पता नहीं... माँ को दूध बनने लगा है!”

“व्हाट? सच में?”

“हाँ... आप दस दिन से घर नहीं आई न! इसलिए आपको पता नहीं।”

“वाओ! आई वांटेड टू बी द फर्स्ट...”

“हा हा हा... माँ भी यही कह रही थीं कि पहले वो माया बिटिया को अपना दूध पिलाना चाहती थीं!”

माया मुस्कुराई, “आपको बताना चाहिए था... हम आ जाते,”

“अपने घर आने में क्या सोचना... क्या बुलाना?”

माया कुछ सोच कर मुस्कुराई - इस बार उसकी मुस्कराहट थोड़ी चौड़ी थी।

“क्या सोच रही हैं आप? क्या है आपने मन में?”

“हमारे मन में एक नॉटी थॉट है...”

“बताइये?”

“नेक्स्ट टाइम जब हम माँ जी का दूध पिएंगे न, तो हम नंगू हो कर पिएंगे!”

“व्हाट! पूरी तरह?”

माया ने ‘हाँ’ में सर हिलाया, “हमने माँ जी को बोला था कि जब भी हम उनका ‘दूध’ पहली बार पिएंगे न... तो उनके बेबी जैसा रहना चाहते हैं!”

“उन्होंने क्या कहा?”

“उन्होंने कहा कि, ‘बेबी जैसा का क्या मतलब? तू मेरी बेबी है…’” माया ने हँसते हुए बताया, “‘तो तुझे जैसे कम्फर्टेबल लगे, वैसे ही रह कर मेरा दूध पी,’”

“अरे तो उसमें हँसने वाली क्या बात है?”

“माँ जी हमसे बस तेरह साल ही तो बड़ी हैं न, इसलिए!”

“लेकिन इस बात ने कभी आपको उनका ब्रेस्टफीड करने से नहीं रोका!”

“नहीं!”

“तो फिर? जैसा कि माँ ने कहा - आप उनकी बेबी हैं!”

“ठीक है...!” माया विनोदपूर्वक बोली, “हमने भी कब इंकार किया है इस बात से?”

कमल ने बात बदलते हुए कहा, “अच्छा एक बात बताइए, हम हमारे बच्चों के नाम क्या रखेंगे?”

“हमारे बच्चों के नाम सोचना आपका काम है, या फिर पापा या माँ जी का! आप बच्चों के पापा हैं और माँ पापा हमारे बड़े।”

“बुद्धिमान हो... उम्म्म,” कमल ने सोचते हुए कहा, “अगर बेटी हुई, तो उसका नाम आराध्या रखेंगे... और बेटा हुआ, तो अर्णव?”

माया ने मुस्कुराते हुए कहा, “अरे वाह! कितने सुन्दर नाम हैं! हमको ये नाम बहुत पसंद आए!” फिर थोड़ा ठहर कर, “जानू... दोनों नाम तो ‘अ’ से शुरू हो रहे हैं...”

कमल समझ गया कि माया को भी समझ में आ रहा है, “अगर हम हमारे बेटे का नाम अजय रखेंगे, तो बहुत कंफ्यूशन हो जाएगा न... मामा का नाम भी अजय, भांजे का नाम भी अजय! इसलिए केवल ‘अ’ से नाम रखना हमको बेहतर लगा।”

“हनी... ये तो बहुत अच्छी बात है! आप बाबू को इतना प्यार करते हैं!”

“माया, वो आपका छोटा भाई है और आप उसको अपने बच्चे जैसा चाहती हैं। उस हिसाब से हमारा भी वही रिश्ता बैठा न?” कमल बोला, “वैसे भी हमारी शादी अज्जू के कारण ही पॉसिबल हो पाई है! वो पहल न करता, तो हमारे अंदर इतनी हिम्मत नहीं थी कि हम आपसे अपनी मोहब्बत का इज़हार कर पाते,”

माया ने कमल को अपने सीने में भींचते हुए कहा, “आई लव यू,”

“आई लव यू मोर,”

“जानू... एक बात तो बताइए?”

“हम्म्म?”

“आपको अच्छा तो लगा न?”

“मतलब?”

“मतलब... हमारे साथ सेक्स... आपको अच्छा लगा?”

“द बेस्ट! लाइक हेवन! हम आपको पहले ही बताना चाहते थे, लेकिन समझ में नहीं आया कि कैसे बताएँ!”

माया संतुष्टि से मुस्कुराई।

“आपको कैसा लगा?” कमल ने माया से पूछा, “अनाड़ी हैं, लेकिन हमने कोशिश करी कि आपको अच्छा लगे,”

“बहुत अच्छा लगा जानू... बहुत अच्छा,”

“आपको बहुत पेन हुआ न?”

“जानू... पहली बार सेक्स में शायद हर लड़की को पेन होता ही है! ... हम कुँवारी हैं... थे... [माया के स्पष्टीकरण पर कमल और माया दोनों ही मुस्कुरा दिए] ... और आपके नन्हे बदमाश का साइज बड़ा है,”

“सॉरी,”

“चुप! लकी हैं हम...” माया ने बड़े प्यार से कमल का लिंग अपनी हथेली में कोमलता से पकड़ कर सहलाते हुए कहा, “... कि हमको इतना प्यारा सा नन्हा बदमाश मिला है! वैसे भी, आप जितना अधिक हमसे सेक्स करेंगे, हम इसकी उतनी ही यूज़्ड टू हो जाएँगे...”

“हम्म्म... अब आप फँस गई हैं...”

“फँस गए? कैसे?”

“आपको कभी नहीं छोड़ा जाएगा...” कमल ने शरारत से कहा, “आपके साथ मुझे रोज़ सेक्स करना है!”

“ऐसा फँसना तो हमको बहुत पसंद है,” माया बोली, “लेकिन जानू... आप हमसे प्रॉमिस करिए, कि आप हमेशा सेक्स के बारे में ही नहीं सोचेंगे... अपनी पढ़ाई पर ध्यान देंगे... और हमारे बड़ों ने हमको शादी के टाइम जो सिखाया गया है, उसका पालन करेंगे?”

“यस मैम,”

“गुड ब्यॉय,”

“थक गई हैं?”

“थोड़ा,”

“सो जाएँ कुछ देर?”

माया मुस्कुराई, “आप हमको अपनी बाँहों में भर लीजिए... तभी हमको अच्छी नींद आएगी,”

**
 

dhparikh

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दोनों इस भावनात्मक रूप से भारी पल के महत्त्व को समझ रहे थे। जो कार्य उन्होंने अभी अभी सम्पन्न किया था, उसी कार्य से सृष्टि चलती है। उस पल में दोनों अपने बीच एक आश्चर्यजनक कनेक्शन महसूस हुआ - जो उन दोनों के प्यार से भी अधिक मज़बूत था। लेकिन दोनों ही अब थक गए थे और दोनों की साँसें तेजी से चल रही थीं। कमल माया के ऊपर ही था। उसने माया की साँसों के साथ उसके स्तनों को ऊपर नीचे होते देखा, तो अपना लोभ न रोक सका। उसने माया का एक चूचक अपने मुँह में लिया और चूसने चुभलाने लगा।

उसकी इस हरकत पर माया खिलखिला कर हँस दी।

“क्या हुआ?”

“कुछ नहीं मेरे सैयां जी!” माया ने बड़े लाड़ से कहा, “अच्छा सुनिए... आपने अब हमको पूरी तरह से अपना बना लिया है... अब हमको हमारे नाम से बुलाइए?”

“कैसे करें... आप हमसे बड़ी हैं न,”

“तो क्या? आपकी पत्नी हैं हम... और आप हमारे सब कुछ हैं...” माया ने आग्रहपूर्वक कहा, “इसलिए आपको मेरी यह बात माननी ही होगी,”

“माया... मेरी माया,”

“एक बार और...”

कमल मुस्कुराया, “माया... आई लव यू मेरी जान,”

“थैंक यू जानू!” माया बोली, “आई लव यू टू!”

“आप हमको हमारे नाम से नहीं बुलाएँगी?”

माया ने ‘न’ में सर हिलाया, “कभी नहीं!”

“थॉट सो,”

“अच्छा सुनिए...”

“हम्म?”

“अब से हम एक अच्छी पत्नी की तरह, हर सुबह उठ कर, आपके पैर छू कर आपका आशीर्वाद लेंगे...”

“अरे! लेकिन जानू...”

“अभी हमारी बात ख़तम नहीं हुई... हर सुबह हम आपका आशीर्वाद लेंगे और आप हर सुबह हमारी माँग में सिन्दूर भरेंगे,”

“और ये हमको कब तक करना पड़ेगा?”

“अच्छा जी, अभी अभी हमारी शादी हुई है और आप अभी से तंग आ गए?”

“हा हा हा... कभी नहीं माया... कभी नहीं! आई लव यू!” कमल हँसते हुए बोला, “अभी से कैसे तंग आएँगे भला आप से? अभी तो हमको ढेर सारे बच्चे करने हैं, फिर उनको पालना है, उनकी शादी करनी है, उनके भी बच्चे देखने हैं... यह सब करते करते कम से कम साठ सत्तर साल निकल जायेंगे! फिर उसके बाद देखेंगे...”

“बाप रे!” माया उसकी बात पर हँसने लगी।

“सच में माया... हमको मन में होता है कि हम साथ में एक खूबसूरत घर बनाएँ,” कमल ने कहा, “ऐसा घर, जहाँ हमारे बच्चे हँसी-खुशी खेलें... बड़े हों! उनके भी बच्चे हों!”

“ये घर नहीं है?”

“है!”

“फिर?” माया ने कमल के होंठों को चूमा, “हम तो चाहते हैं कि माँ जी और पिता जी हमेशा हमारे साथ रहें! हमको उनकी खूब सेवा करनी है!”

“हम्म्म... गुड गर्ल!” कमल बोला।

माया ने मुस्कुराते हुए पूछा, “अच्छा... एक बात बताइये... आपको कितने बच्चे चाहिए?”

कमल ने बताया, “दो... तीन? [फिर थोड़ा सोच कर] ओके, दो - एक प्यारी सी बेटी, जो आपकी तरह हो... सुंदर, समझदार, काइंड एंड क्यूट! और एक बेटा, जो थोड़ा शरारती हो, जैसे कि हम।”

माया ने हँसते हुए कहा, “और अगर दो बेटियाँ हों गईं, या दोनों बेटे हो गए तो?”

कमल ने माया के दूसरे स्तन को चूमते हुए कहा, “तो क्या? हमको तो हर हाल में ख़ुशी ही रहेगी, क्योंकि हमारे बच्चे हमारे प्यार की निशानी होंगे।”

कह कर वो उस स्तन के चूचक को चूसने लगा।

“आपको अच्छा लगता है?” माया ने कुछ देर बाद पूछा।

“क्या?” कमल ने पूछा, “बच्चे?”

माया ने ‘हाँ’ में सर हिलाया, “बच्चे भी... लेकिन हमने दूध पीने को ले कर पूछा था!”

“बच्चे तो चाहिए ही न! ... और हाँ... बहुत पसंद है दूध पीना! आई ऍम हैप्पी कि माँ प्रेग्नेंट हैं!” कमल बोला, “वैसे... शायद आपको पता नहीं... माँ को दूध बनने लगा है!”

“व्हाट? सच में?”

“हाँ... आप दस दिन से घर नहीं आई न! इसलिए आपको पता नहीं।”

“वाओ! आई वांटेड टू बी द फर्स्ट...”

“हा हा हा... माँ भी यही कह रही थीं कि पहले वो माया बिटिया को अपना दूध पिलाना चाहती थीं!”

माया मुस्कुराई, “आपको बताना चाहिए था... हम आ जाते,”

“अपने घर आने में क्या सोचना... क्या बुलाना?”

माया कुछ सोच कर मुस्कुराई - इस बार उसकी मुस्कराहट थोड़ी चौड़ी थी।

“क्या सोच रही हैं आप? क्या है आपने मन में?”

“हमारे मन में एक नॉटी थॉट है...”

“बताइये?”

“नेक्स्ट टाइम जब हम माँ जी का दूध पिएंगे न, तो हम नंगू हो कर पिएंगे!”

“व्हाट! पूरी तरह?”

माया ने ‘हाँ’ में सर हिलाया, “हमने माँ जी को बोला था कि जब भी हम उनका ‘दूध’ पहली बार पिएंगे न... तो उनके बेबी जैसा रहना चाहते हैं!”

“उन्होंने क्या कहा?”

“उन्होंने कहा कि, ‘बेबी जैसा का क्या मतलब? तू मेरी बेबी है…’” माया ने हँसते हुए बताया, “‘तो तुझे जैसे कम्फर्टेबल लगे, वैसे ही रह कर मेरा दूध पी,’”

“अरे तो उसमें हँसने वाली क्या बात है?”

“माँ जी हमसे बस तेरह साल ही तो बड़ी हैं न, इसलिए!”

“लेकिन इस बात ने कभी आपको उनका ब्रेस्टफीड करने से नहीं रोका!”

“नहीं!”

“तो फिर? जैसा कि माँ ने कहा - आप उनकी बेबी हैं!”

“ठीक है...!” माया विनोदपूर्वक बोली, “हमने भी कब इंकार किया है इस बात से?”

कमल ने बात बदलते हुए कहा, “अच्छा एक बात बताइए, हम हमारे बच्चों के नाम क्या रखेंगे?”

“हमारे बच्चों के नाम सोचना आपका काम है, या फिर पापा या माँ जी का! आप बच्चों के पापा हैं और माँ पापा हमारे बड़े।”

“बुद्धिमान हो... उम्म्म,” कमल ने सोचते हुए कहा, “अगर बेटी हुई, तो उसका नाम आराध्या रखेंगे... और बेटा हुआ, तो अर्णव?”

माया ने मुस्कुराते हुए कहा, “अरे वाह! कितने सुन्दर नाम हैं! हमको ये नाम बहुत पसंद आए!” फिर थोड़ा ठहर कर, “जानू... दोनों नाम तो ‘अ’ से शुरू हो रहे हैं...”

कमल समझ गया कि माया को भी समझ में आ रहा है, “अगर हम हमारे बेटे का नाम अजय रखेंगे, तो बहुत कंफ्यूशन हो जाएगा न... मामा का नाम भी अजय, भांजे का नाम भी अजय! इसलिए केवल ‘अ’ से नाम रखना हमको बेहतर लगा।”

“हनी... ये तो बहुत अच्छी बात है! आप बाबू को इतना प्यार करते हैं!”

“माया, वो आपका छोटा भाई है और आप उसको अपने बच्चे जैसा चाहती हैं। उस हिसाब से हमारा भी वही रिश्ता बैठा न?” कमल बोला, “वैसे भी हमारी शादी अज्जू के कारण ही पॉसिबल हो पाई है! वो पहल न करता, तो हमारे अंदर इतनी हिम्मत नहीं थी कि हम आपसे अपनी मोहब्बत का इज़हार कर पाते,”

माया ने कमल को अपने सीने में भींचते हुए कहा, “आई लव यू,”

“आई लव यू मोर,”

“जानू... एक बात तो बताइए?”

“हम्म्म?”

“आपको अच्छा तो लगा न?”

“मतलब?”

“मतलब... हमारे साथ सेक्स... आपको अच्छा लगा?”

“द बेस्ट! लाइक हेवन! हम आपको पहले ही बताना चाहते थे, लेकिन समझ में नहीं आया कि कैसे बताएँ!”

माया संतुष्टि से मुस्कुराई।

“आपको कैसा लगा?” कमल ने माया से पूछा, “अनाड़ी हैं, लेकिन हमने कोशिश करी कि आपको अच्छा लगे,”

“बहुत अच्छा लगा जानू... बहुत अच्छा,”

“आपको बहुत पेन हुआ न?”

“जानू... पहली बार सेक्स में शायद हर लड़की को पेन होता ही है! ... हम कुँवारी हैं... थे... [माया के स्पष्टीकरण पर कमल और माया दोनों ही मुस्कुरा दिए] ... और आपके नन्हे बदमाश का साइज बड़ा है,”

“सॉरी,”

“चुप! लकी हैं हम...” माया ने बड़े प्यार से कमल का लिंग अपनी हथेली में कोमलता से पकड़ कर सहलाते हुए कहा, “... कि हमको इतना प्यारा सा नन्हा बदमाश मिला है! वैसे भी, आप जितना अधिक हमसे सेक्स करेंगे, हम इसकी उतनी ही यूज़्ड टू हो जाएँगे...”

“हम्म्म... अब आप फँस गई हैं...”

“फँस गए? कैसे?”

“आपको कभी नहीं छोड़ा जाएगा...” कमल ने शरारत से कहा, “आपके साथ मुझे रोज़ सेक्स करना है!”

“ऐसा फँसना तो हमको बहुत पसंद है,” माया बोली, “लेकिन जानू... आप हमसे प्रॉमिस करिए, कि आप हमेशा सेक्स के बारे में ही नहीं सोचेंगे... अपनी पढ़ाई पर ध्यान देंगे... और हमारे बड़ों ने हमको शादी के टाइम जो सिखाया गया है, उसका पालन करेंगे?”

“यस मैम,”

“गुड ब्यॉय,”

“थक गई हैं?”

“थोड़ा,”

“सो जाएँ कुछ देर?”

माया मुस्कुराई, “आप हमको अपनी बाँहों में भर लीजिए... तभी हमको अच्छी नींद आएगी,”

**
Nice update....
 

SHOTO

I am what I am
113
284
64
Great updates avsji bhai. The whole wedding ceremony was beautiful and conversation between maya and ajay was quite emotional. She was so grateful for the life she got. Couple's wedding night was beautiful and erotic.

I really want to drop my thoughts on each update but due to my lifestyle it's impossible to be regular here. I hope you also write stories on the those platform which are widely accessible. You are great writer and deserves much wider audience.

And also keep entertaning here with your writing.

Cheers:
 
  • Love
Reactions: avsji

avsji

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Great updates avsji bhai. The whole wedding ceremony was beautiful and conversation between maya and ajay was quite emotional. She was so grateful for the life she got.

Thank you so much, SHOTO bhai!
I wrote that part thinking about, if there is just one purpose that a person can fulfil in his/her life, what would it be?
Ajay felt that making Maya's life better would be that one purpose. It was completely selfless.
Must be noted that so far Ajay has not done anything that can be called a misuse of his living his youth again.

Couple's wedding night was beautiful and erotic.

That's the hallmark! 😂
I have this itch to show the 'first copulation' between a loving couple.

I really want to drop my thoughts on each update but due to my lifestyle it's impossible to be regular here.

Don't worry about it. At least your remember to visit!
Good enough.

I hope you also write stories on the those platform which are widely accessible. You are great writer and deserves much wider audience.

Who reads Devanagari stories/novels these days?
Or rather, who CAN read things written in Devanagari? Most Indians are wretched lot... they can't read, write, speak properly in either Hindi or English.
BUT having said that, which platforms?

And also keep entertaning here with your writing.

Cheers:

Sure! This is the only platform that I know of, that can accept what I write.
Crazy!

Thank you for being the regular reader of my stories. Please keep visiting. ♥️
 

kas1709

Well-Known Member
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अपडेट 73


दोनों इस भावनात्मक रूप से भारी पल के महत्त्व को समझ रहे थे। जो कार्य उन्होंने अभी अभी सम्पन्न किया था, उसी कार्य से सृष्टि चलती है। उस पल में दोनों अपने बीच एक आश्चर्यजनक कनेक्शन महसूस हुआ - जो उन दोनों के प्यार से भी अधिक मज़बूत था। लेकिन दोनों ही अब थक गए थे और दोनों की साँसें तेजी से चल रही थीं। कमल माया के ऊपर ही था। उसने माया की साँसों के साथ उसके स्तनों को ऊपर नीचे होते देखा, तो अपना लोभ न रोक सका। उसने माया का एक चूचक अपने मुँह में लिया और चूसने चुभलाने लगा।

उसकी इस हरकत पर माया खिलखिला कर हँस दी।

“क्या हुआ?”

“कुछ नहीं मेरे सैयां जी!” माया ने बड़े लाड़ से कहा, “अच्छा सुनिए... आपने अब हमको पूरी तरह से अपना बना लिया है... अब हमको हमारे नाम से बुलाइए?”

“कैसे करें... आप हमसे बड़ी हैं न,”

“तो क्या? आपकी पत्नी हैं हम... और आप हमारे सब कुछ हैं...” माया ने आग्रहपूर्वक कहा, “इसलिए आपको मेरी यह बात माननी ही होगी,”

“माया... मेरी माया,”

“एक बार और...”

कमल मुस्कुराया, “माया... आई लव यू मेरी जान,”

“थैंक यू जानू!” माया बोली, “आई लव यू टू!”

“आप हमको हमारे नाम से नहीं बुलाएँगी?”

माया ने ‘न’ में सर हिलाया, “कभी नहीं!”

“थॉट सो,”

“अच्छा सुनिए...”

“हम्म?”

“अब से हम एक अच्छी पत्नी की तरह, हर सुबह उठ कर, आपके पैर छू कर आपका आशीर्वाद लेंगे...”

“अरे! लेकिन जानू...”

“अभी हमारी बात ख़तम नहीं हुई... हर सुबह हम आपका आशीर्वाद लेंगे और आप हर सुबह हमारी माँग में सिन्दूर भरेंगे,”

“और ये हमको कब तक करना पड़ेगा?”

“अच्छा जी, अभी अभी हमारी शादी हुई है और आप अभी से तंग आ गए?”

“हा हा हा... कभी नहीं माया... कभी नहीं! आई लव यू!” कमल हँसते हुए बोला, “अभी से कैसे तंग आएँगे भला आप से? अभी तो हमको ढेर सारे बच्चे करने हैं, फिर उनको पालना है, उनकी शादी करनी है, उनके भी बच्चे देखने हैं... यह सब करते करते कम से कम साठ सत्तर साल निकल जायेंगे! फिर उसके बाद देखेंगे...”

“बाप रे!” माया उसकी बात पर हँसने लगी।

“सच में माया... हमको मन में होता है कि हम साथ में एक खूबसूरत घर बनाएँ,” कमल ने कहा, “ऐसा घर, जहाँ हमारे बच्चे हँसी-खुशी खेलें... बड़े हों! उनके भी बच्चे हों!”

“ये घर नहीं है?”

“है!”

“फिर?” माया ने कमल के होंठों को चूमा, “हम तो चाहते हैं कि माँ जी और पिता जी हमेशा हमारे साथ रहें! हमको उनकी खूब सेवा करनी है!”

“हम्म्म... गुड गर्ल!” कमल बोला।

माया ने मुस्कुराते हुए पूछा, “अच्छा... एक बात बताइये... आपको कितने बच्चे चाहिए?”

कमल ने बताया, “दो... तीन? [फिर थोड़ा सोच कर] ओके, दो - एक प्यारी सी बेटी, जो आपकी तरह हो... सुंदर, समझदार, काइंड एंड क्यूट! और एक बेटा, जो थोड़ा शरारती हो, जैसे कि हम।”

माया ने हँसते हुए कहा, “और अगर दो बेटियाँ हों गईं, या दोनों बेटे हो गए तो?”

कमल ने माया के दूसरे स्तन को चूमते हुए कहा, “तो क्या? हमको तो हर हाल में ख़ुशी ही रहेगी, क्योंकि हमारे बच्चे हमारे प्यार की निशानी होंगे।”

कह कर वो उस स्तन के चूचक को चूसने लगा।

“आपको अच्छा लगता है?” माया ने कुछ देर बाद पूछा।

“क्या?” कमल ने पूछा, “बच्चे?”

माया ने ‘हाँ’ में सर हिलाया, “बच्चे भी... लेकिन हमने दूध पीने को ले कर पूछा था!”

“बच्चे तो चाहिए ही न! ... और हाँ... बहुत पसंद है दूध पीना! आई ऍम हैप्पी कि माँ प्रेग्नेंट हैं!” कमल बोला, “वैसे... शायद आपको पता नहीं... माँ को दूध बनने लगा है!”

“व्हाट? सच में?”

“हाँ... आप दस दिन से घर नहीं आई न! इसलिए आपको पता नहीं।”

“वाओ! आई वांटेड टू बी द फर्स्ट...”

“हा हा हा... माँ भी यही कह रही थीं कि पहले वो माया बिटिया को अपना दूध पिलाना चाहती थीं!”

माया मुस्कुराई, “आपको बताना चाहिए था... हम आ जाते,”

“अपने घर आने में क्या सोचना... क्या बुलाना?”

माया कुछ सोच कर मुस्कुराई - इस बार उसकी मुस्कराहट थोड़ी चौड़ी थी।

“क्या सोच रही हैं आप? क्या है आपने मन में?”

“हमारे मन में एक नॉटी थॉट है...”

“बताइये?”

“नेक्स्ट टाइम जब हम माँ जी का दूध पिएंगे न, तो हम नंगू हो कर पिएंगे!”

“व्हाट! पूरी तरह?”

माया ने ‘हाँ’ में सर हिलाया, “हमने माँ जी को बोला था कि जब भी हम उनका ‘दूध’ पहली बार पिएंगे न... तो उनके बेबी जैसा रहना चाहते हैं!”

“उन्होंने क्या कहा?”

“उन्होंने कहा कि, ‘बेबी जैसा का क्या मतलब? तू मेरी बेबी है…’” माया ने हँसते हुए बताया, “‘तो तुझे जैसे कम्फर्टेबल लगे, वैसे ही रह कर मेरा दूध पी,’”

“अरे तो उसमें हँसने वाली क्या बात है?”

“माँ जी हमसे बस तेरह साल ही तो बड़ी हैं न, इसलिए!”

“लेकिन इस बात ने कभी आपको उनका ब्रेस्टफीड करने से नहीं रोका!”

“नहीं!”

“तो फिर? जैसा कि माँ ने कहा - आप उनकी बेबी हैं!”

“ठीक है...!” माया विनोदपूर्वक बोली, “हमने भी कब इंकार किया है इस बात से?”

कमल ने बात बदलते हुए कहा, “अच्छा एक बात बताइए, हम हमारे बच्चों के नाम क्या रखेंगे?”

“हमारे बच्चों के नाम सोचना आपका काम है, या फिर पापा या माँ जी का! आप बच्चों के पापा हैं और माँ पापा हमारे बड़े।”

“बुद्धिमान हो... उम्म्म,” कमल ने सोचते हुए कहा, “अगर बेटी हुई, तो उसका नाम आराध्या रखेंगे... और बेटा हुआ, तो अर्णव?”

माया ने मुस्कुराते हुए कहा, “अरे वाह! कितने सुन्दर नाम हैं! हमको ये नाम बहुत पसंद आए!” फिर थोड़ा ठहर कर, “जानू... दोनों नाम तो ‘अ’ से शुरू हो रहे हैं...”

कमल समझ गया कि माया को भी समझ में आ रहा है, “अगर हम हमारे बेटे का नाम अजय रखेंगे, तो बहुत कंफ्यूशन हो जाएगा न... मामा का नाम भी अजय, भांजे का नाम भी अजय! इसलिए केवल ‘अ’ से नाम रखना हमको बेहतर लगा।”

“हनी... ये तो बहुत अच्छी बात है! आप बाबू को इतना प्यार करते हैं!”

“माया, वो आपका छोटा भाई है और आप उसको अपने बच्चे जैसा चाहती हैं। उस हिसाब से हमारा भी वही रिश्ता बैठा न?” कमल बोला, “वैसे भी हमारी शादी अज्जू के कारण ही पॉसिबल हो पाई है! वो पहल न करता, तो हमारे अंदर इतनी हिम्मत नहीं थी कि हम आपसे अपनी मोहब्बत का इज़हार कर पाते,”

माया ने कमल को अपने सीने में भींचते हुए कहा, “आई लव यू,”

“आई लव यू मोर,”

“जानू... एक बात तो बताइए?”

“हम्म्म?”

“आपको अच्छा तो लगा न?”

“मतलब?”

“मतलब... हमारे साथ सेक्स... आपको अच्छा लगा?”

“द बेस्ट! लाइक हेवन! हम आपको पहले ही बताना चाहते थे, लेकिन समझ में नहीं आया कि कैसे बताएँ!”

माया संतुष्टि से मुस्कुराई।

“आपको कैसा लगा?” कमल ने माया से पूछा, “अनाड़ी हैं, लेकिन हमने कोशिश करी कि आपको अच्छा लगे,”

“बहुत अच्छा लगा जानू... बहुत अच्छा,”

“आपको बहुत पेन हुआ न?”

“जानू... पहली बार सेक्स में शायद हर लड़की को पेन होता ही है! ... हम कुँवारी हैं... थे... [माया के स्पष्टीकरण पर कमल और माया दोनों ही मुस्कुरा दिए] ... और आपके नन्हे बदमाश का साइज बड़ा है,”

“सॉरी,”

“चुप! लकी हैं हम...” माया ने बड़े प्यार से कमल का लिंग अपनी हथेली में कोमलता से पकड़ कर सहलाते हुए कहा, “... कि हमको इतना प्यारा सा नन्हा बदमाश मिला है! वैसे भी, आप जितना अधिक हमसे सेक्स करेंगे, हम इसकी उतनी ही यूज़्ड टू हो जाएँगे...”

“हम्म्म... अब आप फँस गई हैं...”

“फँस गए? कैसे?”

“आपको कभी नहीं छोड़ा जाएगा...” कमल ने शरारत से कहा, “आपके साथ मुझे रोज़ सेक्स करना है!”

“ऐसा फँसना तो हमको बहुत पसंद है,” माया बोली, “लेकिन जानू... आप हमसे प्रॉमिस करिए, कि आप हमेशा सेक्स के बारे में ही नहीं सोचेंगे... अपनी पढ़ाई पर ध्यान देंगे... और हमारे बड़ों ने हमको शादी के टाइम जो सिखाया गया है, उसका पालन करेंगे?”

“यस मैम,”

“गुड ब्यॉय,”

“थक गई हैं?”

“थोड़ा,”

“सो जाएँ कुछ देर?”

माया मुस्कुराई, “आप हमको अपनी बाँहों में भर लीजिए... तभी हमको अच्छी नींद आएगी,”

**
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दोनों इस भावनात्मक रूप से भारी पल के महत्त्व को समझ रहे थे। जो कार्य उन्होंने अभी अभी सम्पन्न किया था, उसी कार्य से सृष्टि चलती है। उस पल में दोनों अपने बीच एक आश्चर्यजनक कनेक्शन महसूस हुआ - जो उन दोनों के प्यार से भी अधिक मज़बूत था। लेकिन दोनों ही अब थक गए थे और दोनों की साँसें तेजी से चल रही थीं। कमल माया के ऊपर ही था। उसने माया की साँसों के साथ उसके स्तनों को ऊपर नीचे होते देखा, तो अपना लोभ न रोक सका। उसने माया का एक चूचक अपने मुँह में लिया और चूसने चुभलाने लगा।

उसकी इस हरकत पर माया खिलखिला कर हँस दी।

“क्या हुआ?”

“कुछ नहीं मेरे सैयां जी!” माया ने बड़े लाड़ से कहा, “अच्छा सुनिए... आपने अब हमको पूरी तरह से अपना बना लिया है... अब हमको हमारे नाम से बुलाइए?”

“कैसे करें... आप हमसे बड़ी हैं न,”

“तो क्या? आपकी पत्नी हैं हम... और आप हमारे सब कुछ हैं...” माया ने आग्रहपूर्वक कहा, “इसलिए आपको मेरी यह बात माननी ही होगी,”

“माया... मेरी माया,”

“एक बार और...”

कमल मुस्कुराया, “माया... आई लव यू मेरी जान,”

“थैंक यू जानू!” माया बोली, “आई लव यू टू!”

“आप हमको हमारे नाम से नहीं बुलाएँगी?”

माया ने ‘न’ में सर हिलाया, “कभी नहीं!”

“थॉट सो,”

“अच्छा सुनिए...”

“हम्म?”

“अब से हम एक अच्छी पत्नी की तरह, हर सुबह उठ कर, आपके पैर छू कर आपका आशीर्वाद लेंगे...”

“अरे! लेकिन जानू...”

“अभी हमारी बात ख़तम नहीं हुई... हर सुबह हम आपका आशीर्वाद लेंगे और आप हर सुबह हमारी माँग में सिन्दूर भरेंगे,”

“और ये हमको कब तक करना पड़ेगा?”

“अच्छा जी, अभी अभी हमारी शादी हुई है और आप अभी से तंग आ गए?”

“हा हा हा... कभी नहीं माया... कभी नहीं! आई लव यू!” कमल हँसते हुए बोला, “अभी से कैसे तंग आएँगे भला आप से? अभी तो हमको ढेर सारे बच्चे करने हैं, फिर उनको पालना है, उनकी शादी करनी है, उनके भी बच्चे देखने हैं... यह सब करते करते कम से कम साठ सत्तर साल निकल जायेंगे! फिर उसके बाद देखेंगे...”

“बाप रे!” माया उसकी बात पर हँसने लगी।

“सच में माया... हमको मन में होता है कि हम साथ में एक खूबसूरत घर बनाएँ,” कमल ने कहा, “ऐसा घर, जहाँ हमारे बच्चे हँसी-खुशी खेलें... बड़े हों! उनके भी बच्चे हों!”

“ये घर नहीं है?”

“है!”

“फिर?” माया ने कमल के होंठों को चूमा, “हम तो चाहते हैं कि माँ जी और पिता जी हमेशा हमारे साथ रहें! हमको उनकी खूब सेवा करनी है!”

“हम्म्म... गुड गर्ल!” कमल बोला।

माया ने मुस्कुराते हुए पूछा, “अच्छा... एक बात बताइये... आपको कितने बच्चे चाहिए?”

कमल ने बताया, “दो... तीन? [फिर थोड़ा सोच कर] ओके, दो - एक प्यारी सी बेटी, जो आपकी तरह हो... सुंदर, समझदार, काइंड एंड क्यूट! और एक बेटा, जो थोड़ा शरारती हो, जैसे कि हम।”

माया ने हँसते हुए कहा, “और अगर दो बेटियाँ हों गईं, या दोनों बेटे हो गए तो?”

कमल ने माया के दूसरे स्तन को चूमते हुए कहा, “तो क्या? हमको तो हर हाल में ख़ुशी ही रहेगी, क्योंकि हमारे बच्चे हमारे प्यार की निशानी होंगे।”

कह कर वो उस स्तन के चूचक को चूसने लगा।

“आपको अच्छा लगता है?” माया ने कुछ देर बाद पूछा।

“क्या?” कमल ने पूछा, “बच्चे?”

माया ने ‘हाँ’ में सर हिलाया, “बच्चे भी... लेकिन हमने दूध पीने को ले कर पूछा था!”

“बच्चे तो चाहिए ही न! ... और हाँ... बहुत पसंद है दूध पीना! आई ऍम हैप्पी कि माँ प्रेग्नेंट हैं!” कमल बोला, “वैसे... शायद आपको पता नहीं... माँ को दूध बनने लगा है!”

“व्हाट? सच में?”

“हाँ... आप दस दिन से घर नहीं आई न! इसलिए आपको पता नहीं।”

“वाओ! आई वांटेड टू बी द फर्स्ट...”

“हा हा हा... माँ भी यही कह रही थीं कि पहले वो माया बिटिया को अपना दूध पिलाना चाहती थीं!”

माया मुस्कुराई, “आपको बताना चाहिए था... हम आ जाते,”

“अपने घर आने में क्या सोचना... क्या बुलाना?”

माया कुछ सोच कर मुस्कुराई - इस बार उसकी मुस्कराहट थोड़ी चौड़ी थी।

“क्या सोच रही हैं आप? क्या है आपने मन में?”

“हमारे मन में एक नॉटी थॉट है...”

“बताइये?”

“नेक्स्ट टाइम जब हम माँ जी का दूध पिएंगे न, तो हम नंगू हो कर पिएंगे!”

“व्हाट! पूरी तरह?”

माया ने ‘हाँ’ में सर हिलाया, “हमने माँ जी को बोला था कि जब भी हम उनका ‘दूध’ पहली बार पिएंगे न... तो उनके बेबी जैसा रहना चाहते हैं!”

“उन्होंने क्या कहा?”

“उन्होंने कहा कि, ‘बेबी जैसा का क्या मतलब? तू मेरी बेबी है…’” माया ने हँसते हुए बताया, “‘तो तुझे जैसे कम्फर्टेबल लगे, वैसे ही रह कर मेरा दूध पी,’”

“अरे तो उसमें हँसने वाली क्या बात है?”

“माँ जी हमसे बस तेरह साल ही तो बड़ी हैं न, इसलिए!”

“लेकिन इस बात ने कभी आपको उनका ब्रेस्टफीड करने से नहीं रोका!”

“नहीं!”

“तो फिर? जैसा कि माँ ने कहा - आप उनकी बेबी हैं!”

“ठीक है...!” माया विनोदपूर्वक बोली, “हमने भी कब इंकार किया है इस बात से?”

कमल ने बात बदलते हुए कहा, “अच्छा एक बात बताइए, हम हमारे बच्चों के नाम क्या रखेंगे?”

“हमारे बच्चों के नाम सोचना आपका काम है, या फिर पापा या माँ जी का! आप बच्चों के पापा हैं और माँ पापा हमारे बड़े।”

“बुद्धिमान हो... उम्म्म,” कमल ने सोचते हुए कहा, “अगर बेटी हुई, तो उसका नाम आराध्या रखेंगे... और बेटा हुआ, तो अर्णव?”

माया ने मुस्कुराते हुए कहा, “अरे वाह! कितने सुन्दर नाम हैं! हमको ये नाम बहुत पसंद आए!” फिर थोड़ा ठहर कर, “जानू... दोनों नाम तो ‘अ’ से शुरू हो रहे हैं...”

कमल समझ गया कि माया को भी समझ में आ रहा है, “अगर हम हमारे बेटे का नाम अजय रखेंगे, तो बहुत कंफ्यूशन हो जाएगा न... मामा का नाम भी अजय, भांजे का नाम भी अजय! इसलिए केवल ‘अ’ से नाम रखना हमको बेहतर लगा।”

“हनी... ये तो बहुत अच्छी बात है! आप बाबू को इतना प्यार करते हैं!”

“माया, वो आपका छोटा भाई है और आप उसको अपने बच्चे जैसा चाहती हैं। उस हिसाब से हमारा भी वही रिश्ता बैठा न?” कमल बोला, “वैसे भी हमारी शादी अज्जू के कारण ही पॉसिबल हो पाई है! वो पहल न करता, तो हमारे अंदर इतनी हिम्मत नहीं थी कि हम आपसे अपनी मोहब्बत का इज़हार कर पाते,”

माया ने कमल को अपने सीने में भींचते हुए कहा, “आई लव यू,”

“आई लव यू मोर,”

“जानू... एक बात तो बताइए?”

“हम्म्म?”

“आपको अच्छा तो लगा न?”

“मतलब?”

“मतलब... हमारे साथ सेक्स... आपको अच्छा लगा?”

“द बेस्ट! लाइक हेवन! हम आपको पहले ही बताना चाहते थे, लेकिन समझ में नहीं आया कि कैसे बताएँ!”

माया संतुष्टि से मुस्कुराई।

“आपको कैसा लगा?” कमल ने माया से पूछा, “अनाड़ी हैं, लेकिन हमने कोशिश करी कि आपको अच्छा लगे,”

“बहुत अच्छा लगा जानू... बहुत अच्छा,”

“आपको बहुत पेन हुआ न?”

“जानू... पहली बार सेक्स में शायद हर लड़की को पेन होता ही है! ... हम कुँवारी हैं... थे... [माया के स्पष्टीकरण पर कमल और माया दोनों ही मुस्कुरा दिए] ... और आपके नन्हे बदमाश का साइज बड़ा है,”

“सॉरी,”

“चुप! लकी हैं हम...” माया ने बड़े प्यार से कमल का लिंग अपनी हथेली में कोमलता से पकड़ कर सहलाते हुए कहा, “... कि हमको इतना प्यारा सा नन्हा बदमाश मिला है! वैसे भी, आप जितना अधिक हमसे सेक्स करेंगे, हम इसकी उतनी ही यूज़्ड टू हो जाएँगे...”

“हम्म्म... अब आप फँस गई हैं...”

“फँस गए? कैसे?”

“आपको कभी नहीं छोड़ा जाएगा...” कमल ने शरारत से कहा, “आपके साथ मुझे रोज़ सेक्स करना है!”

“ऐसा फँसना तो हमको बहुत पसंद है,” माया बोली, “लेकिन जानू... आप हमसे प्रॉमिस करिए, कि आप हमेशा सेक्स के बारे में ही नहीं सोचेंगे... अपनी पढ़ाई पर ध्यान देंगे... और हमारे बड़ों ने हमको शादी के टाइम जो सिखाया गया है, उसका पालन करेंगे?”

“यस मैम,”

“गुड ब्यॉय,”

“थक गई हैं?”

“थोड़ा,”

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माया मुस्कुराई, “आप हमको अपनी बाँहों में भर लीजिए... तभी हमको अच्छी नींद आएगी,”

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प्रशांत और पैट्रिशिया की शादी की गहमागहमी माया की शादी की ही तरह सुबह सुबह ही होने लगी थी।

लिंडा और पीटर जी को भारतीय परंपरा से होने वाली शादियों के बारे में कोई ज्ञान नहीं था। इसलिए प्रशांत ने उनको ‘हम आपके हैं कौन’ फिल्म भी दिखाई थी कि उनको थोड़ा आईडिया हो जाए। फिर कमल और माया की शादी देख कर उनको बहुत कुछ समझ में आ गया, और उन्होंने जो देखा, वो उनको बहुत पसंद भी आया। ख़ास कर, दुल्हन का रंग बिरंगी पोशाक पहनना! उनके देश में, उनकी परम्परानुसार दुल्हनें सफ़ेद गाउन पहन कर तैयार होती हैं और दूल्हे काले सूट पहनते हैं। ऐसा नहीं है कि ब्लैक एंड व्हाइट देख कर बुरा लगता है, लेकिन अपनी एकलौती बेटी पैट्रिशिया को लाल सुनहरे लहँगा चोली पहने, और भारतीय जेवरों में लदी हुई देख कर उनको बड़ा अच्छा लगा।

और तो और, लिंडा जी ने भी किरण जी के ही समान रंग की साड़ी ब्लाउज़ और पीटर ने अशोक जी के ही समान रंग का धोती कुरता पहना हुआ था। अशोक जी ने कहा था कि उन्होंने ऐसा बंदोबस्त इसलिए किया है कि बेटे और बहू के माता पिता में कोई अंतर न दिखाई दे! इस बात से वो दोनों बहुत प्रभावित हो गए थे। यहीं समझ आ गया कि उनकी बेटी के लिए यह सही घर है।

और भी कई अच्छी बातें थीं - जब से उनको प्रशांत के बारे में पता चला था, तब से वो समझ रहे थे कि न केवल प्रशांत अच्छा अच्छा था, बल्कि उसका परिवार भी अच्छा था। अशोक जी, किरण जी, और अजय से बातें कर के उनको इतना तो समझ आ गया कि बेहतर यही है कि पैट्रिशिया और प्रशांत दोनों भारत ही आ कर अपना जीवन आगे बढ़ाएँ। हाल ही में भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक निवेश के लिए खुली थी, और यह एक बड़ा कारण था कि अजय की अमरीकन कंपनी बॉम्बे में ऑफ़िस खोल रही थी। नहीं तो इतनी कम उम्र में इतना ऊँचा ओहदा मिल पाना कठिन था प्रशांत के लिए। पैट्रिशिया को भी अगर एम्बेसी में नौकरी मिल जाए तो डॉलर में उसको सैलरी मिलेगी - प्रशांत की ही तरह! कुल मिला कर आर्थिक रूप से बढ़िया निर्णय था भारत आना। हाँ - उनसे पैट्रिशिया की दूरी अवश्य बढ़ जाती, लेकिन अमरीका में तो बच्चों को सिखाते ही हैं कि वो अपनी राह चुनें और उस पर चलें!

दोनों की शादी के लिए नव-विवाहित युगल - माया और कमल भी बड़े सवेरे ही आ गए थे। दोपहर होते होते रूचि भी आ गई थी। उसके मम्मी पापा बाद में आने वाले थे। पूरा राणा खानदान भी शाम होने तक शामिल होने वाला था। उसी लॉन में, जहाँ माया और कमल की शादी हुई थी, माया की शादी की ही तरह असंख्य रस्में निभाई गईं। अपनी शादी में शादी वाला जोड़ा ‘मस्ती’ - मतलब नाच गाना - नहीं कर पाता, लेकिन दूसरे की शादी में ऐसा कोई प्रतिबन्ध नहीं होता। लिहाज़ा कमल और माया ने भी सौम्य रूप से बाजे की धुन पर नृत्य किया; और अजय और रूचि ने भी! अब तक सभी निकट के सम्बन्धियों और हितैषियों को पता चल गया था कि रूचि अजय की मंगेतर है, और उसकी होने वाली बीवी है! लिहाज़ा सभी उससे उसके पद की गरिमा के अनुरूप मिले, और उसको आशीर्वाद दिए। रूचि आज बहुत ही खूबसूरत लग रही थी - उसने रागिनी की ही दी हुई रस्ट कलर वाली साड़ी ब्लाउज़ पहनी हुई थी जो उस पर बेहतरीन तरीक़े से फ़ब रही थी। अजय ने क्रीम कलर का रेशमी कुर्ता और चूड़ीदार पैजामी पहन रखी थी। देखने में सरल परिधान था, लेकिन उस पर बहुत ही सुन्दर लग रहा था।

भोजन इत्यादि के बाद, पुनः रात में ही विवाह की मुख्य रस्में पूरी हुईं। प्रशांत और पैट्रिशिया के विवाह में भी विधि-विधान में कोई समझौता नहीं किया गया था। सारी रस्में, सारे नियम पूरे किए गए। चूँकि पैट्रिशिया का कोई भाई नहीं था, इसलिए उसकी बारी में कमल ने खील छोड़ कर सम्पन्नता का आशीर्वाद देने की रस्म अदा करी। बड़े बुज़ुर्गों के आशीर्वाद के लम्बे और भावुक दौर के बाद पैट्रिशिया को उसके माता पिता के होटल भेज दिया गया, जहाँ से उसकी विदाई ‘अपने’ घर को होनी थी। सुबह करीब आठ बजे वो रस्म भी पूरी हुई। पैट्रिशिया का पूरे पारम्परिक रीति के अनुसार और बड़े ही उत्साह से घर में स्वागत किया गया। किरण जी ने अच्छी सास होने के नाते उन दोनों को आराम करने को कहा।

प्रशांत ने पैट्रिशिया को भारतीय परंपरा में विवाह के बारे में बहुत कुछ बता रखा था - ख़ास कर यह बात कि बहू से क्या क्या उम्मीदें होती हैं। वैसे भी पैट्रिशिया कोई आलसी प्रवृत्ति की लड़की नहीं थी। विदा हो कर आने और बहू के स्वागत की रस्में पूरी होते ही वो सीधे रसोईघर में प्रविष्ट हो गई। किरण जी को ऐसी उम्मीद ही नहीं थी कि पैट्रिशिया ऐसा कुछ कर देगी! उन्होंने उसको बहुत मना किया यह कह कर कि रसोईये नाश्ता पका रहे हैं। लेकिन पैट्रिशिया ने एक न सुनी। उसने बहुत से भारतीय व्यंजन पकाने सीखे हुए थे। लेकिन जब सासू माँ (किरण जी) ने उसको बहुत समझाया कि ‘बहूरानी, आज कुछ भी पकाने की ज़रुरत नहीं है,’ तो वो मान तो गई, लेकिन उसका चेहरा उतर गया। यह देख कर अशोक जी ने उससे बड़े प्रेम-पूर्वक आग्रह किया कि क्या बढ़िया हो अगर बहू के हाथ से एक कप बढ़िया से चाय पीने को मिले।

उनके आग्रह पर पैट्रिशिया आह्लादित हो गई, और तुरंत चाय बनाने लगी। उसका उत्साह देखने वाला था। मुश्किल से एक सप्ताह ही वो साथ रही थी, लेकिन अब तक वो भी सभी से पूरी तरह घुल मिल गई थी। किरण जी भी ऐसी प्यारी सी बहू पा कर बहुत अच्छा महसूस कर रही थीं - क्योंकि अभी तक उनके अपने ही बेटे ने उनको बहुत निराश कर रखा था। लेकिन नई बहू के आते ही बड़े सुखद परिवर्तन आते हुए दिखाई दे रहे थे। रूचि भी इस समय घर पर ही थी - उसको देख कर किरण जी बहुत प्रसन्न हुईं।

‘मेरी दोनों बहुएँ कितनी प्यारी हैं… कितनी अच्छी हैं,’ उन्होंने मन ही मन सोचा, ‘हे प्रभु, दोनों को हर बुरी नज़र से बचाना और इस परिवार पर अपनी दया बनाए रखना!’

पैट्रिशिया ने अदरक कूट कर मसाला चाय बनाई सभी के लिए। रसोईये की चाय ‘बाहर वालों’ के लिए थी, और बहू की चाय घर वालों के लिए! और क्या बढ़िया चाय! सभी ने पैट्रिशिया की बहुत बढ़ाई करी और बहू को उसकी ‘पहली रसोई’ के लिए रुपए दे कर उसको आशीर्वाद दिया।

उसके बाद किरण जी ने फिर से पैट्रिशिया और प्रशांत को आराम करने को कहा, लेकिन दोनों का वैसा कोई मूड नहीं था। वैसे भी शादी से पहले ही दोनों की बड़ी ही सक्रिय सेक्स लाइफ थी, और वो विवाह की रस्मों की मोहताज नहीं थी। इसलिए उन दोनों के लिए परिवार के संग बैठना, और सभी के साथ बातें करना अधिक महत्त्वपूर्ण था। कुछ घंटों बाद माया और कमल विदा हो गए। उनको जाते जाते बहुत से उपहार भी दिए गए। कल माया और अजय का रिसेप्शन था, और सभी लोग वहाँ वाँछित थे। उत्सव और हर्ष का माहौल कुछ ऐसा था, कि रूचि का अपने घर जाने का मन नहीं था, इसलिए वो यहीं रुक गई थी। उसके घर में उसके माता पिता को बता दिया गया था कि रूचि आज और कल रात यहीं रुकेगी।

शाम होते होते सभी थक कर चूर हो गए।

इतने कम समय में दो दो शादियों की तैयारी करना और फिर उनको संपन्न करना - बेहद थकाऊ काम होता है। किरण जी थक कर चूर हो गई थीं, और अब तो वो कुछ सोच भी नहीं पा रही थीं। इसलिए घर की बड़ी बहू, पैट्रिशिया ने ही निर्णय लिया, कि घर में ही कुछ सामान्य सा खा लेंगे। अजय ने अपनी भाभी को बताया कि रसोईयों ने बहुत कुछ ला कर रख दिया है, उसमें से खाया जा सकता है। वैसे भी बहुत खाना है और अधिकतर लोग जा चुके हैं। उसको यह सुझाव अच्छा लगा। सभी के लिए पैट्रिशिया ने ही खाने की टेबल पर भोजन सजाया और सभी ने साथ में मिल कर खाया। बाहर बैठे मनोहर भैया को भी भीतर ही बुला लिया गया था। घर की कामवाली बाई भी साथ ही हो ली।

रात्रि भोजन देर तक चला।

खाते समय पता चला कि चूँकि पहली बार आना हुआ है, इसलिए लिंडा और पीटर जी कुछ दिन उत्तर भारत की सैर करेंगे। कल माया और अजय का रिसेप्शन अटेंड कर के परसों सवेरे ही वो आगरा को निकल जाएँगे। वहाँ से जयपुर और फिर वापस दिल्ली आ कर दिल्ली की सैर करेंगे। और फिर यह सब कर के वो प्रशांत और पैट्रिशिया के साथ वापस शिकागो चले जाएँगे। अशोक जी और किरण जी को बहुत अच्छा लगा कि इस दौरान उनके बेटे बहू उनके साथ ही रहेंगे। हाँ, अवश्य ही वो बड़ी जल्दी वापस जा रहे थे, लेकिन फिर वो परमानेंटली वापस भारत ही में सेटल होने वाले थे। यह सब अच्छी बातें थीं!

खाने पर ही प्रशांत और पैट्रिशिया ने रूचि और अजय से उनके आगे के प्लान्स के बारे में पूछा और बातें करीं। पैट्रिशिया ने दोनों से कहा कि अगर दोनों आगे पढ़ने के लिए शिकागो शहर जाते हैं, तो उसका अपना एक छोटा सा घर वहाँ है। अगर दोनों चाहें, तो वहीं रह सकते हैं। उसने शिकागो में स्थित चार यूनिवर्सिटीज़ के नाम बताए जहाँ दोनों साथ में अप्लाई कर सकते थे। शिकागो के बारे में उसने दोनों को बहुत कुछ बताया। उसने यह भी सुझाव दिया कि दोनों शादी कर लें, फिर वहाँ जाएँ… या फिर वहाँ जा कर शादी कर लें। अजय को ये सुझाव अच्छा लगा, लेकिन किरण जी ने उसे आँखें तरेर कर हिदायद दी कि अगर उनके बिना उन दोनों ने शादी करी, तो वो उससे बात नहीं करेंगी कभी!

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ख़ैर, अंत में सोने का समय हो ही गया।

पैट्रिशिया और प्रशांत के रहने का बंदोबस्त प्रशांत के ही कमरे में किया गया था। रूचि स्वतः ही अजय के कमरे में आ गई।

अजय को रूचि की उपस्थिति बहुत अच्छी लगती थी। उसकी सच्चाई जानने के बाद भी वो अजय को अपने से छोटा ही मानती थी और अजय के लिए उसके मन में जो प्रेम था, उसमें कोई परिवर्तन नहीं आया था। बल्कि वो और बढ़ा ही था - उसकी समझ में अजय पहले से भी बेहतर लड़का था, और उसके हिसाब से परफेक्ट! मानसिक और भावनात्मक रूप से वो उसकी ‘असली’ उम्र के जितनी परिपक्व थी। रागिनी को उसके सामने ला कर उसने अजय को अपने ‘वर्स्ट फियर’ का सामना करने की हिम्मत भी दी, और यह संतुष्टि भी कि उसकी पिछली ज़िन्दगी में रागिनी ने जो प्रलय मचाया था, वो इस जीवन में नहीं मचा सकेगी। एक और अच्छी बात हो गई थी - वो यह कि उसको ससुराल के रूप में अजय का घर मिल गया था। जब ईश्वर की ऐसी अनुकम्पा हो, तो कौन लड़की होगी जो अपने आप को सौभाग्यशाली नहीं समझेगी?

रूचि को अपने आलिंगन में भरते हुए अजय बोला, “मेरी जान... देखो न, इतना बिजी हो गया कि तुमसे बात भी नहीं हो सकी इतने दिनों,”

वो मुस्कुराई, “कोई बात नहीं। ... वैसे बहुत बढ़िया बंदोबस्त था दोनों शादियों में!”

अजय संतुष्टि से मुस्कुराया, ‘हाँ - बहुत से काम किये थे उसने इन दोनों शादियों के लिए,’

“मुझको तो हमारी शादी के लिए बहुत से आइडियाज आ रहे हैं,” रूचि बोली।

“फॉर एक्साम्प्ल?”

“बाद में!” रूचि बोली, “कैन यू हेल्प मी इन रिमूविंग माय क्लोथ्स?”

अजय जानता था कि चोली लहँगा उतारने में ऐसी कोई कठिनाई नहीं होती है - लेकिन रूचि का मन था कि अजय उसको निर्वस्त्र करे! तो उसको भी इस काम से क्या परहेज़ हो सकता था?

“पैट्रिशिया भाभी अच्छी हैं,” रूचि बोली।

“हम्म... भैया को लाइन पर रखेंगी,”

“हा हा हा... अरे ऐसा क्यों कहा?”

“नहीं कुछ नहीं! इट इस जस्ट दैट भैया इस ऐन अक्सोरियस पर्सन (ऐसा आदमी जो अपनी बीवी को हद से अधिक प्यार करता है, लेकिन जब तरह के व्यवहार को सकारात्मक दृष्टि से नहीं देखा जा सकता),”

“हम्म्म... कोई बात नहीं! भाभी अच्छी हैं, मतलब घर परिवार को साथ में रखेंगी,”

“हाँ, मुझे तो लगता है कि इंडिया आने का इंस्पिरेशन भी उन्ही से आया है,”

“अच्छा है न!”

“हाँ... अच्छा एक बात बताओ? तुमने डॉक्टर को दिखाया?” अजय ने पूछा।

“हाँ... दिखाया था! आई स्पेशलिस्ट ने कहा कि कोई प्रॉब्लम नहीं है। माइग्रेन या वैसा कुछ हो सकता है...” रूचि ने कहा, “इसलिए, मेरे स्वामी, आप मुझे कुछ कहें, उससे पहले ही मैंने डॉक्टर देशपाण्डे से अपॉइंटमेंट लिया है...”

“ओह?” अजय ने पूछा, “कब का?”

“हाँ... नेक्स्ट वीक! चलोगे साथ में?”

“अरे, ये कोई पूछने वाली बात है?”

तब तक रूचि की चोली उतर गई थी। उसने अंदर कुछ भी नहीं पहना हुआ था। अजय ने रूचि को अपनी तरफ घुमा कर उसके स्तनों को अपनी हथेलियों में भर कर आहिस्ते से दबाया।

“आह्ह्ह...” रूचि के गले से आनंद भरी आह निकल गई।

“क्या हुआ रूचि?” अजय ने चिंतित होते हुए पूछा।

“मेरी जान... दर्द वाली आह और सुख वाली आह में अंतर होता है!” रूचि ने मुस्कुराते हुए शरारत से कहा।

“ओह!”

वो मुस्कुराई, “वैसे एक बात है जो सर दर्द से याद आई... जब भी मैं माँ का दूध पीती हूँ न, बहुत रिलैक्स्ड हो जाती हूँ!”

अजय मुस्कुराया, “आई नो, राइट? मैं भी! ... सच में ऐसा लगता है कि जैसे कोई मेडिसिनल प्रॉपर्टीज़ हैं उनके दूध में,”

रूचि बदमाशी से मुस्कुराई, “अब तो भाभी भी विदा हो गईं... मतलब, उनका शेयर मुझको मिलेगा,”

“हा हा हा हा हा!” अजय दिल खोल कर हँसा और फिर उसका एक चूचक मुँह में ले कर उसको चूसने लगा।

रूचि को भी ये खेल बहुत पसंद आता था।

जब अजय के होंठ उसके स्तनों को छूते चूसते थे, तो वो आनंद सागर में गोते लगाने लगती थी। केवल दो मिनटों में ही उसको छोटी मोटी रति निष्पत्ति का आनंद महसूस होने लगता था। तो दो ही मिनटों में इस बार भी रूचि को छोटी मोटी रति निष्पत्ति का आनंद महसूस होने लगा। ऐसा नहीं था कि अजय को पता नहीं चलता था - अपने अनुभवों से वो रूचि के अंदर होते हुए परिवर्तनों को समझता था। लेकिन वो जानबूझ कर ऐसा करता था कि उसको पता नहीं चल रहा है, जिससे रूचि को शर्म या झिझक महसूस न हो, और वो अपने यौन आनंद का पूरी तरह से आस्वादन कर सके।

“अज्जू?” रूचि ने हाँफते हुए कहा।

“हम्म?” उसका चूचक चूसते हुए अजय बोला।

“ब्बस मेरी जान,” वो बोली, “अब रुक जाओ,”

अजय ने उसके चूचक को छोड़ दिया। दोनों बिस्तर पर लेट गए - रूचि अजय के ऊपर ही टेक लगा कर लेट गई।

“एक बात बताऊँ?” रूचि ने थोड़ा संयत होते हुए कहा।

“हूँ?” अजय ने रूचि के बालों की महक को महसूस करते हुए कहा।

रूचि ने थोड़ा झिझकते हुए बताया, “अज्जू... यार... मैंने कुछ दिनों पहले माँ से कहा था कि क्यों न वो... पापा से... आई मीन, वो दोनों शादी कर लें?”

“व्हाट?”

रूचि ने बड़ी मासूमियत से अपनी पलकें झपकाते हुए कहा, “जान... हम उनको मम्मी पापा कहते ही हैं! भाभी (माया) का कन्यादान दोनों ने मिल कर किया। आज भी प्रशांत भैया के रस्मों को दोनों साथ ही में कर रहे थे! तो... हमारे लिए वो दोनों तो सचमुच के मम्मी पापा हैं ही! अब वो प्रॉपरली शादी कर के हमारे मम्मी पापा बन जाएँ, तो क्या खराबी है?”

अजय हँसने लगा, “अरे यार रूचि! तुम भी न!”

“क्यों? अभी उन दोनों की उम्र ही क्या है?” उसने समझाते हुए बताया, “थोड़ा समझो मेरी बातों को अज्जू... कमल भैया की मम्मी प्रेग्नेंट हैं। मम्मी पापा की शादी हो जाए तो उनके भी बेबी हो सकते हैं न?”

“खड़ी होवो,”

“क्या?”

“अरे यार, गेट अप! तभी तो ये लहँगा उतरेगा,”

“ओह,” कहते हुए रूचि खड़ी हो गई।

अजय ने उसके लहँगे को उसकी चड्ढी समेत उतार दिया।

फिर दोनों वापस अपनी पहले वाली अवस्था में लेट गए।

उसी समय बगल वाले कमरे से प्रशांत और पैट्रिशिया की कामुक आहें सुन कर रूचि ने खिलखिलाते हुए अजय से कहा,

“बाप रे! भैया क्या क्या कर रहे हैं भाभी के साथ… जो वो ऐसी ऐसी आवाज़ें निकाल रही हैं,”

“वही मेरी जान, जो हम तुम साथ में करेंगे… जब हमारी शादी हो जायेगी!” अजय ने उसके एक चूचक को अपनी तर्जनी से छेड़ते हुए कहा।

“हा हा हा... आज ही न करने लग जाना,” रूचि ने हँसते हुए कहा।

“पहले तो ऐसे नंगे हो कर मुझको टीज़ करती हो... फिर ये सब बातें करती हो!”

“हनी, यू विल लव दिस इंतज़ार,” रूचि ने अजय के होंठों को चूमते हुए कहा, “आई प्रॉमिस!”

“यप! आई एग्री,”

“तुम भी तो उतारो... इट इस नॉट फेयर कि मैं ऐसे नंगी नंगी हूँ और तुम पूरे कपड़े पहने हुए हो!”

“क्या रूचि,”

“ओये... बच्चू अपनी लिमिट में रहो,” रूचि ने अजय को प्यार से धमकाया, “क़ायदे से देखो, तो मैं तुम्हारी गार्डियन हूँ!”

“अरे?”

“और नहीं तो क्या! तुमसे बड़ी हूँ... अगर उस दिन मेरे साथ हॉस्पिटल चलते, तो मैं ही गार्डियन की तरह साइन करती!”

“हा हा हा!”

“उस रोज़ हॉस्पिटल में सबके सामने नंगे नंगे घूम रहे थे तब कुछ नहीं,”

“अरे मेरी माँ... उतार रहा हूँ!”

“कोई ज़रुरत नहीं है... मैं कर देती हूँ,” कह कर रूचि उसका चूड़ीदार पजामी उतारने लगती है। कमल अपना कुर्ता खुद उतारने लगता है।

उसी समय माहौल में प्रशांत भैया और पैट्रिशिया भाभी की ऊँची कामुक आवाज़ें गूँज उठीं।

“यार सोचो न,” रूचि अजय की पजामी उतारते हुए बोली, “कुछ दिनों में हमारी भी शादी हो जाएगी... फिर हम भी सेक्स करेंगे... फिर घर में हमारी भी ऐसी ऐसी आवाज़ें आएँगी... सोचो तो, मम्मी पापा के मन पर क्या बीतेगा?”

“हम्म्म,”

“और फिर दोनों कम उम्र ही हैं! वो दोनों बहुत हुआ तो बस फोर्टी टू - फोर्टी थ्री के होंगे?”

अजय ने ‘हाँ’ में सर हिलाया।

अब तक अजय भी रूचि की ही तरह पूरी तरह नग्न हो गया था। उसका लिंग उत्तेजनावश खड़ा हो गया था।

“सो, नो डिफरेंट फ्रॉम माय पेरेंट्स,” वो बोली, “एंड लेट मी टेल यू, मेरे पेरेंट्स की सेक्स लाइफ बहुत एक्टिव है,”

“हाऊ डू यू नो... ओह डोंट आंसर दैट,” अजय बोला, “क्या वो भी प्लान कर रहे हैं बेबीज़?”

“नॉट इन माय नॉलेज,” रूचि ने ऐसे कहा कि जैसे उसको अजय के प्रश्न से कोई फ़र्क़ न पड़ा हो, “लेकिन अगर वो और बच्चे चाहते हैं, तो ऐसी कोई प्रॉब्लम नहीं होनी चाहिए! मम्मी इस जस्ट फोर्टी एंड हाफ, एंड रिप्रोडक्टिवली फर्टाइल ऐस वेल! दोनों लगभग रोज़ सेक्स करते हैं। अगर वो प्रोटेक्शन यूज़ करना बंद कर दें, तो मम्मी विल गेट प्रेग्नेंट! … एंड द न्यू बेबी विल बी एटीन इयर्स ओल्ड, बाय द टाइम शी रिटायर्स,”

“इंटरेस्टिंग! तुमने यह सब उनसे कहा?”

“कितनी बार तो कहा है मैंने कि मुझे एक गुड्डा या गुड़िया दे दो! लेकिन बार बार हँसी में टाल जाते हैं,” वो बताने लगी, “इसीलिए कमल भैया की शादी में मैंने ख़ास कर माँ को आंटी जी से मिलवाया था, और बताया था कि वो प्रेग्नेंट हैं! सोचा कि शायद वो उन्ही से वो थोड़ा इंस्पायर हो जाएँ!”

“हा हा हा हा... रूचि... यू आर अमेज़िंग,”

“आई नो,” रूचि ने बताया, “... अभी कुछ दिनों पहले ही... जब माँ ने ब्रेस्टफीड कराया था न पहली बार, उसके तीन दिन बाद, मैं मम्मी पापा के रूम में गई,”

“ओके!”

“जनरली जाती नहीं क्योंकि उस टाइम के आस पास दोनों सेक्स शुरू करने वाले होते हैं,” रूचि ने बताया, “लेकिन उस रात गई। माँ ने नाईटी पहना हुआ था। मैंने उनकी नाईटी का साइड ढलका कर उनके ब्रेस्ट को पीना शुरू कर दिया। ... माँ वास लाइक एंग्री एंड लाफ़िंग... पापा भी!”

“हा हा हा हा...”

“एनीवे, जब मैंने एनफ डाँट और हँसी सुन ली, तो मुझसे उन्होंने रीज़न पूछा कि मैंने वैसा क्यों किया! तो मैंने दोनों को बताया कि मुझे दूधू पीने का मन है... और मुझे एक लिविंग डॉल चाहिए खेलने के लिए!”

“तो क्या कहा मम्मी पापा ने?”

“कुछ नहीं... देर तक हँसते रहे! शायद सेक्स भी नहीं किया उन्होंने उस रोज़!”

“हा हा हा हा हा,” अजय ज़ोर से हँसने लगा।

“लेकिन अज्जू... क्या ये वाक़ई इतना बुरा थॉट है?” रूचि उसके लिंग को प्यार से सहलाने लगी।

“नहीं मेरी जान,” अजय बोला, “तुम इतनी अच्छी हो... तुम्हारे मन में कोई गलत थॉट्स आ ही नहीं सकते!”

“सो डू यू एग्री, कि माँ और पापा दोनों की शादी हो जानी चाहिए?”

“इन प्रिंसिपल, यस! आई थिंक इट इस गुड! ... लेकिन ये उनका पर्सनल मैटर है न जानू?”

“वो भी है,” रूचि बोली, “लेकिन कम से कम उनको एक बार ये कह देने से ये होगा कि उनको समझ में आ जायेगा कि उनके रिलेशनशिप के लिए हमारी ब्लेसिंग है,”

“यप... बात तो ठीक है,”

रूचि अचानक से अजय का लिंग सहलाना बंद कर के बोली, “आज रात अगर मैं माँ के पास सो जाऊँ तो तुमको बुरा तो नहीं लगेगा?”

“अरे, क्यों बुरा लगेगा?”

“ओके,” कह कर रूचि उठने लगी, “तो मैं माँ के पास जाती हूँ!”

“मैं भी आ जाऊँ?”

“शी इस नॉट ओन्ली माय मदर... ऑफ़ कोर्स यू कैन कम,” रूचि ने चंचल अदा से कहा।

*
 

parkas

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प्रशांत और पैट्रिशिया की शादी की गहमागहमी माया की शादी की ही तरह सुबह सुबह ही होने लगी थी।

लिंडा और पीटर जी को भारतीय परंपरा से होने वाली शादियों के बारे में कोई ज्ञान नहीं था। इसलिए प्रशांत ने उनको ‘हम आपके हैं कौन’ फिल्म भी दिखाई थी कि उनको थोड़ा आईडिया हो जाए। फिर कमल और माया की शादी देख कर उनको बहुत कुछ समझ में आ गया, और उन्होंने जो देखा, वो उनको बहुत पसंद भी आया। ख़ास कर, दुल्हन का रंग बिरंगी पोशाक पहनना! उनके देश में, उनकी परम्परानुसार दुल्हनें सफ़ेद गाउन पहन कर तैयार होती हैं और दूल्हे काले सूट पहनते हैं। ऐसा नहीं है कि ब्लैक एंड व्हाइट देख कर बुरा लगता है, लेकिन अपनी एकलौती बेटी पैट्रिशिया को लाल सुनहरे लहँगा चोली पहने, और भारतीय जेवरों में लदी हुई देख कर उनको बड़ा अच्छा लगा।

और तो और, लिंडा जी ने भी किरण जी के ही समान रंग की साड़ी ब्लाउज़ और पीटर ने अशोक जी के ही समान रंग का धोती कुरता पहना हुआ था। अशोक जी ने कहा था कि उन्होंने ऐसा बंदोबस्त इसलिए किया है कि बेटे और बहू के माता पिता में कोई अंतर न दिखाई दे! इस बात से वो दोनों बहुत प्रभावित हो गए थे। यहीं समझ आ गया कि उनकी बेटी के लिए यह सही घर है।

और भी कई अच्छी बातें थीं - जब से उनको प्रशांत के बारे में पता चला था, तब से वो समझ रहे थे कि न केवल प्रशांत अच्छा अच्छा था, बल्कि उसका परिवार भी अच्छा था। अशोक जी, किरण जी, और अजय से बातें कर के उनको इतना तो समझ आ गया कि बेहतर यही है कि पैट्रिशिया और प्रशांत दोनों भारत ही आ कर अपना जीवन आगे बढ़ाएँ। हाल ही में भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक निवेश के लिए खुली थी, और यह एक बड़ा कारण था कि अजय की अमरीकन कंपनी बॉम्बे में ऑफ़िस खोल रही थी। नहीं तो इतनी कम उम्र में इतना ऊँचा ओहदा मिल पाना कठिन था प्रशांत के लिए। पैट्रिशिया को भी अगर एम्बेसी में नौकरी मिल जाए तो डॉलर में उसको सैलरी मिलेगी - प्रशांत की ही तरह! कुल मिला कर आर्थिक रूप से बढ़िया निर्णय था भारत आना। हाँ - उनसे पैट्रिशिया की दूरी अवश्य बढ़ जाती, लेकिन अमरीका में तो बच्चों को सिखाते ही हैं कि वो अपनी राह चुनें और उस पर चलें!

दोनों की शादी के लिए नव-विवाहित युगल - माया और कमल भी बड़े सवेरे ही आ गए थे। दोपहर होते होते रूचि भी आ गई थी। उसके मम्मी पापा बाद में आने वाले थे। पूरा राणा खानदान भी शाम होने तक शामिल होने वाला था। उसी लॉन में, जहाँ माया और कमल की शादी हुई थी, माया की शादी की ही तरह असंख्य रस्में निभाई गईं। अपनी शादी में शादी वाला जोड़ा ‘मस्ती’ - मतलब नाच गाना - नहीं कर पाता, लेकिन दूसरे की शादी में ऐसा कोई प्रतिबन्ध नहीं होता। लिहाज़ा कमल और माया ने भी सौम्य रूप से बाजे की धुन पर नृत्य किया; और अजय और रूचि ने भी! अब तक सभी निकट के सम्बन्धियों और हितैषियों को पता चल गया था कि रूचि अजय की मंगेतर है, और उसकी होने वाली बीवी है! लिहाज़ा सभी उससे उसके पद की गरिमा के अनुरूप मिले, और उसको आशीर्वाद दिए। रूचि आज बहुत ही खूबसूरत लग रही थी - उसने रागिनी की ही दी हुई रस्ट कलर वाली साड़ी ब्लाउज़ पहनी हुई थी जो उस पर बेहतरीन तरीक़े से फ़ब रही थी। अजय ने क्रीम कलर का रेशमी कुर्ता और चूड़ीदार पैजामी पहन रखी थी। देखने में सरल परिधान था, लेकिन उस पर बहुत ही सुन्दर लग रहा था।

भोजन इत्यादि के बाद, पुनः रात में ही विवाह की मुख्य रस्में पूरी हुईं। प्रशांत और पैट्रिशिया के विवाह में भी विधि-विधान में कोई समझौता नहीं किया गया था। सारी रस्में, सारे नियम पूरे किए गए। चूँकि पैट्रिशिया का कोई भाई नहीं था, इसलिए उसकी बारी में कमल ने खील छोड़ कर सम्पन्नता का आशीर्वाद देने की रस्म अदा करी। बड़े बुज़ुर्गों के आशीर्वाद के लम्बे और भावुक दौर के बाद पैट्रिशिया को उसके माता पिता के होटल भेज दिया गया, जहाँ से उसकी विदाई ‘अपने’ घर को होनी थी। सुबह करीब आठ बजे वो रस्म भी पूरी हुई। पैट्रिशिया का पूरे पारम्परिक रीति के अनुसार और बड़े ही उत्साह से घर में स्वागत किया गया। किरण जी ने अच्छी सास होने के नाते उन दोनों को आराम करने को कहा।

प्रशांत ने पैट्रिशिया को भारतीय परंपरा में विवाह के बारे में बहुत कुछ बता रखा था - ख़ास कर यह बात कि बहू से क्या क्या उम्मीदें होती हैं। वैसे भी पैट्रिशिया कोई आलसी प्रवृत्ति की लड़की नहीं थी। विदा हो कर आने और बहू के स्वागत की रस्में पूरी होते ही वो सीधे रसोईघर में प्रविष्ट हो गई। किरण जी को ऐसी उम्मीद ही नहीं थी कि पैट्रिशिया ऐसा कुछ कर देगी! उन्होंने उसको बहुत मना किया यह कह कर कि रसोईये नाश्ता पका रहे हैं। लेकिन पैट्रिशिया ने एक न सुनी। उसने बहुत से भारतीय व्यंजन पकाने सीखे हुए थे। लेकिन जब सासू माँ (किरण जी) ने उसको बहुत समझाया कि ‘बहूरानी, आज कुछ भी पकाने की ज़रुरत नहीं है,’ तो वो मान तो गई, लेकिन उसका चेहरा उतर गया। यह देख कर अशोक जी ने उससे बड़े प्रेम-पूर्वक आग्रह किया कि क्या बढ़िया हो अगर बहू के हाथ से एक कप बढ़िया से चाय पीने को मिले।

उनके आग्रह पर पैट्रिशिया आह्लादित हो गई, और तुरंत चाय बनाने लगी। उसका उत्साह देखने वाला था। मुश्किल से एक सप्ताह ही वो साथ रही थी, लेकिन अब तक वो भी सभी से पूरी तरह घुल मिल गई थी। किरण जी भी ऐसी प्यारी सी बहू पा कर बहुत अच्छा महसूस कर रही थीं - क्योंकि अभी तक उनके अपने ही बेटे ने उनको बहुत निराश कर रखा था। लेकिन नई बहू के आते ही बड़े सुखद परिवर्तन आते हुए दिखाई दे रहे थे। रूचि भी इस समय घर पर ही थी - उसको देख कर किरण जी बहुत प्रसन्न हुईं।

‘मेरी दोनों बहुएँ कितनी प्यारी हैं… कितनी अच्छी हैं,’ उन्होंने मन ही मन सोचा, ‘हे प्रभु, दोनों को हर बुरी नज़र से बचाना और इस परिवार पर अपनी दया बनाए रखना!’

पैट्रिशिया ने अदरक कूट कर मसाला चाय बनाई सभी के लिए। रसोईये की चाय ‘बाहर वालों’ के लिए थी, और बहू की चाय घर वालों के लिए! और क्या बढ़िया चाय! सभी ने पैट्रिशिया की बहुत बढ़ाई करी और बहू को उसकी ‘पहली रसोई’ के लिए रुपए दे कर उसको आशीर्वाद दिया।

उसके बाद किरण जी ने फिर से पैट्रिशिया और प्रशांत को आराम करने को कहा, लेकिन दोनों का वैसा कोई मूड नहीं था। वैसे भी शादी से पहले ही दोनों की बड़ी ही सक्रिय सेक्स लाइफ थी, और वो विवाह की रस्मों की मोहताज नहीं थी। इसलिए उन दोनों के लिए परिवार के संग बैठना, और सभी के साथ बातें करना अधिक महत्त्वपूर्ण था। कुछ घंटों बाद माया और कमल विदा हो गए। उनको जाते जाते बहुत से उपहार भी दिए गए। कल माया और अजय का रिसेप्शन था, और सभी लोग वहाँ वाँछित थे। उत्सव और हर्ष का माहौल कुछ ऐसा था, कि रूचि का अपने घर जाने का मन नहीं था, इसलिए वो यहीं रुक गई थी। उसके घर में उसके माता पिता को बता दिया गया था कि रूचि आज और कल रात यहीं रुकेगी।

शाम होते होते सभी थक कर चूर हो गए।

इतने कम समय में दो दो शादियों की तैयारी करना और फिर उनको संपन्न करना - बेहद थकाऊ काम होता है। किरण जी थक कर चूर हो गई थीं, और अब तो वो कुछ सोच भी नहीं पा रही थीं। इसलिए घर की बड़ी बहू, पैट्रिशिया ने ही निर्णय लिया, कि घर में ही कुछ सामान्य सा खा लेंगे। अजय ने अपनी भाभी को बताया कि रसोईयों ने बहुत कुछ ला कर रख दिया है, उसमें से खाया जा सकता है। वैसे भी बहुत खाना है और अधिकतर लोग जा चुके हैं। उसको यह सुझाव अच्छा लगा। सभी के लिए पैट्रिशिया ने ही खाने की टेबल पर भोजन सजाया और सभी ने साथ में मिल कर खाया। बाहर बैठे मनोहर भैया को भी भीतर ही बुला लिया गया था। घर की कामवाली बाई भी साथ ही हो ली।

रात्रि भोजन देर तक चला।

खाते समय पता चला कि चूँकि पहली बार आना हुआ है, इसलिए लिंडा और पीटर जी कुछ दिन उत्तर भारत की सैर करेंगे। कल माया और अजय का रिसेप्शन अटेंड कर के परसों सवेरे ही वो आगरा को निकल जाएँगे। वहाँ से जयपुर और फिर वापस दिल्ली आ कर दिल्ली की सैर करेंगे। और फिर यह सब कर के वो प्रशांत और पैट्रिशिया के साथ वापस शिकागो चले जाएँगे। अशोक जी और किरण जी को बहुत अच्छा लगा कि इस दौरान उनके बेटे बहू उनके साथ ही रहेंगे। हाँ, अवश्य ही वो बड़ी जल्दी वापस जा रहे थे, लेकिन फिर वो परमानेंटली वापस भारत ही में सेटल होने वाले थे। यह सब अच्छी बातें थीं!

खाने पर ही प्रशांत और पैट्रिशिया ने रूचि और अजय से उनके आगे के प्लान्स के बारे में पूछा और बातें करीं। पैट्रिशिया ने दोनों से कहा कि अगर दोनों आगे पढ़ने के लिए शिकागो शहर जाते हैं, तो उसका अपना एक छोटा सा घर वहाँ है। अगर दोनों चाहें, तो वहीं रह सकते हैं। उसने शिकागो में स्थित चार यूनिवर्सिटीज़ के नाम बताए जहाँ दोनों साथ में अप्लाई कर सकते थे। शिकागो के बारे में उसने दोनों को बहुत कुछ बताया। उसने यह भी सुझाव दिया कि दोनों शादी कर लें, फिर वहाँ जाएँ… या फिर वहाँ जा कर शादी कर लें। अजय को ये सुझाव अच्छा लगा, लेकिन किरण जी ने उसे आँखें तरेर कर हिदायद दी कि अगर उनके बिना उन दोनों ने शादी करी, तो वो उससे बात नहीं करेंगी कभी!

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Bahut hi shaandar update diya hai avsji bhai....
Nice and lovely update....
 
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