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Mast updateपिछले अपडेट में आपने पढ़ा की..
वैशाली और बाबिल के बीच चुदाई का खेल शुरू होने ही वाला था की तब डॉरबेल बजी.. शीला लौट चुकी थी.. हालांकि वैशाली ने अपने झूठ को छुपाने की भरसक कोशिश की पर शीला की शातिर आँखों से सच छुप नहीं पाया.. शीला पहले तो वैशाल पर उखड़ पड़ती है पर अपनी बेटी की समस्या को सुनने के बाद उसका मन बदलता है.. वैशाली से पहले वो बाबिल को परखना चाहती है..
अब आगे..
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इससे पहले कि उसे कुछ समझ आता, शीला ने उसके मुरझाए हुए लंड को पतलून के ऊपर से पकड़ लिया और ज़ोर से मसल दिया..
‘आह दर्द हो रहा.. मालकिन ओह्ह..’
बाबिल ने शीला का हाथ हटाने की कोशिश करते हुए कहा..
शीला ने बाबिल की तरफ वासना से भरी नज़रों से देखते हुए कहा "क्यों रे, अब तो ये ऐसे मुरझा गया है…जैसे इसमें जान ही ना हो…पहले कैसे इतना कड़क खड़ा था.. साले.. मेरी जवान बेटी पर ग़लत नज़र रखता है.." ये कहते हुए शीला ने उसके लंड को थोड़ा और ज़ोर से मसल दिया..
बाबिल की तो जैसे जान ही निकल गई, उसके चेहरे से साफ़ पता चल रहा था कि वो कितने दर्द में है..
उसके चेहरे को देख कर शीला को अंदाज़ा हुआ कि उसने कुछ ज्यादा ही ज़ोर से उसके लंड को मसल दिया..
शीला ने उसके लंड को छोड़ दिया, फिर उसके लंड को हथेली से रगड़ने लगी..
बाबिल को जैसे लकवा मार गया हो.. वो बुत की तरह शीला को देख रहा था, जो उसकी तरफ देखते हुए, एक हाथ से अपनी चूची को ब्लाउज के ऊपर से मसल रही थी और दूसरे हाथ से बाबिल के लंड को सहला रही थी..
शीला "क्यों रे.. मेरे बेटी को चोदने वाला था..!! एक बार मुझे भी चोद कर देख.. देख फिर कितना ज्यादा मज़ा दूँगी.." ये कह कर उसने एक झटके से बाबिल की पतलून उतार दी..
इससे पहले कि घबराए हुए बाबिल को कुछ समझ आता.. उसकी पेंट घुटनों तक आ चुकी थी और उसका अधखड़ा लंड शीला के हाथ की मुठ्ठी में था..
"ये… ये आप क्या रही हैं मालकिन… ओह्ह नहीं मालकिन आ आहह.."
शीला ने उसके लंड के सुपाड़े पर चमड़ी पीछे सरका दी और गुलाबी सुपाड़े जो कि किसी छोटे सेब जितना मोटा था, उसे देख शीला कर आँखों में वासना छा गई..
शीला के मदमस्त भोसड़े की फांकें फड़फने लगीं और उनकी दीवारों ने कामरस की बूंदे बहाना शुरू कर दिया..
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क्योंकि अब बाबिल का लंड अपने असली विकराल रूप में आना शुरू हो गया था, शीला ने अपने अंगूठे के नाख़ून से बाबिल के लंड के सुपाड़े के चारों तरफ कुरेदा..
तो बाबिल की मस्ती भरी ‘आहह’ निकल गई और अगले ही पल उसे अपने लंड का सुपाड़ा किसी गरम और गीली जगह में जाता हुआ महसूस हुआ..
उससे ऐसा लगा जैसे किसी नरम और रसीले अंग ने उसके लंड के सुपाड़े को चारों तरफ से कस लिया हो..
जब बाबिल ने अपनी मस्ती से भरी आँखों को खोल कर नीचे देखा..
तो जो हो रहा था, उसे अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ..
शीला ने एक हाथ से उसके टट्टों को मुठ्ठी में पकड़ रखा था.. उसके लंड का सुपाड़ा शीला के होंठों के अन्दर था और दूसरे हाथ से शीला अपनी चूची को मसल रही थी..
ये नज़ारा देख बाबिल एकदम से हैरान रह गया, शीला ने उसके लंड के सुपाड़े को चूसते हुए.. ऊपर बाबिल की तरफ देखा.. दोनों की नज़रें आपस में जा मिलीं..
बाबिल का लंड अपनी पूरी औकात पर आ चुका था..
जिस हाथ की मुठ्ठी में शीला ने बाबिल के लंड को भर रखा था, उसे यकीन नहीं हो रहा था कि इस उम्र के लड़के का लंड भी इतना बड़ा हो सकता है..!!
अचानक से शीला ने बाबिल के फनफनाते हुए लंड को अपने मुँह से बाहर निकाला और बिस्तर पर लेट गई..
उसकी टाँगें बिस्तर के नीचे लटक रही थीं..उसने अपनी टाँगों को उठा कर घुटनों से मोड़ा और अपने पेटीकोट को टाँगों से ऊपर उठाते हुए, अपनी कमर तक चढ़ा लिया..
यह देख कर बाबिल की हालत और खराब हो गई..
शीला की चूत की फाँकें फैली हुई थीं और उसमें से कामरस एक पतली सी धार के रूप में बह कर उसकी गांड के छेद की तरफ जा रहा था..उसकी चूत का छेद कभी सिकुड़ता और कभी फैलता..
बाबिल बिना अपनी पलकों को झपकाए हुए, उसकी तरफ देख रहा था..
यह देख कर शीला के होंठों पर कामुकता भरी मुस्कान फ़ैल गई..
‘देख.. तेरे लंड के लिए पानी छोड़ रही है..’ शीला ने अपनी चूत की फांकों को फ़ैलाते हुए अंदर के गुलाबी छेद को दिखाते हुए कहा..
यह सुन कर बाबिल की ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा.. अब उसे समझ में आ रहा था यह दोनों माँ-बेटी उसके साथ खेल रही थी
बाबिल को यूँ खड़ा देख कर शीला से रहा नहीं गया, उसने अपना हाथ आगे बढ़ा कर बाबिल के लंड को पकड़ा और उसके लंड के गुलाबी मोटे सुपाड़े को अपनी गीली चूत के छेद पर रगड़ने लगी..
बाबिल के लंड के गरम और मोटे सुपाड़े का स्पर्श अपनी चूत के छेद पर महसूस करते ही.. शीला के बदन में मस्ती की लहर दौड़ गई..
शीला की वासना से भरी हुई आँखें बंद हो गईं..
उसने बड़ी ही अदा के साथ एक बार अपने होंठों को अपने दाँतों से चबाया और काँपती हुई आवाज़ में बाबिल से बोली "ओह्ह.. बेटा डाल दे.. मेरी चूत में अपना ये मोटा लंड पेल दे… चोद मुझे साले ओह्ह..!!"
बाबिल का लंड अब पूरी तरह से तन चुका था और पूरे जोश में आ चुका था..
शीला उसके लंड को अपनी दो उँगलियों और अंगूठे के मदद से पकड़े हुए, अपनी चूत के छेद पर उसका लंड का सुपाड़ा टिकाए हुए थी..
बाबिल ने शीला की टाँगों को घुटनों से पकड़ कर मोड़ कर ऊपर उठाया और अपनी पूरी ताक़त के साथ एक जोरदार झटका मारा..
बाबिल का लंड शीला की चूत की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ तेज़ी के साथ अन्दर घुसता चला गया.. और धनाधन चोदने लगा.. इतनी अनुभवी और चुदक्कड़ शीला भी इन प्रचण्ड प्रहारों से स्तब्ध हो कर रह गई.. वह एकदम से कराह उठी.. पर तब तक बाबिल का ८ इंच लंबा पूरा का पूरा लंड शीला के भोसड़े की गहराईयों में उतर चुका था..
शीला: "हइई.. आह्ह.. ओह्ह.... ओह हरामी.. धीरे कर थोड़ा.. ओह्ह ओह्ह निकाल साले.. फाड़ के रख दी.. मादरचोद.. मेरी चूत ओह्ह..!!"
शीला ने अपने कंधों और गर्दन को बिस्तर से उठा कर अपनी चूत की तरफ देखने की कोशिश करते हुए कहा..
बाबिल भी शीला के कराहने की आवाज़ सुन कर थोड़ा डर गया और अपना लंड शीला की चूत से बाहर निकालने लगा..
अभी उसने अपना लंड आधा ही बाहर निकाला था कि शीला ने उससे कंधों से पकड़ कर अपने ऊपर खींच लिया..
जिससे बाबिल का लंड एक बार फिर शीला की चूत की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ अन्दर घुस कर उसके बच्चेदानी के मुँह से जा टकराया..
शीला ने अपने ब्लाउज के बटन खोले.. ब्रा को सरकाया और सिसकते हुए बाबिल के चेहरे को अपनी चूचियों में दबा लिया.. इतने विशाल बबलों के बीच अपना चेहरा दबा हुआ पाकर बाबिल तो जैसे धन्य ही हो गया..
बाबिल अब जैसे पागल हो चुका था… निप्पलों को चूसते हुए वह शीला के खरबूजों को मसलने लगे..
शीला का रोम-रोम रोमांच से भर उठा.. नीचे से उसके चूतड़ ऊपर की तरफ उछल पड़े.. यह सीधा संकेत था कि वो बाबिल का पहला जोरदार वार झेल कर अब चुदवाने के लिए तड़प रही है..
बाबिल शीला के ऊपर लेटा हुआ दोनों हाथों से शीला के मम्मों को मसलते हुए हुमच रहा था.. शीला की आँखें फिर से मस्ती में बंद होने लगी थीं.. उसकी मादक सिसकियाँ पूरे कमरे में गूँज रही थीं..
अपनी निप्पल को पकड़कर बाबिल के मुंह में ठुसते हुए शीला बोली "ओह्ह ये ले.. ठीक से चूस्स्स इसे.. ओह्ह ओह्ह ह आह्ह..!!" शीला ने नीचे से अपनी कमर को हिलाते हुए कहा..
बाबिल ने भी झट से शीला की चूची को आधे से ज्यादा मुँह में भर लिया और ज़ोर-ज़ोर से चूसना चालू कर दिया..इतने विशाल स्तन थे की उसकी दोनों हथेलियों में मिलाकर भी शीला का एक स्तन नहीं आता था..
बाबिल ने अपने लंड को आधे से ज्यादा बाहर निकाला और फिर पूरी ताक़त से अन्दर पेल दिया.. बाबिल का लंड पिछले आधे घंटे से खड़ा था.. शीला का भोसड़ा किसी तंदूर से भी ज्यादा गरम था और वह गर्मी अब बाबिल के बर्दाश्त से बाहर हो रही थी..
वो बिस्तर के किनारे खड़ा हो गया और शीला की टाँगों को घुटनों से मोड़ कर ऊपर उठा कर पूरी तरह से फैला दिया..
जिससे उसकी चूत ठीक उसके लंड के लेवल पर आ गई और बाबिल तेज़ी से अपने लंड को शीला की चूत की अन्दर-बाहर करने लगा..
बरसों बाद शीला इतने जवान लंड से चुद रही थी.. इससे पहले इतना जवान साथी जो था.. वह था.. उसका खुद का दामाद पिंटू.!!! तब वो कविता का आशिक था.. और उन दोनों के मिलने का जुगाड़ शीला के घर पर ही होता था चूंकि तब मदन अमरीका गया हुआ था.. तभी एक बार मौका पाकर, शीला और रेणुका ने साथ मिलकर पिंटू को ऐसा रगड़ा था की वो रो दिया था..
बाबिल का मोटा लंड पाकर शीला के मानो ख़ुशी के आँसू बाहर निकालने लगी.. ऐसा तगड़ा लंड तो केवल रसिक का ही था..
शीला का भोसड़ा सरपट गीला हो चुका था और बाबिल का लंड भी शीला की चूत से निकल रहे गाढ़े पानी से एकदम सन गया था..
अब बाबिल का लंड ‘फच-फच’ की आवाज़ करता हुआ तेज़ी से शीला की चूत के अन्दर-बाहर हो रहा था और वह भी अपनी गांड को उछाल कर बाबिल का साथ दे रही थी..
उसका पूरा बदन बाबिल के लगाए हुए हर धक्के के साथ हिल रहा था.. उसके बबले यहाँ वहाँ झूल रहे थे और शीला अपने सर को इधर-उधर पटकते हुए मछली के जैसे तड़प रही थी..
शीला कभी अपनी दोनों चूचियों को मसलती, कभी वो बिस्तर की चादर को अपने हाथों में दबोच लेती..
उसकी चूचियाँ हर धक्के के साथ हिल रही थीं, जिससे देख कर बाबिल का जोश और बढ़ता जा रहा था..
शीला "ओह बेटा धीरेए ओह्ह ओह्ह ह आह्ह.. उँघह धीरेए ऊहह निकाल जाएगा तेरा.. ओह्ह मज़ा आ गया .. ओहह.. आह्ह.. धीरेए ओह्ह ओह्ह ओह्ह..!!"
शीला की भोसड़े ने भरसक पानी छोड़ना चालू कर दिया और वो अपनी गांड को पागलों की तरह उछालते हुए झड़ने लगी..
उसने अपने बिखरे हुए बालों को नोचना शुरू कर दिया..
पर बाबिल अभी भी पूरी रफ़्तार के साथ शीला की चूत में अपना लंड अन्दर-बाहर कर रहा था..
शीला का पूरा बदन एकदम से ऐंठ चुका था, पर बाबिल के ताबड़तोड़ धक्कों ने एक बार फिर से उसकी चूत को ढीला कर दिया था..
शीला झड़ने के बाद पूरी तरह शांत हो चुकी थी और अपनी टाँगों को फैलाए हुए बाबिल के लंड को अपनी चूत में मज़े से ले रही थी..
आख़िर ५ मिनट की और चुदाई के बाद शीला दूसरी बार झड़ गई और इस बार बाबिल के लंड ने भी उसकी भोसड़े में अपना वीर्य उड़ेल दिया..
जैसे ही बाबिल का लंड सिकुड़ कर बाहर आया.. शीला जल्दी से उठ कर बाथरूम चली गई..
बाबिल ने अपने मुरझाए हुए लंड की ओर देखा, वो शीला की चूत की कामरस से एकदम भीगा हुआ था..
उसने कमरे में इधर-उधर नज़र दौड़ाई.. तो उसे फर्श पर पड़ी शीला की साड़ी नज़र आई.. वो साड़ी के पास गया और उसके एक छोर को पकड़ कर उससे अपना लंड साफ़ करने लगा.. तभी वैशाली अचानक से कमरे में आ गई..
उसने बाबिल के लंड की तरफ देखा.. जो शिकार करने के बाद लटक रहा था..
वैशाली ने शैतानी मुस्कान के साथ कहा "क्यों मज़ा आया ना?"
बाबिल वैशाली की बात सुन कर एकदम से हैरान रह गया.. उससे यकीन नहीं हो रहा था कि वैशाली उससे अपनी माँ के बारे में पूछ रही है..
हँसते हुए वैशाली कमरे से बाहर चली गई..
बाबिल खड़ा हुआ और बिना अपना पेंट पहने नंगा ही बाथरूम की ओर गया.. दरवाजा सिर्फ अटका हुआ था, बंद नहीं था.. अंदर से कुछ आवाज़ सुनाई दे रही थी..
उसने दरवाजे पर कान लगाया तो शीला के मूतने की सुरीली सी आवाज़ उसके कानों में पड़ी… वह दरवाजे के पास खड़ा होकर अन्दर झाँकने लगा..
अन्दर का नज़ारा देख कर एक बार फिर से बाबिल का लंड पूरे उफान पर आ गया..
बड़े बड़े गोरे चूतड़ों को उजागर कर शीला मूतने के बाद झुक कर अपनी चूत को एक कपड़े से साफ़ कर रही थी.. पीछे खड़े बाबिल के सामने शीला के बड़े-बड़े चूतड़ों के बीच लबलबा रही चूत का गुलाबी छेद उस पर कहर बरपा रहा था..
शीला को इस बात का पता नहीं था कि बाबिल उसके पीछे खड़े होकर उसकी बड़ी गांड को देख रहा है..
अगले ही पल बाबिल का लंड किसी सांप की तरह फुंफकारने लग गया ..
शीला अपनी चूत की फांकों को अपनी उँगलियों से सहला रही थी, उसके होंठों पर ख़ुशी से भरी हुई मुस्कान फैली हुई थी..
अचानक से उससे अपनी चूत पर एक बार फिर से बाबिल के लंड के मोटे और गरम सुपाड़े का अहसास हुआ.. जिसे महसूस करते ही.. उसके पूरे बदन में मस्ती की कंपकंपी दौड़ गई..
‘आह क्या कर रहा है ओह्ह..छोड़ मुझे!’
इसके पहले कि शीला कुछ संभल पाती.. बाबिल का लंड उसकी चूत की फांकों को फैला कर चूत के छेद पर जा लगा..
‘ओह्ह आह सीईईई..’ शीला के मुँह से मस्ती भरी ‘आह’ निकल गई..
शीला ने एक बार अपनी गर्दन पीछे घुमा कर बाबिल की तरफ अपनी वासना से भरी मस्त आँखों से देखा और मुस्करा कर फिर से आगे देखते हुए.. अपने दोनों हाथों को उस पुराने मेज पर टिका कर झुक गई..
फिर बड़ी ही अदा के साथ अपने पैरों को फैला कर पीछे से अपनी गांड ऊपर की तरफ उठा लिया..
अब बाबिल का लंड बिल्कुल शीला की चूत के सामने था..
बाबिल ने शीला के चूतड़ों को दोनों तरफ से पकड़ कर फैला दिया और अपने लंड को चूत के छेद पर टिका दिया..
इससे पहले कि बाबिल अपना लंड शीला की चूत में पेलने के लिए धक्का मारता.. शीला ने कामातुर होकर अपनी गांड को पीछे की तरफ धकेलना शुरू कर दिया..
बाबिल के लंड का मोटा सुपाड़ा शीला की चूत के छेद को फ़ैलाता हुआ अन्दर घुस गया.. शीला अपनी चूत के छेद के छल्ले को बाबिल के लंड के मोटे सुपाड़े पर कसा हुआ साफ़ महसूस कर पा रही थी..
कामवासना का आनन्द चरम पर पहुँच गया.. शीला की चूत ने एक बार फिर से अपने कामरस का खजाना खोल दिया..
शीला की मस्ती का कोई ठिकाना नहीं था, उसकी चूत में सरसराहट बढ़ गई थी और वो बाबिल के लंड को जड़ तक अपनी चूत में लेने के लिए मचल रही थी..
"ओह्ह आह.. घुसाआ.. दे रे.. छोरे ओह फाड़ दे.. मेरी चूत ओह्ह आह… और ज़ोर से मसल मेरे गांड को ओह्ह हाँ.. ऐसे ही…"
बाबिल बुरी तरह से अपने दोनों हाथों से शीला की गांड को फैला कर मसल रहा था.. उसके लंड का सुपाड़ा शीला की चूत में फँसा हुआ, शीला को मदहोश किए जा रहा था.. बाबिल को भी अपने लंड के सुपाड़े पर शीला की चूत की गरमी साफ़ महसूस हो रही थी..
उसने शीला के चूतड़ों को दबोच कर दोनों तरफ फैला लिया और अपनी गांड को तेज़ी से आगे की तरफ धकेला.. बाबिल के लंड का सुपाड़ा शीला की चूत की दीवारों को चीरता हुआ आगे बढ़ गया, शीला के मुँह से एक घुटी हुई चीख निकल गई.. जो बाथरूम के दीवारों में ही दब कर रह गई..
बाबिल का आधे से अधिक लंड शीला की चूत में समा चुका था..
शीला ने पीछे की तरफ अपनी गांड को ठेल कर अपनी चूत में बाबिल का मोटा लंड लेते हुए कहा "आहह.. आह जालिम मेरी चूत.. ओह फाड़ दी… ओह्ह ओह तेरे इस मूसल लंड की तो मैं आह.. आह.. कायल हो गई उह्ह.. ओह्ह चोद दे.. मुझे.. और तेज धक्के मार.."
बाबिल भी अब नौकर और मालकीं की मर्यादाओं को भूल कर शीला के चूतड़ों को फैला कर अपने लंड को उसकी चूत में अन्दर-बाहर कर रहा था..बाबिल के हर जबरदस्त धक्के के साथ उसकी चूचियाँ तेज़ी से हिल रही थीं..
"ओह रुक बेटे.. ज़रा ओह्ह ओह्ह.. मैं खड़ी-खड़ी थक गई हूँ..ओह्ह ओह्ह आह्ह.."
बाबिल ने अपने लंड को शीला की चूत से बाहर निकाल लिया.. शीला सीधी होकर उसकी तरफ पलटी और बाबिल के होंठों पर अपने रसीले होंठों को रखते हुए उसे से चिपक गई..
बाबिल ने उसकी कमर से अपनी बाँहों को पीछे ले जाकर उसके चूतड़ों को दबोच-दबोच कर मसलना शुरू कर दिया..
बाबिल का विकराल लंड शीला के पेट के निचले हिस्से पर रगड़ खा रहा था..
‘चल अंदर कमरे में चलते हैं..’ शीला ने चुंबन तोड़ते हुए कहा और फिर बाथरूम से निकल कर एक बेड के पास आ गई..
बहुत बढ़िया और मस्त अपडेट वखारिया जी।। दो औरतें के नज़रिए से जीवन के दो पहलु बहुत बढ़िया तरीके से पेश किए गए हैं। एक तरफ जहां वैशाली जैसी आकर्षक औरत जो संभोग सुख के लिए दहलीज लांघने को तैयार है और दूसरी तरफ शीला जैसी चुद्दकड़ जो आपदा में भी अपने लिए मौका ढूंढती है…वाह, मज़ा आ गया!पिछले अपडेट में आपने पढ़ा की..
शीला अपनी बेटी वैशाली के घर आई है, जहाँ घर के सभी सदस्य अनुपस्थित हैं.. माँ-बेटी साथ समय बिताती हैं, जिससे वैशाली को सहारा मिलता है.. हालाँकि, तीसरे दिन, वैशाली इंस्टाग्राम पर उत्तेजक विडियो देखकर कामुक रूप से उत्तेजित हो जाती है.. अपनी तीव्र इच्छा को शांत करने के लिए, वह कविता की माँ के नौकर बाबिल को बुलाने की योजना बनाती है..
शीला को वैशाली एक प्रदर्शनी में साड़ियाँ देखने भेज देती है.. मौका मिलते ही वह बाबिल को अपने घर बुला लेती है और उसके साथ यौन संबंध शुरू कर देती है.. जैसे ही वे आपस में मग्न होते हैं, अचानक दरवाजे की घंटी बज उठती है, जिससे दोनों चौंक जाते हैं..
अब आगे..
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एक ही पल में वैशाली का हाथ बाबिल के ट्रेकपेंट के ऊपर से ही उसके मस्त लंड को सहलाने लग गया..
इससे पहले की बाबिल संभल पाता, वैशाली ने एक झटके में उसका पेंट, जांघिये समेट घुटनों तक उतार दिया.. और बाबिल के तने हुए हथियार के सामने उकड़ूँ अवस्था में बैठ गई
प्यारे गुलाबी लंड की मोटाई को अपनी मुठ्ठी में पकड़कर, उभरी हुई नसों को वह बेतहाशा चाटने लगी.. बाबिल के तो जैसे होश ही उड़ गए.. चमकते हुए गुलाबी टोपे के मूत्र-छेद पर अपनी जीभ की नोक से चाटना शुरू कर वैशाली ने कुछ ही पलों में उस लंबे लंड को अपने कंठ तक उतार दिया..!!
टिंग टॉंग..!!!
घर की डोरबेल बजी..
वैशाली ने तुरंत लंड को अपने मुंह से बाहर निकाला.. सोच में पड़ गई.. बेवक्त कौन टपक पड़ा..?? उसने अपने होंठ पर उंगली रखकर बाबिल को शांत खड़े रहने का इशारा किया.. पास बेड पर पड़ा टॉप पहन लिया.. और दरवाजे पर आई.. खोलने से पहले उसने दरवाजे में बने छेद से बाहर देखा... बाहर उसकी मम्मी शीला खड़ी थी..!!!!
अरे बाप रे..!!! मम्मी इतनी जल्दी कैसे वापिस आ गई?? अब क्या करें..??? बाबिल को कहाँ छुपाऊँ??
उसी उधेड़बुन के बीच शीला ने और दो तीन बार डोरबेल बजाई..
वैशाली भागकर बेडरूम में आई और बाबिल से कहा.. "जल्दी कपड़े ठीक कर ले.. और झाड़ू उठाकर सफाई शुरू कर"
बाबिल को पता नहीं चला की उसे असल में बुलाया किस लिए गया था..!!! वैशाली को इतनी घबराए हुए देखकर उसने तुरंत झाड़ू उठाया और फर्श पर लगाने लगा..
वैशाली ने दरवाजा खोला.. शीला अंदर आकर उसे आश्चर्य से देखती रही.. ऊपर से नीचे तक वैशाली का निरीक्षण करते हुए शीला के शातिर मन में सौ सवाल खड़े हो रहे थे.. पर वो गर्मी से बेहाल हो रही थी इसलिए उसने पंखा ऑन किया और धम्म से सोफ़े पर बैठ गई..
वैशाली की नज़रों में छुपा डर साफ नजर आ रहा था शीला को.. वह रुमाल से अपने चेहरे का पसीना पोंछते हुए वैशाली की तरफ तीक्ष्ण नज़रों से देख रही थी
वैशाली ने कृत्रिम मुस्कान के साथ कहा "अरे मम्मी, इतनी जल्दी कैसे आ गई? सेल में गई नहीं क्या?"
शीला ने थोड़े गुस्से से कहा "मुझे वहाँ भेजने से पहले चेक तो करना था.. सेल तो कल ही खतम हो गया.. बेकार में आने जाने के २०० रुपये ले लिए ऑटो वाले ने.. पर तू बता.. तू तो ऑफिस जाने वाली थी ना..??"
वैशाली ने नजरें झुका ली और कहा "वो फिर आज ट्रक आया ही नहीं तो मटीरीअल कल ही जाएगा.. जाने का कोई मतलब नहीं था इसलिए..!!"
शीला को कुछ तो गंध आ रही थी पर पता नहीं चल पा रहा था की वैशाली आखिर क्या गुल क हिला रही है.. तभी बेडरूम से कुछ गिरने की आवाज आई.. शीला और वैशाली दोनों चोंक उठे..
शीला: "कौन है अंदर?"
अब वैशाली की कठिन परीक्षा होने वाली थी
वैशाली: "वो.. वो... काफी दिनों से कामवाली बाई नहीं आई थी.. तो मैंने कविता के नौकर को फोन करके बुला लिया..!!"
संशय भरी नज़रों से शीला वैशाली की ओर देखती रही.. घर तो पहले से ही साफ-सुथरा था.. उसने खुद ही पिछले दिन पूरी सफाई की थी.. और वैसे भी वैशाली पहले से सफाई के लिए उतनी उत्सुक नहीं रहती थी.. घर पर भी उसकी ज्यादातर चीजें अस्तव्यस्त ही पड़ी रहती थी.. शीला के लाख कहने के बाद ही वह सफाई करती थी.. ऐसे में वैशाली की कही बात शीला को हजम नहीं हुई
शीला तुरंत उठ खड़ी हुई.. और अंदर बेडरूम में गई.. अंदर उस नेपाली लड़के को काम करते हुए उसने कुछ मिनटों तक उसका गहराई से मुआयना किया.. और फिर वापिस बाहर आई तब तक वैशाली किचन में चली गई थी.. असल में वह शीला से नजर मिलाना नहीं चाहती थी
सोफ़े पर आकर बैठी शीला का दिमाग बुलेट ट्रेन की गति से चलने लगा..!! साड़ियों के सेल में भेजने के लिए वैशाली की उत्सुकता.. फिर अचानक ऑफिस जाने की बात... फिर आधे ही घंटे के अंदर सब केन्सल हो जाना और अकेली वैशाली एक गोरे-चिट्टे तंदूरस्त जवान लड़के के साथ..!!
शीला के दिमाग को दो और दो चार का गणित गिनने में ज्यादा वक्त नहीं लगा.. उसने आवाज देकर वैशाली को बुलाना चाहा.. पर ड्रॉइंग रूम में उनकी बातचीत उस नौकर को भी सुनाई देती.. इसलिए वैशाली को बुलाने के बजाए उसने खुद ही अंदर कीचेन में जाकर बात करना मुनासिब समझा..
वह जब कीचेन में आई तो वैशाली बेफिजूल ही बर्तन ऊपर नीचे कर रही थी..
शीला: "क्या चल रहा है कुछ बताएगी मुझे तू?"
वैशाली का बदन पसीने से तर हो गया, वह जानती थी की अपनी मम्मी की नज़रों से यह छुपाना नामुमकिन था
उसने बनावटी हंसी के साथ कहा "किस बारे में बात कर रही हो मम्मी? मैं समझी नहीं"
अब शीला की भृकुटी तंग हो गई, उसने वैशाली का हाथ पकड़कर अपनी ओर खींचते हुए कहा "आधे घंटे पहले तक तो ऑफिस जाने की बहोत जल्दी थी तुझे.. मुझे अकेले नहीं जाना था फिर भी साड़ियों के सेल में धकेल दिया.. और अचानक से तुझे सफाई की इतनी फिकर कब से होने लगी? हुई तो हुई.. यह सब कुछ आधे ही घंटे में?? चलो माना की तुझे मेरे जाने के बाद सफाई का खयाल आया होगा.. उतनी देर में तूने कविता को फोन कर नौकर को बुलाया और वो आ भी गया..!!! कविता का घर इतना नजदीक तो है नहीं..!!"
वैशाली का मन कर रहा था की अभी धरती फटे और वो अंदर समा जाएँ.. शीला ने उसकी चोरी बखूबी पकड़ ली थी.. उसकी माँ के सभी शक जायज थे और उसका कोई जवाब नहीं था उसके पास
वैशाली: "आप गलत समझ रही हो मम्मी.. वो.. असल में... अम्म.. वो कविता को फोन किया तो उसका नौकर यहीं कुछ सामान लेने आया था तो मैंने बुला लिया.. वैसे और कुछ नहीं है"
शीला को अब गुस्सा चढ़ने लगा.. यह लड़की मुझे मूर्ख समझती है क्या..!! उतनी उसकी उम्र नहीं है जिससे ज्यादा तो मैं खुद ऐसे कांड कर चुकी हूँ.. और यह मुझे बेवकूफ बना रही है??
शीला ने गुस्से से तमतमाते हुए चेहरे से वैशाली को कहा "मेरे सामने देख.. नजरें क्यों छिपा रही है?"
बेमन से वैशाली ने घबराई हुई नज़रों से शीला की तरफ देखा.. शीला की आँखों का गुस्सा देखकर वैशाली की हालत खराब हो गई
शीला: "सच सच बता.. क्या माजरा है? क्या चल रहा है तेरे और उस नौकर के बीच?"
अब वैशाली से अपने आप को रोका न गया.. उसने शीला के कंधों पर अपना सिर रख दिया और फूटफुटकर रोने लग गई..
एक ही पल में शीला का शक यकीन में बदल गया.. रो रही वैशाली पर गुस्से से गुर्राई "तू पागल हो गई है क्या वैशाली? वो भी यहाँ अपने घर में? एक नौकर को बुलाकर? अक्ल है भी तुझे या बेच आई है? शादी से पहले जब पिंटू ने तुझे राजेश के साथ देख लिया था तब क्या हुआ था.. भूल गई क्या?? कितनी मिन्नतें.. कितने वादे किए थे.. खुद मैंने पैरों में पड़कर.. गिड़गिड़ाकर माफी मांगी थी, तब जाकर पिंटू माना था.. जरा सा भी अंदाजा है तुझे की पिंटू को पता चला तो क्या होगा??"
शीला के कंधों पर सिर रखकर रो रही वैशाली ने अपने आँसू पोंछे और डाइनिंग टेबल की कुर्सी खींचकर नजरें झुकाए बैठ गई.. शीला भी उसके सामने बैठ गई.. आखिर कारण तो जानना ही था की आखिर वैशाली ने ऐसी बेवकूफों वाली हरकत भला क्यों की.. शीला को दिक्कत उस बात से नहीं थी की उसकी बेटी किसी पराए मर्द के साथ पाई गई थी, तकलीफ इस बात की थी की पिंटू को पता चल गया तो कैसा अनर्थ हो जाएगा
रोते बिलखते हुए वैशाली ने अपनी आपबीती बताई.. पिंटू की नपुंसकता, उसके डॉक्टर के पास जाने से कतराना, उल्टा वैशाली पर गुस्सा करना.. पिछले कई महीनों से पिंटू उसे संतुष्ट नहीं कर पाया था.. सारी बातें विस्तारपूर्वक बताई
सुनकर शीला स्तब्ध हो गई..
थोड़ी नरमी के साथ पर गंभीरतापूर्वक शीला ने कहा "समझ रही हूँ बेटी, समझ रही हूँ तेरी मजबूरी.. तू मेरी बेटी है, तेरे शरीर की आग मैं नहीं समझूंगी तो और कौन समझेगा? पर ये तूने जो किया, इतना बड़ा जोखिम उठाना.. ये बेवकूफी है वैशाली! बहुत बड़ी बेवकूफी..!! इतना भी नहीं समझती तू?"
वैशाली ने उखड़ते हुए कहा "तो क्या करूँ मम्मी? कब तक ऐसे ही बैठी रहूँ?? पिंटू का प्रॉब्लेम अपने आप तो ठीक होने वाला है नहीं.. और डॉक्टर के पास तो वो जाने से रहा..!! इतने महीने तड़पते हुए निकाले.. पर अब बर्दाश्त नहीं होता मुझसे"
शीला का गुस्सा अब अपनी बेटी के प्रति सहानुभूति में बदलने लगा..
शीला: "समझ सकती हूँ बेटा.. मैं तेरी जगह होती तो शायद मैं भी कुछ ऐसा ही करती.. पर मेरी बात और है.. तेरे सिर पर पिंटू नाम का पहरा है..!! तुझे याद है न राजेश वाला कांड? लाख माफ़ी-मिन्नतों के बाद, एक शर्त पर तेरी शादी टिकी है.. कि तू दोबारा ऐसी गलती नहीं करेगी!"
वैशाली अब भड़क पड़ी और बोली "तो क्या करूँ? ऐसे ही मर मरकर जीती रहूँ? पिंटू की खोखली मर्दानगी के लिए अपनी जवानी और अपने अरमानों को आग लगा दूँ?? क्या करूँ मैं, तुम्ही बताओ मुझे मम्मी"
शीला की बोलती बंद हो गई.. वैशाली की बात शत-प्रतिशत सही थी..
उसने एकदम धीरे से कहा "तेरी बात सुनकर अब समझ तो आ रहा है की तूने यह क्यों किया.. और उसपर मैं सवाल भी नहीं उठा रही.. मैं यह कह रही हूँ की यहाँ घर पर उसे बुलाकर यह सब करना खतरे से खाली नहीं है"
वैशाली: "पिंटू बेंगलोर है.. सास-ससुर मेरे दूसरे शहर है.. फिर कहाँ कोई डर की बात है मम्मी?"
शीला: "रे पगली! दुनिया में कुछ भी छुपता है? कल को यह नौकर खुद ही किसी को बता देगा तो..!! पड़ोसी ने देख लिया तो क्या होगा..!!! किसी की नजर पड़ गई तो क्या करेगी... एक बार शक हुआ ना पिंटू को, फिर वह तेरे पीछे पड़ जाएगा.. तू तो जानती है उसका गुस्सा! पिछली बार तो बस पकड़े गए थे, इस बार तो... सबूत मिल गया तो? तलाक! सरेआम बदनामी! और तेरी जिंदगी तबाह हो जाएगी! बेटी, मैं तेरे सुख के खिलाफ नहीं हूँ.. मैं तेरी माँ हूँ, तू खुश रहे, यही चाहती हूँ.. पर तू इतनी लापरवाही से काम मत कर.. अगर करना ही है, तो इतनी बेवकूफी से नहीं..चालाकी से कर"
वैशाली ने बेबस हो कर कहा "फिर क्या करूँ मैं मम्मी? आप ही बताओ"
शीला का खुराफाती दिमाग काम पर लग गया.. उस गोरे लड़के को देखकर नियत तो शीला की भी डोल उठी थी.. मन तो उसका भी कर गया था.. काफी समय से वह केवल राजेश और मदन के वही पुराने लंडों से खेलकर ऊब चुकी थी.. यह बढ़िया मौका था..वैशाली तो वैसे भी वहीं करने वाली थी जो शीला उससे कहेगी
बड़ी ही सावधानी से अपने पाँसे फेंकते हुए शीला ने कहा "देख वैशाली, अब जो हो गया सो हो गया.. लड़का यहाँ आ चुका है.. तो बिना उसका इस्तेमाल किए जाने तो नहीं देंगे..!! और वैसे भी.. अभी तू अकेली तो है नहीं.. तेरे साथ मैं हूँ.. कोई जानेगा तो भी शक नहीं होगा.. इसलिए रास्ता तो साफ है लेकिन.." शीला बीच में ही अटक गई
वैशाली: "लेकिन क्या मम्मी?"
शीला ने एक लंबी सांस छोड़कर कहा "तू उससे मिले उससे पहले मैं उस लड़के को परखूँगी"
वैशाली का दिमाग घूम गया.. इसमें परखना क्या?? ये कोई हीरे मोती है जो इन्हें मम्मी परखेगी?? पर फिर उसका माथा ठनका.. अपनी मम्मी के किस्से उसने भी बहोत सुने थे.. वह समझ गई.. की मम्मी का दिल बाबिल पर आ गया है.. चलो, कोई बात नहीं, इसी बहाने मम्मी मान तो गई.. खुद को तसल्ली देते हुए वैशाली ने कहा
वैशाली: "ठीक है मम्मी, तो पहले आप चले जाइए अंदर"
शीला: "नहीं वैसे सीधे सीधे नहीं"
वैशाली को कुछ समझ नहीं आया, उसने कहा "मतलब? आप कहना क्या चाहती हो?"
शीला ने बड़े ही कमीने अंदाज में कहा "मेरे कहने का मतलब यह है की पहले तू अंदर जा.. और ऊपर ऊपर से शुरुआत कर.. फिर ऐसा दिखावा करेंगे की मैंने तुम दोनों को रंगेहाथों पकड़ लिया..!!"
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वैशाली को कुछ समझ नहीं आ रहा था की शीला क्या खेल खेल रही थी, वह बोली "पर ऐसा क्यों मम्मी?"
शीला ने एक शैतानी मुस्कान के साथ कहा "ऐसा करने से लड़का हमारे दबाव में रहेगा.. किसी के सामने बकेगा नहीं.. मैंने अनुभव से सीखा है, ऐसे मामलों में अगर सामने वाला हमारे कंट्रोल में हो तो आसानी रहती है.. !!"
वैशाली ने जवाब नहीं दिया.. शीला के अगले आदेश के लिए वह तैयार बैठी थी
शीला: "एक काम कर, मैं घर से बाहर चली जाती हूँ, तू मुझे घर की चाबी दे दे.. और फिर मेरे जाने के बाद तू उसके साथ अंदर चली जाना.. फिर कहना की मैं चली गई हूँ और रास्ता साफ है"
वैशाली: "ओके मम्मी" कहते हुए घर के लैच-लॉक की चाबी शीला को दे दी.. शीला तुरंत दरवाजे के बाहर चली गई और वैशाली बेडरूम के अंदर चली आई.. अंदर बेड के पीछे डरा हुआ बाबिल दुबककर बैठा था.. उसकी बड़ी बड़ी आँखों से वैशाली की ओर देख रहा था.. देखकर मन ही मन वैशाली की हंसी छूट गई.. वैसे आधे घंटे पहले उसका हाल भी कुछ वैसा ही तो था..
बाबिल ने घबराते हुए कहा "मैं घर जाऊ?"
वैशाली ने मुस्कुराकर बाबिल के लंड को पकड़ते हुए कहा "जिस काम के लिए आया था वो करेगा नही??"
असमंजस में बाबिल ने पूछा "पर वो मेहमान..!! वो मेडम"
वैशाली: "वो तो कब की चली गई.. अब कोई नहीं है घर पर"
वैशाली उस लड़के का लंड दबोचकर उसके गले को चूमने लगी.. बाबिल की घबराहट धीरे धीरे कम हो रही थी.. गर्दन पर चूमते हुए वैशाली बाबिल के पीछे की तरफ चली गई और पीछे से उसे बाहों में भर लिया
वैशाली की चूचियाँ बाबिल के पीठ पर धँस गई.. वैशाली अपना हाथ आगे लाकर बाबिल के लंड पर ले आई और पतलून के बाहर निकालकर पकड़ कर मसलने लगी..
‘आहह.. मालकिन..’ बाबिल के मुँह से मस्ती भरी ‘आहह’ निकल गई और आँखें बंद हो गईं..
कुछ ही पलों में बाबिल का लंड तन कर अपनी औकात पर आ गया..
इस बात से अंजान कि दरवाजे पर खड़ी शीला ये सब देखते हुए अपने पेटीकोट के ऊपर से अपनी चूत को मसल रही थी..
शीला को अपनी आँखों पर यकीन नहीं हो रहा था..बाबिल का लंबा और मोटा लंड किसी मूसल के तरह खड़ा हुआ था.. जिसे देखते ही शीला की चूत पनियाने लगी..
वैशाली और बाबिल एक दूजे में खोए हुए थे की तभी अचानक से दरवाजा हिलने की आवाज़ से दोनों चौंक गए..
चौंका तो सिर्फ़ बाबिल था और वैशाली तो सब जानते हुए बनने का नाटक कर रही थी..
जैसे ही बाबिल की नज़र शीला पर पड़ी.. मानो उसकी गांड फट गई हो..
वैशाली तो कब से पीछे हट कर शीला की तरफ पीठ करके सर झुकाए खड़ी थी..
बाबिल कभी शीला की तरफ देखता.. कभी वैशाली की तरफ देखता.. तो कभी अपने झटके खाते हुए लंड की तरफ देखता..
डर के मारे थरथर कांप रहे बाबिल को देखकर शीला के होंठों पर वासना से भरी मुस्कान फ़ैल गई..
जिससे देख बाबिल उलझन में पड़ गया..!! यह भला गुस्सा होने की जगह मुस्कुरा क्यों रही है??
‘वो अपना पजामा ठीक कर..’ शीला ने बाबिल के लंड की तरफ इशारा करते हुए कहा..
‘और तुम वैशाली ज़रा बाहर आओ.. ये क्या गुल खिला रही थी?’
यह कह कर शीला वापिस ड्रॉइंग रूम में चली आई.. खेल शुरू हो चुका था.. वैशाली अपनी हँसी रोकते हुए कमरे से बाहर चली गई और बाबिल वहीं ठगा सा खड़ा रह गया.. कुछ पलों के लिए मानो उसके दिमाग़ ने काम करना बंद कर दिया हो..
जब उसे होश सा आया तब उसने लपक कर अपनी ट्रेकपेंट को ऊपर किया.. उसका पूरा बदन डर से थरथर काँप रहा था.. अब क्या होगा?
बाबिल अपना सिर पकड़कर बिस्तर पर बैठ गया..
वैशाली के जाने के बाद बाबिल उस कमरा में ऐसा महसूस कर रहा था, जैसे वो किसी क़ैद खाने में बैठा हो और अभी बाहर से कुछ लोग आयेंगे और उसकी पिटाई शुरू हो जाएगी..
एक अजीब सा सन्नाटा उस कमरा में फैला हुआ था.. तभी कमरे के बाहर से कुछ क़दमों की आहट हुई..
जिससे सुन कर बाबिल के हाथ-पैर काँपने लगे.. लेकिन तभी वैशाली कमरे में दाखिल हुई, उसके चेहरे से ऐसा लग रहा था.. जैसे उसको कोई फर्क ही ना पड़ा हो..
बाबिल ने हकलाते हुए पूछा "क्या.. क्या हुआ... कौन है वो? अब क्या होगा मालकिन?"
वैशाली ने एकदम गंभीर चेहरा बनाकर बिस्तर पर बैठते हुए कहा " वो मेरी मम्मी थी जिन्हों ने हमे पकड़ लिया.. बहोत गुस्से वाली है.. तेरी कंप्लेन पुलिस में कर देने वाली थी.. जैसे तैसे मैंने उन्हें रोक लिया है... सुन बाबिल, अब सब तेरे हाथ में है.. अगर तू चाहे तो ये बात माँ किसी को नहीं बताएगी.. पुलिस को भी नहीं"
बाबिल को कुछ समझ नहीं आ रहा था, वह बोल "पर मैं.. मतलब? पर कैसे मालकिन?"
वैशाली: "तू एक काम कर.. यहाँ पर बैठ… मम्मी थोड़ी देर में यही आ रही हैं.. ध्यान रहें, वो तुझसे जो भी करने को कहें कर लेना.. मना मत करना वरना कहीं वो पुलिस में चली गई तो पूरी ज़िंदगी जेल की चक्की पिसेगा"
यह कह कर वैशाली बिना बाबिल से आँख मिलाए कमरे से बाहर निकल गई, एक बार फिर से वो जान निकाल देने वाला सन्नाटा कमरा में छा गया..
बाबिल को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वो क्या करे.. वह दोनों क्या चाहते थे उससे आखिर..!!!
वैशाली जब बेडरूम से बाहर निकलकर दरवाजा अपने पीछे बंद कर रही थी तभी शीला उसके सामने खड़ी हुई थी..
दोनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा और फिर दोनों के होंठों पर वासना से भरी मुस्कान फ़ैल गई..
‘ध्यान से मम्मी.. लड़का दिखने में भोला सा है पर उसका वो.. बहुत तगड़ा है..’ वैशाली ने शीला के पास से गुज़रते हुए कहा..
वैशाली की बात सुन कर शीला मुस्कुराई.. ‘अपनी माँ को कम आँकने की गलती मत करना कभी..’
वैशाली ने पीछे मुड़ कर शीला की तरफ देखा और एक बार फिर दोनों के होंठों पर मुस्कान फ़ैल गई, फिर वैशाली किचन की ओर चली गई..
उधर कमरे में बैठा, बाबिल अपनी किस्मत को कोस रहा था कि आख़िर वो वैशाली के साथ यहाँ क्यों आया.. क्यों कविता मालकिन के कहने पर वो चला आया.. आज अगर बच गया तो अब बड़ी वाली रमिला मालकिन के अलावा किसी के पास नहीं जाएगा..
एक बार फिर से कमरे के बाहर से आ रही क़दमों की आहट सुन कर बाबिल के रोंगटे खड़े हो गए..
वो जानता था कि अन्दर कौन आने वाला है और वो बिस्तर से खड़ा हो गया..
जैसे ही शीला उसके कमरा में आई तो उसने अपने सर को झुका लिया..
शीला ने एक बार सर झुकाए खड़े बाबिल की तरफ देखा, फिर पलट कर दरवाजे को बंद कर दिया.. दरवाजा बंद होने की आवाज़ सुन कर बाबिल एकदम से चौंक गया..
उसे समझ में नहीं आया कि आख़िर शीला ने दरवाजा किस लिए बंद किया है..
दरवाजा बंद करने के बाद शीला मदहोश अंगड़ाई लेकर बाबिल की तरफ देखते हुए, बिस्तर के पास जाकर खड़ी हो गई..
शीला का मांसल जिस्म अपने जलवे बिखेर रहा था, उसकी गदराई कमर का मांस बाहर निकला हुआ था और नाभि इतनी गहरी थी मानो कुदरत ने उसे दूसरी चूत से नवाजा हो
बाबिल ने तिरछी नज़रों से शीला की तरफ देखा, जो उसकी तरफ देख कर मंद-मंद मुस्करा रही थी..
अपने सामने खड़ी शीला का ये रूप देख उससे यकीन नहीं हो रहा था.. इतने बड़े बड़े स्तनों वाली स्त्री उसने आज तक नहीं देखी थी
उससे देखते ही, बाबिल का मन मचल उठा.. पर कुछ करने या कहने के हिम्मत कहाँ बाकी थी..वो तो किसी मुजरिम की तरह उसके सामने खड़ा था..
‘ओए छोरे इधर आ..’ शीला ने बिस्तर पर बैठते हुए कहा..
बाबिल ने एकदम से चौंकते हुए कहा "जी क्या..?"
शीला: "जी.. जी.. क्या लगा रखा है, इधर आकर खड़ा हो…ठीक मेरे सामने..!!"
बाबिल बिना कुछ बोले शीला के सामने बिस्तर के पास जाकर खड़ा हो गया.. अब भले ही वो सर झुका कर खड़ा था, पर ब्लाउज में से शीला की झाँकती विराट चूचियों का दीदार उसे साफ़ हो रहा था, क्योंकि शीला उसके सामने बिस्तर पर बैठी हुई थी..
‘क्या कर रहा था..तू मेरे बेटी के साथ?’ शीला ने कड़क आवाज़ में बाबिल से पूछा, जिसे सुनते ही बाबिल की गांड फटने को आ गई.. पर वो बिना कुछ बोले खड़ा रहा..
‘सुना नहीं.. क्या पूछा मैंने?’
इस बार बाबिल के लिए चुप रहना नामुनकिन था..
‘वो मैं नहीं.. मालकिन कर रही थीं..’ बाबिल ने शीला की तरफ देखते हुए कहा..
‘अच्छा तो तेरे मतलब सब ग़लती मेरी बेटी की है.. इधर आ..’
शीला ने बाबिल का हाथ पकड़ कर उसे और पास खींच लिया..
बाबिल अवाक सा उसकी ओर देख रहा था..
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वैशाली और बाबिल के बीच चुदाई का खेल शुरू होने ही वाला था की तब डॉरबेल बजी.. शीला लौट चुकी थी.. हालांकि वैशाली ने अपने झूठ को छुपाने की भरसक कोशिश की पर शीला की शातिर आँखों से सच छुप नहीं पाया.. शीला पहले तो वैशाल पर उखड़ पड़ती है पर अपनी बेटी की समस्या को सुनने के बाद उसका मन बदलता है.. वैशाली से पहले वो बाबिल को परखना चाहती है..
अब आगे..
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इससे पहले कि उसे कुछ समझ आता, शीला ने उसके मुरझाए हुए लंड को पतलून के ऊपर से पकड़ लिया और ज़ोर से मसल दिया..
‘आह दर्द हो रहा.. मालकिन ओह्ह..’
बाबिल ने शीला का हाथ हटाने की कोशिश करते हुए कहा..
शीला ने बाबिल की तरफ वासना से भरी नज़रों से देखते हुए कहा "क्यों रे, अब तो ये ऐसे मुरझा गया है…जैसे इसमें जान ही ना हो…पहले कैसे इतना कड़क खड़ा था.. साले.. मेरी जवान बेटी पर ग़लत नज़र रखता है.." ये कहते हुए शीला ने उसके लंड को थोड़ा और ज़ोर से मसल दिया..
बाबिल की तो जैसे जान ही निकल गई, उसके चेहरे से साफ़ पता चल रहा था कि वो कितने दर्द में है..
उसके चेहरे को देख कर शीला को अंदाज़ा हुआ कि उसने कुछ ज्यादा ही ज़ोर से उसके लंड को मसल दिया..
शीला ने उसके लंड को छोड़ दिया, फिर उसके लंड को हथेली से रगड़ने लगी..
बाबिल को जैसे लकवा मार गया हो.. वो बुत की तरह शीला को देख रहा था, जो उसकी तरफ देखते हुए, एक हाथ से अपनी चूची को ब्लाउज के ऊपर से मसल रही थी और दूसरे हाथ से बाबिल के लंड को सहला रही थी..
शीला "क्यों रे.. मेरे बेटी को चोदने वाला था..!! एक बार मुझे भी चोद कर देख.. देख फिर कितना ज्यादा मज़ा दूँगी.." ये कह कर उसने एक झटके से बाबिल की पतलून उतार दी..
इससे पहले कि घबराए हुए बाबिल को कुछ समझ आता.. उसकी पेंट घुटनों तक आ चुकी थी और उसका अधखड़ा लंड शीला के हाथ की मुठ्ठी में था..
"ये… ये आप क्या रही हैं मालकिन… ओह्ह नहीं मालकिन आ आहह.."
शीला ने उसके लंड के सुपाड़े पर चमड़ी पीछे सरका दी और गुलाबी सुपाड़े जो कि किसी छोटे सेब जितना मोटा था, उसे देख शीला कर आँखों में वासना छा गई..
शीला के मदमस्त भोसड़े की फांकें फड़फने लगीं और उनकी दीवारों ने कामरस की बूंदे बहाना शुरू कर दिया..
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क्योंकि अब बाबिल का लंड अपने असली विकराल रूप में आना शुरू हो गया था, शीला ने अपने अंगूठे के नाख़ून से बाबिल के लंड के सुपाड़े के चारों तरफ कुरेदा..
तो बाबिल की मस्ती भरी ‘आहह’ निकल गई और अगले ही पल उसे अपने लंड का सुपाड़ा किसी गरम और गीली जगह में जाता हुआ महसूस हुआ..
उससे ऐसा लगा जैसे किसी नरम और रसीले अंग ने उसके लंड के सुपाड़े को चारों तरफ से कस लिया हो..
जब बाबिल ने अपनी मस्ती से भरी आँखों को खोल कर नीचे देखा..
तो जो हो रहा था, उसे अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ..
शीला ने एक हाथ से उसके टट्टों को मुठ्ठी में पकड़ रखा था.. उसके लंड का सुपाड़ा शीला के होंठों के अन्दर था और दूसरे हाथ से शीला अपनी चूची को मसल रही थी..
ये नज़ारा देख बाबिल एकदम से हैरान रह गया, शीला ने उसके लंड के सुपाड़े को चूसते हुए.. ऊपर बाबिल की तरफ देखा.. दोनों की नज़रें आपस में जा मिलीं..
बाबिल का लंड अपनी पूरी औकात पर आ चुका था..
जिस हाथ की मुठ्ठी में शीला ने बाबिल के लंड को भर रखा था, उसे यकीन नहीं हो रहा था कि इस उम्र के लड़के का लंड भी इतना बड़ा हो सकता है..!!
अचानक से शीला ने बाबिल के फनफनाते हुए लंड को अपने मुँह से बाहर निकाला और बिस्तर पर लेट गई..
उसकी टाँगें बिस्तर के नीचे लटक रही थीं..उसने अपनी टाँगों को उठा कर घुटनों से मोड़ा और अपने पेटीकोट को टाँगों से ऊपर उठाते हुए, अपनी कमर तक चढ़ा लिया..
यह देख कर बाबिल की हालत और खराब हो गई..
शीला की चूत की फाँकें फैली हुई थीं और उसमें से कामरस एक पतली सी धार के रूप में बह कर उसकी गांड के छेद की तरफ जा रहा था..उसकी चूत का छेद कभी सिकुड़ता और कभी फैलता..
बाबिल बिना अपनी पलकों को झपकाए हुए, उसकी तरफ देख रहा था..
यह देख कर शीला के होंठों पर कामुकता भरी मुस्कान फ़ैल गई..
‘देख.. तेरे लंड के लिए पानी छोड़ रही है..’ शीला ने अपनी चूत की फांकों को फ़ैलाते हुए अंदर के गुलाबी छेद को दिखाते हुए कहा..
यह सुन कर बाबिल की ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा.. अब उसे समझ में आ रहा था यह दोनों माँ-बेटी उसके साथ खेल रही थी
बाबिल को यूँ खड़ा देख कर शीला से रहा नहीं गया, उसने अपना हाथ आगे बढ़ा कर बाबिल के लंड को पकड़ा और उसके लंड के गुलाबी मोटे सुपाड़े को अपनी गीली चूत के छेद पर रगड़ने लगी..
बाबिल के लंड के गरम और मोटे सुपाड़े का स्पर्श अपनी चूत के छेद पर महसूस करते ही.. शीला के बदन में मस्ती की लहर दौड़ गई..
शीला की वासना से भरी हुई आँखें बंद हो गईं..
उसने बड़ी ही अदा के साथ एक बार अपने होंठों को अपने दाँतों से चबाया और काँपती हुई आवाज़ में बाबिल से बोली "ओह्ह.. बेटा डाल दे.. मेरी चूत में अपना ये मोटा लंड पेल दे… चोद मुझे साले ओह्ह..!!"
बाबिल का लंड अब पूरी तरह से तन चुका था और पूरे जोश में आ चुका था..
शीला उसके लंड को अपनी दो उँगलियों और अंगूठे के मदद से पकड़े हुए, अपनी चूत के छेद पर उसका लंड का सुपाड़ा टिकाए हुए थी..
बाबिल ने शीला की टाँगों को घुटनों से पकड़ कर मोड़ कर ऊपर उठाया और अपनी पूरी ताक़त के साथ एक जोरदार झटका मारा..
बाबिल का लंड शीला की चूत की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ तेज़ी के साथ अन्दर घुसता चला गया.. और धनाधन चोदने लगा.. इतनी अनुभवी और चुदक्कड़ शीला भी इन प्रचण्ड प्रहारों से स्तब्ध हो कर रह गई.. वह एकदम से कराह उठी.. पर तब तक बाबिल का ८ इंच लंबा पूरा का पूरा लंड शीला के भोसड़े की गहराईयों में उतर चुका था..
शीला: "हइई.. आह्ह.. ओह्ह.... ओह हरामी.. धीरे कर थोड़ा.. ओह्ह ओह्ह निकाल साले.. फाड़ के रख दी.. मादरचोद.. मेरी चूत ओह्ह..!!"
शीला ने अपने कंधों और गर्दन को बिस्तर से उठा कर अपनी चूत की तरफ देखने की कोशिश करते हुए कहा..
बाबिल भी शीला के कराहने की आवाज़ सुन कर थोड़ा डर गया और अपना लंड शीला की चूत से बाहर निकालने लगा..
अभी उसने अपना लंड आधा ही बाहर निकाला था कि शीला ने उससे कंधों से पकड़ कर अपने ऊपर खींच लिया..
जिससे बाबिल का लंड एक बार फिर शीला की चूत की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ अन्दर घुस कर उसके बच्चेदानी के मुँह से जा टकराया..
शीला ने अपने ब्लाउज के बटन खोले.. ब्रा को सरकाया और सिसकते हुए बाबिल के चेहरे को अपनी चूचियों में दबा लिया.. इतने विशाल बबलों के बीच अपना चेहरा दबा हुआ पाकर बाबिल तो जैसे धन्य ही हो गया..
बाबिल अब जैसे पागल हो चुका था… निप्पलों को चूसते हुए वह शीला के खरबूजों को मसलने लगे..
शीला का रोम-रोम रोमांच से भर उठा.. नीचे से उसके चूतड़ ऊपर की तरफ उछल पड़े.. यह सीधा संकेत था कि वो बाबिल का पहला जोरदार वार झेल कर अब चुदवाने के लिए तड़प रही है..
बाबिल शीला के ऊपर लेटा हुआ दोनों हाथों से शीला के मम्मों को मसलते हुए हुमच रहा था.. शीला की आँखें फिर से मस्ती में बंद होने लगी थीं.. उसकी मादक सिसकियाँ पूरे कमरे में गूँज रही थीं..
अपनी निप्पल को पकड़कर बाबिल के मुंह में ठुसते हुए शीला बोली "ओह्ह ये ले.. ठीक से चूस्स्स इसे.. ओह्ह ओह्ह ह आह्ह..!!" शीला ने नीचे से अपनी कमर को हिलाते हुए कहा..
बाबिल ने भी झट से शीला की चूची को आधे से ज्यादा मुँह में भर लिया और ज़ोर-ज़ोर से चूसना चालू कर दिया..इतने विशाल स्तन थे की उसकी दोनों हथेलियों में मिलाकर भी शीला का एक स्तन नहीं आता था..
बाबिल ने अपने लंड को आधे से ज्यादा बाहर निकाला और फिर पूरी ताक़त से अन्दर पेल दिया.. बाबिल का लंड पिछले आधे घंटे से खड़ा था.. शीला का भोसड़ा किसी तंदूर से भी ज्यादा गरम था और वह गर्मी अब बाबिल के बर्दाश्त से बाहर हो रही थी..
वो बिस्तर के किनारे खड़ा हो गया और शीला की टाँगों को घुटनों से मोड़ कर ऊपर उठा कर पूरी तरह से फैला दिया..
जिससे उसकी चूत ठीक उसके लंड के लेवल पर आ गई और बाबिल तेज़ी से अपने लंड को शीला की चूत की अन्दर-बाहर करने लगा..
बरसों बाद शीला इतने जवान लंड से चुद रही थी.. इससे पहले इतना जवान साथी जो था.. वह था.. उसका खुद का दामाद पिंटू.!!! तब वो कविता का आशिक था.. और उन दोनों के मिलने का जुगाड़ शीला के घर पर ही होता था चूंकि तब मदन अमरीका गया हुआ था.. तभी एक बार मौका पाकर, शीला और रेणुका ने साथ मिलकर पिंटू को ऐसा रगड़ा था की वो रो दिया था..
बाबिल का मोटा लंड पाकर शीला के मानो ख़ुशी के आँसू बाहर निकालने लगी.. ऐसा तगड़ा लंड तो केवल रसिक का ही था..
शीला का भोसड़ा सरपट गीला हो चुका था और बाबिल का लंड भी शीला की चूत से निकल रहे गाढ़े पानी से एकदम सन गया था..
अब बाबिल का लंड ‘फच-फच’ की आवाज़ करता हुआ तेज़ी से शीला की चूत के अन्दर-बाहर हो रहा था और वह भी अपनी गांड को उछाल कर बाबिल का साथ दे रही थी..
उसका पूरा बदन बाबिल के लगाए हुए हर धक्के के साथ हिल रहा था.. उसके बबले यहाँ वहाँ झूल रहे थे और शीला अपने सर को इधर-उधर पटकते हुए मछली के जैसे तड़प रही थी..
शीला कभी अपनी दोनों चूचियों को मसलती, कभी वो बिस्तर की चादर को अपने हाथों में दबोच लेती..
उसकी चूचियाँ हर धक्के के साथ हिल रही थीं, जिससे देख कर बाबिल का जोश और बढ़ता जा रहा था..
शीला "ओह बेटा धीरेए ओह्ह ओह्ह ह आह्ह.. उँघह धीरेए ऊहह निकाल जाएगा तेरा.. ओह्ह मज़ा आ गया .. ओहह.. आह्ह.. धीरेए ओह्ह ओह्ह ओह्ह..!!"
शीला की भोसड़े ने भरसक पानी छोड़ना चालू कर दिया और वो अपनी गांड को पागलों की तरह उछालते हुए झड़ने लगी..
उसने अपने बिखरे हुए बालों को नोचना शुरू कर दिया..
पर बाबिल अभी भी पूरी रफ़्तार के साथ शीला की चूत में अपना लंड अन्दर-बाहर कर रहा था..
शीला का पूरा बदन एकदम से ऐंठ चुका था, पर बाबिल के ताबड़तोड़ धक्कों ने एक बार फिर से उसकी चूत को ढीला कर दिया था..
शीला झड़ने के बाद पूरी तरह शांत हो चुकी थी और अपनी टाँगों को फैलाए हुए बाबिल के लंड को अपनी चूत में मज़े से ले रही थी..
आख़िर ५ मिनट की और चुदाई के बाद शीला दूसरी बार झड़ गई और इस बार बाबिल के लंड ने भी उसकी भोसड़े में अपना वीर्य उड़ेल दिया..
जैसे ही बाबिल का लंड सिकुड़ कर बाहर आया.. शीला जल्दी से उठ कर बाथरूम चली गई..
बाबिल ने अपने मुरझाए हुए लंड की ओर देखा, वो शीला की चूत की कामरस से एकदम भीगा हुआ था..
उसने कमरे में इधर-उधर नज़र दौड़ाई.. तो उसे फर्श पर पड़ी शीला की साड़ी नज़र आई.. वो साड़ी के पास गया और उसके एक छोर को पकड़ कर उससे अपना लंड साफ़ करने लगा.. तभी वैशाली अचानक से कमरे में आ गई..
उसने बाबिल के लंड की तरफ देखा.. जो शिकार करने के बाद लटक रहा था..
वैशाली ने शैतानी मुस्कान के साथ कहा "क्यों मज़ा आया ना?"
बाबिल वैशाली की बात सुन कर एकदम से हैरान रह गया.. उससे यकीन नहीं हो रहा था कि वैशाली उससे अपनी माँ के बारे में पूछ रही है..
हँसते हुए वैशाली कमरे से बाहर चली गई..
बाबिल खड़ा हुआ और बिना अपना पेंट पहने नंगा ही बाथरूम की ओर गया.. दरवाजा सिर्फ अटका हुआ था, बंद नहीं था.. अंदर से कुछ आवाज़ सुनाई दे रही थी..
उसने दरवाजे पर कान लगाया तो शीला के मूतने की सुरीली सी आवाज़ उसके कानों में पड़ी… वह दरवाजे के पास खड़ा होकर अन्दर झाँकने लगा..
अन्दर का नज़ारा देख कर एक बार फिर से बाबिल का लंड पूरे उफान पर आ गया..
बड़े बड़े गोरे चूतड़ों को उजागर कर शीला मूतने के बाद झुक कर अपनी चूत को एक कपड़े से साफ़ कर रही थी.. पीछे खड़े बाबिल के सामने शीला के बड़े-बड़े चूतड़ों के बीच लबलबा रही चूत का गुलाबी छेद उस पर कहर बरपा रहा था..
शीला को इस बात का पता नहीं था कि बाबिल उसके पीछे खड़े होकर उसकी बड़ी गांड को देख रहा है..
अगले ही पल बाबिल का लंड किसी सांप की तरह फुंफकारने लग गया ..
शीला अपनी चूत की फांकों को अपनी उँगलियों से सहला रही थी, उसके होंठों पर ख़ुशी से भरी हुई मुस्कान फैली हुई थी..
अचानक से उससे अपनी चूत पर एक बार फिर से बाबिल के लंड के मोटे और गरम सुपाड़े का अहसास हुआ.. जिसे महसूस करते ही.. उसके पूरे बदन में मस्ती की कंपकंपी दौड़ गई..
‘आह क्या कर रहा है ओह्ह..छोड़ मुझे!’
इसके पहले कि शीला कुछ संभल पाती.. बाबिल का लंड उसकी चूत की फांकों को फैला कर चूत के छेद पर जा लगा..
‘ओह्ह आह सीईईई..’ शीला के मुँह से मस्ती भरी ‘आह’ निकल गई..
शीला ने एक बार अपनी गर्दन पीछे घुमा कर बाबिल की तरफ अपनी वासना से भरी मस्त आँखों से देखा और मुस्करा कर फिर से आगे देखते हुए.. अपने दोनों हाथों को उस पुराने मेज पर टिका कर झुक गई..
फिर बड़ी ही अदा के साथ अपने पैरों को फैला कर पीछे से अपनी गांड ऊपर की तरफ उठा लिया..
अब बाबिल का लंड बिल्कुल शीला की चूत के सामने था..
बाबिल ने शीला के चूतड़ों को दोनों तरफ से पकड़ कर फैला दिया और अपने लंड को चूत के छेद पर टिका दिया..
इससे पहले कि बाबिल अपना लंड शीला की चूत में पेलने के लिए धक्का मारता.. शीला ने कामातुर होकर अपनी गांड को पीछे की तरफ धकेलना शुरू कर दिया..
बाबिल के लंड का मोटा सुपाड़ा शीला की चूत के छेद को फ़ैलाता हुआ अन्दर घुस गया.. शीला अपनी चूत के छेद के छल्ले को बाबिल के लंड के मोटे सुपाड़े पर कसा हुआ साफ़ महसूस कर पा रही थी..
कामवासना का आनन्द चरम पर पहुँच गया.. शीला की चूत ने एक बार फिर से अपने कामरस का खजाना खोल दिया..
शीला की मस्ती का कोई ठिकाना नहीं था, उसकी चूत में सरसराहट बढ़ गई थी और वो बाबिल के लंड को जड़ तक अपनी चूत में लेने के लिए मचल रही थी..
"ओह्ह आह.. घुसाआ.. दे रे.. छोरे ओह फाड़ दे.. मेरी चूत ओह्ह आह… और ज़ोर से मसल मेरे गांड को ओह्ह हाँ.. ऐसे ही…"
बाबिल बुरी तरह से अपने दोनों हाथों से शीला की गांड को फैला कर मसल रहा था.. उसके लंड का सुपाड़ा शीला की चूत में फँसा हुआ, शीला को मदहोश किए जा रहा था.. बाबिल को भी अपने लंड के सुपाड़े पर शीला की चूत की गरमी साफ़ महसूस हो रही थी..
उसने शीला के चूतड़ों को दबोच कर दोनों तरफ फैला लिया और अपनी गांड को तेज़ी से आगे की तरफ धकेला.. बाबिल के लंड का सुपाड़ा शीला की चूत की दीवारों को चीरता हुआ आगे बढ़ गया, शीला के मुँह से एक घुटी हुई चीख निकल गई.. जो बाथरूम के दीवारों में ही दब कर रह गई..
बाबिल का आधे से अधिक लंड शीला की चूत में समा चुका था..
शीला ने पीछे की तरफ अपनी गांड को ठेल कर अपनी चूत में बाबिल का मोटा लंड लेते हुए कहा "आहह.. आह जालिम मेरी चूत.. ओह फाड़ दी… ओह्ह ओह तेरे इस मूसल लंड की तो मैं आह.. आह.. कायल हो गई उह्ह.. ओह्ह चोद दे.. मुझे.. और तेज धक्के मार.."
बाबिल भी अब नौकर और मालकीं की मर्यादाओं को भूल कर शीला के चूतड़ों को फैला कर अपने लंड को उसकी चूत में अन्दर-बाहर कर रहा था..बाबिल के हर जबरदस्त धक्के के साथ उसकी चूचियाँ तेज़ी से हिल रही थीं..
"ओह रुक बेटे.. ज़रा ओह्ह ओह्ह.. मैं खड़ी-खड़ी थक गई हूँ..ओह्ह ओह्ह आह्ह.."
बाबिल ने अपने लंड को शीला की चूत से बाहर निकाल लिया.. शीला सीधी होकर उसकी तरफ पलटी और बाबिल के होंठों पर अपने रसीले होंठों को रखते हुए उसे से चिपक गई..
बाबिल ने उसकी कमर से अपनी बाँहों को पीछे ले जाकर उसके चूतड़ों को दबोच-दबोच कर मसलना शुरू कर दिया..
बाबिल का विकराल लंड शीला के पेट के निचले हिस्से पर रगड़ खा रहा था..
‘चल अंदर कमरे में चलते हैं..’ शीला ने चुंबन तोड़ते हुए कहा और फिर बाथरूम से निकल कर एक बेड के पास आ गई..
Wow bahut hi mast hai Sheela, apni beti ke ashiq se hi chud rahi hai.पिछले अपडेट में आपने पढ़ा की..
वैशाली और बाबिल के बीच चुदाई का खेल शुरू होने ही वाला था की तब डॉरबेल बजी.. शीला लौट चुकी थी.. हालांकि वैशाली ने अपने झूठ को छुपाने की भरसक कोशिश की पर शीला की शातिर आँखों से सच छुप नहीं पाया.. शीला पहले तो वैशाल पर उखड़ पड़ती है पर अपनी बेटी की समस्या को सुनने के बाद उसका मन बदलता है.. वैशाली से पहले वो बाबिल को परखना चाहती है..
अब आगे..
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इससे पहले कि उसे कुछ समझ आता, शीला ने उसके मुरझाए हुए लंड को पतलून के ऊपर से पकड़ लिया और ज़ोर से मसल दिया..
‘आह दर्द हो रहा.. मालकिन ओह्ह..’
बाबिल ने शीला का हाथ हटाने की कोशिश करते हुए कहा..
शीला ने बाबिल की तरफ वासना से भरी नज़रों से देखते हुए कहा "क्यों रे, अब तो ये ऐसे मुरझा गया है…जैसे इसमें जान ही ना हो…पहले कैसे इतना कड़क खड़ा था.. साले.. मेरी जवान बेटी पर ग़लत नज़र रखता है.." ये कहते हुए शीला ने उसके लंड को थोड़ा और ज़ोर से मसल दिया..
बाबिल की तो जैसे जान ही निकल गई, उसके चेहरे से साफ़ पता चल रहा था कि वो कितने दर्द में है..
उसके चेहरे को देख कर शीला को अंदाज़ा हुआ कि उसने कुछ ज्यादा ही ज़ोर से उसके लंड को मसल दिया..
शीला ने उसके लंड को छोड़ दिया, फिर उसके लंड को हथेली से रगड़ने लगी..
बाबिल को जैसे लकवा मार गया हो.. वो बुत की तरह शीला को देख रहा था, जो उसकी तरफ देखते हुए, एक हाथ से अपनी चूची को ब्लाउज के ऊपर से मसल रही थी और दूसरे हाथ से बाबिल के लंड को सहला रही थी..
शीला "क्यों रे.. मेरे बेटी को चोदने वाला था..!! एक बार मुझे भी चोद कर देख.. देख फिर कितना ज्यादा मज़ा दूँगी.." ये कह कर उसने एक झटके से बाबिल की पतलून उतार दी..
इससे पहले कि घबराए हुए बाबिल को कुछ समझ आता.. उसकी पेंट घुटनों तक आ चुकी थी और उसका अधखड़ा लंड शीला के हाथ की मुठ्ठी में था..
"ये… ये आप क्या रही हैं मालकिन… ओह्ह नहीं मालकिन आ आहह.."
शीला ने उसके लंड के सुपाड़े पर चमड़ी पीछे सरका दी और गुलाबी सुपाड़े जो कि किसी छोटे सेब जितना मोटा था, उसे देख शीला कर आँखों में वासना छा गई..
शीला के मदमस्त भोसड़े की फांकें फड़फने लगीं और उनकी दीवारों ने कामरस की बूंदे बहाना शुरू कर दिया..
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क्योंकि अब बाबिल का लंड अपने असली विकराल रूप में आना शुरू हो गया था, शीला ने अपने अंगूठे के नाख़ून से बाबिल के लंड के सुपाड़े के चारों तरफ कुरेदा..
तो बाबिल की मस्ती भरी ‘आहह’ निकल गई और अगले ही पल उसे अपने लंड का सुपाड़ा किसी गरम और गीली जगह में जाता हुआ महसूस हुआ..
उससे ऐसा लगा जैसे किसी नरम और रसीले अंग ने उसके लंड के सुपाड़े को चारों तरफ से कस लिया हो..
जब बाबिल ने अपनी मस्ती से भरी आँखों को खोल कर नीचे देखा..
तो जो हो रहा था, उसे अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ..
शीला ने एक हाथ से उसके टट्टों को मुठ्ठी में पकड़ रखा था.. उसके लंड का सुपाड़ा शीला के होंठों के अन्दर था और दूसरे हाथ से शीला अपनी चूची को मसल रही थी..
ये नज़ारा देख बाबिल एकदम से हैरान रह गया, शीला ने उसके लंड के सुपाड़े को चूसते हुए.. ऊपर बाबिल की तरफ देखा.. दोनों की नज़रें आपस में जा मिलीं..
बाबिल का लंड अपनी पूरी औकात पर आ चुका था..
जिस हाथ की मुठ्ठी में शीला ने बाबिल के लंड को भर रखा था, उसे यकीन नहीं हो रहा था कि इस उम्र के लड़के का लंड भी इतना बड़ा हो सकता है..!!
अचानक से शीला ने बाबिल के फनफनाते हुए लंड को अपने मुँह से बाहर निकाला और बिस्तर पर लेट गई..
उसकी टाँगें बिस्तर के नीचे लटक रही थीं..उसने अपनी टाँगों को उठा कर घुटनों से मोड़ा और अपने पेटीकोट को टाँगों से ऊपर उठाते हुए, अपनी कमर तक चढ़ा लिया..
यह देख कर बाबिल की हालत और खराब हो गई..
शीला की चूत की फाँकें फैली हुई थीं और उसमें से कामरस एक पतली सी धार के रूप में बह कर उसकी गांड के छेद की तरफ जा रहा था..उसकी चूत का छेद कभी सिकुड़ता और कभी फैलता..
बाबिल बिना अपनी पलकों को झपकाए हुए, उसकी तरफ देख रहा था..
यह देख कर शीला के होंठों पर कामुकता भरी मुस्कान फ़ैल गई..
‘देख.. तेरे लंड के लिए पानी छोड़ रही है..’ शीला ने अपनी चूत की फांकों को फ़ैलाते हुए अंदर के गुलाबी छेद को दिखाते हुए कहा..
यह सुन कर बाबिल की ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा.. अब उसे समझ में आ रहा था यह दोनों माँ-बेटी उसके साथ खेल रही थी
बाबिल को यूँ खड़ा देख कर शीला से रहा नहीं गया, उसने अपना हाथ आगे बढ़ा कर बाबिल के लंड को पकड़ा और उसके लंड के गुलाबी मोटे सुपाड़े को अपनी गीली चूत के छेद पर रगड़ने लगी..
बाबिल के लंड के गरम और मोटे सुपाड़े का स्पर्श अपनी चूत के छेद पर महसूस करते ही.. शीला के बदन में मस्ती की लहर दौड़ गई..
शीला की वासना से भरी हुई आँखें बंद हो गईं..
उसने बड़ी ही अदा के साथ एक बार अपने होंठों को अपने दाँतों से चबाया और काँपती हुई आवाज़ में बाबिल से बोली "ओह्ह.. बेटा डाल दे.. मेरी चूत में अपना ये मोटा लंड पेल दे… चोद मुझे साले ओह्ह..!!"
बाबिल का लंड अब पूरी तरह से तन चुका था और पूरे जोश में आ चुका था..
शीला उसके लंड को अपनी दो उँगलियों और अंगूठे के मदद से पकड़े हुए, अपनी चूत के छेद पर उसका लंड का सुपाड़ा टिकाए हुए थी..
बाबिल ने शीला की टाँगों को घुटनों से पकड़ कर मोड़ कर ऊपर उठाया और अपनी पूरी ताक़त के साथ एक जोरदार झटका मारा..
बाबिल का लंड शीला की चूत की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ तेज़ी के साथ अन्दर घुसता चला गया.. और धनाधन चोदने लगा.. इतनी अनुभवी और चुदक्कड़ शीला भी इन प्रचण्ड प्रहारों से स्तब्ध हो कर रह गई.. वह एकदम से कराह उठी.. पर तब तक बाबिल का ८ इंच लंबा पूरा का पूरा लंड शीला के भोसड़े की गहराईयों में उतर चुका था..
शीला: "हइई.. आह्ह.. ओह्ह.... ओह हरामी.. धीरे कर थोड़ा.. ओह्ह ओह्ह निकाल साले.. फाड़ के रख दी.. मादरचोद.. मेरी चूत ओह्ह..!!"
शीला ने अपने कंधों और गर्दन को बिस्तर से उठा कर अपनी चूत की तरफ देखने की कोशिश करते हुए कहा..
बाबिल भी शीला के कराहने की आवाज़ सुन कर थोड़ा डर गया और अपना लंड शीला की चूत से बाहर निकालने लगा..
अभी उसने अपना लंड आधा ही बाहर निकाला था कि शीला ने उससे कंधों से पकड़ कर अपने ऊपर खींच लिया..
जिससे बाबिल का लंड एक बार फिर शीला की चूत की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ अन्दर घुस कर उसके बच्चेदानी के मुँह से जा टकराया..
शीला ने अपने ब्लाउज के बटन खोले.. ब्रा को सरकाया और सिसकते हुए बाबिल के चेहरे को अपनी चूचियों में दबा लिया.. इतने विशाल बबलों के बीच अपना चेहरा दबा हुआ पाकर बाबिल तो जैसे धन्य ही हो गया..
बाबिल अब जैसे पागल हो चुका था… निप्पलों को चूसते हुए वह शीला के खरबूजों को मसलने लगे..
शीला का रोम-रोम रोमांच से भर उठा.. नीचे से उसके चूतड़ ऊपर की तरफ उछल पड़े.. यह सीधा संकेत था कि वो बाबिल का पहला जोरदार वार झेल कर अब चुदवाने के लिए तड़प रही है..
बाबिल शीला के ऊपर लेटा हुआ दोनों हाथों से शीला के मम्मों को मसलते हुए हुमच रहा था.. शीला की आँखें फिर से मस्ती में बंद होने लगी थीं.. उसकी मादक सिसकियाँ पूरे कमरे में गूँज रही थीं..
अपनी निप्पल को पकड़कर बाबिल के मुंह में ठुसते हुए शीला बोली "ओह्ह ये ले.. ठीक से चूस्स्स इसे.. ओह्ह ओह्ह ह आह्ह..!!" शीला ने नीचे से अपनी कमर को हिलाते हुए कहा..
बाबिल ने भी झट से शीला की चूची को आधे से ज्यादा मुँह में भर लिया और ज़ोर-ज़ोर से चूसना चालू कर दिया..इतने विशाल स्तन थे की उसकी दोनों हथेलियों में मिलाकर भी शीला का एक स्तन नहीं आता था..
बाबिल ने अपने लंड को आधे से ज्यादा बाहर निकाला और फिर पूरी ताक़त से अन्दर पेल दिया.. बाबिल का लंड पिछले आधे घंटे से खड़ा था.. शीला का भोसड़ा किसी तंदूर से भी ज्यादा गरम था और वह गर्मी अब बाबिल के बर्दाश्त से बाहर हो रही थी..
वो बिस्तर के किनारे खड़ा हो गया और शीला की टाँगों को घुटनों से मोड़ कर ऊपर उठा कर पूरी तरह से फैला दिया..
जिससे उसकी चूत ठीक उसके लंड के लेवल पर आ गई और बाबिल तेज़ी से अपने लंड को शीला की चूत की अन्दर-बाहर करने लगा..
बरसों बाद शीला इतने जवान लंड से चुद रही थी.. इससे पहले इतना जवान साथी जो था.. वह था.. उसका खुद का दामाद पिंटू.!!! तब वो कविता का आशिक था.. और उन दोनों के मिलने का जुगाड़ शीला के घर पर ही होता था चूंकि तब मदन अमरीका गया हुआ था.. तभी एक बार मौका पाकर, शीला और रेणुका ने साथ मिलकर पिंटू को ऐसा रगड़ा था की वो रो दिया था..
बाबिल का मोटा लंड पाकर शीला के मानो ख़ुशी के आँसू बाहर निकालने लगी.. ऐसा तगड़ा लंड तो केवल रसिक का ही था..
शीला का भोसड़ा सरपट गीला हो चुका था और बाबिल का लंड भी शीला की चूत से निकल रहे गाढ़े पानी से एकदम सन गया था..
अब बाबिल का लंड ‘फच-फच’ की आवाज़ करता हुआ तेज़ी से शीला की चूत के अन्दर-बाहर हो रहा था और वह भी अपनी गांड को उछाल कर बाबिल का साथ दे रही थी..
उसका पूरा बदन बाबिल के लगाए हुए हर धक्के के साथ हिल रहा था.. उसके बबले यहाँ वहाँ झूल रहे थे और शीला अपने सर को इधर-उधर पटकते हुए मछली के जैसे तड़प रही थी..
शीला कभी अपनी दोनों चूचियों को मसलती, कभी वो बिस्तर की चादर को अपने हाथों में दबोच लेती..
उसकी चूचियाँ हर धक्के के साथ हिल रही थीं, जिससे देख कर बाबिल का जोश और बढ़ता जा रहा था..
शीला "ओह बेटा धीरेए ओह्ह ओह्ह ह आह्ह.. उँघह धीरेए ऊहह निकाल जाएगा तेरा.. ओह्ह मज़ा आ गया .. ओहह.. आह्ह.. धीरेए ओह्ह ओह्ह ओह्ह..!!"
शीला की भोसड़े ने भरसक पानी छोड़ना चालू कर दिया और वो अपनी गांड को पागलों की तरह उछालते हुए झड़ने लगी..
उसने अपने बिखरे हुए बालों को नोचना शुरू कर दिया..
पर बाबिल अभी भी पूरी रफ़्तार के साथ शीला की चूत में अपना लंड अन्दर-बाहर कर रहा था..
शीला का पूरा बदन एकदम से ऐंठ चुका था, पर बाबिल के ताबड़तोड़ धक्कों ने एक बार फिर से उसकी चूत को ढीला कर दिया था..
शीला झड़ने के बाद पूरी तरह शांत हो चुकी थी और अपनी टाँगों को फैलाए हुए बाबिल के लंड को अपनी चूत में मज़े से ले रही थी..
आख़िर ५ मिनट की और चुदाई के बाद शीला दूसरी बार झड़ गई और इस बार बाबिल के लंड ने भी उसकी भोसड़े में अपना वीर्य उड़ेल दिया..
जैसे ही बाबिल का लंड सिकुड़ कर बाहर आया.. शीला जल्दी से उठ कर बाथरूम चली गई..
बाबिल ने अपने मुरझाए हुए लंड की ओर देखा, वो शीला की चूत की कामरस से एकदम भीगा हुआ था..
उसने कमरे में इधर-उधर नज़र दौड़ाई.. तो उसे फर्श पर पड़ी शीला की साड़ी नज़र आई.. वो साड़ी के पास गया और उसके एक छोर को पकड़ कर उससे अपना लंड साफ़ करने लगा.. तभी वैशाली अचानक से कमरे में आ गई..
उसने बाबिल के लंड की तरफ देखा.. जो शिकार करने के बाद लटक रहा था..
वैशाली ने शैतानी मुस्कान के साथ कहा "क्यों मज़ा आया ना?"
बाबिल वैशाली की बात सुन कर एकदम से हैरान रह गया.. उससे यकीन नहीं हो रहा था कि वैशाली उससे अपनी माँ के बारे में पूछ रही है..
हँसते हुए वैशाली कमरे से बाहर चली गई..
बाबिल खड़ा हुआ और बिना अपना पेंट पहने नंगा ही बाथरूम की ओर गया.. दरवाजा सिर्फ अटका हुआ था, बंद नहीं था.. अंदर से कुछ आवाज़ सुनाई दे रही थी..
उसने दरवाजे पर कान लगाया तो शीला के मूतने की सुरीली सी आवाज़ उसके कानों में पड़ी… वह दरवाजे के पास खड़ा होकर अन्दर झाँकने लगा..
अन्दर का नज़ारा देख कर एक बार फिर से बाबिल का लंड पूरे उफान पर आ गया..
बड़े बड़े गोरे चूतड़ों को उजागर कर शीला मूतने के बाद झुक कर अपनी चूत को एक कपड़े से साफ़ कर रही थी.. पीछे खड़े बाबिल के सामने शीला के बड़े-बड़े चूतड़ों के बीच लबलबा रही चूत का गुलाबी छेद उस पर कहर बरपा रहा था..
शीला को इस बात का पता नहीं था कि बाबिल उसके पीछे खड़े होकर उसकी बड़ी गांड को देख रहा है..
अगले ही पल बाबिल का लंड किसी सांप की तरह फुंफकारने लग गया ..
शीला अपनी चूत की फांकों को अपनी उँगलियों से सहला रही थी, उसके होंठों पर ख़ुशी से भरी हुई मुस्कान फैली हुई थी..
अचानक से उससे अपनी चूत पर एक बार फिर से बाबिल के लंड के मोटे और गरम सुपाड़े का अहसास हुआ.. जिसे महसूस करते ही.. उसके पूरे बदन में मस्ती की कंपकंपी दौड़ गई..
‘आह क्या कर रहा है ओह्ह..छोड़ मुझे!’
इसके पहले कि शीला कुछ संभल पाती.. बाबिल का लंड उसकी चूत की फांकों को फैला कर चूत के छेद पर जा लगा..
‘ओह्ह आह सीईईई..’ शीला के मुँह से मस्ती भरी ‘आह’ निकल गई..
शीला ने एक बार अपनी गर्दन पीछे घुमा कर बाबिल की तरफ अपनी वासना से भरी मस्त आँखों से देखा और मुस्करा कर फिर से आगे देखते हुए.. अपने दोनों हाथों को उस पुराने मेज पर टिका कर झुक गई..
फिर बड़ी ही अदा के साथ अपने पैरों को फैला कर पीछे से अपनी गांड ऊपर की तरफ उठा लिया..
अब बाबिल का लंड बिल्कुल शीला की चूत के सामने था..
बाबिल ने शीला के चूतड़ों को दोनों तरफ से पकड़ कर फैला दिया और अपने लंड को चूत के छेद पर टिका दिया..
इससे पहले कि बाबिल अपना लंड शीला की चूत में पेलने के लिए धक्का मारता.. शीला ने कामातुर होकर अपनी गांड को पीछे की तरफ धकेलना शुरू कर दिया..
बाबिल के लंड का मोटा सुपाड़ा शीला की चूत के छेद को फ़ैलाता हुआ अन्दर घुस गया.. शीला अपनी चूत के छेद के छल्ले को बाबिल के लंड के मोटे सुपाड़े पर कसा हुआ साफ़ महसूस कर पा रही थी..
कामवासना का आनन्द चरम पर पहुँच गया.. शीला की चूत ने एक बार फिर से अपने कामरस का खजाना खोल दिया..
शीला की मस्ती का कोई ठिकाना नहीं था, उसकी चूत में सरसराहट बढ़ गई थी और वो बाबिल के लंड को जड़ तक अपनी चूत में लेने के लिए मचल रही थी..
"ओह्ह आह.. घुसाआ.. दे रे.. छोरे ओह फाड़ दे.. मेरी चूत ओह्ह आह… और ज़ोर से मसल मेरे गांड को ओह्ह हाँ.. ऐसे ही…"
बाबिल बुरी तरह से अपने दोनों हाथों से शीला की गांड को फैला कर मसल रहा था.. उसके लंड का सुपाड़ा शीला की चूत में फँसा हुआ, शीला को मदहोश किए जा रहा था.. बाबिल को भी अपने लंड के सुपाड़े पर शीला की चूत की गरमी साफ़ महसूस हो रही थी..
उसने शीला के चूतड़ों को दबोच कर दोनों तरफ फैला लिया और अपनी गांड को तेज़ी से आगे की तरफ धकेला.. बाबिल के लंड का सुपाड़ा शीला की चूत की दीवारों को चीरता हुआ आगे बढ़ गया, शीला के मुँह से एक घुटी हुई चीख निकल गई.. जो बाथरूम के दीवारों में ही दब कर रह गई..
बाबिल का आधे से अधिक लंड शीला की चूत में समा चुका था..
शीला ने पीछे की तरफ अपनी गांड को ठेल कर अपनी चूत में बाबिल का मोटा लंड लेते हुए कहा "आहह.. आह जालिम मेरी चूत.. ओह फाड़ दी… ओह्ह ओह तेरे इस मूसल लंड की तो मैं आह.. आह.. कायल हो गई उह्ह.. ओह्ह चोद दे.. मुझे.. और तेज धक्के मार.."
बाबिल भी अब नौकर और मालकीं की मर्यादाओं को भूल कर शीला के चूतड़ों को फैला कर अपने लंड को उसकी चूत में अन्दर-बाहर कर रहा था..बाबिल के हर जबरदस्त धक्के के साथ उसकी चूचियाँ तेज़ी से हिल रही थीं..
"ओह रुक बेटे.. ज़रा ओह्ह ओह्ह.. मैं खड़ी-खड़ी थक गई हूँ..ओह्ह ओह्ह आह्ह.."
बाबिल ने अपने लंड को शीला की चूत से बाहर निकाल लिया.. शीला सीधी होकर उसकी तरफ पलटी और बाबिल के होंठों पर अपने रसीले होंठों को रखते हुए उसे से चिपक गई..
बाबिल ने उसकी कमर से अपनी बाँहों को पीछे ले जाकर उसके चूतड़ों को दबोच-दबोच कर मसलना शुरू कर दिया..
बाबिल का विकराल लंड शीला के पेट के निचले हिस्से पर रगड़ खा रहा था..
‘चल अंदर कमरे में चलते हैं..’ शीला ने चुंबन तोड़ते हुए कहा और फिर बाथरूम से निकल कर एक बेड के पास आ गई..
Nice updateपिछले अपडेट में आपने पढ़ा की..
वैशाली और बाबिल के बीच चुदाई का खेल शुरू होने ही वाला था की तब डॉरबेल बजी.. शीला लौट चुकी थी.. हालांकि वैशाली ने अपने झूठ को छुपाने की भरसक कोशिश की पर शीला की शातिर आँखों से सच छुप नहीं पाया.. शीला पहले तो वैशाल पर उखड़ पड़ती है पर अपनी बेटी की समस्या को सुनने के बाद उसका मन बदलता है.. वैशाली से पहले वो बाबिल को परखना चाहती है..
अब आगे..
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इससे पहले कि उसे कुछ समझ आता, शीला ने उसके मुरझाए हुए लंड को पतलून के ऊपर से पकड़ लिया और ज़ोर से मसल दिया..
‘आह दर्द हो रहा.. मालकिन ओह्ह..’
बाबिल ने शीला का हाथ हटाने की कोशिश करते हुए कहा..
शीला ने बाबिल की तरफ वासना से भरी नज़रों से देखते हुए कहा "क्यों रे, अब तो ये ऐसे मुरझा गया है…जैसे इसमें जान ही ना हो…पहले कैसे इतना कड़क खड़ा था.. साले.. मेरी जवान बेटी पर ग़लत नज़र रखता है.." ये कहते हुए शीला ने उसके लंड को थोड़ा और ज़ोर से मसल दिया..
बाबिल की तो जैसे जान ही निकल गई, उसके चेहरे से साफ़ पता चल रहा था कि वो कितने दर्द में है..
उसके चेहरे को देख कर शीला को अंदाज़ा हुआ कि उसने कुछ ज्यादा ही ज़ोर से उसके लंड को मसल दिया..
शीला ने उसके लंड को छोड़ दिया, फिर उसके लंड को हथेली से रगड़ने लगी..
बाबिल को जैसे लकवा मार गया हो.. वो बुत की तरह शीला को देख रहा था, जो उसकी तरफ देखते हुए, एक हाथ से अपनी चूची को ब्लाउज के ऊपर से मसल रही थी और दूसरे हाथ से बाबिल के लंड को सहला रही थी..
शीला "क्यों रे.. मेरे बेटी को चोदने वाला था..!! एक बार मुझे भी चोद कर देख.. देख फिर कितना ज्यादा मज़ा दूँगी.." ये कह कर उसने एक झटके से बाबिल की पतलून उतार दी..
इससे पहले कि घबराए हुए बाबिल को कुछ समझ आता.. उसकी पेंट घुटनों तक आ चुकी थी और उसका अधखड़ा लंड शीला के हाथ की मुठ्ठी में था..
"ये… ये आप क्या रही हैं मालकिन… ओह्ह नहीं मालकिन आ आहह.."
शीला ने उसके लंड के सुपाड़े पर चमड़ी पीछे सरका दी और गुलाबी सुपाड़े जो कि किसी छोटे सेब जितना मोटा था, उसे देख शीला कर आँखों में वासना छा गई..
शीला के मदमस्त भोसड़े की फांकें फड़फने लगीं और उनकी दीवारों ने कामरस की बूंदे बहाना शुरू कर दिया..
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क्योंकि अब बाबिल का लंड अपने असली विकराल रूप में आना शुरू हो गया था, शीला ने अपने अंगूठे के नाख़ून से बाबिल के लंड के सुपाड़े के चारों तरफ कुरेदा..
तो बाबिल की मस्ती भरी ‘आहह’ निकल गई और अगले ही पल उसे अपने लंड का सुपाड़ा किसी गरम और गीली जगह में जाता हुआ महसूस हुआ..
उससे ऐसा लगा जैसे किसी नरम और रसीले अंग ने उसके लंड के सुपाड़े को चारों तरफ से कस लिया हो..
जब बाबिल ने अपनी मस्ती से भरी आँखों को खोल कर नीचे देखा..
तो जो हो रहा था, उसे अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ..
शीला ने एक हाथ से उसके टट्टों को मुठ्ठी में पकड़ रखा था.. उसके लंड का सुपाड़ा शीला के होंठों के अन्दर था और दूसरे हाथ से शीला अपनी चूची को मसल रही थी..
ये नज़ारा देख बाबिल एकदम से हैरान रह गया, शीला ने उसके लंड के सुपाड़े को चूसते हुए.. ऊपर बाबिल की तरफ देखा.. दोनों की नज़रें आपस में जा मिलीं..
बाबिल का लंड अपनी पूरी औकात पर आ चुका था..
जिस हाथ की मुठ्ठी में शीला ने बाबिल के लंड को भर रखा था, उसे यकीन नहीं हो रहा था कि इस उम्र के लड़के का लंड भी इतना बड़ा हो सकता है..!!
अचानक से शीला ने बाबिल के फनफनाते हुए लंड को अपने मुँह से बाहर निकाला और बिस्तर पर लेट गई..
उसकी टाँगें बिस्तर के नीचे लटक रही थीं..उसने अपनी टाँगों को उठा कर घुटनों से मोड़ा और अपने पेटीकोट को टाँगों से ऊपर उठाते हुए, अपनी कमर तक चढ़ा लिया..
यह देख कर बाबिल की हालत और खराब हो गई..
शीला की चूत की फाँकें फैली हुई थीं और उसमें से कामरस एक पतली सी धार के रूप में बह कर उसकी गांड के छेद की तरफ जा रहा था..उसकी चूत का छेद कभी सिकुड़ता और कभी फैलता..
बाबिल बिना अपनी पलकों को झपकाए हुए, उसकी तरफ देख रहा था..
यह देख कर शीला के होंठों पर कामुकता भरी मुस्कान फ़ैल गई..
‘देख.. तेरे लंड के लिए पानी छोड़ रही है..’ शीला ने अपनी चूत की फांकों को फ़ैलाते हुए अंदर के गुलाबी छेद को दिखाते हुए कहा..
यह सुन कर बाबिल की ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा.. अब उसे समझ में आ रहा था यह दोनों माँ-बेटी उसके साथ खेल रही थी
बाबिल को यूँ खड़ा देख कर शीला से रहा नहीं गया, उसने अपना हाथ आगे बढ़ा कर बाबिल के लंड को पकड़ा और उसके लंड के गुलाबी मोटे सुपाड़े को अपनी गीली चूत के छेद पर रगड़ने लगी..
बाबिल के लंड के गरम और मोटे सुपाड़े का स्पर्श अपनी चूत के छेद पर महसूस करते ही.. शीला के बदन में मस्ती की लहर दौड़ गई..
शीला की वासना से भरी हुई आँखें बंद हो गईं..
उसने बड़ी ही अदा के साथ एक बार अपने होंठों को अपने दाँतों से चबाया और काँपती हुई आवाज़ में बाबिल से बोली "ओह्ह.. बेटा डाल दे.. मेरी चूत में अपना ये मोटा लंड पेल दे… चोद मुझे साले ओह्ह..!!"
बाबिल का लंड अब पूरी तरह से तन चुका था और पूरे जोश में आ चुका था..
शीला उसके लंड को अपनी दो उँगलियों और अंगूठे के मदद से पकड़े हुए, अपनी चूत के छेद पर उसका लंड का सुपाड़ा टिकाए हुए थी..
बाबिल ने शीला की टाँगों को घुटनों से पकड़ कर मोड़ कर ऊपर उठाया और अपनी पूरी ताक़त के साथ एक जोरदार झटका मारा..
बाबिल का लंड शीला की चूत की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ तेज़ी के साथ अन्दर घुसता चला गया.. और धनाधन चोदने लगा.. इतनी अनुभवी और चुदक्कड़ शीला भी इन प्रचण्ड प्रहारों से स्तब्ध हो कर रह गई.. वह एकदम से कराह उठी.. पर तब तक बाबिल का ८ इंच लंबा पूरा का पूरा लंड शीला के भोसड़े की गहराईयों में उतर चुका था..
शीला: "हइई.. आह्ह.. ओह्ह.... ओह हरामी.. धीरे कर थोड़ा.. ओह्ह ओह्ह निकाल साले.. फाड़ के रख दी.. मादरचोद.. मेरी चूत ओह्ह..!!"
शीला ने अपने कंधों और गर्दन को बिस्तर से उठा कर अपनी चूत की तरफ देखने की कोशिश करते हुए कहा..
बाबिल भी शीला के कराहने की आवाज़ सुन कर थोड़ा डर गया और अपना लंड शीला की चूत से बाहर निकालने लगा..
अभी उसने अपना लंड आधा ही बाहर निकाला था कि शीला ने उससे कंधों से पकड़ कर अपने ऊपर खींच लिया..
जिससे बाबिल का लंड एक बार फिर शीला की चूत की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ अन्दर घुस कर उसके बच्चेदानी के मुँह से जा टकराया..
शीला ने अपने ब्लाउज के बटन खोले.. ब्रा को सरकाया और सिसकते हुए बाबिल के चेहरे को अपनी चूचियों में दबा लिया.. इतने विशाल बबलों के बीच अपना चेहरा दबा हुआ पाकर बाबिल तो जैसे धन्य ही हो गया..
बाबिल अब जैसे पागल हो चुका था… निप्पलों को चूसते हुए वह शीला के खरबूजों को मसलने लगे..
शीला का रोम-रोम रोमांच से भर उठा.. नीचे से उसके चूतड़ ऊपर की तरफ उछल पड़े.. यह सीधा संकेत था कि वो बाबिल का पहला जोरदार वार झेल कर अब चुदवाने के लिए तड़प रही है..
बाबिल शीला के ऊपर लेटा हुआ दोनों हाथों से शीला के मम्मों को मसलते हुए हुमच रहा था.. शीला की आँखें फिर से मस्ती में बंद होने लगी थीं.. उसकी मादक सिसकियाँ पूरे कमरे में गूँज रही थीं..
अपनी निप्पल को पकड़कर बाबिल के मुंह में ठुसते हुए शीला बोली "ओह्ह ये ले.. ठीक से चूस्स्स इसे.. ओह्ह ओह्ह ह आह्ह..!!" शीला ने नीचे से अपनी कमर को हिलाते हुए कहा..
बाबिल ने भी झट से शीला की चूची को आधे से ज्यादा मुँह में भर लिया और ज़ोर-ज़ोर से चूसना चालू कर दिया..इतने विशाल स्तन थे की उसकी दोनों हथेलियों में मिलाकर भी शीला का एक स्तन नहीं आता था..
बाबिल ने अपने लंड को आधे से ज्यादा बाहर निकाला और फिर पूरी ताक़त से अन्दर पेल दिया.. बाबिल का लंड पिछले आधे घंटे से खड़ा था.. शीला का भोसड़ा किसी तंदूर से भी ज्यादा गरम था और वह गर्मी अब बाबिल के बर्दाश्त से बाहर हो रही थी..
वो बिस्तर के किनारे खड़ा हो गया और शीला की टाँगों को घुटनों से मोड़ कर ऊपर उठा कर पूरी तरह से फैला दिया..
जिससे उसकी चूत ठीक उसके लंड के लेवल पर आ गई और बाबिल तेज़ी से अपने लंड को शीला की चूत की अन्दर-बाहर करने लगा..
बरसों बाद शीला इतने जवान लंड से चुद रही थी.. इससे पहले इतना जवान साथी जो था.. वह था.. उसका खुद का दामाद पिंटू.!!! तब वो कविता का आशिक था.. और उन दोनों के मिलने का जुगाड़ शीला के घर पर ही होता था चूंकि तब मदन अमरीका गया हुआ था.. तभी एक बार मौका पाकर, शीला और रेणुका ने साथ मिलकर पिंटू को ऐसा रगड़ा था की वो रो दिया था..
बाबिल का मोटा लंड पाकर शीला के मानो ख़ुशी के आँसू बाहर निकालने लगी.. ऐसा तगड़ा लंड तो केवल रसिक का ही था..
शीला का भोसड़ा सरपट गीला हो चुका था और बाबिल का लंड भी शीला की चूत से निकल रहे गाढ़े पानी से एकदम सन गया था..
अब बाबिल का लंड ‘फच-फच’ की आवाज़ करता हुआ तेज़ी से शीला की चूत के अन्दर-बाहर हो रहा था और वह भी अपनी गांड को उछाल कर बाबिल का साथ दे रही थी..
उसका पूरा बदन बाबिल के लगाए हुए हर धक्के के साथ हिल रहा था.. उसके बबले यहाँ वहाँ झूल रहे थे और शीला अपने सर को इधर-उधर पटकते हुए मछली के जैसे तड़प रही थी..
शीला कभी अपनी दोनों चूचियों को मसलती, कभी वो बिस्तर की चादर को अपने हाथों में दबोच लेती..
उसकी चूचियाँ हर धक्के के साथ हिल रही थीं, जिससे देख कर बाबिल का जोश और बढ़ता जा रहा था..
शीला "ओह बेटा धीरेए ओह्ह ओह्ह ह आह्ह.. उँघह धीरेए ऊहह निकाल जाएगा तेरा.. ओह्ह मज़ा आ गया .. ओहह.. आह्ह.. धीरेए ओह्ह ओह्ह ओह्ह..!!"
शीला की भोसड़े ने भरसक पानी छोड़ना चालू कर दिया और वो अपनी गांड को पागलों की तरह उछालते हुए झड़ने लगी..
उसने अपने बिखरे हुए बालों को नोचना शुरू कर दिया..
पर बाबिल अभी भी पूरी रफ़्तार के साथ शीला की चूत में अपना लंड अन्दर-बाहर कर रहा था..
शीला का पूरा बदन एकदम से ऐंठ चुका था, पर बाबिल के ताबड़तोड़ धक्कों ने एक बार फिर से उसकी चूत को ढीला कर दिया था..
शीला झड़ने के बाद पूरी तरह शांत हो चुकी थी और अपनी टाँगों को फैलाए हुए बाबिल के लंड को अपनी चूत में मज़े से ले रही थी..
आख़िर ५ मिनट की और चुदाई के बाद शीला दूसरी बार झड़ गई और इस बार बाबिल के लंड ने भी उसकी भोसड़े में अपना वीर्य उड़ेल दिया..
जैसे ही बाबिल का लंड सिकुड़ कर बाहर आया.. शीला जल्दी से उठ कर बाथरूम चली गई..
बाबिल ने अपने मुरझाए हुए लंड की ओर देखा, वो शीला की चूत की कामरस से एकदम भीगा हुआ था..
उसने कमरे में इधर-उधर नज़र दौड़ाई.. तो उसे फर्श पर पड़ी शीला की साड़ी नज़र आई.. वो साड़ी के पास गया और उसके एक छोर को पकड़ कर उससे अपना लंड साफ़ करने लगा.. तभी वैशाली अचानक से कमरे में आ गई..
उसने बाबिल के लंड की तरफ देखा.. जो शिकार करने के बाद लटक रहा था..
वैशाली ने शैतानी मुस्कान के साथ कहा "क्यों मज़ा आया ना?"
बाबिल वैशाली की बात सुन कर एकदम से हैरान रह गया.. उससे यकीन नहीं हो रहा था कि वैशाली उससे अपनी माँ के बारे में पूछ रही है..
हँसते हुए वैशाली कमरे से बाहर चली गई..
बाबिल खड़ा हुआ और बिना अपना पेंट पहने नंगा ही बाथरूम की ओर गया.. दरवाजा सिर्फ अटका हुआ था, बंद नहीं था.. अंदर से कुछ आवाज़ सुनाई दे रही थी..
उसने दरवाजे पर कान लगाया तो शीला के मूतने की सुरीली सी आवाज़ उसके कानों में पड़ी… वह दरवाजे के पास खड़ा होकर अन्दर झाँकने लगा..
अन्दर का नज़ारा देख कर एक बार फिर से बाबिल का लंड पूरे उफान पर आ गया..
बड़े बड़े गोरे चूतड़ों को उजागर कर शीला मूतने के बाद झुक कर अपनी चूत को एक कपड़े से साफ़ कर रही थी.. पीछे खड़े बाबिल के सामने शीला के बड़े-बड़े चूतड़ों के बीच लबलबा रही चूत का गुलाबी छेद उस पर कहर बरपा रहा था..
शीला को इस बात का पता नहीं था कि बाबिल उसके पीछे खड़े होकर उसकी बड़ी गांड को देख रहा है..
अगले ही पल बाबिल का लंड किसी सांप की तरह फुंफकारने लग गया ..
शीला अपनी चूत की फांकों को अपनी उँगलियों से सहला रही थी, उसके होंठों पर ख़ुशी से भरी हुई मुस्कान फैली हुई थी..
अचानक से उससे अपनी चूत पर एक बार फिर से बाबिल के लंड के मोटे और गरम सुपाड़े का अहसास हुआ.. जिसे महसूस करते ही.. उसके पूरे बदन में मस्ती की कंपकंपी दौड़ गई..
‘आह क्या कर रहा है ओह्ह..छोड़ मुझे!’
इसके पहले कि शीला कुछ संभल पाती.. बाबिल का लंड उसकी चूत की फांकों को फैला कर चूत के छेद पर जा लगा..
‘ओह्ह आह सीईईई..’ शीला के मुँह से मस्ती भरी ‘आह’ निकल गई..
शीला ने एक बार अपनी गर्दन पीछे घुमा कर बाबिल की तरफ अपनी वासना से भरी मस्त आँखों से देखा और मुस्करा कर फिर से आगे देखते हुए.. अपने दोनों हाथों को उस पुराने मेज पर टिका कर झुक गई..
फिर बड़ी ही अदा के साथ अपने पैरों को फैला कर पीछे से अपनी गांड ऊपर की तरफ उठा लिया..
अब बाबिल का लंड बिल्कुल शीला की चूत के सामने था..
बाबिल ने शीला के चूतड़ों को दोनों तरफ से पकड़ कर फैला दिया और अपने लंड को चूत के छेद पर टिका दिया..
इससे पहले कि बाबिल अपना लंड शीला की चूत में पेलने के लिए धक्का मारता.. शीला ने कामातुर होकर अपनी गांड को पीछे की तरफ धकेलना शुरू कर दिया..
बाबिल के लंड का मोटा सुपाड़ा शीला की चूत के छेद को फ़ैलाता हुआ अन्दर घुस गया.. शीला अपनी चूत के छेद के छल्ले को बाबिल के लंड के मोटे सुपाड़े पर कसा हुआ साफ़ महसूस कर पा रही थी..
कामवासना का आनन्द चरम पर पहुँच गया.. शीला की चूत ने एक बार फिर से अपने कामरस का खजाना खोल दिया..
शीला की मस्ती का कोई ठिकाना नहीं था, उसकी चूत में सरसराहट बढ़ गई थी और वो बाबिल के लंड को जड़ तक अपनी चूत में लेने के लिए मचल रही थी..
"ओह्ह आह.. घुसाआ.. दे रे.. छोरे ओह फाड़ दे.. मेरी चूत ओह्ह आह… और ज़ोर से मसल मेरे गांड को ओह्ह हाँ.. ऐसे ही…"
बाबिल बुरी तरह से अपने दोनों हाथों से शीला की गांड को फैला कर मसल रहा था.. उसके लंड का सुपाड़ा शीला की चूत में फँसा हुआ, शीला को मदहोश किए जा रहा था.. बाबिल को भी अपने लंड के सुपाड़े पर शीला की चूत की गरमी साफ़ महसूस हो रही थी..
उसने शीला के चूतड़ों को दबोच कर दोनों तरफ फैला लिया और अपनी गांड को तेज़ी से आगे की तरफ धकेला.. बाबिल के लंड का सुपाड़ा शीला की चूत की दीवारों को चीरता हुआ आगे बढ़ गया, शीला के मुँह से एक घुटी हुई चीख निकल गई.. जो बाथरूम के दीवारों में ही दब कर रह गई..
बाबिल का आधे से अधिक लंड शीला की चूत में समा चुका था..
शीला ने पीछे की तरफ अपनी गांड को ठेल कर अपनी चूत में बाबिल का मोटा लंड लेते हुए कहा "आहह.. आह जालिम मेरी चूत.. ओह फाड़ दी… ओह्ह ओह तेरे इस मूसल लंड की तो मैं आह.. आह.. कायल हो गई उह्ह.. ओह्ह चोद दे.. मुझे.. और तेज धक्के मार.."
बाबिल भी अब नौकर और मालकीं की मर्यादाओं को भूल कर शीला के चूतड़ों को फैला कर अपने लंड को उसकी चूत में अन्दर-बाहर कर रहा था..बाबिल के हर जबरदस्त धक्के के साथ उसकी चूचियाँ तेज़ी से हिल रही थीं..
"ओह रुक बेटे.. ज़रा ओह्ह ओह्ह.. मैं खड़ी-खड़ी थक गई हूँ..ओह्ह ओह्ह आह्ह.."
बाबिल ने अपने लंड को शीला की चूत से बाहर निकाल लिया.. शीला सीधी होकर उसकी तरफ पलटी और बाबिल के होंठों पर अपने रसीले होंठों को रखते हुए उसे से चिपक गई..
बाबिल ने उसकी कमर से अपनी बाँहों को पीछे ले जाकर उसके चूतड़ों को दबोच-दबोच कर मसलना शुरू कर दिया..
बाबिल का विकराल लंड शीला के पेट के निचले हिस्से पर रगड़ खा रहा था..
‘चल अंदर कमरे में चलते हैं..’ शीला ने चुंबन तोड़ते हुए कहा और फिर बाथरूम से निकल कर एक बेड के पास आ गई..