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hmmmm......nice one...पिछले अपडेट में आपने पढ़ा की..
शीला अपनी बेटी वैशाली के घर आई है, जहाँ घर के सभी सदस्य अनुपस्थित हैं.. माँ-बेटी साथ समय बिताती हैं, जिससे वैशाली को सहारा मिलता है.. हालाँकि, तीसरे दिन, वैशाली इंस्टाग्राम पर उत्तेजक विडियो देखकर कामुक रूप से उत्तेजित हो जाती है.. अपनी तीव्र इच्छा को शांत करने के लिए, वह कविता की माँ के नौकर बाबिल को बुलाने की योजना बनाती है..
शीला को वैशाली एक प्रदर्शनी में साड़ियाँ देखने भेज देती है.. मौका मिलते ही वह बाबिल को अपने घर बुला लेती है और उसके साथ यौन संबंध शुरू कर देती है.. जैसे ही वे आपस में मग्न होते हैं, अचानक दरवाजे की घंटी बज उठती है, जिससे दोनों चौंक जाते हैं..
अब आगे..
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एक ही पल में वैशाली का हाथ बाबिल के ट्रेकपेंट के ऊपर से ही उसके मस्त लंड को सहलाने लग गया..
इससे पहले की बाबिल संभल पाता, वैशाली ने एक झटके में उसका पेंट, जांघिये समेट घुटनों तक उतार दिया.. और बाबिल के तने हुए हथियार के सामने उकड़ूँ अवस्था में बैठ गई
प्यारे गुलाबी लंड की मोटाई को अपनी मुठ्ठी में पकड़कर, उभरी हुई नसों को वह बेतहाशा चाटने लगी.. बाबिल के तो जैसे होश ही उड़ गए.. चमकते हुए गुलाबी टोपे के मूत्र-छेद पर अपनी जीभ की नोक से चाटना शुरू कर वैशाली ने कुछ ही पलों में उस लंबे लंड को अपने कंठ तक उतार दिया..!!
टिंग टॉंग..!!!
घर की डोरबेल बजी..
वैशाली ने तुरंत लंड को अपने मुंह से बाहर निकाला.. सोच में पड़ गई.. बेवक्त कौन टपक पड़ा..?? उसने अपने होंठ पर उंगली रखकर बाबिल को शांत खड़े रहने का इशारा किया.. पास बेड पर पड़ा टॉप पहन लिया.. और दरवाजे पर आई.. खोलने से पहले उसने दरवाजे में बने छेद से बाहर देखा... बाहर उसकी मम्मी शीला खड़ी थी..!!!!
अरे बाप रे..!!! मम्मी इतनी जल्दी कैसे वापिस आ गई?? अब क्या करें..??? बाबिल को कहाँ छुपाऊँ??
उसी उधेड़बुन के बीच शीला ने और दो तीन बार डोरबेल बजाई..
वैशाली भागकर बेडरूम में आई और बाबिल से कहा.. "जल्दी कपड़े ठीक कर ले.. और झाड़ू उठाकर सफाई शुरू कर"
बाबिल को पता नहीं चला की उसे असल में बुलाया किस लिए गया था..!!! वैशाली को इतनी घबराए हुए देखकर उसने तुरंत झाड़ू उठाया और फर्श पर लगाने लगा..
वैशाली ने दरवाजा खोला.. शीला अंदर आकर उसे आश्चर्य से देखती रही.. ऊपर से नीचे तक वैशाली का निरीक्षण करते हुए शीला के शातिर मन में सौ सवाल खड़े हो रहे थे.. पर वो गर्मी से बेहाल हो रही थी इसलिए उसने पंखा ऑन किया और धम्म से सोफ़े पर बैठ गई..
वैशाली की नज़रों में छुपा डर साफ नजर आ रहा था शीला को.. वह रुमाल से अपने चेहरे का पसीना पोंछते हुए वैशाली की तरफ तीक्ष्ण नज़रों से देख रही थी
वैशाली ने कृत्रिम मुस्कान के साथ कहा "अरे मम्मी, इतनी जल्दी कैसे आ गई? सेल में गई नहीं क्या?"
शीला ने थोड़े गुस्से से कहा "मुझे वहाँ भेजने से पहले चेक तो करना था.. सेल तो कल ही खतम हो गया.. बेकार में आने जाने के २०० रुपये ले लिए ऑटो वाले ने.. पर तू बता.. तू तो ऑफिस जाने वाली थी ना..??"
वैशाली ने नजरें झुका ली और कहा "वो फिर आज ट्रक आया ही नहीं तो मटीरीअल कल ही जाएगा.. जाने का कोई मतलब नहीं था इसलिए..!!"
शीला को कुछ तो गंध आ रही थी पर पता नहीं चल पा रहा था की वैशाली आखिर क्या गुल क हिला रही है.. तभी बेडरूम से कुछ गिरने की आवाज आई.. शीला और वैशाली दोनों चोंक उठे..
शीला: "कौन है अंदर?"
अब वैशाली की कठिन परीक्षा होने वाली थी
वैशाली: "वो.. वो... काफी दिनों से कामवाली बाई नहीं आई थी.. तो मैंने कविता के नौकर को फोन करके बुला लिया..!!"
संशय भरी नज़रों से शीला वैशाली की ओर देखती रही.. घर तो पहले से ही साफ-सुथरा था.. उसने खुद ही पिछले दिन पूरी सफाई की थी.. और वैसे भी वैशाली पहले से सफाई के लिए उतनी उत्सुक नहीं रहती थी.. घर पर भी उसकी ज्यादातर चीजें अस्तव्यस्त ही पड़ी रहती थी.. शीला के लाख कहने के बाद ही वह सफाई करती थी.. ऐसे में वैशाली की कही बात शीला को हजम नहीं हुई
शीला तुरंत उठ खड़ी हुई.. और अंदर बेडरूम में गई.. अंदर उस नेपाली लड़के को काम करते हुए उसने कुछ मिनटों तक उसका गहराई से मुआयना किया.. और फिर वापिस बाहर आई तब तक वैशाली किचन में चली गई थी.. असल में वह शीला से नजर मिलाना नहीं चाहती थी
सोफ़े पर आकर बैठी शीला का दिमाग बुलेट ट्रेन की गति से चलने लगा..!! साड़ियों के सेल में भेजने के लिए वैशाली की उत्सुकता.. फिर अचानक ऑफिस जाने की बात... फिर आधे ही घंटे के अंदर सब केन्सल हो जाना और अकेली वैशाली एक गोरे-चिट्टे तंदूरस्त जवान लड़के के साथ..!!
शीला के दिमाग को दो और दो चार का गणित गिनने में ज्यादा वक्त नहीं लगा.. उसने आवाज देकर वैशाली को बुलाना चाहा.. पर ड्रॉइंग रूम में उनकी बातचीत उस नौकर को भी सुनाई देती.. इसलिए वैशाली को बुलाने के बजाए उसने खुद ही अंदर कीचेन में जाकर बात करना मुनासिब समझा..
वह जब कीचेन में आई तो वैशाली बेफिजूल ही बर्तन ऊपर नीचे कर रही थी..
शीला: "क्या चल रहा है कुछ बताएगी मुझे तू?"
वैशाली का बदन पसीने से तर हो गया, वह जानती थी की अपनी मम्मी की नज़रों से यह छुपाना नामुमकिन था
उसने बनावटी हंसी के साथ कहा "किस बारे में बात कर रही हो मम्मी? मैं समझी नहीं"
अब शीला की भृकुटी तंग हो गई, उसने वैशाली का हाथ पकड़कर अपनी ओर खींचते हुए कहा "आधे घंटे पहले तक तो ऑफिस जाने की बहोत जल्दी थी तुझे.. मुझे अकेले नहीं जाना था फिर भी साड़ियों के सेल में धकेल दिया.. और अचानक से तुझे सफाई की इतनी फिकर कब से होने लगी? हुई तो हुई.. यह सब कुछ आधे ही घंटे में?? चलो माना की तुझे मेरे जाने के बाद सफाई का खयाल आया होगा.. उतनी देर में तूने कविता को फोन कर नौकर को बुलाया और वो आ भी गया..!!! कविता का घर इतना नजदीक तो है नहीं..!!"
वैशाली का मन कर रहा था की अभी धरती फटे और वो अंदर समा जाएँ.. शीला ने उसकी चोरी बखूबी पकड़ ली थी.. उसकी माँ के सभी शक जायज थे और उसका कोई जवाब नहीं था उसके पास
वैशाली: "आप गलत समझ रही हो मम्मी.. वो.. असल में... अम्म.. वो कविता को फोन किया तो उसका नौकर यहीं कुछ सामान लेने आया था तो मैंने बुला लिया.. वैसे और कुछ नहीं है"
शीला को अब गुस्सा चढ़ने लगा.. यह लड़की मुझे मूर्ख समझती है क्या..!! उतनी उसकी उम्र नहीं है जिससे ज्यादा तो मैं खुद ऐसे कांड कर चुकी हूँ.. और यह मुझे बेवकूफ बना रही है??
शीला ने गुस्से से तमतमाते हुए चेहरे से वैशाली को कहा "मेरे सामने देख.. नजरें क्यों छिपा रही है?"
बेमन से वैशाली ने घबराई हुई नज़रों से शीला की तरफ देखा.. शीला की आँखों का गुस्सा देखकर वैशाली की हालत खराब हो गई
शीला: "सच सच बता.. क्या माजरा है? क्या चल रहा है तेरे और उस नौकर के बीच?"
अब वैशाली से अपने आप को रोका न गया.. उसने शीला के कंधों पर अपना सिर रख दिया और फूटफुटकर रोने लग गई..
एक ही पल में शीला का शक यकीन में बदल गया.. रो रही वैशाली पर गुस्से से गुर्राई "तू पागल हो गई है क्या वैशाली? वो भी यहाँ अपने घर में? एक नौकर को बुलाकर? अक्ल है भी तुझे या बेच आई है? शादी से पहले जब पिंटू ने तुझे राजेश के साथ देख लिया था तब क्या हुआ था.. भूल गई क्या?? कितनी मिन्नतें.. कितने वादे किए थे.. खुद मैंने पैरों में पड़कर.. गिड़गिड़ाकर माफी मांगी थी, तब जाकर पिंटू माना था.. जरा सा भी अंदाजा है तुझे की पिंटू को पता चला तो क्या होगा??"
शीला के कंधों पर सिर रखकर रो रही वैशाली ने अपने आँसू पोंछे और डाइनिंग टेबल की कुर्सी खींचकर नजरें झुकाए बैठ गई.. शीला भी उसके सामने बैठ गई.. आखिर कारण तो जानना ही था की आखिर वैशाली ने ऐसी बेवकूफों वाली हरकत भला क्यों की.. शीला को दिक्कत उस बात से नहीं थी की उसकी बेटी किसी पराए मर्द के साथ पाई गई थी, तकलीफ इस बात की थी की पिंटू को पता चल गया तो कैसा अनर्थ हो जाएगा
रोते बिलखते हुए वैशाली ने अपनी आपबीती बताई.. पिंटू की नपुंसकता, उसके डॉक्टर के पास जाने से कतराना, उल्टा वैशाली पर गुस्सा करना.. पिछले कई महीनों से पिंटू उसे संतुष्ट नहीं कर पाया था.. सारी बातें विस्तारपूर्वक बताई
सुनकर शीला स्तब्ध हो गई..
थोड़ी नरमी के साथ पर गंभीरतापूर्वक शीला ने कहा "समझ रही हूँ बेटी, समझ रही हूँ तेरी मजबूरी.. तू मेरी बेटी है, तेरे शरीर की आग मैं नहीं समझूंगी तो और कौन समझेगा? पर ये तूने जो किया, इतना बड़ा जोखिम उठाना.. ये बेवकूफी है वैशाली! बहुत बड़ी बेवकूफी..!! इतना भी नहीं समझती तू?"
वैशाली ने उखड़ते हुए कहा "तो क्या करूँ मम्मी? कब तक ऐसे ही बैठी रहूँ?? पिंटू का प्रॉब्लेम अपने आप तो ठीक होने वाला है नहीं.. और डॉक्टर के पास तो वो जाने से रहा..!! इतने महीने तड़पते हुए निकाले.. पर अब बर्दाश्त नहीं होता मुझसे"
शीला का गुस्सा अब अपनी बेटी के प्रति सहानुभूति में बदलने लगा..
शीला: "समझ सकती हूँ बेटा.. मैं तेरी जगह होती तो शायद मैं भी कुछ ऐसा ही करती.. पर मेरी बात और है.. तेरे सिर पर पिंटू नाम का पहरा है..!! तुझे याद है न राजेश वाला कांड? लाख माफ़ी-मिन्नतों के बाद, एक शर्त पर तेरी शादी टिकी है.. कि तू दोबारा ऐसी गलती नहीं करेगी!"
वैशाली अब भड़क पड़ी और बोली "तो क्या करूँ? ऐसे ही मर मरकर जीती रहूँ? पिंटू की खोखली मर्दानगी के लिए अपनी जवानी और अपने अरमानों को आग लगा दूँ?? क्या करूँ मैं, तुम्ही बताओ मुझे मम्मी"
शीला की बोलती बंद हो गई.. वैशाली की बात शत-प्रतिशत सही थी..
उसने एकदम धीरे से कहा "तेरी बात सुनकर अब समझ तो आ रहा है की तूने यह क्यों किया.. और उसपर मैं सवाल भी नहीं उठा रही.. मैं यह कह रही हूँ की यहाँ घर पर उसे बुलाकर यह सब करना खतरे से खाली नहीं है"
वैशाली: "पिंटू बेंगलोर है.. सास-ससुर मेरे दूसरे शहर है.. फिर कहाँ कोई डर की बात है मम्मी?"
शीला: "रे पगली! दुनिया में कुछ भी छुपता है? कल को यह नौकर खुद ही किसी को बता देगा तो..!! पड़ोसी ने देख लिया तो क्या होगा..!!! किसी की नजर पड़ गई तो क्या करेगी... एक बार शक हुआ ना पिंटू को, फिर वह तेरे पीछे पड़ जाएगा.. तू तो जानती है उसका गुस्सा! पिछली बार तो बस पकड़े गए थे, इस बार तो... सबूत मिल गया तो? तलाक! सरेआम बदनामी! और तेरी जिंदगी तबाह हो जाएगी! बेटी, मैं तेरे सुख के खिलाफ नहीं हूँ.. मैं तेरी माँ हूँ, तू खुश रहे, यही चाहती हूँ.. पर तू इतनी लापरवाही से काम मत कर.. अगर करना ही है, तो इतनी बेवकूफी से नहीं..चालाकी से कर"
वैशाली ने बेबस हो कर कहा "फिर क्या करूँ मैं मम्मी? आप ही बताओ"
शीला का खुराफाती दिमाग काम पर लग गया.. उस गोरे लड़के को देखकर नियत तो शीला की भी डोल उठी थी.. मन तो उसका भी कर गया था.. काफी समय से वह केवल राजेश और मदन के वही पुराने लंडों से खेलकर ऊब चुकी थी.. यह बढ़िया मौका था..वैशाली तो वैसे भी वहीं करने वाली थी जो शीला उससे कहेगी
बड़ी ही सावधानी से अपने पाँसे फेंकते हुए शीला ने कहा "देख वैशाली, अब जो हो गया सो हो गया.. लड़का यहाँ आ चुका है.. तो बिना उसका इस्तेमाल किए जाने तो नहीं देंगे..!! और वैसे भी.. अभी तू अकेली तो है नहीं.. तेरे साथ मैं हूँ.. कोई जानेगा तो भी शक नहीं होगा.. इसलिए रास्ता तो साफ है लेकिन.." शीला बीच में ही अटक गई
वैशाली: "लेकिन क्या मम्मी?"
शीला ने एक लंबी सांस छोड़कर कहा "तू उससे मिले उससे पहले मैं उस लड़के को परखूँगी"
वैशाली का दिमाग घूम गया.. इसमें परखना क्या?? ये कोई हीरे मोती है जो इन्हें मम्मी परखेगी?? पर फिर उसका माथा ठनका.. अपनी मम्मी के किस्से उसने भी बहोत सुने थे.. वह समझ गई.. की मम्मी का दिल बाबिल पर आ गया है.. चलो, कोई बात नहीं, इसी बहाने मम्मी मान तो गई.. खुद को तसल्ली देते हुए वैशाली ने कहा
वैशाली: "ठीक है मम्मी, तो पहले आप चले जाइए अंदर"
शीला: "नहीं वैसे सीधे सीधे नहीं"
वैशाली को कुछ समझ नहीं आया, उसने कहा "मतलब? आप कहना क्या चाहती हो?"
शीला ने बड़े ही कमीने अंदाज में कहा "मेरे कहने का मतलब यह है की पहले तू अंदर जा.. और ऊपर ऊपर से शुरुआत कर.. फिर ऐसा दिखावा करेंगे की मैंने तुम दोनों को रंगेहाथों पकड़ लिया..!!"
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वैशाली को कुछ समझ नहीं आ रहा था की शीला क्या खेल खेल रही थी, वह बोली "पर ऐसा क्यों मम्मी?"
शीला ने एक शैतानी मुस्कान के साथ कहा "ऐसा करने से लड़का हमारे दबाव में रहेगा.. किसी के सामने बकेगा नहीं.. मैंने अनुभव से सीखा है, ऐसे मामलों में अगर सामने वाला हमारे कंट्रोल में हो तो आसानी रहती है.. !!"
वैशाली ने जवाब नहीं दिया.. शीला के अगले आदेश के लिए वह तैयार बैठी थी
शीला: "एक काम कर, मैं घर से बाहर चली जाती हूँ, तू मुझे घर की चाबी दे दे.. और फिर मेरे जाने के बाद तू उसके साथ अंदर चली जाना.. फिर कहना की मैं चली गई हूँ और रास्ता साफ है"
वैशाली: "ओके मम्मी" कहते हुए घर के लैच-लॉक की चाबी शीला को दे दी.. शीला तुरंत दरवाजे के बाहर चली गई और वैशाली बेडरूम के अंदर चली आई.. अंदर बेड के पीछे डरा हुआ बाबिल दुबककर बैठा था.. उसकी बड़ी बड़ी आँखों से वैशाली की ओर देख रहा था.. देखकर मन ही मन वैशाली की हंसी छूट गई.. वैसे आधे घंटे पहले उसका हाल भी कुछ वैसा ही तो था..
बाबिल ने घबराते हुए कहा "मैं घर जाऊ?"
वैशाली ने मुस्कुराकर बाबिल के लंड को पकड़ते हुए कहा "जिस काम के लिए आया था वो करेगा नही??"
असमंजस में बाबिल ने पूछा "पर वो मेहमान..!! वो मेडम"
वैशाली: "वो तो कब की चली गई.. अब कोई नहीं है घर पर"
वैशाली उस लड़के का लंड दबोचकर उसके गले को चूमने लगी.. बाबिल की घबराहट धीरे धीरे कम हो रही थी.. गर्दन पर चूमते हुए वैशाली बाबिल के पीछे की तरफ चली गई और पीछे से उसे बाहों में भर लिया
वैशाली की चूचियाँ बाबिल के पीठ पर धँस गई.. वैशाली अपना हाथ आगे लाकर बाबिल के लंड पर ले आई और पतलून के बाहर निकालकर पकड़ कर मसलने लगी..
‘आहह.. मालकिन..’ बाबिल के मुँह से मस्ती भरी ‘आहह’ निकल गई और आँखें बंद हो गईं..
कुछ ही पलों में बाबिल का लंड तन कर अपनी औकात पर आ गया..
इस बात से अंजान कि दरवाजे पर खड़ी शीला ये सब देखते हुए अपने पेटीकोट के ऊपर से अपनी चूत को मसल रही थी..
शीला को अपनी आँखों पर यकीन नहीं हो रहा था..बाबिल का लंबा और मोटा लंड किसी मूसल के तरह खड़ा हुआ था.. जिसे देखते ही शीला की चूत पनियाने लगी..
वैशाली और बाबिल एक दूजे में खोए हुए थे की तभी अचानक से दरवाजा हिलने की आवाज़ से दोनों चौंक गए..
चौंका तो सिर्फ़ बाबिल था और वैशाली तो सब जानते हुए बनने का नाटक कर रही थी..
जैसे ही बाबिल की नज़र शीला पर पड़ी.. मानो उसकी गांड फट गई हो..
वैशाली तो कब से पीछे हट कर शीला की तरफ पीठ करके सर झुकाए खड़ी थी..
बाबिल कभी शीला की तरफ देखता.. कभी वैशाली की तरफ देखता.. तो कभी अपने झटके खाते हुए लंड की तरफ देखता..
डर के मारे थरथर कांप रहे बाबिल को देखकर शीला के होंठों पर वासना से भरी मुस्कान फ़ैल गई..
जिससे देख बाबिल उलझन में पड़ गया..!! यह भला गुस्सा होने की जगह मुस्कुरा क्यों रही है??
‘वो अपना पजामा ठीक कर..’ शीला ने बाबिल के लंड की तरफ इशारा करते हुए कहा..
‘और तुम वैशाली ज़रा बाहर आओ.. ये क्या गुल खिला रही थी?’
यह कह कर शीला वापिस ड्रॉइंग रूम में चली आई.. खेल शुरू हो चुका था.. वैशाली अपनी हँसी रोकते हुए कमरे से बाहर चली गई और बाबिल वहीं ठगा सा खड़ा रह गया.. कुछ पलों के लिए मानो उसके दिमाग़ ने काम करना बंद कर दिया हो..
जब उसे होश सा आया तब उसने लपक कर अपनी ट्रेकपेंट को ऊपर किया.. उसका पूरा बदन डर से थरथर काँप रहा था.. अब क्या होगा?
बाबिल अपना सिर पकड़कर बिस्तर पर बैठ गया..
वैशाली के जाने के बाद बाबिल उस कमरा में ऐसा महसूस कर रहा था, जैसे वो किसी क़ैद खाने में बैठा हो और अभी बाहर से कुछ लोग आयेंगे और उसकी पिटाई शुरू हो जाएगी..
एक अजीब सा सन्नाटा उस कमरा में फैला हुआ था.. तभी कमरे के बाहर से कुछ क़दमों की आहट हुई..
जिससे सुन कर बाबिल के हाथ-पैर काँपने लगे.. लेकिन तभी वैशाली कमरे में दाखिल हुई, उसके चेहरे से ऐसा लग रहा था.. जैसे उसको कोई फर्क ही ना पड़ा हो..
बाबिल ने हकलाते हुए पूछा "क्या.. क्या हुआ... कौन है वो? अब क्या होगा मालकिन?"
वैशाली ने एकदम गंभीर चेहरा बनाकर बिस्तर पर बैठते हुए कहा " वो मेरी मम्मी थी जिन्हों ने हमे पकड़ लिया.. बहोत गुस्से वाली है.. तेरी कंप्लेन पुलिस में कर देने वाली थी.. जैसे तैसे मैंने उन्हें रोक लिया है... सुन बाबिल, अब सब तेरे हाथ में है.. अगर तू चाहे तो ये बात माँ किसी को नहीं बताएगी.. पुलिस को भी नहीं"
बाबिल को कुछ समझ नहीं आ रहा था, वह बोल "पर मैं.. मतलब? पर कैसे मालकिन?"
वैशाली: "तू एक काम कर.. यहाँ पर बैठ… मम्मी थोड़ी देर में यही आ रही हैं.. ध्यान रहें, वो तुझसे जो भी करने को कहें कर लेना.. मना मत करना वरना कहीं वो पुलिस में चली गई तो पूरी ज़िंदगी जेल की चक्की पिसेगा"
यह कह कर वैशाली बिना बाबिल से आँख मिलाए कमरे से बाहर निकल गई, एक बार फिर से वो जान निकाल देने वाला सन्नाटा कमरा में छा गया..
बाबिल को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वो क्या करे.. वह दोनों क्या चाहते थे उससे आखिर..!!!
वैशाली जब बेडरूम से बाहर निकलकर दरवाजा अपने पीछे बंद कर रही थी तभी शीला उसके सामने खड़ी हुई थी..
दोनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा और फिर दोनों के होंठों पर वासना से भरी मुस्कान फ़ैल गई..
‘ध्यान से मम्मी.. लड़का दिखने में भोला सा है पर उसका वो.. बहुत तगड़ा है..’ वैशाली ने शीला के पास से गुज़रते हुए कहा..
वैशाली की बात सुन कर शीला मुस्कुराई.. ‘अपनी माँ को कम आँकने की गलती मत करना कभी..’
वैशाली ने पीछे मुड़ कर शीला की तरफ देखा और एक बार फिर दोनों के होंठों पर मुस्कान फ़ैल गई, फिर वैशाली किचन की ओर चली गई..
उधर कमरे में बैठा, बाबिल अपनी किस्मत को कोस रहा था कि आख़िर वो वैशाली के साथ यहाँ क्यों आया.. क्यों कविता मालकिन के कहने पर वो चला आया.. आज अगर बच गया तो अब बड़ी वाली रमिला मालकिन के अलावा किसी के पास नहीं जाएगा..
एक बार फिर से कमरे के बाहर से आ रही क़दमों की आहट सुन कर बाबिल के रोंगटे खड़े हो गए..
वो जानता था कि अन्दर कौन आने वाला है और वो बिस्तर से खड़ा हो गया..
जैसे ही शीला उसके कमरा में आई तो उसने अपने सर को झुका लिया..
शीला ने एक बार सर झुकाए खड़े बाबिल की तरफ देखा, फिर पलट कर दरवाजे को बंद कर दिया.. दरवाजा बंद होने की आवाज़ सुन कर बाबिल एकदम से चौंक गया..
उसे समझ में नहीं आया कि आख़िर शीला ने दरवाजा किस लिए बंद किया है..
दरवाजा बंद करने के बाद शीला मदहोश अंगड़ाई लेकर बाबिल की तरफ देखते हुए, बिस्तर के पास जाकर खड़ी हो गई..
शीला का मांसल जिस्म अपने जलवे बिखेर रहा था, उसकी गदराई कमर का मांस बाहर निकला हुआ था और नाभि इतनी गहरी थी मानो कुदरत ने उसे दूसरी चूत से नवाजा हो
बाबिल ने तिरछी नज़रों से शीला की तरफ देखा, जो उसकी तरफ देख कर मंद-मंद मुस्करा रही थी..
अपने सामने खड़ी शीला का ये रूप देख उससे यकीन नहीं हो रहा था.. इतने बड़े बड़े स्तनों वाली स्त्री उसने आज तक नहीं देखी थी
उससे देखते ही, बाबिल का मन मचल उठा.. पर कुछ करने या कहने के हिम्मत कहाँ बाकी थी..वो तो किसी मुजरिम की तरह उसके सामने खड़ा था..
‘ओए छोरे इधर आ..’ शीला ने बिस्तर पर बैठते हुए कहा..
बाबिल ने एकदम से चौंकते हुए कहा "जी क्या..?"
शीला: "जी.. जी.. क्या लगा रखा है, इधर आकर खड़ा हो…ठीक मेरे सामने..!!"
बाबिल बिना कुछ बोले शीला के सामने बिस्तर के पास जाकर खड़ा हो गया.. अब भले ही वो सर झुका कर खड़ा था, पर ब्लाउज में से शीला की झाँकती विराट चूचियों का दीदार उसे साफ़ हो रहा था, क्योंकि शीला उसके सामने बिस्तर पर बैठी हुई थी..
‘क्या कर रहा था..तू मेरे बेटी के साथ?’ शीला ने कड़क आवाज़ में बाबिल से पूछा, जिसे सुनते ही बाबिल की गांड फटने को आ गई.. पर वो बिना कुछ बोले खड़ा रहा..
‘सुना नहीं.. क्या पूछा मैंने?’
इस बार बाबिल के लिए चुप रहना नामुनकिन था..
‘वो मैं नहीं.. मालकिन कर रही थीं..’ बाबिल ने शीला की तरफ देखते हुए कहा..
‘अच्छा तो तेरे मतलब सब ग़लती मेरी बेटी की है.. इधर आ..’
शीला ने बाबिल का हाथ पकड़ कर उसे और पास खींच लिया..
बाबिल अवाक सा उसकी ओर देख रहा था..
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शीला अपनी बेटी वैशाली के घर आई है, जहाँ घर के सभी सदस्य अनुपस्थित हैं.. माँ-बेटी साथ समय बिताती हैं, जिससे वैशाली को सहारा मिलता है.. हालाँकि, तीसरे दिन, वैशाली इंस्टाग्राम पर उत्तेजक विडियो देखकर कामुक रूप से उत्तेजित हो जाती है.. अपनी तीव्र इच्छा को शांत करने के लिए, वह कविता की माँ के नौकर बाबिल को बुलाने की योजना बनाती है..
शीला को वैशाली एक प्रदर्शनी में साड़ियाँ देखने भेज देती है.. मौका मिलते ही वह बाबिल को अपने घर बुला लेती है और उसके साथ यौन संबंध शुरू कर देती है.. जैसे ही वे आपस में मग्न होते हैं, अचानक दरवाजे की घंटी बज उठती है, जिससे दोनों चौंक जाते हैं..
अब आगे..
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एक ही पल में वैशाली का हाथ बाबिल के ट्रेकपेंट के ऊपर से ही उसके मस्त लंड को सहलाने लग गया..
इससे पहले की बाबिल संभल पाता, वैशाली ने एक झटके में उसका पेंट, जांघिये समेट घुटनों तक उतार दिया.. और बाबिल के तने हुए हथियार के सामने उकड़ूँ अवस्था में बैठ गई
प्यारे गुलाबी लंड की मोटाई को अपनी मुठ्ठी में पकड़कर, उभरी हुई नसों को वह बेतहाशा चाटने लगी.. बाबिल के तो जैसे होश ही उड़ गए.. चमकते हुए गुलाबी टोपे के मूत्र-छेद पर अपनी जीभ की नोक से चाटना शुरू कर वैशाली ने कुछ ही पलों में उस लंबे लंड को अपने कंठ तक उतार दिया..!!
टिंग टॉंग..!!!
घर की डोरबेल बजी..
वैशाली ने तुरंत लंड को अपने मुंह से बाहर निकाला.. सोच में पड़ गई.. बेवक्त कौन टपक पड़ा..?? उसने अपने होंठ पर उंगली रखकर बाबिल को शांत खड़े रहने का इशारा किया.. पास बेड पर पड़ा टॉप पहन लिया.. और दरवाजे पर आई.. खोलने से पहले उसने दरवाजे में बने छेद से बाहर देखा... बाहर उसकी मम्मी शीला खड़ी थी..!!!!
अरे बाप रे..!!! मम्मी इतनी जल्दी कैसे वापिस आ गई?? अब क्या करें..??? बाबिल को कहाँ छुपाऊँ??
उसी उधेड़बुन के बीच शीला ने और दो तीन बार डोरबेल बजाई..
वैशाली भागकर बेडरूम में आई और बाबिल से कहा.. "जल्दी कपड़े ठीक कर ले.. और झाड़ू उठाकर सफाई शुरू कर"
बाबिल को पता नहीं चला की उसे असल में बुलाया किस लिए गया था..!!! वैशाली को इतनी घबराए हुए देखकर उसने तुरंत झाड़ू उठाया और फर्श पर लगाने लगा..
वैशाली ने दरवाजा खोला.. शीला अंदर आकर उसे आश्चर्य से देखती रही.. ऊपर से नीचे तक वैशाली का निरीक्षण करते हुए शीला के शातिर मन में सौ सवाल खड़े हो रहे थे.. पर वो गर्मी से बेहाल हो रही थी इसलिए उसने पंखा ऑन किया और धम्म से सोफ़े पर बैठ गई..
वैशाली की नज़रों में छुपा डर साफ नजर आ रहा था शीला को.. वह रुमाल से अपने चेहरे का पसीना पोंछते हुए वैशाली की तरफ तीक्ष्ण नज़रों से देख रही थी
वैशाली ने कृत्रिम मुस्कान के साथ कहा "अरे मम्मी, इतनी जल्दी कैसे आ गई? सेल में गई नहीं क्या?"
शीला ने थोड़े गुस्से से कहा "मुझे वहाँ भेजने से पहले चेक तो करना था.. सेल तो कल ही खतम हो गया.. बेकार में आने जाने के २०० रुपये ले लिए ऑटो वाले ने.. पर तू बता.. तू तो ऑफिस जाने वाली थी ना..??"
वैशाली ने नजरें झुका ली और कहा "वो फिर आज ट्रक आया ही नहीं तो मटीरीअल कल ही जाएगा.. जाने का कोई मतलब नहीं था इसलिए..!!"
शीला को कुछ तो गंध आ रही थी पर पता नहीं चल पा रहा था की वैशाली आखिर क्या गुल क हिला रही है.. तभी बेडरूम से कुछ गिरने की आवाज आई.. शीला और वैशाली दोनों चोंक उठे..
शीला: "कौन है अंदर?"
अब वैशाली की कठिन परीक्षा होने वाली थी
वैशाली: "वो.. वो... काफी दिनों से कामवाली बाई नहीं आई थी.. तो मैंने कविता के नौकर को फोन करके बुला लिया..!!"
संशय भरी नज़रों से शीला वैशाली की ओर देखती रही.. घर तो पहले से ही साफ-सुथरा था.. उसने खुद ही पिछले दिन पूरी सफाई की थी.. और वैसे भी वैशाली पहले से सफाई के लिए उतनी उत्सुक नहीं रहती थी.. घर पर भी उसकी ज्यादातर चीजें अस्तव्यस्त ही पड़ी रहती थी.. शीला के लाख कहने के बाद ही वह सफाई करती थी.. ऐसे में वैशाली की कही बात शीला को हजम नहीं हुई
शीला तुरंत उठ खड़ी हुई.. और अंदर बेडरूम में गई.. अंदर उस नेपाली लड़के को काम करते हुए उसने कुछ मिनटों तक उसका गहराई से मुआयना किया.. और फिर वापिस बाहर आई तब तक वैशाली किचन में चली गई थी.. असल में वह शीला से नजर मिलाना नहीं चाहती थी
सोफ़े पर आकर बैठी शीला का दिमाग बुलेट ट्रेन की गति से चलने लगा..!! साड़ियों के सेल में भेजने के लिए वैशाली की उत्सुकता.. फिर अचानक ऑफिस जाने की बात... फिर आधे ही घंटे के अंदर सब केन्सल हो जाना और अकेली वैशाली एक गोरे-चिट्टे तंदूरस्त जवान लड़के के साथ..!!
शीला के दिमाग को दो और दो चार का गणित गिनने में ज्यादा वक्त नहीं लगा.. उसने आवाज देकर वैशाली को बुलाना चाहा.. पर ड्रॉइंग रूम में उनकी बातचीत उस नौकर को भी सुनाई देती.. इसलिए वैशाली को बुलाने के बजाए उसने खुद ही अंदर कीचेन में जाकर बात करना मुनासिब समझा..
वह जब कीचेन में आई तो वैशाली बेफिजूल ही बर्तन ऊपर नीचे कर रही थी..
शीला: "क्या चल रहा है कुछ बताएगी मुझे तू?"
वैशाली का बदन पसीने से तर हो गया, वह जानती थी की अपनी मम्मी की नज़रों से यह छुपाना नामुमकिन था
उसने बनावटी हंसी के साथ कहा "किस बारे में बात कर रही हो मम्मी? मैं समझी नहीं"
अब शीला की भृकुटी तंग हो गई, उसने वैशाली का हाथ पकड़कर अपनी ओर खींचते हुए कहा "आधे घंटे पहले तक तो ऑफिस जाने की बहोत जल्दी थी तुझे.. मुझे अकेले नहीं जाना था फिर भी साड़ियों के सेल में धकेल दिया.. और अचानक से तुझे सफाई की इतनी फिकर कब से होने लगी? हुई तो हुई.. यह सब कुछ आधे ही घंटे में?? चलो माना की तुझे मेरे जाने के बाद सफाई का खयाल आया होगा.. उतनी देर में तूने कविता को फोन कर नौकर को बुलाया और वो आ भी गया..!!! कविता का घर इतना नजदीक तो है नहीं..!!"
वैशाली का मन कर रहा था की अभी धरती फटे और वो अंदर समा जाएँ.. शीला ने उसकी चोरी बखूबी पकड़ ली थी.. उसकी माँ के सभी शक जायज थे और उसका कोई जवाब नहीं था उसके पास
वैशाली: "आप गलत समझ रही हो मम्मी.. वो.. असल में... अम्म.. वो कविता को फोन किया तो उसका नौकर यहीं कुछ सामान लेने आया था तो मैंने बुला लिया.. वैसे और कुछ नहीं है"
शीला को अब गुस्सा चढ़ने लगा.. यह लड़की मुझे मूर्ख समझती है क्या..!! उतनी उसकी उम्र नहीं है जिससे ज्यादा तो मैं खुद ऐसे कांड कर चुकी हूँ.. और यह मुझे बेवकूफ बना रही है??
शीला ने गुस्से से तमतमाते हुए चेहरे से वैशाली को कहा "मेरे सामने देख.. नजरें क्यों छिपा रही है?"
बेमन से वैशाली ने घबराई हुई नज़रों से शीला की तरफ देखा.. शीला की आँखों का गुस्सा देखकर वैशाली की हालत खराब हो गई
शीला: "सच सच बता.. क्या माजरा है? क्या चल रहा है तेरे और उस नौकर के बीच?"
अब वैशाली से अपने आप को रोका न गया.. उसने शीला के कंधों पर अपना सिर रख दिया और फूटफुटकर रोने लग गई..
एक ही पल में शीला का शक यकीन में बदल गया.. रो रही वैशाली पर गुस्से से गुर्राई "तू पागल हो गई है क्या वैशाली? वो भी यहाँ अपने घर में? एक नौकर को बुलाकर? अक्ल है भी तुझे या बेच आई है? शादी से पहले जब पिंटू ने तुझे राजेश के साथ देख लिया था तब क्या हुआ था.. भूल गई क्या?? कितनी मिन्नतें.. कितने वादे किए थे.. खुद मैंने पैरों में पड़कर.. गिड़गिड़ाकर माफी मांगी थी, तब जाकर पिंटू माना था.. जरा सा भी अंदाजा है तुझे की पिंटू को पता चला तो क्या होगा??"
शीला के कंधों पर सिर रखकर रो रही वैशाली ने अपने आँसू पोंछे और डाइनिंग टेबल की कुर्सी खींचकर नजरें झुकाए बैठ गई.. शीला भी उसके सामने बैठ गई.. आखिर कारण तो जानना ही था की आखिर वैशाली ने ऐसी बेवकूफों वाली हरकत भला क्यों की.. शीला को दिक्कत उस बात से नहीं थी की उसकी बेटी किसी पराए मर्द के साथ पाई गई थी, तकलीफ इस बात की थी की पिंटू को पता चल गया तो कैसा अनर्थ हो जाएगा
रोते बिलखते हुए वैशाली ने अपनी आपबीती बताई.. पिंटू की नपुंसकता, उसके डॉक्टर के पास जाने से कतराना, उल्टा वैशाली पर गुस्सा करना.. पिछले कई महीनों से पिंटू उसे संतुष्ट नहीं कर पाया था.. सारी बातें विस्तारपूर्वक बताई
सुनकर शीला स्तब्ध हो गई..
थोड़ी नरमी के साथ पर गंभीरतापूर्वक शीला ने कहा "समझ रही हूँ बेटी, समझ रही हूँ तेरी मजबूरी.. तू मेरी बेटी है, तेरे शरीर की आग मैं नहीं समझूंगी तो और कौन समझेगा? पर ये तूने जो किया, इतना बड़ा जोखिम उठाना.. ये बेवकूफी है वैशाली! बहुत बड़ी बेवकूफी..!! इतना भी नहीं समझती तू?"
वैशाली ने उखड़ते हुए कहा "तो क्या करूँ मम्मी? कब तक ऐसे ही बैठी रहूँ?? पिंटू का प्रॉब्लेम अपने आप तो ठीक होने वाला है नहीं.. और डॉक्टर के पास तो वो जाने से रहा..!! इतने महीने तड़पते हुए निकाले.. पर अब बर्दाश्त नहीं होता मुझसे"
शीला का गुस्सा अब अपनी बेटी के प्रति सहानुभूति में बदलने लगा..
शीला: "समझ सकती हूँ बेटा.. मैं तेरी जगह होती तो शायद मैं भी कुछ ऐसा ही करती.. पर मेरी बात और है.. तेरे सिर पर पिंटू नाम का पहरा है..!! तुझे याद है न राजेश वाला कांड? लाख माफ़ी-मिन्नतों के बाद, एक शर्त पर तेरी शादी टिकी है.. कि तू दोबारा ऐसी गलती नहीं करेगी!"
वैशाली अब भड़क पड़ी और बोली "तो क्या करूँ? ऐसे ही मर मरकर जीती रहूँ? पिंटू की खोखली मर्दानगी के लिए अपनी जवानी और अपने अरमानों को आग लगा दूँ?? क्या करूँ मैं, तुम्ही बताओ मुझे मम्मी"
शीला की बोलती बंद हो गई.. वैशाली की बात शत-प्रतिशत सही थी..
उसने एकदम धीरे से कहा "तेरी बात सुनकर अब समझ तो आ रहा है की तूने यह क्यों किया.. और उसपर मैं सवाल भी नहीं उठा रही.. मैं यह कह रही हूँ की यहाँ घर पर उसे बुलाकर यह सब करना खतरे से खाली नहीं है"
वैशाली: "पिंटू बेंगलोर है.. सास-ससुर मेरे दूसरे शहर है.. फिर कहाँ कोई डर की बात है मम्मी?"
शीला: "रे पगली! दुनिया में कुछ भी छुपता है? कल को यह नौकर खुद ही किसी को बता देगा तो..!! पड़ोसी ने देख लिया तो क्या होगा..!!! किसी की नजर पड़ गई तो क्या करेगी... एक बार शक हुआ ना पिंटू को, फिर वह तेरे पीछे पड़ जाएगा.. तू तो जानती है उसका गुस्सा! पिछली बार तो बस पकड़े गए थे, इस बार तो... सबूत मिल गया तो? तलाक! सरेआम बदनामी! और तेरी जिंदगी तबाह हो जाएगी! बेटी, मैं तेरे सुख के खिलाफ नहीं हूँ.. मैं तेरी माँ हूँ, तू खुश रहे, यही चाहती हूँ.. पर तू इतनी लापरवाही से काम मत कर.. अगर करना ही है, तो इतनी बेवकूफी से नहीं..चालाकी से कर"
वैशाली ने बेबस हो कर कहा "फिर क्या करूँ मैं मम्मी? आप ही बताओ"
शीला का खुराफाती दिमाग काम पर लग गया.. उस गोरे लड़के को देखकर नियत तो शीला की भी डोल उठी थी.. मन तो उसका भी कर गया था.. काफी समय से वह केवल राजेश और मदन के वही पुराने लंडों से खेलकर ऊब चुकी थी.. यह बढ़िया मौका था..वैशाली तो वैसे भी वहीं करने वाली थी जो शीला उससे कहेगी
बड़ी ही सावधानी से अपने पाँसे फेंकते हुए शीला ने कहा "देख वैशाली, अब जो हो गया सो हो गया.. लड़का यहाँ आ चुका है.. तो बिना उसका इस्तेमाल किए जाने तो नहीं देंगे..!! और वैसे भी.. अभी तू अकेली तो है नहीं.. तेरे साथ मैं हूँ.. कोई जानेगा तो भी शक नहीं होगा.. इसलिए रास्ता तो साफ है लेकिन.." शीला बीच में ही अटक गई
वैशाली: "लेकिन क्या मम्मी?"
शीला ने एक लंबी सांस छोड़कर कहा "तू उससे मिले उससे पहले मैं उस लड़के को परखूँगी"
वैशाली का दिमाग घूम गया.. इसमें परखना क्या?? ये कोई हीरे मोती है जो इन्हें मम्मी परखेगी?? पर फिर उसका माथा ठनका.. अपनी मम्मी के किस्से उसने भी बहोत सुने थे.. वह समझ गई.. की मम्मी का दिल बाबिल पर आ गया है.. चलो, कोई बात नहीं, इसी बहाने मम्मी मान तो गई.. खुद को तसल्ली देते हुए वैशाली ने कहा
वैशाली: "ठीक है मम्मी, तो पहले आप चले जाइए अंदर"
शीला: "नहीं वैसे सीधे सीधे नहीं"
वैशाली को कुछ समझ नहीं आया, उसने कहा "मतलब? आप कहना क्या चाहती हो?"
शीला ने बड़े ही कमीने अंदाज में कहा "मेरे कहने का मतलब यह है की पहले तू अंदर जा.. और ऊपर ऊपर से शुरुआत कर.. फिर ऐसा दिखावा करेंगे की मैंने तुम दोनों को रंगेहाथों पकड़ लिया..!!"
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वैशाली को कुछ समझ नहीं आ रहा था की शीला क्या खेल खेल रही थी, वह बोली "पर ऐसा क्यों मम्मी?"
शीला ने एक शैतानी मुस्कान के साथ कहा "ऐसा करने से लड़का हमारे दबाव में रहेगा.. किसी के सामने बकेगा नहीं.. मैंने अनुभव से सीखा है, ऐसे मामलों में अगर सामने वाला हमारे कंट्रोल में हो तो आसानी रहती है.. !!"
वैशाली ने जवाब नहीं दिया.. शीला के अगले आदेश के लिए वह तैयार बैठी थी
शीला: "एक काम कर, मैं घर से बाहर चली जाती हूँ, तू मुझे घर की चाबी दे दे.. और फिर मेरे जाने के बाद तू उसके साथ अंदर चली जाना.. फिर कहना की मैं चली गई हूँ और रास्ता साफ है"
वैशाली: "ओके मम्मी" कहते हुए घर के लैच-लॉक की चाबी शीला को दे दी.. शीला तुरंत दरवाजे के बाहर चली गई और वैशाली बेडरूम के अंदर चली आई.. अंदर बेड के पीछे डरा हुआ बाबिल दुबककर बैठा था.. उसकी बड़ी बड़ी आँखों से वैशाली की ओर देख रहा था.. देखकर मन ही मन वैशाली की हंसी छूट गई.. वैसे आधे घंटे पहले उसका हाल भी कुछ वैसा ही तो था..
बाबिल ने घबराते हुए कहा "मैं घर जाऊ?"
वैशाली ने मुस्कुराकर बाबिल के लंड को पकड़ते हुए कहा "जिस काम के लिए आया था वो करेगा नही??"
असमंजस में बाबिल ने पूछा "पर वो मेहमान..!! वो मेडम"
वैशाली: "वो तो कब की चली गई.. अब कोई नहीं है घर पर"
वैशाली उस लड़के का लंड दबोचकर उसके गले को चूमने लगी.. बाबिल की घबराहट धीरे धीरे कम हो रही थी.. गर्दन पर चूमते हुए वैशाली बाबिल के पीछे की तरफ चली गई और पीछे से उसे बाहों में भर लिया
वैशाली की चूचियाँ बाबिल के पीठ पर धँस गई.. वैशाली अपना हाथ आगे लाकर बाबिल के लंड पर ले आई और पतलून के बाहर निकालकर पकड़ कर मसलने लगी..
‘आहह.. मालकिन..’ बाबिल के मुँह से मस्ती भरी ‘आहह’ निकल गई और आँखें बंद हो गईं..
कुछ ही पलों में बाबिल का लंड तन कर अपनी औकात पर आ गया..
इस बात से अंजान कि दरवाजे पर खड़ी शीला ये सब देखते हुए अपने पेटीकोट के ऊपर से अपनी चूत को मसल रही थी..
शीला को अपनी आँखों पर यकीन नहीं हो रहा था..बाबिल का लंबा और मोटा लंड किसी मूसल के तरह खड़ा हुआ था.. जिसे देखते ही शीला की चूत पनियाने लगी..
वैशाली और बाबिल एक दूजे में खोए हुए थे की तभी अचानक से दरवाजा हिलने की आवाज़ से दोनों चौंक गए..
चौंका तो सिर्फ़ बाबिल था और वैशाली तो सब जानते हुए बनने का नाटक कर रही थी..
जैसे ही बाबिल की नज़र शीला पर पड़ी.. मानो उसकी गांड फट गई हो..
वैशाली तो कब से पीछे हट कर शीला की तरफ पीठ करके सर झुकाए खड़ी थी..
बाबिल कभी शीला की तरफ देखता.. कभी वैशाली की तरफ देखता.. तो कभी अपने झटके खाते हुए लंड की तरफ देखता..
डर के मारे थरथर कांप रहे बाबिल को देखकर शीला के होंठों पर वासना से भरी मुस्कान फ़ैल गई..
जिससे देख बाबिल उलझन में पड़ गया..!! यह भला गुस्सा होने की जगह मुस्कुरा क्यों रही है??
‘वो अपना पजामा ठीक कर..’ शीला ने बाबिल के लंड की तरफ इशारा करते हुए कहा..
‘और तुम वैशाली ज़रा बाहर आओ.. ये क्या गुल खिला रही थी?’
यह कह कर शीला वापिस ड्रॉइंग रूम में चली आई.. खेल शुरू हो चुका था.. वैशाली अपनी हँसी रोकते हुए कमरे से बाहर चली गई और बाबिल वहीं ठगा सा खड़ा रह गया.. कुछ पलों के लिए मानो उसके दिमाग़ ने काम करना बंद कर दिया हो..
जब उसे होश सा आया तब उसने लपक कर अपनी ट्रेकपेंट को ऊपर किया.. उसका पूरा बदन डर से थरथर काँप रहा था.. अब क्या होगा?
बाबिल अपना सिर पकड़कर बिस्तर पर बैठ गया..
वैशाली के जाने के बाद बाबिल उस कमरा में ऐसा महसूस कर रहा था, जैसे वो किसी क़ैद खाने में बैठा हो और अभी बाहर से कुछ लोग आयेंगे और उसकी पिटाई शुरू हो जाएगी..
एक अजीब सा सन्नाटा उस कमरा में फैला हुआ था.. तभी कमरे के बाहर से कुछ क़दमों की आहट हुई..
जिससे सुन कर बाबिल के हाथ-पैर काँपने लगे.. लेकिन तभी वैशाली कमरे में दाखिल हुई, उसके चेहरे से ऐसा लग रहा था.. जैसे उसको कोई फर्क ही ना पड़ा हो..
बाबिल ने हकलाते हुए पूछा "क्या.. क्या हुआ... कौन है वो? अब क्या होगा मालकिन?"
वैशाली ने एकदम गंभीर चेहरा बनाकर बिस्तर पर बैठते हुए कहा " वो मेरी मम्मी थी जिन्हों ने हमे पकड़ लिया.. बहोत गुस्से वाली है.. तेरी कंप्लेन पुलिस में कर देने वाली थी.. जैसे तैसे मैंने उन्हें रोक लिया है... सुन बाबिल, अब सब तेरे हाथ में है.. अगर तू चाहे तो ये बात माँ किसी को नहीं बताएगी.. पुलिस को भी नहीं"
बाबिल को कुछ समझ नहीं आ रहा था, वह बोल "पर मैं.. मतलब? पर कैसे मालकिन?"
वैशाली: "तू एक काम कर.. यहाँ पर बैठ… मम्मी थोड़ी देर में यही आ रही हैं.. ध्यान रहें, वो तुझसे जो भी करने को कहें कर लेना.. मना मत करना वरना कहीं वो पुलिस में चली गई तो पूरी ज़िंदगी जेल की चक्की पिसेगा"
यह कह कर वैशाली बिना बाबिल से आँख मिलाए कमरे से बाहर निकल गई, एक बार फिर से वो जान निकाल देने वाला सन्नाटा कमरा में छा गया..
बाबिल को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वो क्या करे.. वह दोनों क्या चाहते थे उससे आखिर..!!!
वैशाली जब बेडरूम से बाहर निकलकर दरवाजा अपने पीछे बंद कर रही थी तभी शीला उसके सामने खड़ी हुई थी..
दोनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा और फिर दोनों के होंठों पर वासना से भरी मुस्कान फ़ैल गई..
‘ध्यान से मम्मी.. लड़का दिखने में भोला सा है पर उसका वो.. बहुत तगड़ा है..’ वैशाली ने शीला के पास से गुज़रते हुए कहा..
वैशाली की बात सुन कर शीला मुस्कुराई.. ‘अपनी माँ को कम आँकने की गलती मत करना कभी..’
वैशाली ने पीछे मुड़ कर शीला की तरफ देखा और एक बार फिर दोनों के होंठों पर मुस्कान फ़ैल गई, फिर वैशाली किचन की ओर चली गई..
उधर कमरे में बैठा, बाबिल अपनी किस्मत को कोस रहा था कि आख़िर वो वैशाली के साथ यहाँ क्यों आया.. क्यों कविता मालकिन के कहने पर वो चला आया.. आज अगर बच गया तो अब बड़ी वाली रमिला मालकिन के अलावा किसी के पास नहीं जाएगा..
एक बार फिर से कमरे के बाहर से आ रही क़दमों की आहट सुन कर बाबिल के रोंगटे खड़े हो गए..
वो जानता था कि अन्दर कौन आने वाला है और वो बिस्तर से खड़ा हो गया..
जैसे ही शीला उसके कमरा में आई तो उसने अपने सर को झुका लिया..
शीला ने एक बार सर झुकाए खड़े बाबिल की तरफ देखा, फिर पलट कर दरवाजे को बंद कर दिया.. दरवाजा बंद होने की आवाज़ सुन कर बाबिल एकदम से चौंक गया..
उसे समझ में नहीं आया कि आख़िर शीला ने दरवाजा किस लिए बंद किया है..
दरवाजा बंद करने के बाद शीला मदहोश अंगड़ाई लेकर बाबिल की तरफ देखते हुए, बिस्तर के पास जाकर खड़ी हो गई..
शीला का मांसल जिस्म अपने जलवे बिखेर रहा था, उसकी गदराई कमर का मांस बाहर निकला हुआ था और नाभि इतनी गहरी थी मानो कुदरत ने उसे दूसरी चूत से नवाजा हो
बाबिल ने तिरछी नज़रों से शीला की तरफ देखा, जो उसकी तरफ देख कर मंद-मंद मुस्करा रही थी..
अपने सामने खड़ी शीला का ये रूप देख उससे यकीन नहीं हो रहा था.. इतने बड़े बड़े स्तनों वाली स्त्री उसने आज तक नहीं देखी थी
उससे देखते ही, बाबिल का मन मचल उठा.. पर कुछ करने या कहने के हिम्मत कहाँ बाकी थी..वो तो किसी मुजरिम की तरह उसके सामने खड़ा था..
‘ओए छोरे इधर आ..’ शीला ने बिस्तर पर बैठते हुए कहा..
बाबिल ने एकदम से चौंकते हुए कहा "जी क्या..?"
शीला: "जी.. जी.. क्या लगा रखा है, इधर आकर खड़ा हो…ठीक मेरे सामने..!!"
बाबिल बिना कुछ बोले शीला के सामने बिस्तर के पास जाकर खड़ा हो गया.. अब भले ही वो सर झुका कर खड़ा था, पर ब्लाउज में से शीला की झाँकती विराट चूचियों का दीदार उसे साफ़ हो रहा था, क्योंकि शीला उसके सामने बिस्तर पर बैठी हुई थी..
‘क्या कर रहा था..तू मेरे बेटी के साथ?’ शीला ने कड़क आवाज़ में बाबिल से पूछा, जिसे सुनते ही बाबिल की गांड फटने को आ गई.. पर वो बिना कुछ बोले खड़ा रहा..
‘सुना नहीं.. क्या पूछा मैंने?’
इस बार बाबिल के लिए चुप रहना नामुनकिन था..
‘वो मैं नहीं.. मालकिन कर रही थीं..’ बाबिल ने शीला की तरफ देखते हुए कहा..
‘अच्छा तो तेरे मतलब सब ग़लती मेरी बेटी की है.. इधर आ..’
शीला ने बाबिल का हाथ पकड़ कर उसे और पास खींच लिया..
बाबिल अवाक सा उसकी ओर देख रहा था..
मेरी stories कोई नहीं पढ़रहा.... पता नहीं ऐसा मेरे साथ ही क्यों होता हैBahut hi gazab ki update he vakharia Bhai
Babil ke sath to us gaane wala scene ho gaya
SHIKAR KARNE KO AAYE.............SHIKAR HO KAR CHALE............
Maja aa gaya bhai, dono maa beti ne gazab ki scheme lagayi he........
Keep rocking bro
don't worry niraash na ho .....मेरी stories कोई नहीं पढ़रहा.... पता नहीं ऐसा मेरे साथ ही क्यों होता है![]()
Padhta hoon, bahut jaldiमेरी stories कोई नहीं पढ़रहा.... पता नहीं ऐसा मेरे साथ ही क्यों होता है![]()
Plz पढ़िए और बताइये क्या कमी है के लोग पढ़ नहीं रहे हैPadhta hoon, bahut jaldi
Behtreen updateपिछले अपडेट में आपने पढ़ा की..
शीला अपनी बेटी वैशाली के घर आई है, जहाँ घर के सभी सदस्य अनुपस्थित हैं.. माँ-बेटी साथ समय बिताती हैं, जिससे वैशाली को सहारा मिलता है.. हालाँकि, तीसरे दिन, वैशाली इंस्टाग्राम पर उत्तेजक विडियो देखकर कामुक रूप से उत्तेजित हो जाती है.. अपनी तीव्र इच्छा को शांत करने के लिए, वह कविता की माँ के नौकर बाबिल को बुलाने की योजना बनाती है..
शीला को वैशाली एक प्रदर्शनी में साड़ियाँ देखने भेज देती है.. मौका मिलते ही वह बाबिल को अपने घर बुला लेती है और उसके साथ यौन संबंध शुरू कर देती है.. जैसे ही वे आपस में मग्न होते हैं, अचानक दरवाजे की घंटी बज उठती है, जिससे दोनों चौंक जाते हैं..
अब आगे..
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एक ही पल में वैशाली का हाथ बाबिल के ट्रेकपेंट के ऊपर से ही उसके मस्त लंड को सहलाने लग गया..
इससे पहले की बाबिल संभल पाता, वैशाली ने एक झटके में उसका पेंट, जांघिये समेट घुटनों तक उतार दिया.. और बाबिल के तने हुए हथियार के सामने उकड़ूँ अवस्था में बैठ गई
प्यारे गुलाबी लंड की मोटाई को अपनी मुठ्ठी में पकड़कर, उभरी हुई नसों को वह बेतहाशा चाटने लगी.. बाबिल के तो जैसे होश ही उड़ गए.. चमकते हुए गुलाबी टोपे के मूत्र-छेद पर अपनी जीभ की नोक से चाटना शुरू कर वैशाली ने कुछ ही पलों में उस लंबे लंड को अपने कंठ तक उतार दिया..!!
टिंग टॉंग..!!!
घर की डोरबेल बजी..
वैशाली ने तुरंत लंड को अपने मुंह से बाहर निकाला.. सोच में पड़ गई.. बेवक्त कौन टपक पड़ा..?? उसने अपने होंठ पर उंगली रखकर बाबिल को शांत खड़े रहने का इशारा किया.. पास बेड पर पड़ा टॉप पहन लिया.. और दरवाजे पर आई.. खोलने से पहले उसने दरवाजे में बने छेद से बाहर देखा... बाहर उसकी मम्मी शीला खड़ी थी..!!!!
अरे बाप रे..!!! मम्मी इतनी जल्दी कैसे वापिस आ गई?? अब क्या करें..??? बाबिल को कहाँ छुपाऊँ??
उसी उधेड़बुन के बीच शीला ने और दो तीन बार डोरबेल बजाई..
वैशाली भागकर बेडरूम में आई और बाबिल से कहा.. "जल्दी कपड़े ठीक कर ले.. और झाड़ू उठाकर सफाई शुरू कर"
बाबिल को पता नहीं चला की उसे असल में बुलाया किस लिए गया था..!!! वैशाली को इतनी घबराए हुए देखकर उसने तुरंत झाड़ू उठाया और फर्श पर लगाने लगा..
वैशाली ने दरवाजा खोला.. शीला अंदर आकर उसे आश्चर्य से देखती रही.. ऊपर से नीचे तक वैशाली का निरीक्षण करते हुए शीला के शातिर मन में सौ सवाल खड़े हो रहे थे.. पर वो गर्मी से बेहाल हो रही थी इसलिए उसने पंखा ऑन किया और धम्म से सोफ़े पर बैठ गई..
वैशाली की नज़रों में छुपा डर साफ नजर आ रहा था शीला को.. वह रुमाल से अपने चेहरे का पसीना पोंछते हुए वैशाली की तरफ तीक्ष्ण नज़रों से देख रही थी
वैशाली ने कृत्रिम मुस्कान के साथ कहा "अरे मम्मी, इतनी जल्दी कैसे आ गई? सेल में गई नहीं क्या?"
शीला ने थोड़े गुस्से से कहा "मुझे वहाँ भेजने से पहले चेक तो करना था.. सेल तो कल ही खतम हो गया.. बेकार में आने जाने के २०० रुपये ले लिए ऑटो वाले ने.. पर तू बता.. तू तो ऑफिस जाने वाली थी ना..??"
वैशाली ने नजरें झुका ली और कहा "वो फिर आज ट्रक आया ही नहीं तो मटीरीअल कल ही जाएगा.. जाने का कोई मतलब नहीं था इसलिए..!!"
शीला को कुछ तो गंध आ रही थी पर पता नहीं चल पा रहा था की वैशाली आखिर क्या गुल क हिला रही है.. तभी बेडरूम से कुछ गिरने की आवाज आई.. शीला और वैशाली दोनों चोंक उठे..
शीला: "कौन है अंदर?"
अब वैशाली की कठिन परीक्षा होने वाली थी
वैशाली: "वो.. वो... काफी दिनों से कामवाली बाई नहीं आई थी.. तो मैंने कविता के नौकर को फोन करके बुला लिया..!!"
संशय भरी नज़रों से शीला वैशाली की ओर देखती रही.. घर तो पहले से ही साफ-सुथरा था.. उसने खुद ही पिछले दिन पूरी सफाई की थी.. और वैसे भी वैशाली पहले से सफाई के लिए उतनी उत्सुक नहीं रहती थी.. घर पर भी उसकी ज्यादातर चीजें अस्तव्यस्त ही पड़ी रहती थी.. शीला के लाख कहने के बाद ही वह सफाई करती थी.. ऐसे में वैशाली की कही बात शीला को हजम नहीं हुई
शीला तुरंत उठ खड़ी हुई.. और अंदर बेडरूम में गई.. अंदर उस नेपाली लड़के को काम करते हुए उसने कुछ मिनटों तक उसका गहराई से मुआयना किया.. और फिर वापिस बाहर आई तब तक वैशाली किचन में चली गई थी.. असल में वह शीला से नजर मिलाना नहीं चाहती थी
सोफ़े पर आकर बैठी शीला का दिमाग बुलेट ट्रेन की गति से चलने लगा..!! साड़ियों के सेल में भेजने के लिए वैशाली की उत्सुकता.. फिर अचानक ऑफिस जाने की बात... फिर आधे ही घंटे के अंदर सब केन्सल हो जाना और अकेली वैशाली एक गोरे-चिट्टे तंदूरस्त जवान लड़के के साथ..!!
शीला के दिमाग को दो और दो चार का गणित गिनने में ज्यादा वक्त नहीं लगा.. उसने आवाज देकर वैशाली को बुलाना चाहा.. पर ड्रॉइंग रूम में उनकी बातचीत उस नौकर को भी सुनाई देती.. इसलिए वैशाली को बुलाने के बजाए उसने खुद ही अंदर कीचेन में जाकर बात करना मुनासिब समझा..
वह जब कीचेन में आई तो वैशाली बेफिजूल ही बर्तन ऊपर नीचे कर रही थी..
शीला: "क्या चल रहा है कुछ बताएगी मुझे तू?"
वैशाली का बदन पसीने से तर हो गया, वह जानती थी की अपनी मम्मी की नज़रों से यह छुपाना नामुमकिन था
उसने बनावटी हंसी के साथ कहा "किस बारे में बात कर रही हो मम्मी? मैं समझी नहीं"
अब शीला की भृकुटी तंग हो गई, उसने वैशाली का हाथ पकड़कर अपनी ओर खींचते हुए कहा "आधे घंटे पहले तक तो ऑफिस जाने की बहोत जल्दी थी तुझे.. मुझे अकेले नहीं जाना था फिर भी साड़ियों के सेल में धकेल दिया.. और अचानक से तुझे सफाई की इतनी फिकर कब से होने लगी? हुई तो हुई.. यह सब कुछ आधे ही घंटे में?? चलो माना की तुझे मेरे जाने के बाद सफाई का खयाल आया होगा.. उतनी देर में तूने कविता को फोन कर नौकर को बुलाया और वो आ भी गया..!!! कविता का घर इतना नजदीक तो है नहीं..!!"
वैशाली का मन कर रहा था की अभी धरती फटे और वो अंदर समा जाएँ.. शीला ने उसकी चोरी बखूबी पकड़ ली थी.. उसकी माँ के सभी शक जायज थे और उसका कोई जवाब नहीं था उसके पास
वैशाली: "आप गलत समझ रही हो मम्मी.. वो.. असल में... अम्म.. वो कविता को फोन किया तो उसका नौकर यहीं कुछ सामान लेने आया था तो मैंने बुला लिया.. वैसे और कुछ नहीं है"
शीला को अब गुस्सा चढ़ने लगा.. यह लड़की मुझे मूर्ख समझती है क्या..!! उतनी उसकी उम्र नहीं है जिससे ज्यादा तो मैं खुद ऐसे कांड कर चुकी हूँ.. और यह मुझे बेवकूफ बना रही है??
शीला ने गुस्से से तमतमाते हुए चेहरे से वैशाली को कहा "मेरे सामने देख.. नजरें क्यों छिपा रही है?"
बेमन से वैशाली ने घबराई हुई नज़रों से शीला की तरफ देखा.. शीला की आँखों का गुस्सा देखकर वैशाली की हालत खराब हो गई
शीला: "सच सच बता.. क्या माजरा है? क्या चल रहा है तेरे और उस नौकर के बीच?"
अब वैशाली से अपने आप को रोका न गया.. उसने शीला के कंधों पर अपना सिर रख दिया और फूटफुटकर रोने लग गई..
एक ही पल में शीला का शक यकीन में बदल गया.. रो रही वैशाली पर गुस्से से गुर्राई "तू पागल हो गई है क्या वैशाली? वो भी यहाँ अपने घर में? एक नौकर को बुलाकर? अक्ल है भी तुझे या बेच आई है? शादी से पहले जब पिंटू ने तुझे राजेश के साथ देख लिया था तब क्या हुआ था.. भूल गई क्या?? कितनी मिन्नतें.. कितने वादे किए थे.. खुद मैंने पैरों में पड़कर.. गिड़गिड़ाकर माफी मांगी थी, तब जाकर पिंटू माना था.. जरा सा भी अंदाजा है तुझे की पिंटू को पता चला तो क्या होगा??"
शीला के कंधों पर सिर रखकर रो रही वैशाली ने अपने आँसू पोंछे और डाइनिंग टेबल की कुर्सी खींचकर नजरें झुकाए बैठ गई.. शीला भी उसके सामने बैठ गई.. आखिर कारण तो जानना ही था की आखिर वैशाली ने ऐसी बेवकूफों वाली हरकत भला क्यों की.. शीला को दिक्कत उस बात से नहीं थी की उसकी बेटी किसी पराए मर्द के साथ पाई गई थी, तकलीफ इस बात की थी की पिंटू को पता चल गया तो कैसा अनर्थ हो जाएगा
रोते बिलखते हुए वैशाली ने अपनी आपबीती बताई.. पिंटू की नपुंसकता, उसके डॉक्टर के पास जाने से कतराना, उल्टा वैशाली पर गुस्सा करना.. पिछले कई महीनों से पिंटू उसे संतुष्ट नहीं कर पाया था.. सारी बातें विस्तारपूर्वक बताई
सुनकर शीला स्तब्ध हो गई..
थोड़ी नरमी के साथ पर गंभीरतापूर्वक शीला ने कहा "समझ रही हूँ बेटी, समझ रही हूँ तेरी मजबूरी.. तू मेरी बेटी है, तेरे शरीर की आग मैं नहीं समझूंगी तो और कौन समझेगा? पर ये तूने जो किया, इतना बड़ा जोखिम उठाना.. ये बेवकूफी है वैशाली! बहुत बड़ी बेवकूफी..!! इतना भी नहीं समझती तू?"
वैशाली ने उखड़ते हुए कहा "तो क्या करूँ मम्मी? कब तक ऐसे ही बैठी रहूँ?? पिंटू का प्रॉब्लेम अपने आप तो ठीक होने वाला है नहीं.. और डॉक्टर के पास तो वो जाने से रहा..!! इतने महीने तड़पते हुए निकाले.. पर अब बर्दाश्त नहीं होता मुझसे"
शीला का गुस्सा अब अपनी बेटी के प्रति सहानुभूति में बदलने लगा..
शीला: "समझ सकती हूँ बेटा.. मैं तेरी जगह होती तो शायद मैं भी कुछ ऐसा ही करती.. पर मेरी बात और है.. तेरे सिर पर पिंटू नाम का पहरा है..!! तुझे याद है न राजेश वाला कांड? लाख माफ़ी-मिन्नतों के बाद, एक शर्त पर तेरी शादी टिकी है.. कि तू दोबारा ऐसी गलती नहीं करेगी!"
वैशाली अब भड़क पड़ी और बोली "तो क्या करूँ? ऐसे ही मर मरकर जीती रहूँ? पिंटू की खोखली मर्दानगी के लिए अपनी जवानी और अपने अरमानों को आग लगा दूँ?? क्या करूँ मैं, तुम्ही बताओ मुझे मम्मी"
शीला की बोलती बंद हो गई.. वैशाली की बात शत-प्रतिशत सही थी..
उसने एकदम धीरे से कहा "तेरी बात सुनकर अब समझ तो आ रहा है की तूने यह क्यों किया.. और उसपर मैं सवाल भी नहीं उठा रही.. मैं यह कह रही हूँ की यहाँ घर पर उसे बुलाकर यह सब करना खतरे से खाली नहीं है"
वैशाली: "पिंटू बेंगलोर है.. सास-ससुर मेरे दूसरे शहर है.. फिर कहाँ कोई डर की बात है मम्मी?"
शीला: "रे पगली! दुनिया में कुछ भी छुपता है? कल को यह नौकर खुद ही किसी को बता देगा तो..!! पड़ोसी ने देख लिया तो क्या होगा..!!! किसी की नजर पड़ गई तो क्या करेगी... एक बार शक हुआ ना पिंटू को, फिर वह तेरे पीछे पड़ जाएगा.. तू तो जानती है उसका गुस्सा! पिछली बार तो बस पकड़े गए थे, इस बार तो... सबूत मिल गया तो? तलाक! सरेआम बदनामी! और तेरी जिंदगी तबाह हो जाएगी! बेटी, मैं तेरे सुख के खिलाफ नहीं हूँ.. मैं तेरी माँ हूँ, तू खुश रहे, यही चाहती हूँ.. पर तू इतनी लापरवाही से काम मत कर.. अगर करना ही है, तो इतनी बेवकूफी से नहीं..चालाकी से कर"
वैशाली ने बेबस हो कर कहा "फिर क्या करूँ मैं मम्मी? आप ही बताओ"
शीला का खुराफाती दिमाग काम पर लग गया.. उस गोरे लड़के को देखकर नियत तो शीला की भी डोल उठी थी.. मन तो उसका भी कर गया था.. काफी समय से वह केवल राजेश और मदन के वही पुराने लंडों से खेलकर ऊब चुकी थी.. यह बढ़िया मौका था..वैशाली तो वैसे भी वहीं करने वाली थी जो शीला उससे कहेगी
बड़ी ही सावधानी से अपने पाँसे फेंकते हुए शीला ने कहा "देख वैशाली, अब जो हो गया सो हो गया.. लड़का यहाँ आ चुका है.. तो बिना उसका इस्तेमाल किए जाने तो नहीं देंगे..!! और वैसे भी.. अभी तू अकेली तो है नहीं.. तेरे साथ मैं हूँ.. कोई जानेगा तो भी शक नहीं होगा.. इसलिए रास्ता तो साफ है लेकिन.." शीला बीच में ही अटक गई
वैशाली: "लेकिन क्या मम्मी?"
शीला ने एक लंबी सांस छोड़कर कहा "तू उससे मिले उससे पहले मैं उस लड़के को परखूँगी"
वैशाली का दिमाग घूम गया.. इसमें परखना क्या?? ये कोई हीरे मोती है जो इन्हें मम्मी परखेगी?? पर फिर उसका माथा ठनका.. अपनी मम्मी के किस्से उसने भी बहोत सुने थे.. वह समझ गई.. की मम्मी का दिल बाबिल पर आ गया है.. चलो, कोई बात नहीं, इसी बहाने मम्मी मान तो गई.. खुद को तसल्ली देते हुए वैशाली ने कहा
वैशाली: "ठीक है मम्मी, तो पहले आप चले जाइए अंदर"
शीला: "नहीं वैसे सीधे सीधे नहीं"
वैशाली को कुछ समझ नहीं आया, उसने कहा "मतलब? आप कहना क्या चाहती हो?"
शीला ने बड़े ही कमीने अंदाज में कहा "मेरे कहने का मतलब यह है की पहले तू अंदर जा.. और ऊपर ऊपर से शुरुआत कर.. फिर ऐसा दिखावा करेंगे की मैंने तुम दोनों को रंगेहाथों पकड़ लिया..!!"
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वैशाली को कुछ समझ नहीं आ रहा था की शीला क्या खेल खेल रही थी, वह बोली "पर ऐसा क्यों मम्मी?"
शीला ने एक शैतानी मुस्कान के साथ कहा "ऐसा करने से लड़का हमारे दबाव में रहेगा.. किसी के सामने बकेगा नहीं.. मैंने अनुभव से सीखा है, ऐसे मामलों में अगर सामने वाला हमारे कंट्रोल में हो तो आसानी रहती है.. !!"
वैशाली ने जवाब नहीं दिया.. शीला के अगले आदेश के लिए वह तैयार बैठी थी
शीला: "एक काम कर, मैं घर से बाहर चली जाती हूँ, तू मुझे घर की चाबी दे दे.. और फिर मेरे जाने के बाद तू उसके साथ अंदर चली जाना.. फिर कहना की मैं चली गई हूँ और रास्ता साफ है"
वैशाली: "ओके मम्मी" कहते हुए घर के लैच-लॉक की चाबी शीला को दे दी.. शीला तुरंत दरवाजे के बाहर चली गई और वैशाली बेडरूम के अंदर चली आई.. अंदर बेड के पीछे डरा हुआ बाबिल दुबककर बैठा था.. उसकी बड़ी बड़ी आँखों से वैशाली की ओर देख रहा था.. देखकर मन ही मन वैशाली की हंसी छूट गई.. वैसे आधे घंटे पहले उसका हाल भी कुछ वैसा ही तो था..
बाबिल ने घबराते हुए कहा "मैं घर जाऊ?"
वैशाली ने मुस्कुराकर बाबिल के लंड को पकड़ते हुए कहा "जिस काम के लिए आया था वो करेगा नही??"
असमंजस में बाबिल ने पूछा "पर वो मेहमान..!! वो मेडम"
वैशाली: "वो तो कब की चली गई.. अब कोई नहीं है घर पर"
वैशाली उस लड़के का लंड दबोचकर उसके गले को चूमने लगी.. बाबिल की घबराहट धीरे धीरे कम हो रही थी.. गर्दन पर चूमते हुए वैशाली बाबिल के पीछे की तरफ चली गई और पीछे से उसे बाहों में भर लिया
वैशाली की चूचियाँ बाबिल के पीठ पर धँस गई.. वैशाली अपना हाथ आगे लाकर बाबिल के लंड पर ले आई और पतलून के बाहर निकालकर पकड़ कर मसलने लगी..
‘आहह.. मालकिन..’ बाबिल के मुँह से मस्ती भरी ‘आहह’ निकल गई और आँखें बंद हो गईं..
कुछ ही पलों में बाबिल का लंड तन कर अपनी औकात पर आ गया..
इस बात से अंजान कि दरवाजे पर खड़ी शीला ये सब देखते हुए अपने पेटीकोट के ऊपर से अपनी चूत को मसल रही थी..
शीला को अपनी आँखों पर यकीन नहीं हो रहा था..बाबिल का लंबा और मोटा लंड किसी मूसल के तरह खड़ा हुआ था.. जिसे देखते ही शीला की चूत पनियाने लगी..
वैशाली और बाबिल एक दूजे में खोए हुए थे की तभी अचानक से दरवाजा हिलने की आवाज़ से दोनों चौंक गए..
चौंका तो सिर्फ़ बाबिल था और वैशाली तो सब जानते हुए बनने का नाटक कर रही थी..
जैसे ही बाबिल की नज़र शीला पर पड़ी.. मानो उसकी गांड फट गई हो..
वैशाली तो कब से पीछे हट कर शीला की तरफ पीठ करके सर झुकाए खड़ी थी..
बाबिल कभी शीला की तरफ देखता.. कभी वैशाली की तरफ देखता.. तो कभी अपने झटके खाते हुए लंड की तरफ देखता..
डर के मारे थरथर कांप रहे बाबिल को देखकर शीला के होंठों पर वासना से भरी मुस्कान फ़ैल गई..
जिससे देख बाबिल उलझन में पड़ गया..!! यह भला गुस्सा होने की जगह मुस्कुरा क्यों रही है??
‘वो अपना पजामा ठीक कर..’ शीला ने बाबिल के लंड की तरफ इशारा करते हुए कहा..
‘और तुम वैशाली ज़रा बाहर आओ.. ये क्या गुल खिला रही थी?’
यह कह कर शीला वापिस ड्रॉइंग रूम में चली आई.. खेल शुरू हो चुका था.. वैशाली अपनी हँसी रोकते हुए कमरे से बाहर चली गई और बाबिल वहीं ठगा सा खड़ा रह गया.. कुछ पलों के लिए मानो उसके दिमाग़ ने काम करना बंद कर दिया हो..
जब उसे होश सा आया तब उसने लपक कर अपनी ट्रेकपेंट को ऊपर किया.. उसका पूरा बदन डर से थरथर काँप रहा था.. अब क्या होगा?
बाबिल अपना सिर पकड़कर बिस्तर पर बैठ गया..
वैशाली के जाने के बाद बाबिल उस कमरा में ऐसा महसूस कर रहा था, जैसे वो किसी क़ैद खाने में बैठा हो और अभी बाहर से कुछ लोग आयेंगे और उसकी पिटाई शुरू हो जाएगी..
एक अजीब सा सन्नाटा उस कमरा में फैला हुआ था.. तभी कमरे के बाहर से कुछ क़दमों की आहट हुई..
जिससे सुन कर बाबिल के हाथ-पैर काँपने लगे.. लेकिन तभी वैशाली कमरे में दाखिल हुई, उसके चेहरे से ऐसा लग रहा था.. जैसे उसको कोई फर्क ही ना पड़ा हो..
बाबिल ने हकलाते हुए पूछा "क्या.. क्या हुआ... कौन है वो? अब क्या होगा मालकिन?"
वैशाली ने एकदम गंभीर चेहरा बनाकर बिस्तर पर बैठते हुए कहा " वो मेरी मम्मी थी जिन्हों ने हमे पकड़ लिया.. बहोत गुस्से वाली है.. तेरी कंप्लेन पुलिस में कर देने वाली थी.. जैसे तैसे मैंने उन्हें रोक लिया है... सुन बाबिल, अब सब तेरे हाथ में है.. अगर तू चाहे तो ये बात माँ किसी को नहीं बताएगी.. पुलिस को भी नहीं"
बाबिल को कुछ समझ नहीं आ रहा था, वह बोल "पर मैं.. मतलब? पर कैसे मालकिन?"
वैशाली: "तू एक काम कर.. यहाँ पर बैठ… मम्मी थोड़ी देर में यही आ रही हैं.. ध्यान रहें, वो तुझसे जो भी करने को कहें कर लेना.. मना मत करना वरना कहीं वो पुलिस में चली गई तो पूरी ज़िंदगी जेल की चक्की पिसेगा"
यह कह कर वैशाली बिना बाबिल से आँख मिलाए कमरे से बाहर निकल गई, एक बार फिर से वो जान निकाल देने वाला सन्नाटा कमरा में छा गया..
बाबिल को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वो क्या करे.. वह दोनों क्या चाहते थे उससे आखिर..!!!
वैशाली जब बेडरूम से बाहर निकलकर दरवाजा अपने पीछे बंद कर रही थी तभी शीला उसके सामने खड़ी हुई थी..
दोनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा और फिर दोनों के होंठों पर वासना से भरी मुस्कान फ़ैल गई..
‘ध्यान से मम्मी.. लड़का दिखने में भोला सा है पर उसका वो.. बहुत तगड़ा है..’ वैशाली ने शीला के पास से गुज़रते हुए कहा..
वैशाली की बात सुन कर शीला मुस्कुराई.. ‘अपनी माँ को कम आँकने की गलती मत करना कभी..’
वैशाली ने पीछे मुड़ कर शीला की तरफ देखा और एक बार फिर दोनों के होंठों पर मुस्कान फ़ैल गई, फिर वैशाली किचन की ओर चली गई..
उधर कमरे में बैठा, बाबिल अपनी किस्मत को कोस रहा था कि आख़िर वो वैशाली के साथ यहाँ क्यों आया.. क्यों कविता मालकिन के कहने पर वो चला आया.. आज अगर बच गया तो अब बड़ी वाली रमिला मालकिन के अलावा किसी के पास नहीं जाएगा..
एक बार फिर से कमरे के बाहर से आ रही क़दमों की आहट सुन कर बाबिल के रोंगटे खड़े हो गए..
वो जानता था कि अन्दर कौन आने वाला है और वो बिस्तर से खड़ा हो गया..
जैसे ही शीला उसके कमरा में आई तो उसने अपने सर को झुका लिया..
शीला ने एक बार सर झुकाए खड़े बाबिल की तरफ देखा, फिर पलट कर दरवाजे को बंद कर दिया.. दरवाजा बंद होने की आवाज़ सुन कर बाबिल एकदम से चौंक गया..
उसे समझ में नहीं आया कि आख़िर शीला ने दरवाजा किस लिए बंद किया है..
दरवाजा बंद करने के बाद शीला मदहोश अंगड़ाई लेकर बाबिल की तरफ देखते हुए, बिस्तर के पास जाकर खड़ी हो गई..
शीला का मांसल जिस्म अपने जलवे बिखेर रहा था, उसकी गदराई कमर का मांस बाहर निकला हुआ था और नाभि इतनी गहरी थी मानो कुदरत ने उसे दूसरी चूत से नवाजा हो
बाबिल ने तिरछी नज़रों से शीला की तरफ देखा, जो उसकी तरफ देख कर मंद-मंद मुस्करा रही थी..
अपने सामने खड़ी शीला का ये रूप देख उससे यकीन नहीं हो रहा था.. इतने बड़े बड़े स्तनों वाली स्त्री उसने आज तक नहीं देखी थी
उससे देखते ही, बाबिल का मन मचल उठा.. पर कुछ करने या कहने के हिम्मत कहाँ बाकी थी..वो तो किसी मुजरिम की तरह उसके सामने खड़ा था..
‘ओए छोरे इधर आ..’ शीला ने बिस्तर पर बैठते हुए कहा..
बाबिल ने एकदम से चौंकते हुए कहा "जी क्या..?"
शीला: "जी.. जी.. क्या लगा रखा है, इधर आकर खड़ा हो…ठीक मेरे सामने..!!"
बाबिल बिना कुछ बोले शीला के सामने बिस्तर के पास जाकर खड़ा हो गया.. अब भले ही वो सर झुका कर खड़ा था, पर ब्लाउज में से शीला की झाँकती विराट चूचियों का दीदार उसे साफ़ हो रहा था, क्योंकि शीला उसके सामने बिस्तर पर बैठी हुई थी..
‘क्या कर रहा था..तू मेरे बेटी के साथ?’ शीला ने कड़क आवाज़ में बाबिल से पूछा, जिसे सुनते ही बाबिल की गांड फटने को आ गई.. पर वो बिना कुछ बोले खड़ा रहा..
‘सुना नहीं.. क्या पूछा मैंने?’
इस बार बाबिल के लिए चुप रहना नामुनकिन था..
‘वो मैं नहीं.. मालकिन कर रही थीं..’ बाबिल ने शीला की तरफ देखते हुए कहा..
‘अच्छा तो तेरे मतलब सब ग़लती मेरी बेटी की है.. इधर आ..’
शीला ने बाबिल का हाथ पकड़ कर उसे और पास खींच लिया..
बाबिल अवाक सा उसकी ओर देख रहा था..
Mast updateपिछले अपडेट में आपने पढ़ा की..
शीला अपनी बेटी वैशाली के घर आई है, जहाँ घर के सभी सदस्य अनुपस्थित हैं.. माँ-बेटी साथ समय बिताती हैं, जिससे वैशाली को सहारा मिलता है.. हालाँकि, तीसरे दिन, वैशाली इंस्टाग्राम पर उत्तेजक विडियो देखकर कामुक रूप से उत्तेजित हो जाती है.. अपनी तीव्र इच्छा को शांत करने के लिए, वह कविता की माँ के नौकर बाबिल को बुलाने की योजना बनाती है..
शीला को वैशाली एक प्रदर्शनी में साड़ियाँ देखने भेज देती है.. मौका मिलते ही वह बाबिल को अपने घर बुला लेती है और उसके साथ यौन संबंध शुरू कर देती है.. जैसे ही वे आपस में मग्न होते हैं, अचानक दरवाजे की घंटी बज उठती है, जिससे दोनों चौंक जाते हैं..
अब आगे..
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एक ही पल में वैशाली का हाथ बाबिल के ट्रेकपेंट के ऊपर से ही उसके मस्त लंड को सहलाने लग गया..
इससे पहले की बाबिल संभल पाता, वैशाली ने एक झटके में उसका पेंट, जांघिये समेट घुटनों तक उतार दिया.. और बाबिल के तने हुए हथियार के सामने उकड़ूँ अवस्था में बैठ गई
प्यारे गुलाबी लंड की मोटाई को अपनी मुठ्ठी में पकड़कर, उभरी हुई नसों को वह बेतहाशा चाटने लगी.. बाबिल के तो जैसे होश ही उड़ गए.. चमकते हुए गुलाबी टोपे के मूत्र-छेद पर अपनी जीभ की नोक से चाटना शुरू कर वैशाली ने कुछ ही पलों में उस लंबे लंड को अपने कंठ तक उतार दिया..!!
टिंग टॉंग..!!!
घर की डोरबेल बजी..
वैशाली ने तुरंत लंड को अपने मुंह से बाहर निकाला.. सोच में पड़ गई.. बेवक्त कौन टपक पड़ा..?? उसने अपने होंठ पर उंगली रखकर बाबिल को शांत खड़े रहने का इशारा किया.. पास बेड पर पड़ा टॉप पहन लिया.. और दरवाजे पर आई.. खोलने से पहले उसने दरवाजे में बने छेद से बाहर देखा... बाहर उसकी मम्मी शीला खड़ी थी..!!!!
अरे बाप रे..!!! मम्मी इतनी जल्दी कैसे वापिस आ गई?? अब क्या करें..??? बाबिल को कहाँ छुपाऊँ??
उसी उधेड़बुन के बीच शीला ने और दो तीन बार डोरबेल बजाई..
वैशाली भागकर बेडरूम में आई और बाबिल से कहा.. "जल्दी कपड़े ठीक कर ले.. और झाड़ू उठाकर सफाई शुरू कर"
बाबिल को पता नहीं चला की उसे असल में बुलाया किस लिए गया था..!!! वैशाली को इतनी घबराए हुए देखकर उसने तुरंत झाड़ू उठाया और फर्श पर लगाने लगा..
वैशाली ने दरवाजा खोला.. शीला अंदर आकर उसे आश्चर्य से देखती रही.. ऊपर से नीचे तक वैशाली का निरीक्षण करते हुए शीला के शातिर मन में सौ सवाल खड़े हो रहे थे.. पर वो गर्मी से बेहाल हो रही थी इसलिए उसने पंखा ऑन किया और धम्म से सोफ़े पर बैठ गई..
वैशाली की नज़रों में छुपा डर साफ नजर आ रहा था शीला को.. वह रुमाल से अपने चेहरे का पसीना पोंछते हुए वैशाली की तरफ तीक्ष्ण नज़रों से देख रही थी
वैशाली ने कृत्रिम मुस्कान के साथ कहा "अरे मम्मी, इतनी जल्दी कैसे आ गई? सेल में गई नहीं क्या?"
शीला ने थोड़े गुस्से से कहा "मुझे वहाँ भेजने से पहले चेक तो करना था.. सेल तो कल ही खतम हो गया.. बेकार में आने जाने के २०० रुपये ले लिए ऑटो वाले ने.. पर तू बता.. तू तो ऑफिस जाने वाली थी ना..??"
वैशाली ने नजरें झुका ली और कहा "वो फिर आज ट्रक आया ही नहीं तो मटीरीअल कल ही जाएगा.. जाने का कोई मतलब नहीं था इसलिए..!!"
शीला को कुछ तो गंध आ रही थी पर पता नहीं चल पा रहा था की वैशाली आखिर क्या गुल क हिला रही है.. तभी बेडरूम से कुछ गिरने की आवाज आई.. शीला और वैशाली दोनों चोंक उठे..
शीला: "कौन है अंदर?"
अब वैशाली की कठिन परीक्षा होने वाली थी
वैशाली: "वो.. वो... काफी दिनों से कामवाली बाई नहीं आई थी.. तो मैंने कविता के नौकर को फोन करके बुला लिया..!!"
संशय भरी नज़रों से शीला वैशाली की ओर देखती रही.. घर तो पहले से ही साफ-सुथरा था.. उसने खुद ही पिछले दिन पूरी सफाई की थी.. और वैसे भी वैशाली पहले से सफाई के लिए उतनी उत्सुक नहीं रहती थी.. घर पर भी उसकी ज्यादातर चीजें अस्तव्यस्त ही पड़ी रहती थी.. शीला के लाख कहने के बाद ही वह सफाई करती थी.. ऐसे में वैशाली की कही बात शीला को हजम नहीं हुई
शीला तुरंत उठ खड़ी हुई.. और अंदर बेडरूम में गई.. अंदर उस नेपाली लड़के को काम करते हुए उसने कुछ मिनटों तक उसका गहराई से मुआयना किया.. और फिर वापिस बाहर आई तब तक वैशाली किचन में चली गई थी.. असल में वह शीला से नजर मिलाना नहीं चाहती थी
सोफ़े पर आकर बैठी शीला का दिमाग बुलेट ट्रेन की गति से चलने लगा..!! साड़ियों के सेल में भेजने के लिए वैशाली की उत्सुकता.. फिर अचानक ऑफिस जाने की बात... फिर आधे ही घंटे के अंदर सब केन्सल हो जाना और अकेली वैशाली एक गोरे-चिट्टे तंदूरस्त जवान लड़के के साथ..!!
शीला के दिमाग को दो और दो चार का गणित गिनने में ज्यादा वक्त नहीं लगा.. उसने आवाज देकर वैशाली को बुलाना चाहा.. पर ड्रॉइंग रूम में उनकी बातचीत उस नौकर को भी सुनाई देती.. इसलिए वैशाली को बुलाने के बजाए उसने खुद ही अंदर कीचेन में जाकर बात करना मुनासिब समझा..
वह जब कीचेन में आई तो वैशाली बेफिजूल ही बर्तन ऊपर नीचे कर रही थी..
शीला: "क्या चल रहा है कुछ बताएगी मुझे तू?"
वैशाली का बदन पसीने से तर हो गया, वह जानती थी की अपनी मम्मी की नज़रों से यह छुपाना नामुमकिन था
उसने बनावटी हंसी के साथ कहा "किस बारे में बात कर रही हो मम्मी? मैं समझी नहीं"
अब शीला की भृकुटी तंग हो गई, उसने वैशाली का हाथ पकड़कर अपनी ओर खींचते हुए कहा "आधे घंटे पहले तक तो ऑफिस जाने की बहोत जल्दी थी तुझे.. मुझे अकेले नहीं जाना था फिर भी साड़ियों के सेल में धकेल दिया.. और अचानक से तुझे सफाई की इतनी फिकर कब से होने लगी? हुई तो हुई.. यह सब कुछ आधे ही घंटे में?? चलो माना की तुझे मेरे जाने के बाद सफाई का खयाल आया होगा.. उतनी देर में तूने कविता को फोन कर नौकर को बुलाया और वो आ भी गया..!!! कविता का घर इतना नजदीक तो है नहीं..!!"
वैशाली का मन कर रहा था की अभी धरती फटे और वो अंदर समा जाएँ.. शीला ने उसकी चोरी बखूबी पकड़ ली थी.. उसकी माँ के सभी शक जायज थे और उसका कोई जवाब नहीं था उसके पास
वैशाली: "आप गलत समझ रही हो मम्मी.. वो.. असल में... अम्म.. वो कविता को फोन किया तो उसका नौकर यहीं कुछ सामान लेने आया था तो मैंने बुला लिया.. वैसे और कुछ नहीं है"
शीला को अब गुस्सा चढ़ने लगा.. यह लड़की मुझे मूर्ख समझती है क्या..!! उतनी उसकी उम्र नहीं है जिससे ज्यादा तो मैं खुद ऐसे कांड कर चुकी हूँ.. और यह मुझे बेवकूफ बना रही है??
शीला ने गुस्से से तमतमाते हुए चेहरे से वैशाली को कहा "मेरे सामने देख.. नजरें क्यों छिपा रही है?"
बेमन से वैशाली ने घबराई हुई नज़रों से शीला की तरफ देखा.. शीला की आँखों का गुस्सा देखकर वैशाली की हालत खराब हो गई
शीला: "सच सच बता.. क्या माजरा है? क्या चल रहा है तेरे और उस नौकर के बीच?"
अब वैशाली से अपने आप को रोका न गया.. उसने शीला के कंधों पर अपना सिर रख दिया और फूटफुटकर रोने लग गई..
एक ही पल में शीला का शक यकीन में बदल गया.. रो रही वैशाली पर गुस्से से गुर्राई "तू पागल हो गई है क्या वैशाली? वो भी यहाँ अपने घर में? एक नौकर को बुलाकर? अक्ल है भी तुझे या बेच आई है? शादी से पहले जब पिंटू ने तुझे राजेश के साथ देख लिया था तब क्या हुआ था.. भूल गई क्या?? कितनी मिन्नतें.. कितने वादे किए थे.. खुद मैंने पैरों में पड़कर.. गिड़गिड़ाकर माफी मांगी थी, तब जाकर पिंटू माना था.. जरा सा भी अंदाजा है तुझे की पिंटू को पता चला तो क्या होगा??"
शीला के कंधों पर सिर रखकर रो रही वैशाली ने अपने आँसू पोंछे और डाइनिंग टेबल की कुर्सी खींचकर नजरें झुकाए बैठ गई.. शीला भी उसके सामने बैठ गई.. आखिर कारण तो जानना ही था की आखिर वैशाली ने ऐसी बेवकूफों वाली हरकत भला क्यों की.. शीला को दिक्कत उस बात से नहीं थी की उसकी बेटी किसी पराए मर्द के साथ पाई गई थी, तकलीफ इस बात की थी की पिंटू को पता चल गया तो कैसा अनर्थ हो जाएगा
रोते बिलखते हुए वैशाली ने अपनी आपबीती बताई.. पिंटू की नपुंसकता, उसके डॉक्टर के पास जाने से कतराना, उल्टा वैशाली पर गुस्सा करना.. पिछले कई महीनों से पिंटू उसे संतुष्ट नहीं कर पाया था.. सारी बातें विस्तारपूर्वक बताई
सुनकर शीला स्तब्ध हो गई..
थोड़ी नरमी के साथ पर गंभीरतापूर्वक शीला ने कहा "समझ रही हूँ बेटी, समझ रही हूँ तेरी मजबूरी.. तू मेरी बेटी है, तेरे शरीर की आग मैं नहीं समझूंगी तो और कौन समझेगा? पर ये तूने जो किया, इतना बड़ा जोखिम उठाना.. ये बेवकूफी है वैशाली! बहुत बड़ी बेवकूफी..!! इतना भी नहीं समझती तू?"
वैशाली ने उखड़ते हुए कहा "तो क्या करूँ मम्मी? कब तक ऐसे ही बैठी रहूँ?? पिंटू का प्रॉब्लेम अपने आप तो ठीक होने वाला है नहीं.. और डॉक्टर के पास तो वो जाने से रहा..!! इतने महीने तड़पते हुए निकाले.. पर अब बर्दाश्त नहीं होता मुझसे"
शीला का गुस्सा अब अपनी बेटी के प्रति सहानुभूति में बदलने लगा..
शीला: "समझ सकती हूँ बेटा.. मैं तेरी जगह होती तो शायद मैं भी कुछ ऐसा ही करती.. पर मेरी बात और है.. तेरे सिर पर पिंटू नाम का पहरा है..!! तुझे याद है न राजेश वाला कांड? लाख माफ़ी-मिन्नतों के बाद, एक शर्त पर तेरी शादी टिकी है.. कि तू दोबारा ऐसी गलती नहीं करेगी!"
वैशाली अब भड़क पड़ी और बोली "तो क्या करूँ? ऐसे ही मर मरकर जीती रहूँ? पिंटू की खोखली मर्दानगी के लिए अपनी जवानी और अपने अरमानों को आग लगा दूँ?? क्या करूँ मैं, तुम्ही बताओ मुझे मम्मी"
शीला की बोलती बंद हो गई.. वैशाली की बात शत-प्रतिशत सही थी..
उसने एकदम धीरे से कहा "तेरी बात सुनकर अब समझ तो आ रहा है की तूने यह क्यों किया.. और उसपर मैं सवाल भी नहीं उठा रही.. मैं यह कह रही हूँ की यहाँ घर पर उसे बुलाकर यह सब करना खतरे से खाली नहीं है"
वैशाली: "पिंटू बेंगलोर है.. सास-ससुर मेरे दूसरे शहर है.. फिर कहाँ कोई डर की बात है मम्मी?"
शीला: "रे पगली! दुनिया में कुछ भी छुपता है? कल को यह नौकर खुद ही किसी को बता देगा तो..!! पड़ोसी ने देख लिया तो क्या होगा..!!! किसी की नजर पड़ गई तो क्या करेगी... एक बार शक हुआ ना पिंटू को, फिर वह तेरे पीछे पड़ जाएगा.. तू तो जानती है उसका गुस्सा! पिछली बार तो बस पकड़े गए थे, इस बार तो... सबूत मिल गया तो? तलाक! सरेआम बदनामी! और तेरी जिंदगी तबाह हो जाएगी! बेटी, मैं तेरे सुख के खिलाफ नहीं हूँ.. मैं तेरी माँ हूँ, तू खुश रहे, यही चाहती हूँ.. पर तू इतनी लापरवाही से काम मत कर.. अगर करना ही है, तो इतनी बेवकूफी से नहीं..चालाकी से कर"
वैशाली ने बेबस हो कर कहा "फिर क्या करूँ मैं मम्मी? आप ही बताओ"
शीला का खुराफाती दिमाग काम पर लग गया.. उस गोरे लड़के को देखकर नियत तो शीला की भी डोल उठी थी.. मन तो उसका भी कर गया था.. काफी समय से वह केवल राजेश और मदन के वही पुराने लंडों से खेलकर ऊब चुकी थी.. यह बढ़िया मौका था..वैशाली तो वैसे भी वहीं करने वाली थी जो शीला उससे कहेगी
बड़ी ही सावधानी से अपने पाँसे फेंकते हुए शीला ने कहा "देख वैशाली, अब जो हो गया सो हो गया.. लड़का यहाँ आ चुका है.. तो बिना उसका इस्तेमाल किए जाने तो नहीं देंगे..!! और वैसे भी.. अभी तू अकेली तो है नहीं.. तेरे साथ मैं हूँ.. कोई जानेगा तो भी शक नहीं होगा.. इसलिए रास्ता तो साफ है लेकिन.." शीला बीच में ही अटक गई
वैशाली: "लेकिन क्या मम्मी?"
शीला ने एक लंबी सांस छोड़कर कहा "तू उससे मिले उससे पहले मैं उस लड़के को परखूँगी"
वैशाली का दिमाग घूम गया.. इसमें परखना क्या?? ये कोई हीरे मोती है जो इन्हें मम्मी परखेगी?? पर फिर उसका माथा ठनका.. अपनी मम्मी के किस्से उसने भी बहोत सुने थे.. वह समझ गई.. की मम्मी का दिल बाबिल पर आ गया है.. चलो, कोई बात नहीं, इसी बहाने मम्मी मान तो गई.. खुद को तसल्ली देते हुए वैशाली ने कहा
वैशाली: "ठीक है मम्मी, तो पहले आप चले जाइए अंदर"
शीला: "नहीं वैसे सीधे सीधे नहीं"
वैशाली को कुछ समझ नहीं आया, उसने कहा "मतलब? आप कहना क्या चाहती हो?"
शीला ने बड़े ही कमीने अंदाज में कहा "मेरे कहने का मतलब यह है की पहले तू अंदर जा.. और ऊपर ऊपर से शुरुआत कर.. फिर ऐसा दिखावा करेंगे की मैंने तुम दोनों को रंगेहाथों पकड़ लिया..!!"
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वैशाली को कुछ समझ नहीं आ रहा था की शीला क्या खेल खेल रही थी, वह बोली "पर ऐसा क्यों मम्मी?"
शीला ने एक शैतानी मुस्कान के साथ कहा "ऐसा करने से लड़का हमारे दबाव में रहेगा.. किसी के सामने बकेगा नहीं.. मैंने अनुभव से सीखा है, ऐसे मामलों में अगर सामने वाला हमारे कंट्रोल में हो तो आसानी रहती है.. !!"
वैशाली ने जवाब नहीं दिया.. शीला के अगले आदेश के लिए वह तैयार बैठी थी
शीला: "एक काम कर, मैं घर से बाहर चली जाती हूँ, तू मुझे घर की चाबी दे दे.. और फिर मेरे जाने के बाद तू उसके साथ अंदर चली जाना.. फिर कहना की मैं चली गई हूँ और रास्ता साफ है"
वैशाली: "ओके मम्मी" कहते हुए घर के लैच-लॉक की चाबी शीला को दे दी.. शीला तुरंत दरवाजे के बाहर चली गई और वैशाली बेडरूम के अंदर चली आई.. अंदर बेड के पीछे डरा हुआ बाबिल दुबककर बैठा था.. उसकी बड़ी बड़ी आँखों से वैशाली की ओर देख रहा था.. देखकर मन ही मन वैशाली की हंसी छूट गई.. वैसे आधे घंटे पहले उसका हाल भी कुछ वैसा ही तो था..
बाबिल ने घबराते हुए कहा "मैं घर जाऊ?"
वैशाली ने मुस्कुराकर बाबिल के लंड को पकड़ते हुए कहा "जिस काम के लिए आया था वो करेगा नही??"
असमंजस में बाबिल ने पूछा "पर वो मेहमान..!! वो मेडम"
वैशाली: "वो तो कब की चली गई.. अब कोई नहीं है घर पर"
वैशाली उस लड़के का लंड दबोचकर उसके गले को चूमने लगी.. बाबिल की घबराहट धीरे धीरे कम हो रही थी.. गर्दन पर चूमते हुए वैशाली बाबिल के पीछे की तरफ चली गई और पीछे से उसे बाहों में भर लिया
वैशाली की चूचियाँ बाबिल के पीठ पर धँस गई.. वैशाली अपना हाथ आगे लाकर बाबिल के लंड पर ले आई और पतलून के बाहर निकालकर पकड़ कर मसलने लगी..
‘आहह.. मालकिन..’ बाबिल के मुँह से मस्ती भरी ‘आहह’ निकल गई और आँखें बंद हो गईं..
कुछ ही पलों में बाबिल का लंड तन कर अपनी औकात पर आ गया..
इस बात से अंजान कि दरवाजे पर खड़ी शीला ये सब देखते हुए अपने पेटीकोट के ऊपर से अपनी चूत को मसल रही थी..
शीला को अपनी आँखों पर यकीन नहीं हो रहा था..बाबिल का लंबा और मोटा लंड किसी मूसल के तरह खड़ा हुआ था.. जिसे देखते ही शीला की चूत पनियाने लगी..
वैशाली और बाबिल एक दूजे में खोए हुए थे की तभी अचानक से दरवाजा हिलने की आवाज़ से दोनों चौंक गए..
चौंका तो सिर्फ़ बाबिल था और वैशाली तो सब जानते हुए बनने का नाटक कर रही थी..
जैसे ही बाबिल की नज़र शीला पर पड़ी.. मानो उसकी गांड फट गई हो..
वैशाली तो कब से पीछे हट कर शीला की तरफ पीठ करके सर झुकाए खड़ी थी..
बाबिल कभी शीला की तरफ देखता.. कभी वैशाली की तरफ देखता.. तो कभी अपने झटके खाते हुए लंड की तरफ देखता..
डर के मारे थरथर कांप रहे बाबिल को देखकर शीला के होंठों पर वासना से भरी मुस्कान फ़ैल गई..
जिससे देख बाबिल उलझन में पड़ गया..!! यह भला गुस्सा होने की जगह मुस्कुरा क्यों रही है??
‘वो अपना पजामा ठीक कर..’ शीला ने बाबिल के लंड की तरफ इशारा करते हुए कहा..
‘और तुम वैशाली ज़रा बाहर आओ.. ये क्या गुल खिला रही थी?’
यह कह कर शीला वापिस ड्रॉइंग रूम में चली आई.. खेल शुरू हो चुका था.. वैशाली अपनी हँसी रोकते हुए कमरे से बाहर चली गई और बाबिल वहीं ठगा सा खड़ा रह गया.. कुछ पलों के लिए मानो उसके दिमाग़ ने काम करना बंद कर दिया हो..
जब उसे होश सा आया तब उसने लपक कर अपनी ट्रेकपेंट को ऊपर किया.. उसका पूरा बदन डर से थरथर काँप रहा था.. अब क्या होगा?
बाबिल अपना सिर पकड़कर बिस्तर पर बैठ गया..
वैशाली के जाने के बाद बाबिल उस कमरा में ऐसा महसूस कर रहा था, जैसे वो किसी क़ैद खाने में बैठा हो और अभी बाहर से कुछ लोग आयेंगे और उसकी पिटाई शुरू हो जाएगी..
एक अजीब सा सन्नाटा उस कमरा में फैला हुआ था.. तभी कमरे के बाहर से कुछ क़दमों की आहट हुई..
जिससे सुन कर बाबिल के हाथ-पैर काँपने लगे.. लेकिन तभी वैशाली कमरे में दाखिल हुई, उसके चेहरे से ऐसा लग रहा था.. जैसे उसको कोई फर्क ही ना पड़ा हो..
बाबिल ने हकलाते हुए पूछा "क्या.. क्या हुआ... कौन है वो? अब क्या होगा मालकिन?"
वैशाली ने एकदम गंभीर चेहरा बनाकर बिस्तर पर बैठते हुए कहा " वो मेरी मम्मी थी जिन्हों ने हमे पकड़ लिया.. बहोत गुस्से वाली है.. तेरी कंप्लेन पुलिस में कर देने वाली थी.. जैसे तैसे मैंने उन्हें रोक लिया है... सुन बाबिल, अब सब तेरे हाथ में है.. अगर तू चाहे तो ये बात माँ किसी को नहीं बताएगी.. पुलिस को भी नहीं"
बाबिल को कुछ समझ नहीं आ रहा था, वह बोल "पर मैं.. मतलब? पर कैसे मालकिन?"
वैशाली: "तू एक काम कर.. यहाँ पर बैठ… मम्मी थोड़ी देर में यही आ रही हैं.. ध्यान रहें, वो तुझसे जो भी करने को कहें कर लेना.. मना मत करना वरना कहीं वो पुलिस में चली गई तो पूरी ज़िंदगी जेल की चक्की पिसेगा"
यह कह कर वैशाली बिना बाबिल से आँख मिलाए कमरे से बाहर निकल गई, एक बार फिर से वो जान निकाल देने वाला सन्नाटा कमरा में छा गया..
बाबिल को कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वो क्या करे.. वह दोनों क्या चाहते थे उससे आखिर..!!!
वैशाली जब बेडरूम से बाहर निकलकर दरवाजा अपने पीछे बंद कर रही थी तभी शीला उसके सामने खड़ी हुई थी..
दोनों ने एक-दूसरे की तरफ देखा और फिर दोनों के होंठों पर वासना से भरी मुस्कान फ़ैल गई..
‘ध्यान से मम्मी.. लड़का दिखने में भोला सा है पर उसका वो.. बहुत तगड़ा है..’ वैशाली ने शीला के पास से गुज़रते हुए कहा..
वैशाली की बात सुन कर शीला मुस्कुराई.. ‘अपनी माँ को कम आँकने की गलती मत करना कभी..’
वैशाली ने पीछे मुड़ कर शीला की तरफ देखा और एक बार फिर दोनों के होंठों पर मुस्कान फ़ैल गई, फिर वैशाली किचन की ओर चली गई..
उधर कमरे में बैठा, बाबिल अपनी किस्मत को कोस रहा था कि आख़िर वो वैशाली के साथ यहाँ क्यों आया.. क्यों कविता मालकिन के कहने पर वो चला आया.. आज अगर बच गया तो अब बड़ी वाली रमिला मालकिन के अलावा किसी के पास नहीं जाएगा..
एक बार फिर से कमरे के बाहर से आ रही क़दमों की आहट सुन कर बाबिल के रोंगटे खड़े हो गए..
वो जानता था कि अन्दर कौन आने वाला है और वो बिस्तर से खड़ा हो गया..
जैसे ही शीला उसके कमरा में आई तो उसने अपने सर को झुका लिया..
शीला ने एक बार सर झुकाए खड़े बाबिल की तरफ देखा, फिर पलट कर दरवाजे को बंद कर दिया.. दरवाजा बंद होने की आवाज़ सुन कर बाबिल एकदम से चौंक गया..
उसे समझ में नहीं आया कि आख़िर शीला ने दरवाजा किस लिए बंद किया है..
दरवाजा बंद करने के बाद शीला मदहोश अंगड़ाई लेकर बाबिल की तरफ देखते हुए, बिस्तर के पास जाकर खड़ी हो गई..
शीला का मांसल जिस्म अपने जलवे बिखेर रहा था, उसकी गदराई कमर का मांस बाहर निकला हुआ था और नाभि इतनी गहरी थी मानो कुदरत ने उसे दूसरी चूत से नवाजा हो
बाबिल ने तिरछी नज़रों से शीला की तरफ देखा, जो उसकी तरफ देख कर मंद-मंद मुस्करा रही थी..
अपने सामने खड़ी शीला का ये रूप देख उससे यकीन नहीं हो रहा था.. इतने बड़े बड़े स्तनों वाली स्त्री उसने आज तक नहीं देखी थी
उससे देखते ही, बाबिल का मन मचल उठा.. पर कुछ करने या कहने के हिम्मत कहाँ बाकी थी..वो तो किसी मुजरिम की तरह उसके सामने खड़ा था..
‘ओए छोरे इधर आ..’ शीला ने बिस्तर पर बैठते हुए कहा..
बाबिल ने एकदम से चौंकते हुए कहा "जी क्या..?"
शीला: "जी.. जी.. क्या लगा रखा है, इधर आकर खड़ा हो…ठीक मेरे सामने..!!"
बाबिल बिना कुछ बोले शीला के सामने बिस्तर के पास जाकर खड़ा हो गया.. अब भले ही वो सर झुका कर खड़ा था, पर ब्लाउज में से शीला की झाँकती विराट चूचियों का दीदार उसे साफ़ हो रहा था, क्योंकि शीला उसके सामने बिस्तर पर बैठी हुई थी..
‘क्या कर रहा था..तू मेरे बेटी के साथ?’ शीला ने कड़क आवाज़ में बाबिल से पूछा, जिसे सुनते ही बाबिल की गांड फटने को आ गई.. पर वो बिना कुछ बोले खड़ा रहा..
‘सुना नहीं.. क्या पूछा मैंने?’
इस बार बाबिल के लिए चुप रहना नामुनकिन था..
‘वो मैं नहीं.. मालकिन कर रही थीं..’ बाबिल ने शीला की तरफ देखते हुए कहा..
‘अच्छा तो तेरे मतलब सब ग़लती मेरी बेटी की है.. इधर आ..’
शीला ने बाबिल का हाथ पकड़ कर उसे और पास खींच लिया..
बाबिल अवाक सा उसकी ओर देख रहा था..