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Adultery शीला की लीला (५५ साल की शीला की जवानी)

vakharia

Supreme
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बहुत बढ़िया और मस्त अपडेट वखारिया जी।। दो औरतें के नज़रिए से जीवन के दो पहलु बहुत बढ़िया तरीके से पेश किए गए हैं। एक तरफ जहां वैशाली जैसी आकर्षक औरत जो संभोग सुख के लिए दहलीज लांघने को तैयार है और दूसरी तरफ शीला जैसी चुद्दकड़ जो आपदा में भी अपने लिए मौका ढूंढती है…वाह, मज़ा आ गया!

शीला ने पकड़ लिया वैशाली को घर में रंगे हाथ
कमरे के अंदर लगी हुई थी वो बाबिल के साथ
डांट डपट के शीला अपनी बेटी को लगी समझाने
नौकर को बुलाया है घर पर अपनी चूत मारवाने

पिंटू का अब खड़ा नहीं होता वैशाली लगी बताने
इसी लिये बुलाया बाबिल को अपनी चूत मरवाने
मम्मी कैसे कहूँ तुम्हे अब पिंटू से कुछ नहीं होता
पिछले कई महीने से उस ने मेरा खेत नहीं जोता

सम्भोग सुख हर औरत के लिए होता है बड़ा जरूरी
एक नौकरी से चूत मरवाना बेटी ऐसी क्या मजबूरी
घर पर ये सब करना क्या तेरी अकल गई है चरने
ले जाओ बाहर होटल में इसको ये सब कुछ करने

राजेश और मदन मेरे लंड से शीला भी हो गई बोर
अपनी चूत चुदवाने को भी ढूंढ रही थी कोई और
चूत पनिया गई थी शीला की देख के गोरा बाबिल
बोली पहले चुदवा के देखूंगी क्या है तेरे काबिल
कर बहाना अपनी प्यारी बेटी का घर बचाने को
शीला ने मौका ढूंढ लिया अपनी चूत मरवाने को

तहे दिल से शुक्रिया!! बस दंग रह गया आप की इस रचना को पढ़कर..!! जिस सरलता से आपने इसे रचा है, मैं चाहकर भी इसकी योग्य प्रशंसा कर नहीं पाऊँगा.. योग्यता ही नहीं है मेरी..!

इसकी लयबद्धता और छंद-योजना मुझे बीथोवन के सिम्फनी नंबर ५ की याद दिला गई.. एक सरल, आकर्षक थीम (कथा) को आपने विविध वाद्यों (शब्दों) और जटिल काउंटरपॉइंट (छंद-विन्यास) के माध्यम से इतने समृद्ध और भव्य स्वरूप में प्रस्तुत किया है कि क्या ही कहें..!! और सब से अनोखी थी आपकी तुकबन्दियाँ..!! इतनी सहज और प्रवाहमयी..!! पूरे काव्य में एक अद्भुत सी संगति का माहोल रच दिया..!!

कहानी के प्रति आपका यह अनूठा और काव्यात्मक स्नेह मेरे लिए बहुत मूल्यवान है.. आपके इस सुंदर उपहार के लिए मैं हृदय से आभारी हूँ.. आपकी कलम सदैव ऐसे ही प्रवाहित होती रहे..!!
arushi_dayal
 

Ajju Landwalia

Well-Known Member
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पिछले अपडेट में आपने पढ़ा की..

वैशाली और बाबिल के बीच चुदाई का खेल शुरू होने ही वाला था की तब डॉरबेल बजी.. शीला लौट चुकी थी.. हालांकि वैशाली ने अपने झूठ को छुपाने की भरसक कोशिश की पर शीला की शातिर आँखों से सच छुप नहीं पाया.. शीला पहले तो वैशाल पर उखड़ पड़ती है पर अपनी बेटी की समस्या को सुनने के बाद उसका मन बदलता है.. वैशाली से पहले वो बाबिल को परखना चाहती है..

अब आगे..
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इससे पहले कि उसे कुछ समझ आता, शीला ने उसके मुरझाए हुए लंड को पतलून के ऊपर से पकड़ लिया और ज़ोर से मसल दिया..

‘आह दर्द हो रहा.. मालकिन ओह्ह..’

बाबिल ने शीला का हाथ हटाने की कोशिश करते हुए कहा..

शीला ने बाबिल की तरफ वासना से भरी नज़रों से देखते हुए कहा "क्यों रे, अब तो ये ऐसे मुरझा गया है…जैसे इसमें जान ही ना हो…पहले कैसे इतना कड़क खड़ा था.. साले.. मेरी जवान बेटी पर ग़लत नज़र रखता है.." ये कहते हुए शीला ने उसके लंड को थोड़ा और ज़ोर से मसल दिया..

1

बाबिल की तो जैसे जान ही निकल गई, उसके चेहरे से साफ़ पता चल रहा था कि वो कितने दर्द में है..
उसके चेहरे को देख कर शीला को अंदाज़ा हुआ कि उसने कुछ ज्यादा ही ज़ोर से उसके लंड को मसल दिया..

शीला ने उसके लंड को छोड़ दिया, फिर उसके लंड को हथेली से रगड़ने लगी..

बाबिल को जैसे लकवा मार गया हो.. वो बुत की तरह शीला को देख रहा था, जो उसकी तरफ देखते हुए, एक हाथ से अपनी चूची को ब्लाउज के ऊपर से मसल रही थी और दूसरे हाथ से बाबिल के लंड को सहला रही थी..

शीला "क्यों रे.. मेरे बेटी को चोदने वाला था..!! एक बार मुझे भी चोद कर देख.. देख फिर कितना ज्यादा मज़ा दूँगी.." ये कह कर उसने एक झटके से बाबिल की पतलून उतार दी..

इससे पहले कि घबराए हुए बाबिल को कुछ समझ आता.. उसकी पेंट घुटनों तक आ चुकी थी और उसका अधखड़ा लंड शीला के हाथ की मुठ्ठी में था..

2
"ये… ये आप क्या रही हैं मालकिन… ओह्ह नहीं मालकिन आ आहह.."

शीला ने उसके लंड के सुपाड़े पर चमड़ी पीछे सरका दी और गुलाबी सुपाड़े जो कि किसी छोटे सेब जितना मोटा था, उसे देख शीला कर आँखों में वासना छा गई..

शीला के मदमस्त भोसड़े की फांकें फड़फने लगीं और उनकी दीवारों ने कामरस की बूंदे बहाना शुरू कर दिया..

4 3

क्योंकि अब बाबिल का लंड अपने असली विकराल रूप में आना शुरू हो गया था, शीला ने अपने अंगूठे के नाख़ून से बाबिल के लंड के सुपाड़े के चारों तरफ कुरेदा..

तो बाबिल की मस्ती भरी ‘आहह’ निकल गई और अगले ही पल उसे अपने लंड का सुपाड़ा किसी गरम और गीली जगह में जाता हुआ महसूस हुआ..

उससे ऐसा लगा जैसे किसी नरम और रसीले अंग ने उसके लंड के सुपाड़े को चारों तरफ से कस लिया हो..
जब बाबिल ने अपनी मस्ती से भरी आँखों को खोल कर नीचे देखा..

तो जो हो रहा था, उसे अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ..

शीला ने एक हाथ से उसके टट्टों को मुठ्ठी में पकड़ रखा था.. उसके लंड का सुपाड़ा शीला के होंठों के अन्दर था और दूसरे हाथ से शीला अपनी चूची को मसल रही थी..

5

ये नज़ारा देख बाबिल एकदम से हैरान रह गया, शीला ने उसके लंड के सुपाड़े को चूसते हुए.. ऊपर बाबिल की तरफ देखा.. दोनों की नज़रें आपस में जा मिलीं..

बाबिल का लंड अपनी पूरी औकात पर आ चुका था..

जिस हाथ की मुठ्ठी में शीला ने बाबिल के लंड को भर रखा था, उसे यकीन नहीं हो रहा था कि इस उम्र के लड़के का लंड भी इतना बड़ा हो सकता है..!!

अचानक से शीला ने बाबिल के फनफनाते हुए लंड को अपने मुँह से बाहर निकाला और बिस्तर पर लेट गई..
उसकी टाँगें बिस्तर के नीचे लटक रही थीं..उसने अपनी टाँगों को उठा कर घुटनों से मोड़ा और अपने पेटीकोट को टाँगों से ऊपर उठाते हुए, अपनी कमर तक चढ़ा लिया..

7

यह देख कर बाबिल की हालत और खराब हो गई..

शीला की चूत की फाँकें फैली हुई थीं और उसमें से कामरस एक पतली सी धार के रूप में बह कर उसकी गांड के छेद की तरफ जा रहा था..उसकी चूत का छेद कभी सिकुड़ता और कभी फैलता..

8

बाबिल बिना अपनी पलकों को झपकाए हुए, उसकी तरफ देख रहा था..

यह देख कर शीला के होंठों पर कामुकता भरी मुस्कान फ़ैल गई..

‘देख.. तेरे लंड के लिए पानी छोड़ रही है..’ शीला ने अपनी चूत की फांकों को फ़ैलाते हुए अंदर के गुलाबी छेद को दिखाते हुए कहा..

9

यह सुन कर बाबिल की ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा.. अब उसे समझ में आ रहा था यह दोनों माँ-बेटी उसके साथ खेल रही थी

बाबिल को यूँ खड़ा देख कर शीला से रहा नहीं गया, उसने अपना हाथ आगे बढ़ा कर बाबिल के लंड को पकड़ा और उसके लंड के गुलाबी मोटे सुपाड़े को अपनी गीली चूत के छेद पर रगड़ने लगी..


10

बाबिल के लंड के गरम और मोटे सुपाड़े का स्पर्श अपनी चूत के छेद पर महसूस करते ही.. शीला के बदन में मस्ती की लहर दौड़ गई..

शीला की वासना से भरी हुई आँखें बंद हो गईं..

उसने बड़ी ही अदा के साथ एक बार अपने होंठों को अपने दाँतों से चबाया और काँपती हुई आवाज़ में बाबिल से बोली "ओह्ह.. बेटा डाल दे.. मेरी चूत में अपना ये मोटा लंड पेल दे… चोद मुझे साले ओह्ह..!!"

बाबिल का लंड अब पूरी तरह से तन चुका था और पूरे जोश में आ चुका था..

शीला उसके लंड को अपनी दो उँगलियों और अंगूठे के मदद से पकड़े हुए, अपनी चूत के छेद पर उसका लंड का सुपाड़ा टिकाए हुए थी..

बाबिल ने शीला की टाँगों को घुटनों से पकड़ कर मोड़ कर ऊपर उठाया और अपनी पूरी ताक़त के साथ एक जोरदार झटका मारा..

11

बाबिल का लंड शीला की चूत की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ तेज़ी के साथ अन्दर घुसता चला गया.. और धनाधन चोदने लगा.. इतनी अनुभवी और चुदक्कड़ शीला भी इन प्रचण्ड प्रहारों से स्तब्ध हो कर रह गई.. वह एकदम से कराह उठी.. पर तब तक बाबिल का ८ इंच लंबा पूरा का पूरा लंड शीला के भोसड़े की गहराईयों में उतर चुका था..

शीला: "हइई.. आह्ह.. ओह्ह.... ओह हरामी.. धीरे कर थोड़ा.. ओह्ह ओह्ह निकाल साले.. फाड़ के रख दी.. मादरचोद.. मेरी चूत ओह्ह..!!"

शीला ने अपने कंधों और गर्दन को बिस्तर से उठा कर अपनी चूत की तरफ देखने की कोशिश करते हुए कहा..

बाबिल भी शीला के कराहने की आवाज़ सुन कर थोड़ा डर गया और अपना लंड शीला की चूत से बाहर निकालने लगा..

अभी उसने अपना लंड आधा ही बाहर निकाला था कि शीला ने उससे कंधों से पकड़ कर अपने ऊपर खींच लिया..

जिससे बाबिल का लंड एक बार फिर शीला की चूत की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ अन्दर घुस कर उसके बच्चेदानी के मुँह से जा टकराया..

शीला ने अपने ब्लाउज के बटन खोले.. ब्रा को सरकाया और सिसकते हुए बाबिल के चेहरे को अपनी चूचियों में दबा लिया.. इतने विशाल बबलों के बीच अपना चेहरा दबा हुआ पाकर बाबिल तो जैसे धन्य ही हो गया..

बाबिल अब जैसे पागल हो चुका था… निप्पलों को चूसते हुए वह शीला के खरबूजों को मसलने लगे..

शीला का रोम-रोम रोमांच से भर उठा.. नीचे से उसके चूतड़ ऊपर की तरफ उछल पड़े.. यह सीधा संकेत था कि वो बाबिल का पहला जोरदार वार झेल कर अब चुदवाने के लिए तड़प रही है..

बाबिल शीला के ऊपर लेटा हुआ दोनों हाथों से शीला के मम्मों को मसलते हुए हुमच रहा था.. शीला की आँखें फिर से मस्ती में बंद होने लगी थीं.. उसकी मादक सिसकियाँ पूरे कमरे में गूँज रही थीं..

अपनी निप्पल को पकड़कर बाबिल के मुंह में ठुसते हुए शीला बोली "ओह्ह ये ले.. ठीक से चूस्स्स इसे.. ओह्ह ओह्ह ह आह्ह..!!" शीला ने नीचे से अपनी कमर को हिलाते हुए कहा..

बाबिल ने भी झट से शीला की चूची को आधे से ज्यादा मुँह में भर लिया और ज़ोर-ज़ोर से चूसना चालू कर दिया..इतने विशाल स्तन थे की उसकी दोनों हथेलियों में मिलाकर भी शीला का एक स्तन नहीं आता था..

12

बाबिल ने अपने लंड को आधे से ज्यादा बाहर निकाला और फिर पूरी ताक़त से अन्दर पेल दिया.. बाबिल का लंड पिछले आधे घंटे से खड़ा था.. शीला का भोसड़ा किसी तंदूर से भी ज्यादा गरम था और वह गर्मी अब बाबिल के बर्दाश्त से बाहर हो रही थी..

वो बिस्तर के किनारे खड़ा हो गया और शीला की टाँगों को घुटनों से मोड़ कर ऊपर उठा कर पूरी तरह से फैला दिया..

जिससे उसकी चूत ठीक उसके लंड के लेवल पर आ गई और बाबिल तेज़ी से अपने लंड को शीला की चूत की अन्दर-बाहर करने लगा..

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बरसों बाद शीला इतने जवान लंड से चुद रही थी.. इससे पहले इतना जवान साथी जो था.. वह था.. उसका खुद का दामाद पिंटू.!!! तब वो कविता का आशिक था.. और उन दोनों के मिलने का जुगाड़ शीला के घर पर ही होता था चूंकि तब मदन अमरीका गया हुआ था.. तभी एक बार मौका पाकर, शीला और रेणुका ने साथ मिलकर पिंटू को ऐसा रगड़ा था की वो रो दिया था..

बाबिल का मोटा लंड पाकर शीला के मानो ख़ुशी के आँसू बाहर निकालने लगी.. ऐसा तगड़ा लंड तो केवल रसिक का ही था..

शीला का भोसड़ा सरपट गीला हो चुका था और बाबिल का लंड भी शीला की चूत से निकल रहे गाढ़े पानी से एकदम सन गया था..

अब बाबिल का लंड ‘फच-फच’ की आवाज़ करता हुआ तेज़ी से शीला की चूत के अन्दर-बाहर हो रहा था और वह भी अपनी गांड को उछाल कर बाबिल का साथ दे रही थी..

14

उसका पूरा बदन बाबिल के लगाए हुए हर धक्के के साथ हिल रहा था.. उसके बबले यहाँ वहाँ झूल रहे थे और शीला अपने सर को इधर-उधर पटकते हुए मछली के जैसे तड़प रही थी..

शीला कभी अपनी दोनों चूचियों को मसलती, कभी वो बिस्तर की चादर को अपने हाथों में दबोच लेती..

उसकी चूचियाँ हर धक्के के साथ हिल रही थीं, जिससे देख कर बाबिल का जोश और बढ़ता जा रहा था..

शीला "ओह बेटा धीरेए ओह्ह ओह्ह ह आह्ह.. उँघह धीरेए ऊहह निकाल जाएगा तेरा.. ओह्ह मज़ा आ गया .. ओहह.. आह्ह.. धीरेए ओह्ह ओह्ह ओह्ह..!!"

शीला की भोसड़े ने भरसक पानी छोड़ना चालू कर दिया और वो अपनी गांड को पागलों की तरह उछालते हुए झड़ने लगी..

उसने अपने बिखरे हुए बालों को नोचना शुरू कर दिया..

पर बाबिल अभी भी पूरी रफ़्तार के साथ शीला की चूत में अपना लंड अन्दर-बाहर कर रहा था..

शीला का पूरा बदन एकदम से ऐंठ चुका था, पर बाबिल के ताबड़तोड़ धक्कों ने एक बार फिर से उसकी चूत को ढीला कर दिया था..

शीला झड़ने के बाद पूरी तरह शांत हो चुकी थी और अपनी टाँगों को फैलाए हुए बाबिल के लंड को अपनी चूत में मज़े से ले रही थी..

आख़िर ५ मिनट की और चुदाई के बाद शीला दूसरी बार झड़ गई और इस बार बाबिल के लंड ने भी उसकी भोसड़े में अपना वीर्य उड़ेल दिया..

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जैसे ही बाबिल का लंड सिकुड़ कर बाहर आया.. शीला जल्दी से उठ कर बाथरूम चली गई..

बाबिल ने अपने मुरझाए हुए लंड की ओर देखा, वो शीला की चूत की कामरस से एकदम भीगा हुआ था..
उसने कमरे में इधर-उधर नज़र दौड़ाई.. तो उसे फर्श पर पड़ी शीला की साड़ी नज़र आई.. वो साड़ी के पास गया और उसके एक छोर को पकड़ कर उससे अपना लंड साफ़ करने लगा.. तभी वैशाली अचानक से कमरे में आ गई..

उसने बाबिल के लंड की तरफ देखा.. जो शिकार करने के बाद लटक रहा था..

वैशाली ने शैतानी मुस्कान के साथ कहा "क्यों मज़ा आया ना?"

बाबिल वैशाली की बात सुन कर एकदम से हैरान रह गया.. उससे यकीन नहीं हो रहा था कि वैशाली उससे अपनी माँ के बारे में पूछ रही है..

हँसते हुए वैशाली कमरे से बाहर चली गई..

बाबिल खड़ा हुआ और बिना अपना पेंट पहने नंगा ही बाथरूम की ओर गया.. दरवाजा सिर्फ अटका हुआ था, बंद नहीं था.. अंदर से कुछ आवाज़ सुनाई दे रही थी..

उसने दरवाजे पर कान लगाया तो शीला के मूतने की सुरीली सी आवाज़ उसके कानों में पड़ी… वह दरवाजे के पास खड़ा होकर अन्दर झाँकने लगा..

अन्दर का नज़ारा देख कर एक बार फिर से बाबिल का लंड पूरे उफान पर आ गया..

बड़े बड़े गोरे चूतड़ों को उजागर कर शीला मूतने के बाद झुक कर अपनी चूत को एक कपड़े से साफ़ कर रही थी.. पीछे खड़े बाबिल के सामने शीला के बड़े-बड़े चूतड़ों के बीच लबलबा रही चूत का गुलाबी छेद उस पर कहर बरपा रहा था..

16

शीला को इस बात का पता नहीं था कि बाबिल उसके पीछे खड़े होकर उसकी बड़ी गांड को देख रहा है..

अगले ही पल बाबिल का लंड किसी सांप की तरह फुंफकारने लग गया ..

शीला अपनी चूत की फांकों को अपनी उँगलियों से सहला रही थी, उसके होंठों पर ख़ुशी से भरी हुई मुस्कान फैली हुई थी..

अचानक से उससे अपनी चूत पर एक बार फिर से बाबिल के लंड के मोटे और गरम सुपाड़े का अहसास हुआ.. जिसे महसूस करते ही.. उसके पूरे बदन में मस्ती की कंपकंपी दौड़ गई..

‘आह क्या कर रहा है ओह्ह..छोड़ मुझे!’

इसके पहले कि शीला कुछ संभल पाती.. बाबिल का लंड उसकी चूत की फांकों को फैला कर चूत के छेद पर जा लगा..

‘ओह्ह आह सीईईई..’ शीला के मुँह से मस्ती भरी ‘आह’ निकल गई..

शीला ने एक बार अपनी गर्दन पीछे घुमा कर बाबिल की तरफ अपनी वासना से भरी मस्त आँखों से देखा और मुस्करा कर फिर से आगे देखते हुए.. अपने दोनों हाथों को उस पुराने मेज पर टिका कर झुक गई..
फिर बड़ी ही अदा के साथ अपने पैरों को फैला कर पीछे से अपनी गांड ऊपर की तरफ उठा लिया..
अब बाबिल का लंड बिल्कुल शीला की चूत के सामने था..

बाबिल ने शीला के चूतड़ों को दोनों तरफ से पकड़ कर फैला दिया और अपने लंड को चूत के छेद पर टिका दिया..

इससे पहले कि बाबिल अपना लंड शीला की चूत में पेलने के लिए धक्का मारता.. शीला ने कामातुर होकर अपनी गांड को पीछे की तरफ धकेलना शुरू कर दिया..

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बाबिल के लंड का मोटा सुपाड़ा शीला की चूत के छेद को फ़ैलाता हुआ अन्दर घुस गया.. शीला अपनी चूत के छेद के छल्ले को बाबिल के लंड के मोटे सुपाड़े पर कसा हुआ साफ़ महसूस कर पा रही थी..

कामवासना का आनन्द चरम पर पहुँच गया.. शीला की चूत ने एक बार फिर से अपने कामरस का खजाना खोल दिया..

शीला की मस्ती का कोई ठिकाना नहीं था, उसकी चूत में सरसराहट बढ़ गई थी और वो बाबिल के लंड को जड़ तक अपनी चूत में लेने के लिए मचल रही थी..

"ओह्ह आह.. घुसाआ.. दे रे.. छोरे ओह फाड़ दे.. मेरी चूत ओह्ह आह… और ज़ोर से मसल मेरे गांड को ओह्ह हाँ.. ऐसे ही…"

बाबिल बुरी तरह से अपने दोनों हाथों से शीला की गांड को फैला कर मसल रहा था.. उसके लंड का सुपाड़ा शीला की चूत में फँसा हुआ, शीला को मदहोश किए जा रहा था.. बाबिल को भी अपने लंड के सुपाड़े पर शीला की चूत की गरमी साफ़ महसूस हो रही थी..

उसने शीला के चूतड़ों को दबोच कर दोनों तरफ फैला लिया और अपनी गांड को तेज़ी से आगे की तरफ धकेला.. बाबिल के लंड का सुपाड़ा शीला की चूत की दीवारों को चीरता हुआ आगे बढ़ गया, शीला के मुँह से एक घुटी हुई चीख निकल गई.. जो बाथरूम के दीवारों में ही दब कर रह गई..

बाबिल का आधे से अधिक लंड शीला की चूत में समा चुका था..

शीला ने पीछे की तरफ अपनी गांड को ठेल कर अपनी चूत में बाबिल का मोटा लंड लेते हुए कहा "आहह.. आह जालिम मेरी चूत.. ओह फाड़ दी… ओह्ह ओह तेरे इस मूसल लंड की तो मैं आह.. आह.. कायल हो गई उह्ह.. ओह्ह चोद दे.. मुझे.. और तेज धक्के मार.."

बाबिल भी अब नौकर और मालकीं की मर्यादाओं को भूल कर शीला के चूतड़ों को फैला कर अपने लंड को उसकी चूत में अन्दर-बाहर कर रहा था..बाबिल के हर जबरदस्त धक्के के साथ उसकी चूचियाँ तेज़ी से हिल रही थीं..

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"ओह रुक बेटे.. ज़रा ओह्ह ओह्ह.. मैं खड़ी-खड़ी थक गई हूँ..ओह्ह ओह्ह आह्ह.."

बाबिल ने अपने लंड को शीला की चूत से बाहर निकाल लिया.. शीला सीधी होकर उसकी तरफ पलटी और बाबिल के होंठों पर अपने रसीले होंठों को रखते हुए उसे से चिपक गई..

बाबिल ने उसकी कमर से अपनी बाँहों को पीछे ले जाकर उसके चूतड़ों को दबोच-दबोच कर मसलना शुरू कर दिया..

बाबिल का विकराल लंड शीला के पेट के निचले हिस्से पर रगड़ खा रहा था..

‘चल अंदर कमरे में चलते हैं..’ शीला ने चुंबन तोड़ते हुए कहा और फिर बाथरूम से निकल कर एक बेड के पास आ गई..

Gazab ki hahakari update he vakharia Bhai

Babil ne sheela ki jaisi experienced lundkhor ki bhi rail bana di......

Vaishali ka to bura haal karne vala he aaj babil..............

Maja aa gaya Bhai

Keep rocking
 

Rajizexy

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पिछले अपडेट में आपने पढ़ा की..

वैशाली और बाबिल के बीच चुदाई का खेल शुरू होने ही वाला था की तब डॉरबेल बजी.. शीला लौट चुकी थी.. हालांकि वैशाली ने अपने झूठ को छुपाने की भरसक कोशिश की पर शीला की शातिर आँखों से सच छुप नहीं पाया.. शीला पहले तो वैशाल पर उखड़ पड़ती है पर अपनी बेटी की समस्या को सुनने के बाद उसका मन बदलता है.. वैशाली से पहले वो बाबिल को परखना चाहती है..

अब आगे..
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इससे पहले कि उसे कुछ समझ आता, शीला ने उसके मुरझाए हुए लंड को पतलून के ऊपर से पकड़ लिया और ज़ोर से मसल दिया..

‘आह दर्द हो रहा.. मालकिन ओह्ह..’

बाबिल ने शीला का हाथ हटाने की कोशिश करते हुए कहा..

शीला ने बाबिल की तरफ वासना से भरी नज़रों से देखते हुए कहा "क्यों रे, अब तो ये ऐसे मुरझा गया है…जैसे इसमें जान ही ना हो…पहले कैसे इतना कड़क खड़ा था.. साले.. मेरी जवान बेटी पर ग़लत नज़र रखता है.." ये कहते हुए शीला ने उसके लंड को थोड़ा और ज़ोर से मसल दिया..

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बाबिल की तो जैसे जान ही निकल गई, उसके चेहरे से साफ़ पता चल रहा था कि वो कितने दर्द में है..
उसके चेहरे को देख कर शीला को अंदाज़ा हुआ कि उसने कुछ ज्यादा ही ज़ोर से उसके लंड को मसल दिया..

शीला ने उसके लंड को छोड़ दिया, फिर उसके लंड को हथेली से रगड़ने लगी..

बाबिल को जैसे लकवा मार गया हो.. वो बुत की तरह शीला को देख रहा था, जो उसकी तरफ देखते हुए, एक हाथ से अपनी चूची को ब्लाउज के ऊपर से मसल रही थी और दूसरे हाथ से बाबिल के लंड को सहला रही थी..

शीला "क्यों रे.. मेरे बेटी को चोदने वाला था..!! एक बार मुझे भी चोद कर देख.. देख फिर कितना ज्यादा मज़ा दूँगी.." ये कह कर उसने एक झटके से बाबिल की पतलून उतार दी..

इससे पहले कि घबराए हुए बाबिल को कुछ समझ आता.. उसकी पेंट घुटनों तक आ चुकी थी और उसका अधखड़ा लंड शीला के हाथ की मुठ्ठी में था..

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"ये… ये आप क्या रही हैं मालकिन… ओह्ह नहीं मालकिन आ आहह.."

शीला ने उसके लंड के सुपाड़े पर चमड़ी पीछे सरका दी और गुलाबी सुपाड़े जो कि किसी छोटे सेब जितना मोटा था, उसे देख शीला कर आँखों में वासना छा गई..

शीला के मदमस्त भोसड़े की फांकें फड़फने लगीं और उनकी दीवारों ने कामरस की बूंदे बहाना शुरू कर दिया..

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क्योंकि अब बाबिल का लंड अपने असली विकराल रूप में आना शुरू हो गया था, शीला ने अपने अंगूठे के नाख़ून से बाबिल के लंड के सुपाड़े के चारों तरफ कुरेदा..

तो बाबिल की मस्ती भरी ‘आहह’ निकल गई और अगले ही पल उसे अपने लंड का सुपाड़ा किसी गरम और गीली जगह में जाता हुआ महसूस हुआ..

उससे ऐसा लगा जैसे किसी नरम और रसीले अंग ने उसके लंड के सुपाड़े को चारों तरफ से कस लिया हो..
जब बाबिल ने अपनी मस्ती से भरी आँखों को खोल कर नीचे देखा..

तो जो हो रहा था, उसे अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ..

शीला ने एक हाथ से उसके टट्टों को मुठ्ठी में पकड़ रखा था.. उसके लंड का सुपाड़ा शीला के होंठों के अन्दर था और दूसरे हाथ से शीला अपनी चूची को मसल रही थी..

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ये नज़ारा देख बाबिल एकदम से हैरान रह गया, शीला ने उसके लंड के सुपाड़े को चूसते हुए.. ऊपर बाबिल की तरफ देखा.. दोनों की नज़रें आपस में जा मिलीं..

बाबिल का लंड अपनी पूरी औकात पर आ चुका था..

जिस हाथ की मुठ्ठी में शीला ने बाबिल के लंड को भर रखा था, उसे यकीन नहीं हो रहा था कि इस उम्र के लड़के का लंड भी इतना बड़ा हो सकता है..!!

अचानक से शीला ने बाबिल के फनफनाते हुए लंड को अपने मुँह से बाहर निकाला और बिस्तर पर लेट गई..
उसकी टाँगें बिस्तर के नीचे लटक रही थीं..उसने अपनी टाँगों को उठा कर घुटनों से मोड़ा और अपने पेटीकोट को टाँगों से ऊपर उठाते हुए, अपनी कमर तक चढ़ा लिया..

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यह देख कर बाबिल की हालत और खराब हो गई..

शीला की चूत की फाँकें फैली हुई थीं और उसमें से कामरस एक पतली सी धार के रूप में बह कर उसकी गांड के छेद की तरफ जा रहा था..उसकी चूत का छेद कभी सिकुड़ता और कभी फैलता..

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बाबिल बिना अपनी पलकों को झपकाए हुए, उसकी तरफ देख रहा था..

यह देख कर शीला के होंठों पर कामुकता भरी मुस्कान फ़ैल गई..

‘देख.. तेरे लंड के लिए पानी छोड़ रही है..’ शीला ने अपनी चूत की फांकों को फ़ैलाते हुए अंदर के गुलाबी छेद को दिखाते हुए कहा..

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यह सुन कर बाबिल की ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा.. अब उसे समझ में आ रहा था यह दोनों माँ-बेटी उसके साथ खेल रही थी

बाबिल को यूँ खड़ा देख कर शीला से रहा नहीं गया, उसने अपना हाथ आगे बढ़ा कर बाबिल के लंड को पकड़ा और उसके लंड के गुलाबी मोटे सुपाड़े को अपनी गीली चूत के छेद पर रगड़ने लगी..


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बाबिल के लंड के गरम और मोटे सुपाड़े का स्पर्श अपनी चूत के छेद पर महसूस करते ही.. शीला के बदन में मस्ती की लहर दौड़ गई..

शीला की वासना से भरी हुई आँखें बंद हो गईं..

उसने बड़ी ही अदा के साथ एक बार अपने होंठों को अपने दाँतों से चबाया और काँपती हुई आवाज़ में बाबिल से बोली "ओह्ह.. बेटा डाल दे.. मेरी चूत में अपना ये मोटा लंड पेल दे… चोद मुझे साले ओह्ह..!!"

बाबिल का लंड अब पूरी तरह से तन चुका था और पूरे जोश में आ चुका था..

शीला उसके लंड को अपनी दो उँगलियों और अंगूठे के मदद से पकड़े हुए, अपनी चूत के छेद पर उसका लंड का सुपाड़ा टिकाए हुए थी..

बाबिल ने शीला की टाँगों को घुटनों से पकड़ कर मोड़ कर ऊपर उठाया और अपनी पूरी ताक़त के साथ एक जोरदार झटका मारा..

11

बाबिल का लंड शीला की चूत की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ तेज़ी के साथ अन्दर घुसता चला गया.. और धनाधन चोदने लगा.. इतनी अनुभवी और चुदक्कड़ शीला भी इन प्रचण्ड प्रहारों से स्तब्ध हो कर रह गई.. वह एकदम से कराह उठी.. पर तब तक बाबिल का ८ इंच लंबा पूरा का पूरा लंड शीला के भोसड़े की गहराईयों में उतर चुका था..

शीला: "हइई.. आह्ह.. ओह्ह.... ओह हरामी.. धीरे कर थोड़ा.. ओह्ह ओह्ह निकाल साले.. फाड़ के रख दी.. मादरचोद.. मेरी चूत ओह्ह..!!"

शीला ने अपने कंधों और गर्दन को बिस्तर से उठा कर अपनी चूत की तरफ देखने की कोशिश करते हुए कहा..

बाबिल भी शीला के कराहने की आवाज़ सुन कर थोड़ा डर गया और अपना लंड शीला की चूत से बाहर निकालने लगा..

अभी उसने अपना लंड आधा ही बाहर निकाला था कि शीला ने उससे कंधों से पकड़ कर अपने ऊपर खींच लिया..

जिससे बाबिल का लंड एक बार फिर शीला की चूत की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ अन्दर घुस कर उसके बच्चेदानी के मुँह से जा टकराया..

शीला ने अपने ब्लाउज के बटन खोले.. ब्रा को सरकाया और सिसकते हुए बाबिल के चेहरे को अपनी चूचियों में दबा लिया.. इतने विशाल बबलों के बीच अपना चेहरा दबा हुआ पाकर बाबिल तो जैसे धन्य ही हो गया..

बाबिल अब जैसे पागल हो चुका था… निप्पलों को चूसते हुए वह शीला के खरबूजों को मसलने लगे..

शीला का रोम-रोम रोमांच से भर उठा.. नीचे से उसके चूतड़ ऊपर की तरफ उछल पड़े.. यह सीधा संकेत था कि वो बाबिल का पहला जोरदार वार झेल कर अब चुदवाने के लिए तड़प रही है..

बाबिल शीला के ऊपर लेटा हुआ दोनों हाथों से शीला के मम्मों को मसलते हुए हुमच रहा था.. शीला की आँखें फिर से मस्ती में बंद होने लगी थीं.. उसकी मादक सिसकियाँ पूरे कमरे में गूँज रही थीं..

अपनी निप्पल को पकड़कर बाबिल के मुंह में ठुसते हुए शीला बोली "ओह्ह ये ले.. ठीक से चूस्स्स इसे.. ओह्ह ओह्ह ह आह्ह..!!" शीला ने नीचे से अपनी कमर को हिलाते हुए कहा..

बाबिल ने भी झट से शीला की चूची को आधे से ज्यादा मुँह में भर लिया और ज़ोर-ज़ोर से चूसना चालू कर दिया..इतने विशाल स्तन थे की उसकी दोनों हथेलियों में मिलाकर भी शीला का एक स्तन नहीं आता था..

12

बाबिल ने अपने लंड को आधे से ज्यादा बाहर निकाला और फिर पूरी ताक़त से अन्दर पेल दिया.. बाबिल का लंड पिछले आधे घंटे से खड़ा था.. शीला का भोसड़ा किसी तंदूर से भी ज्यादा गरम था और वह गर्मी अब बाबिल के बर्दाश्त से बाहर हो रही थी..

वो बिस्तर के किनारे खड़ा हो गया और शीला की टाँगों को घुटनों से मोड़ कर ऊपर उठा कर पूरी तरह से फैला दिया..

जिससे उसकी चूत ठीक उसके लंड के लेवल पर आ गई और बाबिल तेज़ी से अपने लंड को शीला की चूत की अन्दर-बाहर करने लगा..

13

बरसों बाद शीला इतने जवान लंड से चुद रही थी.. इससे पहले इतना जवान साथी जो था.. वह था.. उसका खुद का दामाद पिंटू.!!! तब वो कविता का आशिक था.. और उन दोनों के मिलने का जुगाड़ शीला के घर पर ही होता था चूंकि तब मदन अमरीका गया हुआ था.. तभी एक बार मौका पाकर, शीला और रेणुका ने साथ मिलकर पिंटू को ऐसा रगड़ा था की वो रो दिया था..

बाबिल का मोटा लंड पाकर शीला के मानो ख़ुशी के आँसू बाहर निकालने लगी.. ऐसा तगड़ा लंड तो केवल रसिक का ही था..

शीला का भोसड़ा सरपट गीला हो चुका था और बाबिल का लंड भी शीला की चूत से निकल रहे गाढ़े पानी से एकदम सन गया था..

अब बाबिल का लंड ‘फच-फच’ की आवाज़ करता हुआ तेज़ी से शीला की चूत के अन्दर-बाहर हो रहा था और वह भी अपनी गांड को उछाल कर बाबिल का साथ दे रही थी..

14

उसका पूरा बदन बाबिल के लगाए हुए हर धक्के के साथ हिल रहा था.. उसके बबले यहाँ वहाँ झूल रहे थे और शीला अपने सर को इधर-उधर पटकते हुए मछली के जैसे तड़प रही थी..

शीला कभी अपनी दोनों चूचियों को मसलती, कभी वो बिस्तर की चादर को अपने हाथों में दबोच लेती..

उसकी चूचियाँ हर धक्के के साथ हिल रही थीं, जिससे देख कर बाबिल का जोश और बढ़ता जा रहा था..

शीला "ओह बेटा धीरेए ओह्ह ओह्ह ह आह्ह.. उँघह धीरेए ऊहह निकाल जाएगा तेरा.. ओह्ह मज़ा आ गया .. ओहह.. आह्ह.. धीरेए ओह्ह ओह्ह ओह्ह..!!"

शीला की भोसड़े ने भरसक पानी छोड़ना चालू कर दिया और वो अपनी गांड को पागलों की तरह उछालते हुए झड़ने लगी..

उसने अपने बिखरे हुए बालों को नोचना शुरू कर दिया..

पर बाबिल अभी भी पूरी रफ़्तार के साथ शीला की चूत में अपना लंड अन्दर-बाहर कर रहा था..

शीला का पूरा बदन एकदम से ऐंठ चुका था, पर बाबिल के ताबड़तोड़ धक्कों ने एक बार फिर से उसकी चूत को ढीला कर दिया था..

शीला झड़ने के बाद पूरी तरह शांत हो चुकी थी और अपनी टाँगों को फैलाए हुए बाबिल के लंड को अपनी चूत में मज़े से ले रही थी..

आख़िर ५ मिनट की और चुदाई के बाद शीला दूसरी बार झड़ गई और इस बार बाबिल के लंड ने भी उसकी भोसड़े में अपना वीर्य उड़ेल दिया..

15

जैसे ही बाबिल का लंड सिकुड़ कर बाहर आया.. शीला जल्दी से उठ कर बाथरूम चली गई..

बाबिल ने अपने मुरझाए हुए लंड की ओर देखा, वो शीला की चूत की कामरस से एकदम भीगा हुआ था..
उसने कमरे में इधर-उधर नज़र दौड़ाई.. तो उसे फर्श पर पड़ी शीला की साड़ी नज़र आई.. वो साड़ी के पास गया और उसके एक छोर को पकड़ कर उससे अपना लंड साफ़ करने लगा.. तभी वैशाली अचानक से कमरे में आ गई..

उसने बाबिल के लंड की तरफ देखा.. जो शिकार करने के बाद लटक रहा था..

वैशाली ने शैतानी मुस्कान के साथ कहा "क्यों मज़ा आया ना?"

बाबिल वैशाली की बात सुन कर एकदम से हैरान रह गया.. उससे यकीन नहीं हो रहा था कि वैशाली उससे अपनी माँ के बारे में पूछ रही है..

हँसते हुए वैशाली कमरे से बाहर चली गई..

बाबिल खड़ा हुआ और बिना अपना पेंट पहने नंगा ही बाथरूम की ओर गया.. दरवाजा सिर्फ अटका हुआ था, बंद नहीं था.. अंदर से कुछ आवाज़ सुनाई दे रही थी..

उसने दरवाजे पर कान लगाया तो शीला के मूतने की सुरीली सी आवाज़ उसके कानों में पड़ी… वह दरवाजे के पास खड़ा होकर अन्दर झाँकने लगा..

अन्दर का नज़ारा देख कर एक बार फिर से बाबिल का लंड पूरे उफान पर आ गया..

बड़े बड़े गोरे चूतड़ों को उजागर कर शीला मूतने के बाद झुक कर अपनी चूत को एक कपड़े से साफ़ कर रही थी.. पीछे खड़े बाबिल के सामने शीला के बड़े-बड़े चूतड़ों के बीच लबलबा रही चूत का गुलाबी छेद उस पर कहर बरपा रहा था..

16

शीला को इस बात का पता नहीं था कि बाबिल उसके पीछे खड़े होकर उसकी बड़ी गांड को देख रहा है..

अगले ही पल बाबिल का लंड किसी सांप की तरह फुंफकारने लग गया ..

शीला अपनी चूत की फांकों को अपनी उँगलियों से सहला रही थी, उसके होंठों पर ख़ुशी से भरी हुई मुस्कान फैली हुई थी..

अचानक से उससे अपनी चूत पर एक बार फिर से बाबिल के लंड के मोटे और गरम सुपाड़े का अहसास हुआ.. जिसे महसूस करते ही.. उसके पूरे बदन में मस्ती की कंपकंपी दौड़ गई..

‘आह क्या कर रहा है ओह्ह..छोड़ मुझे!’

इसके पहले कि शीला कुछ संभल पाती.. बाबिल का लंड उसकी चूत की फांकों को फैला कर चूत के छेद पर जा लगा..

‘ओह्ह आह सीईईई..’ शीला के मुँह से मस्ती भरी ‘आह’ निकल गई..

शीला ने एक बार अपनी गर्दन पीछे घुमा कर बाबिल की तरफ अपनी वासना से भरी मस्त आँखों से देखा और मुस्करा कर फिर से आगे देखते हुए.. अपने दोनों हाथों को उस पुराने मेज पर टिका कर झुक गई..
फिर बड़ी ही अदा के साथ अपने पैरों को फैला कर पीछे से अपनी गांड ऊपर की तरफ उठा लिया..
अब बाबिल का लंड बिल्कुल शीला की चूत के सामने था..

बाबिल ने शीला के चूतड़ों को दोनों तरफ से पकड़ कर फैला दिया और अपने लंड को चूत के छेद पर टिका दिया..

इससे पहले कि बाबिल अपना लंड शीला की चूत में पेलने के लिए धक्का मारता.. शीला ने कामातुर होकर अपनी गांड को पीछे की तरफ धकेलना शुरू कर दिया..

18
बाबिल के लंड का मोटा सुपाड़ा शीला की चूत के छेद को फ़ैलाता हुआ अन्दर घुस गया.. शीला अपनी चूत के छेद के छल्ले को बाबिल के लंड के मोटे सुपाड़े पर कसा हुआ साफ़ महसूस कर पा रही थी..

कामवासना का आनन्द चरम पर पहुँच गया.. शीला की चूत ने एक बार फिर से अपने कामरस का खजाना खोल दिया..

शीला की मस्ती का कोई ठिकाना नहीं था, उसकी चूत में सरसराहट बढ़ गई थी और वो बाबिल के लंड को जड़ तक अपनी चूत में लेने के लिए मचल रही थी..

"ओह्ह आह.. घुसाआ.. दे रे.. छोरे ओह फाड़ दे.. मेरी चूत ओह्ह आह… और ज़ोर से मसल मेरे गांड को ओह्ह हाँ.. ऐसे ही…"

बाबिल बुरी तरह से अपने दोनों हाथों से शीला की गांड को फैला कर मसल रहा था.. उसके लंड का सुपाड़ा शीला की चूत में फँसा हुआ, शीला को मदहोश किए जा रहा था.. बाबिल को भी अपने लंड के सुपाड़े पर शीला की चूत की गरमी साफ़ महसूस हो रही थी..

उसने शीला के चूतड़ों को दबोच कर दोनों तरफ फैला लिया और अपनी गांड को तेज़ी से आगे की तरफ धकेला.. बाबिल के लंड का सुपाड़ा शीला की चूत की दीवारों को चीरता हुआ आगे बढ़ गया, शीला के मुँह से एक घुटी हुई चीख निकल गई.. जो बाथरूम के दीवारों में ही दब कर रह गई..

बाबिल का आधे से अधिक लंड शीला की चूत में समा चुका था..

शीला ने पीछे की तरफ अपनी गांड को ठेल कर अपनी चूत में बाबिल का मोटा लंड लेते हुए कहा "आहह.. आह जालिम मेरी चूत.. ओह फाड़ दी… ओह्ह ओह तेरे इस मूसल लंड की तो मैं आह.. आह.. कायल हो गई उह्ह.. ओह्ह चोद दे.. मुझे.. और तेज धक्के मार.."

बाबिल भी अब नौकर और मालकीं की मर्यादाओं को भूल कर शीला के चूतड़ों को फैला कर अपने लंड को उसकी चूत में अन्दर-बाहर कर रहा था..बाबिल के हर जबरदस्त धक्के के साथ उसकी चूचियाँ तेज़ी से हिल रही थीं..

19

"ओह रुक बेटे.. ज़रा ओह्ह ओह्ह.. मैं खड़ी-खड़ी थक गई हूँ..ओह्ह ओह्ह आह्ह.."

बाबिल ने अपने लंड को शीला की चूत से बाहर निकाल लिया.. शीला सीधी होकर उसकी तरफ पलटी और बाबिल के होंठों पर अपने रसीले होंठों को रखते हुए उसे से चिपक गई..

बाबिल ने उसकी कमर से अपनी बाँहों को पीछे ले जाकर उसके चूतड़ों को दबोच-दबोच कर मसलना शुरू कर दिया..

बाबिल का विकराल लंड शीला के पेट के निचले हिस्से पर रगड़ खा रहा था..

‘चल अंदर कमरे में चलते हैं..’ शीला ने चुंबन तोड़ते हुए कहा और फिर बाथरूम से निकल कर एक बेड के पास आ गई..
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पिछले अपडेट में आपने पढ़ा की..

वैशाली और बाबिल के बीच चुदाई का खेल शुरू होने ही वाला था की तब डॉरबेल बजी.. शीला लौट चुकी थी.. हालांकि वैशाली ने अपने झूठ को छुपाने की भरसक कोशिश की पर शीला की शातिर आँखों से सच छुप नहीं पाया.. शीला पहले तो वैशाल पर उखड़ पड़ती है पर अपनी बेटी की समस्या को सुनने के बाद उसका मन बदलता है.. वैशाली से पहले वो बाबिल को परखना चाहती है..

अब आगे..
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इससे पहले कि उसे कुछ समझ आता, शीला ने उसके मुरझाए हुए लंड को पतलून के ऊपर से पकड़ लिया और ज़ोर से मसल दिया..

‘आह दर्द हो रहा.. मालकिन ओह्ह..’

बाबिल ने शीला का हाथ हटाने की कोशिश करते हुए कहा..

शीला ने बाबिल की तरफ वासना से भरी नज़रों से देखते हुए कहा "क्यों रे, अब तो ये ऐसे मुरझा गया है…जैसे इसमें जान ही ना हो…पहले कैसे इतना कड़क खड़ा था.. साले.. मेरी जवान बेटी पर ग़लत नज़र रखता है.." ये कहते हुए शीला ने उसके लंड को थोड़ा और ज़ोर से मसल दिया..

1

बाबिल की तो जैसे जान ही निकल गई, उसके चेहरे से साफ़ पता चल रहा था कि वो कितने दर्द में है..
उसके चेहरे को देख कर शीला को अंदाज़ा हुआ कि उसने कुछ ज्यादा ही ज़ोर से उसके लंड को मसल दिया..

शीला ने उसके लंड को छोड़ दिया, फिर उसके लंड को हथेली से रगड़ने लगी..

बाबिल को जैसे लकवा मार गया हो.. वो बुत की तरह शीला को देख रहा था, जो उसकी तरफ देखते हुए, एक हाथ से अपनी चूची को ब्लाउज के ऊपर से मसल रही थी और दूसरे हाथ से बाबिल के लंड को सहला रही थी..

शीला "क्यों रे.. मेरे बेटी को चोदने वाला था..!! एक बार मुझे भी चोद कर देख.. देख फिर कितना ज्यादा मज़ा दूँगी.." ये कह कर उसने एक झटके से बाबिल की पतलून उतार दी..

इससे पहले कि घबराए हुए बाबिल को कुछ समझ आता.. उसकी पेंट घुटनों तक आ चुकी थी और उसका अधखड़ा लंड शीला के हाथ की मुठ्ठी में था..

2
"ये… ये आप क्या रही हैं मालकिन… ओह्ह नहीं मालकिन आ आहह.."

शीला ने उसके लंड के सुपाड़े पर चमड़ी पीछे सरका दी और गुलाबी सुपाड़े जो कि किसी छोटे सेब जितना मोटा था, उसे देख शीला कर आँखों में वासना छा गई..

शीला के मदमस्त भोसड़े की फांकें फड़फने लगीं और उनकी दीवारों ने कामरस की बूंदे बहाना शुरू कर दिया..

4 3

क्योंकि अब बाबिल का लंड अपने असली विकराल रूप में आना शुरू हो गया था, शीला ने अपने अंगूठे के नाख़ून से बाबिल के लंड के सुपाड़े के चारों तरफ कुरेदा..

तो बाबिल की मस्ती भरी ‘आहह’ निकल गई और अगले ही पल उसे अपने लंड का सुपाड़ा किसी गरम और गीली जगह में जाता हुआ महसूस हुआ..

उससे ऐसा लगा जैसे किसी नरम और रसीले अंग ने उसके लंड के सुपाड़े को चारों तरफ से कस लिया हो..
जब बाबिल ने अपनी मस्ती से भरी आँखों को खोल कर नीचे देखा..

तो जो हो रहा था, उसे अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ..

शीला ने एक हाथ से उसके टट्टों को मुठ्ठी में पकड़ रखा था.. उसके लंड का सुपाड़ा शीला के होंठों के अन्दर था और दूसरे हाथ से शीला अपनी चूची को मसल रही थी..

5

ये नज़ारा देख बाबिल एकदम से हैरान रह गया, शीला ने उसके लंड के सुपाड़े को चूसते हुए.. ऊपर बाबिल की तरफ देखा.. दोनों की नज़रें आपस में जा मिलीं..

बाबिल का लंड अपनी पूरी औकात पर आ चुका था..

जिस हाथ की मुठ्ठी में शीला ने बाबिल के लंड को भर रखा था, उसे यकीन नहीं हो रहा था कि इस उम्र के लड़के का लंड भी इतना बड़ा हो सकता है..!!

अचानक से शीला ने बाबिल के फनफनाते हुए लंड को अपने मुँह से बाहर निकाला और बिस्तर पर लेट गई..
उसकी टाँगें बिस्तर के नीचे लटक रही थीं..उसने अपनी टाँगों को उठा कर घुटनों से मोड़ा और अपने पेटीकोट को टाँगों से ऊपर उठाते हुए, अपनी कमर तक चढ़ा लिया..

7

यह देख कर बाबिल की हालत और खराब हो गई..

शीला की चूत की फाँकें फैली हुई थीं और उसमें से कामरस एक पतली सी धार के रूप में बह कर उसकी गांड के छेद की तरफ जा रहा था..उसकी चूत का छेद कभी सिकुड़ता और कभी फैलता..

8

बाबिल बिना अपनी पलकों को झपकाए हुए, उसकी तरफ देख रहा था..

यह देख कर शीला के होंठों पर कामुकता भरी मुस्कान फ़ैल गई..

‘देख.. तेरे लंड के लिए पानी छोड़ रही है..’ शीला ने अपनी चूत की फांकों को फ़ैलाते हुए अंदर के गुलाबी छेद को दिखाते हुए कहा..

9

यह सुन कर बाबिल की ख़ुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा.. अब उसे समझ में आ रहा था यह दोनों माँ-बेटी उसके साथ खेल रही थी

बाबिल को यूँ खड़ा देख कर शीला से रहा नहीं गया, उसने अपना हाथ आगे बढ़ा कर बाबिल के लंड को पकड़ा और उसके लंड के गुलाबी मोटे सुपाड़े को अपनी गीली चूत के छेद पर रगड़ने लगी..


10

बाबिल के लंड के गरम और मोटे सुपाड़े का स्पर्श अपनी चूत के छेद पर महसूस करते ही.. शीला के बदन में मस्ती की लहर दौड़ गई..

शीला की वासना से भरी हुई आँखें बंद हो गईं..

उसने बड़ी ही अदा के साथ एक बार अपने होंठों को अपने दाँतों से चबाया और काँपती हुई आवाज़ में बाबिल से बोली "ओह्ह.. बेटा डाल दे.. मेरी चूत में अपना ये मोटा लंड पेल दे… चोद मुझे साले ओह्ह..!!"

बाबिल का लंड अब पूरी तरह से तन चुका था और पूरे जोश में आ चुका था..

शीला उसके लंड को अपनी दो उँगलियों और अंगूठे के मदद से पकड़े हुए, अपनी चूत के छेद पर उसका लंड का सुपाड़ा टिकाए हुए थी..

बाबिल ने शीला की टाँगों को घुटनों से पकड़ कर मोड़ कर ऊपर उठाया और अपनी पूरी ताक़त के साथ एक जोरदार झटका मारा..

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बाबिल का लंड शीला की चूत की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ तेज़ी के साथ अन्दर घुसता चला गया.. और धनाधन चोदने लगा.. इतनी अनुभवी और चुदक्कड़ शीला भी इन प्रचण्ड प्रहारों से स्तब्ध हो कर रह गई.. वह एकदम से कराह उठी.. पर तब तक बाबिल का ८ इंच लंबा पूरा का पूरा लंड शीला के भोसड़े की गहराईयों में उतर चुका था..

शीला: "हइई.. आह्ह.. ओह्ह.... ओह हरामी.. धीरे कर थोड़ा.. ओह्ह ओह्ह निकाल साले.. फाड़ के रख दी.. मादरचोद.. मेरी चूत ओह्ह..!!"

शीला ने अपने कंधों और गर्दन को बिस्तर से उठा कर अपनी चूत की तरफ देखने की कोशिश करते हुए कहा..

बाबिल भी शीला के कराहने की आवाज़ सुन कर थोड़ा डर गया और अपना लंड शीला की चूत से बाहर निकालने लगा..

अभी उसने अपना लंड आधा ही बाहर निकाला था कि शीला ने उससे कंधों से पकड़ कर अपने ऊपर खींच लिया..

जिससे बाबिल का लंड एक बार फिर शीला की चूत की दीवारों से रगड़ ख़ाता हुआ अन्दर घुस कर उसके बच्चेदानी के मुँह से जा टकराया..

शीला ने अपने ब्लाउज के बटन खोले.. ब्रा को सरकाया और सिसकते हुए बाबिल के चेहरे को अपनी चूचियों में दबा लिया.. इतने विशाल बबलों के बीच अपना चेहरा दबा हुआ पाकर बाबिल तो जैसे धन्य ही हो गया..

बाबिल अब जैसे पागल हो चुका था… निप्पलों को चूसते हुए वह शीला के खरबूजों को मसलने लगे..

शीला का रोम-रोम रोमांच से भर उठा.. नीचे से उसके चूतड़ ऊपर की तरफ उछल पड़े.. यह सीधा संकेत था कि वो बाबिल का पहला जोरदार वार झेल कर अब चुदवाने के लिए तड़प रही है..

बाबिल शीला के ऊपर लेटा हुआ दोनों हाथों से शीला के मम्मों को मसलते हुए हुमच रहा था.. शीला की आँखें फिर से मस्ती में बंद होने लगी थीं.. उसकी मादक सिसकियाँ पूरे कमरे में गूँज रही थीं..

अपनी निप्पल को पकड़कर बाबिल के मुंह में ठुसते हुए शीला बोली "ओह्ह ये ले.. ठीक से चूस्स्स इसे.. ओह्ह ओह्ह ह आह्ह..!!" शीला ने नीचे से अपनी कमर को हिलाते हुए कहा..

बाबिल ने भी झट से शीला की चूची को आधे से ज्यादा मुँह में भर लिया और ज़ोर-ज़ोर से चूसना चालू कर दिया..इतने विशाल स्तन थे की उसकी दोनों हथेलियों में मिलाकर भी शीला का एक स्तन नहीं आता था..

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बाबिल ने अपने लंड को आधे से ज्यादा बाहर निकाला और फिर पूरी ताक़त से अन्दर पेल दिया.. बाबिल का लंड पिछले आधे घंटे से खड़ा था.. शीला का भोसड़ा किसी तंदूर से भी ज्यादा गरम था और वह गर्मी अब बाबिल के बर्दाश्त से बाहर हो रही थी..

वो बिस्तर के किनारे खड़ा हो गया और शीला की टाँगों को घुटनों से मोड़ कर ऊपर उठा कर पूरी तरह से फैला दिया..

जिससे उसकी चूत ठीक उसके लंड के लेवल पर आ गई और बाबिल तेज़ी से अपने लंड को शीला की चूत की अन्दर-बाहर करने लगा..

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बरसों बाद शीला इतने जवान लंड से चुद रही थी.. इससे पहले इतना जवान साथी जो था.. वह था.. उसका खुद का दामाद पिंटू.!!! तब वो कविता का आशिक था.. और उन दोनों के मिलने का जुगाड़ शीला के घर पर ही होता था चूंकि तब मदन अमरीका गया हुआ था.. तभी एक बार मौका पाकर, शीला और रेणुका ने साथ मिलकर पिंटू को ऐसा रगड़ा था की वो रो दिया था..

बाबिल का मोटा लंड पाकर शीला के मानो ख़ुशी के आँसू बाहर निकालने लगी.. ऐसा तगड़ा लंड तो केवल रसिक का ही था..

शीला का भोसड़ा सरपट गीला हो चुका था और बाबिल का लंड भी शीला की चूत से निकल रहे गाढ़े पानी से एकदम सन गया था..

अब बाबिल का लंड ‘फच-फच’ की आवाज़ करता हुआ तेज़ी से शीला की चूत के अन्दर-बाहर हो रहा था और वह भी अपनी गांड को उछाल कर बाबिल का साथ दे रही थी..

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उसका पूरा बदन बाबिल के लगाए हुए हर धक्के के साथ हिल रहा था.. उसके बबले यहाँ वहाँ झूल रहे थे और शीला अपने सर को इधर-उधर पटकते हुए मछली के जैसे तड़प रही थी..

शीला कभी अपनी दोनों चूचियों को मसलती, कभी वो बिस्तर की चादर को अपने हाथों में दबोच लेती..

उसकी चूचियाँ हर धक्के के साथ हिल रही थीं, जिससे देख कर बाबिल का जोश और बढ़ता जा रहा था..

शीला "ओह बेटा धीरेए ओह्ह ओह्ह ह आह्ह.. उँघह धीरेए ऊहह निकाल जाएगा तेरा.. ओह्ह मज़ा आ गया .. ओहह.. आह्ह.. धीरेए ओह्ह ओह्ह ओह्ह..!!"

शीला की भोसड़े ने भरसक पानी छोड़ना चालू कर दिया और वो अपनी गांड को पागलों की तरह उछालते हुए झड़ने लगी..

उसने अपने बिखरे हुए बालों को नोचना शुरू कर दिया..

पर बाबिल अभी भी पूरी रफ़्तार के साथ शीला की चूत में अपना लंड अन्दर-बाहर कर रहा था..

शीला का पूरा बदन एकदम से ऐंठ चुका था, पर बाबिल के ताबड़तोड़ धक्कों ने एक बार फिर से उसकी चूत को ढीला कर दिया था..

शीला झड़ने के बाद पूरी तरह शांत हो चुकी थी और अपनी टाँगों को फैलाए हुए बाबिल के लंड को अपनी चूत में मज़े से ले रही थी..

आख़िर ५ मिनट की और चुदाई के बाद शीला दूसरी बार झड़ गई और इस बार बाबिल के लंड ने भी उसकी भोसड़े में अपना वीर्य उड़ेल दिया..

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जैसे ही बाबिल का लंड सिकुड़ कर बाहर आया.. शीला जल्दी से उठ कर बाथरूम चली गई..

बाबिल ने अपने मुरझाए हुए लंड की ओर देखा, वो शीला की चूत की कामरस से एकदम भीगा हुआ था..
उसने कमरे में इधर-उधर नज़र दौड़ाई.. तो उसे फर्श पर पड़ी शीला की साड़ी नज़र आई.. वो साड़ी के पास गया और उसके एक छोर को पकड़ कर उससे अपना लंड साफ़ करने लगा.. तभी वैशाली अचानक से कमरे में आ गई..

उसने बाबिल के लंड की तरफ देखा.. जो शिकार करने के बाद लटक रहा था..

वैशाली ने शैतानी मुस्कान के साथ कहा "क्यों मज़ा आया ना?"

बाबिल वैशाली की बात सुन कर एकदम से हैरान रह गया.. उससे यकीन नहीं हो रहा था कि वैशाली उससे अपनी माँ के बारे में पूछ रही है..

हँसते हुए वैशाली कमरे से बाहर चली गई..

बाबिल खड़ा हुआ और बिना अपना पेंट पहने नंगा ही बाथरूम की ओर गया.. दरवाजा सिर्फ अटका हुआ था, बंद नहीं था.. अंदर से कुछ आवाज़ सुनाई दे रही थी..

उसने दरवाजे पर कान लगाया तो शीला के मूतने की सुरीली सी आवाज़ उसके कानों में पड़ी… वह दरवाजे के पास खड़ा होकर अन्दर झाँकने लगा..

अन्दर का नज़ारा देख कर एक बार फिर से बाबिल का लंड पूरे उफान पर आ गया..

बड़े बड़े गोरे चूतड़ों को उजागर कर शीला मूतने के बाद झुक कर अपनी चूत को एक कपड़े से साफ़ कर रही थी.. पीछे खड़े बाबिल के सामने शीला के बड़े-बड़े चूतड़ों के बीच लबलबा रही चूत का गुलाबी छेद उस पर कहर बरपा रहा था..

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शीला को इस बात का पता नहीं था कि बाबिल उसके पीछे खड़े होकर उसकी बड़ी गांड को देख रहा है..

अगले ही पल बाबिल का लंड किसी सांप की तरह फुंफकारने लग गया ..

शीला अपनी चूत की फांकों को अपनी उँगलियों से सहला रही थी, उसके होंठों पर ख़ुशी से भरी हुई मुस्कान फैली हुई थी..

अचानक से उससे अपनी चूत पर एक बार फिर से बाबिल के लंड के मोटे और गरम सुपाड़े का अहसास हुआ.. जिसे महसूस करते ही.. उसके पूरे बदन में मस्ती की कंपकंपी दौड़ गई..

‘आह क्या कर रहा है ओह्ह..छोड़ मुझे!’

इसके पहले कि शीला कुछ संभल पाती.. बाबिल का लंड उसकी चूत की फांकों को फैला कर चूत के छेद पर जा लगा..

‘ओह्ह आह सीईईई..’ शीला के मुँह से मस्ती भरी ‘आह’ निकल गई..

शीला ने एक बार अपनी गर्दन पीछे घुमा कर बाबिल की तरफ अपनी वासना से भरी मस्त आँखों से देखा और मुस्करा कर फिर से आगे देखते हुए.. अपने दोनों हाथों को उस पुराने मेज पर टिका कर झुक गई..
फिर बड़ी ही अदा के साथ अपने पैरों को फैला कर पीछे से अपनी गांड ऊपर की तरफ उठा लिया..
अब बाबिल का लंड बिल्कुल शीला की चूत के सामने था..

बाबिल ने शीला के चूतड़ों को दोनों तरफ से पकड़ कर फैला दिया और अपने लंड को चूत के छेद पर टिका दिया..

इससे पहले कि बाबिल अपना लंड शीला की चूत में पेलने के लिए धक्का मारता.. शीला ने कामातुर होकर अपनी गांड को पीछे की तरफ धकेलना शुरू कर दिया..

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बाबिल के लंड का मोटा सुपाड़ा शीला की चूत के छेद को फ़ैलाता हुआ अन्दर घुस गया.. शीला अपनी चूत के छेद के छल्ले को बाबिल के लंड के मोटे सुपाड़े पर कसा हुआ साफ़ महसूस कर पा रही थी..

कामवासना का आनन्द चरम पर पहुँच गया.. शीला की चूत ने एक बार फिर से अपने कामरस का खजाना खोल दिया..

शीला की मस्ती का कोई ठिकाना नहीं था, उसकी चूत में सरसराहट बढ़ गई थी और वो बाबिल के लंड को जड़ तक अपनी चूत में लेने के लिए मचल रही थी..

"ओह्ह आह.. घुसाआ.. दे रे.. छोरे ओह फाड़ दे.. मेरी चूत ओह्ह आह… और ज़ोर से मसल मेरे गांड को ओह्ह हाँ.. ऐसे ही…"

बाबिल बुरी तरह से अपने दोनों हाथों से शीला की गांड को फैला कर मसल रहा था.. उसके लंड का सुपाड़ा शीला की चूत में फँसा हुआ, शीला को मदहोश किए जा रहा था.. बाबिल को भी अपने लंड के सुपाड़े पर शीला की चूत की गरमी साफ़ महसूस हो रही थी..

उसने शीला के चूतड़ों को दबोच कर दोनों तरफ फैला लिया और अपनी गांड को तेज़ी से आगे की तरफ धकेला.. बाबिल के लंड का सुपाड़ा शीला की चूत की दीवारों को चीरता हुआ आगे बढ़ गया, शीला के मुँह से एक घुटी हुई चीख निकल गई.. जो बाथरूम के दीवारों में ही दब कर रह गई..

बाबिल का आधे से अधिक लंड शीला की चूत में समा चुका था..

शीला ने पीछे की तरफ अपनी गांड को ठेल कर अपनी चूत में बाबिल का मोटा लंड लेते हुए कहा "आहह.. आह जालिम मेरी चूत.. ओह फाड़ दी… ओह्ह ओह तेरे इस मूसल लंड की तो मैं आह.. आह.. कायल हो गई उह्ह.. ओह्ह चोद दे.. मुझे.. और तेज धक्के मार.."

बाबिल भी अब नौकर और मालकीं की मर्यादाओं को भूल कर शीला के चूतड़ों को फैला कर अपने लंड को उसकी चूत में अन्दर-बाहर कर रहा था..बाबिल के हर जबरदस्त धक्के के साथ उसकी चूचियाँ तेज़ी से हिल रही थीं..

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"ओह रुक बेटे.. ज़रा ओह्ह ओह्ह.. मैं खड़ी-खड़ी थक गई हूँ..ओह्ह ओह्ह आह्ह.."

बाबिल ने अपने लंड को शीला की चूत से बाहर निकाल लिया.. शीला सीधी होकर उसकी तरफ पलटी और बाबिल के होंठों पर अपने रसीले होंठों को रखते हुए उसे से चिपक गई..

बाबिल ने उसकी कमर से अपनी बाँहों को पीछे ले जाकर उसके चूतड़ों को दबोच-दबोच कर मसलना शुरू कर दिया..

बाबिल का विकराल लंड शीला के पेट के निचले हिस्से पर रगड़ खा रहा था..

‘चल अंदर कमरे में चलते हैं..’ शीला ने चुंबन तोड़ते हुए कहा और फिर बाथरूम से निकल कर एक बेड के पास आ गई..
बहुत ही गरमागरम कामुक और उत्तेजना से भरपूर कामोत्तेजक अपडेट है भाई मजा आ गया
वैशाली को चोदने आये बाबिल को दोनों माँ बेटी ने फसाया और अब उसके जबरा लंड का मजा शीला ले रहीं हैं दोनों की चुदाई का वर्णन बडा ही गजब का हैं
खैर देखते हैं आगे क्या होता है
अगले रोमांचकारी धमाकेदार और चुदाईदार अपडेट की प्रतिक्षा रहेगी जल्दी से दिजिएगा
 

vakharia

Supreme
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पिछले अपडेट में आपने पढ़ा की..

बाबिल और शीला के बीच की यौन मुठभेड़ अपने उफान पर है.. वैशाली और बाबिल को साथ में रंगेहाथों पकड़ने के बहाने, शीला बाबिल को दंडित करने के बहाने उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने लगती है.. शीला पहले बाबिल के साथ मौखिक क्रिया करती है और फिर वे दोनों अलग अलग यौन-क्रिया में लिप्त हो जाते हैं.. संभोग का एक राउंड खतम होने के बाद जब शीला गुसलखाने में चली जाती है तब शीला की बेटी वैशाली कमरे में आती है और मुस्कुराते हुए बाबिल से पूछती है कि उसे मज़ा आया या नहीं.. अंत में, बाबिल बाथरूम में शीला के पीछे जाता है, जहाँ वे फिर से दमदार चुदाई की ओर आगे बढ़ते है..

अब आगे..
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बाबिल का विकराल लंड शीला के पेट के निचले हिस्से पर रगड़ खा रहा था..

‘चल अंदर कमरे में चलते हैं..’ शीला ने चुंबन तोड़ते हुए कहा और फिर बाथरूम से निकल कर एक बेड के पास आ गई..

बाबिल उसके पीछे कमरे में दाखिल हुआ और शीला ने उसे पकड़ कर बिस्तर पर धक्का दे दिया..

शीला ने अपनी हथेली में थूका और अपनी चूत के लबों पर लगाकर किसी रंडी की तरह बाबिल के ऊपर सवार हो गई.. बाबिल शीला का ये रूप देख कर भावविभोर हो रहा था.. उसने अपनी जिंदगी में कभी कल्पना भी नहीं की थी, उसे इतने कम समय में इतनी सारी चूतें चोदने को मिल जायेंगी..

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शीला ने बाबिल के ऊपर आते ही उसका लंड पकड़ कर अपनी चूत के छेद पर लगा कर.. उस पर अपनी चूत को दबाना चालू कर दिया..

शीला की चूत पहले से बाबिल के लंड के आकार के बराबर खुल चुकी थी, चूत को लंड पर दबाते ही बाबिल का लंड शीला की चूत की गहराईयों में उतरने लगा..

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"ऊहह माआ.. ओह्ह ओह क्या कमाल का लंड पाया है तूने.. ओह्ह…" शीला ने अपने चूतड़ों को ऊपर-नीचे उछालते हुए कहा..

शीला ने तेज़ी से सीसियाते हुए बाबिल के लंड पर अपनी चूत पटकती है..

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शीला "हाँ मेरे राजा.. ओह आह्ह.. ओह्ह तेरे लंड का कमाल है रे.. बहुत गहरी टक्कर मार कर चूत को खोदता है रे..ईई तेरा लंड आह.. आह्ह.. ओह्ह देख ना एक बार फिर से झड़ने वाली हूँ…ओह्ह चोद मुझे.. और ज़ोर से चोद आह्ह.. ओह्ह सीईइ मैं गइई… ओह ओह..!!"

शीला का बदन एक बार फिर से अकड़ गया और उसकी चूत से पानी का सैलाब बह निकला.. बाबिल भी शीला की चूत में झड़ गया..

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जहां अंदर शीला अपनी हवस की आग में उस जवान नौकर को झोंक रही थी वहीं बाहर बैठी वैशाली इस बात से परेशान थी की कविता को क्या जवाब दे.. कविता के फोन पर फोन आ रहे थे.. और वह बाबिल को वापिस बुला रही थी क्योंकी उसकी माँ रमिलाबहन ने दो बार फोन कर अपने नौकर के लिए पूछा था..

एक बार फिर कविता का फोन आया वैशाली पर.. कुछ देर के लिए तो वैशाली ने उठाया ही नहीं.. उठाकर बोलती भी क्या?? अपनी माँ की लीलाओ के बारे में वो कैसे बताती कविता को..!! और उसकी बारी तो अब तक आई भी नहीं थी..

आखिर जब कविता ने फोन रखने का नाम ही नहीं लिया तब मजबूरन वैशाली को फोन उठाना ही पड़ा..

वैशाली बाहर बैठी है.. कविता के फोन पर फोन आ रहे है.. बाबिल को उसकी माँ बुला रही है.. वैशाली क्या जवाब देती

कविता ने परेशान स्वर में कहा "अरे यार, अब तेरा हो गया हो तो उसे भेज वापिस.. मम्मी के फोन पर फोन आ रहे है.."

वैशाली: "बस यार.. उसे अभी भेज ही देती हूँ, तू चिंता मत कर.. पैसे देकर ऑटो से ही भेजूँगी ताकि तुरंत पहुँच जाएँ"

कविता: "हम्म.. बड़ा निचोड़ा लगता है बेचारे को.. दो घंटों से तू लगी पड़ी थी"

वैशाली बेचारी क्या बताती..!! की उसका तो आज नंबर ही नहीं आया.. उसकी माँ बेडरूम में ऐसे गई जैसे मेमने के कमरे में भूखी शेरनी गई हो.. बस केवल उनकी आवाज़ें ही सुनाई पड़ रही थी..!!

वैशाली ने केवल "हम्ममम" कहकर फोन काट दिया और तुरंत उठकर बेडरूम के दरवाजे की तरफ गई.. उसने हल्के से दस्तक देते हुए कहा.. "अब हो गया हो तो बाहर आ जाइए.. कविता का बार बार फोन आ रहा है.. बाबिल को तुरंत वापिस भेजना होगा"

करीब एकाद मिनट तक कोई हरकत नहीं हुई और फिर दरवाजे की सिटकनी खोलने की आवाज आई.. दरवाजा खुलते ही वैशाली ने अपनी मम्मी शीला की ओर देखा.. बिखरे हुए बाल, अस्तव्यस्त कपड़े, कंधे तक उतरा हुआ ब्लाउज जिसमें से उसकी काले ब्रा की पट्टी नजर आ रही थी.. वैशाली ने सोचा की अगर शीला का हाल ऐसा है तो उस बेचारे बाबिल का हश्र तो देखने लायक होगा..!!

शीला मुस्कुराते हुए वैशाली के करीब से गुजरकर ड्रॉइंगरूम के सोफ़े पर बैठ गई.. वैशाली अब भी बेडरूम के दरवाजे पर खड़ी थी बाबिल के इंतज़ार में.. तभी बाबिल भी अपनी टीशर्ट और ट्रेक-पेंट पहने बाहर आया.. उसके चेहरे पर थकान तो नहीं थी.. हाँ, संतुष्टि भरी मुस्कान जरूर थी.. और थोड़ी शर्म भी..!!

बाबिल चुपचाप वैशाली के करीब से गुज़रता हुआ ड्रॉइंगरूम की तरफ जाने लगा.. अपने करीब से उसे गुज़रता देख एक पल के लिए वैशाली का मन कर गया की उसे दबोचकर फिर से बेडरूम में ले जाएँ.. पर समय ही कहाँ था?? इससे पहले की कविता का एक ओर फोन आ जाएँ, बाबिल को भेज देना जरूरी था..

वैशाली ड्रॉइंगरूम की तरफ आई और उसने बाबिल से कहा "तुरंत निकल ऑटो से... और कविता के घर जाने की जरूरत नहीं, सीधे आंटी के घर ही पहुंचना"

बाबिल ने सिर झुकाए हामी भरी और मुख्य दरवाजे की ओर जाने लगा की तभी शीला ने उसे आवाज देकर रोक लिया.. बाबिल और वैशाली आश्चर्यसह शीला की तरफ देखने लगे की तभी शीला ने अपने पर्स से ५०० के तीन नोट निकाले और बाबिल के हाथों में थमा दिए.. बाबिल असमंजस में उन पैसों की तरफ देख रहा था

शीला: "देख क्या रहा है.. ये तेरी मेहनत का इनाम है, ले ले और जा जल्दी, तेरी मालकिन राह देख रही है" हँसते हुए उसने कहा

बाबिल घर से बाहर गया और वैशाली ने दरवाजा बंद कर दिया.. वह एकटक अपनी माँ के चेहरे की ओर देख रही थी, जो काफी खिला-खिला सा नजर आ रहा था.. जाहीर सी बात थी की उसके पीछे का कारण क्या था

शीला के बगल में बैठकर वैशाली ने रूठे हुए स्वर में कहा "कितनी देर लगा दी मम्मी तुमने.. मेरी तो बारी ही नहीं आई..!!"

शीला ने वैशाली की गाल पर हाथ फेरते हुए कहा "अरे मैं तो यहाँ कुछ दिनों के लिए ही आई हूँ.. और चली भी जाऊँगी.. तू तो यहीं है, जब मन चाहे इससे खेल सकती है"

वैशाली ने थोड़े गुस्से से कहा "इतना आसान भी नहीं है ना.. इस तरह घर का खाली मिलना, फिर उसे यहाँ बुलाना.. वो भी ऐसे की रमिला आंटी को शक न हो.. ऐसे मौके बार बार थोड़े ही मिलते है"

अपनी बेटी के क्रोध को भांप चुकी शीला ने उसके माथे पर स्नेहपूर्वक हाथ फेरते हुए कहा "क्यों इतना टेंशन ले रही है..!! यह नहीं तो कोई और सही"

शीला के मुंह से यह सुनते ही वैशाली बेहद चोंक उठी, उसने अपने माथे से शीला का हाथ झटकाते हुए कहा "क्या मतलब यह नहीं तो और सही? तुम्हें क्या लगता है मम्मी, की मैं कितने लोगों के साथ यह कर रही हूँ?"

वैशाली के इस रवैये से शीला एक पल के लिए झेंप जरूर गई, पर अपनी लाक्षणिक अदा में वापिस आते हुए कहा "इतनी भी भोली नहीं है तू वैशाली..!!"

वैशाली को अब सही में बहोत गुस्सा आया.. एक तरफ तो हवस की आग लगने के बाद बिना बुझे ही रह गई.. और ऊपर से उसकी माँ के ताने ने उसे और उकसा दिया..!!

वैशाली: "तुम भूल गई क्या मेरी शादी के पहले क्या हुआ था..!! राजेश सर के साथ जब पिंटू ने मुझे देख लिया था उसके बाद मेरी शादी तो ल लगभग टूट ही गई थी.. और इतना बड़ा लेक्चर भी सुनाया था तुमने.. उसके बाद अभी भी तुम्हें लगता है की मैं वो सब कर रही हूँ??"

शीला ने अपनी आँखें छोटी करते हुए कहा "गुस्सा क्यों हो रही है..!! मैंने तो बस एक बात कही.. और वैसे राजेश एकलौता तो था नहीं जिसके साथ तू ये सब कर रही थी..!!"

अब चौंकने की बारी वैशाली की थी.. वह स्तब्ध होकर बस सुनती ही रही

शीला: "हैरान मत हो.. मुझे पता ही तेरे और पीयूष के चक्कर के बारे में"

शीला की बात सुनकर वैशाली का खून जम गया.. मम्मी को इस बारे में कैसे पता लगा???

शीला ने एक शैतानी मुस्कान के साथ कहा "तुझे क्या लगता है, घर के अंदर मेरे पीठ पीछे सब चल रहा हो और मुझे ही न पता हो..!! ऐसा कभी हो सकता है क्या..!!"

वैशाली ने नजरें झुका ली और कोई जवाब नहीं दिया..

शीला: "डरने की कोई बात नहीं है बेटा.. एक औरत होने के नाते मैं जानती हूँ की तूने वो सब क्यों किया.. जवान शरीर बिना मर्द के लंबे समय तक कैसे रह पाता भला..!!"

वैशाली ने एक लंबी गहरी सांस ली और कहा "वो सब पुरानी बातें हैं मम्मी.. तब संजय से मेरा कोई नाता था नहीं.. पर पिंटू के साथ शादी के बाद मैंने ऐसी कोई हरकत नहीं की थी अब तक.. पूरी शिद्दत से मैं पिंटू के प्रति वफादार रही.. पर उसे भी तो समझना चाहिए ना.. तुम जानती नहीं हो माँ, की मेरे साथ क्या हो रहा है..!!"

सुनकर शीला के चेहरे पर चिंता की लकीरें दौड़ पड़ी

शीला: "क्या हुआ बेटा? यहाँ पर तुझे कोई तकलीफ है?"

वैशाली ने विस्तार पूर्वक पिंटू की उस समस्या के बारे में बताया जिसके कारण वह उसे तृप्त नहीं कर पा रहा था.. सुनकर शीला गहरी सोच में पड़ गई.. यह तो वाकई चिंता का विषय था.. पिंटू की शारीरिक समस्या और उससे निजाद पाने में असमर्थता.. यह तो वैशाली और पिंटू के सांसारिक जीवन को भंग करने का कारण बन सकती थी

काफी देर तक शीला और वैशाली दोनों चुप ही रहें

वैशाली ने नजरें झुकाकर कहा "मम्मी, मैं समझ नहीं पा रही हूँ कि क्या करूँ.. पिंटू... वो... डॉक्टर के पास जाने को तैयार ही नहीं है.. बड़ा गुरूर है अपनी मर्दानगी पर.. मैं तो उससे बात कर करके थक गई..!!"

शीला ने एक गहरी साँस लेकर, वैशाली के बाल सहलाते हुए कहा "बेटा, तेरी बातें सुनकर... मुझे तेरी तकलीफ समझ आ रही है.. तू चुपचाप कब तक सहती रहेगी? शरीर की भूख... वो कोई छोटी चीज़ थोड़े ही है.. उसे अनदेखा करने से वह गायब तो हो नहीं जाती, बल्कि और तड़पाती है.."

वैशाली शरमाते हुए चुपचाप सुनती रही..

शीला ने वैशाली की आँखों में आँखें डालकर देखा और बोली "क्यों शर्मा रही है? मैं तेरी माँ हूँ, और एक औरत भी.. जवानी का जोश, शरीर की भूख... ये सब कुदरत की माया है.. तू पहले भी शादीशुदा रह चुकी है, फिर भी ऐसे मुद्दे पर बात करने में हिचक?"

वैशाली: "पर मम्मी, ऐसे ही मेरा पैर फिलसता रहा तो गलत होगा न?"

शीला ने थोड़े कड़क स्वर में कहा "वफादारी तब होती है जब सामने वाला भी अपनी ज़िम्मेदारी समझे.. अगर पति अपनी पत्नी की ज़रूरतों को अनदेखा करे, तो यह तो एक तरह का अब्यूज़ ही है.. तू पहले भी एक नाकाम शादी झेल चुकी है.. और अब तेरी उम्र भी हो चली है.. क्या तू चाहती है कि इसी तरह तड़पती रहे, और एक दिन तेरा चेहरा, तेरी जिंदगी से रौनक चली जाए?"

वैशाली: "तो क्या करूँ मम्मी? तलाक लेना तो विकल्प नहीं है.. पिंटू अच्छा इंसान है, बस यही एक समस्या है.."

शीला ने धीमे से कहा "देख बेटा, ज़िंदगी सिर्फ सहने के लिए नहीं होती.. कभी-कभी हमें अपने लिए, अपनी खुशी के लिए भी कदम उठाने पड़ते हैं.. तू शादीशुदा रह... पिंटू का साथ निभा... पर अपनी शारीरिक ज़रूरतों को नजरअंदाज मत कर... दूसरे रास्ते भी तो हैं..!!"

वैशाली: "पर कितना रिस्क है इन सब चीजों में.. तुम्हें तो पता है पिंटू का स्वभाव"

शीला ने गंभीर होते हुए कहा "हाँ.. जानती हूँ, इसलिए तुझे दो चीजों का अमल करना होगा.. एहतियात और चुप्पी.. किसी के साथ भी कोई इमोशनल अफेयर नहीं होना चाहिए.. सिर्फ... एक फिजिकल नीड का समाधान.. बिल्कुल डिस्क्रीट.. कोई जाने नहीं, खासकर पिंटू को तो बिल्कुल नहीं पता चलना चाहिए.."

वैशाली ने घबराते हुए कहा "मैं... मैं ऐसा नहीं कर पाऊँगी.. बहोत डर लगता है.. किसी को पता चल गया तो? लोग क्या कहेंगे?"

शीला ने दृढ़ स्वर में कहा "तू कुछ कर न कर.. लोग तो कुछ न कुछ कहते ही रहते हैं.. और अगर तू इतनी सतर्क रही कि पता ही न चले, तो कौन कहेगा? यह तेरा शरीर है, तेरी ज़िंदगी है.. तू कब तक दूसरों के डर से अपने आप को सुखाएगी? मैं तुझे यह कह रही हूँ क्योंकि मैं जानती हूँ कि एक औरत की भूख क्या होती है, और समाज उस भूख को कैसे दबाना चाहता है.."

वैशाली ने कुछ देर चुप रहकर फिर कहा "जितनी आसानी से तुम कह रही हो, पता नहीं.. मैं खुद को कंविन्स ही नहीं कर पा रही"

शीला ने थोड़ा रिलैक्स होते हुए कहा "देख.. पहला कदम है मन में ठान लेना कि तू अपने हक के लिए यह कर रही है.. फिर... सावधानी से.. किसी ऐसे को चुनना जो तेरी इस जरूरत को समझें.. कभी ब्लैक्मैल न करें.. हाँ सबकुछ केवल फिजिकल होना चाहिए.. कोई इमोशनल लगाव नहीं.. सबसे ज़रूरी - सेफ सेक्स.. हमेशा कंडोम का इस्तेमाल.. अगर कुछ अचानक हो जाए तो आफ्टर सेक्स पिल भी बड़ी आसानी से मिल जाती है"

वैशाली: "वो सब तो मैं भी समझती हूँ मम्मी.. पर ये सब कैसे हो पाएगा.. समझ में नहीं आता"

शीला: "धीरे धीरे सबकुछ होगा बेटा.. यह कोई लव स्टोरी नहीं है.. यह तेरी एक जरूरत का समाधान है, जो तेरा पति तुझे नहीं दे पा रहा.. इससे तेरा घर बचा रहेगा, तेरी शांति बची रहेगी.. कभी-कभी एक सफेद झूठ... एक छोटा सा रास्ता... पूरी जिंदगी को संभाल देता है.."

वैशाली ने गहरी साँस लेते हुए कहा "तुम्हारी बात में दम तो है... मैं इन्हीं उलझनों में घुट रही थी.. बस... एक अजीब सा डर लगा रहता है.."

वैशाली का हाथ थामकर शीला ने कहा "डर तो लगेगा ही.. पहली बार में मुझे भी लगा था.. पर जब तू देखेगी कि इससे तेरा मन हल्का हो रहा है, तेरे और पिंटू के रिश्ते में तनाव कम हो रहा है... क्योंकि तू उस पर गुस्सा नहीं करेगी... तो तुझे समझ आ जाएगा कि मैंने जो सलाह दी, वह सही थी.. बस याद रख - दिल पर कभी कब्ज़ा मत होने देना.. दिल तो पिंटू के पास ही रहना चाहिए.. बस शरीर... कभी-कभार... एक ब्रेक ले सकता है.."

वैशाली ने मुस्कुराते हुए, आँखों में थोड़ी चमक के साथ कहा "तुम सचमुच बहुत अलग हो माँ.. समाज क्या कहेगा, इसकी तुमने कभी परवाह नहीं की.."

शीला ने हल्के से हँसते हुए कहा "समाज की परवाह करती तो कब की बूढ़ी हो चुकी होती.. इस समाज ने हमेशा औरतों को बाँधा है.. पर हमें खुद ही अपनी आज़ादी के रास्ते बनाने पड़ते हैं.. बस, समझदारी से.. अब तू सोच.. मैं हूँ तेरे साथ..!"

वैशाली ने अपनी माँ शीला की तरफ देखा.. एक नई समझ और संकल्प उसकी आँखों में उतरता दिखाई दे रहा था..
 
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