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Incest रिश्तों का कामुक संगम

rajeev13

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Bhaiya or ek achhi erotic and adultery with incest bala story start karona bahat maja aata hai apki story padhkar
पहले ही वो अपने निजी जीवन, कार्यक्षेत्र और इस कहानी के बीच संतुलन बनाने में लगे हुए है, उस पर नई कहानी की शुरुवात करना अच्छा नहीं होगा !
 

fuckre

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पहले ही वो अपने निजी जीवन, कार्यक्षेत्र और इस कहानी के बीच संतुलन बनाने में लगे हुए है, उस पर नई कहानी की शुरुवात करना अच्छा नहीं होगा !
Ok thik hai🙌🏻
 
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Chodunga

Incest Lover
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पगड़ी- जिम्मेवारी की

हर मर्द की जरूरत है औरत। औरत मर्द को पूरा करती है। औरत का प्यार पाना हर किसीके नसीब में नहीं होता। हर किसी के जीवन में औरत नहीं होती। औरत वो होती है, जो आपकी कामयाबी में आपके साथ आपकी खुशियां दोगुनी करती हैं, और जब ग़म आता है तो उसको बांटकर आपको सहारा देती है। औरत जब किसी को चाहती है तो उसके लिए अपना सब कुछ लुटा देती है। उसकी खुशी आपकी खुशी में होती है, वो बदले में आपसे प्यार और लगाव की अपेक्षा रखती है। लेकिन मर्द अक्सर भूल जाते हैं कि उनके भी कुछ सपने, कुछ इच्छाएं होती हैं। वो अपनी इच्छाओं का दमन कर, मर्द की हर जरूरत पूरी करती है और उसे टूटकर चाहती है। हर औरत अपने मर्द के लिए कुछ भी कर गुजरने का माद्दा रखती है। उसके लिए तब समाज, धर्म, जाति, सम्प्रदाय, नैतिक-अनैतिक, सही-गलत, कोई मायने नहीं रखते, मायने रखती है तो उसके मर्द की खुशी। घर की दहलीजों में कैद रहकर भी ये मर्दों के जीवन को सजाती है और उनकी तक़दीर को संवारती है। वो एक माँ की तरह उसको लाड-प्यार करती है, एक बहन की तरह उसका ख्याल रखती है। लेकिन क्या हो, अगर माँ और बहन ही घर की औरत बन जाये। एक मर्द को इससे ज्यादा सुकून कौन देगा कि उसकी माँ और बहन ही उसके साथ औरत की तरह प्यार करे। आखिर माँ और बहन भी तो किसी मर्द की औरत बनती है, तो क्यों ना वो अपने ही घर के मर्द को औरत की तरह चाहे। पराए मर्द के साथ हमबिस्तरी करते हुए, औरत शायद उतनी सहज ना हो जितनी अपने भाई या बेटे के साथ हो सकती है। अगम्यगमन समाज के लिए गलत हो सकता है, पर जो लोग अपनी माँ बहन को अपनी औरत की तरह रखते हैं, उन्हें वो किसी वरदान सा लगता है। इन गलियों में रिश्ते नहीं घुसते, जाते हैं तो केवल मर्द और औरत। ये घुसते तो हैं भाई बहन या माँ बेटे बनकर और हमेशा के लिए एक दूसरे को मर्द औरत की तरह ही देखते हैं। यहाँ जिस्म की प्यास और हवस की भूख के बीच उनके रिश्ते पिस जाते हैं। जहाँ माँ बहन को निर्वस्त्र सोचना भी पाप होता है वहां, वो खुद निर्लज्जता की सीमाएं लांघ बिस्तर पर कांड करती हैं। अक्सर ये नाजायज़ रिश्ते धीरे धीरे सुलगते हैं, पर एक बार जब उनका विस्फोट होता है, तो कोई भी काबू में नहीं रहता। बस जरूरत होती है उनके अंदर की उस औरत को जगाना जो सालों से प्यासी बैठी है। फिर तो उनके सामने न भाई, न बाप, न बेटा कोई भी हो, उन्हें मर्द नज़र आता है। वो अपनी ओर से हरकतों से उन्हें इशारे देती है। उनके सामने अपना अंग प्रदर्शन करती हैं। उनसे गंदा मज़ाक करने लगती है, अक्सर उनके करीब चिपकने लगती है।
उनकी इन ओछी हरकतों के पीछे छिपी होती है उनकी दबी वासना, उनकी अधूरी यौनेच्छाएँ, उनकी असीमित कामुक भूख और उनकी जवानी की अंगीठी पर सुलगती काया।
राजू के हाथ तो उसकी माँ और बहन लग चुकी थी। पहले तो उसने बहन को ससुराल से भगाया और अब माँ विधवा हो चुकी थी। अब वो घर का मालिक बनने वाला था। हालांकि राजू की माँ बीना राजू को थप्पड़ मारी थी, पर राजू के लिए अंदर ही अंदर जल रही थी। उसने गुस्से में आकर राजू को थप्पड़ तो मारा था, जिससे राजू दुखी था। बीना भी उसे थप्पड़ मारके पछता रही थी, लेकिन उसे न जाने क्यों राजू पर बस अपना हक लगता था। वो चाहती थी कि राजू बस उसका यार बने। अब जबकि वो विधवा हो गयी थी तो, घर पर उन दोनों को टोकने वाला भी नहीं था। बीना चाहती थी कि राजू को अपने बिस्तर पर ले जाये, पर घर में पति गुजरने के बाद कोई भी शरीफ औरत को खुद पर काबू रखना होता है। इसके साथ ही वो राजू से नाराज़ थी, क्योंकि उसे लग रहा था कि राजू ने उसके हिस्से का प्यार उसकी बेटी को दिया है। वहीं वो गुड्डी की हरकत से भी नाराज़ थी कि नई नई शादी होने के बावजूद उसके अपने भाई के साथ नाजायज शारीरिक संबंध बने।हालांकि वो खुद भी अपने बेटे के साथ इन नाजायज रिश्तों में संलिप्त हो चुकी थी। बीना के आखरी यौन संबंध अपने बेटे के साथ ही बने थे, पति ने तो उसे बहुत दिनों से नहीं चोदा था, क्योंकि वो राजू के प्रति वफादार हो गयी थी। वो अपने पति से संभोग करना पिछले तीन महीनों से बंद कर दी थी। राजू के साथ अंतरंग क्षणों में उसे बहुत आनंद आता था। सगी माँ होकर अपने ही बेटे से यौन संबंध बनाना उसे अब उत्तेजना के शिखर पर ले जाता था। जब राजू उसके बूर में लण्ड घुसाता और चोदता था तो बीना उसे बताती कि कैसे उसने राजू को ९ महीने कोख में पाला और इसी बूर से जन्म दिया, ताकि एक दिन वो उसीके के साथ हमबिस्तरी करे। राजू उसकी बातें सुन उत्तेजित होता, जो बीना को बहुत अच्छा लगता था। उसे अपने अंदर पति के साथ रतिक्रिया के प्रति जो रुचि खो गयी थी, अपने बेटे संग संबंध बनने के बाद, नई काम ऊर्जा उसके अंग अंग में जाग गयी थी। सच तो ये है कि बीना जैसी कामुक औरतें, काम वासना में अंधी होकर घर की इज्जत न लुटाए, इसलिए वो बेटों के साथ अनुचित यौन संबंध को भी तर्कसंगत और उचित समझती है। राजू जैसे बेटे भी तो अपनी माँओं को छोड़ते नहीं, जो उन्हें न जाने कबसे अपनी गंदी नजरों से देखते हैं। जब माँ काम वासना में जल रही हो, और बेटे की गंदी नज़र उसपर हो तो दोनों के लिए एक ही रास्ता बचता है, " अगम्यगमन" का। जहाँ माँ एक औरत होती है, और बेटा सिर्फ एक पुरुष। जहाँ माँ की ममता पर वासना भारी पर जाती है, वहां बेटे अपनी माँ की यौनेच्छा पूरी कर अपना पुरुष धर्म निभाते हैं। मानव ने समाज के नियम बनाये, पर प्रकृति का नियम सर्वोपरि होता है। बीना पिछले सात आठ दिनों से अपने कमरे में बैठी, अपने घर और अपने भविष्य के बारे में सोच रही थी। पति तो जा चुका था, बेटे के लिए वो तड़प रही थी। बीना रात को रतिक्रिया के लिए मचलती थी। वो सपने में खुद को राजू के नीचे नंगी लेटी हुई, चुदती हुई महसूस करती थी। लेकिन गुड्डी के संग उसके संबंध के बारे में सोचकर, वो लज्जित हो उठती कि अब वो राजू से कैसे संबंध बनाए। कैसा माहौल होगा जब राजू उसे चोद रहा होगा और गुड्डी घर में ही होगी। गुड्डी को जब पता चल जाएगा कि उसकी मां और उसके भाई के बीच नाजायज शारीरिक संबंध है तो कैसे वो अपनी बेटी से नज़र मिलाएगी।
राजू ने गैर कानूनी काम करके जो पैसे कमाए थे, वो उसने शहर में अपने मकान मालिक के यहां छुपा रखे थे। राजू चुकी घर के कार्यक्रम में व्यस्त था, तो राजू के कहे अनुसार अरुण ने शहर जाकर वो पैसे वहां से उठा लिए और शाम तक राघोपुर वापस लौट आया। अरुण ने राजू को वो पैसे दिए और अपने गैर कानूनी व्यापार का ताजा समाचार भी बताया। मंत्रीजी उनदोनों के काम से खुश थे। शाम को मंत्री ने राजू को फोन कर हालचाल लिया और उसे सांत्वना दी। उसने अपनी ओर से खर्चे की पेशकश की तो राजू ने पैसों के बदले उनसे अपने घर आने की बात की। अरुण ने ही उसे ऐसा करने को कहा था, क्योंकि अगले पंचायत चुनाव में उसकी माँ/माशूका रंजू भाग लेने वाली थी। इससे उनकी गांव में धाक बनेगी। मंत्री ने उससे आने का वादा किया।
राजू ने जो पैसे कमाए थे, उससे उसने पहले अपनी ज़मीन छुड़वाई। उसने घर और जमीन के कागज़ात अपनी माँ को लाकर उसके हाथ में दे दिये। जो काम उसका पति पिछले सात सालों में नहीं कर पाया वो उसने सात दिन में कर दिखाया।
घर का माहौल ग़मगीन था, पर अब इस घर की जिम्मेवारी राजू के कंधों पर आ गयी थी। तीनों में असल मुद्दे पर खुलके बात नहीं कर पा रहे थे। राजू को पिछले कुछ दिनों में बीना की कचोटती नज़र बेहद चुभ रही थी। गुड्डी और बंसुरिया तो खाना बना राजू को खिलाती थी, पर बीना पिछले कुछ दिन से कमरे में मायूस बैठी थी। उसकी आँखों में धरमदेव के आंसू कम, राजू के धोखे के ज्यादे थे। बंसुरिया को इसकी भनक भी नहीं थी।
राजू," का भईल माई। काहे एतना कानत बारू। जेकरा जाय के रहल उ गईल। अब होश में आ।"
बीना," तू त खुश होबे करबआ, दु दु औरत जउन तहरा हाथ लग गईल। हमके गुड्डी से कउनु शिकायत नइखे पर तु हमरा संग काहे अइसे कइले।"
राजू," हम का कइनी। तहरा प्यार के अलावा कुछ न कइनी जान।" राजू उसे बांहों में कसके थाम बोला।
बीना," हम त तहरा उपर सब लुटा देनी। लेकिन तू गुड्डी के भी न छोड़लु।"
राजू," हम तू दुनु के प्यार करब। गुड्डी दीदी अउर तहरा में कउनु अंतर नइखे। हम चाहत बानि कि अब तू दुनु माई बेटी न बहिन जइसन रह।"
बीना," राजू हमरा में का कमी रहे?
राजू," तहरा में कमी नइखे रानी। गुड्डी.. गुड्डी बा अउर बीना बीना। दुनु के आपन अस्तित्व अउर महत्व बा।"
बीना," अगर कमी नइखे, त गुड्डी के छोड़ दे।"
राजू," देख गुड्डी दीदी अउर हमरा बीच अइसन संबंध बा जइसन तहरा साथ। का कुछ गलत कइनी हम। अरे हमार का गलती बा कि तू दुनु हमार माई बहिन बारू। तू दुनु भी हमके उतना अउर वसही चाहेलु जेतना एक प्रेमिका आपन प्रेमी के। जब घर में आपस में हम सब एक दोसर के प्यार करब त सोच केतना मज़ा आयी। हम तहरा कउनु धोखा न देनी। अउर गुड्डी दीदी अउर तहरा संग संबंध बनाए गुनाह बा, त तू भी हमके धोखा देले बारू। धरमदेव अउर हमरा बीच में से तू भी एक के काहे न चुनलु। खुद धरमदेव के पतिव्रता पत्नी जइसन दिन में रहलु अउर रात के खुद के बेटा संग गुलछारा उड़ात रहलु। तहार ई लच्छन शरीफ औरत के न, वासना के आग में जरत बेबस औरत के रहल। बाहर केहू के पता चली त लोक थुकिहन तहरा पर। लेकिन उ हम रहनि जउन तहार अंदर के वासना बुझौनी। अगर तहरा न चोदति त जाने कहाँ मुँह कारी करवत रहित तू। हमरा साथ सूते से पहिले हमसे पूछले रहलु कि हमार जिनगी में केहू अउर बा कि ना। तहरा से त बढ़िया गुड्डी बा, जब ओकरा पता चलल कि हम तहरा संग चुदायी कइनी, त उ हमार खुशी खातिर आपन प्यार बांटे तैयार हो गइल। हम भी तू दुनु के एक साथ एक ही घर में रखब। जहाँ न रिश्ता के बंधन हो, न समाज के मर्यादा। ऊंहा सिर्फ तू बीना, हम राजू अउर गुड्डी होखब। अइसन सुंदर परिवार जहां तू दुनु हमार वंश के आगे बढ़ेबु। ई घर में प्रेम अउर वासना के नदी बहे। सोच हम सब केतना मस्ती करब। सच बता, तहरा आपन बेटा से चुदाबे में मज़ा आईल रहे, या धरमदेव के साथ?
बीना राजू की आंखों में देखते हुए," बेटा के साथ।"
राजू," गुड्डी के भी भाई के साथ चुदाबे में मज़ा आवेला। जब दुनु के बेटा अउर भाई संग मज़ा आवेला। त हमार संग साथ रहे में का हर्ज बा। अइसन कामुक स्त्री केहू के मिलेला, अउर हमके दुगो मिल गईल। कउन मरद तहरा दुनु के छोड़ी।"
आज पहली बार राजू बीना के साथ इतने अधिकार से हक़ से बात कर रहा था। बीना को ऐसा लग रहा था कि राजू उससे बात नहीं बल्कि अपना फैसला सुना रहा है। राजू का ये अंदाज उसके लिए एकदम नया था। बीना चुपचाप उसकी बात सुनती रही, क्योंकि उसके बातों में शत प्रतिशत सच्चाई थी।
उसका ये काम घर पर उसका दावा पक्का कर गया। बीना तो उसकी दीवानी थी ही, पर आज उसने राजू को पहली बार घर के मुखिया के रूप में देखा। बीना निश्चिन्त थी कि, राजू इस घर को कुछ नहीं होने देगा।
राजू बीना के माथे पर हाथ रख बोला," हम कभू तहरा संग जबरदस्ती न करब। तू हमार बारू बीना, तू खुद अइबू हमरा पास फेर से। जउन बीत गईल ओकरा भूल जो, अब आगे के सोच।" ऐसा बोलकर वो निकल गया। बीना चाहती थी कि राजू को गले लगाना, पर वो कर नहीं पाई। शायद उसके अंदर असमंजस की स्थिति थी।

वहीं दूसरी ओर गुड्डी भी राजू के लिए तड़प रही थी। ऐसा नहीं था कि गुड्डी को उसके पिता के जाने का ग़म नहीं था, पर अभी दस दिन ही हुआ था कि गुड्डी के बदन में सुरसुरी शुरू होने लगी थी चुदने की। घर में चार लोग ही थे। एक दिन जब बूर मसलते हुए गुड्डी बेचैन हो रही थी और उसकी प्यास बर्दाश्त के बाहर हो गई तो वो राजू को बोली," राजू, आबअ न घर के पाछे, भुसवा वाला घर में।"
राजू, जो भैंसों के लिए चारा काट रहा था और अपनी बड़ी बहन की मंशा से परिचित बोला" काहे?
गुड्डी," चूल्हा खातिर बढ़िया लकड़ी चाही, उहे ऊंहा उपर राखल बा।" उसकी प्यासी नज़रें साफ बता रही थी कि वो किस चूल्हे और किस लकड़ी की बात कर रही थी।
राजू," ठीक बा, तू चल हम आवत बानि।"
गुड्डी ने आज अपनी शादी से पहले की घाघरा और चोली पहनी हुई थी। उसकी मटकती गाँड़ और बैकलेस चोली देख वो मन ही मन बोला," कसम से ऐसी चुदक्कड़ बहन किस्मतवालों को मिलती है।"
राजू थोड़ी देर बाद घर के पीछे बने भूँसे वाले घर के पास पहुंचा, तो देखा उसका दरवाजा खुला है। राजू अंदर घुसा तो गुड्डी उससे लिपट गयी और उसके सीने को सहलाते हुए, गर्दन चूमने लगी। राजू सिर्फ एक तौलिया डाले हुए थे और पसीने से तर था। राजू बोला," ई का करआ तारू?
गुड्डी," उहे, जउन तहरा निम्मन लागेला।" वो मुस्कुराते हुए बोली।
राजू बोला," गुड्डी दीदी, हम पसीना से भीजल बानि। छोड़ द हमके, नहाए जाय द।"
गुड्डी उसके सीने पर बहता पसीना चाट बोली," इहे देख के त बर्दाश्त नइखे भइल। तहार गठीला बदन देख मन ललचा गईल। तू केतना मेहनती बारआ। आवअ, तहरा तनि राहत दे दी।"
राजू," गुड्डी दीदी, इँहा केहू आ जाइ, लावअ हम जल्दी से लकड़िया उतार देत हईं, चूल्हा खातिर।"
गुड्डी मुस्कुराते हुए," हमार चूल्हा में आपन लकड़ी ढुका दअ।" ऐसा बोल वो उसका तौलिया खोल लण्ड थाम ली। राजू नंगा हो चुका था। उसने राजू का हाथ थाम अपने घाघरे में घुसा अपनी बूर छुआई और बोली," ई चूल्हा में आग लागल बा, आपन लकड़ी घुसाके ठंढा कर दअ।" गुड्डी सिसयाते हुए अपने होठ काटते हुए बोली। राजू बुत सा खड़ा था और गुड्डी उसके बांहों को सहलाते हुए सिसयाते हुए मचल रही थी। अपनी बहन की बूर की चिपचिपे पानी का एहसास उसके बूर की पत्तियों के बीच उसकी उंगली पर हो रहा था। उसके बूर की चिर परिचित कामुक मादक गंध उसके नाक में समा रही थी।
अगले ही पल गुड्डी राजू को पकड़े और साथ में ले नीचे अपने ऊपर लिटा ली।
राजू उसके चूचियों को चोली के उपर से दबोच उसे चूमते हुए बड़बड़ाया," गुड्डी दीदी, तू हमके पागल कर देबु।"
गुड्डी," तू त हमके पागल कर देलु, राजू। हम दिन रात खाली तहरा बारे में सोचत बानि। अब हमके केहू लेबे खातिर आई, तब भी ससुरारि न जाएब।"
राजू," अब तहरा कहूँ अउर जाय भी न देब। अब तू हमेशा इंहे रहबु, ई घर तहार भी उतने बा, जेतना कि हमार।"
गुड्डी," सच राजू, तू हमके हमेशा अपना पास रखबू। लेकिन माई के कइसे समझेबु।"
राजू," केकर नाम ले लू। उफ़्फ़फ़ ..... हम तू दुनु के अब आपन औरत के जइसन राखब। माई के मनाबे के काम तहार बा। कुछ उपाय सोच, ओकर नाम सुनते लांड टनटना जाता।"
गुड्डी," हम त कोशिश करब। लेकिन जब तू ओकरा चोद दिहलस, त ओकरा फेर से लेटा लेबे करबु। अभी त तनि सदमा में बिया। तहार हमार नाजायज रिश्ता, बाबूजी के देहांत, घर के आर्थिक स्तिथि देखके। कुछ दिन में जब चुदायी के तलब लागी त आई तहार लांड खातिर भागल भागल। बोली राजू बेटा चोद द, चोद द।"
राजू गुड्डी के बूर में लण्ड का सुपाड़ा रगड़ते हुए बोला," आह... का मज़ा आई बीना के भारी नग्न शरीर के अपना गोद में उठा, बूर में लण्ड घुसाबे में। आह.... बीना ऊफ़्फ़फ़फ़ बीना......
गुड्डी," राजू, हम तहरा से वादा करत बानि कि हम बहुत जल्दी माई के फेर से तहरा से चुदवाईब। तू हमरा चोदलू इहे से उ नाराज़ बिया, त ई हमार जिम्मेवारी बा कि हम ओकरा फ़ेरसे तहरा से चुदबा दी। तहरा माई पसंद बा अउर हमरा तू।"
राजू," अइसन न बोल। हमरा तू दुनु पसंद बारू।"
गुड्डी," अउर हमके तहार खुशी। माई के नाम लेते तहार लांड केतना लोहा हो गइल बा। माई के चोदबअ राजू बेटा।"
राजू," उफ़्फ़फ़... हाँ माई, तहरा त हम हमेशा से चोदे चाहेनि।"
गुड्डी उसकी आँखों में देख बोली," माई के बूर में लांड घुसा के पेल दअ आपन माई के। बेटा के लांड, माई के बूर में समाई। तू हमार चोदू बेटा बारअ, हम तहार छिनरी माई बीना।"
बीना का नाम सुन राजू बेकाबू हो गया। राजू का लण्ड जाने कब उसकी बूर में घुस गया। राजू पागलों की तरह उसे चूम रहा था। गुड्डी को राजू की उत्तेजना बहुत पसंद आ रही थी। ये वैसी ही थी जब राजू ने उसे पहली बार खेतों में चोदा था। राजू गुड्डी की चुच्चियों को चोली से निकाल बेरहमी से दबाते हुए एक एक कर भूरे चूचकों को चूस रहा था। गुड्डी का घाघरा कमर तक सिमट चुका था।
गुड्डी बोली," आह... लागतआ माई के पेले में तहरा जादे जोश चढ़ेला। हम खाली तहार माई न, रंडी माई बानि। रंडी के खाली पेलाई चाही। अब उ बेटा के पेल्हड़ होई चाहे भतार के। भतार त गईल, त बेटे के पेल्हड़ लेब राजा।"
राजू उसकी दोनों टांगों के बीच अपनी कमर तेजी से चला रहा था। उसका लण्ड माँ रूपी गुड्डी के बूर की गहराईयों में समा रहा था।
राजू कभी उसके होठ को चूसता तो कभी चुच्चियों को। गुड्डी नीचे लेटे चुदाई का भरपूर आनंद ले रही थी। राजू ने उत्तेजना में गुड्डी के चूचकों को मसलते हुए चिकोटी काट ली।
गुड्डी," आह... दरद होता, चुच्ची चूसे खातिर होखेला, चिकोटी काटेला ना। हमरा दरद देके तहरा अच्छा लागेला का।"
राजू ने उसके भूरे चूचक को फिर से भींच लिया और बोला," हम एतना ऊपर हुमच हुमच के मेहनत करत बानि, तू निचवा पड़ल मज़ा लेत बारू। तनि दरद त सहे के पड़ी। ई मसले में बड़ा मजा आ रहल बा।"
गुड्डी," सि सि..... इशशश...... आह......सि.....। चुदाई में मरद के दिहल दरद भी मजेदार होखेला। बड़ा मजा आवतआ माई के दरद देवे में, माई के मज़ा आवेला दरद सहे में। मादरचोद बेटा, अइसे पेलबु त हम जल्दी झड़ जाएब।"
राजू," आह....जब तू मादरचोद कहेलु त मज़ा आ जाता। वाह... हम मादरचोद बानि। आपन माई के बूर चोदिले।"
गुड्डी को भी माँ बेटे के तड़के की चुदाई में मज़ा आ रहा था। उसकी बूर से लगातार काम रस बह रहा था, जो कि लण्ड के आवागमन के लिए बूर की अंदरूनी दीवारों को चिकना कर रहा था। लगातार बूर में लण्ड के घर्षण से वहां सफेद झाग सा बनने लगा था।
गुड्डी," माई पर कउनु रहम न करबअ। एतना मोट लांड बूर में सटासट पेल रहल बारअ। तू बड़ा जालिम चोदू बारअ हो। तहार लांड पूरा भीतरी घुस के तूफान मचैले बा। बेटा हम रंडी न, तहार सगा माई बानि। आह...बूर झड़ जाइ रे हरामी मादरचोद। मादरचोद के बच्चा।"
राजू," साली रंडी भोंसड़ीवाली, तू हमार रंडी बारू। तहार अंग अंग के हम निचोड़ लेब। तू पैदा भईल बारू हमरा खातिर। हमार लांड से चुदाबे खातिर। तू भले हमरा पैदा कइलु पर हम तहार बेटा के साथ साथ तहार घरवाला भी बानि। अब तलिक त तहरा छुप छुप के चोदत रहनि, लेकिन अब ई घर के मालिक हम बानि अउर तू हमार माई के साथ हमार मेहरू बन गईलु।"
गुड्डी," माई भी कहत बारअ अउर अइसन रंडी जइसन पेल रहल बारअ अपना माई के। कम से कम हमके आपन बाबूजी के मातम त मना लेबे दे।"
राजू," जउन बीत गईल ओकरा छोड़ ना। तहरा सामने अभी पूरा जीवन बा। तू एतना चुदासी बारू कि मातम में भी तहार बूर लांड मांग रहल बा। अउर जब हम बानि त तहरा तड़पे न देब। तहरा शांत रखे खातिर लांड हाज़िर बा रंडी माई।"
गुड्डी," तहार लांड के लत जउन लागल बा, हमके अपना आप पर काबू नइखे। राजा बूर से एतना पानी चूता, कि का करि।"
राजू," अब जे करेके बा, उ हम करब। तू सोच मत बस अपना आप के हमरा हवाले कर दे। देख तहरा हम केतना मज़ा कराएब, तहरा जन्नत के सैर कराएब रानी।"
गुड्डी," सच राजू बेटा, कभी भी अपना माई के गलत न बुझिहा। अब अगर हम एतना कामुक स्त्री बानि त एमे हमार का दोष बा। अगर माई के न चोदबअ त कहूँ न कहूँ ई घर के इज्जत लुट जाई। केहू अउर के संग ई कुकर्म करे से बढ़िया बा कि हम तहरा आपन देह सौंप दी। ले लअ आपन माई के इज्जत। हम अपनाके तहरा सौंप देले बानि। अब जउन तहार इच्छा बा उ कर। तहरा साथ त हम जन्नत का जहन्नुम चल जाएब। अब मौत भी आ जाय त ग़म नइखे।"
राजू," न...न अइसन मत बोल। अभी त हम दुनु के काम गाथा शुरू भईल बा। तहार जीवन के सुनहरा दौड़ अब आईल बा। तहरा जइसन औरत के चुदाई के बिना चैन कहाँ आवेला। अबसे तहार हर दिन कउनु सुहागन से भी ज्यादा वासनामयी होई। एगो रंडी भी दिन में लिमिट में चुदाबेलि, पर तहार कउनु सीमा न होई। अइसन कामुक काया के त हमेशा हम पियासल रहब।"

गुड्डी," आ...आह...आ.. उफ....सच में हम अभागन बानि, कि एतना चुदक्कड़ माल होके, तहार बाबूजी हमरा पर खास ध्यान न देले। अब उ काम तू पूरा करबु। आपन माई के पेल पेल के, हमार प्यास बुझाबा। हम बहुत दिन से पियासल रंडी बानि।"
राजू," तू अपना मुंह से खुद के रंडी कहलु, लाज नइखे आइल?"
गुड्डी," रंडी कउनु गाली न होखेला, ई उ औरत होखेलि जउन पइसा खातिर दोसर मरद सब से चुदाबेलि, काहे कि ओकरा पइसा के कमी रहेला। हर औरत के चुदाई जरूरी बा। अब उ ग्राहक हो, चाहे भाई हो, चाहे बेटा हो। मज़ा त दुनु के आवेला। फरक ई बा कि ऊंहा चुदाई के दाम होखेला, इँहा खाली चुदायी के काम होखेला। हर घरेलू औरत एगो रंडी बा।"
राजू," उफ्फ मतलब तू रंडी बारू, तहार बेटी भी रंडी बिया।"
गुड्डी," उफ़्फ़फ़... माई अउर बहिन रंडी होई, त बेटा भी मादरचोद अउर बहिनचोद होबे न करि। आह...बेशर्मी में केतना मज़ा बा, कामवासना के तृप्ति खातिर बेशर्मी जरूरी बा। बेटा के साथ नाजायज संबंध बनाबे में, ई कुकर्म, ई पाप करे में केतना सुकून बा"
दोनों आपस में घनघोर चुदाई में लीन थे। गुड्डी को बीना बनकर चुदने में मज़ा आ रहा था, वहीं राजू को ये पूरा एहसास हो रहा था जैसे वो बीना को ही चोद रहा हो। दोनों अत्यधिक उत्तेजित और कामुक हो उठे थे।
कुछ देर बाद राजू उत्साह में गुड्डी के साथ ही झड़ गया और सारा माल उसकी बूर में छोड़ दिया।
राजू और गुड्डी भूँसे पर ही लेटे हुए थे। गुड्डी अपने कपड़े ठीक करने लगी। राजू गुड्डी को देख बोला," तहरा मज़ा आईल माई बनके चुदाबे में।"
गुड्डी मुस्कुरा बोली," सच में बहुत मज़ा आईल।"
राजू गुड्डी को अपनी बांहों में भर बोला," सोच माई के केतना मज़ा आवत होई। माई के अंदर भी वासना ढेरी भरल बा। अब उ बेचारी कहां जाई, विधवा औरत के यौन सुख के पूर्ति करेके पड़ी न।"
गुड्डी बोली," राजू, सच बोल का तू माई के खाली एहि खातिर चोदे चाहेलु कि उ विधवा बा या ओकरा प्रति ओकर शरीर के प्रति अतृप्त वासना बा। तहरा आँखिया में माई के खातिर अथाह काम वासना साफ झलकअता।"
राजू," सच में, बीना जइसन माल मिल जाये त हम पूरा पूरा दिन ओकरा साथ बिस्तर पर बिताएब। ओकरा चोदे के बावजूद ओकरा प्रति कामेच्छा बढेला। हम ओकराके बिस्तर के रानी बना के रखब।"
गुड्डी," राजू हमरा खातिर ही माई तहरा से नाराज़ बा। हम माई के मनाएब अउर तहरा माई दिलवा के रहब। हम जानत बानि की उ भी तहरा खातिर मचलत होई। उ जादे दिन न रह पाई, तहरा से दूर। तहार लांड खातिर उ जरूर आई। सवाल खाली बा कि उ केतना दिन आपन देह के काबू में रखी। जब बर्दाश्त से फ़ाज़िल हो जाई, त उ खुद अपना के सौंप दी। ई बखत उ खिसियाईल बा, ओकरा उकसावे वाला चाही। उ खुद लंगटी होई अउर तहार लांड पर बइठी। हमके ई भी पता लग गईल कि बेटा के साथ यौन संबंध केतना सुखकारी होता। अइसन सुख से माई के वंचित न रखल जा सकेला।"
राजू," का बात है, अगर अइसन भईल त तहरा हम एगो स्पेशल गिफ्ट देब। बीना के संग हमार सुहागरात भी बाकी ह।"
गुड्डी लजाते हुए," हमके लागत बा अगर उ तहरा मिली त पूरा सप्ताह तू ओकरा छोड़बआ न। भर सप्ताह ओकरा पेलते रहबु।"
राजू," पूरा महीना हम ओकरा कमरा से न निकले देब। एतना दिन के पूरा कसर निकालब। उहु पूरा मज़ा ली, हम जानत बानि।"
गुड्डी को समझ में आने लगा, कि आखिर क्यों बीना को राजू के साथ मज़ा आ रहा होगा, जिसका सच था माँ बेटे के पवित्र रिश्ते में अनुचित अवैध कामुक संबंध का बंधन। वो समझ गयी कि उसे अपनी माँ के अतृप्त दैहिक सुख, और भाई की अथाह वासना का मिलन कराना होगा। उसे ये समझ भी आने लगा था कि उन दोनों भाई बहनों के खून में ही व्यभिचार विरासत में मिली है। जहां उसकी माँ को भी इन नीच कामों में मज़ा आता है, तो उन्हें क्यों नहीं होगा।

वो राजू से कुछ कहना चाहती थी पर राजू वहां से चला आया। गुड्डी ने उसे बीना से थोड़ा रूखा व्यवहार रखने को कहा था। गुड्डी ने एक गहरी चाल चली थी बीना को राजू के गोद में डालने की। वो जानती थी कि बीना राजू के लण्ड के बिना ज्यादा दिन रह नहीं पाएगी और राजू जब उसे नजरअंदाज करेगा तो वो मचल कर खुद उसके पास भाग के जाएगी।
अगले दिन गुड्डी अपनी माँ के पास गयी। वो कमरे में चुपचाप बैठी थी। अपनी माँ को उसने हमेशा सजा संवरा देखा था। बीना एक फीके रंग की साड़ी में बिस्तर पर लेटी शायद राजू के बारे में ही सोच रही थी। गुड्डी उसके पास बैठी तो, बीना ने उसे देख मुँह फेर लिया।
बीना की कामुकता काम नहीं हो रही थी। घर में भले उसके पति की मौत हुई थी, और मातम का माहौल था। पर बीना की बूर चुदायी की गुहार लगा रही थी। राजू को देखकर उसकी बूर पनिया जाती थी। बीना ने लेकिन अपने दिमाग में अपनी बेटी गुड्डी के प्रति ही ईर्ष्या पाल ली थी। उसने उसके मुंह का निवाला जो छीन लिया था।
गुड्डी बोली," माई, हम तहरा से माफी मांगे खातिर आईल बानि। देख हमरा से नाराज़ न हो। हम जानत बानि कि तू हमरा से नाराज़ बारू। लेकिन होनी के, के टाल सकेला। हम सच कहत बानि, राजू अउर हम अभी से न बियाह के पहिले से एक दोसर के चाहत बानि।"
हम दुनु पढ़ाई करत करत एक दोसर के करीब आ गइनी। भाई बहिन के रिश्ता जाने कब प्यार में बदल गईल। नइखे पता चलल। आखिर में हम दुनु उ काम कइनी जउन जवान लइका लइकी आपस में करेला। एमे न राजू के दोष बा न हमार दोष बा त हम दुनु के जवानी के, जउन ई उम्र में उफान मारेला।"

बीना उसकी ओर देखी और फिर नज़र हटा बोली," कब कइलु तू सब ई खेला?"
गुड्डी," जब हम आपन सहेली के बियाह में गईल रहनि, राजू हमरा ऊंहा से उठा के खेत में ले गईल, जहां हम दुनु...।"
बीना कटाक्ष मारते हुए बोली," बोल न लजात काहे बारि, करत बेर में त लाज न आईल होई। भाई के साथ चोंच में चोंच लड़ेलु।"
गुड्डी," हाँ, माई राजू अउर हम ऊंहा हद पार कर देनी। आपन रिश्ता के मर्यादा तोड़ हम चुदाई के सुख भोगनी। इहे न राजू अउर हम जब पटना गइनी त ऊंहा हम सब पूरा मज़ा मारनी। हम दुनु एक दोसर के प्रेम में सारा हद पार कर, देनी।"
बीना ईर्ष्या से बोली, " उ त भईल होई, राजू तहरा बढ़िया से फँसा के आपन हवस के शिकार बनाउने होई।"
गुड्डी," माई, राजू पर गलत आरोप मत लगा, हम भी राजू के साथ शामिल बानि। औरत के मर्ज़ी के बिना ई संभव नइखे।"
बीना," अच्छा फेर का भईल?
गुड्डी," हम पटना में पेट से हो गइल रहनि। राजू अउर हमरा बीच एतना चुदाई भईल कि कब गर्भ ठहर गईल पते न चलल। राजू बड़ा होशियारी कइके हमार गर्भपात करवा दिहलस।"
बीना की आंखें फटी रह गयी। उसे विश्वास नहीं हो रहा था, गुड्डी जो बोल रही थी।
गुड्डी," हम परीक्षा पास कइके आइनि, त तू लोक बिना हमरा से पूछने, हमार बियाह तय कर दिहलस। हमके लागल कि राजू अउर हमार साथ उतने दिन के रहल ह।
हमके लागत रहल कि ई खाली आकर्षण होई जउन बियाह के बाद दूर हो जाई। पर हमार दूल्हा नामरद निकलल। एक नवविवाहित दुल्हन के अगर अइसन मरद मिली त उ बेचारी के का हाल होई।"

बीना गुड्डी की ओर देख बोली," का दामादजी नामरद बाटे का?"

गुड्डी," हाँ, माई हमार फूटल किस्मत जउन अइसन मरद मिलल कि खुद लौंडा सबके साथ गाँड़ मरबाबत रहल। अइसन में तहार बेटी असहाय हो गइल रहे। हमार सास हमके बांझ कहत रहल। लेकिन माई हम कुछ न कहनि, हम चुपचाप सब सहत रहनि। मरद के कुछ कहे के हिम्मत न रहे, उ हरदम मुँह चुरात रहे।"

बीना," बेटी मतलब दामादजी तहरा छूलस भी न। हे भगवान मोर बच्ची। हमरा सबके कहलस काहे ना? तहरा साथ एतना अन्याय हो गइल।" बीना को एहसास था कि अगर औरत को शारीरिक सुख न मिले तो, उसके साथ कितना बड़ा अन्याय होता है।

गुड्डी," का कहती, कि हमके चोदे खातिर मरद चाही। खैर, राजू जब ससुरारि आईल त हमार सुतल अरमान फेर से जग गईल। अब एमे का गलत बा।"

बीना," गलत बा पूरा गलत बा, एक भाई के साथ बहिन चुदाई न कर सकेला।"
गुड्डी," लेकिन का एगो माई बेटा से चुदबा सकेलि। बोल.."
बीना," का बोल लस तू.....।"
गुड्डी," हमके मालूम बा कि राजू तहरा चोदले बा। अउर हमके एमे कउनु गलत नइखे बुझाता। तू पियासल औरत रहलु, अउर राजू तहार काम पिपासा बुझौलस। तू माई से पहिले औरत बारू, अउर औरत के अगर संभोग सुख न मिली त उ बेचैन रही। राजू तहरा के बहुत प्यार करेला अउर तहरा खुश रखे चाहेला।"
बीना शरम से पानी पानी हो गयी। अपनी बेटी के मुंह से अपनी कुकर्म की कहानी सुनके। बीना अपना मुंह फेर बोली," मतलब राजू तहरा सब बता देले बा।"
गुड्डी," हाँ, लेकिन हमरा तू दुनु के ई रिश्ता से कउनु एतराज नइखे। माई तू अभी जवान बारू, तहरा साथी चाही। त उ तहार आपन खून रही त का बुरा बा। बेटा ही माई के हाथ थाम ली। राजू बहुत अच्छा लड़का बा, उ तहरा कभू कमी न महसूस होबे दी, बाबूजी के। उ तहरा खातिर, तहार खुशी खातिर सब कुछ करे के तैयार बा। तहरा मन में का बा बोल न माई।"

उसी समय घर पर मलंग बाबा आ पहुंचे। उन्होंने दोनों मां बेटी को अपने पास बुलाया। बीना मलंग बाबा को बहुत मानती थी। मलंग बाबा की कही गयी हर बात सच हो रही थी। बीना को आशीर्वाद दे, वो घर के चबूतरे पर बैठ गए। बीना को चिंतित देख उन्होंने उसका कारण पूछा। बीना लजाते हुए सब बातें उनको बताई। मलंग बाबा ने राजू के बारे में बीना को बताना शुरू किया।

मलंग बाबा," सिंह राशि बा तहार बेटा के। तहार बेटा अब ई घर के उद्धार करि। तहार पति के किस्मत में अब ई घर अउर न भोग विलास लिखल रहे। राजू अब ओकर स्थान ली। उ अब बेटा के साथे तहार घरवाला के भी जिम्मेवारी ली। तू भी माई के साथ साथ ओकर औरत जइसन रहबु। उ तहरा जीवन में अब उहे दर्जा रखी जउन पति के होखेला।"
बीना," लेकिन बाबा उ त हमार बेटी के साथ भी ई सब करेला। हम अउर हमार बेटी दुनु एक साथ एक ही आदमी के साथ पत्नी जइसे कइसे रहब? मरद के जेतना औरत मिली उ त खुश रही, इँहा त माई बेटी कइसे नज़र मिलाईब, ई जानके कि दुनु एके मरद के साथ....।"
मलंग बाबा," एमे राजू के का गलती बा। तू अउर तहार बेटी दुनु राजू के प्रति आकर्षित होखेलि। तहार बेटी के त हम पहिले ही कहले रहनि, कि ओकर पहिल बियाह सफल न होई, ओकरा जीवन में दोसर मरद आयी। ओकरे से एकरा बच्चा होई। तहार बेटा ही ओकर बच्चा के बाप बनि। देखअ तू दुनु औरत बारू, अउर पहिले त अइसन बहुत होत रहल कि एक आदमी तीन चार पत्नी रखत रहले। अब रहल बात माई बेटी वाला त, ई घर के सुख शांति अब तू दुनु औरत के ही हाथ में बा। राजू तू दुनु में से केहू के साथ न छोड़ी। माई अउर बेटी भी त पहिले औरत होखेलि। ई घर के भविष्य अब तहरा दुनु के समझदारी में बा। समझदारी ई बा कि तू लोक अब राजू के ई घर के अउर आपन जीवन के मालिक समझ ओकर साथ दे। तू दुनु जेतना राजू से प्यार करेलु, उ से ज्यादा उ तू दुनु से करेला। उ बेचारा तहरा दुनु के बढ़िया से संभारि, ओकर चिंता अउर न बढ़ा।"
बीना," हमार अउर राजू के पहिले से नाजायज़ संबंध स्थापित बा। पति के पीठ पीछे हम राजू के साथ संबंध बनौनी। हमके लागत रहे कि उ खाली हमके साथ अइसन कर रहल बा, पर हमार बेटी के भी साथ उ पहिले से अइसन करत रहल। उ भी राजू के दीवानी बिया। हमके गुड्डी से न राजू से धोखा मिलल।"

मलंग बाबा," उ कइसे धोखा दिहलस, का तू ओकरा से पूछले रहलु कि उ केहू अउर के चाहेला?

बीना," न।"
मलंग बाबा," तब, तू ई बुझलु कि उ खाली तहरा साथ रतिक्रिया करेला। तू सोच तहार बेटी के यौनसुख के इच्छा न होत होई का। अरे एकर उमर में लइकी के दु बच्चा हो जाता। तहार जमाई बाबू, नामर्द रहल, एहिसे राजू के फेर मौका मिलल, गुड्डी के साथ यौन संबंध बनबे के। जब गुड्डी के पति के एतराज नइखे, गुड्डी के एतराज नइखे त तहरा न होबे के चाही। काल के तहार बेटी के लोक बांझ कहत रहियन, अगर राजू तहार बेटी के पेट से न कइलस रही त।सिंह के एक मादा से मन न भरेला। झुंड में चार से पांच या अधिक भी मादा होखेलि। आपन मन से शंका हटो, अउर बेटा अउर बेटी के साथ के स्वीकार कर।"

बीना ने बाबा का आशीर्वाद लिया। फिर बाबा ने राजू को बुलाया। राजू ने उन्हें प्रणाम किया। बाबा ने उसका हाथ देखा और कुछ देर गौर करने पर कहा," राजू तहार भाग में बहुत औरत के प्यार लिखल बा। तहार अनेक औरत से संबंध बनी। लेकिन तू आपन माई अउर बहिन के प्रति ही गंभीर बारू। तू उ दुनु संग संभोग करेलु।
राजू," जी बाबा, ई बात त केहू के नइखे मालूम रउआ के कइसे?
बाबा," तहार भाग्य पढ़ रहल बानि, तहरा ढेर बच्चा होई। तहार माई बीना भी तहार बच्चा के माई बनि, तहार दीदी गुड्डी भी बच्चा होई। तहार पत्नी से तहरा त बच्चा होबे करि। ई घर के तू नया युग के शुरुआत कर देबु। भविष्य में भी तू अउर बच्चा के बाप बनबु।"
राजू," लेकिन बाबा, हमरा त बीना अउर गुड्डी के अलावा केहू अउर पसंद नइखे।"
बाबा," ई दुनु तहार पत्नी जइसन रही, पत्नी न बनि। बाद में तहार बियाह होई अउर ई सबके सहमति से होई। अभी एक दु दिन में तहार पगड़ी होई, तू ई घर के सही मायने में मालिक हो जइबू, ओकर बाद तू माई बहिन के जे कहबू उ करिहन।"
राजू," पर बाबा, हम बीना के आपन सुहागन बनाबे चाहेलि, ओकर ऊपर ई सादा साड़ी अच्छा न लागी। बीना हमार माई जरूर बिया, पर हम ओकरा पत्नी बनाके अपना पास रखे चाहेनि। गुड्डी त विवाहित बिया, लेकिन ओकरा भी हम आपन पत्नी ही बनायेब।"

बाबा," बीना तहार पत्नी अकेले में बन सकेलि, पर दुनिया के सामने न, अकेले में तू ओकर मांग भरके, ओकरा मंगलसूत्र पिन्हा के आपन पत्नी के तरह रख सकेलु। वसही गुड्डी भी चाहे त तहार नाम के श्रृंगार कर सकेलि, पर दुनिया के नज़र में उ पत्नी केहू अउर के रही। अगर तू कहबू त हम तू सबके गुप्त विवाह करबा देब।"
राजू," बाबा, का सच में ई हो सकेला। बीना हमार माई, हमार पत्नी बनि। हम रउवा के बढ़िया दक्षिणा देब।"
बाबा," ओकर चिंता नइखे, लेकिन उ दुनु बहुत कामुक स्त्री बिया, उ दुनु के संभाल लेबु का? तहरा हम कुछ जड़ी बूटी देब, जेकर सेवन से तू हर महिला के खुश कर देबु।" बाबा ने उसे अपने थैले से निकाल कुछ जड़ी बूटी दी और कहा," एक महीना में खाली एक बेर खाये के बा, पूरा महीना तय घोड़ा जइसन हिनहिनात रहबु। राजू ने उसे रख लिया
बाबा थोड़ी देर वहीं लेटे रहे। थोड़ी देर बाद वो चल दिये।

अंदर गुड्डी और बीना की बात वहीं से चालू हुई जहां से बीच में बाधा आई थी।
बीना," अब जब बात खुल गईल बा, त का बताई। तहार बियाह के बाद हम बहुत अकेले रहनि। राजू हमार खूब ख्याल रखलस। धीरे धीरे हम दुनु काफी करीब आइनि अउर एक दोसर के छू छा करे लगनी। अउर फिर हम दुनु एक दोसर के साथ, एतना नज़दीक आ गइनी कि राजू अउर हम माई बेटा के रिश्ता के बावजूद आपस में चुदाई करनी। तहार बाबूजी हमरा पर ध्यान न देवत रहले। उमर के साथ साथ जहां हमार प्यास बढलस, उंहे तहार बाबूजी के घट गईल।
गुड्डी," हम बूझत बानि माई, पर ई जमाना ई समाज न बूझेला। लेकिन हमरा तू दुनु के रिश्ता से कउनु एतराज नइखे। लेकिन राजू तहरा से रुसल बा। तू जउन उ दिन ओकरा थप्पड़ मार देलु।

बीना," हम उ दिन भावना में बह गईल रहनि। हमके बड़ा अफसोस बा गुड्डी।"
गुड्डी," राजू के मनाबे खातिर, तहरा कुछ करे के पड़ी।"
बीना," हम सबकुछ करब राजू के बिना हम न रह सकेनि।"
गुड्डी," त फेर राजू के कइसे मनेबु?
बीना," औरत के देख के त ऋषि मुनि पिघल जावेला। राजू त लइका बा। काल से हम ओकरा रिझाईब। बहुत जल्दी हम ओकरा फेर से फँसा ली।"

गुड्डी," माई, हमार अउर राजू के रिश्ता के स्वीकार कर ल। हम दुनु तहार संग में रहब।"

बीना कुछ नहीं बोली। गुड्डी जानती थी कि वो अभी भी थोड़ी नाराज़ है, और ये नाराज़गी वक़्त के साथ चली जायेगी। जब बातें इतनी खुल के हो गयी तो एक दिन सब खुल ही जायेगा। अगले दिन से बीना राजू को मनाने और रिझाने के लिए अक्सर उससे चिपकने का बहाना खोजती। वो राजू के इर्द गिर्द रह अपनी चूचियाँ छुआती, तो कभी उसके लण्ड पर हाथ फेरती।
बीना राजू को उकसाने के लिए, सिर्फ साया और ब्लाउज में काम कर रही थी। राजू बीना को देख समझ गया था कि वो उसे अपनी ओर आकर्षित करना चाह रही है, पर गुड्डी की बात मान वो बीना को भाव नहीं दे रहा था। वो राजू के सामने अपने चूचियों और गाँड़ को अच्छे से प्रदर्शित कर रही थी। बीना राजू को बुला उपर की रैक से बोतल उतारने बोली। राजू आया और बीना जानबूझ के उसके आगे खड़ी रही। ऐसे में बीना की गदरायी गाँड़ राजू के लण्ड से टकराई। बीना यही चाहती थी, वो जानबूझ कर गाँड़ उपर नीचे कर राजू के लण्ड को उकसा रही थी। राजू ने कुछ नहीं कहा वो बस बीना की उत्तेजना देखना चाहता था।
बीना वैसे ही खड़े खड़े बोली," राजू हमके माफ कर दे। हमरा से गलती हो गइल। तू हमसे नाराज़ होके, एतना बड़ा सज़ा मत दे। हम त बानि पागल, तभी होश न रहे। भूल जो, हमरा खातिर।"
राजू कुछ नहीं बोला। उसने डिब्बा उतार उसके आगे रख दिया।
बीना," देख न गुड्डी राजू खातिर हम आज साड़ी भी न पेन्हनी। साया ब्लाउज में घूम रहल बानि, जइसन तू कहले रहलु। हमके अइसन देखके उ कभू हमके छोड़ न सकेला, पर जाने का आज त उ छुलस भी न।"
गुड्डी," तहरा कुछ अलग करेके पड़ी। उ बहुत नाराज होई। माई तू कुछ अइसन कर जउन से तहार बदन के खुशबू राजू तक पहुंचे। उ तहार बदन के खुशबू सूंघ जरूर तहरा पास आई।"
बीना," हमहु त पागल बानि, हमके जीवन के अइसन मोर पर, राजू के रूप में असली प्यार मिलल। ओकरे नाराज़ कर देनि।"
गुड्डी," कउनु बात न माई, जिनगी में अइसन होता। जहां प्यार बा ऊंहा नोकझोंक होता। राजू तहरा छोड़ि न, घबरा मत। भगवान राजू के तहरा किस्मत में लिखले बाड़े। तू आपन कच्छी खोल अउर राजू के सामने खोल। ओकरा देखा के कच्छी छोड़ दे। उ जब तहार कच्छी सूँघि त जरूर तहरा पाछे आई।"

बीना को गुड्डी की ये बात जँच गयी। उसने देखा राजू नहाने जा रहा था। बीना भाग के राजू से पहले घुस गई। राजू ने कुछ नहीं कहा। अंदर जाकर बीना ने अपनी कच्छी खोली जो कि उसके बूर के रस से भीगी हुई थी। उसने एक बार अपनी कच्छी खुद सूंघी, बड़ी तेज गंध थी। उसने कुछ देर अंदर रहकर पेशाब करने का बहाना किया। फिर साया घुटनों तक उठा मटकते हुए, बाहर निकल गयी। बीना को पूरा विश्वास था कि राजू उसके यौनांग की गंध सूंघ जरूर उसे उठा ले जाएगा।"

राजू बीना के निकलते ही अंदर घुस गया। अंदर जाकर उसने बीना की बूर के रस से भीगी, मादक गंध वाली कच्छी को देखा। राजू ने रस्सी पर लगी उस कच्छी को सूंघा और उसे आत्मसात करने लगा। अपनी माँ की बूर की ताजी गंध उसे अपनी ओर बुला रही थी। राजू ने हाथ बढ़ा कच्छी को उठाना चाहा, तो उसे गुड्डी की बात याद आ गयी," माई तहरा पास खुद आई, तब तक तू न ओकरा छुहिया, न ओकर कपड़ा, पूरा मूड खराब बना के रख ओकरा पर। उ बेचैन होके खुद लंगटी होके चुदाबे आयी।"

राजू मन ही मन बोला," गुड्डी दीदी ई कइसन स्थिति में डाल देलु हमके, भूखल के सामने खाना त बा, पर खा न सकेला। मन होता अभिये बीना के उठाके बिछौना पर ले जाई। का मस्त गंध ह, ओकर बूर के।"

उधर बीना का दिल जोड़ों से धड़क रहा था, जाने वो क्या कर रहा होगा उसकी कच्छी से। बीना गुड्डी से बोली," गुड्डी तनि देख न उ कच्छी के साथ का करत बा।"
गुड्डी बीना की उत्सुकता देख बोली," अच्छा, रुक।"
गुड्डी ने छेद से देखा कि राजू उसकी कच्छी बिना छुए सूंघ लण्ड हिला रहा था। गुड्डी को गुस्सा आया कि राजू को समझाने के बावजूद वो बीना की कच्छी सूंघ मूठ मार रहा है। पीछे बीना गुड्डी से बोली," गुड्डी बता न का करेला उ हमार कच्छी साथ? सूँघत बा का, मूठ मारत ह का?"
गुड्डी," न माई, उ त कच्छी के तरफ देख भी न रहल बा।"
बीना का चेहरा उदास हो गया। वो गुड्डी की बातों पर विश्वास कर चुकी थी। वो वहां से चली गयी और खाना पकाने लगी। गुड्डी फौरन अंदर घुसी और राजू से बोली," तहरा कहले रही न, अभी कुछ मत करिहा। त फेर अभी का करत बारअ।"
राजू," कच्छी सूँघके बर्दाश्त न भईल, एहिसे मूठ मारत लगनि।"
गुड्डी," माई के के कच्छी सूंघ के तहार ई हाल बा, त माई के बूर मिली त का करबअ।"
राजू," मान त गईल बिया बीना, ओकरा हमके पास ले आबा, आज रतिया में।"
गुड्डी," राजू, अभी न, पहिले पछताए दे माई के, तहार लांड खातिर तड़पे दे। काल तेरही बा, काल राति उ खुद आई तहरा पास। औरत के पाबे के असली मज़ा तब बा जब उ खुद चलके तहरा पास आये। काल तहार पगड़ी के रश्म होई,तू घर के मालिक बन जइबू। ई घर के हर चीज सजीव अउर निर्जीव दुनु तहार कब्ज़ा में आ जाइ। माई त खुद चलके तहरा आपन मालिक बनाई। बस तू कुछ उल्टा सीधा न करिहा। माई पर कउनु रहम मत खो। काल रात माई के साथ तहार एक नया रिश्ता बन जायीं, जहां तू मालिक अउर उ तहार दासी बन जाई। ओकरा आपन गलती के एहसास होबे के चाही। चुदाई भी वसही करिहा जइसे ओकरा पर तु एहसान करत बारअ।"
राजू," ठीक बा दीदी, लेकिन ई खड़ा लांड के का करि।"
गुड्डी अपने बाल समेट, मुस्कुराते हुए घुटनों पर बैठ गयी और बोली," एकरा हम देख लेत बानि। बदमाश कहीं के।"
गुड्डी ने उसका लण्ड चूसना शुरू किया। वहां गुड्डी ने उसका लण्ड चूस उसका पानी पी गयी और जाते हुए बीना की कच्छी भी ले गयी। जब राजू नहा के निकला तो उसने बीना की कच्छी वापिस वैसे ही रख दी।"

गुड्डी ने बीना को आके बोला," माई, राजू तहार कच्छी छुलस भी न।"
बीना बोली," कउनु बात न, हम कुछ अउर सोच लेले बानि।"
गुड्डी," का?"
बीना गुड्डी को रोटी दिखाते हुए बोली," ई देख।"
बीना ने इधर उधर देखा और ताज़ी बनी रोटी को अपने बूर पर मल दी। उसके बूर से रिसता पानी घी की तरह मल दिया। वो जानती थी कि राजू को ये गंध उत्तेजक कर देगी। बीना ने मौका देख, सभी रोटियों में बूर का पानी मल दिया।
बीना," अब तू खाना राजू के खातिर ले जो। जब उ खाई त माई के बूर याद आई।" वो बेशर्मी से बोली। गुड्डी ये चाहती थी कि बीना चुदने से पहले पूरी तरह बेशरम हो जाये और राजू उससे जो मर्ज़ी करवाये।

गुड्डी राजू के लिए खाना ले गयी। राजू ने जैसे ही रोटियां उठायी तो उसपर लगी बीना के बूर का देसी घी की गंध की महक सूंघ पागल हो गया। राजू ने कहा," गुड्डी दीदी, एमे से त बूर के पानी के महक आता।"
गुड्डी," माई ही दिहलस बा, रोटी पर असली देसी औरत के घी लगाके। बेटा मजबूत होखे के चाही न। जउन बाद में चोदी ओकरा जम के। तू त चोदू बेटा बा माई के।"
राजू बोला," माई लागत बा बहुत ज्यादे चुदासी हो गइल बा। अइसन उ कभू न कइलस कि आपन बूर के पानी रोटी पर लगाके दिहलस। लागत बा उ बेचारी वासना में जरत बा।"
गुड्डी," आज न काल। अगर तू आज चोदबअ माई के त तहरा उ अधिकार न मिली जउन तहरा चाही ओकरा उपर। हम चाहत बानि की उ खुद तहरा पास आके लंगटी खड़ा हो जाये, अउर तहरा से चुदाबे खातिर भीख मांगे। तब तू जउन कहबू उ करि। तब माई के आपन वास्तविक स्थिति के ज्ञान होई, कि तू अब घर के मालिक बारअ। स्त्री के भोगे से पहिले, स्त्री के चरम उत्तेजना जरूरी बा। अइसन की उ तहरा निहुरा करे आपने बदन भोगे खातिर।"

राजू इतने में बीना के बूर के पानी से लबरेज रोटियां खा चुका था। गुड्डी उसको देख हँसी। राजू बोला," सही कहेलु तू, लेकिन बीना के बिना बर्दाश्त नइखे होत।"
गुड्डी थाली उठा बोली," आज त रोटी से काम चला, काल त माई के झांट वाला बूर मिली, चाभे खातिर।"
राजू का लण्ड टनटना गया था। उसने गुड्डी से कहा," आज राति हम भूंसा वाला घर में तहार इंतज़ार करब।"
गुड्डी शरारत से बोली," उ काहे?"
राजू ने उसके चूचियों को दबा दिया और बोला," माई से पहिले बेटी के चोदे के चाही।"
गुड्डी बोली," आह...राजू बड़ा बदमाश बारअ। अभी तू जो काहे शाम के भोज के तैयारी करेके बा। हलवाई सब आ गईल बा। समान सब लाबे के बा। तू भी थकल रहबु, हम भी पता न रात में समय मिली कि ना?
राजू," हम इंतज़ार करब।"
इतने में अरुण आ गया था। राजू और अरुण शाम के भोज की तैयारी करने लगे। शहर जाकर दोनों ने जरूरी सामान लिया। फिर घर आकर शामियाना लगवाया। राजू सब जगह बराबर ध्यान दे रहा था। दोपहर तक सारी तैयारियां हो चुकी थी। शाम होते ही लोग आने लगे। राजू सबसे मिलजुल रहा था। सबलोग राजू को सांत्वना दी रहे थे। राजू ने सबका धन्यवाद दिया और सबको भोजन पर बिठाया।
थोड़ी देर में मंत्री जी भी आये। जिससे राजू की धाक और बढ़ गयी। मंत्री जी राजू के बगल में बैठे। राजू ने उन्हें भी भोजन करवाया। अपने परिवार से मिलाया। रंजू भी वहीं थी, तो राजू ने बोला कि रंजू चाची को अगले चुनाव में उम्मीदवार बनना है, और उनका समर्थन जरूरी है। मंत्री ने जब सुना कि वो फौजी की विधवा है तो उसके जीतने के आसार उसे नज़र आये जिससे पार्टी भी मजबूत होती। उसने रंजू को पूरा समर्थन देने की बात कही। गांव के लोग अब राजू का और सम्मान करने लगे। थोड़ी देर बाद वो चले गए। रात दस बजे तक ये सारा कार्यक्रम चला। उसके बाद सब सो गए। राजू भी थक चुका था। तभी उसे याद आया कि, उसने गुड्डी को चोदने के लिए बुलाया था। रात के बारह बज रहे थे। वो चुपके से उठ भूँसे वाले घर में गया। वहां पहुंच उसने देखा कि कोई नहीं है, वो निराश हो उठा और लौटने लगा। अभी वो घर से बाहर कदम रखा ही था, कि किसी ने उसे पीछे से पकड़ लिया। उसने देखा वो महिला के हाथ थे। रात के अंधेरे में उसकी चूड़ियों की आवाज़ से उसने उसके महिला होने का अनुमान लगाया था। राजू के चेहरे पर मुस्कान तैर गयी। दोनों अंदर आ गए और राजू ने दरवाजा बंद कर दिया। वहां बहुत अँधेरा था। राजू ने कहा," हमरा बिस्वास रहे तू अइबू।"
उसने राजू का हाथ पकड़ अपने गीले बूर पर रख दिया।
राजू," बाप रे, एतना पानी, लागत बा, कउनु झड़ना बा।"
कुछ ही देर में दोनों में गुत्थम गुथाई शुरू हो गयी। प्यासे होठ आपस में टकराने लगे। राजू ने जब उसका चुम्मा लिया तो उसे शक हुआ कि वो गुड्डी है। उसने उसे खुद से अलग किया और उसके चेहरे पर हाथ फेरा और गौर से देख चौंक गया। वो उसकी बुआ बंसुरिया थी।
राजू," बंसुरिया फुआ तू, इँहा का करत बारू?
बंसुरिया," उहे जउन तू आपन गुड्डी दीदी के साथ करत रहलु, उ दिन। हम सब देख लेनी। आज जब तू गुड्डी के मिले खातिर इँहा बुलेलु, उ भी हम सुन लेनी। भैया हमके बतौले रहले कि तहरा अउर गुड्डी में अवैध संबंध बा।"
राजू," उ कब ?
बंसुरिया," बताएब, लेकिन पहिले हमके चोद न राजू।"
राजू," लेकिन तू त फुआ बारू, तहरा संग कइसे?
बंसुरिया," फुआ बानि, माई थोड़े। हम सच कहत बानि, तहरा खूब मजा देब। देख न बूर केतना पनियाईल बा। हमके लौड़ा चाही राजू तहार।"
राजू ने सोचा, गुड्डी न सही फुआ ही सही वैसे भी पिछले दो तीन दिन से सब शांत ही था। उसकी बुआ भी त कड़क माल थी।
राजू ने उसकी बूर में उंगली घुसाई और बोला," फूफा चोदत नइखे का तहरा।" बंसुरिया अपने बूर में हुए हमले से चिंहुक उठी और राजू का लण्ड पकड़ बोली," अगर चोदत रहित त हिंया तहरा साथ न रहति।"
दोनों वहीं भूँसे के ढेर पर गिर पड़े। राजू ने बंसुरिया के होठों पर अपने होठों का युद्ध शुरू कर दिया। दोनों आपस में फिर गुत्थम गुथाई में एक दूसरे के उपर नीचे होने लगे। कभी वो पलट के उपर आती, तो कभी राजू। बंसुरिया तो पिछले तीन चार महीनों से नहीं चुदी थी। उसके अंदर जबरदस्त कामवासना भड़की हुई थी। कुछ ही पल में राजू ने बंसुरिया को नंगा करना शुरू कर दिया। पहले उसकी साड़ी उतरी, फिर ब्लाउज। इसके बाद, उसकी ब्रा उतरी और फिर उसका साया का नारा भी राजू ने खोल दिया। बंसुरिया पूरी नंगी होने के लिए अपना साया भी उतार दिया। राजू अभी भी धोती में था।
बंसुरिया बोली," तू सही में भैया जइसन ही बुझा रहल बारू। उ हमके असही लंगटी कइके, खुद धोती में पड़ल रहत रहले। अब जउन काम उ करत रहले, उ काम तहरा करेके पड़ी। हाँ, उ भी आपन बहिन के चोदत रहले। तहरा से अब हमके इहे चाही।"
राजू," का बाबूजी तहरा चोदत रहले का?
बंसुरिया," हाँ, बियाह के पहिले से। तहार फूफा के त तनि सा लुल्ली बा, हमके बच्चा भी न होत रहल। त भैया हमके पेट से कइके, बच्चा दिहलस। तहार मधु दीदी तहार बाबूजी के ही संतान बा।"
राजू," वाह...फुआ तू दुनु त खेलल खिलाड़ी निकललु। एकर मतलब ई खानदानी बा।"
बंसुरिया," ई घर में कुछ बा, ई खानदान में हर पीढ़ी में बहिन भाई से फंसत आईल बा। हर पीढ़ी में भाई बहिन के चोदेला।"
राजू," लागत बा तू ई घर के बारे में अउर भी बहुत कुछ जानेलु?
बंसुरिया," ई घर के अतीत में बहुत गहरा राज बा। इँहा के कोना कोना कौटुम्बिक व्यभिचार के गवाह बा। इँहा अइसन अइसन चीज भईल बा, जेकर कल्पना न कइल जा सकेला। ई घर के मरद हमेशा, घर के औरत के पीछे दीवाना रहेला।"
राजू," का हमके बतेबु न का?
बंसुरिया," बूर में लांड घुसा अभी, ओकरा खातिर अलग से बइठे के पड़ी।" ऐसा बोल बंसुरिया ने लण्ड बूर में घुसा लिया और खुद उछल उछल कर चुदने लगी। राजू अपनी बुआ को इस तरह छिनाल की तरह चुदते हुए देखने में मज़ा आ रहा था।"
राजू उसकी चूचियों की घुंडी ऐंठते हुए बोला," फुआ, तू चिंता मत कर, बाबूजी के कमी हम पूरा करब। तहरा कभू लांड के कमी न महसूस होई।"
बंसुरिया," राजू, तहरे से त आशा बा। अब तू ई घर के मालिक हो गईलु।"
राजू," तहरा निराश न करब। लेकिन ई घर के कइसन राज बा, ई जाने के हक़ हमरा बा।"
बंसुरिया," बिल्कुल बा, लेकिन अभी न। फिलहाल ई जान ल कि तहार बाप अउर हम बाप बेटी के अवैध संबंध के पैदाइश बानि। मतलब ई कि तहार दादी, आपन बाप से चुदवाके हमके पैदा कइलस। अउर बाप के मरे के बाद बाद उ आपन भाई के साथ कहूँ चल गईल।"
राजू अचरज में था। उसे कुछ समझ में नहीं आया। वो अपनी बुआ से और सुनना चाहता था पर वो कुछ बोलने के मूड में नहीं थी। वो बस चुदना चाहती थी। दोनों आपस में उलझे हुए, वासना के समुंदर में उतर गए थे।
राजू के लौड़े का आनंद अलग ही था। बंसुरिया कुछ देर के लिए भूल ही गयी थी कि उसके बड़े भाई का देहांत हुआ है। राजू के धक्कों को बंसुरिया किसी रंडी की तरह लपक लपक के ले रही थी। मलंग बाबा के कहे अनुसार उसे एक और कामुक औरत मिल गयी थी। राजू को एक से एक चुदक्कड़ माल मिल रही थी। वैसे तो उसका आकर्षण बीना और गुड्डी होती थी, पर उसकी बुआ में भी कम आग नहीं थी। बंसुरिया अपने बाल खोल राजू के लण्ड पर कूद रही थी। उसके उछलने से उसकी चूचियाँ फुदक रही थी। उसके गोरे गोरे चूतड़ बार बार नीचे आकर राजू की जांघों से टकरा रहे थे।
बंसुरिया," राजू बेटा, अब हमहु तहार जिम्मेवारी बानि। पहिले तहार बाबूजी हमार जवानी के खेत पर हल चलावत रहे। अब ई खेत पर तु आपन हल चलाबआ। एतना जोत ई खेत के, कि अगर दु महीना बरसात भी न हो, त खेत जुताई के खातिर तैयार रहे।"

राजू," जुताई न चुदाई बोल। लजात बारू का, बूर में लांड लेबु सीधा सीधा बोल ना। बाबूजी के सारा जिम्मेवारी हमार बा। तू भी हमार जिम्मेवारी बारू। बोल त तहरा हिंये रख लेब फुआ रानी।"

बंसुरिया," तहार लौड़ा देख के मन त होता, पर जायके बा काल। लेकिन हम जल्दी वापस आएब। तहरा साथ अभी बहुत अश्लील अउर छिनरी जइसे रहे के बा।"

बंसुरिया पूरी तरह राजू के उपर चुद रही थी। राजू तो भूखा शेर था और यहां हिरणी खुद अपना शिकार करवाने आयी थी। राजू ने उसे पूरी रात जी भर के चोदा। बंसुरिया सारी रात अलग अलग आसन में चुदती रही। एक घंटे बाद उनकी चुदाई खत्म हुई। राजू बंसुरिया के बूर में सारा माल निकाल दिया। बंसुरिया अपने कपड़े उठा कर राजू के सामने ही ठीक करने लगी। जाते वक्त बंसुरिया राजू को चूम उसे थोड़ी देर बाद निकलने बोली और अंत में फुआ बोली," देख काल हम चल जाएब, पर तू हमके बराबर बुलावल करिहा। समय निकालके हमरा पास चल आवल करिहा। तहरा तहार बाबूजी के कसम बा।"
बंसुरिया चुदवाके चली गयी। राजू के हाथ एक और मुर्गी लग गयी थी।

अगले दिन घर पर काम फिर से शुरू हुआ। आज क्रिया करम का अंतिम और तेरहवा दिन था। राजू की आज पगड़ी होने वाली थी। गांव के बुजुर्ग लोग आकर उसे इस घर की मिलने वाली जिम्मेवारी की बधाई दे रहे थे और आशीर्वाद भी दे रहे थे। राजू ने नया कुर्ता और धोती पहनी थी, आज वो इस घर का मालिक बन रहा था। उसकी माँ बीना उसकी बहन गुड़िया और उसकी बुआ बंसुरिया सब उसे ही निहारे जा रहे थे। उनके नज़रों में तो राजू से बड़ा मर्द कोई और नहीं था। राजू एक खास स्थान पर बैठा हुआ था। उस जगह गुड्डी और बंसुरिया ने अल्पना बनाई थी। बांस के बने एक बड़े कटोरे में, कुछ पूजा के समान भी रखे थे जैसे, धान, दूभ, अक्षत, चंदन इत्यादि।
गांव के पांच बूढ़े बुजुर्ग मर्द उसके माथे पर पगड़ी पहनाई। उन सबने उसे आशीर्वाद दिया। उसकी पगड़ी खत्म हुई तो, बंसुरिया उसके पास आई और उसे काला टीका लगा दी। बंसुरिया बोली," राजू, आज हमके जाय के बा।लेकिन हम बहुत जल्दी आएब।" राजू अपनी नई माल को जाने नहीं देना चाहता था। वो बंसुरिया से बोला," तहरा जल्दी ही हम बुलाएब, अगर जरूरत नइखे त रुक जो।"बंसुरिया ने उससे कहा कि उसका जाना जरूरी है। थोड़ी देर में उसकी बुआ उसके फूफा के साथ वापिस चली गयी।
बीना राजू के पास आ उसे तिलक लगाई और रिवाज के अनुसार एक माँ के नाते अपने पल्लू से उसका चेहरा पोछा। राजू को उसका नंगा पेट दिख रहा था। बीना की नाभि और उसकी गहराई देख वो बहक रहा था। आखिर इस घर का मालिक बन उसे सबसे पहले बीना को ही अपना बनाना था। बीना अपने पति की तेरहवीं पर भी काम वासना से ओत प्रोत हो रही थी। उसके सब्र का बांध आज टूटने वाला था। इतने दिनों से बिना चुदायी वो पागल सी हो रही थी।
धीरे धीरे सब लोग चले गए। घर में बीना, गुड्डी और राजू थे। राजू आज छत पर सोने चला गया। घर के चारदीवारी में उसकी मां के अंदर वासना की प्यास जागने लगी थी। वो राजू को याद कर बेचैन हो रही थी। एक तरफ उसके पति की आज तेरहवीं थी और एक तरफ वासना का समुंदर मन में हिलोड़े मार रहा था। ऐसी स्थिति में अब उसे खुद को रोक पाना मुश्किल था। बहती बूर, बेचैन बदन और अधूरे अरमान उसे राजू की ओर खींच रहे थे। आखिरकार वो उठी और चादर ओढ़ कमरे से निकली और सीढ़ियों की ओर बढ़ी। बीना सीढ़ीयां चढ़ रही थी, गुड्डी पीछे से उसे देख मुस्का उठी। वो जानती थी बीना अपनी काम पिपासा बुझाने उपर जा रही थी। इस घर की सबसे कीमती चीज़ आज राजू को मिलने वाली थी।

अरे भाई, कहानी तो अभी तो असली आग पकड़ने वाली है!
पगड़ी की रस्म, रात का अंधेरा, बीना का पूरी तरह टूटकर बेटे के सामने लोटना, गुड्डी का माँ को राजू के बिस्तर तक खींचकर लाना, और फिर तीनों का एक साथ भूसे पर त्रिरंड बन जाना… ये सब तो अभी बाकी है ना!

Writer भैया कहाँ गायब हो गए?
जल्दी से अगला भाग फेंको वरना सारे पाठक लण्ड हाथ में लिये यहीं डेरा डाल देंगे! 🔥

लेखक जी, अब देर मत करो…
पगड़ी बंधते ही राजू का असली रंग दिखाओ – माँ को सुहागरात, बहन को पेलते हुए माँ को चटवाओ, बुआ को भी लाइन में लगवाओ… पूरा घर चुदाई की भेंट चढ़ जाए, बस अब लिख डालो!

हम इंतज़ार में तड़प रहे हैं…
अगला भाग कब??? ⏳
 

liverpool244

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बहुत बेसब्री से इंतजार है भाई।।अब और रहा नहीं जाता प्लीज अपडेट दीजिए
 

vyabhichari

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तेरहवीं की रात- भाग-१

क्या हो अगर मन का वहम टूट जाये? क्या हो अगर झिझक खत्म हो जाये? क्या हो अगर नियम निरर्थक हो जाये? क्या हो अगर कोई बंधन ना हो? क्या हो जब जिस्म काम अगन में तड़पकर पिघल जाए? क्या हो अगर औरत की बेड़ियां खुल जाए? क्या हो अगर औरत बूर की तपन में जलती जाए? क्या हो अगर एक माँ अपने ही बेटे संग यौनाचार को आतुर हो जाए? क्या हो जब वो जान जाए कि बेटा भी उसे गंदी नज़रों से देखता है? और क्या हो जब बेटा ही अपनी माँ को अपने बिस्तर पर नंगी सुलाना चाहे?
जाने ऐसे कितने अनगिनत सवाल और उनके एकलौते जवाब को बीना मन में समाए सीढ़ियों की तरफ बढ़ रही थी। उसके अंदर अब न कोई वहम था, ना शक और ना ही समाज के बंधन का डर। आज उसके पति की तेरहवीं थी और उधर राजू आज ही इस घर के मुखिया की कमान संभाल चुका था। वो राजू को खोजते हुए छत पर पहुंची तो, राजू अपनी खाट पर लेटा सिगरेट पी रहा था। राजू ने आज धोती और कुर्ता पहना था। उसने कुर्ता उतार दिया था। अभी वो केवल धोती और बनियान में लेटा था। बीना जब राजू की ओर देखी तो राजू की धोती उसकी जांघों तक उठी हुई थी क्योंकि उसने पैर मोड़ रखा था। बीना उसके करीब आकर बैठी तो राजू ने उसकी ओर देखा और सिगरेट को फेंक दिया। राजू उठा और बोला," का बात ह, इँहा काहे आइलु?
बीना उसकी ओर देख बोली," अइसे काहे बोलआ तारअ। का हम तहरा पास ना आ सकेनि?
राजू," आ सकेलु, काहे ना आ सकेलु? लेकिन अब का दुबारा थप्पड़ मारे आइलु का? सबके सामने थप्पड़ मारके तहार मन न भरल का?
बीना राजू की ओर देख बोली," राजू तू अभी तक नाराज़ बारअ का? हम त तहरा से माफी मांगे आइनि ह। का तू हमके माफ न करबअ? हमसे गलती हो गइल राजा, हम तहार माई बानि, का हमके एतना अधिकार नइखे तहरा पर?" वो राजू के गाल को छूने को हुई तो, राजू ने अपना गाल झटक लिया।
बीना उसकी ओर देख बोली," एतना गुस्सा राजा जी। आपन माई से। बाप रे, घर के नया मुखिया त बड़ा खिसियाता? राजू हमके माफ कर दअ, हमसे गलती हो गइल न।"
राजू उठने को हुआ तो बीना ने उसको रोक दिया और उसे अपनी ओर घुमा बोली," राजू का हमरा तहरा पर कउनु अधिकार नइखे? का तू हमके माफ न कर सकेलु? जउन होबे के रहल हो गइल ना? उ दिन हम गुस्सा में रहनि, एक तरफ पति के लाश अउर एक तरफ तू दुनु भाई बहन के नाजायज रिश्ता के बात हमके उकसा देले रहले। हम न चाहत भी काबू न कर पईनि। अब हम उ बदल त न सकेनि लेकिन तहरा से माफी मांग सकेनि। हम दिल से दुखी बानि। न विश्वास बा त हमार धड़कन सुन।" ऐसा बोल उसने राजू को अपने सीने से लगा लिया। बीना ने जानबूझकर राजू को अपनी चूचियों का एहसास दिलाने के लिए खुद से गले लगाया था। राजू का चेहरा उसकी गुब्बारे जैसी फूली चूचियों से दबा हुआ था। बीना उसे सीने से चिपकाए आँसू बहाते बोली," सुन गौर से सुन हमार धड़कन का कहेला। तहरा से धक धक कइके माफी मांग रहल बा। का तहरा पर हमार एतना अधिकार भी नइखे?"
राजू कुछ नहीं बोला और बीना के चूचियों से चिपका उसका सच्चा पश्चाताप देखना चाहता था।
राजू," तहरा अधिकार बा माई, पूरा अधिकार बा। एतना कि अगर तू जान देबे कहबू त उफ्फ न करब। लेकिन हर आदमी के आत्मसम्मान होखेला ओकरा ठेस न पहुँचाबे के चाही। नियति के जउन मंजूर होखेला उ होके रहेला। मलंग बाबा इहे कहलिन न। गुड्डी दीदी के साथ हमार संबंध, तहार साथ यौन संबंध अउर बाबूजी के देहांत सब लिखल रहे। उ खातिर न गुड्डी दीदी जिम्मेवार बानि अउर न हम अउर न तू। अगर तू कहबू त हम अबसे न गुड्डी दीदी के अउर न तहरा छुअब।" इस क्रम में बीना लेट गयी और राजू को अपने साथ ही वैसे ही लिटा ली, कि उसका सर उसकी चूचियों पर टिका रहे। बीना चाहती थी कि राजू इस स्थिति में बना रहे जिससे उसे उकसाया जा सके।
बीना उसके बालों को सहलाते हुए बोली," सच बोलत बारअ तू। हमसे गलती हो गइल, तू अब सियान हो गइल बारअ। तहरा थप्पड़ मारके हम खुद पछतात रहनि। गुड्डी बेचारी के साथ त अनर्थ भईल कि पति ही नपुंसक बा। अइसे में तू ई घर के इज़्ज़त बचेलु, हमार बहकत कदम भी तू ही सम्हारलू। हे भगवान जउन आदमी के सम्मान करेके चाही, हम ओकरे थप्पड़ मारनी। कइसन नासमझ बानि हम। हमार नासमझी के सज़ा हमार बेटी अउर न हमरा चाही।"

बीना आगे बोली," मरद लोक के ई दुनिया में हर औरत आपन स्थान खोजेला। औरत त रिश्ता अउर घर गृहस्थी में पिस के रह जाली। ओकर हर कदम में डर अउर संशय होखेला। औरत अगर सही अउर मनपसंद मरद के पास रहेली, त ओकर अउर ओकर मरद के जीवन स्वर्ग हो जाता। मरद खातिर त उ सबकुछ लुटा देत बिया। हर कामुक स्त्री के मरद के पूरा आज़ादी देवे के चाही। अगर स्त्री के ई आज़ादी मरद दे दी, त स्त्री कामानंद के द्वार खोलके मरद के खातिर खुदके बिछा दी। बहुत कम औरत होखेलि जेके मन लायक मरद मिलेला, जउन ओकरा आपन जीवन में उचित स्थान दी। हर स्त्री के आपन अस्तित्व के तलाश रहेला, जउन पुरूष ही ओकरा देखा सकेला। एगो कामुक स्त्री के जीवन एगो अइसन मरद के शरण में होखे के चाही, जउन ओकरा ओकर सच्चाई के आईना दिखाई। ओकरा ई एहसास दिलाई, कि ओकर जीवन के मकसद ही काम सुख के चरम पर खुद के अउर आपन मरद के ले जाए के बा। ई तभी संभव बा जब उ खुदके मरद के सामने समर्पित कर दे। जब अइसन उ करेली, त सब अतीत अउर बंधन के भुलाके कामवासना के अद्भुत सुख के लाभ उठावेली। हम आज आपन अतीत अउर रिश्ता के बंधन से मुक्त हो, अपना आप के तहरा समर्पित करत बानि। हम आज से तहार बानि। हमार जिस्म के रोम रोम आज से तहार बा। हमार आत्मा भी तहरा समर्पित बा। ई घर के मुखिया बने के साथ, तहरा हमके भी स्वीकार करे के पड़ी।"

राजू बीना की कमर पर हाथ रख बोला," माई जब तू एतना समझदार बारू, त उ दिन घर के जवान मरद के काहे मार दिहलु, अइसन नासमझी तहार उमर में बहुत महग पड़ेला?
बीना बोली," अच्छा, केतना महग बेटा?
राजू," बेटा, न ई घर के मुखिया बानि हम। मालिक बोल।"
बीना," हां, अब सच में रउवा ई घर के मुखिया बानि मालिक। अब ई घर राउर हिसाब से चली। बोलि का करे के पड़ी हमके?
राजू उसकी कमर पर चिकोटी काट बोला," गुड्डी दीदी के सामने तहके, ई सच क़ुबूल करे के पड़ी कि तहार हमार बीच नाज़ायज़ संबंध बा। ई घर के आवेबाला भविष्य अब तू दुनु के सामंजस्य पर टिकल बा।"
बीना उसकी बात सुनती रही फिर बोली," का अइसन न हो सकेला कि रउवा गुड्डी के संग भी समय बिताई अउर फेर हमरा भी समय दी।"
राजू," हम ई घर खातिर एकता चाहत बानि न कि बटवारा। तू हमरा खातिर उतना ही जरूरी बारू जेतना गुड्डी दीदी। इँहा बटवारा न होई, न तहार, न हमार अउर न गुड्डी के। जब घर में तीनों के बदन सुलगअता, त काहे खातिर कुछो छुपाबे के। गुड्डी के आवाज़ देके बुलावा।"
बीना ने राजू के कहे अनुसार गुड्डी को आवाज़ दी। राजू ने गुड्डी के आने से पहले बीना को गुड्डी को सब सच सच बताने को बोला। हालांकि गुड्डी को राजू ने सब बात बता दी थी, पर वो चाहता था कि बीना अपने मुँह से गुड्डी को उसकी अश्लील कांड के बारे में बताए। गुड्डी थोड़ी देर बाद छत पर आई। बीना और राजू बैठे हुए थे, तभी गुड्डी को देख बीना ने उसे अपने पास बुलाया। बीना के एक तरफ राजू था और एक तरफ गुड्डी। बीना को थोड़ी झिझक सी हो रही थी, गुड्डी से कैसे अपनी और राजू के बारे में बात करे। गुड्डी मन ही मन अपने भाई और माँ को देख मुस्कुरा रही थी।
बीना," गुड्डी.. बेटी, हम तहरा कुछ बताबे खातिर बुलौनी ह।"
गुड्डी," हाँ, माई बोली न।"
बीना," आज तहार बाबूजी के तेरहवीं बा, अब उ ई दुनिया में नइखन। हमार जिनगी सूना हो गइल। लेकिन उनकर रहित भी हमार जीवन नीरस रहल। पिछला कुछ बरख से हमके उ पत्नी के सम्मान त खूब देलन, लेकिन पत्नी के जउन सुख चाही उ न देत रहलन। तू बूझ रहल बारू ना।"
गुड्डी अनजान बन बोली," माई, हम न बुझनी कि पत्नी के सम्मान अउर सुख में का अंतर बा।"
बीना," बेटी, उ असली सुख केवल पति पत्नी के संग प्यार कइके देवेला। अब त तू विवाहित बारू, तहरा त सब पता होई।"
गुड्डी," कइसे पता होई, हमार पति त हमसे कभू प्यार न कइलस। हमके खुलके बताई न माई।"
बीना," अच्छा, एक पल के खातिर सोच अगर राजू तहार भतार रहित त तहरा कइसन रखि, सुखी रखि ना?
गुड्डी," हाँ, काहे ना राजू जइसन भतार भेटा जाई त हर औरत के भाग्य खुल जाइ।"
बीना," देख, हम जानत बानि कि राजू अउर तहरा बीच जिस्मानी रिश्ता बा। उ तहार भतार जइसन बा। अब हम तहरा बताबे चाहेनि कि, हमार अउर राजू के बीच भी नाजायज संबंध बन चुकल बा। तहार त पति नपुंसक रहे, हमार पति के हमरा में कउनु रुचि न बचल रहे। एहि से राजू अउर हम तहार जाए के बाद, धीरे धीरे नज़दीक आ गइनी, अउर राजू अउर हम माई बेटा के पवित्र रिश्ता के बावजूद चुदाई के आनंद लेनि। राजू हमके पटाके खेतवा पर चोदलस। सच कही त हम बहुत ही कामुक अउर उत्तेजित रहत रहनि, जबसे तहार बाबूजी हमके छुअत न रहलस। हमके कामज्वर हो गइल रहे। अइसे में हमार कदम बहकत रहल, त राजू हमके काबू में कइके हमके अद्भुत चुदाई अउर कामेच्छा के पूर्ति कइलस। हम दुनु माई बेटा के साथ साथ अब मर्द औरत जइसन हो गइनी ह। हम जानत बानि कि तू दुनु भी कामसुख खूब लूटत बारू। हम उ दिन गुस्सा में बहुत कुछ कहनि, पर आज हम राजू से माफी मांग लेनी ह। अब आगे घर के माहौल कइसन रही ई अब हम दुनु के हाथ में बा। का तू राजू के ई घर के मालिक अउर भाग्यविधाता के रूप में हमरा साथ स्वीकार करबु।"
गुड्डी इस वक़्त घाघरा अउर चोली में बैठी चुपचाप सुन रही थी। उसने एक नज़र राजू की ओर देखा और फिर बीना की ओर देख बोली," माई, सच में राजू ही ई घर के मुखिया के जिम्मेवारी ठीक से निभाई। हम त राजू के सहर्ष ई घर के मुखिया के रूप में स्वीकार करत बानि। माई तू सच कहेलु कि राजू तहार बहकत कदम के सम्हार लेलस। ई हमार भी जोबन के पियास हमके चोदके मिटाउलस। ई हमके भी बियाह से पहिले खूब चोदलस। माई चुदाई त हर विवाहित स्त्री के अधिकार बा। लेकिन अब तू विधवा हो गईलु, त एकर मतलब ई त नइखे कि तहार कामेच्छा मर गईल। तहरा भी मरद चाही, हमके भी मरद चाही। सच बताई त लांड के जरूरत बा। अगर हम दुनु के राजू संग ही एकर मज़ा मिली त, एमे का गलत बात बा। अगर हम राजू के बहिन न रहित त हम एकरे से बियाह कइने रहित। माई हम दुनु के सच इहे बा कि राजू ही हम दुनु के पियास बुझा सकेला। हम चाहत बानि कि घर में कउनु दिक्कत न होबे। एहिसे हमरा तू दुनु के नाजायज रिश्ता से कउनु परेशानी नइखे। चुदायी में सब जायज बा। लेकिन खाली एगो परेशानी बा।"
बीना," उ का?
गुड्डी," जब राजू तहरा चोदी, त उ हमार बाबूजी बन जाई। हम राजू के उ बकत पापा कहब। जब राजू हमरा चोदी त उ तहार दामाद बन जाई, या हम अपने घर के बहु। केतना ओझरा जाई रिश्ता।"
बीना," गुड्डी, अब त जउन रिश्ता बने का फ़रक़ पड़ी। रिश्ता ओझरा जाई त ओझरा जाई, बदन के भूख त शांत होई। सच गुड्डी, तहरा बतावत बानि बूर हमार हरदम बहेला, कभू न रुकेला। लांड जब घुसेला त राहत महसूस होखेला, चुदायी के बाद चरम सुख भी मिलेला। लेकिन कुछ देर बाद काम वासना फेर से जाग जाता। का तहरा साथ भी अइसन होखेला?
गुड्डी," माई, एकदम असही हमरा साथ होखेला। हरदम बूर बहत रहेला। सच हम बहुत कामोत्तेजित रहेनि। राजू का हम दुनु के बढ़िया से एक साथ पेल सकेला?
बीना," तहरा शक बा का?
राजू," गुड्डी, सुन ना, हम तहरा से एगो चीज़ मांग रहल बानि।"
गुड्डी," बोल न राजू।"
राजू," माई के बहुत दिन से चुदाई न भईल बा। अब हम अगला तीन दिन सिर्फ बीना के संग चुदाई करब। तहरा एमे कउनु एतराज नइखे न। घर के बाकी काम तहरा देखे के पड़ी। बीना अबसे अगला तीन दिन तक आपन कमरा में हमरा साथ रही।"
गुड्डी," हम चाहत बानि कि तू माई के हंसी लउटा दे। तीन दिन में का होई, कम से कम सात दिन तक कमरा में रख।"
बीना अब शरमाके बोली," उफ़्फ़फ़ एतना दिन, गुड्डी के का होई?
राजू ने बीना को अपनी जांघ पर बिठाया और फिर गुड्डी को भी अपनी दूसरी जांघ पर बिठाया और बोला," अरे हमार चुदक्कड़ माई अउर छिनार बहिन अबसे तू दुनु हमार रखैल बारू। हमके जब मन होई त हम तू दुनु से केहुके चोदब। बहुत हो गइल बा परदा। तू दुनु के ई रस भरल जवानी अब हम जब चाही भोगब। अगला सात दिन बीना के साथ रासलीला होई।"
बीना," रासलीला कि कामलीला। हम दुनु माई बेटी के रउवा काबू में कइके, अब अपना इशारा पर नचेबू। माई बेटी के बीच एतना अश्लील अउर गंदा वार्तालाप सुनलु। हम दुनु के बेशरम कर देलु।"
गुड्डी," माई, चुदायी के असली मज़ा बेशर्मी में ही बा।"
राजू ने गुड्डी की चुम्मी ले बोला," ई भईल असल रंडी बहन बला बात। गुड्डी तू एक काम कर नीचे जाके माई के कमरा के बिस्तर बना अउर सब व्यवस्था कर। हम दुनु तब तक इंहे बइठत बानि।" गुड्डी के चूतड़ पर एक चपत लगा बोला। गुड्डी उठके चली गयी।
बीना तभी बोली," गुड्डी, बिस्तर कइके तू सूत रहिया, जाने तहार नया पापा, केतना देर लगाई।" गुड्डी मुस्कुराई और बोली," सच में तू दुनु के जोड़ी बहुत जबरदस्त बा। ठीक बा माई, अबसे अगला सात दिन तू अउर हमार पापा जाने का कहर ढाबु।" गुड्डी के जाने के बाद राजू ने बीना को अपनी ओर घुमा बोला," सात दिन ठीक रही न, तहरा ढंग से चोदे खातिर।"
बीना राजू की ओर देख बोली," उ त तहरा उपर निर्भर बा। हमके कइसे कइसे, केतना देर तक चोदबु। लेकिन हमार एगो निहुरा बा, माई बुझिके आपन कउनु इच्छा रोक न लिहा। हम उ बकत बीना रहब, तहार काम- सहेली।"
राजू उसकी ओर देख बोला," बीना आज के रात, तहरा हमेशा याद रही। एक तरफ पति के तेरहवीं अउर एक तरफ काम सुख से लदल आगे के जीवन के शुरुआत हो रहल बा। ई रात एगो नया अध्याय बा, तहार हमार जीवन के, जहाँ हम दुनु रिश्ता नाता के दीवार गिराके सिर्फ कामसुख खातिर बेचैन बानि।"
बीना और राजू एक दूसरे को देख रहे थे। तभी राजू बोला," बीना तू केतना खूबसूरत बारू। लेकिन तहार असली खूबसूरती ई कपड़ा में नुकाईल बा। हम तहार सम्पूर्ण यौवन के खूबसूरती देखे चाहेनि।"
बीना," सीधा सीधा बोलअ न, कि हमके लंगटी करे चाहेलु। अब कुल कमान तहार हाथ में बा। उतार द कुल कपड़वा कर दअ लंगटी। बीना उठी और राजू के सामने ही खड़ी हो गयी। राजू उठा और बीना का पल्लू थाम,उसे गिरा दिया। बीना के ऊपरी जिस्म में केवल ब्लाउज थी। उसकी भारी चूचियों का वजन उसकी कसी हुई चोली में साफ झलक रहा था। राजू उसकी ओर गंदी और कामुक नज़रों से देखते हुए उसकी साड़ी खींचने लगा।
राजू बीना की साड़ी उसकी आँखों में आँखें डाल उतारने लगा। बीना अपने बदन से उतरते आवरण के साथ साथ अपनी आंखों से शर्मिंदगी भी उतार रही थी। अब उसे अपने बेटे के हाथों ही कपड़े उतरवाने में मज़ा आ रहा था।सच कहो तो राजू अपनी माँ की साड़ी नहीं, उसकी झिझक उतार रहा था। वो बीना को नंगी नहीं बल्कि उसकी नैसर्गिक यौनेच्छाओं को नंगी कर रहा था। कुछ देर में बीना सिर्फ ब्लाउज और साया में खड़ी थी, उसकी साड़ी राजू ने फर्श पर फेंक दी थी। राजू ने बीना को उंगली से इशारा कर अपने पास बुलाया, बीना एक आज्ञाकारी दासी की भांति उसके इशारे पर उसके पास आ गयी। राजू ने उसके बाल खोल दिये और उसके कान के पास आकर बोला," उफ़्फ़फ़... सच में तहार गोर पीठ पर ई कारी कारी केशिया मस्त लागेला। ब्लाउज उतरी त अउर सुंदर लगबु।" ऐसा बोल उसने एक झटके से उसकी ब्लाउज फाड़ दी। बीना के ब्लाउज फटते ही, उसकी भारी भारी चूचियाँ नंगी हो बाहर आ गयी। अपनी माँ के उन स्तनों को देख उसे बचपन और खेतों की याद आ गयी। भूरे भूरे तने हुए चूचक देख वो उन दोनों चूचियों को थाम चूमने लगा।
बीना उसके छुअन से पागल हो उठी। उसने राजू के गले में बांहे डाल दी और उसके माथे को चूमने लगी। राजू उन दूध के गुब्बारों से परिचित था, किंतु उनका अनुभव हर बार नया एहसास दिलाता था। राजू उसके चूचकों को मुंह में ले चूसने लगा, बीना के अंदर की वासनात्मक नारीत्व नर के एहसास से भड़कने लगी। अगले ही पल राजू ने जाने कब बीना को खटिये पर अपनी गोद में बिठा लिया। बीना अपने बेटे के जांघ पर बैठ उसे थामे हुए थी। राजू और उसकी आँखों में वासना और हवस के अंगारे बरस रहे थे। बीना राजू की आंखों में देख बोली," चूसअ... चूसअ माई के चुच्ची, लेकिन पेट के भूख न शरीर के भूख मिटाबे खातिर। जिस्म से ही जिस्म के भूख मिट सकेला। बहुत दिन हो गइल बर्दाश्त, अब खुला राज बा तहार। अब केहू न रोकी न टोकि। हाय, एकरे त इंतज़ार रहल ह।"
राजू," उफ़्फ़फ़...माई तहरा साथ अब खूब सेक्स करब।"
बीना," सेक्स का होता, बोलअ माई तहरा अबसे खूब चोदब। तहरा नइखे पता हम तहार केतना बेसब्री से इंतज़ार करत रहनि। तहार खातिर बूर से हमेशा पानी बहेला। आज तहार बाप के कुल अमानत तहरा सौंप देनी, हमेशा के खातिर।"
राजू," अभी कुल कहाँ सौंपलु, ई साया उतारबु तब न देखब असली खज़ाना।" राजु ने बीना को खड़े होने का इशारा किया और बीना खड़ी हो गयी। बीना ने खुद राजू के हाथ साया का नारा थमा के कहा," लअ, खुद खोल द अउर ले लअ आपन बाप के सबसे निजी खजाना।"
राजू ने नारा खींच दिया और बीना की कमर से साया लुढ़क कर उसकी जांघों से नीचे आ कर फंस गया।बीना सम्पूर्ण नग्न थी। उसका गदराया नंगा जिस्म नारी के तराशे हुए बदन की उत्कृष्टता को छू रहा था। उसके खुले केश, धीमी बहती पुरवैया के साथ, हल्के हल्के उड़ रहे थे। उसके कांपते होठों पर राजू के होठों के लिए कामुक निमंत्रण था। उसकी आँखों में वासना की तेज आंधी साफ दिख रही थी। उसकी उन्नत चुच्चियाँ और उनके गोलाकार चूचक तनकर राजू की हथेलियों से मीसे जाने को तैयार थे। उसकी माँ की बूर अब उसके सामने थी, जो कि असली खजाना था। बीना बोली," कइसन बा तहार बाप के अमानत?
राजू," बेजोड़, एकरा ख़ातिर त हमके सब मंजूर बा। ई हर हीरा, सोना जेवर से सबसे कीमती बा। माई के लंगटी बुरिया से चुअत ई चिपचिपा पदार्थ के गंध केतना मादक बा।"
बीना," राजू अबसे तहार माई तहरा ई तोहफा रोज़ दी। इहे बूर खातिर त हर जगह मारा मारी बा। हर मरद औरत के बूर चोदे खातिर पगलाइल रहेला।"
राजू," खाली बूर न, अइसन मदमस्त मटकत गाँड़ भी मन लालचावेला।" बीना के भारी चूतड़ राजू के सामने अपनी तारीफ के लिए मचल रहे थे।
बीना अपने चूतड़ को सहलाते हुए बोली," अइसन का खास बात बा हमार गाँड़ में राजा?
राजू," हाय, तहार गाँड़ के ई मनमादक खुशबू हमार अंदर के जानवर जगा दी।"
बीना," हम भी इहे चाहिले। आज तू हमके आपन रंडी जइसन चोदे। आज से ई यौवन, ई वासना, ई अतृप्त कामुक शरीर हम तहरा सामने नतमस्तक करत बानि। हमार अंग अंग पर तहार अधिकार बा। हमके बस तहार लांड के छत्रछाया में रहे के बा। औरत के त बस एगो मरद चाही, जउन ओकरा प्यार करे, अउर ओकरा साथ उ खुश रहे सुरक्षित महसूस करे। औरत के फ़र्ज़ बा कि उ मरद के खुश रखे, ओकर हर काम इच्छा पूरा करे। अगर उ खुश न रही, त औरत के घर में रखे के फायदा नइखे। अगर मरद के हर इच्छा घर में ही पूरा होई, त उ बाहर काहे जाई। औरत के भी हर यौनेच्छा जब मरद घर में ही पूरा करि, त उ बाहर न जाइ, घर के मान मर्यादा, इज्जत सब बचल रहेला। मरद अगर बाहर मुँह मारी त केहू कुछ न कहेला, लेकिन औरत अगर अइसन करिले त लोक गंदा नज़र से देखेला।"
राजू," तहरा गंदा नज़र से खाली अब हम देखब। हमके त घर के ही औरत सब पसंद बा। तहार जइसन रसीला औरत हमार माई बा, तहार अंग अंग से जउन रस चुएला, तहार जोबन के रस, ओकरा हम पियब, हर दिन हर रात। घर के बाहर त हम तहरा माई जइसन सम्मान देब, लेकिन घर के अंदर हमके तहार पति जइसन सम्मान चाही।"
बीना," घर के चारदीवारी में तहार पत्नी के जइसन सम्मान करब। तू कहबू त रोज़ तहार पैर छुअब। माई बेटा के संबंध के बावजूद हर लाज शरम के पर्दा हटाके, तहरा संग बिस्तर पर रासलीला खेलब। हमार बूर से जोबन के रस तहरा पियाईब। हर अंग के रस तहरा आपन मरद जइसन पियाईब। तहार तृप्ति खातिर हम देह के हर कोना हाज़िर करब। हमार सर से लेके पैर तक तहरा जहां इच्छा करे चुम्मा ले लिहा, चाट लिहा अउर जउन छेदा में मन करे लौड़ा घुसा दिहा।"
राजू ने बीना की आंखों में देखा, जिनमें समागम की चाहत झलक रही थी। अपनी नग्न माँ को इतनी वासनामयी देख उसने उसके माथे पर चूम लिया। उसकी नज़र उसके सूने मांग पर गयी, तो बोला,"अभी तेरह दिन पहिले तहार मांग में सिंदूर रहे, अब ई सूना बा। तहार गला में मंगलसूत्र रहे, अब उहु नइखे। भरल जवानी में तहरा संग ई का हो गइल। जउन हाथ में हमेशा चूड़ी खनकत रहल ह, अब उ सूना बा, पैर के पायल रुनझुन बजत रहल, उ सुनाई नइखे देत। न आंख में कजरा बा, न बिंदी, न कान में बाली अउर न कउनु अंगूठी। तहरा अइसन देख हमके अच्छा न लागेला।"
बीना उसका एक हाथ पकड़ अपने बूर पर डाली और दूसरा अपने चुच्चियों पर और बोली," देख, बूर से हरदम पहिले नेखन पानी बहता, चुच्ची में कसाव पहिले नेखन बा। हमार आँखिया में वासना उमरत बा, देहिया के अंग अंग कामज्वर जइसन तप रहल बा। हमार श्रृंगार तू आपन लांड से करअ। तहार लांड के पानी से हमार मांग भर दअ। हमार बूर में लांड घुसा के हमके सबसे कीमती गहना दे दअ। हमके चाटके तू आपन थूक से हमके रंग दअ। इहे हमार असली श्रृंगार होई।"
राजू ने बीना की तपती बूर का रस महसूस कर उसे कहा," बीना तहार श्रृंगार त हम जरूर करब। मलंग बाबा से बात हो गइल बा, तहार संग हम बियाह करब। उ विवाह गुप्त होई। हम तहरा हर रात आपन सुहागन बनाके चोदब। लेकिन आज राति हम तहार मांग में सिंदूर अउर मंगलसूत्र त जरूर डालब रानी।"
बीना राजू को चूम बोली," तू हमसे बियाह करबु। तू हमके आपन सुहागन बनाके चोदबु। एतना चाहेलु तू ई अभागन के।"
राजू," तहरा न पता हम केतना चाहिले तहके।"
बीना राजू के होठों को चूम बोली," बताबा न, हमार रूप हमार जवानी त अब ढल रहल बा, पता न हम तहरा लायक बानि कि ना?
राजू उसके होठों को चूम बोला," सच बताई त ई उमर में ही औरत के चोदे में मज़ा आवेला। बीना, सच पूरा गांव में तहार जइसन सुंदर केहू नइखे । तहरा जइसन मस्त गोर माल के लंगटी देखके केहू के लांड खड़ा हो जाई। सच अगर हम तहार पति रहित, त तहरा हर रात असही लंगटी कइके, तहरा आपन जांघ पर बिठाति अउर तहरा खूब चोदति। तू हमार जीवन में नया उमंग लेके आईल बारू। हम जानत बानि कि तू अब हमार औरत बन गईलु, तहरा आपन लांड पर नचाबे में बहुत मज़ा आयी।"

बीना मुस्कुरा बोली," हम तहार माई के साथ, अब तहार प्रेयसी भी बानि। तू आपन हर यौन इच्छा पूरा कर सकेलु। हमरा से लजा मत। हम तहार औरत बानि। औरत के मतलब बूझेलु, औरत मतलब महिला के गुप्तांग यानि बूर होखेला। हमार बूर, हमेशा लांड खातिर बहेलि। सी...आह....देखअ न, लांड के चर्चा होत ही केतना बह रहल बिया। जब तू हमके गन्दा नज़र से देखेलु, आपन हाथ हमार चुच्ची, बूर, गाँड़, चूतड़, पर फेरेलु त बहुत गंदा गंदा चीज़ करेके मन होता। हम जानत बानि कि तू हमार बेटा बारू, पर तहरा साथ ही ई सब करेके मन होता। हम जानत बानि कि तू भी हमरा बारे में बहुत ही घिनौना अउर गंदा सोचेलु। एगो बात बताई चुदायी के मज़ा त अइसन ही मरद के साथ आवेला जउन चुदाई के दौरान खूब अश्लील, घिनौना, घटिया, नीच, वासना से लिप्त बात करे। बिस्तर पर मरद के ई असभ्य बात, औरत के बेहद कामुक बुझाता। स्त्री के साथ बिस्तर पर ई वजह से कउनु नरमी न बरते के चाही काहे कि उ तहार माई बिया। एगो औरत के शारीरिक भूख त लांड से ही खतम होई, उ चाहे बेटा के ही काहे न हो। औरत के असली जगह मरद के लांड होता। औरत के सबसे ज्यादा सुकून बूर में लांड लेके ओकर सवारी करे में आता। हमके आपन लांड पर बिठा लअ। इहे औरत के सम्मान बा।"
राजू," उफ़्फ़फ़.... सच में तहार ई गंदा गंदा बात से एतना कामुक नशा चढ़ रहल बा, कि दारू भी उ नशा न दे पाई।"
बीना," अभी त गंदा गंदा बात शुरू भी न भईल, गंदा बात तब होई जब हम तहरा ई कहब कि, राजू बेटा आपन माई के साथ बियाह कइके पत्नी बनेबु या माई के रखैल बनाके रखबू? सगरो रतिया माई के बूर में लौड़ा देके हुमच हुमच के चोदबु।"
राजू," आह...छिनार कहीं के शरम नइखे आवतअ?
बीना," शरम आता कि हम तहरा साथ पहिले बेशरम काहे न भयनी। लेकिन अब देखिहा कि केतना मज़ा आई। हमार बेशर्मी देखके तहरा बहुत मज़ा आयी।"

तभी नीचे से गुड्डी ने आवाज़ दी," माई, बिस्तर लग गईल ह, आ जाई निचवा। हमके नींद लागल ह, हम सूते जात बानि।"
बीना राजू की ओर देख बोली," चली, नीचे तहार बेटी बिस्तर बना दिहले बा आपन माई के पेलवाबे खातिर।" बीना उठी और चादर ओढ़ ली। राजू अभी भी धोती में था। बीना को चादर ओढ़ देख बोला," लंगटी चले में शरम आवेला का?
बीना," तू भी त धोती में बारआ। जब चले के बा, त दुनु एक निहन जाएब।"


राजू बीना को अपने अपने करीब लाकर बोला," आज रात हम धीमे धीमे तहार रूप अउर जोबन के चखब।"
बीना राजू के माथे को चूम बोली," तहरा जइसे मन हो वइसे कर। धीमे धीमे आंच पर ही त स्वाद आई। माई बेटा के बीच ई नाजायज संबंध मसाला के काम करि। जब तहरा ई एहसास रहे कि तू आपन माई के चोदत बारू, अउर हमके ई एहसास रहे कि हमके बेटा चोद रहल बा।"
राजू," माई बेटा के रिश्ता धूमिल हो जाई।"
बीना," काहे, तू अगर हमके चोदबु त का, हम तहार माई न रहब का। जब बेटा माई के चोदेला, त जानत बारू उ का कहाला?
राजू," बोल न, तू ही?
बीना," मादरचोद। काहे कि उ आपन माई के संग गंदा काम करेला। आह...उहु...
राजू," मतलब?
बीना," मतलब माई के बूर में बेटा लांड घुसा के, ओकरा चोदेला।"
राजू," ई गंदा काम होखेला?
बीना," माई के साथ ई काम खाली बाप कर सकेला। अगर बेटा करेला त ई गंदा काम होता।"
राजू," तहरा सच में लागतआ ई गंदा काम बा।"
बीना," हाँ।"
राजू," त फेर ई काहे करेलु?
बीना अपने चूचियों को मसलते हुए बोली," काहे कि, अगर तू हमके आपन बच्चा के माई बना देबु। त तू भी बाप बन जइबू। सब जायज हो जाई।"
राजू बीना को गोद में उठा बोला," बीना आज से सात दिन तक हम और तू खाली चुदायी करब। चल तू आपन कमरा में। ऊंहा अब तहरा दिन रात चोदके गाभिन कर देब।" राजू ने बीना को गोद में उठाया और सीढ़ियों से उतरते हुए दोनों एक दूसरे को निहार रहे थे। थोड़ी ही देर में वो कमरे के बाहर खड़े थे। राजू बीना को बिस्तर पर रख बोला," तहार पति के तेरहवीं के दिन ही तहार बेटा तहार भतार के जगह ली।"
बीना उसकी ओर देख बोली," इहे त हमरा अंदर कामोन्माद बढ़ा रहल बा। बेटा ही हमके आपन औरत बना के रखी।"
बीना कामोन्माद में बोली," ई धोती खोल के हमके हमार यार से मिला द। बहुत दिन से न मिलनी ह।" राजू ने फौरन धोती खोल दी और अपना लण्ड बीना के सामने लहरा दिया। लण्ड को देख बीना की आँखे बड़ी हो गयी, उसके होठों पर जीभ अपने आप फिरने लगी। वो बिल्कुल A K 47 की तरह तना बीना की वासना शांत करने को तैयार था।
राजू को उसकी आँखों में एक अजीब उत्साह और वासना दिखी। बीना इसको महसूस कर पा रही थी, लेकिन देख नहीं पा रही थी। राजू ने बीना का उत्साह बढ़ाने और माहौल में काम ऊर्जा को चरम पर लाने के लिए बीना को बिस्तर से उठा लिया।
बीना को राजू हाथ पकड़ शीशे के सामने ले जाने लगा। उसे समझ नहीं आ रहा था कि राजू उसे कहां ले जा रहा है। अगले पल वो बीना के कमरे में शीशे के सामने खड़े थे। राजू ने बीना की ओर देखा और एक झटके में उसकी चादर उतार कर फेंक दिया। बीना एकदम नंगी खड़ी थी। फिर राजू ने शीशे की ओर इशारा कर कहा," बीना देख असल में तू के बारू? तहार अस्तित्व का बा?

बीना शीशे में मादकता से देख बोली," हम एगो पियासल औरत बानि जउन चुदायी खातिर बेचैन बिया। ई बहत बूर, ई तनल चुच्ची सब ई बात के भरपूर प्रमाण बा। जबसे तहरा से संबंध बनौनी ह, हमार अंदर कामाग्नि हमेशा जरेला। हम अब हर घड़ी बेचैन रहेनि, हर घड़ी बूर से पानी चुएला। हमके लागतआ हम तहार माई से भी बढ़के कुछ बानि।"
राजू," का बोल ना?
बीना," हाय, हमके बेशरम बनेबु का?
राजू," इहे खातिर त तहरा हिंया ले आइनि ह। ताकि तू शीशा में खुदके देख अउर आपन सच्चाई बताबा। बोल तू शीशा में देख के।"
बीना ने मुस्कुराके शीशे में देखा," राजू के माई, राजू के रंडी, राजू के रखैल।"
राजू," अउर राजू के पत्नी भी।"
बीना," का ! तू हमसे सच में बियाह करबु?
राजू," हाँ, तू बियाहल औरत जइसे ही रहबु।"
बीना," हमके मंजूर बा, लेकिन केहू के पता चली त का कही लोग?
राजू," घर के अंदर ही तू सुहागन बनके रहबु, हमार सुहागन। बाहर जब तू जइबू त घूंघट कइके अउर मंगलसूत्र छुपा के। तहरा जइसन औरत के विधवा कइके भगवान बहुत जुल्म कइले बारन। तू अबसे हमार सुहागन बनके रहबु ई घर में। हम तहार मांग में सिंदूर भरब अउर गला में मंगलसूत्र बाँधब।"
ऐसा बोल उसने बारह दिन पहले विधवा हुई अपनी माँ के माँग में सिंदूर भर दिया और नया मंगलसूत्र उसके गले में बांधने लगा। बीना चुपचाप खड़ी उसका समर्थन कर रही थी। दोनों माँ बेटे नग्न अवस्था में ही विवाह की इन रश्मों को अंजाम दे रहे थे। जब राजू ने गले में मंगलसूत्र बांध दिया तो बीना झुककर उसके पैर छुई और राजू ने उसके सर पर हाथ रख बोला," सौभाग्यवती भवः। उठ ना तहार जगह पैर में ना, हमार लांड पर बा।"
बीना उसकी ओर देख मुस्कुराई और बोली," हाँ, रउवा सच कहेनि, औरत के असली जगह लांड ही होखेला। अब बियाह हो गइल त सुहागरात मनाबे के चाही।"
राजू," हाँ, जरूर लेकिन अभी एगो काम बाकी बा।"
बीना," उ का?
राजू ने उसे उठने को कहा और बीना खड़ी हो गयी। फिर राजू," आपन माई के आशीर्वाद लेबे के बा बियाह के बाद।" ऐसा बोल उसने बीना के पैर छुए और बीना ने उसे तुरंत उठा दिया और बोला," न पति के आपन पत्नी के पैर न छुए के चाही।"
राजू," पत्नी त तू बाद में, पहिले त माई बारू। आशीर्वाद त लेब।"
बीना की आंखों में खुशी के आंसू आ गए उसकी ओर देख बोली," जुग जुग जिय।" थोड़ा रुक वो बोली," अब चलि पत्नी के साथ सुहागरात के आनंद ली।"
राजू ने बीना को अपनी गोद में उठा लिया और बोला," बीना हम चाहत बानि कि तहार संग हमार हरेक रात सुहागरात जइसन बीते।" बीना बोली," हाँ, तहार लौड़ा हमार बूर पर अभीसे दस्तक देता।" राजू का तना हुआ लण्ड बीना की बूर की तह तक जाने के लिए फनफना रहा था। राजू और बीना ने कुछ देर एक दूसरे को देखा और दोनों एक दूसरे को आक्रमक तरीके से चूमने लगे। दोनों एक दूसरे के होठों पर होठ को मलते हुए थूक का आदान प्रदान कर रहे थे। एक दूसरे के मुख रस का स्वाद उन्हें किसी मिठाई की चासनी से भी बढ़कर लग रहा था। बीना राजू के गर्दन में अपनी बांहे डाले उसके हाथों पर अपने भारी नितम्भ टिकाए हुए थी। बीना का शरीर भारी था, पर राजू के मजबूत हाथ उसका वजन बिना दिक्कत के उठाये हुए थे। राजू बीना के नंगे चूतड़ को मसलते हुए उसके बूर
के मुहाने पर लण्ड का सुपाड़ा रगड़ रहा था। बीना के मुँह में राजू की जीभ बार बार घुस रही थी, जिसे वो अपनी जीभ से टकड़ा कर मज़े ले रही थी। बीना उसकी जीभ को लण्ड की तरह चूस रही थी। राजू ने बीना के मुंह में ढ़ेर सारा थूक उगल दिया। बीना ने उसे झटके से निगल लिया। राजू ने एक पल के लिए खुद को अलग किया, बीना मुँह खोले हुए थी। इतने में राजू ने निशाना लगा उसके खुले मुँह में थूका, बीना उसे भी निगल गयी। राजू बीना की गाँड़ पर चपत लगा बोला," रंडी साली, हमार थूक पिये में मज़ा आवेला का?
बीना," ह्हम्म, चुदायी में सब जायज बा। अब राउर जेतना भी गंदा हरकत बा, ओकरा साथ हमहु के देवे के पड़ी। अउर पति के जूठन त, पत्नी के खातिर पवित्र होखेला। हमके अउर पियाई न।"
राजू," सच में तहरा जइसन रंडी माई कहूँ न होई? ई ले आ.... थू
बीना के खुले मुँह में राजू ने फिर से थूका और बीना उसे पीती चली गयी। बीना मुँह खोलके राजू से कहती," अउर थूकी न हमार मुँह में। उम्ममम्म, हमके अच्छा बुझाता। आ..
बीना के मोती जैसे दांतों के बीच उसकी लपलपाती गुलाबी जुबान पर राजू ने थूक की बरसात कर दी। बीना मुँह में थूक भरती और निगल लेती। कुछ देर ये घिनौना मुख रस का खेल खेलकर राजू ने बीना को बिस्तर पर उतार दिया। बीना बिस्तर पर कुतिया की तरह चौपाया हो गयी। अपनी गाँड़ राजू की ओर घुमा हिला रही थी। राजू की ओर घूम बोली," कइसन बुझाता देखे में?
राजू ने बीना की ओर देखा और उसके बाल पकड़, गाँड़ पर दो चार थप्पड़ कस के मार बोला," साली तू सच में एक नंबर के छिनरी बारू। का गाँड़ बा, रंडी सबके भी अइसन गाँड़ न होखेला जइसन तहार ह, जउन रोज़ चुदाबेलि। साली बूर त अइसे बह रहल बा, जइसे पत्थर के फाटल दरार से पानी चुएला। सच में तहरा जइसन गरम माल के गरमी आसानी से शांत न होई।"
बीना बाल खींचे जाने और गाँड़ पर थप्पड़ बरसने की वजह से थोड़े दर्द में थी, पर वो उसकी उत्तेजना बढ़ा रही थी। वो बोली," आह... सच ई बदन के गर्मी शांत नइखे होत। अब त तहार भरोसा बा, तहार लांड के पूरा जोर हमार बूर में लगाबे के पड़ी।"
तभी राजू ने एक उंगली उसकी गाँड़ के छेद में घुसा बोला," हमार सांप त पाछे के बिल में भी घुसी अउर एकरा ढीला कर दी।"
बीना," उफ़्फ़फ़... उई... ई सांप खातिर त हमार शरीर के तीनों बिल खुलल बा। सांप जब बेर बेर बिल में आई जाई त पाछे के बिल ओकरा हिसाब से ढल जाई।"

बीना राजू के सामने लुटने को तैयार थी, और राजू अपनी माँ के जिस्म को नग्नता की चादर में लिपटे देख उत्साह में था।
बीना राजू की ओर घूम बोली," अइसे का देखत बारे?
राजू," इहे कि माई लंगटी होके अउर सुंदर लागेलु।"
बीना राजू का हाथ पकड़ बूर पर लगा बोली," माई के बूर के गर्मी देख। तप रहल बा।"
राजू ने उसे पीठ के बल लिटा दिया और खुद भी बिस्तर पर आ गया और बीना से बोला," हाथ से न बुझाता तनि चाटब तब पता चली।"
बीना मुस्कुराई और अपनी जांघ खोल दी। उसकी बेचैन बहती बूर अब राजू के सामने खुल गयी थी।

बीना की बूर क्या थी, जैसे गुलाब की कली को पानी से भिगो दिया गया हो। बूर की कोमल सांवली सी पत्तियां चिपकी हुई थी। बूर के पानी में लबरेज़, जिनके बीच से बूर का चिपचिपा पानी बह रहा हो। बीना की मोटे पाव के बीच उसकी बूर खिली खिली सी राजू को अपने रसास्वादन का निमंत्रण दे रही थी। बूर की पतली दरार और उनके इर्द गिर्द छोटे छोटे बूर के बाल उसकी सुंदरता बढ़ा रहे थे। राजू ने बूर को छू बोला," उफ़्फ़फ़ इहे खातिर त लोक के लोक से मार हो जाता। ई बूर पर अब हमार अधिकार बा। ई देखे में एतना नशीला बा, त जाने चखे में केतना नशा दी।"
बीना अपनी बूर को ओर इशारा करते हुए बोली," आवा न राजा, चिख के देख हमार बूर। बूर के पानी रोटी पर दिहले रहनि, अब सीधा बूर से पीके देखअ।"
राजू उसके टांगों के बीच लेट गया और अपनी माँ की बूर से उठती मादक गंध सूंघने लगा। बीना की यौनेच्छा की तीव्रता उसकी बूर से चूती पानी की तेज रासायनिक गंध में पता चल रही थी। तभी राजू ने बीना की बूर पर अपने होठ सटा दिए और उसे चूमने लगा। राजू की गर्म जुबान बूर से लगते ही बीना के मुंह से उफ्फ और आह की बौछार होने लगी। उसके हाथ अपने बेटे के सर पर चले गए जिससे वो उसे बूर की ओर दबाव बना रही थी। बीना एक हाथ से अपनी फूली हुई चूचियों को दबा रही थी। अगर इस वक़्त दुनिया भी पलट जाती तो शायद ही राजू वहां से उठता। तपती बूर का रसास्वादन इतना मजेदार था कि राजू की लपलपाती जीभ एक बूंद भी छोड़ने को तैयार नहीं थी। बीना अपनी गाँड़ उछाल उछाल के बूर को राजू के मुंह पर रगड़ रही थी। बीना कामाग्नि में जलती हुई बोली," उफ़्फ़फ़ मादरचोद, पी लअ कुल रस माई के बूर के। हे भगवान, अइसन बुझाता कउनु रंडी घुस गईल बा देह में, एतना बूर में चुनचुनि हो रहल बा। तहार जीभ जब लगेला त सुकून मिल रहल बा। हाय.... उम्म.. कहां रहल ह राजा एतना दिन, आपन रंडी माई के छोड़ के।"
राजू उसकी गंदी बातों में मस्त, उसकी बूर की अंदरूनी गुलाबी त्वचा को जीभ से कुरेदने लगा। बीना के बूर से उठती, बीना की जवानी के रस के साथ सम्मिलित पेशाब और पसीने की रासायनिक गंध राजू को आक्रामक बनाने लगे। राजू ने बीना की बूर को फैलाके उसकी अंदरूनी गुलाबी हिस्से पर थूका और पूरे बूर पर मल दिया। बूर अब बेहद चिपचिपी और गीली हो गयी थी। राजू ने उंगली से बूर के दाने को छेड़ते हुए, पूरा थूक बूर पर मल दिया। बीना की सांवली बूर अब और भी आकर्षक लग रही थी। राजू अब पूरी बूर के चीरे को अपनी जीभ से तेज़ी से छुड़ी की तरह हिला रहा था। वो कई बार बूर को पूरी तरह मुँह में रख चूसने लगता था, ऐसा करते हुए उसने बीना की बूर के आसपास काट भी लिया था। बीना को चुदायी की तड़प में उसमें भी सुकून मिल रहा था। अब राजू की जीभ बीना के बूर के छेद में घुस उसका मुआयना करने लगी। बीना की बूर को उसने जीभ से ही चोदना शुरू कर दिया था। बीना मचल उठी, बहुत दिनों से किसी मर्द ने छेड़ा जो नहीं था। राजू का लण्ड भी तन चुका था। बीना भी अब बेहद गर्म हो चुकी थी।
बीना तभी बोली," आह..बेटा खाली बुरिया चुसबअ का। एतना देर से हमार बूर के रस पी रहल बारू। अब लांड डारके आपन माई के बूर चोदअ।"

राजू," बड़ा ओगताईल बारू, चुदाबे खातिर।"

बीना," हाँ, ओगताईल त बानि, ई बूर बड़ा परेशान बिया लांड लेबे खातिर। आबअ न राजा ई पियासल बूर में लांड घुसा दअ।"

राजू ने अपना लण्ड अपनी माँ बीना के बूर पर रगड़ते हुए बोला," लांड बूर में ढुकि त तहार बेटा तहार भतार हो जाई।"

बीना," भतार न माँ के चोदेवाला मादरचोद हो जइबू। हम जनम त देनी ह बेटा के, लेकिन अब उ हमहि के चोदके मादरचोद बनि। आह...आ.आ..." राजू ने बीना की बूर में लण्ड घुसा दिया और उसकी चुच्चियों को कसके मसलते हुए बोला," जब तू हमके मादरचोद कहेलु, उफ़्फ़फ़ मज़ा आ जाता। आपन माई के बूर में लांड घुसाबे में जउन मज़ा बा उ केहू में नइखे। ई व्यभिचार के शिखर बा, जब एगो बेटा, बाप के बिस्तर पर माई के संग चुदाई करेला।"

राजू ने बीना को अपना लण्ड दिखा बोला," घुसाई तहरा बूर में माई।"
बीना," पूछत काहे बारे, घुसावा न भीतरी अउर पेलअ हमके।"
राजू ने बीना से बोला," का चाही तहरा बोल?
बीना बूर को छेड़ते हुए बेहद मादक अंदाज़ में बोली," लांड चाही बेटा के।"
राजू ने अपना लण्ड उसके सामने लहराते हुए बोला," सोच ल, ई जल्दी शांत न होई।"
बीना," जेतना देर मन करे उतना देर चोदिहआ, ई बूर भी शांत जल्दी न होई।"
राजू ने अपनी तड़पती हुई माँ को तड़पाते हुए कहा," लांड त सुखल बा। एकरा गीला के करि?"
बीना उसका इशारा समझ गयी। राजू घुटनों पर बैठा था, बीना उसके सामने भूखी कुतिया की तरह चौपाया हो गयी और बोली," तहार ई कुतिया लांड के गीला कर दी।"
राजू ने उसके बाल को पकड़ा और चूतड़ों पर दो थप्पड़ मार बोला," लांड के हाथ नइखे लगाबे के, खाली मुँह के इस्तेमाल कर रंडी साली।"
बीना किसी कुतिया की ही तरह जीभ बाहर निकाल कुतिया की तरह कूं..कूं.. कर गाँड़ हिलाई। राजू को ये अदा बहुत पसंद आई। राजू ने बोला," वाह मोर कुतिया तू त सच में कुतिया बन गईलु।"
बीना ने गाँड़ हिलाई और उसके लण्ड को चाटने लगी। बीना ने लण्ड को अपनी जीभ से खूब चाटा। लण्ड के सुपाडे से लेकर राजू के झूलते हुए आंड़ तक। बीना एक अच्छी लण्डखोर औरत की तरह अपने मुंह की कलाबाजी दिखा रही थी। राजू का विशालकाय लण्ड आधा मुँह में लिए हुए, वो किसी ब्लू फिल्म की हीरोइन लग रही थी। उसके मुँह से थूक और लार चू रहा था। बीना मुँह के लगभग हर हिस्से में लण्ड को छुआ रही थी। इसी बीच राजू ने मुँह से लण्ड निकाल उसके खुले मुँह में थूका और फिर वो उसे पी गयी। बीना उसकी ओर मुंह खोल बोली," आह..आ..अउर द । अउर थूकअ, बड़ा बढ़िया लागल बा।" राजू ने उसके मुँह पर एक के बाद एक के बाद एक, चार पांच बार थूका। बीना हर थूक को लेते हुए सिसिया उठती। राजू अपने लण्ड से उसके पूरे चेहरे पर थूक फैलाने लगा। बीना हंसते हुए इसका मज़ा ले रही थी। राजू ने बीना के गोरे मुखड़े को थूक से चिकना कर, उसका श्रृंगार कर रहा था। बीना अभी भी उसके लण्ड को मुंह से पकड़ने में लगी थी। पर राजू उसके कोमल गाल, माथे, आंखों पर अपने लण्ड की ब्रश से पेंटिंग कर रहा था। कुछ देर बाद राजू ने फिरसे बीना को लण्ड दे दिया। बीना लण्ड चूसते हुए गाँड़ हिला रही थी। राजू उसकी गाँड़ को सहलाते हुए बोला," लण्ड अब तैयार बा रानी, तहार बूर में जाय खातिर। चल ई पिछवाड़ा हमरा तरफ घुमावा।"
बीना मुँह से लण्ड निकाल घूमके बोली," असही कुतिया बनल रही न?
राजू उसकी बूर की दरार में उंगली छेड़ते हुए बोला," हां, तू असही मस्त लागत बारू?" राजू ने उसकी गाँड़ पर एक थप्पड़ मार बोला।
बीना अपने चूतड़ को सहलाते हुए बोली," उफ्फ गाँड़ लाल हो जाई अइसे में, एतना कसके मारबू त। लेकिन थप्पड़ खाए में मज़ा भी आ रहल बा।"
राजू ने बीना की गाँड़ पर दो चार चपत और लगा बोला," एकर आदत लगा ले। बीना अब लांड घुसा दी।"
बीना पीछे सर घुमा बोली," जल्दी से ढुका द।" उसकी आवाज़ में कामेच्छा पूर्ति हेतु दया की याचना झलक रही थी। बूर गीली थी और लण्ड तैयार था। राजू ने लण्ड को पहले बीना की बूर के मुंहाने पर रगड़ा। बीना बेचैन हो उठी और बोली," घुसाबा न रे कुत्ता मादरचोद।" इतने में राजू ने लण्ड पेल दिया। बीना की बूर में लण्ड गर्म चाकू की तरह मक्खन में समा गया, बीना की कामोन्माद से भरी चीख निकल गयी। बीना की बूर में लण्ड अंदर तक समा चुका था। राजू लण्ड बड़े आराम से अंदर बाहर कर रहा था।

बीना बहुत दिन बाद लण्ड घुसने से इतने सुकून में थी कि कुछ पलों के लिए वो सिसयाते हुए बस बूर में लण्ड के अंदर बाहर होने का आनंद ले रही थी। राजू ने एक जोर का धक्का दिया तो वो वास्तविकता में लौटी। राजू ने उसकी चुच्ची के चुचकों को दबाते हुए बोला," लागतआ तहरा लांड के बहुत इंतज़ार रहल ह।"

बीना," तू सोच भी न सकेलु उतना रहल। पेलअ, चोदअ अउर ठोकअ जेतना मन करे राजा। बूर त एतना गीला बा कि बिस्तर पर लांड पर से चू रहल बा। बहुत दिन हम संस्कारी अउर पवित्र औरत बनके रहनि ह। जबकि हम बहुत कामुक औरत बानि। हरदम अब दिमाग में लांड ही चलेला। ई उमर में अउर चुदास हो गइल बानि। चुदाई अउर लांड के भूख अउर पियास अब बर्दाश्त न होता। तू हमके आज़ाद कर दिहलु, अब खाली चुदायी के चाहत बा। ई चुदाई जब बेटा करे त अउर मजेदार हो जाई। उफ़्फ़फ़ मादरचोद कहीं के, माई के बूर चोदे में मज़ा आ रहल बा न?

राजू," पूछ मत साली। तहार बूर में लांड घुसाबे में एतना मज़ा बा कि जवाब नइखे। जब तू मादरचोद कहेलु त अउर मज़ा आवेला। मादरचोद बनके बहुत सुकून मिल रहल ह।"

बीना," मादरचोद राजू तू बहुत हरामी बारू। आपन विधवा माई के मांग में सिंदूर भरके ओकरा आपन सुहागन बना देलु। सुहागन से ज़्यादा त रखैल बना लेलु।"

राजू," तू खुद हमरा संग चुदाबे खातिर पगलाइल रहलु रंडी साली। आपन बूर के पानी रोटी में लगाके भेजले रहलु। कउन संस्कारी औरत अइसन करेलि, ई काम त छिनरी सबके ही होखेला। साली एक नंबर के चुदक्कड़ रंडी बारू तू।"

बीना," आह... आपन माई के रंडी बोले में तहरा मज़ा आवेला का। माई के त उहे बेटा गारी देवेला जउन माई के बूर पेलेला। राजू बेटा तू मादरचोद अउर हम रंडी का जोड़ी बा। लौड़ा से आज बूर के फाड़ दअ। इश श....ह।"

राजू उसकी आँखों में आंख डाल बोला," उफ़्फ़फ़ अइसन शानदार बूर के जवाब नइखे। अइसन बूर के त रोज़ चोदे के चाही। तहरा अब रंडी बनाके रोज़ चोदब माई।" ऐसा बोल राजू ने बीना के चूचियों को कसके दबा दिया।"
इसके बाद उसने बीना को पीठ के बल लिटा लिया और उसकी टांगों के बीच आकर बूर में दुबारा लण्ड पेल दिया।
बीना कमर उछाल राजू के धक्कों से तालमेल बिठा रही थी। राजू उसे चोदते हुए देख रहा था, वहीं बीना भी उसके गले में हाथ डाल, उसे निर्लज्ज हो निहार रही थी। बीना के पैर हवा में फैले हुए राजू की थापों पर हिल रहे थे। न जाने कितनी देर तक, राजू बीना को ऐसे ही चोदता रहा। आखिर में बीना झड़ने लगी। वो किकयाते हुए बूर से तेज़ पानी का फव्वारा छोड़ बैठी। राजू उसे पेलता जा रहा था, जब उसे बीना के बूर से बहते झड़ने का एहसास हुआ तो वो नीचे जाकर उसमें अपना चेहरा भिगो लिया। बीना के बूर के दाने को छेड़ते हुए वो महत्तम पानी निकालना चाहता था। बिस्तर गीला हो उठा, बीना ने इतना पानी गिराया। बीना की सांसें तेज़ चल रही थी। तभी राजू भी ने लण्ड वापिस उसकी बूर में घुसा, जोर से चोदने लगा। बीना थोड़ी देर ऐसे ही लेटी रही। राजू ने उसे पांच से दस मिनट और चोदा, फिर लण्ड निकाल बीना को बैठने को कहा," इँहा आ , उठके बईठ।" बीना आज्ञाकारी पत्नी की भांति उठ घुटनों पर बैठी और उसके आंड़ को चूमते हुए बोली," मलाई गिराबे का?
राजू," तहरा चाही मलाई न रानी, न चाही त असही गिरा देब।"
बीना तुरंत बोली," चाही न लांड के मलाई। हमके ई मलाई बहुत पसंद बा। ई लगाबे से चेहरा खिलल खिलल रहेला। हम लालची बानि ई मामला में, पियब भी अउर लगाएब भी। "
राजू," अभी तहरा ढेर मलाई मिली, हमार लांड से एतना मूठ गिरी, कि तू पी भी लेबु अउर तहार चेहरा के फेसिअल भी हो जाई।
बीना," त गिराबअ न राजा आपन ताज़ा ताज़ा गाढ़ा मूठ, जउन के हर बूंद पर हमार नाम लिखल बा। ई पियासल रंडी के एकर औकात दिखा द। हम इहे खातिर पैदा भईल बानि। तहार मूठ के पिये खातिर। लांड से जब चुई त तहार ई रंडी माई के पीके सुकून मिली।"
बीना राजू को उकसा रही थी। राजू के आंडों में खलबली शुरू हो गयी और लण्ड से एक के बाद एक सफेद गाढ़ा मूठ, मुँह खुली बीना के चेहरे और मुंह पर बरसने लगी। राजू आंहे भरते हुए मूठ छोड़ रहा था और बीना मुस्कुराते हुए उस गुनगुने चिपचिपे वीर्य को अपने चेहरे पर बरसते हुए महसूस कर रही थी। थोड़ी देर में उसका चेहरा राजू के वीर्य से सन गया। राजू ने आखरी बूंद तक बीना के मुंह में गिराया। बीना मुस्कुराते हुए अपने मुंह में समाए वीर्य को स्वाद लेते हुए चट कर गयी। राजू उसे देख खुश था, उसने बीना के सर को सहलाते हुए बोला," भुखल कुतिया पियासल रंडी।"

बीना," राजू राजा जी, हम सुंदर लागत बानि न ! तहार वीर्य के गाढ़ा लेप आपन मुँह पर लगाके। बोली न।"
राजू," सच तू सुंदर लागत बारू। अब तू अउर गोर हो जइबू। रोज़ हमार वीर्य आपन चेहरा पर लगाबा।"
बीना," सी...उफ्फ तहार वीर्य पिये में भी मजेदार बा। हमके त मने न भरेला। एतना गाढ़ा, एतना मोटा मस्त मलाई जइसन लागेला। मन करेला जेतना मिल जायीं उतना पी ली।" तभी बीना को जोर से मूत आयी। उसने राजू से कहा," पेशाब लग गईल, रुक मूत के आवत बानि।"
राजू ने उसे अपनी बांहों में पकड़ लिया और उसके बूर को दबोच बोला," कहीं जाय के जरूरी नइखे, तहरा इंहे ई बिस्तर पर मूते के बा।"
बीना," राजू, पर पूरा बिस्तर पेशाब से गीला हो जायीं।"
राजू," हम इहे त चाहत बानि। ई बिस्तर पर तहार मूत के गंध रहे के चाही। तू बिस्तर पर खड़ा होके, हमके आपन पेशाब से नहा दे।"
बीना खड़ी हो गयी और राजू घुटने के बल बैठ उसकी बूर के ठीक नीचे बैठ गया। बीना ने एक पैर राजू के कंधे पर रख दिया। राजू मुँह खोले अपनी माँ की बूर से खाड़े पानी की पतली धार का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था। बीना अपने हाथों से बूर फैला, उसकी आँखों में देख बोली," सच हमरा जइसन निर्लज्ज माई न होई, अउर तहरा जइसन हरामी बेटा। पहिले त बिस्तर पर बेटा चोद दिहलस, अब हमके आपन आदेश दे मुतवा रहल बा।" बीना की बूर से मूत की धारा सीटी की आवाज़ पर बह निकली और राजू उसे पीता चला गया। एक तरफ बीना को मूतने से राहत मिल रही थी तो दूसरी तरफ राजू को उसका मूत पीने से। राजू को पीले खाड़े पानी का स्वाद किसी अमृत से कम नहीं लग रहा था। बीना की बूर से छुल छुल कर बहती मूत की धार उसकी जांघों को भी गीला कर रही थी। राजू ने बीना की बूर को ही मुंह में रख लिया और मूत पीने लगा। बीना उसके बाल सहला रही थी। अगर किसी शिल्पकार को व्यभिचार की सांकेतिक मूर्ति बनानी है, तो ये वो मुद्रा थी, जिसमें माँ और बेटा व्यभिचार के कुकृत्य में शामिल हैं। जहां माँ अपने बेटे को बूर से मूत पिला रही हो। कुछ देर बाद बीना का मूत्राशय खाली हुआ तो, वो राजू के संग बिस्तर पर लेट गयी। राजू अपनी नंगी मां को बांहों में ले उसकी पीठ सहला रहा था। तभी राजू ने बीना से बोला," तनि सलाई ले आ।"
बीना," काहे?
राजू ने सिगरेट दिखा बोला," ई सुलगाबे खातिर।"
बीना उठी और गाँड़ मटकाते हुए सलाई रैख से ले आई। राजू ने सिगरेट जलाई और बीना को सीने से लगा सिगरेट पीने लगा। बीना उसकी ओर अभी भी कामुकता से देख रही थी।

वो बीना को अपनी बांहों में लिए सिगरेट का धुंआ छोड़ रहा था। तभी बीना उसकी जलती सिगरेट होठों से अलग कर दी।
राजू," का भईल माई।"
बीना," ए राजा, गुस्सा मत हो। देख देख आपन सामने। तहार माई न हम एगो कामुक स्त्री बिया। हम का चाहेनि? एगो औरत एगो मरद के सामने लंगटी होके का करे चाहेलि।
राजू," माई ई सिगरेट अउर दारू के नशा हमके शहर में लग गईल। काम के टेंशन में पियत रहनि।"
बीना," ई पिये से टेंशन दूर होता का?
राजू सिगरेट का धुँवा छोड़ बोला," हां, तनि देर खातिर। अच्छा तू ई सिगरेट पी।" राजू बीना के होठों के पास सिगरेट ला उसे खींचने का इशारा किया। बीना उसकी ओर देख समझ गयी कि उसे ये करना ही होगा। उसने सिगरेट का लंबा कश ले धुंआ फेंक दिया।

राजू उसे सिगरेट पीता देख हैरान हो गया। राजू बीना को बांहों में भर बिस्तर पर लेट गया। बीना अभी भी सिगरेट पी रही थी।
राजू," बहुत सेक्सी लग रहल बारू।"
बीना," ई सिगरेट में का नशा रही, जउन औरत के जिस्म में होखेला। सिगरेट के नशा छोड़, औरत के नशा कर। आपन माई के बदन के नशा कर। सच एतना मस्त नशा होई, कि निकले न चाहबु। सब टेंशन दूर हो जाइ।"
राजू," अच्छा अइसन का बात बा औरत में?

बीना," सिगरेट के नशा त तुरत खतम हो जाई, पर एगो लंगटी औरत के नशा, ओकरा चोदे के ललक शांत न होई। तहार लांड हमेशा हमार बूर ही खोजी। मन होई की सारा दिन इहे बूर में लांड घुसाके पड़ल रही।"
राजू," का करि माई, काम ही अइसन रहल ग़ैरकानूनी काम के अंजाम देबे में टेंशन होता।"
बीना सिगरेट का कश लगा बोली," हम जानत बानि, लेकिन तू आपन जान काहे जोखिम में डारत रहलअ। ई सब के चक्कर में तहरा कुछ हो जाई त हमके कउन सम्हारि।"

राजू," बीना, मोर जानेमन आज ई घर बचल बा उ काम से ही। न त घर, खेत सब बिक गईल रहित। हम अउर तू सड़क पर आ गईल रहित।" राजू ने सिगरेट ले एक कश लगाया।

बीना," हम जानत बानि, ई घर, हम अउर गुड्डी सदा तहार एहसान मानि लेकिन, जब तू एतना पइसा कमात रहलु त आपन बाप के काहे न बतेलु?

राजू," बता के का हो जाइत, उ हमके उ काम छुड़वा देत रहलन। इँहा सवाल ई घर खातिर रहल, एहिसे हम चुपचाप काम करत रहनि। अब ई घर हमार कब्ज़ा में बा।

बीना," अउर ई घर के औरत भी तहार कब्ज़ा में बा।" ऐसा बोल बीना ने सिगरेट फेंक राजू को अपने उपर खींच लिया और एक गहरे चुम्बन में संलिप्त कर लिया।
राजू ने बीना की आंखों में देख बोला," समझ में नइखे आवत औरत हमार कब्ज़ा में बिया कि हम औरत के कब्ज़ा में।"
बीना मुस्कुरा के बोली," का फरक पड़ेला, खरबूजा पर चक्कू गिरे या चक्कू खरबूजा पर, कटेला त खरबूजे न।"
राजू," लागत बा तू हमके निचोड़ लेबु रानी।"
बीना," औरत के काम बा, मरद के निचोड़े के। सारा रात इहे काम होई। अउर अभी त रात बाकी बा, काम बाकी बा।"
एक विधवा मां अपने बेटे को पिता की मृत्यु पर उसके पगड़ी का सही हक़ दे रही थी। तेरहवीं की रात अपने पूरे शबाब में चढ़ने को तैयार थी।
 

liverpool244

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अदभूत कोई शब्द ही नहीं आ रहा है।।।बिना अभी और चिनार बनेंगी।।।किसी बाजारू रण्डी की तरह
 
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Reactions: rahulmishra18062003

Raja jani

आवारा बादल
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Adbhut asang abhi tak ka sabse garm uttejak kamuk update.bahut der se aaya lekin ek ek pal ke internet ki puri bharpai kiya hai ye apdate.bahut rasila vybhichar ho raha maa bete ke ye kissa abhi aur lamba aur garm hoga.
 
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तेरहवीं की रात- भाग-१

क्या हो अगर मन का वहम टूट जाये? क्या हो अगर झिझक खत्म हो जाये? क्या हो अगर नियम निरर्थक हो जाये? क्या हो अगर कोई बंधन ना हो? क्या हो जब जिस्म काम अगन में तड़पकर पिघल जाए? क्या हो अगर औरत की बेड़ियां खुल जाए? क्या हो अगर औरत बूर की तपन में जलती जाए? क्या हो अगर एक माँ अपने ही बेटे संग यौनाचार को आतुर हो जाए? क्या हो जब वो जान जाए कि बेटा भी उसे गंदी नज़रों से देखता है? और क्या हो जब बेटा ही अपनी माँ को अपने बिस्तर पर नंगी सुलाना चाहे?
जाने ऐसे कितने अनगिनत सवाल और उनके एकलौते जवाब को बीना मन में समाए सीढ़ियों की तरफ बढ़ रही थी। उसके अंदर अब न कोई वहम था, ना शक और ना ही समाज के बंधन का डर। आज उसके पति की तेरहवीं थी और उधर राजू आज ही इस घर के मुखिया की कमान संभाल चुका था। वो राजू को खोजते हुए छत पर पहुंची तो, राजू अपनी खाट पर लेटा सिगरेट पी रहा था। राजू ने आज धोती और कुर्ता पहना था। उसने कुर्ता उतार दिया था। अभी वो केवल धोती और बनियान में लेटा था। बीना जब राजू की ओर देखी तो राजू की धोती उसकी जांघों तक उठी हुई थी क्योंकि उसने पैर मोड़ रखा था। बीना उसके करीब आकर बैठी तो राजू ने उसकी ओर देखा और सिगरेट को फेंक दिया। राजू उठा और बोला," का बात ह, इँहा काहे आइलु?
बीना उसकी ओर देख बोली," अइसे काहे बोलआ तारअ। का हम तहरा पास ना आ सकेनि?
राजू," आ सकेलु, काहे ना आ सकेलु? लेकिन अब का दुबारा थप्पड़ मारे आइलु का? सबके सामने थप्पड़ मारके तहार मन न भरल का?
बीना राजू की ओर देख बोली," राजू तू अभी तक नाराज़ बारअ का? हम त तहरा से माफी मांगे आइनि ह। का तू हमके माफ न करबअ? हमसे गलती हो गइल राजा, हम तहार माई बानि, का हमके एतना अधिकार नइखे तहरा पर?" वो राजू के गाल को छूने को हुई तो, राजू ने अपना गाल झटक लिया।
बीना उसकी ओर देख बोली," एतना गुस्सा राजा जी। आपन माई से। बाप रे, घर के नया मुखिया त बड़ा खिसियाता? राजू हमके माफ कर दअ, हमसे गलती हो गइल न।"
राजू उठने को हुआ तो बीना ने उसको रोक दिया और उसे अपनी ओर घुमा बोली," राजू का हमरा तहरा पर कउनु अधिकार नइखे? का तू हमके माफ न कर सकेलु? जउन होबे के रहल हो गइल ना? उ दिन हम गुस्सा में रहनि, एक तरफ पति के लाश अउर एक तरफ तू दुनु भाई बहन के नाजायज रिश्ता के बात हमके उकसा देले रहले। हम न चाहत भी काबू न कर पईनि। अब हम उ बदल त न सकेनि लेकिन तहरा से माफी मांग सकेनि। हम दिल से दुखी बानि। न विश्वास बा त हमार धड़कन सुन।" ऐसा बोल उसने राजू को अपने सीने से लगा लिया। बीना ने जानबूझकर राजू को अपनी चूचियों का एहसास दिलाने के लिए खुद से गले लगाया था। राजू का चेहरा उसकी गुब्बारे जैसी फूली चूचियों से दबा हुआ था। बीना उसे सीने से चिपकाए आँसू बहाते बोली," सुन गौर से सुन हमार धड़कन का कहेला। तहरा से धक धक कइके माफी मांग रहल बा। का तहरा पर हमार एतना अधिकार भी नइखे?"
राजू कुछ नहीं बोला और बीना के चूचियों से चिपका उसका सच्चा पश्चाताप देखना चाहता था।
राजू," तहरा अधिकार बा माई, पूरा अधिकार बा। एतना कि अगर तू जान देबे कहबू त उफ्फ न करब। लेकिन हर आदमी के आत्मसम्मान होखेला ओकरा ठेस न पहुँचाबे के चाही। नियति के जउन मंजूर होखेला उ होके रहेला। मलंग बाबा इहे कहलिन न। गुड्डी दीदी के साथ हमार संबंध, तहार साथ यौन संबंध अउर बाबूजी के देहांत सब लिखल रहे। उ खातिर न गुड्डी दीदी जिम्मेवार बानि अउर न हम अउर न तू। अगर तू कहबू त हम अबसे न गुड्डी दीदी के अउर न तहरा छुअब।" इस क्रम में बीना लेट गयी और राजू को अपने साथ ही वैसे ही लिटा ली, कि उसका सर उसकी चूचियों पर टिका रहे। बीना चाहती थी कि राजू इस स्थिति में बना रहे जिससे उसे उकसाया जा सके।
बीना उसके बालों को सहलाते हुए बोली," सच बोलत बारअ तू। हमसे गलती हो गइल, तू अब सियान हो गइल बारअ। तहरा थप्पड़ मारके हम खुद पछतात रहनि। गुड्डी बेचारी के साथ त अनर्थ भईल कि पति ही नपुंसक बा। अइसे में तू ई घर के इज़्ज़त बचेलु, हमार बहकत कदम भी तू ही सम्हारलू। हे भगवान जउन आदमी के सम्मान करेके चाही, हम ओकरे थप्पड़ मारनी। कइसन नासमझ बानि हम। हमार नासमझी के सज़ा हमार बेटी अउर न हमरा चाही।"

बीना आगे बोली," मरद लोक के ई दुनिया में हर औरत आपन स्थान खोजेला। औरत त रिश्ता अउर घर गृहस्थी में पिस के रह जाली। ओकर हर कदम में डर अउर संशय होखेला। औरत अगर सही अउर मनपसंद मरद के पास रहेली, त ओकर अउर ओकर मरद के जीवन स्वर्ग हो जाता। मरद खातिर त उ सबकुछ लुटा देत बिया। हर कामुक स्त्री के मरद के पूरा आज़ादी देवे के चाही। अगर स्त्री के ई आज़ादी मरद दे दी, त स्त्री कामानंद के द्वार खोलके मरद के खातिर खुदके बिछा दी। बहुत कम औरत होखेलि जेके मन लायक मरद मिलेला, जउन ओकरा आपन जीवन में उचित स्थान दी। हर स्त्री के आपन अस्तित्व के तलाश रहेला, जउन पुरूष ही ओकरा देखा सकेला। एगो कामुक स्त्री के जीवन एगो अइसन मरद के शरण में होखे के चाही, जउन ओकरा ओकर सच्चाई के आईना दिखाई। ओकरा ई एहसास दिलाई, कि ओकर जीवन के मकसद ही काम सुख के चरम पर खुद के अउर आपन मरद के ले जाए के बा। ई तभी संभव बा जब उ खुदके मरद के सामने समर्पित कर दे। जब अइसन उ करेली, त सब अतीत अउर बंधन के भुलाके कामवासना के अद्भुत सुख के लाभ उठावेली। हम आज आपन अतीत अउर रिश्ता के बंधन से मुक्त हो, अपना आप के तहरा समर्पित करत बानि। हम आज से तहार बानि। हमार जिस्म के रोम रोम आज से तहार बा। हमार आत्मा भी तहरा समर्पित बा। ई घर के मुखिया बने के साथ, तहरा हमके भी स्वीकार करे के पड़ी।"

राजू बीना की कमर पर हाथ रख बोला," माई जब तू एतना समझदार बारू, त उ दिन घर के जवान मरद के काहे मार दिहलु, अइसन नासमझी तहार उमर में बहुत महग पड़ेला?
बीना बोली," अच्छा, केतना महग बेटा?
राजू," बेटा, न ई घर के मुखिया बानि हम। मालिक बोल।"
बीना," हां, अब सच में रउवा ई घर के मुखिया बानि मालिक। अब ई घर राउर हिसाब से चली। बोलि का करे के पड़ी हमके?
राजू उसकी कमर पर चिकोटी काट बोला," गुड्डी दीदी के सामने तहके, ई सच क़ुबूल करे के पड़ी कि तहार हमार बीच नाज़ायज़ संबंध बा। ई घर के आवेबाला भविष्य अब तू दुनु के सामंजस्य पर टिकल बा।"
बीना उसकी बात सुनती रही फिर बोली," का अइसन न हो सकेला कि रउवा गुड्डी के संग भी समय बिताई अउर फेर हमरा भी समय दी।"
राजू," हम ई घर खातिर एकता चाहत बानि न कि बटवारा। तू हमरा खातिर उतना ही जरूरी बारू जेतना गुड्डी दीदी। इँहा बटवारा न होई, न तहार, न हमार अउर न गुड्डी के। जब घर में तीनों के बदन सुलगअता, त काहे खातिर कुछो छुपाबे के। गुड्डी के आवाज़ देके बुलावा।"
बीना ने राजू के कहे अनुसार गुड्डी को आवाज़ दी। राजू ने गुड्डी के आने से पहले बीना को गुड्डी को सब सच सच बताने को बोला। हालांकि गुड्डी को राजू ने सब बात बता दी थी, पर वो चाहता था कि बीना अपने मुँह से गुड्डी को उसकी अश्लील कांड के बारे में बताए। गुड्डी थोड़ी देर बाद छत पर आई। बीना और राजू बैठे हुए थे, तभी गुड्डी को देख बीना ने उसे अपने पास बुलाया। बीना के एक तरफ राजू था और एक तरफ गुड्डी। बीना को थोड़ी झिझक सी हो रही थी, गुड्डी से कैसे अपनी और राजू के बारे में बात करे। गुड्डी मन ही मन अपने भाई और माँ को देख मुस्कुरा रही थी।
बीना," गुड्डी.. बेटी, हम तहरा कुछ बताबे खातिर बुलौनी ह।"
गुड्डी," हाँ, माई बोली न।"
बीना," आज तहार बाबूजी के तेरहवीं बा, अब उ ई दुनिया में नइखन। हमार जिनगी सूना हो गइल। लेकिन उनकर रहित भी हमार जीवन नीरस रहल। पिछला कुछ बरख से हमके उ पत्नी के सम्मान त खूब देलन, लेकिन पत्नी के जउन सुख चाही उ न देत रहलन। तू बूझ रहल बारू ना।"
गुड्डी अनजान बन बोली," माई, हम न बुझनी कि पत्नी के सम्मान अउर सुख में का अंतर बा।"
बीना," बेटी, उ असली सुख केवल पति पत्नी के संग प्यार कइके देवेला। अब त तू विवाहित बारू, तहरा त सब पता होई।"
गुड्डी," कइसे पता होई, हमार पति त हमसे कभू प्यार न कइलस। हमके खुलके बताई न माई।"
बीना," अच्छा, एक पल के खातिर सोच अगर राजू तहार भतार रहित त तहरा कइसन रखि, सुखी रखि ना?
गुड्डी," हाँ, काहे ना राजू जइसन भतार भेटा जाई त हर औरत के भाग्य खुल जाइ।"
बीना," देख, हम जानत बानि कि राजू अउर तहरा बीच जिस्मानी रिश्ता बा। उ तहार भतार जइसन बा। अब हम तहरा बताबे चाहेनि कि, हमार अउर राजू के बीच भी नाजायज संबंध बन चुकल बा। तहार त पति नपुंसक रहे, हमार पति के हमरा में कउनु रुचि न बचल रहे। एहि से राजू अउर हम तहार जाए के बाद, धीरे धीरे नज़दीक आ गइनी, अउर राजू अउर हम माई बेटा के पवित्र रिश्ता के बावजूद चुदाई के आनंद लेनि। राजू हमके पटाके खेतवा पर चोदलस। सच कही त हम बहुत ही कामुक अउर उत्तेजित रहत रहनि, जबसे तहार बाबूजी हमके छुअत न रहलस। हमके कामज्वर हो गइल रहे। अइसे में हमार कदम बहकत रहल, त राजू हमके काबू में कइके हमके अद्भुत चुदाई अउर कामेच्छा के पूर्ति कइलस। हम दुनु माई बेटा के साथ साथ अब मर्द औरत जइसन हो गइनी ह। हम जानत बानि कि तू दुनु भी कामसुख खूब लूटत बारू। हम उ दिन गुस्सा में बहुत कुछ कहनि, पर आज हम राजू से माफी मांग लेनी ह। अब आगे घर के माहौल कइसन रही ई अब हम दुनु के हाथ में बा। का तू राजू के ई घर के मालिक अउर भाग्यविधाता के रूप में हमरा साथ स्वीकार करबु।"
गुड्डी इस वक़्त घाघरा अउर चोली में बैठी चुपचाप सुन रही थी। उसने एक नज़र राजू की ओर देखा और फिर बीना की ओर देख बोली," माई, सच में राजू ही ई घर के मुखिया के जिम्मेवारी ठीक से निभाई। हम त राजू के सहर्ष ई घर के मुखिया के रूप में स्वीकार करत बानि। माई तू सच कहेलु कि राजू तहार बहकत कदम के सम्हार लेलस। ई हमार भी जोबन के पियास हमके चोदके मिटाउलस। ई हमके भी बियाह से पहिले खूब चोदलस। माई चुदाई त हर विवाहित स्त्री के अधिकार बा। लेकिन अब तू विधवा हो गईलु, त एकर मतलब ई त नइखे कि तहार कामेच्छा मर गईल। तहरा भी मरद चाही, हमके भी मरद चाही। सच बताई त लांड के जरूरत बा। अगर हम दुनु के राजू संग ही एकर मज़ा मिली त, एमे का गलत बात बा। अगर हम राजू के बहिन न रहित त हम एकरे से बियाह कइने रहित। माई हम दुनु के सच इहे बा कि राजू ही हम दुनु के पियास बुझा सकेला। हम चाहत बानि कि घर में कउनु दिक्कत न होबे। एहिसे हमरा तू दुनु के नाजायज रिश्ता से कउनु परेशानी नइखे। चुदायी में सब जायज बा। लेकिन खाली एगो परेशानी बा।"
बीना," उ का?
गुड्डी," जब राजू तहरा चोदी, त उ हमार बाबूजी बन जाई। हम राजू के उ बकत पापा कहब। जब राजू हमरा चोदी त उ तहार दामाद बन जाई, या हम अपने घर के बहु। केतना ओझरा जाई रिश्ता।"
बीना," गुड्डी, अब त जउन रिश्ता बने का फ़रक़ पड़ी। रिश्ता ओझरा जाई त ओझरा जाई, बदन के भूख त शांत होई। सच गुड्डी, तहरा बतावत बानि बूर हमार हरदम बहेला, कभू न रुकेला। लांड जब घुसेला त राहत महसूस होखेला, चुदायी के बाद चरम सुख भी मिलेला। लेकिन कुछ देर बाद काम वासना फेर से जाग जाता। का तहरा साथ भी अइसन होखेला?
गुड्डी," माई, एकदम असही हमरा साथ होखेला। हरदम बूर बहत रहेला। सच हम बहुत कामोत्तेजित रहेनि। राजू का हम दुनु के बढ़िया से एक साथ पेल सकेला?
बीना," तहरा शक बा का?
राजू," गुड्डी, सुन ना, हम तहरा से एगो चीज़ मांग रहल बानि।"
गुड्डी," बोल न राजू।"
राजू," माई के बहुत दिन से चुदाई न भईल बा। अब हम अगला तीन दिन सिर्फ बीना के संग चुदाई करब। तहरा एमे कउनु एतराज नइखे न। घर के बाकी काम तहरा देखे के पड़ी। बीना अबसे अगला तीन दिन तक आपन कमरा में हमरा साथ रही।"
गुड्डी," हम चाहत बानि कि तू माई के हंसी लउटा दे। तीन दिन में का होई, कम से कम सात दिन तक कमरा में रख।"
बीना अब शरमाके बोली," उफ़्फ़फ़ एतना दिन, गुड्डी के का होई?
राजू ने बीना को अपनी जांघ पर बिठाया और फिर गुड्डी को भी अपनी दूसरी जांघ पर बिठाया और बोला," अरे हमार चुदक्कड़ माई अउर छिनार बहिन अबसे तू दुनु हमार रखैल बारू। हमके जब मन होई त हम तू दुनु से केहुके चोदब। बहुत हो गइल बा परदा। तू दुनु के ई रस भरल जवानी अब हम जब चाही भोगब। अगला सात दिन बीना के साथ रासलीला होई।"
बीना," रासलीला कि कामलीला। हम दुनु माई बेटी के रउवा काबू में कइके, अब अपना इशारा पर नचेबू। माई बेटी के बीच एतना अश्लील अउर गंदा वार्तालाप सुनलु। हम दुनु के बेशरम कर देलु।"
गुड्डी," माई, चुदायी के असली मज़ा बेशर्मी में ही बा।"
राजू ने गुड्डी की चुम्मी ले बोला," ई भईल असल रंडी बहन बला बात। गुड्डी तू एक काम कर नीचे जाके माई के कमरा के बिस्तर बना अउर सब व्यवस्था कर। हम दुनु तब तक इंहे बइठत बानि।" गुड्डी के चूतड़ पर एक चपत लगा बोला। गुड्डी उठके चली गयी।
बीना तभी बोली," गुड्डी, बिस्तर कइके तू सूत रहिया, जाने तहार नया पापा, केतना देर लगाई।" गुड्डी मुस्कुराई और बोली," सच में तू दुनु के जोड़ी बहुत जबरदस्त बा। ठीक बा माई, अबसे अगला सात दिन तू अउर हमार पापा जाने का कहर ढाबु।" गुड्डी के जाने के बाद राजू ने बीना को अपनी ओर घुमा बोला," सात दिन ठीक रही न, तहरा ढंग से चोदे खातिर।"
बीना राजू की ओर देख बोली," उ त तहरा उपर निर्भर बा। हमके कइसे कइसे, केतना देर तक चोदबु। लेकिन हमार एगो निहुरा बा, माई बुझिके आपन कउनु इच्छा रोक न लिहा। हम उ बकत बीना रहब, तहार काम- सहेली।"
राजू उसकी ओर देख बोला," बीना आज के रात, तहरा हमेशा याद रही। एक तरफ पति के तेरहवीं अउर एक तरफ काम सुख से लदल आगे के जीवन के शुरुआत हो रहल बा। ई रात एगो नया अध्याय बा, तहार हमार जीवन के, जहाँ हम दुनु रिश्ता नाता के दीवार गिराके सिर्फ कामसुख खातिर बेचैन बानि।"
बीना और राजू एक दूसरे को देख रहे थे। तभी राजू बोला," बीना तू केतना खूबसूरत बारू। लेकिन तहार असली खूबसूरती ई कपड़ा में नुकाईल बा। हम तहार सम्पूर्ण यौवन के खूबसूरती देखे चाहेनि।"
बीना," सीधा सीधा बोलअ न, कि हमके लंगटी करे चाहेलु। अब कुल कमान तहार हाथ में बा। उतार द कुल कपड़वा कर दअ लंगटी। बीना उठी और राजू के सामने ही खड़ी हो गयी। राजू उठा और बीना का पल्लू थाम,उसे गिरा दिया। बीना के ऊपरी जिस्म में केवल ब्लाउज थी। उसकी भारी चूचियों का वजन उसकी कसी हुई चोली में साफ झलक रहा था। राजू उसकी ओर गंदी और कामुक नज़रों से देखते हुए उसकी साड़ी खींचने लगा।
राजू बीना की साड़ी उसकी आँखों में आँखें डाल उतारने लगा। बीना अपने बदन से उतरते आवरण के साथ साथ अपनी आंखों से शर्मिंदगी भी उतार रही थी। अब उसे अपने बेटे के हाथों ही कपड़े उतरवाने में मज़ा आ रहा था।सच कहो तो राजू अपनी माँ की साड़ी नहीं, उसकी झिझक उतार रहा था। वो बीना को नंगी नहीं बल्कि उसकी नैसर्गिक यौनेच्छाओं को नंगी कर रहा था। कुछ देर में बीना सिर्फ ब्लाउज और साया में खड़ी थी, उसकी साड़ी राजू ने फर्श पर फेंक दी थी। राजू ने बीना को उंगली से इशारा कर अपने पास बुलाया, बीना एक आज्ञाकारी दासी की भांति उसके इशारे पर उसके पास आ गयी। राजू ने उसके बाल खोल दिये और उसके कान के पास आकर बोला," उफ़्फ़फ़... सच में तहार गोर पीठ पर ई कारी कारी केशिया मस्त लागेला। ब्लाउज उतरी त अउर सुंदर लगबु।" ऐसा बोल उसने एक झटके से उसकी ब्लाउज फाड़ दी। बीना के ब्लाउज फटते ही, उसकी भारी भारी चूचियाँ नंगी हो बाहर आ गयी। अपनी माँ के उन स्तनों को देख उसे बचपन और खेतों की याद आ गयी। भूरे भूरे तने हुए चूचक देख वो उन दोनों चूचियों को थाम चूमने लगा।
बीना उसके छुअन से पागल हो उठी। उसने राजू के गले में बांहे डाल दी और उसके माथे को चूमने लगी। राजू उन दूध के गुब्बारों से परिचित था, किंतु उनका अनुभव हर बार नया एहसास दिलाता था। राजू उसके चूचकों को मुंह में ले चूसने लगा, बीना के अंदर की वासनात्मक नारीत्व नर के एहसास से भड़कने लगी। अगले ही पल राजू ने जाने कब बीना को खटिये पर अपनी गोद में बिठा लिया। बीना अपने बेटे के जांघ पर बैठ उसे थामे हुए थी। राजू और उसकी आँखों में वासना और हवस के अंगारे बरस रहे थे। बीना राजू की आंखों में देख बोली," चूसअ... चूसअ माई के चुच्ची, लेकिन पेट के भूख न शरीर के भूख मिटाबे खातिर। जिस्म से ही जिस्म के भूख मिट सकेला। बहुत दिन हो गइल बर्दाश्त, अब खुला राज बा तहार। अब केहू न रोकी न टोकि। हाय, एकरे त इंतज़ार रहल ह।"
राजू," उफ़्फ़फ़...माई तहरा साथ अब खूब सेक्स करब।"
बीना," सेक्स का होता, बोलअ माई तहरा अबसे खूब चोदब। तहरा नइखे पता हम तहार केतना बेसब्री से इंतज़ार करत रहनि। तहार खातिर बूर से हमेशा पानी बहेला। आज तहार बाप के कुल अमानत तहरा सौंप देनी, हमेशा के खातिर।"
राजू," अभी कुल कहाँ सौंपलु, ई साया उतारबु तब न देखब असली खज़ाना।" राजु ने बीना को खड़े होने का इशारा किया और बीना खड़ी हो गयी। बीना ने खुद राजू के हाथ साया का नारा थमा के कहा," लअ, खुद खोल द अउर ले लअ आपन बाप के सबसे निजी खजाना।"
राजू ने नारा खींच दिया और बीना की कमर से साया लुढ़क कर उसकी जांघों से नीचे आ कर फंस गया।बीना सम्पूर्ण नग्न थी। उसका गदराया नंगा जिस्म नारी के तराशे हुए बदन की उत्कृष्टता को छू रहा था। उसके खुले केश, धीमी बहती पुरवैया के साथ, हल्के हल्के उड़ रहे थे। उसके कांपते होठों पर राजू के होठों के लिए कामुक निमंत्रण था। उसकी आँखों में वासना की तेज आंधी साफ दिख रही थी। उसकी उन्नत चुच्चियाँ और उनके गोलाकार चूचक तनकर राजू की हथेलियों से मीसे जाने को तैयार थे। उसकी माँ की बूर अब उसके सामने थी, जो कि असली खजाना था। बीना बोली," कइसन बा तहार बाप के अमानत?
राजू," बेजोड़, एकरा ख़ातिर त हमके सब मंजूर बा। ई हर हीरा, सोना जेवर से सबसे कीमती बा। माई के लंगटी बुरिया से चुअत ई चिपचिपा पदार्थ के गंध केतना मादक बा।"
बीना," राजू अबसे तहार माई तहरा ई तोहफा रोज़ दी। इहे बूर खातिर त हर जगह मारा मारी बा। हर मरद औरत के बूर चोदे खातिर पगलाइल रहेला।"
राजू," खाली बूर न, अइसन मदमस्त मटकत गाँड़ भी मन लालचावेला।" बीना के भारी चूतड़ राजू के सामने अपनी तारीफ के लिए मचल रहे थे।
बीना अपने चूतड़ को सहलाते हुए बोली," अइसन का खास बात बा हमार गाँड़ में राजा?
राजू," हाय, तहार गाँड़ के ई मनमादक खुशबू हमार अंदर के जानवर जगा दी।"
बीना," हम भी इहे चाहिले। आज तू हमके आपन रंडी जइसन चोदे। आज से ई यौवन, ई वासना, ई अतृप्त कामुक शरीर हम तहरा सामने नतमस्तक करत बानि। हमार अंग अंग पर तहार अधिकार बा। हमके बस तहार लांड के छत्रछाया में रहे के बा। औरत के त बस एगो मरद चाही, जउन ओकरा प्यार करे, अउर ओकरा साथ उ खुश रहे सुरक्षित महसूस करे। औरत के फ़र्ज़ बा कि उ मरद के खुश रखे, ओकर हर काम इच्छा पूरा करे। अगर उ खुश न रही, त औरत के घर में रखे के फायदा नइखे। अगर मरद के हर इच्छा घर में ही पूरा होई, त उ बाहर काहे जाई। औरत के भी हर यौनेच्छा जब मरद घर में ही पूरा करि, त उ बाहर न जाइ, घर के मान मर्यादा, इज्जत सब बचल रहेला। मरद अगर बाहर मुँह मारी त केहू कुछ न कहेला, लेकिन औरत अगर अइसन करिले त लोक गंदा नज़र से देखेला।"
राजू," तहरा गंदा नज़र से खाली अब हम देखब। हमके त घर के ही औरत सब पसंद बा। तहार जइसन रसीला औरत हमार माई बा, तहार अंग अंग से जउन रस चुएला, तहार जोबन के रस, ओकरा हम पियब, हर दिन हर रात। घर के बाहर त हम तहरा माई जइसन सम्मान देब, लेकिन घर के अंदर हमके तहार पति जइसन सम्मान चाही।"
बीना," घर के चारदीवारी में तहार पत्नी के जइसन सम्मान करब। तू कहबू त रोज़ तहार पैर छुअब। माई बेटा के संबंध के बावजूद हर लाज शरम के पर्दा हटाके, तहरा संग बिस्तर पर रासलीला खेलब। हमार बूर से जोबन के रस तहरा पियाईब। हर अंग के रस तहरा आपन मरद जइसन पियाईब। तहार तृप्ति खातिर हम देह के हर कोना हाज़िर करब। हमार सर से लेके पैर तक तहरा जहां इच्छा करे चुम्मा ले लिहा, चाट लिहा अउर जउन छेदा में मन करे लौड़ा घुसा दिहा।"
राजू ने बीना की आंखों में देखा, जिनमें समागम की चाहत झलक रही थी। अपनी नग्न माँ को इतनी वासनामयी देख उसने उसके माथे पर चूम लिया। उसकी नज़र उसके सूने मांग पर गयी, तो बोला,"अभी तेरह दिन पहिले तहार मांग में सिंदूर रहे, अब ई सूना बा। तहार गला में मंगलसूत्र रहे, अब उहु नइखे। भरल जवानी में तहरा संग ई का हो गइल। जउन हाथ में हमेशा चूड़ी खनकत रहल ह, अब उ सूना बा, पैर के पायल रुनझुन बजत रहल, उ सुनाई नइखे देत। न आंख में कजरा बा, न बिंदी, न कान में बाली अउर न कउनु अंगूठी। तहरा अइसन देख हमके अच्छा न लागेला।"
बीना उसका एक हाथ पकड़ अपने बूर पर डाली और दूसरा अपने चुच्चियों पर और बोली," देख, बूर से हरदम पहिले नेखन पानी बहता, चुच्ची में कसाव पहिले नेखन बा। हमार आँखिया में वासना उमरत बा, देहिया के अंग अंग कामज्वर जइसन तप रहल बा। हमार श्रृंगार तू आपन लांड से करअ। तहार लांड के पानी से हमार मांग भर दअ। हमार बूर में लांड घुसा के हमके सबसे कीमती गहना दे दअ। हमके चाटके तू आपन थूक से हमके रंग दअ। इहे हमार असली श्रृंगार होई।"
राजू ने बीना की तपती बूर का रस महसूस कर उसे कहा," बीना तहार श्रृंगार त हम जरूर करब। मलंग बाबा से बात हो गइल बा, तहार संग हम बियाह करब। उ विवाह गुप्त होई। हम तहरा हर रात आपन सुहागन बनाके चोदब। लेकिन आज राति हम तहार मांग में सिंदूर अउर मंगलसूत्र त जरूर डालब रानी।"
बीना राजू को चूम बोली," तू हमसे बियाह करबु। तू हमके आपन सुहागन बनाके चोदबु। एतना चाहेलु तू ई अभागन के।"
राजू," तहरा न पता हम केतना चाहिले तहके।"
बीना राजू के होठों को चूम बोली," बताबा न, हमार रूप हमार जवानी त अब ढल रहल बा, पता न हम तहरा लायक बानि कि ना?
राजू उसके होठों को चूम बोला," सच बताई त ई उमर में ही औरत के चोदे में मज़ा आवेला। बीना, सच पूरा गांव में तहार जइसन सुंदर केहू नइखे । तहरा जइसन मस्त गोर माल के लंगटी देखके केहू के लांड खड़ा हो जाई। सच अगर हम तहार पति रहित, त तहरा हर रात असही लंगटी कइके, तहरा आपन जांघ पर बिठाति अउर तहरा खूब चोदति। तू हमार जीवन में नया उमंग लेके आईल बारू। हम जानत बानि कि तू अब हमार औरत बन गईलु, तहरा आपन लांड पर नचाबे में बहुत मज़ा आयी।"

बीना मुस्कुरा बोली," हम तहार माई के साथ, अब तहार प्रेयसी भी बानि। तू आपन हर यौन इच्छा पूरा कर सकेलु। हमरा से लजा मत। हम तहार औरत बानि। औरत के मतलब बूझेलु, औरत मतलब महिला के गुप्तांग यानि बूर होखेला। हमार बूर, हमेशा लांड खातिर बहेलि। सी...आह....देखअ न, लांड के चर्चा होत ही केतना बह रहल बिया। जब तू हमके गन्दा नज़र से देखेलु, आपन हाथ हमार चुच्ची, बूर, गाँड़, चूतड़, पर फेरेलु त बहुत गंदा गंदा चीज़ करेके मन होता। हम जानत बानि कि तू हमार बेटा बारू, पर तहरा साथ ही ई सब करेके मन होता। हम जानत बानि कि तू भी हमरा बारे में बहुत ही घिनौना अउर गंदा सोचेलु। एगो बात बताई चुदायी के मज़ा त अइसन ही मरद के साथ आवेला जउन चुदाई के दौरान खूब अश्लील, घिनौना, घटिया, नीच, वासना से लिप्त बात करे। बिस्तर पर मरद के ई असभ्य बात, औरत के बेहद कामुक बुझाता। स्त्री के साथ बिस्तर पर ई वजह से कउनु नरमी न बरते के चाही काहे कि उ तहार माई बिया। एगो औरत के शारीरिक भूख त लांड से ही खतम होई, उ चाहे बेटा के ही काहे न हो। औरत के असली जगह मरद के लांड होता। औरत के सबसे ज्यादा सुकून बूर में लांड लेके ओकर सवारी करे में आता। हमके आपन लांड पर बिठा लअ। इहे औरत के सम्मान बा।"
राजू," उफ़्फ़फ़.... सच में तहार ई गंदा गंदा बात से एतना कामुक नशा चढ़ रहल बा, कि दारू भी उ नशा न दे पाई।"
बीना," अभी त गंदा गंदा बात शुरू भी न भईल, गंदा बात तब होई जब हम तहरा ई कहब कि, राजू बेटा आपन माई के साथ बियाह कइके पत्नी बनेबु या माई के रखैल बनाके रखबू? सगरो रतिया माई के बूर में लौड़ा देके हुमच हुमच के चोदबु।"
राजू," आह...छिनार कहीं के शरम नइखे आवतअ?
बीना," शरम आता कि हम तहरा साथ पहिले बेशरम काहे न भयनी। लेकिन अब देखिहा कि केतना मज़ा आई। हमार बेशर्मी देखके तहरा बहुत मज़ा आयी।"

तभी नीचे से गुड्डी ने आवाज़ दी," माई, बिस्तर लग गईल ह, आ जाई निचवा। हमके नींद लागल ह, हम सूते जात बानि।"
बीना राजू की ओर देख बोली," चली, नीचे तहार बेटी बिस्तर बना दिहले बा आपन माई के पेलवाबे खातिर।" बीना उठी और चादर ओढ़ ली। राजू अभी भी धोती में था। बीना को चादर ओढ़ देख बोला," लंगटी चले में शरम आवेला का?
बीना," तू भी त धोती में बारआ। जब चले के बा, त दुनु एक निहन जाएब।"


राजू बीना को अपने अपने करीब लाकर बोला," आज रात हम धीमे धीमे तहार रूप अउर जोबन के चखब।"
बीना राजू के माथे को चूम बोली," तहरा जइसे मन हो वइसे कर। धीमे धीमे आंच पर ही त स्वाद आई। माई बेटा के बीच ई नाजायज संबंध मसाला के काम करि। जब तहरा ई एहसास रहे कि तू आपन माई के चोदत बारू, अउर हमके ई एहसास रहे कि हमके बेटा चोद रहल बा।"
राजू," माई बेटा के रिश्ता धूमिल हो जाई।"
बीना," काहे, तू अगर हमके चोदबु त का, हम तहार माई न रहब का। जब बेटा माई के चोदेला, त जानत बारू उ का कहाला?
राजू," बोल न, तू ही?
बीना," मादरचोद। काहे कि उ आपन माई के संग गंदा काम करेला। आह...उहु...
राजू," मतलब?
बीना," मतलब माई के बूर में बेटा लांड घुसा के, ओकरा चोदेला।"
राजू," ई गंदा काम होखेला?
बीना," माई के साथ ई काम खाली बाप कर सकेला। अगर बेटा करेला त ई गंदा काम होता।"
राजू," तहरा सच में लागतआ ई गंदा काम बा।"
बीना," हाँ।"
राजू," त फेर ई काहे करेलु?
बीना अपने चूचियों को मसलते हुए बोली," काहे कि, अगर तू हमके आपन बच्चा के माई बना देबु। त तू भी बाप बन जइबू। सब जायज हो जाई।"
राजू बीना को गोद में उठा बोला," बीना आज से सात दिन तक हम और तू खाली चुदायी करब। चल तू आपन कमरा में। ऊंहा अब तहरा दिन रात चोदके गाभिन कर देब।" राजू ने बीना को गोद में उठाया और सीढ़ियों से उतरते हुए दोनों एक दूसरे को निहार रहे थे। थोड़ी ही देर में वो कमरे के बाहर खड़े थे। राजू बीना को बिस्तर पर रख बोला," तहार पति के तेरहवीं के दिन ही तहार बेटा तहार भतार के जगह ली।"
बीना उसकी ओर देख बोली," इहे त हमरा अंदर कामोन्माद बढ़ा रहल बा। बेटा ही हमके आपन औरत बना के रखी।"
बीना कामोन्माद में बोली," ई धोती खोल के हमके हमार यार से मिला द। बहुत दिन से न मिलनी ह।" राजू ने फौरन धोती खोल दी और अपना लण्ड बीना के सामने लहरा दिया। लण्ड को देख बीना की आँखे बड़ी हो गयी, उसके होठों पर जीभ अपने आप फिरने लगी। वो बिल्कुल A K 47 की तरह तना बीना की वासना शांत करने को तैयार था।
राजू को उसकी आँखों में एक अजीब उत्साह और वासना दिखी। बीना इसको महसूस कर पा रही थी, लेकिन देख नहीं पा रही थी। राजू ने बीना का उत्साह बढ़ाने और माहौल में काम ऊर्जा को चरम पर लाने के लिए बीना को बिस्तर से उठा लिया।
बीना को राजू हाथ पकड़ शीशे के सामने ले जाने लगा। उसे समझ नहीं आ रहा था कि राजू उसे कहां ले जा रहा है। अगले पल वो बीना के कमरे में शीशे के सामने खड़े थे। राजू ने बीना की ओर देखा और एक झटके में उसकी चादर उतार कर फेंक दिया। बीना एकदम नंगी खड़ी थी। फिर राजू ने शीशे की ओर इशारा कर कहा," बीना देख असल में तू के बारू? तहार अस्तित्व का बा?

बीना शीशे में मादकता से देख बोली," हम एगो पियासल औरत बानि जउन चुदायी खातिर बेचैन बिया। ई बहत बूर, ई तनल चुच्ची सब ई बात के भरपूर प्रमाण बा। जबसे तहरा से संबंध बनौनी ह, हमार अंदर कामाग्नि हमेशा जरेला। हम अब हर घड़ी बेचैन रहेनि, हर घड़ी बूर से पानी चुएला। हमके लागतआ हम तहार माई से भी बढ़के कुछ बानि।"
राजू," का बोल ना?
बीना," हाय, हमके बेशरम बनेबु का?
राजू," इहे खातिर त तहरा हिंया ले आइनि ह। ताकि तू शीशा में खुदके देख अउर आपन सच्चाई बताबा। बोल तू शीशा में देख के।"
बीना ने मुस्कुराके शीशे में देखा," राजू के माई, राजू के रंडी, राजू के रखैल।"
राजू," अउर राजू के पत्नी भी।"
बीना," का ! तू हमसे सच में बियाह करबु?
राजू," हाँ, तू बियाहल औरत जइसे ही रहबु।"
बीना," हमके मंजूर बा, लेकिन केहू के पता चली त का कही लोग?
राजू," घर के अंदर ही तू सुहागन बनके रहबु, हमार सुहागन। बाहर जब तू जइबू त घूंघट कइके अउर मंगलसूत्र छुपा के। तहरा जइसन औरत के विधवा कइके भगवान बहुत जुल्म कइले बारन। तू अबसे हमार सुहागन बनके रहबु ई घर में। हम तहार मांग में सिंदूर भरब अउर गला में मंगलसूत्र बाँधब।"
ऐसा बोल उसने बारह दिन पहले विधवा हुई अपनी माँ के माँग में सिंदूर भर दिया और नया मंगलसूत्र उसके गले में बांधने लगा। बीना चुपचाप खड़ी उसका समर्थन कर रही थी। दोनों माँ बेटे नग्न अवस्था में ही विवाह की इन रश्मों को अंजाम दे रहे थे। जब राजू ने गले में मंगलसूत्र बांध दिया तो बीना झुककर उसके पैर छुई और राजू ने उसके सर पर हाथ रख बोला," सौभाग्यवती भवः। उठ ना तहार जगह पैर में ना, हमार लांड पर बा।"
बीना उसकी ओर देख मुस्कुराई और बोली," हाँ, रउवा सच कहेनि, औरत के असली जगह लांड ही होखेला। अब बियाह हो गइल त सुहागरात मनाबे के चाही।"
राजू," हाँ, जरूर लेकिन अभी एगो काम बाकी बा।"
बीना," उ का?
राजू ने उसे उठने को कहा और बीना खड़ी हो गयी। फिर राजू," आपन माई के आशीर्वाद लेबे के बा बियाह के बाद।" ऐसा बोल उसने बीना के पैर छुए और बीना ने उसे तुरंत उठा दिया और बोला," न पति के आपन पत्नी के पैर न छुए के चाही।"
राजू," पत्नी त तू बाद में, पहिले त माई बारू। आशीर्वाद त लेब।"
बीना की आंखों में खुशी के आंसू आ गए उसकी ओर देख बोली," जुग जुग जिय।" थोड़ा रुक वो बोली," अब चलि पत्नी के साथ सुहागरात के आनंद ली।"
राजू ने बीना को अपनी गोद में उठा लिया और बोला," बीना हम चाहत बानि कि तहार संग हमार हरेक रात सुहागरात जइसन बीते।" बीना बोली," हाँ, तहार लौड़ा हमार बूर पर अभीसे दस्तक देता।" राजू का तना हुआ लण्ड बीना की बूर की तह तक जाने के लिए फनफना रहा था। राजू और बीना ने कुछ देर एक दूसरे को देखा और दोनों एक दूसरे को आक्रमक तरीके से चूमने लगे। दोनों एक दूसरे के होठों पर होठ को मलते हुए थूक का आदान प्रदान कर रहे थे। एक दूसरे के मुख रस का स्वाद उन्हें किसी मिठाई की चासनी से भी बढ़कर लग रहा था। बीना राजू के गर्दन में अपनी बांहे डाले उसके हाथों पर अपने भारी नितम्भ टिकाए हुए थी। बीना का शरीर भारी था, पर राजू के मजबूत हाथ उसका वजन बिना दिक्कत के उठाये हुए थे। राजू बीना के नंगे चूतड़ को मसलते हुए उसके बूर
के मुहाने पर लण्ड का सुपाड़ा रगड़ रहा था। बीना के मुँह में राजू की जीभ बार बार घुस रही थी, जिसे वो अपनी जीभ से टकड़ा कर मज़े ले रही थी। बीना उसकी जीभ को लण्ड की तरह चूस रही थी। राजू ने बीना के मुंह में ढ़ेर सारा थूक उगल दिया। बीना ने उसे झटके से निगल लिया। राजू ने एक पल के लिए खुद को अलग किया, बीना मुँह खोले हुए थी। इतने में राजू ने निशाना लगा उसके खुले मुँह में थूका, बीना उसे भी निगल गयी। राजू बीना की गाँड़ पर चपत लगा बोला," रंडी साली, हमार थूक पिये में मज़ा आवेला का?
बीना," ह्हम्म, चुदायी में सब जायज बा। अब राउर जेतना भी गंदा हरकत बा, ओकरा साथ हमहु के देवे के पड़ी। अउर पति के जूठन त, पत्नी के खातिर पवित्र होखेला। हमके अउर पियाई न।"
राजू," सच में तहरा जइसन रंडी माई कहूँ न होई? ई ले आ.... थू
बीना के खुले मुँह में राजू ने फिर से थूका और बीना उसे पीती चली गयी। बीना मुँह खोलके राजू से कहती," अउर थूकी न हमार मुँह में। उम्ममम्म, हमके अच्छा बुझाता। आ..
बीना के मोती जैसे दांतों के बीच उसकी लपलपाती गुलाबी जुबान पर राजू ने थूक की बरसात कर दी। बीना मुँह में थूक भरती और निगल लेती। कुछ देर ये घिनौना मुख रस का खेल खेलकर राजू ने बीना को बिस्तर पर उतार दिया। बीना बिस्तर पर कुतिया की तरह चौपाया हो गयी। अपनी गाँड़ राजू की ओर घुमा हिला रही थी। राजू की ओर घूम बोली," कइसन बुझाता देखे में?
राजू ने बीना की ओर देखा और उसके बाल पकड़, गाँड़ पर दो चार थप्पड़ कस के मार बोला," साली तू सच में एक नंबर के छिनरी बारू। का गाँड़ बा, रंडी सबके भी अइसन गाँड़ न होखेला जइसन तहार ह, जउन रोज़ चुदाबेलि। साली बूर त अइसे बह रहल बा, जइसे पत्थर के फाटल दरार से पानी चुएला। सच में तहरा जइसन गरम माल के गरमी आसानी से शांत न होई।"
बीना बाल खींचे जाने और गाँड़ पर थप्पड़ बरसने की वजह से थोड़े दर्द में थी, पर वो उसकी उत्तेजना बढ़ा रही थी। वो बोली," आह... सच ई बदन के गर्मी शांत नइखे होत। अब त तहार भरोसा बा, तहार लांड के पूरा जोर हमार बूर में लगाबे के पड़ी।"
तभी राजू ने एक उंगली उसकी गाँड़ के छेद में घुसा बोला," हमार सांप त पाछे के बिल में भी घुसी अउर एकरा ढीला कर दी।"
बीना," उफ़्फ़फ़... उई... ई सांप खातिर त हमार शरीर के तीनों बिल खुलल बा। सांप जब बेर बेर बिल में आई जाई त पाछे के बिल ओकरा हिसाब से ढल जाई।"

बीना राजू के सामने लुटने को तैयार थी, और राजू अपनी माँ के जिस्म को नग्नता की चादर में लिपटे देख उत्साह में था।
बीना राजू की ओर घूम बोली," अइसे का देखत बारे?
राजू," इहे कि माई लंगटी होके अउर सुंदर लागेलु।"
बीना राजू का हाथ पकड़ बूर पर लगा बोली," माई के बूर के गर्मी देख। तप रहल बा।"
राजू ने उसे पीठ के बल लिटा दिया और खुद भी बिस्तर पर आ गया और बीना से बोला," हाथ से न बुझाता तनि चाटब तब पता चली।"
बीना मुस्कुराई और अपनी जांघ खोल दी। उसकी बेचैन बहती बूर अब राजू के सामने खुल गयी थी।

बीना की बूर क्या थी, जैसे गुलाब की कली को पानी से भिगो दिया गया हो। बूर की कोमल सांवली सी पत्तियां चिपकी हुई थी। बूर के पानी में लबरेज़, जिनके बीच से बूर का चिपचिपा पानी बह रहा हो। बीना की मोटे पाव के बीच उसकी बूर खिली खिली सी राजू को अपने रसास्वादन का निमंत्रण दे रही थी। बूर की पतली दरार और उनके इर्द गिर्द छोटे छोटे बूर के बाल उसकी सुंदरता बढ़ा रहे थे। राजू ने बूर को छू बोला," उफ़्फ़फ़ इहे खातिर त लोक के लोक से मार हो जाता। ई बूर पर अब हमार अधिकार बा। ई देखे में एतना नशीला बा, त जाने चखे में केतना नशा दी।"
बीना अपनी बूर को ओर इशारा करते हुए बोली," आवा न राजा, चिख के देख हमार बूर। बूर के पानी रोटी पर दिहले रहनि, अब सीधा बूर से पीके देखअ।"
राजू उसके टांगों के बीच लेट गया और अपनी माँ की बूर से उठती मादक गंध सूंघने लगा। बीना की यौनेच्छा की तीव्रता उसकी बूर से चूती पानी की तेज रासायनिक गंध में पता चल रही थी। तभी राजू ने बीना की बूर पर अपने होठ सटा दिए और उसे चूमने लगा। राजू की गर्म जुबान बूर से लगते ही बीना के मुंह से उफ्फ और आह की बौछार होने लगी। उसके हाथ अपने बेटे के सर पर चले गए जिससे वो उसे बूर की ओर दबाव बना रही थी। बीना एक हाथ से अपनी फूली हुई चूचियों को दबा रही थी। अगर इस वक़्त दुनिया भी पलट जाती तो शायद ही राजू वहां से उठता। तपती बूर का रसास्वादन इतना मजेदार था कि राजू की लपलपाती जीभ एक बूंद भी छोड़ने को तैयार नहीं थी। बीना अपनी गाँड़ उछाल उछाल के बूर को राजू के मुंह पर रगड़ रही थी। बीना कामाग्नि में जलती हुई बोली," उफ़्फ़फ़ मादरचोद, पी लअ कुल रस माई के बूर के। हे भगवान, अइसन बुझाता कउनु रंडी घुस गईल बा देह में, एतना बूर में चुनचुनि हो रहल बा। तहार जीभ जब लगेला त सुकून मिल रहल बा। हाय.... उम्म.. कहां रहल ह राजा एतना दिन, आपन रंडी माई के छोड़ के।"
राजू उसकी गंदी बातों में मस्त, उसकी बूर की अंदरूनी गुलाबी त्वचा को जीभ से कुरेदने लगा। बीना के बूर से उठती, बीना की जवानी के रस के साथ सम्मिलित पेशाब और पसीने की रासायनिक गंध राजू को आक्रामक बनाने लगे। राजू ने बीना की बूर को फैलाके उसकी अंदरूनी गुलाबी हिस्से पर थूका और पूरे बूर पर मल दिया। बूर अब बेहद चिपचिपी और गीली हो गयी थी। राजू ने उंगली से बूर के दाने को छेड़ते हुए, पूरा थूक बूर पर मल दिया। बीना की सांवली बूर अब और भी आकर्षक लग रही थी। राजू अब पूरी बूर के चीरे को अपनी जीभ से तेज़ी से छुड़ी की तरह हिला रहा था। वो कई बार बूर को पूरी तरह मुँह में रख चूसने लगता था, ऐसा करते हुए उसने बीना की बूर के आसपास काट भी लिया था। बीना को चुदायी की तड़प में उसमें भी सुकून मिल रहा था। अब राजू की जीभ बीना के बूर के छेद में घुस उसका मुआयना करने लगी। बीना की बूर को उसने जीभ से ही चोदना शुरू कर दिया था। बीना मचल उठी, बहुत दिनों से किसी मर्द ने छेड़ा जो नहीं था। राजू का लण्ड भी तन चुका था। बीना भी अब बेहद गर्म हो चुकी थी।
बीना तभी बोली," आह..बेटा खाली बुरिया चुसबअ का। एतना देर से हमार बूर के रस पी रहल बारू। अब लांड डारके आपन माई के बूर चोदअ।"

राजू," बड़ा ओगताईल बारू, चुदाबे खातिर।"

बीना," हाँ, ओगताईल त बानि, ई बूर बड़ा परेशान बिया लांड लेबे खातिर। आबअ न राजा ई पियासल बूर में लांड घुसा दअ।"

राजू ने अपना लण्ड अपनी माँ बीना के बूर पर रगड़ते हुए बोला," लांड बूर में ढुकि त तहार बेटा तहार भतार हो जाई।"

बीना," भतार न माँ के चोदेवाला मादरचोद हो जइबू। हम जनम त देनी ह बेटा के, लेकिन अब उ हमहि के चोदके मादरचोद बनि। आह...आ.आ..." राजू ने बीना की बूर में लण्ड घुसा दिया और उसकी चुच्चियों को कसके मसलते हुए बोला," जब तू हमके मादरचोद कहेलु, उफ़्फ़फ़ मज़ा आ जाता। आपन माई के बूर में लांड घुसाबे में जउन मज़ा बा उ केहू में नइखे। ई व्यभिचार के शिखर बा, जब एगो बेटा, बाप के बिस्तर पर माई के संग चुदाई करेला।"

राजू ने बीना को अपना लण्ड दिखा बोला," घुसाई तहरा बूर में माई।"
बीना," पूछत काहे बारे, घुसावा न भीतरी अउर पेलअ हमके।"
राजू ने बीना से बोला," का चाही तहरा बोल?
बीना बूर को छेड़ते हुए बेहद मादक अंदाज़ में बोली," लांड चाही बेटा के।"
राजू ने अपना लण्ड उसके सामने लहराते हुए बोला," सोच ल, ई जल्दी शांत न होई।"
बीना," जेतना देर मन करे उतना देर चोदिहआ, ई बूर भी शांत जल्दी न होई।"
राजू ने अपनी तड़पती हुई माँ को तड़पाते हुए कहा," लांड त सुखल बा। एकरा गीला के करि?"
बीना उसका इशारा समझ गयी। राजू घुटनों पर बैठा था, बीना उसके सामने भूखी कुतिया की तरह चौपाया हो गयी और बोली," तहार ई कुतिया लांड के गीला कर दी।"
राजू ने उसके बाल को पकड़ा और चूतड़ों पर दो थप्पड़ मार बोला," लांड के हाथ नइखे लगाबे के, खाली मुँह के इस्तेमाल कर रंडी साली।"
बीना किसी कुतिया की ही तरह जीभ बाहर निकाल कुतिया की तरह कूं..कूं.. कर गाँड़ हिलाई। राजू को ये अदा बहुत पसंद आई। राजू ने बोला," वाह मोर कुतिया तू त सच में कुतिया बन गईलु।"
बीना ने गाँड़ हिलाई और उसके लण्ड को चाटने लगी। बीना ने लण्ड को अपनी जीभ से खूब चाटा। लण्ड के सुपाडे से लेकर राजू के झूलते हुए आंड़ तक। बीना एक अच्छी लण्डखोर औरत की तरह अपने मुंह की कलाबाजी दिखा रही थी। राजू का विशालकाय लण्ड आधा मुँह में लिए हुए, वो किसी ब्लू फिल्म की हीरोइन लग रही थी। उसके मुँह से थूक और लार चू रहा था। बीना मुँह के लगभग हर हिस्से में लण्ड को छुआ रही थी। इसी बीच राजू ने मुँह से लण्ड निकाल उसके खुले मुँह में थूका और फिर वो उसे पी गयी। बीना उसकी ओर मुंह खोल बोली," आह..आ..अउर द । अउर थूकअ, बड़ा बढ़िया लागल बा।" राजू ने उसके मुँह पर एक के बाद एक के बाद एक, चार पांच बार थूका। बीना हर थूक को लेते हुए सिसिया उठती। राजू अपने लण्ड से उसके पूरे चेहरे पर थूक फैलाने लगा। बीना हंसते हुए इसका मज़ा ले रही थी। राजू ने बीना के गोरे मुखड़े को थूक से चिकना कर, उसका श्रृंगार कर रहा था। बीना अभी भी उसके लण्ड को मुंह से पकड़ने में लगी थी। पर राजू उसके कोमल गाल, माथे, आंखों पर अपने लण्ड की ब्रश से पेंटिंग कर रहा था। कुछ देर बाद राजू ने फिरसे बीना को लण्ड दे दिया। बीना लण्ड चूसते हुए गाँड़ हिला रही थी। राजू उसकी गाँड़ को सहलाते हुए बोला," लण्ड अब तैयार बा रानी, तहार बूर में जाय खातिर। चल ई पिछवाड़ा हमरा तरफ घुमावा।"
बीना मुँह से लण्ड निकाल घूमके बोली," असही कुतिया बनल रही न?
राजू उसकी बूर की दरार में उंगली छेड़ते हुए बोला," हां, तू असही मस्त लागत बारू?" राजू ने उसकी गाँड़ पर एक थप्पड़ मार बोला।
बीना अपने चूतड़ को सहलाते हुए बोली," उफ्फ गाँड़ लाल हो जाई अइसे में, एतना कसके मारबू त। लेकिन थप्पड़ खाए में मज़ा भी आ रहल बा।"
राजू ने बीना की गाँड़ पर दो चार चपत और लगा बोला," एकर आदत लगा ले। बीना अब लांड घुसा दी।"
बीना पीछे सर घुमा बोली," जल्दी से ढुका द।" उसकी आवाज़ में कामेच्छा पूर्ति हेतु दया की याचना झलक रही थी। बूर गीली थी और लण्ड तैयार था। राजू ने लण्ड को पहले बीना की बूर के मुंहाने पर रगड़ा। बीना बेचैन हो उठी और बोली," घुसाबा न रे कुत्ता मादरचोद।" इतने में राजू ने लण्ड पेल दिया। बीना की बूर में लण्ड गर्म चाकू की तरह मक्खन में समा गया, बीना की कामोन्माद से भरी चीख निकल गयी। बीना की बूर में लण्ड अंदर तक समा चुका था। राजू लण्ड बड़े आराम से अंदर बाहर कर रहा था।

बीना बहुत दिन बाद लण्ड घुसने से इतने सुकून में थी कि कुछ पलों के लिए वो सिसयाते हुए बस बूर में लण्ड के अंदर बाहर होने का आनंद ले रही थी। राजू ने एक जोर का धक्का दिया तो वो वास्तविकता में लौटी। राजू ने उसकी चुच्ची के चुचकों को दबाते हुए बोला," लागतआ तहरा लांड के बहुत इंतज़ार रहल ह।"

बीना," तू सोच भी न सकेलु उतना रहल। पेलअ, चोदअ अउर ठोकअ जेतना मन करे राजा। बूर त एतना गीला बा कि बिस्तर पर लांड पर से चू रहल बा। बहुत दिन हम संस्कारी अउर पवित्र औरत बनके रहनि ह। जबकि हम बहुत कामुक औरत बानि। हरदम अब दिमाग में लांड ही चलेला। ई उमर में अउर चुदास हो गइल बानि। चुदाई अउर लांड के भूख अउर पियास अब बर्दाश्त न होता। तू हमके आज़ाद कर दिहलु, अब खाली चुदायी के चाहत बा। ई चुदाई जब बेटा करे त अउर मजेदार हो जाई। उफ़्फ़फ़ मादरचोद कहीं के, माई के बूर चोदे में मज़ा आ रहल बा न?

राजू," पूछ मत साली। तहार बूर में लांड घुसाबे में एतना मज़ा बा कि जवाब नइखे। जब तू मादरचोद कहेलु त अउर मज़ा आवेला। मादरचोद बनके बहुत सुकून मिल रहल ह।"

बीना," मादरचोद राजू तू बहुत हरामी बारू। आपन विधवा माई के मांग में सिंदूर भरके ओकरा आपन सुहागन बना देलु। सुहागन से ज़्यादा त रखैल बना लेलु।"

राजू," तू खुद हमरा संग चुदाबे खातिर पगलाइल रहलु रंडी साली। आपन बूर के पानी रोटी में लगाके भेजले रहलु। कउन संस्कारी औरत अइसन करेलि, ई काम त छिनरी सबके ही होखेला। साली एक नंबर के चुदक्कड़ रंडी बारू तू।"

बीना," आह... आपन माई के रंडी बोले में तहरा मज़ा आवेला का। माई के त उहे बेटा गारी देवेला जउन माई के बूर पेलेला। राजू बेटा तू मादरचोद अउर हम रंडी का जोड़ी बा। लौड़ा से आज बूर के फाड़ दअ। इश श....ह।"

राजू उसकी आँखों में आंख डाल बोला," उफ़्फ़फ़ अइसन शानदार बूर के जवाब नइखे। अइसन बूर के त रोज़ चोदे के चाही। तहरा अब रंडी बनाके रोज़ चोदब माई।" ऐसा बोल राजू ने बीना के चूचियों को कसके दबा दिया।"
इसके बाद उसने बीना को पीठ के बल लिटा लिया और उसकी टांगों के बीच आकर बूर में दुबारा लण्ड पेल दिया।
बीना कमर उछाल राजू के धक्कों से तालमेल बिठा रही थी। राजू उसे चोदते हुए देख रहा था, वहीं बीना भी उसके गले में हाथ डाल, उसे निर्लज्ज हो निहार रही थी। बीना के पैर हवा में फैले हुए राजू की थापों पर हिल रहे थे। न जाने कितनी देर तक, राजू बीना को ऐसे ही चोदता रहा। आखिर में बीना झड़ने लगी। वो किकयाते हुए बूर से तेज़ पानी का फव्वारा छोड़ बैठी। राजू उसे पेलता जा रहा था, जब उसे बीना के बूर से बहते झड़ने का एहसास हुआ तो वो नीचे जाकर उसमें अपना चेहरा भिगो लिया। बीना के बूर के दाने को छेड़ते हुए वो महत्तम पानी निकालना चाहता था। बिस्तर गीला हो उठा, बीना ने इतना पानी गिराया। बीना की सांसें तेज़ चल रही थी। तभी राजू भी ने लण्ड वापिस उसकी बूर में घुसा, जोर से चोदने लगा। बीना थोड़ी देर ऐसे ही लेटी रही। राजू ने उसे पांच से दस मिनट और चोदा, फिर लण्ड निकाल बीना को बैठने को कहा," इँहा आ , उठके बईठ।" बीना आज्ञाकारी पत्नी की भांति उठ घुटनों पर बैठी और उसके आंड़ को चूमते हुए बोली," मलाई गिराबे का?
राजू," तहरा चाही मलाई न रानी, न चाही त असही गिरा देब।"
बीना तुरंत बोली," चाही न लांड के मलाई। हमके ई मलाई बहुत पसंद बा। ई लगाबे से चेहरा खिलल खिलल रहेला। हम लालची बानि ई मामला में, पियब भी अउर लगाएब भी। "
राजू," अभी तहरा ढेर मलाई मिली, हमार लांड से एतना मूठ गिरी, कि तू पी भी लेबु अउर तहार चेहरा के फेसिअल भी हो जाई।
बीना," त गिराबअ न राजा आपन ताज़ा ताज़ा गाढ़ा मूठ, जउन के हर बूंद पर हमार नाम लिखल बा। ई पियासल रंडी के एकर औकात दिखा द। हम इहे खातिर पैदा भईल बानि। तहार मूठ के पिये खातिर। लांड से जब चुई त तहार ई रंडी माई के पीके सुकून मिली।"
बीना राजू को उकसा रही थी। राजू के आंडों में खलबली शुरू हो गयी और लण्ड से एक के बाद एक सफेद गाढ़ा मूठ, मुँह खुली बीना के चेहरे और मुंह पर बरसने लगी। राजू आंहे भरते हुए मूठ छोड़ रहा था और बीना मुस्कुराते हुए उस गुनगुने चिपचिपे वीर्य को अपने चेहरे पर बरसते हुए महसूस कर रही थी। थोड़ी देर में उसका चेहरा राजू के वीर्य से सन गया। राजू ने आखरी बूंद तक बीना के मुंह में गिराया। बीना मुस्कुराते हुए अपने मुंह में समाए वीर्य को स्वाद लेते हुए चट कर गयी। राजू उसे देख खुश था, उसने बीना के सर को सहलाते हुए बोला," भुखल कुतिया पियासल रंडी।"

बीना," राजू राजा जी, हम सुंदर लागत बानि न ! तहार वीर्य के गाढ़ा लेप आपन मुँह पर लगाके। बोली न।"
राजू," सच तू सुंदर लागत बारू। अब तू अउर गोर हो जइबू। रोज़ हमार वीर्य आपन चेहरा पर लगाबा।"
बीना," सी...उफ्फ तहार वीर्य पिये में भी मजेदार बा। हमके त मने न भरेला। एतना गाढ़ा, एतना मोटा मस्त मलाई जइसन लागेला। मन करेला जेतना मिल जायीं उतना पी ली।" तभी बीना को जोर से मूत आयी। उसने राजू से कहा," पेशाब लग गईल, रुक मूत के आवत बानि।"
राजू ने उसे अपनी बांहों में पकड़ लिया और उसके बूर को दबोच बोला," कहीं जाय के जरूरी नइखे, तहरा इंहे ई बिस्तर पर मूते के बा।"
बीना," राजू, पर पूरा बिस्तर पेशाब से गीला हो जायीं।"
राजू," हम इहे त चाहत बानि। ई बिस्तर पर तहार मूत के गंध रहे के चाही। तू बिस्तर पर खड़ा होके, हमके आपन पेशाब से नहा दे।"
बीना खड़ी हो गयी और राजू घुटने के बल बैठ उसकी बूर के ठीक नीचे बैठ गया। बीना ने एक पैर राजू के कंधे पर रख दिया। राजू मुँह खोले अपनी माँ की बूर से खाड़े पानी की पतली धार का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा था। बीना अपने हाथों से बूर फैला, उसकी आँखों में देख बोली," सच हमरा जइसन निर्लज्ज माई न होई, अउर तहरा जइसन हरामी बेटा। पहिले त बिस्तर पर बेटा चोद दिहलस, अब हमके आपन आदेश दे मुतवा रहल बा।" बीना की बूर से मूत की धारा सीटी की आवाज़ पर बह निकली और राजू उसे पीता चला गया। एक तरफ बीना को मूतने से राहत मिल रही थी तो दूसरी तरफ राजू को उसका मूत पीने से। राजू को पीले खाड़े पानी का स्वाद किसी अमृत से कम नहीं लग रहा था। बीना की बूर से छुल छुल कर बहती मूत की धार उसकी जांघों को भी गीला कर रही थी। राजू ने बीना की बूर को ही मुंह में रख लिया और मूत पीने लगा। बीना उसके बाल सहला रही थी। अगर किसी शिल्पकार को व्यभिचार की सांकेतिक मूर्ति बनानी है, तो ये वो मुद्रा थी, जिसमें माँ और बेटा व्यभिचार के कुकृत्य में शामिल हैं। जहां माँ अपने बेटे को बूर से मूत पिला रही हो। कुछ देर बाद बीना का मूत्राशय खाली हुआ तो, वो राजू के संग बिस्तर पर लेट गयी। राजू अपनी नंगी मां को बांहों में ले उसकी पीठ सहला रहा था। तभी राजू ने बीना से बोला," तनि सलाई ले आ।"
बीना," काहे?
राजू ने सिगरेट दिखा बोला," ई सुलगाबे खातिर।"
बीना उठी और गाँड़ मटकाते हुए सलाई रैख से ले आई। राजू ने सिगरेट जलाई और बीना को सीने से लगा सिगरेट पीने लगा। बीना उसकी ओर अभी भी कामुकता से देख रही थी।

वो बीना को अपनी बांहों में लिए सिगरेट का धुंआ छोड़ रहा था। तभी बीना उसकी जलती सिगरेट होठों से अलग कर दी।
राजू," का भईल माई।"
बीना," ए राजा, गुस्सा मत हो। देख देख आपन सामने। तहार माई न हम एगो कामुक स्त्री बिया। हम का चाहेनि? एगो औरत एगो मरद के सामने लंगटी होके का करे चाहेलि।
राजू," माई ई सिगरेट अउर दारू के नशा हमके शहर में लग गईल। काम के टेंशन में पियत रहनि।"
बीना," ई पिये से टेंशन दूर होता का?
राजू सिगरेट का धुँवा छोड़ बोला," हां, तनि देर खातिर। अच्छा तू ई सिगरेट पी।" राजू बीना के होठों के पास सिगरेट ला उसे खींचने का इशारा किया। बीना उसकी ओर देख समझ गयी कि उसे ये करना ही होगा। उसने सिगरेट का लंबा कश ले धुंआ फेंक दिया।

राजू उसे सिगरेट पीता देख हैरान हो गया। राजू बीना को बांहों में भर बिस्तर पर लेट गया। बीना अभी भी सिगरेट पी रही थी।
राजू," बहुत सेक्सी लग रहल बारू।"
बीना," ई सिगरेट में का नशा रही, जउन औरत के जिस्म में होखेला। सिगरेट के नशा छोड़, औरत के नशा कर। आपन माई के बदन के नशा कर। सच एतना मस्त नशा होई, कि निकले न चाहबु। सब टेंशन दूर हो जाइ।"
राजू," अच्छा अइसन का बात बा औरत में?

बीना," सिगरेट के नशा त तुरत खतम हो जाई, पर एगो लंगटी औरत के नशा, ओकरा चोदे के ललक शांत न होई। तहार लांड हमेशा हमार बूर ही खोजी। मन होई की सारा दिन इहे बूर में लांड घुसाके पड़ल रही।"
राजू," का करि माई, काम ही अइसन रहल ग़ैरकानूनी काम के अंजाम देबे में टेंशन होता।"
बीना सिगरेट का कश लगा बोली," हम जानत बानि, लेकिन तू आपन जान काहे जोखिम में डारत रहलअ। ई सब के चक्कर में तहरा कुछ हो जाई त हमके कउन सम्हारि।"

राजू," बीना, मोर जानेमन आज ई घर बचल बा उ काम से ही। न त घर, खेत सब बिक गईल रहित। हम अउर तू सड़क पर आ गईल रहित।" राजू ने सिगरेट ले एक कश लगाया।

बीना," हम जानत बानि, ई घर, हम अउर गुड्डी सदा तहार एहसान मानि लेकिन, जब तू एतना पइसा कमात रहलु त आपन बाप के काहे न बतेलु?

राजू," बता के का हो जाइत, उ हमके उ काम छुड़वा देत रहलन। इँहा सवाल ई घर खातिर रहल, एहिसे हम चुपचाप काम करत रहनि। अब ई घर हमार कब्ज़ा में बा।

बीना," अउर ई घर के औरत भी तहार कब्ज़ा में बा।" ऐसा बोल बीना ने सिगरेट फेंक राजू को अपने उपर खींच लिया और एक गहरे चुम्बन में संलिप्त कर लिया।
राजू ने बीना की आंखों में देख बोला," समझ में नइखे आवत औरत हमार कब्ज़ा में बिया कि हम औरत के कब्ज़ा में।"
बीना मुस्कुरा के बोली," का फरक पड़ेला, खरबूजा पर चक्कू गिरे या चक्कू खरबूजा पर, कटेला त खरबूजे न।"
राजू," लागत बा तू हमके निचोड़ लेबु रानी।"
बीना," औरत के काम बा, मरद के निचोड़े के। सारा रात इहे काम होई। अउर अभी त रात बाकी बा, काम बाकी बा।"
एक विधवा मां अपने बेटे को पिता की मृत्यु पर उसके पगड़ी का सही हक़ दे रही थी। तेरहवीं की रात अपने पूरे शबाब में चढ़ने को तैयार थी।

हमने तो पूरा भाग एक साँस में पढ़ डाला… दिल की धड़कन इतनी तेज हो गई थी कि लगा अभी छाती फट जाएगी!
लेखक जी, आपने बीना को इतना जीवंत, इतना सशक्त और इतना कामुक बना दिया है कि पढ़ते-पढ़ते खुद को उसकी जगह महसूस करने लगी। जिस तरह उसने अपनी वासना को स्वीकार किया, अपनी भूख को बिना शर्म के अपनाया, वो सीन तो सीधे दिल में उतर गया। राजू के साथ वो सारी रात… उफ़्फ़… कितनी खूबसूरत तरीके से आपने हर एहसास को लिखा है। आँख बंद करके भी सब साफ-साफ दिख रहा था। सच में कमाल कर दिया आपने! 💦❤️

बस एक छोटी-सी गुजारिश है, बहुत प्यार से कह रही हूँ…
घर की औरतें चाहे जितनी भी वासना में डूबी हों, चाहे कितना भी बेशर्म हो जाएँ, लेकिन “रंडी”, “छिनार”, “कुतिया” जैसे शब्द जब माँ और बहन के लिए इस्तेमाल होते हैं तो दिल को चुभते हैं। वो भी जब प्यार और समर्पण की बात हो रही हो।
उसकी जगह आप कुछ और शब्द इस्तेमाल कर सकते हैं ना? जैसे
- “तेरी प्यासी”, “तेरी दीवानी”, “तेरी गुलाम”, “तेरी रखैल”, “तेरी सुहागन”, “तेरी जोगन”, “तेरी भूखी”, “तेरी मदमस्त”…
ऐसे शब्दों से भी तो उतनी ही गर्मी आती है, बल्कि और ज्यादा प्यार और कब्ज़े का एहसास होता है। माँ और बहन का रिश्ता जब वासना में बदलता है, तो उसमें एक अजीब-सी पवित्रता भी होती है… उस पवित्रता को ये गालियाँ थोड़ी चोट पहुँचाती हैं।

बाकी आपका लिखा कमाल का है, अगला भाग का तो इंतज़ार बेकरारी से है…
प्लीज़ जल्दी लाइए, और थोड़ा-सा ध्यान बस इसी बात का रखिएगा।
बहुत-बहुत प्यार और ढेर सारी आग आपकी कलम में हमेशा बनी रहे ♡

आपकी प्यासी पाठिका
 
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