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Premkumar65

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Update 23​



सुंदरी ने परम के साथ किरण की चुदाई देखी और उसने मुनीम और विनोद को इस युवा तंग योनि की पेशकश करने के बारे में सोचा।

“दूसरो से चुदवायेगी?” सुंदरी ने पूछा।।"परम जैसा ही मस्त कर देगा।"

“मैं तो तैयार हूं,लेकिन बदनामी नहीं होनी चाहिए। भरोसेमंद लंड होना चाहिए। अगर अच्छा और भरोसे का लंड होगा तो गांड भी मरवा लुंगी।”

“चिंता मत कर,तेरी शादी खूब धूम-धाम से होगी,तब तक अलग-अलग लंड का मजा ले।” सुंदरी ने किरण को दोपहर 11 बजे अपने घर आने को कहा।

दोनों ने चूमा, गले लगाया और प्यार किया।
फनलवर निर्मित

“वाह क्या सीन है!!!” एक चुदास दूसरी को चुदासिपन सिखा रही है।”

बड़ी भाभी को कमरे में देखकर किरण शरमा गई, फ्रॉक पहनी और कमरे से बाहर चली गई। छोटीबहू अंदर आई और उसने किरण को बाहर जाते देखा।

“ये किरण यहा क्या कर रही थी…?”

“देखती नहीं हो…इतना नया बेडशीट दिया था कि तुम और परम खूब प्यार से चुदाई करो।”

“हाँ वो तो हमने किया,परम ने मुझे मस्त कर दिया।” छोटी ने उत्तर दिया और परम की चुदाई से संतुष्टि व्यक्त की। उसने यह नहीं बताया कि ससुर ने भी उसे उसी बिस्तर पर चोदा था। और वही चुदी हुई चूत पर हमला कर के चले गए।

छोटी ने बिस्तर पर बहुत सारे डार्क मरून धब्बे देखे।

“लगता है किरण कुंवारी थी, तभी ये सारे दाग है! लगता है उसकी चूत ने अपनी शील गवा दी है। चलो अच्छा हुआ कभी तो शील टूटना ही था।” छोटी ने टिप्पणी की।

सुंदरी ने की पुष्टि। “हां, वो कुवारी तो थी लेकिन अब नहीं है, परम के लंड ने उसकी चूत को सही तरीके से चूत में तब्दील कर दी है। अब वह माल दुसरे लोडो के लिए उपलब्ध हो गई है। अपनी मस्ती से अब जो चाहे लंड को अपने अन्दर ले सकती है।“ सुंदरी ने छोटी की गांड की दरार पर हाथ रखते हुए कहा।

“छोटी, ये दोनो माँ बेटे पुरे गाव को बरबाद कर देंगे…।” बड़ी ने टिप्पणी की। और साथ-साथ सुंदरी के हाथ जो छोटी की गांड की दरार संभल रही थी उसे झटक कर अपनी गांड पर रखा।

“मैंने क्या किया…?” सुंदरी ने पूछा।

“और क्या! दीदी ठीक ही तो कहती है।” छोटी ने कहा।

'तेरा बेटा परम अपना मस्त लोडा देखा कर सब छोटी-बड़ी चुतो को चोद रहा है और मुझे तो उसने बिना पैसे का गुलाम बना लिया है।'

“और तू सुंदरी, सारे मर्दों को बरबाद कर ही रही है।” बड़ी ने कहा। “हमारे लिए कुछ तो छोड़ दे। कुछ अच्छे लंड हमारी चूत के लिए भो छोड़ दे। जो आराम से हमारी चूत में चरक सके।”
फनलवर की पेशकश

“जो भी मर्द आता है सुंदरी के सुन्दरता का वखान कर के उसे चोदने की तमन्ना लिए बैठता है।“

“जानती है छोटी, तेरे जेठ ने कहा है कि इस बार जैसे भी हो सुंदरी और महक को चोदेगा ही और मुझे अपने देवर से चुदवाने के लिए कह रहा है।”

“दीदी यहीं हाल तेरे देवर का भी है। वो हरामी भी बोल रहा था कि इस बार सुंदरी और पूनम को चोदेगा ही। साला अब भी पूनम से शादी करना चाहता है, और जानती हो, सुंदरी दीदी, वो मुझे बड़े भैया की रखैल बनाने के लिए कहा रहा है और मजबूर कर रहा है। कहता है की मुझे भी अब चुदासी की तरह हर लंड को शांत करने की नौकरी कर ही देनी चाहिए। बोलो अब मैं क्या करू?''

बड़ीबहू ने देखा नहीं कि छोटी ने सुंदरी को आंख मारी। उसे क्या पता था कि छोटी को ससुर ने पहले से ही अपनी रखैल बना रखा है। और अपने लंड को खाली कर ही देता है। शायद हो सकता है की वह ससुरजी के लंड से ही गर्भवती हो जाए। लेकिन वह मुनीमजी के लंड से परम जैसे को जन्म देना चाहती थी।


अरे तो इसमें क्या समस्या है…।” सुंदरी ने कहा। मैंने कोई गुनाह तो नहीं किया, अब मैं क्या बताऊ मैं हु ही ऐसी, भगवान् ने दिया मैंने लिया। और सुनो मैं वो कढाई में बना व्यंजन हूँ की हर कोई मेरे व्यंजन को खाना पसंद करता है।

और तुम लोग सिर्फ एक प्रेशर कुकर में बना व्यंजन हो जो गरम तो होता है पर टेस्ट कढाई में बना व्यंजन जैसा नहीं होता। समजी? सुंदरी ने आगे कहा;

"मेरा बेटा और पति तुम लोगों को चोद ही रहा है,मैं भी तेरे पति से चुदवा लुंगी,महेक और पूनम का मैं नहीं जानती। उनको शायद छोड़ देना चाहिए, कच्चे माल है और मुनीमजी और परम उन दोनों की चूत को संभल लेगा, वैसे भी विनोद है महक के लिए, उनकी शादी भी करा दूंगी, मुनीम से कह तो दिया है अब देखो क्या होता है! लेकिन अगर महक अपनी चूत दूसरो के लिए खोलती है तो मुझे कोई दिक्कत नहीं पर बहोत गरम माल है ऐसे-वैसे साधारण सा लंड का काम नहीं जो उसे अपने लंड की गुलाम बना सके, मुझे तो लगता है उसका बाप ही सही है उसके लिए, लेकिन साला कुछ करता नहीं।"

अरे....ऐसा कैसा महक का माल है जो हमसे अलग है? छोटी ने पूछा।


सुंदरी: “महक को तुम जानती नहीं, सिर्फ उसकी चूत की महक से ही ना जाने कितने लंड से पानी चरक पड़ता है। वह एक आग है। एक ऐसा व्यंजन है अगर वह जल्दी और मनचाहे अंदाज और लंड को मिल जाती है तो अच्छी डिश बन सकती है। बस यह समज लो की, जहाँ प्रेशर कुकर में खाना बहुत जल्दी पक जाता है वहीँ चूल्हे और कढाई में खाना लेट पकता है। मैं और तुम कढाई या प्रेशर कुकर है या नहीं पर महक की चूत का यही कारण है कि अगर असली स्वादु लोग यानी की चोदु लंड, धैर्य और मेहनत के साथ चूल्हे कढ़ाई में पके खाने को ही पसंद करते है। लेकिन एक बात तो है की दोनों बर्तन में गर्मी ज्यादा होती है और ठंडा जल्दी नहीं होता मगर असली स्वादु लोग धैर्य और मेहनत के साथ चूल्हे कढ़ाई में पके खाने को ही पसंद करते है। पर असली चूत का मजा एक अनुभवी चूत या भोस ही दे सकती है तभी तो असली स्वादु लोग धैर्य और मेहनत के साथ चूल्हे कढ़ाई में पके खाने को ही पसंद करते है। तभी तो आम भारतीय रसोई से चूल्हे कढ़ाई लगभग गायब हो गए है। क्यों की लंड अब रुक नहीं सकता। तेरे पति देवो में यह बात नहीं है की वह एक कढाई या फिर प्रेशर कुकर दोनों को ठंडा कर सके तभी तो तुम मुनीम जैसे लंड से प्रेम करती हो। और चाहती हो की सदा वह तुम्हारी चूत चोदते रहे।“ सुंदरी अपने पति को प्रमोट कर रही थी शायद।

“नहीं दीदी…। एक बार वो तुम्हें चोद लेगा तो फिर कभी हमें टच भी नहीं करेगा।” बड़ी ने कहा।

“हा दीदी ठीक कहती है।” छोटी ने कहा।

तभी किरण एक नौकरानी के साथ चाय लेकर लौटी। नौकरानी के जाने के बाद बड़ी बहू ने किरण से पूछा कि क्या परम ने अंदर चूत में ही वीर्यपात कर दिया है!

“हा भाभी…पहली बार मैंने पानी अंदर जाने दिया लेकिन बाद में दोनों बार पी गई।” उसने एक रंडी की तरह उत्तर दिया।

“कुतिया बच्चा रह जाएगा तो क्या करेगी! तेरी माँ चुद जायेगी अगर बच्चा रह गया तो! किस-किस को जवाब देती फिरेगी, अभी तो शादी है कुछ समय के बाद, परम तो चोद के निकल गया और अपना माल तेरी चूत में छोड़ गया, कोई उसे नहीं पूछेगा पर तेरी तो गांड मार देंगे, खास कर तेरे ससुराल वाले। चल एक पुरिया दे देती हूं। फिर जितना चाहे दिन भर चुदवा, जैसे चाहे अपनी चूत को फड़वा कोइ प्रोब्लेम नहीं होगी, कोई बच्चा नहीं रहेगा। लेकिन बता तो, तूने परम को पटाया कैसे! तू कल ही तो आई है! खिलाड़ी लग रही हो।”

फिर चाय पीते समय किरण ने अपनी भाभी और ड्राइवर की कहानी सुनाई जिससे उसके अंदर सेक्स जाग गया और परम को देखते ही उसने परम से ही अपनी वर्जिनिटी तुड़वाने का फैसला कर लिया।

“भाभी, वो तो मान ही नहीं रहा था, लेकिन आख़िर मैं भी लड़की ही हूं। अपना माल दिखाकर उसे पटा ही लिया। लेकिन भाभी,परम ने सच मुझे स्वर्ग में पहुंचा दिया था, मुझे तो लगता है की इस से अच्चा स्वर्ग होता नहीं होगा। क्या गजब का लंड है। मालदार है।”

“चल तुझे अपने भैया से चुदवा कर अब नर्क में ले जाती हूँ। और हाँ पुडिया खा ले और चूत को खोल दे।" बड़ी बहू किरण को अपने कमरे में ले गई। पति अभी भी सो रहा था, शुक्र है उसने अपना शरीर ढक लिया था। उषा ने अलमारी से एक पैकेट निकाला और किरण को पानी के साथ एक गोली गटकने दी।

"अब जितना मन करे चुदवा, कोई बच्चा नहीं रहेगा। लकिन याद रहे कल फिर से ले लेना जब भी तेरी चूत में लंड का माल पड़े, यह गोली ले लेना, और हां, लंड को अपने में ही खाली करना होता है तो गोली आवश्यक है, यहाँ कोइ भोसडिका निरोध इस्तेमाल नहीं करता, सब नंगे लंड लेके चूत और गांड मारते है। अब मजे से जितना चुदवा सकती है चुदवा। और सच कहू तो बिना आवरण ही चुदवाने में मजा है।"
फनलवर की रचना

उसने उसे पाँच खुराक दीं। "आ जा बड़े भैया के पास सो जा। उन्हें भी अपनी जवानी का रस पिला दे।" बड़ी ने किरण को भाई के साथ चुदने को कहा।

"अभी नहीं, पहले चूत को परम का लंड खूब खाने दो।"

किरण अभी खुश थी उसे सब के सामने अब चुदने का लायसंस मिल गया था। बड़ी ने उसका हाथ पकड़ कर अपने पति यानी की किरण के भाई के लंड पर रख दिया और बोली: “इसे भी खा ले, मजा आएगी वैसे यह लंड परम जैसा तो नहीं है, पर नया लंड तो है। अब मैं और तू, या फिर गाँव की सभी औरतो को एक तरीके से नए लंड की तलाश तो रहती ही है, एक नयापन जैसे मर्दों को होता है। हर नए लंड से अपनी कामोत्तेजना बढती है चाहे लंड छोटा, बड़ा,पतला, टेढ़ा, कोई भी हो। हर मर्द यही कहेगा की तेरे जैसा माल कोई नहीं है, वैसे ही हमें भी नए लंड का मजा लेने के लिए लंड कोई भी और कैसा भी हो चलता है बस अपने वीर्य से अपनी चूत, गांड या मुंह भर दे। समजी! यही दुनिया का दस्तूर है। और हां जब भी किसी छोटे या पतले लंड से चुदवाओ ऊउन्ह्ह, आआअह्हह्हह करना मत भूलना, और दमार लंड तो तुज से बुलवा ही लेगा।”

लेकिन किरण ने भाई के लंड पर थोडा हाथ फिराके छोड़ दिया,किरण कमरे से बाहर आई। वह बहुत खुश थी।




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आज के लिए बस यही तक


फिर मिलेंगे एक नए अपडेट के साथ रब तक के लिए फनलवर की तरफ से जय भारत
Sab ki sab auraten chudai ki deevani hain.
 

Premkumar65

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लेकिन किरण ने भाई के लंड पर थोडा हाथ फिराके छोड़ दिया,किरण कमरे से बाहर आई। वह बहुत खुश थी।


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अब आगे............


किरण के पास अब एक लायसंस था की वह दोनों बहु के सामने भी अपने पैर किसी लंड के आगे खोल सकती थी। पता नै उसे क्या अजीब सा आनंद मिल रहा था। खेर उसे भाई के लंड पर कोई रूचि नहीं थी। पर वह जानती थी की खुल के चुदवाना है तो भाई को थोडा मौक़ा देना पड़ेगा ताकि भाभी शांत रहे। और वह खुद ही किरण के पैरो को किसी के सामने फैलाने को कहे। क्या पता श्याद यह एक डील थी!!!!!!!!

अब यह परम कहाँ गया? चलो देखते है। फनलवर को उसके पीछे पड़े रहना पड़ता है कही मेरी जानकारी के बाहर कोई गुल ना खिला रहा हो।
फनलवर की पेशकश

जब वह कमरे से बाहर आया तो अभी भी अंधेरा था। उसके पास घड़ी नहीं थी। सुबह के करीब 6 बज रहे थे। उसने इधर-उधर देखा तो चारों तरफ औरतें और लड़कियाँ सो रही थीं, किसी की झांगे तो किसी की गांड तो किसी के बोबले साफ़ दिख रहे थे, सोने में कपड़ो का को प्रावधान नहीं दिख रहा था। वह अभी भी नींद में था। बाहरी मकान पर भी उसे आरामदायक जगह नहीं मिली। इसलिए उसने घर जाकर देर तक सोने का फैसला किया। वह लगभग शॉर्ट कट से भागते हुए घर पहुंच गया। उसने दरवाज़ा खटखटाया और कुछ देर खटखटाने के बाद पूनम ने दरवाज़ा खोला। उन्हें पूनम को नंगी देखकर कोई हैरानी नहीं हुई। उसने दरवाज़ा बंद कर दिया और परम को अपने साथ खींचने की कोशिश की,

“परम मेरे साथ तू सो जा,चूत प्यासी है तेरे लंड के लिए, थोडा मेरी चूत को पानी पिला दे। कल तेरे बाप ने भी नहीं चोदा।”

“नहीं रानी, अभी नहीं…। मैं बहुत थक गया हूँ…।” फिर भी परम ने उसकी चूत को थोडा दबाया और आगे चला।

छोटीबहू, सेठानी और किरण जैसी माल को चोदकर परम सच में बहुत थक गया था।

परम दूसरे कमरे में चला गया और माता-पिता के कमरे में उसने महक को नंगी सोती हुई देखा। पूनम के आस-पास होने के कारण, वह महक के साथ सोने नहीं गया और अपना कमरा खोला, जिसे लड़कियों ने कल रात बाहर से कुंडी लगा दी थी। उसने लाइट जलाई और देखा कि उसके पिता और सलोनी एक-दूसरे को पकड़े हुए नंगी सो रहे थे। सलौनी की चूत से अभी भी बाप का माल और खून दोनों ही टपक रहा था। परम को अपने पिता से जलन हुई।

“बेटीचोद साला, हर वक़्त नयी चूत को फाड़ देता है। जवान लोडो को यह मार ही देगा। कुछ बचाके रखनेवाला नहीं है। माँ ने अपने पति को बिगाड़ के रखा है। चूत की क्या हालत बना देता है! और एक सुंदरी है की ऐसे मस्त लोडे को छोड़ कर सेठजी जैसे बेकार लंड से खेलती रहती है।“ उसे फिर याद आया की वह भी तो नयी चूत चोदते रहता है। उसके चहरे पर एक हलकी सी मुस्कान आई।

“बाबूजी!” उसने मुनीम को थोडा हिलाया।
फनलवर की रचना

“हम्म....कौन?” मुनीम ने अपने हाथ को ऊपर उठाते हुए पूछा।

“बाबूजी मैं हूँ, परम।”

थोड़ी देर तो मुनीम कुछ नहीं बोला पर थोड़ी ही देर में उसके मस्तिष्क में परम की आवाज़ गरजी। “बाबूजी!”

बेबाक हो के मुनीम जागा, उसने देखा की सलौनी के हाथ उसकी छाती पर है, और उसके हाथ उसके बोब्लो को ढके हुए हैं। मुनीम ने थोडा निचे देखा तो अचरज हुआ, उसका अधमरा लंड सलौनी की झांगो के बिच फसा पाया। वह तुरत उसके लंड को पकड़ के बहार खिंचा और पलग पर बैठ गया।

परम ने फिर से उसकी बाप का पैर को थोडा हिलाया, उसने उन्हें हिलाया और बाहर जाने को कहा। “मुझे अब यहाँ सोना है।“

बाबूजी: “तू यहाँ इस वक़्त? तू तो सेठजी के घर ही रुकनेवाला था यहाँ क्यों आया?” उसने एक हाथ अपने लंड पर रखा और कहा।

“बाबूजी, मैं वही से आ रहा हूँ, मैं कल रात ठीक से सोया नहीं तो सोचा घर जाके आराम से सो जाऊ। लेकिन यहाँ तो सब कमरे में कोई ना कोई है तो मैंने सोचा आपको जगाऊ और मुझे सोने का मौक़ा मिले।“ उसने सलौनी की आधी दिख रही चूत पर ध्यान केन्द्रित करते हुए कहा।

“क्यों? क्या हुआ जो नींद नहीं आई?” मुनीम अभी भी नींद में लग रहा था क्यों की वह समज नहीं पाया की परम क्या बोला।

आखिर मुनीम भान में आया और समज गया की क्यों परम को नींद नहीं आई।

“हां,ठीक है, तुम यहाँ सो जाओ मैं बहार चला जाता हूँ।“ मुनीमजी ने एक नजर गहरी नींद में सोती हुई सलौनी की तरफ देखा और उसके शरीर पर नजर डाली। उसके बोबले पर काफी जगह मुनीम के निशान दिख रहे थे, निपल काफी सूजी हुई थी, जो उसके नार्मल आकर से काफी बढ़ गई थी। उस निपल को देख के कोई भी कहा सकता था की मुनीमजी ने क्या कांड किया है। उसकी चूत से निकला खून उसकी झांग पर थे साथ में उसके माल भी उसकी झांगो पर चमक कर अपनी हाजरी भरा रहे थे। किसी को भी पता चल सकता था की लडकी के साथ क्या हुआ है। उसकी चूत तो काफी सूज के पकोड़ा जैसी बनी हुई थी जो साफ़ दिखाई देती थी।

मुनीम को यह जानकर शर्मिंदगी हुई कि उसके बेटे ने उसे एक नंगी लड़की के साथ नंगा देख लिया। बिना कुछ कहे मुनीम बाहर चला गया। परम ने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। उसने अपने कपड़े उतारे और सलोनी के पास बैठ गया जो गहरी नींद में थी। उसने धीरे से उसे सीधा किया। उसकी चुची की जोड़ी सबसे छोटी थी जिसे उसने अब तक सहलाया। लेकिन उसकी निपल उसके स्तन के आकर पर गवाही दे रही थी की निपल को मुनीमजी ने काफी मेहनत कर दी है। काफी सूजी हुई थी और स्तनों के उभार से तुरंत ध्यान खिंच रही थी।

वास्तव में वह बहुत पतली कमर वाली और कम विकसित जांघों वाली सबसे पतली लड़की थी। उसने बालों वाली चूत को सहलाया और ऐसा करते समय उसका लंड टाइट हो गया। वह गुस्से में था कि उसके पिता ने इस लड़की को चोदा। वह इस लड़की पर ज्यादा गुस्सा था, बजाय इसके कि वह जवान लड़कों से चुदवाए, जैसे परम। लेकिन उसको एक पिता समान आदमी ने चोदा। चोदा तब तक तो ठीक था पर उसकी हालत ज्यादा ही ख़राब दिख ररही थी। वह उसके शरीर को देख रहा था।
फ्नलवर की लेखनी

सलौनी के बोबले पर पापा के निशानों को देख कर उसको ओर ज्यादा जलन महसूस हुई। उसने पाया की लगभग सभी जगह से उसके बाप ने अपनी छाप छोड़ रखी थी। लेकिन वह एक बात से प्रसन्न भी हुआ की उसका बाप उस से भी बड़ा चोदु है, साथ-साथ में जलन भी हुई की उसका सुपारा और उसके बाप का सुपारे में बहोत फर्क था, एक बार उसके बाप का लंड किसी चूत पर टकराया तो उसका भोसड़ा बनना तय ही था। और यहाँ तो एक नन्ही सी चूत का हिसाब लिया गया था, उसके बाप के लंड ने।

तभी सलौनी करवट बदल कर सीधी हो गई अब उसका शरीर और माल सब साफ़ दिखाई देता था। और उसी वक़्त एक लोंदा उसकी चूत से बहार आके चादर पर गिरा। जो की उसके खून और बाप के माल और सलौनी के खुद का माल का मिक्सचर था।

वह सोच रहा था की माल पतला तो है लेकिन चोदने के लायक भी है। उसके बाप ने खूब जम के उसे चोदा हुआ है। उसके शरीर को पकड़े बिना उसने चूत के होंठ खींचे!

और सलोनी चिल्लाई, “ओह्ह्ह्ह माआआ…मर गयी…। का....का अब रहने दो.....म........र जाउंगी....आ....प का लं...ड ब...हो...त बड़ा है। आ...प....ने भो...स बना दिया है।” सलौनी नींद में कुछ भी बोल रही थी। परम को शायद उसके शब्दों पर ध्यान नहीं था।

वैसे भी,एकदम सुजा हुआ माल को अगर कोई इस तरह बिना सूचित किये खींचे तो क्या होगा! सलौनी के हाथ तुरंत ही उसकी चूत पर चला गया जो परम की हरकत से उसे काफी दर्द महसूस हुआ था। वैसे भी वह काफी दर्द सह चुकी थी। और गहरी नींद में भो तो थी। उसकी चूत ठीक से मूत भी नहीं सकती ऐसी हालत हो गई थी। लेकिन परम ने देखा की उसके चेहरे पर एक सुकून था, भले वह ही नींद में थी।


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दोस्तों आज के लिए बस यही तक


फिर मिलेंगे एक नए अपडेट के साथ



तब तक के लिए फनलवर की ओर से जय भारत
Mast seal tod raha hai Munim. Mujhe bhi jalan ho rahi hai Munim se.
 

sunoanuj

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लेकिन किरण ने भाई के लंड पर थोडा हाथ फिराके छोड़ दिया,किरण कमरे से बाहर आई। वह बहुत खुश थी।


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अब आगे............


किरण के पास अब एक लायसंस था की वह दोनों बहु के सामने भी अपने पैर किसी लंड के आगे खोल सकती थी। पता नै उसे क्या अजीब सा आनंद मिल रहा था। खेर उसे भाई के लंड पर कोई रूचि नहीं थी। पर वह जानती थी की खुल के चुदवाना है तो भाई को थोडा मौक़ा देना पड़ेगा ताकि भाभी शांत रहे। और वह खुद ही किरण के पैरो को किसी के सामने फैलाने को कहे। क्या पता श्याद यह एक डील थी!!!!!!!!

अब यह परम कहाँ गया? चलो देखते है। फनलवर को उसके पीछे पड़े रहना पड़ता है कही मेरी जानकारी के बाहर कोई गुल ना खिला रहा हो।
फनलवर की पेशकश

जब वह कमरे से बाहर आया तो अभी भी अंधेरा था। उसके पास घड़ी नहीं थी। सुबह के करीब 6 बज रहे थे। उसने इधर-उधर देखा तो चारों तरफ औरतें और लड़कियाँ सो रही थीं, किसी की झांगे तो किसी की गांड तो किसी के बोबले साफ़ दिख रहे थे, सोने में कपड़ो का को प्रावधान नहीं दिख रहा था। वह अभी भी नींद में था। बाहरी मकान पर भी उसे आरामदायक जगह नहीं मिली। इसलिए उसने घर जाकर देर तक सोने का फैसला किया। वह लगभग शॉर्ट कट से भागते हुए घर पहुंच गया। उसने दरवाज़ा खटखटाया और कुछ देर खटखटाने के बाद पूनम ने दरवाज़ा खोला। उन्हें पूनम को नंगी देखकर कोई हैरानी नहीं हुई। उसने दरवाज़ा बंद कर दिया और परम को अपने साथ खींचने की कोशिश की,

“परम मेरे साथ तू सो जा,चूत प्यासी है तेरे लंड के लिए, थोडा मेरी चूत को पानी पिला दे। कल तेरे बाप ने भी नहीं चोदा।”

“नहीं रानी, अभी नहीं…। मैं बहुत थक गया हूँ…।” फिर भी परम ने उसकी चूत को थोडा दबाया और आगे चला।

छोटीबहू, सेठानी और किरण जैसी माल को चोदकर परम सच में बहुत थक गया था।

परम दूसरे कमरे में चला गया और माता-पिता के कमरे में उसने महक को नंगी सोती हुई देखा। पूनम के आस-पास होने के कारण, वह महक के साथ सोने नहीं गया और अपना कमरा खोला, जिसे लड़कियों ने कल रात बाहर से कुंडी लगा दी थी। उसने लाइट जलाई और देखा कि उसके पिता और सलोनी एक-दूसरे को पकड़े हुए नंगी सो रहे थे। सलौनी की चूत से अभी भी बाप का माल और खून दोनों ही टपक रहा था। परम को अपने पिता से जलन हुई।

“बेटीचोद साला, हर वक़्त नयी चूत को फाड़ देता है। जवान लोडो को यह मार ही देगा। कुछ बचाके रखनेवाला नहीं है। माँ ने अपने पति को बिगाड़ के रखा है। चूत की क्या हालत बना देता है! और एक सुंदरी है की ऐसे मस्त लोडे को छोड़ कर सेठजी जैसे बेकार लंड से खेलती रहती है।“ उसे फिर याद आया की वह भी तो नयी चूत चोदते रहता है। उसके चहरे पर एक हलकी सी मुस्कान आई।

“बाबूजी!” उसने मुनीम को थोडा हिलाया।
फनलवर की रचना

“हम्म....कौन?” मुनीम ने अपने हाथ को ऊपर उठाते हुए पूछा।

“बाबूजी मैं हूँ, परम।”

थोड़ी देर तो मुनीम कुछ नहीं बोला पर थोड़ी ही देर में उसके मस्तिष्क में परम की आवाज़ गरजी। “बाबूजी!”

बेबाक हो के मुनीम जागा, उसने देखा की सलौनी के हाथ उसकी छाती पर है, और उसके हाथ उसके बोब्लो को ढके हुए हैं। मुनीम ने थोडा निचे देखा तो अचरज हुआ, उसका अधमरा लंड सलौनी की झांगो के बिच फसा पाया। वह तुरत उसके लंड को पकड़ के बहार खिंचा और पलग पर बैठ गया।

परम ने फिर से उसकी बाप का पैर को थोडा हिलाया, उसने उन्हें हिलाया और बाहर जाने को कहा। “मुझे अब यहाँ सोना है।“

बाबूजी: “तू यहाँ इस वक़्त? तू तो सेठजी के घर ही रुकनेवाला था यहाँ क्यों आया?” उसने एक हाथ अपने लंड पर रखा और कहा।

“बाबूजी, मैं वही से आ रहा हूँ, मैं कल रात ठीक से सोया नहीं तो सोचा घर जाके आराम से सो जाऊ। लेकिन यहाँ तो सब कमरे में कोई ना कोई है तो मैंने सोचा आपको जगाऊ और मुझे सोने का मौक़ा मिले।“ उसने सलौनी की आधी दिख रही चूत पर ध्यान केन्द्रित करते हुए कहा।

“क्यों? क्या हुआ जो नींद नहीं आई?” मुनीम अभी भी नींद में लग रहा था क्यों की वह समज नहीं पाया की परम क्या बोला।

आखिर मुनीम भान में आया और समज गया की क्यों परम को नींद नहीं आई।

“हां,ठीक है, तुम यहाँ सो जाओ मैं बहार चला जाता हूँ।“ मुनीमजी ने एक नजर गहरी नींद में सोती हुई सलौनी की तरफ देखा और उसके शरीर पर नजर डाली। उसके बोबले पर काफी जगह मुनीम के निशान दिख रहे थे, निपल काफी सूजी हुई थी, जो उसके नार्मल आकर से काफी बढ़ गई थी। उस निपल को देख के कोई भी कहा सकता था की मुनीमजी ने क्या कांड किया है। उसकी चूत से निकला खून उसकी झांग पर थे साथ में उसके माल भी उसकी झांगो पर चमक कर अपनी हाजरी भरा रहे थे। किसी को भी पता चल सकता था की लडकी के साथ क्या हुआ है। उसकी चूत तो काफी सूज के पकोड़ा जैसी बनी हुई थी जो साफ़ दिखाई देती थी।

मुनीम को यह जानकर शर्मिंदगी हुई कि उसके बेटे ने उसे एक नंगी लड़की के साथ नंगा देख लिया। बिना कुछ कहे मुनीम बाहर चला गया। परम ने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। उसने अपने कपड़े उतारे और सलोनी के पास बैठ गया जो गहरी नींद में थी। उसने धीरे से उसे सीधा किया। उसकी चुची की जोड़ी सबसे छोटी थी जिसे उसने अब तक सहलाया। लेकिन उसकी निपल उसके स्तन के आकर पर गवाही दे रही थी की निपल को मुनीमजी ने काफी मेहनत कर दी है। काफी सूजी हुई थी और स्तनों के उभार से तुरंत ध्यान खिंच रही थी।

वास्तव में वह बहुत पतली कमर वाली और कम विकसित जांघों वाली सबसे पतली लड़की थी। उसने बालों वाली चूत को सहलाया और ऐसा करते समय उसका लंड टाइट हो गया। वह गुस्से में था कि उसके पिता ने इस लड़की को चोदा। वह इस लड़की पर ज्यादा गुस्सा था, बजाय इसके कि वह जवान लड़कों से चुदवाए, जैसे परम। लेकिन उसको एक पिता समान आदमी ने चोदा। चोदा तब तक तो ठीक था पर उसकी हालत ज्यादा ही ख़राब दिख ररही थी। वह उसके शरीर को देख रहा था।
फ्नलवर की लेखनी

सलौनी के बोबले पर पापा के निशानों को देख कर उसको ओर ज्यादा जलन महसूस हुई। उसने पाया की लगभग सभी जगह से उसके बाप ने अपनी छाप छोड़ रखी थी। लेकिन वह एक बात से प्रसन्न भी हुआ की उसका बाप उस से भी बड़ा चोदु है, साथ-साथ में जलन भी हुई की उसका सुपारा और उसके बाप का सुपारे में बहोत फर्क था, एक बार उसके बाप का लंड किसी चूत पर टकराया तो उसका भोसड़ा बनना तय ही था। और यहाँ तो एक नन्ही सी चूत का हिसाब लिया गया था, उसके बाप के लंड ने।

तभी सलौनी करवट बदल कर सीधी हो गई अब उसका शरीर और माल सब साफ़ दिखाई देता था। और उसी वक़्त एक लोंदा उसकी चूत से बहार आके चादर पर गिरा। जो की उसके खून और बाप के माल और सलौनी के खुद का माल का मिक्सचर था।

वह सोच रहा था की माल पतला तो है लेकिन चोदने के लायक भी है। उसके बाप ने खूब जम के उसे चोदा हुआ है। उसके शरीर को पकड़े बिना उसने चूत के होंठ खींचे!

और सलोनी चिल्लाई, “ओह्ह्ह्ह माआआ…मर गयी…। का....का अब रहने दो.....म........र जाउंगी....आ....प का लं...ड ब...हो...त बड़ा है। आ...प....ने भो...स बना दिया है।” सलौनी नींद में कुछ भी बोल रही थी। परम को शायद उसके शब्दों पर ध्यान नहीं था।

वैसे भी,एकदम सुजा हुआ माल को अगर कोई इस तरह बिना सूचित किये खींचे तो क्या होगा! सलौनी के हाथ तुरंत ही उसकी चूत पर चला गया जो परम की हरकत से उसे काफी दर्द महसूस हुआ था। वैसे भी वह काफी दर्द सह चुकी थी। और गहरी नींद में भो तो थी। उसकी चूत ठीक से मूत भी नहीं सकती ऐसी हालत हो गई थी। लेकिन परम ने देखा की उसके चेहरे पर एक सुकून था, भले वह ही नींद में थी।


******
दोस्तों आज के लिए बस यही तक


फिर मिलेंगे एक नए अपडेट के साथ



तब तक के लिए फनलवर की ओर से जय भारत
बहुत ही शानदार और बेहतरीन अपडेट है!
 

Iron Man

Try and fail. But never give up trying
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लेकिन किरण ने भाई के लंड पर थोडा हाथ फिराके छोड़ दिया,किरण कमरे से बाहर आई। वह बहुत खुश थी।


Xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx

अब आगे............


किरण के पास अब एक लायसंस था की वह दोनों बहु के सामने भी अपने पैर किसी लंड के आगे खोल सकती थी। पता नै उसे क्या अजीब सा आनंद मिल रहा था। खेर उसे भाई के लंड पर कोई रूचि नहीं थी। पर वह जानती थी की खुल के चुदवाना है तो भाई को थोडा मौक़ा देना पड़ेगा ताकि भाभी शांत रहे। और वह खुद ही किरण के पैरो को किसी के सामने फैलाने को कहे। क्या पता श्याद यह एक डील थी!!!!!!!!

अब यह परम कहाँ गया? चलो देखते है। फनलवर को उसके पीछे पड़े रहना पड़ता है कही मेरी जानकारी के बाहर कोई गुल ना खिला रहा हो।
फनलवर की पेशकश

जब वह कमरे से बाहर आया तो अभी भी अंधेरा था। उसके पास घड़ी नहीं थी। सुबह के करीब 6 बज रहे थे। उसने इधर-उधर देखा तो चारों तरफ औरतें और लड़कियाँ सो रही थीं, किसी की झांगे तो किसी की गांड तो किसी के बोबले साफ़ दिख रहे थे, सोने में कपड़ो का को प्रावधान नहीं दिख रहा था। वह अभी भी नींद में था। बाहरी मकान पर भी उसे आरामदायक जगह नहीं मिली। इसलिए उसने घर जाकर देर तक सोने का फैसला किया। वह लगभग शॉर्ट कट से भागते हुए घर पहुंच गया। उसने दरवाज़ा खटखटाया और कुछ देर खटखटाने के बाद पूनम ने दरवाज़ा खोला। उन्हें पूनम को नंगी देखकर कोई हैरानी नहीं हुई। उसने दरवाज़ा बंद कर दिया और परम को अपने साथ खींचने की कोशिश की,

“परम मेरे साथ तू सो जा,चूत प्यासी है तेरे लंड के लिए, थोडा मेरी चूत को पानी पिला दे। कल तेरे बाप ने भी नहीं चोदा।”

“नहीं रानी, अभी नहीं…। मैं बहुत थक गया हूँ…।” फिर भी परम ने उसकी चूत को थोडा दबाया और आगे चला।

छोटीबहू, सेठानी और किरण जैसी माल को चोदकर परम सच में बहुत थक गया था।

परम दूसरे कमरे में चला गया और माता-पिता के कमरे में उसने महक को नंगी सोती हुई देखा। पूनम के आस-पास होने के कारण, वह महक के साथ सोने नहीं गया और अपना कमरा खोला, जिसे लड़कियों ने कल रात बाहर से कुंडी लगा दी थी। उसने लाइट जलाई और देखा कि उसके पिता और सलोनी एक-दूसरे को पकड़े हुए नंगी सो रहे थे। सलौनी की चूत से अभी भी बाप का माल और खून दोनों ही टपक रहा था। परम को अपने पिता से जलन हुई।

“बेटीचोद साला, हर वक़्त नयी चूत को फाड़ देता है। जवान लोडो को यह मार ही देगा। कुछ बचाके रखनेवाला नहीं है। माँ ने अपने पति को बिगाड़ के रखा है। चूत की क्या हालत बना देता है! और एक सुंदरी है की ऐसे मस्त लोडे को छोड़ कर सेठजी जैसे बेकार लंड से खेलती रहती है।“ उसे फिर याद आया की वह भी तो नयी चूत चोदते रहता है। उसके चहरे पर एक हलकी सी मुस्कान आई।

“बाबूजी!” उसने मुनीम को थोडा हिलाया।
फनलवर की रचना

“हम्म....कौन?” मुनीम ने अपने हाथ को ऊपर उठाते हुए पूछा।

“बाबूजी मैं हूँ, परम।”

थोड़ी देर तो मुनीम कुछ नहीं बोला पर थोड़ी ही देर में उसके मस्तिष्क में परम की आवाज़ गरजी। “बाबूजी!”

बेबाक हो के मुनीम जागा, उसने देखा की सलौनी के हाथ उसकी छाती पर है, और उसके हाथ उसके बोब्लो को ढके हुए हैं। मुनीम ने थोडा निचे देखा तो अचरज हुआ, उसका अधमरा लंड सलौनी की झांगो के बिच फसा पाया। वह तुरत उसके लंड को पकड़ के बहार खिंचा और पलग पर बैठ गया।

परम ने फिर से उसकी बाप का पैर को थोडा हिलाया, उसने उन्हें हिलाया और बाहर जाने को कहा। “मुझे अब यहाँ सोना है।“

बाबूजी: “तू यहाँ इस वक़्त? तू तो सेठजी के घर ही रुकनेवाला था यहाँ क्यों आया?” उसने एक हाथ अपने लंड पर रखा और कहा।

“बाबूजी, मैं वही से आ रहा हूँ, मैं कल रात ठीक से सोया नहीं तो सोचा घर जाके आराम से सो जाऊ। लेकिन यहाँ तो सब कमरे में कोई ना कोई है तो मैंने सोचा आपको जगाऊ और मुझे सोने का मौक़ा मिले।“ उसने सलौनी की आधी दिख रही चूत पर ध्यान केन्द्रित करते हुए कहा।

“क्यों? क्या हुआ जो नींद नहीं आई?” मुनीम अभी भी नींद में लग रहा था क्यों की वह समज नहीं पाया की परम क्या बोला।

आखिर मुनीम भान में आया और समज गया की क्यों परम को नींद नहीं आई।

“हां,ठीक है, तुम यहाँ सो जाओ मैं बहार चला जाता हूँ।“ मुनीमजी ने एक नजर गहरी नींद में सोती हुई सलौनी की तरफ देखा और उसके शरीर पर नजर डाली। उसके बोबले पर काफी जगह मुनीम के निशान दिख रहे थे, निपल काफी सूजी हुई थी, जो उसके नार्मल आकर से काफी बढ़ गई थी। उस निपल को देख के कोई भी कहा सकता था की मुनीमजी ने क्या कांड किया है। उसकी चूत से निकला खून उसकी झांग पर थे साथ में उसके माल भी उसकी झांगो पर चमक कर अपनी हाजरी भरा रहे थे। किसी को भी पता चल सकता था की लडकी के साथ क्या हुआ है। उसकी चूत तो काफी सूज के पकोड़ा जैसी बनी हुई थी जो साफ़ दिखाई देती थी।

मुनीम को यह जानकर शर्मिंदगी हुई कि उसके बेटे ने उसे एक नंगी लड़की के साथ नंगा देख लिया। बिना कुछ कहे मुनीम बाहर चला गया। परम ने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। उसने अपने कपड़े उतारे और सलोनी के पास बैठ गया जो गहरी नींद में थी। उसने धीरे से उसे सीधा किया। उसकी चुची की जोड़ी सबसे छोटी थी जिसे उसने अब तक सहलाया। लेकिन उसकी निपल उसके स्तन के आकर पर गवाही दे रही थी की निपल को मुनीमजी ने काफी मेहनत कर दी है। काफी सूजी हुई थी और स्तनों के उभार से तुरंत ध्यान खिंच रही थी।

वास्तव में वह बहुत पतली कमर वाली और कम विकसित जांघों वाली सबसे पतली लड़की थी। उसने बालों वाली चूत को सहलाया और ऐसा करते समय उसका लंड टाइट हो गया। वह गुस्से में था कि उसके पिता ने इस लड़की को चोदा। वह इस लड़की पर ज्यादा गुस्सा था, बजाय इसके कि वह जवान लड़कों से चुदवाए, जैसे परम। लेकिन उसको एक पिता समान आदमी ने चोदा। चोदा तब तक तो ठीक था पर उसकी हालत ज्यादा ही ख़राब दिख ररही थी। वह उसके शरीर को देख रहा था।
फ्नलवर की लेखनी

सलौनी के बोबले पर पापा के निशानों को देख कर उसको ओर ज्यादा जलन महसूस हुई। उसने पाया की लगभग सभी जगह से उसके बाप ने अपनी छाप छोड़ रखी थी। लेकिन वह एक बात से प्रसन्न भी हुआ की उसका बाप उस से भी बड़ा चोदु है, साथ-साथ में जलन भी हुई की उसका सुपारा और उसके बाप का सुपारे में बहोत फर्क था, एक बार उसके बाप का लंड किसी चूत पर टकराया तो उसका भोसड़ा बनना तय ही था। और यहाँ तो एक नन्ही सी चूत का हिसाब लिया गया था, उसके बाप के लंड ने।

तभी सलौनी करवट बदल कर सीधी हो गई अब उसका शरीर और माल सब साफ़ दिखाई देता था। और उसी वक़्त एक लोंदा उसकी चूत से बहार आके चादर पर गिरा। जो की उसके खून और बाप के माल और सलौनी के खुद का माल का मिक्सचर था।

वह सोच रहा था की माल पतला तो है लेकिन चोदने के लायक भी है। उसके बाप ने खूब जम के उसे चोदा हुआ है। उसके शरीर को पकड़े बिना उसने चूत के होंठ खींचे!

और सलोनी चिल्लाई, “ओह्ह्ह्ह माआआ…मर गयी…। का....का अब रहने दो.....म........र जाउंगी....आ....प का लं...ड ब...हो...त बड़ा है। आ...प....ने भो...स बना दिया है।” सलौनी नींद में कुछ भी बोल रही थी। परम को शायद उसके शब्दों पर ध्यान नहीं था।

वैसे भी,एकदम सुजा हुआ माल को अगर कोई इस तरह बिना सूचित किये खींचे तो क्या होगा! सलौनी के हाथ तुरंत ही उसकी चूत पर चला गया जो परम की हरकत से उसे काफी दर्द महसूस हुआ था। वैसे भी वह काफी दर्द सह चुकी थी। और गहरी नींद में भो तो थी। उसकी चूत ठीक से मूत भी नहीं सकती ऐसी हालत हो गई थी। लेकिन परम ने देखा की उसके चेहरे पर एक सुकून था, भले वह ही नींद में थी।


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अब यह परम कहाँ गया? चलो देखते है। फनलवर को उसके पीछे पड़े रहना पड़ता है कही मेरी जानकारी के बाहर कोई गुल ना खिला रहा हो।
फनलवर की पेशकश

जब वह कमरे से बाहर आया तो अभी भी अंधेरा था। उसके पास घड़ी नहीं थी। सुबह के करीब 6 बज रहे थे। उसने इधर-उधर देखा तो चारों तरफ औरतें और लड़कियाँ सो रही थीं, किसी की झांगे तो किसी की गांड तो किसी के बोबले साफ़ दिख रहे थे, सोने में कपड़ो का को प्रावधान नहीं दिख रहा था। वह अभी भी नींद में था। बाहरी मकान पर भी उसे आरामदायक जगह नहीं मिली। इसलिए उसने घर जाकर देर तक सोने का फैसला किया। वह लगभग शॉर्ट कट से भागते हुए घर पहुंच गया। उसने दरवाज़ा खटखटाया और कुछ देर खटखटाने के बाद पूनम ने दरवाज़ा खोला। उन्हें पूनम को नंगी देखकर कोई हैरानी नहीं हुई। उसने दरवाज़ा बंद कर दिया और परम को अपने साथ खींचने की कोशिश की,

“परम मेरे साथ तू सो जा,चूत प्यासी है तेरे लंड के लिए, थोडा मेरी चूत को पानी पिला दे। कल तेरे बाप ने भी नहीं चोदा।”

“नहीं रानी, अभी नहीं…। मैं बहुत थक गया हूँ…।” फिर भी परम ने उसकी चूत को थोडा दबाया और आगे चला।

छोटीबहू, सेठानी और किरण जैसी माल को चोदकर परम सच में बहुत थक गया था।

परम दूसरे कमरे में चला गया और माता-पिता के कमरे में उसने महक को नंगी सोती हुई देखा। पूनम के आस-पास होने के कारण, वह महक के साथ सोने नहीं गया और अपना कमरा खोला, जिसे लड़कियों ने कल रात बाहर से कुंडी लगा दी थी। उसने लाइट जलाई और देखा कि उसके पिता और सलोनी एक-दूसरे को पकड़े हुए नंगी सो रहे थे। सलौनी की चूत से अभी भी बाप का माल और खून दोनों ही टपक रहा था। परम को अपने पिता से जलन हुई।

“बेटीचोद साला, हर वक़्त नयी चूत को फाड़ देता है। जवान लोडो को यह मार ही देगा। कुछ बचाके रखनेवाला नहीं है। माँ ने अपने पति को बिगाड़ के रखा है। चूत की क्या हालत बना देता है! और एक सुंदरी है की ऐसे मस्त लोडे को छोड़ कर सेठजी जैसे बेकार लंड से खेलती रहती है।“ उसे फिर याद आया की वह भी तो नयी चूत चोदते रहता है। उसके चहरे पर एक हलकी सी मुस्कान आई।

“बाबूजी!” उसने मुनीम को थोडा हिलाया।
फनलवर की रचना

“हम्म....कौन?” मुनीम ने अपने हाथ को ऊपर उठाते हुए पूछा।

“बाबूजी मैं हूँ, परम।”

थोड़ी देर तो मुनीम कुछ नहीं बोला पर थोड़ी ही देर में उसके मस्तिष्क में परम की आवाज़ गरजी। “बाबूजी!”

बेबाक हो के मुनीम जागा, उसने देखा की सलौनी के हाथ उसकी छाती पर है, और उसके हाथ उसके बोब्लो को ढके हुए हैं। मुनीम ने थोडा निचे देखा तो अचरज हुआ, उसका अधमरा लंड सलौनी की झांगो के बिच फसा पाया। वह तुरत उसके लंड को पकड़ के बहार खिंचा और पलग पर बैठ गया।

परम ने फिर से उसकी बाप का पैर को थोडा हिलाया, उसने उन्हें हिलाया और बाहर जाने को कहा। “मुझे अब यहाँ सोना है।“

बाबूजी: “तू यहाँ इस वक़्त? तू तो सेठजी के घर ही रुकनेवाला था यहाँ क्यों आया?” उसने एक हाथ अपने लंड पर रखा और कहा।

“बाबूजी, मैं वही से आ रहा हूँ, मैं कल रात ठीक से सोया नहीं तो सोचा घर जाके आराम से सो जाऊ। लेकिन यहाँ तो सब कमरे में कोई ना कोई है तो मैंने सोचा आपको जगाऊ और मुझे सोने का मौक़ा मिले।“ उसने सलौनी की आधी दिख रही चूत पर ध्यान केन्द्रित करते हुए कहा।

“क्यों? क्या हुआ जो नींद नहीं आई?” मुनीम अभी भी नींद में लग रहा था क्यों की वह समज नहीं पाया की परम क्या बोला।

आखिर मुनीम भान में आया और समज गया की क्यों परम को नींद नहीं आई।

“हां,ठीक है, तुम यहाँ सो जाओ मैं बहार चला जाता हूँ।“ मुनीमजी ने एक नजर गहरी नींद में सोती हुई सलौनी की तरफ देखा और उसके शरीर पर नजर डाली। उसके बोबले पर काफी जगह मुनीम के निशान दिख रहे थे, निपल काफी सूजी हुई थी, जो उसके नार्मल आकर से काफी बढ़ गई थी। उस निपल को देख के कोई भी कहा सकता था की मुनीमजी ने क्या कांड किया है। उसकी चूत से निकला खून उसकी झांग पर थे साथ में उसके माल भी उसकी झांगो पर चमक कर अपनी हाजरी भरा रहे थे। किसी को भी पता चल सकता था की लडकी के साथ क्या हुआ है। उसकी चूत तो काफी सूज के पकोड़ा जैसी बनी हुई थी जो साफ़ दिखाई देती थी।

मुनीम को यह जानकर शर्मिंदगी हुई कि उसके बेटे ने उसे एक नंगी लड़की के साथ नंगा देख लिया। बिना कुछ कहे मुनीम बाहर चला गया। परम ने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। उसने अपने कपड़े उतारे और सलोनी के पास बैठ गया जो गहरी नींद में थी। उसने धीरे से उसे सीधा किया। उसकी चुची की जोड़ी सबसे छोटी थी जिसे उसने अब तक सहलाया। लेकिन उसकी निपल उसके स्तन के आकर पर गवाही दे रही थी की निपल को मुनीमजी ने काफी मेहनत कर दी है। काफी सूजी हुई थी और स्तनों के उभार से तुरंत ध्यान खिंच रही थी।

वास्तव में वह बहुत पतली कमर वाली और कम विकसित जांघों वाली सबसे पतली लड़की थी। उसने बालों वाली चूत को सहलाया और ऐसा करते समय उसका लंड टाइट हो गया। वह गुस्से में था कि उसके पिता ने इस लड़की को चोदा। वह इस लड़की पर ज्यादा गुस्सा था, बजाय इसके कि वह जवान लड़कों से चुदवाए, जैसे परम। लेकिन उसको एक पिता समान आदमी ने चोदा। चोदा तब तक तो ठीक था पर उसकी हालत ज्यादा ही ख़राब दिख ररही थी। वह उसके शरीर को देख रहा था।
फ्नलवर की लेखनी

सलौनी के बोबले पर पापा के निशानों को देख कर उसको ओर ज्यादा जलन महसूस हुई। उसने पाया की लगभग सभी जगह से उसके बाप ने अपनी छाप छोड़ रखी थी। लेकिन वह एक बात से प्रसन्न भी हुआ की उसका बाप उस से भी बड़ा चोदु है, साथ-साथ में जलन भी हुई की उसका सुपारा और उसके बाप का सुपारे में बहोत फर्क था, एक बार उसके बाप का लंड किसी चूत पर टकराया तो उसका भोसड़ा बनना तय ही था। और यहाँ तो एक नन्ही सी चूत का हिसाब लिया गया था, उसके बाप के लंड ने।

तभी सलौनी करवट बदल कर सीधी हो गई अब उसका शरीर और माल सब साफ़ दिखाई देता था। और उसी वक़्त एक लोंदा उसकी चूत से बहार आके चादर पर गिरा। जो की उसके खून और बाप के माल और सलौनी के खुद का माल का मिक्सचर था।

वह सोच रहा था की माल पतला तो है लेकिन चोदने के लायक भी है। उसके बाप ने खूब जम के उसे चोदा हुआ है। उसके शरीर को पकड़े बिना उसने चूत के होंठ खींचे!

और सलोनी चिल्लाई, “ओह्ह्ह्ह माआआ…मर गयी…। का....का अब रहने दो.....म........र जाउंगी....आ....प का लं...ड ब...हो...त बड़ा है। आ...प....ने भो...स बना दिया है।” सलौनी नींद में कुछ भी बोल रही थी। परम को शायद उसके शब्दों पर ध्यान नहीं था।

वैसे भी,एकदम सुजा हुआ माल को अगर कोई इस तरह बिना सूचित किये खींचे तो क्या होगा! सलौनी के हाथ तुरंत ही उसकी चूत पर चला गया जो परम की हरकत से उसे काफी दर्द महसूस हुआ था। वैसे भी वह काफी दर्द सह चुकी थी। और गहरी नींद में भो तो थी। उसकी चूत ठीक से मूत भी नहीं सकती ऐसी हालत हो गई थी। लेकिन परम ने देखा की उसके चेहरे पर एक सुकून था, भले वह ही नींद में थी।


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तब तक के लिए फनलवर की ओर से जय भारत
Mast update hai. Munim Ji ke kya kahane. Munim kankirdar bhi aapne Sundari ki tarah hai damdar gadha hai. Jahan Sundari us gaon ki sabse khubsurat aur kamuk stri hai to vahin uska pati Munim gaon ka sabse khatarnak chodu aadmi hai jiske changul me jyadatar kunwari ladkiyan hi fansti hai aur vo unhe poori tarah se nichod kar choos leta hai. Kya bible aur kya yoni. Sabko aisa tabah karta hai ki fir vo ladkiyan usi ki deewani ho kar rah jati hai aur fir se chodu Munim se apne jism ka madhukar nikalane ki hasrat rakhti hai.
Yahan Param ki jalan bhi apne baap se ekdam sahi hai ki Munim apne mote supade we joki gaon me sabse mota hai vo kunwari ladkiyo ko aisa tabah o barbad karta hai ki fir vo ladkiyan kisi ladke me interest nahi leti. Param ki bahan Mahak bhi baap se chudne ke baad apne pahle seal todne wale seth ko kab ka bhul kar bap se chudwane ke bad Param aur Vinod ke sath sambhog karne ke bawjud vo apne baap Munim ka bachcha janna chahti hai aur uske liye bhi vah Sundari ki tarah nai ladkiyon ka intjam kar rahi hai yah Saloni bhi Mahak ki bahkai hui ladki hai jise usne apne baap ko aaj ki rat gift kar di.

Wah kya gajab ka scene aur sanwad likhe hai maze hi aa gaya. Thank you.
 

Ashiq Baba

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आपसे अनुरोध है कि समय मिलने पर फुरसत के क्षणों में इस शादी समारोह के बाद कोई सिचुएशन बना कर सुन्दरी को मुनीम और परम से एकसाथ रमण करवाइए वो भी धमाकेदार तरीके से और वह भी महक की मौजूदगी में । यह सीन पढ़ने की बड़ी दिली इच्छा उत्पन्न हो गई है । कोई प्रेशर नही है बस अनुरोध है आपसे । धन्यवाद ।
 
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