Update 23
सुंदरी ने परम के साथ किरण की चुदाई देखी और उसने मुनीम और विनोद को इस युवा तंग योनि की पेशकश करने के बारे में सोचा।
“दूसरो से चुदवायेगी?” सुंदरी ने पूछा।।"परम जैसा ही मस्त कर देगा।"
“मैं तो तैयार हूं,लेकिन बदनामी नहीं होनी चाहिए। भरोसेमंद लंड होना चाहिए। अगर अच्छा और भरोसे का लंड होगा तो गांड भी मरवा लुंगी।”
“चिंता मत कर,तेरी शादी खूब धूम-धाम से होगी,तब तक अलग-अलग लंड का मजा ले।” सुंदरी ने किरण को दोपहर 11 बजे अपने घर आने को कहा।
दोनों ने चूमा, गले लगाया और प्यार किया। फनलवर निर्मित।
“वाह क्या सीन है!!!” एक चुदास दूसरी को चुदासिपन सिखा रही है।”
बड़ी भाभी को कमरे में देखकर किरण शरमा गई, फ्रॉक पहनी और कमरे से बाहर चली गई। छोटीबहू अंदर आई और उसने किरण को बाहर जाते देखा।
“ये किरण यहा क्या कर रही थी…?”
“देखती नहीं हो…इतना नया बेडशीट दिया था कि तुम और परम खूब प्यार से चुदाई करो।”
“हाँ वो तो हमने किया,परम ने मुझे मस्त कर दिया।” छोटी ने उत्तर दिया और परम की चुदाई से संतुष्टि व्यक्त की। उसने यह नहीं बताया कि ससुर ने भी उसे उसी बिस्तर पर चोदा था। और वही चुदी हुई चूत पर हमला कर के चले गए।
छोटी ने बिस्तर पर बहुत सारे डार्क मरून धब्बे देखे।
“लगता है किरण कुंवारी थी, तभी ये सारे दाग है! लगता है उसकी चूत ने अपनी शील गवा दी है। चलो अच्छा हुआ कभी तो शील टूटना ही था।” छोटी ने टिप्पणी की।
सुंदरी ने की पुष्टि। “हां, वो कुवारी तो थी लेकिन अब नहीं है, परम के लंड ने उसकी चूत को सही तरीके से चूत में तब्दील कर दी है। अब वह माल दुसरे लोडो के लिए उपलब्ध हो गई है। अपनी मस्ती से अब जो चाहे लंड को अपने अन्दर ले सकती है।“ सुंदरी ने छोटी की गांड की दरार पर हाथ रखते हुए कहा।
“छोटी, ये दोनो माँ बेटे पुरे गाव को बरबाद कर देंगे…।” बड़ी ने टिप्पणी की। और साथ-साथ सुंदरी के हाथ जो छोटी की गांड की दरार संभल रही थी उसे झटक कर अपनी गांड पर रखा।
“मैंने क्या किया…?” सुंदरी ने पूछा।
“और क्या! दीदी ठीक ही तो कहती है।” छोटी ने कहा।
'तेरा बेटा परम अपना मस्त लोडा देखा कर सब छोटी-बड़ी चुतो को चोद रहा है और मुझे तो उसने बिना पैसे का गुलाम बना लिया है।'
“और तू सुंदरी, सारे मर्दों को बरबाद कर ही रही है।” बड़ी ने कहा। “हमारे लिए कुछ तो छोड़ दे। कुछ अच्छे लंड हमारी चूत के लिए भो छोड़ दे। जो आराम से हमारी चूत में चरक सके।” फनलवर की पेशकश।
“जो भी मर्द आता है सुंदरी के सुन्दरता का वखान कर के उसे चोदने की तमन्ना लिए बैठता है।“
“जानती है छोटी, तेरे जेठ ने कहा है कि इस बार जैसे भी हो सुंदरी और महक को चोदेगा ही और मुझे अपने देवर से चुदवाने के लिए कह रहा है।”
“दीदी यहीं हाल तेरे देवर का भी है। वो हरामी भी बोल रहा था कि इस बार सुंदरी और पूनम को चोदेगा ही। साला अब भी पूनम से शादी करना चाहता है, और जानती हो, सुंदरी दीदी, वो मुझे बड़े भैया की रखैल बनाने के लिए कहा रहा है और मजबूर कर रहा है। कहता है की मुझे भी अब चुदासी की तरह हर लंड को शांत करने की नौकरी कर ही देनी चाहिए। बोलो अब मैं क्या करू?''
बड़ीबहू ने देखा नहीं कि छोटी ने सुंदरी को आंख मारी। उसे क्या पता था कि छोटी को ससुर ने पहले से ही अपनी रखैल बना रखा है। और अपने लंड को खाली कर ही देता है। शायद हो सकता है की वह ससुरजी के लंड से ही गर्भवती हो जाए। लेकिन वह मुनीमजी के लंड से परम जैसे को जन्म देना चाहती थी।
“अरे तो इसमें क्या समस्या है…।” सुंदरी ने कहा। मैंने कोई गुनाह तो नहीं किया, अब मैं क्या बताऊ मैं हु ही ऐसी, भगवान् ने दिया मैंने लिया। और सुनो मैं वो कढाई में बना व्यंजन हूँ की हर कोई मेरे व्यंजन को खाना पसंद करता है।
और तुम लोग सिर्फ एक प्रेशर कुकर में बना व्यंजन हो जो गरम तो होता है पर टेस्ट कढाई में बना व्यंजन जैसा नहीं होता। समजी? सुंदरी ने आगे कहा;
"मेरा बेटा और पति तुम लोगों को चोद ही रहा है,मैं भी तेरे पति से चुदवा लुंगी,महेक और पूनम का मैं नहीं जानती। उनको शायद छोड़ देना चाहिए, कच्चे माल है और मुनीमजी और परम उन दोनों की चूत को संभल लेगा, वैसे भी विनोद है महक के लिए, उनकी शादी भी करा दूंगी, मुनीम से कह तो दिया है अब देखो क्या होता है! लेकिन अगर महक अपनी चूत दूसरो के लिए खोलती है तो मुझे कोई दिक्कत नहीं पर बहोत गरम माल है ऐसे-वैसे साधारण सा लंड का काम नहीं जो उसे अपने लंड की गुलाम बना सके, मुझे तो लगता है उसका बाप ही सही है उसके लिए, लेकिन साला कुछ करता नहीं।"
अरे....ऐसा कैसा महक का माल है जो हमसे अलग है? छोटी ने पूछा।
सुंदरी: “महक को तुम जानती नहीं, सिर्फ उसकी चूत की महक से ही ना जाने कितने लंड से पानी चरक पड़ता है। वह एक आग है। एक ऐसा व्यंजन है अगर वह जल्दी और मनचाहे अंदाज और लंड को मिल जाती है तो अच्छी डिश बन सकती है। बस यह समज लो की, जहाँ प्रेशर कुकर में खाना बहुत जल्दी पक जाता है वहीँ चूल्हे और कढाई में खाना लेट पकता है। मैं और तुम कढाई या प्रेशर कुकर है या नहीं पर महक की चूत का यही कारण है कि अगर असली स्वादु लोग यानी की चोदु लंड, धैर्य और मेहनत के साथ चूल्हे कढ़ाई में पके खाने को ही पसंद करते है। लेकिन एक बात तो है की दोनों बर्तन में गर्मी ज्यादा होती है और ठंडा जल्दी नहीं होता मगर असली स्वादु लोग धैर्य और मेहनत के साथ चूल्हे कढ़ाई में पके खाने को ही पसंद करते है। पर असली चूत का मजा एक अनुभवी चूत या भोस ही दे सकती है तभी तो असली स्वादु लोग धैर्य और मेहनत के साथ चूल्हे कढ़ाई में पके खाने को ही पसंद करते है। तभी तो आम भारतीय रसोई से चूल्हे कढ़ाई लगभग गायब हो गए है। क्यों की लंड अब रुक नहीं सकता। तेरे पति देवो में यह बात नहीं है की वह एक कढाई या फिर प्रेशर कुकर दोनों को ठंडा कर सके तभी तो तुम मुनीम जैसे लंड से प्रेम करती हो। और चाहती हो की सदा वह तुम्हारी चूत चोदते रहे।“ सुंदरी अपने पति को प्रमोट कर रही थी शायद।
“नहीं दीदी…। एक बार वो तुम्हें चोद लेगा तो फिर कभी हमें टच भी नहीं करेगा।” बड़ी ने कहा।
“हा दीदी ठीक कहती है।” छोटी ने कहा।
तभी किरण एक नौकरानी के साथ चाय लेकर लौटी। नौकरानी के जाने के बाद बड़ी बहू ने किरण से पूछा कि क्या परम ने अंदर चूत में ही वीर्यपात कर दिया है!
“हा भाभी…पहली बार मैंने पानी अंदर जाने दिया लेकिन बाद में दोनों बार पी गई।” उसने एक रंडी की तरह उत्तर दिया।
“कुतिया बच्चा रह जाएगा तो क्या करेगी! तेरी माँ चुद जायेगी अगर बच्चा रह गया तो! किस-किस को जवाब देती फिरेगी, अभी तो शादी है कुछ समय के बाद, परम तो चोद के निकल गया और अपना माल तेरी चूत में छोड़ गया, कोई उसे नहीं पूछेगा पर तेरी तो गांड मार देंगे, खास कर तेरे ससुराल वाले। चल एक पुरिया दे देती हूं। फिर जितना चाहे दिन भर चुदवा, जैसे चाहे अपनी चूत को फड़वा कोइ प्रोब्लेम नहीं होगी, कोई बच्चा नहीं रहेगा। लेकिन बता तो, तूने परम को पटाया कैसे! तू कल ही तो आई है! खिलाड़ी लग रही हो।”
फिर चाय पीते समय किरण ने अपनी भाभी और ड्राइवर की कहानी सुनाई जिससे उसके अंदर सेक्स जाग गया और परम को देखते ही उसने परम से ही अपनी वर्जिनिटी तुड़वाने का फैसला कर लिया।
“भाभी, वो तो मान ही नहीं रहा था, लेकिन आख़िर मैं भी लड़की ही हूं। अपना माल दिखाकर उसे पटा ही लिया। लेकिन भाभी,परम ने सच मुझे स्वर्ग में पहुंचा दिया था, मुझे तो लगता है की इस से अच्चा स्वर्ग होता नहीं होगा। क्या गजब का लंड है। मालदार है।”
“चल तुझे अपने भैया से चुदवा कर अब नर्क में ले जाती हूँ। और हाँ पुडिया खा ले और चूत को खोल दे।" बड़ी बहू किरण को अपने कमरे में ले गई। पति अभी भी सो रहा था, शुक्र है उसने अपना शरीर ढक लिया था। उषा ने अलमारी से एक पैकेट निकाला और किरण को पानी के साथ एक गोली गटकने दी।
"अब जितना मन करे चुदवा, कोई बच्चा नहीं रहेगा। लकिन याद रहे कल फिर से ले लेना जब भी तेरी चूत में लंड का माल पड़े, यह गोली ले लेना, और हां, लंड को अपने में ही खाली करना होता है तो गोली आवश्यक है, यहाँ कोइ भोसडिका निरोध इस्तेमाल नहीं करता, सब नंगे लंड लेके चूत और गांड मारते है। अब मजे से जितना चुदवा सकती है चुदवा। और सच कहू तो बिना आवरण ही चुदवाने में मजा है।" फनलवर की रचना।
उसने उसे पाँच खुराक दीं। "आ जा बड़े भैया के पास सो जा। उन्हें भी अपनी जवानी का रस पिला दे।" बड़ी ने किरण को भाई के साथ चुदने को कहा।
"अभी नहीं, पहले चूत को परम का लंड खूब खाने दो।"
किरण अभी खुश थी उसे सब के सामने अब चुदने का लायसंस मिल गया था। बड़ी ने उसका हाथ पकड़ कर अपने पति यानी की किरण के भाई के लंड पर रख दिया और बोली: “इसे भी खा ले, मजा आएगी वैसे यह लंड परम जैसा तो नहीं है, पर नया लंड तो है। अब मैं और तू, या फिर गाँव की सभी औरतो को एक तरीके से नए लंड की तलाश तो रहती ही है, एक नयापन जैसे मर्दों को होता है। हर नए लंड से अपनी कामोत्तेजना बढती है चाहे लंड छोटा, बड़ा,पतला, टेढ़ा, कोई भी हो। हर मर्द यही कहेगा की तेरे जैसा माल कोई नहीं है, वैसे ही हमें भी नए लंड का मजा लेने के लिए लंड कोई भी और कैसा भी हो चलता है बस अपने वीर्य से अपनी चूत, गांड या मुंह भर दे। समजी! यही दुनिया का दस्तूर है। और हां जब भी किसी छोटे या पतले लंड से चुदवाओ ऊउन्ह्ह, आआअह्हह्हह करना मत भूलना, और दमार लंड तो तुज से बुलवा ही लेगा।”
लेकिन किरण ने भाई के लंड पर थोडा हाथ फिराके छोड़ दिया,किरण कमरे से बाहर आई। वह बहुत खुश थी।
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आज के लिए बस यही तक ।
फिर मिलेंगे एक नए अपडेट के साथ रब तक के लिए फनलवर की तरफ से जय भारत।।