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Funlover

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बहुत ही शानदार लाजवाब दमदार और जबरदस्त कामुक अपडेट है मजा आ गया
किरण को तो कोई भी अपने मनचाहे लंड से चुदने का खुला आमंत्रण मिल गया है बस वो उसका इस्तेमाल किस तरहा से करती है
खैर देखते हैं आगे क्या होता है
अगले रोमांचकारी धमाकेदार और चुदाईदार अपडेट की प्रतिक्षा रहेगी जल्दी से दिजिएगा
जी शुक्रिया दोस्त



बस यही कहूँगी "जैसा संग वैसा ही रंग"
 

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थैंक यू जी । मुझे ये सब अच्छे से याद है । और आपका बहुत बहुत धन्यवाद करना चाहता हूँ कि आपने मेरे उदाहरण को अपनी इस बेहतरीन और अतिलोकप्रिय कहानी में स्थान दिया है । वह भी परमिशन मांग कर । आगे से आपको मेरे द्वारा लिखे कोई लाइन पसंद आए बिना झिझक इस्तेमाल कर लेवे । परमिशन मांग कर मुझे शर्मिंदा ना करे । आप इतनी बड़ी और उत्कृष्ट लेखिका होते हुए भी सहर्ष ही कहानी के लिए हमारे कमैंट्स में से कुछ जरा सा उठा कर अपनी नौलखा हार की बुनाई में उसे उचित जगह पर अपने हिसाब से तराश कर प्रयोग कर लेते है तो उस जरा सी चीज की भी कीमत नौलखा हार ही हो जाती है ।
आपकी साफगोई और सहजता का हम दिल से सम्मान करते है । धन्यवाद जी ।
आपकी और बाकी सब रीडर्स की बहोत बहोत आभारी हूँ दोस्तों

प्रयास और कोशिश करती रहती हूँ, परिणाम आप लोग ही देंगे
 

Funlover

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लेकिन किरण ने भाई के लंड पर थोडा हाथ फिराके छोड़ दिया,किरण कमरे से बाहर आई। वह बहुत खुश थी।


Xxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxxx

अब आगे............


किरण के पास अब एक लायसंस था की वह दोनों बहु के सामने भी अपने पैर किसी लंड के आगे खोल सकती थी। पता नै उसे क्या अजीब सा आनंद मिल रहा था। खेर उसे भाई के लंड पर कोई रूचि नहीं थी। पर वह जानती थी की खुल के चुदवाना है तो भाई को थोडा मौक़ा देना पड़ेगा ताकि भाभी शांत रहे। और वह खुद ही किरण के पैरो को किसी के सामने फैलाने को कहे। क्या पता श्याद यह एक डील थी!!!!!!!!

अब यह परम कहाँ गया? चलो देखते है। फनलवर को उसके पीछे पड़े रहना पड़ता है कही मेरी जानकारी के बाहर कोई गुल ना खिला रहा हो।
फनलवर की पेशकश

जब वह कमरे से बाहर आया तो अभी भी अंधेरा था। उसके पास घड़ी नहीं थी। सुबह के करीब 6 बज रहे थे। उसने इधर-उधर देखा तो चारों तरफ औरतें और लड़कियाँ सो रही थीं, किसी की झांगे तो किसी की गांड तो किसी के बोबले साफ़ दिख रहे थे, सोने में कपड़ो का को प्रावधान नहीं दिख रहा था। वह अभी भी नींद में था। बाहरी मकान पर भी उसे आरामदायक जगह नहीं मिली। इसलिए उसने घर जाकर देर तक सोने का फैसला किया। वह लगभग शॉर्ट कट से भागते हुए घर पहुंच गया। उसने दरवाज़ा खटखटाया और कुछ देर खटखटाने के बाद पूनम ने दरवाज़ा खोला। उन्हें पूनम को नंगी देखकर कोई हैरानी नहीं हुई। उसने दरवाज़ा बंद कर दिया और परम को अपने साथ खींचने की कोशिश की,

“परम मेरे साथ तू सो जा,चूत प्यासी है तेरे लंड के लिए, थोडा मेरी चूत को पानी पिला दे। कल तेरे बाप ने भी नहीं चोदा।”

“नहीं रानी, अभी नहीं…। मैं बहुत थक गया हूँ…।” फिर भी परम ने उसकी चूत को थोडा दबाया और आगे चला।

छोटीबहू, सेठानी और किरण जैसी माल को चोदकर परम सच में बहुत थक गया था।

परम दूसरे कमरे में चला गया और माता-पिता के कमरे में उसने महक को नंगी सोती हुई देखा। पूनम के आस-पास होने के कारण, वह महक के साथ सोने नहीं गया और अपना कमरा खोला, जिसे लड़कियों ने कल रात बाहर से कुंडी लगा दी थी। उसने लाइट जलाई और देखा कि उसके पिता और सलोनी एक-दूसरे को पकड़े हुए नंगी सो रहे थे। सलौनी की चूत से अभी भी बाप का माल और खून दोनों ही टपक रहा था। परम को अपने पिता से जलन हुई।

“बेटीचोद साला, हर वक़्त नयी चूत को फाड़ देता है। जवान लोडो को यह मार ही देगा। कुछ बचाके रखनेवाला नहीं है। माँ ने अपने पति को बिगाड़ के रखा है। चूत की क्या हालत बना देता है! और एक सुंदरी है की ऐसे मस्त लोडे को छोड़ कर सेठजी जैसे बेकार लंड से खेलती रहती है।“ उसे फिर याद आया की वह भी तो नयी चूत चोदते रहता है। उसके चहरे पर एक हलकी सी मुस्कान आई।

“बाबूजी!” उसने मुनीम को थोडा हिलाया।
फनलवर की रचना

“हम्म....कौन?” मुनीम ने अपने हाथ को ऊपर उठाते हुए पूछा।

“बाबूजी मैं हूँ, परम।”

थोड़ी देर तो मुनीम कुछ नहीं बोला पर थोड़ी ही देर में उसके मस्तिष्क में परम की आवाज़ गरजी। “बाबूजी!”

बेबाक हो के मुनीम जागा, उसने देखा की सलौनी के हाथ उसकी छाती पर है, और उसके हाथ उसके बोब्लो को ढके हुए हैं। मुनीम ने थोडा निचे देखा तो अचरज हुआ, उसका अधमरा लंड सलौनी की झांगो के बिच फसा पाया। वह तुरत उसके लंड को पकड़ के बहार खिंचा और पलग पर बैठ गया।

परम ने फिर से उसकी बाप का पैर को थोडा हिलाया, उसने उन्हें हिलाया और बाहर जाने को कहा। “मुझे अब यहाँ सोना है।“

बाबूजी: “तू यहाँ इस वक़्त? तू तो सेठजी के घर ही रुकनेवाला था यहाँ क्यों आया?” उसने एक हाथ अपने लंड पर रखा और कहा।

“बाबूजी, मैं वही से आ रहा हूँ, मैं कल रात ठीक से सोया नहीं तो सोचा घर जाके आराम से सो जाऊ। लेकिन यहाँ तो सब कमरे में कोई ना कोई है तो मैंने सोचा आपको जगाऊ और मुझे सोने का मौक़ा मिले।“ उसने सलौनी की आधी दिख रही चूत पर ध्यान केन्द्रित करते हुए कहा।

“क्यों? क्या हुआ जो नींद नहीं आई?” मुनीम अभी भी नींद में लग रहा था क्यों की वह समज नहीं पाया की परम क्या बोला।

आखिर मुनीम भान में आया और समज गया की क्यों परम को नींद नहीं आई।

“हां,ठीक है, तुम यहाँ सो जाओ मैं बहार चला जाता हूँ।“ मुनीमजी ने एक नजर गहरी नींद में सोती हुई सलौनी की तरफ देखा और उसके शरीर पर नजर डाली। उसके बोबले पर काफी जगह मुनीम के निशान दिख रहे थे, निपल काफी सूजी हुई थी, जो उसके नार्मल आकर से काफी बढ़ गई थी। उस निपल को देख के कोई भी कहा सकता था की मुनीमजी ने क्या कांड किया है। उसकी चूत से निकला खून उसकी झांग पर थे साथ में उसके माल भी उसकी झांगो पर चमक कर अपनी हाजरी भरा रहे थे। किसी को भी पता चल सकता था की लडकी के साथ क्या हुआ है। उसकी चूत तो काफी सूज के पकोड़ा जैसी बनी हुई थी जो साफ़ दिखाई देती थी।

मुनीम को यह जानकर शर्मिंदगी हुई कि उसके बेटे ने उसे एक नंगी लड़की के साथ नंगा देख लिया। बिना कुछ कहे मुनीम बाहर चला गया। परम ने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। उसने अपने कपड़े उतारे और सलोनी के पास बैठ गया जो गहरी नींद में थी। उसने धीरे से उसे सीधा किया। उसकी चुची की जोड़ी सबसे छोटी थी जिसे उसने अब तक सहलाया। लेकिन उसकी निपल उसके स्तन के आकर पर गवाही दे रही थी की निपल को मुनीमजी ने काफी मेहनत कर दी है। काफी सूजी हुई थी और स्तनों के उभार से तुरंत ध्यान खिंच रही थी।

वास्तव में वह बहुत पतली कमर वाली और कम विकसित जांघों वाली सबसे पतली लड़की थी। उसने बालों वाली चूत को सहलाया और ऐसा करते समय उसका लंड टाइट हो गया। वह गुस्से में था कि उसके पिता ने इस लड़की को चोदा। वह इस लड़की पर ज्यादा गुस्सा था, बजाय इसके कि वह जवान लड़कों से चुदवाए, जैसे परम। लेकिन उसको एक पिता समान आदमी ने चोदा। चोदा तब तक तो ठीक था पर उसकी हालत ज्यादा ही ख़राब दिख ररही थी। वह उसके शरीर को देख रहा था।
फ्नलवर की लेखनी

सलौनी के बोबले पर पापा के निशानों को देख कर उसको ओर ज्यादा जलन महसूस हुई। उसने पाया की लगभग सभी जगह से उसके बाप ने अपनी छाप छोड़ रखी थी। लेकिन वह एक बात से प्रसन्न भी हुआ की उसका बाप उस से भी बड़ा चोदु है, साथ-साथ में जलन भी हुई की उसका सुपारा और उसके बाप का सुपारे में बहोत फर्क था, एक बार उसके बाप का लंड किसी चूत पर टकराया तो उसका भोसड़ा बनना तय ही था। और यहाँ तो एक नन्ही सी चूत का हिसाब लिया गया था, उसके बाप के लंड ने।

तभी सलौनी करवट बदल कर सीधी हो गई अब उसका शरीर और माल सब साफ़ दिखाई देता था। और उसी वक़्त एक लोंदा उसकी चूत से बहार आके चादर पर गिरा। जो की उसके खून और बाप के माल और सलौनी के खुद का माल का मिक्सचर था।

वह सोच रहा था की माल पतला तो है लेकिन चोदने के लायक भी है। उसके बाप ने खूब जम के उसे चोदा हुआ है। उसके शरीर को पकड़े बिना उसने चूत के होंठ खींचे!

और सलोनी चिल्लाई, “ओह्ह्ह्ह माआआ…मर गयी…। का....का अब रहने दो.....म........र जाउंगी....आ....प का लं...ड ब...हो...त बड़ा है। आ...प....ने भो...स बना दिया है।” सलौनी नींद में कुछ भी बोल रही थी। परम को शायद उसके शब्दों पर ध्यान नहीं था।

वैसे भी,एकदम सुजा हुआ माल को अगर कोई इस तरह बिना सूचित किये खींचे तो क्या होगा! सलौनी के हाथ तुरंत ही उसकी चूत पर चला गया जो परम की हरकत से उसे काफी दर्द महसूस हुआ था। वैसे भी वह काफी दर्द सह चुकी थी। और गहरी नींद में भो तो थी। उसकी चूत ठीक से मूत भी नहीं सकती ऐसी हालत हो गई थी। लेकिन परम ने देखा की उसके चेहरे पर एक सुकून था, भले वह ही नींद में थी।


******
दोस्तों आज के लिए बस यही तक


फिर मिलेंगे एक नए अपडेट के साथ



तब तक के लिए फनलवर की ओर से जय भारत
 

Ek number

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लेकिन किरण ने भाई के लंड पर थोडा हाथ फिराके छोड़ दिया,किरण कमरे से बाहर आई। वह बहुत खुश थी।


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अब आगे............


किरण के पास अब एक लायसंस था की वह दोनों बहु के सामने भी अपने पैर किसी लंड के आगे खोल सकती थी। पता नै उसे क्या अजीब सा आनंद मिल रहा था। खेर उसे भाई के लंड पर कोई रूचि नहीं थी। पर वह जानती थी की खुल के चुदवाना है तो भाई को थोडा मौक़ा देना पड़ेगा ताकि भाभी शांत रहे। और वह खुद ही किरण के पैरो को किसी के सामने फैलाने को कहे। क्या पता श्याद यह एक डील थी!!!!!!!!

अब यह परम कहाँ गया? चलो देखते है। फनलवर को उसके पीछे पड़े रहना पड़ता है कही मेरी जानकारी के बाहर कोई गुल ना खिला रहा हो।
फनलवर की पेशकश

जब वह कमरे से बाहर आया तो अभी भी अंधेरा था। उसके पास घड़ी नहीं थी। सुबह के करीब 6 बज रहे थे। उसने इधर-उधर देखा तो चारों तरफ औरतें और लड़कियाँ सो रही थीं, किसी की झांगे तो किसी की गांड तो किसी के बोबले साफ़ दिख रहे थे, सोने में कपड़ो का को प्रावधान नहीं दिख रहा था। वह अभी भी नींद में था। बाहरी मकान पर भी उसे आरामदायक जगह नहीं मिली। इसलिए उसने घर जाकर देर तक सोने का फैसला किया। वह लगभग शॉर्ट कट से भागते हुए घर पहुंच गया। उसने दरवाज़ा खटखटाया और कुछ देर खटखटाने के बाद पूनम ने दरवाज़ा खोला। उन्हें पूनम को नंगी देखकर कोई हैरानी नहीं हुई। उसने दरवाज़ा बंद कर दिया और परम को अपने साथ खींचने की कोशिश की,

“परम मेरे साथ तू सो जा,चूत प्यासी है तेरे लंड के लिए, थोडा मेरी चूत को पानी पिला दे। कल तेरे बाप ने भी नहीं चोदा।”

“नहीं रानी, अभी नहीं…। मैं बहुत थक गया हूँ…।” फिर भी परम ने उसकी चूत को थोडा दबाया और आगे चला।

छोटीबहू, सेठानी और किरण जैसी माल को चोदकर परम सच में बहुत थक गया था।

परम दूसरे कमरे में चला गया और माता-पिता के कमरे में उसने महक को नंगी सोती हुई देखा। पूनम के आस-पास होने के कारण, वह महक के साथ सोने नहीं गया और अपना कमरा खोला, जिसे लड़कियों ने कल रात बाहर से कुंडी लगा दी थी। उसने लाइट जलाई और देखा कि उसके पिता और सलोनी एक-दूसरे को पकड़े हुए नंगी सो रहे थे। सलौनी की चूत से अभी भी बाप का माल और खून दोनों ही टपक रहा था। परम को अपने पिता से जलन हुई।

“बेटीचोद साला, हर वक़्त नयी चूत को फाड़ देता है। जवान लोडो को यह मार ही देगा। कुछ बचाके रखनेवाला नहीं है। माँ ने अपने पति को बिगाड़ के रखा है। चूत की क्या हालत बना देता है! और एक सुंदरी है की ऐसे मस्त लोडे को छोड़ कर सेठजी जैसे बेकार लंड से खेलती रहती है।“ उसे फिर याद आया की वह भी तो नयी चूत चोदते रहता है। उसके चहरे पर एक हलकी सी मुस्कान आई।

“बाबूजी!” उसने मुनीम को थोडा हिलाया।
फनलवर की रचना

“हम्म....कौन?” मुनीम ने अपने हाथ को ऊपर उठाते हुए पूछा।

“बाबूजी मैं हूँ, परम।”

थोड़ी देर तो मुनीम कुछ नहीं बोला पर थोड़ी ही देर में उसके मस्तिष्क में परम की आवाज़ गरजी। “बाबूजी!”

बेबाक हो के मुनीम जागा, उसने देखा की सलौनी के हाथ उसकी छाती पर है, और उसके हाथ उसके बोब्लो को ढके हुए हैं। मुनीम ने थोडा निचे देखा तो अचरज हुआ, उसका अधमरा लंड सलौनी की झांगो के बिच फसा पाया। वह तुरत उसके लंड को पकड़ के बहार खिंचा और पलग पर बैठ गया।

परम ने फिर से उसकी बाप का पैर को थोडा हिलाया, उसने उन्हें हिलाया और बाहर जाने को कहा। “मुझे अब यहाँ सोना है।“

बाबूजी: “तू यहाँ इस वक़्त? तू तो सेठजी के घर ही रुकनेवाला था यहाँ क्यों आया?” उसने एक हाथ अपने लंड पर रखा और कहा।

“बाबूजी, मैं वही से आ रहा हूँ, मैं कल रात ठीक से सोया नहीं तो सोचा घर जाके आराम से सो जाऊ। लेकिन यहाँ तो सब कमरे में कोई ना कोई है तो मैंने सोचा आपको जगाऊ और मुझे सोने का मौक़ा मिले।“ उसने सलौनी की आधी दिख रही चूत पर ध्यान केन्द्रित करते हुए कहा।

“क्यों? क्या हुआ जो नींद नहीं आई?” मुनीम अभी भी नींद में लग रहा था क्यों की वह समज नहीं पाया की परम क्या बोला।

आखिर मुनीम भान में आया और समज गया की क्यों परम को नींद नहीं आई।

“हां,ठीक है, तुम यहाँ सो जाओ मैं बहार चला जाता हूँ।“ मुनीमजी ने एक नजर गहरी नींद में सोती हुई सलौनी की तरफ देखा और उसके शरीर पर नजर डाली। उसके बोबले पर काफी जगह मुनीम के निशान दिख रहे थे, निपल काफी सूजी हुई थी, जो उसके नार्मल आकर से काफी बढ़ गई थी। उस निपल को देख के कोई भी कहा सकता था की मुनीमजी ने क्या कांड किया है। उसकी चूत से निकला खून उसकी झांग पर थे साथ में उसके माल भी उसकी झांगो पर चमक कर अपनी हाजरी भरा रहे थे। किसी को भी पता चल सकता था की लडकी के साथ क्या हुआ है। उसकी चूत तो काफी सूज के पकोड़ा जैसी बनी हुई थी जो साफ़ दिखाई देती थी।

मुनीम को यह जानकर शर्मिंदगी हुई कि उसके बेटे ने उसे एक नंगी लड़की के साथ नंगा देख लिया। बिना कुछ कहे मुनीम बाहर चला गया। परम ने अंदर से दरवाजा बंद कर लिया। उसने अपने कपड़े उतारे और सलोनी के पास बैठ गया जो गहरी नींद में थी। उसने धीरे से उसे सीधा किया। उसकी चुची की जोड़ी सबसे छोटी थी जिसे उसने अब तक सहलाया। लेकिन उसकी निपल उसके स्तन के आकर पर गवाही दे रही थी की निपल को मुनीमजी ने काफी मेहनत कर दी है। काफी सूजी हुई थी और स्तनों के उभार से तुरंत ध्यान खिंच रही थी।

वास्तव में वह बहुत पतली कमर वाली और कम विकसित जांघों वाली सबसे पतली लड़की थी। उसने बालों वाली चूत को सहलाया और ऐसा करते समय उसका लंड टाइट हो गया। वह गुस्से में था कि उसके पिता ने इस लड़की को चोदा। वह इस लड़की पर ज्यादा गुस्सा था, बजाय इसके कि वह जवान लड़कों से चुदवाए, जैसे परम। लेकिन उसको एक पिता समान आदमी ने चोदा। चोदा तब तक तो ठीक था पर उसकी हालत ज्यादा ही ख़राब दिख ररही थी। वह उसके शरीर को देख रहा था।
फ्नलवर की लेखनी

सलौनी के बोबले पर पापा के निशानों को देख कर उसको ओर ज्यादा जलन महसूस हुई। उसने पाया की लगभग सभी जगह से उसके बाप ने अपनी छाप छोड़ रखी थी। लेकिन वह एक बात से प्रसन्न भी हुआ की उसका बाप उस से भी बड़ा चोदु है, साथ-साथ में जलन भी हुई की उसका सुपारा और उसके बाप का सुपारे में बहोत फर्क था, एक बार उसके बाप का लंड किसी चूत पर टकराया तो उसका भोसड़ा बनना तय ही था। और यहाँ तो एक नन्ही सी चूत का हिसाब लिया गया था, उसके बाप के लंड ने।

तभी सलौनी करवट बदल कर सीधी हो गई अब उसका शरीर और माल सब साफ़ दिखाई देता था। और उसी वक़्त एक लोंदा उसकी चूत से बहार आके चादर पर गिरा। जो की उसके खून और बाप के माल और सलौनी के खुद का माल का मिक्सचर था।

वह सोच रहा था की माल पतला तो है लेकिन चोदने के लायक भी है। उसके बाप ने खूब जम के उसे चोदा हुआ है। उसके शरीर को पकड़े बिना उसने चूत के होंठ खींचे!

और सलोनी चिल्लाई, “ओह्ह्ह्ह माआआ…मर गयी…। का....का अब रहने दो.....म........र जाउंगी....आ....प का लं...ड ब...हो...त बड़ा है। आ...प....ने भो...स बना दिया है।” सलौनी नींद में कुछ भी बोल रही थी। परम को शायद उसके शब्दों पर ध्यान नहीं था।

वैसे भी,एकदम सुजा हुआ माल को अगर कोई इस तरह बिना सूचित किये खींचे तो क्या होगा! सलौनी के हाथ तुरंत ही उसकी चूत पर चला गया जो परम की हरकत से उसे काफी दर्द महसूस हुआ था। वैसे भी वह काफी दर्द सह चुकी थी। और गहरी नींद में भो तो थी। उसकी चूत ठीक से मूत भी नहीं सकती ऐसी हालत हो गई थी। लेकिन परम ने देखा की उसके चेहरे पर एक सुकून था, भले वह ही नींद में थी।


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Shandaar update
 

Premkumar65

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परम ने कहा और उसने उसे 69 पोज में ऊपर खींच लिया। उसने चूत को अंदर-बाहर चाटा और किरण ने लंड को सबसे अच्छे से चूसा। यह उसका पहली बार था। अगले 15-20 मिनट में परम ने फिर से किरण में प्रवेश किया और इस बार दोनों ने पहली बार की तुलना में बहुत अच्छा आनंद लिया। लगभग 15 मिनट की सीधी चुदाई के बाद परम ने किरण को डॉगी पोज में चोदा। वह जोर से कराहने और चीखने लगी और इस बार परम ने स्खलन के समय लंड बाहर निकाला और किरण के मुंह में लंड डाल दिया। उसने उसे अपना सारा वीर्य निगलने और पीने के लिए मजबूर किया और ऐसा करते हुए उसने ‘वीर्य’ निगलने के लाभ के बारे में समझाया जैसा उसने सुंदरी को महक और सुधा को बताते सुना था। किरण के मुंह में लैंड ने मलाई की बौछार कर दी। और किरण के पास कोई मौक़ा नहीं था की वह थूंके।



****
यहाँ से आगे........


" तुम्हारा माल पसंद आया और बहुत स्वादिष्ट भी है।" किरण ने वीर्य का स्वाद लिया।


एक-दूसरे से लिपटे रहने के बाद, दोनों अलग हो गए, नग्न अवस्था में बाहर आए, पेशाब किया और वापस कमरे में लौट आए।

परम बैठ गया और किरण को अपने सामने खड़ा होने को कहा, पहले उसकी तरफ मुँह करके और फिर अपनी कमर उसकी तरफ करके।

किरण महक जैसी ही एक मांसल लड़की थी, साधारण दिखने वाली, 5'2" लंबी, मोटी जांघें, 34" साइज़ की गोल मोटी मांसल चूची, 34" से ज़्यादा साइज़ के कूल्हे और 24" कमर।
फनलवर निर्मित।

वह खूबसूरत तो नहीं थी, लेकिन चुदाई के लिए बिल्कुल अच्छी थी। एक असली मस्त माल।

“जानती हो किरण, तुम पूनम, छोटी बहू या सुंदरी जैसी सुंदर नहीं हो…लेकिन तुम्हारे साथ चुदाई में बहुत मज़ा है…जो एक बार तुझे चोदेगा वो तेरी गरम चूत का गुलाम हो जाएगा।”

“तो फिर एक बार और चोदो…मै लंड तैयार कर देती हूं…।”

परम के ना करने पर भी, किरण परम के ऊपर लेट गई, उसके शरीर को रगड़ा और लगभग आधे घंटे के बाद वह उसे ऊपर से चोदने लगी…।

“सच किरण…। मैंने बहुतों को चोदा है…तेरे जैसी चुदासी कोई नहीं…। चोद मुझे कुतिया।” और दोनों ने काफी देर तक एन्जॉय किया, उनका फोकस डिस्टर्ब हो गया।

“ये क्या कर रहे हो तुम लोग?” सुंदरी सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी, और चुची लगभग नंगी थी।

लेकिन दोनों इतना आनंद ले रहे थे कि किरण परम के लंड पर कूदती रही।

"साली तेरी शादी 20 दिन के बाद है...और कुतिया तू यहाँ अपनी चूत फड़वा रही है! कुछ दिन और नहीं संभल सकती!"

“दीदी, परम के जैसा चोदने वाला फिर कब मिलेगा! आह... बहुत मस्ती दी तेरे बेटे ने, मजा आ गया। जब तक यहाँ हूँ…रोज चुदवाऊंगी,किसी और को परम का लंड नहीं छूने दूंगी…। आप हमें क्षमा करे और किसी के आगे अपना मुंह ना खोले, विनती है मेरी आपसे।”

माँ को देखकर परम का उत्साह बढ़ गया, उसने किरण को सीधा किया और जोर-जोर से तब तक चोदा जब तक कि किरण ने उसे रुकने के लिए नहीं कहा।

“बस राजा…। अब मुझे रस पिला दो…।”

और सुंदरी ने किरण को परम का 'वीर्य' निगलते हुए देखा। और उसके मुंह में भी पानी आ गया। हाला की सेठजी का माल उसके मुंह में अभी भी कुछ् बुँदे यहाँ-वहा पड़ी थी।

“बहुत गरम माल है…। मैं इसे अपने मुनीम और यार विनोद से भी चुदवाऊंगी…। चूत दमदार है लेकिन यह मुनीमजी भी उसकी गांड का भोसड़ा बना ही देंगे। क्या करू, अब यह इतनी चुदासी भी है की कोई शरम के बिना ही अपने टाँगे फैला ली है तो मुनीमजी को तो मजा आएगा ही पर इस चुदास को भी लंड क्या होता है पता चलेगा।”

दोनों की सांसें वापस आने के बाद सुंदरी ने परम को बाहर जाने के लिए कहा।

“परम, बाहर जा। सेठानी को पता चलेगा कि तूने उसकी बहन की बेटी को चोदा दी है…वो तेरा लोडा काट देगी…।”

परम ने कपड़े पहने, पहले माँ को चूमा और फिर किरण को चूमा और बाहर चला गया।

“दीदी, परम ने आपको चोदा है ना…?” किरण ने पूछा।

“नहीं रे, मेरी ऐसी किस्मत कहा! साले के सामने कई बार नंगी हुई लेकिन उसे तुम लोग जैसी कुंवारी माल ही पसंद है…चूची भी नहीं दबाता है…। और कमबख्त मेरा बेटा भी तो है।” सुंदरी ने झूठ बोला।

“तु बोल कितना का लंड खा चुकी हो?” सुंदरी ने पूछा और अपना घुटना किरण की चुत पर दबाया। सुंदरी ने एक उंगली चुत में डाली और अंदर ले गई।

उधर किरण ने ब्लाउज के बटन खोलकर सुंदरी को टॉपलेस कर दिया।

“दीदी, तुम बहुत सुंदर हो,मैं बहुत घूमती हूं,लेकिन तुम्हारे जैसी सुंदर और मस्त औरत आज तक नहीं देखी, मस्त माल हो तुम। शायद उस से भी ज्यादा तुम्हारा यह अगला और पिछला माल होगा।”

किरण ने सबसे खूबसूरत महिला की चूची को सहलाया और कहा कि परम उसके जीवन में अब तक केवल एक ही है और वह उसकी गुलाम बन गई है।

“दीदी, तेरे बेटे ने मस्त कर दिया। मुझे रोज ही चुदाई चाहिए अब।“

“दूसरो से चुदवायेगी..?” सुंदरी ने पूछा। "परम जैसा ही मस्त कर देगा।"

सुंदरी चाहती थी कि उसके पति और यार को एक नई जवान चूत मिले।


यही तक


शाम को दूसरा दे दूंगी अगर मौक़ा मिला तब तक के लिए फनलवर की ओर से ।। जय भारत।।
Mast chuten mil rahi hain param ko.
 
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