परम ने कहा और उसने उसे 69 पोज में ऊपर खींच लिया। उसने चूत को अंदर-बाहर चाटा और किरण ने लंड को सबसे अच्छे से चूसा। यह उसका पहली बार था। अगले 15-20 मिनट में परम ने फिर से किरण में प्रवेश किया और इस बार दोनों ने पहली बार की तुलना में बहुत अच्छा आनंद लिया। लगभग 15 मिनट की सीधी चुदाई के बाद परम ने किरण को डॉगी पोज में चोदा। वह जोर से कराहने और चीखने लगी और इस बार परम ने स्खलन के समय लंड बाहर निकाला और किरण के मुंह में लंड डाल दिया। उसने उसे अपना सारा वीर्य निगलने और पीने के लिए मजबूर किया और ऐसा करते हुए उसने ‘वीर्य’ निगलने के लाभ के बारे में समझाया जैसा उसने सुंदरी को महक और सुधा को बताते सुना था। किरण के मुंह में लैंड ने मलाई की बौछार कर दी। और किरण के पास कोई मौक़ा नहीं था की वह थूंके।
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यहाँ से आगे........
" तुम्हारा माल पसंद आया और बहुत स्वादिष्ट भी है।" किरण ने वीर्य का स्वाद लिया।
एक-दूसरे से लिपटे रहने के बाद, दोनों अलग हो गए, नग्न अवस्था में बाहर आए, पेशाब किया और वापस कमरे में लौट आए।
परम बैठ गया और किरण को अपने सामने खड़ा होने को कहा, पहले उसकी तरफ मुँह करके और फिर अपनी कमर उसकी तरफ करके।
किरण महक जैसी ही एक मांसल लड़की थी, साधारण दिखने वाली, 5'2" लंबी, मोटी जांघें, 34" साइज़ की गोल मोटी मांसल चूची, 34" से ज़्यादा साइज़ के कूल्हे और 24" कमर। फनलवर निर्मित।
वह खूबसूरत तो नहीं थी, लेकिन चुदाई के लिए बिल्कुल अच्छी थी। एक असली मस्त माल।
“जानती हो किरण, तुम पूनम, छोटी बहू या सुंदरी जैसी सुंदर नहीं हो…लेकिन तुम्हारे साथ चुदाई में बहुत मज़ा है…जो एक बार तुझे चोदेगा वो तेरी गरम चूत का गुलाम हो जाएगा।”
“तो फिर एक बार और चोदो…मै लंड तैयार कर देती हूं…।”
परम के ना करने पर भी, किरण परम के ऊपर लेट गई, उसके शरीर को रगड़ा और लगभग आधे घंटे के बाद वह उसे ऊपर से चोदने लगी…।
“सच किरण…। मैंने बहुतों को चोदा है…तेरे जैसी चुदासी कोई नहीं…। चोद मुझे कुतिया।” और दोनों ने काफी देर तक एन्जॉय किया, उनका फोकस डिस्टर्ब हो गया।
“ये क्या कर रहे हो तुम लोग?” सुंदरी सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी, और चुची लगभग नंगी थी।
लेकिन दोनों इतना आनंद ले रहे थे कि किरण परम के लंड पर कूदती रही।
"साली तेरी शादी 20 दिन के बाद है...और कुतिया तू यहाँ अपनी चूत फड़वा रही है! कुछ दिन और नहीं संभल सकती!"
“दीदी, परम के जैसा चोदने वाला फिर कब मिलेगा! आह... बहुत मस्ती दी तेरे बेटे ने, मजा आ गया। जब तक यहाँ हूँ…रोज चुदवाऊंगी,किसी और को परम का लंड नहीं छूने दूंगी…। आप हमें क्षमा करे और किसी के आगे अपना मुंह ना खोले, विनती है मेरी आपसे।”
माँ को देखकर परम का उत्साह बढ़ गया, उसने किरण को सीधा किया और जोर-जोर से तब तक चोदा जब तक कि किरण ने उसे रुकने के लिए नहीं कहा।
“बस राजा…। अब मुझे रस पिला दो…।”
और सुंदरी ने किरण को परम का 'वीर्य' निगलते हुए देखा। और उसके मुंह में भी पानी आ गया। हाला की सेठजी का माल उसके मुंह में अभी भी कुछ् बुँदे यहाँ-वहा पड़ी थी।
“बहुत गरम माल है…। मैं इसे अपने मुनीम और यार विनोद से भी चुदवाऊंगी…। चूत दमदार है लेकिन यह मुनीमजी भी उसकी गांड का भोसड़ा बना ही देंगे। क्या करू, अब यह इतनी चुदासी भी है की कोई शरम के बिना ही अपने टाँगे फैला ली है तो मुनीमजी को तो मजा आएगा ही पर इस चुदास को भी लंड क्या होता है पता चलेगा।”
दोनों की सांसें वापस आने के बाद सुंदरी ने परम को बाहर जाने के लिए कहा।
“परम, बाहर जा। सेठानी को पता चलेगा कि तूने उसकी बहन की बेटी को चोदा दी है…वो तेरा लोडा काट देगी…।”
परम ने कपड़े पहने, पहले माँ को चूमा और फिर किरण को चूमा और बाहर चला गया।
“दीदी, परम ने आपको चोदा है ना…?” किरण ने पूछा।
“नहीं रे, मेरी ऐसी किस्मत कहा! साले के सामने कई बार नंगी हुई लेकिन उसे तुम लोग जैसी कुंवारी माल ही पसंद है…चूची भी नहीं दबाता है…। और कमबख्त मेरा बेटा भी तो है।” सुंदरी ने झूठ बोला।
“तु बोल कितना का लंड खा चुकी हो?” सुंदरी ने पूछा और अपना घुटना किरण की चुत पर दबाया। सुंदरी ने एक उंगली चुत में डाली और अंदर ले गई।
उधर किरण ने ब्लाउज के बटन खोलकर सुंदरी को टॉपलेस कर दिया।
“दीदी, तुम बहुत सुंदर हो,मैं बहुत घूमती हूं,लेकिन तुम्हारे जैसी सुंदर और मस्त औरत आज तक नहीं देखी, मस्त माल हो तुम। शायद उस से भी ज्यादा तुम्हारा यह अगला और पिछला माल होगा।”
किरण ने सबसे खूबसूरत महिला की चूची को सहलाया और कहा कि परम उसके जीवन में अब तक केवल एक ही है और वह उसकी गुलाम बन गई है।
“दीदी, तेरे बेटे ने मस्त कर दिया। मुझे रोज ही चुदाई चाहिए अब।“
“दूसरो से चुदवायेगी..?” सुंदरी ने पूछा। "परम जैसा ही मस्त कर देगा।"
सुंदरी चाहती थी कि उसके पति और यार को एक नई जवान चूत मिले।
यही तक
शाम को दूसरा दे दूंगी अगर मौक़ा मिला तब तक के लिए फनलवर की ओर से ।। जय भारत।।