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Napster

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परम ने कहा और उसने उसे 69 पोज में ऊपर खींच लिया। उसने चूत को अंदर-बाहर चाटा और किरण ने लंड को सबसे अच्छे से चूसा। यह उसका पहली बार था। अगले 15-20 मिनट में परम ने फिर से किरण में प्रवेश किया और इस बार दोनों ने पहली बार की तुलना में बहुत अच्छा आनंद लिया। लगभग 15 मिनट की सीधी चुदाई के बाद परम ने किरण को डॉगी पोज में चोदा। वह जोर से कराहने और चीखने लगी और इस बार परम ने स्खलन के समय लंड बाहर निकाला और किरण के मुंह में लंड डाल दिया। उसने उसे अपना सारा वीर्य निगलने और पीने के लिए मजबूर किया और ऐसा करते हुए उसने ‘वीर्य’ निगलने के लाभ के बारे में समझाया जैसा उसने सुंदरी को महक और सुधा को बताते सुना था। किरण के मुंह में लैंड ने मलाई की बौछार कर दी। और किरण के पास कोई मौक़ा नहीं था की वह थूंके।



****
यहाँ से आगे........


" तुम्हारा माल पसंद आया और बहुत स्वादिष्ट भी है।" किरण ने वीर्य का स्वाद लिया।


एक-दूसरे से लिपटे रहने के बाद, दोनों अलग हो गए, नग्न अवस्था में बाहर आए, पेशाब किया और वापस कमरे में लौट आए।

परम बैठ गया और किरण को अपने सामने खड़ा होने को कहा, पहले उसकी तरफ मुँह करके और फिर अपनी कमर उसकी तरफ करके।

किरण महक जैसी ही एक मांसल लड़की थी, साधारण दिखने वाली, 5'2" लंबी, मोटी जांघें, 34" साइज़ की गोल मोटी मांसल चूची, 34" से ज़्यादा साइज़ के कूल्हे और 24" कमर।
फनलवर निर्मित।

वह खूबसूरत तो नहीं थी, लेकिन चुदाई के लिए बिल्कुल अच्छी थी। एक असली मस्त माल।

“जानती हो किरण, तुम पूनम, छोटी बहू या सुंदरी जैसी सुंदर नहीं हो…लेकिन तुम्हारे साथ चुदाई में बहुत मज़ा है…जो एक बार तुझे चोदेगा वो तेरी गरम चूत का गुलाम हो जाएगा।”

“तो फिर एक बार और चोदो…मै लंड तैयार कर देती हूं…।”

परम के ना करने पर भी, किरण परम के ऊपर लेट गई, उसके शरीर को रगड़ा और लगभग आधे घंटे के बाद वह उसे ऊपर से चोदने लगी…।

“सच किरण…। मैंने बहुतों को चोदा है…तेरे जैसी चुदासी कोई नहीं…। चोद मुझे कुतिया।” और दोनों ने काफी देर तक एन्जॉय किया, उनका फोकस डिस्टर्ब हो गया।

“ये क्या कर रहे हो तुम लोग?” सुंदरी सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में थी, और चुची लगभग नंगी थी।

लेकिन दोनों इतना आनंद ले रहे थे कि किरण परम के लंड पर कूदती रही।

"साली तेरी शादी 20 दिन के बाद है...और कुतिया तू यहाँ अपनी चूत फड़वा रही है! कुछ दिन और नहीं संभल सकती!"

“दीदी, परम के जैसा चोदने वाला फिर कब मिलेगा! आह... बहुत मस्ती दी तेरे बेटे ने, मजा आ गया। जब तक यहाँ हूँ…रोज चुदवाऊंगी,किसी और को परम का लंड नहीं छूने दूंगी…। आप हमें क्षमा करे और किसी के आगे अपना मुंह ना खोले, विनती है मेरी आपसे।”

माँ को देखकर परम का उत्साह बढ़ गया, उसने किरण को सीधा किया और जोर-जोर से तब तक चोदा जब तक कि किरण ने उसे रुकने के लिए नहीं कहा।

“बस राजा…। अब मुझे रस पिला दो…।”

और सुंदरी ने किरण को परम का 'वीर्य' निगलते हुए देखा। और उसके मुंह में भी पानी आ गया। हाला की सेठजी का माल उसके मुंह में अभी भी कुछ् बुँदे यहाँ-वहा पड़ी थी।

“बहुत गरम माल है…। मैं इसे अपने मुनीम और यार विनोद से भी चुदवाऊंगी…। चूत दमदार है लेकिन यह मुनीमजी भी उसकी गांड का भोसड़ा बना ही देंगे। क्या करू, अब यह इतनी चुदासी भी है की कोई शरम के बिना ही अपने टाँगे फैला ली है तो मुनीमजी को तो मजा आएगा ही पर इस चुदास को भी लंड क्या होता है पता चलेगा।”

दोनों की सांसें वापस आने के बाद सुंदरी ने परम को बाहर जाने के लिए कहा।

“परम, बाहर जा। सेठानी को पता चलेगा कि तूने उसकी बहन की बेटी को चोदा दी है…वो तेरा लोडा काट देगी…।”

परम ने कपड़े पहने, पहले माँ को चूमा और फिर किरण को चूमा और बाहर चला गया।

“दीदी, परम ने आपको चोदा है ना…?” किरण ने पूछा।

“नहीं रे, मेरी ऐसी किस्मत कहा! साले के सामने कई बार नंगी हुई लेकिन उसे तुम लोग जैसी कुंवारी माल ही पसंद है…चूची भी नहीं दबाता है…। और कमबख्त मेरा बेटा भी तो है।” सुंदरी ने झूठ बोला।

“तु बोल कितना का लंड खा चुकी हो?” सुंदरी ने पूछा और अपना घुटना किरण की चुत पर दबाया। सुंदरी ने एक उंगली चुत में डाली और अंदर ले गई।

उधर किरण ने ब्लाउज के बटन खोलकर सुंदरी को टॉपलेस कर दिया।

“दीदी, तुम बहुत सुंदर हो,मैं बहुत घूमती हूं,लेकिन तुम्हारे जैसी सुंदर और मस्त औरत आज तक नहीं देखी, मस्त माल हो तुम। शायद उस से भी ज्यादा तुम्हारा यह अगला और पिछला माल होगा।”

किरण ने सबसे खूबसूरत महिला की चूची को सहलाया और कहा कि परम उसके जीवन में अब तक केवल एक ही है और वह उसकी गुलाम बन गई है।

“दीदी, तेरे बेटे ने मस्त कर दिया। मुझे रोज ही चुदाई चाहिए अब।“

“दूसरो से चुदवायेगी..?” सुंदरी ने पूछा। "परम जैसा ही मस्त कर देगा।"

सुंदरी चाहती थी कि उसके पति और यार को एक नई जवान चूत मिले।


यही तक


शाम को दूसरा दे दूंगी अगर मौक़ा मिला तब तक के लिए फनलवर की ओर से ।। जय भारत।।
बहुत ही गरमागरम कामुक और शानदार लाजवाब अपडेट है भाई मजा आ
अपडेट छोटा तो हैं लेकीन कहते हैं ना
छोटा पाकेट बडा धमाका
खैर देखते हैं आगे
 

Napster

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Update 23​



सुंदरी ने परम के साथ किरण की चुदाई देखी और उसने मुनीम और विनोद को इस युवा तंग योनि की पेशकश करने के बारे में सोचा।

“दूसरो से चुदवायेगी?” सुंदरी ने पूछा।।"परम जैसा ही मस्त कर देगा।"

“मैं तो तैयार हूं,लेकिन बदनामी नहीं होनी चाहिए। भरोसेमंद लंड होना चाहिए। अगर अच्छा और भरोसे का लंड होगा तो गांड भी मरवा लुंगी।”

“चिंता मत कर,तेरी शादी खूब धूम-धाम से होगी,तब तक अलग-अलग लंड का मजा ले।” सुंदरी ने किरण को दोपहर 11 बजे अपने घर आने को कहा।

दोनों ने चूमा, गले लगाया और प्यार किया।
फनलवर निर्मित

“वाह क्या सीन है!!!” एक चुदास दूसरी को चुदासिपन सिखा रही है।”

बड़ी भाभी को कमरे में देखकर किरण शरमा गई, फ्रॉक पहनी और कमरे से बाहर चली गई। छोटीबहू अंदर आई और उसने किरण को बाहर जाते देखा।

“ये किरण यहा क्या कर रही थी…?”

“देखती नहीं हो…इतना नया बेडशीट दिया था कि तुम और परम खूब प्यार से चुदाई करो।”

“हाँ वो तो हमने किया,परम ने मुझे मस्त कर दिया।” छोटी ने उत्तर दिया और परम की चुदाई से संतुष्टि व्यक्त की। उसने यह नहीं बताया कि ससुर ने भी उसे उसी बिस्तर पर चोदा था। और वही चुदी हुई चूत पर हमला कर के चले गए।

छोटी ने बिस्तर पर बहुत सारे डार्क मरून धब्बे देखे।

“लगता है किरण कुंवारी थी, तभी ये सारे दाग है! लगता है उसकी चूत ने अपनी शील गवा दी है। चलो अच्छा हुआ कभी तो शील टूटना ही था।” छोटी ने टिप्पणी की।

सुंदरी ने की पुष्टि। “हां, वो कुवारी तो थी लेकिन अब नहीं है, परम के लंड ने उसकी चूत को सही तरीके से चूत में तब्दील कर दी है। अब वह माल दुसरे लोडो के लिए उपलब्ध हो गई है। अपनी मस्ती से अब जो चाहे लंड को अपने अन्दर ले सकती है।“ सुंदरी ने छोटी की गांड की दरार पर हाथ रखते हुए कहा।

“छोटी, ये दोनो माँ बेटे पुरे गाव को बरबाद कर देंगे…।” बड़ी ने टिप्पणी की। और साथ-साथ सुंदरी के हाथ जो छोटी की गांड की दरार संभल रही थी उसे झटक कर अपनी गांड पर रखा।

“मैंने क्या किया…?” सुंदरी ने पूछा।

“और क्या! दीदी ठीक ही तो कहती है।” छोटी ने कहा।

'तेरा बेटा परम अपना मस्त लोडा देखा कर सब छोटी-बड़ी चुतो को चोद रहा है और मुझे तो उसने बिना पैसे का गुलाम बना लिया है।'

“और तू सुंदरी, सारे मर्दों को बरबाद कर ही रही है।” बड़ी ने कहा। “हमारे लिए कुछ तो छोड़ दे। कुछ अच्छे लंड हमारी चूत के लिए भो छोड़ दे। जो आराम से हमारी चूत में चरक सके।”
फनलवर की पेशकश

“जो भी मर्द आता है सुंदरी के सुन्दरता का वखान कर के उसे चोदने की तमन्ना लिए बैठता है।“

“जानती है छोटी, तेरे जेठ ने कहा है कि इस बार जैसे भी हो सुंदरी और महक को चोदेगा ही और मुझे अपने देवर से चुदवाने के लिए कह रहा है।”

“दीदी यहीं हाल तेरे देवर का भी है। वो हरामी भी बोल रहा था कि इस बार सुंदरी और पूनम को चोदेगा ही। साला अब भी पूनम से शादी करना चाहता है, और जानती हो, सुंदरी दीदी, वो मुझे बड़े भैया की रखैल बनाने के लिए कहा रहा है और मजबूर कर रहा है। कहता है की मुझे भी अब चुदासी की तरह हर लंड को शांत करने की नौकरी कर ही देनी चाहिए। बोलो अब मैं क्या करू?''

बड़ीबहू ने देखा नहीं कि छोटी ने सुंदरी को आंख मारी। उसे क्या पता था कि छोटी को ससुर ने पहले से ही अपनी रखैल बना रखा है। और अपने लंड को खाली कर ही देता है। शायद हो सकता है की वह ससुरजी के लंड से ही गर्भवती हो जाए। लेकिन वह मुनीमजी के लंड से परम जैसे को जन्म देना चाहती थी।


अरे तो इसमें क्या समस्या है…।” सुंदरी ने कहा। मैंने कोई गुनाह तो नहीं किया, अब मैं क्या बताऊ मैं हु ही ऐसी, भगवान् ने दिया मैंने लिया। और सुनो मैं वो कढाई में बना व्यंजन हूँ की हर कोई मेरे व्यंजन को खाना पसंद करता है।

और तुम लोग सिर्फ एक प्रेशर कुकर में बना व्यंजन हो जो गरम तो होता है पर टेस्ट कढाई में बना व्यंजन जैसा नहीं होता। समजी? सुंदरी ने आगे कहा;

"मेरा बेटा और पति तुम लोगों को चोद ही रहा है,मैं भी तेरे पति से चुदवा लुंगी,महेक और पूनम का मैं नहीं जानती। उनको शायद छोड़ देना चाहिए, कच्चे माल है और मुनीमजी और परम उन दोनों की चूत को संभल लेगा, वैसे भी विनोद है महक के लिए, उनकी शादी भी करा दूंगी, मुनीम से कह तो दिया है अब देखो क्या होता है! लेकिन अगर महक अपनी चूत दूसरो के लिए खोलती है तो मुझे कोई दिक्कत नहीं पर बहोत गरम माल है ऐसे-वैसे साधारण सा लंड का काम नहीं जो उसे अपने लंड की गुलाम बना सके, मुझे तो लगता है उसका बाप ही सही है उसके लिए, लेकिन साला कुछ करता नहीं।"

अरे....ऐसा कैसा महक का माल है जो हमसे अलग है? छोटी ने पूछा।


सुंदरी: “महक को तुम जानती नहीं, सिर्फ उसकी चूत की महक से ही ना जाने कितने लंड से पानी चरक पड़ता है। वह एक आग है। एक ऐसा व्यंजन है अगर वह जल्दी और मनचाहे अंदाज और लंड को मिल जाती है तो अच्छी डिश बन सकती है। बस यह समज लो की, जहाँ प्रेशर कुकर में खाना बहुत जल्दी पक जाता है वहीँ चूल्हे और कढाई में खाना लेट पकता है। मैं और तुम कढाई या प्रेशर कुकर है या नहीं पर महक की चूत का यही कारण है कि अगर असली स्वादु लोग यानी की चोदु लंड, धैर्य और मेहनत के साथ चूल्हे कढ़ाई में पके खाने को ही पसंद करते है। लेकिन एक बात तो है की दोनों बर्तन में गर्मी ज्यादा होती है और ठंडा जल्दी नहीं होता मगर असली स्वादु लोग धैर्य और मेहनत के साथ चूल्हे कढ़ाई में पके खाने को ही पसंद करते है। पर असली चूत का मजा एक अनुभवी चूत या भोस ही दे सकती है तभी तो असली स्वादु लोग धैर्य और मेहनत के साथ चूल्हे कढ़ाई में पके खाने को ही पसंद करते है। तभी तो आम भारतीय रसोई से चूल्हे कढ़ाई लगभग गायब हो गए है। क्यों की लंड अब रुक नहीं सकता। तेरे पति देवो में यह बात नहीं है की वह एक कढाई या फिर प्रेशर कुकर दोनों को ठंडा कर सके तभी तो तुम मुनीम जैसे लंड से प्रेम करती हो। और चाहती हो की सदा वह तुम्हारी चूत चोदते रहे।“ सुंदरी अपने पति को प्रमोट कर रही थी शायद।

“नहीं दीदी…। एक बार वो तुम्हें चोद लेगा तो फिर कभी हमें टच भी नहीं करेगा।” बड़ी ने कहा।

“हा दीदी ठीक कहती है।” छोटी ने कहा।

तभी किरण एक नौकरानी के साथ चाय लेकर लौटी। नौकरानी के जाने के बाद बड़ी बहू ने किरण से पूछा कि क्या परम ने अंदर चूत में ही वीर्यपात कर दिया है!

“हा भाभी…पहली बार मैंने पानी अंदर जाने दिया लेकिन बाद में दोनों बार पी गई।” उसने एक रंडी की तरह उत्तर दिया।

“कुतिया बच्चा रह जाएगा तो क्या करेगी! तेरी माँ चुद जायेगी अगर बच्चा रह गया तो! किस-किस को जवाब देती फिरेगी, अभी तो शादी है कुछ समय के बाद, परम तो चोद के निकल गया और अपना माल तेरी चूत में छोड़ गया, कोई उसे नहीं पूछेगा पर तेरी तो गांड मार देंगे, खास कर तेरे ससुराल वाले। चल एक पुरिया दे देती हूं। फिर जितना चाहे दिन भर चुदवा, जैसे चाहे अपनी चूत को फड़वा कोइ प्रोब्लेम नहीं होगी, कोई बच्चा नहीं रहेगा। लेकिन बता तो, तूने परम को पटाया कैसे! तू कल ही तो आई है! खिलाड़ी लग रही हो।”

फिर चाय पीते समय किरण ने अपनी भाभी और ड्राइवर की कहानी सुनाई जिससे उसके अंदर सेक्स जाग गया और परम को देखते ही उसने परम से ही अपनी वर्जिनिटी तुड़वाने का फैसला कर लिया।

“भाभी, वो तो मान ही नहीं रहा था, लेकिन आख़िर मैं भी लड़की ही हूं। अपना माल दिखाकर उसे पटा ही लिया। लेकिन भाभी,परम ने सच मुझे स्वर्ग में पहुंचा दिया था, मुझे तो लगता है की इस से अच्चा स्वर्ग होता नहीं होगा। क्या गजब का लंड है। मालदार है।”

“चल तुझे अपने भैया से चुदवा कर अब नर्क में ले जाती हूँ। और हाँ पुडिया खा ले और चूत को खोल दे।" बड़ी बहू किरण को अपने कमरे में ले गई। पति अभी भी सो रहा था, शुक्र है उसने अपना शरीर ढक लिया था। उषा ने अलमारी से एक पैकेट निकाला और किरण को पानी के साथ एक गोली गटकने दी।

"अब जितना मन करे चुदवा, कोई बच्चा नहीं रहेगा। लकिन याद रहे कल फिर से ले लेना जब भी तेरी चूत में लंड का माल पड़े, यह गोली ले लेना, और हां, लंड को अपने में ही खाली करना होता है तो गोली आवश्यक है, यहाँ कोइ भोसडिका निरोध इस्तेमाल नहीं करता, सब नंगे लंड लेके चूत और गांड मारते है। अब मजे से जितना चुदवा सकती है चुदवा। और सच कहू तो बिना आवरण ही चुदवाने में मजा है।"
फनलवर की रचना

उसने उसे पाँच खुराक दीं। "आ जा बड़े भैया के पास सो जा। उन्हें भी अपनी जवानी का रस पिला दे।" बड़ी ने किरण को भाई के साथ चुदने को कहा।

"अभी नहीं, पहले चूत को परम का लंड खूब खाने दो।"

किरण अभी खुश थी उसे सब के सामने अब चुदने का लायसंस मिल गया था। बड़ी ने उसका हाथ पकड़ कर अपने पति यानी की किरण के भाई के लंड पर रख दिया और बोली: “इसे भी खा ले, मजा आएगी वैसे यह लंड परम जैसा तो नहीं है, पर नया लंड तो है। अब मैं और तू, या फिर गाँव की सभी औरतो को एक तरीके से नए लंड की तलाश तो रहती ही है, एक नयापन जैसे मर्दों को होता है। हर नए लंड से अपनी कामोत्तेजना बढती है चाहे लंड छोटा, बड़ा,पतला, टेढ़ा, कोई भी हो। हर मर्द यही कहेगा की तेरे जैसा माल कोई नहीं है, वैसे ही हमें भी नए लंड का मजा लेने के लिए लंड कोई भी और कैसा भी हो चलता है बस अपने वीर्य से अपनी चूत, गांड या मुंह भर दे। समजी! यही दुनिया का दस्तूर है। और हां जब भी किसी छोटे या पतले लंड से चुदवाओ ऊउन्ह्ह, आआअह्हह्हह करना मत भूलना, और दमार लंड तो तुज से बुलवा ही लेगा।”

लेकिन किरण ने भाई के लंड पर थोडा हाथ फिराके छोड़ दिया,किरण कमरे से बाहर आई। वह बहुत खुश थी।




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आज के लिए बस यही तक


फिर मिलेंगे एक नए अपडेट के साथ रब तक के लिए फनलवर की तरफ से जय भारत
बहुत ही शानदार लाजवाब दमदार और जबरदस्त कामुक अपडेट है मजा आ गया
किरण को तो कोई भी अपने मनचाहे लंड से चुदने का खुला आमंत्रण मिल गया है बस वो उसका इस्तेमाल किस तरहा से करती है
खैर देखते हैं आगे क्या होता है
अगले रोमांचकारी धमाकेदार और चुदाईदार अपडेट की प्रतिक्षा रहेगी जल्दी से दिजिएगा
 

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बहुत गजब लिखा है । प्रेशर कुकर, कढ़ाई, का इस्तेमाल इस तरीके से करोगे आप मैने तो कल्पना ही नही की थी । सुन्दरी के मुंह से क्या वाक्य कहलवाया एक उदाहरण बन गया है । मैं हूँ ही ऐसी भगवान ने दिया और मैने लिया । कितना असरदार और सटीक बैठता है सुन्दरी के मुंह से मजा ही आ गया । साथ ने दोनों बहुओं को प्रेशर कुकर में बना हुआ व्यंजन और खुद को तथा अपनी बेटी महक के लिए चूल्हे पर कढ़ाई में बने व्यंजन से तुलना करके ऐसा करारा जवाब दिया है कि दोनों बहुओं की बोलती बंद हो गई । गजब का संवाद रचा है आपने इस कहानी के हिसाब से एकदम सटीक उदाहरण सहित असरदार शब्दों का प्रयोग करते हुए वह भी एक मुख्य किरदार के मुंह से कहलवाए है कि बात में वजन रहे ।
शुक्रिया दोस्त Ashiq Baba

यह संवाद आप ही की देन है और उसके लिए आप का धन्यवाद

आप को याद होगा मुझे आप का यह डायलोग बहोत पसंद आया था और मैंने कहा था की मैं इसे कही न कही इस्तेमाल कर लुंगी शायद आप को याद नहीं

और मुझे कोई शरम नहीं यह कहने में के मैंने यह संवाद के शब्द आपकी कोमेंट से लिए है

आप सब के लिए निचे कोपी कर देती हूँ आप ही के संवाद कैसे थे और मैंने कैसे उपयोग किया है


थैंक्स जी, आपके बेहतरीन रिप्लाई के लिए । अशुभ मुहूर्त तो मैं नही जानता मगर साथ ही परम सुन्दरी वाली अति कामुक और चोदू गाँव की सुलभ सैक्स वाली कहानी और ऊपर से जल्दी जल्दी अपडेट वाली कहानी के चलते पाठक उस और से यहाँ शिफ्ट हो गए है । सबको गर्मागर्म मसाले दार सामग्री चाहिए होती है । और वह अगर जल्दी और मनचाहे अंदाज में मिल रही है तो फिर दूसरी डिश पर लोग कम ही जाना पसंद करेंगे । उस कहानी में और इस कहानी में ये काफी फर्क है । जहाँ प्रेशर कुकर में खाना बहुत जल्दी पक जाता है वहीँ चूल्हे और कढाई में खाना लेट पकता है । यही कारण है कि आम भारतीय रसोई से चूल्हे कढ़ाई लगभग गायब हो गए है । मगर असली स्वादु लोग धैर्य और मेहनत के साथ चूल्हे कढ़ाई में पके खाने को ही पसंद करते है । मैं भी उनमें से एक हु । लुई और जानकी के एपिसोड का बेसब्री से इंतजार रहेगा । आपसे एक और गुजारिश है कृपया वहाँ के अपडेट की सूचना यहाँ भी दे देवे ।



पेज 287 पोस्ट #2,868



वाह एक बहेतारिन कोमेंट दोस्त



आपकी यह लिखावट मैंने नोट कर ली है किसी कहानी में यह लिखावट जुरूर एड् करुँगी और वह भी आपकी परमिशन यही से ले लेती हूँ :DD:



कही मेरी कहानी में आपके शब्द मिल जाए तो विरोध ना जताए प्लीज़



बढ़िया शब्द चयन ......................impressive..................



इस कोमेंट से सहमत हूँ दोस्त परम-सुंदरी को मैंने काफी बड़ा लम्बाई देने की सोची है और लूई के पन्ने में उतनी लम्बाई नहीं होगी क्यों की यह पन्ने है मतलब जानकी कुछ एपिसोड तक ही है बाकी लूई क्या क्या देखता है और समजता है उस पर फोकस है.................. उसके पन्ने में उसने क्या क्या लिखा है................



आपका सुझाव अच्छा है आगे से ध्यान से लूई के पन्ने के अपडेट के बारे में यहाँ साँझा करती रहूंगी..................



शुक्रिया दोस्त



#2,870



आपको मेरे शब्दों और सुझाव को अपनी कहानी में ऐड करनी की फुल परमिशन है जी । आप बेझिझक इन्हें प्रयोग कर सकते हैब। थैंक्स ।



#2,872


शुक्रिया दोस्त............
 

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sunoanuj

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सुंदरी ने परम के साथ किरण की चुदाई देखी और उसने मुनीम और विनोद को इस युवा तंग योनि की पेशकश करने के बारे में सोचा।

“दूसरो से चुदवायेगी?” सुंदरी ने पूछा।।"परम जैसा ही मस्त कर देगा।"

“मैं तो तैयार हूं,लेकिन बदनामी नहीं होनी चाहिए। भरोसेमंद लंड होना चाहिए। अगर अच्छा और भरोसे का लंड होगा तो गांड भी मरवा लुंगी।”

“चिंता मत कर,तेरी शादी खूब धूम-धाम से होगी,तब तक अलग-अलग लंड का मजा ले।” सुंदरी ने किरण को दोपहर 11 बजे अपने घर आने को कहा।

दोनों ने चूमा, गले लगाया और प्यार किया।
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“वाह क्या सीन है!!!” एक चुदास दूसरी को चुदासिपन सिखा रही है।”

बड़ी भाभी को कमरे में देखकर किरण शरमा गई, फ्रॉक पहनी और कमरे से बाहर चली गई। छोटीबहू अंदर आई और उसने किरण को बाहर जाते देखा।

“ये किरण यहा क्या कर रही थी…?”

“देखती नहीं हो…इतना नया बेडशीट दिया था कि तुम और परम खूब प्यार से चुदाई करो।”

“हाँ वो तो हमने किया,परम ने मुझे मस्त कर दिया।” छोटी ने उत्तर दिया और परम की चुदाई से संतुष्टि व्यक्त की। उसने यह नहीं बताया कि ससुर ने भी उसे उसी बिस्तर पर चोदा था। और वही चुदी हुई चूत पर हमला कर के चले गए।

छोटी ने बिस्तर पर बहुत सारे डार्क मरून धब्बे देखे।

“लगता है किरण कुंवारी थी, तभी ये सारे दाग है! लगता है उसकी चूत ने अपनी शील गवा दी है। चलो अच्छा हुआ कभी तो शील टूटना ही था।” छोटी ने टिप्पणी की।

सुंदरी ने की पुष्टि। “हां, वो कुवारी तो थी लेकिन अब नहीं है, परम के लंड ने उसकी चूत को सही तरीके से चूत में तब्दील कर दी है। अब वह माल दुसरे लोडो के लिए उपलब्ध हो गई है। अपनी मस्ती से अब जो चाहे लंड को अपने अन्दर ले सकती है।“ सुंदरी ने छोटी की गांड की दरार पर हाथ रखते हुए कहा।

“छोटी, ये दोनो माँ बेटे पुरे गाव को बरबाद कर देंगे…।” बड़ी ने टिप्पणी की। और साथ-साथ सुंदरी के हाथ जो छोटी की गांड की दरार संभल रही थी उसे झटक कर अपनी गांड पर रखा।

“मैंने क्या किया…?” सुंदरी ने पूछा।

“और क्या! दीदी ठीक ही तो कहती है।” छोटी ने कहा।

'तेरा बेटा परम अपना मस्त लोडा देखा कर सब छोटी-बड़ी चुतो को चोद रहा है और मुझे तो उसने बिना पैसे का गुलाम बना लिया है।'

“और तू सुंदरी, सारे मर्दों को बरबाद कर ही रही है।” बड़ी ने कहा। “हमारे लिए कुछ तो छोड़ दे। कुछ अच्छे लंड हमारी चूत के लिए भो छोड़ दे। जो आराम से हमारी चूत में चरक सके।”
फनलवर की पेशकश

“जो भी मर्द आता है सुंदरी के सुन्दरता का वखान कर के उसे चोदने की तमन्ना लिए बैठता है।“

“जानती है छोटी, तेरे जेठ ने कहा है कि इस बार जैसे भी हो सुंदरी और महक को चोदेगा ही और मुझे अपने देवर से चुदवाने के लिए कह रहा है।”

“दीदी यहीं हाल तेरे देवर का भी है। वो हरामी भी बोल रहा था कि इस बार सुंदरी और पूनम को चोदेगा ही। साला अब भी पूनम से शादी करना चाहता है, और जानती हो, सुंदरी दीदी, वो मुझे बड़े भैया की रखैल बनाने के लिए कहा रहा है और मजबूर कर रहा है। कहता है की मुझे भी अब चुदासी की तरह हर लंड को शांत करने की नौकरी कर ही देनी चाहिए। बोलो अब मैं क्या करू?''

बड़ीबहू ने देखा नहीं कि छोटी ने सुंदरी को आंख मारी। उसे क्या पता था कि छोटी को ससुर ने पहले से ही अपनी रखैल बना रखा है। और अपने लंड को खाली कर ही देता है। शायद हो सकता है की वह ससुरजी के लंड से ही गर्भवती हो जाए। लेकिन वह मुनीमजी के लंड से परम जैसे को जन्म देना चाहती थी।


अरे तो इसमें क्या समस्या है…।” सुंदरी ने कहा। मैंने कोई गुनाह तो नहीं किया, अब मैं क्या बताऊ मैं हु ही ऐसी, भगवान् ने दिया मैंने लिया। और सुनो मैं वो कढाई में बना व्यंजन हूँ की हर कोई मेरे व्यंजन को खाना पसंद करता है।

और तुम लोग सिर्फ एक प्रेशर कुकर में बना व्यंजन हो जो गरम तो होता है पर टेस्ट कढाई में बना व्यंजन जैसा नहीं होता। समजी? सुंदरी ने आगे कहा;

"मेरा बेटा और पति तुम लोगों को चोद ही रहा है,मैं भी तेरे पति से चुदवा लुंगी,महेक और पूनम का मैं नहीं जानती। उनको शायद छोड़ देना चाहिए, कच्चे माल है और मुनीमजी और परम उन दोनों की चूत को संभल लेगा, वैसे भी विनोद है महक के लिए, उनकी शादी भी करा दूंगी, मुनीम से कह तो दिया है अब देखो क्या होता है! लेकिन अगर महक अपनी चूत दूसरो के लिए खोलती है तो मुझे कोई दिक्कत नहीं पर बहोत गरम माल है ऐसे-वैसे साधारण सा लंड का काम नहीं जो उसे अपने लंड की गुलाम बना सके, मुझे तो लगता है उसका बाप ही सही है उसके लिए, लेकिन साला कुछ करता नहीं।"

अरे....ऐसा कैसा महक का माल है जो हमसे अलग है? छोटी ने पूछा।


सुंदरी: “महक को तुम जानती नहीं, सिर्फ उसकी चूत की महक से ही ना जाने कितने लंड से पानी चरक पड़ता है। वह एक आग है। एक ऐसा व्यंजन है अगर वह जल्दी और मनचाहे अंदाज और लंड को मिल जाती है तो अच्छी डिश बन सकती है। बस यह समज लो की, जहाँ प्रेशर कुकर में खाना बहुत जल्दी पक जाता है वहीँ चूल्हे और कढाई में खाना लेट पकता है। मैं और तुम कढाई या प्रेशर कुकर है या नहीं पर महक की चूत का यही कारण है कि अगर असली स्वादु लोग यानी की चोदु लंड, धैर्य और मेहनत के साथ चूल्हे कढ़ाई में पके खाने को ही पसंद करते है। लेकिन एक बात तो है की दोनों बर्तन में गर्मी ज्यादा होती है और ठंडा जल्दी नहीं होता मगर असली स्वादु लोग धैर्य और मेहनत के साथ चूल्हे कढ़ाई में पके खाने को ही पसंद करते है। पर असली चूत का मजा एक अनुभवी चूत या भोस ही दे सकती है तभी तो असली स्वादु लोग धैर्य और मेहनत के साथ चूल्हे कढ़ाई में पके खाने को ही पसंद करते है। तभी तो आम भारतीय रसोई से चूल्हे कढ़ाई लगभग गायब हो गए है। क्यों की लंड अब रुक नहीं सकता। तेरे पति देवो में यह बात नहीं है की वह एक कढाई या फिर प्रेशर कुकर दोनों को ठंडा कर सके तभी तो तुम मुनीम जैसे लंड से प्रेम करती हो। और चाहती हो की सदा वह तुम्हारी चूत चोदते रहे।“ सुंदरी अपने पति को प्रमोट कर रही थी शायद।

“नहीं दीदी…। एक बार वो तुम्हें चोद लेगा तो फिर कभी हमें टच भी नहीं करेगा।” बड़ी ने कहा।

“हा दीदी ठीक कहती है।” छोटी ने कहा।

तभी किरण एक नौकरानी के साथ चाय लेकर लौटी। नौकरानी के जाने के बाद बड़ी बहू ने किरण से पूछा कि क्या परम ने अंदर चूत में ही वीर्यपात कर दिया है!

“हा भाभी…पहली बार मैंने पानी अंदर जाने दिया लेकिन बाद में दोनों बार पी गई।” उसने एक रंडी की तरह उत्तर दिया।

“कुतिया बच्चा रह जाएगा तो क्या करेगी! तेरी माँ चुद जायेगी अगर बच्चा रह गया तो! किस-किस को जवाब देती फिरेगी, अभी तो शादी है कुछ समय के बाद, परम तो चोद के निकल गया और अपना माल तेरी चूत में छोड़ गया, कोई उसे नहीं पूछेगा पर तेरी तो गांड मार देंगे, खास कर तेरे ससुराल वाले। चल एक पुरिया दे देती हूं। फिर जितना चाहे दिन भर चुदवा, जैसे चाहे अपनी चूत को फड़वा कोइ प्रोब्लेम नहीं होगी, कोई बच्चा नहीं रहेगा। लेकिन बता तो, तूने परम को पटाया कैसे! तू कल ही तो आई है! खिलाड़ी लग रही हो।”

फिर चाय पीते समय किरण ने अपनी भाभी और ड्राइवर की कहानी सुनाई जिससे उसके अंदर सेक्स जाग गया और परम को देखते ही उसने परम से ही अपनी वर्जिनिटी तुड़वाने का फैसला कर लिया।

“भाभी, वो तो मान ही नहीं रहा था, लेकिन आख़िर मैं भी लड़की ही हूं। अपना माल दिखाकर उसे पटा ही लिया। लेकिन भाभी,परम ने सच मुझे स्वर्ग में पहुंचा दिया था, मुझे तो लगता है की इस से अच्चा स्वर्ग होता नहीं होगा। क्या गजब का लंड है। मालदार है।”

“चल तुझे अपने भैया से चुदवा कर अब नर्क में ले जाती हूँ। और हाँ पुडिया खा ले और चूत को खोल दे।" बड़ी बहू किरण को अपने कमरे में ले गई। पति अभी भी सो रहा था, शुक्र है उसने अपना शरीर ढक लिया था। उषा ने अलमारी से एक पैकेट निकाला और किरण को पानी के साथ एक गोली गटकने दी।

"अब जितना मन करे चुदवा, कोई बच्चा नहीं रहेगा। लकिन याद रहे कल फिर से ले लेना जब भी तेरी चूत में लंड का माल पड़े, यह गोली ले लेना, और हां, लंड को अपने में ही खाली करना होता है तो गोली आवश्यक है, यहाँ कोइ भोसडिका निरोध इस्तेमाल नहीं करता, सब नंगे लंड लेके चूत और गांड मारते है। अब मजे से जितना चुदवा सकती है चुदवा। और सच कहू तो बिना आवरण ही चुदवाने में मजा है।"
फनलवर की रचना

उसने उसे पाँच खुराक दीं। "आ जा बड़े भैया के पास सो जा। उन्हें भी अपनी जवानी का रस पिला दे।" बड़ी ने किरण को भाई के साथ चुदने को कहा।

"अभी नहीं, पहले चूत को परम का लंड खूब खाने दो।"

किरण अभी खुश थी उसे सब के सामने अब चुदने का लायसंस मिल गया था। बड़ी ने उसका हाथ पकड़ कर अपने पति यानी की किरण के भाई के लंड पर रख दिया और बोली: “इसे भी खा ले, मजा आएगी वैसे यह लंड परम जैसा तो नहीं है, पर नया लंड तो है। अब मैं और तू, या फिर गाँव की सभी औरतो को एक तरीके से नए लंड की तलाश तो रहती ही है, एक नयापन जैसे मर्दों को होता है। हर नए लंड से अपनी कामोत्तेजना बढती है चाहे लंड छोटा, बड़ा,पतला, टेढ़ा, कोई भी हो। हर मर्द यही कहेगा की तेरे जैसा माल कोई नहीं है, वैसे ही हमें भी नए लंड का मजा लेने के लिए लंड कोई भी और कैसा भी हो चलता है बस अपने वीर्य से अपनी चूत, गांड या मुंह भर दे। समजी! यही दुनिया का दस्तूर है। और हां जब भी किसी छोटे या पतले लंड से चुदवाओ ऊउन्ह्ह, आआअह्हह्हह करना मत भूलना, और दमार लंड तो तुज से बुलवा ही लेगा।”

लेकिन किरण ने भाई के लंड पर थोडा हाथ फिराके छोड़ दिया,किरण कमरे से बाहर आई। वह बहुत खुश थी।




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आज के लिए बस यही तक


फिर मिलेंगे एक नए अपडेट के साथ रब तक के लिए फनलवर की तरफ से जय भारत
बहुत ही अच्छा अपडेट दिया है
 

Ashiq Baba

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शुक्रिया दोस्त Ashiq Baba

यह संवाद आप ही की देन है और उसके लिए आप का धन्यवाद

आप को याद होगा मुझे आप का यह डायलोग बहोत पसंद आया था और मैंने कहा था की मैं इसे कही न कही इस्तेमाल कर लुंगी शायद आप को याद नहीं

और मुझे कोई शरम नहीं यह कहने में के मैंने यह संवाद के शब्द आपकी कोमेंट से लिए है


आप सब के लिए निचे कोपी कर देती हूँ आप ही के संवाद कैसे थे और मैंने कैसे उपयोग किया है


थैंक्स जी, आपके बेहतरीन रिप्लाई के लिए । अशुभ मुहूर्त तो मैं नही जानता मगर साथ ही परम सुन्दरी वाली अति कामुक और चोदू गाँव की सुलभ सैक्स वाली कहानी और ऊपर से जल्दी जल्दी अपडेट वाली कहानी के चलते पाठक उस और से यहाँ शिफ्ट हो गए है । सबको गर्मागर्म मसाले दार सामग्री चाहिए होती है । और वह अगर जल्दी और मनचाहे अंदाज में मिल रही है तो फिर दूसरी डिश पर लोग कम ही जाना पसंद करेंगे । उस कहानी में और इस कहानी में ये काफी फर्क है । जहाँ प्रेशर कुकर में खाना बहुत जल्दी पक जाता है वहीँ चूल्हे और कढाई में खाना लेट पकता है । यही कारण है कि आम भारतीय रसोई से चूल्हे कढ़ाई लगभग गायब हो गए है । मगर असली स्वादु लोग धैर्य और मेहनत के साथ चूल्हे कढ़ाई में पके खाने को ही पसंद करते है । मैं भी उनमें से एक हु । लुई और जानकी के एपिसोड का बेसब्री से इंतजार रहेगा । आपसे एक और गुजारिश है कृपया वहाँ के अपडेट की सूचना यहाँ भी दे देवे ।



पेज 287 पोस्ट #2,868



वाह एक बहेतारिन कोमेंट दोस्त



आपकी यह लिखावट मैंने नोट कर ली है किसी कहानी में यह लिखावट जुरूर एड् करुँगी और वह भी आपकी परमिशन यही से ले लेती हूँ :DD:



कही मेरी कहानी में आपके शब्द मिल जाए तो विरोध ना जताए प्लीज़



बढ़िया शब्द चयन ......................impressive..................



इस कोमेंट से सहमत हूँ दोस्त परम-सुंदरी को मैंने काफी बड़ा लम्बाई देने की सोची है और लूई के पन्ने में उतनी लम्बाई नहीं होगी क्यों की यह पन्ने है मतलब जानकी कुछ एपिसोड तक ही है बाकी लूई क्या क्या देखता है और समजता है उस पर फोकस है.................. उसके पन्ने में उसने क्या क्या लिखा है................



आपका सुझाव अच्छा है आगे से ध्यान से लूई के पन्ने के अपडेट के बारे में यहाँ साँझा करती रहूंगी..................



शुक्रिया दोस्त



#2,870



आपको मेरे शब्दों और सुझाव को अपनी कहानी में ऐड करनी की फुल परमिशन है जी । आप बेझिझक इन्हें प्रयोग कर सकते हैब। थैंक्स ।



#2,872


शुक्रिया दोस्त............
थैंक यू जी । मुझे ये सब अच्छे से याद है । और आपका बहुत बहुत धन्यवाद करना चाहता हूँ कि आपने मेरे उदाहरण को अपनी इस बेहतरीन और अतिलोकप्रिय कहानी में स्थान दिया है । वह भी परमिशन मांग कर । आगे से आपको मेरे द्वारा लिखे कोई लाइन पसंद आए बिना झिझक इस्तेमाल कर लेवे । परमिशन मांग कर मुझे शर्मिंदा ना करे । आप इतनी बड़ी और उत्कृष्ट लेखिका होते हुए भी सहर्ष ही कहानी के लिए हमारे कमैंट्स में से कुछ जरा सा उठा कर अपनी नौलखा हार की बुनाई में उसे उचित जगह पर अपने हिसाब से तराश कर प्रयोग कर लेते है तो उस जरा सी चीज की भी कीमत नौलखा हार ही हो जाती है ।
आपकी साफगोई और सहजता का हम दिल से सम्मान करते है । धन्यवाद जी ।
 

Iron Man

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यहाँ सेठ की दोनो बहुओं को सुन्दरी, महक और पूनम की सुंदरता से भी जलन जाहिर होती है कि उनके पति इन तीनो के प्रति आकर्षित क्यो कर है । जबकि दोनो बहुएँ अच्छे खासे सेठो के परिवार से है और उनके पति भी अच्छे पैसे वाले है फिर भी उन दोनों की उनके पति इतनी कदर नही करते उल्टे उनके मुंह पर ही पर स्त्री सम्बन्ध की बाते कर रहै है । अब उन्हें कौन समझाए की कुदरत का अपना सिस्टम है वो किसे सुंदरता का खजाना बख्शती है और किसे धन का खजाना यह ऊपरवाला ही जानता है । सुन्दरी ने क्या सटीक वाक्य बोला है कि "मैं हूँ ही ऐसी । भगवान ने दिया और मैंने लिया ।"
शुक्रिया दोस्त

आपको एपिसोड पसंद आया तो मुझे भी मजा आ गई.................
 

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बड़ी बहू अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए किरण ई पूछताछ करती है कि परम का बीज अंदर लिया या बाहर । किरण के यह बताने पर की एक बार अंदर गया है तो वह उसे लोकलाज का डर परिवार वालो का डर और होने वाले ससुराल वालों का डर दिखा कर उसे समझाती है कि जो भी करे सम्हाल कर करे । फिर उसे गर्भनिरोधक गोली की सुरक्षा की पुड़िया देती है औऱ अपने पति के लिए किरण को तैयार करती है । आपने बड़ी बहू का किरदार भी काफी सोच समझ कर गढ़ा है और उसी के हिसाब से उसके लिए संवाद लिख रहे हो । बहुत अच्छा लगता है किरदार की रचना के साथ उसी के हिसाब से सीन और संवाद लिखना । धन्यवाद ।
आप का बहोत बहोत धन्यवाद दोस्त

मुझे तो लगता है की बहुए इस के जरिये सब का रास्ता खोल देना चाहती है..........इन्सेस्ट................ना कोई डर ला शरम.............

खेर देखते है आगे.............
 

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बहुत ही गरमागरम कामुक और शानदार लाजवाब अपडेट है भाई मजा आ
अपडेट छोटा तो हैं लेकीन कहते हैं ना
छोटा पाकेट बडा धमाका
खैर देखते हैं आगे
हा हा हा हा......जी छोटा अपडेट


शुक्रिया दोस्त प्रयास को सराहने के लिए


आप को पसंद आया तो धमाका वर्ना..........बेकार.

यह सब कुछ मेरे लिए भी है तो खास कर रीडर्स के लिए भी है...............कल्पनाये उडती रहती है............
 
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