• If you are trying to reset your account password then don't forget to check spam folder in your mailbox. Also Mark it as "not spam" or you won't be able to click on the link.

Erotica ड्रेगन हार्ट (लव, सेक्स एण्ड क्राईम)

redhat.ag

Member
499
3,489
139
सॉरी दोस्त ऑफिस के काम से कुछ दिनों के लिए आउट ऑफ सिटी गया हुआ था.... पूरे एक हफ्ते से रेगुलर सफर में रहने के कारण अपडेट पोस्ट नहीं कर पया था। कल रात को ही घर बापिस आया हूँ। इसलिए आज शाम तक पक्का अपडेट पोस्ट कर दूँगा।
 

parkas

Well-Known Member
32,911
70,422
303
सॉरी दोस्त ऑफिस के काम से कुछ दिनों के लिए आउट ऑफ सिटी गया हुआ था.... पूरे एक हफ्ते से रेगुलर सफर में रहने के कारण अपडेट पोस्ट नहीं कर पया था। कल रात को ही घर बापिस आया हूँ। इसलिए आज शाम तक पक्का अपडेट पोस्ट कर दूँगा।
Besabari se intezaar rahega next update ka redhat.ag bhai....
 

dhparikh

Well-Known Member
13,290
15,476
228
सॉरी दोस्त ऑफिस के काम से कुछ दिनों के लिए आउट ऑफ सिटी गया हुआ था.... पूरे एक हफ्ते से रेगुलर सफर में रहने के कारण अपडेट पोस्ट नहीं कर पया था। कल रात को ही घर बापिस आया हूँ। इसलिए आज शाम तक पक्का अपडेट पोस्ट कर दूँगा।
intezaar rahga....
 
  • Like
Reactions: redhat.ag

park

Well-Known Member
13,951
16,750
228
सॉरी दोस्त ऑफिस के काम से कुछ दिनों के लिए आउट ऑफ सिटी गया हुआ था.... पूरे एक हफ्ते से रेगुलर सफर में रहने के कारण अपडेट पोस्ट नहीं कर पया था। कल रात को ही घर बापिस आया हूँ। इसलिए आज शाम तक पक्का अपडेट पोस्ट कर दूँगा।
intezaar rahega....
 
  • Like
Reactions: redhat.ag

redhat.ag

Member
499
3,489
139
Update 101 -

हम लोग दोपहर कबीर 1 बजे दिल्ली में मेरे घर पहुँच गऐ थे। चूँकि संडे का दिन था, इसलिए आज विकाश अंकल घर पर ही थे। विकाश अंकल ने कबीर और पापा का बडी गर्मजोशी से स्वागत किया। सबका इंट्रोडक्शन करवाने के बाद मैं अपने रूम में चेंज करने के लिए चली गई, तब तक घर पर काम करने बाले नौकरों ने चाय नाश्ते का इंतजाम कर दिया था। अपने कपडे चेंज करने के बाद मैं बापिस से हॉल में आकर सबके साथ बैठ गई। कुछ देर नॉर्मल बातें करने के बाद पापा ने विकाश अंकल से कहा

पापा- मिस्टर चौहान अब आपको तो पता ही है कि मेरा बेटा कबीर और आपकी भतीजी अमृता दोनों ही एक दूसरे को पसंद करते हैं। इसलिए आज मैं आपसे कबीर के लिए अमृता का हाथ माँगने आया हूँ।

पापा की बात सुनकर विकाश अंकल कुछ देर तक खामोश रहे और फिर थोडा सीरियस होकर बोले

विकाश- देखिए मिस्टर शर्मा मुझे इस रिश्ते से कोई एतराज नहीं है, इनफेक्ट अगर अमृता ने कबीर को पसंद किया है तो जरूर कबीर एक अच्छा और बेहद टेलेंटेड लडका होगा। लेकिन शादी की इतनी क्या जल्दी है। कुछ दिनों तक बच्चों को साथ घूमने फिरने और समय बिताने देते हैं। शादी तो होती ही रहेगी

पापा- मिस्टर चौहान असल में मैं हार्ट पेसेंट हूँ और जल्द ही मेरी बाईपास सर्जरी होने बाली है। मुझे नहीं पता कि मैं उस सर्जरी को सरवाईब कर भी पाऊँगा या नहीं। इसलिए अपनी सर्जरी से पहले ही अपने बेटे का घर वसता हुआ देखना चाहता हूँ। इस दौरान मुझे भी कुछ समय अपनी बहू के साथ समय बिताने का मौका मिल जाऐगा। आप मुझपर यकीन कीजिए मैं अमृता को अपनी सगी बेटी की तरह रखूँगा।

विकाश- अरे मिस्टर शर्मा आप मुझे शर्मिंदा कर रहे हैं…. मुझे आप लोगों पर पूरा यकीन है कि आप लोग अमृता को हमेशा खुश रखेंगे। लेकिन शायद आपको इस बारे में पता ना हो कि मैं भी अभी कुछ समय पहले ही अमृता से मिला हूँ। उससे पहले हम दोनों को ही एक दूसरे के बारे में कुछ भी पता नहीं था। मैंने अपनी पूरी जिंदगी देश के नाम समर्पित कर दी है और अमृता ही हमारे परिवार की एकमात्र उत्तराधिकारी है। मैंने अपनी लगभग आधी से ज्यादा जिंदगी अकेले ही बिताई है। अब जब मेरी अपनी भतीजी अमृता मेरे पास है तो मैं उसके साथ कुछ समय बिताना चाहता हूँ। बैसे भी मैं आर्मी से हूँ तो मेरी जिंदगी का भी कोई भरोसा नहीं है।

पापा- मैं आपकी बात समझ रहा हूँ मिस्टर चौहान लेकिन बच्चों की खुशी के लिए हमें कुछ ना कुछ बलिदान तो करना ही पडता है।

पापा की बात सुनकर विकाश अंकल थोडा निराश होते हुए बोले

विकाश- हाँ वो बात तो है…………

इतना बोलकर विकाश अंकल खामोश होकर कुछ देर यूँ ही सोचते रहे और फिर अचानक से बोले

विकाश- अच्छा ठीक है… मुझे यह रिश्ता मंजूर है….. आप जब भी कहेंगे मैं दोनों बच्चों की शादी के लिए तैयार रहूँगा। लेकिन मेरी एक शर्त है

विकाश अंकल की बात सुनकर पापा थोडा हैरान होते हुए बोले

पापा- कैसी शर्त

विकाश- दोनों बच्चों की शादी के बाद आप लोगों को यहीँ दिल्ली में रहना होगा। इससे मुझे भी अपनी भतीजी से दूर नहीं होना पडेगा और आप भी अपने बेटे बहू के साथ रह सकेंगे।

विकाश अंकल की बात सुनकर पापा ने कुछ देर तक इस बारे में सोचा और फिर मुस्कुराकर बोले

पापा- ठीक है मिस्टर चौहान मुझे आपकी शर्त मंजूर है….

विकाश- तो फिर ठीक है, मैं जल्द ही किसी अच्छे पण्डित से मिलकर शादी की तारीख निकलवा कर आपको बता दूँगा।

पापा- जैसा आपको सही लगे… बैसे मैं सोच रहा था कि क्यों ना शादि से पहले हम दोनों की इंगेज्मेंट करवा दें

विकाश- मुझे कोई ऐतराज नहीं है।

पापा- तो फिर ठीक है…. एंगेज्मेंट हम आगरा से करेंगे

पापा की बात सुनकर विकाश अंकल थोडा चौंकते हुए बोले

विकाश- आगरा से क्यों…..

पापा- अरे भाई हम लोग वर्षों से आगरा में रह रहे हैं, वहाँ हमारे कई जान पहचान बाले लोग हैं। इसलिए मैं उन सभी से अमृता को मिलवाना चाहता हूँ। बैसे भी बारात लेकर तो हमें दिल्ली ही आना है और शादि के बाद भी हम लोग यहीं सैटल होने बाले हैं। तो मैं चाहता हूँ कि कम से कम शादि का कोई एक प्रोग्राम तो हम लोग आगरा में ही करें।

पापा की बात सुनकर विकाश अंकल तुरंत बोले….

विकाश- हाँ यह ठीक रहेगा…. इस वहाने हम लोग भी आपके रिलेटिव्स से मिल लेंगे और आगरा भी घूम लेंगे।

इसी तरह कुछ देर और बातें करने के बाद हम सभी लोगों ने एक साथ लंच किया। जिसके बाद कबीर और पापा आगरा के लिए बापिस निकल गए। अगले दिन मैं दिल्ली के एक फेमस प्रापर्टी डीलर से मिलने चली गई। असल में मैं हमारी कॉलोनी में ही कबीर के लिए एक घर लेना चाहती थी, ताकि शादि के बाद भी मैं विकाश अंकल के एकदम पास रह सकूँ। किस्मत से इस वक्त हमारे घर के पास ही एक मकान विकाऊ था। हाँलाकि वो हमारे घर से काफी बडा और मंहगा भी था। लेकिन उस लोकेशन पर मकान मिलना ही मेरे लिए बहुत बडी बात थी। ऊपर से मेरे पास इस वक्त पर्याप्त पैसे भी थे।

इसलिए मैं उस प्रापर्टी डीलर के साथ उस मकान को चैक करने जा पहुँची। वो मकान पूरी तरह से खाली था, यहाँ तक कि उसमें कोई फर्नीचर बगैरह भी नहीं था। शायद मंहगा होने के कारण किसी ने भी उस मकान को कंस्ट्रक्शन कंपनी बालों से खरीदा नहीं था, इसलिए कंस्ट्रक्शन के बाद से अब तक उस मकान में कोई रहने नहीं आया था। असल में वो एक दो मंजिला मकान था, जिसमें 4 बेडरूम और एक मास्टर बेडरूम के अलावा, किचिन हॉल, गैराज बगैरह बने हुऐ थे, साथ ही साथ उस मकान में एक अच्छा खासा गार्डन भी था, जिस कारण वह मकान मुझे तुरंत पसंद आ गया। इसलिए मैंने तुरंत ही उस मकान को खरीदने की डील फाईनल कर ली।

मैं वो मकान कबीर के नाम से खऱीदना चाहती थी, इसलिए मैंने कबीर से पहले ही उसके डॉक्यूमेंट्स की एक कॉपी ले ली थी। हांलाकि वो मकान पूरे 3 करोड रूपये का था, लेकिन डील फाईनल होते ही मैंने अपने डिजीटल कैश कार्ड से तुरंत सारा पेंमेंट कर दिया और कबीर के डॉक्यूमेंट भी उस प्रापर्टी डीलर को दे दिए। ताकि वो जल्दी से जल्दी मकान का रजिस्ट्रेशन कबीर के नाम करवाकर मुझे उस मकान के ऑरीजनल डॉक्यूमेंट दे सके। पूरा पेमेंट एडवांस में होने के कारण प्रापर्टी डीलर कॉफी खुश था, वो समझ गया था कि मेरे कांटेक्ट में रहने से आगे चलकर उसे और भी ज्यादा फायदा हो सकता है। इसीलिए उसने मुझे तुरंत उस मकान का चाबियाँ दे दीं थी और एक हफ्ते के अंदर रजिस्ट्रेशन कबीर के नाम ट्रांशफर करवाने का वादा भी कर दिया।

मकान का सारा काम होने के बाद मैं एक इंटीरियल डिजाईनर से मिलने चली गई और उसे अपने मकान को रिन्यूवेट करके रहने लायक बनाने का काम सौंप दिया। क्योंकि वह मकान काफी लम्बें समय से खाली पडा हुआ था और उसमें सामान के नाम पर एक सुई भी नहीं थी। जिस कारण उस मकान के लिए सारा जरूरी सामान इकट्ठा करके उसे रहने लायक बनाने का मेरे पास बिल्कुल भी समय नहीं था। इसलिए यह काम मैंने किसी इंटीरियल डिजाईनर को सौंपने का फैसला किया था। इंटीरियल डिजाईनर से डील फाईनल करने के बाद मैं अपने घर बापिस आ गई। अब चूँकि शादि के बाद यहाँ दिल्ली में रहने के लिए मकान का इंतजाम भी हो चुका था। इसलिए मैं अपने दूसरे जरूरी कामों को पूरा करने में लग गई।

सबसे पहले तो मैं उसी दिन शाम के समय सोढी, विक्रांत, साक्षी और पूर्वी से मिली। उनसे मिलने के बाद मैंने उन्हें कबीर और मेरी शादी फिक्स होने की खुशखबरी दी और फिर उन लोगों से हमारी शादि के सेम वेन्यू पर एक दो दिन आगे पीछे करके शादी करने के लिए कहा। थोडी सी ना नुकुर के बाद वो लोग भी सेम बेन्यू पर शादी करने के लिए मान ही गए। वहीं दूसरी तरफ श्रेया ने रवि और रघू से पहले ही इस बारे में बात कर ली थी। इसलिए हम लोगों का सेम बेन्यू पर शादी करने का प्लान ठीक ठाक आगे बड रहा था। अपने दोस्तों से कुछ देर बातें करने के बाद मैं अपने घर बापिस लौट आई।

अगले दिन विकाश अंकल ने मुझे बताया कि दो महिने बाद हमारे देश में फॉरेन लीडर्स का एक बहुत बडा सम्मिट होने बाला है। जिनकी सिक्योरिटी की पूरी जिम्मेदारी एन.एस.जी. को सौंपी गई है। इसलिए कुछ दिनों तक वो होममिनिस्टर और एन.एस.ए. के साथ सिक्योरिटी प्लानिंग को लेकर जरूरी मीटिंग्स में बिजी रहेंगे। जिस कराण मेरी और कबीर की शादी के साथ साथ इंगेज्मेंट की डेट फाईनल करने के लिए पण्डित जी से मिलने का काम विकाश अंकल ने मेरे जिम्मे छोड दिया था। बैसे भी मैं खुद भी यही चाहती थी। असल में अब जब मैं कबीर से शादी करने का फैसला कर ही चुकी थी। तो मैं चाहती थी कि हमारी शादी शुभ मुहूर्त में हो।

लेकिन उसके लिए मुझे अपनी यानि निशा की ऑरीजनल डेट ऑफ वर्थ की जरूरत पडने बाली थी। बैसे तो मेरी और अमृता की डेट ऑफ बर्थ सेम ही थी, बस वर्थ ईयर में डिफरेंस था। जिस बजह से मैं कोई रिस्क नहीं लेना चाहती थी। इसलिए अगले दिन ही मैंने एक पण्डित के पास जाकर मेरी ऑरीजनल डेट ऑफ वर्थ और कबीर की ऑरीजनल डेट ऑफ वर्थ से हमारी शादी की डेट और इंगेज्मेंट की डेट निकलवा ली। पण्डित जी के अनुसार अगले महिने इंगेज्मेंट और तीन महिने बाद शादी का शुभ मुहूर्त था। इतना समय मुझे अपने पेंडिंग कामों को निपटाने के लिए काफी था। इसलिए घर पर आकर मैंने विकाश अंकल और कबीर को कॉल करके इस बारे में बता दिया।

अब चूँकि विकाश अंकल अगले कुछ दिनों तक बिजी रहने बाले थे, इसलिए मैं दिल्ली से इंदौर के लिए निकल गई, जहाँ रवि और रघू से मीटिंग करके मैंने अपने इंदौर और भोपाल के शॉपिगं मॉल छोडकर बाकी सभी शॉपिंग मॉल को बेचकर दिल्ली में शॉपिंग मॉल शुरू करने के प्लान पर डिस्कस किया, साथ ही साथ मैंने इंदौर और भोपाल का सारा बिजिनेश रघू को हैंडओवर करने और दिल्ली का बिजिनेश रवि को हैंडओपर करने के प्लान के बारे में भी उन्हें बता दिया था। जिसमें उन दोनों को कोई प्राब्लम नहीं थी। पूरा प्लान डिस्कस होने के बाद अगले दिन से हम तीनों अपने अगल अलग शहरों के शॉपिंग मॉल बिजिट करने निकल गए। चूँकि वहाँ के प्रापर्टी डीलर्स से मैं पहले ही बात कर चुकी थी। इसलिए वहाँ जाते ही हमने अपने शॉपिंग मॉल को सैल करने की डील फाईनल कर ली।

करीब दो हफ्तों में ही मैंने इंदौर और भोपाल के शॉपिंग मॉल छोडकर अपने बाकी के सभी शॉपिंग मॉल बेच दिए थे। इस डील में हमें अच्छा खासा प्रॉफिट भी हुआ था। क्योंकि हमारे शॉपिंग मॉल पहले से ही काफी अच्छा बिजिनेश कर रहे थे। सारा काम पूरा होने के बाद रघू बापिस से इंदौर चला गया, जबकि मैं रवि के साथ दिल्ली आ गई। जहाँ मैं रवि के साथ उसी प्रापर्टी डीलर के पास गई, जिससे मैंने वो घर खरीदा था। जैसे ही मैं उस प्रापर्टी डीलर के पास पहुँची तो उसने मेरे मकान के ऑरीजनल डॉक्यूमेंट मुझे दे दिए। जिसके बाद मैंने और रवि ने उसे दिल्ली में अपने शॉपिंग मॉल का चेन बिजिनेश शुरू करने के बारे में बताया।

हमारा पूरा प्लॉन जानने के बाद उस प्रापर्टी डीलर ने दिल्ली में पहले से ही चल रहे कुछ शॉपिंग मॉल के बारे में बताया जो लॉस के चलते अब बंद हो चुके थे और उनके ऑनर उन्हें बेचना चाहते थे। उस प्रापर्टी डीलर की बात सुनकर मैंने सोचा कि खाली जमीन खरीदकर उसपर शॉपिगं मॉल बनाने में अच्छा खासा समय लगेगा। अगर पहले से ही बना हुआ शॉपिंग मॉल हमें मिल जाऐ। तो उसमें कुछ जरूरी चेंजिस करवाकर हम उन्हें नऐ शिरे से लॉंच कर सकते हैं। कुछ देर रवि से इस बारे में डिस्कस करने के बाद मैं और रवि उस प्रापर्टी डीलर के साथ उन सभी शॉपिंग मॉल को विजिट करने चले गऐ।

अगले दो दिनों में हमने करीब 30 से ज्यादा बंद पडे शॉपिंग मॉल को बिजिट किया। लोकेशन और अपनी रिक्वार्यमेंट को देखत हुए उनमें से हमने कुल 8 शॉपिंग मॉल सिलेक्ट किऐ और अगले ही दिन उनके ऑनर से मिलकर हमने एक साथ उन सभी शॉपिंग मॉल को खरीद लिया। हमारी पूरी डील फाईनल होने के बाद रवि बापिस से भोपाल लौट गया, ताकि वो अपना जरूरी सामान पैक करके दिल्ली शिफ्ट हो सके। क्योंकि अब उन शॉपिंग मॉल को रीफर्निश करके दोबारा शुरू करने की सारी जिम्मेदारी रवि की थी। जिसके लिए उसे यहीँ दिल्ली में ही रहना था।

कहानी जारी है............
 

fantasyWriter

Member
155
182
59
Update 101 -

हम लोग दोपहर कबीर 1 बजे दिल्ली में मेरे घर पहुँच गऐ थे। चूँकि संडे का दिन था, इसलिए आज विकाश अंकल घर पर ही थे। विकाश अंकल ने कबीर और पापा का बडी गर्मजोशी से स्वागत किया। सबका इंट्रोडक्शन करवाने के बाद मैं अपने रूम में चेंज करने के लिए चली गई, तब तक घर पर काम करने बाले नौकरों ने चाय नाश्ते का इंतजाम कर दिया था। अपने कपडे चेंज करने के बाद मैं बापिस से हॉल में आकर सबके साथ बैठ गई। कुछ देर नॉर्मल बातें करने के बाद पापा ने विकाश अंकल से कहा



अगले दो दिनों में हमने करीब 30 से ज्यादा बंद पडे शॉपिंग मॉल को बिजिट किया। लोकेशन और अपनी रिक्वार्यमेंट को देखत हुए उनमें से हमने कुल 8 शॉपिंग मॉल सिलेक्ट किऐ और अगले ही दिन उनके ऑनर से मिलकर हमने एक साथ उन सभी शॉपिंग मॉल को खरीद लिया। हमारी पूरी डील फाईनल होने के बाद रवि बापिस से भोपाल लौट गया, ताकि वो अपना जरूरी सामान पैक करके दिल्ली शिफ्ट हो सके। क्योंकि अब उन शॉपिंग मॉल को रीफर्निश करके दोबारा शुरू करने की सारी जिम्मेदारी रवि की थी। जिसके लिए उसे यहीँ दिल्ली में ही रहना था।


कहानी जारी है............
yeh Amrita to jhatke par jhatke diye jaa rahi hai! Ekdum kisi entrepreneur ki tarah behve kar rahi hai !
Par shopping maal ka handover un dono ko karna thoda immaturity hai; agar sirf operation part ka handover hota to baat thi kyuki investment sab Amrita ka tha aur agar koi sirf chalane ka headache le raha hai to partnership to rehna hi chahiye tha ya koi condition jisme lagat + x amount ka profilt hone par complete ownership .

Aakhir kaar Kabir aur Amrita ki shaadi tay ho hi gai!
 
  • Like
Reactions: sunoanuj
Top