Update 101 -
हम लोग दोपहर कबीर 1 बजे दिल्ली में मेरे घर पहुँच गऐ थे। चूँकि संडे का दिन था, इसलिए आज विकाश अंकल घर पर ही थे। विकाश अंकल ने कबीर और पापा का बडी गर्मजोशी से स्वागत किया। सबका इंट्रोडक्शन करवाने के बाद मैं अपने रूम में चेंज करने के लिए चली गई, तब तक घर पर काम करने बाले नौकरों ने चाय नाश्ते का इंतजाम कर दिया था। अपने कपडे चेंज करने के बाद मैं बापिस से हॉल में आकर सबके साथ बैठ गई। कुछ देर नॉर्मल बातें करने के बाद पापा ने विकाश अंकल से कहा
अगले दो दिनों में हमने करीब 30 से ज्यादा बंद पडे शॉपिंग मॉल को बिजिट किया। लोकेशन और अपनी रिक्वार्यमेंट को देखत हुए उनमें से हमने कुल 8 शॉपिंग मॉल सिलेक्ट किऐ और अगले ही दिन उनके ऑनर से मिलकर हमने एक साथ उन सभी शॉपिंग मॉल को खरीद लिया। हमारी पूरी डील फाईनल होने के बाद रवि बापिस से भोपाल लौट गया, ताकि वो अपना जरूरी सामान पैक करके दिल्ली शिफ्ट हो सके। क्योंकि अब उन शॉपिंग मॉल को रीफर्निश करके दोबारा शुरू करने की सारी जिम्मेदारी रवि की थी। जिसके लिए उसे यहीँ दिल्ली में ही रहना था।
कहानी जारी है............
yeh Amrita to jhatke par jhatke diye jaa rahi hai! Ekdum kisi entrepreneur ki tarah behve kar rahi hai !
Par shopping maal ka handover un dono ko karna thoda immaturity hai; agar sirf operation part ka handover hota to baat thi kyuki investment sab Amrita ka tha aur agar koi sirf chalane ka headache le raha hai to partnership to rehna hi chahiye tha ya koi condition jisme lagat + x amount ka profilt hone par complete ownership .
Aakhir kaar Kabir aur Amrita ki shaadi tay ho hi gai!