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Erotica ड्रेगन हार्ट (लव, सेक्स एण्ड क्राईम)

sunoanuj

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redhat.ag अगला अपडेट कब तक आएगा मित्र !
 

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Update 100 -

मेरी पूरी कहानी सुनने के बाद पापा मुझे समझाते हुए बोले

पापा- किसी ने सही कहा कि कि भगवान एक रास्ता बंद करते हैं तो दूसरा जरूर खोल देते हैं, जब तुम्हारा पूरा परिवार तुम्हें छोड गया तो उन्होंने तुम्हारे अंकल से मिलवा दिया, तुम्हारी कहानी सुनने के बाद मुझे इस बात का पूरा यकीन हो गया है कि तुम्हारे अंकल एक बहुत अच्छे इंशान हैं।

पापा की बात सुनकर मैं मुस्कुराते हुए बोली

अमृता- हाँ वो तो है… मेरे बिकाश अंकल दुनिया के सबसे अच्छे और प्यारे इंशान है।

पापा- और तुम भी बहुत प्यारी और बहादुर बच्ची हो…. इतना सब कुछ सहने के बाद भी तुम मुस्कुरा रही हो… इसके लिए बहुत हिम्मत की जरूरत होती है मेरी बच्ची।

अमृता- अब आप मुझे शर्मिंदा कर रहे हैं अंकल…. मैं उतनी भी काबिल नहीं हूँ… बस पुरानी यादों से मूवऑन करके खुश रहने की कोशिश कर रही हूँ।

पापा- बैसे कबीर ने मुझे तुम दोनोें के रिलेशन के बारे में कुछ दिनों पहले ही बताया है, इसलिए मैं खुद भी तुमसे मिलना चाहते था। सच कहूँ तो तुमसे मिलकर मुझे ऐसा लग ही नहीं रहा है कि मैं अपनी होने बाली बहू से बात कर रहा हूँ, बल्कि तुम तो मुझे अपनी बेटी जैसी लग रही हो। इसलिए मुझे इस रिश्ते से कोई आपत्ति नहीं है। अब तुम जल्दी से जल्दी अपने अंकल से बात कर लो, ताकि मैं तुम्हारे घर जाकर कबीर के लिए तुम्हारा हाथ माँग सकूँ। मैं चाहता हूँ कि तुम जल्द से जल्द इस घर में आ जाओ ताकि यह घर एक बार फिर खुशियों से भर जाऐ।

इससे पहले मैं पापा की बात का कोई जबाब देती कबीर हमारे सामने टेबिल पर चाय नाश्ता रखते हुए बोला

कबीर- पापा अमृता ने अपने अंकल से मेरे बारे में ऑलरेडी बात कर ली है और वो भी मुझसे मिलना चाहते हैं। इसलिए कल मैं अमृता के साथ उसके घर जा रहा हूँ। ताकि अंकल से मिल सकूँ। उसके बाद जो करना है आपको और अमृता के अंकल को करना है।

पापा- यह तो बहुत अच्छी बात है….

इतना बोलकर पापा ने चाय का कप उठाकर मुझे दे दिया और फिर अपने लिए भी एक कप उठाकर चाय शिप करने लगे। चाय नाश्ता करने के बाद मैंने कहा

अमृता- तो फिर ठीक है अंकल जी मैं अब चलती हूँ

पापा- पर बेटा अभी अभी तो कबीर ने बताया था कि तुम दोनों कल दिल्ली जाओगे। फिर अभी तुम कहाँ जा रही हो।

अमृता- हाँ अंकल दिल्ली तो हम कल ही जाऐंगे, लेकिन आज रात के लिए मुझे अपने लिए होटल रूम भी तो बुक करना है ना।

पापा- अरे बेटा होटल में रुकने की क्या जरूरत हो… इसे अपना ही घर समझो… बैसे भी कुछ दिनों बाद तो तुम्हें इसी घर में रहने आना है।

अमृता- पर अंकल शादी से पहले मेरा यहाँ रुकना ठीक नहीं होगा और फिर आप लोगों को भी मेरे कारण प्राब्लम होगी

पापा- अरे अमृता बेटा हमें कोई प्राब्लम नहीं होगी, बल्कि मुझे तो अच्छा लगेगा, कम से कम इस बहाने मुझे भी तुम्हारे साथ कुछ और समय विताने का मौका मिल पाऐगा।

इतना बोलकर पापा ने कबीर की तरफ देखते हुए कहा

पापा- अरे कबीर तुम अमृता बेटा को निशा का कमरा दिखा दो और उसका सामान भी उसी कमरे में रख दो।

अमृता- ठीक है अंकल अगर आप कह रहे हैं तो आज मैं यहीँ रुक जाती हूँ। लेकिन मेरी भी एक शर्त है

मेरी बात सुनकर पापा थोडा सीरियस होते हुए बोले

पापा- कैसी शर्त बेटा

पापा की बात सुनकर मैंने उनसे मुश्कुराते हुए कहा

अमृता- आज रात का डिनर मैं अपने हाथों से बनाकर आपको खिलाऊँगी,

मेरी बात सुनकर पापा भी मुस्कुराते हुए बोले

पापा- ठीक है…. मुझे कोई प्राब्लम नहीं है…. कम से कम इस बहाने मुझे कुछ स्वादिस्ट खाने के लिए तो मिलेगा

इसके बाद मैं कबीर के साथ अपने कमरे में चली गई। कबीर के जाने के बाद मैंने सबसे पहले बाथरूम में जाकर नहाया और फिर कपडे चेंज करके बापिस से हॉल में आगई। जहाँ पापा टी.वी. पर न्यूज देख रहे थे और कबीर मार्केट से कुछ सामान लेने गया हुआ था। इसलिए मैं भी पापा के पास बैठकर उनसे बातें करते हुए टी.वी. पर न्यूज देखने लगी। कुछ देर तक पापा से बातें करने के बाद मैं किचिन में रात के डिनर की तैयारी करने चली गई, तब तक कबीर भी बापिस आ चुका था, इसलिए वो भी मेरे साथ किचिन में आकर मेरी हेल्प करने लगा। हांलाकि वो मेरी हेल्प कम कर रहा था और मेरे साथ छेडछाड ज्यादा कर रहा था। जिसमें मुझे भी काफी ज्यादा मजा आ रहा था।

इसलिए मैं भी बडे आराम से अपना काम कर रही थी, ताकि हमारे बीच की यह छेड छाड कुछ देर तक यूं ही चलती रहे। खाना तैयार होने के बाद हम तीनों ने एक साथ मिलकर डिनर किया और फिर हॉल में बैठकर कुछ देर आपस में बातें करने के बाद अपने अपने कमरे में सोने के लिए चले गए। अपने कमरे में आने के बाद मैं जैसे ही दरवाजा अंदर से बंद करने लगी, ठीक तभी कबीर वहाँ आ गया। कबीर को अपने कमरे के बाहर देखकर मैं बुरी तरह से हैरान रही गई। इससे पहले मैं कुछ समझ पाती कबीर एक झटके में कमरे के अंदर दाखिल हो गया और मुझे अपनी बाहों में भरकर किस करने लगा।

किचिन में कबीर ने मेरे साथ जो छेडछाड की थी, उससे मैं पहले से ही काफी ज्यादा उत्तेजित थी ऊपर से कबीर के यूँ अचानक मेरे कमरे में आकर मुझे किस करने से मैं धीरे धीरे अपना सेल्फ कंट्रोल खोने लगी थी, इसलिए मैं भी उसका पूरा साथ देते हुए किस को इंजाय कर रही थी। मैंने इस वक्त टॉप-स्कर्ट पहनी हुई थी, जिसमें मैं कुछ ज्यादा ही सेक्सी लग रही थी। इसलिए कबीर धीरे धीरे अपना कंट्रोल खोता जा रहा था और मैं भी वासना की आग में जलकर उसकी बाहों में पिघलती जा रही थी। हम दोनों का यह किस काफी देर तक चलता रहा और जब हमारी सांसे उखडने लगीं तो कबीर मुझसे अलग हो गया। उसके बाद कबीर ने मेरे कमरे को अंदर ले लॉक किया और मुझे अपनी गोद में उठाकर विस्तर की तरफ जाने लगा।

अब तक मैं पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी और मेरा मन अब चुदने का कर रहा था। इसलिए मैंने मन ही मन तय किया कि अगर कबीर आज मेरे साथ फिजीकल होने की कोशिश भी करेगा तो मैं उसे मना नहीं करूँगी, आखिरकार अब हम दोनों रिलेशनशिप में आ चुके थे और जल्दी ही हमारी शादी भी होने बाली थी। विस्तर के पास पहुँचकर कबीर ने मुझे आहिस्ता से बिस्तर पर लेटा दिया और फिर वो मेरे ऊपर आकर एक बार फिर से मुझे किस करने लगा। कबीर के इस उताबलेपन को देखकर मैं समझ गई थी कि आज मेरी चुदाई पक्का होकर ही रहेगी। कबीर बिना रुके लगातार मेरे चेहरे पर किस करता ही जा रहा था।

कभी वो मेरे होंठों को चूमता तो कभी गालों को और कभी मेरी गर्दन को चूमने लगता, कबीर के इस तरह मुझे किस करने से मेरे मूँह से हल्की हल्कि सिस्कियां निकलने लगीं थी, जो माहौल को और भी ज्यादा कामुक बना रहीं थी, मेरे चेहरे पर किस करने के बाद कबीर नीचे की तरफ बडने लगा, वो मेरी गर्दन से होता हुआ मेरी क्लीबेज तक आ पहुँचा था। असल में मैंने लूज टॉप पहना हुआ था, जिसका फ्रंट कुछ ज्यादा ही डीप था, जिस कारण मेरी क्लीवेज बाहर की तरफ उभर आईं थीं, जैस ही कबीर ने अपने होंठों से मेरे क्लीबेज को छुआ तो मेरे पूरे बदन में सनसनाहट दौड गई और मैं मदहोश होने लगी।

वहीँ दूसरी तरफ कबीर अपने हाथों से मेरे बूब्स को सहलाते हुए लगातार मेरे क्लीवेज को किस कर रहा था। मेरी क्लीवेज को जी भरकर चूमने के बाद वो धीरे धीरे नीचे की तरफ बडने लगा। मैं तो अब तक पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी और इस लम्हे को इंजॉय कर रही थी, वहीं दूसरी तरफ कबीर किस करते करते मेरी नाभी तक आ पहुँचा था, मेरा टॉप नीचे से थोडा शार्ट था, जिस कारण मेरी नाभी टॉप से बाहर झाँक रही थी, मेरी नाभी को देखते ही कबीर उसपर टूट पडा और उसे चूमने के साथ साथ अपनी जीभ से छेडछाड करने लगा।

कबीर की इस हरकत से मेरे पूरे बदन में ऐंठन होने लगी थी और मेरी चूत में से पानी भी रिसने लगा था, जिससे मुझे एहसास हुआ कि अगर कबीर ऐसे ही मेरी नाभी के साथ छेडछाड करता रहा तो पक्का मैं झर जाऊंगी। इससे पहले मैं कबीर को रोक पाती, कबीर नीचे की तरफ बडने लगा, जिससे मैं समझ गई कि अब वो पक्का मेरी चूत को किस करने बाला है, ऊपर से मैंने स्कर्ट पहन रखी थी, जिस बजह से वो आसानी से मेरी स्कर्ट ऊपर करके मेरी चूत तक पहुँच सकता था। कबीर ने मुझे अब तक इतना ज्यादा उत्तेजित कर दिया था कि मैं अब उसे रोकना नहीं चाहती थी, लेकिन फिर भी मैंने अपनी सारी ताकत इकट्ठी करते हुऐ कबीर से कहा

अमृता- कबीर प्लीज अब रुक जाओ

पर कबीर ने मेरी बात को जैसे सुना ही नहीं, इसलिए मैंने इस बार थोडी तेज अबाज में उससे कहा

अमृता- कबीर प्लीज एक बार मेरी बात सुन लो… उसके बाद तुम जो चाहो मेरे साथ कर सकते हो, मैं तुम्हें नहीं रोकूँगी

कबीर अब तक किस करते हुए मेरी चूत के बिल्कुल पास आ पहुँचा था, लेकिन जैसे ही उसने मेरी बात सुनी तो वो तुरंत रुक गया और उठकर मेरे बगल में आकर लेट गया। इसके बाद वो वासना भरी नजर से मुझे देखते हुए बोला

कबीर- हुम्मममम… कहो क्या कह रही थी तुम….

अमृता- वो वो मैं कह रही थी कि अभी हमें यह सब नहीं करना चाहिए….

कबीर- हम दोनों ही एक दूसरे से प्यार करते हैं और जल्द ही शादी भी करने बाले हैं, तो भल

अमृता- कोई प्राब्लम नहीं है कबीर… लेकिन तुम समझने की कोशिश करो, मैं अब तक वर्जिन हूँ और मैं अपनी वर्जनिटी सुहागरात पर तुम्हें गिफ्ट करना चाहती हूँ। ताकि मैं हमारी सुहागरात को यादगार बना सकूँ। बस इतनी सी बात है… लेकिन अगर तुम अब भी मेरे साथ फिजीकल होना चाहते हो तो मैं तुम्हें नहीं रोकूँगी…

मेरी बात सुनकर कबीर कुछ पलों तक मेरी आँखों में ही देखता रहा और फिर मेरे माथे पर प्यार से किस करते हुए बोला

कबीर- ठीक है… तो फिर हम यह सब हमारी सुहागरात पर ही करेंगे…

अमृता- प्रामिस….

कबीर- हाँ बाबा प्रामिस… लेकिन मैं तुम्हें किस करने और तुम्हारे साथ छेडछाड करने से अपने आप को रोक नहीं सकता।

अमृता- कोई बात नहीं…. उसे मैं कंट्रोल कर लूँगी…

कबीर- तो फिर ठीक है, अब तुम सो जाओ…. कल हमें दिल्ली के लिए निकलना


कहानी जारी है..........
दर्शन दो घनश्याम नाथ मोरी,
अँखियाँ प्यासी रे |
 
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