अगला दिन संडे था। हम सोकर उठे तो मैंने सोचा की जो कल हुआ वो शायद नशे में हुआ लेकिन अब मेरा बहुत मन था की मैं रेनू को राजेश से चुदवाते देखूं। मैं अभी ये तय नहीं कर पाया था की रेनू इसके लिए तैयार होने में कितना वक़्त लेगी या फिर होगी भी या नहीं। वैसे राजेश भी थोडा सा हिला हुआ था और सन्डे को वो आम तौर पर लंच के लिए भी आता था, पर उस दिन नहीं आया। फोन किया तो बोला शहर शॉपिंग के लिए गया है। मैं इस सिलसिले को और आगे ले जाना चाहता था तो मैंने कहा रात के डिनर के लिए ज़रूर आना, वो हिचकिचाते हुए मान गया।
उधर रेनू भी चुपचाप थी। उसको भी समझ नहीं आ रहा था की कल मैंने क्या किया था और अब आगे क्या होने वाला था। मैंने फिलहाल अपने प्लान के बारे में उससे बात न करने का निर्णय लिया और उसे बताया की राजेश लंच के लिए नहीं आयेगा, सिर्फ डिनर करेगा। रात को जब राजेश आया, मैंने आधे घंटे तक कुछ नहीं किया।
रेनू स्कर्ट और टैंक टॉप में किचन में थी। आधा घंटा बाद मैंने कहा चलो किचन की डाइनिंग टेबल पर बैठते हैं। जैसे ही वहाँ पहुँचे, मैं रेनू के पास गया और चुपके से उसका स्कर्ट नीचे सरका दिया। पूरा नीचे टखनों तक, और उसने कुछ नहीं किया बल्कि पैर से निकालकर उनको एक तरफ रख दिया। अब कमर के नीचे वो पूरी नंगी थी।
राजेश और मैं फिर बातें करने लगे और उसकी नंगी गांड ताकने लगे। अब वो काफ़ी रिलैक्स लग रहा था। शराब नहीं पी थी, इसलिए उसे पता चल गया था कि कल रात जो हुआ वो भले ही नशे में हुआ था पर अब ये कोई नशे की हरकत नहीं थी, हम दोनों को सब मंज़ूर है। खाना बनने के बाद रेनू ने स्कर्ट वापस पहना और टेबल पर आकर बैठ गई। उसके बाद से जो रूटीन बना, वो ये कि जैसे ही राजेश आता, मैं रेनू का शॉर्ट्स-पैंटी उतार देता। पहले दो-चार दिन तो वो आधी नंगी खाना बनाती, फिर डिनर से पहले वापस पहन लेती। मगर बाद में उसने वो भी बंद कर दिया। अब राजेश के सामने रेनू ज्यादातर कमर के नीचे पूरी नंगी रहती। उसकी चिकनी चूत और गोल गांड देखते-देखते राजेश को आदत पड़ गई।
एक हफ्ते बाद तो रेनू राजेश के आने से पहले खुद ही नीचे के कपडे उतार देती ताकि मुझे न उतारने पड़े। ऊपर से ब्रा, टॉप और मंगलसूत्र वैसे के वैसे। राजेश घूरता तो था, पर कभी कुछ बोला नहीं, मैंने भी नहीं। तभी मैंने अगला स्टेप लेने का सोचा।
एक रात रेनू खाना बना रही थी, मैं उसके पास गया और उसका टॉप ऊपर खींचने लगा।
“रुको।” उसने कहा। मैं रुक गया, सोचा शायद लिमिट क्रॉस हो गई। मगर वो बोली, “हाथ में मसाले लगे हैं, टॉप खराब हो जाएगा। पहले हाथ धो लूँ।”
वो दो कदम चली, सिंक में हाथ धोए, पोछे, फिर दोनों हाथ ऊपर उठा लिए। मैंने टॉप उतारा और वो सिर्फ़ ब्रा में वापस खाना बनाने लगी। और बेशक मंगलसूत्र तो पहना ही था। राजेश की तो जैसे लॉटरी लग गई। उस रात रेनू ने पूरे घर में, खाना बनाते हुए, डिनर करते हुए सिर्फ़ ब्रा में ही घूमती रही। नीचे पूरी नंगी। ब्रा में से भी उसके मस्त उभार साफ़ दिख रहे थे।
अगले दिन से उसने टॉप पहनना भी बंद कर दिया और अब कुछ दिन ये सीन रहा की राजेश जब भी घर आता, रेनू सिर्फ़ ब्रा में और मंगलसूत्र में रहती।
जैसी उम्मीद थी, इस स्टेप ने रेनू को बिस्तर पर और भी जंगली बना दिया। लगभग हर सुबह मैं उठता तो मेरी बीवी नंगी होती और मेरा लंड उसके मुँह में। सुबह काम पर जाने से पहले दो-दो बार चुदाई रूटीन बन गया।
हम तीनों को पता था अगला स्टेप क्या होने वाला है, रेनू को पूरी तरह नंगी होना था। अब तक मैं ही सब कर रहा था, रेनू और राजेश सिर्फ़ साथ दिया जा रहे थे। मैंने सोचा इनकी तड़प थोड़ी और बढ़ा दूँ। करीब दो हफ्ते तक सब वैसे ही रहा। रेनू सिर्फ़ ब्रा में, राजेश दिन-रात घूरता रहता। मुझे पूरा यकीन था कि वो हर रात रेनू की बॉडी और उसके खूबसूरत चेहरे को याद करके मुठ मारता होगा।
दो हफ्ते बाद मैंने सोचा अब समय आ गया। रेनू खाना बनाकर हमारी टेबल पर आई, सिर्फ़ ब्रा और मंगलसूत्र पहने। मंगलसूत्र उसकी क्लीवेज में लटक रहा था। डिनर के बीच में मैंने बिल्कुल कैजुअली उसकी पीठ के पीछे हाथ डाला और लेफ्ट हैंड से ब्रा का हुक खोल दिया।
रेनू का चेहरा एकदम सीरियस हो गया, वो प्लेट में ही घूरती रही। मैंने स्ट्रैप्स को कंधों से नीचे सरकाया, ब्रा का कप आगे गिरा और उसके मस्त, गोरे-गोरे बूब्स राजेश के सामने पूरी तरह नंगे हो गए।
पहली बार राजेश के मुँह से आवाज़ निकली, हल्का सा “ओह गॉड”। उसने खाना छोड़ दिया और कुछ मिनटों तक बस उसके बूब्स को ताकता रहा। रेनू ने आराम से ब्रा पूरी उतारी और पास की कुर्सी पर रख दी। अब वो सौ प्रतिशत नंगी थी।
राजेश ने फिर खाना शुरू किया, पर उसकी आँखें रेनू के बूब्स पर ही चिपकी रहीं। खाना ख़त्म हुआ तो रेनू नंगी ही किचन सिंक पर बर्तन धोने लगी।
अब आखिरी लाइन भी पार हो चुकी थी। उसके बाद रेनू ने राजेश के घर आने पर कपड़े पहनना लगभग बंद ही कर दिया। राजेश जब आता तो पूरी नंगी ही रहती, उसके सामने नंगी खाना बनाना, उससे बात करना तब भी नंगी। सिर्फ़ मंगलसूत्र गले में। वो मंगलसूत्र देखकर और भी ज़्यादा हॉट लगता था। और बेडरूम में तो उसकी चूत में जैसे आग लगी रहती थी।
अब मैं समझ नहीं पा रहा था की और आगे कैसे बढूँ, न तो राजेश ही अपने आप कुछ पहल कर रहा था और न ही रेनू, हालाँकि अब तक मैंने जो भी किया उसका रेनू ने कोई विरोध नहीं किया पर ये भी नहीं कहा की वो राजेश से चुदवाना चाहती है। फिर एक वीकेंड पर थोड़ा ट्विस्ट आया। ऑफिस से लौटा तो रेनू ने एक छोटी सी ड्रेस पहनी थी पर अन्दर ब्रा और पैंटी नहीं थी। मुझे उसे नंगी देख-देखकर आदत पड़ गई थी तो आज कपड़े देखकर हैरानी हुई। राजेश आया तो वो भी चौंका।
मैंने सोचा चलो कपड़े उतार दूँ, पर फिर क्यूरियस हुआ कि अगर मैं कुछ न करूँ तो क्या होगा? क्या ये खुद नंगी होगी ये फिर राजेश कुछ करेगा इसीलिए ऐसे ही छोड़ दिया। रेनू ने उसी छोटी ड्रेस में खाना बनाया। कभी झुकती तो गांड और चूत की झलक मिल जाती, बाकी समय ढका रहता। डिनर पर बैठे तो रेनू बोली,
“वो जो नई डीवीडी तुम लाए थे न?”
“हाँ?”
“आज डिनर के बाद देखते हैं। कल तो छुट्टी है तो राजेश-जी भी रुक जायेंगे।”
पहली बार मुझे लगा कि रेनू ने कुछ प्लान किया है। मैंने हाँ कर दी, राजेश भी तुरंत तैयार। डिनर के बाद रेनू बोली, “तुम दोनों लिविंग रूम में जाओ, डीवीडी प्लेयर ऑन करो, मैं बर्तन निपटाकर आती हूँ।”
हम लिविंग रूम में पहुँचे। दो सोफ़े लगे थे। मैं एक पर बैठा, राजेश दूसरे पर (सोचकर कि रेनू मेरे पास बैठेगी)। मैंने डीवीडी डाली, टाइटल्स पर पॉज़ किया और बातें करने लगे।
मैं सोच रहा था कि रेनू नंगी आएगी, पर वो उसी ड्रेस में आई। थोड़ी निराशा तो हुई पर अगले ही पल मैं चौंक गया क्योंकि रेनू मेरे पास नहीं, राजेश वाले सोफ़े पर बैठ गई!
राजेश भी हैरान। रेनू बोली, “मुझे इस कोने से मूवी देखने का एंगल ज़्यादा अच्छा लगता है।”
मैं हँसी रोकते-रोकते मरा। बकवास बहाना था। मुझे मज़ा आ गया। पहली बार रेनू खुद इनिशिएटिव ले रही थी। मैंने मूवी स्टार्ट कर दी।
रेनू सोफ़े पर राजेश के साथ बैठी थी फिर थोड़ी दूर रेनू ने सर झुकाकर आर्मरेस्ट पर टिका दिया, पैर ऊपर सोफ़े पर खींच लिए और घुटनों मोड़कर लेट गई। अब उसकी आधी गांड और चूत साफ़ दिख रही थी। मैंने तुरंत देख लिया और मन ही मन मुस्कुराया। राजेश को समझ आने में थोड़ा टाइम लगा। जब समझ आया तो पहले चूत को ताका, फिर स्क्रीन देखी, फिर वापस चूत। रेनू मूवी में “खोई” हुई थी (या नाटक कर रही थी)। कुछ मिनट ऐसे ही चले। फिर रेनू ने अगला मूव खेला। उसने पैर सीधे किए और राजेश की गोद में रख दिए। पहला फिजिकल टच! राजेश चौंककर उछला। रेनू स्क्रीन देखती रही।
राजेश उसके नाज़ुक पैरों को गोद में लिए ताकता रहा। कुछ देर बाद उसने डरते-डरते एक हाथ उसके पैर पर रखा। रेनू ने कोई रिएक्शन नहीं दिया। तो उसने धीरे-धीरे मालिश शुरू कर दी। रेनू के चेहरे पर हल्की मुस्कान आ गई। मज़ा ले रही थी। थोड़ी देर बाद रेनू ने पैर और फैलाए। अब उसके नंगे पिंडलियाँ राजेश की गोद में थीं। राजेश ने हाथ पैर से हटाकर पिंडलियों पर रखा और दोनों हाथों से मालिश करने लगा। मुझे पता है रेनू को ये बहुत पसंद है। वो हल्के से सिसकारी, “उफ्फ्फ… अच्छा लग रहा है… दिन भर काम से पैर दुख रहे थे।”
bahut badhiya aur bahut hi mast update!राजेश एक पल को रुक गया और मेरी तरफ देखा। मैंने मुस्कुराकर उसकी तरफ देखा और फिर स्क्रीन की तरफ। अब हम तीनों में से किसी को मालूम नहीं था कि मूवी में चल क्या रहा है पर सबने चुपचाप मूवी देखने का नाटक जारी रखने का फैसला कर लिया था। राजेश उसकी पिंडलियों को सहलाता रहा, मालिश करता रहा, और धीरे-धीरे हाथ ऊपर खिसकाता गया। दस मिनट में उसका हाथ घुटनों के ऊपर पहुँच चुका था, अब वो जाँघों के निचले हिस्से को मल रहा था, ठीक स्कर्ट के किनारे के नीचे। वहाँ कुछ देर मालिश की और रुक गया, शायद आगे बढ़ने में हिचक रहा था।
रेनू अभी भी स्क्रीन की तरफ देख रही थी। फिर उसने अपना दायाँ पैर उठाया, घुटने से मोड़ा और सोफ़े की पीठ से टिका दिया। इससे स्कर्ट पूरी तरह कमर तक लुढ़क गई और उसकी चूत राजेश के सामने एकदम साफ़ हो गई। राजेश ने इसे ग्रीन सिग्नल समझा। उसने एक हाथ और ऊपर सरकाया, अब उसकी उंगलियाँ चूत के ठीक नीचे थीं। वो इर्द-गिर्द घुमाने लगा। मुझे भी उसकी पतलून में बड़ा सा तंबू दिख गया, लंड एकदम टाइट हो गया था। पहले जब रेनू नंगी होती थी तो टेबल के नीचे छुप जाता था, इसलिए पता नहीं चलता था कि वो खड़ा होता है या नहीं। आज साफ़ दिख रहा था।
उंगलियाँ अभी भी चूत के आस-पास घूम रही थीं, तभी राजेश ने मेरी तरफ देखा। मैंने फट से नज़र स्क्रीन पर डाल दी, जैसे कह रहा हूँ, “जा बेटा, मैं देख नहीं रहा” (हालाँकि सबको पता था कि मैं सब देख रहा हूँ)। कोने से आँख देखते हुए मैंने देखा, उसकी उंगली चूत के होंठों पर फिसली और धीरे-धीरे अंदर घुस गई।
रेनू ने बड़ी जोर की सिसकारी भरी, “आआह्ह्ह…”
मैं उठा और उनके पास जाकर खड़ा हो गया। राजेश ने झटके से हाथ खींच लिया, गोद में रख लिया और डर के मारे मेरी तरफ देखने लगा। रेनू मुस्कुरा रही थी, जैसे कह रही हो, “अब तुम्हारी बारी डिअर हस्बैंड!”
मैंने दोनों को बारी-बारी देखा और कहा,
“अच्छा रेनू, तेरी चूत में उसकी उंगलियाँ पसंद आ रही हैं तो कम से कम सही पोज़ीशन में तो आ।”
मैंने उसके पैर पकड़े, खींचा, वो पीठ के बल लुढ़क गई। फिर मैंने दोनों टाँगें चौड़ी कर दीं, चूत के होंठ अपने आप थोड़े खुल गए। स्कर्ट को कमर पर छोटा सा रोल बना दिया।
“लो, अब आराम से उंगली कर सकता है। वैसे ये ड्रेस का क्या काम?”
कहते हुए मैंने उसकी ड्रेस उतार दी। अब उसके मस्त बूब्स भी बाहर। मैं घुटनों के बल बैठ गया और उसके बूब्स चूसने-दबाने लगा। राजेश ने हिम्मत जुटाई और फिर से चूत में उंगली डाल दी। अंगूठे से क्लिट रगड़ने लगा।
मैं बूब्स चाटता-काटता रहा, मंगलसूत्र को निप्पल पर रगड़ता रहा (ये उसका फेवरेट है)। दोनों तरफ से हमला पड़ा तो रेनू ज्यादा देर टिक नहीं पाई। पाँच-सात मिनट में ही वो जोर-जोर से चिल्लाने लगी, पूरा सोफ़ा हिलाने लगी और एक जबरदस्त ऑर्गेज़म में झड़ गई। करीब एक मिनट तक तड़पती रही, फिर शांत हुई।
राजेश ने हाथ रोक दिया। मैं अपनी सोफ़े पर वापस बैठ गया। रेनू ने साँसें लीं, फिर उठी, स्कर्ट भी उतार फेंकी, पूरी नंगी हो गई और मेरी तरफ देखकर साफ़-साफ़ बोली,
“मुझे अभी चुदना है।”
उसकी आवाज़ में वो दबंगई सुनकर मज़ा आ गया। मेरी शर्मीली बीवी कितना बदल गई थी!
“बढ़िया आज दो दो लंड का मजा एक साथ लो, मैं बहुत दिनों से सोच रहा था की राजेश तुम्हे मेरे सामने...” मैं बोल ही रहा था की उसने मुझे टोक दिया।
“नहीं, इनके साथ नहीं।” वो राजेश की तरफ देखकर बोली, “सॉरी राजेश-जी, मैं इससे ज्यादा के लिए आपके साथ कंफर्टेबल नहीं हूँ…”
राजेश ने निराशा से सिर हिलाया, “ठीक है तो मैं चलता हूँ।”
वो उठने लगा तो मैंने उसे रोका और रेनू का कंधा दबाया और उसे वापस राजेश के साथ बिठा दिया।
“रुको रेनू। देखो राजेश कितना परेशान है।” मैंने उसकी पेंट के तंबू की तरफ इशारा किया। “इसकी बीवी भी यहाँ नहीं है, और तुमने इसको इतना छेड़ा है और अब इसको ऐसे ही जाने को कह रही हो…”
"मैं सेक्स तुम्हारे अलावा किसी के साथ नहीं कर सकती तो इससे ज्यादा तो कुछ नहीं होगा" रेनू ने कहा तो मुझे बहुत अफ़सोस हुआ की मेरी फंतासी का क्या होगा।
"चलो सेक्स न सही कम से कम राजेश को रिलैक्स तो कर दो। इतना तो तुम्हारा फ़र्ज़ बनता है, मुंह से ही कर दो..." मेरी बात सुन कर रेनू ने कुछ देर सोचा और फिर वो राजेश के सामने घुटनों के बल बैठ गई और उसकी पेंट की ज़िप खोल दी। राजेश का खड़ा लंड बाहर उछल आया, काफी बड़ा और मोटा साइज़ था, मैंने सोचा अगर रेनू आज इसको लेती तो उसको बहुत मज़ा आता। उधर रेनू ने अपने नाज़ुक हाथ उसको से पकड़ा और धीरे-धीरे हिलाने लगी।
“हाथ से कर दूं?” उसने मेरी तरफ देखकर पूछा। मैंने सोचा की जब रेनू का मुंह में लेने का मन नहीं है तो फिर से कहना ठीक नहीं होगा और सिर हिलाकर हाथ से करने की इजाज़त दे दी।
राजेश सोफ़े पर पीठ टिकाकर मज़े लेने लगा। मुझे हैरानी हुई, रेनू कितनी प्रोफेशनल तरीके से हिलाती है! मुझे कभी हँडजॉब नहीं दिया। मेरा मानना है कि औरत का हाथ थकाने से अच्छा है उसकी चूत या मुँह इस्तेमाल करो। पर राजेश को इसमें ही बहुत मज़ा आ रहा था और वो जल्दी ही झड़ने लगा। रेनू ने लंड इस एंगल पर पकड़ा कि सारा माल कॉफ़ी टेबल पर गिरा,थोड़ा सा उसकी पेंट पर।
“थैंक यू, सर...मैडम…” वो कृतज्ञ स्वर में बोला, “सच में इसकी बहुत ज़रूरत थी।”
"ठीक है अब आप जाइये" रेनू ने कहा तो राजेश ने लंड वापस अंदर डाला, ज़िप बंद की और उठा। रेनू नंगी ही उसके साथ दरवाज़े तक गई। वहाँ उसने राजेश के गाल पर प्यार से किस किया, राजेश ने भी उसके गाल पर किस किया और चला गया। बेशक मेरा लंड तो पत्थर जैसा हो चुका था, अपनी बीवी को इतना रंडीपना करते देखकर। जैसे ही रेनू दरवाज़े से लौटी, मैं उस पर टूट पड़ा। सोफ़े पर पटका और वहीं ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा। फिर नीचे गया, उसकी चूत चाट-चाटकर एक और बार झड़वा दिया। उस रात हमने दो बार और चुदाई की। आख़िर में दोनों थककर नंगे ही सोफ़े पर सो गए।
Uff kya hot kahani hai.. bilkul khada ho gayaअगला दिन संडे था। हम सोकर उठे तो मैंने सोचा की जो कल हुआ वो शायद नशे में हुआ लेकिन अब मेरा बहुत मन था की मैं रेनू को राजेश से चुदवाते देखूं। मैं अभी ये तय नहीं कर पाया था की रेनू इसके लिए तैयार होने में कितना वक़्त लेगी या फिर होगी भी या नहीं। वैसे राजेश भी थोडा सा हिला हुआ था और सन्डे को वो आम तौर पर लंच के लिए भी आता था, पर उस दिन नहीं आया। फोन किया तो बोला शहर शॉपिंग के लिए गया है। मैं इस सिलसिले को और आगे ले जाना चाहता था तो मैंने कहा रात के डिनर के लिए ज़रूर आना, वो हिचकिचाते हुए मान गया।
उधर रेनू भी चुपचाप थी। उसको भी समझ नहीं आ रहा था की कल मैंने क्या किया था और अब आगे क्या होने वाला था। मैंने फिलहाल अपने प्लान के बारे में उससे बात न करने का निर्णय लिया और उसे बताया की राजेश लंच के लिए नहीं आयेगा, सिर्फ डिनर करेगा। रात को जब राजेश आया, मैंने आधे घंटे तक कुछ नहीं किया।
रेनू स्कर्ट और टैंक टॉप में किचन में थी। आधा घंटा बाद मैंने कहा चलो किचन की डाइनिंग टेबल पर बैठते हैं। जैसे ही वहाँ पहुँचे, मैं रेनू के पास गया और चुपके से उसका स्कर्ट नीचे सरका दिया। पूरा नीचे टखनों तक, और उसने कुछ नहीं किया बल्कि पैर से निकालकर उनको एक तरफ रख दिया। अब कमर के नीचे वो पूरी नंगी थी।
राजेश और मैं फिर बातें करने लगे और उसकी नंगी गांड ताकने लगे। अब वो काफ़ी रिलैक्स लग रहा था। शराब नहीं पी थी, इसलिए उसे पता चल गया था कि कल रात जो हुआ वो भले ही नशे में हुआ था पर अब ये कोई नशे की हरकत नहीं थी, हम दोनों को सब मंज़ूर है। खाना बनने के बाद रेनू ने स्कर्ट वापस पहना और टेबल पर आकर बैठ गई। उसके बाद से जो रूटीन बना, वो ये कि जैसे ही राजेश आता, मैं रेनू का शॉर्ट्स-पैंटी उतार देता। पहले दो-चार दिन तो वो आधी नंगी खाना बनाती, फिर डिनर से पहले वापस पहन लेती। मगर बाद में उसने वो भी बंद कर दिया। अब राजेश के सामने रेनू ज्यादातर कमर के नीचे पूरी नंगी रहती। उसकी चिकनी चूत और गोल गांड देखते-देखते राजेश को आदत पड़ गई।
एक हफ्ते बाद तो रेनू राजेश के आने से पहले खुद ही नीचे के कपडे उतार देती ताकि मुझे न उतारने पड़े। ऊपर से ब्रा, टॉप और मंगलसूत्र वैसे के वैसे। राजेश घूरता तो था, पर कभी कुछ बोला नहीं, मैंने भी नहीं। तभी मैंने अगला स्टेप लेने का सोचा।
एक रात रेनू खाना बना रही थी, मैं उसके पास गया और उसका टॉप ऊपर खींचने लगा।
“रुको।” उसने कहा। मैं रुक गया, सोचा शायद लिमिट क्रॉस हो गई। मगर वो बोली, “हाथ में मसाले लगे हैं, टॉप खराब हो जाएगा। पहले हाथ धो लूँ।”
वो दो कदम चली, सिंक में हाथ धोए, पोछे, फिर दोनों हाथ ऊपर उठा लिए। मैंने टॉप उतारा और वो सिर्फ़ ब्रा में वापस खाना बनाने लगी। और बेशक मंगलसूत्र तो पहना ही था। राजेश की तो जैसे लॉटरी लग गई। उस रात रेनू ने पूरे घर में, खाना बनाते हुए, डिनर करते हुए सिर्फ़ ब्रा में ही घूमती रही। नीचे पूरी नंगी। ब्रा में से भी उसके मस्त उभार साफ़ दिख रहे थे।
अगले दिन से उसने टॉप पहनना भी बंद कर दिया और अब कुछ दिन ये सीन रहा की राजेश जब भी घर आता, रेनू सिर्फ़ ब्रा में और मंगलसूत्र में रहती।
जैसी उम्मीद थी, इस स्टेप ने रेनू को बिस्तर पर और भी जंगली बना दिया। लगभग हर सुबह मैं उठता तो मेरी बीवी नंगी होती और मेरा लंड उसके मुँह में। सुबह काम पर जाने से पहले दो-दो बार चुदाई रूटीन बन गया।
हम तीनों को पता था अगला स्टेप क्या होने वाला है, रेनू को पूरी तरह नंगी होना था। अब तक मैं ही सब कर रहा था, रेनू और राजेश सिर्फ़ साथ दिया जा रहे थे। मैंने सोचा इनकी तड़प थोड़ी और बढ़ा दूँ। करीब दो हफ्ते तक सब वैसे ही रहा। रेनू सिर्फ़ ब्रा में, राजेश दिन-रात घूरता रहता। मुझे पूरा यकीन था कि वो हर रात रेनू की बॉडी और उसके खूबसूरत चेहरे को याद करके मुठ मारता होगा।
दो हफ्ते बाद मैंने सोचा अब समय आ गया। रेनू खाना बनाकर हमारी टेबल पर आई, सिर्फ़ ब्रा और मंगलसूत्र पहने। मंगलसूत्र उसकी क्लीवेज में लटक रहा था। डिनर के बीच में मैंने बिल्कुल कैजुअली उसकी पीठ के पीछे हाथ डाला और लेफ्ट हैंड से ब्रा का हुक खोल दिया।
रेनू का चेहरा एकदम सीरियस हो गया, वो प्लेट में ही घूरती रही। मैंने स्ट्रैप्स को कंधों से नीचे सरकाया, ब्रा का कप आगे गिरा और उसके मस्त, गोरे-गोरे बूब्स राजेश के सामने पूरी तरह नंगे हो गए।
पहली बार राजेश के मुँह से आवाज़ निकली, हल्का सा “ओह गॉड”। उसने खाना छोड़ दिया और कुछ मिनटों तक बस उसके बूब्स को ताकता रहा। रेनू ने आराम से ब्रा पूरी उतारी और पास की कुर्सी पर रख दी। अब वो सौ प्रतिशत नंगी थी।
