debesh1107
New Member
- 72
- 20
- 8
Awesome update“सर, मैं चलता हूँ अब।” राजेश घबराते हुए बोला।
“बैठे रहो यार और जवाब दो। मेरी बीवी की गांड से ज्यादा हॉट गांड तुमने किसी और औरत की देखी है क्या?” मैंने थोड़ी ऊँची आवाज़ में पूछा।
“सर, हम दोनों ने काफी पी रखी है और…” वो उठने की कोशिश करने लगा।
“बैठ जाओ!” मैं चिल्लाया और वो तुरंत धप्प से बैठ गया। “अब सवाल का जवाब दो। उसकी गांड देखो।”
राजेश ने डरते-डरते सिर घुमाया और रेनू की गांड देखने लगा।
“बताओ क्या ख्याल है।” मैंने आगे कहा।
“सर… मैं… मतलब… प्लीज सर…” राजेश हकलाने लगा।
“मैं समझ गया तू क्या कहना चाह रहा है। दरअसल तूने अभी तक उसकी गांड ठीक से देखी ही नहीं? सही कहा न?” मैंने उठते हुए पूछा।
राजेश डर के मारे सिकुड़ गया, शायद सोचा मैं मारने वाला हूँ। लेकिन मैं उठा और रेनू के पीछे जाकर खड़ा हो गया।
“मैं मानता हूँ कि तुमने अभी तक ठीक से देखा ही नहीं, इसलिए फैसला कैसे करोगे। चलो, मैं मदद करता हूँ।” मैंने कहा और रेनू के शॉर्ट्स के पीछे की तरफ दोनों हाथों से पकड़कर नीचे का हिस्सा ऊपर खींचने लगा। मैंने उन्हें मुट्ठी में लपेटते हुए इतना ऊपर कर दिया कि दोनों गांड के आधे-आधे हिस्से बाहर आ गए, साथ में उसकी पैंटी भी थोड़ी सी झलक गई।
“अब बोलो, मेरी बीवी की गांड सबसे शानदार है या नहीं?”
राजेश मुँह खोले रेनू की गांड को ताके जा रहा था। मुझे पूरा यकीन था कि रेनू अब चिल्लाएगी या मेरा हाथ झटक देगी। मगर बस वो एक सेकंड के लिए रुकी पर उसने कुछ नहीं किया, बस वैसे ही खाना बनाती रही जैसे कुछ हुआ ही न हो। आखिरकार मैंने शॉर्ट्स छोड़ दिया और वो वापस नीचे लुढ़क गए।
“लगता है अभी भी फैसला नहीं कर पाए। शायद इसलिए…” मैंने ठुड्डी पर हाथ रखकर सोचने का नाटक किया, “…कि अभी तक तुमने उसकी गांड ठीक से देखी ही नहीं।”
और फिर मैंने वो कर दिया जो कई दिनों से मेरे मन में चल रहा था। मैंने रेनू की कमर में उंगलियाँ डालीं और एक झटके में शॉर्ट्स और पैंटी दोनों को घुटनों तक नीचे खींच दिया। उसकी गांड अब राजेश के सामने पूरी तरह नंगी थी। रेनू एकदम भौंचक्की रह गयी। उसने ये नहीं सोचा था। वो वापस अपने कपडे ऊपर खीचते हुए बोली।
"क्या कर रहे हो? पागल हो गए हो क्या?" मुझे लगा बस अब खेल खत्म।
मगर हैरानी की बात थी की मैंने ठंडी आवाज में कहा "ऐसे ही रहने दो जब तक मैं न कहूं" और वापस उसके शॉर्ट्स और पैंटी को घुटनों तक नीचे खींच दिया। रेनू दो-तीन सेकंड के लिए सख्त हो गई, जैसे कुछ सोच रही हो और बोली “जैसा तुम ठीक समझो” और फिर नॉर्मल हो कर खाना बनाने लगी।
मैं मुस्कुराया, टेबल पर वापस आकर बैठ गया। राजेश बिल्कुल ललचाई आँखों से उसे देख रहा था। रेनू नंगी गांड लिए खड़ी थी, शॉर्ट्स-पैंटी घुटनों के पास लटक रही थीं, और वो आराम से खाना बना रही थी। मैं भी अब नई नजर से उसकी गांड निहारने लगा। जब से मुझे पता चला था कि रेनू के अंदर छुपी हुई एग्जिबिशनिस्ट है, तब से मैं उसे राजेश के सामने एक्सपोज करने की सोच रहा था, पर हिम्मत नहीं पड़ रही थी।
और अब जब कर दिया तो रेनू ने बिल्कुल कूल रहकर रिएक्ट किया। मुझे वो दिन याद आ गया जब फल वाली आंटी ने हमें पकड़ लिया था। तब भी वो नहीं घबराई थी, आज भी नहीं। उल्टा, जैसे ही वो एक्सपोज होती है, उसकी कॉन्फिडेंस दस गुना बढ़ जाती है।
हम तीनों करीब दस मिनट तक ऐसे ही रहे। राजेश और मैं उसकी गांड निहारते रहे, रेनू खाना बनाती रही। आखिरकार रेनू मुझसे बोली,
“खाना तैयार है। अब वापस पहन लूं?”
मैंने सर हिला कर उसे इजाजत दी तो उसने झुककर शॉर्ट्स और पैंटी ऊपर खींची और डिनर परोसने लगी। हमने चुपचाप खाना खाया, फिर राजेश चला गया।
उस रात बिस्तर पर रेनू पूरी तरह पागल हो गई थी। बहुत तेज़ आवाज़ें, बहुत ज़्यादा सेक्स। गंदी गालियाँ तो नहीं निकलीं मुँह से, पर उसकी चुदाई की भूख साफ़ झलक रही थी। हमने उस रात जितनी बार चुदाई की, कभी एक रात में इतनी नहीं की थी। न हमने उस घटना के बारे में बात की, न उसने। सुबह करीब चार बजे, दोनों नंगे एक-दूसरे की बाहों में सो गए।







Awesome updateराजेश एक पल को रुक गया और मेरी तरफ देखा। मैंने मुस्कुराकर उसकी तरफ देखा और फिर स्क्रीन की तरफ। अब हम तीनों में से किसी को मालूम नहीं था कि मूवी में चल क्या रहा है पर सबने चुपचाप मूवी देखने का नाटक जारी रखने का फैसला कर लिया था। राजेश उसकी पिंडलियों को सहलाता रहा, मालिश करता रहा, और धीरे-धीरे हाथ ऊपर खिसकाता गया। दस मिनट में उसका हाथ घुटनों के ऊपर पहुँच चुका था, अब वो जाँघों के निचले हिस्से को मल रहा था, ठीक स्कर्ट के किनारे के नीचे। वहाँ कुछ देर मालिश की और रुक गया, शायद आगे बढ़ने में हिचक रहा था।
रेनू अभी भी स्क्रीन की तरफ देख रही थी। फिर उसने अपना दायाँ पैर उठाया, घुटने से मोड़ा और सोफ़े की पीठ से टिका दिया। इससे स्कर्ट पूरी तरह कमर तक लुढ़क गई और उसकी चूत राजेश के सामने एकदम साफ़ हो गई। राजेश ने इसे ग्रीन सिग्नल समझा। उसने एक हाथ और ऊपर सरकाया, अब उसकी उंगलियाँ चूत के ठीक नीचे थीं। वो इर्द-गिर्द घुमाने लगा। मुझे भी उसकी पतलून में बड़ा सा तंबू दिख गया, लंड एकदम टाइट हो गया था। पहले जब रेनू नंगी होती थी तो टेबल के नीचे छुप जाता था, इसलिए पता नहीं चलता था कि वो खड़ा होता है या नहीं। आज साफ़ दिख रहा था।
उंगलियाँ अभी भी चूत के आस-पास घूम रही थीं, तभी राजेश ने मेरी तरफ देखा। मैंने फट से नज़र स्क्रीन पर डाल दी, जैसे कह रहा हूँ, “जा बेटा, मैं देख नहीं रहा” (हालाँकि सबको पता था कि मैं सब देख रहा हूँ)। कोने से आँख देखते हुए मैंने देखा, उसकी उंगली चूत के होंठों पर फिसली और धीरे-धीरे अंदर घुस गई।
रेनू ने बड़ी जोर की सिसकारी भरी, “आआह्ह्ह…”
मैं उठा और उनके पास जाकर खड़ा हो गया। राजेश ने झटके से हाथ खींच लिया, गोद में रख लिया और डर के मारे मेरी तरफ देखने लगा। रेनू मुस्कुरा रही थी, जैसे कह रही हो, “अब तुम्हारी बारी डिअर हस्बैंड!”
मैंने दोनों को बारी-बारी देखा और कहा,
“अच्छा रेनू, तेरी चूत में उसकी उंगलियाँ पसंद आ रही हैं तो कम से कम सही पोज़ीशन में तो आ।”
मैंने उसके पैर पकड़े, खींचा, वो पीठ के बल लुढ़क गई। फिर मैंने दोनों टाँगें चौड़ी कर दीं, चूत के होंठ अपने आप थोड़े खुल गए। स्कर्ट को कमर पर छोटा सा रोल बना दिया।
“लो, अब आराम से उंगली कर सकता है। वैसे ये ड्रेस का क्या काम?”
कहते हुए मैंने उसकी ड्रेस उतार दी। अब उसके मस्त बूब्स भी बाहर। मैं घुटनों के बल बैठ गया और उसके बूब्स चूसने-दबाने लगा। राजेश ने हिम्मत जुटाई और फिर से चूत में उंगली डाल दी। अंगूठे से क्लिट रगड़ने लगा।
मैं बूब्स चाटता-काटता रहा, मंगलसूत्र को निप्पल पर रगड़ता रहा (ये उसका फेवरेट है)। दोनों तरफ से हमला पड़ा तो रेनू ज्यादा देर टिक नहीं पाई। पाँच-सात मिनट में ही वो जोर-जोर से चिल्लाने लगी, पूरा सोफ़ा हिलाने लगी और एक जबरदस्त ऑर्गेज़म में झड़ गई। करीब एक मिनट तक तड़पती रही, फिर शांत हुई।
राजेश ने हाथ रोक दिया। मैं अपनी सोफ़े पर वापस बैठ गया। रेनू ने साँसें लीं, फिर उठी, स्कर्ट भी उतार फेंकी, पूरी नंगी हो गई और मेरी तरफ देखकर साफ़-साफ़ बोली,
“मुझे अभी चुदना है।”
उसकी आवाज़ में वो दबंगई सुनकर मज़ा आ गया। मेरी शर्मीली बीवी कितना बदल गई थी!
“बढ़िया आज दो दो लंड का मजा एक साथ लो, मैं बहुत दिनों से सोच रहा था की राजेश तुम्हे मेरे सामने...” मैं बोल ही रहा था की उसने मुझे टोक दिया।
“नहीं, इनके साथ नहीं।” वो राजेश की तरफ देखकर बोली, “सॉरी राजेश-जी, मैं इससे ज्यादा के लिए आपके साथ कंफर्टेबल नहीं हूँ…”
राजेश ने निराशा से सिर हिलाया, “ठीक है तो मैं चलता हूँ।”
वो उठने लगा तो मैंने उसे रोका और रेनू का कंधा दबाया और उसे वापस राजेश के साथ बिठा दिया।
“रुको रेनू। देखो राजेश कितना परेशान है।” मैंने उसकी पेंट के तंबू की तरफ इशारा किया। “इसकी बीवी भी यहाँ नहीं है, और तुमने इसको इतना छेड़ा है और अब इसको ऐसे ही जाने को कह रही हो…”
"मैं सेक्स तुम्हारे अलावा किसी के साथ नहीं कर सकती तो इससे ज्यादा तो कुछ नहीं होगा" रेनू ने कहा तो मुझे बहुत अफ़सोस हुआ की मेरी फंतासी का क्या होगा।
"चलो सेक्स न सही कम से कम राजेश को रिलैक्स तो कर दो। इतना तो तुम्हारा फ़र्ज़ बनता है, मुंह से ही कर दो..." मेरी बात सुन कर रेनू ने कुछ देर सोचा और फिर वो राजेश के सामने घुटनों के बल बैठ गई और उसकी पेंट की ज़िप खोल दी। राजेश का खड़ा लंड बाहर उछल आया, काफी बड़ा और मोटा साइज़ था, मैंने सोचा अगर रेनू आज इसको लेती तो उसको बहुत मज़ा आता। उधर रेनू ने अपने नाज़ुक हाथ उसको से पकड़ा और धीरे-धीरे हिलाने लगी।
“हाथ से कर दूं?” उसने मेरी तरफ देखकर पूछा। मैंने सोचा की जब रेनू का मुंह में लेने का मन नहीं है तो फिर से कहना ठीक नहीं होगा और सिर हिलाकर हाथ से करने की इजाज़त दे दी।
राजेश सोफ़े पर पीठ टिकाकर मज़े लेने लगा। मुझे हैरानी हुई, रेनू कितनी प्रोफेशनल तरीके से हिलाती है! मुझे कभी हँडजॉब नहीं दिया। मेरा मानना है कि औरत का हाथ थकाने से अच्छा है उसकी चूत या मुँह इस्तेमाल करो। पर राजेश को इसमें ही बहुत मज़ा आ रहा था और वो जल्दी ही झड़ने लगा। रेनू ने लंड इस एंगल पर पकड़ा कि सारा माल कॉफ़ी टेबल पर गिरा,थोड़ा सा उसकी पेंट पर।
“थैंक यू, सर...मैडम…” वो कृतज्ञ स्वर में बोला, “सच में इसकी बहुत ज़रूरत थी।”
"ठीक है अब आप जाइये" रेनू ने कहा तो राजेश ने लंड वापस अंदर डाला, ज़िप बंद की और उठा। रेनू नंगी ही उसके साथ दरवाज़े तक गई। वहाँ उसने राजेश के गाल पर प्यार से किस किया, राजेश ने भी उसके गाल पर किस किया और चला गया। बेशक मेरा लंड तो पत्थर जैसा हो चुका था, अपनी बीवी को इतना रंडीपना करते देखकर। जैसे ही रेनू दरवाज़े से लौटी, मैं उस पर टूट पड़ा। सोफ़े पर पटका और वहीं ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा। फिर नीचे गया, उसकी चूत चाट-चाटकर एक और बार झड़वा दिया। उस रात हमने दो बार और चुदाई की। आख़िर में दोनों थककर नंगे ही सोफ़े पर सो गए।