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करीब एक महीना ऐसे ही बीत गया और फिर वह दिन आया जब चीजें पहली बार एक अलग लेवल पर चलीं गईं। यह शनिवार था, और जैसे हम अधिकतर वीकेंड पर करते थे, राजेश और मैं पी रहे थे। हम दोनों कुछ ड्रिंक्स के नशे में थे और रेनू हमारे लिए स्नैक्स बनाने के लिए रसोई में काम कर रही थी। उसने शॉर्ट्स पहने हुए थे जो, हालाँकि हॉटपैंट नहीं थे, फिर भी इतनी छोटी थीं कि उसकी चिकनी और फेयर जांघें दिख रही थीं। अब तक राजेश ने कोई परवाह नहीं दिखाते हुए मेरी पत्नी की खुलकर प्रशंसा करनी शुरू कर दी थी। उसने शायद समझ लिया था कि मैं कुछ नहीं कह रहा था, इसलिए देखना ठीक था।
क्योंकि बहुत सारे स्नैक्स थे, हम दोनों डाइनिंग टेबल पर बैठकर पी रहे थे। हम दोनों थोड़े नशे में थे। रेनू करीब दस फुट दूर थी, पीठ हमारी तरफ करके खाना बना रही थी। शॉर्ट्स स्किन-टाइट नहीं थे, लेकिन रेनू की गांड का शेप बहुत अच्छे से उभर रहा था। हम बातें कर रहे थे, राजेश हर दो-चार मिनट में उसकी गांड की तरफ देख लेता था।
मैं कई दिनों से कुछ करने की सोच रहा था। शराब ने हिम्मत दे दी। अगली बार जब राजेश ने सिर घुमाकर रेनू को देखा, मैंने कहा,
“इतना क्या देख रहे हो, राजेश?”
राजेश ने झटके से सिर सीधा किया और मेरी तरफ देखा,
“हम्म? क्या?” उसने हल्का तुतलाते हुए कहा।
“मैंने पूछा वहाँ क्या देख रहे हो?” मैंने अंगूठा रेनू की तरफ करके कहा।
“कुछ नहीं सर। सॉरी सर।” उसने जवाब दिया। भले ही वो मेरे नीचे काम करता था, लेकिन मुझसे करीब दस साल बड़ा था। मैंने उसे नाम से बुलाने को कहा था, पर वो पुराने ख़यालों का था, सर ही बुलाता था।
“कुछ नहीं या सॉरी? अगर कुछ नहीं था तो सॉरी की क्या जरूरत। और अगर सॉरी है तो कुछ तो था।” मैंने उस पर उंगली तानते हुए कहा।
राजेश मुझे घूर कर देखने लगा, चेहरे पर घबराहट साफ दिख रही थी। माथे पर पसीने की बूंदें आ गईं। वो चुप रहा। मैंने कुछ सेकंड तक उसे और घबराने दिया।
“एक बात बता।” मैंने कहा, “क्या लगता है, मेरी बीवी हॉट है?”
“नहीं सर या हाँ सर? दोनों एक साथ नहीं हो सकता राजेश। सच-सच बता। मैं तुझे खा थोड़ी न जाऊँगा। रेनू खूबसूरत है या नहीं?”
रेनू सारी बातें सुन रही थी, लेकिन बिना रुके, बिना पलटे खाना बनाती रही।
“हाँ सर। सॉरी सर।” राजेश ने माथा पोंछते हुए कहा।
“सॉरी की कोई बात नहीं राजेश। बिल्कुल है वो खूबसूरत। रिलैक्स कर। मुझे कोई गुस्सा नहीं कि किसी को मेरी बीवी हॉट लगती है।” मैंने कहा और अपना ग्लास एक घूँट में खाली कर दिया।
राजेश का ग्लास भी लगभग खत्म था। मैंने बोतल उठाई और दोनों के ग्लास फिर से भर दिए।
“पी लो।” मैंने कहा। “लग रहा है तुम्हें जरूरत है।”
राजेश ने खुशी-खुशी ग्लास लिया और आधा एक ही घूँट में गटक गया। मैं चुस्कियाँ लेने लगा और फालतू की कोई बात करने लगा।
पाँच मिनट बाद मैंने बिल्कुल लापरवाही से पूछा,
“राजेश, सच बता, तुमने आज तक रेनू की गांड जैसी शानदार गांड नहीं देखी न?”
राजेश के मुँह से ड्रिंक छूटते-छूटते बची। रेनू भी एक पल को रुक गई, फिर खाना बनाने लगी।
“बैठे रहो यार और जवाब दो। मेरी बीवी की गांड से ज्यादा हॉट गांड तुमने किसी और औरत की देखी है क्या?” मैंने थोड़ी ऊँची आवाज़ में पूछा।
“सर, हम दोनों ने काफी पी रखी है और…” वो उठने की कोशिश करने लगा।
“बैठ जाओ!” मैं चिल्लाया और वो तुरंत धप्प से बैठ गया। “अब सवाल का जवाब दो। उसकी गांड देखो।”
राजेश ने डरते-डरते सिर घुमाया और रेनू की गांड देखने लगा।
“बताओ क्या ख्याल है।” मैंने आगे कहा।
“सर… मैं… मतलब… प्लीज सर…” राजेश हकलाने लगा।
“मैं समझ गया तू क्या कहना चाह रहा है। दरअसल तूने अभी तक उसकी गांड ठीक से देखी ही नहीं? सही कहा न?” मैंने उठते हुए पूछा।
राजेश डर के मारे सिकुड़ गया, शायद सोचा मैं मारने वाला हूँ। लेकिन मैं उठा और रेनू के पीछे जाकर खड़ा हो गया।
“मैं मानता हूँ कि तुमने अभी तक ठीक से देखा ही नहीं, इसलिए फैसला कैसे करोगे। चलो, मैं मदद करता हूँ।” मैंने कहा और रेनू के शॉर्ट्स के पीछे की तरफ दोनों हाथों से पकड़कर नीचे का हिस्सा ऊपर खींचने लगा। मैंने उन्हें मुट्ठी में लपेटते हुए इतना ऊपर कर दिया कि दोनों गांड के आधे-आधे हिस्से बाहर आ गए, साथ में उसकी पैंटी भी थोड़ी सी झलक गई।
“अब बोलो, मेरी बीवी की गांड सबसे शानदार है या नहीं?”
राजेश मुँह खोले रेनू की गांड को ताके जा रहा था। मुझे पूरा यकीन था कि रेनू अब चिल्लाएगी या मेरा हाथ झटक देगी। मगर बस वो एक सेकंड के लिए रुकी पर उसने कुछ नहीं किया, बस वैसे ही खाना बनाती रही जैसे कुछ हुआ ही न हो। आखिरकार मैंने शॉर्ट्स छोड़ दिया और वो वापस नीचे लुढ़क गए।
“लगता है अभी भी फैसला नहीं कर पाए। शायद इसलिए…” मैंने ठुड्डी पर हाथ रखकर सोचने का नाटक किया, “…कि अभी तक तुमने उसकी गांड ठीक से देखी ही नहीं।”
और फिर मैंने वो कर दिया जो कई दिनों से मेरे मन में चल रहा था। मैंने रेनू की कमर में उंगलियाँ डालीं और एक झटके में शॉर्ट्स और पैंटी दोनों को घुटनों तक नीचे खींच दिया। उसकी गांड अब राजेश के सामने पूरी तरह नंगी थी। रेनू एकदम भौंचक्की रह गयी। उसने ये नहीं सोचा था। वो वापस अपने कपडे ऊपर खीचते हुए बोली।
"क्या कर रहे हो? पागल हो गए हो क्या?" मुझे लगा बस अब खेल खत्म।
मगर हैरानी की बात थी की मैंने ठंडी आवाज में कहा "ऐसे ही रहने दो जब तक मैं न कहूं" और वापस उसके शॉर्ट्स और पैंटी को घुटनों तक नीचे खींच दिया। रेनू दो-तीन सेकंड के लिए सख्त हो गई, जैसे कुछ सोच रही हो और बोली “जैसा तुम ठीक समझो” और फिर नॉर्मल हो कर खाना बनाने लगी।
मैं मुस्कुराया, टेबल पर वापस आकर बैठ गया। राजेश बिल्कुल ललचाई आँखों से उसे देख रहा था। रेनू नंगी गांड लिए खड़ी थी, शॉर्ट्स-पैंटी घुटनों के पास लटक रही थीं, और वो आराम से खाना बना रही थी। मैं भी अब नई नजर से उसकी गांड निहारने लगा। जब से मुझे पता चला था कि रेनू के अंदर छुपी हुई एग्जिबिशनिस्ट है, तब से मैं उसे राजेश के सामने एक्सपोज करने की सोच रहा था, पर हिम्मत नहीं पड़ रही थी।
और अब जब कर दिया तो रेनू ने बिल्कुल कूल रहकर रिएक्ट किया। मुझे वो दिन याद आ गया जब फल वाली आंटी ने हमें पकड़ लिया था। तब भी वो नहीं घबराई थी, आज भी नहीं। उल्टा, जैसे ही वो एक्सपोज होती है, उसकी कॉन्फिडेंस दस गुना बढ़ जाती है।
हम तीनों करीब दस मिनट तक ऐसे ही रहे। राजेश और मैं उसकी गांड निहारते रहे, रेनू खाना बनाती रही। आखिरकार रेनू मुझसे बोली,
“खाना तैयार है। अब वापस पहन लूं?”
मैंने सर हिला कर उसे इजाजत दी तो उसने झुककर शॉर्ट्स और पैंटी ऊपर खींची और डिनर परोसने लगी। हमने चुपचाप खाना खाया, फिर राजेश चला गया।
उस रात बिस्तर पर रेनू पूरी तरह पागल हो गई थी। बहुत तेज़ आवाज़ें, बहुत ज़्यादा सेक्स। गंदी गालियाँ तो नहीं निकलीं मुँह से, पर उसकी चुदाई की भूख साफ़ झलक रही थी। हमने उस रात जितनी बार चुदाई की, कभी एक रात में इतनी नहीं की थी। न हमने उस घटना के बारे में बात की, न उसने। सुबह करीब चार बजे, दोनों नंगे एक-दूसरे की बाहों में सो गए।