उस रात, रेनु सच में बिस्तर पर जानवर बन गई। उस रात हम दो बार सेक्स कर चुके थे, मैंने उससे पूछा कि क्या दुसरा कोई उसे अधनंगी देखता है तो उसको मजा आता है? उसने कुछ नहीं कहा बस रेनू मेरे सीने पर सिर रखकर लेट गयी। उसने वापस से एक पतली सी नाइटी पहन ली थी, अंदर कुछ नहीं। मैं उसकी चूची को नाइटी के ऊपर से सहला रहा था। निप्पल एकदम सख्त हो गए थे।

मैंने धीरे से उसका कान चाटा और बोला, “रेनू… आज कुछ नया करते हैं?”
वो शरमाई, “क्या नया?”
मैंने उसकी गांड पर हल्के से थप्पड़ मारा, “ये वाला छेद आज तक बेकार पड़ा है। आज इसे भी चालू करते हैं।”
वो तुरंत सिकुड़ गई, “नहीं मनीष… वो बहुत दर्द होगा… मैं डरती हूँ…”
मैंने उसे सीने से लगाया, “अरे पागल, मैं धीरे-धीरे करूँगा। तूने तो मेरे लिए सब किया है ना? आज मेरे लिए ये भी कर दे। मैं वादा करता हूँ, अगर ज्यादा दर्द हुआ तो तुरंत रोक दूँगा।”
वो चुप रही। मैं समझ गया हाँ है। मैं उठा और अलमारी से नारियल तेल की छोटी शीशी और एक पुराना स्कार्फ़ निकाला। वापस आया और उसे बेड पर घुटनों के बल बैठाया, नाइटी ऊपर उठा दी। उसकी गोरी-गोरी गांड देखकर मेरा लंड एकदम पत्थर हो गया। मैंने उसकी गांड पर प्यार से किस किया, फिर जीभ से गीला करना शुरू किया। वो सिहर उठी, “उफ्फ्फ… गंदा लग रहा है…”
मैंने हँस कर कहा, “कुछ भी गंदा नहीं, तेरी गांड तो गुलाब जैसी है।”
फिर मैंने तेल की शीशी खोली। पहले अपनी उँगलियों पर तेल लगाया, फिर उसकी गांड के छेद पर धीरे-धीरे मलने लगा। वो काँप रही थी। एक उंगली का सिर्फ़ नाखून वाला हिस्सा अंदर डाला। वो तड़प कर बोली, “आह… दर्द…”
मैंने रुक कर उसकी पीठ सहलाई, “साँस छोड़… रिलैक्स हो…”
धीरे-धीरे एक उंगली पूरा अंदर चली गई। मैंने अंदर-बाहर करना शुरू किया। दस-पंद्रह बार करने पर वो थोड़ी ढीली पड़ी।
फिर मैंने दूसरी उंगली भी डाली। अब वो सिसकियाँ ले रही थी, पर मना नहीं कर रही थी। मैंने तेल और डाला। अब दो उँगलियाँ आसानी से अंदर-बाहर हो रही थीं। उसकी चूत से पानी टपक रहा था। मैंने पूछा, “मजा आ रहा है ना?”
वो शरमाते हुए बोली, “हाँ… थोड़ा अजीब सा… पर अच्छा भी लग रहा है…”
अब मैंने अपना लंड तेल से अच्छे से चिकना किया। उसकी कमर पकड़ी और लंड का सुपारा उसकी गांड के छेद पर टिकाया। वो डर गई, “धीरे… बहुत धीरे…”
मैंने सिर्फ़ सुपारा अंदर दबाया। वो जोर से चीखी, “निकालो… बहुत मोटा है…”
मैं रुक गया। उसकी पीठ पर किस किया, “बस थोड़ा सा और… साँस छोड़…”
फिर धीरे-धीरे दबाया। सुपारा पूरा अंदर चला गया। वो दाँत भींचे हुए थी। मैंने रुक कर उसकी चूत सहलानी शुरू की। उँगलियाँ उसकी चूत में डाल दीं। वो फिर गीली होने लगी।

धीरे-धीरे मैंने आधा लंड अंदर कर दिया। अब वो सिर्फ़ सिसक रही थी, चीख नहीं रही थी। मैंने उससे पूछा, “रोकूँ?”
वो धीरे से बोली, “नहीं… अब करो… बस धीरे…”
मैंने धीरे-धीरे आगे-पीछे करना शुरू किया। उसकी गांड बहुत टाइट थी, ऐसा लग रहा था जैसे लंड को निचोड़ रही हो। पाँच-सात धक्के मारते ही वो खुद पीछे को गांड हिलाने लगी। “आह… मनीष… अब अच्छा लग रहा है… थोड़ा तेज…”
मैंने स्पीड बढ़ा दी। अब पूरा लंड उसकी गांड में अंदर-बाहर हो रहा था। कमरा में सिर्फ़ चप-चप और उसकी सिसकियों की आवाज़ थी। मैंने उसकी चूत में तीन उँगलियाँ डाल रखी थीं, तेज-तेज चला रहा था। अचानक वो जोर से चिल्लाई, “बस… आ गया… गांड में ही आ रहा है…” और उसकी गांड ने मेरा लंड इतना कस लिया कि मैं भी झड़ गया। पूरा माल उसकी गांड में ही छोड़ दिया।

जब मैंने लंड निकाला तो उसकी गांड का छेद खुला हुआ था, माल धीरे-धीरे बाहर बह रहा था। मैंने उसे सीने से लगाया। वो पसीने से तर थी, मेरे गले लगकर रोने लगी, पर खुशी के मारे। बोली, “पहले बहुत डर लग रहा था… पर अब बहुत अच्छा लगा। तुम जो चाहो कर सकते हो मुझसे… मैं तुम्हारी हूँ पूरी की पूरी।”
उस रात हमने एक बार और सेक्स किया। उसने खुद घोड़ी बनकर कहा, “अब फिर से गांड में डालो… अब दर्द नहीं होगा।” और सच में, दूसरी बार तो वो खुद जोर-जोर से गांड हिलाकर ले रही थी।

मैंने धीरे से उसका कान चाटा और बोला, “रेनू… आज कुछ नया करते हैं?”
वो शरमाई, “क्या नया?”
मैंने उसकी गांड पर हल्के से थप्पड़ मारा, “ये वाला छेद आज तक बेकार पड़ा है। आज इसे भी चालू करते हैं।”
वो तुरंत सिकुड़ गई, “नहीं मनीष… वो बहुत दर्द होगा… मैं डरती हूँ…”
मैंने उसे सीने से लगाया, “अरे पागल, मैं धीरे-धीरे करूँगा। तूने तो मेरे लिए सब किया है ना? आज मेरे लिए ये भी कर दे। मैं वादा करता हूँ, अगर ज्यादा दर्द हुआ तो तुरंत रोक दूँगा।”
वो चुप रही। मैं समझ गया हाँ है। मैं उठा और अलमारी से नारियल तेल की छोटी शीशी और एक पुराना स्कार्फ़ निकाला। वापस आया और उसे बेड पर घुटनों के बल बैठाया, नाइटी ऊपर उठा दी। उसकी गोरी-गोरी गांड देखकर मेरा लंड एकदम पत्थर हो गया। मैंने उसकी गांड पर प्यार से किस किया, फिर जीभ से गीला करना शुरू किया। वो सिहर उठी, “उफ्फ्फ… गंदा लग रहा है…”
मैंने हँस कर कहा, “कुछ भी गंदा नहीं, तेरी गांड तो गुलाब जैसी है।”
फिर मैंने तेल की शीशी खोली। पहले अपनी उँगलियों पर तेल लगाया, फिर उसकी गांड के छेद पर धीरे-धीरे मलने लगा। वो काँप रही थी। एक उंगली का सिर्फ़ नाखून वाला हिस्सा अंदर डाला। वो तड़प कर बोली, “आह… दर्द…”
मैंने रुक कर उसकी पीठ सहलाई, “साँस छोड़… रिलैक्स हो…”
धीरे-धीरे एक उंगली पूरा अंदर चली गई। मैंने अंदर-बाहर करना शुरू किया। दस-पंद्रह बार करने पर वो थोड़ी ढीली पड़ी।
फिर मैंने दूसरी उंगली भी डाली। अब वो सिसकियाँ ले रही थी, पर मना नहीं कर रही थी। मैंने तेल और डाला। अब दो उँगलियाँ आसानी से अंदर-बाहर हो रही थीं। उसकी चूत से पानी टपक रहा था। मैंने पूछा, “मजा आ रहा है ना?”
वो शरमाते हुए बोली, “हाँ… थोड़ा अजीब सा… पर अच्छा भी लग रहा है…”
अब मैंने अपना लंड तेल से अच्छे से चिकना किया। उसकी कमर पकड़ी और लंड का सुपारा उसकी गांड के छेद पर टिकाया। वो डर गई, “धीरे… बहुत धीरे…”
मैंने सिर्फ़ सुपारा अंदर दबाया। वो जोर से चीखी, “निकालो… बहुत मोटा है…”
मैं रुक गया। उसकी पीठ पर किस किया, “बस थोड़ा सा और… साँस छोड़…”
फिर धीरे-धीरे दबाया। सुपारा पूरा अंदर चला गया। वो दाँत भींचे हुए थी। मैंने रुक कर उसकी चूत सहलानी शुरू की। उँगलियाँ उसकी चूत में डाल दीं। वो फिर गीली होने लगी।

धीरे-धीरे मैंने आधा लंड अंदर कर दिया। अब वो सिर्फ़ सिसक रही थी, चीख नहीं रही थी। मैंने उससे पूछा, “रोकूँ?”
वो धीरे से बोली, “नहीं… अब करो… बस धीरे…”
मैंने धीरे-धीरे आगे-पीछे करना शुरू किया। उसकी गांड बहुत टाइट थी, ऐसा लग रहा था जैसे लंड को निचोड़ रही हो। पाँच-सात धक्के मारते ही वो खुद पीछे को गांड हिलाने लगी। “आह… मनीष… अब अच्छा लग रहा है… थोड़ा तेज…”
मैंने स्पीड बढ़ा दी। अब पूरा लंड उसकी गांड में अंदर-बाहर हो रहा था। कमरा में सिर्फ़ चप-चप और उसकी सिसकियों की आवाज़ थी। मैंने उसकी चूत में तीन उँगलियाँ डाल रखी थीं, तेज-तेज चला रहा था। अचानक वो जोर से चिल्लाई, “बस… आ गया… गांड में ही आ रहा है…” और उसकी गांड ने मेरा लंड इतना कस लिया कि मैं भी झड़ गया। पूरा माल उसकी गांड में ही छोड़ दिया।

जब मैंने लंड निकाला तो उसकी गांड का छेद खुला हुआ था, माल धीरे-धीरे बाहर बह रहा था। मैंने उसे सीने से लगाया। वो पसीने से तर थी, मेरे गले लगकर रोने लगी, पर खुशी के मारे। बोली, “पहले बहुत डर लग रहा था… पर अब बहुत अच्छा लगा। तुम जो चाहो कर सकते हो मुझसे… मैं तुम्हारी हूँ पूरी की पूरी।”
उस रात हमने एक बार और सेक्स किया। उसने खुद घोड़ी बनकर कहा, “अब फिर से गांड में डालो… अब दर्द नहीं होगा।” और सच में, दूसरी बार तो वो खुद जोर-जोर से गांड हिलाकर ले रही थी।





