रेनू बेडरूम में “तैयार” होने गई थी। हम दोनों सोफे पर बैठे, गिलास हाथ में, पर किसी की हिम्मत नहीं थी कुछ बोलने की। हवा में सिर्फ़ तनाव था, गाढ़ा, गर्म, चिपचिपा।
फिर बेडरूम का दरवाज़ा धीरे से खुला। हर कदम के साथ कमरे में उसकी परफ़्यूम की मीठी गंध और चूत की तेज़, नमकीन खुशबू फैलने लगी। रेनू ऊपर बिलकुल नंगी थी और नीचे सिर्फ एक पेंटी पहने थी।

गले में सिर्फ़ मंगलसूत्र, जो उसकी भारी चूचियों के बीच झूल रहा था, हर कदम पर हल्का सा झनझना रहा था। होंठ खून जैसे लाल, आँखें काजल से काली, पूरा बदन ताज़ा वैक्स किया हुआ… चिकना, चमकदार, पसीने की हल्की चमक।
राजेश के पास आकर उसने पेंटी भी उतार दी अब मैंने देखा की उसकी चूत एकदम क्लीन शेव थी, गुलाबी, होंठ हल्के से खुले हुए, बीच में हल्का सा चमकता हुआ रस। हर कदम के साथ उसकी चूचियाँ उछल रही थीं, निप्पल इतने सख्त कि काटने को जी चाहे।
राजेश का गिलास हाथ से छूट गया। उसकी पैंट में लंड इतनी जोर से उभरा कि ज़िप फटने की हालत हो गयी। रेनू सीधे राजेश के पास गई। उसने उसकी ज़िप पर उँगलियाँ फेरीं, धीरे से मसलते हुए फुसफुसाई,
“इतना सख्त? अभी तो मैंने छुआ भी नहीं…”
फिर मेरी तरफ देखा, आँखों में शरारत और चुनौती, “देखो मनीष… तुम्हारा दोस्त कितना बेचैन है। तुम तो बस देखते रहना, ये मुझे आज अच्छे से चोदेगा… हैं न राजेश।”
राजेश ने मेरी तरफ देखा। मैंने सिर्फ़ सिर हिलाया, दिल में जलन और उत्तेजना का मिश्रण महसूस करते हुए। पल भर में राजेश नंगा। उसका लंड मेरे से भी मोटा, नसें फूली हुईं, सुपारा पूरा लाल, उस पर पहले से ही चिपचिपा पानी चमक रहा था।
रेनू ने उसका अंडरवियर अपने पैर से खींचा और दूर फेंक दिया। फिर राजेश की गोद में बैठ गई। उसकी गीली चूत और गांड सीधे उस मोटे लंड पर रगड़ने लगी। लंड उसकी गांड की दरार में फँस गया, उसकी गर्मी और चिपचिपाहट साफ़ महसूस हो रही थी। वो धीरे-धीरे कमर हिलाने लगी, लंड को अपनी रसदार चूत से गीला करती हुई।
“इधर कई दिनों से काम कर करके मैं बहुत थक गई हूँ…” उसने बच्ची जैसी आवाज़ में राजेश से कहा, “आज आप मुझे अपने हाथ से खाना खिलाओ ना… प्लीज़?”
खाना शुरू हुआ। राजेश ने रोटी तोड़ी, दाल-सब्जी उँगलियों से उठाई और रेनू के लाल होंठों पर रखी। रेनू ने जीभ निकाल कर चाटा, फिर मुँह में लिया। कभी जानबूझ कर सब्जी अपनी चूचियों पर गिरा देती और राजेश से चाटने को कहती। राजेश झुक कर उसकी चूचियों से एक-एक कतरा चाटता, निप्पल को दाँतों से कुरेदता।
फिर रेनू ने अपना चबाया हुआ निवाला राजेश के मुँह में डाला। राजेश ने आँखें बंद कर के स्वीकार किया। रेनू ने सब्जी उँगलियों पर ली, राजेश के लंड पर अच्छे से मली, फिर वही उँगलियाँ चाटते हुए बोली, “हम्म… तुम्हारे लंड का नमकीन स्वाद… सब्जी में भी कितना अच्छा लग रहा है।”
फिर बेडरूम का दरवाज़ा धीरे से खुला। हर कदम के साथ कमरे में उसकी परफ़्यूम की मीठी गंध और चूत की तेज़, नमकीन खुशबू फैलने लगी। रेनू ऊपर बिलकुल नंगी थी और नीचे सिर्फ एक पेंटी पहने थी।

गले में सिर्फ़ मंगलसूत्र, जो उसकी भारी चूचियों के बीच झूल रहा था, हर कदम पर हल्का सा झनझना रहा था। होंठ खून जैसे लाल, आँखें काजल से काली, पूरा बदन ताज़ा वैक्स किया हुआ… चिकना, चमकदार, पसीने की हल्की चमक।
राजेश के पास आकर उसने पेंटी भी उतार दी अब मैंने देखा की उसकी चूत एकदम क्लीन शेव थी, गुलाबी, होंठ हल्के से खुले हुए, बीच में हल्का सा चमकता हुआ रस। हर कदम के साथ उसकी चूचियाँ उछल रही थीं, निप्पल इतने सख्त कि काटने को जी चाहे।
राजेश का गिलास हाथ से छूट गया। उसकी पैंट में लंड इतनी जोर से उभरा कि ज़िप फटने की हालत हो गयी। रेनू सीधे राजेश के पास गई। उसने उसकी ज़िप पर उँगलियाँ फेरीं, धीरे से मसलते हुए फुसफुसाई,
“इतना सख्त? अभी तो मैंने छुआ भी नहीं…”
फिर मेरी तरफ देखा, आँखों में शरारत और चुनौती, “देखो मनीष… तुम्हारा दोस्त कितना बेचैन है। तुम तो बस देखते रहना, ये मुझे आज अच्छे से चोदेगा… हैं न राजेश।”
राजेश ने मेरी तरफ देखा। मैंने सिर्फ़ सिर हिलाया, दिल में जलन और उत्तेजना का मिश्रण महसूस करते हुए। पल भर में राजेश नंगा। उसका लंड मेरे से भी मोटा, नसें फूली हुईं, सुपारा पूरा लाल, उस पर पहले से ही चिपचिपा पानी चमक रहा था।
रेनू ने उसका अंडरवियर अपने पैर से खींचा और दूर फेंक दिया। फिर राजेश की गोद में बैठ गई। उसकी गीली चूत और गांड सीधे उस मोटे लंड पर रगड़ने लगी। लंड उसकी गांड की दरार में फँस गया, उसकी गर्मी और चिपचिपाहट साफ़ महसूस हो रही थी। वो धीरे-धीरे कमर हिलाने लगी, लंड को अपनी रसदार चूत से गीला करती हुई।
“इधर कई दिनों से काम कर करके मैं बहुत थक गई हूँ…” उसने बच्ची जैसी आवाज़ में राजेश से कहा, “आज आप मुझे अपने हाथ से खाना खिलाओ ना… प्लीज़?”
खाना शुरू हुआ। राजेश ने रोटी तोड़ी, दाल-सब्जी उँगलियों से उठाई और रेनू के लाल होंठों पर रखी। रेनू ने जीभ निकाल कर चाटा, फिर मुँह में लिया। कभी जानबूझ कर सब्जी अपनी चूचियों पर गिरा देती और राजेश से चाटने को कहती। राजेश झुक कर उसकी चूचियों से एक-एक कतरा चाटता, निप्पल को दाँतों से कुरेदता।
फिर रेनू ने अपना चबाया हुआ निवाला राजेश के मुँह में डाला। राजेश ने आँखें बंद कर के स्वीकार किया। रेनू ने सब्जी उँगलियों पर ली, राजेश के लंड पर अच्छे से मली, फिर वही उँगलियाँ चाटते हुए बोली, “हम्म… तुम्हारे लंड का नमकीन स्वाद… सब्जी में भी कितना अच्छा लग रहा है।”










