ये तअल्लुक ये तेरी चाहतें बाकी रखना,
और दिल में वो मुलाकातें पुरानी रखना.
इत्तफाकन कभी मिल जाएं तो रख लेना भरम,
अपनी आँखों में मुहब्बत को छुपाई रखना.
हम बिछड़ जाएं तो फूलों को महक दे देना,
दिल की बगिया में हवाओं को सुहानी रखना.
शाम ढल जाएगी इस ज़िन्दगी में मिलने तक,
आँख कजरारी सी होंठों को गुलाबी रखना.
ज़ेरे अंजुम ये मेरा चाँद हवाले है तेरे,
आस्माँ इस पे तेरी नज़रें पराई रखना.
~अली हसनैन