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Erotica हरामी साहूकार

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Ashokafun30

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''ओो आह ह उम्म्म्मम अहह ऑशएसस्सस्स...भाई...... अहह ....ऐसे ही...... उम्म्म्मममम.... ज़ोर से ...चोदो ...अपनी लाडली बहन को.......अहह.....भाई.....मैं तो आई रे.....मैं तो आआईय.....''

इतना कहते हुए निशि की चूत ने ढेर सारा रज बाहर की तरफ उडेल दिया...

नंदू तो अभी कुछ देर पहले ही झड़ा था इसलिए उसका लंड अभी डोर तक जाने वाला था..

उसने अपना रसीले पानी से लिसड़ा लंड बाहर निकाला और एक बार फिर से अपनी प्यारी माँ की चूत में डालकर उन्हे चोदने लगा...

ये सब नज़ारा दूर नंगी होकर लेटी हुई पिंकी बड़े आराम से देख रही थी...
और मन में सोच रही थी की घर में अगर एक ऐसा चोदने वाला जवान मर्द हो तो कोई बाहर मुँह क्यो मारे भला..
वो सोच रही थी की काश जैसे निशि के पास एक भाई है वैसा उसके पास भी होता तो वो भी घर पर जी भरके मज़े लेती...
पर एक बात तो उसने सोच ही ली थी की अब अपने पहले प्यार यानी नंदू को वो छोड़ने वाली नही है

इसी बीच नंदू के लंड को अपनी चूत में लेकर मज़े लेती हुई गोरी की किलकरियां एक बार फिर से पूरे घर में गूंजने लगी....
वो एक खेली खाई औरत थी जिसे लंड को अंदर लेने का अच्छा ख़ासा अनुभव था...
वो जानती थी की ऐसे मौके पर कब अपनी चूत की मांसपेशिया दबानी है ताकि लॅंड को अंदर बाहर होने में और उसे लेने मे ज़्यादा मज़ा आए...
और वही इस वक़्त हो रहा था..



पर हर चूत मराई की एक रस्म होती है,
जो झड़ने के बाद ही पूरी होती है...
गोरी के साथ भी यही हुआ...
उसकी चूत भी जब झड़ी तो अंदर का ज्वालामुखी एक जबरदस्त झोंके के साथ बाहर निकला...
और नंदू के लोड़े को तर बतर करता हुआ उसकी जाँघो से बाहर बहने लगा..

पर नंदू का जेनरेटर अभी भी चालू था....
उसका तो ये हाल हो रहा था की अभी भी 8-10 चूतें और भी चोद मारे....
पर अब सामने से भी तो रिप्लाइ आना ज़रूरी था..

और वो आया भी....
तीनो एकसाथ खड़ी होकर उसके इर्द गिर्द आकर उसके लंड को चूसने लगी



अब एक साथ 3-3 नर्म होंठ जब लंड पर लग जाए तो उसका झड़ना तो बनता ही है...

नंदू के साथ भी यही हुआ....
इतने सारे होंठों की गर्मी उस से सहन नहीं हुई और उसके लंबे लंड से एक के बाद एक पिचकारियां निकल कर उसकी माँ , बहन और प्रेमिका के चेहरे पर गिरने लगी....
उसने ज़रा भी भेदभाव नही किया..
हर किसी को 3-3 पिचकारियां दी उनके चेहरे पर ताकि किसी को शिकायत का मौका ना मिले...



और फिर नंदू वहीं अपने बेड पर पस्त होकर गिर पड़ा...
निशि और पिंकी अपने चुलबुलेपन पर उतर आई और पूरी शाम उन दोनो ने किसी को भी कपड़े नही पहनने दिए और अलग-2 तरह की शरारत भरी गेम्स भी खेलती रही और चुदाई भी करवाती रही..

नंदू की तो लाइफ जैसे सेट हो गयी थी आज के बाद...

और यही हाल निशि और पिंकी का भी था....
लाला ने उनकी लाइफ में जो रंग भरे थे उन रंगो की सही पहचान अब नंदू उन्हे करवा रहा था..

गोरी भी अपने बेटे और लाला से मिल रहे मज़े को अब अच्छे से एंजाय करना चाहती थी..

और रही बात लाला की तो उसके हाथ की पाँचो उंगलिया घी में और रामलाल कड़ाई में था.

ऐसा घी जो उसके गाँव में हर जगह फैला हुआ था...

पिंकी और निशि के रूप में ...
गोरी और सीमा के रूप में ....
नाज़िया और शबाना के रूप में ...
और भी बीच-2 में कुछ नयी फसल उगती रहती थी जिसे काटने का काम वो और रामलाल करते ही रहते थे..
और ये काम तो उम्र भर चलने ही वाला था.

*****************
समाप्त
*****************
 

Ek number

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नंदू को भी पता था की आज उसके साथ पूरा दिन कुछ ना कुछ स्पेशल होता रहेगा...
सुबह स्कूल जाने से पहले निशि ने भी उसे आकर एक रसीली सी किस्स दी थी और ये भी बोली थी की आज अपने स्पेशल गिफ्ट का इन्तजार करना.....

और अब खेतो में आते ही उसकी माँ ने इतनी गर्मजोशी के साथ अपनी चूत में उसका लंड लिया था मानो बरसो की प्यासी हो....
वैसे भी नंदू को अपनी माँ की यही बात तो पसंद थी...
हर बार उनका जोश पहले जैसा ही रहता था...
अब रहे भी क्यो नही,
इतने सालो बाद जो लंड का स्वाद मिला है उसकी चूत को,
उसका मज़ा तो ऐसे ही मिलता है ना..

उसके बाद दोनो अंदर गए और उस पानी की होदी में घुसकर अच्छे से नहाए और फिर बाद में खेतो के काम में जुट गये...

गोरी आज अपने बेटे के जन्मदिन पर उसे पूरी तरह से खुश कर देना चाहती थी...
जिसके लिए वो किसी भी हद तक जाने को तैयार थी...
आज की शाम वो नंदू के जीवन की एक यादगार शाम बना देना चाहती थी...
इसलिए खेतों का काम निपटा कर वो दोनो जल्दी ही घर की तरफ निकल गये.

5 बजने को आ रहे थे और निशि अभी तक स्कूल से घर नही आई थी, गोरी समझ गयी की वो पिंकी के घर ही होगी पर उसे क्या पता था की उसकी लाडली बेटी पिंकी के साथ क्या प्लानिंग कर रही है..

खैर, वो रात की तैयारी में जुट गयी...
सबसे पहले तो उसने अपने बेटे का मनपसंद खाना बनाया और साथ में खीर भी जो उसे सबसे ज़्यादा पसंद थी...

और सारे काम निपटा कर वो नंदू के कमरे में गयी जहाँ वो खेतो से आने के बाद लंबी तान कर सो रहा था..

उसे उपर से नीचे तक निहारते हुए उसके बदन में एक बार फिर से चींटियां रेंगने लगी...

वो भी सोचने लगी की ये हो क्या गया है मुझे....
इतने सालो तक चुदाई से दूर रहने के बाद अब दिन में 2-3 बार करवाने का मन क्यो करने लगा है उसका भला...
जैसे की अब...
अभी सुबह ही तो उसने जी भरकर नंदू के लंड से चुदाई करवाई थी और अब उसे ऐसे सोता देखकर उसका लंड फिर से लेने की ललक जाग रही थी उसके मन में ..

नंदू ने इस वक़्त एक बनियान और धोती ही पहन रखी थी...
उसकी सुडोल बाजुए और मोटी जांघे उसे ललचा रही थी...
वो उसके करीब जाकर बैठ गयी और अपने हाथ से उसके कसरती बदन को सहलाने लगी.

गोरी का हाथ उसकी छाती से होता हुआ धीरे-2 नीचे आने लगा...
और उसकी नाभि पर आकर ठहर गया....
नीचे जाने में पता नही उसे कुछ संकोच सा हो रहा था पर कुछ सोचकर उसने हाथ नीचे करना शुरू कर दिया...
और जब हाथ जाकर उसके खजाने पर लगा तो उसे एहसास हुआ की वो पहले से ही खड़ा है....
उसने चौंकते हुए उसके चेहरे को देखा तो उसे मुस्कुराता हुआ पाया...
यानी वो आँखे मूंदकर अपनी माँ के सहलाने का मज़ा ले रहा था..

गोरी : "बड़ा बदमाश हो गया है रे तू तो....जाग रहा था तो सोने का नाटक क्यों करता रहा...''

नंदू ने अपनी माँ की कमर में हाथ डालकर उन्हे अपनी छाती पर गिरा लिया और बोला : "अगर ऐसा ना करता तो मुझे पता कैसे चलता की मेरी माँ मुझे सोते हुए देखकर भी मेरा लंड लेने के लिए तड़प रही है....''

गोरी ने भी आँखे तरेरते हुए कहा : "तू भी तो पिछले १-२ सालो से रात को उठ- यही सब करता रहता था, मैंने तो कभी कुछ नहीं कहा तुझे ''

नंदू भी ये सुनकर हैरान रह गया, उसे आखिरी के कुछ दिनों में तो लगा था की उसकी माँ जाग रही है पर वो पिछले १-२ साल से हर बार जाग रही थी ये उसे पता नहीं था , पर जो भी था उन १-२ सालो की मेहनत का ही फल था जो अब उसकी माँ इस तरह उसकी बाँहों में लेटी हुई थी

उसने मुस्कुराते हुए अपनी माँ के रसीले होंठ अपने मुँह में लिए और उन्हे जोरों से चूसना शुरू कर दिया...
जैसे कह रहा हो की चुप भी हो जाओ माँ, कितना बोलती हो तुम.



गोरी भी सब कुछ भूलकर नंदू का साथ देने लगी की तभी पीछे से की आवाज़ ने उन दोनो को चोंका दिया

''ओ हो ....मेरे भाई का जन्मदिन तो बड़े शानदार तरीके से मनाया जा रहा है....हा...हा ''

दोनो ने चौंकते हुए निशि को देखा जो ना जाने कब से उनके पीछे आकर खड़ी हो गयी थी....

हालाँकि उन्हे ज़्यादा घबराने की ज़रूरत तो नही थी क्योंकि उनके बीच का परदा तो कब का गिर चुका था पर फिर भी ऐसे एकदम से पकड़े जाने के बाद वो निशि से नज़रे नही मिला पा रहे थे...

निशि ने ही चहकते हुए उन दोनो को उस स्थिति से उबारा ,
वो बोली : "अर्रे....माँ ...इतना क्यों परेशान हो रहे हो...आज भाई का बर्थडे है...आज के दिन तो इन्हे सब कुछ एलोव है...मैं भी होती तो यही करती जो इस वक़्त आप कर रही हो...''

इतना कहते हुए वो घूमकर बेड के दूसरी तरफ से आई और नंदू की बगल में बैठ गयी, जैसे सामने उसकी माँ बैठी हुई थी...
और वो कुछ सोच पाते इससे पहले ही निशि ने नीचे झुककर अपने नर्म और मुलायम होंठ अपने भाई के होंठो पर रख दिए और उन्हे बुरी तरह से चूसने लगी...
Nice update
 

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कुछ देर पहले अपनी माँ के और अब अपनी बहन के होंठ चूसते हुए अब नंदू को सही में लग रहा था की आज के दिन का राजा वही है...
जिन नशीले जिस्मो को देखते हुए वो जवान हुआ था वो अब दोनो तरफ से उसपर गिरे जा रहे थे.

नंदू भी मुस्कुराते हुए अपनी कमसिन बहन को चूसने लगा...
उन दोनो की माँ भी हंसते हुए उनका साथ देने लगी...
एक हाथ से अपनी बेटी का तो दूसरे से अपने बेटे का सिर सहलाने लगी...
और उसके मन में ख़याल आया की काश इस दुनिया में भाई बहन की शादी का भी रिवाज चल पड़े..
ऐसा हुआ तो उसे अपने बेटे के लिए बाहर किसी का मुँह ना देखना पड़ता और ना ही उसे अपने बेटे को किसी और का होते हुए देखना पड़ता...
घर की बात घर में ही रह जाती...
पर वो भी जानती थी की ये हो नही सकता...
इसलिए उसने इस ख़याल को ही दिमाग़ से निकाल दिया..
और अपना हाथ नीचे लाते हुए अपने बेटे की धोती में डालकर उसके छोटे सिपाही को सहलाने लगी.

निशि ने अपनी लंबी स्मूच तोड़ते हुए कहा : "अर्रे भाई, इतने गरम माहौल में आप ये कपड़े पहन कर कैसे सो रहे हो....मुझसे तो नही पहने जा रहे अपने ये कपड़े..''

इतना कहते हुए उसने अपनी स्कूल की ड्रेस को नीचे से पकड़ कर घुमाया और गले से निकाल दिया.

अंदर तो उसने कुछ पहना ही नही था हमेशा की तरहा...
एक ही पल में उसकी नंगी छातियां अपना शबाब बिखेरते हुए नंदू के सामने थी..

और तब नंदू को पता चला की वो ऐसा क्यो करना चाह रही थी...
उसने अपने बूब्स के उपर वाले हिस्से पर ग्लिट्टर वाले पेन से हैप्पी बर्थडे लिखा हुआ था...
ख़ास नंदू के लिए...
शायद पिंकी की मदद से उसने ये कलाकारी की थी...
जो नंदू को काफ़ी पसंद आई..



निशि के गोरे-2 स्तन अपना गुलाबीपन बिखेरते हुए नंदू और उसकी माँ के सामने झंडे की तरह लहरा रहे थे.

गोरी भी अपनी बेटी की इस बेबाकी पर हैरान थी...
उसने निशि की छातियों को देखा जो ठीक वैसी ही थी जैसी उसकी थी जब वो इस उम्र में थी....
यानी अभी से वो बता सकती थी की बड़ी होकर उसकी छातियां कैसी रसीली बनने वाली है...उसकी तरह.

निशि ने इशारा करके अपनी माँ से भी वैसा ही करने को कहा...
यानी कपडे उतारने को...गोरी ने घर आने के बाद सिर्फ एक गाउन से अपने नंगे बदन को धक् रखा था.

पहले तो वो झिझकी पर जब निशि ने कहा की आज भाई का बर्थडे है और आज के दिन इन्हे खुश करने के लिए हमे कुछ भी करना पड़ेगा तो वो मान गयी...
वो भी तो यही सोचकर आई थी आज की अपने बेटे के जन्मदिन को यादगार बना देगी..

वो अपनी जगह से उठी और उसने अपना गाउन निकाल कर एक कोने में उछाल दिया.

अब वो भी अपने यौवन की कला का प्रदर्शन अपने बच्चो के सामने बेशर्मी से कर रही थी...



निशि ने नंदू को देखा और आँखो ही आँखो का इशारा करके दोनो उसके करीब आ गये..
और एक साथ दोनो भाई बहन ने अपने-2 मुँह अपनी माँ के मोटे स्तानो पर लगा दिए और उन्हे चूसने लगे जैसे उसका दूध पे रहे हो...

गोरी भी उन दोनो की शरारत पर मुस्कुरा उठी और उन दोनो के मुँह मे अपने मुम्मे ठूसते हुए उन्हे अपना दूध पिलाने लगी...

कुछ देर बाद निशि ने अपना मुँह बाहर निकाला और बोली : "भाई...आज तो तुम्हारा दिन है..और आज के दिन के लिए मैं तुम्हारे लिए एक ख़ास तोहफा लाई हूँ ''

ख़ास तोहफा सुनते ही नंदू की आँखो में चमक आ गयी..सुबह से उसके दिमाग में यही चल रहा था की आखिर वो ख़ास तोहफा क्या होगा , अब वक़्त आ चूका था वो जानने का. नंदू भी जानता था की जिस अंदाज से वो बोल रही है वो कुछ ख़ास ही होने वाला है...

वो नंदू का हाथ पकड़ कर बाहर खींचती हुई ले गयी और बाहर आकर नंदू ने देखा की उसकी चारपाई पर कोई लेटा हुआ है...जिसे निशि ने एक चादर से ढका हुआ है...
देखने से सॉफ पता चल रहा था की अंदर कोई इंसान है..
इसलिए नंदू घबरा भी रहा था की ऐसे मौके पर निशि ये किसे ले आई है,
क्योंकि इस वक़्त उसकी बहन और माँ नंगे खड़े थे वहां और वो भी खड़ा लंड लिए वहीं पर था.

निशि ने उसे आगे बढ़कर उस चादर को हटाने के लिए कहा..
और नंदू ने उसका कहना मानकर धीरे-2 चादर खींचनी शुरू कर दी...



जैसे-2 चादर खिसकती जा रही थी वैसे-2 अंदर से एक खूबसूरत नंगा जिस्म बाहर आ रहा था...
जिसे देखकर नंदू का मुरझा रहा लंड फिर से अकड़ने लगा...
अकड़ता भी क्यो नही,
आज उसकी बहन ने उसकी लाइफ का सबसे अच्छा गिफ्ट जो दिया था उसे...
वो थी रेशम की चादर में लिपटी नंगी पिंकी.

और पिंकी भी आज पहली बार बिना अपने नंगेपन की शर्म के नंदू की आँखो में आँखे डालकर मुस्करा रही थी..

गोरी भी पिंकी को वहाँ देखकर हैरान थी....
वो खुद इस वक़्त नंगी खड़ी थी पर अब अपने आप को छुपाने का कोई फायदा नही था..
पिंकी उसे नंगा देख चुकी थी....
निशि भी उपर से नंगी ही थी और पिंकी तो खुद ही पूरी नंगी थी.

पिंकी धीरे-2 चलती हुई नंदू के करीब आई और उसके सामने आकर खड़ी हो गयी...
नंदू को ऐसा लगा जैसे दुनिया की सबसे खूबसूरत लड़की उसके सामने आकर खड़ी हो गयी है...
पूरी नंगी.
उसका चिकना बदन, मोठे -२ मुम्मे और उनपर लगे ब्राउन कलर के निप्पल बड़े दिलकश लग रहे थे,
और बिना बालों वाली चूत तो सबसे घातक लग रही थी उसे.



निशि : "देख क्या रहे हो भाई.....आगे बडो और अपने इस जन्मदिन के तोहफे को उठा कर अंदर ले चलो....''

नंदू को दूसरी बार कहने की ज़रूरत नही पड़ी....
उसने अपनी मजबूत बाहों में अपने सपनो की रानी पिंकी के नंगे जिस्म को उठाया और उसे लेकर अंदर वाले कमरे में आ गया और उसे उसी बेड पर लिटा दिया जहा कुछ देर पहले वो लेटा हुआ था..

निशि तब तक अपने पूरे कपड़े उतार कर नंगी हो चुकी थी....
Mast update
 

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अब सिर्फ़ कपड़ो में वहाँ नंदू ही बचा था....
इसलिए वो दोनो माँ बेटियों ने मिलकर नंदू के भी सारे कपड़े निकाल फेंके...

नंदू का लंड तो यही सोच-सोचकर पागल हुए जा रहा था की आज उसे पिंकी की चूत मिलने वाली है...
बचपन से ही वो उसके सपनो की रानी रही थी...
जब भी वो निशि से मिलने घर आती थी तो उसके मनमोहक चेहरे को देखकर वो रात को मूठ ज़रूर मारा करता था...
उसी के सामने वो जवान हुई थी और आज वही जवानी उसके 20वे जन्मदिन पर उसके सामने नंगी पड़ी थी उसके बेड पर...
उसके जन्मदिन के तोहफे के रूप में ...



नंदू के नंगा होते ही निशि ने पिंकी को उठाया और उसे नंदू के लंड के सामने बिठा दिया...
बाकी का काम तो पिंकी अच्छे से जानती थी...
लाला के लंड को गन्ने की तरह चूस-चूस्कर उसे इतनी समझ तो आ ही चुकी थी की इन गन्नो का रस कैसे निकाला जाता है.

पिंकी को भी नंदू शुरू से ही पसंद था...
इसलिए जब निशि ने उसे ये सब करने को कहा तो उसने भी मना नही किया...
लाला का लंड लेने के बाद उसमे इतनी दिलेरी तो आ ही चुकी थी की अब वो किसी का भी लंड लेने के लिए तैयार थी और जब अपने क्रश की बात आए तो कौन भला मना करेगा...

और अब वो उसी क्रश के गन्ने को क्रश करने में लगी हुई थी...
अपने मुँह से...



और नंदू भी उसके मुँह में अपने लंड को धीरे-२ करके अंदर दाल रहा था..

''आअह्हह्ह्ह्ह .............. ऐसे ही ...... . पिंकीsssssssss .......मेरी जाआआआंन ''

पिंकी को भी अच्छा लगा जब नंदू ने उसे अपनी जान कहा.

यानी वो भी उसे पसंद करता था....
करता भी क्यो नही...
वो थी ही इतनी खूबसूरत.

और कुछ देर तक उसे चूसने के बाद जब वो पहले जैसा कड़क हो गया तो नंदू ने उसे बेड पर पटक दिया....

वो समझ गयी की मिलन की बेला आ चुकी है...

निशि और उसकी माँ भी उन दोनो के अगल बगल आकर खड़े हो गये...
इस ऐतिहासिक चुदाई के गवाह बनने के लिए..

नंदू ने पिंकी की चूत को सबसे पहले एक गीला सा चुम्मा दिया....चुम्मा क्या दिया उसे मुंह में लेकर चूस ही डाला
ताकि वो जान सके की जितना पानी उसके लंड से निकल रहा है उतना ही उसकी चूत में से भी बह रहा है या नही...



और उसका अंदाज़ा सही निकला....
वो वैसी ही थी जैसी उसने सोची थी.

एकदम गीली और रस से सराबोर

नंदू उसके उपर आया और अपना लंड उसकी चूत पर सेट करके उसके उपर झुकता चला गया...

हालाँकि उसे लग रहा था की वो दर्द से चीख पड़ेगी जब वो उसका मोटा लॅंड अंदर लेगी तो...
पर ऐसा कुछ नही हुआ...
वो भला क्या जानता था की उसके इस काम को लाला ने अपना लंड डालकर कितना आसान कर दिया है..

पर फिर भी एक नये लंड के अंदर जाने से होने वाली सुससुराहट को महसूस करके वो गुनगुना ज़रूर उठी...

''आआआआआआआआआआआआहह....सस्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्स्सस्स.....नंदुऊऊुुुुउउ....... उम्म्म्ममममममममममममम...... मजाआाआआ आआआआआआ गय्ाआआआआआआअ''
Pinki bhi chud gayi
 

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''ओो आह ह उम्म्म्मम अहह ऑशएसस्सस्स...भाई...... अहह ....ऐसे ही...... उम्म्म्मममम.... ज़ोर से ...चोदो ...अपनी लाडली बहन को.......अहह.....भाई.....मैं तो आई रे.....मैं तो आआईय.....''

इतना कहते हुए निशि की चूत ने ढेर सारा रज बाहर की तरफ उडेल दिया...

नंदू तो अभी कुछ देर पहले ही झड़ा था इसलिए उसका लंड अभी डोर तक जाने वाला था..

उसने अपना रसीले पानी से लिसड़ा लंड बाहर निकाला और एक बार फिर से अपनी प्यारी माँ की चूत में डालकर उन्हे चोदने लगा...

ये सब नज़ारा दूर नंगी होकर लेटी हुई पिंकी बड़े आराम से देख रही थी...
और मन में सोच रही थी की घर में अगर एक ऐसा चोदने वाला जवान मर्द हो तो कोई बाहर मुँह क्यो मारे भला..
वो सोच रही थी की काश जैसे निशि के पास एक भाई है वैसा उसके पास भी होता तो वो भी घर पर जी भरके मज़े लेती...
पर एक बात तो उसने सोच ही ली थी की अब अपने पहले प्यार यानी नंदू को वो छोड़ने वाली नही है

इसी बीच नंदू के लंड को अपनी चूत में लेकर मज़े लेती हुई गोरी की किलकरियां एक बार फिर से पूरे घर में गूंजने लगी....
वो एक खेली खाई औरत थी जिसे लंड को अंदर लेने का अच्छा ख़ासा अनुभव था...
वो जानती थी की ऐसे मौके पर कब अपनी चूत की मांसपेशिया दबानी है ताकि लॅंड को अंदर बाहर होने में और उसे लेने मे ज़्यादा मज़ा आए...
और वही इस वक़्त हो रहा था..



पर हर चूत मराई की एक रस्म होती है,
जो झड़ने के बाद ही पूरी होती है...
गोरी के साथ भी यही हुआ...
उसकी चूत भी जब झड़ी तो अंदर का ज्वालामुखी एक जबरदस्त झोंके के साथ बाहर निकला...
और नंदू के लोड़े को तर बतर करता हुआ उसकी जाँघो से बाहर बहने लगा..

पर नंदू का जेनरेटर अभी भी चालू था....
उसका तो ये हाल हो रहा था की अभी भी 8-10 चूतें और भी चोद मारे....
पर अब सामने से भी तो रिप्लाइ आना ज़रूरी था..

और वो आया भी....
तीनो एकसाथ खड़ी होकर उसके इर्द गिर्द आकर उसके लंड को चूसने लगी



अब एक साथ 3-3 नर्म होंठ जब लंड पर लग जाए तो उसका झड़ना तो बनता ही है...

नंदू के साथ भी यही हुआ....
इतने सारे होंठों की गर्मी उस से सहन नहीं हुई और उसके लंबे लंड से एक के बाद एक पिचकारियां निकल कर उसकी माँ , बहन और प्रेमिका के चेहरे पर गिरने लगी....
उसने ज़रा भी भेदभाव नही किया..
हर किसी को 3-3 पिचकारियां दी उनके चेहरे पर ताकि किसी को शिकायत का मौका ना मिले...



और फिर नंदू वहीं अपने बेड पर पस्त होकर गिर पड़ा...
निशि और पिंकी अपने चुलबुलेपन पर उतर आई और पूरी शाम उन दोनो ने किसी को भी कपड़े नही पहनने दिए और अलग-2 तरह की शरारत भरी गेम्स भी खेलती रही और चुदाई भी करवाती रही..

नंदू की तो लाइफ जैसे सेट हो गयी थी आज के बाद...

और यही हाल निशि और पिंकी का भी था....
लाला ने उनकी लाइफ में जो रंग भरे थे उन रंगो की सही पहचान अब नंदू उन्हे करवा रहा था..

गोरी भी अपने बेटे और लाला से मिल रहे मज़े को अब अच्छे से एंजाय करना चाहती थी..

और रही बात लाला की तो उसके हाथ की पाँचो उंगलिया घी में और रामलाल कड़ाई में था.

ऐसा घी जो उसके गाँव में हर जगह फैला हुआ था...

पिंकी और निशि के रूप में ...
गोरी और सीमा के रूप में ....
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और भी बीच-2 में कुछ नयी फसल उगती रहती थी जिसे काटने का काम वो और रामलाल करते ही रहते थे..
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Agasthya

Resurrection
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Hello everyone.

We are Happy to present to you The annual story contest of XForum


"The Ultimate Story Contest" (USC).


"Chance to win cash prize up to Rs 8000"
Jaisa ki aap sabko maloom hai abhi pichhle hafte hi humne USC ki announcement ki hai or abhi kuch time pehle Rules and Queries thread bhi open kiya hai or Chit Chat thread toh pehle se hi Hindi section mein khula hai.

Well iske baare mein thoda aapko bata dun ye ek short story contest hai jisme aap kisi bhi prefix ki short story post kar sakte ho, jo minimum 700 words and maximum 7000 words ke bich honi chahiye (Story ke words count karne ke liye is tool ka use kare — Characters Tool) . Isliye main aapko invitation deta hun ki aap is contest mein apne khayaalon ko shabdon kaa roop dekar isme apni stories daalein jisko poora XForum dekhega, Ye ek bahot accha kadam hoga aapke or aapki stories ke liye kyunki USC ki stories ko poore XForum ke readers read karte hain.. Aap XForum ke sarvashreshth lekhakon mein se ek hain. aur aapki kahani bhi bahut acchi chal rahi hai. Isliye hum aapse USC ke liye ek chhoti kahani likhne ka anurodh karte hain. hum jaante hain ki aapke paas samay ki kami hai lekin iske bawajood hum ye bhi jaante hain ki aapke liye kuch bhi asambhav nahi hai.

Aur jo readers likhna nahi chahte woh bhi is contest mein participate kar sakte hain "Best Readers Award" ke liye. Aapko bas karna ye hoga ki contest mein posted stories ko read karke unke upar apne views dene honge.

Winning Writer's ko well deserved Cash Awards milenge, uske alawa aapko apna thread apne section mein sticky karne ka mouka bhi milega taaki aapka thread top par rahe uss dauraan. Isliye aapsab ke liye ye ek behtareen mouka hai XForum ke sabhi readers ke upar apni chhaap chhodne ka or apni reach badhaane kaa.. Ye aap sabhi ke liye ek bahut hi sunehra avsar hai apni kalpanao ko shabdon ka raasta dikha ke yahan pesh karne ka. Isliye aage badhe aur apni kalpanao ko shabdon mein likhkar duniya ko dikha de.

Entry thread 15th February ko open ho chuka matlab aap apni story daalna shuru kar sakte hain or woh thread 5th March 2024 tak open rahega is dauraan aap apni story post kar sakte hain. Isliye aap abhi se apni Kahaani likhna shuru kardein toh aapke liye better rahega.

Aur haan! Kahani ko sirf ek hi post mein post kiya jaana chahiye. Kyunki ye ek short story contest hai jiska matlab hai ki hum kewal chhoti kahaniyon ki ummeed kar rahe hain. Isliye apni kahani ko kayi post / bhaagon mein post karne ki anumati nahi hai. Agar koi bhi issue ho toh aap kisi bhi staff member ko Message kar sakte hain.



Story se related koi doubt hai to iske liye is thread ka use kare — Chit Chat Thread

Kisi bhi story par apna review post karne ke liye is thread ka use kare — Review Thread

Rules check karne ke liye is thread ko dekho — Rules & Queries Thread

Apni story post karne ke liye is thread ka use kare — Entry Thread

Prizes
Position Benifits
Winner 4000 Rupees + Award + 5000 Likes + 30 days sticky Thread (Stories)
1st Runner-Up 1500 Rupees + Award + 3500 Likes + 15 day Sticky thread (Stories)
2nd Runner-UP 1000 Rupees + 2000 Likes + 7 Days Sticky Thread (Stories)
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