नंदू को भी पता था की आज उसके साथ पूरा दिन कुछ ना कुछ स्पेशल होता रहेगा...
सुबह स्कूल जाने से पहले निशि ने भी उसे आकर एक रसीली सी किस्स दी थी और ये भी बोली थी की आज अपने स्पेशल गिफ्ट का इन्तजार करना.....
और अब खेतो में आते ही उसकी माँ ने इतनी गर्मजोशी के साथ अपनी चूत में उसका लंड लिया था मानो बरसो की प्यासी हो....
वैसे भी नंदू को अपनी माँ की यही बात तो पसंद थी...
हर बार उनका जोश पहले जैसा ही रहता था...
अब रहे भी क्यो नही,
इतने सालो बाद जो लंड का स्वाद मिला है उसकी चूत को,
उसका मज़ा तो ऐसे ही मिलता है ना..
उसके बाद दोनो अंदर गए और उस पानी की होदी में घुसकर अच्छे से नहाए और फिर बाद में खेतो के काम में जुट गये...
गोरी आज अपने बेटे के जन्मदिन पर उसे पूरी तरह से खुश कर देना चाहती थी...
जिसके लिए वो किसी भी हद तक जाने को तैयार थी...
आज की शाम वो नंदू के जीवन की एक यादगार शाम बना देना चाहती थी...
इसलिए खेतों का काम निपटा कर वो दोनो जल्दी ही घर की तरफ निकल गये.
5 बजने को आ रहे थे और निशि अभी तक स्कूल से घर नही आई थी, गोरी समझ गयी की वो पिंकी के घर ही होगी पर उसे क्या पता था की उसकी लाडली बेटी पिंकी के साथ क्या प्लानिंग कर रही है..
खैर, वो रात की तैयारी में जुट गयी...
सबसे पहले तो उसने अपने बेटे का मनपसंद खाना बनाया और साथ में खीर भी जो उसे सबसे ज़्यादा पसंद थी...
और सारे काम निपटा कर वो नंदू के कमरे में गयी जहाँ वो खेतो से आने के बाद लंबी तान कर सो रहा था..
उसे उपर से नीचे तक निहारते हुए उसके बदन में एक बार फिर से चींटियां रेंगने लगी...
वो भी सोचने लगी की ये हो क्या गया है मुझे....
इतने सालो तक चुदाई से दूर रहने के बाद अब दिन में 2-3 बार करवाने का मन क्यो करने लगा है उसका भला...
जैसे की अब...
अभी सुबह ही तो उसने जी भरकर नंदू के लंड से चुदाई करवाई थी और अब उसे ऐसे सोता देखकर उसका लंड फिर से लेने की ललक जाग रही थी उसके मन में ..
नंदू ने इस वक़्त एक बनियान और धोती ही पहन रखी थी...
उसकी सुडोल बाजुए और मोटी जांघे उसे ललचा रही थी...
वो उसके करीब जाकर बैठ गयी और अपने हाथ से उसके कसरती बदन को सहलाने लगी.
गोरी का हाथ उसकी छाती से होता हुआ धीरे-2 नीचे आने लगा...
और उसकी नाभि पर आकर ठहर गया....
नीचे जाने में पता नही उसे कुछ संकोच सा हो रहा था पर कुछ सोचकर उसने हाथ नीचे करना शुरू कर दिया...
और जब हाथ जाकर उसके खजाने पर लगा तो उसे एहसास हुआ की वो पहले से ही खड़ा है....
उसने चौंकते हुए उसके चेहरे को देखा तो उसे मुस्कुराता हुआ पाया...
यानी वो आँखे मूंदकर अपनी माँ के सहलाने का मज़ा ले रहा था..
गोरी : "बड़ा बदमाश हो गया है रे तू तो....जाग रहा था तो सोने का नाटक क्यों करता रहा...''
नंदू ने अपनी माँ की कमर में हाथ डालकर उन्हे अपनी छाती पर गिरा लिया और बोला : "अगर ऐसा ना करता तो मुझे पता कैसे चलता की मेरी माँ मुझे सोते हुए देखकर भी मेरा लंड लेने के लिए तड़प रही है....''
गोरी ने भी आँखे तरेरते हुए कहा : "तू भी तो पिछले १-२ सालो से रात को उठ- यही सब करता रहता था, मैंने तो कभी कुछ नहीं कहा तुझे ''
नंदू भी ये सुनकर हैरान रह गया, उसे आखिरी के कुछ दिनों में तो लगा था की उसकी माँ जाग रही है पर वो पिछले १-२ साल से हर बार जाग रही थी ये उसे पता नहीं था , पर जो भी था उन १-२ सालो की मेहनत का ही फल था जो अब उसकी माँ इस तरह उसकी बाँहों में लेटी हुई थी
उसने मुस्कुराते हुए अपनी माँ के रसीले होंठ अपने मुँह में लिए और उन्हे जोरों से चूसना शुरू कर दिया...
जैसे कह रहा हो की चुप भी हो जाओ माँ, कितना बोलती हो तुम.
गोरी भी सब कुछ भूलकर नंदू का साथ देने लगी की तभी पीछे से की आवाज़ ने उन दोनो को चोंका दिया
''ओ हो ....मेरे भाई का जन्मदिन तो बड़े शानदार तरीके से मनाया जा रहा है....हा...हा ''
दोनो ने चौंकते हुए निशि को देखा जो ना जाने कब से उनके पीछे आकर खड़ी हो गयी थी....
हालाँकि उन्हे ज़्यादा घबराने की ज़रूरत तो नही थी क्योंकि उनके बीच का परदा तो कब का गिर चुका था पर फिर भी ऐसे एकदम से पकड़े जाने के बाद वो निशि से नज़रे नही मिला पा रहे थे...
निशि ने ही चहकते हुए उन दोनो को उस स्थिति से उबारा ,
वो बोली : "अर्रे....माँ ...इतना क्यों परेशान हो रहे हो...आज भाई का बर्थडे है...आज के दिन तो इन्हे सब कुछ एलोव है...मैं भी होती तो यही करती जो इस वक़्त आप कर रही हो...''
इतना कहते हुए वो घूमकर बेड के दूसरी तरफ से आई और नंदू की बगल में बैठ गयी, जैसे सामने उसकी माँ बैठी हुई थी...
और वो कुछ सोच पाते इससे पहले ही निशि ने नीचे झुककर अपने नर्म और मुलायम होंठ अपने भाई के होंठो पर रख दिए और उन्हे बुरी तरह से चूसने लगी...