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Fantasy 'सुप्रीम' एक रहस्यमई सफर

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Bhut hi badhiya update Bhai
Maya ne aane vale yudh aur antriksh jeevo ke bare me bhut si jankari di hai
Ha bhai, maya nahi hoti to kya hota inka :D
Thank you very much for your valuable review and support bhai :thanks:
 

dhalchandarun

[Death is the most beautiful thing.]
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Bilkul Vyom ke paas bhi, aur Hanuka ke paas bhi hai. :approve:
Thank you very much for your wonderful review and support bhai :hug:
Bilkul, natkhat Hanuka* ko gurutv shakti bachpan mein hi mil gaya hai, mujhe yaad hai.
 
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Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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#193.

चैपटर-6
प्राणवायु:
(तिलिस्मा 5.2)

सुयश सहित सभी लैक्राइमल पंक्टा से होते हुए नाक के अंदर पहुंच गये थे। सभी के सामने अब 2 लंबी सुरंगें दिखाई दे रहीं थीं।

“ये दोनों सुरंगें नाक के दोनों छेद लग रहे हैं?" क्रिस्टी ने कहा- “पर यहां पर इतना दम क्यों घुट रहा है? ऐसा लग रहा है कि जैसे यहां शुद्ध हवा है ही नहीं।"

"क्रिस्टी सही कह रही है, यहां पर शुद्ध हवा नहीं है, मेरा भी यहां पर दम घुट रहा है।” सुयश ने तेज-तेज साँस लेने की कोशिश करते हुए कहा।

"मुझे लग रहा है कि हम जहां खड़े हैं, इस नाक के दोनों छेद बुरी तरह से बंद हैं, जिसकी वजह से हम यहां पर साँस नहीं ले पा रहे हैं।" शैफाली ने कहा- “हमें जल्द से जल्द इस नाक के छेद को खोलना होगा, नहीं तो हमारा दम यहां पर घुट जायेगा।

“मैं इस जगह पर भी ठीक से साँस ले पा रहा हूं। ऐलेक्स ने कहा- “शायद यह मेरी वशीन्द्रिय शक्ति के कारण हो रहा है।"

"मुझे लगता है कि हमें बिना एक सेकेण्ड गंवाए, पहले इन नासट्रिल्स (नाक के दोनो छेद) को खोलना होगा।" जेनिथ ने भी गहरी-गहरी साँस लेते हुए कहा।

जेनिथ की बात सुन सभी, एक सुरंग के अंदर की ओर तेजी से चल दिये।
जब वह सुरंग के आखिरी छोर पर पहुंचे, तो उन्हें सुरंग के मुहाने पर, एक शटर लगा दिखाई दिया।

उस शटर को उठाने के लिये, एक हैंडिल की जरुरत थी, जो उनके पास नहीं था।

"कैप्टेन अंकल, बिना शटर के हैंडिल के हम नाक को नहीं खोल पायेंगे।” शैफाली ने इधर-उधर देखते हुए कहा- “मुझे लगता है कि शटर का हैंडिल आसपास ही कहीं होना चाहिये?"

शैफाली के साथ अब सभी तेजी से अपने आसपास देखने लगे। तभी जेनिथ को एक पत्थर के पीछे, एक छोटा सा धातु का डिब्बा पड़ा दिखाई दिया।

"शैफाली, यहां पर एक छोटा सा डिब्बा है, परंतु इस पर कोई 7 डिजिट वाला कोड लगा है।" कहते-कहते जेनिथ जमीन पर बैठ गई। उसकी साँस अब ज्यादा फूलने लगी थी।

जेनिथ की आवाज सुन सभी भागकर जेनिथ के पास आ गये।

“धत् तेरे की।” शैफाली ने गुस्साते हुए कहा- “इस बार कैश्वर ने 7 डिजिट का कोड दिया है, जिसे बिना उसका सही पासवर्ड जाने खोलना असंभव है और ऊपर से हमें साँस भी नहीं आ रही, ऐसे में इतने कम समय में कोड को ढूंढ पाना भी बहुत मुश्किल है।

शैफाली अब खतरे को पूरी तरह से भांप चुकी थी, इसलिये उसने कोड ढूंढने की जगह ऐलेक्स का हाथ पकड़ा और बोल उठी- “ऐलेक्स भैया, अब तुम ही हम सबकी आखिरी उम्मीद हो। अब मैं जो कह रही हूं, उसे आप ध्यान से सुनो। हम इतने कम समय में कोड को ढूंढ कर, इस लॉक को नहीं खोल पायेंगे, इसलिये हमें कोड ढूंढने की जगह पहले सभी के साँस लेने की व्यवस्था करनी होगी, नहीं तो हम सभी यहां पर मारे जायेंगे।

“अब अगर ऐसी स्थिति में हम नाक को नहीं खोल पा रहे हैं, तो कम से कम हमें मुंह को खोलना होगा। अगर कैश्वर के बनाये इस विशाल मानव का मुंह भी खुल गया, तो हमें साँस आने लगेगी। तो आप यहां से नाक के रास्ते मुंह में प्रवेश करो और कैसे भी करके इस मानव का मुंह खोल दो? लेकिन यह ध्यान रहे,.... कि आपके पास समय बहुत कम है।“ शैफाली ने यह कहकर ऐलेक्स को मुंह की ओर जाने का रास्ता बता दिया।

ऐलेक्स बिना देर किये, मुंह की ओर चल दिया। शैफाली के कहे अनुसार ऐलेक्स, जैसे ही एक रस्सी के सहारे नीचे उतरा, उसने स्वयं को उस विशाल कृत्रिम मानव के मुंह में पाया।

शैफाली सही कह रही थी, इस समय उस कृत्रिम मानव का मुंह भी बंद था।

“हे भगवान, इस राक्षस का मुंह अब कैसे खुलवाऊं?" ऐलेक्स मन ही मन बड़बड़ाया।

ऐलेक्स की नजरें अब तेजी से चारो ओर घूमने लगीं। पर ऐलेक्स को मुंह में कोई भी ऐसी चीज नहीं दिखाई दी, जिससे वह राक्षस का मुंह खुलवा सके।

धीरे-धीरे समय बीत रहा था और हर बीतते समय के साथ ऐलेक्स को अपने दोस्तों का ख्याल आ रहा था। उसे साफ महसूस हो रहा था कि उसके दोस्तों के प्राण संकट में हैं, उसे कुछ भी करके इस कृत्रिम मानव का मुंह खुलवाना ही होगा?

तभी ऐलेक्स की नजर उस कृत्रिम मानव के मुंह में स्थित एक दाँत की ओर गई। उस दाँत में एक जगह पर छोटा सा छेद दिखाई दे रहा था। यह देख ऐलेक्स की आँखों में खुशी साफ झलकने लगी।

“कैश्वर ने इतना बड़ा कृत्रिम मानव बनाया, पर उसे टूथपेस्ट नहीं दिया, अब देखो, इस बेचारे के दाँत में कीड़ा लग गया है।" यह सोच ऐलेक्स उस दाँत के पास पहुंचा और अपने जूते से दाँत के उसी स्थान पर तेज-तेज चोट मारने लगा।

ऐलेक्स का यह आइडिया काम कर गया। ऐलेक्स के चोट करने से उस कृत्रिम मानव के दाँत में दर्द होने लगा, जिससे वह मुंह खोलकर बुरी तरह से कराहने लगा।

यह देख ऐलेक्स पागलों की तरह से, उस स्थान पर कुछ चोट और मारने लगा। शायद ऐलेक्स उस कृत्रिम मानव को कैश्वर समझ अपनी भड़ास निकाल रहा था।

कुछ देर तक ऐसा करते रहने के बाद ऐलेक्स वापस नाक की ओर चल दिया। लेकिन उसने जाते-जाते भी ऐसा कर दिया था, कि कम से कम अब 2 घंटे तक उस कृत्रिम मानव ने अपना मुंह तो नहीं बंद करना था।

ऐलेक्स जब ऊपर नाक में पहुंचा, तब तक सभी ठीक नजर आने लगे थे।

ऐलक्स को देख क्रिस्टी ने दौड़कर ऐलेक्स को गले से लगा लिया। लगाती भी क्यों ना आखिर ऐलेक्स ने सभी की जान जो बचाई थी?

“इन दोनों का फिर शुरु हो गया।” जेनिथ ने मुस्कुराते हुए कहा- “आप चलिये कैप्टेन, इससे पहले कि यह कृत्रिम मानव फिर से अपना मुंह बंद करे, हमें नाक के छेद को खोलना ही होगा।"

जेनिथ की बात सुन ऐलेक्स और क्रिस्टी हड़बड़ाकर अलग हो गये और सभी के साथ, नाक के उस स्थान पर कोड को ढूंढने लगे।

कुछ देर तक उस स्थान पर कोड ढूंढने के बाद, तौफीक को दोनों नाक के बीच की दीवार (सेप्टम) पर कुछ नंबर्स लिखे दिखाई दिये, जो कि काफी धुंधले होने की वजह से सही से नजर नहीं आ रहे थे।

तौफीक ने हाथ से उस जगह को साफ किया, अब वह अंक साफ दिखाई देने लगे थे।

“शैफाली, जरा यहां आकर देखो, मुझे कुछ नंबर मिले हैं यहां पर?" तौफीक ने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हुए कहा।

तौफीक की बात सुन सभी भागकर तौफीक के पास पहुंच गये। अब उनकी सबकी नजरें सेप्टम पर लिखे उन अंकों पर थी।

वहां 4 लाइनों में कुल 32 अंक लिखे थे
0100 1110
0100 1111
0101 0011
0100 0101

“यह अंक तो सिर्फ 0 और 1 हैं और वह भी 32 फिर भला ये कोड कैसे हो सकते हैं?” सुयश ने कहा- “हमें तो 7 अंकों की जरूरत है डिब्बे के लिये।"

"कैप्टेन अंकल, यह बाइनरी कोड हैं, मैं इसे सॉल्व कर सकती हूं।" शैफाली ने कहा।

“ये बाइनरी कोड क्या होते हैं?" जेनिथ ने पूछा।

“कंम्प्यूटर की भाषा को बाइनरी नंबर्स कहते हैं, बाइनरी का मतलब होता है- 2 नंबर्स से मिलकर बनाई गई संख्या। जैसे हम जो गणित पढ़ते हैं, उसे डेसिमल नंबर्स (यानि की 10 अंकों की भाषा) कहते हैं। हम जब अपने कंम्प्यूटर पर कोई बटन दबाते हैं, तो कंम्प्यूटर अपने अंदर इन्हीं 2 नंबर्स से सारी कैलकुलेशन करता है।" यह कहकर शैफाली उन 4 लाइनों को डीकोड करने लगी।

कुछ देर तक ऐसे ही कुछ करते रहने के बाद उसने 4 अंग्रेजी के अक्षर, उन 4 लाइनों से निकाल लिये।

“कैप्टेन अंकल, पहली लाइन का मतलब N था, दूसरी लाइन का मतलब O था, तीसरी लाइन का S और चौथी का E था। इस प्रकार इन 4 लाइनों से मिलकर जो शब्द बना, वह NOSE है।” शैफाली ने कहा।

“पर NOSE तो अंग्रेजी शब्द है, इसमें 7 डिजिट का कोड कहां है?” क्रिस्टी ने शैफाली से पूछा।

“अगर हम अंग्रेजी की पूरी वर्णमाला को गणित के अंकों में बदल दें तो N=14, O=15, S=19 और E-5, यानि कि अब हमारे सामने जो गणित के अंक हैं, वह हैं1415195 और यह 7 अंक ही हैं। इसका साफ मतलब है कि डिब्बे का पासवर्ड यही अंक होंगे?” शैफाली ने कुछ ही पलों में इतनी मुश्किल पहेली को हल कर दिया।

इसे देख सभी शैफाली के दिमाग का लोहा मान गये।

शैफाली ने अब इन अंकों को डिब्बे के लॉक पर लगा दिया। पासवर्ड लगाते ही डिब्बे का लॉक खुल गया। डिब्बे में शटर का लीवर रखा था।

तौफीक ने उस लीवर को डिब्बे से निकाल, शटर के किनारे पर फंसा दिया और फिर धीरे-धीरे उस लीवर को घुमाकर शटर खोलने लगा।

कुछ ही देर में पूरा शटर खुल गया, पर शटर के खुलते ही एक तेज बदबू ने अंदर की ओर प्रवेश किया, पर उस बदबू को ऐलेक्स के सिवा कोई दूसरा सूंघ नहीं पाया।

“कैप्टेन इस हवा में तो बहुत बदबू भरी है, लगता है यह कृत्रिम मानव किसी कूड़ा घर में बैठा है?” ऐलेक्स ने अपनी नाक बंद करते हुए कहा।

“पर हमें तो कोई दुर्गंध नहीं आ रही ऐलेक्स?" सुयश ने अपनी नाक पर जोर देते हुए कहा।

पर इससे पहले कि कोई और किसी निष्कर्ष पर पहुंच पाता कि तभी नाक के छेद से हवा में तैरते, कुछ विशाल जीव भी अंदर आने लगे।

"सब अंदर की ओर भागो, नहीं तो यह विशाल जीव हमें खत्म कर देंगे।” सुयश ने चीखकर कहा- “हम इन्हें मार नहीं सकते।"

"रुक जाओ।” तभी शैफाली की आवाज सभी को सुनाई दी- “सब लोग कसकर कोई ना कोई चीज पकड़ लें, मैं इन जीवों को अभी बाहर निकालती हूं।" यह कहकर शैफाली ने नाक की दीवारों पर, अपने हाथ फिराकर धीरे-धीरे गुदगुदी करनी शुरु कर दी।

शैफाली के ऐसा करते ही, कृत्रिम मानव को बहुत तेज छींक आ गई और उसके फेफड़े से 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा बाहर निकली।

इस तेज हवा ने सभी जीवों को उड़ाकर नाक के बाहर निकाल दिया।

“वाह, क्या दिमाग लगाया है शैफाली ने?" जेनिथ ने शैफाली की तारीफ करते हुए कहा।

“वह सभी वायरस थे, जो नाक में बदबू के साथ प्रवेश कर रहे थे।" शैफाली ने कहा।

अब सभी शैफाली का इशारा पाकर अंदर की ओर चल पड़े। वह सभी नाक के अंदरी भाग में पहुंच गये थे।

यह एक विशाल कमरा था, जहां छत की ओर ऊपर एक टूथब्रश के आकार का झाड़ी नुमा पेड़ दिखाई दिया, जिसकी लताएं कमरे में कुछ ऊंचाई पर हवा में झूल रहीं थीं। वह लताएं, एक-दो नहीं बल्कि लाखों की संख्या में थीं।

“ऊपर मौजूद पेड़‘ओला फैक्ट्री बल्ब' है और नीचे लटक रही पेड़ की लताएं‘ओला फैक्ट्री नर्वस्' हैं, जब नाक में कोई भी गंध आती है, तो वह ओला फैक्ट्री नर्वस् के द्वारा सेंस करके, ओला फैक्ट्री बल्ब तक जाती हैं। ओला फैक्ट्री बल्ब इस गंध को इलेक्ट्रानिक सिग्नल के द्वारा, मस्तिष्क तक भेज देता है और मस्तिष्क उन इलेक्ट्रानिक सिग्नल को पहचान कर, हमें बता देते हैं कि वह गंध, किस चीज की है? इन्ही करोड़ों नर्वस के कारण, एक इंसानी शरीर 10,000 से भी ज्यादा गंध की पहचान कर सकता है।” शैफाली ने अपने ज्ञान का परिचय देते हुए कहा।

"हमारा शरीर कितना जटिल है, पता नहीं ईश्वर ने इसे किस प्रकार बनाया होगा?” क्रिस्टी ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा।

“ईश्वर ने हमारे शरीर को इस प्रकार बनाया है कि हमारे शरीर के सभी अंग, स्वयं का कार्य समझकर अपने आप में स्वयं बदलाव कर सकते हैं।" शैफाली ने कहा" इस प्रकार ये शरीर एक बार में नहीं बना, बल्कि करोड़ों बार स्वयं से परिवर्तित होकर इस आकार में आया है।

तभी सुयश ने भटक चुके यात्रियों को वापस गंतव्य की ओर लाते हुए कहा- “क्या अब हम वापस अपने कार्य के बारे में सोच सकते हैं।"

सुयश की बात सुन ऐलेक्स बोल उठा- “शैफाली ये बताओ कि जब नाक के अंदर हवा आयी, तो मुझे तो बदबू साफ महसूस हुई, पर तुममें से किसी को भी वो गंध महसूस नहीं हुई? ऐसा क्यों?"

“आपकी वशीन्द्रिय शक्ति की वजह से आप पर यहां के वातावरण का कोई असर नहीं हो रहा है।" शैफाली ने कहा- “आपने देखा नहीं कि नाक बंद होने के बाद भी आपको साँस लेने में किसी भी प्रकार से कोई परेशानी नहीं हो रही थी। लेकिन हमको बदबू का ना सूंघा पाना, ये बताता है कि इस कृत्रिम मानव की ओला फैक्ट्री में कोई परेशानी है, जिससे यह इलेक्ट्रानिक सिग्नल को मस्तिष्क तक नहीं भेज पा रहा है।
मुझे लगता है कि यही हमारा अगला कार्य भी है ओला फैक्ट्री बल्ब को सही करने का।....और इस कार्य को पूरा करने के लिये, हमें किसी प्रकार से ऊपर मौजूद उस पेड़ तक पहुंचना होगा।"

“पर कैसे?" क्रिस्टी ने कहा- “वह पेड़ की लताएं तो हमसे काफी ऊंचाई पर हैं, हम वहां तक पहुंचेगे कैसे?"

“पहुंच सकते हैं।” शैफाली ने कहा- “ऊपर की ओर देखो, छत के पास कुछ गोले हवा में तैर रहे हैं। यह गोले अवश्य ही हवा में मौजूद नन्हें कण हैं, जो नाक का द्वार खुलने पर अंदर घुसे थे। तो बस हमें फिर से इस कृत्रिम मानव के साँस अंदर खींचने का इंतजार करना होगा। जैसे ही हवा अंदर आयेगी, हवा के दबाव से यह कण नीचे की ओर आ जायेंगे, जो कि कुछ देर बाद फिर से ऊपर की ओर चले जायेंगे। हमें इन्हीं कणों के ऊपर बैठकर पेड़ की लताओं तक पहुंचना होगा।"

शैफाली के शब्द सुनकर सभी कृत्रिम मानव के साँस लेने का इंतजार करने लगे।

सभी ज्यादा देर तक इंतजार नहीं करना पड़ा, कुछ ही देर में कृत्रिम मानव ने साँस लेना शुरु कर दिया और इसी के साथ हवा में मौजूद कण हवा के दबाव से नीचे की ओर आने लगे।

कणों को नीचे आता देख सभी एक-एक कर, अलग-अलग कणों पर बैठ गये। बाहर से आयी हवा गले के पृष्ठ भाग से होती हुई फेफड़ों की ओर चली गई।

जैसे ही उस स्थान पर हवा का दबाव थोड़ा कम हुआ, वह कण सभी को लेकर ऊपर की ओर जाने लगे।

लताओं तक पहुंचते ही सभी ने एक-एक कर लताओं को पकड़ लिया और उस पर चढ़कर पेड़ के ऊपर की ओर आ गये।

पेड़ के ऊपर की ओर बहुत से तीर, हवा में ऐसे लटक रहे थे, जैसे कि वह तीर ना होकर इस पेड़ के फल हों।

उस ब्रशनुमा पेड़ के ऊपर आगे बढ़ने पर, सभी को एक स्थान पर, एक रबरबैंड के समान कोई छल्ला पेड़ के ऊपर, कसकर चिपका दिखाई दिया।

“यह छल्ला ही है असली परेशानी।” शैफाली ने छल्ले को देखते हुए कहा- “यह इतनी कसकर ओला फैक्ट्री बल्ब को जकड़े है कि इससे सिग्नल निकल ही नहीं सकते। हमें किसी भी प्रकार से इस छल्ले को यहां से हटाना होगा?"

शैफाली की बात सुन तौफीक अपनी जेब से चाकू निकालकर, उस रबरबैंड के छल्ले को काटने की कोशिश करने लगा।

पर 5 मिनट की कोशिश के बाद ही तौफीक समझ गया कि यह छल्ला इस चाकू से नहीं कटने वाला।

अब तौफीक उठकर शैफाली की ओर देखने लगा। पर शैफाली इस समय गहन सोच में पड़ी थी।

“कैप्टेन अंकल, हमारे पास इस रबरबैंड को काटने का हथियार नहीं है और बिना इसको हटाए इलेक्ट्रानिक सिग्नल आगे भी नहीं जायेंगे, पर अगर हम सब मिलकर अपनी पूरी ताकत लगाएं, तो इस रबरबैंड के छल्ले को थोड़ा आगे की ओर खींच सकते हैं। ऐसी स्थिति में चाहे कुछ देर के लिये ही सही, पर ओला फैक्ट्री बल्ब अपने सिग्नल आगे भेजने में सफल हो जायेगा। हो सकता है कि उसके सिग्नल भेजते ही इस द्वार का कार्य समाप्त हो जाये? हां पर हमें एक चीज का ध्यान अवश्य रखना है कि ओला फैक्ट्री बल्ब के सिग्नल कहीं उस पर लटके तीर ना हों। अगर ऐसा हुआ, तो वह बहुत तेजी से हमारी ओर आयेंगे, इसलिये हमको उन तीरों से पहले से ही सावधान रहना होगा।“

सभी ने सहमति से सिर हिलाया और घूमकर इस प्रकार खड़े हो गये, जिससे उन्हें पेड़ पर लटके तीर साफ दिखाई दे रहे थे।

अब सभी ने अपनी पूरी ताकत लगाकर एक साथ, उस रबरबैंड को अपनी ओर खींचना शुरु कर दिया।

उन सभी के सम्मिलित प्रयासों से रबर का छल्ला थोड़ा सा खिंचकर उनकी ओर आ गया।

इसी के साथ ही उस पेड़ पर लटका एक तीर तेजी से उनकी ओर लपका, परंतु शैफाली के द्वारा पहले से ही सावधान किये जाने की वजह से, किसी को कोई नुकसान नहीं हुआ।

पर उस तीर का निशाना वह लोग नहीं बल्कि वह रबर का छल्ला था। तीर तेजी से आकर रबर के छल्ले से टकराया और उसे काटता हुआ, दूसरी ओर चला गया। यह देख सभी खुशी से भर उठे।

“शैफाली ने सही कहा था कि शरीर अपना उपचार स्वयं से करना जानता है।” सुयश ने कहा।

तभी पेड़ पर लटके अन्य कई तीर हवा में होते हुए एक दिशा की ओर चले गए।

“ओला फैक्ट्री बल्ब से इलेक्ट्रानिक सिग्नल जाने लगे हैं, पर फिर भी यह द्वार पार नहीं हुआ, इसका मतलब हमें स्वयं भी उन सिग्नल के सहारे आगे तक जाना होगा।" शैफाली ने कहा।

अब तीरों का छूटना बंद हो गया था और पेड़ पर नये तीर उग आये थे।

"हम सभी को एक-एक तीर पकड़कर उससे लटकना होगा।” शैफाली ने कहा- “जैसे ही ओला फैक्ट्री बल्ब दोबारा से सिग्नल भेजेगा, हम उस तीर को पकड़कर आगे की ओर चले जायेंगे।"

शैफाली की बात सुन, सभी एक-एक तीर पकड़कर लटक गए। उन्हें सिग्नल के लिये ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ा, कुछ देर बाद ही सभी तीर से लटके हुए आगे की ओर जा रहे थे।

आगे एक स्थान पर उन्हें एक विशाल दीवार दिखाई दी, जिसमें असंख्य सुराख नजर आ रहे थे।

सभी तीर उस सुराख से ही अंदर जा रहे थे। उस सुराख के आगे जमीन पर एक बड़ा सा प्लेटफार्म बना था।

"हमें आगे आने वाले उस प्लेटफार्म पर ही कूदना होगा।” सुयश ने सभी से चिल्लाकर कहा- “अगर हम दीवार से टकराए, तो हमें गंभीर चोट आ सकती है।"

अब सभी उस प्लेटफार्म के पास पहुंचकर एक-एक कर उस पर कूद गये।

उस प्लेटफार्म के दूसरी ओर एक द्वार था, जिस पर लिखा था- “तिलिस्मा द्वार संख्या 5.3"

सभी समझ गये कि यह द्वार पार हो चुका है। अतः सभी धीरे-धीरे उस द्वार के पार निकल गये।

जारी रहेगा_____✍️
 

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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बहुत ही शानदार और लाज़वाब अपडेट है सुयश के टैटू का तो राज खुल गया लेकिन एक और राज सामने आ गया सबकी हैप्पी न्यू ईयर की जगह bad न्यू ईयर हो गई शैफाली के पास एक सिक्का मिला है वह शैफाली के पास कौन व क्यों रख के गया है जिसका पता किसी को भी नहीं है अल्बर्ट के हिसाब से यह सिक्का अटलांटिस सभ्यता का है ये सच हो सकता है और शैफाली का उनके साथ कुछ तो संबंध हो सकता है???

James aur Wilmar ne Shalaka👸 aur uske bhaiyo 🦸‍♂️🦹‍♂️🦸‍♂️🦹‍♂️🦸‍♂️🦹‍♂️ 🦸‍♂️ ko jagaa diya. Lekin inaam ki jagah unhe sunehri qaid mili.. 😏

Yeha Mayavan mei ab Nayantara 🤩 ka kya mamla hai yaar.. bahut suspense hai yaar..
:cool3:

चौदह वर्ष पूर्व कलिका - जो दिल्ली के एक मैग्जीन की संपादक थी - ने यक्षलोक के प्रहरी युवान के कठिन सवालों का जो जवाब दिया वह बिल्कुल महाभारत के एक प्रसंग ( युधिष्ठिर और यक्ष संवाद ) की तरह था ।
क्या ही कठिन सवाल थे और क्या ही अद्भुत जवाब थे ! यह सब कैसे कर लेते है आप शर्मा जी ! पहले तो दिमाग मे कठिन सवाल लाना और फिर उस सवाल का जवाब ढूंढना , यह कैसे कर लेते है आप !
यह वाकई मे अद्भुत था । इस अपडेट के लिए आप की जितनी तारीफ की जाए कम है ।

शायद सम्राट शिप से चौदह साल पहले जो शिप बरमूडा ट्राइंगल मे डुब गया था , उस शिप मे ही कलिका की बेटी सफर कर रही होगी । वह लड़की आकृति हो सकती है । वह आकृति जो शलाका का क्लोन धारण कर रखी है ।

दूसरी तरफ सामरा प्रदेश मे व्योम साहब पर कुदरत बहुत ही अधिक मेहरबान हो रखा है । वगैर मांगे छप्पर फाड़ कर कृपा बरसा रहा है । पहले अमृत की प्राप्ति हुई और अब राजकुमारी त्रिकाली का दिल उनपर धड़क गया है ।
मंदिर मे जिस तरह दोनो ने एक दूसरे को रक्षा सूत्र पहनाया , उससे लगता है यह रक्षा सूत्र नही विवाह सूत्र की प्रक्रिया थी ।


इन दो घटनाक्रम के बाद तीसरी तरफ कैस्पर का दिल भी मैग्ना पर मचल उठा है और खास यह है कि यह धड़कन हजारों वर्ष बाद हुआ है । लेकिन सवाल यह है कि मैग्ना है कहां !
कहीं शैफाली ही मैग्ना तो नही ! शैफाली कहीं मैग्ना का पुनर्जन्म तो नही !

कुकुरमुत्ता को छाते की तरह इस्तेमाल करते हुए सुयश साहब और उनकी टीम का तेजाबी बारिश से खुद को रक्षा करना एक और खुबसूरत अपडेट था । पांच लोग बचे हुए हैं और एलेक्स को मिला दिया जाए तो छ लोग । तौफिक साहब की जान जाते जाते बची , लेकिन लगता नही है यह साहब अधिक दिन तक जीवित रह पायेंगे ।
कुछ मिलाकर पांच प्राणी ही सम्राट शिप के जीवित बचेंगे , बशर्ते राइटर साहब ने कुछ खुराफाती न सोच रखा हो ।
ये मिश्रित पांडव जीवित रहने चाहिए पंडित जी ! :D

सभी अपडेट बेहद खुबसूरत थे ।
रोमांच से भरपूर ।
एक अलग तरह की कहानी , एक अद्भुत कहानी ।
और आउटस्टैंडिंग राइटिंग ।

Nice update ...lambe gap ke karan thoda confusion hai kuch ...lekhak mahodaya ho sake to iska answer dijiyega ...
Gurutva shakti

Nice update....

Ab s
समझ आया आकृति के चेहरा नहीं बदल पाने के कारण.... इसलिए आर्यन भी जल्दी नहीं पहचान पाया उसको....


बहुत ही सुंदर अपडेट

अदभुद अकल्पनीय इससे अधिक शब्द नहीं हैं व्याख्यान के लिए

राज भाई
सेक्स नहीं कहानी पढ़ने का शौक रहा है मेरा हमेशा से
सेक्स पढ़ने देखने की जरूरत सिर्फ कुछ नया, अनोखा, अलग जानने के लिए समझता हूं
आनन्द या मनोरंजन सेक्स लिखने, पढ़ने, सुनने या देखने से नहीं 'करने' में ही होता है

Awesome update and nice story.

फिर से एक अप्रतिम अद्भुत और रोमांचक विस्मयकारी अपडेट हैं भाई मजा आ गया

शैफाली का किरदार बिल्कुल असाधारण ऊँचाई पर है। जिस तरह वह बारूद की खुशबू के समय में फर्क पकड़ती है और उससे धुएँ पर फूँक मारने की आदत तक पहुँचती है, और फिर जले हुए रुमाल व संदल की खुशबू जैसा सूक्ष्म विवरण देती है, वह सिर्फ बुद्धिमत्ता नहीं, बल्कि लेखन की गहराई भी दिखाता है। एक अंधी बच्ची का इस तरह संवेदनाओं के सहारे अपराध की परतें खोलना बेहद प्रभावशाली लगा।

नीली रोशनी, अजीब ध्वनि, इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम का ब्लास्ट होना यह हिस्सा पूरी तरह सिनेमैटिक और रहस्य से भरा लगा। ऐसा लगा जैसे कहानी अब केवल मर्डर मिस्ट्री नहीं रही, बल्कि किसी बड़े, अज्ञात, रहस्यमय और अलौकिक एडवेंचर की ओर बढ़ रही है।

कुल मिलाकर यह अपडेट कहानी को नए स्तर पर ले जाता है। भावनात्मक गहराई, वैज्ञानिक तर्क, रहस्य और अलौकिक संकेत सब एक साथ इतने संतुलित तरीके से आए हैं कि अब आगे क्या होगा, यह जानने की उत्सुकता और भी बढ़ गई है।

मजेदार अपडेट, कहानी ने दिलचस्प मोड ले लिया। मर्डर मिस्ट्री से बरमूडा ट्रेंगल की और। हम्ममम🤔🤔

बहुत ही शानदार अपडेट है !

Superb update

रिव्यू की शुरुआत की जाए

नए अध्याय का प्रारंभ हो चुका हैं युद्ध का बिगुल बज चुका हैं , जिस तरह युद्ध की झलकियां दिखाई हैं वे साबित करते हैं आगे हमें क्या देखना को मिलेगा।

मतलब सिर्फ एंडोर्स ग्रह के १० लोग भिड़ने आए हैं , अटका वासियों से, फिर भी इतनी तबाहि , भला हो सूर्यवर्या की शुभार्जुन का जिसने इस युद्ध में थोड़ा समय मांग लिया।

अब सबसे पहले मुझे ये बताओ सुनेरा लड़की हैं या लड़का क्योंकि कभी लगता हैं ये लड़की है तो कभी लड़का लगता है

जब शक्ति का वर्णन हो रहा था तब इनका जिक्र क्यों नहीं हुआ क्योंकि मैने पुराना अपडेट पढ़ा है। इसे तो लगता है ये दोनो शक्तियों उन पंद्रह शक्ति में से हैं।

अब मुझे नही पता इतना बड़ा लूपहोल कैसे भरेगा। पर करना तो पड़ेगा वर्ना कन्फ्यूजन होगा ।

अब समझा आगया है , की रॉजर जिंदा कैसे हुआ, वो शुभर्जुना का जादू था।

मेगा लाइट के गुस्से वाला अवतार तो खतरनाक था, वैसे ये जिंदा मारने के खेल कब तक चालू रखोगे , एक समय लगा कि युद्ध में पहले बलि आगाई, लेकिन हम गलत थे।


वैसे जैसा शुभार्जुन के बारे में पढ़ा हैं लगता है इसका प्रयोग पहले बार हुआ है और आगे चल कर २ बार हम किसी को भी जीवित कर सकते है ।

अब मार्कोटा ने युद्ध चालू कर कर कही न कही मुसीबत मोल लेली है, ये एंडोर्स वाले किसी को नहीं छोड़ने वाले अब तो और ताकतवर होकर आयेंगे क्यूंकि इनके महाबली योद्धा को परास्त किया है

इस अपडेट से ये भी लगता है कहानी के समाप्ति की और एक कदम बढ़ चुका है

कुलमिलाकर शानदार अपडेट आगे की प्रतीक्षा
Raj_sharma

Shaandar update

Intezar rahega bhai

#179

राज भाई - आपकी रचना तो एक भव्य और महत्वाकांक्षी फंतासी वाले संसार की रचना है। इंद्रसभा, त्रिदेवों का आगमन, और कलयुग के लिए “ब्रह्मांड रक्षक” की योजना, यह सभी तत्व मिलकर बढ़िया प्लॉट बना रहे हैं। मतलब आगे कहानी में और विस्तार आने वाला है। हमको इनके बारे में पहले पता चल चुका है लेकिन फिर भी, इस अपडेट के विचार न सिर्फ नए लगते हैं, बल्कि एक structured universe का संकेत भी देते हैं।

लेकिन सबसे पहले, भाषा और शुद्धता - जो आपने जान बूझ कर खराब करी है - उस पर ध्यान देना ज़रूरी है। एक और बात, संवाद केवल functional से हैं, मतलब, वो कहानी को आगे बढ़ाते तो हैं, लेकिन अलग-अलग पात्रों की आवाज़ में अंतर नहीं पढ़ने में आता। इंद्र, सूर्य, और वरुण, तीनों के ही बोलने का तरीका लगभग एक जैसा है।

-- ये उतारी मैंने बाल की खाल!

#180

यह अपडेट पिछले से बेहतर है और बहुत जीवंत है। बढ़िया visual narrative! देवशक्तियों का प्रस्तुतिकरण - रत्नों के माध्यम से शक्तियों को दिखाना एक बहुत ही प्रभावी और याद रहने वाला आइडिया है (वो अलग बात है कि मुझ भुलक्कड़ को याद नहीं रहेगा)। हर शक्ति का रंग, उसका गुण (जैसे सूर्यशक्ति = पराक्रम, जलशक्ति = गंभीरता, वायुशक्ति = विज्ञान) - यह सब मिलकर एक structured magic system बनाता है। अच्छी फंतासी वहीं होती है जहाँ शक्तियों के नियम स्पष्ट हों।

उधर इंद्र की आफ़त हो गई है। पहले उसको दूसरों के अमरत्व के कारण दिक्कत थी, फ़िर राक्षसलोक का डर, फिर माया पर संदेह, और अंत में मन ही मन कोई खिचड़ी पकाना। देवराज एक insecure और politically aware शासक है। बढ़िया!

Update is very nice 👍 🙂
Ek pakda gaya toh baki sab bahar ajaenge

lovely update. ashrudhara train me baithne ke liye 12 sawalo ka jawab dena hai jisme se 8 ke jawab de diye hai ,shefali aur christi ke dimag ki vajah se sab sahi uttar de paye .dekhte hai aage aise kaun kaun se prashn poochhta hai computer jo dikhte to aasan hai par sochne par majbur kar hi dete hai .

Kya gazab ki update post ki he Raj_sharma Bhai

Eye Specialist wali padhayi karwa di aapne to is dwar me.........

Ab agla number ENT ka he............

Keep rocking Bro

nice update

Nice update....

Wonderful update, jab Vyom, Trikali, Suyash, Shefali aur Varuni aur baki sabhi ek sath honge, lekin isme abhi bahut waqt lagna hai, abhi Vyom ka mission pura nahi hua hai, Shefali aur Suyash abhi Tilism ko todne mein lage huye hain, khair dark matter ka ilaaz toh apne Vyom ke paas hai.

Bahut hi shaandar update diya hai Raj_sharma bhai....
Nice and lovely update....

Bhut hi badhiya update Bhai
Maya ne aane vale yudh aur antriksh jeevo ke bare me bhut si jankari di hai

Superb updates🔥🔥🔥🔥
Update posted friends, please provide your valuable review/feedback 🫡
 

sunoanuj

Well-Known Member
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#193.

चैपटर-6
प्राणवायु:
(तिलिस्मा 5.2)

सुयश सहित सभी लैक्राइमल पंक्टा से होते हुए नाक के अंदर पहुंच गये थे। सभी के सामने अब 2 लंबी सुरंगें दिखाई दे रहीं थीं।

“ये दोनों सुरंगें नाक के दोनों छेद लग रहे हैं?" क्रिस्टी ने कहा- “पर यहां पर इतना दम क्यों घुट रहा है? ऐसा लग रहा है कि जैसे यहां शुद्ध हवा है ही नहीं।"

"क्रिस्टी सही कह रही है, यहां पर शुद्ध हवा नहीं है, मेरा भी यहां पर दम घुट रहा है।” सुयश ने तेज-तेज साँस लेने की कोशिश करते हुए कहा।

"मुझे लग रहा है कि हम जहां खड़े हैं, इस नाक के दोनों छेद बुरी तरह से बंद हैं, जिसकी वजह से हम यहां पर साँस नहीं ले पा रहे हैं।" शैफाली ने कहा- “हमें जल्द से जल्द इस नाक के छेद को खोलना होगा, नहीं तो हमारा दम यहां पर घुट जायेगा।

“मैं इस जगह पर भी ठीक से साँस ले पा रहा हूं। ऐलेक्स ने कहा- “शायद यह मेरी वशीन्द्रिय शक्ति के कारण हो रहा है।"

"मुझे लगता है कि हमें बिना एक सेकेण्ड गंवाए, पहले इन नासट्रिल्स (नाक के दोनो छेद) को खोलना होगा।" जेनिथ ने भी गहरी-गहरी साँस लेते हुए कहा।

जेनिथ की बात सुन सभी, एक सुरंग के अंदर की ओर तेजी से चल दिये।
जब वह सुरंग के आखिरी छोर पर पहुंचे, तो उन्हें सुरंग के मुहाने पर, एक शटर लगा दिखाई दिया।

उस शटर को उठाने के लिये, एक हैंडिल की जरुरत थी, जो उनके पास नहीं था।

"कैप्टेन अंकल, बिना शटर के हैंडिल के हम नाक को नहीं खोल पायेंगे।” शैफाली ने इधर-उधर देखते हुए कहा- “मुझे लगता है कि शटर का हैंडिल आसपास ही कहीं होना चाहिये?"

शैफाली के साथ अब सभी तेजी से अपने आसपास देखने लगे। तभी जेनिथ को एक पत्थर के पीछे, एक छोटा सा धातु का डिब्बा पड़ा दिखाई दिया।

"शैफाली, यहां पर एक छोटा सा डिब्बा है, परंतु इस पर कोई 7 डिजिट वाला कोड लगा है।" कहते-कहते जेनिथ जमीन पर बैठ गई। उसकी साँस अब ज्यादा फूलने लगी थी।

जेनिथ की आवाज सुन सभी भागकर जेनिथ के पास आ गये।

“धत् तेरे की।” शैफाली ने गुस्साते हुए कहा- “इस बार कैश्वर ने 7 डिजिट का कोड दिया है, जिसे बिना उसका सही पासवर्ड जाने खोलना असंभव है और ऊपर से हमें साँस भी नहीं आ रही, ऐसे में इतने कम समय में कोड को ढूंढ पाना भी बहुत मुश्किल है।

शैफाली अब खतरे को पूरी तरह से भांप चुकी थी, इसलिये उसने कोड ढूंढने की जगह ऐलेक्स का हाथ पकड़ा और बोल उठी- “ऐलेक्स भैया, अब तुम ही हम सबकी आखिरी उम्मीद हो। अब मैं जो कह रही हूं, उसे आप ध्यान से सुनो। हम इतने कम समय में कोड को ढूंढ कर, इस लॉक को नहीं खोल पायेंगे, इसलिये हमें कोड ढूंढने की जगह पहले सभी के साँस लेने की व्यवस्था करनी होगी, नहीं तो हम सभी यहां पर मारे जायेंगे।

“अब अगर ऐसी स्थिति में हम नाक को नहीं खोल पा रहे हैं, तो कम से कम हमें मुंह को खोलना होगा। अगर कैश्वर के बनाये इस विशाल मानव का मुंह भी खुल गया, तो हमें साँस आने लगेगी। तो आप यहां से नाक के रास्ते मुंह में प्रवेश करो और कैसे भी करके इस मानव का मुंह खोल दो? लेकिन यह ध्यान रहे,.... कि आपके पास समय बहुत कम है।“ शैफाली ने यह कहकर ऐलेक्स को मुंह की ओर जाने का रास्ता बता दिया।

ऐलेक्स बिना देर किये, मुंह की ओर चल दिया। शैफाली के कहे अनुसार ऐलेक्स, जैसे ही एक रस्सी के सहारे नीचे उतरा, उसने स्वयं को उस विशाल कृत्रिम मानव के मुंह में पाया।

शैफाली सही कह रही थी, इस समय उस कृत्रिम मानव का मुंह भी बंद था।

“हे भगवान, इस राक्षस का मुंह अब कैसे खुलवाऊं?" ऐलेक्स मन ही मन बड़बड़ाया।

ऐलेक्स की नजरें अब तेजी से चारो ओर घूमने लगीं। पर ऐलेक्स को मुंह में कोई भी ऐसी चीज नहीं दिखाई दी, जिससे वह राक्षस का मुंह खुलवा सके।

धीरे-धीरे समय बीत रहा था और हर बीतते समय के साथ ऐलेक्स को अपने दोस्तों का ख्याल आ रहा था। उसे साफ महसूस हो रहा था कि उसके दोस्तों के प्राण संकट में हैं, उसे कुछ भी करके इस कृत्रिम मानव का मुंह खुलवाना ही होगा?

तभी ऐलेक्स की नजर उस कृत्रिम मानव के मुंह में स्थित एक दाँत की ओर गई। उस दाँत में एक जगह पर छोटा सा छेद दिखाई दे रहा था। यह देख ऐलेक्स की आँखों में खुशी साफ झलकने लगी।

“कैश्वर ने इतना बड़ा कृत्रिम मानव बनाया, पर उसे टूथपेस्ट नहीं दिया, अब देखो, इस बेचारे के दाँत में कीड़ा लग गया है।" यह सोच ऐलेक्स उस दाँत के पास पहुंचा और अपने जूते से दाँत के उसी स्थान पर तेज-तेज चोट मारने लगा।

ऐलेक्स का यह आइडिया काम कर गया। ऐलेक्स के चोट करने से उस कृत्रिम मानव के दाँत में दर्द होने लगा, जिससे वह मुंह खोलकर बुरी तरह से कराहने लगा।

यह देख ऐलेक्स पागलों की तरह से, उस स्थान पर कुछ चोट और मारने लगा। शायद ऐलेक्स उस कृत्रिम मानव को कैश्वर समझ अपनी भड़ास निकाल रहा था।

कुछ देर तक ऐसा करते रहने के बाद ऐलेक्स वापस नाक की ओर चल दिया। लेकिन उसने जाते-जाते भी ऐसा कर दिया था, कि कम से कम अब 2 घंटे तक उस कृत्रिम मानव ने अपना मुंह तो नहीं बंद करना था।

ऐलेक्स जब ऊपर नाक में पहुंचा, तब तक सभी ठीक नजर आने लगे थे।

ऐलक्स को देख क्रिस्टी ने दौड़कर ऐलेक्स को गले से लगा लिया। लगाती भी क्यों ना आखिर ऐलेक्स ने सभी की जान जो बचाई थी?

“इन दोनों का फिर शुरु हो गया।” जेनिथ ने मुस्कुराते हुए कहा- “आप चलिये कैप्टेन, इससे पहले कि यह कृत्रिम मानव फिर से अपना मुंह बंद करे, हमें नाक के छेद को खोलना ही होगा।"

जेनिथ की बात सुन ऐलेक्स और क्रिस्टी हड़बड़ाकर अलग हो गये और सभी के साथ, नाक के उस स्थान पर कोड को ढूंढने लगे।

कुछ देर तक उस स्थान पर कोड ढूंढने के बाद, तौफीक को दोनों नाक के बीच की दीवार (सेप्टम) पर कुछ नंबर्स लिखे दिखाई दिये, जो कि काफी धुंधले होने की वजह से सही से नजर नहीं आ रहे थे।

तौफीक ने हाथ से उस जगह को साफ किया, अब वह अंक साफ दिखाई देने लगे थे।

“शैफाली, जरा यहां आकर देखो, मुझे कुछ नंबर मिले हैं यहां पर?" तौफीक ने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हुए कहा।

तौफीक की बात सुन सभी भागकर तौफीक के पास पहुंच गये। अब उनकी सबकी नजरें सेप्टम पर लिखे उन अंकों पर थी।

वहां 4 लाइनों में कुल 32 अंक लिखे थे
0100 1110
0100 1111
0101 0011
0100 0101

“यह अंक तो सिर्फ 0 और 1 हैं और वह भी 32 फिर भला ये कोड कैसे हो सकते हैं?” सुयश ने कहा- “हमें तो 7 अंकों की जरूरत है डिब्बे के लिये।"

"कैप्टेन अंकल, यह बाइनरी कोड हैं, मैं इसे सॉल्व कर सकती हूं।" शैफाली ने कहा।

“ये बाइनरी कोड क्या होते हैं?" जेनिथ ने पूछा।

“कंम्प्यूटर की भाषा को बाइनरी नंबर्स कहते हैं, बाइनरी का मतलब होता है- 2 नंबर्स से मिलकर बनाई गई संख्या। जैसे हम जो गणित पढ़ते हैं, उसे डेसिमल नंबर्स (यानि की 10 अंकों की भाषा) कहते हैं। हम जब अपने कंम्प्यूटर पर कोई बटन दबाते हैं, तो कंम्प्यूटर अपने अंदर इन्हीं 2 नंबर्स से सारी कैलकुलेशन करता है।" यह कहकर शैफाली उन 4 लाइनों को डीकोड करने लगी।

कुछ देर तक ऐसे ही कुछ करते रहने के बाद उसने 4 अंग्रेजी के अक्षर, उन 4 लाइनों से निकाल लिये।

“कैप्टेन अंकल, पहली लाइन का मतलब N था, दूसरी लाइन का मतलब O था, तीसरी लाइन का S और चौथी का E था। इस प्रकार इन 4 लाइनों से मिलकर जो शब्द बना, वह NOSE है।” शैफाली ने कहा।

“पर NOSE तो अंग्रेजी शब्द है, इसमें 7 डिजिट का कोड कहां है?” क्रिस्टी ने शैफाली से पूछा।

“अगर हम अंग्रेजी की पूरी वर्णमाला को गणित के अंकों में बदल दें तो N=14, O=15, S=19 और E-5, यानि कि अब हमारे सामने जो गणित के अंक हैं, वह हैं1415195 और यह 7 अंक ही हैं। इसका साफ मतलब है कि डिब्बे का पासवर्ड यही अंक होंगे?” शैफाली ने कुछ ही पलों में इतनी मुश्किल पहेली को हल कर दिया।

इसे देख सभी शैफाली के दिमाग का लोहा मान गये।

शैफाली ने अब इन अंकों को डिब्बे के लॉक पर लगा दिया। पासवर्ड लगाते ही डिब्बे का लॉक खुल गया। डिब्बे में शटर का लीवर रखा था।

तौफीक ने उस लीवर को डिब्बे से निकाल, शटर के किनारे पर फंसा दिया और फिर धीरे-धीरे उस लीवर को घुमाकर शटर खोलने लगा।

कुछ ही देर में पूरा शटर खुल गया, पर शटर के खुलते ही एक तेज बदबू ने अंदर की ओर प्रवेश किया, पर उस बदबू को ऐलेक्स के सिवा कोई दूसरा सूंघ नहीं पाया।

“कैप्टेन इस हवा में तो बहुत बदबू भरी है, लगता है यह कृत्रिम मानव किसी कूड़ा घर में बैठा है?” ऐलेक्स ने अपनी नाक बंद करते हुए कहा।

“पर हमें तो कोई दुर्गंध नहीं आ रही ऐलेक्स?" सुयश ने अपनी नाक पर जोर देते हुए कहा।

पर इससे पहले कि कोई और किसी निष्कर्ष पर पहुंच पाता कि तभी नाक के छेद से हवा में तैरते, कुछ विशाल जीव भी अंदर आने लगे।

"सब अंदर की ओर भागो, नहीं तो यह विशाल जीव हमें खत्म कर देंगे।” सुयश ने चीखकर कहा- “हम इन्हें मार नहीं सकते।"

"रुक जाओ।” तभी शैफाली की आवाज सभी को सुनाई दी- “सब लोग कसकर कोई ना कोई चीज पकड़ लें, मैं इन जीवों को अभी बाहर निकालती हूं।" यह कहकर शैफाली ने नाक की दीवारों पर, अपने हाथ फिराकर धीरे-धीरे गुदगुदी करनी शुरु कर दी।

शैफाली के ऐसा करते ही, कृत्रिम मानव को बहुत तेज छींक आ गई और उसके फेफड़े से 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा बाहर निकली।

इस तेज हवा ने सभी जीवों को उड़ाकर नाक के बाहर निकाल दिया।

“वाह, क्या दिमाग लगाया है शैफाली ने?" जेनिथ ने शैफाली की तारीफ करते हुए कहा।

“वह सभी वायरस थे, जो नाक में बदबू के साथ प्रवेश कर रहे थे।" शैफाली ने कहा।

अब सभी शैफाली का इशारा पाकर अंदर की ओर चल पड़े। वह सभी नाक के अंदरी भाग में पहुंच गये थे।

यह एक विशाल कमरा था, जहां छत की ओर ऊपर एक टूथब्रश के आकार का झाड़ी नुमा पेड़ दिखाई दिया, जिसकी लताएं कमरे में कुछ ऊंचाई पर हवा में झूल रहीं थीं। वह लताएं, एक-दो नहीं बल्कि लाखों की संख्या में थीं।

“ऊपर मौजूद पेड़‘ओला फैक्ट्री बल्ब' है और नीचे लटक रही पेड़ की लताएं‘ओला फैक्ट्री नर्वस्' हैं, जब नाक में कोई भी गंध आती है, तो वह ओला फैक्ट्री नर्वस् के द्वारा सेंस करके, ओला फैक्ट्री बल्ब तक जाती हैं। ओला फैक्ट्री बल्ब इस गंध को इलेक्ट्रानिक सिग्नल के द्वारा, मस्तिष्क तक भेज देता है और मस्तिष्क उन इलेक्ट्रानिक सिग्नल को पहचान कर, हमें बता देते हैं कि वह गंध, किस चीज की है? इन्ही करोड़ों नर्वस के कारण, एक इंसानी शरीर 10,000 से भी ज्यादा गंध की पहचान कर सकता है।” शैफाली ने अपने ज्ञान का परिचय देते हुए कहा।

"हमारा शरीर कितना जटिल है, पता नहीं ईश्वर ने इसे किस प्रकार बनाया होगा?” क्रिस्टी ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा।

“ईश्वर ने हमारे शरीर को इस प्रकार बनाया है कि हमारे शरीर के सभी अंग, स्वयं का कार्य समझकर अपने आप में स्वयं बदलाव कर सकते हैं।" शैफाली ने कहा" इस प्रकार ये शरीर एक बार में नहीं बना, बल्कि करोड़ों बार स्वयं से परिवर्तित होकर इस आकार में आया है।

तभी सुयश ने भटक चुके यात्रियों को वापस गंतव्य की ओर लाते हुए कहा- “क्या अब हम वापस अपने कार्य के बारे में सोच सकते हैं।"

सुयश की बात सुन ऐलेक्स बोल उठा- “शैफाली ये बताओ कि जब नाक के अंदर हवा आयी, तो मुझे तो बदबू साफ महसूस हुई, पर तुममें से किसी को भी वो गंध महसूस नहीं हुई? ऐसा क्यों?"

“आपकी वशीन्द्रिय शक्ति की वजह से आप पर यहां के वातावरण का कोई असर नहीं हो रहा है।" शैफाली ने कहा- “आपने देखा नहीं कि नाक बंद होने के बाद भी आपको साँस लेने में किसी भी प्रकार से कोई परेशानी नहीं हो रही थी। लेकिन हमको बदबू का ना सूंघा पाना, ये बताता है कि इस कृत्रिम मानव की ओला फैक्ट्री में कोई परेशानी है, जिससे यह इलेक्ट्रानिक सिग्नल को मस्तिष्क तक नहीं भेज पा रहा है।
मुझे लगता है कि यही हमारा अगला कार्य भी है ओला फैक्ट्री बल्ब को सही करने का।....और इस कार्य को पूरा करने के लिये, हमें किसी प्रकार से ऊपर मौजूद उस पेड़ तक पहुंचना होगा।"

“पर कैसे?" क्रिस्टी ने कहा- “वह पेड़ की लताएं तो हमसे काफी ऊंचाई पर हैं, हम वहां तक पहुंचेगे कैसे?"

“पहुंच सकते हैं।” शैफाली ने कहा- “ऊपर की ओर देखो, छत के पास कुछ गोले हवा में तैर रहे हैं। यह गोले अवश्य ही हवा में मौजूद नन्हें कण हैं, जो नाक का द्वार खुलने पर अंदर घुसे थे। तो बस हमें फिर से इस कृत्रिम मानव के साँस अंदर खींचने का इंतजार करना होगा। जैसे ही हवा अंदर आयेगी, हवा के दबाव से यह कण नीचे की ओर आ जायेंगे, जो कि कुछ देर बाद फिर से ऊपर की ओर चले जायेंगे। हमें इन्हीं कणों के ऊपर बैठकर पेड़ की लताओं तक पहुंचना होगा।"

शैफाली के शब्द सुनकर सभी कृत्रिम मानव के साँस लेने का इंतजार करने लगे।

सभी ज्यादा देर तक इंतजार नहीं करना पड़ा, कुछ ही देर में कृत्रिम मानव ने साँस लेना शुरु कर दिया और इसी के साथ हवा में मौजूद कण हवा के दबाव से नीचे की ओर आने लगे।

कणों को नीचे आता देख सभी एक-एक कर, अलग-अलग कणों पर बैठ गये। बाहर से आयी हवा गले के पृष्ठ भाग से होती हुई फेफड़ों की ओर चली गई।

जैसे ही उस स्थान पर हवा का दबाव थोड़ा कम हुआ, वह कण सभी को लेकर ऊपर की ओर जाने लगे।

लताओं तक पहुंचते ही सभी ने एक-एक कर लताओं को पकड़ लिया और उस पर चढ़कर पेड़ के ऊपर की ओर आ गये।

पेड़ के ऊपर की ओर बहुत से तीर, हवा में ऐसे लटक रहे थे, जैसे कि वह तीर ना होकर इस पेड़ के फल हों।

उस ब्रशनुमा पेड़ के ऊपर आगे बढ़ने पर, सभी को एक स्थान पर, एक रबरबैंड के समान कोई छल्ला पेड़ के ऊपर, कसकर चिपका दिखाई दिया।

“यह छल्ला ही है असली परेशानी।” शैफाली ने छल्ले को देखते हुए कहा- “यह इतनी कसकर ओला फैक्ट्री बल्ब को जकड़े है कि इससे सिग्नल निकल ही नहीं सकते। हमें किसी भी प्रकार से इस छल्ले को यहां से हटाना होगा?"

शैफाली की बात सुन तौफीक अपनी जेब से चाकू निकालकर, उस रबरबैंड के छल्ले को काटने की कोशिश करने लगा।

पर 5 मिनट की कोशिश के बाद ही तौफीक समझ गया कि यह छल्ला इस चाकू से नहीं कटने वाला।

अब तौफीक उठकर शैफाली की ओर देखने लगा। पर शैफाली इस समय गहन सोच में पड़ी थी।

“कैप्टेन अंकल, हमारे पास इस रबरबैंड को काटने का हथियार नहीं है और बिना इसको हटाए इलेक्ट्रानिक सिग्नल आगे भी नहीं जायेंगे, पर अगर हम सब मिलकर अपनी पूरी ताकत लगाएं, तो इस रबरबैंड के छल्ले को थोड़ा आगे की ओर खींच सकते हैं। ऐसी स्थिति में चाहे कुछ देर के लिये ही सही, पर ओला फैक्ट्री बल्ब अपने सिग्नल आगे भेजने में सफल हो जायेगा। हो सकता है कि उसके सिग्नल भेजते ही इस द्वार का कार्य समाप्त हो जाये? हां पर हमें एक चीज का ध्यान अवश्य रखना है कि ओला फैक्ट्री बल्ब के सिग्नल कहीं उस पर लटके तीर ना हों। अगर ऐसा हुआ, तो वह बहुत तेजी से हमारी ओर आयेंगे, इसलिये हमको उन तीरों से पहले से ही सावधान रहना होगा।“

सभी ने सहमति से सिर हिलाया और घूमकर इस प्रकार खड़े हो गये, जिससे उन्हें पेड़ पर लटके तीर साफ दिखाई दे रहे थे।

अब सभी ने अपनी पूरी ताकत लगाकर एक साथ, उस रबरबैंड को अपनी ओर खींचना शुरु कर दिया।

उन सभी के सम्मिलित प्रयासों से रबर का छल्ला थोड़ा सा खिंचकर उनकी ओर आ गया।

इसी के साथ ही उस पेड़ पर लटका एक तीर तेजी से उनकी ओर लपका, परंतु शैफाली के द्वारा पहले से ही सावधान किये जाने की वजह से, किसी को कोई नुकसान नहीं हुआ।

पर उस तीर का निशाना वह लोग नहीं बल्कि वह रबर का छल्ला था। तीर तेजी से आकर रबर के छल्ले से टकराया और उसे काटता हुआ, दूसरी ओर चला गया। यह देख सभी खुशी से भर उठे।


“शैफाली ने सही कहा था कि शरीर अपना उपचार स्वयं से करना जानता है।” सुयश ने कहा।

तभी पेड़ पर लटके अन्य कई तीर हवा में होते हुए एक दिशा की ओर चले गए।

“ओला फैक्ट्री बल्ब से इलेक्ट्रानिक सिग्नल जाने लगे हैं, पर फिर भी यह द्वार पार नहीं हुआ, इसका मतलब हमें स्वयं भी उन सिग्नल के सहारे आगे तक जाना होगा।" शैफाली ने कहा।

अब तीरों का छूटना बंद हो गया था और पेड़ पर नये तीर उग आये थे।

"हम सभी को एक-एक तीर पकड़कर उससे लटकना होगा।” शैफाली ने कहा- “जैसे ही ओला फैक्ट्री बल्ब दोबारा से सिग्नल भेजेगा, हम उस तीर को पकड़कर आगे की ओर चले जायेंगे।"

शैफाली की बात सुन, सभी एक-एक तीर पकड़कर लटक गए। उन्हें सिग्नल के लिये ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ा, कुछ देर बाद ही सभी तीर से लटके हुए आगे की ओर जा रहे थे।

आगे एक स्थान पर उन्हें एक विशाल दीवार दिखाई दी, जिसमें असंख्य सुराख नजर आ रहे थे।

सभी तीर उस सुराख से ही अंदर जा रहे थे। उस सुराख के आगे जमीन पर एक बड़ा सा प्लेटफार्म बना था।

"हमें आगे आने वाले उस प्लेटफार्म पर ही कूदना होगा।” सुयश ने सभी से चिल्लाकर कहा- “अगर हम दीवार से टकराए, तो हमें गंभीर चोट आ सकती है।"

अब सभी उस प्लेटफार्म के पास पहुंचकर एक-एक कर उस पर कूद गये।

उस प्लेटफार्म के दूसरी ओर एक द्वार था, जिस पर लिखा था- “तिलिस्मा द्वार संख्या 5.3"

सभी समझ गये कि यह द्वार पार हो चुका है। अतः सभी धीरे-धीरे उस द्वार के पार निकल गये।

जारी रहेगा_____✍️
बहुत ही उम्दा और बेहतरीन अपडेट है 👏🏻👏🏻👏🏻
 

dhalchandarun

[Death is the most beautiful thing.]
6,882
21,537
174
#193.

चैपटर-6
प्राणवायु:
(तिलिस्मा 5.2)

सुयश सहित सभी लैक्राइमल पंक्टा से होते हुए नाक के अंदर पहुंच गये थे। सभी के सामने अब 2 लंबी सुरंगें दिखाई दे रहीं थीं।

“ये दोनों सुरंगें नाक के दोनों छेद लग रहे हैं?" क्रिस्टी ने कहा- “पर यहां पर इतना दम क्यों घुट रहा है? ऐसा लग रहा है कि जैसे यहां शुद्ध हवा है ही नहीं।"

"क्रिस्टी सही कह रही है, यहां पर शुद्ध हवा नहीं है, मेरा भी यहां पर दम घुट रहा है।” सुयश ने तेज-तेज साँस लेने की कोशिश करते हुए कहा।

"मुझे लग रहा है कि हम जहां खड़े हैं, इस नाक के दोनों छेद बुरी तरह से बंद हैं, जिसकी वजह से हम यहां पर साँस नहीं ले पा रहे हैं।" शैफाली ने कहा- “हमें जल्द से जल्द इस नाक के छेद को खोलना होगा, नहीं तो हमारा दम यहां पर घुट जायेगा।

“मैं इस जगह पर भी ठीक से साँस ले पा रहा हूं। ऐलेक्स ने कहा- “शायद यह मेरी वशीन्द्रिय शक्ति के कारण हो रहा है।"

"मुझे लगता है कि हमें बिना एक सेकेण्ड गंवाए, पहले इन नासट्रिल्स (नाक के दोनो छेद) को खोलना होगा।" जेनिथ ने भी गहरी-गहरी साँस लेते हुए कहा।

जेनिथ की बात सुन सभी, एक सुरंग के अंदर की ओर तेजी से चल दिये।
जब वह सुरंग के आखिरी छोर पर पहुंचे, तो उन्हें सुरंग के मुहाने पर, एक शटर लगा दिखाई दिया।

उस शटर को उठाने के लिये, एक हैंडिल की जरुरत थी, जो उनके पास नहीं था।

"कैप्टेन अंकल, बिना शटर के हैंडिल के हम नाक को नहीं खोल पायेंगे।” शैफाली ने इधर-उधर देखते हुए कहा- “मुझे लगता है कि शटर का हैंडिल आसपास ही कहीं होना चाहिये?"

शैफाली के साथ अब सभी तेजी से अपने आसपास देखने लगे। तभी जेनिथ को एक पत्थर के पीछे, एक छोटा सा धातु का डिब्बा पड़ा दिखाई दिया।

"शैफाली, यहां पर एक छोटा सा डिब्बा है, परंतु इस पर कोई 7 डिजिट वाला कोड लगा है।" कहते-कहते जेनिथ जमीन पर बैठ गई। उसकी साँस अब ज्यादा फूलने लगी थी।

जेनिथ की आवाज सुन सभी भागकर जेनिथ के पास आ गये।

“धत् तेरे की।” शैफाली ने गुस्साते हुए कहा- “इस बार कैश्वर ने 7 डिजिट का कोड दिया है, जिसे बिना उसका सही पासवर्ड जाने खोलना असंभव है और ऊपर से हमें साँस भी नहीं आ रही, ऐसे में इतने कम समय में कोड को ढूंढ पाना भी बहुत मुश्किल है।

शैफाली अब खतरे को पूरी तरह से भांप चुकी थी, इसलिये उसने कोड ढूंढने की जगह ऐलेक्स का हाथ पकड़ा और बोल उठी- “ऐलेक्स भैया, अब तुम ही हम सबकी आखिरी उम्मीद हो। अब मैं जो कह रही हूं, उसे आप ध्यान से सुनो। हम इतने कम समय में कोड को ढूंढ कर, इस लॉक को नहीं खोल पायेंगे, इसलिये हमें कोड ढूंढने की जगह पहले सभी के साँस लेने की व्यवस्था करनी होगी, नहीं तो हम सभी यहां पर मारे जायेंगे।

“अब अगर ऐसी स्थिति में हम नाक को नहीं खोल पा रहे हैं, तो कम से कम हमें मुंह को खोलना होगा। अगर कैश्वर के बनाये इस विशाल मानव का मुंह भी खुल गया, तो हमें साँस आने लगेगी। तो आप यहां से नाक के रास्ते मुंह में प्रवेश करो और कैसे भी करके इस मानव का मुंह खोल दो? लेकिन यह ध्यान रहे,.... कि आपके पास समय बहुत कम है।“ शैफाली ने यह कहकर ऐलेक्स को मुंह की ओर जाने का रास्ता बता दिया।

ऐलेक्स बिना देर किये, मुंह की ओर चल दिया। शैफाली के कहे अनुसार ऐलेक्स, जैसे ही एक रस्सी के सहारे नीचे उतरा, उसने स्वयं को उस विशाल कृत्रिम मानव के मुंह में पाया।

शैफाली सही कह रही थी, इस समय उस कृत्रिम मानव का मुंह भी बंद था।

“हे भगवान, इस राक्षस का मुंह अब कैसे खुलवाऊं?" ऐलेक्स मन ही मन बड़बड़ाया।

ऐलेक्स की नजरें अब तेजी से चारो ओर घूमने लगीं। पर ऐलेक्स को मुंह में कोई भी ऐसी चीज नहीं दिखाई दी, जिससे वह राक्षस का मुंह खुलवा सके।

धीरे-धीरे समय बीत रहा था और हर बीतते समय के साथ ऐलेक्स को अपने दोस्तों का ख्याल आ रहा था। उसे साफ महसूस हो रहा था कि उसके दोस्तों के प्राण संकट में हैं, उसे कुछ भी करके इस कृत्रिम मानव का मुंह खुलवाना ही होगा?

तभी ऐलेक्स की नजर उस कृत्रिम मानव के मुंह में स्थित एक दाँत की ओर गई। उस दाँत में एक जगह पर छोटा सा छेद दिखाई दे रहा था। यह देख ऐलेक्स की आँखों में खुशी साफ झलकने लगी।

“कैश्वर ने इतना बड़ा कृत्रिम मानव बनाया, पर उसे टूथपेस्ट नहीं दिया, अब देखो, इस बेचारे के दाँत में कीड़ा लग गया है।" यह सोच ऐलेक्स उस दाँत के पास पहुंचा और अपने जूते से दाँत के उसी स्थान पर तेज-तेज चोट मारने लगा।

ऐलेक्स का यह आइडिया काम कर गया। ऐलेक्स के चोट करने से उस कृत्रिम मानव के दाँत में दर्द होने लगा, जिससे वह मुंह खोलकर बुरी तरह से कराहने लगा।

यह देख ऐलेक्स पागलों की तरह से, उस स्थान पर कुछ चोट और मारने लगा। शायद ऐलेक्स उस कृत्रिम मानव को कैश्वर समझ अपनी भड़ास निकाल रहा था।

कुछ देर तक ऐसा करते रहने के बाद ऐलेक्स वापस नाक की ओर चल दिया। लेकिन उसने जाते-जाते भी ऐसा कर दिया था, कि कम से कम अब 2 घंटे तक उस कृत्रिम मानव ने अपना मुंह तो नहीं बंद करना था।

ऐलेक्स जब ऊपर नाक में पहुंचा, तब तक सभी ठीक नजर आने लगे थे।

ऐलक्स को देख क्रिस्टी ने दौड़कर ऐलेक्स को गले से लगा लिया। लगाती भी क्यों ना आखिर ऐलेक्स ने सभी की जान जो बचाई थी?

“इन दोनों का फिर शुरु हो गया।” जेनिथ ने मुस्कुराते हुए कहा- “आप चलिये कैप्टेन, इससे पहले कि यह कृत्रिम मानव फिर से अपना मुंह बंद करे, हमें नाक के छेद को खोलना ही होगा।"

जेनिथ की बात सुन ऐलेक्स और क्रिस्टी हड़बड़ाकर अलग हो गये और सभी के साथ, नाक के उस स्थान पर कोड को ढूंढने लगे।

कुछ देर तक उस स्थान पर कोड ढूंढने के बाद, तौफीक को दोनों नाक के बीच की दीवार (सेप्टम) पर कुछ नंबर्स लिखे दिखाई दिये, जो कि काफी धुंधले होने की वजह से सही से नजर नहीं आ रहे थे।

तौफीक ने हाथ से उस जगह को साफ किया, अब वह अंक साफ दिखाई देने लगे थे।

“शैफाली, जरा यहां आकर देखो, मुझे कुछ नंबर मिले हैं यहां पर?" तौफीक ने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हुए कहा।

तौफीक की बात सुन सभी भागकर तौफीक के पास पहुंच गये। अब उनकी सबकी नजरें सेप्टम पर लिखे उन अंकों पर थी।

वहां 4 लाइनों में कुल 32 अंक लिखे थे
0100 1110
0100 1111
0101 0011
0100 0101

“यह अंक तो सिर्फ 0 और 1 हैं और वह भी 32 फिर भला ये कोड कैसे हो सकते हैं?” सुयश ने कहा- “हमें तो 7 अंकों की जरूरत है डिब्बे के लिये।"

"कैप्टेन अंकल, यह बाइनरी कोड हैं, मैं इसे सॉल्व कर सकती हूं।" शैफाली ने कहा।

“ये बाइनरी कोड क्या होते हैं?" जेनिथ ने पूछा।

“कंम्प्यूटर की भाषा को बाइनरी नंबर्स कहते हैं, बाइनरी का मतलब होता है- 2 नंबर्स से मिलकर बनाई गई संख्या। जैसे हम जो गणित पढ़ते हैं, उसे डेसिमल नंबर्स (यानि की 10 अंकों की भाषा) कहते हैं। हम जब अपने कंम्प्यूटर पर कोई बटन दबाते हैं, तो कंम्प्यूटर अपने अंदर इन्हीं 2 नंबर्स से सारी कैलकुलेशन करता है।" यह कहकर शैफाली उन 4 लाइनों को डीकोड करने लगी।

कुछ देर तक ऐसे ही कुछ करते रहने के बाद उसने 4 अंग्रेजी के अक्षर, उन 4 लाइनों से निकाल लिये।

“कैप्टेन अंकल, पहली लाइन का मतलब N था, दूसरी लाइन का मतलब O था, तीसरी लाइन का S और चौथी का E था। इस प्रकार इन 4 लाइनों से मिलकर जो शब्द बना, वह NOSE है।” शैफाली ने कहा।

“पर NOSE तो अंग्रेजी शब्द है, इसमें 7 डिजिट का कोड कहां है?” क्रिस्टी ने शैफाली से पूछा।

“अगर हम अंग्रेजी की पूरी वर्णमाला को गणित के अंकों में बदल दें तो N=14, O=15, S=19 और E-5, यानि कि अब हमारे सामने जो गणित के अंक हैं, वह हैं1415195 और यह 7 अंक ही हैं। इसका साफ मतलब है कि डिब्बे का पासवर्ड यही अंक होंगे?” शैफाली ने कुछ ही पलों में इतनी मुश्किल पहेली को हल कर दिया।

इसे देख सभी शैफाली के दिमाग का लोहा मान गये।

शैफाली ने अब इन अंकों को डिब्बे के लॉक पर लगा दिया। पासवर्ड लगाते ही डिब्बे का लॉक खुल गया। डिब्बे में शटर का लीवर रखा था।

तौफीक ने उस लीवर को डिब्बे से निकाल, शटर के किनारे पर फंसा दिया और फिर धीरे-धीरे उस लीवर को घुमाकर शटर खोलने लगा।

कुछ ही देर में पूरा शटर खुल गया, पर शटर के खुलते ही एक तेज बदबू ने अंदर की ओर प्रवेश किया, पर उस बदबू को ऐलेक्स के सिवा कोई दूसरा सूंघ नहीं पाया।

“कैप्टेन इस हवा में तो बहुत बदबू भरी है, लगता है यह कृत्रिम मानव किसी कूड़ा घर में बैठा है?” ऐलेक्स ने अपनी नाक बंद करते हुए कहा।

“पर हमें तो कोई दुर्गंध नहीं आ रही ऐलेक्स?" सुयश ने अपनी नाक पर जोर देते हुए कहा।

पर इससे पहले कि कोई और किसी निष्कर्ष पर पहुंच पाता कि तभी नाक के छेद से हवा में तैरते, कुछ विशाल जीव भी अंदर आने लगे।

"सब अंदर की ओर भागो, नहीं तो यह विशाल जीव हमें खत्म कर देंगे।” सुयश ने चीखकर कहा- “हम इन्हें मार नहीं सकते।"

"रुक जाओ।” तभी शैफाली की आवाज सभी को सुनाई दी- “सब लोग कसकर कोई ना कोई चीज पकड़ लें, मैं इन जीवों को अभी बाहर निकालती हूं।" यह कहकर शैफाली ने नाक की दीवारों पर, अपने हाथ फिराकर धीरे-धीरे गुदगुदी करनी शुरु कर दी।

शैफाली के ऐसा करते ही, कृत्रिम मानव को बहुत तेज छींक आ गई और उसके फेफड़े से 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा बाहर निकली।

इस तेज हवा ने सभी जीवों को उड़ाकर नाक के बाहर निकाल दिया।

“वाह, क्या दिमाग लगाया है शैफाली ने?" जेनिथ ने शैफाली की तारीफ करते हुए कहा।

“वह सभी वायरस थे, जो नाक में बदबू के साथ प्रवेश कर रहे थे।" शैफाली ने कहा।

अब सभी शैफाली का इशारा पाकर अंदर की ओर चल पड़े। वह सभी नाक के अंदरी भाग में पहुंच गये थे।

यह एक विशाल कमरा था, जहां छत की ओर ऊपर एक टूथब्रश के आकार का झाड़ी नुमा पेड़ दिखाई दिया, जिसकी लताएं कमरे में कुछ ऊंचाई पर हवा में झूल रहीं थीं। वह लताएं, एक-दो नहीं बल्कि लाखों की संख्या में थीं।

“ऊपर मौजूद पेड़‘ओला फैक्ट्री बल्ब' है और नीचे लटक रही पेड़ की लताएं‘ओला फैक्ट्री नर्वस्' हैं, जब नाक में कोई भी गंध आती है, तो वह ओला फैक्ट्री नर्वस् के द्वारा सेंस करके, ओला फैक्ट्री बल्ब तक जाती हैं। ओला फैक्ट्री बल्ब इस गंध को इलेक्ट्रानिक सिग्नल के द्वारा, मस्तिष्क तक भेज देता है और मस्तिष्क उन इलेक्ट्रानिक सिग्नल को पहचान कर, हमें बता देते हैं कि वह गंध, किस चीज की है? इन्ही करोड़ों नर्वस के कारण, एक इंसानी शरीर 10,000 से भी ज्यादा गंध की पहचान कर सकता है।” शैफाली ने अपने ज्ञान का परिचय देते हुए कहा।

"हमारा शरीर कितना जटिल है, पता नहीं ईश्वर ने इसे किस प्रकार बनाया होगा?” क्रिस्टी ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा।

“ईश्वर ने हमारे शरीर को इस प्रकार बनाया है कि हमारे शरीर के सभी अंग, स्वयं का कार्य समझकर अपने आप में स्वयं बदलाव कर सकते हैं।" शैफाली ने कहा" इस प्रकार ये शरीर एक बार में नहीं बना, बल्कि करोड़ों बार स्वयं से परिवर्तित होकर इस आकार में आया है।

तभी सुयश ने भटक चुके यात्रियों को वापस गंतव्य की ओर लाते हुए कहा- “क्या अब हम वापस अपने कार्य के बारे में सोच सकते हैं।"

सुयश की बात सुन ऐलेक्स बोल उठा- “शैफाली ये बताओ कि जब नाक के अंदर हवा आयी, तो मुझे तो बदबू साफ महसूस हुई, पर तुममें से किसी को भी वो गंध महसूस नहीं हुई? ऐसा क्यों?"

“आपकी वशीन्द्रिय शक्ति की वजह से आप पर यहां के वातावरण का कोई असर नहीं हो रहा है।" शैफाली ने कहा- “आपने देखा नहीं कि नाक बंद होने के बाद भी आपको साँस लेने में किसी भी प्रकार से कोई परेशानी नहीं हो रही थी। लेकिन हमको बदबू का ना सूंघा पाना, ये बताता है कि इस कृत्रिम मानव की ओला फैक्ट्री में कोई परेशानी है, जिससे यह इलेक्ट्रानिक सिग्नल को मस्तिष्क तक नहीं भेज पा रहा है।
मुझे लगता है कि यही हमारा अगला कार्य भी है ओला फैक्ट्री बल्ब को सही करने का।....और इस कार्य को पूरा करने के लिये, हमें किसी प्रकार से ऊपर मौजूद उस पेड़ तक पहुंचना होगा।"

“पर कैसे?" क्रिस्टी ने कहा- “वह पेड़ की लताएं तो हमसे काफी ऊंचाई पर हैं, हम वहां तक पहुंचेगे कैसे?"

“पहुंच सकते हैं।” शैफाली ने कहा- “ऊपर की ओर देखो, छत के पास कुछ गोले हवा में तैर रहे हैं। यह गोले अवश्य ही हवा में मौजूद नन्हें कण हैं, जो नाक का द्वार खुलने पर अंदर घुसे थे। तो बस हमें फिर से इस कृत्रिम मानव के साँस अंदर खींचने का इंतजार करना होगा। जैसे ही हवा अंदर आयेगी, हवा के दबाव से यह कण नीचे की ओर आ जायेंगे, जो कि कुछ देर बाद फिर से ऊपर की ओर चले जायेंगे। हमें इन्हीं कणों के ऊपर बैठकर पेड़ की लताओं तक पहुंचना होगा।"

शैफाली के शब्द सुनकर सभी कृत्रिम मानव के साँस लेने का इंतजार करने लगे।

सभी ज्यादा देर तक इंतजार नहीं करना पड़ा, कुछ ही देर में कृत्रिम मानव ने साँस लेना शुरु कर दिया और इसी के साथ हवा में मौजूद कण हवा के दबाव से नीचे की ओर आने लगे।

कणों को नीचे आता देख सभी एक-एक कर, अलग-अलग कणों पर बैठ गये। बाहर से आयी हवा गले के पृष्ठ भाग से होती हुई फेफड़ों की ओर चली गई।

जैसे ही उस स्थान पर हवा का दबाव थोड़ा कम हुआ, वह कण सभी को लेकर ऊपर की ओर जाने लगे।

लताओं तक पहुंचते ही सभी ने एक-एक कर लताओं को पकड़ लिया और उस पर चढ़कर पेड़ के ऊपर की ओर आ गये।

पेड़ के ऊपर की ओर बहुत से तीर, हवा में ऐसे लटक रहे थे, जैसे कि वह तीर ना होकर इस पेड़ के फल हों।

उस ब्रशनुमा पेड़ के ऊपर आगे बढ़ने पर, सभी को एक स्थान पर, एक रबरबैंड के समान कोई छल्ला पेड़ के ऊपर, कसकर चिपका दिखाई दिया।

“यह छल्ला ही है असली परेशानी।” शैफाली ने छल्ले को देखते हुए कहा- “यह इतनी कसकर ओला फैक्ट्री बल्ब को जकड़े है कि इससे सिग्नल निकल ही नहीं सकते। हमें किसी भी प्रकार से इस छल्ले को यहां से हटाना होगा?"

शैफाली की बात सुन तौफीक अपनी जेब से चाकू निकालकर, उस रबरबैंड के छल्ले को काटने की कोशिश करने लगा।

पर 5 मिनट की कोशिश के बाद ही तौफीक समझ गया कि यह छल्ला इस चाकू से नहीं कटने वाला।

अब तौफीक उठकर शैफाली की ओर देखने लगा। पर शैफाली इस समय गहन सोच में पड़ी थी।

“कैप्टेन अंकल, हमारे पास इस रबरबैंड को काटने का हथियार नहीं है और बिना इसको हटाए इलेक्ट्रानिक सिग्नल आगे भी नहीं जायेंगे, पर अगर हम सब मिलकर अपनी पूरी ताकत लगाएं, तो इस रबरबैंड के छल्ले को थोड़ा आगे की ओर खींच सकते हैं। ऐसी स्थिति में चाहे कुछ देर के लिये ही सही, पर ओला फैक्ट्री बल्ब अपने सिग्नल आगे भेजने में सफल हो जायेगा। हो सकता है कि उसके सिग्नल भेजते ही इस द्वार का कार्य समाप्त हो जाये? हां पर हमें एक चीज का ध्यान अवश्य रखना है कि ओला फैक्ट्री बल्ब के सिग्नल कहीं उस पर लटके तीर ना हों। अगर ऐसा हुआ, तो वह बहुत तेजी से हमारी ओर आयेंगे, इसलिये हमको उन तीरों से पहले से ही सावधान रहना होगा।“

सभी ने सहमति से सिर हिलाया और घूमकर इस प्रकार खड़े हो गये, जिससे उन्हें पेड़ पर लटके तीर साफ दिखाई दे रहे थे।

अब सभी ने अपनी पूरी ताकत लगाकर एक साथ, उस रबरबैंड को अपनी ओर खींचना शुरु कर दिया।

उन सभी के सम्मिलित प्रयासों से रबर का छल्ला थोड़ा सा खिंचकर उनकी ओर आ गया।

इसी के साथ ही उस पेड़ पर लटका एक तीर तेजी से उनकी ओर लपका, परंतु शैफाली के द्वारा पहले से ही सावधान किये जाने की वजह से, किसी को कोई नुकसान नहीं हुआ।

पर उस तीर का निशाना वह लोग नहीं बल्कि वह रबर का छल्ला था। तीर तेजी से आकर रबर के छल्ले से टकराया और उसे काटता हुआ, दूसरी ओर चला गया। यह देख सभी खुशी से भर उठे।


“शैफाली ने सही कहा था कि शरीर अपना उपचार स्वयं से करना जानता है।” सुयश ने कहा।

तभी पेड़ पर लटके अन्य कई तीर हवा में होते हुए एक दिशा की ओर चले गए।

“ओला फैक्ट्री बल्ब से इलेक्ट्रानिक सिग्नल जाने लगे हैं, पर फिर भी यह द्वार पार नहीं हुआ, इसका मतलब हमें स्वयं भी उन सिग्नल के सहारे आगे तक जाना होगा।" शैफाली ने कहा।

अब तीरों का छूटना बंद हो गया था और पेड़ पर नये तीर उग आये थे।

"हम सभी को एक-एक तीर पकड़कर उससे लटकना होगा।” शैफाली ने कहा- “जैसे ही ओला फैक्ट्री बल्ब दोबारा से सिग्नल भेजेगा, हम उस तीर को पकड़कर आगे की ओर चले जायेंगे।"

शैफाली की बात सुन, सभी एक-एक तीर पकड़कर लटक गए। उन्हें सिग्नल के लिये ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ा, कुछ देर बाद ही सभी तीर से लटके हुए आगे की ओर जा रहे थे।

आगे एक स्थान पर उन्हें एक विशाल दीवार दिखाई दी, जिसमें असंख्य सुराख नजर आ रहे थे।

सभी तीर उस सुराख से ही अंदर जा रहे थे। उस सुराख के आगे जमीन पर एक बड़ा सा प्लेटफार्म बना था।

"हमें आगे आने वाले उस प्लेटफार्म पर ही कूदना होगा।” सुयश ने सभी से चिल्लाकर कहा- “अगर हम दीवार से टकराए, तो हमें गंभीर चोट आ सकती है।"

अब सभी उस प्लेटफार्म के पास पहुंचकर एक-एक कर उस पर कूद गये।

उस प्लेटफार्म के दूसरी ओर एक द्वार था, जिस पर लिखा था- “तिलिस्मा द्वार संख्या 5.3"

सभी समझ गये कि यह द्वार पार हो चुका है। अतः सभी धीरे-धीरे उस द्वार के पार निकल गये।

जारी रहेगा_____✍️
Lovely update brother!

Shefali and Suyash team dhire dhire har ek mushkil ko paar kar har ek tilism ko paar kar apni manzil ki aur ja rahe hain, Kaikaishwar bhale hi khud ko god samajh raha ho, magar uska gyan bhi Shefali and uski team ke aage dhire dhire kam padta nazar aa raha hai.
 

Iron Man

Try and fail. But never give up trying
45,977
123,939
304
#193.

चैपटर-6
प्राणवायु:
(तिलिस्मा 5.2)

सुयश सहित सभी लैक्राइमल पंक्टा से होते हुए नाक के अंदर पहुंच गये थे। सभी के सामने अब 2 लंबी सुरंगें दिखाई दे रहीं थीं।

“ये दोनों सुरंगें नाक के दोनों छेद लग रहे हैं?" क्रिस्टी ने कहा- “पर यहां पर इतना दम क्यों घुट रहा है? ऐसा लग रहा है कि जैसे यहां शुद्ध हवा है ही नहीं।"

"क्रिस्टी सही कह रही है, यहां पर शुद्ध हवा नहीं है, मेरा भी यहां पर दम घुट रहा है।” सुयश ने तेज-तेज साँस लेने की कोशिश करते हुए कहा।

"मुझे लग रहा है कि हम जहां खड़े हैं, इस नाक के दोनों छेद बुरी तरह से बंद हैं, जिसकी वजह से हम यहां पर साँस नहीं ले पा रहे हैं।" शैफाली ने कहा- “हमें जल्द से जल्द इस नाक के छेद को खोलना होगा, नहीं तो हमारा दम यहां पर घुट जायेगा।

“मैं इस जगह पर भी ठीक से साँस ले पा रहा हूं। ऐलेक्स ने कहा- “शायद यह मेरी वशीन्द्रिय शक्ति के कारण हो रहा है।"

"मुझे लगता है कि हमें बिना एक सेकेण्ड गंवाए, पहले इन नासट्रिल्स (नाक के दोनो छेद) को खोलना होगा।" जेनिथ ने भी गहरी-गहरी साँस लेते हुए कहा।

जेनिथ की बात सुन सभी, एक सुरंग के अंदर की ओर तेजी से चल दिये।
जब वह सुरंग के आखिरी छोर पर पहुंचे, तो उन्हें सुरंग के मुहाने पर, एक शटर लगा दिखाई दिया।

उस शटर को उठाने के लिये, एक हैंडिल की जरुरत थी, जो उनके पास नहीं था।

"कैप्टेन अंकल, बिना शटर के हैंडिल के हम नाक को नहीं खोल पायेंगे।” शैफाली ने इधर-उधर देखते हुए कहा- “मुझे लगता है कि शटर का हैंडिल आसपास ही कहीं होना चाहिये?"

शैफाली के साथ अब सभी तेजी से अपने आसपास देखने लगे। तभी जेनिथ को एक पत्थर के पीछे, एक छोटा सा धातु का डिब्बा पड़ा दिखाई दिया।

"शैफाली, यहां पर एक छोटा सा डिब्बा है, परंतु इस पर कोई 7 डिजिट वाला कोड लगा है।" कहते-कहते जेनिथ जमीन पर बैठ गई। उसकी साँस अब ज्यादा फूलने लगी थी।

जेनिथ की आवाज सुन सभी भागकर जेनिथ के पास आ गये।

“धत् तेरे की।” शैफाली ने गुस्साते हुए कहा- “इस बार कैश्वर ने 7 डिजिट का कोड दिया है, जिसे बिना उसका सही पासवर्ड जाने खोलना असंभव है और ऊपर से हमें साँस भी नहीं आ रही, ऐसे में इतने कम समय में कोड को ढूंढ पाना भी बहुत मुश्किल है।

शैफाली अब खतरे को पूरी तरह से भांप चुकी थी, इसलिये उसने कोड ढूंढने की जगह ऐलेक्स का हाथ पकड़ा और बोल उठी- “ऐलेक्स भैया, अब तुम ही हम सबकी आखिरी उम्मीद हो। अब मैं जो कह रही हूं, उसे आप ध्यान से सुनो। हम इतने कम समय में कोड को ढूंढ कर, इस लॉक को नहीं खोल पायेंगे, इसलिये हमें कोड ढूंढने की जगह पहले सभी के साँस लेने की व्यवस्था करनी होगी, नहीं तो हम सभी यहां पर मारे जायेंगे।

“अब अगर ऐसी स्थिति में हम नाक को नहीं खोल पा रहे हैं, तो कम से कम हमें मुंह को खोलना होगा। अगर कैश्वर के बनाये इस विशाल मानव का मुंह भी खुल गया, तो हमें साँस आने लगेगी। तो आप यहां से नाक के रास्ते मुंह में प्रवेश करो और कैसे भी करके इस मानव का मुंह खोल दो? लेकिन यह ध्यान रहे,.... कि आपके पास समय बहुत कम है।“ शैफाली ने यह कहकर ऐलेक्स को मुंह की ओर जाने का रास्ता बता दिया।

ऐलेक्स बिना देर किये, मुंह की ओर चल दिया। शैफाली के कहे अनुसार ऐलेक्स, जैसे ही एक रस्सी के सहारे नीचे उतरा, उसने स्वयं को उस विशाल कृत्रिम मानव के मुंह में पाया।

शैफाली सही कह रही थी, इस समय उस कृत्रिम मानव का मुंह भी बंद था।

“हे भगवान, इस राक्षस का मुंह अब कैसे खुलवाऊं?" ऐलेक्स मन ही मन बड़बड़ाया।

ऐलेक्स की नजरें अब तेजी से चारो ओर घूमने लगीं। पर ऐलेक्स को मुंह में कोई भी ऐसी चीज नहीं दिखाई दी, जिससे वह राक्षस का मुंह खुलवा सके।

धीरे-धीरे समय बीत रहा था और हर बीतते समय के साथ ऐलेक्स को अपने दोस्तों का ख्याल आ रहा था। उसे साफ महसूस हो रहा था कि उसके दोस्तों के प्राण संकट में हैं, उसे कुछ भी करके इस कृत्रिम मानव का मुंह खुलवाना ही होगा?

तभी ऐलेक्स की नजर उस कृत्रिम मानव के मुंह में स्थित एक दाँत की ओर गई। उस दाँत में एक जगह पर छोटा सा छेद दिखाई दे रहा था। यह देख ऐलेक्स की आँखों में खुशी साफ झलकने लगी।

“कैश्वर ने इतना बड़ा कृत्रिम मानव बनाया, पर उसे टूथपेस्ट नहीं दिया, अब देखो, इस बेचारे के दाँत में कीड़ा लग गया है।" यह सोच ऐलेक्स उस दाँत के पास पहुंचा और अपने जूते से दाँत के उसी स्थान पर तेज-तेज चोट मारने लगा।

ऐलेक्स का यह आइडिया काम कर गया। ऐलेक्स के चोट करने से उस कृत्रिम मानव के दाँत में दर्द होने लगा, जिससे वह मुंह खोलकर बुरी तरह से कराहने लगा।

यह देख ऐलेक्स पागलों की तरह से, उस स्थान पर कुछ चोट और मारने लगा। शायद ऐलेक्स उस कृत्रिम मानव को कैश्वर समझ अपनी भड़ास निकाल रहा था।

कुछ देर तक ऐसा करते रहने के बाद ऐलेक्स वापस नाक की ओर चल दिया। लेकिन उसने जाते-जाते भी ऐसा कर दिया था, कि कम से कम अब 2 घंटे तक उस कृत्रिम मानव ने अपना मुंह तो नहीं बंद करना था।

ऐलेक्स जब ऊपर नाक में पहुंचा, तब तक सभी ठीक नजर आने लगे थे।

ऐलक्स को देख क्रिस्टी ने दौड़कर ऐलेक्स को गले से लगा लिया। लगाती भी क्यों ना आखिर ऐलेक्स ने सभी की जान जो बचाई थी?

“इन दोनों का फिर शुरु हो गया।” जेनिथ ने मुस्कुराते हुए कहा- “आप चलिये कैप्टेन, इससे पहले कि यह कृत्रिम मानव फिर से अपना मुंह बंद करे, हमें नाक के छेद को खोलना ही होगा।"

जेनिथ की बात सुन ऐलेक्स और क्रिस्टी हड़बड़ाकर अलग हो गये और सभी के साथ, नाक के उस स्थान पर कोड को ढूंढने लगे।

कुछ देर तक उस स्थान पर कोड ढूंढने के बाद, तौफीक को दोनों नाक के बीच की दीवार (सेप्टम) पर कुछ नंबर्स लिखे दिखाई दिये, जो कि काफी धुंधले होने की वजह से सही से नजर नहीं आ रहे थे।

तौफीक ने हाथ से उस जगह को साफ किया, अब वह अंक साफ दिखाई देने लगे थे।

“शैफाली, जरा यहां आकर देखो, मुझे कुछ नंबर मिले हैं यहां पर?" तौफीक ने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हुए कहा।

तौफीक की बात सुन सभी भागकर तौफीक के पास पहुंच गये। अब उनकी सबकी नजरें सेप्टम पर लिखे उन अंकों पर थी।

वहां 4 लाइनों में कुल 32 अंक लिखे थे
0100 1110
0100 1111
0101 0011
0100 0101

“यह अंक तो सिर्फ 0 और 1 हैं और वह भी 32 फिर भला ये कोड कैसे हो सकते हैं?” सुयश ने कहा- “हमें तो 7 अंकों की जरूरत है डिब्बे के लिये।"

"कैप्टेन अंकल, यह बाइनरी कोड हैं, मैं इसे सॉल्व कर सकती हूं।" शैफाली ने कहा।

“ये बाइनरी कोड क्या होते हैं?" जेनिथ ने पूछा।

“कंम्प्यूटर की भाषा को बाइनरी नंबर्स कहते हैं, बाइनरी का मतलब होता है- 2 नंबर्स से मिलकर बनाई गई संख्या। जैसे हम जो गणित पढ़ते हैं, उसे डेसिमल नंबर्स (यानि की 10 अंकों की भाषा) कहते हैं। हम जब अपने कंम्प्यूटर पर कोई बटन दबाते हैं, तो कंम्प्यूटर अपने अंदर इन्हीं 2 नंबर्स से सारी कैलकुलेशन करता है।" यह कहकर शैफाली उन 4 लाइनों को डीकोड करने लगी।

कुछ देर तक ऐसे ही कुछ करते रहने के बाद उसने 4 अंग्रेजी के अक्षर, उन 4 लाइनों से निकाल लिये।

“कैप्टेन अंकल, पहली लाइन का मतलब N था, दूसरी लाइन का मतलब O था, तीसरी लाइन का S और चौथी का E था। इस प्रकार इन 4 लाइनों से मिलकर जो शब्द बना, वह NOSE है।” शैफाली ने कहा।

“पर NOSE तो अंग्रेजी शब्द है, इसमें 7 डिजिट का कोड कहां है?” क्रिस्टी ने शैफाली से पूछा।

“अगर हम अंग्रेजी की पूरी वर्णमाला को गणित के अंकों में बदल दें तो N=14, O=15, S=19 और E-5, यानि कि अब हमारे सामने जो गणित के अंक हैं, वह हैं1415195 और यह 7 अंक ही हैं। इसका साफ मतलब है कि डिब्बे का पासवर्ड यही अंक होंगे?” शैफाली ने कुछ ही पलों में इतनी मुश्किल पहेली को हल कर दिया।

इसे देख सभी शैफाली के दिमाग का लोहा मान गये।

शैफाली ने अब इन अंकों को डिब्बे के लॉक पर लगा दिया। पासवर्ड लगाते ही डिब्बे का लॉक खुल गया। डिब्बे में शटर का लीवर रखा था।

तौफीक ने उस लीवर को डिब्बे से निकाल, शटर के किनारे पर फंसा दिया और फिर धीरे-धीरे उस लीवर को घुमाकर शटर खोलने लगा।

कुछ ही देर में पूरा शटर खुल गया, पर शटर के खुलते ही एक तेज बदबू ने अंदर की ओर प्रवेश किया, पर उस बदबू को ऐलेक्स के सिवा कोई दूसरा सूंघ नहीं पाया।

“कैप्टेन इस हवा में तो बहुत बदबू भरी है, लगता है यह कृत्रिम मानव किसी कूड़ा घर में बैठा है?” ऐलेक्स ने अपनी नाक बंद करते हुए कहा।

“पर हमें तो कोई दुर्गंध नहीं आ रही ऐलेक्स?" सुयश ने अपनी नाक पर जोर देते हुए कहा।

पर इससे पहले कि कोई और किसी निष्कर्ष पर पहुंच पाता कि तभी नाक के छेद से हवा में तैरते, कुछ विशाल जीव भी अंदर आने लगे।

"सब अंदर की ओर भागो, नहीं तो यह विशाल जीव हमें खत्म कर देंगे।” सुयश ने चीखकर कहा- “हम इन्हें मार नहीं सकते।"

"रुक जाओ।” तभी शैफाली की आवाज सभी को सुनाई दी- “सब लोग कसकर कोई ना कोई चीज पकड़ लें, मैं इन जीवों को अभी बाहर निकालती हूं।" यह कहकर शैफाली ने नाक की दीवारों पर, अपने हाथ फिराकर धीरे-धीरे गुदगुदी करनी शुरु कर दी।

शैफाली के ऐसा करते ही, कृत्रिम मानव को बहुत तेज छींक आ गई और उसके फेफड़े से 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा बाहर निकली।

इस तेज हवा ने सभी जीवों को उड़ाकर नाक के बाहर निकाल दिया।

“वाह, क्या दिमाग लगाया है शैफाली ने?" जेनिथ ने शैफाली की तारीफ करते हुए कहा।

“वह सभी वायरस थे, जो नाक में बदबू के साथ प्रवेश कर रहे थे।" शैफाली ने कहा।

अब सभी शैफाली का इशारा पाकर अंदर की ओर चल पड़े। वह सभी नाक के अंदरी भाग में पहुंच गये थे।

यह एक विशाल कमरा था, जहां छत की ओर ऊपर एक टूथब्रश के आकार का झाड़ी नुमा पेड़ दिखाई दिया, जिसकी लताएं कमरे में कुछ ऊंचाई पर हवा में झूल रहीं थीं। वह लताएं, एक-दो नहीं बल्कि लाखों की संख्या में थीं।

“ऊपर मौजूद पेड़‘ओला फैक्ट्री बल्ब' है और नीचे लटक रही पेड़ की लताएं‘ओला फैक्ट्री नर्वस्' हैं, जब नाक में कोई भी गंध आती है, तो वह ओला फैक्ट्री नर्वस् के द्वारा सेंस करके, ओला फैक्ट्री बल्ब तक जाती हैं। ओला फैक्ट्री बल्ब इस गंध को इलेक्ट्रानिक सिग्नल के द्वारा, मस्तिष्क तक भेज देता है और मस्तिष्क उन इलेक्ट्रानिक सिग्नल को पहचान कर, हमें बता देते हैं कि वह गंध, किस चीज की है? इन्ही करोड़ों नर्वस के कारण, एक इंसानी शरीर 10,000 से भी ज्यादा गंध की पहचान कर सकता है।” शैफाली ने अपने ज्ञान का परिचय देते हुए कहा।

"हमारा शरीर कितना जटिल है, पता नहीं ईश्वर ने इसे किस प्रकार बनाया होगा?” क्रिस्टी ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा।

“ईश्वर ने हमारे शरीर को इस प्रकार बनाया है कि हमारे शरीर के सभी अंग, स्वयं का कार्य समझकर अपने आप में स्वयं बदलाव कर सकते हैं।" शैफाली ने कहा" इस प्रकार ये शरीर एक बार में नहीं बना, बल्कि करोड़ों बार स्वयं से परिवर्तित होकर इस आकार में आया है।

तभी सुयश ने भटक चुके यात्रियों को वापस गंतव्य की ओर लाते हुए कहा- “क्या अब हम वापस अपने कार्य के बारे में सोच सकते हैं।"

सुयश की बात सुन ऐलेक्स बोल उठा- “शैफाली ये बताओ कि जब नाक के अंदर हवा आयी, तो मुझे तो बदबू साफ महसूस हुई, पर तुममें से किसी को भी वो गंध महसूस नहीं हुई? ऐसा क्यों?"

“आपकी वशीन्द्रिय शक्ति की वजह से आप पर यहां के वातावरण का कोई असर नहीं हो रहा है।" शैफाली ने कहा- “आपने देखा नहीं कि नाक बंद होने के बाद भी आपको साँस लेने में किसी भी प्रकार से कोई परेशानी नहीं हो रही थी। लेकिन हमको बदबू का ना सूंघा पाना, ये बताता है कि इस कृत्रिम मानव की ओला फैक्ट्री में कोई परेशानी है, जिससे यह इलेक्ट्रानिक सिग्नल को मस्तिष्क तक नहीं भेज पा रहा है।
मुझे लगता है कि यही हमारा अगला कार्य भी है ओला फैक्ट्री बल्ब को सही करने का।....और इस कार्य को पूरा करने के लिये, हमें किसी प्रकार से ऊपर मौजूद उस पेड़ तक पहुंचना होगा।"

“पर कैसे?" क्रिस्टी ने कहा- “वह पेड़ की लताएं तो हमसे काफी ऊंचाई पर हैं, हम वहां तक पहुंचेगे कैसे?"

“पहुंच सकते हैं।” शैफाली ने कहा- “ऊपर की ओर देखो, छत के पास कुछ गोले हवा में तैर रहे हैं। यह गोले अवश्य ही हवा में मौजूद नन्हें कण हैं, जो नाक का द्वार खुलने पर अंदर घुसे थे। तो बस हमें फिर से इस कृत्रिम मानव के साँस अंदर खींचने का इंतजार करना होगा। जैसे ही हवा अंदर आयेगी, हवा के दबाव से यह कण नीचे की ओर आ जायेंगे, जो कि कुछ देर बाद फिर से ऊपर की ओर चले जायेंगे। हमें इन्हीं कणों के ऊपर बैठकर पेड़ की लताओं तक पहुंचना होगा।"

शैफाली के शब्द सुनकर सभी कृत्रिम मानव के साँस लेने का इंतजार करने लगे।

सभी ज्यादा देर तक इंतजार नहीं करना पड़ा, कुछ ही देर में कृत्रिम मानव ने साँस लेना शुरु कर दिया और इसी के साथ हवा में मौजूद कण हवा के दबाव से नीचे की ओर आने लगे।

कणों को नीचे आता देख सभी एक-एक कर, अलग-अलग कणों पर बैठ गये। बाहर से आयी हवा गले के पृष्ठ भाग से होती हुई फेफड़ों की ओर चली गई।

जैसे ही उस स्थान पर हवा का दबाव थोड़ा कम हुआ, वह कण सभी को लेकर ऊपर की ओर जाने लगे।

लताओं तक पहुंचते ही सभी ने एक-एक कर लताओं को पकड़ लिया और उस पर चढ़कर पेड़ के ऊपर की ओर आ गये।

पेड़ के ऊपर की ओर बहुत से तीर, हवा में ऐसे लटक रहे थे, जैसे कि वह तीर ना होकर इस पेड़ के फल हों।

उस ब्रशनुमा पेड़ के ऊपर आगे बढ़ने पर, सभी को एक स्थान पर, एक रबरबैंड के समान कोई छल्ला पेड़ के ऊपर, कसकर चिपका दिखाई दिया।

“यह छल्ला ही है असली परेशानी।” शैफाली ने छल्ले को देखते हुए कहा- “यह इतनी कसकर ओला फैक्ट्री बल्ब को जकड़े है कि इससे सिग्नल निकल ही नहीं सकते। हमें किसी भी प्रकार से इस छल्ले को यहां से हटाना होगा?"

शैफाली की बात सुन तौफीक अपनी जेब से चाकू निकालकर, उस रबरबैंड के छल्ले को काटने की कोशिश करने लगा।

पर 5 मिनट की कोशिश के बाद ही तौफीक समझ गया कि यह छल्ला इस चाकू से नहीं कटने वाला।

अब तौफीक उठकर शैफाली की ओर देखने लगा। पर शैफाली इस समय गहन सोच में पड़ी थी।

“कैप्टेन अंकल, हमारे पास इस रबरबैंड को काटने का हथियार नहीं है और बिना इसको हटाए इलेक्ट्रानिक सिग्नल आगे भी नहीं जायेंगे, पर अगर हम सब मिलकर अपनी पूरी ताकत लगाएं, तो इस रबरबैंड के छल्ले को थोड़ा आगे की ओर खींच सकते हैं। ऐसी स्थिति में चाहे कुछ देर के लिये ही सही, पर ओला फैक्ट्री बल्ब अपने सिग्नल आगे भेजने में सफल हो जायेगा। हो सकता है कि उसके सिग्नल भेजते ही इस द्वार का कार्य समाप्त हो जाये? हां पर हमें एक चीज का ध्यान अवश्य रखना है कि ओला फैक्ट्री बल्ब के सिग्नल कहीं उस पर लटके तीर ना हों। अगर ऐसा हुआ, तो वह बहुत तेजी से हमारी ओर आयेंगे, इसलिये हमको उन तीरों से पहले से ही सावधान रहना होगा।“

सभी ने सहमति से सिर हिलाया और घूमकर इस प्रकार खड़े हो गये, जिससे उन्हें पेड़ पर लटके तीर साफ दिखाई दे रहे थे।

अब सभी ने अपनी पूरी ताकत लगाकर एक साथ, उस रबरबैंड को अपनी ओर खींचना शुरु कर दिया।

उन सभी के सम्मिलित प्रयासों से रबर का छल्ला थोड़ा सा खिंचकर उनकी ओर आ गया।

इसी के साथ ही उस पेड़ पर लटका एक तीर तेजी से उनकी ओर लपका, परंतु शैफाली के द्वारा पहले से ही सावधान किये जाने की वजह से, किसी को कोई नुकसान नहीं हुआ।

पर उस तीर का निशाना वह लोग नहीं बल्कि वह रबर का छल्ला था। तीर तेजी से आकर रबर के छल्ले से टकराया और उसे काटता हुआ, दूसरी ओर चला गया। यह देख सभी खुशी से भर उठे।


“शैफाली ने सही कहा था कि शरीर अपना उपचार स्वयं से करना जानता है।” सुयश ने कहा।

तभी पेड़ पर लटके अन्य कई तीर हवा में होते हुए एक दिशा की ओर चले गए।

“ओला फैक्ट्री बल्ब से इलेक्ट्रानिक सिग्नल जाने लगे हैं, पर फिर भी यह द्वार पार नहीं हुआ, इसका मतलब हमें स्वयं भी उन सिग्नल के सहारे आगे तक जाना होगा।" शैफाली ने कहा।

अब तीरों का छूटना बंद हो गया था और पेड़ पर नये तीर उग आये थे।

"हम सभी को एक-एक तीर पकड़कर उससे लटकना होगा।” शैफाली ने कहा- “जैसे ही ओला फैक्ट्री बल्ब दोबारा से सिग्नल भेजेगा, हम उस तीर को पकड़कर आगे की ओर चले जायेंगे।"

शैफाली की बात सुन, सभी एक-एक तीर पकड़कर लटक गए। उन्हें सिग्नल के लिये ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ा, कुछ देर बाद ही सभी तीर से लटके हुए आगे की ओर जा रहे थे।

आगे एक स्थान पर उन्हें एक विशाल दीवार दिखाई दी, जिसमें असंख्य सुराख नजर आ रहे थे।

सभी तीर उस सुराख से ही अंदर जा रहे थे। उस सुराख के आगे जमीन पर एक बड़ा सा प्लेटफार्म बना था।

"हमें आगे आने वाले उस प्लेटफार्म पर ही कूदना होगा।” सुयश ने सभी से चिल्लाकर कहा- “अगर हम दीवार से टकराए, तो हमें गंभीर चोट आ सकती है।"

अब सभी उस प्लेटफार्म के पास पहुंचकर एक-एक कर उस पर कूद गये।

उस प्लेटफार्म के दूसरी ओर एक द्वार था, जिस पर लिखा था- “तिलिस्मा द्वार संख्या 5.3"

सभी समझ गये कि यह द्वार पार हो चुका है। अतः सभी धीरे-धीरे उस द्वार के पार निकल गये।

जारी रहेगा_____✍️
Shaandar update
 

Dhakad boy

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#193.

चैपटर-6
प्राणवायु:
(तिलिस्मा 5.2)

सुयश सहित सभी लैक्राइमल पंक्टा से होते हुए नाक के अंदर पहुंच गये थे। सभी के सामने अब 2 लंबी सुरंगें दिखाई दे रहीं थीं।

“ये दोनों सुरंगें नाक के दोनों छेद लग रहे हैं?" क्रिस्टी ने कहा- “पर यहां पर इतना दम क्यों घुट रहा है? ऐसा लग रहा है कि जैसे यहां शुद्ध हवा है ही नहीं।"

"क्रिस्टी सही कह रही है, यहां पर शुद्ध हवा नहीं है, मेरा भी यहां पर दम घुट रहा है।” सुयश ने तेज-तेज साँस लेने की कोशिश करते हुए कहा।

"मुझे लग रहा है कि हम जहां खड़े हैं, इस नाक के दोनों छेद बुरी तरह से बंद हैं, जिसकी वजह से हम यहां पर साँस नहीं ले पा रहे हैं।" शैफाली ने कहा- “हमें जल्द से जल्द इस नाक के छेद को खोलना होगा, नहीं तो हमारा दम यहां पर घुट जायेगा।

“मैं इस जगह पर भी ठीक से साँस ले पा रहा हूं। ऐलेक्स ने कहा- “शायद यह मेरी वशीन्द्रिय शक्ति के कारण हो रहा है।"

"मुझे लगता है कि हमें बिना एक सेकेण्ड गंवाए, पहले इन नासट्रिल्स (नाक के दोनो छेद) को खोलना होगा।" जेनिथ ने भी गहरी-गहरी साँस लेते हुए कहा।

जेनिथ की बात सुन सभी, एक सुरंग के अंदर की ओर तेजी से चल दिये।
जब वह सुरंग के आखिरी छोर पर पहुंचे, तो उन्हें सुरंग के मुहाने पर, एक शटर लगा दिखाई दिया।

उस शटर को उठाने के लिये, एक हैंडिल की जरुरत थी, जो उनके पास नहीं था।

"कैप्टेन अंकल, बिना शटर के हैंडिल के हम नाक को नहीं खोल पायेंगे।” शैफाली ने इधर-उधर देखते हुए कहा- “मुझे लगता है कि शटर का हैंडिल आसपास ही कहीं होना चाहिये?"

शैफाली के साथ अब सभी तेजी से अपने आसपास देखने लगे। तभी जेनिथ को एक पत्थर के पीछे, एक छोटा सा धातु का डिब्बा पड़ा दिखाई दिया।

"शैफाली, यहां पर एक छोटा सा डिब्बा है, परंतु इस पर कोई 7 डिजिट वाला कोड लगा है।" कहते-कहते जेनिथ जमीन पर बैठ गई। उसकी साँस अब ज्यादा फूलने लगी थी।

जेनिथ की आवाज सुन सभी भागकर जेनिथ के पास आ गये।

“धत् तेरे की।” शैफाली ने गुस्साते हुए कहा- “इस बार कैश्वर ने 7 डिजिट का कोड दिया है, जिसे बिना उसका सही पासवर्ड जाने खोलना असंभव है और ऊपर से हमें साँस भी नहीं आ रही, ऐसे में इतने कम समय में कोड को ढूंढ पाना भी बहुत मुश्किल है।

शैफाली अब खतरे को पूरी तरह से भांप चुकी थी, इसलिये उसने कोड ढूंढने की जगह ऐलेक्स का हाथ पकड़ा और बोल उठी- “ऐलेक्स भैया, अब तुम ही हम सबकी आखिरी उम्मीद हो। अब मैं जो कह रही हूं, उसे आप ध्यान से सुनो। हम इतने कम समय में कोड को ढूंढ कर, इस लॉक को नहीं खोल पायेंगे, इसलिये हमें कोड ढूंढने की जगह पहले सभी के साँस लेने की व्यवस्था करनी होगी, नहीं तो हम सभी यहां पर मारे जायेंगे।

“अब अगर ऐसी स्थिति में हम नाक को नहीं खोल पा रहे हैं, तो कम से कम हमें मुंह को खोलना होगा। अगर कैश्वर के बनाये इस विशाल मानव का मुंह भी खुल गया, तो हमें साँस आने लगेगी। तो आप यहां से नाक के रास्ते मुंह में प्रवेश करो और कैसे भी करके इस मानव का मुंह खोल दो? लेकिन यह ध्यान रहे,.... कि आपके पास समय बहुत कम है।“ शैफाली ने यह कहकर ऐलेक्स को मुंह की ओर जाने का रास्ता बता दिया।

ऐलेक्स बिना देर किये, मुंह की ओर चल दिया। शैफाली के कहे अनुसार ऐलेक्स, जैसे ही एक रस्सी के सहारे नीचे उतरा, उसने स्वयं को उस विशाल कृत्रिम मानव के मुंह में पाया।

शैफाली सही कह रही थी, इस समय उस कृत्रिम मानव का मुंह भी बंद था।

“हे भगवान, इस राक्षस का मुंह अब कैसे खुलवाऊं?" ऐलेक्स मन ही मन बड़बड़ाया।

ऐलेक्स की नजरें अब तेजी से चारो ओर घूमने लगीं। पर ऐलेक्स को मुंह में कोई भी ऐसी चीज नहीं दिखाई दी, जिससे वह राक्षस का मुंह खुलवा सके।

धीरे-धीरे समय बीत रहा था और हर बीतते समय के साथ ऐलेक्स को अपने दोस्तों का ख्याल आ रहा था। उसे साफ महसूस हो रहा था कि उसके दोस्तों के प्राण संकट में हैं, उसे कुछ भी करके इस कृत्रिम मानव का मुंह खुलवाना ही होगा?

तभी ऐलेक्स की नजर उस कृत्रिम मानव के मुंह में स्थित एक दाँत की ओर गई। उस दाँत में एक जगह पर छोटा सा छेद दिखाई दे रहा था। यह देख ऐलेक्स की आँखों में खुशी साफ झलकने लगी।

“कैश्वर ने इतना बड़ा कृत्रिम मानव बनाया, पर उसे टूथपेस्ट नहीं दिया, अब देखो, इस बेचारे के दाँत में कीड़ा लग गया है।" यह सोच ऐलेक्स उस दाँत के पास पहुंचा और अपने जूते से दाँत के उसी स्थान पर तेज-तेज चोट मारने लगा।

ऐलेक्स का यह आइडिया काम कर गया। ऐलेक्स के चोट करने से उस कृत्रिम मानव के दाँत में दर्द होने लगा, जिससे वह मुंह खोलकर बुरी तरह से कराहने लगा।

यह देख ऐलेक्स पागलों की तरह से, उस स्थान पर कुछ चोट और मारने लगा। शायद ऐलेक्स उस कृत्रिम मानव को कैश्वर समझ अपनी भड़ास निकाल रहा था।

कुछ देर तक ऐसा करते रहने के बाद ऐलेक्स वापस नाक की ओर चल दिया। लेकिन उसने जाते-जाते भी ऐसा कर दिया था, कि कम से कम अब 2 घंटे तक उस कृत्रिम मानव ने अपना मुंह तो नहीं बंद करना था।

ऐलेक्स जब ऊपर नाक में पहुंचा, तब तक सभी ठीक नजर आने लगे थे।

ऐलक्स को देख क्रिस्टी ने दौड़कर ऐलेक्स को गले से लगा लिया। लगाती भी क्यों ना आखिर ऐलेक्स ने सभी की जान जो बचाई थी?

“इन दोनों का फिर शुरु हो गया।” जेनिथ ने मुस्कुराते हुए कहा- “आप चलिये कैप्टेन, इससे पहले कि यह कृत्रिम मानव फिर से अपना मुंह बंद करे, हमें नाक के छेद को खोलना ही होगा।"

जेनिथ की बात सुन ऐलेक्स और क्रिस्टी हड़बड़ाकर अलग हो गये और सभी के साथ, नाक के उस स्थान पर कोड को ढूंढने लगे।

कुछ देर तक उस स्थान पर कोड ढूंढने के बाद, तौफीक को दोनों नाक के बीच की दीवार (सेप्टम) पर कुछ नंबर्स लिखे दिखाई दिये, जो कि काफी धुंधले होने की वजह से सही से नजर नहीं आ रहे थे।

तौफीक ने हाथ से उस जगह को साफ किया, अब वह अंक साफ दिखाई देने लगे थे।

“शैफाली, जरा यहां आकर देखो, मुझे कुछ नंबर मिले हैं यहां पर?" तौफीक ने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करते हुए कहा।

तौफीक की बात सुन सभी भागकर तौफीक के पास पहुंच गये। अब उनकी सबकी नजरें सेप्टम पर लिखे उन अंकों पर थी।

वहां 4 लाइनों में कुल 32 अंक लिखे थे
0100 1110
0100 1111
0101 0011
0100 0101

“यह अंक तो सिर्फ 0 और 1 हैं और वह भी 32 फिर भला ये कोड कैसे हो सकते हैं?” सुयश ने कहा- “हमें तो 7 अंकों की जरूरत है डिब्बे के लिये।"

"कैप्टेन अंकल, यह बाइनरी कोड हैं, मैं इसे सॉल्व कर सकती हूं।" शैफाली ने कहा।

“ये बाइनरी कोड क्या होते हैं?" जेनिथ ने पूछा।

“कंम्प्यूटर की भाषा को बाइनरी नंबर्स कहते हैं, बाइनरी का मतलब होता है- 2 नंबर्स से मिलकर बनाई गई संख्या। जैसे हम जो गणित पढ़ते हैं, उसे डेसिमल नंबर्स (यानि की 10 अंकों की भाषा) कहते हैं। हम जब अपने कंम्प्यूटर पर कोई बटन दबाते हैं, तो कंम्प्यूटर अपने अंदर इन्हीं 2 नंबर्स से सारी कैलकुलेशन करता है।" यह कहकर शैफाली उन 4 लाइनों को डीकोड करने लगी।

कुछ देर तक ऐसे ही कुछ करते रहने के बाद उसने 4 अंग्रेजी के अक्षर, उन 4 लाइनों से निकाल लिये।

“कैप्टेन अंकल, पहली लाइन का मतलब N था, दूसरी लाइन का मतलब O था, तीसरी लाइन का S और चौथी का E था। इस प्रकार इन 4 लाइनों से मिलकर जो शब्द बना, वह NOSE है।” शैफाली ने कहा।

“पर NOSE तो अंग्रेजी शब्द है, इसमें 7 डिजिट का कोड कहां है?” क्रिस्टी ने शैफाली से पूछा।

“अगर हम अंग्रेजी की पूरी वर्णमाला को गणित के अंकों में बदल दें तो N=14, O=15, S=19 और E-5, यानि कि अब हमारे सामने जो गणित के अंक हैं, वह हैं1415195 और यह 7 अंक ही हैं। इसका साफ मतलब है कि डिब्बे का पासवर्ड यही अंक होंगे?” शैफाली ने कुछ ही पलों में इतनी मुश्किल पहेली को हल कर दिया।

इसे देख सभी शैफाली के दिमाग का लोहा मान गये।

शैफाली ने अब इन अंकों को डिब्बे के लॉक पर लगा दिया। पासवर्ड लगाते ही डिब्बे का लॉक खुल गया। डिब्बे में शटर का लीवर रखा था।

तौफीक ने उस लीवर को डिब्बे से निकाल, शटर के किनारे पर फंसा दिया और फिर धीरे-धीरे उस लीवर को घुमाकर शटर खोलने लगा।

कुछ ही देर में पूरा शटर खुल गया, पर शटर के खुलते ही एक तेज बदबू ने अंदर की ओर प्रवेश किया, पर उस बदबू को ऐलेक्स के सिवा कोई दूसरा सूंघ नहीं पाया।

“कैप्टेन इस हवा में तो बहुत बदबू भरी है, लगता है यह कृत्रिम मानव किसी कूड़ा घर में बैठा है?” ऐलेक्स ने अपनी नाक बंद करते हुए कहा।

“पर हमें तो कोई दुर्गंध नहीं आ रही ऐलेक्स?" सुयश ने अपनी नाक पर जोर देते हुए कहा।

पर इससे पहले कि कोई और किसी निष्कर्ष पर पहुंच पाता कि तभी नाक के छेद से हवा में तैरते, कुछ विशाल जीव भी अंदर आने लगे।

"सब अंदर की ओर भागो, नहीं तो यह विशाल जीव हमें खत्म कर देंगे।” सुयश ने चीखकर कहा- “हम इन्हें मार नहीं सकते।"

"रुक जाओ।” तभी शैफाली की आवाज सभी को सुनाई दी- “सब लोग कसकर कोई ना कोई चीज पकड़ लें, मैं इन जीवों को अभी बाहर निकालती हूं।" यह कहकर शैफाली ने नाक की दीवारों पर, अपने हाथ फिराकर धीरे-धीरे गुदगुदी करनी शुरु कर दी।

शैफाली के ऐसा करते ही, कृत्रिम मानव को बहुत तेज छींक आ गई और उसके फेफड़े से 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा बाहर निकली।

इस तेज हवा ने सभी जीवों को उड़ाकर नाक के बाहर निकाल दिया।

“वाह, क्या दिमाग लगाया है शैफाली ने?" जेनिथ ने शैफाली की तारीफ करते हुए कहा।

“वह सभी वायरस थे, जो नाक में बदबू के साथ प्रवेश कर रहे थे।" शैफाली ने कहा।

अब सभी शैफाली का इशारा पाकर अंदर की ओर चल पड़े। वह सभी नाक के अंदरी भाग में पहुंच गये थे।

यह एक विशाल कमरा था, जहां छत की ओर ऊपर एक टूथब्रश के आकार का झाड़ी नुमा पेड़ दिखाई दिया, जिसकी लताएं कमरे में कुछ ऊंचाई पर हवा में झूल रहीं थीं। वह लताएं, एक-दो नहीं बल्कि लाखों की संख्या में थीं।

“ऊपर मौजूद पेड़‘ओला फैक्ट्री बल्ब' है और नीचे लटक रही पेड़ की लताएं‘ओला फैक्ट्री नर्वस्' हैं, जब नाक में कोई भी गंध आती है, तो वह ओला फैक्ट्री नर्वस् के द्वारा सेंस करके, ओला फैक्ट्री बल्ब तक जाती हैं। ओला फैक्ट्री बल्ब इस गंध को इलेक्ट्रानिक सिग्नल के द्वारा, मस्तिष्क तक भेज देता है और मस्तिष्क उन इलेक्ट्रानिक सिग्नल को पहचान कर, हमें बता देते हैं कि वह गंध, किस चीज की है? इन्ही करोड़ों नर्वस के कारण, एक इंसानी शरीर 10,000 से भी ज्यादा गंध की पहचान कर सकता है।” शैफाली ने अपने ज्ञान का परिचय देते हुए कहा।

"हमारा शरीर कितना जटिल है, पता नहीं ईश्वर ने इसे किस प्रकार बनाया होगा?” क्रिस्टी ने आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा।

“ईश्वर ने हमारे शरीर को इस प्रकार बनाया है कि हमारे शरीर के सभी अंग, स्वयं का कार्य समझकर अपने आप में स्वयं बदलाव कर सकते हैं।" शैफाली ने कहा" इस प्रकार ये शरीर एक बार में नहीं बना, बल्कि करोड़ों बार स्वयं से परिवर्तित होकर इस आकार में आया है।

तभी सुयश ने भटक चुके यात्रियों को वापस गंतव्य की ओर लाते हुए कहा- “क्या अब हम वापस अपने कार्य के बारे में सोच सकते हैं।"

सुयश की बात सुन ऐलेक्स बोल उठा- “शैफाली ये बताओ कि जब नाक के अंदर हवा आयी, तो मुझे तो बदबू साफ महसूस हुई, पर तुममें से किसी को भी वो गंध महसूस नहीं हुई? ऐसा क्यों?"

“आपकी वशीन्द्रिय शक्ति की वजह से आप पर यहां के वातावरण का कोई असर नहीं हो रहा है।" शैफाली ने कहा- “आपने देखा नहीं कि नाक बंद होने के बाद भी आपको साँस लेने में किसी भी प्रकार से कोई परेशानी नहीं हो रही थी। लेकिन हमको बदबू का ना सूंघा पाना, ये बताता है कि इस कृत्रिम मानव की ओला फैक्ट्री में कोई परेशानी है, जिससे यह इलेक्ट्रानिक सिग्नल को मस्तिष्क तक नहीं भेज पा रहा है।
मुझे लगता है कि यही हमारा अगला कार्य भी है ओला फैक्ट्री बल्ब को सही करने का।....और इस कार्य को पूरा करने के लिये, हमें किसी प्रकार से ऊपर मौजूद उस पेड़ तक पहुंचना होगा।"

“पर कैसे?" क्रिस्टी ने कहा- “वह पेड़ की लताएं तो हमसे काफी ऊंचाई पर हैं, हम वहां तक पहुंचेगे कैसे?"

“पहुंच सकते हैं।” शैफाली ने कहा- “ऊपर की ओर देखो, छत के पास कुछ गोले हवा में तैर रहे हैं। यह गोले अवश्य ही हवा में मौजूद नन्हें कण हैं, जो नाक का द्वार खुलने पर अंदर घुसे थे। तो बस हमें फिर से इस कृत्रिम मानव के साँस अंदर खींचने का इंतजार करना होगा। जैसे ही हवा अंदर आयेगी, हवा के दबाव से यह कण नीचे की ओर आ जायेंगे, जो कि कुछ देर बाद फिर से ऊपर की ओर चले जायेंगे। हमें इन्हीं कणों के ऊपर बैठकर पेड़ की लताओं तक पहुंचना होगा।"

शैफाली के शब्द सुनकर सभी कृत्रिम मानव के साँस लेने का इंतजार करने लगे।

सभी ज्यादा देर तक इंतजार नहीं करना पड़ा, कुछ ही देर में कृत्रिम मानव ने साँस लेना शुरु कर दिया और इसी के साथ हवा में मौजूद कण हवा के दबाव से नीचे की ओर आने लगे।

कणों को नीचे आता देख सभी एक-एक कर, अलग-अलग कणों पर बैठ गये। बाहर से आयी हवा गले के पृष्ठ भाग से होती हुई फेफड़ों की ओर चली गई।

जैसे ही उस स्थान पर हवा का दबाव थोड़ा कम हुआ, वह कण सभी को लेकर ऊपर की ओर जाने लगे।

लताओं तक पहुंचते ही सभी ने एक-एक कर लताओं को पकड़ लिया और उस पर चढ़कर पेड़ के ऊपर की ओर आ गये।

पेड़ के ऊपर की ओर बहुत से तीर, हवा में ऐसे लटक रहे थे, जैसे कि वह तीर ना होकर इस पेड़ के फल हों।

उस ब्रशनुमा पेड़ के ऊपर आगे बढ़ने पर, सभी को एक स्थान पर, एक रबरबैंड के समान कोई छल्ला पेड़ के ऊपर, कसकर चिपका दिखाई दिया।

“यह छल्ला ही है असली परेशानी।” शैफाली ने छल्ले को देखते हुए कहा- “यह इतनी कसकर ओला फैक्ट्री बल्ब को जकड़े है कि इससे सिग्नल निकल ही नहीं सकते। हमें किसी भी प्रकार से इस छल्ले को यहां से हटाना होगा?"

शैफाली की बात सुन तौफीक अपनी जेब से चाकू निकालकर, उस रबरबैंड के छल्ले को काटने की कोशिश करने लगा।

पर 5 मिनट की कोशिश के बाद ही तौफीक समझ गया कि यह छल्ला इस चाकू से नहीं कटने वाला।

अब तौफीक उठकर शैफाली की ओर देखने लगा। पर शैफाली इस समय गहन सोच में पड़ी थी।

“कैप्टेन अंकल, हमारे पास इस रबरबैंड को काटने का हथियार नहीं है और बिना इसको हटाए इलेक्ट्रानिक सिग्नल आगे भी नहीं जायेंगे, पर अगर हम सब मिलकर अपनी पूरी ताकत लगाएं, तो इस रबरबैंड के छल्ले को थोड़ा आगे की ओर खींच सकते हैं। ऐसी स्थिति में चाहे कुछ देर के लिये ही सही, पर ओला फैक्ट्री बल्ब अपने सिग्नल आगे भेजने में सफल हो जायेगा। हो सकता है कि उसके सिग्नल भेजते ही इस द्वार का कार्य समाप्त हो जाये? हां पर हमें एक चीज का ध्यान अवश्य रखना है कि ओला फैक्ट्री बल्ब के सिग्नल कहीं उस पर लटके तीर ना हों। अगर ऐसा हुआ, तो वह बहुत तेजी से हमारी ओर आयेंगे, इसलिये हमको उन तीरों से पहले से ही सावधान रहना होगा।“

सभी ने सहमति से सिर हिलाया और घूमकर इस प्रकार खड़े हो गये, जिससे उन्हें पेड़ पर लटके तीर साफ दिखाई दे रहे थे।

अब सभी ने अपनी पूरी ताकत लगाकर एक साथ, उस रबरबैंड को अपनी ओर खींचना शुरु कर दिया।

उन सभी के सम्मिलित प्रयासों से रबर का छल्ला थोड़ा सा खिंचकर उनकी ओर आ गया।

इसी के साथ ही उस पेड़ पर लटका एक तीर तेजी से उनकी ओर लपका, परंतु शैफाली के द्वारा पहले से ही सावधान किये जाने की वजह से, किसी को कोई नुकसान नहीं हुआ।

पर उस तीर का निशाना वह लोग नहीं बल्कि वह रबर का छल्ला था। तीर तेजी से आकर रबर के छल्ले से टकराया और उसे काटता हुआ, दूसरी ओर चला गया। यह देख सभी खुशी से भर उठे।


“शैफाली ने सही कहा था कि शरीर अपना उपचार स्वयं से करना जानता है।” सुयश ने कहा।

तभी पेड़ पर लटके अन्य कई तीर हवा में होते हुए एक दिशा की ओर चले गए।

“ओला फैक्ट्री बल्ब से इलेक्ट्रानिक सिग्नल जाने लगे हैं, पर फिर भी यह द्वार पार नहीं हुआ, इसका मतलब हमें स्वयं भी उन सिग्नल के सहारे आगे तक जाना होगा।" शैफाली ने कहा।

अब तीरों का छूटना बंद हो गया था और पेड़ पर नये तीर उग आये थे।

"हम सभी को एक-एक तीर पकड़कर उससे लटकना होगा।” शैफाली ने कहा- “जैसे ही ओला फैक्ट्री बल्ब दोबारा से सिग्नल भेजेगा, हम उस तीर को पकड़कर आगे की ओर चले जायेंगे।"

शैफाली की बात सुन, सभी एक-एक तीर पकड़कर लटक गए। उन्हें सिग्नल के लिये ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ा, कुछ देर बाद ही सभी तीर से लटके हुए आगे की ओर जा रहे थे।

आगे एक स्थान पर उन्हें एक विशाल दीवार दिखाई दी, जिसमें असंख्य सुराख नजर आ रहे थे।

सभी तीर उस सुराख से ही अंदर जा रहे थे। उस सुराख के आगे जमीन पर एक बड़ा सा प्लेटफार्म बना था।

"हमें आगे आने वाले उस प्लेटफार्म पर ही कूदना होगा।” सुयश ने सभी से चिल्लाकर कहा- “अगर हम दीवार से टकराए, तो हमें गंभीर चोट आ सकती है।"

अब सभी उस प्लेटफार्म के पास पहुंचकर एक-एक कर उस पर कूद गये।

उस प्लेटफार्म के दूसरी ओर एक द्वार था, जिस पर लिखा था- “तिलिस्मा द्वार संख्या 5.3"

सभी समझ गये कि यह द्वार पार हो चुका है। अतः सभी धीरे-धीरे उस द्वार के पार निकल गये।

जारी रहेगा_____✍️
Shandar update bhai
Shaifali and team ne is dvar ko bhi par kar liya
Or ab agle dvar par pahunch gaye hai
 
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