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Incest मासी का घर (सेक्सी मासी और मासी की बेटी)

Should I rewrite the ending in better way? Taking some time?

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Ek number

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मासी का घर
अध्याय 4 - स्वीकारोक्ति (confession)

पिछले अपडेट में मैंने आपको बताया कि क्यों विशाखा ने मुझे kiss किया था और अब हम तीनों खाना खाने लगे थे।

खाना खाते खाते मैंने सन्नाटे को थोड़ा, मासी को पूछा,

मैं: “मासी, मौसा जी आए नहीं अब तक?”

मासी: “आज वो देर से आने वाले थे।”

मैं: “हमेशा से वह एक busy आदमी रहे है।”

मासी: “बेटा busy तो आज कल तुम भी हो गए हो, हमारा कॉल भी नहीं उठाते।”

मैं: “अरे मासी, मैं कहा का busy, बस कॉलेज और साइड के काम manage कर रहा हूँ।”

मासी: “ज्यादा टेंशन मत लिया करो, देखो कितने पतले होते जा रहे हो।”

मैं: “अब आपके हाथ का खाना खा कर फिर से अच्छा हो जाऊंगा।”

मासी और मेरी काफी सारी बातें हुई, मजाक हुए मगर विशाखा ने कुछ नहीं कहा, बस हमें बातें करते हुए देखती रही और मुस्कराते रही, वो मेरे बाजू में बैठी बिल्कुल मेरी नई नवेली दुल्हन जैसी दिख रही थी जो काफी शर्माती है।


1757742198010

खाना खा कर मैं बाहर टहलने आ गया। कुछ देर बाद मैंने यू ही छत की ओर देखा, विशाखा वहां खड़ी हो कर मुझे देख रही थी। मुझे देख कर वो झट से छुप गई।

मैंने मुस्कराया, और भाग कर अंदर गया। मैं भी अब छत पर जा रहा था।

मैं छत पर पहुंचा, लेकिन विशाखा शायद मुझे नीचे ही ढूंढ रही थी। वो रेलिंग से झुक कर मुझे अभी भी नीचे खोज रही थी।

मैं उसके पीछे धीरे से गया, लेकिन पता नहीं कैसे उसे पता चल गया और वह पीछे मुड़ गई। मुझे देख के वह शर्मा के लाल हो गई थी। उसकी नजरे मेरी नजरों से मिल ही नहीं रही थी और मैं उसे ही ताड़े जा रहा था।

अंधेरे में भी वह चांद सी चमक रही थी, हल्की गर्म हवा चल रही थी, उसके खुले बाल उड़ रहे थे, हम दोनों के बीच सिर्फ सन्नाटा था।


1757740705322

हर बार की तरह, मैंने सन्नाटे को तोड़ते हुए कहा,

मैं: “I Love You Too.”

जिसे सुन कर विशाखा लाल टमाटर हो गई, वो मुझे देख मुस्कुराई और भाग के नीचे चली गई।


1757740627953

मैं छत पर ही था, शरीर मेरा भी ठंडा पड़ चुका था क्योंकि किसी लड़की ने मुझे आगे से प्रपोज किया और मैंने उसे हां कह दिया।

शर्मा तो मैं भी रहा था, लेकिन खुशी भी इतनी हो रही जो शब्दों बयान करना मुश्किल है। मैं अपनी खुशी में डूबा ही था तभी मुझे एक ख्याल आता है, जिससे मेरा मुंह उतर जाता है।

वो ख्याल था कि, विशाखा मेरी मौसेरी बहन है, और उसके साथ संबंध में होना समाज में वर्जित है और यह अनैतिक संबंध में गिना जायेगा।

एक ही छत के नीचे रह कर प्यार करते करते अगर हम पकड़ा गए तो बड़ी मुश्किल हो जाएगी। अभी तो ठीक है लेकिन अगर हमारा प्यार गहरा हो गया तो हम भविष्य में क्या करेगें? क्या यह समाज, हमारे घरवाले हमें साथ रहने देंगे?

फिर मैंने खुद को दिलासा देते हुए कहां कि जो होगा देखा जाएगा, जमाना बदल चुका आज कल कुछ भी हो सकता है।

फिर मैं अपने कमरे में चला गया। मुझे देर

तक नींद नहीं आई लेकिन आखिर में मैं सो ही गया।
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Ek number

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मासी का घर
अध्याय 5 - गपशप और बातचीत

अगले दिन, सुबह 6 बजे जब मैं सो रहा था, तब विशाखा मुझे उठाने आई। उसने मुझे छेड़ते हुए उठाया मेरे जग ते ही वह भागने लगी, तभी मैंने उसकी कलाई पकड़ ली। वह मेरी ओर मुड़ी और हंसने लगी।

मैंने उसे मेरी ओर खींचा, तो उसका मुंह मेरी मुंह के ऊपर आ कर रुका, उसके बाल सामने के और गिर गए, उसकी आँखें बंद होगे, वह पल काफी रोमांटिक था। मैंने उसके बालों को पीछे किया।


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कुछ देर बाद वो एकदम मेरे दूर होगी और उसने एकदम हल्की प्यारी आवाज में कहा,

विशाखा: “तुम्हें पापा बुला रहे है नीचे।”

ऐसा कहती ही वो भाग गई। मैं उठा चेहरा धोया और नीचे हॉल में चला गया। हॉल में सोफे पर मेरे मौसा जी बैठे हुए थे। उन्हें मुझे बैठने को कहा और बोले,

मौसा जी: “बेटा तुम्हें बाइक चलानी आती है?”

मैंने हां के जवाब में सिर हिलाया।

मौसा जी: “दरसल मैं कुछ काम से 3 दिनों के लिए दूसरे शहर जा रहा हूं। तुम मुझे बाइक से रेलवे स्टेशन तक छोड़ देना फिर बाइक घर पर लेकर आ जाना।”

यह बात सुनकर मैं काफी खुश हो चुका था, क्योंकि अगर मौसा जी चले जाते है तो घर ओर मैं, विशाखा और मासी ही रहेंगे, जो मेरे लिए एक सुनहरा मौका था।

मैं: “जी, ठीक है।”

कुछ देर बाद मेरी मासी किचन से मौसा जी के लिए चाय लेकर आती है। उन्होंने एक लाल कलर की, साटिन की नाइटी पहनी थी। नाइटी पर गले का कट डीप था, मासी की दो बड़ी बड़ी दूध की फैक्ट्रीज इसमें काफी उभर के दिख रही थी। मेरा तो मन कर रहा था अभी उन्हें दबा आकर सारा दूध बाहर निकल दु। उनसे तो इतना दूध निकले गा कि 10 सालों तक उनके घर दूध की कमी नहीं होगी।


20250913-120220

मासी मौसा को चाय देने के बाद फिर से किचन में चली गई। अपनी चाय खत्म करने के बाद मौसा जी उनकी बैग लेने अपने कमरे में चले गए।

तभी किचन की और से विशाखा हॉल की तरफ चलती हुई आई। उसके मुंह पर कोई भाव नहीं था। जैसे ही वो हॉल में आई, उसने अपने कदम रोक लिए। और मुझे देख कर मुस्कुराने लगे, मैने भी मुस्कराते हुए उसे देख। अब वह मुझसे इतनी शर्मा थी कि जैसे हमारी अभी अभी शादी हुई हो।

अब वो चली गई, मौसा जी भी अपना बैग लेकर बाहर आए और फिर हम रेल्वे स्टेशन के ओर चले गए।

मौसा जी को छोड़ने के बाद, मैं लौट आया और बाइक को पार्क कर के घर के अंदर घुसने लगा। तभी मुझे किसी की आवाज सुनाई आई। मेरी मासी और कोई और औरत अंदर बैठ के बातें कर रही थीं।

मैं उस औरत को नहीं जानता था। मगर मैं उनकी बातें बाहर ही छुप कर सुनने लगा।

औरत: “आपके घर वो लड़का कौन आया है?”

मासी: “वो मेरा भांजा आया हुआ है हमारे घर।”

औरत (मजाकिया अंदाज में): “अच्छा, मुझे लगा कि कोई लड़का रख लिया है आपने अपने लिए।”

मासी: “कैसी बातें करती हो तुम!”

औरत (चिढ़ाते हुए): “अरे, अच्छा खासा जवान लड़का है, क्यों मौका छोड़ रही हो!”

मासी हंसते हुए चुप रही।

औरत: “आपको भी तो संतुष्ट नहीं है ना, तो क्या दिक्कत है।”

मासी (हंसने हुए, मजाक में): “ऐसा लगता है मुझसे ज्यादा तुम्हें जरूरत है।”

वे दोनों जोर जोर से हंसने लगे। तभी मैं अंदर घुसता हूं और उन्हें वहां बैठा हुआ देखता हु।


1757745071339

मासी के साथ जो बैठी थी वह बाजू वाली भाभी थी, उन्होंने एक लाल कलर की साड़ी पहनी थी जिसमें वह एकदम माल लग रही थी।


259a6428a7f975c4bf7e73ca4b49ded4

मुझे देख उनकी बातें बंद हो गयी और मौसी ने मुझे देख कर बोला,

मासी: “आ गया बेटा!”

मैं अपने कमरे की ओर जा रहा था, चलते चलते मैंने कहा,

मैं: “जी।”

फिर में सीढ़ियों पर ही रुक गया, रुक कर उनकी बातें सुनने लगा।

भाभी जी: “लोंडा तो बड़ा तगड़ा है।”

मासी (हंसते हुए): “बस कर, मेरे भांजे को नजर ना लगा।”

भाभी जी: “अब आप से नजर नहीं लगती तो हमें लगाने दीजिए।”

दोनों फिर से हंसने लगे। उनकी बातें खत्म नहीं होने वाली थी, और मैं उधर उनकी बातें सुनता हुआ खड़ा नहीं हो सकता था। मुझे अपनी नींद पूरी करनी थी। मैं जा कर सो गया।

फिर, उठने के बाद में नहाया, खाना खाया और अपने कमरे टाइमपास करने लगा। दिन काफी बोर हो रहा था, तभी मैंने सोचा विशाखा के साथ टाइमपास कर लेता हूं।

जब मैं उसके कमरे में पहुंचा तो देख वह सो रही थी। सोते हुए वो काफी क्यूट दिख रही थी। मैं उसे निहारते ही रह गया।

फिर मैं वह से निकल कर नीचे गया। हॉल में भी कोई नहीं था। फिर मैं अपनी मासी के कमरे की ओर गया। मासी के कमरे का दरवाजा खुला था, घर में चारों तरफ सन्नाटा था।

मैंने मासी को देख, वह एक पीले कलर का सूट पहन कर अपने बेड पर बैठी कुछ पुरानी तस्वीरें देख रही थी। मैंने यूं ही मजाक में कहा,


1757757098707

मैं: “अरे वाह मासी, आप तो आपकी पौराणिक तस्वीरें देख रही हो। कही डायनासोर भी देखे क्या उसमें?”

मासी ने अपनी नज़रे एल्बम पर ही बनाए रखी, मुकरते हुए उन्होंने कहा,

मासी: “हां… एक तो अभी मेरे रोम में घुस आया है।”

मैं यह सुन कर हंसने लगा, मासी भी हंस रही थी और जाकर उसके पास बैठ गया।

फिर में उनकी एक पुरानी तस्वीर देखता हूं, मासी बिल्कुल विशाखा जैसी दिखती थी। मैंने यूं ही मजाक में पूछा,

मैं: “ये विशु है क्या? कितनी क्यूट दिख रही है।”

मासी ने मेरी ओर देखा, एक स्माइल के साथ कहा,

मासी: “अरे बुद्धू, ये मैं हूं।”

मासी को और मस्का लगाते हुए मैंने चौंकने की एक्टिंग की और कहा,

मैं: “क्या बात कर रहे हो! मतलब आप तो फुल हीरोइन थी। अगर आप आज के जमाने में होती तो सोशल मीडिया क्वीन होती।”

मासी (मुस्कराते हुए और चिढाते हुए): “और तुम जैसे दिन भर DMs रिफ्रेश करते रहते।”

मैं: “मैं तो आपका फॉलोवर नंबर 1 रहता।”

मासी और मैं हंस देते है और मासी मुझे चिढ़ाते हुए कहती है,


1757751121168

मासी: “hmm… ये lines अपने age की लड़कियों पर मारना, मुझे एक बहु तो मिल जाएगी!”

मैं: “अरे मासी, बहुत lines मारी… पर कोई सुनता ही नहीं। सब ignore कर देते है।”

मासी: “सही है, तुम जैसों की बातें सुनकर सब भाग जाएंगी।”

मैं: “पर आप तो अभी तक बैठी है।”

मासी मुझे देखते रही, उनका चेहरा लाल पड़ रहा था। फिर से सन्नाटा हो गया, लेकिन अब मासी हल्की आवाज में बोली बोली,

मासी: “तुम्हे बस टाइमपास करना आता है।”

मैं वह से जाते जाते बोला।

मैं: “टाइमपास तो सब करते है, आपके साथ तो तुम रुक जाता है।”

मासी की धड़कने तेज होगी, वह शरमाने लगी। शायद उनके मन में मैंने प्यार का बीज बो दिया था।
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sunoanuj

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मासी का घर
अध्याय 5 - गपशप और बातचीत

अगले दिन, सुबह 6 बजे जब मैं सो रहा था, तब विशाखा मुझे उठाने आई। उसने मुझे छेड़ते हुए उठाया मेरे जग ते ही वह भागने लगी, तभी मैंने उसकी कलाई पकड़ ली। वह मेरी ओर मुड़ी और हंसने लगी।

मैंने उसे मेरी ओर खींचा, तो उसका मुंह मेरी मुंह के ऊपर आ कर रुका, उसके बाल सामने के और गिर गए, उसकी आँखें बंद होगे, वह पल काफी रोमांटिक था। मैंने उसके बालों को पीछे किया।


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कुछ देर बाद वो एकदम मेरे दूर होगी और उसने एकदम हल्की प्यारी आवाज में कहा,

विशाखा: “तुम्हें पापा बुला रहे है नीचे।”

ऐसा कहती ही वो भाग गई। मैं उठा चेहरा धोया और नीचे हॉल में चला गया। हॉल में सोफे पर मेरे मौसा जी बैठे हुए थे। उन्हें मुझे बैठने को कहा और बोले,

मौसा जी: “बेटा तुम्हें बाइक चलानी आती है?”

मैंने हां के जवाब में सिर हिलाया।

मौसा जी: “दरसल मैं कुछ काम से 3 दिनों के लिए दूसरे शहर जा रहा हूं। तुम मुझे बाइक से रेलवे स्टेशन तक छोड़ देना फिर बाइक घर पर लेकर आ जाना।”

यह बात सुनकर मैं काफी खुश हो चुका था, क्योंकि अगर मौसा जी चले जाते है तो घर ओर मैं, विशाखा और मासी ही रहेंगे, जो मेरे लिए एक सुनहरा मौका था।

मैं: “जी, ठीक है।”

कुछ देर बाद मेरी मासी किचन से मौसा जी के लिए चाय लेकर आती है। उन्होंने एक लाल कलर की, साटिन की नाइटी पहनी थी। नाइटी पर गले का कट डीप था, मासी की दो बड़ी बड़ी दूध की फैक्ट्रीज इसमें काफी उभर के दिख रही थी। मेरा तो मन कर रहा था अभी उन्हें दबा आकर सारा दूध बाहर निकल दु। उनसे तो इतना दूध निकले गा कि 10 सालों तक उनके घर दूध की कमी नहीं होगी।


20250913-120220

मासी मौसा को चाय देने के बाद फिर से किचन में चली गई। अपनी चाय खत्म करने के बाद मौसा जी उनकी बैग लेने अपने कमरे में चले गए।

तभी किचन की और से विशाखा हॉल की तरफ चलती हुई आई। उसके मुंह पर कोई भाव नहीं था। जैसे ही वो हॉल में आई, उसने अपने कदम रोक लिए। और मुझे देख कर मुस्कुराने लगे, मैने भी मुस्कराते हुए उसे देख। अब वह मुझसे इतनी शर्मा थी कि जैसे हमारी अभी अभी शादी हुई हो।

अब वो चली गई, मौसा जी भी अपना बैग लेकर बाहर आए और फिर हम रेल्वे स्टेशन के ओर चले गए।

मौसा जी को छोड़ने के बाद, मैं लौट आया और बाइक को पार्क कर के घर के अंदर घुसने लगा। तभी मुझे किसी की आवाज सुनाई आई। मेरी मासी और कोई और औरत अंदर बैठ के बातें कर रही थीं।

मैं उस औरत को नहीं जानता था। मगर मैं उनकी बातें बाहर ही छुप कर सुनने लगा।

औरत: “आपके घर वो लड़का कौन आया है?”

मासी: “वो मेरा भांजा आया हुआ है हमारे घर।”

औरत (मजाकिया अंदाज में): “अच्छा, मुझे लगा कि कोई लड़का रख लिया है आपने अपने लिए।”

मासी: “कैसी बातें करती हो तुम!”

औरत (चिढ़ाते हुए): “अरे, अच्छा खासा जवान लड़का है, क्यों मौका छोड़ रही हो!”

मासी हंसते हुए चुप रही।

औरत: “आपको भी तो संतुष्ट नहीं है ना, तो क्या दिक्कत है।”

मासी (हंसने हुए, मजाक में): “ऐसा लगता है मुझसे ज्यादा तुम्हें जरूरत है।”

वे दोनों जोर जोर से हंसने लगे। तभी मैं अंदर घुसता हूं और उन्हें वहां बैठा हुआ देखता हु।


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मासी के साथ जो बैठी थी वह बाजू वाली भाभी थी, उन्होंने एक लाल कलर की साड़ी पहनी थी जिसमें वह एकदम माल लग रही थी।


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मुझे देख उनकी बातें बंद हो गयी और मौसी ने मुझे देख कर बोला,

मासी: “आ गया बेटा!”

मैं अपने कमरे की ओर जा रहा था, चलते चलते मैंने कहा,

मैं: “जी।”

फिर में सीढ़ियों पर ही रुक गया, रुक कर उनकी बातें सुनने लगा।

भाभी जी: “लोंडा तो बड़ा तगड़ा है।”

मासी (हंसते हुए): “बस कर, मेरे भांजे को नजर ना लगा।”

भाभी जी: “अब आप से नजर नहीं लगती तो हमें लगाने दीजिए।”

दोनों फिर से हंसने लगे। उनकी बातें खत्म नहीं होने वाली थी, और मैं उधर उनकी बातें सुनता हुआ खड़ा नहीं हो सकता था। मुझे अपनी नींद पूरी करनी थी। मैं जा कर सो गया।

फिर, उठने के बाद में नहाया, खाना खाया और अपने कमरे टाइमपास करने लगा। दिन काफी बोर हो रहा था, तभी मैंने सोचा विशाखा के साथ टाइमपास कर लेता हूं।

जब मैं उसके कमरे में पहुंचा तो देख वह सो रही थी। सोते हुए वो काफी क्यूट दिख रही थी। मैं उसे निहारते ही रह गया।

फिर मैं वह से निकल कर नीचे गया। हॉल में भी कोई नहीं था। फिर मैं अपनी मासी के कमरे की ओर गया। मासी के कमरे का दरवाजा खुला था, घर में चारों तरफ सन्नाटा था।

मैंने मासी को देख, वह एक पीले कलर का सूट पहन कर अपने बेड पर बैठी कुछ पुरानी तस्वीरें देख रही थी। मैंने यूं ही मजाक में कहा,


1757757098707

मैं: “अरे वाह मासी, आप तो आपकी पौराणिक तस्वीरें देख रही हो। कही डायनासोर भी देखे क्या उसमें?”

मासी ने अपनी नज़रे एल्बम पर ही बनाए रखी, मुकरते हुए उन्होंने कहा,

मासी: “हां… एक तो अभी मेरे रोम में घुस आया है।”

मैं यह सुन कर हंसने लगा, मासी भी हंस रही थी और जाकर उसके पास बैठ गया।

फिर में उनकी एक पुरानी तस्वीर देखता हूं, मासी बिल्कुल विशाखा जैसी दिखती थी। मैंने यूं ही मजाक में पूछा,

मैं: “ये विशु है क्या? कितनी क्यूट दिख रही है।”

मासी ने मेरी ओर देखा, एक स्माइल के साथ कहा,

मासी: “अरे बुद्धू, ये मैं हूं।”

मासी को और मस्का लगाते हुए मैंने चौंकने की एक्टिंग की और कहा,

मैं: “क्या बात कर रहे हो! मतलब आप तो फुल हीरोइन थी। अगर आप आज के जमाने में होती तो सोशल मीडिया क्वीन होती।”

मासी (मुस्कराते हुए और चिढाते हुए): “और तुम जैसे दिन भर DMs रिफ्रेश करते रहते।”

मैं: “मैं तो आपका फॉलोवर नंबर 1 रहता।”

मासी और मैं हंस देते है और मासी मुझे चिढ़ाते हुए कहती है,


1757751121168

मासी: “hmm… ये lines अपने age की लड़कियों पर मारना, मुझे एक बहु तो मिल जाएगी!”

मैं: “अरे मासी, बहुत lines मारी… पर कोई सुनता ही नहीं। सब ignore कर देते है।”

मासी: “सही है, तुम जैसों की बातें सुनकर सब भाग जाएंगी।”

मैं: “पर आप तो अभी तक बैठी है।”

मासी मुझे देखते रही, उनका चेहरा लाल पड़ रहा था। फिर से सन्नाटा हो गया, लेकिन अब मासी हल्की आवाज में बोली बोली,

मासी: “तुम्हे बस टाइमपास करना आता है।”

मैं वह से जाते जाते बोला।

मैं: “टाइमपास तो सब करते है, आपके साथ तो तुम रुक जाता है।”

मासी की धड़कने तेज होगी, वह शरमाने लगी। शायद उनके मन में मैंने प्यार का बीज बो दिया था।

बहुत ही जबर्दस्त कहानी है और आप लिख भी बहुत मस्त रहे हैं ! 👌👌👏🏻👏🏻👏🏻
 

1112

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मासी का घर
अध्याय 3.5 - प्रस्ताव

घर पर पहुंचने के बाद, विशाखा कुछ कहे बिना ही अपने कमरे में चली गई और में वही हॉल में सोफे पर अपना मोबाइल चलाते हुए बैठ गया। ऐसा नहीं था कि जो हुआ था मैं उसे भुला चुका था, मैं समझ नहीं पा रहा था कि विशाखा के मन क्या चल रहा है।

हम दोनों काफी अच्छे से घूमे, काफी बातें की लेकिन जो उसने आखिर में किया इसका उद्देश्य क्या था। उसके ओठों के स्पर्श से जो मेरे गालों को महसूस हुआ था वह उसके ओठों के हटने के बाद भी, अभी तक हो रहा था।

मैं मोबाइल चला ही रहा था तभी मेरी मासी उनके कमरे से निकल कर हॉल में आती है। वे मेरे सामने ही अपने कमर पर हाथों को रखें, मेरी ओर देखती हुई खड़ी थी मगर विशाखा की उस हरकत के विचारों में मैं डूबा हुआ था।


Shweta-Tiwari-Opens-Up-On-People-Trolling-Her-For-Failure-Of-Second-Marriage-Finding-Love-Again-More 1757673458872

मासी ने मुझे कुछ देर ऐसे ही देखा और फिर मेरे बाजू में आकर बैठ गई, एकदम सट के। में काफी देर से एक ही वीडियो देख रहा था।

मासी: “फोन छोड़ो जरा… आंखें खराब हो जाएगी।”

मेरा ध्यान एकदम से मासी की ओर गया। फिर में सारे विचार छोड़ कर मासी से बात करने लगा,

मैं: “अरे मासी, वैसे भी जिंदगी में कुछ मजा नहीं है, फोन ही एक सहारा है।”

मासी: “हां, और लोग बोरिंग लगते है न?”

मैं: “आप तो कभी बोरिंग हो ही नहीं सकती, सिर्फ सब अपने अपने कामों में व्यस्त है।”

मासी: “और बताओ कॉलेज कैसा चल रहा है तुम्हारा, पढ़ाई के अलावा और कुछ भी करती हो या सिर्फ मोबाइल से चिपके रहते हो।”

मैं: “पढ़ाई तो चल रही है, उसके अलावा इवेंट्स में भी पार्टिसिपेट कर लेता हूं, अच्छा खासा टाइमपास होता है।”

मासी: “अरे वाह, किन किन चीजों में पार्टिसिपेट किया था?”

मैं: “अपना तो स्पोर्ट्स ही है, और कभी कभी पेंटिंग कंपटीशन में भी हिस्सा ले लेता हूं।”

ऐसे ही हमारी काफी बातें हुई, सूरज ढलने लगा और अंधेरा बढ़ने लगा। मासी और मेरी काफी अच्छी जमती है, वे मुझसे काफी मजाकिया स्वभाव से बातें करती है। मासी से लंबी देर तक बातें करने के बाद मैं अपने कमरे में जाने लगा।

जाते जाते मुझे विशाखा के कमरे का दरवाजा खुला हुआ नजर आया। मैं उसके साथ उस विषय बात करना चाहता था। मैं उसके दरवाजे पर खड़ा हो गया। वह दरवाजे के ओर ही देख रही थी। मैने कहा,

मैं: “विशाखा… जो तालाब के किनारे हुआ उसका मतलब क्या था।”

विशाखा आगे बढ़ी और दरवाजे को बंद करते हुए हल्की आवाज में बोली,

विशाखा: “खुद समझ जाओ!”

मैं फिर से सोच में चला गया। सोचते सोचते मैं अपने कमरे में आ गया। मैं अपने सिर को खुजा ही रहा था कि पीछे विशाखा की से वह आई।

विशाखा: “बुद्धू!”

मैं पीछे मुड़ा। वह मेरे नज़दीक आई और मेरे आंखों में देखने लगी।

विशाखा: “बचपन से ही तुम मुझे काफी पसंद हो। विशाल, तुम मेरे crush हो। मैं तुम्हे काफी ज्यादा पसंद करती हूं।”

ऐसा कह कर वह भाग कर अपने कमरे में चली गई। मैं शर्म से लाल हो चुका था। फिर में बिस्तर पर लेट गया और पता नहीं कब मेरी आंख लग गई।

मैं जब उठा तो खाने का समय हो चुका था। मैं नीचे गया तो विशाखा डायनिंग टेबल पर बैठी हुई थी और मासी खाना लगा रही थी। मैं विशाखा के बाजू में जाकर बैठ गया। उसने उसके बाद के शब्द नहीं

कहा था। मेरी मासी भी बैठ गई और हम खाना खाने लगे।
Larki toh pehle se hi set hai. Massi ji bhi set hongi kys
 

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मासी का घर
अध्याय 4 - स्वीकारोक्ति (confession)

पिछले अपडेट में मैंने आपको बताया कि क्यों विशाखा ने मुझे kiss किया था और अब हम तीनों खाना खाने लगे थे।

खाना खाते खाते मैंने सन्नाटे को थोड़ा, मासी को पूछा,

मैं: “मासी, मौसा जी आए नहीं अब तक?”

मासी: “आज वो देर से आने वाले थे।”

मैं: “हमेशा से वह एक busy आदमी रहे है।”

मासी: “बेटा busy तो आज कल तुम भी हो गए हो, हमारा कॉल भी नहीं उठाते।”

मैं: “अरे मासी, मैं कहा का busy, बस कॉलेज और साइड के काम manage कर रहा हूँ।”

मासी: “ज्यादा टेंशन मत लिया करो, देखो कितने पतले होते जा रहे हो।”

मैं: “अब आपके हाथ का खाना खा कर फिर से अच्छा हो जाऊंगा।”

मासी और मेरी काफी सारी बातें हुई, मजाक हुए मगर विशाखा ने कुछ नहीं कहा, बस हमें बातें करते हुए देखती रही और मुस्कराते रही, वो मेरे बाजू में बैठी बिल्कुल मेरी नई नवेली दुल्हन जैसी दिख रही थी जो काफी शर्माती है।


1757742198010

खाना खा कर मैं बाहर टहलने आ गया। कुछ देर बाद मैंने यू ही छत की ओर देखा, विशाखा वहां खड़ी हो कर मुझे देख रही थी। मुझे देख कर वो झट से छुप गई।

मैंने मुस्कराया, और भाग कर अंदर गया। मैं भी अब छत पर जा रहा था।

मैं छत पर पहुंचा, लेकिन विशाखा शायद मुझे नीचे ही ढूंढ रही थी। वो रेलिंग से झुक कर मुझे अभी भी नीचे खोज रही थी।

मैं उसके पीछे धीरे से गया, लेकिन पता नहीं कैसे उसे पता चल गया और वह पीछे मुड़ गई। मुझे देख के वह शर्मा के लाल हो गई थी। उसकी नजरे मेरी नजरों से मिल ही नहीं रही थी और मैं उसे ही ताड़े जा रहा था।

अंधेरे में भी वह चांद सी चमक रही थी, हल्की गर्म हवा चल रही थी, उसके खुले बाल उड़ रहे थे, हम दोनों के बीच सिर्फ सन्नाटा था।


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हर बार की तरह, मैंने सन्नाटे को तोड़ते हुए कहा,

मैं: “I Love You Too.”

जिसे सुन कर विशाखा लाल टमाटर हो गई, वो मुझे देख मुस्कुराई और भाग के नीचे चली गई।


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मैं छत पर ही था, शरीर मेरा भी ठंडा पड़ चुका था क्योंकि किसी लड़की ने मुझे आगे से प्रपोज किया और मैंने उसे हां कह दिया।

शर्मा तो मैं भी रहा था, लेकिन खुशी भी इतनी हो रही जो शब्दों बयान करना मुश्किल है। मैं अपनी खुशी में डूबा ही था तभी मुझे एक ख्याल आता है, जिससे मेरा मुंह उतर जाता है।

वो ख्याल था कि, विशाखा मेरी मौसेरी बहन है, और उसके साथ संबंध में होना समाज में वर्जित है और यह अनैतिक संबंध में गिना जायेगा।

एक ही छत के नीचे रह कर प्यार करते करते अगर हम पकड़ा गए तो बड़ी मुश्किल हो जाएगी। अभी तो ठीक है लेकिन अगर हमारा प्यार गहरा हो गया तो हम भविष्य में क्या करेगें? क्या यह समाज, हमारे घरवाले हमें साथ रहने देंगे?

फिर मैंने खुद को दिलासा देते हुए कहां कि जो होगा देखा जाएगा, जमाना बदल चुका आज कल कुछ भी हो सकता है।

फिर मैं अपने कमरे में चला गया। मुझे देर

तक नींद नहीं आई लेकिन आखिर में मैं सो ही गया।
Badhiya update
 

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अध्याय 5 - गपशप और बातचीत

अगले दिन, सुबह 6 बजे जब मैं सो रहा था, तब विशाखा मुझे उठाने आई। उसने मुझे छेड़ते हुए उठाया मेरे जग ते ही वह भागने लगी, तभी मैंने उसकी कलाई पकड़ ली। वह मेरी ओर मुड़ी और हंसने लगी।

मैंने उसे मेरी ओर खींचा, तो उसका मुंह मेरी मुंह के ऊपर आ कर रुका, उसके बाल सामने के और गिर गए, उसकी आँखें बंद होगे, वह पल काफी रोमांटिक था। मैंने उसके बालों को पीछे किया।


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कुछ देर बाद वो एकदम मेरे दूर होगी और उसने एकदम हल्की प्यारी आवाज में कहा,

विशाखा: “तुम्हें पापा बुला रहे है नीचे।”

ऐसा कहती ही वो भाग गई। मैं उठा चेहरा धोया और नीचे हॉल में चला गया। हॉल में सोफे पर मेरे मौसा जी बैठे हुए थे। उन्हें मुझे बैठने को कहा और बोले,

मौसा जी: “बेटा तुम्हें बाइक चलानी आती है?”

मैंने हां के जवाब में सिर हिलाया।

मौसा जी: “दरसल मैं कुछ काम से 3 दिनों के लिए दूसरे शहर जा रहा हूं। तुम मुझे बाइक से रेलवे स्टेशन तक छोड़ देना फिर बाइक घर पर लेकर आ जाना।”

यह बात सुनकर मैं काफी खुश हो चुका था, क्योंकि अगर मौसा जी चले जाते है तो घर ओर मैं, विशाखा और मासी ही रहेंगे, जो मेरे लिए एक सुनहरा मौका था।

मैं: “जी, ठीक है।”

कुछ देर बाद मेरी मासी किचन से मौसा जी के लिए चाय लेकर आती है। उन्होंने एक लाल कलर की, साटिन की नाइटी पहनी थी। नाइटी पर गले का कट डीप था, मासी की दो बड़ी बड़ी दूध की फैक्ट्रीज इसमें काफी उभर के दिख रही थी। मेरा तो मन कर रहा था अभी उन्हें दबा आकर सारा दूध बाहर निकल दु। उनसे तो इतना दूध निकले गा कि 10 सालों तक उनके घर दूध की कमी नहीं होगी।


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मासी मौसा को चाय देने के बाद फिर से किचन में चली गई। अपनी चाय खत्म करने के बाद मौसा जी उनकी बैग लेने अपने कमरे में चले गए।

तभी किचन की और से विशाखा हॉल की तरफ चलती हुई आई। उसके मुंह पर कोई भाव नहीं था। जैसे ही वो हॉल में आई, उसने अपने कदम रोक लिए। और मुझे देख कर मुस्कुराने लगे, मैने भी मुस्कराते हुए उसे देख। अब वह मुझसे इतनी शर्मा थी कि जैसे हमारी अभी अभी शादी हुई हो।

अब वो चली गई, मौसा जी भी अपना बैग लेकर बाहर आए और फिर हम रेल्वे स्टेशन के ओर चले गए।

मौसा जी को छोड़ने के बाद, मैं लौट आया और बाइक को पार्क कर के घर के अंदर घुसने लगा। तभी मुझे किसी की आवाज सुनाई आई। मेरी मासी और कोई और औरत अंदर बैठ के बातें कर रही थीं।

मैं उस औरत को नहीं जानता था। मगर मैं उनकी बातें बाहर ही छुप कर सुनने लगा।

औरत: “आपके घर वो लड़का कौन आया है?”

मासी: “वो मेरा भांजा आया हुआ है हमारे घर।”

औरत (मजाकिया अंदाज में): “अच्छा, मुझे लगा कि कोई लड़का रख लिया है आपने अपने लिए।”

मासी: “कैसी बातें करती हो तुम!”

औरत (चिढ़ाते हुए): “अरे, अच्छा खासा जवान लड़का है, क्यों मौका छोड़ रही हो!”

मासी हंसते हुए चुप रही।

औरत: “आपको भी तो संतुष्ट नहीं है ना, तो क्या दिक्कत है।”

मासी (हंसने हुए, मजाक में): “ऐसा लगता है मुझसे ज्यादा तुम्हें जरूरत है।”

वे दोनों जोर जोर से हंसने लगे। तभी मैं अंदर घुसता हूं और उन्हें वहां बैठा हुआ देखता हु।


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मासी के साथ जो बैठी थी वह बाजू वाली भाभी थी, उन्होंने एक लाल कलर की साड़ी पहनी थी जिसमें वह एकदम माल लग रही थी।


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मुझे देख उनकी बातें बंद हो गयी और मौसी ने मुझे देख कर बोला,

मासी: “आ गया बेटा!”

मैं अपने कमरे की ओर जा रहा था, चलते चलते मैंने कहा,

मैं: “जी।”

फिर में सीढ़ियों पर ही रुक गया, रुक कर उनकी बातें सुनने लगा।

भाभी जी: “लोंडा तो बड़ा तगड़ा है।”

मासी (हंसते हुए): “बस कर, मेरे भांजे को नजर ना लगा।”

भाभी जी: “अब आप से नजर नहीं लगती तो हमें लगाने दीजिए।”

दोनों फिर से हंसने लगे। उनकी बातें खत्म नहीं होने वाली थी, और मैं उधर उनकी बातें सुनता हुआ खड़ा नहीं हो सकता था। मुझे अपनी नींद पूरी करनी थी। मैं जा कर सो गया।

फिर, उठने के बाद में नहाया, खाना खाया और अपने कमरे टाइमपास करने लगा। दिन काफी बोर हो रहा था, तभी मैंने सोचा विशाखा के साथ टाइमपास कर लेता हूं।

जब मैं उसके कमरे में पहुंचा तो देख वह सो रही थी। सोते हुए वो काफी क्यूट दिख रही थी। मैं उसे निहारते ही रह गया।

फिर मैं वह से निकल कर नीचे गया। हॉल में भी कोई नहीं था। फिर मैं अपनी मासी के कमरे की ओर गया। मासी के कमरे का दरवाजा खुला था, घर में चारों तरफ सन्नाटा था।

मैंने मासी को देख, वह एक पीले कलर का सूट पहन कर अपने बेड पर बैठी कुछ पुरानी तस्वीरें देख रही थी। मैंने यूं ही मजाक में कहा,


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मैं: “अरे वाह मासी, आप तो आपकी पौराणिक तस्वीरें देख रही हो। कही डायनासोर भी देखे क्या उसमें?”

मासी ने अपनी नज़रे एल्बम पर ही बनाए रखी, मुकरते हुए उन्होंने कहा,

मासी: “हां… एक तो अभी मेरे रोम में घुस आया है।”

मैं यह सुन कर हंसने लगा, मासी भी हंस रही थी और जाकर उसके पास बैठ गया।

फिर में उनकी एक पुरानी तस्वीर देखता हूं, मासी बिल्कुल विशाखा जैसी दिखती थी। मैंने यूं ही मजाक में पूछा,

मैं: “ये विशु है क्या? कितनी क्यूट दिख रही है।”

मासी ने मेरी ओर देखा, एक स्माइल के साथ कहा,

मासी: “अरे बुद्धू, ये मैं हूं।”

मासी को और मस्का लगाते हुए मैंने चौंकने की एक्टिंग की और कहा,

मैं: “क्या बात कर रहे हो! मतलब आप तो फुल हीरोइन थी। अगर आप आज के जमाने में होती तो सोशल मीडिया क्वीन होती।”

मासी (मुस्कराते हुए और चिढाते हुए): “और तुम जैसे दिन भर DMs रिफ्रेश करते रहते।”

मैं: “मैं तो आपका फॉलोवर नंबर 1 रहता।”

मासी और मैं हंस देते है और मासी मुझे चिढ़ाते हुए कहती है,


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मासी: “hmm… ये lines अपने age की लड़कियों पर मारना, मुझे एक बहु तो मिल जाएगी!”

मैं: “अरे मासी, बहुत lines मारी… पर कोई सुनता ही नहीं। सब ignore कर देते है।”

मासी: “सही है, तुम जैसों की बातें सुनकर सब भाग जाएंगी।”

मैं: “पर आप तो अभी तक बैठी है।”

मासी मुझे देखते रही, उनका चेहरा लाल पड़ रहा था। फिर से सन्नाटा हो गया, लेकिन अब मासी हल्की आवाज में बोली बोली,

मासी: “तुम्हे बस टाइमपास करना आता है।”

मैं वह से जाते जाते बोला।

मैं: “टाइमपास तो सब करते है, आपके साथ तो तुम रुक जाता है।”

मासी की धड़कने तेज होगी, वह शरमाने लगी। शायद उनके मन में मैंने प्यार का बीज बो दिया था।
Bhout hi romantic updates de rahe ho bhai
 
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