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Incest मासी का घर (सेक्सी मासी और मासी की बेटी)

Should I rewrite the ending in better way? Taking some time?

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tyro

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Shandaar update
मासी का घर
अध्याय 3.5 - प्रस्ताव

घर पर पहुंचने के बाद, विशाखा कुछ कहे बिना ही अपने कमरे में चली गई और में वही हॉल में सोफे पर अपना मोबाइल चलाते हुए बैठ गया। ऐसा नहीं था कि जो हुआ था मैं उसे भुला चुका था, मैं समझ नहीं पा रहा था कि विशाखा के मन क्या चल रहा है।

हम दोनों काफी अच्छे से घूमे, काफी बातें की लेकिन जो उसने आखिर में किया इसका उद्देश्य क्या था। उसके ओठों के स्पर्श से जो मेरे गालों को महसूस हुआ था वह उसके ओठों के हटने के बाद भी, अभी तक हो रहा था।

मैं मोबाइल चला ही रहा था तभी मेरी मासी उनके कमरे से निकल कर हॉल में आती है। वे मेरे सामने ही अपने कमर पर हाथों को रखें, मेरी ओर देखती हुई खड़ी थी मगर विशाखा की उस हरकत के विचारों में मैं डूबा हुआ था।


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मासी ने मुझे कुछ देर ऐसे ही देखा और फिर मेरे बाजू में आकर बैठ गई, एकदम सट के। में काफी देर से एक ही वीडियो देख रहा था।

मासी: “फोन छोड़ो जरा… आंखें खराब हो जाएगी।”

मेरा ध्यान एकदम से मासी की ओर गया। फिर में सारे विचार छोड़ कर मासी से बात करने लगा,

मैं: “अरे मासी, वैसे भी जिंदगी में कुछ मजा नहीं है, फोन ही एक सहारा है।”

मासी: “हां, और लोग बोरिंग लगते है न?”

मैं: “आप तो कभी बोरिंग हो ही नहीं सकती, सिर्फ सब अपने अपने कामों में व्यस्त है।”

मासी: “और बताओ कॉलेज कैसा चल रहा है तुम्हारा, पढ़ाई के अलावा और कुछ भी करती हो या सिर्फ मोबाइल से चिपके रहते हो।”

मैं: “पढ़ाई तो चल रही है, उसके अलावा इवेंट्स में भी पार्टिसिपेट कर लेता हूं, अच्छा खासा टाइमपास होता है।”

मासी: “अरे वाह, किन किन चीजों में पार्टिसिपेट किया था?”

मैं: “अपना तो स्पोर्ट्स ही है, और कभी कभी पेंटिंग कंपटीशन में भी हिस्सा ले लेता हूं।”

ऐसे ही हमारी काफी बातें हुई, सूरज ढलने लगा और अंधेरा बढ़ने लगा। मासी और मेरी काफी अच्छी जमती है, वे मुझसे काफी मजाकिया स्वभाव से बातें करती है। मासी से लंबी देर तक बातें करने के बाद मैं अपने कमरे में जाने लगा।

जाते जाते मुझे विशाखा के कमरे का दरवाजा खुला हुआ नजर आया। मैं उसके साथ उस विषय बात करना चाहता था। मैं उसके दरवाजे पर खड़ा हो गया। वह दरवाजे के ओर ही देख रही थी। मैने कहा,

मैं: “विशाखा… जो तालाब के किनारे हुआ उसका मतलब क्या था।”

विशाखा आगे बढ़ी और दरवाजे को बंद करते हुए हल्की आवाज में बोली,

विशाखा: “खुद समझ जाओ!”

मैं फिर से सोच में चला गया। सोचते सोचते मैं अपने कमरे में आ गया। मैं अपने सिर को खुजा ही रहा था कि पीछे विशाखा की से वह आई।

विशाखा: “बुद्धू!”

मैं पीछे मुड़ा। वह मेरे नज़दीक आई और मेरे आंखों में देखने लगी।

विशाखा: “बचपन से ही तुम मुझे काफी पसंद हो। विशाल, तुम मेरे crush हो। मैं तुम्हे काफी ज्यादा पसंद करती हूं।”

ऐसा कह कर वह भाग कर अपने कमरे में चली गई। मैं शर्म से लाल हो चुका था। फिर में बिस्तर पर लेट गया और पता नहीं कब मेरी आंख लग गई।

मैं जब उठा तो खाने का समय हो चुका था। मैं नीचे गया तो विशाखा डायनिंग टेबल पर बैठी हुई थी और मासी खाना लगा रही थी। मैं विशाखा के बाजू में जाकर बैठ गया। उसने उसके बाद के शब्द नहीं

कहा था। मेरी मासी भी बैठ गई और हम खाना खाने लगे।
 
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parkas

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मासी का घर
अध्याय 4 - स्वीकारोक्ति (confession)

पिछले अपडेट में मैंने आपको बताया कि क्यों विशाखा ने मुझे kiss किया था और अब हम तीनों खाना खाने लगे थे।

खाना खाते खाते मैंने सन्नाटे को थोड़ा, मासी को पूछा,

मैं: “मासी, मौसा जी आए नहीं अब तक?”

मासी: “आज वो देर से आने वाले थे।”

मैं: “हमेशा से वह एक busy आदमी रहे है।”

मासी: “बेटा busy तो आज कल तुम भी हो गए हो, हमारा कॉल भी नहीं उठाते।”

मैं: “अरे मासी, मैं कहा का busy, बस कॉलेज और साइड के काम manage कर रहा हूँ।”

मासी: “ज्यादा टेंशन मत लिया करो, देखो कितने पतले होते जा रहे हो।”

मैं: “अब आपके हाथ का खाना खा कर फिर से अच्छा हो जाऊंगा।”

मासी और मेरी काफी सारी बातें हुई, मजाक हुए मगर विशाखा ने कुछ नहीं कहा, बस हमें बातें करते हुए देखती रही और मुस्कराते रही, वो मेरे बाजू में बैठी बिल्कुल मेरी नई नवेली दुल्हन जैसी दिख रही थी जो काफी शर्माती है।


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खाना खा कर मैं बाहर टहलने आ गया। कुछ देर बाद मैंने यू ही छत की ओर देखा, विशाखा वहां खड़ी हो कर मुझे देख रही थी। मुझे देख कर वो झट से छुप गई।

मैंने मुस्कराया, और भाग कर अंदर गया। मैं भी अब छत पर जा रहा था।

मैं छत पर पहुंचा, लेकिन विशाखा शायद मुझे नीचे ही ढूंढ रही थी। वो रेलिंग से झुक कर मुझे अभी भी नीचे खोज रही थी।

मैं उसके पीछे धीरे से गया, लेकिन पता नहीं कैसे उसे पता चल गया और वह पीछे मुड़ गई। मुझे देख के वह शर्मा के लाल हो गई थी। उसकी नजरे मेरी नजरों से मिल ही नहीं रही थी और मैं उसे ही ताड़े जा रहा था।

अंधेरे में भी वह चांद सी चमक रही थी, हल्की गर्म हवा चल रही थी, उसके खुले बाल उड़ रहे थे, हम दोनों के बीच सिर्फ सन्नाटा था।


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हर बार की तरह, मैंने सन्नाटे को तोड़ते हुए कहा,

मैं: “I Love You Too.”

जिसे सुन कर विशाखा लाल टमाटर हो गई, वो मुझे देख मुस्कुराई और भाग के नीचे चली गई।


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मैं छत पर ही था, शरीर मेरा भी ठंडा पड़ चुका था क्योंकि किसी लड़की ने मुझे आगे से प्रपोज किया और मैंने उसे हां कह दिया।

शर्मा तो मैं भी रहा था, लेकिन खुशी भी इतनी हो रही जो शब्दों बयान करना मुश्किल है। मैं अपनी खुशी में डूबा ही था तभी मुझे एक ख्याल आता है, जिससे मेरा मुंह उतर जाता है।

वो ख्याल था कि, विशाखा मेरी मौसेरी बहन है, और उसके साथ संबंध में होना समाज में वर्जित है और यह अनैतिक संबंध में गिना जायेगा।

एक ही छत के नीचे रह कर प्यार करते करते अगर हम पकड़ा गए तो बड़ी मुश्किल हो जाएगी। अभी तो ठीक है लेकिन अगर हमारा प्यार गहरा हो गया तो हम भविष्य में क्या करेगें? क्या यह समाज, हमारे घरवाले हमें साथ रहने देंगे?

फिर मैंने खुद को दिलासा देते हुए कहां कि जो होगा देखा जाएगा, जमाना बदल चुका आज कल कुछ भी हो सकता है।

फिर मैं अपने कमरे में चला गया। मुझे देर

तक नींद नहीं आई लेकिन आखिर में मैं सो ही गया।
Nice and lovely update....
 

tyro

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Story ki pace/speed jyada fast ya slow ho gyi ho toh please mujhe feedback dijiye. Apki salah se story aur acchi ban sakti hai.
Maybe story ki speed thodi slow hogi to acha lagega . Vishal Vishakha ko puri tarah accept karne me thoda time lena chahiye. dono ke bich kuch sweet movements ho or mosi ke sath slow seduction hona chahiye
 
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Rajizexy

Punjabi Doc💊
Supreme
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मासी का घर
अध्याय 1- मासी मिलन

परिचय -

मैं (विशाल) : मैं एक 18 वर्षीय नौजवान हूं, सेक्स के लिया काफी ज्यादा उत्तेजित हूं। मेरा लंड 7 इंच लंबा और 2 इंच चौड़ा है। मुझे बचपन से ही मेरी मासी से प्यार था।


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उर्मिला : 36 वर्षीय मेरी मासी, एक हाउसवाइफ है। इनका रंग गोरा है और शरीर गदराया, सुडौल, चिकना है। उनका फिगर 38-40-38 है।

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विशाखा : मेरे मासी की बेटी, उम्र मेरे बराबर है। शरीर चिकना, फिट है, बिल्कुल अपनी मां जैसा चिकना बदन। मैने मेरी मां से सुना है कि मेरी मासी भी अपनी जवानी में ऐसी ही दिखती थी। इसका फिगर 36-24-36 है।

तरुण : मेरी मौसा जी, जिनकी उम्र 44 साल है। इनकी एक सुपरशॉप है। अपने बिसिनेज में काफी बिजी व्यक्ति है।

---

यह बात उन दिनों की जब मैं 18 साल का हुआ ही था। इस उम्र में जवानी अपने चरम पर होती है। मैं इस उम्र में सेक्स के लिए काफी उत्सुक था। Incest पॉर्न (अनाचार) काफी देखने के बाद मैं अपने ही परिवार वालों को गंदी नजरों से देखता था।

मेरे ना कोई मामा थे, ना ही नाना नानी जिंदा थे। इस वजह से मैं गर्मियों की छुट्टियों में अपने मासी के घर जाया करता था। वहां मेरी मौसेरी बहन विशाखा थी जिसके साथ मेरी काफी बनती है।चार साल हो चुके थे, मैं चार सालों से मेरी मासी घर नहीं गया था। मगर इस बार में मुझे जाना ही था।

श्याम का समय था, दिन ढल रहा था। मैं अपने मासी घर पहुंचा और डोर बेल बजाई। मेरी मासी ने दरवाजा खोला। उन्होंने एक सफेद साड़ी पहनी थीं, वे काफी सुंदर दिख रही थी।


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मुझे देखकर उन्होंने मुझे कस के गले लगाया। उनकी बाहें काफी गरम महसूस हो रही थी। फिर उन्होंने मेरे कंधों पर हाथ रखते हुए मुझसे कहा,

मासी: "कड़ी बड़े हो गए हो बेटा।"

मैं: "हां, बिल्कुल।"

फिर उन्होंने मुझे अंदर बुलाया। अंदर घुसते ही मैं विशाखा से मिला। वो भी काफी जवान होगया थी, हाइट में मेरे बराबर होगी थी। मैने अपनी बैग सोफे पर रखी और आराम से बैठ गया। विशाखा और मैने अपनी बातें चालू कर दी। मासी किचेन में चली गई थी।

बातों ही बातों में, विशाखा ने मुझे नहाने के लिए कहा। सफर के बाद मैं भी काफी थक चुका था इसलिए झट से नहाने चला गया।

मेरे मासी के घर 3 बेडरूम्स थे, एक में मेरी मासी मौसा सोते थे और एक में विशाखा और एक गेस्ट रूम था जिसमें अब में रह रहा था। 2 बेडरूम फर्स्ट फ्लोर पर थे और एक बेडरूम ग्राउंड फ्लोर पर, कॉमन बाथरूम, किचेन attached with डायनिंग रूम और हॉल भी ग्राउंड फ्लोर पर था।

नहाने के बाद मैं कपड़े बदल के डायनिंग रूम में चला गया। मेरा मौसा जी घर वालिस आ गए थे और रात भी हो गई थी। मौसा जी डायनिंग टेबल पर बैठे थे और मासी किचेन में काम कर रही थी। मासी ने साटिन के कपड़े का स्लीवलेस गाउन पहनना था, जिसमें वे काफी सेक्सी लग रही थी।

डायनिंग टेबल पर बैठ कर मैने और मौसा जी ने अपने बातें चालू कर थी। काफी समय बाद मासी टेबल पर खाना लगाने लगी तभी मैं भी उनकी मदद के लिए कुछ सामान लाने लगा। इसी बीच उनके नंगे हाथ मेरे बाहों को छू रही थी, उनका वह घर्षण काफी था मुझे उत्तेजित करने के लिए।

खाना लगाने के बाद मैं डायनिंग टेबल पर बैठ गया और मासी ने परसोना चालू किया। जब वे मुझे परोस रही थी तभी उनकी दीप नेक से उनके बड़े बड़े दूध से बाहरी स्तन और उनके बीच की गहरी दरार मुझे नजर आई। वह मेरी ओर झुकी हुई थी और वैसे ही रुक गई, उन्होंने विशाखा को आवाज लगाई। मेरा लंड खड़ा होकर चट्टान बन चुका था।

खाना खाने के बाद में अपने कमरे में चला गया और बिस्तर पर लेट कर वही दृश्य याद करने लगा। पूरी रात मैने उस नजारे को याद करते हुए मुठ मारी।
Kamuk, romantic start 👌 👌 👌
 

Toto Monkie

Loves_Padosan
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Maybe story ki speed thodi slow hogi to acha lagega . Vishal Vishakha ko puri tarah accept karne me thoda time lena chahiye. dono ke bich kuch sweet movements ho or mosi ke sath slow seduction hona chahiye
Thankyou for feedback. Main puri koshish karunga ki story ki pace slow ho aur characters ke bich sweet moments ho.
 
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Toto Monkie

Loves_Padosan
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मासी का घर
अध्याय 5 - गपशप और बातचीत

अगले दिन, सुबह 6 बजे जब मैं सो रहा था, तब विशाखा मुझे उठाने आई। उसने मुझे छेड़ते हुए उठाया मेरे जग ते ही वह भागने लगी, तभी मैंने उसकी कलाई पकड़ ली। वह मेरी ओर मुड़ी और हंसने लगी।

मैंने उसे मेरी ओर खींचा, तो उसका मुंह मेरी मुंह के ऊपर आ कर रुका, उसके बाल सामने के और गिर गए, उसकी आँखें बंद होगे, वह पल काफी रोमांटिक था। मैंने उसके बालों को पीछे किया।


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कुछ देर बाद वो एकदम मेरे दूर होगी और उसने एकदम हल्की प्यारी आवाज में कहा,

विशाखा: “तुम्हें पापा बुला रहे है नीचे।”

ऐसा कहती ही वो भाग गई। मैं उठा चेहरा धोया और नीचे हॉल में चला गया। हॉल में सोफे पर मेरे मौसा जी बैठे हुए थे। उन्हें मुझे बैठने को कहा और बोले,

मौसा जी: “बेटा तुम्हें बाइक चलानी आती है?”

मैंने हां के जवाब में सिर हिलाया।

मौसा जी: “दरसल मैं कुछ काम से 3 दिनों के लिए दूसरे शहर जा रहा हूं। तुम मुझे बाइक से रेलवे स्टेशन तक छोड़ देना फिर बाइक घर पर लेकर आ जाना।”

यह बात सुनकर मैं काफी खुश हो चुका था, क्योंकि अगर मौसा जी चले जाते है तो घर ओर मैं, विशाखा और मासी ही रहेंगे, जो मेरे लिए एक सुनहरा मौका था।

मैं: “जी, ठीक है।”

कुछ देर बाद मेरी मासी किचन से मौसा जी के लिए चाय लेकर आती है। उन्होंने एक लाल कलर की, साटिन की नाइटी पहनी थी। नाइटी पर गले का कट डीप था, मासी की दो बड़ी बड़ी दूध की फैक्ट्रीज इसमें काफी उभर के दिख रही थी। मेरा तो मन कर रहा था अभी उन्हें दबा आकर सारा दूध बाहर निकल दु। उनसे तो इतना दूध निकले गा कि 10 सालों तक उनके घर दूध की कमी नहीं होगी।


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मासी मौसा को चाय देने के बाद फिर से किचन में चली गई। अपनी चाय खत्म करने के बाद मौसा जी उनकी बैग लेने अपने कमरे में चले गए।

तभी किचन की और से विशाखा हॉल की तरफ चलती हुई आई। उसके मुंह पर कोई भाव नहीं था। जैसे ही वो हॉल में आई, उसने अपने कदम रोक लिए। और मुझे देख कर मुस्कुराने लगे, मैने भी मुस्कराते हुए उसे देख। अब वह मुझसे इतनी शर्मा थी कि जैसे हमारी अभी अभी शादी हुई हो।

अब वो चली गई, मौसा जी भी अपना बैग लेकर बाहर आए और फिर हम रेल्वे स्टेशन के ओर चले गए।

मौसा जी को छोड़ने के बाद, मैं लौट आया और बाइक को पार्क कर के घर के अंदर घुसने लगा। तभी मुझे किसी की आवाज सुनाई आई। मेरी मासी और कोई और औरत अंदर बैठ के बातें कर रही थीं।

मैं उस औरत को नहीं जानता था। मगर मैं उनकी बातें बाहर ही छुप कर सुनने लगा।

औरत: “आपके घर वो लड़का कौन आया है?”

मासी: “वो मेरा भांजा आया हुआ है हमारे घर।”

औरत (मजाकिया अंदाज में): “अच्छा, मुझे लगा कि कोई लड़का रख लिया है आपने अपने लिए।”

मासी: “कैसी बातें करती हो तुम!”

औरत (चिढ़ाते हुए): “अरे, अच्छा खासा जवान लड़का है, क्यों मौका छोड़ रही हो!”

मासी हंसते हुए चुप रही।

औरत: “आपको भी तो संतुष्ट नहीं है ना, तो क्या दिक्कत है।”

मासी (हंसने हुए, मजाक में): “ऐसा लगता है मुझसे ज्यादा तुम्हें जरूरत है।”

वे दोनों जोर जोर से हंसने लगे। तभी मैं अंदर घुसता हूं और उन्हें वहां बैठा हुआ देखता हु।


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मासी के साथ जो बैठी थी वह बाजू वाली भाभी थी, उन्होंने एक लाल कलर की साड़ी पहनी थी जिसमें वह एकदम माल लग रही थी।


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मुझे देख उनकी बातें बंद हो गयी और मौसी ने मुझे देख कर बोला,

मासी: “आ गया बेटा!”

मैं अपने कमरे की ओर जा रहा था, चलते चलते मैंने कहा,

मैं: “जी।”

फिर में सीढ़ियों पर ही रुक गया, रुक कर उनकी बातें सुनने लगा।

भाभी जी: “लोंडा तो बड़ा तगड़ा है।”

मासी (हंसते हुए): “बस कर, मेरे भांजे को नजर ना लगा।”

भाभी जी: “अब आप से नजर नहीं लगती तो हमें लगाने दीजिए।”

दोनों फिर से हंसने लगे। उनकी बातें खत्म नहीं होने वाली थी, और मैं उधर उनकी बातें सुनता हुआ खड़ा नहीं हो सकता था। मुझे अपनी नींद पूरी करनी थी। मैं जा कर सो गया।

फिर, उठने के बाद में नहाया, खाना खाया और अपने कमरे टाइमपास करने लगा। दिन काफी बोर हो रहा था, तभी मैंने सोचा विशाखा के साथ टाइमपास कर लेता हूं।

जब मैं उसके कमरे में पहुंचा तो देख वह सो रही थी। सोते हुए वो काफी क्यूट दिख रही थी। मैं उसे निहारते ही रह गया।

फिर मैं वह से निकल कर नीचे गया। हॉल में भी कोई नहीं था। फिर मैं अपनी मासी के कमरे की ओर गया। मासी के कमरे का दरवाजा खुला था, घर में चारों तरफ सन्नाटा था।

मैंने मासी को देख, वह एक पीले कलर का सूट पहन कर अपने बेड पर बैठी कुछ पुरानी तस्वीरें देख रही थी। मैंने यूं ही मजाक में कहा,


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मैं: “अरे वाह मासी, आप तो आपकी पौराणिक तस्वीरें देख रही हो। कही डायनासोर भी देखे क्या उसमें?”

मासी ने अपनी नज़रे एल्बम पर ही बनाए रखी, मुकरते हुए उन्होंने कहा,

मासी: “हां… एक तो अभी मेरे रोम में घुस आया है।”

मैं यह सुन कर हंसने लगा, मासी भी हंस रही थी और जाकर उसके पास बैठ गया।

फिर में उनकी एक पुरानी तस्वीर देखता हूं, मासी बिल्कुल विशाखा जैसी दिखती थी। मैंने यूं ही मजाक में पूछा,

मैं: “ये विशु है क्या? कितनी क्यूट दिख रही है।”

मासी ने मेरी ओर देखा, एक स्माइल के साथ कहा,

मासी: “अरे बुद्धू, ये मैं हूं।”

मासी को और मस्का लगाते हुए मैंने चौंकने की एक्टिंग की और कहा,

मैं: “क्या बात कर रहे हो! मतलब आप तो फुल हीरोइन थी। अगर आप आज के जमाने में होती तो सोशल मीडिया क्वीन होती।”

मासी (मुस्कराते हुए और चिढाते हुए): “और तुम जैसे दिन भर DMs रिफ्रेश करते रहते।”

मैं: “मैं तो आपका फॉलोवर नंबर 1 रहता।”

मासी और मैं हंस देते है और मासी मुझे चिढ़ाते हुए कहती है,


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मासी: “hmm… ये lines अपने age की लड़कियों पर मारना, मुझे एक बहु तो मिल जाएगी!”

मैं: “अरे मासी, बहुत lines मारी… पर कोई सुनता ही नहीं। सब ignore कर देते है।”

मासी: “सही है, तुम जैसों की बातें सुनकर सब भाग जाएंगी।”

मैं: “पर आप तो अभी तक बैठी है।”

मासी मुझे देखते रही, उनका चेहरा लाल पड़ रहा था। फिर से सन्नाटा हो गया, लेकिन अब मासी हल्की आवाज में बोली बोली,

मासी: “तुम्हे बस टाइमपास करना आता है।”

मैं वह से जाते जाते बोला।

मैं: “टाइमपास तो सब करते है, आपके साथ तो तुम रुक जाता है।”

मासी की धड़कने तेज होगी, वह शरमाने लगी। शायद उनके मन में मैंने प्यार का बीज बो दिया था।
 

sunoanuj

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मासी का घर
अध्याय 3 - प्रेम भ्रमण

विशाखा की जिद्द पर मैं और वह घर के बाहर घूमने निकल गए। उसने एक white camisole, grey jacket और denim shorts पहना था।

उसका outfit:


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गर्म मौसम था और सीमेंट के रोड पर, आजू बाजू के पेड़ों की ठंडी छांव थी। मैं उसे पूंछ की नहीं की कहां जाना था, बस उसके साथ साथ चलते रहा। फिर मैंने पूँछ ही लिया।


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मैं: “कहां चलना है?”

विशाखा: “तुम बस चलो मेरे साथ।”

मैं: “अरे बता नहीं तो जा रहा हूं मैं।”

विशाखा: “अरे, तुम्हे एक मस्त जगह दिखानी है।”

फिर मैंने ज्यादा पूछ ताज नहीं कि, कौन एक सुंदर लड़की के साथ घूमना नहीं पसंद करेगा। कुछ दूर चलने पर रस्ते में कुछ कुत्ते हमें देख कर भोंकने लगे। डर के मारे विशु मुझसे चिपक गई और मेरा हाथ थाम लिया।

विशाखा: “मुझे कुत्तों से डर लगता है।”

मैं हंसते हंसते उसे लेकर आगे बढ़ता रहा। वह पल काफी बेहतरीन था।

कुछ देर में हम पार्क पहुंचे, वहां काफी ठंडक थी, काफी पेड़ और झाड़ियां थी। कुछ देर हम पैदल ही चले।


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विशाखा: “ये हमारे यहां का सबसे अच्छा पार्क है।”

मैं: “काफी बढ़िया है, गर्मियों में भी ठंड है यहां।”

विशाखा: “ये पार्क काफी टूरिस्ट को आकर्षित करता है। मेरी योगा की क्लास भी यही होती है सुबह।”

मैं: “अच्छा, तो तुम सुबह सुबह यहां आती हो।”

विशाखा: “हां, सुबह के समय यह काफी अच्छा लगता है।”

कुछ दूर चलने पर हमें कुछ आवाज आई। कुछ दूर पर झाड़ियां काफी जोर से हिल रही थी। कोई लड़की बड़ी जोर से सिसकारियां ले रही थी झाड़ियों में। मैं समझ चुका था यहां कोई किसी को पेल रहा था मगर मैं चुप था। विशाखा के सामने मैं एकदम शरीफ बनने की कोशिश कर रहा था। तभी विशाखा बोली,

विशाखा: “देखो, ऐसे जानवरों को भी आकर्षित करता है ये पार्क।”

मैने मेरा मुंह उसकी तरफ किया, उसने भी मुझे देखा। हम दोनों के सिर एक दूसरे की तरफ था। हम दोनों के बीच सन्नाटा था। फिर एकदम से हम दोनों ही जोर से हंसने लगे।

सबसे अच्छी बात तो ये थी कि अब भी उसका हाथ मेरे हाथों में था। पार्क के दूसरे कोने में हम दोनों एक बेंच पर जाकर बैठ गए।


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विशाखा हंसते हुए बोली,

विशाखा: “क्या लोग है, कही भी चालू हो जाते है।”

मैंने भी मुस्कुराहट के साथ कहा,

मैं: “बहुतों की तो fantasies ही ऐसी होती है।”

विशाखा: “अरे मगर अपने घर करो ना जो करना है।”

मैं: “छोड़ो न, अपने को क्या करना है!”

विशाखा: “सही है। वैसे तुमने किसको पटाया कि नहीं?”

मैं: “अरे तुम्हे लगता है मुझसे कोई सेट होगी!?”

ऐसे ही बातें करते करते है काफी देर हो गई, श्याम होने को आई थी। विशाखा उठकर बोली,

विशाखा: “चलो, तुम्हे अब तो एक इससे भी प्यारी जगह देखनी है।”

फिर हम दोनों पार्क से निकल कर फिर बातें करते हुए चल पड़े। काफी दूर तक चलने के बाद विशाखा रुक गई। मैंने उससे पूछा,

मैं: “क्या हुआ, क्यों रुक गई?”

विशाखा: “अपने left side देखो।”


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मैं जैसे बाईं ओर मुड़ा, मैंने काफी सुंदर नजारा देखा। श्याम का वह केसरिया आसमान जो एक तालाब में दिख रहा था। तलब और उसके आजू बाजू का नजारा भी काफी सुंदर था।

विशाखा ने तालाब की ओर देखते हुए हल्के टोन में बोली,

विशाखा: “मुझे जब भी low feel होता है, या मैं बोर हो जाती हूं, या कुछ करने का मन नहीं होता तो मैं यही आती हूं।”

मैं सिर्फ तालाब और देखता रहा।

विशाखा: “मैंने इस जगह के बारे में आज तक किसी को नहीं बताया, सिर्फ तुम्हें आज दिखाया।”

मैं: “ऐसा क्यों?”

वो शांत रही और सिर्फ उस तालाब की ओर देखती थी, मैं भी तालाब की खूबसूरती को ही निहार रहा था। एकदम सन्नाटा था, हल्की हवा चल रही थी।

एकदम से विशाखा से मेरी हाथों को जोर से जकड़ लिया। मैंने कुछ हरकत नहीं की। अचानक, उसने मेरे गालों पर किस किया और मेरा हाथ छोड़ कर वहां से जाने लगी।

मैं हैरान था, गालों पे हाथ लगते हुए बस उसे आगे चलते हुए देखते रहा। जब वो कुछ दूरी पर चली गई उसने पीछे मुड़ कर देखा और फिर में भी उसके पीछे पीछे चला गया।

पूरे रस्ते मैं हैरान था और विशाखा मेरे एक-दो फूट की दूरी पर आगे चल रही थी। लौटते वक्त हमारे मुंह से एक शब्द नहीं निकला।


उनकी कॉलोनी में पहुंचने के बाद हम दोनों को उसे एक साथ देख कर काफी लोग हमे ही घूर रहे थे। फिर हम घर पहुंचे।
Bhaut hee jabardast update hai ..
 
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