Bhai updateThank you han try krta hu
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Bahut hi acha update brobilkul intgaar nhi ho rha aage kya hoga
Jab bhi lao thoda lamba update Lana
... waiting for next...
Nice going.Chapter 2: चाय की चुस्की और वो हल्की-हल्की अजीब सी हवा
सुबह के ८:१५ हो चुके थे। विजय की गाड़ी के जाने के बाद घर में एक अजीब सी शांति छा गई थी। बाहर अहमदाबाद की गर्मी पहले ही ३८ डिग्री पार कर चुकी थी, पंखे की हवा भी गर्म लग रही थी।
राधा ने रसोई साफ की। उसका सलवार-कमीज अभी भी वही था – हल्का पसीना आ गया था। दुपट्टा कंधे पर लापरवाही से पड़ा हुआ था। वो चाय का दूसरा कप बना रही थी। राहुल अभी भी किचन टेबल पर बैठा था, लैपटॉप खोला हुआ था, लेकिन उसकी आँखें बार-बार माँ की तरफ उठ रही थीं।
“मॉम… चाय में थोड़ी ज़्यादा चीनी डाल देना आज,” राहुल ने कहा, आवाज़ पूरी तरह नॉर्मल।
राधा ने पलटकर हल्के से मुस्कुराते हुए देखा। “हाँ बेटा… तुझे तो मीठा बहुत पसंद है।” उसने चम्मच घुमाया। कमीज़ की आस्तीन थोड़ी ऊपर चढ़ गई थी, पसीने की वजह से बाजू चिपक गई थी। राहुल ने एक पल के लिए उसकी गोरी बाजू और वहाँ की हल्की रगड़ देखी, फिर तुरंत नजरें लैपटॉप पर कर लीं।
राधा ने चाय का कप आगे बढ़ाया। जब वो झुकी, तो उसके भारी स्तन हल्के से हिले। दुपट्टा थोड़ा और सरक गया। राहुल ने चाय लेते वक़्त उसकी उँगलियों को छू लिया। दोनों की उँगलियाँ एक पल के लिए टकराईं। गर्मी की वजह से दोनों के हाथ थोड़े नम थे।
“थैंक्यू मॉम,” राहुल ने कहा और चाय की चुस्की ली।
राधा ने अपने कप के साथ उसके सामने ही बैठ गई। “आज ऑफिस से क्या काम है?”
“बस कुछ रिपोर्ट्स… घर से ही हो जाएगा।” राहुल ने चाय पीते हुए कहा। उसकी नजर एक पल के लिए माँ के गले पर पसीने की छोटी-सी बूँद पर अटक गई जो धीरे-धीरे नीचे की तरफ सरक रही थी।
राधा ने महसूस किया। लेकिन उसने कुछ नहीं कहा। बस दुपट्टा ठीक किया और चाय पीती रही।
“नेहा कॉलेज गई?” राधा ने पूछा।
“हाँ… बोली शाम को ६ बजे तक आएगी। प्रिया अभी भी ऊपर है न?” राहुल ने पूछा।
“हाँ… वो तो लेट उठती है। अभी शायद नहा रही होगी।” राधा ने कहा और उठकर सिंक की तरफ गई।
राहुल ने पीछे से देखा। मॉम की कमर, नितंब… सलवार का कपड़ा हल्का-हल्का चिपका हुआ था। वो बस एक पल देखता रहा, फिर खुद को झिड़का – “क्या सोच रहा है रे… ये तेरी माँ है।”
राधा ने बर्तन धोते हुए कहा, “बेटा… आज दोपहर में थोड़ी सब्जी लाना बाजार से। मैं भूल गई थी।”
“हाँ मॉम… ले आऊंगा।” राहुल ने जवाब दिया।
कुछ देर तक सिर्फ बर्तनों की खनक और पंखे की आवाज़ थी। फिर राधा ने अचानक पूछा, “राहुल… तू अब इतना बड़ा हो गया है… कोई लड़की वगैरह तो नहीं देख रहा ना?”
राहुल हँस पड़ा। “मॉम… अचानक ये सवाल?”
राधा ने शरमाते हुए सिर हिलाया। “नहीं… बस पूछ रही थी। तुम्हारे पापा तो अक्सर बाहर रहते हैं… सोचा तू अकेला तो नहीं है ना।”
“नहीं मॉम… सब ठीक है।” राहुल ने कहा। लेकिन उसकी आवाज़ में हल्की अजीब सी गर्माहट थी।
राधा ने मुड़कर देखा। “अच्छा… मैं ऊपर जाकर कपड़े सुखा लेती हूँ। तू काम कर।”
राधा ऊपर चली गई। राहुल ने एक गहरी साँस ली। उसका मन थोड़ा अजीब सा हो रहा था। मॉम की वो छोटी-सी बात, वो छुअन, वो पसीना… कुछ भी खास नहीं था, फिर भी उसका शरीर थोड़ा सा गर्म हो गया था। वो खुद को समझाने लगा – “ये सब नॉर्मल है… गर्मी है… घर है…”
ऊपर राधा ने बालकनी में कपड़े फैलाए। उसका मन भी कुछ विचलित था। विजय चला गया था और अब तीन दिन बाद आएगा। वो अकेली महसूस कर रही थी। लेकिन उसने खुद को झिड़का – “राधा… शर्म कर… ये तेरे बच्चे हैं।”
प्रिया नीचे आई। बाल अभी भी गीले थे। साधारण टी-शर्ट और लूज पैंट्स पहनी हुई थी। “मॉम… ब्रेकफास्ट क्या है?”
“पराठे बना देती हूँ बेटा।” राधा ने कहा।
तीनों साथ में बैठकर नाश्ता किया। बातें रोज़ वाली थीं – कॉलेज, ऑफिस, मौसम। राहुल ने प्रिया की तरफ देखा। बहन की टी-शर्ट थोड़ी टाइट थी, लेकिन उसने तुरंत नजर हटा ली। प्रिया ने भी भाई को देखा और मुस्कुरा दी।
“भैया… आज मुझे लाइब्रेरी जाना है… साथ चलोगे?” प्रिया ने पूछा।
“हाँ… शाम को चला जाएगा।” राहुल ने कहा।
दोपहर ढलते-ढलते घर में वही गर्मी, वही पंखे की हवा, वही छोटी-छोटी बातें चलती रहीं।
राधा ने दोपहर को अपनी साड़ी पहनी। हल्की सील्क वाली, जो उसके शरीर पर अच्छे से बैठती थी। जब वो राहुल के पास से गुजरी, तो साड़ी की हल्की खुशबू और उसके पसीने की मिली-जुली महक राहुल तक आई। राहुल ने बस एक पल साँस रोकी।
कुछ नहीं हुआ।बस एक छोटी सी नजर।एक हल्की सी मुस्कान।एक अनजानी सी गर्माहट।
शाम को नेहा आई। थकी हुई, पसीने से तर। “मॉम… पानी देना।”
राधा ने पानी दिया। नेहा ने ग्लास मुँह से लगाया तो कुछ बूँदें उसके गले से नीचे सरक गईं। राहुल ने देखा, लेकिन तुरंत नजर हटा ली।
रात के खाने के बाद सब अपने-अपने कमरों में चले गए।
राधा अपने बेडरूम में लेटी थी। पंखा तेज़ था। उसने आँखें बंद कीं। मन में विजय की याद आई। फिर अचानक राहुल की वो सुबह वाली मुस्कान याद आई। उसने खुद को झिड़का – “क्या सोच रही हो राधा… ये तेरा बेटा है।”
लेकिन नींद आने से पहले उसकी उँगलियाँ अनजाने में ही अपने पेट पर फिर गईं।
राहुल अपने कमरे में लैपटॉप पर काम कर रहा था। लेकिन दिमाग बार-बार किचन की उस छोटी सी छुअन पर जा रहा था।
प्रिया और नेहा अपने कमरे में फुसफुसा रही थीं – कुछ लड़कियों वाली बातें।
घर शांत था।बहुत शांत।लेकिन अंदर कहीं… बहुत धीरे-धीरे… एक छोटी सी आग सुलगने लगी थी।
To be continued…
Wonderful update.Chapter 4:
सुबह के ६:४५ बज रहे थे। सूरज अभी पूरी तरह निकला नहीं था, लेकिन घर में हल्की रोशनी फैल चुकी थी। पंखे की आवाज़ अब भी चल रही थी। राधा सबसे पहले उठी। उसने नाइटी उतारकर साधारण सलवार-कमीज पहन ली। बाल बाँधे, चेहरा धोया, और सीधी रसोई में चली गई।
चाय की केतली चढ़ाई। दूध गरम होने लगा। घर में चाय की हल्की महक फैल गई। राधा ने खिड़की खोली। बाहर की गर्म हवा अंदर घुस आई। उसने एक गहरी साँस ली और फुसफुसाई, “आज फिर गर्मी बहुत है…”
थोड़ी देर बाद राहुल भी नीचे आया। बाल बिखरे हुए, सिर्फ बॉक्सर और एक ढीला टी-शर्ट। नींद अभी पूरी तरह नहीं टूटी थी। “गुड मॉर्निंग मॉम,” उसने धीमी आवाज़ में कहा।
“गुड मॉर्निंग बेटा। चाय बना रही हूँ। बैठ जा।” राधा ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया।
राहुल किचन टेबल पर बैठ गया। उसकी नजर अनजाने में माँ की तरफ चली गई। सलवार-कमीज साधारण थी, लेकिन गर्मी की वजह से कमीज़ थोड़ी सी शरीर से चिपक गई थी। राधा जब केतली हिला रही थी, तो उसकी कमर हल्की सी हिल रही थी। राहुल ने तुरंत नजर हटा ली और मोबाइल निकाल लिया।
चाय तैयार हुई। राधा ने दो कप भरे और एक राहुल के सामने रख दिया। जब वो झुकी, तो दोनों की उँगलियाँ फिर से हल्की सी टकराईं। इस बार राधा ने भी महसूस किया। उसने जल्दी से हाथ पीछे खींच लिया और मुस्कुरा दी। “सावधान… गरम है।”
“हाँ… थैंक्यू।” राहुल ने चाय की चुस्की ली। स्वाद वही था जो रोज़ होता है, लेकिन आज कुछ अलग लग रहा था।
प्रिया भी नीचे आ गई। बाल गीले थे, नहाकर आई थी। “मॉम, मेरा टोस्ट भी बना देना।” उसने राहुल की तरफ देखा और हँसते हुए बोली, “भैया आज भी लेट उठे?”
राहुल ने सिर्फ सिर हिलाया। प्रिया के पास बैठ गई। तीनों चाय पीने लगे। बातें रोज़ जैसी थीं – मौसम, कॉलेज, ऑफिस। लेकिन बीच-बीच में छोटी-छोटी खामोशियाँ आ जा रही थीं। राधा जब राहुल की तरफ देखती, तो उसकी नजर थोड़ी देर टिक जाती। राहुल जब माँ की तरफ देखता, तो तुरंत चाय के कप पर ध्यान लगा लेता।
नेहा सबसे बाद में आई। आँखें अभी भी नींद से भरी हुई थीं। “मॉम… मुझे भी चाय।” उसने राहुल के पास जगह बनाई और बैठ गई। उसका कंधा हल्का सा राहुल के कंधे से छू गया। दोनों ने कुछ नहीं कहा। बस नेहा ने चाय का कप थाम लिया।
नाश्ता हो गया। राधा ने बर्तन समेटे। “राहुल, बाजार जाना है ना? टमाटर-प्याज़ ले आना। और थोड़ा हरा धनिया भी।”
“हाँ मॉम… अभी जाता हूँ।” राहुल ने टी-शर्ट ठीक की और बाहर निकलने लगा।
दरवाज़े पर पहुँचकर उसने पीछे मुड़कर देखा। राधा सिंक के पास खड़ी थी, बर्तन धो रही थी। उसकी पीठ की तरफ से कमर और नितंब साफ दिख रहे थे। राहुल ने एक पल रुककर देखा, फिर जल्दी से बाहर निकल गया।
बाजार में भी गर्मी थी। राहुल ने सब्ज़ियाँ लीं, लेकिन दिमाग बार-बार घर की तरफ जा रहा था। मॉम की वो सुबह वाली मुस्कान, वो उँगलियों की छुअन… कुछ गलत नहीं था। फिर भी मन थोड़ा भारी लग रहा था।
घर वापस आया तो प्रिया और नेहा टीवी देख रही थीं। राधा रसोई में खड़ी थी। राहुल ने थैला टेबल पर रखा। “मॉम, ले आया।”
राधा ने पास आकर थैला खोला। “बहुत अच्छा। धन्यवाद बेटा।” उसने राहुल के कंधे पर हल्का सा हाथ रखा। बस एक छोटी सी छुअन। राहुल की साँस एक पल के लिए रुक गई। राधा ने भी महसूस किया, लेकिन जल्दी से हाथ हटा लिया और सब्ज़ियाँ निकालने लग गई।
दोपहर तक घर में वही रोज़ का माहौल रहा। खाना बना, सबने साथ खाया, बातें कीं। लेकिन हर किसी के मन में छोटी-छोटी बेचैनियाँ घूम रही थीं। कोई कुछ गलत नहीं कर रहा था। कोई कुछ खुल्लम-खुल्ला नहीं कह रहा था। बस गर्मी थी, खामोशी थी, और वो अनकही नज़रें थीं जो कभी-कभी एक-दूसरे से टकरा जाती थीं।
शाम ढलने लगी। घर फिर से शांत होने लगा।
शाम के ५:३० बज रहे थे। सूरज अभी पूरी तरह डूबा नहीं था, लेकिन घर के अंदर गर्मी पहले से कहीं ज़्यादा लग रही थी। पंखे तेज़ चल रहे थे, फिर भी शरीर से पसीना नहीं रुक रहा था। राधा रसोई में खड़ी थी। उसने साधारण कॉटन की साड़ी पहन रखी थी – हल्के गुलाबी रंग की। साड़ी का पल्लू कंधे पर था, लेकिन गर्मी की वजह से वो बार-बार सरक रहा था। माथे पर पसीने की छोटी-छोटी बूँदें चमक रही थीं।
राहुल अपने कमरे से निकलकर ड्राइंग रूम में आया। टी-शर्ट शरीर से चिपक गई थी। उसने पानी का गिलास लिया और किचन की तरफ बढ़ गया। राधा ने उसकी तरफ देखा। “आ गए? पानी पी लो… आज गर्मी बहुत है।”
“हाँ मॉम…” राहुल ने गिलास भरा। जब वो पी रहा था, तो राधा उसके पास से गुज़री। साड़ी का पल्लू हल्का सा राहुल के हाथ से छू गया। दोनों एक पल के लिए रुक गए। राधा ने पल्लू ठीक किया और मुस्कुरा दी। “सावधान… फिसल जाएगा।”
राहुल ने कुछ नहीं कहा। बस गिलास सिंक में रख दिया। उसकी नजर अनजाने में माँ की कमर पर चली गई। साड़ी पतली थी, और पसीने की वजह से शरीर की रूप-रेखा थोड़ी साफ दिख रही थी। राहुल ने जल्दी से नजर हटा ली, लेकिन दिल की धड़कन थोड़ी तेज़ हो गई थी।
प्रिया और नेहा टीवी के सामने बैठी थीं। नेहा ने अचानक कहा, “मॉम, आज खाना हल्का बनाना… बहुत गर्मी लग रही है।”
राधा ने जवाब दिया, “हाँ… दही-चावल और थोड़ी सी सब्ज़ी बना देती हूँ।”
थोड़ी देर बाद राधा ने स्नान करने का मन बनाया। “राहुल, तुम लोग बैठो… मैं नहा कर आती हूँ।” वो ऊपर चली गई।
राहुल ड्राइंग रूम में बैठा रहा, लेकिन मन ऊपर ही अटका हुआ था। बाथरूम का दरवाज़ा बंद होने की आवाज़ आई। फिर पानी की धार की धीमी आवाज़। राहुल ने टीवी की तरफ देखा, लेकिन ध्यान कहीं और था। दिमाग में मॉम की साड़ी वाली छवि घूम रही थी – पसीने से चमकता माथा, सरकता पल्लू, हल्की कमर… उसने खुद को झिड़का। “ये क्या सोच रहा है तू…”
ऊपर बाथरूम में राधा पानी से नहा रही थी। गर्म पानी शरीर पर गिर रहा था। उसने आँखें बंद कीं। मन में सुबह वाली बातें घूम रही थीं – राहुल की उँगलियों की छुअन, उसकी नजर, वो छोटी सी खामोशी। कुछ गलत नहीं था। फिर भी शरीर में एक अजीब सी गर्माहट फैल रही थी। उसने पानी की धार को और तेज़ कर दिया और जल्दी से नहा लिया।
नहाकर बाहर आई तो बाल खुले हुए थे, शरीर पर हल्की नमी थी। उसने सिर्फ एक पतली पेटीकोट और ब्लाउज पहन लिया। साड़ी बाद में पहनने का मन था। नीचे जाते समय सीढ़ियों पर राहुल आ रहा था। दोनों आमने-सामने हो गए।
राधा की हालत साफ दिख रही थी – गीले बाल, चमकता चेहरा, ब्लाउज शरीर से हल्का चिपका हुआ। राहुल की साँस एक पल के लिए रुक गई। राधा ने भी उसकी नजर महसूस की। दोनों एक पल के लिए खामोश खड़े रहे।
“नहा लिए?” राहुल ने धीमी आवाज़ में पूछा।
“हाँ…” राधा ने जवाब दिया। उसकी आवाज़ में हल्की सी गर्माहट थी। “तुम भी नहा लो… पसीना आ गया होगा।”
राहुल ने सिर हिलाया। दोनों एक-दूसरे के पास से गुज़रे। इस बार कंधे सिर्फ नहीं, बाजू भी हल्के से छू गए। राधा की गीली बाजू राहुल की टी-शर्ट से सट गई। दोनों ने कुछ नहीं कहा। बस आगे बढ़ गए।
नीचे आकर राधा ने जल्दी से साड़ी पहन ली। लेकिन मन शांत नहीं था। वो रसोई में खड़ी होकर सब्ज़ी काटने लगी। चाकू हाथ में था, लेकिन ध्यान कहीं और। राहुल के शरीर की वो गर्मी, उसकी नजर… सब याद आ रहा था।
राहुल ऊपर नहाने चला गया। बाथरूम में पानी खोलते हुए उसका शरीर पहले से गर्म था। उसने ठंडा पानी लिया, लेकिन मन की बेचैनी कम नहीं हुई। मॉम की वो गीली छवि बार-बार आँखों के सामने आ रही थी। उसने जल्दी से नहा लिया और नीचे आ गया।
खाना तैयार हुआ। सबने साथ बैठकर खाया। बातें कम थीं। प्रिया और नेहा टीवी की बातें कर रही थीं, लेकिन राधा और राहुल के बीच एक अलग सी खामोशी थी। कभी-कभी उनकी नजरें मिल जातीं, फिर दोनों जल्दी से नजर हटा लेते।
खाना खत्म होने के बाद राधा बर्तन समेटने लगी। राहुल उसके पास आ गया। “मॉम, मैं मदद कर दूँ?”
“नहीं बेटा… तुम बैठो।” राधा ने कहा, लेकिन राहुल ने फिर भी प्लेट उठा ली। दोनों सिंक के पास खड़े हो गए। राधा बर्तन धो रही थी, राहुल पोंछ रहा था। उनके शरीर एक-दूसरे के बहुत करीब थे। गर्मी की वजह से दोनों के शरीर से हल्की गर्मी निकल रही थी। कभी-कभी बाजू छू जाते, कभी कंधे।
एक बार राधा का हाथ फिसला और राहुल के हाथ पर पड़ गया। दोनों रुक गए। राधा ने धीरे से कहा, “सॉरी…”
“कोई बात नहीं मॉम…” राहुल की आवाज़ थोड़ी भारी थी।
दोनों ने काम जारी रखा। लेकिन अब हवा में एक अलग सी गर्माहट थी। छोटी-छोटी छुअन, हल्की-हल्की नजरें, और वो अनकही बेचैनी जो दोनों के अंदर बढ़ रही थी।
रात गहराने लगी। घर फिर से शांत होने लगा। लेकिन आज की खामोशी पहले जैसी नहीं थी। आज उसमें हल्की-हल्की गर्मी घुली हुई थी।
रात के ११:४५ बज चुके थे। घर पूरी तरह शांत था। प्रिया और नेहा सो चुकी थीं। सिर्फ पंखे की आवाज़ और कभी-कभी बाहर कुत्तों की भौंक सुनाई दे रही थी।
राधा अपने कमरे में लेटी थी। साड़ी उतारकर सिर्फ पतली नाइटी पहन रखी थी। पंखा तेज़ चल रहा था, लेकिन शरीर की गर्मी कम नहीं हो रही थी। आँखें बंद करके लेटी थी, लेकिन नींद नहीं आ रही थी। दिमाग में बार-बार शाम वाली बातें घूम रही थीं – राहुल के पास से गुज़रते वक़्त बाजू का छूना, उसकी भारी साँस, उसकी नजर जो एक पल के लिए उसकी छाती पर ठहर गई थी…
राधा ने करवट बदली। नाइटी ऊपर सरक गई। उसका हाथ अनजाने में अपने पेट पर फिर गया, फिर नीचे की तरफ बढ़ने लगा। उसने खुद को रोका। “राधा… शर्म कर… ये तेरा बेटा है।” लेकिन शरीर नहीं मान रहा था। पसीना आ रहा था। जाँघों के बीच हल्की सी गीलापन महसूस हो रहा था। उसने आँखें और ज़ोर से बंद कीं और साँस तेज़ हो गई।
नीचे वाले कमरे में राहुल भी लेटा हुआ था। टी-शर्ट उतार रखी थी। सिर्फ बॉक्सर में। उसका लौड़ा पहले से ही आधा कड़ा हो चुका था। दिमाग में मॉम की वो गीली छवि बार-बार आ रही थी – बाथरूम से निकलते वक़्त चमकता चेहरा, चिपकता ब्लाउज, गीले बाल… उसने मुट्ठी भींच ली। “क्या सोच रहा है तू पागल… ये तेरी माँ है।” लेकिन शरीर नहीं सुन रहा था। उसने बॉक्सर के अंदर हाथ डाल दिया। धीरे-धीरे सहलाने लगा। आँखें बंद करके वो सोचने लगा – मॉम की कमर, उसके नितंब, उसकी साड़ी के नीचे का शरीर…
उसी वक़्त ऊपर से हल्के कदमों की आवाज़ आई। राधा पानी पीने नीचे आ रही थी।
राहुल ने जल्दी से हाथ बाहर निकाला और करवट बदल ली। दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था।
किचन में हल्की रोशनी जल रही थी। राधा ने गिलास में पानी भरा। नाइटी पतली थी, रोशनी में उसके स्तनों की रूप-रेखा साफ दिख रही थी। निप्पल हल्के से उभर आए थे। उसने पानी पिया तो गले से पानी की बूँदें नीचे सरक गईं।
तभी राहुल भी किचन में आ गया। दोनों आमने-सामने खड़े हो गए।
“मॉम… तुम भी?” राहुल की आवाज़ थोड़ी भारी थी।
“हाँ… प्यास लगी थी।” राधा ने जवाब दिया। उसकी आवाज़ भी सामान्य नहीं थी। दोनों एक-दूसरे को देख रहे थे। राहुल की छाती नंगी थी, पसीने से चमक रही थी। राधा की नजर एक पल के लिए उसके पेट और नीचे बॉक्सर पर चली गई। बॉक्सर में हल्की सी उभार साफ दिख रही थी। राधा की साँस अटक गई।
राहुल ने भी माँ की नाइटी पर नजर डाली। पतले कपड़े में उसके भारी स्तन हल्के-हल्के हिल रहे थे। निप्पल की नोक साफ उभर आई थी। दोनों एक पल के लिए खामोश खड़े रहे। हवा में सिर्फ पंखे की आवाज़ थी और दोनों की तेज़ साँसें।
राधा ने गिलास सिंक में रखा। उसका हाथ काँप रहा था। “तुम… सो क्यों नहीं रहे?”
“नींद नहीं आ रही मॉम…” राहुल ने एक कदम करीब बढ़ा लिया। अब दोनों के बीच बहुत कम दूरी रह गई थी। गर्मी दोनों के शरीर से निकल रही थी।
राधा ने पीछे हटने की कोशिश की, लेकिन दीवार से सट गई। राहुल और करीब आ गया। उसकी छाती राधा के स्तनों से लगभग छूने वाली थी। दोनों की साँसें एक-दूसरे पर पड़ रही थीं।
“मॉम…” राहुल ने धीमी, भारी आवाज़ में कहा। उसका हाथ खुद-ब-खुद उठकर राधा की कमर पर रख गया। बस हल्का सा स्पर्श।
राधा का शरीर काँप गया। उसने राहुल का हाथ पकड़ लिया, लेकिन हटाने के बजाय वहीं दबाए रखा। “राहुल… ये… ये गलत है…” उसकी आवाज़ काँप रही थी।
“मुझे पता है मॉम…” राहुल ने और करीब आकर उसके कान के पास फुसफुसाया। “लेकिन रोक नहीं पा रहा…”
उसका लौड़ा अब पूरी तरह कड़ा हो चुका था और राधा के पेट से सट गया। दोनों एक पल के लिए थर्रा गए। राधा की आँखें बंद हो गईं। उसके होंठ काँप रहे थे। राहुल ने धीरे से अपना माथा राधा के माथे से सटा दिया। दोनों की साँसें मिल रही थीं।
राधा का हाथ खुद-ब-खुद राहुल की छाती पर फिसल गया। पसीने से गीली मांसपेशियाँ महसूस हुईं। राहुल ने कमर पर रखा हाथ और ज़ोर से दबा दिया। नाइटी ऊपर सरक गई। उसकी हथेली सीधे राधा की नंगी कमर पर आ गई।
“हम्म…” राधा के मुँह से हल्की सी आवाज़ निकल गई। उसने आँखें खोलीं और राहुल को देखा। दोनों की नजरें मिल गईं। उस नजर में शर्म थी, डर था… और भूख भी थी।
राहुल ने धीरे से अपना चेहरा आगे बढ़ाया। उसके होंठ राधा के गाल से छू गए। फिर कान के नीचे। राधा का शरीर और काँप गया। उसने राहुल के बालों में उँगलियाँ फँसा लीं।
“राहुल… बेटा… रुको…” उसकी आवाज़ में मना करने का स्वर बहुत कमज़ोर था।
लेकिन राहुल रुकने वाला नहीं था। उसने धीरे से होंठ राधा के गले पर रख दिए और हल्की सी चुंबन ले ली। राधा की साँस तेज़ हो गई। जाँघों के बीच अब और ज़्यादा गीलापन फैल चुका था।
तभी ऊपर से हल्की सी आवाज़ आई – शायद नेहा करवट बदल रही थी। दोनों एकदम सहम गए। राहुल ने जल्दी से कदम पीछे हटा लिया। राधा ने भी नाइटी ठीक की और साँस संभाली।
दोनों एक-दूसरे को देख रहे थे। आँखों में अभी भी वही आग थी।
“जा… सो जा…” राधा ने काँपती आवाज़ में कहा।
राहुल ने सिर हिलाया। “मॉम…” उसने कुछ और कहना चाहा, लेकिन राधा ने हाथ उठाकर रोक दिया।
दोनों अपने-अपने कमरों में चले गए। लेकिन आज नींद कहीं नहीं थी।
राधा बिस्तर पर लेटकर अपने गले को सहला रही थी, जहाँ राहुल के होंठ पड़े थे। नीचे जाँघों के बीच उँगलियाँ फिसल गईं। गीलापन महसूस करके उसकी आँखें बंद हो गईं।
राहुल अपने कमरे में बॉक्सर खींचकर लेटा था। लौंडा पूरा खड़ा था। उसने आँखें बंद कीं और मॉम की नाइटी, उसके काँपते शरीर, उसके गले की गर्माहट याद करने लगा…
अब वापस मुड़ना मुश्किल था।
Woww Maa badi asani se chud gai. Uffff hot update.Chapter 5
रात के १२:३० बज चुके थे। घर फिर से शांत हो गया था, लेकिन राधा और राहुल के कमरों में खामोशी नहीं थी।
राधा बिस्तर पर लेटी हुई थी। नाइटी ऊपर तक सरक चुकी थी। उसके दोनों चूचियाँ बाहर निकली हुई थीं – भारी, गोल, निप्पल कड़े हो चुके थे। उसने एक हाथ से अपनी चूची दबाई और दूसरी हाथ जाँघों के बीच ले गई। चूत पूरी तरह भीग चुकी थी। उँगलियाँ फिसलते ही अंदर चली गईं।
“हम्म… राहुल…” उसके मुँह से धीमी सी आवाज़ निकल गई। आँखें बंद करके वो सोच रही थी – बेटे का कड़ा लौड़ा उसके पेट से कैसे सटा था, उसकी गरम साँस गले पर कैसे पड़ रही थी। उँगलियाँ और तेज़ी से चूत के अंदर-बाहर होने लगीं। चूची को ज़ोर से मसलने लगी। पसीना आ गया। बिस्तर गीला होने लगा।
नीचे राहुल भी उसी हालत में था। बॉक्सर पूरी तरह खींच रखा था। उसका मोटा लौड़ा हाथ में था – पूरा खड़ा, नसों से भरा हुआ। वो धीरे-धीरे हिला रहा था और मॉम की चूचियाँ याद कर रहा था। “मॉम की इतनी बड़ी-बड़ी चूचियाँ… कितनी नरम होंगी…” उसने आँखें बंद कीं और तेज़ी से हिलाने लगा। थोड़ी देर में ही उसका लौड़ा फड़कने लगा और गाढ़ा वीर्य निकलकर पेट पर फैल गया।
मन और बेचैन हो गया।
थोड़ी देर बाद राहुल उठा। पानी की प्यास नहीं थी। बस मन नहीं मान रहा था। वो धीरे-धीरे सीढ़ियों से ऊपर चला गया। राधा के कमरे का दरवाज़ा आधा खुला था। अंदर हल्की सी सिसकी आ रही थी।
राहुल ने दरवाज़ा और धक्का दिया। राधा बिस्तर पर लेटी थी – नाइटी कमर तक उठी हुई, एक हाथ चूची पर, दूसरा चूत में। उँगलियाँ गीली चमक रही थीं।
राधा की आँखें खुलीं। दोनों एक-दूसरे को देखने लगे।
“राहुल…” राधा की आवाज़ काँप रही थी। उसने जल्दी से नाइटी नीचे खींचने की कोशिश की, लेकिन राहुल ने कमरे में घुसकर दरवाज़ा बंद कर दिया।
“मॉम… मत छुपाओ।” राहुल की आवाज़ भारी थी। वो बिस्तर के पास आ गया। उसका लौड़ा बॉक्सर में फिर से कड़ा हो चुका था।
राधा उठकर बैठ गई। नाइटी अभी भी ऊपर थी। उसकी दोनों चूचियाँ राहुल के सामने थीं – निप्पल कड़े, हल्के गुलाबी। “बेटा… ये गलत है… बहुत गलत…”
राहुल ने घुटनों के बल बिस्तर पर चढ़ गया। उसका हाथ सीधे राधा की चूची पर रख दिया। नरम, भारी, गरम। उसने हल्के से दबाया। “मॉम… कितनी नरम हैं तुम्हारी चूचियाँ…”
राधा की साँस अटक गई। उसने राहुल का हाथ पकड़ा, लेकिन हटाने के बजाय और ज़ोर से दबाने दिया। “हम्म… राहुल… मत कर…”
राहुल ने दूसरी चूची भी थाम ली। दोनों हाथों से मसलने लगा। फिर झुककर एक निप्पल मुँह में ले लिया और चूसने लगा। जीभ घुमाई, दाँत से हल्के से काटा।
“आह… साले…” राधा के मुँह से पहली बार गाली निकल गई। उसने राहुल के बाल पकड़ लिए। “और ज़ोर से चूस… मेरी चूची…”
राहुल और रसिक हो गया। दोनों चूचियाँ बारी-बारी चूसने लगा, थूक से गीला कर दिया। राधा की चूत से पानी टपकने लगा। उसने खुद ही राहुल का हाथ पकड़कर अपनी चूत पर रख दिया।
“यहाँ… अंदर डाल…” राधा ने फुसफुसाया।
राहुल की मोटी उँगली चूत में घुस गई। गीली, गर्म, तंग। उसने दो उँगलियाँ कर दीं और अंदर-बाहर करने लगा। राधा की कमर उठने लगी। “हाँ… ऐसे… और तेज़… मेरी चूत चोद अपनी उँगलियों से…”
राहुल ने बॉक्सर नीचे खींच दी। उसका मोटा काला लौड़ा बाहर निकल आया – नसों से भरा, आगे से पानी टपकाता हुआ। राधा ने देखा और आँखें फाड़ लीं। “इतना मोटा… मेरा बेटा…”
उसने खुद ही हाथ बढ़ाकर लौड़ा पकड़ लिया। धीरे-धीरे हिलाने लगी। “कितना गरम है… कितना सख्त…”
राहुल ने राधा को लिटा दिया। नाइटी पूरी फाड़कर अलग फेंक दी। अब राधा पूरी नंगी थी – बड़ी-बड़ी चूचियाँ, गोल गाँड, भीगी हुई चूत। राहुल उसके ऊपर चढ़ गया। लौड़ा चूत के मुँह पर रख दिया।
“मॉम… डालूँ?” उसने पूछा।
राधा ने दोनों पैर फैला दिए। “डाल… धीरे से डाल… मेरी चूत में अपना मोटा लौड़ा…”
राहुल ने धक्का मारा। आधा लौड़ा अंदर चला गया। राधा की आँखें बंद हो गईं। “आह्ह… साले… कितना मोटा है… पूरी चूत फाड़ रहा है…”
राहुल ने और अंदर धकेला। पूरा लौड़ा चूत में समा गया। दोनों एक पल के लिए रुक गए। फिर राहुल धीरे-धीरे हिलेगा। चूत की फट-फट आवाज़ आने लगी। राधा की चूचियाँ हिल रही थीं। राहुल ने झुककर दोनों चूचियाँ मुँह में ले लीं और चोदने लगा।
“हाँ… चोद… अपनी माँ की चूत चोद… और ज़ोर से…” राधा गालियाँ देने लगी। “मेरी गाँड भी सहला… हाँ… ऐसे…”
राहुल ने गाँड के दोनों लोथड़े पकड़कर और तेज़ धक्के मारने शुरू कर दिए। बिस्तर चरमरा रहा था। राधा की सिसकियाँ बढ़ने लगीं। “आ रही हूँ… राहुल… तेरी माँ की चूत झड़ने वाली है…”
थोड़ी देर और तेज़ चुदाई के बाद राधा का शरीर काँप उठा। चूत में पानी की धार छोड़ दी। राहुल भी नहीं रुक सका। उसने गहराई तक धक्का मारा और गाढ़ा वीर्य राधा की चूत में उड़ेल दिया।
दोनों हाँफते हुए एक-दूसरे से चिपके रहे। लौड़ा अभी भी चूत में था। राधा ने राहुल के बाल सहलाते हुए धीरे से कहा, “अब… अब कोई वापसी नहीं राहुल…”
राहुल ने उसकी चूची चूमते हुए जवाब दिया, “मैं नहीं लौटना चाहता मॉम… अब रोज़ तेरी चूत चोदूँगा…”
बाहर अभी भी खामोशी थी। लेकिन कमरे के अंदर पहली असली चुदाई हो चुकी थी।
राहुल अभी भी उसके अंदर था।
धीरे-धीरे ढीला पड़ रहा था, लेकिन निकला नहीं। राधा के नाखून उसकी पीठ में गड़े हुए थे। दोनों पसीने से तरबतर थे। कमरे में सिर्फ भारी साँसें चल रही थीं।
राधा ने आँखें खोलीं। राहुल के चेहरे को देखा। माथे पर पसीना, होठ सूजे हुए। उसने धीरे से उसके बाल पीछे किए।
“निकल जा अब…” आवाज़ बहुत हल्की थी। “कृपया… निकल जा।”
राहुल ने जवाब में और गहराई तक धक्का मार दिया। राधा की कमर अपने आप उठ गई।
“साले…” उसने दबी आवाज़ में कहा। “अभी भी कर रहा है तू…”
“निकलने का मन नहीं।” राहुल ने गर्दन में मुँह दबाया। जीभ से पसीना चाटा। “तेरी चूत पकड़े हुए है मुझे।”
राधा ने उसके कंधे पर हल्का थप्पड़ मारा। “पागल। आवाज़ कम कर। कोई सुन लेगा।”
लेकिन उसने उसे धक्का नहीं दिया। बल्कि दोनों पैर और फैला दिए ताकि वो आसानी से बाहर निकल सके। जब लौंडा धीरे-धीरे खिसका तो दोनों के बीच से गाढ़ा सफेद द्रव रिसने लगा। राधा की जाँघों तक फैल गया।
राहुल बगल में लेट गया। एक हाथ उसकी चूची पर रख दिया। उँगली से निप्पल घुमाने लगा। राधा ने हाथ नहीं हटाया। बस आँखें बंद किए पड़ी रही।
थोड़ी देर खामोशी रही। पंखा घूम रहा था।
“अब क्या होगा हमारा?” राधा ने अचानक पूछा। आवाज़ में थकान और डर दोनों थे।
राहुल ने उसकी चूची मुँह में ले ली। धीरे से चूसा। “अब रोज़ होगा।”
“बकवास मत कर।” राधा ने उसके बाल खींचे। “ये घर है राहुल। प्रिया और नेहा सो रही हैं। तेरा बाप तीन दिन में आ जाएगा।”
“तो तीन दिन में जितना हो सके…” राहुल ने दूसरी चूची पकड़ ली। “उतना चोदूँगा।”
राधा ने उसे धक्का दिया, लेकिन कमज़ोर सा। “तू सुन नहीं रहा…”
राहुल उसके ऊपर चढ़ आया। दोनों हाथ पकड़कर सिर के ऊपर कर दिए। मुँह उसके मुँह पर रख दिया। इस बार सही से चुंबन हुआ। जीभ अंदर गई। राधा ने भी जवाब दिया। थूक मुँह में मिल गया।
जब होंठ अलग हुए तो राधा हाँफ रही थी। “राहुल… रुक…”
“नहीं।” उसने साफ कहा। लौंडा दोबारा कड़ा हो चुका था। उसने जाँघें और फैलाईं। बिना पूछे अंदर घुस गया।
राधा की सिसकी उसके मुँह में दब गई। “आह… धीरे… अभी दर्द है…”
“सह ले थोड़ा।” राहुल ने कमर घुमाई। “अब ये चूत मेरी है।”
“तेरी नहीं… मैं तेरी माँ हूँ…” राधा ने दाँतों से उसका होठ काटा। लेकिन कमर उसके साथ हिलने लगी।
“माँ होकर भी इतनी गीली हो रही है।” राहुल ने एक चूची मुँह में भर ली। “देख कितना पानी निकाला तूने।”
“चुप कर… और कर…” राधा की आवाज़ टूट रही थी। “ज़ोर से… माँ की चूत फाड़ दे…”
बिस्तर हल्के-हल्के चरमरा रहा था। दोनों आवाज़ दबाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन जब राधा का शरीर काँपने लगा तो उसने राहुल को जोर से जकड़ लिया।
“आ रही हूँ… अंदर ही छोड़… मत निकालना…”
राहुल ने गहराई में रहकर खुद को छोड़ दिया। दोनों की साँसें एक-दूसरे से उलझ गईं।
बाद में वो पसीने से चिपके रहे। राहुल अभी भी आधा अंदर था। राधा की उँगलियाँ उसकी पीठ पर धीरे-धीरे घूम रही थीं।
“अब सो जा।” राधा ने धीरे से कहा। “सुबह नेहा को कॉलेज छोड़ना है।”
“यहीं सोऊँगा।”
“नहीं।” इस बार आवाज़ में सख्ती थी। “जा अपने कमरे। कोई देख ले तो सब खत्म।”
राहुल ने आखिरी बार उसकी चूची दबाई, फिर बाहर निकला। बॉक्सर पहनी। दरवाज़े तक गया, रुका, पीछे मुड़ा।
राधा नंगी पड़ी थी। जाँघों के बीच सफेद द्रव चमक रहा था। चूचियाँ अभी भी ऊपर-नीचे हो रही थीं।
उसने कुछ नहीं कहा। बस देखा। फिर चुपचाप निकल गया।
राधा देर तक वैसे ही पड़ी रही। फिर उठी। नाइटी ढूँढ़ी। पैंटी नहीं पहनी। बिस्तर साफ किया। शीशे में अपना चेहरा देखा – होठ सूजे, गर्दन पर लाल निशान।
नीचे राहुल अपने बिस्तर पर लेटा। लौंडा फिर से हल्का कड़ा हो रहा था। उसने मुस्कुराते हुए आँखें बंद कीं।
आज के बाद कुछ भी पहले जैसा नहीं रहने वाला था।