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Chapter 1: परिवार की सुबह – वो गर्म हवा जो अभी छुपी हुई थी
उस पुरानी हवेली-नुमा बंगले में, जहाँ बाहर गर्मी अभी से ४० डिग्री पार कर चुकी थी, अंदर का माहौल कुछ और ही था। सुबह के ७:३० बजे थे। रसोई में चाय की महक फैली हुई थी और उसके साथ-साथ वो हल्की-हल्की पसीने की खुशबू, जो गर्मी में औरतों के जिस्म से निकलती है।
विजय शर्मा, ४६ साल के मोटे-तगड़े बिजनेसमैन, बैग पैक कर रहे थे। आज फिर दिल्ली का फ्लाइट था। “राधा, मेरी शर्ट कहाँ है?” उन्होंने रसोई की तरफ आवाज लगाई।
राधा शर्मा, ३९ साल की वो औरत, जिसे देखकर पूरा मोहल्ला जलता था, चूल्हे के पास खड़ी थी। उसका सलवार-कमीज का दुपट्टा थोड़ा सरक गया था। ३६-२८-३८ का फिगर, गोरा-मटोल शरीर, भारी-भारी स्तन जो हर साँस के साथ हिलते थे। कमर में अभी भी वो जवानपन था जो १९ साल की लड़की को शर्मिन्दा कर दे। बाल खुले हुए थे, थोड़े पसीने से चिपक गए थे गर्दन पर। “अरे आ गए ना तुम्हारे पास… ले लो,” उसने शर्ट फेंकी और मुस्कुराते हुए पति की तरफ देखा।
विजय ने शर्ट पहनी तो राधा का हाथ उसके सीने पर फिर गया। “दिल्ली में रहना संभाल के… और हाँ, वहाँ की मालिश वाली लड़कियों के चक्कर में मत पड़ना,” उसने हँसते हुए कहा, लेकिन आँखों में वो चमक थी जो कह रही थी – “मुझे भी तो कुछ चाहिए जब तुम नहीं होते।”
विजय ने उसकी कमर पकड़कर खींचा और जोर से चूम लिया। “तेरी चूत तो मैं ही भरता हूँ ना… बाकी सब बकवास है।” राधा ने हल्का सा थप्पड़ मारा उसके सीने पर। “शर्म करो… बच्चे घर पर हैं।”
लेकिन बच्चे घर पर थे।
राहुल, २४ साल का, अभी-अभी बिस्तर से उठा था। उसका बॉडी जिम की वजह से कसा हुआ, छाती चौड़ी, पेट पर हल्की लकीरें। सिर्फ बॉक्सर पहने हुए वो सीधा किचन में आ गया। “मॉम, चाय…” उसकी आँखें सीधे राधा के स्तनों पर टिक गईं। दुपट्टा सरका हुआ था और उसकी भारी छातियों का आधा हिस्सा साफ दिख रहा था। पसीने की वजह से कमीज़ चिपक गई थी, निप्पल की हल्की आउटलाइन साफ नजर आ रही थी। राहुल का लौड़ा बॉक्सर के अंदर हल्का सा उभर आया।
“बेटा, नमस्ते तो बोल लिया कर,” राधा ने मुस्कुराते हुए कहा, लेकिन उसकी नजर बेटे की बॉक्सर पर गई। वो जानती थी कि राहुल अब छोटा नहीं रहा।
“सॉरी मॉम… गुड मॉर्निंग,” राहुल ने पास आकर पीछे से गले लगाने की कोशिश की। उसका कड़ा लौड़ा राधा की नितंबों पर हल्का सा रगड़ खा गया। राधा ने हल्का सा कसमसाया, लेकिन कुछ नहीं बोला। बस मुस्कुरा दी।
तभी छोटी बेटी नेहा भी नीचे आ गई। १९ साल की, कॉलेज की पहली साल। उसका शरीर अभी भी किशोरावस्था से बाहर निकल रहा था – ३४-२६-३६, गोल-गोल नितंब, नुकीले स्तन। शॉर्ट्स और टॉप पहने हुए थी। बालों में मैस, चेहरे पर नींद। “भैया, आज भी मेरा फोन चार्जर ले लिया?” उसने राहुल को घूरा।
राहुल ने हँसकर उसकी छाती पर नजर मारी। “तेरी चूचियाँ आज और बड़ी लग रही हैं रे… ब्रा नहीं पहनी क्या?”
नेहा ने लजाते हुए अपनी छाती ढक ली। “गंदा भैया… मॉम देखो ना!”
राधा हँस पड़ी। “बस करो दोनों… तुम्हारा बाप जा रहा है, पहले उसे विदा तो करो।”
प्रिया, बड़ी बेटी, २२ साल की, अभी ऊपर ही थी। वो थोड़ी शांत किस्म की थी, लेकिन शरीर उसका भी माँ जैसा ही – भारी, रसीला। वो अभी शावर ले रही थी। पानी की आवाज़ नीचे तक आ रही थी। राहुल ने सोचा – “आज फिर उसकी चूत देखने का मौका नहीं मिला… लेकिन शाम को जरूर…”
विजय ने सबको गले लगाया। राधा को आखिरी बार जोर से चूमते हुए उसके कान में फुसफुसाया, “रात को वीडियो कॉल पर अपनी चूत दिखाना… बिना पैंटी के।” राधा ने शरमाते हुए सिर हिलाया।
विजय के जाते ही घर में एक अजीब सी खामोशी छा गई।
राधा ने राहुल की तरफ देखा। “बेटा, आज ऑफिस नहीं जाना?”
“नहीं मॉम… वर्क फ्रॉम होम।” राहुल ने चाय का कप लिया और मॉम के पास ही बैठ गया। उसकी जाँघ राधा की जाँघ से सटी हुई थी। गर्मी की वजह से दोनों के शरीरों से पसीना बह रहा था। राहुल ने नजरें नीचे कीं – मॉम के सलवार का नाड़ा थोड़ा ढीला था। हल्की-हल्की पब्लिक हेयर की लाइन दिख रही थी।
राधा ने भी महसूस किया। लेकिन उसने कुछ नहीं कहा। बस चाय पीती रही।
नेहा ने कहा, “मॉम, मैं कॉलेज जा रही हूँ… शाम को ६ बजे तक आ जाऊंगी।” उसने राहुल को जीभ दिखाई और चली गई।
अब घर में सिर्फ माँ और बेटा थे।
राधा उठी। “मैं ऊपर जाकर नहा लेती हूँ… तू काम कर ले।”
राहुल ने मुस्कुराते हुए कहा, “मॉम… तुम्हें मदद चाहिए तो बता देना।”
राधा ने पलटकर देखा। “किस बात में मदद?”
“नहाने में…” राहुल की आँखों में शरारत थी।
राधा ने हँसकर सिर हिलाया। “बदमाश… जा, अपना काम कर।” लेकिन जाते-जाते उसकी नितंब हिल रहे थे, और राहुल की नजरें उन पर जमी हुई थीं।
राधा ऊपर अपने कमरे में गई। दरवाजा बंद किया, लेकिन पूरी तरह नहीं। थोड़ा-सा खुला छोड़ दिया। शायद अनजाने में। शायद जानबूझकर।
उसने सलवार-कमीज उतारी। ब्रा और पैंटी में खड़ी होकर आईने के सामने खड़ी हुई। अपने भारी स्तनों को हाथों से ऊपर उठाया। “अब भी कितनी टाइट हैं…” खुद से बोली। पसीने से भीगी पैंटी में हाथ डाला। उँगलियाँ चूत पर फिसलीं। “हम्म… विजय चला गया तो अब कौन भरेगा इस प्यासी चूत को?”
नीचे राहुल का लौड़ा पहले से ही पूरा खड़ा था। उसने सोचा – “आज नहीं… लेकिन धीरे-धीरे… मॉम की ये चूत मेरी होने वाली है।”
घर में गर्मी बढ़ रही थी।
और वो गर्मी सिर्फ मौसम की नहीं थी।
To be continued…
उस पुरानी हवेली-नुमा बंगले में, जहाँ बाहर गर्मी अभी से ४० डिग्री पार कर चुकी थी, अंदर का माहौल कुछ और ही था। सुबह के ७:३० बजे थे। रसोई में चाय की महक फैली हुई थी और उसके साथ-साथ वो हल्की-हल्की पसीने की खुशबू, जो गर्मी में औरतों के जिस्म से निकलती है।
विजय शर्मा, ४६ साल के मोटे-तगड़े बिजनेसमैन, बैग पैक कर रहे थे। आज फिर दिल्ली का फ्लाइट था। “राधा, मेरी शर्ट कहाँ है?” उन्होंने रसोई की तरफ आवाज लगाई।
राधा शर्मा, ३९ साल की वो औरत, जिसे देखकर पूरा मोहल्ला जलता था, चूल्हे के पास खड़ी थी। उसका सलवार-कमीज का दुपट्टा थोड़ा सरक गया था। ३६-२८-३८ का फिगर, गोरा-मटोल शरीर, भारी-भारी स्तन जो हर साँस के साथ हिलते थे। कमर में अभी भी वो जवानपन था जो १९ साल की लड़की को शर्मिन्दा कर दे। बाल खुले हुए थे, थोड़े पसीने से चिपक गए थे गर्दन पर। “अरे आ गए ना तुम्हारे पास… ले लो,” उसने शर्ट फेंकी और मुस्कुराते हुए पति की तरफ देखा।
विजय ने शर्ट पहनी तो राधा का हाथ उसके सीने पर फिर गया। “दिल्ली में रहना संभाल के… और हाँ, वहाँ की मालिश वाली लड़कियों के चक्कर में मत पड़ना,” उसने हँसते हुए कहा, लेकिन आँखों में वो चमक थी जो कह रही थी – “मुझे भी तो कुछ चाहिए जब तुम नहीं होते।”
विजय ने उसकी कमर पकड़कर खींचा और जोर से चूम लिया। “तेरी चूत तो मैं ही भरता हूँ ना… बाकी सब बकवास है।” राधा ने हल्का सा थप्पड़ मारा उसके सीने पर। “शर्म करो… बच्चे घर पर हैं।”
लेकिन बच्चे घर पर थे।
राहुल, २४ साल का, अभी-अभी बिस्तर से उठा था। उसका बॉडी जिम की वजह से कसा हुआ, छाती चौड़ी, पेट पर हल्की लकीरें। सिर्फ बॉक्सर पहने हुए वो सीधा किचन में आ गया। “मॉम, चाय…” उसकी आँखें सीधे राधा के स्तनों पर टिक गईं। दुपट्टा सरका हुआ था और उसकी भारी छातियों का आधा हिस्सा साफ दिख रहा था। पसीने की वजह से कमीज़ चिपक गई थी, निप्पल की हल्की आउटलाइन साफ नजर आ रही थी। राहुल का लौड़ा बॉक्सर के अंदर हल्का सा उभर आया।
“बेटा, नमस्ते तो बोल लिया कर,” राधा ने मुस्कुराते हुए कहा, लेकिन उसकी नजर बेटे की बॉक्सर पर गई। वो जानती थी कि राहुल अब छोटा नहीं रहा।
“सॉरी मॉम… गुड मॉर्निंग,” राहुल ने पास आकर पीछे से गले लगाने की कोशिश की। उसका कड़ा लौड़ा राधा की नितंबों पर हल्का सा रगड़ खा गया। राधा ने हल्का सा कसमसाया, लेकिन कुछ नहीं बोला। बस मुस्कुरा दी।
तभी छोटी बेटी नेहा भी नीचे आ गई। १९ साल की, कॉलेज की पहली साल। उसका शरीर अभी भी किशोरावस्था से बाहर निकल रहा था – ३४-२६-३६, गोल-गोल नितंब, नुकीले स्तन। शॉर्ट्स और टॉप पहने हुए थी। बालों में मैस, चेहरे पर नींद। “भैया, आज भी मेरा फोन चार्जर ले लिया?” उसने राहुल को घूरा।
राहुल ने हँसकर उसकी छाती पर नजर मारी। “तेरी चूचियाँ आज और बड़ी लग रही हैं रे… ब्रा नहीं पहनी क्या?”
नेहा ने लजाते हुए अपनी छाती ढक ली। “गंदा भैया… मॉम देखो ना!”
राधा हँस पड़ी। “बस करो दोनों… तुम्हारा बाप जा रहा है, पहले उसे विदा तो करो।”
प्रिया, बड़ी बेटी, २२ साल की, अभी ऊपर ही थी। वो थोड़ी शांत किस्म की थी, लेकिन शरीर उसका भी माँ जैसा ही – भारी, रसीला। वो अभी शावर ले रही थी। पानी की आवाज़ नीचे तक आ रही थी। राहुल ने सोचा – “आज फिर उसकी चूत देखने का मौका नहीं मिला… लेकिन शाम को जरूर…”
विजय ने सबको गले लगाया। राधा को आखिरी बार जोर से चूमते हुए उसके कान में फुसफुसाया, “रात को वीडियो कॉल पर अपनी चूत दिखाना… बिना पैंटी के।” राधा ने शरमाते हुए सिर हिलाया।
विजय के जाते ही घर में एक अजीब सी खामोशी छा गई।
राधा ने राहुल की तरफ देखा। “बेटा, आज ऑफिस नहीं जाना?”
“नहीं मॉम… वर्क फ्रॉम होम।” राहुल ने चाय का कप लिया और मॉम के पास ही बैठ गया। उसकी जाँघ राधा की जाँघ से सटी हुई थी। गर्मी की वजह से दोनों के शरीरों से पसीना बह रहा था। राहुल ने नजरें नीचे कीं – मॉम के सलवार का नाड़ा थोड़ा ढीला था। हल्की-हल्की पब्लिक हेयर की लाइन दिख रही थी।
राधा ने भी महसूस किया। लेकिन उसने कुछ नहीं कहा। बस चाय पीती रही।
नेहा ने कहा, “मॉम, मैं कॉलेज जा रही हूँ… शाम को ६ बजे तक आ जाऊंगी।” उसने राहुल को जीभ दिखाई और चली गई।
अब घर में सिर्फ माँ और बेटा थे।
राधा उठी। “मैं ऊपर जाकर नहा लेती हूँ… तू काम कर ले।”
राहुल ने मुस्कुराते हुए कहा, “मॉम… तुम्हें मदद चाहिए तो बता देना।”
राधा ने पलटकर देखा। “किस बात में मदद?”
“नहाने में…” राहुल की आँखों में शरारत थी।
राधा ने हँसकर सिर हिलाया। “बदमाश… जा, अपना काम कर।” लेकिन जाते-जाते उसकी नितंब हिल रहे थे, और राहुल की नजरें उन पर जमी हुई थीं।
राधा ऊपर अपने कमरे में गई। दरवाजा बंद किया, लेकिन पूरी तरह नहीं। थोड़ा-सा खुला छोड़ दिया। शायद अनजाने में। शायद जानबूझकर।
उसने सलवार-कमीज उतारी। ब्रा और पैंटी में खड़ी होकर आईने के सामने खड़ी हुई। अपने भारी स्तनों को हाथों से ऊपर उठाया। “अब भी कितनी टाइट हैं…” खुद से बोली। पसीने से भीगी पैंटी में हाथ डाला। उँगलियाँ चूत पर फिसलीं। “हम्म… विजय चला गया तो अब कौन भरेगा इस प्यासी चूत को?”
नीचे राहुल का लौड़ा पहले से ही पूरा खड़ा था। उसने सोचा – “आज नहीं… लेकिन धीरे-धीरे… मॉम की ये चूत मेरी होने वाली है।”
घर में गर्मी बढ़ रही थी।
और वो गर्मी सिर्फ मौसम की नहीं थी।
To be continued…