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Incest तू लौट के आजा मेरे लाल

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chapter 106

( कोई मुझे गाली दे जो बोलना है बोले मुझे फरक नही परता लेकिन वो लोग जो पहले ही स्टोरी ना समझ कुछ भी कॉमेंट करने लगते है ये मत करो वो , किसी भी स्टोरी करेक्टर को स्टोरी लिखने वाले को समझ लिया समझो अपने अंदाज़ा लगा लिया किया हो सकता है स्टोरी मे किया नही

मुझे नाराजगी उन लोगो से होता है जो स्टोरी पढ़ते है हर सवाल का जवाब भी स्टोरी मे होता है मे हीन्त् भी देता हु कई बार सब चीजे किलर होता है फिर भी लोग ना समझ के कॉमेंट करते है ना उनके मुझे नाराजगी होती है

अभय सुसमा के बीच सब हो गया अभय ने अपनी मासी को चोद दिया तो एक भाई फॉमेंट करते है अभय ने अपनी मासी को 2 दिन भी नही हुवे चोद दिया, अब मे उस भाई को किया बोलू किया बोलू कैसे कहु अभय सुसमा की मुलाकात एक महीने पहले हो गई थी हा उस समय दोनों नही जानते थे दोनों भांजा मासी है महीने पहले मुलाकात बाते के बाद दोनों मे सेक्स हुआ कियुंकी जब जब दोनों को पता चला दिल दिमाग तो आगे बढ़ गया था
हा ये सब मेने स्टोरी मे अच्छे से जिगर किया फिर भी लोग कॉमेंट करते

कसम से हर सवाल का जवाब जब स्टोरी मे होते हुवे ना समझ के कॉमेंट करते है ना हो मेरा सर दर्द करने लगता है दिल करता है साला सब छोर दु खतम कर दु कियु फोकट का टेंसन लेना

सुसमा के घर

अभी भी सब के बीच बाते चल रही थी जाहिर है दो बहन लम्बे समय बाद मिले थे कमरे मे मितल आती है सुसमा मितल को देख - कई महीनों से परेसान करके रखा था मासी नही आयेगी तो शादी नही करुगी देख मासी बाकी सब आ गये अब करेगी ना शादी

मितल आसा के पीछे से गले लगते हुवे मुस्कुराते हुवे - हा मेरी प्यारी मासी आ गई मेरा भाई सब आ गये तो कियु ना करुगी

आसा मितल को गले लगाते हुवे - मेरी बच्ची की शादी है मे आ गई हु ना अच्छे से होगी तेरी शादी

मिनिता - अच्छा हुआ दीदी सब पहले ही अभय से सही कर दिया मामला नही तो मितल शादी ही नही करती
सिला हस्ते हुवे - सही कहा अपने लेकिन समय रहते सब सही हो गया
तारा - बिल्कुल अब तो बस धूम धाम से शादी होगी मितल बेटी की
मितल शर्मा जाती है


दूसरी तरफ अभय शोभा को इसारे से कमरे मे चलने को कहता है शोभा समझ जाती है और सर्म से मन मे - कितने बेसरम है सब के सामने

शोभा खरी होके - तुम सब बाते करो हम आते है कियु जी चले
अभय मुस्कुराते हुवे - हा कियु नही

रेखा मन मे हस्ते हुवे - जैसे हमे पता ही नही कियु जा रहे है
रीना मन मे हस्ते हुवे - रुका भी नही जा रहा
अदिति मन मे सर्म से - हद है क्या क्या देखना परेगा मुझे

कमरे मे अभय आते ही शोभा को बिस्तर पे लेता के - जाना होगा इस लिये अभी कर लेते है
शोभा सर्म से - जी समझ सकती हु मे भी तरपि हु
अभय मुस्कुराते हुवे - मे भी मेरी जान

अभय शोभा को किस करने लगता है फिर धीरे धीरे दोनों नंगे होके एक दूसरे को चूमने लगते है अभय शोभा के चूचे दबाते हुवे मजे से चूसने लगता है शोभा सिसकिया लेते हुवे - उफ पति जी मेरी जिस्म आपके प्यार के लिये तरप् रही थी उफ अब जाके वो प्यार मिल रहा है

दोनों मिया बीवी पुरे जोस मे लगे रहते है अभय शोभा की मस्त बुर का रस पिता है और शोभा लंड का स्वाद लेती है फिर अभय शोभा की एक पैर उठा के अपने कन्धे पे रख बिस्तर के नीचे खरा शोभा की बुर के छेद पे लंड रख जोर से धक्का मारने पुरा घुसा देता है और चुदाई शुरू हो जाती है

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शोभा दर्द अभय को देख - एक बार मे ही घुसा देते है दर्द होता है
अभय शोभा के चूचे दबाते चुदाई करते हुवे - क्या करू मेरी जान रुक नही पाता
शोभा - उफ आह पति जी मेरी बुर आपके लंड के लिये बहोत तरपी है
अभय तेज धक्के मारते हुवे - अब नही तरपे गी उफ बहोत गर्म है
33 मिनट बाद

अभय शोभा को बाहों मे लिये - कितनी गर्म टाइट थी तुम्हारी बुर
शोभा सर्म से - बेशर्म पति जी एक महीने से तरप रही थी गर्म तो होगी ही
शोभा अभय को देखते हुवे थोरा सर्म से - सुनिये मुझे आपको कुछ बताता है
अभय शोभा को देख - हा बोलो ना
शोभा सर्म से - वो वो आप ना पापा बनने वाले है मे मा
अभय जोर से - क्या कहा सच्ची मे
शोभा अभय का हाथ अपने पेट पे रख - हु सच्ची

अभय शोभा को बाहों मे कस के - मे बहोत खुश हु शोभा मे चाहता ही था हमारे बच्चे हो
शोभा अभय के बाहों मे समाये - मे भी बहोत खुश हु आपके बच्चो की मा बन के
अभय शोभा के चेहरे को पकर प्यार से - एक और बच्चा करेगे किया कहती हो
शोभा सर्म से - जैसा आप कहे
अभय - शोभा केह तो नही सकता कब लेकिन एक दिन हम साथ रहेगे तुम अपने ससुराल मे रहोगी
शोभा खुश होके - सच
अभय - हा बस थोरा इंतज़ार करना होगा
शोभा अभय के लगे लगते हुवे इमोसनल होके - कर लुगी इंतज़ार

अभय - हु जान रेखा बेटी को चोदना है अभी क्या करू
शोभा मुस्कुराते हुवे - रेखा भी बेचैन है आपका लंड लेने के लिये बुला लीजिये मे नहाने जा रही हु
अभय मुस्कुराते हुवे - ठीक है
अभय रेखा को फोन करता है रेखा भी कमरे मे आती है शोभा नहाने चली जाती है

रेखा अभय के पास जाके अभय का लंड पकर हिलाते हुवे अभय को देख - मुझे लगा मेरे पापा को अब मेरी जरूरत नही है
अभय मुस्कुराते हुवे - बेटी की बुर से मन भर सकता है क्या
रेखा - उफ पापा बहोत तरपी हु आह मेरी बुर
रेखा अभय का लंड मुह मे लेके चूसने लगती है अभय - उफ रेखा बेटी आह

रेखा फिर सारी पेटीकोट उपर करके तांगे फैला के अभय को देख - पापा देखिये आपकी बेटी की बुर कैसे गीली होके तरप रही है
अभय रेखा की बुर देख मुस्कुराते हुवे - अभी इसकी तरप मीटा देता हु
अभय रेखा के बुर चूसने चाटने लगता है रेखा मजे से सिसकिया लेते हुवे - उफ पापा बहोत मजा आ रहा है चूसते रहिये उफ मा पापा आह
चुसाइ मे ही रेखा झर जाती है

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अभय फिर छेद पे लंड रख जोर का धक्का मारता है रेखा दर्द मे आह मा मर गई अभय तेज धक्के मारते हुवे - उफ रेखा बेटी तेरी बुर तो सच मे बहोत गर्म है राज अच्छे से चोदता नही है क्या
रेखा सिसकिया लेते हुवे अभय को देख - उफ पापा भाई चोदते है आह अच्छे से लेकिन आपकी बात ही अलग है उफ आप तो पूरी गर्मी अच्छे से निकाल देते है पापा बहोत मजा आ रहा है चोदते रहिये उफ
25 मिनट बाद

रेखा सारी बाल सही करके बैठे बाते करने लगते है शोभा नाहके आती है और अभय रेखा को देख मुस्कुराते हुवे - हो गया पापा बेटी का प्यार
रेखा सर्म से - मा आप भी ना
अभय मुस्कुराते हुवे - हो गया जान मे क्या कहता हु खाना मंगवा लेते है खाके घर जाउंगा

शोभा - नही बिल्कुल नही मे बनाउगी आप मेरे पति है अपने हाथो का खाना खिलाऊँगी
अभय - लेकिन जान सफर से तुम सब थक गई होगी
शोभा - नही मे बनाउगी
अभय - अच्छा बाबा ठीक है

शोभा रेडी होके खाना बनाने लगती अभय ने पहले ही सब इंतज़ाम करके रखा हुआ था

किचन मे अदिति शोभा के गले लग - भाभी बधाई हो आपको
शोभा अदिति को गले लगा के सर्म से - आपको भी आप बुआ जो बनने वाली है
अदिति मुस्कुराते हुवे - जी भाभी
अदिति मन मे - पता नही और कितनी बार बुआ बनुगी
अदिति - भाभी मे आपकी मदद कर देती हु
शोभा मुस्कुराते हुवे - जी मुझे खुशी होगी मेरी प्यारी ननद मदद करेगी तो

वही अभय छत पे खरा मन मे - जंग होने वाली है कहना मुश्किल है क्या होगा डर तो लग रहा है मे मरने से नही डरता लेकिन मेरे चाहने वाले मा सब

तभी रीना आते हुवे - पापा किस सोच मे है आप
अभय पीछे रीना को देख मुस्कुराते हुवे - तुम्हारी
रीना मुस्कुराते हुवे - मेरी सोच मे कियु
अभय रीना को बाहों मे लेके - तुम मेरी बेटी बहोत खूबसूरत हो थोरा प्यार पापा को भी देदो जैसे रेखा बेटी देती है
अभय की बात सुन समझ रीना सर्म से - छि गंदे पापा
अभय रीना के होठ पे उंगली रखते हुवे - किस करलू हु
रीना अभय को देख सर्म से - पापा प्यार दुगी सब दुगी लेकिन
अभय मुस्कुराते हुवे - समझ गया पहला हक हु जीतू
रीना सर्म से - जी आप करना चाहे तो कर सकते है
अभय रीना के चूचे देख - बहोत बड़े है ठीक है इंतज़ार कर लूंगा
अभय धीरे से कान मे - उसके बाद बुर दोगी ना
रीना की सासे रुक जाती है
रीना - उफ पापा दीदी ने दिया है तो मे भी उफ दुगी
अभय रीना के एक चूचे दबा के - ठीक है

सुसमा के घर

अशोक राहुल आ गये थे अंधेरा होने लगा था आगन मे मिनाक्षी मितल खाना बना रहे थे बाकी सब बाते कर रहे थे

राहुल आसा के पैर छूके - मासी आप आई बहोत खुशी हुई
आसा राहुल को गले लगा के - मुझे भी मेरे बच्चे
अशोक आसा को देख - साली जी हमे माफ कर दीजियेगा आप ने इतना सब सहा और हम
आसा - कोई बात नही जीजा जी मे किसी से नाराज नही ये तो किस्मत का खेल था जो होना था हो गया
सुसमा - मेरी छोटकी दिल से बरी है अरे हा ये लरका अभय बेटा कहा गया दिख नही रहा है
दिशा - जी वो एक दोस्त मिल गये उनके बुआ के घर है आ जायेंगे
सुसमा - अच्छा अदिति बेटी भी गई है साथ मे
दिशा - जी मासी
आसा मन में - ये लरका भी ना

वही अभय सभी के साथ बैठ सभी खाना खा रहे थे

अदिति - भाभी आप खाना बहोत अच्छा बनाती है
शोभा - आपको अच्छा लगा
अदिति - जी भाभी बहोत अच्छा लगा
अभय शोभा को देख - मेरी बीवी जो है कियु मेरी जान
शोभा सर्म से - सर्म करिये
रेखा हस्ते हुवे - सर्म करे पर कियु
रीना मुस्कुराते हुवे - हम सब है ना इस लिये
राज - खाना खाओ चुप चाप
रेखा रीना चुप हो जाते है

बाते करते खाना पीना हो जाता है
अभय शोभा रेखा रीना राज को देख - अब हमे जाना होगा लेकिन मे आता रहुंगा पास मे ही हम है

अदिति - मे भी आती रहूगी बरी भाभी जो लोग आप के बारे में जानते है वो भी आपसे मिलने आते रहेगे

शोभा - जी समझ गई
अभय शोभा को बाहों मे लेके - अपने पति को माफ कर देना शोभा साथ रह नही पा रहा तुम्हारे
शोभा अभय के बाहों मे समा के इमोसनल होके - नही जी आपके जैसे प्यार करने वाला पति मुझे मिले है मे किस्मत वाली हु आपका थोरा भी प्यार मुझे मिलेगा उसी मे खुश रहूगी लेकिन आप बहोत अच्छे है पति जी आई लोव यू
अभय शोभा के होठ पे किस करते हुवे - आई लोव यू तू

अभय सब से गले लगता है फिर बाय बोल गारी मे आके बैठ जाता है
अदिति - देखा मेने मुझे खुशी है की मेरे भइया सब को कितना प्यार करते है
अभय अदिति को देख - वो मेरे अपने है उन्हें प्यार देना ख्याल रखना मेरी जिमेदारी है अब चले
अदिति - हु चलिये

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अभय गारी लेके निकल परता है लेकिन आधे रास्ते मे साइड पे गारी रोक अदिति को देख - गुरिया
अदिति समझ जाती है सर्म से - भाई
अभय अपना लंड बाहर निकल हिलाने हुवे - हिलाओ ना गुरिया जब तुम मेरे लंड को हाथो पे पकर हिलाती तो तो बहोत अच्छा लगता है अदिति सर्म से नजरे बीचे किये धीरे से अभय के लंड पकर - सच
अभय अदिति को देख - उफ हा जैसे अभी तूने पकरा उफ गुरिया हिलाओ मुठ मारो आह

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अदिति अभय के लंड के चमरे को उपर नीचे करते मुठ मारते हुवे मन मे - उफ कितना बरा गर्म है हाथो मे पकरते ही मेरी बॉडी गर्म और बुर गीली होने लगती है नशे कैसे फूली हुई है भइया के लंड की
अभय अदिति को देख - गुरिया मजा आ रहा है एक बात कहु मेरे लंड को देख मुह मे लेके चूसने का दिल नही करता तेरा सच कहना
अदिति हैरान शोक अभय को देखती है फिर नजरे नीचे कर लंड को देखते हुवे सर्म से - मुझे नही पता भाई
अभय अदिति को देख - गुरिया खुल के बोल अब हम कोई बात नही छुपाते
अदिति लंड हिलाते हुवे अभय को देख - जी करता है
अदिति के मुह से ये सुन अभय का लंड और टाइट होने लगता है
अभय - कब से
अदिति सर्म से - जी वो मधु ने बताया फिर आपका लंड देखा तब से
अभय जोस मे अदिति को देख - तो सोचना क्या है तेरा भी हक है मुझे भी बहोत अच्छा लगेगा मेरी गुरिया मेरे लंड को मुह मे लेगी तो

अदिति अभय के लंड को देखती है फिर मन मे - हा लेना है जब से मधु ने कहा लंड चूसने मे बहोत मजा आता है तब से मेरे अंदर भी उफ अब तो देख रहा नही जाता बहोत सर्म आ रही है लेकिन दिल मान नही रहा
अभय - उफ गुरिया देरी मत करो घर भी जाना है
अदिति - जी जी भाई

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अदिति हिम्मत करके सर्म से लाल झुक के अभय के लंड पकरे लंड के टोपे को चूमती है थोरा स्वाद लेती है अपनी प्यारी गुरिया को ऐसा करते देख होठ अपने लंड के टोपे पे फिल कर अभय को जो मजा आता है वो तो एक भाई अभय ही फिल कर रहा था
अभय - उफ मा कसम गुरिया सुकून मिल गया आह
अदिति टोपे का स्वाद लेके मन मे सर्म से - गंदा है लेकिन मधु ने कहा था शुरू मे पहली बार गंदा लगता है बाद मे बहोत मजा आता है हु

अदिति गर्म थी जवान लरकी थी इतना सब होने देखने के बाद जाहिर है उसका भी मन करेगा ही अदिति तय कर चुकी थी आज अपने भाई के लंड का स्वाद लेके ही रहेगी

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अदिति झुकती है मुह खोल अपने भाई का मोटा लंड धीरे धीरे जितना हो सके अंदर लेके चूसने लगती है अपना पुरा लंड अपनी प्यारी गुरिया के मुह मे फिल करके अपनी गुरिया के होठ अपने लंड पे दबाव फिल करके अभय को आज वो मजा मिला जो एक भाई को बहन से मिल सकता है अभय मजे से आह करते अदिति के सर पे हाथ रख - बहोत अच्छे गुरिया अच्छा कर रही हो उफ तूने तो आज अपने भाई को जो मजा दे रही हो उफ केह नही सकता कितना मजा आ रहा है
अदिति एक हाथ से लंड पकरे मजे से चुस्टे हुवे मन मे - उफ मधु सही केह रही थी आह भाई का लंड चूसने मे बहोत मजा आ रहा है लंड का स्वाद नमकीन जैसा है लेकिन उफ चूस के पीते रहने का दिल कर रहा है

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अभय भी पुरे जोस मे आके नीचे से अदिति के मुह मे धकके मारके लंड घुसाने लगता है अभय - उफ गुरिया ये मजा उफ आज तक ऐसा मजा मुझे किसी के लंड चूसने से नही आया जो मजा तेरे चूसने से आ रहा है गुरिया मेरी जान चुस्टे रहो रुकना मत ये मजा उफ आह गुरिया
अदिति लंड चूसते हुवे मन मे - भाई को बहोत मजा आ रहा है तो और अच्छे से मुझे चूसना होगा ताकि भाई को और मजा आये

अदिति और मजे से लंड के टोपे पे गोल जीब घुमा घुमा के चाटने चूसने लगती है अभय को और मजा आने लगता है अभय - उफ कसम से गुरिया गजब अच्छा कर रही हो उफ बहोत जयदा मजा आ रहा है हा ऐसे ही चुसो चाटो जीब से अपने भाई का लंड उफ आह
अदिति - उफ मुझे भी मजा आ रहा है मोटा गर्म गर्म चिप चिपा रस से भरा भाई का लंड चूसने मे आह ये स्वाद तो गजब है आज मुझे ये स्वाद मिला ये मजा मिला है भाई उफ आपका लंड कमाल का है
अभय जोर से आह करते हुवे - गुरिया आने वाला है तुझे सब रस मुह मे लेने पीना होगा जोर से करो आह जल्दी उफ आह गुरिया
अदिति अभय की बात सुन जल्दी से तेज मुह मे लेके चूसने लगती है अभय अदिति के सर पकर दबाते नीचे से धक्के मारते हुवे - आह उफ गुरिया मेरी प्यारी गुरिया ये ले भाई का रस पीले आह
अभय अदिति के सर पकर दबाते हुवे पिचकारी मारते झरने लगता है एक मिनट तक गर्म गर्म सारा माल अदिति के मुह मे गिरा देता है आज अभय गजब का झरा था कियुंकी लंड चूसने वाली उसकी सगी छोटी बहन गुरिया थी

अदिति अपने मुह मे इतना सारा गर्म गर्म अपने भाई का माल लेके उसकी ससे फूलने लगी थी अभय जल्दी से अदिति के सर को छोर देता है अदिति लंड पे होठ दबा के धीरे धीरे मुह से लंड निकाल मुह मे अपने भाई का गर्म पानी लेके अभय को देखती है

अभय अदिति को देख - पी जाओ गुरिया तेरे भाई के लंड का पानी है
अदिति भी बरी मुश्किल से पुरा का पुरा माल पी जाती है पीते ही अदिति जोर जोर से खासने लगती है ससे लेने लगती है

अभय अदिति के पीठ सेहलते हुवे - गुरिया तुम ठीक तो हो ना
अदिति जोर जोर से सासे लेते अपना मुह साफ करके अभय को देख सर्म से - जी जी भइया मे ठीक हु वो सासे रुक सी गई थी उफ
अभय अदिति को सीने से लगा के - आज तूने अपने भाई को बरी खुशी दी है सुक्रिया
अदिति सर्म से - नही भाई सुक्रिया मत कहिये मुझे भी बहोत मजा आया
अभय अदिति के चेहरे को पकर आखो मे देख - सच
अदिति सर्म से - आपकी कसम
अभय खुश होके - तो जब बोलुगा चुसोगी
अदिति सर्म से - जी भाई

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अभय अदिति के होठ चूसने लगता है अदिति भी पुरे जोस से अपने भइया का साथ देते हुवे दोनों भाई बहन होठ का रस पीने लगते है
2 मिनट बाद

अभय - गुरिया बुर मे उंगली मत करना ना ही पानी निकालना समझ रही हो ना मेरी बात को

अदिति की सासे रुक जाती है अभय की बात सुन कियुंकी अदिति समझ गई थी उसका भाई ये कियु केह रहा है

अदिति दूसरी तरफ देख धीरे से सर्म से - जी जी भाई जैसा आप बोले
अभय गारी चालू करते हुवे - आज जो मजा आया उफ केह नही कहता गुरिया पैंटी गंदी हो गई होगी बदल लेना
अदिति हैरान अभय को देखती है अभय मुस्कुराते हुवे - तेरा भाई इस सब मे खिलाडी है
अदिति सर्म से पानी पानी हो जाती है तभी अभय का फोन बजता है

अभय - हा
सामने से ......?
अभय - ठीक है आता हु
अदिति - कोन था भाई
अभय मुस्कुराते हुवे - कोई नही चलते है


सुसमा के घर के पीछे दिशा विजय खेत की तरफ जा रहे थे विजय दिशा के हाथ पकरे हुवे था तभी विजय दिशा को एकदम से बाहों मे लेके चूचे जोर से दबाने लगता है

दिशा सिसकिया लेते हुवे - नही देवर जी और आगे यहा कोई आ सकता है
विजय दिशा के ब्लाउस के अंदर हाथ डालते हुवे - नही रुका नही जाता

दिशा विजय का हाथ पकर प्यार से - यहा अच्छे से नही कर पायेंगे 10 मिनट का रास्ता है आगे एक माचन् है लालटेन है मेने सब रेडी करके रखा है

विजय - ठीक है चलते है रहा नही जाता भाभी उफ
दिशा मुस्कुराते हुवे - हु चलिए मुझे भी रहा नही आता

खेतो से होते चादनी रातों मे दिशा विजय माचन् के पास आ जाते है दूर दूर तक खेत थे और कोई नही था विजय एक नजर चारों तरफ देखता है चादनी रात की वजह से कुछ दूर देखा जा सकता था

विजय दिशा के पास सत् के एक चूचे पे हाथ रख दबाते हुवे - उफ मस्त है
दिशा विजय को देख मुस्कुराते हुवे - अच्छा लेकिन इसकी सजा तुम सेह नही पाओगे
विजय हैरान दिशा को देख - मतलब

विजय के पीछे से कोई कहता है - मे बताता हु
विजय शोक मे पीछे देखता है तो एक विजय और खरा था तभी खेत मे छुपे 20 लोग जब खरे होते है तो विजय की हालत खराब हो जाती है

हा दो विजय लेकिन एक नकली था एक असली

दूसरा विजय पहले विजय के पास जाने लगता है लेकिन पहला विजय जल्दी से एक चाकू निकाल दिशा की तरफ देखता है तो दिशा के आगे दो लरकी खरी थी मास्क पहने

दूसरा विजय तेजी से पहले विजय के चाकू वाले हाथ को पकर - तूने इसी हाथ से मेरी प्यारी भाभी को मेरी जान रीमा को छुवा है ना

पहला विजय कुछ कर पता तब तक दूसरा जो असली था पहले विजय का हाथ तोर देता है कराक् के आवाज के साथ
पहला नकली विजय दर्द मे चीखने ही वाला था पीछे से कोई उसके मुह को बंद कर अछे से पकर लेता है

विजय दिशा को देखता है फिर एकदम से दिशा के पैर पे गिर रोते हुवे - माफ कर दीजिये भाभी मेरी गलती की वजह से आप को रीमा को इतना सब सेहना परा मेरी वजह से सब खतरे मे आ गये थे

दिशा विजय को उठा के ; गलती तो आपसे हुई है देवर जी लेकिन जरूरी ये है खतरा तल गया है

विजय रोते हुवे - लेकिन भाभी इस कमीने ने आपको छुवा इस कमीने ने आपको सिर्फ मेरे भइया छु सकते है और कोई नही

दिशा लाल आखो से नकली विजय को देख - हा उसकी सजा तो उसे मिल के रहेगी

तभी अभय आते हुवे - सही कहा दिखा मेरी बीवी मेरे अपनो पे हाथ डाला है सजा भी ऐसी मिलेगी रूह काप् जाए

अभय एक नजर नकली विजय को देखता है फिर असली विजय को
विजय अभय को देख डर जाता है अभय मे नियम बनाये थे गलती की सजा सब को मिलके ही रहेगी चाहे कोई भी हो

दिशा अभय के सीने से लग - पति जी उसने
अभय दिशा को बाहों मे लेके - रोना मत तुमने बहोत अच्छा क्या दिशा अब सजा की बरी है

अभय नकली विजय को देख - तुम विकास हो ना हु

नकली विजय अभय को देख डरता नही जाहिर है नकली विजय यानी विकास को पता है अभय कोन है फिर दिशा उसकी कोन है फिर भी उसने सब करा

अभय अपने बंदे को इशारा करता है तो जिस बंदे ने विकास का मुह बंद किया था खुल देता है

विकास दर्द मे तरपते हुवे अभय को देख - तो आह तुम जान गये
अभय - जानते तो हो मे कोन हु
विकास दर्द मे भी मुस्कुराते हुवे - अच्छे से जनता हु कमीने तेरी वजह से मे पीछे रह जाता तु आगे लोग सब तेरी बाते करते मुझे कोई देखता भी नही था जबकि मेरे अंदर भी वो दम पावर थी

अभय - हु ये सच है चलो मरने से पहले बता भी दो कैसे तुम विजय के जगह लिये
विकास अभय को देखता है फिर हस्ते हुवे विजय को देख - आसान था

dp devil तुम्हे कही से भी ढुंढ के मारना चाहता था कियुंकी तूने उसका सब कुछ खतम कर दिया dp devil के कई लोग तुझे पगलो की तरह ढुंढ रहे थे उसमे मे भी था

किस्मत ने मेरा साथ दिया मुझे विजय दिख गया एक लरकी के साथ बाइक पे जाते हुवे बस उसी दिन से विजय को फ्लोव् करने लगा

विकास विजय को देख - ये पागल उस लरकी मे इतना खोया रहता था की आस पास ध्यान ही नही देता उसका पुरा फायेदा मुझे मिला जब दोनों पार्क मे बैठ बाते करते तो मे चुपके से सुनता था दोनों की बाते सुन मुझे पता चला वो लरकी रीमा है जिसके विजय प्यार करता है दोनों की बाते सुन आह आह मुझे ये भी पता चला तुम जाने वाले हो और , विकास दिशा को देख मुस्कुराते हुवे, तेरी बीवी के बारे मे भी

विजय विकास की तरफ गुस्से से जाते हुवे - साले मेरी भाभी को
अभय बीच मे - सन्त बोलने दो
विजय एक जगह सन्त खरा हो जाता है

विकास - दोनों की बाते सुनके मुझे बहोत कुछ पता चला इतना काफी था तेरे घर के अंदर जाने का प्लान भी बन गया

जिस दिन तु गया उसी साम विजय घर बाइक से आ रहा था बीच मे ही मे अपने लोगो के साथ रेडी था बस विजय को बेहोस करके उसकी जगह मे ले लिया


दिशा आगे आके - फिर तुम रीमा के पास गये कियुंकी तु हवस से भरा इंसान है तुझे लगा रीमा आसान शिकार है

विकास हस्ते हुवे दिशा को देख - एकदम सही विजय रीमा दोनों एक दूसरे से प्यार करते थे दोनों के बीच सब हो भी चुका था लेकिन सोचा नही था उस दिन मे कुछ कर नही पऊगा
दिशा - तुम रूप बदलने मे माहिर हो सच कहूं तुझे देख कोई केह नही सकता तुम नकली विजय हो लेकिन तुम एक बात भूल गये
विकास - वो क्या
दिशा - फीलिंग एहसास ये तिलिंग एहसास तब आती है जब कोई अपने प्यारे को देखते है रीमा के पास तुम गये लेकिन रीमा तुझे देख तेरी आखो मे देख समझ गई तुम विजय नही हो रीमा को वो फीलिंग एहसास जो देवर जी को देख होती थी वो हुई ही नही इस लिये उन्होंने बहाना बनाया की पीरियड आये है

विकास हैरान होता है
दिशा - उसी रात रीमा ने मुझे फोन करके बताया

रीमा - भाभी आज ऐसा हुआ मुझे लग ही नही रहा वो विजय जी है समझ नही आ रहा कुछ

दिशा हैरान होके - क्या रीमा अगर ऐसा है तो दो ही चीजे हो सकती है पहला वो कोई दूसरा है दूसरा देवर जी बदल गये मुझे पहला लगता है देवर जी को मेने टेस्ट लिया करीब से जानी हु तो देवर जी बदल नही सकते

रीमा हैरान होके - तो भाभी कोन हो सकता है
दिशा - बात नही लेकिन वो भी है आया गलत इरादे से ही है एक बात बताओ देवर जी के जिस्म पे कोई ऐसा निसान है जिसे देख पहचान सके

रीमा - जी सीने पे वो इंसान
दिशा - नही दूसरा ये काम नही करेगा जब कोई देवर जी के जगह आया है तो जाहिर है उसे सब पता होगा कोई ऐसा जिसपे ध्यान जाये भी तो इंग्नोर कर दे
रीमा सोचते हुवे सर्म से - वो वो इनके लंड के ऊपर तिल है काला
दिशा सर्म से - हु समझ गई सुनो वो जो भी है फिर कोसिस करेगा तेरे साथ कुछ करने की तो सावधान रहना मे पति को को बताती हु सब

रीमा - जी समझ गई

दिशा विकास को देख - फिर मेने पति जी को सब बताया

अभय - किया दिशा तुम सब ठीक तो हो ना उसने किसी के साथ
दिशा - नही अभी कोसिस की है
अभय - जो भी है उसे पता था मे जाने वाला हु तब वो आया विजय का रूप लेके दिशा उसे टाइम को आदत पर जायेगी समझ रही हो ना तुझे उसे सक होने नही देना है अगर ऐसा हुआ तो

दिशा विकास को देख - फिर मेने वैसा ही किया तुझे अपने आप को छूने दिया ताकि तुम किसी और पे धयान ना दे सको मुझे कैसे भी पति जी के पास तुझे ले जाते हुवे नाटक करना था जब तक देवर जी मिल नही जाते देवर जी मिल गये फिर तेरी फील्डिंग सेट करदी देख तो रहे ही हो

विकास सन्त रहता है फिर जोर जोर से हसने लगता है

विकास हस्ते हुवे - मेरा कम बस इतना था जनकारी निकालना shadow के बारे मे पता करना लेकिन मेने देखा साला shadow के आस पास एक पे एक लरकी औरत है तो उफ और तुम आह ये सच है मे हवस की वजह से पकरा गया कियुंकी मुझे रोज एक बुर चाहिये ही होता था खैर सायद मेरी मौत यही लिखी थी लेकिन मजा बहोत आया जितना भी तेरे

इतने मे ही विजय तेजी से जाके विकास के दूसरे हाथ को भी तोर देता है और मुह बंद करके गुस्से से - एक बार फिर इस गंदी जुबान से मेरी भाभी का नाम भी लिया तो अच्छा नही होगा

अभय दिशा के पास जाके गले लगा के - मेरी जान तूने अच्छा क्या हा उस कमीने ने तुझे टच किया लेकिन
दिशा - नही पति जी करना जरुरी था बाकी अब उसकी सजा आप उसे दे ही दोगे
अभय दिशा को किस करके - हु जाओ हम आते है
दिशा - लेकिन मुझे उसे मरते हुवे देखना है
अभय - नही जान हमारी मजबूरी किस्मत हमे एस रास्ते पे लेके आई है लेकिन मे नही चाहता तुम हमारा बच्चा पे ये सब परे

दिशा - ठीक है जी जैसा आप कहे

दिशा जाने लगती है अभय दिशा को देखता है जाते huw फिर विकास के पास आके मुह कस के पकर् गुस्से से आखो मे देख - मेरे बारे मे सब जनता था किस पे हाथ डाल रहा है उसकी सजा तुझे किया मिलेगी ये भी जनता था लेकिन अगर तु ये सोच रहा है मे गुस्से से एक बार मे ही मुझे मार दूँगा तो तु गलत है
अभय की बात सुन विकास की आखो मे वो डर दिखने लगता


विकास का मुह बंद किया जाता है और अभय एक एक उंगली हाथ के पैर के पैर भी तोर देता है फिर सीने के हड्डी भी कोई कट खून नही बस अंदर की हड्डी टूटने की आवाज सुनाई दे रही थी और विकास दर्द पे तरप रहा था लेकिन आवाज नही निकल पाती 10 मिनट मे ही दर्द ना सहने की वजह से विकास दम तोर देता है

अभय j, k लोगो को देख - लाश ठिकाने लगा तो और मासी के घर के चारों तरफ लोगो को लगा दो

j. k - जी बॉस

अभय विजय को देख - चले
विजय डरते हुवे - जी जी भाई

विजय - भाई माफ
अभय बीच मे - बहोत कुछ हो गया जो होना नही चाहिये था इस बारे मे कल आराम से बात करेगे

घर पे आगँन मे सब लाइन दे बैठे थे खाना लग रहा था आसा दिशा को देख - बहु लाला विजय बेटा दोनों कहा है
दिशा - मम्मी जी आ रहे है
सुसमा - ये दोनों भी ना खाने के समय हो गया और पता नही किया कर रहे है
मिनिता - आने दो खबर लेती हु दोनों की
सिला - और नही तो किया टाइम का ख्याल भी नही है दोनों को
तारा हसने लगती है
पूजा - मा आप हस कियु रही है
तारा - हसू नही तो क्या सब दामाद जी पे गुस्सा कर रहे है लेकिन आयेगे तो कोई कुछ बोल नही पायेगा
अदिति हस्ते हुवे - अपने एकदम सही कहा
सुसमा - कियु कोई नही बोलेगा
sabhi सुसमा को देखने लगते है

tabhi अभय विजय आते है रीमा विजय को देखती है विजय रीमा को रीमा के दिल मे एहसास फीलिंग आती है हा यही उसका विजय है

मिनिता अभय विजय को देख - अरे तुम दोनों आ गये आ जाओ बैठो
सिला - तुम दोनों का ही इंतज़ार कर रहे थे
तारा फिर हसने लगती है तो सब हसने लगते है तारा ने जैसा कहा किसी ने गुस्सा नही किया

अभय आसा के पास बैठ - मा सब हस कियु रहे है
विजय मिनिता के पास बैठ - हा बताओ ना
दिशा - बस ऐसे ही
अशोक - चलो खाते है मुझे खुशी है मेरी साली बाकी आप सब आये मेरी बेटी की शादी मे
मितल - हा खास कर मेरी प्यारी मासी को
आसा मुस्कुराते हुवे - आना ही था आ गये
मिनाक्षी - सुकर है आप आ गई मासी नही तो ये शादी तो टूट के रहती
सुसमा - हु छोटी बहु सही केह रही है

खाना पीना होने के बाद फिर सब बाते करने लगते है लेकिन सवाल ये था सब कैसे सोने वाले थे

सुसमा - मितल अदिति पूजा बेटी एक कमरे मे ,
अभय बीच मे - कोई कही भी सोये लेकिन हम मा बेटे साथ सोयेंगे
आसा की सासे रुक जाती है वही सुसमा हैरान होके - किया मुझे लगा हम साथ सोयेंगे अच्छा मा के आते ही मासी को भूल गया

अभय आसा को गले लग - नही मासी आपके साथ कल
सुसमा - ठीक है भाई तुम मा बेटे को एक कमरा मिल जायेगा
अभय धीरे से - मा रेडी हो ना
आसा सिहर जाती है

तीन चार एक एक कमरे मे सोने वाले थे जिसको जिसके साथ सोना था जोरि बना के लेत जाते है

सुसमा लेती नाइटी के अंदर बुर पे उंगली करते हुवे मन मे - उफ बहोत दिल कर रहा है लेकिन अब कल ही ले पयुगी लंड उफ अभय बेटे ने फिर प्यास जगा दी तो वही आग ठंडी करेगा

एक कमरे मे अदिति पूजा कोमल दिशा थे

दिशा कोमल पूजा बाते कर रहे थे लेकिन अदिति बार बार होठ छु रही थी जीब फेर रही थी कियुंकी अदिति को लंड का स्वाद अभी भी फिल हो रहा था गारी वाला सीन याद आ रहा था वो मजा कैसे भाई का लंड चुस्के स्वाद लिया कितना मजा आया सब याद मे खोई थी

दिशा कोमल पूजा अदिति को देखते है फिर मुस्कुराने लगते है तीनो को समझ आ चुकी थी कुछ ना कुछ हुआ तो है

वही अभय आसा कमरे मे आते है आसा खरी थी अभय जाके अच्छे से दरवाजा बंद कर देता है ये देख आसा की सासे रुक जाती है

अभय आसा के पास आके आसा को देख - आज इस मोक्के का इंतज़ार बहोत बेसबरी से कर रहा था मा अब मे आपको बिकनी पैंटी मे देख प्यार कर सकता हु उफ मा

आसा सिहर जाती है काप् जाती है और कपते हुवे - बेटा
अभय आसा के कमर पकर अपने होठ आसा के होठ के पास लाते हुवे - आज जो करना है मे करके ही रहुंगा मा
बडा ही गजब का शानदार लाजवाब और अद्भुत रोमांचक मनमोहक मदमस्त अपडेट है भाई मजा आ गया
 

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chapter 107

( दोस्तो वो मिठाई जो हमे पसंद होती है लेकिन रोज रोज खरीद नही पाते लेकिन जिस दिन खरीद लेते है तो हम बरे आराम से तुकरो मे स्वाद लेके खाते है आसा वही मिठाई है जिसे अभय धीरे धीरे स्वाद लेके खाना चाहता है

आसा अभय के लिये मेने बहोत कुछ सोच रखा है जिसकी आपको उमीद नही होगी इतना फोकस ध्यान मेने इस स्टोरी मे किसी करेक्टर अभय के बीच नही दिया मे आसा अभय के हर मोमेंट पे देने की सोच रखा है हर मोमेंट आसा अभय के बीच जो होगा उसे पुरे दिल से अच्छे से उतरना है जिसके लिये मे पुरा ध्यान देता हु फोटो वीडियो gif बनाता हु ताकि आप फिल करो आसा के साथ
कैसा लगेगा आसा की जगह मे कोई पतली लरकी का फोटो gif दालु अभय की जगह एक बूढ़े को हा तो मे पुरा ध्यान देता हु कई घंटे स्टोरी लिखता ताकि आप लोगो को लम्बा लम्बा update दु जिसे पढ़ आपको भी मजा आये इतना सब करने के बाद भी कोई मेरी मेहनत मुझे नही समझता तब बुरा लगता है

स्टोरी मे कई करेक्टर है उन सब पे भी फोकस करना परता है मे सिर्फ आसा अभय पे नही कर सकता स्टोरी के हिसाब से कहानी मे किसी update मे आसा कम आ सकती है किसी मे जयदा तो किसी पुरे update मे आसा ही रहेगी ये स्टोरी कैसे आगे जा रही है उसपे डिपेंट करता है
मे यही बाकी कुछ लोगो को समझाने की कोसिस करता हु
जैसे आज का ये update आसा अभय मे चला गया इस upadate को पढ़ो फिल करोगे दिखेगी मेरी मेहनत जाके पढ़िये और कॉमेंट करके बताये ये upadate कैसा लगा मेरी मेहनत दिखी या नही
🙏🙏🙏🙏


कमरे मे आज पहले से भी जयदा गर्मी बढ़ गई थी एक मा का जिस्म जो प्यार के लिये तरप रहा है वो अब पुरे गर्मी से भरा था

हा आज आसा की बॉडी हद से जयदा गर्म हो गई थी जाहिर है आसा को अच्छे से पता था आज उसे क्या करना होगा

अभय आसा के होठ पे उंगली फेरते हुवे आसा की आखो मे देख - मेरी मा आप की खूबसूरती आपकी ये आखे आपका ये हुस्न आपके बॉडी की खुशबु सब कुछ मुझे पागल कर देता है मे होस खोने लगता हु
आसा अभय की आखो मे देख कपते होठो से - लाला वो मे तु
अभय आसा के होठ पे उंगली रख - कुछ मत बोलिये आज लाला को प्यार करने दीजिये जयदा आगे नही जाउंगा

आसा जोर जोर से साने लेने लगती है आसा के चूचे उपर नीचे होने लगते है चेहरे पे नही पूरी बॉडी पसीने से भीगने लगती है

अभय आसा को देखता है फिर एक हाथ आगे ले जाके आसा के एक चूचे ब्लाउस के ऊपर से ही पकर दाबने लगता है अपने बेटे को यू चूचे पकर दबाते देख आसा सिहर काप् जाती है आसा जोर से आह करती है जोर जोर से सिसकिया लेने लगती है जोर जोर से सासे लेने लगती है अभय आसा के एक चूचे दबाते फिल करते आसा को देख - मा आज मेरे कुछ सपने पुरे होगे मा आपके ये मुलायम नर्क सॉफ्ट बरे चूचे जिसे पे छोटा था तो दूध पिता था आज मेरे हाथो मे है मे बता नही सकता मे कितना खुश जोस से भरा हुआ हु उफ मा बहोत मुलायम है सॉफ्ट है दबाने मे ऐसा लग रहा है मे रबर दबा रहा हु

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आसा तो तरप रही थी आसा की पूरी बॉडी काप् रही थी पैर भी काप् रहे थे अपने बेटे के उंगली चूचे पे फिल करके आसा पूरी मद्होस होते जा रही थी अपने बेटे के दबाव जो उसके चूचे पे फिल हो रहे थे दबाने से जो मीठा दर्द आसा को हो रहा था वो दर्द वो फिल करके आसा एक जोर दर्द आह मा करती है और नासिलि आखो से अभय को देख कपते होठो से - आह मा लाला इस लिये तुझे पैदा किया ताकि बरे होके अपनी मा के चूचे दबाये हा बोल सर्म नही आती
अभय जोर से चूचे दबा के - किया क्या फिर से बोलिये
आसा जोर से आह मा मर गई - मे मे मेने कुछ नही कहा

अभय आसा के चूचे छोर देता है आसा जोर जोर से सासे लिये जा रही थी अभी भी आसा की बॉडी अभय की हरकत से काप् रही थी ये इस लिये था कियुंकी चूचे दबाने वाला उसका पति नही बेटा था अभी से ही आसा पसीने से भीग गई थी

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अभय आसा को देखता है फिर नीचे आसा की कमर को जो पसीने से भीगी हुई थी आसा की चिकनी गोरी कमर पे पसीने की बूँद और भी सीन को आसा की कमर को कमुक् बना रही थी और आसा की गहरी ढोरी के क्या ही कहने वो तो और सीन को गर्म कर रही थी अभय बरे गोर से देखता रहता है अभय सन्त था सब देख फिल कर रहा था
आसा अभय को देखे जा रही थी उसका बेटा कैसे उसकी कमर को देख रहा है तो आसा की सासे और भी तेज होने लगती है

अभय आसा की तरफ एक कदम बढ़ाता है तो आसा सिहर जाती है
अभय आसा के एकदम पास आके - असली खेल तो बाकी ही है और आप अभी से ही पसीने से भीग गई
आसा सर्म से पानी पानी हो जाती है नजरे नीचे कर लेती है

अभय आसा को एकदम से आगे घुमा देता है आसा हैरान होती है लेकिन तब तक अभय आसा के बरे बरे गोल गोल बाहर निकले गुडे से भरी गांड को दबाने लगता है आसा जैसे ही गांड पे अभय का हाथ और दबाव फिल करती है आसा जोर से आह करते सिसकिया लेते हुवे - लाला मत कर लाला करना ही है तो धीरे कर ना लाला जोर से मत दबा मेरी गांड को तेरी मा की गांड है आह लाला सुन रहा है ना

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अभय आसा के दोनों गांड पे हाथ फेरते हुवे गांड को दबाते हुवे फिल करने मे लगा था अभय अपनी मा की बरी गांड को दबाते हुवे गांड की बीच दरार मे भी थोरा उंगली ले जा रहा था ये सब कुछ आसा के लिये बहोत ही सर्म से भरा मोमेंट था लेकिन पुरे जोस मद्होस करने वाला भी आसा के मुह से जोर जोर से आह उफ सिसकिया ही निकल रही थी अभय अच्छे से गांड दबाते हुवे फिल करते हुवे - मा सुन रहा हु लेकिन आपकी ये बरी बरी गुडे से भरी गांड दबाने मे हद से जयदा ही मजा आ रहा है मा सच मे बहोत बरी गांड है मास से भरी रबर जैसा

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अभय अच्छे से गांड दबाते हुवे एक जोर दार चाटा आसा की गांड पे मारता है आसा जोर से आह मा मर गई करती है आसा और भी सिहर जाती है अभय की हरकत आसा को और जोस मद्होस कर रही थी बुर की हालत अभी से ही खराब हो गई थी आसा कपते हुवे - लाला जोर से मत मार आह मर गई इतने जोर से मत दबा लाला आह
आसा मन मे - आज तो मे गई मेरी बुर बहोत पानी बहा रही है मे मे मद्होस होती जा रही हु इतना जोस गर्मी मेने पहले कभी फिल नही की लेकिन मेरा बेटा जो कर रहा है वो भी मेरे पति ने नही क्या उफ

अभय रुक जाता है आसा पीछे मुरति है जोर जोर से सासे लेते huw बिस्तर पे बैठ जाती है चेहरे पे पसीने की बूँद थे और आसा की हालत खराब आसा मन मे - इतनी हालत तो पहले कभी मेरी खराब नही हुई

अभय आसा के एकदम पास आके खरा हो जाता है आसा घबराते हुवे अभय को देखती है अभय आसा को देखता है फिर एक हाथ आसा के ब्लाउस के बीच रख पीछे लेता है जिसकी वजह से आसा के दोनों गोरे गोरे मस्त चूचे आधे अभय को दिखने लगते है इस हरकत से आसा जिसने अपने सासो को कंट्रोल करके रखा था फिर से उखड़ जाती है आसा बहोत जोर से बिस्तर को पकर लेती है तेज सासे की आवाजे अभय के कानों मे जा रहा था अपने बेटे की हर हरकत से आसा सिहर जाती काप् जाती

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अभय सांत खरा ब्लाउस के अंदर अपनी मा के चूचे देखते हुवे - कोई नही ठीक सकता मेरी मा के सामने मा आपके चूचे जैसा किसी के चूचे नही हो सकते ना मेने देखे है बहोत गोरे है पता नही निपल बहोत काले है या थोरा सा लेकिन जैसा भी हो कयामत होगा खूबसूरत होगा
अपने बेटे की बात सुन आसा को बहोत जयादा की खुशी मिलती है आसा अभय की तरफ देख कपते होठ से - सच केह रहा है किया मेरे चूचे जैसा किसी के चूचे नही है मेरे चूचे मे ऐसा क्या है
अभय आसा को देख - बनावट मा बॉडी जैसी हो वैसे ही बॉडी का हर अंग पार्ट भी हो तो वो एक पर्फेट बॉडी मानी जाती है दूर से ही देखने मे बहोत गजब कयामत लगती है मान लो बॉडी के हिसाब से चूचे छोटे है या जयदा ही बरे तो वो अच्छे नही लगते और सबसे बरी बात ये चूचे मेरी मा की है जिसे मे चूस चूस के पीके बरा हुआ
अभय के चूस चूस वाली बाते सुन आसा के बॉडी मे अजीब का एहसास होता है

अभय आसा के सीने पे हाथ रख जोर से आसा को धक्का देता है आसा आह करते एकदम से बिस्तर पे गिर परती अभय आसा को देखता है आसा बिस्तर पे परी जोर से सासे लेते घबराई अभय को देखती है सोचती है अब आगे किया करेगा

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बिस्तर पे परी आसा सीने पे सारी नही कमर खुले साफ दिख रहे थे बरे चूचे होने की वजह से ब्लाउस मे भी चूचे खरे खरे साफ दिख रहा था
अभय उपर से नीचे तक आसा को देखते हुवे - जिसकी मा इतनी खूबसूरत हो उसका बेटा कैसे अपने आप को रोक सकता है
आसा बिस्तर पकरे अभय को देख - लेकिन . तभी आसा बात बदल. तु बहोत बेशर्म हो गया है मा हु तेरी थोरि तो दया कर
अभय आसा को देख - नही इस मामले मे दया की कोई जगह नही ये मोमेंट प्यार करने का है इसमें दर्द ही कियु ना हो मे दया नही करता हा मे आपके आखो मे आसु नही देख सकता लेकिन इस प्यार करते वक़्त आ भी गये तो रुकुगा नही
अपने बेटे की बात सुन के आसा की हालात पूरी खराब हो जाती है

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अभय धीरे से बिस्तर पे जाके आसा के पास बैठ जाता है फिर आसा की सासे तेज हो जाती है अभय एक हाथ आसा के पेट पे रखता है फिर सेहलते हुवे जोर से मसल देता है आसा को बहोत दर्द होता है आसा जोर से आह करती है दर्द मे - मर गई जोर से मसल दिया
अभय आसा के पेट मसलते हुवे - कितनी गोरी चिकनी है
आसा दोनों हाथो से बिस्तर पकरे दर्द मे सिसकिया लेते - आह बेटा

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अभय झुकता है आसा के पेट को एक हाथ से पकरे अपनी जीब निकाल मजे से आसा के पेट को चाटने लगता है इस हरकत से भी आसा सिहर काप् जाती है आसा बिस्तर पे मछली की तरह तरपने लगती है जोर जोर से आह उफ सिसकिया लेने लगती है
अभय झुका अपनी मा के पेट चाटने हुवे मन मे - उफ कितना अच्छा स्वाद है मा के पेट चाटने मे इतना मजा आ रहा है तो उफ मा की रस से भरी फूली बुर चाटने मे कितना मजा आयेगा

तभी एकदम से आसा अभय को दूर करके उठ के बैठ जोर जोर से सासे लेते हुवे कपते हुवे होठो से - आह लाला प्यास प्यास लगी है

अभय - लाता हु मा
अभय पानी लेने जाता है आसा जल्दी से बुर को सारी के ऊपर से रगर के मसलने लगती है मुह से आह उफ सिसकिया निकालते हुवे - मेरी बुर गीली है अंदर ऐसा लग रहा है चीटिया रेग रही हो आह उफ


अभय आता है आसा बैठी थी अभय पानी देता है आसा पीने लगती है
पीने के बाद अभय गिलास को रख आसा के पीछे जाके बाहों मे भर लेता है आसा - लाला दया कर ना थोरि सी बेसर्म कही का
अभय मुस्कुराते हुवे - कोई दया नही आज मा
अभय आसा के फेस को अपनी तरफ करके किस करने लगता है साथ मे आसा के पेट को दोनों हाथो से सेहलाते रहता है आसा भी पुरे जोस मे अपने के सर को पकरे किस किये जा रही थी

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कमरे मे दोनों का बेटे की गर्मी प्यार से कमरा पुरा गर्म हो चुका था आसा अभय दोनों की हालत सेम थी आसा की बुर पूरी गीली थी लेकिन आसा बरी मुश्किल से अपने आप को रोके हुवे थी झरने से नही तो अब तक आसा की बुर पानी भर भर के बहा चुकी थी लेकिन आसा के लिये खुद को रोकना मुश्किल हो रहा था सेम अभय का भी वही हाल था जाहिर है मा बेटे थे वो होस मजा फीलिंग सब अलग ही लेवल पे था

अभय किस तोरता है और अपने सर्ट निकालने लगता है आसा हैरान घबरते हुवे कपते हुवे - लाला ये ये तुम क्या कर रहे हो
अभय सर्ट निकाल - चिंता मत कीजिये हद से आगे नही जाउंगा

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अभय एकदम से आसा को पकर अपनी तरफ खिचता है आसा तेजी से अभय के जाके लगती है अभय पीछे से आसा के ब्लाउस के बटन खोलने लगता है आसा घबराते हुवे - लाला मत कर उफ मा हु बेसरम मा के साथ कोई बेटा ऐसा करता है क्या तुझे सर्म नही आ रही लेकिन मुझे बहोत आ रही है रुक जा ना लाला

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आसा के कहते रहती है तब तक अभय आसा के ब्लाउस के बटन खोल ब्लाउस को दोनों तरफ अलग कर देता है लाल गुलाबी बिकनी मे कैद आसा के दोनों चूचे अभय के सामने आ जाते है आसा सर्म से पानी पानी हो जाती है लाल गुलाबी बिकनी मे उफ आसा कयामत लग रही थी अभय भी ये देख पुरे जोस में पागल हो जाता है

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ब्लाउस अलग करने के बाद अभय दोनों हाथ धीरे से आसा के चूचे पे उपर रख सेहलाते हुवे चूचे की तरफ ले जाने लगता है आसा फिल करके समझ के और काप् जाती है आसा - नही लाला रुक जा उफ नही वाहा नही लाला आह बेटा मा हु तेरी मत कर लाला

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आसा कहती रहती है लेकिन तब तक आसा के दोनों हाथ को चूचे पे रख आसा के ऊपर अपना हाथ रख अभय का हाथअभय जोर से दोनों चूचे दबाने लगता है अभय अपनी मा से खुद के चूचे डबवा रहा था आसा भी हैरान थी आसा जोर से दर्द मे आह करते हुवे - मर गई मर गई मेरे चूचे खुद मुझसे दबवा रहा है जोर जोर से बेसरम
अभय मुस्कुराते हुवे - उफ मा आप दबती नही ना इस लिये फिल करिये ऐसा लग रहा है बोलिये ना मा
आसा सिसकिया लेते हुवे सर्म से - उफ मा मेरे हाथ मेरे दोनों चूचे पे है लेकिन दबा तु रहा है नालायक बेसरम कही का

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अभय आसा के हाथ हटा के अपना हाथ आसा के दोनों चूचे पे रख जोर जोर से दबाने लगता है आसा जल्दी से अभय के हाथ पे हाथ रख सिसकिया लेते हुवे - लाला मेरे बेटे आह दर्द हो रहा है जोर से मत दबा मे रोक आह मा नही रही आह लेकिन धीरे मेरे लाल
अभय चूचे दबाते हुवे - मा बहोत नर्म बरे चूचे है दबाने मे उफ कसम से बहोत जयदा ही मजा आ रहा है मा आपको अच्छा लग रहा है ना
आसा मद्होस सिसकिया लेते हुवे थोरा सर्म से - उफ बेटा मेरे पति दबाते नही थे तुही ही दबा रहा है ये चूचे दबाने वाला मजा उफ पहली बार ले रही हु बहोत अच्छा लग रहा है आह लाला मेरे बेटे दबा जितना दबाना है मे साथ हु तेरे कर ले अपने मन की

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अपनी मा की बात सुन अभय पुरे जोस से भर जाता है और आसा को गोद पे झुका के किस करते हुवे चूचे दबाते रहता है आसा भी पुरे मजे ले रही थी अपने चूचे दबाने किस करने का अभय मन मे - आज मेरी किस्मत खुल गई मे जो कर रहा हु जो सोचा नही था कभी अपनी मा के साथ कर पाऊंगा मा के बरे बरे दोनों चूचे मेरे हाथो मे है दबाने मे जो फिल मजा मिल रहा है केह नही सकता मा के रसीले होठों का रस उफ मेरी मा मेरे गोद पे है उसकी बॉडी की गर्मी खुसबी आज कही मे पागल ना हो जाऊ

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अभय किस करते हुवे अपनी मा को बिस्तर पे अच्छे से लेता के ऊपर आके किस करने लगता है आसा हर फिल हर हरकत का अपने बेटे के प्यार करके का मजा ले रही थी कुछ आसा मन मे - आज तो लाला अलग जी जोस मे है मेरी हालत खराब कर दी है लाला ने लेकिन सच कहु बहोत मजा आ रहा है ये सेक्स करने से कई जयदा मजा इस तरह मेरे जिस्म को अभय के पापा ने कभी प्यार नही क्या लेकिन आज मेरा बेटा कर रहा है ये एहसास मजा मुझे पागल कर रहा है

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अभय फिर एकदम से आसा को पेट के बल लेता के सारी पेटीकोट के अंदर हाथ दाल के आसा के गांड दबाने लगता है आसा पूरी तरह शोक हो जाती है एकदम सिहर काप् जाती है आसा जोर से - नही नही बेटा रुक जा, आसा जल्दी से उठ कर बैठ जाती है

अभय पसीने से भीगा आसा को देख - मा मेने कुछ गलत कर दिया
आसा पसीने से भीगी अभय को देख तेज सासे लेते हुवे - नही मे आती हु

आसा पहले ब्लाउस पहन लेती है सारी सही कर लेती है अभय नही रोकता जो करना था अभय कर चुका था बाकी का खेल ऐसे भी हो सकता था

अभय - कहा जा रही है आप
आसा अभय को देख - पिसाब करने
अभय खरा होके - मुझे भी लगी है साथ मे चलते है
आसा सर्म से - हु ठीक है

आसा अभय घर के पीछे आते है आसा सारी पेटीकोट उपर करके बैठ जाती है अभय थोरि दूर खरा पिसाब करने लगता है

आसा के सिटी की पिसाब करने की आवाज अभय अच्छे से सुन पा रहा था और अभय के पिसाब करने की आवाज आसा

अभय लंड पकरे मन मे - ऐसा लग रहा था मे झर जाउंगा लेकिन बूँद बूँद पानी निकल मेरे लंड को गिला कर दिया है

वही आसा मन मे - बच गई नही तो झर जाती
अभय आसा की तरफ देख - मा सिटी की आवाज मस्त है
अभय को आसा बैठी पिसाब करती पास मे दिख रही थी लेकिन आसा सारी नीचे किये थी तो कुछ दिख नही रहा था

आसा सर्म से - चुप कर बेसरम आज बहोत कुछ कर लिया तूने
अभय मुस्कुराते हुवे - अच्छा अभी तो मैन काम आपको करना बाकी है
आसा ये सुनते ही काप् जाती है

अभय पिसाब करने के बाद आसा के पास आके सारी के नीचे हाथ डालने लगता है आसा हैरान शोक होके - लाला किया कर रहा है

अभय - आप पिसाब करते रहिये मा
अभय आसा के बुर के नीचे हाथ रखता है तो आसा के गर्म गर्म पिसाब अभय के हाथ पे बुर से निकल गिरता है तेज धार का फोर्स अभय अपने हाथो पे फिल करता है उफ ये फिल करके अभय मस्त होके - मा बहोत गर्म गर्म है तेज सुसु निकल रही है आपकी बुर से और जोर से करो ना सुसु
आसा अपना चेहरा छुपा के सर्म से - कितना बेसरम हो गया है तू अब मुझे पिसाब भी संती से करने नही दे रहा

आसा अभी हद से जयदा ही सर्म से पानी पानी हो जाती है
आसा पिसाब करके खरी अभय को देख सर्म से - ये क्या था ऐसा कोई करता है सर्म से मार देगा क्या

अभय जिस हाथ पे आसा के पिसाब लगा था उसे नाक से सुघते हुवे - आह ये आपके पिसाब की खुशबु उफ मा

आसा तो और भी सर्म से पानी पानी हो जाती है

अभय आसा कमरे मे आते है आसा बिस्तर पे बैठी थी अभय खरा था अभय आसा को देख - मा रेडी है आज आप अपने बेटे का लंड देखने वाली है

आसा बिस्तर जोर से पकर अभय को देख - आज सर्म से मार दोगे मुझे ठीक है दिखा मे भी देखु तेरा तेरा कैसा है

अभय पैंट खोलते हुवे - ये बताइये मा अपने पति का लंड कितना बरा होता है
आसा सर्म से - हु वही 5 इंच लम्बा 2 के पास मोटा
अभय - आपकी बुर से पानी निकाल देते होंगे हु
आसा सर्म से - छि बेसरम कैसी बाते करता है

तभी अभय पैंट खोल बिस्तर पे रख देता है और अभय लंड हाथ पे पकर आसा को देख - मा देख लो ये है आपके बेटे का लंड कैसा है
आसा जैसे ही अपने बेटे का लंड देखती है सासे फिल सब कुछ पल के लिये रुक जाता है मुह खुले आखे फटे रह जाते है आसा की बॉडी जरा भी हिल नही रही थी लेकिन नजरे बेटे के लंड पे थी

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अपनी का के शोक वाला फेस देख अभय बहोत खुश होता है आज तक अभय ने अच्छे से से ये फिल नही होने दिया था की उसका लंड कितना लम्बा होता है इस मोमेंट अपनी मा का यही शोक वाला फेस देखने के किये वो आज अभय देख रहा था

अभय आसा के पास नंगे मोटे पुरे टाइट लंड लेके आके खरा होके - मा कहा खो गई

आसा होस मे आती है अपने एकदम सामने बेटे का मोटा लंड देख कपते हुवे होठो से - लाला ये ये तेरा लंड इतना लम्बा मोटा कैसे मुझे मुझे पहले फिल कियु नही हुआ
तभी आसा समझ जाती है सब मामला और हैरान अभय को देखती है अभय मुस्कुराते हुवे - कैसा है बोलिये ना मा

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आसा अभय के लंड देखते हुवे मन मे - 12 इंच का होगा मोटाई 3 से उपर कैसे मेरे बेटे का लंड इतना लम्बा मोटा होगा सोचा नही था अब देख सोचती हु बहु कैसे लेती होगी ये मेरी बुर मे जायेगा तो मेरी बुर को फार के रख देगा, आसा फिर एकदम से, छि मे ये किया सोचने लगी
आसा अभय को देख सर्म से घबराते हुवे - बहोत बरा मोटा है

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अभय आसा के सीने से सारी हटा के एक चूचे दबाते हुवे - मा आपकी बुर मे जायेगा तो आपकी बुर का क्या होगा सोच लिया ना
आसा हैरान सर्म से सिसकिया लेते हुवे - सोच लिया लेकिन आह मे लुगी नही समझ गया आह मा धीरे दबा दर्द होता है

अभय चूचे छोर आसा को देख - अब बारी आपकी छूके देखिये
आसा अभय को देखती है और कपते हाथो से सर्म से अभय का लंड मुठी के पकर लेती है लोहे जैसा गर्म नशे फूली मोटे लम्बे लंड को पकरते ही आसा के बॉडी मे झटका लगता है और वो झटका बुर पे जाके लगता है आसा की बुर फच् फच् करके कई बूँद पानी निकाल देती है आसा मुश्किल से खुद को रोकने लगती है

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अपनी का को लंड पकरा देख अपनी मा के मुलायम उंगली अपने लंड पे फिल करके दुनिया का सबसे बरा खुशी मजा अभय को मिलता है वो कई बेटे का सपना सपना ही रह जाता है लेकिन आज अभय के कुछ सपनो मे से एक सपना पुरा हो गया था
अभय मजे जोस मे आसा को देख - उफ मा आपके लंड पकरते ही इतना मजा आ रहा है किया बताऊ मे उफ आज तो उफ मजा आ गया

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आसा अपने बेटे का मोटा लम्बा नशे फूली देख मन मे - कितना गर्म मोटा है मुठी मे भी नही आ रहे मेरी बुर लाला के लंड देख रो रही है सच कहु दिल कर रहा है बुर मे लगू भले मेरी बुर फट जाये लेकिन मे ऐसा नही कर सकती ये मेरे बेटे का लंड है जिस बुर से निकाला उसी मे कैसे ले सकती हु

अभय - मा हिलाओ ना रहा नही जाता समझो अपने बेटे का दर्द इस मोमेंट का इंतज़ार पगलो की तरह किया है
आसा अभय का दर्द समझ - हु करती हु लाला

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आसा बरे प्यार से अपने बेटे का लंड चमरे उपर नीचे करते हुवे हिलाने लगती है अभय खरा अपनी मा को लंड हिलाते मुठ मरते देख मजे की दुनिया मे जाते हुवे - आह उफ मा मेरी जान हो आप आज जो खुशी मुझे दे रही है आह उसका मे शब्द मे जिकर नही कर सकता आपकी मुठी मे मेरा लंड है आप हिला रही है मुठ मार रही है देख मुझे जो खुशी एहसास मजा मिल रहा है आह मा बता नही सकता
आसा अभय को देखती है फिर लंड हिलाते हुवे मन मे - लाला बहोत खुश है लाला को मजा आ रहा है लेकिन मुझे भी लाला का लंड पकर हिलाने मे अजीब का मजा आ रहा है ये एहसास मजा मेरे पति के हिलाने से भी नही आता था सायद हम मा बेटे है इस लिये

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अभय थोरा नीचे झुक अपने मा के एक चूचे दबाते हुवे - करते रहिये मा हिलाते रहिये उफ बहोत मजा आ रहा है आह मा उफ आप तो माहिर है अच्छे से मुठ मार रही है
आसा सर्म से - आह चुप कर बेसरम उफ मेरे चूचे धीरे दबा उफ आह
15 मिनट हो जाते है आसा का हाथ दर्द करने लगता है आसा हैरान होके अभय को देख - और कितना देर कब झरेगा तु हाथ दर्द करने लगे मेरे

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अभय आसा के निपल मसलने लगता है आसा के निपल नर्म टाइट लम्बे थे सुई के जैसा निकला हुआ अभय निपल दबाते फिल करने लगता है आसा सिहर जाती सिसकिया लेते हुवे - आह बेटा निपल मत दबा नही तो मे आह
अभय मुस्कुराते हुवे - मा अपने चूचे बहोत टाइट हो गये है उफ मा आपके निपल आह मसलने मे उफ किया ही उफ मा आह दोनों हाथो से मुठ मारो दर्द नही होगा इतनी जल्दी मे नही झरता
आसा हैरान अभय को देखती है फिर दोनों हाथो से मुठ मारते हुवे मन मे शोक मे - इतनी देर तो अभय के पापा टिकते नही थे
25 मिनट हो जाते है आसा अब पूरी शोक मे थी 35 मिनट हो जाते है अब आसा के दोनों हाथ बहोत जयदा दर्द करने लगते है
आसा तेज सासे लेते हुवे - बस अब नही होगा
अभय - बस मा उफ आने वाला है तेज तेज करो जल्दी

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अपने बेटे की बात सुन आसा तेजी से हाथ चलाते हुवे हिलाने लगती है अभय - आह मा उफ आने वाला है आने वाला है मा मेरी हॉट सेक्सी रस से भरी मा आह करते अभय पिचकारी एक मिनट तक मारते मारते झरने लगता है कई बूँद आसा के फेस चूचे सारी और हाथ पे जाके गिरते है अभय बहोत जोर से झरा था इतना माल अभय का अभी भी नही निकला था

अभय धराम से बिस्तर पे गिर जोर जोर से सासे लेने लगता है आसा जल्दी से जाके मुह हाथ साफ करती है और बेड के पास अपने बेटे का इतना सारा उजला गाढ़ा माल देख मन मे - इतना सारा उफ तभी मेरी बहु एक बार मे ही मा बन गई बुर मे इतना माल निकलेगा तो वो मा बन ही जायेगी

आसा अभय को देख - आज हमने लाइन के आगे जाके ये सब किया है लेकिन लाला खुश है तो मे खुश हु

आसा सारी निकाल नाइटी पहन मन मे - सारी पैंटी मुझे सुबह धोना होगा

आसा फिर कपड़े लाके नीचे बैठ अभय का माल देखती है फिर एक उंगली पे अपने बेटे का माल लेके नाक से घुसती है अभय बैठ आसा को देख मुस्कुराते हुवे - कैसी खुशबु है
आसा एकदम से घबरा के अभय को देख सर्म से - चुप कर

आसा कपड़े से माल साफ करते हुवे - निकाला तूने साफ मुझे करना पर रहा है

आसा सब साफ करके बिस्तर पे लेत जाती है हाथ अभी भी दर्द कर रहे थे आसा अभी पूरी शोक मे एक ही बात सोचे जा रही थी उसका बेटा 40 मिनट बाद खरा जोकि आसा के लिये बरा शोक था लेकिन आसा नही जानती अभय कितनी मुश्किल से अपने आप को रोके रखा था ताकि उसकी मा को दिखा सके उसका बेटा मर्द है

आसा अभय को देख सर्म से - नंगे रहेगा पैंट पहन ले कोई आ सकता है देख सकता है

अभय मुस्कुराते हुवे पैंट सर्ट पहन आसा के पास लेत के - पैंटी पे देखना है अपने पैंटी बिकनी पहनी है मेने देखा जल्दी दिखाओ
आसा हैरान होके सर्म से - नही आज बहोत कुछ कर लिया वादा कल दिखा दूंगी

अभय भी मान जाता है और आसा को बाहों पे अपने से पुरा चिपका के आखो मे देख - मा सच बताना आज बहोत मजा आया ना
आसा सर्म से धीरे से - तुझे आया मुझे कियु आयेगा
अभय - अच्छा नही आया तो आगे से कुछ नही करुगा
आसा जल्दी से - नही आया ना
फिर आसा को एहसास होता है उसने किया बोल दिया आसा सर्म से लाल हो जाती है अभय मुस्कुराते हुवे - मा लंड कैसा है आपके बेटे का हिला के कैसा लगा
आसा अभय को देख - लाला सच बोलू बहोत लम्बा मोटा है मेरे पति से बहोत लम्बा मोटा है तेरा लंड जब मेने पकरा तो मेरी बॉडी रूह सब काप् गई थी हाथो मे भी नही आ रहा था और तो और एक बात मे सीना ठोक के केह सकती हु मेरा बेटा असली मर्द है

अभय - मा सच ये है मेने बरी मुश्किल से खुद को रोक रखा था नही तो एक खूबसूरत औरत जो मेरी मा है उसने प्यार से लंड हिलाया तो मे कैसे खुद को रोक पता पर मेने रोका ताकि आपको बता सकु मे आपका बेटा एक मर्द है

आसा मुस्कुराते हुवे - हु देख जान भी किया
अभय आसा को किस करने लगता है किस के बाद - मा आपके चूचे गांड दबा के मुझे भी बहोत जयदा मजा आया आपकी मोती मास से भरी गांड आपके दोनों बरे चूचे दबाने मे जो मजा आ रहा था बता नही सकता
आसा सर्म से - बेसरम तूने दबा के मजे लिये मुझे तो दर्द हो रहा था
अभय मुस्कुराते हुवे - ये कियु नही कहती दर्द मे मजा आ रहा था
आसा सर्म से - सोते है बहोत देरी हो गई है
अभय - हु लेकिन पता है ना आपको किया करना है
आसा अपनी गांड आगे कर एक पैर अभय की जांघो पे रख अपनी बुर अच्छे से लंड पे चिपका के अभय को देख सर्म से - अब ठीक है
अभय आसा को पुरा अपने से चिपका के - उफ बहोत गर्म है आपकी बुर हा अब ठीक है

फिर दोनों मा बेटे प्यार करने के बाद अपने नये रिश्ते के आगे बढ़ते हुवे सो जाते है

आज के लिये इतना ही 🙏🙏
बहुत ही गरमागरम कामुक और उत्तेजना से भरपूर कामोत्तेजक अपडेट है भाई मजा आ गया
 

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chapter 108

सुबह होती हैं आसा की जब नींद खुलती है तो अभय आसा को पकरे चिपका हुआ था आसा की गांड अभय की तरफ थी आसा को फिल होता है उसकी गांड के दरार मे मोटा गर्म कुछ घुसा है आसा एकदम से सिहर जाती है आसा अभय जाती है ये उसके बेटे का लंड है जो उसकी गांड की दरार मे घुसा है

आसा को पता नही क्या होता है आसा धीरे धीरे अपनी गांड आगे पीछे करने लगती है जिसकी वजह से अभय का खरा लंड के चमरे आगे पीछे होने लगते है आसा थोरा पीछे गांड करती है तो अभय का लंड सीधा आसा के गांड की छेद पे लगता है वैसे ही आसा आह करती है तभी आसा को एहसास होता है वो क्या कर रही है

आसा जल्दी से उठ कर बैठ तेज सासे लेते हुवे अभय को देख - मे ये किया कर रही थी

आसा अभय को किस करती है फिर खरी होती है पीछे गांड पे दरार मे नाइटी जो घुसी थी उसे बाहर निकाल कमरे से बाहर आती है

सभी धीरे धीरे उठ कर नहाने लगते है अपने काम मे लग जाते है 25 मिनट बाद अभय के कमरे मे मीनाक्षी आके अभय को जगाती है

अभय उठ कर बैठ मीनाक्षी को पकर अपनी गोदी मे बैठा लेता है मीनाक्षी सर्म से डरते हुवे - देवर जी छोरिये मुझे कोई देख लेगा
अभय धीरे से कान मे - वादा करो आप अकेले मे करने दोगी हु
मीनाक्षी डरते हुवे - नही मुझे पता है आप कितने बेसरम है और किया क्या कांड किये है
अभय हैरान मीनाक्षी को अपनी तरफ करके - क्या कोन किसने आपको बताया
मीनाक्षी मुस्कुराते हुवे - कोई है जिसने मुझे सब बताया है
अभय हैरान मन मे - कोन है जो मेरी वाट लगाने पे तुला है
अभय - जानती है तो किसी को बताना नही वर्ना
मीनाक्षी अभय को देख - वर्ना क्या कर लेगे

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अभय एकदम से मीनाक्षी के होठ मुह मे लेके चूसने लगता है मीनाक्षी की आखे बरी हो जाती है अभय बरे प्यार से मीनाक्षी के होठ चूसने लगता है ये एहसास मजा मे मीनाक्षी ढीली पर जाती है कुछ कर नही पाती बस अभय को अपना रस पीने देती है 3 मिनट बाद

अभय किस तोरके मुस्कुराते हुवे - वर्ना आपकी भी ले लुंगा
मीनाक्षी शोक अभय को देखती है फिर अभय को मारते हुवे - बेसरम बेसरम है आप

मीनाक्षी जल्दी से भाग जाती है अभय मुस्कुराते हुवे - कोसिस तो करुगा ही लेने की

अभय बाहर आता है सुसमा अभय को देख - उठ गया बेटा
अभय सुसमा को गले लग - मेरी प्यारी मासी
सुसमा मुस्कुराते हुवे अभय को गले लगाते हुवे - मेरा प्यारा बेटा
मितल आते हुवे - वाह मा मे नही हु आपकी प्यारी बेटी अब ये लंगूर हो गया

अभय मितल को देख - मासी सुना दीदी मुझे लंगूर केह रही है
सुसमा - मेरे हैंडसम बेटे को लंगूर मत केह
मितल मुह बना के - कहा से ये लंगूर हैंडसम लग रहा है
मधु आते हुवे - मेरे भइया बहोत हैंडसम है
मितल - आ गई भैया की लाडली भाई का साथ देने
अदिति आते हुवे - मे भी हु भइया की लाडली
सिला - अरे मे भी हु मेरा लाल अकेला थोरि है
तारा - अरे मेरा दामाद करोरो मे एक है
कोमल - हा अभय बहोत हैंडसम है
मिनिता - और नही तो क्या बहोत प्यारा भी है

आसा ये सब देख मुस्कुरा रही थी
मितल मुह खोले सभी को देख - आखिर इस लंगूर मे ऐसा क्या है जो आप सब उसको इतना प्यार करते है

सभी मितल को देख - जान जाओगी जल्दी ही
अभय मितल को गले लगा के - मेरी दीदी भी बहोत जयदा खूबसूरत है
मितल मुस्कुराते हुवे - मेरा प्यारा भाई भी

अभय आसा को देखता है फिर आख मार देता है आसा सर्म से मन मे - बेसरम बेटा

शादी के 5 दिन बचे थे तैयारी सुरु हो गई थी 10 बज चुके थे अभय काजल के घर आता है और काजल ममता की अच्छे से चुदाई करने के बाद बाते करने लगता है

अभय - आते जाते रहना आप दोनों
काजल ममता - समझ गये

अभय खरा होके - दीदी से बाते कर लेता हु
काजल ममता मुस्कुराते हुवे - धीरे से बाते करना
अभय मुस्कुराते हुवे - हा

अभय कमरे मे आता है रुमा अभय को देख सर्म से - सुबह सुबह कर लिया कितना बेसरम है तू

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अभय रुमा के पास बैठ ब्लाउस के बटन खोल चूचे निकाल पीने लगता है रुमा सिसकिया लेते हुवे - आह अभय लगता है तुझे दूध चूस के पीने मे बहोत अच्छा लगता है पीले भाई उफ 3 मिनट बाद

अभय रुमा को बिस्तर पे लेता के सारी पेटीकोट उपर करके मुस्कुराते हुवे - पैंटी नही पहनी हु
रुमा सर्म से - ताकि तुम जब चाहे कर सको
अभय मुस्कुराते हुवे - क्या
रुमा शर्म से - चुदाई

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अभय लंड निकाल थूक लगा के थोरा घिसता है और छेद पे रख एक धक्के मे घुसा देता है रुमा दर्द मे मर गई अभय चुदाई करने लगता है रुमा दर्द मजे से वा सिसकिया लेते हुवे - हा उफ भाई तेरा लंड लेके अपनी बुर मे बहोत मजा आता है ऐसी चुदाई के लिये ही मे तरपति रहती थी लेकिन अब तुही मुझे मेरी बुर की आग ठंडी करेगा
अभय चुदाई करते हुवे - दीदी चिंता मत करो अच्छे से आपकी बुर की आग निकाल दूँगा 23 मिनट बाद

अभय - दीदी मुझे जाना होगा अकेला नही हु कई लोग है सदी का माहौल भी

रुमा उठ के सारी बाल सही करते हुवे - जानती हु तुम जाओ
अभय - हु

अभय फिर बाहर आके गुलाबी को फोन करता है

गुलाबी - आ गई मेरी याद
अभय - दीदी काम मे बिजी था मसी के यहा हु मितल की शादी है आप आइये ना
गुलाबी - नही अभय नही आ सकती तुम घर आओगे तो आउंगी
अभय - ठीक है दीदी शादी होने के बाद मे जीत जीतू से मिलने आने ही वाला हु तब आप आना फिर करेगे वो सब
गुलाबी सर्म से - ठीक है
अभय - दीदी चूचे के फोटो भेजो ना देखना है
गुलाबी सर्म से - भेज देती हु
अभय खुश होके - ठीक है दीदी रखता हु
फोन कट
2 मिनट बाद गुलाबी का फोटो आता है अभय देखता है तो उसका लंड पुरे जोस मे खरा होके झटके मरने लगता है

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गुलाबी लेती हुई थी ब्लाउस नही थे बिकनी के अंदर से दोनों चूचे निकाल फोटो खिच के भेजा था अभय चूचे देखते हुवे - उफ किया मस्त बरे बरे गोरे चूचे है दीदी के दबाने मसलने चूसने मे मजा आयेगा
अभय चलते हुवे ही जीत की मा कमला को फोन करता है

कमला - याद आ गई तुम आयेगा कब या आना ही नही चाहता
अभय - ऑन्टी आऊगा ना मेने बताया तो मासी की बेटी मितल दीदी की शादी के बाद ही आ पऊगा आप को कहा तो आ नही रही
कमला - बेटा मजबूरी है लेकिन इस महीने के बाद सब काम निपट पायेगा घर भी रेडी
अभय - ठीक है दीदी के शादी के बाद आता हु लेकिन मुझे वो चाहिये
कमला - वो क्या
अभय मुस्कुराते हुवे - आपकी बुर
कमला सर्म से - सपने देख बेसरम कहने मे भी सर्म नही आती तुझे
अभय मुस्कुराते हुवे - देना ही होगा ऑन्टी मजाक नही सच मे आप बहोत खूबसूरत है प्लेस ना एक बार करने दोगी बस एक बार
कमला सन्त रहती है फिर थोरि देर बाद - ठीक है एक बार बस लेकिन अभय बेटा किसी को पता ना चले
अभय खुश होके - जी किसी को पता नही चलेगा तो पक्का
कमला धीरे से सर्म से - हु पक्का
अभय - बस इतना बता तो आप बुर पे बाल है
कमला - छि नही है कल ही साफ किया है
अभय का लंड फिर खरा हो जाता है
अभय - अच्छा ऑन्टी फोटो भेजो ना एक ब्लाउस या बिकनी वाला देखना है कितने बरे है आपके
कमला सर्म से - बेशर्म देखा तो है तूने
अभय - महीने हो गये ना
कमला - अच्छा भेज देती हु किसी को दिखाना मत
अभय - हा ठीक है
फोन कट 2 मिनट बाद फोटो आ जाती है

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लाल ब्लाउस मे कमला के चूचे कैद था अभय मन मे - बरे है लेकिन दिख नही रहे जयदा हु ब्लाउस नही होता तो उफ अच्छे से दिखता पर साफ है बरे है गोरे भी अब तो रुका नही जाता लेकिन

अभय गहरी सास लेके - dp devil से जंग भी लरना है मे मरने से नही डरता लेकिन अब मे अकेला अपनी मा का भी बेटा हु मुझे कुछ हो गया तो मेरी मा बाकी सब ना मे चाहता हु विजय जीत जीतू को कुछ हो लेकिन मे ये जनता हु कई सारे लोग इस जंग मे मारे जायेंगे मे भी सभी को बचा नही पऊगा

अभय को यही तो बात तो टेंसन दे रही थी जाहिर है जंग मे कुछ भी हो सकता है किसी के साथ भी और अभय जनता था अच्छे से

अभय जीत की मा जोति को फोन करता है

जोति - कब आ रहा रहा है मितल की शादी के बाद
अभय - जी ऑन्टी किया कर रही है आप
जाती - खेत मे आई हु अभी खास कटने
अभय - हु वो ऑन्टी मे
जाती - बेटा जानती हु तुम मुझसे क्या चाहते हो लेकिन बेटा ये गलत है देखो नाराज मत होना उसके अलावा जो बोलो करुगी
अभय थोरा निरास होके - हु बुर दिखाओगी
जोति सर्म से - हा पूरी नंगी होके तेरे सामने आउंगी सब देख लेना लेकिन वो नही बेटा समझ बात को
अभय - ठीक है ऑन्टी जितना मिलेगा मुझे उसी मे खुश रहुंगा आप जैसी औरत को नँगा देखने का मिले किस्मत की बात है मे शादी बाद आऊगा
जाती - ठीक है
अभय - एक फोटो ब्लाउस के ऊपर से ही देखने के लिये मिल सकता है
जाती - हु भेज देती हु
फोन कट 2 मिनट बाद जोति का फोटो भी आ जाता है

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गुलाबी कलर की ब्लाउस जोति ने पहना हुआ था चूचे के उभार साफ दिख रहे थे अभय देखते हुवे मन मे - अंदर कैसे चूचे होगे निपल कैसा होगा उफ ऑन्टी खाजना छुपा के रखा है अपने

अभय गुलाबी जोति तीनों के फोटो देख मन मे - मा बेटी ऑन्टी दोनों बवाल है, अभय कमला के फोटो देख, ऑन्टी भी समझ आ रहा किया करू जंग भी करनी है जाना भी है

अभय फोन रख घर आता है सभी लगे परे थे बातो मे कुछ काम करने मे

अभय सीधा कमरे मे जाके लेत जाता है टेंसन् मे था जंग को लेके दिशा अभय के पास आके बैठ - क्या बात है टेंसन् मे लग रहे है
अभय दिशा को पकर बाहों मे लेके - नही तो
दिशा - क्या कर रहे है कोई आ जायेगा तो
अभय दिशा के ऊपर आके - सब बाते करने या काम पे बिजी है

अभय बैठ के पैंट खोलते हुवे दिशा को देख - जान सारी उपर करो ना जल्दी से कर लेते है चिंता मत करो मधु कोमल किसी को आने नही देगे उन्हें पता है हम कमरे मे है

दिशा जल्दी से सारी पेटीकोट उपर करके तांगे फैला के अभय को देख - रात को नही क्या अपने मेरा भी बहोत मन है डाल दीजिये

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अभय लंड निकाल थूक लगा के छेद पे रख एक धक्का मारके पुरा घुसा देता है दिशा दर्द मजे मे - आह पति जी मजा आ गया
दिशा की बुर बहोत प्यारी थी छोटे काले बाल थे बुर पे अभय चुदाई करते हुवे दिशा के ऊपर आके किस करने लगता है लेकिन पुरा दबाव दिशा पे नही डालता कियुंकी दिशा पेट से थी 20 मिनट बाद

दिशा बुर साफ करते हुवे - हद है बुर मे पानी गिरा देते है बार बार मुझे तो लगता है एक बेबी होते ही फिर मा बना देगे मुझे आप
अभय पैंट पहनते हुवे मुस्कुरा के - हा सही कहा तुमने
दिशा सारी पेटीकोट नीचे कर abh को देख - थोरा तो गेप रखना होगा ना
अभय सोचते हुवे - देखते है
कोमल अंदर आते हुवे - हद है घर मे इतने लोग है लेकिन तुम दोनों लगे हुवे थे और रखवाली हम करे
अभय कोमल को बाहों मे लेके - जान तुम लोगो के भरोसे ही तो मेरा सब काम होने वाला है
दिशा मुस्कुराते हुवे - सुन लिया अच्छा मे चली पति जी आपका तो निकल जाता है फिर भी करते रहते है आई है तो डाल दीजिये
दिशा मुस्कुराते हुवे चली जाती है
अभय कोमल को देख - क्या कहती हो
कोमल सर्म से - हा मेरा भी मन है

अभय फिर कोमल को किस करता है और बिस्तर पे लेता देता है कोमल पैंट पैंटी उपर करके तांगे उठा लेती है अभय लंड निकाल बुर के छेद पे रख धक्के से घुसा देता है कोमल दर्द मे आह करती है

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अभय चुदाई करते हुवे - उफ जान बहोत गर्म है रात चोद नही पाया लेकिन आज सब का कोटा पुरा कर दूँगा उफ मस्त बुर है तुमारी
कोमल दर्द मजे मे अभय को देख - आह दर्द होता है धीरे करो ना
अभय - बस जान दर्द मे ही तो असली मजा आता है 18 मिनट बाद

कोमल पैंट पहन बाल कपड़े सही कर अभय को देख - रिस्की है
अभय - जनता हु लेकिन तुम सब हो ना
कोमल अभय को किस करते हुवे - हा वो तो है

अभय बाहर आता है आसा सुसमा बाते करने मे लगे थे अशोक राहुल कई गई हुवे थे मितल घर के पीछे अपने होने वाले पति से बात करने मे लगी हुई थी मीनाक्षी अभय को देखती है और जल्दी से भाग जाती है अदिति अभय के पीछे से आते हुवे हस के - लगता है अपने भाभी को डरा दिया

अभय अदिति को देख हस के - लगता तो है गुरिया सब बिजी है तो कैसा रहेगा हम तेरी छोटी भाभी से मिल के आये
अदिति - जी चलिये फिर चलते है

अभय अदिति गारी मे बैठ निकल परते है और कुछ मिनट मे ही शोभा के पास आ जाते है पहले तो अभय शोभा रेखा की चुदाई करता है फिर बाते करता है

अभय ने काजल ममता रुमा को चोदा तो अपना माल नही निकाला था दिशा की बुर मे ही निकाला था यानी अभय बिना झरे 3 खुश कर दिया था अभय चाहे तो कुछ मिनट रुक रुक के सब का पानी निकाल सकता है नही तो बार बार झरता तो हर किसी के साथ सेक्स नही कर पता यही दिमाग अभय यूज़ कर रहा था

अभय बाकी सब बैठे थे

अभय - 5 दिन बचे है कल या परसो बुआ भी आ जायेगी हु कल तुम सब को शोपिंग पे लेके जाउंगा शादी मे आना जो है
शोभा सब बहोत खुश हो जाते है
रेखा रीना खुश होके - जी पापा मे दादी से मिलने के लिये बेचैन हु
शोभा - मे मम्मी जी दीदी बाकी सब से
अभय - तो तय रहा कल शोपिंग पे जायेंगे अब मुझे जाना होगा जानती ही तो शादी का घर उपर से सब साथ मे है

शोभा - जानती हु आप जाइये
अदिति - भाभी चलती हु रेखा रीना
शोभा - जी

अभय अदिति फिर गारी पे बैठ निकल परते है लेकिन फिर अभय गारी बीच रास्ते पे रोक देता है तो अदिति की सासे तेज हो जाती है

अभय अदिति को देख - गुरिया चुसोगी मन नही है करने का तो चलते है
अदिति सर्म से - वो वो मे हा चुसुगि भाई
अदिति सर्म से नजरे नीचे करके मन मे - बहोत सर्म आ रही है लेकिन मेरा दिल बहोत जोर से भाई का लंड चूसने का कर रहा है
अभय मुस्कुराते हुवे लंड बाहर निकाल के - हु चुसो मेरी गुरिया

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अदिति सर्माते झुक के अभय के लंड पकर मुह मे लेके चूसने लगती है स्वाद लेते हुवे मन मे - उफ भाई का मोटा गर्म लंड का स्वाद चूस के लेने मे बहोत मजा आता है सर्म भी बहोत आ रही है लेकिन क्या करू दिल मानता ही नही उफ बहोत अच्छा लग रहा है भाई के लंड का स्वाद, अभय अदिति के सर पे हाथ रख - चुसो गुरिया अपने भाई का लंड अच्छे से स्वाद लो आह बहोत अच्छा चूसने लगी हो मजा आ रहा है और आह अंदर तक लो उफ हा ऐसे ही अच्छा लग रहा है
12 मिनट बाद

अदिति अपने भाई का माल पीके मुह साफ करते हुवे सर्म से मन मे - उफ कितना गर्म गाढ़ा माल पीके अजीब का मजा नसा चढ़ जाता है

अभय लंड अंदर करके अदिति को देख - गुरिया तु जब लंड चुस्ती है ना सच मे मजा आ जाता है गुरिया कोन का कलर का बिकनी पहना है दिखाओगी अपने भाई को हु बोलो ना

अदिति अभय को देख सर्म से - भाई मुझे सर्म आ रही है बहोत
अभय अदिति के चूचे दबाते हुवे - दिखाओ ना गुरिया
अदिति सिसकिया लेते हुवे सर्म से - जी आह दिखाती हु
अदिति सर्माते हुवे सूट उपर करके अभय को दिखाती है सूट के साथ मैच बिकनी मे अदिति के मस्त गोरे चूचे कैद थे आधे दिख रहे थे गोरे उजले दोनों बरे मस्त चूचे कैद बिकनी मे

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अभय अपनी बहन की बिकनी मे कैद चूचे देखता ही रह जाता है अभय अदिति चूचे को देख - गुरिया तेरे चूचे तो बहोत बरे दूध जैसे उजले गोरे है देखो कैसे कैद है बिकनी मे उफ बहोत मस्त है मेरी गुरिया के चूचे आह गुरिया कभी दिखाना अपने भाई को हु
अदिति जल्दी से सूट नीचे करके सर्म से नजरे नीचे किये - सोचुगी
अभय गारी चालू करते हुवे - हु उमीद है मेरी गुरिया मुझे अपने चूचे दिखायेगी

अभय अदिति फिर घर आते है साम् के 3 बज रहे थे अभय अंदर आता है तो कोई नही दिखता तभी मीनाक्षी कमरे से बाहर आती है

अभय - भाभी कोई दिखाई नही दे रहा
मीनाक्षी - देवर जी सब खेत घूमने गये है मम्मी जी मसी ने कहा आप आये तो बता दु जाना है तो जाइये देवरानी जी भी जाने वाले ही

दिशा पीछे से कमरे से आते हुवे अभय अदिति को देख - आ गये आप दोनों खेत जा रही हु चलेंगे
अभय - नही जान तुम गुरिया चले जाओ
दिशा मुस्कुराते हुवे - चले ननद जी
अदिति - जी भाभी

दिशा अदिति चले जाते है अभय मीनाक्षी अकेले थे

अभय मीनाक्षी को देखता है तो मीनाक्षी डरके कमरे मे भाग जाती है अभय भी पीछे से कमरे मे आ जाता है मीनाक्षी डरते हुवे - नही ना देवर जी मत करिये

अभय मन मे - मे ये क्या कर रहा हु मे ऐसा नही था
अभय मीनाक्षी को देख नजरे नीचे कर सर्म से - माफ करना भाभी आपको डरा दिया मे पहले ऐसा नही था लेकिन अब
अभय जाने लगता है तो मीनाक्षी अभय का हाथ पकर अभय को देख - देवर जी भाभी हु आपकी लेकिन बात ऐसी है मे सब जानती हु आपके बरे मे आप जिस्म के पीछे हवस पूरी करने नही जाते लेकिन

मीनाक्षी बिस्तर पे बैठ जाती है अभय भी
मीनाक्षी दुखी मन से - शादी के 2 साल हो गये मा नही बन पा रही ना आपके भैया मुझे खुश कर पाते है आपके भैया बहोत अच्छे है प्यार करते है लेकिन सायद मे ही समझ नही आता क्या करू

अभय मीनाक्षी के हाथ पे हाथ रख - मेरे कई अफेयर है भाभी आप जान ही चुकी है अगर आप मे कोई गर्बर् नही है तो मे आपको मा बना सकता हु अगर आप चाहे तो किसी को पता नही चलेगा

मीनाक्षी अभय को देख - क्या सच मे आप मुझे मा बना सकते है
अभय - हा इतना दम है मुझसे अगर आपके अंदर गर्बर् नही है तो
मीनाक्षी सोच मे पर जाती है ठोरी देर बाद अभय को देख - नही जानती मुझसे कमी है या आपके भइया मे
अभय - तो कर लेते है ना पता चल जायेगा आपमें कोई प्रॉब्लम नही है तो खुशखबरी आ जायेगी

मीनाक्षी - अगर किसी को पता चल गया तो देवर जी हंगामा हो जायेगा
अभय - आज तक मेने जितनो के साथ क्या किसी को पता नही चला अभी सब बाहर है जयदा सोचिये मत 30 मिनट है हमारे पास

मीनाक्षी बिस्तर पे लेत जाती है और अभय को देख - मा का सुख मुझे भी चाहिये मे भी चाहती हु मेरी गोद मे मेरा प्यारा बच्चा हो उसके लिये मे आपके साथ सब करने को तैयार हु देवर जी

अभय - सिर्फ बच्चे के लिये
मीनाक्षी - सायद हा
अभय - ठीक है भाभी जैसा आप चाहे

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अभय मीनाक्षी को देखता है वो बिस्तर पे लेती हुई थी बहोत ही खूबसूरत सेक्सी लग रही थी मीनाक्षी की चिकनी कमर गहरी ढोरी देख अभय का लंड खरा होने लगता है अभय मीनाक्षी के ऊपर आ जाता है ये देख मीनाक्षी की सासे तेज हो जाती है
32 मिनट बाद

अभय कपड़े पहन पसीने से भीगा बाहर आके मन मे - इतनी टाइट गर्म बुर थी ऐसा लग रहा था मेरा लंड जल रहा है , अभय कमरे की तरफ देख , ना मा का सुख ना जिस्म का सुख दोनों के लिये तरप् रही थी भाभी

10 मिनट बाद सुसमा आसा सब आ जाते है तब तक मीनाक्षी अपने आप को संभाल चुकी थी

सुसमा अभय को देख - आया कियु नही खेत मे हा बोल
अभय - अरे मासी बुआ के घर गया था काम से
आसा - हा हा तेरा बहोत काम रहता है
अभय आसा को गले लग - मा
आसा - मस्का मत मार
मिनिता हस्ते हुवे - दीदी प्यार दिखा रहा है
आसा मन मे - बहोत कुछ दिखा चूका है

रात 7 बजे

अभय नीतिका से घर के बाहर बात कर रहा था
नीतिका - आपके बिना मन नही लगता
अभय - जान जनता हु लेकिन कुछ दिन इंतज़ार करना पड़ेगा
नीतिका - हु जानती हु
मीका - शादी की तैयारी चल रही है ना
अभय - हा सुरु हो चुकी है
मिका - मुझे मुझे भी आपकी याद आ रही है
अभय मुस्कुराते हुवे - हा मुझे भी तुम दोनों की बुर की याद आ रही है
नीतिका मीका शर्मा के जोर से एक साथ - छि बेसरम
अभय कुछ देर बाते करता है फिर फोन कट

मितल अभय के पास आके - किसने बाते कर रहा था ना
अभय मुस्कुराते हुवे - दीदी आप तो खुद लगी रहती है जीजा जी के साथ उसका क्या
मितल - बेसरम होने वाले पति है मेरे बात करुगी ही लेकिन तु किससे बाते कर रहा था ये बता
अभय - है एक
मितल हैरान शोक होके - क्या तुम दिशा को धोका दे रहे हो
अभय - नही दीदी दिशा को पता है
मितल और हैरान होके - क्या दिशा कुछ नही बोलती
अभय - नही वो दिशा की दोस्त ही है असल मे कहानी कुछ ऐसी है छोरो जाने दो
मितल एकदम से - क्या कहानी है बता मुझे जल्दी से
अभय मितल को देख - दीदी नही बता सकता समझो ना
मितल - मुझे जानना है नही बताएगा तो मुझे नींद नही आयेगी
अभय - बता दूँगा आप जिद कर रही है तो लेकिन जब हम अकेले होंगे तब
मितल - ठीक है लेकिन ये गलत है हा ऐसा मत कर
अभय - आप कहानी सुन लेना फिर बताना मे गलत हु या सही
मितल - ठीक है
मितल चली जाती है अभय मन मे - झूठी कहानी है दीदी ताकि आप की ले सकु पता नही अब मे रोक नही पाता खुद को

तभी तारा आते हुवे - दामाद जी क्या कर रहे है बाहर
अभय तारा को देख - मम्मी जी आप औरते तो लगी है खुद मे मै बेचारा किया करू
तारा हस्ते हुवे - औरते जब एक साथ होती है तो बाते बहोत करती है
अभय तारा को बाहों मे लेके दोनों हाथ गांड पे रख दबाते हुवे - जनता हु
तारा सिसकिया लेते हुवे - दामाद जी कोई आ जायेगा
अभय तारा के बुर को पकर मसलते हुवे - बहोत गर्म है लंड चाहिये या नही हु
तारा अभय को देख दर्द मे सिसकिया लेते - आह मा चाहिये दामाद जी लेकिन कैसे सब के होते हुवे

अभय तारा के मुह मे उंगली डालते हुवे - मे कमरे मे जाता हु आप आ जाना समझ गई
तारा नासिलि आखो से देख - कोई आ गया तो कमरे मे
अभय मुस्कुराते हुवे - नही आयेगा आयेगा भी तो पता चल जायेगा

अभय कमरे मे आता है सब बाते कर रहे थे अशोक राहुल भी थे अभय दिशा मधु अदिति कोमल को इसारे से बता देता है फिर कमरे मे आ जाता है तारा भी पीछे से आ जाती है


अभय - जल्दी करिये रिस्क तो है लेकिन दिशा देख लेगी
तारा बिस्तर पे लेत सारी उपर करके - हु डाल दीजिये

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अभय तारा के दोनों पैर अच्छे से फैला के बुर पे लंड घुसा के चुदाई करने लगता है तारा के बुर पे भी छोटे बाल थे तारा - आह उफ दामाद जी मजा आ रहा है करते रहिये रात नींद नही आई अच्छे से अपने चोदा ही नही मुझे अपनी सास को उफ
अभय चुदाई करते हुवे - इस लिये इतनी गर्म है आपकी बुर मम्मी जी आह आज रात अच्छी नींद आयेगी मे पूरी गर्मी निकाल दूँगा
15 मिनट बाद
तारा जल्दी से सारी बाल सही करके अभय को देख - आप तो झरे ही नही मे दो बार झर गई
अभय मुस्कुराते हुवे - आपकी बेटी की बुर मे झरुगा
तारा सर्म से - बेशर्म

दोनों बाहर आते है अभय एक जगह बैठ जाता है लेकिन सिला मधु की नजर अभय पे थी अभय दोनों को देख समझ जाता है

अभय मन मे - मर गया आज तो चुदते हुवे अच्छा है मे जल्दी नही झरता नही तो सब की बुर की आग ठंडा नही कर पाता

अशोक - मेरी एक ही बेटी है अब हमे छोर चली जायेगी
सुसमा - बेटी पराइ ही होती है एक दिन जाना ही होता है
आसा - दीदी अपने सही कहा मेरी बेटी भी मुझे छोर एक दिन चली जायेगी
अदिति अभय को देखती है अभय इसारे से कहता है मेरी गुरिया मेरे साथ रहेगी अदिति भी इसारे समझ खुश हो जाती है

दिशा मधु मन मे - घंटा
मितल - आप लोग ऐसी बाते करेगे तो मे शादी नही करुगी
अभय - दीदी बेचारे जिजा जी का क्या होगा
अभय की बात सुन मितल बहोत जयादा सर्म से लाल हो जाती है तो बाकी सब जोर से हसने लगते है

अभय मीनाक्षी को देखता है मीनाक्षी सर्म से नजरे नीचे करके मन मे - कितना लंड ले लिया मेने जान निकाल दी बहोत दर्द जलन हो रही है इतना दर्द तो सुहागरात मे भी नही हुई लेकिन जो मजा आया

बाते करते खाना लग जाता है सब खाते है फिर थोरि देर बाते करते है

अभय भी अपने कमरे मे आके लेत जाता है थक गया था बेचारा तभी मधु अभय के पास आके लेत जाती है और अभय को देख - भाई
अभय मुस्कुराते हुवे - बोलो करना है हु
मधु सर्म से - वो हा करना है बहोत मन है
मधु फिर सर्म से लाल हो जाती है

अभय जल्दी से करते है उतरो पुरा नही पैट उपर कर लो बस

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मधु भी पैंट पैंटी उपर करके तांगे उठा लेती है अभय सिर्फ लंड निकाल बुर मे घुसा के चुदाई करने लगता है मधु दर्द मे - आह भाई दर्द हो रहा है अच्छा भी लग रहा है
अभय चुदाई करते हुवे - गुरिया उफ तेरी टाइट गर्म बुर चुदने मे मजा आ जाता है
मधु - आह भाई करते रहिये चोदीये अपनी गुरिया को आह
16 मिनट बाद

मधु पैंट पहन लेती है अभय - अब खुश बुर की खुजली मिट गई
मधु सर्म से - हा
अभय मधु को गले लगा के - शादी का माहौल है सब साथ है तो आराम से बात नही कर सकते ना वो
मधु - जानती हु

मधु चली जाती है अभय फिर लेत लंड पकर -मेरा लंड भी दर्द करने लगा है अब कल से हर किसी को चोद नही सकता एक दिन छोर के करना परेगा या बुर चाट् के पानी निकाल दूँगा उफ थक गया

तभी सिला आती है तो अभय मन मे लग गये

सिला अभय के पास बैठ - कियु अब मेरे पास नही आता मन भर गया क्या
अभय सिला को बिस्तर पे लेता के - जानती तो है माहौल कैसा है
अभय किस करने लगता है उसके बाद - सारी उपर करिये जल्दी
सिला सारी उपर कर देती है

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अभय बुर मे लंड घुसा के चोदने लगता है सिला दर्द मजे मे - उफ मा अभय बेटा बहोत मजा आ रहा है करते रह उफ मेरी बुर आह
अभय चुदाई करते हुवे - आपकी बुर बहोत गर्म है मा
सिला - आह बहोत आग है बेटा ठंडा कर दे
16 मिनट बाद सिला भी चली जाती है

तभी रीमा आती तो अभय को पसीने आने लगते हो रीमा हस्ते हुवे - नही भाई फिर कभी विजय जी ने करके आग ठंडी कर दी है
अभय गहरी सास लेके - चलो अच्छा है
दिशा आते हुवे - आज बहोत मेहनत हो गई है ना
अभय - हा बीवी जी बहोत

दिशा रीमा बाते थोरि देर करते हो फिर चले जाते है तब आसा आती है और अभय के पास लेत के - दीदी भी हमारे साथ सोयेगी

अभय हैरान आसा को देख - क्या नही ना फिर हम
आसा बीच मे अभय के कान पकर - रात को बहोत कुछ हो गया तूने किया ऐसा तो नही करता था आज नही दीदी आती होगी अभी

अभय उदास होके - ठीक है समझ गया
आसा अभय को किस करते हुवे - कल रात को हु
अभय खुश होके - हु ठीक है मा लेकिन अभी थोरा

तभी सुसमा नाइटी पहने आते हुवे - मा बेटा लेत भी गये
आसा - दीदी आईये
सुसमा अभय के बगल मे लेत जाती है अभय बीच मे दोनों बहन के बीच था एक तो उसकी मा एक मने दोनों खूबसूरत हॉट औरतेअभय से चिपक ले लेती हुई थी

अभय मन मे - क्या किस्मत है मेरी अब तो मासी को चोदना ही पड़ेगा मा जब सो जायेगी तो मा के बगल मे मा की बरी बहन को चोदने मे उफ सोच कर ही लंड मेरा खरा हो गया मासी जब सो जायेगी चुदाई के बाद तो मा के भी मजे ले लुंगा हु हा ये सही है बहोत मजा आयेगा आज रात को

सुसमा अभय को सीने से लगा के आसा को देख - चोटकी अपने बहु अभय बेटे के साथ सही नही क्या बहु की जगह हम आके लेत गये
आसा थोरा शर्मा के - दीदी अपने कहा तो सही कियु लाला
अभय आसा को देख फिर सुसमा को देख मुस्कुराते हुवे - एक बेटा एक भांजे के बलग मे दो खूबसूरत हॉट बहने चिपक के लेती हो तो एक बेटे भांजे को और क्या चाहिये

सुसमा आसा को देख - सुना तेरा लाल लाल ने क्या कहा
आसा मुस्कुराते हुवे अभय के कान पकर - सुना दीदी बेसरम हो गया है
अभय आसा के सीने से लग बाहों मे लेके - मा
आसा अभय को सीने से दबा के - मेरा बच्चा
सुसमा भी अभय से चिपक जाती है थोरि बाते करने के बाद आसा सो जाती है सुसमा भी लेकिन जब अभय देखता है आसा दूसरी तरफ चेहरा करके नींद मे है तो अभय को मोक्का मिल जाता है

अभय धीरे से सुसमा के सारी उपर करने लगता है

आज के लिये इतना ही 🙏🙏🙏🙏
बहुत ही गरमागरम कामुक और शानदार उत्तेजक अपडेट है भाई मजा आ गया
 

Napster

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chapter 109

अभय मीनाक्षी के ऊपर लेता किस करने लगता है पूरी बॉडी को चूमने लगता है आज मीनाक्षी को पति नही देवर अभय प्यार कर रहा था
मीनाक्षी सिसकिया जोर जोर से लिये जा रही थी अभय के छूने किस करने का एहसास अलग था

अभय फिर सर्ट निकलते हुवे - भाभी समय नही है जल्दी से कपड़े निकाल दिखा दो खजाना

मीनाक्षी शर्मा के - क्या नही कपड़े निकाले बिना भी तो कर सकते है
अभय पैंट खोलते हुवे - पगली बार हम कर रहे है मे आपको पुरा नँगा देखना चोदना चाहता हु

अभय चड्डी पे खरा था मीनाक्षी अभय को चड्डी मे देख सर्म से लाल हो जाती है

अभय - भाभी जल्दी करो ना
मीनाक्षी सर्म से - ठीक है बाबा

मीनाक्षी भी पूरी नंगी हो जाती है अभय मीनाक्षी के नंगे जिस्म को देख - उफ भाभी जैसा सोचा था आपकी बॉडी वैसी ही बहोत गजब का है आपके चूचे पतली कमर गोरा बदन उपर से नीचे उफ गजब की बनावट है
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अभय जल्दी से चड्डी निकाल देता है बस वही होता है मीनाक्षी शोक आखे बरी किये कपते अभय का लंड देख जोर से - ये क्या है
अभय मुस्कुराते हुवे अपना लंड पकर - मेरा छोटू दोस्त
मीनाक्षी कपते हुवे - ये छोटू है अच्छा मजाक है
मीनाक्षी मन मे - मर गई देवर जी का इतना बरा होगा सोचा नही था

अभय - भाभी देरी मत कीजिये मुह मे लीजिये
मीनाक्षी अभय के पास आके घुटने पे बैठ लंड को देखती है फिर कपते हाथो दे पकर लेती है मोटा गर्म लंड पकरते ही मीनाक्षी की बॉडी काप् सिहर जाती है

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मीनाक्षी हिम्मत लरके मुह मे जितना जाता है लेके चूसने लगाते है मुह मे जाते ही अभय को बहोत जयदा मजा आने लगता है मीनाक्षी मजे से लंड चूसने लगती है अभय - आह भाभी मजा आ रहा है
मीनाक्षी लंड चूसते हुवे मन मे - पति जा का चुस्ती हु लेकिन देवर जी का लंड चूसने मे बहोत मजा आ रहा है स्वाद भी उफ बहोत अच्छा है
4 मिनट बाद

मीनाक्षी खरी होके मुह साफ करके अभय को देख सर्म से - हो गया
अभय - बहोत मजा आया आप ने अच्छे से चुसा अब मेरी बारी

अभय घुटने पे बैठ खरी मीनाक्षी को देख - भाभी बुर फैलाये ताकि मे आपकी बुर का स्वाद ले सकु
मीनाक्षी सर्माते हुवे दोनों हाथो से अपनी बुर के फाके फैला देती है अभय भी बिना देरी किये जीब से फाको के बीच चाटने लगता है बुर का स्वाद लेने लगता है राहुल भी मीनाक्षी का बुर चाटता था लेकिन अभय के बुर चाटने से मीनाक्षी को अलग ही मजा आ रहा था

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मीनाक्षी सिसकिया लेने लगती है खरी खरी मजे से बुर का रस पिलाने लगती है अभय मन मे - उफ भाभी के बुर का स्वाद तो बहोत अच्छा है बहोत मजा आ रहा है बुर बहोत गर्म है जैसे अंदर बहोत गर्मी हो
4 mina बाद मीनाक्षी कपते हुवे आह देवर जी करते झर जाती है

मीनाक्षी तेज सासे लेते बिस्तर पे लेत जाती है मीनाक्षी मन मे - आह मा इस तरह तो मे कभी नही झरी

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अभय मीनाक्षी के ऊपर आके दोनों चूचे दबाने लगता है मीनाक्षी दर्द मजे मे आह उफ करने लगती है अभय चूचे दबाते हुवे मीनाक्षी को देख - भाभी बहोत बरे अच्छे चूचे है आपके दबाने मे बहोत मजा आ रहा है भाभी जब आप मा बनेगी तो दूध पिलाओगी ना
मीनाक्षी सिसकिया लेते हुवे अभय को देख - आह उफ हा देवर जी आप ही तो मेरे बच्चे के पापा होंगे जितना पीना है पी लेना उफ

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अभय जोस से भर जाता है नीचे झुक मीनाक्षी के एक चूचे मुह मे लेके चूसने लगता है मीनाक्षी मचलने लगती है जोर जोर से सिसकिया लेने लगती है मीनाक्षी - आह देवर जी ये अलग ही एहसास है आपके साथ मुझे अलग ही मजा आ रहा है ये सब करने मे आह उफ देवर जी
अभय चूचे चूसते हुवे मन मे - आह मजा तो मुझे भी बहोत आ रहा है

सब होने के बाद अभय टांगों के बीच आ जाता है मीनाक्षी भी तांगे अच्छे से फैला के अभय को देख डरते हुवे - देवर जी धीरे
अभय बुर के छेद पे लंड रख - ठीक है भाभी धीरे से डालूँगा

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अभय धीरे से एक धक्का मारता है मीनाक्षी दर्द मे टरप् उठती है अभय एक और धक्का मारता है लंड बुर फैलाते पुरा अंदर घुस जाता है मीनाक्षी दर्द मे चिल्ला उठती है हाथ पैर मारते रोने लगती है
अभय मीनाक्षी के ऊपर पुरा लेत किस करने लगता है 3 मिनट बाद

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अभय चुदाई करते हुवे मीनाक्षी को देख - उफ भाभी बहोत गर्म है आपकी बुर टाइट भी है भइया का बरा नही है क्या आह बहोत मजा आ रहा है अंदर मेरा लंड जल रहा है उफ मस्त गर्म बुर है आपकी
मीनाक्षी दर्द मे अभय को देख - बहोत दर्द हो रहा है उफ मा देवर जी
अभय धक्के मरते हुवे मीनाक्षी को किस करते चूचे दबाते चुदाई करते रहता है मोटा लम्बा लंड लेके मीनाक्षी को दर्द मे भी जो मजा मिल रहा था वो पहले कभी नही मिला था

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अभय बिस्तर पे लेत -उपर आके सवारी कीजिये भाभी जी मजा आयेगा आपको पुरा अंदर तक लेना समझ गई
मीनाक्षी सर्माते अभय के उपर आके लंड बुर के छेद पे रख बैठ जाती है लंड अंदर जाते ही मीनाक्षी - आह मर गई उफ मा
मीनाक्षी फिर उपर नीचे गांड करते हुवे लंड लेने लगती है मीनाक्षी की गांड अभय तरफ थी तो अभय लेता मीनाक्षी की गांड देख - उफ बहोत मस्त गांड है मारना पड़ेगा अभय एक जोर का चाटा गांड पे मारता है तो मीनाक्षी जोर से आह मा मर गई देवर जी

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अभय फिर मीनाक्षी को घोरी बना के चोदने लगता है गांड मसलते दबाते चुदाई करते रहता है मीनाक्षी घोरी बनी मोटे लंड लिये जा रही थी और मजे से सिसकिया लिये आह उफ कर रही थी
अभय फिर मीनाक्षी को नीचे लेता के चुदाई करने लगता है तेज धक्के मारते हुवे - उफ भाभी मेरा आने वाला है
मीनाक्षी अभय को जोर से पकर - आह मा देवर जी मेरा भी आह

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abh फिर आखरी एक जोर का धक्का मरते हुवे झरने लगता है और अपना गर्म माल मीनाक्षी के अंदर निकाल देता है मीनाक्षी भी साथ मे झर जाती है मीनाक्षी अपनी बुर मे साफ गर्म गर्म अभय का माल फिल कर रही थी

अभय बिस्तर पे लेत जाता है दोनों पसीने से भीगे तेज सासे लिये जा रहे थे अभय - मजा आया
मीनाक्षी अभय को देख सर्म से - बहोत
अभय - फिर करने देगी
मीनाक्षी - एक बार मे मै मा बन जाउंगी
अभय खरा होके कपड़े पहनते हुवे - बता नही लेकिन हा पर एक हफ्ते करते रहेगे तो अच्छा रहेगा
मीनाक्षी सर्म से - हा ठीक है
मीनाक्षी तांगे उठाये रहती है ताकि पुरा माल अंदर ही रहे फिर कपड़े पहन लेती है

ये तो साम के समय अभय मीनाक्षी के बीच जो हुआ वो था अब पर्जेंट मे आते है यानी रात को अभय आसा सुसमा के पास

आसा सो चुकी थी अभय सुसमा के नाइटी उपर करने लगता है तो सुसमा धीरे से - मत कर छोटी को पता चलेगा तो

अभय नाइटी उपर करके सुसमा के ऊपर धीरे से लेत सुसमा के नाइटी से दोनों चूचे बाहर निकाल - मा सो रही है
अभय ये केह सुसमा के चूचे दबाते हुवे चूसने लगता है सुसमा मुह बंद किये मन मे - आह आग तो मेरी बुर मे भी लगी है इस लिये नींद भी नही आ रही थी उफ

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अभय चूचे दबाने पीने के बाद नीचे बुर चूसने लगता है सुसमा तांगे फैलाये मुह बंद किये सिसकिया रोकते मन मे - आह अभय बेटा मेरी बुर चाटता है तो उफ बाहर मजा आता है
अभय अपनी मासी के बुर का स्वाद लेने के बाद टांगों के बीच बैठ लंड पकर बुर के छेद पे रख अपनी मा आसा को देखता है फिर धीरे से आसा के गांड पे हाथ रख दबाता है और एक धक्का मारता है

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एक बार मे ही अभय पुरा लंड सुसमा अपनी मासी के बुर मे घुसा के चुदाई करने लगता है सुसमा मुह बंद किये मन मे - मर गई बहोत दर्द हो रहा है आह कितना मोटा है अभय बेटे का लंड मेरी बुर के पुरा अंदर तक आह मे साफ फिल कर पा रही हु आह बहोत मजा भी आ रहा है अभय जोस मे था आसा अपनी मा की गांड धीरे दबाते अपनी मासी को चोद रहा था फिर अभय सुसमा के ऊपर लेत चुदाई करते हुवे धीरे से -उफ मासी आपकी बुर बहोत गर्म है आप का भी मन था इस लिये जगी हुई थी ना हु
सुसमा सर्म से आह - हा तेरी वजह से उफ तेरा लेने के बाद मेरी प्यास जग गई है चोदते रह बेटा मजा आ रहा है 25 मिनट बाद

सुसमा अपने चूचे अंदर कर लेती है नाइटी भी सही करके - अब सोते है
अभय किस करते हुवे - लोव यू मेरी प्यारी मासी
सुसमा अभय को किस करते हुवे - लोव यू मेरा बच्चा

सुसमा चुदाई के बाद मस्त होके अभय से चिपक सो जाती है 10
मिनट बाद अभय अपनी मा से चिपक के सो जाता है कुछ करता नही


सुबह होती है फिर सब उठ के नहाने मुह धोने खाना बनाने मे लग जाती है मीनाक्षी बैठी सब्ज़ी कटते हुवे मन मे - अब समझ अच्छे से आया कियु देवर जी से सब इतना प्यार करते है देवर जी सेक्स करने मे एक मर्द है लेकिन उसी के साथ अभय अच्छे साफ दिल के है उनके अंदर कोई कमी नही इस लिये सब उनको बहोत प्यार करते है मेरी चुदाई जैसे की उन्होंने उफ बहोत मजा आया कसम से


कमरे मे आसा अभय को जगाने जाती है सुबह के 9 बज रहे थे आसा अभय के पास बैठ प्यार से सर पे हाथ फेरते हुवे - उठ जा लाला सुबह हो गई है

अभय आखे खोल आसा को देख मुस्कुराते हुवे - मा
अभय आसा को पकर बिस्तर पे लेता के बाहों मे लेके - नही सोना है
आसा हस्ते हुवे - रात को बाहों मे लेके सोया तो मन नही भरा
अभय आसा को देख - आपसे मेरा मन कभी भर नही सकता

अभय आसा के ऊपर आके किस करने लगता है आसा हैरान डरते हुवे मन मे - कोई देख ना ले ये लरका कभी भी सुरु हो जाता है
किस करने के बाद आसा - लाला कोई देख लेगा समझ
अभय मुस्कुराते हुवे - समझ गया मा
आसा खरी होके - चल रेडी हो जा

अभय बिस्तर से खरा होके - ठीक है मा

अभय भी रेडी होता है मस्ती मजाक करते हुवे 10 बज जाते है खाना पीना करने के बाद अभय घर से बहार आता है और अपनी बुआ को फोन करता है

पुष्पा - कोन है बेसरम तुमने फिर फोन कियु किया इस बार भी गलती से लग गया किया
अभय मुस्कुराते हुवे - नही इस बार जान बुझ के लगाया है आपकी मीठी आवाज सुनने के लिये
पुष्पा - आवाज से तुम बच्चे लगते हो देखो तुम जैसे लरके को अच्छे से जानती हु में फोन रखो दुबारा फोन मत करना
अभय - ठीक है जी नही करुगा आपकी आवाज अच्छी लगी मुझे लगता नही यकीन है आप बहोत खूबसूरत होगी बाय
फोन कट

अभय की लास्ट लाइन इस बार भी पुष्पा को सोचने पे मजबूर कर देती है पुष्पा मन मे - अजीब है कुछ दो बार बाते करने के बाद ही मुझे अजीब का एहसास कियु हो रहा है जैसे मेरा दिल उससे बाते करना चाहता है जिसे मे जानती नही और तो और वो जवान लरका है

अभय मुस्कुराते हुवे अंदर आता है दिशा अभय के बाद आके मुस्कुराते हुवे - आपके जैसा बेसरम ठरकी किसी को नही देखा जितनी आपके पास आती है वो आपके नीचे भी आ जाती है
अभय दिशा को बाहों मे लेके मुस्कुराते हुवे - मे तो थोरा कोसिस करता हु बस
दिशा मुस्कुराते हुवे - हा हा जानती हु बरे आये
अभय - शोभा सब को शोपिंग पे ले जाना है चलोगी मिल लेना सब से अच्छा लगेगा तुमसे मिल के
दिशा - ठीक है चलूंगी

विजय कमरे मे आता है अभय दिशा को एक दूसरे के बाहों मे देख सर्म से जाने लगता है तो दिशा - आ चले शर्मा गये क्या देवर जी
विजय नजरे नीचे किये - वो मे तो बस भाई से बात करने आया था
अभय -करेगे बाद मे
विजय - जी भाई फिर चला जाता है


अभय आसा सुसमा से केह दिशा को लेके शोभा के पास आता है

शोभा दिशा को देख बहोत खुश होती है और दिशा के गले लग - दीदी आप आई मुझे बहोत खुशी हुई
दिशा - मुझे भी शोभा
दिशा शोभा को उपर से नीचे तक देख - हु सब कुछ मस्त है
शोभा सर्म से - छी दीदी आप भी ना
रेखा रीना आते हुवे - बरी मा
दिशा रेखा रीना को देख - अरे रेखा रीना
रेखा रीना दिशा के पैर छूके - बरी मा आप तो मा से भी बहोत खूबसूरत है
दिशा हस्ते हुवे - नही शोभा भी बहोत खूबसूरत है और तुम दोनों भी
राज आते हुवे दिशा को देख सर्म से पैर छूके -बरी मा
दिशा मुस्कुराते हुवे - खुश रहिये मेरे लिये भी अजीब है थोरा किया करे आपके पापा खिलाडी है
अभय - अरे यार हो गई बाते तो चले जल्दी से घर भी जाना है
शोभा रेखा रीना - हा

अभय फिर शोभा रेखा रीना राजू सब को शोपिंग करता है 2 घंटे लग जाते है अभय शोभा सब से बाते कर दिशा को लेके निकल परता है

दिशा - मम्मी जी को एक दिन बता चलेगा तो किया होगा सोचा है
अभय गारी रोक दिशा को देख - दिशा जानती हो तुम सब कुछ मा मेरे किये मा के साथ भी बहोत कुछ है एक दिन मा को सारी खुसिया देखे रहुंगा ये मेने सोच लिया है
दिशा - मे एक औरत हु और अच्छे से जानती हु जिस्म की जरूरत पूरी ना हो तो जीना मुश्किल हो जाता है जीते तो है लेकिन अंदर की जिस्म की चाहता बार बार परेसान करती रहती है
अभय - जनता हु इस लिये मेने सोच लिया है मा मेरी है रहेगी
दिशा मुस्कुराते हुवे - अच्छा है तो फिर लगे रहिये

अभय मुस्कुराते हुवे अपना लंड निकाल दिशा को देख - फिलाल मेरा लंड मेरी बीवी के बुर मे जाना चाहता है
दिशा अभय का लंड पकर मुस्कुराते हुवे - बीवी को भी लेना है
दिशा झुक के मुह मे लंड लेने चूसने लगती है उसके बाद दिशा सारी उपर कर पैंटी निकाल अभय के गोद मे लंड लेके बैठ जाती है

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दिशा गांड उठा उठा के मजे से सिसकिया लेते हुवे लंड लेने लगती है अभय दिशा को बाहों मे लिये चूचे गर्दन मे किस करते हुवे - मेरी जान तुम्हारी बुर मारने का अलग ही मजा है इतना चोदता हु फिर भी टाइट गर्म ही रहती है, दिशा सिसकिया लेते बुर मे लंड लेते हुवे - उफ पति जी आपका मोटा लंड अंदर तक लेके उफ मुझे भी मजा आ जाता है
25 मिनट बाद

दिशा पैंटी पहन अभय को देख - उफ अब यही रास्ता है घर मे करना तो बहोत मुश्किल हो गया है अब तो और लोग आएँगे
अभय लंड अंदर करते हुवे - सही कहा कल बुआ मासी भी आने वाली है तुमने सही कहा

अभय फिर घर आता है आसा सुसमा बाकी लरकिया तो लगे परे थे बाते करने मे अभय आराम से कमरे मे जाके लेत मन मे - dp devil
तभी अदिति आती है अभय के पास बैठ - भाभी सब को शोपिंग करके आ गये
अभय अदिति को देख बैठ के - हा गुरिया आ गया गुरिया जरा एक बार फिर दिखाओ ना सूट उपर करके प्लेस
अदिति बहोत शर्म से - भाई कोई आ जायेगा
अभय धीरे से - इसी लिये उपर करके दिखाने को बोल रहा हु
अदिति सर्म से धीरे से - जी भाई दिखाती हु

अदिति खरी हो जाती है अभय बैठे जोस से भरा अदिति को देख - जल्दी गुरिया रुका नही जाता

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अदिति सर्माते हुवे सूट को उपर कर देती है जो नजारा अभय के सामने था उसे देख अभय देखता रह जाता है लंड पुरे जोस से टाइट होके झटके मारने लगता है गुलाबी बिकनी मे अदिति के चूचे कैद थे कमर गहरी ढोरी के किया ही कहने अदिति ने लेगीस पहना था नीचे
अभय - गुरिया बहोत बहोत कमाल का सीन दिखाया है तूने अपने भाई को उफ गुरिया गुलाबी बिकनी तुम्हारी कमर गहरी ढोरी सब कुछ बहोत जयदा गजब का है
अदिति तो सूट से चेहरा छुपाये थी सर्म से लाल थी लेकिन अभय अपने भाई की बात सुन बहोत खुश भी हो जाती है

अदिति फिर सूट नीचे कर लेती है सर्म से नजरे भी नीचे थे अभय जल्दी से लंड निकाल - गुरिया जल्दी से अपने भाई का लंड चूस के ठंडा कर दे उफ तुझे देखने के बाद फट रहा है

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अदिति अभय के पास आके घुटने पे बैठ अभय का लंड पकर मुह मे लेके चूसने लगती है अदिति मजे से अपने भाई के लंड का स्वाद लेते हुवे मन मे - अब तो भाई जो कहते है करने का दिल करता है पता नही कियु भाई की बाते हरकते मुझे जोस से भर देती है
अभय अदिति के सर पकर - आह गुरिया मजा आ रहा है करते रह
7 मिनट बाद

अदिति मुह साफ करके सर्म से - भाई मे जाती हु
अदिति फिर चली जाती है अभय लंड अंदर करके - आह गुरिया मा जब लंड चूसती है मजा ही आ जाता है

तभी रीमा कमरे मे आते हुवे - भैया
अभय रीमा को देख बाहों मे लेके - गुरिया तेरी बुर नही मारी चल पैंट उपर कर अभी मोक्का है बाद मे मिले या ना मिले
रीमा सर्म से - जी भाई

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रीमा पैंट पैंटी उपर करके लेत जाती है अभय लंड निकाल बुर मे घुसा के चुदाई करने लगता है रीमा दर्द मजे से सिसकिया लेते अभय को देख - आह भाई थोरा धीरे उफ बहोत अंदर तक जा रहा है
अभय मुस्कुराते हुवे धक्का मारते हुवे - गुरिया तेरी बुर है ही इतनी गर्म टाइट रुक नही पाता उफ विजय ने चोदा दिन मे
रीमा - आह नही भाई उन्होंने तो दबाया और लंड चूसा है
अभय - उफ अच्छा इस किये बुर इतनी गर्म है तेरी आह गुरिया
17 मिनट बाद

रीमा पैंटी पैट पहन मन मे - उफ अब जाके सुकून मिला भाई से चुदवाने के बाद दर्द मे जो मजा आता है उफ

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रीमा चली जाती है तब आसा आती है अभय आसा को बाहों मे लेके किस करने लगता है आसा भी प्यासी थी तो दोनों मा बेटे एक दूसरे की बाहों मे एक दूसरे के होठो का रस पीने लगते है 3 मिनट बाद

आसा - बेटा कोई देख लेगा हर वक़्त ऐसी हरकते मत कर
अभय आसा को देख - मा क्या करू रहा नही जाता

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अभय सीने से सारी हटा के आसा के एक चूचे पकर दबाते हुवे आसा को देख - मा उफ आप जैसी खूबसूरत सेक्सी औरत मेरी मा है तो मे कैसे आपको देख रोक पऊगा
आसा सिसकिया लेते अभय को देख - आह बेटा लेकिन घर मे शादी का आह धीरे दबा जोर से मत दबा समझ ना
अभय चूचे दबाते हुवे - अभी मा लंड हिलाओ ना आह बहोत मन है
आसा सिसकिया लेते दरवाजे की तरफ देख - ठीक है जल्दी से निकाल

अभय भी जोस से भरा जल्दी से लंड निकाल देता है बिस्तर पे लेत जाता है आसा जल्दी से बिस्तर पे लंड के पास बैठ बिना देरी किये लंड पकर हिलाने लगती है

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आसा लंड हिलाते हुवे अभय को देख सर्म से - बेशर्म सर्म तो नही आ रही होगी अपनी मा से गंदे काम करवा के
अभय मजे से लेता आसा को देख - उफ मेरी मा अपने नर्म हाथो से मेरा लंड हिला रही है अपने बेटे का एक बेटे के लिये कितना उफ मजे वाला मोमेंट है मा आह आप नही समझ पाओगी उफ जोर से अच्छे से करिये उफ
आसा लंड हिलाते हुवे लंड को देख मन मे -लाला का लंड देख हिलाते हुवे मेरी बुर मेरी बॉडी हद से जयदा गर्म हो जाती है
10 मिनट बाद

अभय झर जाता है इस बार आसा साइड हो जाती है
अभय - उफ मजा आ गया मा आह
आसा हाथ साफ करके - बेशर्म नालायक जाती हु दीदी के पास तु अपनी हरकते अभी थोरा कम करदे

अभय - जी मा समझ गया लेकिन मा एक बार आपकी गांड दबाना है सेहलना ना फिल करना है आपकी मोती फैली बरे बरे गांड को

आसा हैरान अभय को देख - बहोत बिगर गया है बेसरम
आसा बिस्तर पे दोनों हाथ रख झुक के सर्म से - जल्दी कर कोई आ जायेगा
अभय आसा को इस तरह झुका देख जोस से भर जाता है

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अभय आसा के पास खरा होके गांड पे हाथ रख पकर के मसलने सेहलानें लगता है पूरे गांड पे हाथ फेरते हुवे - उफ मा आपकी गांड कसम से बहोत बरी फैली हुई आह पुरा मास से भरा है दबाने मे सेहलानें फिल करने मे बहोत उफ मजा आ रहा है
आसा अपने बेटे को इस तरह गांड दबाते अपनी गांड पे हर जगह हाथ फेरते फिल करके जोर से सिसकिया लेने लगती है जोर से सासे लेते हुवे - आह उफ बेटा बस बस हो गया फिर कभी आराम से दबा लेना

अभय भी हाथ हटा के - जैसा आप कहे मा लेकिन पैंटी मे कब आपको देखुंगा
आसा सारी सही करके अभय को देख सर्म से - लाला मोक्का मिलते ही दिखा दूंगी अभी नही


आसा चली जाती है अभय मन मे - उफ ये मजा भी गजब का मजा है मा जब लंड पकर उफ कितने मजे से प्यार से रस नर्म हाथो से मुठी मे निकलती है यकीन नही होता लेकिन सच है आह मेरी मा उफ और मा की गांड के किया ही कहने उफ मस्त दबाने सेहलानें मे गांड पे हाथ फेरने मे मजा आ रहा था

शादी के 4 दिन बचे थे अब कई लोगो का आना जाना होने लगा था लेकिन अभय तो अभय था थोरा सा मोक्का मिलते ही कोमल पूजा मधु सब को मजे दे दी देता था

रात 9 बजे खाना पीना होने के बाद

अभय के कमरे मे दिशा कोमल पूजा मधु अदिति बैठे थे

अदिति अभय की गोद मे बैठी थी पूजा - यार अदिति तुम महेसा जीजा जी से चिपकी गोद मे बैठ जाती हो मे भी हु यार
अदिति पूजा कोई देख - तो किया ये जगह मेरी है
कोमल - हा भाई तेरी ही है भैया की लाडली
अभय अदिति को बाहों मे कसते हुवे - सही कहा मेरी गुरिया ने
अदिति दिशा कोई देख - भाभी की भी जगह है
दिशा मुस्कुराते हुवे - थैंक्स ननद जी जगह देने के लिये
अभय - अरे रीमा कहा है
पूजा हस्ते हुवे - जीजा जी के साथ और कहा
कोमल - अभय तुम दोनों को लेके कियु आये लगे रहते है दोनों
अभय - अरे तो गलत क्या है दोनों की शादी होने वाली है प्यार करते है


कमरे मे अभय बाकी सब लगे थे बाते करने मे बाहर आसा सुसमा बाकी औरते

आसा सुसमा से - दीदी कल आने वाले है ना सब
सुसमा - हा कल जीजा जी की बहन ननद नंदोई आयेगे अभय के कहने मे मेने कुछ नही बताया तुम आई हो तुम्हे देख बेचारी का रिएक्सान देखने लायक होगा
मिनिता सिला - हम को देखने के लिये बेताब है
तारा - दामाद जी भी ना बहोत मस्तीबाज़ है
आसा हस्ते हुवे - हा जरुरु कुछ सैतानी करेगा

अभय के कमरे मे अभय दिशा सब को इशारा करता है तो सब समझ जाते है

दिशा मे चली कोमल पूजा मधु सब भी खरे होके मे भी

सभी चले जाते है अदिति हैरान होती है और अभय कोई देखती है अभय मुस्कुराते हुवे - सब को बता है तुम्हे भी गुरिया थोरा समय है अपने भाई को चूचे दिखाओ ना मुझे बहोत दिल कर रहा है तेरे चूचे देखने दबाने चूसने का बोलो ना गुरिया करोगी ये इच्छा पूरी मुझे अपनी गुरिया को बिकनी पैंटी मे देखना है मेने बिकनी मे तो देख लिया है लेकिन बिकनी पैंटी मे मेरी प्यारी गुरिया कैसी लगेगी देखना है

अदिति हैरान जोर से सासे लेते कपते होठो से - भाई अगर आप चाहते है तो ठीक है बाप कर सकते है
अदिति हिम्मत करके केह नजरे सर्म से नीचे कर लेती है
15 मिनट बाद

अदिति कमरे से वा निकल अपने कमरे मे बाकी सब के पास चली जाती है अभय कमरे मे अपने हाथ को ही देख रहा था जिस हाथ से उसने अभी अभी अपनी छोटी बहन के मस्त चूचे दबाये मसलने पकर के चुसे

मीनाक्षी कमरे से बाहर आती है तो देखती है सब बाते करने मे लगे है तो धीरे से अभय के कमरे मे घुस जाती है अभय मीनाक्षी को देख - भाभी जल्दी से कर लेते है मा मासी आने वाली ही होगी

मीनाक्षी बिस्तर पे लेत के सर्म से - जी देवर जी

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अभय जल्दी से मीनाक्षी की नाइट उपर करके चुदाई करने लगता है मीनाक्षी मजे से लंड लेने लगती है सिसकिया लेते हुवे - आह देवर जी सच कहु आप किसी औरत को खुस कर सकते है उफ मा इतना मजा चुदाई मे आयेगा सोचा नही था लेकिन आप आपका मोटा लंड उफ पूरी गर्मी निकाल देता है दर्द भी मजे भी देता है
अभय चुदाई करते हुवे - भाभी ऐसे ही मजे लेता रहुंगा आप बुर देती रहना आह उफ बहोत गर्म टाइट है 16 मिनट बाद

मीनाक्षी नाइटी बाल सही करके - जाना होगा देवर जी
मीनाक्षी बाहर जैसे ही जाती है आसा दरवाजे मे आ जाती है
मीनाक्षी थोरा घबरा जाती है
आसा - अरे बहु लाला से बात हो गई
मीनाक्षी - जी जी मासी हो गई मे जाती हु

मीनाक्षी जल्दी से चली जाती है

आसा अभय के पास लेत अभय को देख - कुछ करने की सोचना मत दीदी आती ही होगी
अभय मुस्कुराते हुवे - नही करुगा थोरा सा रात मे मासी के सोने के बाद
आसा सिहर जाती है
आसा - बेसरम दीदी ने देख लिया तो गजब हो जायेगा
अभय आसा को अपने से चिपका के आखो मे देख - अपने लाला का लंड नही हिलाओगी मा मुह मे लोगी एक बार चूस के देखो बहोत मजा आयेगा आपको

अभय की बात लंड चूसने की बात सुनते ही आसा शोक हैरान अभय को देख जोर से - किया कहा तूने जरा फिर से बोल
तभी सुसमा आते हुवे - आ गई मे
सुसमा भी अभय के बगल मे लेत जाती है
सुसमा के आने से बात वही रुक जाती है लेकिन आसा बहोत जयदा शोक हैरान मे थी बेचारी को पता भी नही था लंड चूसा जाता है और बुर भी लेकिन अभय धीरे धीरे सब खोल रहा था

आज के लिये इतना ही 🙏🙏🙏
बहुत ही गरमागरम कामुक और उत्तेजना से भरपूर कामोत्तेजक अपडेट है भाई मजा आ गया
 

beatrix

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chapter 125

अभय कमरे से बाहर खिरकी पे खरा आसा को देख - मा ये गलत है बुर दिखाने को ही तो कहा था आपने मुझे बाहर निकाल दिया

आसा खिरकी के पास अंदर खरी अभय को देख - वाह बेटा बुर ही चल भाग यहा से बरा आया बुर देखने वाला

अभय - मा दिखा दोगी तो क्या हो जायेगा इतना सब किया ना हमने
बस देखना है कुछ नही करुगा
आसा बेड पे जाते हुवे - सोचुगी चल जाके सो जा मुझे भी सोने दे
अभय खुश होके - मा जरूर सोचना आप बहोत अच्छी प्यारी है मुझे यकीन है आप दिखाओगी

अभय फिर गुड नाइट कहके चला जाता है वही आसा हस्ते हुवे - देखो तो बेसरम को मस्का मारके गया है बेसरम

अभय अपने कमरे मे आता है दिशा पूजा सो गये थे तो अभय भी आराम से सो जाता है

सुबह 10 बजे

सभी हॉल मे ही बैठे थे आसा पुष्पा से बाते कर रही थी

पुष्पा - भाभी कैसी है आप
आसा - मे अच्छी हु आप कैसी है
पुष्पा - यार भाभी आपके घर से होके जब से आई हु यहा मन नही लग रहा
आसा मन मे - बेसरम ये केह ना जब से लाला का लंड लिया है मन बार बार लेने का कर रहा है
आसा मुस्कुराते हुवे - अरे तो आ जाइये ना रोका किसने है
पुष्पा - यार भाभी घर छोर नही आ सकती ना

अभय आसा के पास बैठ - अच्छा तो राहुल की शादी जल्दी कर दो बहु आ जायेगी फिर आते जाते रहना
पुष्पा - ऐसा ही सोच रही हु लाला लरकी देख रखी है देखते है तू बता किया चल रहा है
अभय मुस्कुराते हुवे - बुआ आपको याद करता रहता हु
पुष्पा बात समझ - मे भी बहोत याद करती हु
आसा मन मे - देखो तो मेरे सामने ही लग रहे बेसरम
अदिति अभय के पास बैठ - बुआ जी आप कम आयेगी फिर इतने सालों बाद मिले फिर आप चली गई
पुष्पा - अदिति बेटा माफ कर देना तेरी बात तो सही है लेकिन किया करू मे तुही बता
दिशा - बुआ कोई बात नही हम समझ सकते है
पुष्पा - बहु बेबी होगा तो मे कई दिन जरूर रुकूगी
दिशा सर्म से - रुकना ही परेगा

पुष्पा - समधन जी आप का ही अच्छा है बेटी दामाद के साथ रह रही है
तारा पास मे ही बैठी - आपने सही कहा किस्मत वाली हु मे
पुष्पा - बिल्कुल है ये भी कहने की बात है

ऐसे ही बाते होती रहती है 11 बजे अभय सिला के पास खेत मे जाता है सिला अभय खेत के अंदर लेते बाते कर रहे

अभय - उफ मा आपकी बुर जितनी बार मारता हु अलग ही मजा आता है और आपकी गांड उफ कसी मारके भी
सिला - लाला तेरा लंड भी जम लेती हु तो ऐसा लगता है पहली बार ले रही हु उफ अंदर जाते ही दर्द सुकून दोनो मिल जाता है

सिला अभय के ऊपर आके बुर मे लंड लेके बैठ गांड उपर नीचे करते हुवे - आह उफ मा मजा आ रहा है
अभय मुस्कुराते हुवे - आप तो जोस मे ही रहती है
सिला मुस्कुराते हुवे - उफ बस अंदर तक आह जाने दे आह

12 बजे सिला अभय घर आते है मधु सिला अभय सब कमरे मे बैठे बाते करने लगते है

अभय मधु को गोद मे बैठाया चुचे दबाते हुवे - उफ मा आपके जैसे ही गुरिया के चुचे बुर है
मधु सिसकिया लेते सर्म से - उफ भाई मा के सामने मत करो आह
सिला मुस्कुराते हुवे - बेटी किसकी है चुचे बुर खूबसूरती सब मुझसे मिली है

अभय मधु को देख - लंड चुसो गुरिया
मधु सर्म से - भाई मा के समाने
सिला - इतना मत शर्मा चूस या मे लगु बोल

मधु जल्दी से लंड मुह मे लेके चूसने लगती है अभय मजे लेते हुवे सिला को देख - उफ मा आपकी बेटी भी मस्त लंड चुस्ती है
सिला मुस्कुराते हुवे - मे भी सामिल हो जाती हु
फिर सिला मधु दोनो मा बेटी लंड मजे से चूसने स्वाद लेने लगते है
अभय तो मस्त हो गया था जोस से भर गया था मा बेटी को एक साथ चुदाई करने का मोक्का किस्मत वाले को मिलता है

अभय फिर सिला मधु के बुर चूस के पानी निकाल देता है

अभय सिला मधु को देख - देखो मा गुरिया एक दिन छोर मे आप दोनो की साथ मे चुदाई करुगा एसी टाइम कियुंकी मे रोज सब को करने जायेगा तो मेरी लग जायेगी
सिला हस्ते हुवे - समझ गई तूने सही बोला इतनी सारी है भी तो
मधु - भाई चलेगा एक दिन छोर के भी बस आप मिलने आते रहना
अभय मधु को गले लगा के - पागल तु भी आते रह चल साथ घर चलेगी
सिला - चल मे भी चलती हु दीदी बाकी सब से मिल लुगी
अभय - ये हुई ना बात

अभय सिला मधु को घर लेके आता है दोपहर 1 बजे बगीचे मे

अभय अंदर दूर अकेले खरा मितल से बाते कर रहा था

मितल - कियु रे दीदी की बुर मिल गई तो याद भी नही करता
अभय - क्या दीदी आपकी बुर से मन कैसे भर सकता है आपके बरे मे सोचते ही मेरा लंड खरा हो जाता है
मितल सर्म से - सच
अभय - सच्ची
मीनाक्षी - और मेरे बरे मे किया देवर जी
अभय मुस्कुराते हुवे - अच्छा आप भी है भाभी
मीनाक्षी मुस्कुराते हुवे - हा जवाब दीजिये
अभय मुस्कुराते हुवे - सेम आपकी भी मस्त कसी गर्म बुर मारके मजा आता है
मीनाक्षी सर्म से - झुठ
अभय - सच्ची वैसे मासी किया कर रही है
मितल - मासी से बात तुम कहा हो जो पता नही
अभय - अंदर हु वैसे फिर आऊगा तो आप दोनो की गांड मारुंगा
मितल मीनाक्षी डरते हुवे - ठीक है

अभय बाते करके खरा था की अदिति आती है अभय मुस्कुराते हुवे - गुरिया
अदिति अभय से चिपक के - भाई
अभय अदिति को बाहों मे लेके - उफ मेरी गुरिया तुझे बाहों मे लेके ही सुकून मिल जाता है

अभय अदिति के चेहरे को पकर - मेरी गुरिया बहोत खूबसूरत है
अदिति सर्म से - आप भी बहोत हैंडसम है

अभय अदिति को किस करने लगता है अदिति भी अभय से और चिपक किस करने लगती है दोनो भाई बहन लगे हुवे थे तभी दिशा पूजा भी आते है सामने का सीन देख मुस्कुरा देते है

दिशा - वाह किया सीन है
पूजा मुस्कुराते हुवे - गर्म सीन है
अभय अदिति किस तोर दिशा पूजा को देखते है अदिति थोरा शर्मा जाती है

अभय मुस्कुराते हुवे दिशा के पास जाके बाहों मे लेके - मेरी प्यारी बीवी
दिशा मुस्कुराते हुवे - इतना मास्क मत मारिये
अभय - अरे सच कहा मेने
पूजा - और मे जीजा जी
अभय पूजा को देख - आप भी बहोत प्यारी है साली जी

साम 3 बजे

अभय हॉल मे बैठा अकेले तारा से बाते कर रहा था
अभय - ऑन्टी कैसी है आप
तारा - अच्छी हु बेटा तु बता सब कैसे है
अभय - सब अच्छे है आपकी बहोत याद आ रही है उफ आपकी कसी बुर की भी
तारा सर्म से - बेसरम गंदे
अभय हस्ते हुवे - आपको नही आती मेरी याद
तारा धीरे से - बहोत आती है
अभय - आऊगा तो गांड बुर अच्छे से मारुंगा वैसे जीत कहा है
तारा - होगा जीतू के घर
अभय - अच्छा और दीदी
तारा - वो भी साथ गई है कल चली जायेगी
अभय - अच्छा ठीक है रखता हु
तारा - वो कब आओगे
अभय मुस्कुराते हुवे - इस बार आप सब को आना है
तारा सर्म से - अच्छा ठीक है
अभय - लोव यू
तारा सर्म से - लोव यू

अभय कमला को फोन करता है
कमला - याद आ गई
अभय मुस्कुराते हुवे - आ गई याद किया कर रही है
कमला - किया करुगी बैठी हु
अभय - अच्छा आ जाऊ करेगे
कमला सर्म से - आ जाओ सब तो दे ही दिया है
अभय - हु ऑन्टी सच आपकी जैसी मस्त औरत की चुदाई करके मजा ही आ गया आप सब आ जाओ जल्दी
कमला सर्म से - अच्छा बाबा जल्दी ही आउंगी
अभय - हु जीतू कहा है
कमला - सब कमरे मे बाते कर रहे है
अभय - अच्छा रखता हु और हा जल्दी आना आप सब
कमला - समझ गई बाबा
फोन कट

तभी आसा आती है और अभय को देख - अकेले कियु बैठा है यहा
अभय आसा को देख मुस्कुराते हुवे खरा होके आसा के हाथ पकर किचन मे लेके आता है

आसा किचन साइड खरी अभय आसा से चिपक खरा हो जाता है आसा हैरान सर्म से - यहा किचन मे कियु लेके आया है मुझे
अभय मुस्कुराते हुवे - आपकी प्यार करने के लिये
अभय मन मे - मेरी कई fantasy है जो आपके साथ पूरी करनी है एक किचन मे प्यार करने का जो अभी आधा ही पुरा हो पायेगा
आसा हैरान होके - किया
आसा मन मे - ये लरका तो सच मे हमेसा हैरान शोक कर देता है मुझे मे सोच भी नही आती ये कब कहा सुरु हो जायेगा

Id Mf D5bz S DJp9I9
अभय आसा को किस करने लगता है और एक हाथ आसा की मस्त गोरी चिकनी कमर पे रख सेहलानें लगता है किचन मे बेटे के साथ रोमांस करने का अलग नया एहसास आसा को और पागल जोस से भर दे रहा था आसा मन मे - सच मे ये एहसास उफ गजब का है अब समझी लाला कियु किचन मे लेके आया

Id Mf D5bz S DJp9I9 (1)
choose number of sides die
किस करने के बाद अभय आसा की गुलाबी ब्लाउस के ऊपर से ही चुचे दबाते मसलते हुवे आसा को देख - उफ मा किचन मे आह आपके साथ प्यार करने मे बहोत मजा आ रहा है
आसा चुचे दबाने का मजा लेते हुवे अभय को देख - उफ आह लाला धीरे से दबा जोर से दबाने से मुझे आह मर गई दर्द होता है
अभय आसा की आखो मे देख - दर्द मे असली मजा है मा

Id Mf D5bz S DJp9I9 (2)
अभय अपनी मा के ब्लाउस के अंदर से दोनो बरे बरे गोरे चुचे बाहर निकाल के आसा को देख - उफ मा आह किया मस्त चुचे है बिकनी नही पहनी हु मेरे लिये तो नही ना
आसा तेज सासे लेते मदहोसी मे अभय को देख - आह लाला बाते नही जो कर रहा है उसपे ध्यान दे
अपनी मा को इतना जोस मे देख अभय भी जोस से भर जाता है

Id Mf D5bz S DJp9I9 (3)
अभय अपनी मा के दोनो चुचे बरी बरी से दबाने लगता है आसा मजे से सिसकिया लेने लगती है आसा खरी अपने बेटे से चुचे दबाने का मजा ले रही थी आसा - उफ मेरे लाल दबाते रह अपनी मा के चुचे उफ बहोत अच्छा लग रहा है मजा आ रहा है
अभय दोनो चुचे बरी बरी दबाते हुवे आसा को देख - उफ मेरी मा आपके दोनो बरे गोरे नर्म मुलायम चुचे दबाने मे मुझे भी उफ बहोत मजा आ रहा है आह मा मजा आ रहा है क्या मस्त चुचे है आपके

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अभय फिर झुक एक चुचे मुह मे भर चूसने लगता है आसा अभय के बाल पकर सिसकिया लेते हुवे - उफ लाला मेरे बेटे चूस बेटा अपनी मा के चुचे पीले आह ये एहसास सुकून उफ तेरी मा को मजा दे रहा है
अभय मजे से चूसने लगता है और मन मे - उफ कितने मोटे निपल है मा के आह, अभय निपल को काट लेता है आसा दर्द मजे मे, आह मा लाला काट मत उफ शैतान बच्चे मे ऐसा ही करता था उफ लाला
अभय पैंट नीचे कर अपना लंड नँगा आसा के समाने करके - मा

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आसा अभय को देखती है तेज सासे लिये लेते फिर अपने बेटे के टाइट खरे लंड को फिर आसा बैठ बिना देरी किये लंड मुह मे लेके चूसने लगती है अभय मजे लेते हुवे - उफ मा चुसो आह
आसा लंड चुस्टे हुवे मन मे - उफ अब तो अलग ही मजा आने लगा है अपने बेटे का लंड चूसने स्वाद लेने मे कितना गर्म है
12 मिनट बाद

आसा मुह साफ करके अभय को देख सर्म से - अब हो गया ना
अभय आसा को बाहों मे लेके प्यार से - मा सच बताना किचन मे बेटे का प्यार पाके कैसा लगा
आसा सर्म से धीरे से - नया था लाला बहोत मजा आया
आसा सर्म से फिर भाग जाती है
अभय मुस्कुराते हुवे - हाय ये आपका सर्माना

मिनिता के घर

कोमल घर आती है विजय कोमल के कमरे मे जाता है कोमल विजय को देख - अरे छोटे क्या बात है बोल तु ऐसे तो आता नही

विजय कोमल के पास बैठ सर्म से - वो वो दीदी एक हेल्प चाहिये
कोमल - कैसा हेल्प
विजय हिम्मत करके - वो वो मा के साथ आप समझ रही है ना
कोमल हैरान फिर मुस्कुराते हुवे - अच्छा समझ गई मा की लेना चाहता है
विजय सर्म से नजरे नीचे किये - वो मेरे कभी ऐसा सोचा नही लेकिन जीत जीतू को उसकी मा मिली है तो
कोमल - अच्छा तो तुझे भी चाहिये अपनी मा
विजय कोमल को देख - हा दीदी भाई खुद चाहते है
कोमल - हु अभय इस लिये चाहता है ताकि तुम सब अपनी मा को उसके पास ना रहने से खुश रख सको अभय के लाइफ मे कई है वो अकेला सब को समय नही दे सकता मेरे भाई तु खुद जा मा मना नही करेगी मा मुझे बहोत चाहती है एक लौटा बेटा है तु
विजय खुश होके - सच मा गुस्सा तो नही करेगी
कोमल मुस्कुराते हुवे - नही करेगी

विजय खुश होके कोमल को गले लगा के - थैंक्स दीदी
विजय फिर चला जाता है
कोमल मुस्कुराते हुवे - लगे रहे उफ एक लरके की वजह से सारा माहौल ही बदल गया है

विजय मिनिता के पास आता है मिनिता विजय को देख मुस्कुराते हुवे - मिल गई फुर्सत मा से बात करने के लिये
विजय मिनिता के पास बैठ - मा आपके लिये टाइम ही टाइम है
मिनिता - हा हा रीमा से टाइम मिले तब ना बता कुछ कहना है
विजय मिनिता को देख हिम्मत करके - मा मुझे आप चाहिये
मिनिता हैरान होती है फिर मुस्कुराते हुवे - मे तो तेरी ही हु
विजय - नही भाई जो करते है ना प्यार आपको वो वाला
मिनिता मन मे - वाह इतनी हिम्मत कब से आ गई मेरे सर्मिले बेटे में
मिनिता विजय के करीब आके धीरे से - अच्छा तो ये बात है
विजय डरते हुवे - मा वो हा
मिनिता धीरे से विजय के आखो मे देख - ठीक है मिल गई तुझे लेकिन याद रखना मे तेरे भाई की हु उसके बाद ही तेरी बाकी बेटा है तू मेरा उसकी जगह तो तेरी ही है

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विजय खुश होके सीधा मिनिता को किस करने लगता है मिनिता बहोत जयदा हैरान होती है फिर सांत अपने बेटे को बाहों मे कस लेती है विजय मिनिता मा बेटे पहली बार incest वाला फीलिंग लेते है
विजय हैरान होके मन मे किस करते हुवे - तो ये फिल होता है इतना मजा आता है मा को किस करने मे तो बाकी सब करने मे कितना आयेगा
मिनिता भी हैरान मन मे - ये ये तो अलग ही फीलिंग है बेटे के साथ किस करने का तो ये एहसास फीलिंग है बेटे के साथ प्यार करने का
किस तोर विजय - उफ मा इतना मजा तो रीमा के साथ भी नही आता
मिनिता मुस्कुराते हुवे - चल जा बाकी बाद मे

विजय भी खुश होके चला जाता है

रात 9 बजे

अभय तारा को अपनी सासु की चुदाई बाते करके अदिति के कमरे मे आ चुका था अदिति नंगी लेती टांगे फैलाये थी अभय भी नँगा अपना मोटा लंड अपनी गुरिया की कसी बुर मे घुसाये चुदाई कर रहा था

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अदिति दर्द मे - भाई मर गई दर्द मे जान जा रही है आह बहोत मोटा है आपका धीरे करो ना उफ मा मर गई आह
अभय अदिति के एक टांग पकरे चुदाई करते हुवे -गुरिया धीरे ही कर रहा हु उफ कितनी गर्म कसी बुर है तेरी आह मजा ही आ जाता है
मोटा लंड अंदर बाहर अदिति की बुर मे जा आ रहा था

चुदाई के बाद अभय अदिति को देख प्यार से - गुरिया मे जा रहा हु फिल्हाल मा पे मेरा फोकस है मा के साथ सब हो जायेगा तो मे मा तुझे साथ मे चुदाई करुगा

अदिति हैरान होती है फिर सर्म से - भाई बहोत सर्म आयेगी मा के सामने किया मा मानेगी
अभय मुस्कुराते हुवे - बिल्कुल फिल्हाल उसकी ले तो लूँ पहले
अभय अदिति को किस लरके - लोव लोव
अदिति अभय को किस करके - लोव यू भाई

अभय फिर आता है आसा के कमरे मे आता है आसा लेती सोच रही थी अभय आसा के पास आके लेत आसा को देख - किया सोच रही है मा

आसा अभय को देख - आ गया कुछ नही
अभय - हु पापा की याद आ रही है
आसा हैरान होके अभय को देखती है
अभय - मा ये बदल नही जाता वो कमीना मेरा पापा है लेकिन मा मेरे दिल मे उनके लिये कोई दया प्यार नही

आसा अभय को सीने से लगा के - समझ सकती हु बेटा और तु सही भी है जब तुझे अदिति विनय, इमोसनल होके, खैर भूल जा सब

अभय आसा को देख - आप ही मेरा सब कुछ है गुरिया दिशा पूजा सासु मिनिता ऑन्टी पूजा सब पहले हम अकेले थे लेकिन अब बहोत लोग है हमारा बरा परिवार है
आसा - सही कहा बेटा अब हम अकेले नही

अभय - हु
आसा अभय को देख - उदास लग रहा है कियु
अभय आसा की आखो मे देख - आप जानती है कियु
आसा मन मे - हु बुर देखना है मा की जनाब को इस लिये उदास है

आसा - अच्छा ठीक है देख बुर दिखा तो नही सकती है लेकिन अभी तु, आसा सर्म से, दबा छु सकता है
अभय हैरान खुशी से आसा को देख - सच मे मा
आसा सर्म से - हा सच

आसा खुद नीचे से नंगी पैंटी मे सीधे लेत जाती है अभय हैरान मुह खोले देखता ही रह जाता है आसा सर्म को दबाते हुवे - पहले भी देखा है मुह बंद कर जो करना है कर ले
अभय होस मे आते हुवे - हा
अभय एक तकिये को लेके - मा अपनी गांड के नीचे इस तकिये को रख लो
आसा हैरान फिर सर्म से गांड उठा के - रख दे
अभय जल्दी से रख देता है फिर आसा के पैर के पास आके बैठ जाता है

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अभय के आखो के सामने आसा नीचे से नंगी पीले पैंटी मे लेती हुई थी भरा गोरा बदन मोती जांघे पीले पैंटी मे उफ किया ही बवाल लग रही थी आसा अभय की हालत पूरी खराब थी लंड लोहा बन गया था अभय तो सब देखे जा रहा था वही आसा लेती अभय को देख मन मे - सच कहु लाला मुझे मेरी बॉडी को ऐसे देखता है तो अलग ही खुशी मिलती है उफ बहोत सर्म भी आती है
अभय होस मे आते मन मे - जब भी देखता हु होस खो देता हु

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अभय कपते हाथो से बुर के पास आसा की मोती गोरी जांघों को सेहलानें मसलने लगता है आसा सिसक् परती है सिहर उठती है तेज सासे लेने लगती है अभय बुर के पास जांघों को मसल रहा था लेकिन जो गर्मी फिल हो रही थी अभय को पागल कर रही थी मस्त गोरे मुलायम कमरे थे आसा के
अभय की नजरे तो पैंटी पे ही थी उसके अंदर छुपा था खजाना

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अभय फिर दोनो हाथो से दोनो जांघों को मालिस् करने लगता है आसा की हालत बिना पानी के मछली जैसी हो गई थी आसा देख रही थी फिल कर रही थी अभय की उंगली अपनी बुर के पास आते जाते और अपने जांघों के चलते हाथो को आसा को अलग ही मजा आ रहा था मुह से आह उफ सिसकिया की आवाज निकाले जा रही थी अभय अपनी मा की तरप देख और जोस मे आने लगता है

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अभय को रहा नही जाता और अपनी मा की बुर के उभार पे पैंटी के ऊपर से ही सेहलानें लगता है उपर से नीचे बुर लाते अपनी उंगली से पुरे बुर का जाएजा ले रहा था अभय फिल कर रहा था कितनी फूली मोती मास गुड़ा से बरी मा की बुर है आसा ही हालत और खराब हो जाती है तेज सासे लेते अपने बेटे को देख रही थी कैसे उसका बेटा बरे प्यार से उसकी बुर की उभार को बुर को सेहला रहा है मालिस् कर रहा है बुर गीली होने लगती है आसा अभय को देख - उफ आह मा मेरे लाल
अभय तो पैंटी के ऊपर अपनी मा के बुर के उभार को फिल करके पागल हो चुका था बहोत जयदा गर्म उतना ही नर्म मुलायम अभय साफ फिल कर रहा था बुर पे कितना मास गुड़ा है यानी बुर फूली है

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अभय धीरे धीरे प्यार से उंगली से अपनी मा के फूली बुर पे उंगली फिराते जा रहा था अभय की उंगली आसा की बुर के चल रही थी
अभय आसा को देखते हुवे - उफ मेरी मा आपकी बुर मे आग लगी हुई है इतना गर्म है ही मेरी उंगली जल रही है मा आपकी बुर बहोत मुलायम नर्म फूली हुई है आह बता नही सकता मे कैसा फिल कर रहा हु उफ मा ये पल रुक जाए मे ऐसे ही आपकी बुर सेहलाते फिल करते रहु उफ मा कुछ तो बोलिये
आसा कपते होठो से अभय को देख - आह लाला मे बोलने की हालत मे नही हु लाला आह मर गई बस लाला रुक जा
अभय मुस्कुराते हुवे - पैंटी गीली हो गई है झरने वाली तो नही है ना

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अभय जोस मे आसा की टांगे थोरा फैला के जांघों को सेहलते हुवे बुर पे ले जाके कस मे आसा की फूली गीली गर्म बुर को मुठी मे पकर मसल देता है आसा एकदम से चीख परती है अभय पैंटी पकरता ही है की आसा जल्दी से बैठ बुर पे हाथ रख दर्द मे अभय को देखती है अभय ने जोर से मसल दिया था बुल पे बाल थे वो खिच गये थे

आसा हैरान अभय को देख दर्द मे - बहोत हो गया चल जाके सो सा बहु इंतज़ार कर रही होगी
अभय उदास होके - बस इतना ही मजा तो आना सुरु हुआ था अभी
आसा अभय को देख मन मे - बेसरम मजा तो मुझे भी आ रहा था लेकिन और कुछ देर करता तो मे झर जाती जोर इतना जोर से मेरी बुर को मसला की आह बहोत दर्द हो रहा है

अभय हाथ जोर आसा के सामने आसा को देख - प्लेस प्लेस मा बस आपको बुर का बाल देखा दो आपको बुर का उभार उसपे जो बाल है वो देखना है प्लेस मा प्लेस मेरी प्यारी मा मान जाओ

असल मे अभय न अच्छे से जाएजा अपनी मा की बुर का ले लिया था अभय फिल कर चुका था बुर पे बाल है और बुर के छेद के ऊपर उभार पे बहोत मास गुड़ा है यानी की आसा की बुर फूली मोती मास से भरी हुई है

अपने बेटे को ऐसा करता मानता देख आसा को अंदर ही अंदर बहोत ही जयदा खुशी मिलती है यही तो वजह थी की आसा अभी तक ये सच नही बता रही थी वो भी अपने बेटे से प्यार करती h और सब उसके नाम कर चुकी है

यानी ये आसा को अच्छा लगता है जब अभय आसा को मानता है
अभय - अच्छा अच्छा इतना केह रहे हो तो ठीक है लेकिन बुर देखा तो अच्छा नही होगा फिर जो मिल रहा है वो भी नही मिलेगा जितना कहा उतना ही देखना है

आसा अपने पैर सीधा कर देती है और मन मे - इतना सर्म आ रही है मुझे बता नही सकती और मे बेताब भी रहती हु सब दिखाने के लिये
अभय खुशी से नाच उठता है
अभय खुशी से - समझ गया मा उतना ही देखुंगा

अभय फिर अपनी मा की पैंटी मे छिपे बुर को देखता है और कपते हाथो से पैंटी के अंदर उंगली डाल धीरे से नीचे करता है वैसे ही काले काले बाल और बुर की उभार गुडे से भरे अभय के नजरे के सामने आ जाते है जिसे देख अभय का लंड झटके मारते कुछ बूंद पानी निकाल लेता है नंगी बुर मे अपने बेटे की उंगली फिल करके आसा को करेंट जैसा लगता है सिहर जाती है और आसा की बुर और जयदा गीली हो जाती है उसी के साथ पैंटी भी

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अभय बाबला होके अपनी उंगली से अपनी मा की बालों वाली बुर के उभार को सेहलानें लगता है उंगली से बाल को खुरेडने लगता है नर्म मास बालों से भरी अभय जो देख कर फिल कर रहा था अभय ही समझ सकता था आसा बेचारी की तो और जयदा हालत खराब हो गई थी बस बुर के छेद बचे थे बाकी जगह तो अभय की उंगली चल रही थी आसा अभय को देख - आह मा अभय बेटा सेह नही पाउंगी बस हो गया मर गई आह उफ बेटा लाला मेरे बच्चे अब बस कर

आसा एकदम से उठ कर बैठ जाती है और जोर जोर से सासे लेने लगती है अभय अपनी उगली नाक के पास लेके सूंघने लगता है उफ एक अलग ही खुशबु अभय के नाक मे जाती है अभय - आह किया खुशबु है मा की बुर की

आसा अभय को देख हफते हुवे - चल जा अब हो गया ना जो बोला मेने किया

अभय आराम से बैठ आसा को देख - चला जाउंगा लेकिन अब आपकी बुर के बाल देखने के बाद मुझे बुर नंगी पुरा देखना है अभी नही तो कल लेकिन देखना है

आसा हैरान अभय को देख - सपने देख जो कर देख लिये तेरे लिये बहोत है चल अब जा यहा से
अभय - नही आप वादा करो कल आप दिखाओगी तोहि जाउंगा
आसा बिस्तर उतर गांड अभय की तरफ करके पैंटी निकाल नाइटी पहन बिस्तर पे लेत - ना तो ना मे तो सोने चली बैठा रह

अभय - ठीक है मे बैठा ही रहुंगा जब तक आप हा नही करती
आसा अभय को एक बार देख - ना तो ना
आसा आराम से सोने लगती है तो अभय बैठा रहता है 30 मिनट बाद आसा देखती है अभय बैठा ही है तो आसा उठ के बैठ अभय को देख - तु गया नही
अभय - जब तक आप हा नही बोलेगी
आसा अभय को देखती रहती है फिर गहरी सासे लेते हुवे - अच्छा बाबा वादा कल पूरी नंगी जो देखना है जैसे देखना है देख लेना

बस इतना सुनते ही अभय खुशी से आसा को गले लगा के - मा मजाक तो नही कर रही है ना
आसा मुस्कुराते हुवे - सच केह रही हु
अभय खुशी से आसा को किस करने लगता है किस करके के बाद अभय प्यार से आसा को देख - जानती है मा मुझे पता था देर स्वेर् आप हा करेगी कियुंकी आप मुझे बहोत प्यार करती है
आसा अभय के सेर सेहलाते हुवे - ये भी कहने की बात है अब जा बहु इंतज़ार कर रही होगी

अभय - हु गुड नाइट मा लोव यू
आसा मुस्कुराते हुवे - गुड नाइट लाला लोव यू
अभय चला जाता है आसा बिस्तर पे लेत मन मे - हु तो यहा तक हम आ ही गये जल्दी ही हमारा जिस्म भी मिल के एक हो जायेगा लाला तेरी मा तो तरप रही है ये तु भी अच्छे से जनता है

अभय अपने कमरे मे आता है आसा पूजा सब अभय को देखते है जो बहोत खुश था और दिशा पूजा के बीच बैठ जाता है

दिशा मुस्कुराते हुवे - किया बात है बहोत खुश लग रहे है
पूजा मुस्कुराते हुवे - लगता है मजिल के करीब आ गये है
अभय पूजा दिशा को देख - हा मा ने वादा किया है पूरी नंगी होके सब कुछ अच्छे से देखायेगी एक बेटे के लिये किस्मत वाला पल होता मे अपनी मा की बुर देखने वाला हु वो बुर जिस से मे निकला हु

दिशा मुस्कुराते हुवे - वाह किया बात है किस्मत वाले ही कुछ लोग अपनी मा को नँगा देख पाते है आप किस्मत वाले है और अपने ये मोक्का जीत जीतू विजय तीनों देवर जी और सब को दिया है

अभय - हा वो तो है चलो अपना खेल सुरु करते है मे बहोत खुश हु
दिशा पूजा डरते हुवे - खुशी मे हमारी हालत मत खराब कर देना

फिर अभय सुरु हो जाता है और दिशा पूजा की दर्द भरी आवाजे कमरे मे गुजने लगती है

सुबह

सुबह आसा रेडी होके बाल सवार रही थी तभी अभय आता है इतनी सुबह अभय को उठ आता देख आसा हैरान पीछे मूर अभय को देखते हुवे - किया बात है आज मेरा लाला इतनी सुबह कैसे उठ गया

अभय आसा को बाहों मे लेके आखो मे देख - अपने कहा था कल बुर दिखाओगी कल यानी आज अभी दिखाओ ना मा रात भर मे सो नही पाया सोच सोच के

आसा हैरान अभय को देख मन मे - तो ये बात है इस लिये इतनी सुबह उठ गया कितना बेताब है अपनी मा की बुर देखने के लिये

आसा - बोला तो दिखा दुगी लेकिन अभी नही

आसा रेडी होके नीचे आती है अभय भी पीछे पीछे आता है दिशा तारा ये सब हॉल मे बैठे देख रहे थे अंदर ही अंदर हस रहे है मजे ले रहे थे सब देख के

आसा सोफे पे बैठ तारा दिशा को देख - हु मा बेटी पहले ही बैठे बाते कर रहे है रेडी होके
तारा मुस्कुराते हुवे - बिल्कुल कियु बेटी
दिशा अभय को देख - जी मा मम्मी जी आज कोई जल्दी उठ गया है पता नही कैसे
तारा - मे भी हैरान हु दामाद जी किया बात है हु
आसा थोरि घबरा जाती है
अभय आसा को देख - बस ऐसे ही नींद खुल गई थी

अदिति कोफ़ी लेके आती है आसा अभय दिशा तारा को लेती है और खुद लेके बैठ जाती है अभय के पास

अदिति - मे भी हैरान हु भाई आज इतनी सुबह उठ गए
अभय - बस भी करो तुम सब
अभय कान मे आसा से धीरे से - मा दिखाओ ना चले कमरे मे
आसा कोफ़ी पीते हुवे धीरे से -दिखा दुगी अभी नही

दोपहर 12 बजे बगीचे मे सब बैठ थे अभय आसा के पास बैठे धीरे से - मा अब तो दिखा दो
आसा अभय को देख - बाद मे

अभय सुबह से आसा के पीछे लगा रहा एक नही कई बार कहते रहा आसा को बुर दिखाने के लिये लेकिन आसा हर बार बाद मे बाद मे करती रही असल मे आसा जानबूझ के अभय को तरपा रही थी और बाकी सब मजे ले रहे थे सीन का

अभय आखिर नाराज हो जाता है और फिर उठ घर जाने लगता है
आसा अभय को जाते देख मन मे - लगता है नाराज हो गया

अदिति दिशा से धीरे से - मा जानबूझ भाई को तरपा रही थी अब नाराज हो गए है
दिशा मुस्कुराते हुवे - चिंता मत कीजिये मम्मी जी अपने लाला को नाराज दुखी जयदा देर नही होने देगी
पूजा कोमल से धीरे से - जीजा जी तो नाराज हो गये
कोमल मुस्कुराते हुवे - देख रही हु मे देखते है आगे किया होता है

मिनिता तारा से धीरे से - देख रही है ना आप मा बेटे मे किया चल रहा है
तारा मुस्कुराते हुवे धीरे से - अच्छे से सुबह से यही तो देख रही हु देखते है समधन जी किया करती है कितने देर अपने लाला को टारपति है

अभय अंदर चला जाता है आसा बैठी मन मे - शायद अब जाएदा नही परपना चाहिये मे अपने लाला को दुखी नाराज नही देख सकती

आसा खरी होके सभी को देख - मे आती हु
आसा भी पीछे अभय के निकल परती है ये देख सब एक दूसरे को देख मुस्कुरा देते है

अभय आसा के कमरे मे लेता नाराज होके - हद है इतना कोन अपने बेटे को टरपता है

तभी आसा अंदर आते हुवे - तो तु यहा है मुझे लगा अपने कमरे मे होगा

अभय मुह फेर नाराज मे - आपको किया
आसा मुस्कुराते हुवे मन में - उफ देखो तो नाराज होता है तो कितना प्यारा लगता है मेरा लाला

आसा अभय के पास लेत अभय की आखो मे देख - माफ कर दे लाला अपनी मा को देख आ गई तुझे बुर देखना है ना देख ले

अभय आसा को देख - हा लेकिन जितना परपाया है मुझे अब देखने से नही मानूँगा
आसा हैरान होके - मतलब
अभय आसा की आखो मे देख - कितने साल से आपने बुर से पानी नही निकाला है
आसा नॉर्मल होके - 20 के पास हो गये होगे
अभय - हु लेकिन अब आज मे आपकी बुर का पानी निकालूँगा और उस पानी को पिऊंगा पुरा का पुरा कई सालों से आपके बुर का रस जब के मस्त मलाई बन गई होगी

आसा पूरी शोक हैरान होके- किया
आसा मन मे - समझ गई मे खुद रेडी हु लेकिन लाला कैसे निकालेगा मेरा पानी बुर से उंगली करके या

अभय मुस्कुराते हुवे - यही सोच नही है ना कैसे निकाउंगा
आसा हैरान अभय को देखती h
अभय मुस्कुराते हुवे - बुर को चाट के चुस के निकालूँगा आपकी बुर का पानी और उस पानी को मजे से पिऊंगा जैसे आप मेरे लंड को चुस के स्वाद लेती है फिर मेरे लंड का पानी पीती है

अपने बेटे की बात सुन आसा पूरी हिल जाती है शोक होके अभय को देखती रहती है आसा दूर तक ये सोची नही थी बुर चाटा चूसा जाता है और उसका बेटा उसकी बुर चाटेगा कभी नही सोचा था

अभय शोक अपनी मा देख मन मे मुस्कुराते हुवे - यही हैरान शोक वाला फेस देखना चाहता था मा आपका

अभय बैठ जाता है और अपनी मा की टांगे फैला के सारी पेटिकोट उपर करके लगता है आसा होस मे आती है और अभय को देख मन मे - मे इतना शोक हु किया ही बोलू लेकिन अब सोचु तो हा करते होगे मुझे तो लंड चूसा जाता है पता नही था लेकिन चूसने के बाद एहसास हुआ बहोत मजा आता है तो लाला मेरी बुर चुसेगा तो उफ मेरी बुर रोने लगी है खुशी है चल लाला दिखा अपना कमाल मुझे यकीन है तू जो करेगा मुझे उसमे अलग ही मजा आने वाला है

ये सोच आसा अपनी टांगे और फैला देती है ये देख अभय और जोस से भर जाता है

आज के लिये इतना ही - कैसा रहा आज का update जरूर बताना दोस्तो 🙏🙏🙏🙏
Mast
 

beatrix

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chapter 126

अभय अपनी मा के सारी पेटीकोट उठा के ऊपर घुटनों तक कर देता है और दोनो हाथ अपनी मा के मोटे जांघों पे रख सेहलते हुवे बुर की तरफ जाने लगता है तो वही आसा लेती सर्म से मदहोसी मे लेती सिसकिया और तेज सासे ले रही थी

अभय अपनी मा के मोटे मुलायम जांघों को सेहलाते हुवे बुर के पास आता है लेकिन अभय को एहसास होता है उसकी मा ने पैंटी नही पहना है तो हैरान होता है फिर मुस्कुराते हुवे आसा को देखता है आसा अभय को देख सर्म से नजरे फेर लेती है

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अभय मुस्कुराते हुवे कपते हाथो से बेताबी मे सारी जल्दी से पूरा उपर कर देता है और धराम आसा की बालों वाली मस्त फूली उभरी बुर अभय ले नजरो के सामने थी जिसे देख अभय जम जाता है जिस बुर से निकला था जिस बुर को देखने के लिये अभय तरप रहा था वो सब अभय के सामने थी उफ आसा की बुर के किया ही कहने थे काले बाल मे किया दिख रहे थे बाल होने की वजह से पुरे साफ अच्छे से सब दिख नही रहा था लेकिन बालों वाली बुर भी मस्त दिख रही थी

तभी आसा एकदम से बैठ सारी नीचे कर लेती है अभय हैरान आसा को देखता है आसा धीरे से सर्म से - लाला ये समय सही नही है रात को कर लेना

अभय बात समझ - समझ गया मा लेकिन जो देखा बिस्वास नही हो रहा
आसा सर्म से नसिलि आखो से अभय को देख - सच है लाला तूने अपनी मा की बुर देखी है अपना जन्म अस्थल देखा है तुने अब चल

अभय मुस्कुराते हुवे - जिस बुर से निकला वो जन्म अस्थल कमाल का है
आसा सर्म से पानी पानी हो जाती है

अभय आसा फिर बगीचे मे आते है मिनिता तारा इतनी जल्दी आते देख हैरान होते है आसा सर्म से लाल थी लेकिन खुद को नॉर्मल करके मिनिता आसा के पास बैठ जाती है वही अभय के चेहरे पे खुशी साफ दिख रही थी

अभय दिशा बाकी सब के पास बैठ जाता है दिशा बाकी सब भी हैरान अभय को देखते है तो अभय सारी कहानी बता देता है ये सुन सब मुस्कुराने लगते है

पूजा मुस्कुराते हुवे - दीदी रात को फिर अकेले ही सोना होगा उनके बिना ही
दिशा मुस्कुराते हुवे - तूने सही कहा छोटी
कोमल अभय को देख - बाबू बताओ ना ऑन्टी की बुर कैसी है
अदिति अभय को देख - भाई मुझे भी जानना है बताओ ना
दिशा - हा पति जी, दिशा एक नजर पास बैठी आसा को देख , मम्मी जी बला की खूबसूरत है इस उमर मे भी पूरी फिर है जाहिर है

अभय सभी को देख मुस्कुराते हुवे - तुम सब सही हो मेरे पास शब्द नही है कहने के लिये लेकिन जैसा सोचा था उससे भी कही जयदा खूबसूरत नजारा था बस इतना ही जान लो

साम 4 बजे शोभा के घर

हॉल मे सब बैठे थे अभय शोभा को बाहों मे लिये किस कर रहा था और सब देख रहे थे अभय किस करते शोभा के चुचे दबाने लगता है शोभा सर्म से राज को देखते हुवे धीरे से - किया कर रहे है राज बैठा देख रहा है

अभय रुक राज को देख - तो बेटा मन मे कुछ चल रहा है हु
राज एकदम से - नही नही तो पापा
अभय - देखो राज माहौल ऐसा ही रहने वाला है खुला सा लेकिन कभी किसी के ऊपर उसके मर्ज़ी बिना हाथ मत डालना

राज - पापा आप मुझे बुरा समझ रहे है
अभय मुस्कुराते हुवे - बिल्कुल नही
रीना - पापा भाई के सामने ऐसे करेगे तो मन बिगर जायेगा
रेखा राज को देख - सच मे किया
राज रेखा को देख - जो खुद पे काबू ना रख सके वो इंसान ही किया तुम हो ना और किया चाहिये
अभय शोभा से धीरे से - राज अच्छा लरका है जाहिर है मेरी जान ने पर्वरिस् किस है
शोभा अभय को देख पेट पे हाथ रख - हमारे आने वाले बेबी को भी पुरा प्यार देगे
अभय होठों पे किस करते हुवे - बिल्कुल मेरी जान

अभय शोभा सभी से बात करके अच्छा समय बिता के नीतिका मिका सुमन रीमा से मिलकर बाते थोरा प्यार करके घर आ जाता है
अभय समय निकाल सब के पास जरूर जी रोज जाता कियुंकी अभय के लिये सब उसके प्यार चाहने वाले थे अभय कुछ पल ही मिलने जाता उसी मे सब बहोत जयादा खुश हो जाते सेक्स ही सब नही होता जिस को आप प्यार करते है उसके साथ थोरा प्यारा वक़्त गुजार लेना भी जरूरी होता है

रात 9 बजे - खाना पीना होने के बाद

पुरे दिन अभय इस पल का इंतज़ार कर रहा था पहले अभय तारा मधु से प्यार करता है बाते थोरी करके अपने कमरे मे आके दिशा पूजा को देख - आज नही आऊगा मा के साथ सोऊंगा

दिशा पूजा मुस्कुराते हुवे - जानते थे पहले से ही जाइये जंग जीत लो
अभय मुस्कुराते हुवे दोनो को किस करते हुवे - ठीक है गुड नाइट

अभय फिर अपनी मा के कमरे मे आता है आसा नाइटी मे लेती हुई थी अभय के अंदर आते ही आसा की सासे तेज हो जाती है आसा तो यही सोच रही थी अब जो होने वाला है कैसे होगा बेचारी दिन से लेके अब तक वही सोचे जा रही थी

अभय आसा के पास लेत के आसा को देख - किया सोच रही है मा
आसा अभय को देख थोरा सर्म से - यही की बुर को चाटा भी जाता है वो जगह तो गंदी होती है ना
अभय - वो वजह गंदी कैसे हो सकती है मा आप मेरा लंड चुस्ती हो स्वाद लेती हो फिर मेरे लंड का गर्म पानी पीती हो तो मजा आता है ना
आसा सर्म से - हा
अभय - पहले आपने सोचा था कभी लंड चूसा जाता है लेकिन अब चुस्ती हो ना तो वैसे ही मुझे आपको हम दोनो को मजा आयेगा

अभय आसा के ऊपर आके - अब रहा नही जाता
अभय आसा को किस करने लगता है आसा भी अभय को बाहों कसते हुवे किस करने लगती है मुह मिठा करने के बाद

अभय बेड से नीचे खरा होके आसा को देख - मा नाइटी उपर करो अपनी बुर दिखाओ

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आसा अभय को देखते हुवे सर्म से नाइटी पकर उपर कर देती है और सर्म के मारे अपने चेहरे मे हाथ रख मन मे - उफ बहोत सर्म आ रही है
किया ही बवाल नजारा था मोटी गोरी जांघों के बीच बालों वाली फूली बुर किया ही कयामत लग रही थी अभय सब देख सांत था अभय तैयार होके आया था अभय पुरे हर पल का मजा आराम से लेना चाहता था ये अलग बात है अभय का लंड लोहा बन गया था

अभय - मा अच्छे से दोनो टांगे फैला दो
आसा बिना अभय को देखे अपनी दोनो टांगे पूरी तरह खोल देती है उफ अभय सब देख रहा था आसा जो अपनी टांगे अपने पति के लिये खोलती थी अब अपने बेटे के लिये खोल रही थी

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अभय टांगों के पास बैठ थोरा झुक गोर से अच्छे से अपनी मा की फूली बुर देखते हुवे - मा बता नही सकता मे कितना खुश हु मा इसी बुर से मे बाहर आया हु ना कितनी प्यारी खूबसूरत बुर है आपकी फूली उभरी गुडे वाली उफ काले बाल आपके बुर पे अच्छे लग रहे है साफ करोगी तो और मस्त गोरी चिकनी लगेगी
अपने बेटे की बात सुन आसा सर्म से पानी पानी हो जाती है और धीरे से अभय को देखती है तो उसके टांगों के बीच बुर देखने मे खोया था आसा मन मे - उफ ये कैसा पल है अजीब एहसास है मे पागल हो रही हु यकीन नही होता मुझे मे अपने बेटे को बुर दिखा रही हु

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अभय एक उंगली से बुर को टच करते हुवे फाके अलग करने की कोसिस करता है वैसे ही आसा अपने बेटे की उंगली अपनी नंगी बुर पे फिल करते ही गांड उठा के उछल परती है आसा सिहर जाती है बॉडी काप् जाती है आसा की सासे एक पल रुक सी जाती है फिर बिस्तर कस के पकर जोर जोर से सासे लेने लगती है अभय का पूरा फोकस अपनी मा के बुर पे था अभय आज बहोत सांत था जल्दी बाज़ी नही कर रहा था अच्छे से देख फिल कर रहा था

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अभय फिर अपने हाथो को आसा के बुर पे रख मसले लगता है और बुर के फाको के चमरे को पकर जोर से मसल देता है आसा पूरी हिल जाती है जोर से दर्द मे चीख परती है आसा दर्द मे अभय को देखते हुवे - आह मर गई ये कैसा एहसास दर्द है आह मा मेरी बुर को इतने जोर से मत मसल लाला दर्द हो रहा है उफ
अभय आसा को एक नजर देख - मुझे जो करना है करुगा
आसा तेज सासे लेते दर्द मे - ठीक है जो करना है उफ कर

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अभय फिर अपनी उंगलियों से अपनी मा के बुर के फाको को अलग करके फैला के देखता है उफ गुलाबी लाल छेद देख अभय बाबला होने लगता है अभय - यही छेद है ना मा जिससे मे बाहर निकला हु मा गुलाबी लाल उफ कसी हुई लग रही है बहोत छोटा छेद है
आसा तेज सासे लेते बिस्तर कस के पकरे मदहोसी मे - हा उसी छेद से तू निकला है आह और हा कसी हुई है तेरी मा की बुर कियुंकी आह मे उंगली नही करती थी आह लाला कैसी लगी अपनी मा की बुर की छेद
अभय अपनी मा को इतना जोस गर्म खोल के बोलते देख जोस मे जोस मे पागल होके - बहोत बवाल गजब खूबसूरत

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अभय ये कहते हुवे बुर के हाथ रख उंगलियों से जोर जोर से पुरे बुर को कस के मसले लगता है आसा दर्द मे गांड हिलाते हुवे - आह मर गई लाला बहोत दर्द हो रहा है इतने जोर से मत मसल आह बेटा
अभय बुर मसलते हुवे आसा को देख - उफ मा कितनी फूली गर्म बुर है आपकी मसलने मे मजा आ रहा है पुरे मास गुड़ा से भरी हुई है
आसा दर्द मे मजे ले रही थी पहली बार कोई इस तरह उसकी बुर को मसल रहा था वो भी कई सालों बाद उसका खुद का बेटा
आसा जोस गर्म मे बुर से पानी निकलते हुवे - आह मसल लाला मसल अपनी मा के बुर को आह ये दर्द मेरे लिये सुकून है कई साल हो गये उफ अपनी बुर मे किसी मर्द का हाथ फिल करते हुवे

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अभय बीच वाली उंगली बुर के अंदर घुसाते आसा को देख - ऐसा है किया मा उफ मर गया , अभय बुर को देखता है अंदर उंगली जा रही थी साथ मे आसा की बुर भी अंदर जा रही थी ये साफ था आसा की बुर कितनी कसी है अंदर पूरा उंगली डालते ही अभय जोर से - आह मर गया मेरी उंगली जल रही है अंदर तो आग लगी हुई है मा कितनी कसी हुई बुर है ये आग कैसे काबू करके जीते आ रही थी आप
आसा अपनी बुर मे बेटे के उंगली अंदर तक फिल करते ही बबली होके अभय को देखते हुवे - उफ मा लाला तेरी मा आह तरप के जीते आ रही थी आह लाला तेरी उंगली आह अंदर मेरी बुर मे फिल करके मुझे आह अलग ही एहसास सुकून मिल रहा है बेटा आह

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अभय अंदर मे ही उंगली चलाने लगता है बुर के अंदर उंगली मोर मोर के फिल करके लगता है कितनी टाइट है आसा की हालत खराब होने लगती है तरपने मचलने लगती है तेज सासे लेते हुवे - उफ लाला मेरे बेटे करते रहे आह बहोत मजा आ गया है इतना मजा तो मे उंगली करती थी तब भी नही आता था
अभय आसा को देख - उफ मा अंदर आपकी गुड़ा उफ गर्मी सब अच्छे से फिल कर पा रहा हु उफ मेरी उंगली जल रही है

जल्दी से उंगली बाहर निकाल देता है और अपनी उंगली को देखता है जो पूरी गीली थी आसा पसीने से भीग गई थी जोर जोर से सासे लिये जा रही थी अभय आसा को देखते हुवे उस उंगली को मुह मे लेके मजे से चूस लेता है ये देख आसा की आखे फैल जाती है अजीब एहसास मे पागल होके सर्म से लाल हो जाती है

अभय आसा को देख - मा अब बरी है आपके बुर के रस पीने की
आसा मदहोसी मे अभय को देख - पीले मेरे लाल मुझे पता नही था बुर को चाटा जाता है बुर के रस को पीते भी है लेकिन मे ये एहसास फिल करना चाहती हु कितना मजा आता है जब कोई मर्द बुर चाटता है
अभय पुरे जोस मे - ठीक है मा तो अच्छे से फिल करके मजे लेना
आसा अपनी टांगे और फैला के हफ्ते हुवे सर्म से - ठीक है सुरु कर

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अभय झुक जाता है अंगूठे उंगली से फाके फैला के देखता है और भी अच्छे से पहले से लाल गुलाबी छेद अंदर तक अच्छे से साफ तरीके से दिख रही थी पूरी गीली रस से भरी अभय पागल होके बिना देरी किये जिब निकाल टूट परता है

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अभय दोनो अंगुटे से बुर के फाको को अच्छे से फैला के जिब से चाटने लगता है जैसे ही आसा अपनी बुर के फाको के बीच अपने बेटे के जिब फिल करती है आसा जो बिस्तर पकरे थी और कस के गांड सीने उपर उठाते हुवे जोर से सिसक् के - आह मा ये कैसा एहसास है ये कैसा आलम है ये कैसी फीलिंग है मेरे बेटे के जिब मेरी बुर के चमरे को छुटे ही मेरी बॉडी आह खुशी से नाचने लगी है मेरी बुर तो खुशी से रोने लगी है उफ लाला चाट बेटा अपनी मा की बुर
आसा को पहले बुर चुसाइ चटाई से अलग ही दुनिया मे चली गई थी तो वही पहला अपनी मा के बुर रस का स्वाद लेते ही अभय मंगमध् हो जाता है जैसे अमृत पी लिया हो हा एक बेटे के लिये मा की बुर का रस अमृत से कम नही था अभय ने कई बुर के रस का स्वाद लिया था लेकिन अब अपनी मा के बुर के स्वाद लेने के बाद उसके सामने सब फीके हो गये थे

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अभय मजे से जिब से अपनी मा की बुर बरे प्यार आराम से चाटे जा रहा था और फिर अभय एकदम से फाके के चमरे मुह मे लेके चूसने लगता है आसा तो इस एहसास फीलिंग मे बबली हो चुकी थी अब आसा को एहसास हो गया था बुर चाटने चुस्वाने मे कितना मजा सुकून मिलता है आसा गांड उठा उठा के - आह लाला मेरे बेटे ये कैसा एहसास सुकून है उफ इतना मजा आता है मुझे आह अब पता चला मेरे मेरे चूस मेरी बुर को अच्छे से चूस अपनी मा की बुर को आह मे ये मजा मिस कर देती उफ लेकिन तूने तु ये मजा मुझे दे रहा है आह

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अभय अपनी मा की बाते सुन और जोस मे बुर के फाको के बीच जिब पुरे उपर नीचे करते हुवे अच्छे से चाटने स्वाद लेने लगता है
अभय मन मे - उफ ये स्वाद गर्म गर्म मा आपके बुर के स्वाद के आगे दुनिया की सारी बुर के स्वाद कुछ नही है आह मा मेरी मा उफ
आसा की बॉडी एकदम से अकरने लगती है आसा एक हाथ अभय के सर पे रख जोर से बुर पे दबा के गांड कमर उठाते हुवे मचले हुवे मछली की तरह अपनी बुर जोर जोर से अभय के मुह मे लेते हुवे - आह लाला मेरे बेटे मे झरने वाली हु बेटा आने वाला है

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सीन बहोत गजब का था आसा बिस्तर पकरे अपने बेटे के सर अपनी बुर पे दबाये थी उछल मचल रही थी कई सालों बाद आसा पूरी तरह से झरने वाली थी कई सालों से जमा रस आज अपने बेटे के मुह मे निकालने वाली थी और अभय वही चाहता था आखिर एक जोर का फोर्स के साथ आसा कपते हुवे अभय के सर जोर से दबाये अपनी बुर मे झरने लगती है आसा गांड कमर उठा उठा के झरति रहती है एक मिनट तक अभय मुह खुले पूरी बुर को मुह मे लिये था इस लिये सारा रस जो आसा निकालती है पूरा अभय के मुह मे भर जाता है गर्म गर्म गाढ़ा रस जिसे अभय बरे आराम से स्वाद लेते हुवे धीरे धीरे पी जाता है

अभय धराम से बिस्तर पे लेत हफने लगता है आसा के सर दबाने से अभय अच्छे से सासे नही ले पा रहा था वही आसा बेसुद्ग हो गई थी इतने सालों बाद इतने खतरनाक तरीके से कभी नही झरी थी
कई सालों बाद अंदर जमा रस एकदम से निकालने पे असर तो होता ही है लेकिन वो मजा एहसास सुकून भी अलग ही नेवल का होता है

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आसा टांगे फैलाए लेती पसीने से भीगी जोर जोर से सासे लिये जा रही थी वही आसा की बुर पूरी छेद पे अभी भी बुर के पानी से सना हुआ था गाढ़ा उजला उफ इतना पानी मस्त सीन था

10 मिनट बाद अभय आसा दोनो सांत सीधे पैर किये हाथ फैलाये लेते छत को देखते सोचो मे गुम थे

आसा मन मे - यकीन नही होता बिना चुदाई के इतना मजा सुकून कभी मुझे मिलेगा मे इतनी बुरी तरह से झरी हु जितना मे पहले नही झरी इतना जोस मदहोसी पहले में कभी फिल नही किया ,आसा अभय की तरह देख , शायद इस लिये कियुंकी मेरे अंग् को छूने प्यार करने वाला मेरा बेटा है तो ये रिस्तो के बीच बने प्यार का एहसास है

तो वही अभय मन मे - ये सपना तो नही मेने मा के बुर देखे वो बुर जो मेरा जन्म अस्थल है मेने देखा ही नही छुवा मसला उंगली की मुह मे लेके चूसा जिब से चाटा भी जिसके लिये मे अब से तरप रहा था

अभय आसा की तरफ करवट लेता है आसा अभय की तरफ दोनो नजदीक आ जाते है और एक दूसरे की आखो मे प्यार से देखते है

अभय आसा की आखो मे देखते हुवे - अपने बेटे से बुर चट्वाने चुस्वाने कई साल बाद झरने के बाद कैसा लग रहा है आपको मा मजा आया या नही बताओ ना

आसा अभय की आखो मे देखते हुवे - लाला मेरे पास शब्द नही है सच कहु लाला जिस तरह तूने मेरी बुर दबाया मसला चूसा चाटा है मुझे इतना मजा आया ही मे अलग ही दुनिया मे चली गई थी तेरे तेरे पापा के जाने के बाद पहली बार मे झरी हु अब मुझे बहोत अच्छा हल्का सुकून भरा फिल हो रहा है जैसे सर से भारी वजन हट गया हो अभी जो भी हमारे बीच हुआ मेरे लिये बहोत सर्म वाला मोमेंट था लेकिन उतना ही अच्छा प्यारा सुकून भरा भी

अभय आसा को बाहों मे भर कसते हुवे - मुझे भी बहोत मजा आया मा आपके बुर के स्वाद रस पीके उफ मस्त स्वाद था

आसा अभय को देख सर्म से - सच्ची मे
अभय मुस्कुराते हुवे -आपकी कसम

अभय अपने लंड को देखाते हुवे - मा ये दर्द कर रहा है जब से आपकी बुर देखा तब से अब तक बैठा नही है
आसा सर्म से - अच्छा तो मे क्या करू

अभय आसा के ऊपर आके मुह के लंड अपना लंड कर देता है आसा भी समझते हुवे सर्म से अपना मुह खोल देती है और अभय फक् के साथ अपनी मा के मुह मे पूरा लंड पेल देता है

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अभय बिस्तर मे हाथ रखे झुके जोर जोर से तेजी से आसा की मुह लंड पेलने लगता है आसा की हालत खराब होने लगती है आसा अभय को रोकने की कोसिस करती है लेकिन अभय जोस मे था झरने वाला था इस लिये पूरा अंदर गले तक पेलते हुवे - उफ मा आह मजा आ रहा है झरने वाला हु
अभय फिर पूरा गले तक लंड घुसा के झर जाता है फक् के साथ लंड निकाल अभय फिर बिस्तर पे लेत जाता है

आसा जल्दी से बैठ झुक खासने लगती है और गले पकरे दर्द मे - आह मर गई जान ही निकल गई थी मेरी

आसा अभय को देख - बेसरम ऐसा कोन करता है
अभय मुस्कुराते हुवे - मे आपका बेटा और करता रहुंगा
आसा अभय के ऊपर बैठ नंगी - अच्छा जी
अभय आसा को लेता के ऊपर आके - हा जी

अभय फिर आसा के ऊपर लेत जाता है दोनो मा बेटे नंगे थे
अभय - मा इस पल के लिये मे कब से इंतज़ार कर रहा था
आसा अभय के सर सेहलाते हुवे प्यार से - अब खुश है ना
अभय आसा को देख - हा

आसा बिस्तर से नीचे उतरते हुवे - सुसु आई है
अभय एकदम ने बिस्तर से नीचे आके - मुझे भी
आसा हैरान सर्म से - बेसरम
आसा अभय बाथरूम मे आते है आसा अभय को देख - चल आखे बंद कर सुसु करनी है मुझे
अभय मुस्कुराते हुवे - शायद आप भूल गई है मेने आपकी बुर देख दबा मसल चूस स्वाद लिया है अभी भी आप नंगी है देख रहा हु सब

अभय नीचे बैठ आसा की बुर देखते हुवे - उफ मा तो आप जब सुसु करने के लिये बैठती है तो ऐसा सीन बनता है उफ आपकी बुर चिपकी मस्त लग रही है करिये ना सुसु मुझे देखना है
आसा हैरान सर्म से - अच्छा अच्छा ठीक है समझ गई

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आसा फिर सर्माते सुसु करने लगती है बुर के फाके अलग होके पानी की धार निकल परती है जिस नजारे को देख अभय का लंड झटके मारने लगता है जो आसा देख सिहर सर्म से लाल हो जाती है
आसा सुसु कर लेती है तभी अभय आसा को वही लेता देता है आसा हैरान होके अभय को देख - लाला ये तुम किया कर रहे हो मुझे पिसाब के ऊपर ही लेता दिया
अभय आसा के टांगे फैला के बीच मे बैठ - मुझे भी सुसु करना है आपकी बुर पे
आसा हैरान शोक अभय को देखती रहती है

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अभय लंड पकरे एक तेज धार आसा अपनी मा की बुर के फाको के बीच छेद पे मारते हुवे सुसु करने लगता है गर्म गर्म तेज धार अपनी बुर पे फाको छेद मे लगते फिल करते ही आसा - आह कितना गर्म गर्म है उफ अच्छा लग रहा है लाला सुसु करते है नहा दे अपनी मा की बुर को अपने सुसु के पानी से उफ लाला मेरे बेटे तु कमाल का है जो करता है मुझे गंदा लगता है सुरु मे बाद मे आह इतना सुकून मजा आता है

अभय सुसु करने के बाद टांगों के बीच आसा के ऊपर लेत जाता है अपनी बुर पे बेटे का करक लंड टच फिल करके ही आसा काप् जाती है दोनो मा बेटे नंगे बाथरूम मे अपने पिसाब किये गये पानी पे लेते थे अभय आसा की आखो मे देख - डाल दु बुर मे लंड
आसा डरते हुवे - नही लाला ये मत करना प्लेस
अभय - हु दोगी ना बुर अपनी बोलो ना

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अभय ये कहते दोनो चुचे दबाने लगता है मसलने लगता है आसा दर्द मजे मे सिसकिया लेते हुवे - नही नही दुगी अपनी बुर आह
अभय चुचे जोर से दबाते हुवे निपल मसलते हुवे - नही दोगी कभी नही अपने बेटे को तरपाओगी हा बोलो मा
आसा अभय को देख दर्द मजे मे - ठीक है दुगी लेकिन जब मेरा मन करेगा उसी दिन
अभय खुश होके - सच मे मा
आसा मदहोसी मे - हा सच अब उठ पुरे बॉडी से पिसाब की मेहक आ रही है नहाना होगा

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अभय हट जाता है दोनो खरे पानी चालू करके नहाने लगते है अभय आसा को किस करते हुवे पीछे गांड पे हाथ रख सेहलानें लगता है तो वही आसा किस मे साथ देते हुवे अपने बेटे का लंड मुठी मे लेके हिलाने लगती है आसा तो पुरे मजे ले रही थी एक बार झरने से इतनी सालों की प्यास थोरि ना कम हो जायेगी

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अभय थोरा झुकता है अपनी मा के गर्दन पे किस करते हुवे बुर सेहलानें उंगली करने लगता है तो वही आसा उफ मा आह करते हुवे अपने बेटे का लंड हिलाये जा रही थी
अभय - उफ मा पानी मे भी आपकी बुर बहोत गर्म है
आसा मजे से सिसकिया लेते हुवे -उफ लाला कई दिनों की प्यारी बुर है इतनी जल्दी ठंडा नही होगी आह करते रह अच्छा लग रहा है

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अभय फिर आसा के गांड सेहलाते हुवे चुचे चुस्टे हुवे गर्दन मे किस करते लगता है तो वही आसा हर हरकत अपने बेटे के प्यार से बबली होके लंड हो हिलाये जा रही थी आसा - उफ बेटे इतना मजा आह इस तरह तेरे पापा मुझे कभी प्यार नही कर सके
अभय आसा को देख - किस गांडू का नाम ले लिया अपने
आसा हस्ते हुवे - सोर्री बाबा माफ कर दे

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आसा अभय के कंधे पे अपना दोनो हाथ रख नीचे अभय का लंड देखते हुवे अपनी गांड आगे करते टोपे पे अपनी मस्त गर्म बुर घिसने लगती है बुर लंड का मिलन होते ही आसा अभय दोनो को करेंट लगता है और दोनो साथ साथ एक दूसरे की आखो मे देख आह करते है अभय मुस्कुराते हुवे अपने लंड के टोपे अपनी मा के बुर पे घिसते हुवे - उफ जब इतना मिलन हो गया तो अंदर भी ले लो मा तरप रहा हु
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आसा भी बुर को अपने बेटे के लंड के टोपे मे घिसते हुवे अभय को देख - उफ मा लाला चिंता कियु करता है लुगी जल्दी ही

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आसा फिर नीचे बैठ बरे प्यार से अपने बेटे का लंड मुह मे लेके चूसने लगती है अभय खरा बाबला हुआ मजे से - आह मा किया बात है उफ मजा ही आ गया उफ अच्छा चूसने लगी है उफ मजा आ रहा है
आसा अभय को देख लंड चुस्टे हुवे मन मे - मजा तो मुझे बहोत आ रहा है मेरे लाल इस तरह एक औरत को प्यार करते है पता नही था बगीचे मे झरने मे बाथरूम मे उफ सब नया एहसास था मेरे लिये

5 मिनट बाद अभय आसा को गोदी मे उठा के बिस्तर पे लेता देता है अभय नसीली आखो से आसा को देखता है आसा भी नसीली आखो से अभय को देखते हुवे अपनी टांगे पूरी फैला देती है अभय भी ये देख और बाबला हो जाता है

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आसा और अभय को बाबला पागल करने के लिये लंड पकर अपनी मस्त फूली बुर के फाको के बीच घिसने लगती है आसा जोर से - आह मा कितना गर्म मोटा है उफ मेरी बुर खुशी से झूम रही है आह लाला
अभय अपनी मा को जोस मे देख अभय भी कमर हिलाते धीरे धीरे अपनी मा के बुर के फाको के बीच घिसने लगता है
अभय आसा को देख - उफ मा सेह नही आ रहा उफ देखो इतना सब करते हुवे भी अंदर मे घुसा नही सकता आह मा कितनी गर्म नर्म बुर है आपकी ये एहसास आह पागल मुझे कर देगी
आसा तेज सासे लेते लंड पकरे अपनी बुर मे घिसते हुवे - उफ लाला करते रह घिसते रह अपने मोटे गर्म लंड से अपनी मा की बुर मे मसाज करदे मेरी बुर को अपने लंड से आह कई सालों बाद मेरी बुर लंड को फिल किया है

अभय तेजी से आसा को पकर पेट के बल लेता है दोनो पैर सीधे करके अभय आसा ले दोनो मोटे जांघों मे बैठ जाता है और अपना मोटा लम्बा लंड पकर आसा अपनी मा के मस्त बरी गोरी चिकनी गांड के बीच बुर गांड की छेद पे लंड से घिसने लगता है ये हमले से आसा पूरी हिल जाती है आसा झरने ले करीब आ जाती है

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अभय लंड पकरे मजे से बुर गांड दोनो पे घिसे जा रहा था अभय के लिये ये सब सपने से कम नही था अभय - उफ मा आपकी गांड उसकी छेद भी आह बहोत मस्त है मा मजा आ रहा है

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आसा कपते हुवे - आह लाला मे मे झरने वाली हु आह मा लाला
अभय भी पिचकारी मारते हुवे - आह मा मे भी आह
दोनो मा बेटे एक साथ झर जाते है अभय कुछ देर आसा के उपर ही लेत जाता है 5 मिनट बाद

आसा खरी होती है जोरों से प्यास लगी थी लेकिन पैर लारखराने लगते है दो बार कई सालों बाद झरी थी उसी का असर था आसा फ्रिज से पानी निकाल पीती है और अभय को बोतल देती है अभय भी पिता है

आसा अभय के ऊपर ही नंगी लेत जाती है बरे बरे चुचे अभय के सीने से दब जाते है आसा अभय दोनो आखे बंद कर देते है वो हुआ जो मजा किया सब सोचने लगते है

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अभय - मा आप को मजा आया ना आप खुश है ना
आसा आखे बंद किये हुवे - एक औरत 43 की होने वाली है जिसका पति छोर चला गया तब से मे तरप रही थी जिस्म की प्यास मे लेकिन लाला तूने मुझे देखा फिल किया समझा मे तरप रही हु मुझे किसकी जरूरत है तेरे पापा सुरु मे नँगा करके मेरी चुदाई करते थे लेकिन कुछ महीने बाद सारी या नाइटी उठा के लेकिन तूने जो प्यार दिया अब तक तेरी मस्ती गंदी बाते हरकते झरने मे बगीचे मे बाथरूम मे लाला मेरे लिये सब सब तूने अब तक जो किया नया ना मे तो सोच नही सकती थी वो प्यार एहसास सुकून तूने मुझे दिया है

आसा आखे खोल अभय को देख प्यार से देख इमोसनल होके - लाला मुझे कुछ बताना है मुझे

अभय आखे खोल आसा को देख - यही ना आप भी मुझसे बहोत प्यार करती है एक औरत मर्द वाला
आसा हैरान होके - तुझे तुझे कैसे पता
अभय - आप भूल रही है मेरा दिमाग सब देख समझ लेता है मा सुरु मे जब मे आपको किस करता आपकी बॉडी को प्यार करता तब मुझे एक दीवार फिल होता था आप के ना का सुरु मे ना ही होता था लेकिन जब मे आया फिल किया वो दीवार नही है और आपके ना मे ना नही हा थी तभी मे समझ गया आप भी मुझसे बहोत प्यार करती है लेकिन एक बात नही समझ आ रही जब प्यार करती थी पहले से हि तो मुझे इतना कियु तरपाया और खुद को रोके रखा

आसा मुस्कुराते हुवे - अच्छा जिस दिन बोल देती मे तुमसे प्यार करती हु तो तुम उसी दिन मुझे चोद देते मे देखना चाहती थी मुझे पाने के लिये तुम किया किया करते हो और मेने देख रहा ये तेरा धीरे धीरे वाला प्यार जिस तरह तुम धीरे धीरे मेरे हर अंग के साथ खेलते प्यार करते आगे बढ़ रहे थे ना वो सब मुझे बहोत अच्छा लग रहा था इस लिये

अभय - अच्छा ये बात है, तभी अभय डरते हुवे -मा कही आपको मेरे
आसा जोर से अभय के कान पकर मरोड़ के - हा नालायक मुझे सब पता है तेरे पास पास जो लरकी औरत है सब की लेली मेरी प्यारी मासूम बेटी अपनी गुरिया की सिल तोर औरत बना दिया दूसरी शादी भी कर ली वो भी मेरे उमर की औरत से

अभय की फट जाती है और दर्द मे डर से - मा मा वो पता नही कैसे होता चला गया माफ करदे ना अपने लाला को प्लेस

आसा कान छोर - हु माफ करदु सोचने दे

आसा बिस्तर पे टांगे फैला के अभय को प्यारी नसीली नजरो से देख - माफी चाहिये तो आज पूरी रात अपनी मा को जम ले चोद इतना चोद की कई सालों की प्यास बुझ जाये लाला तेरी मा बहोत तरपी है आज अब इतने आगे बढ़ सब कर लिया दोनो ले दिल मे प्यार है तो फिर रुलना कियु

अभय हैरान होता है फिर खुश भी

अभय आसा को देख - नही मा
आसा पूरी हैरान शोक मे अभय को देख - नही मतलब
अभय आसा के मांग मे सिंदूर देख - आपके मांग मे सिंदूर मंगलसूत्र है मे वो नही कर सकता है

आसा अभय की बात समझ खरी होती है और बाथरूम जाके मांग धोके आती है अभय के सामने गले से मंगलसूत्र निकाल देती है
और अभय को देख - अब खुश मेरे लाल

अभय - नही मे रुको

अभय अपने पॉकेट से एक खूबसूरत मंगलसूत्र सिंदूर निकलता है जिसे देख आसा हैरान होती है अभय आसा को देख -एहसास था आप जल्दी ही मेरे प्यार को स्विकार कर लेगी इस लिये मे रेडी था मा आप रेडी है बोलिये किया आप अपने बेटे की बीवी और अपने बेटे के नाम के गले मे मंगलसूत्र मांग मे सिंदूर लगाने के भरने के लिये

आसा अभय के पास आके खरी इमोसनाल प्यार से देख - हा लाला मेरे बेटे मे रेडी हु

अभय भी बिना देरी किये गले मे मंगलसूत्र मांग मे सिंदूर भर देता है किया ही सीन था मा बेटे पुरे नंगे होके एक और नये रिश्ते बना चुके थे

आसा एक बीवी होने ले नाते अभय का पैर छूके आशीर्वाद लेती है अभय आसा के आसु साफ करते हुवे - ये पहली बार था मुझे नये रिश्ते मे अपनी मा का प्यार नही खोना है

आसा प्यार से अभय को देख - चिंता मत कर मे भी नही चाहती मे तुझे मा बीवी दोनो का प्यार बराबर दुगी
अभय - अच्छा जी मेरी प्यारी आसा
पहली बार अभय मे अपनी मा को नाम से बुलाया था ये सुन आसा को अलग ही एहसास होता है
अभय - मा मा कहने मे मुझे जयदा खुशी होती है वैसे बीवी मा दोनो के मजे लूंगा
आसा सर्म से - बेसरम अजीब है ना नंगे है शादी भी कर ली हमने
अभय आसा को प्यार से देख - तो सुहागरात मानते है

आसा बिस्तर पे जाके लेत जाती है टांगे फैला के और पुरे जोस मदहोसी मे अभय को देख अपनी बुर के फाके फैला के - लाला सब कर ही लिया है अब सीधा डाल है अपनी मा की बुर मे अपना मोटा लम्बा लंड कई साल से तेरी मा की बुर तरप रही है

अभय पुरे जोस मे बेड मे जाके आसा की टांगों के बीच बैठ लंड पकर आसा को देख - मे भी मा तरप रहा था अपना लंड आपकी बुर के गेहराइ मे डालने के लिये मुझे भी अब रहा नही जाता दर्द होगा आपकी बुर कसी हुई है
आसा अभय को मदहोसी मे देख - दर्द मे सेह लुगी पूरी रात मेरे बेटे तुझे अपनी मा को चोदना है उस बुर को उस छेद मे लंड डालके जिससे तु निकला है
अभय लंड पकरे जोस मे - ठीक है मा रेडी हो जाइये अपने बेटे का मोटा लम्बा लंड लेने के लिये

आज के लिये इतना ही कैसा रहा आज का update 🙏🙏🙏
Gazab bhai mazza agya
 

kumark83

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Par Abhay ne ek bar vijay ko bola tha Arohi,Amar aur Tinu per najar rakhne ke liye uska kya hua abhi tak koi jikra nahi kia gaya hai.Agla update me is bat ka ulekh jaroor kare.
 

Napster

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chapter 110

रात सब अपने कमरे मे थे जगे थे बाते चल रही थी अभय अपनी मा मासी के बीच मस्त दोनों की गर्मी खुशबु से पागल हो रहा था

अभय - मासी चिपक के सोइये ना
सुसमा अभय से चिपक के - अब सही है
अभय - हु अब मा आप भी
आसा मुस्कुराते हुवे अभय से चिपक जाती है
अभय आसा के आगे के हर अंग पूरी बॉडी सीने पे दबे चूचे बुर की गर्मी फिल कर रहा था तो वही पीछे पीठ पे अपनी मासी के दबे चूचे बॉडी की गर्मी

अभय मुस्कुराते हुवे - क्या मस्त किस्मत है दो खूबसूरत हॉट औरत मुझसे चिपक के लेती है उफ अच्छा लग रहा है

सुसमा आसा को देख - सुना तेरा लाला बिगर गया है छोटी
आसा मुस्कुराते हुवे - क्या करू दीदी बिगर तो गया है
अभय धीरे से आसा के चूचे दबाते हुवे - मासी दीदी की शादी होने के बाद हमारे घर आना होगा
अभय के चूचे दबाने से आसा होठ दबाते हुवे मन मे - आह लाला ये क्या कर रहा है दीदी भी साथ मे है उफ
अभय मन मे अपनी मा के चूचे दबाते हुवे - आह मा के चूचे तो हाथ मे भी पुरे नही आते उफ
सुसमा - हा चलुंगी ना कियु नही चलुंगी
अभय एक हाथ पीछे ले जाके सुसमा के बुर पे रख मसलने लगता हो सुसमा हैरान होठ दबाते मन मे - उफ अभय बेटा मत कर आह

अभय बाते करते अपनी मा मासी के मजे लेता है फिर सब सो जाते है
1 घंटे बाद

अभय मासी के नाइटी उतार लेता है सुसमा भी जाग जाती है अपनी तांगे फैला देती है अभय लंड निकाल बुर मे घुसा के चुदाई करने लगता है सुसमा के ऊपर लेता धीरे धीरे

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अभय चुदाई करते हुवे धीरे से - मासी आप सच मे बहोत खूबसूरत है आपकी बॉडी उफ आपके चूचे गर्म बुर बरी गांड मासी मुझे आपकी गांड मारना है देगी ना हा
सुसमा शोक डरते हुवे धीरे से - आह अभय बेटा लेकिन गांड मे दर्द होगा बहोत उफ
अभय मासी के चूचे दबाते हुवे धीरे से - मजा भी आयेगा हु
सुसमा धीरे से दर्द मे सिसकिया लेते - आह ठीक है अभय बेटा
22 मिनट बाद सुसमा सो जाती है

अभय लेता छत को देखते हुवे आगे जो होने करने वाला था उसके बरे मे सोचने प्लान दबाने लगता है 20 मिनट बाद

अभय सुसमा को देखता है जो मस्त नींद ले रही थी तो अभय अपनी मा से चिपक जाता है और एक हाथ नाइटी के अंदर ले जाके एक चूचे पकर निपल मसलने लगता है आसा की नींद खुल जाती है अभय आसा के ऊपर आके पुरा लेत जाता है

आसा अभय को बाहों मे पकर धीरे से - लाला बोला था ना मत कर दीदी है कियु नही समझता
अभय धीरे से - मा मेने जो कहा था मुह मे लेगी बोलिये ना
आसा हैरान शोक धीरे से - पागल हा गया है क्या मा हु तेरी और कोई लंड मुह मे लेता है क्या
अभय आसा के ऊपर से साइड पे लेत दूसरी तरफ मुह करके लेत जाता है आसा हैरान होती है फिर अपना सर पकर लेती है

आसा अभय से चिपक एक तांगे अभय के ऊपर रख धीरे से - नाराज मत हो लाला तु समझ ना मा बेटे मे ये नही होता
अभय - हमारे बीच अभी जो भी हुआ क्या वो सब मा बेटे के बीच होता है
अभय की बात सुन आसा सन्त हो जाती है
आसा बहोत सोचने के बाद धीरे से - ठीक है मुह मे लुंगी लेकिन मेरी कुछ सर्त है
अभय आसा की तरफ फेस करके खुश होके - बोलिये किया सर्त है
आसा - कल तेरी बुआ बाकी कई मेहमान आयेगे तो घर मेहमान लोगो से भरा होगा
अभय - हा तो
आसा - तो जब हम घर जायेंगे तब थोरा सर्म से, जो तूने कहा करुगि यहा नही मंजूर है
अभय जल्दी से आसा को बाहों मे कसते हुवे - मा मंजूर है मे जनता था मेरी मा मुझे निरास नही करेगी
आसा अभय को सीने से लगा के - कियुंकी तु मेरी जान है मेरा सहारा
अभय - मा अभी हिला दो ना अपने नर्म हाथो से नींद अच्छी आयेगी
आसा मुस्कुराते हुवे - बेसरम कही का

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आसा अभय के लंड पैंट से निकाल हाथो पे पकर हिलाते हुवे - पानी नही निकालुगी समझ गया बिस्तर कपड़े गंदे हो जायेंगे
अभय आसा के चूचे दबाते हुवे - आह ठीक है मा करती रहिये
आसा - उफ बेटा निपल मसल मत आह मुझे कुछ होने लगता है
अभय मुस्कुराते हुवे - बुर गीली होने लगती है किया
आसा जोर से अभय का लंड दबाते हुवे - हा होने लगती है
अभय दर्द मे - उफ मा धीरे आह हिलाती रहो अच्छा लग रहा है
7 मिनट बाद

अभय आसा दोनों एक दूसरे की बाहों मे सो जाते है

अब हम पीछे अदिति अभय के बीच किया हुआ जानेंगे

तो अभय के कहने पे अदिति रेडी थी जल्दी से सब करना था

अभय अदिति को बिस्तर पे लेता के पैंट खोलते हुवे - गुरिया जीन्स पहन रखी हो अभी भी हा
अदिति सर्म से - वो भाई सोने से पहले नाइट कपड़े पहनती हु
अदिति सर्म से तेज सासे लेते हुवे अभय को देख मन मे - बहोत सर्म आ रही है मेरे भइया मेरे चूचे उफ सर्म से मर ना जाऊ

अभय जीन्स के बटन खोल लेता है फिर अदिति के सूट उपर कर लेता है वाइट बिकनी मे अदिति के बरे खरे गोरे चूचे अभय के सामने आ जाते है अभय का लंड खरा हो जाता है अभय पीछे दरवाजे की तरफ देख मन मे - कोई आना मत उफ मेरी गुरिया को आज अच्छे से देखना है जी भर के
तो वही अदिति बिस्तर पे लेती सब देख सर्म से पानी पानी हुवे जा रही थी

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अभय अपनी छोटी बहन के बिकनी मे कैद चूचे को अच्छे से देखते हुवे अदिति को देख - गुरिया बहोत बरे है दबाती तो नही ना
अदिति बिस्तर जोर से पकर तेज सासे लेते सर्म से अभय को देख - वो नहाते टाइम या रात को कभी कभी दबाती हु भइया
अपनी प्यारी गुरिया की बात सुन अभय का लंड और टाइट हा जाता है
अभय मुस्कुराते हुवे - मेरे होते हुवे तुम कियु कर रही थी
अदिति दूसरी तरफ फेस करके - बेसरम है आप बहोत जयदा
अभय मुस्कुराते हुवे - वो तो मे हु

अभय आगे बढ़ के कपते हाथो से अदिति को थोरा उठा के हूक खोल बिकनी निकाल देता है है फिर नीचे आके जिस्म थोरा नीचे कर देता है
अदिति सर्म से अपने चूचे हाथो से छुपा लेती है
अभय अदिति को देख - guri ऐसा मत कर ना प्लेस टाइम भी नही है कोई भी आ सकता है प्लेस
अपने भाई की तरप् देख अदिति आखे बंद करके हाथ हटा देती है नंगे चूचे कमर नंगी पैंट नीचे पैंटी मे छुपी बुर एक ऐसा सीन अभय के सामने था जिसे देख अभय का लंड उसकी नशे इतनी टाइट हो जाती है की अभय को दर्द होने लगता है अभय के मुह से निकलता है कयामत कयामत सीन था भी बहोत गजब था

अभय अदिति के ऊपर आके अच्छे से अभय अपनी प्यारी छोटी बहन के नंगे गोरे चूचे बॉडी देख रहा था कयामत हा अदिति कयामत लग रही थी पूरी बॉडी दूध जैसी गोरी थी चूचे बरे बरे थे निपल थोरे काले थे कमर पतली चिकनी थी और ब्राउन पैंटी मे छुपी थी सिल पैक बुर नजारा ऐसा था की अभय के होस उर गये थे अदिति तो सर्म से आखे बंद किये हुवे लेती थी

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अभय उपर से नीचे फिर जी भर के देखते हुवे मन मे - ना अब तो कोई ताकत मेरी गुरिया को मुझसे छीन नही सकता मेरी गुरिया मेरी बीवी बनेगी हा मेरी रानी बनेगी मे कैसे इस हुस्न की मालिक मेरी गुरिया को किसी और कमीने को दे सकता हु नही गुरिया मेरी है रहेगी
अभय ने तय कर लिया था अदिति बनेगी अभय की रानी

13 (1)
अभय आराम से बैठ एक हाथ अदिति के पेट पे एक हाथ अदिति के पैंटी के पास रख फिल करने लगता है जिसे ही अभय का हाथ अदिति पेट अपनी बुर के पास फिल करती है अदिति की मुठी और कस जाती है अदिति जोर से सासे लेते आखे खोल अभय को देख मन मे - भैया कैसे मेरे नंगे बॉडी को देख रहे है मुझे बहोत सर्म आ रही है लेकिन मुझे खुशी भी बहोत हो रही है
अभय तो खोया था अपनी गुरिया के मस्त पर्फेट बॉडी को देख
अभय मन मे - बिल्कुल मा पे गई है मेरी गुरिया

1080
अभय अदिति के पैर के पास बैठ अदिति के पैंटी के पास हाथ रख सेहलाने लगता है अदिति काप् सिहर जाती हो मचल के जोर से सिसकिया लेने लगती है अदिति अभय को देख - आह भैया
अभय पैंटी के पास कमर के ऊपर नीचे मसाज जैसा सेहलाते हुवे - बुर की गर्मी मुझे यहा तक फिल हो रही है गुरिया तेरी गोरी चिकनी उफ बॉडी मस्त है

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अभय फिर जल्दी से लंड बाहर निकाल हिलाते हुवे अदिति के चूचे के पास बैठ अदिति के निपल मसलते हुवे लंड जोर जोर से हिलाने लगता है ये देख अदिति जोर सर्म से पानी पानी होने लगती है अदिति की बुर गीली हो के पानी निकालने लगती है
अभय निपल मसलते लंड हिलाते हुवे - आह मेरी गुरिया मेरा लंड फट जायेगा आह कुछ कर गुरिया

1080 (2)
अपने भाई की बात सुन अदिति जल्दी से अभय का लंड पकर जोर से हिलाने लगती है और अभय पेट सेहलाते हुवे पैंटी के ऊपर से ही अपनी बहन का बुर सेहलानें बुर की गर्मी फिल करने लगता है अदिति फिर सिहर काप् जाती अदिति जोर से सासे लेते लंड हिलातेहुवे - आह भैया उफ भाई मत करिये आह मा
अभय अदिति को देख - आह बहोत गर्म है तेरी बुर गुरिया आग लगी है तेरी बुर मे उफ और जोर से हिला आह आने वाला है

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अदिति जोर जोर दे तेजी से लंड हिलाते हुवे मन मे - उफ बहोत सर्म आ रही है मुझे भाई मेरी बुर को टच कर रहे है उफ मुझे मुझे कुछ होने लगा है मेरी बुर गीली हो गई है
अभय अदिति के बुर की गर्मी लेते हुवे - आह गुरिया मेरी गुरिया करते पिचकारी मारते अदिति के ऊपर ही झर जाता है अभय का गाढ़ा उजला माल अदिति के पेट चूचे पे जाके गिरता है अभय अदिति के बुर को एक बार अच्छे से दबा के हाथ हटा लेता है

अदिति जल्दी से कपड़े लेके सर्माते हुवे पेट चूचे पे गिरे अपने भाई का गर्म माल साफ करके बिकनी पैट पहन लेती है

अभय अदिति को देख - गुरिया लंड साफ करदे
अदिति सर्माते हुवे लंड मुह मे लेके अच्छे से चूस के साफ कर देती है

अभय अदिति को गले लगा के - गुरिया मे जो करता हु उसकी वजह से तुम नाराज तो नही हो ना देखो अगर तुम्हे
अदिति बीच मे अभय को कस के पकर - भाई नाराज मे कियु रहूगी बल्कि मुझे बहोत जयदा खुशी मिलती है
अदिति अभय को देख सर्म से - मे जाती हु
अदिति भाग जाती है अभय मुस्कुराते हुवे - पगली बहोत प्यारी है होगी कियु नही मेरी गुरिया जो है

हा तो ये सब हुआ था अब आते है अभी के समय पे

सुबह होती है नहाना धोना सुरु होता है परसो शादी थी आज से कई मेहमान आने वाले था आज से शादी के दिन तक घर पुरा भरने वाला था

सुबह के 11 बजे इन्टरी होती है अभय की बुआ पुष्पा की जो अपने पति बेटे के साथ आई हुई थी

पुष्पा जब अंदर जाती है तो अभय सब कोई आगन् मे ही थे अभय की नजर जैसे ही जाती है अभय देखता ही रहता है अभय को पता था ये उसकी बुआ है कियुंकी सुसमा ने फोटो दिखा दिया था

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अभय आदत से मजबूर अपनी बुआ को उपर से नीचे तक देखने लगता है दिशा कोमल अदिति मधु सब अभय कोई देख अपना सर पकर मन मे - ये नही सुधरेगे

अभय पुष्पा के बगल मे एक लरके और एक अंकल को देख मन मे - ये लरका बुआ का बेटा और ये मेरे फूफा जी है हु

पुष्पा के पति का नाम है - कैलाश
पुष्पा के बेटे का नाम है - बिकास
पुष्पा की एक बेटी है लेकिन वो बिदेश मे अपने पति के साथ रहती है
पुष्पा की बेटी का नाम है - प्रियंका एक बेटा है 2 साल का

तभी सुसमा आते हुवे पुष्पा को देख गले लग - आ गई आप
पुष्पा - जी भाभी आ गई
सुसमा कैलाश को देख - आप कैसे है नंदोई जी
कैलाश - जी मे अच्छा हु
बिकास सुसमा के पैर छूके - बुआ
सुसमा बिकास को गले लगा के - बहोत बरा हो गया है शादी कब करेगा हु
बिकास सर्म से - बुआ आप भी ना
पुष्पा हस्ते हुवे - अलगे साल इसकी भी शादी कर डुगी
अशोक राहुल भी आते है सब से मिलते है अभय आसा सब खरे देख रहे थे जब मिलन हो जाता है तब सुसमा

सुसमा पुष्पा को देख - कोई और भी आया है यहा
पुष्पा हैरान होके - कोन आया है
सुसमा आसा को देख - छोटी यहा आओ
आसा सब के सामने खरी हो जाती है जिसे देख कैलाश पुष्पा पुरे शोक हो जाते है
पुष्पा कपते हुवे आसा को देख - भाभी
सुसमा बिना देरी किये सारी कहानी बता देती है जिसे सुन पुष्पा कैलाश बिकास पुरे शोक मे चले जाते है

पुष्पा एकदम से आसा के गले लग जोर जोर से रोने लगती है आसा भी पुष्पा को गले लगा के इमोसनल हो जाती है अभय सब भी ये सीन देख इमोसनल हो जाते है

पुष्पा रोते हुवे - भाभी माफ कर दीजिये मुझे आप ने इतना सब झेला और हम अपने गरूर मे एक बार भी आपसे मिलने नही आये हमने सोचा आप खुदगर्ज़ हो गई है लेकिन आप कितना सब सेह नही थी
आसा इमोसनल होके पुष्पा के सर सेहलाते हुवे - सन्त हो जाइये किस्मत मे लिखा था जो मुझे सेहना झेलना था

आसा पुष्पा के आसु साफ करके - मे अकेले नही आई हु अभय अदिति मेरी बहु भी आई है

अभय दिशा अदिति पुष्पा के पास आते है पुष्पा अभय दिशा अदिति को देखती है
पुष्पा अभय के पास जाके प्यार से गाल सेहलाते हुवे - कितना बरा हैंडसम हो गया है तू अपनी बुआ से नाराज तो नही है ना अगर है भी तो
अभय एकदम से पुष्पा के गले लग इमोसनल होके - नही बुआ मे आपसे नाराज नही हु
पुष्पा भी अभय को कस के गले लगा के रोते हुवे - माफ कर दे बेटा अपनी बुआ को माफ करदे
अभय - मत रो बुआ जो होना था हो गया
अदिति - बुआ
पुष्पा अदिति को देख -मेरी प्यारी बच्ची
अदिति पुष्पा के गले लग जाती है पुष्पा अदिति को कस के गले लगा के - मेरी बच्ची माफ कर देना अपनी बुआ को
अदिति इमोसनल होके - कोई बात नही बुआ अब हम साथ रहेगी
पुष्पा रोते हुवे - मा मेरी बच्ची
कैलाश आसा के पास जाके - मुझे भी माफ कर देना आपने इतना सब सहा और हम समझ रहे थे
आसा - कोई बात नही नंदोई जी सायद किस्मत मे वही होना था
पुष्पा दिशा के पास जाके अच्छे से देख - बहु तो बहोत खूबसूरत है
दिशा पैर छूके - बुआ
पुष्पा दिशा को गले लगा के -तुम भी नाराज हो ना
दिशा इमोसनल होके - नही बुआ आपसे कोई नाराज नही
आसा - ननद जी बहु 4 महीने की पग्नेंट है
पुष्पा हैरान खुशी से दिशा को देख - सच्ची
दिशा सर्म से - जी
पुष्पा अभय को देख मुस्कुराते हुवे -वाह बेटा बहोत तेज निकला
अभय सर्म से - आप भी ना बुआ
सब हसने लगते है
बिकास आसा के पैर छूके - बुआ
आसा बिकास के गले लगा के - बहोत बरा हो गया है छोटा था तब देखा था
बिकास - जी
बिकास दिशा के पैर छूके - भाभी
दिशा गले लगा के - कैसे है आप देवर जी
बिकास थोरा सर्म से - अच्छा हु
अभय - मेरे पैर कोन छुवेगा
बिकास जल्दी से अभय के पैर छूके - भैया
अभय गले लगा के - अब सही है
फिर सब हसने लगते है
आसा पुष्पा को देख - और भी लोग है जिससे मिलवा देती हु

अभय तारा के पास आके - ये है सम्धन जी
आसा सिला मिनिता कोमल पूजा मधु विजय रीमा सब से मिलावटी है और कैसे रिश्ते बने वो भी
पुष्पा सिला को देख सब से मिलती है फिर सभी के बीच बातो का सिलसिला सुरु जो जाता है

अभय बाहर आके शोभा को फोन करके - जान रेडी रहना आज लेने आऊगा
शोभा खुश होके - जी समझ गई
दिशा अभय के पास आके - मम्मी जी बहोत खुश है सब एक साथ है
अभय दिशा को बाहों मे लेके - हा मे भी बहोत खुश हु
दिशा - कोई देख लेगा दूर हटो
अभय हस्ते हुवे - समझ गया
दिशा - तो शोभा बाकी सब को लाने वाले है
अभय - हु और छोटी मा साथ देगी
दिशा मुस्कुराते हुवे - समझ गई

मेहमान आते रहते है गाव के लोग का भी आना जाना होने लगता है

साम तीन बजे

अभय सिला बाहर अकेले मे

सिला - समझ गई जाके लेके आ छोटी बहु को मे संभाल लुगी
अभय गाल पे किस करके - सुक्रिया मा
सिला धीरे से कान मे - सुक्रिया मत है बस कैसे भी मोक्का देख मेरी अपनी मा की बुर की आग बुझा देना बहोत मन है
अभय मुस्कुराते हुवे - देखता हु मोक्का मिला तो गर्मी निकाल दूंगा
सिला शर्म से - हु अब जा

अभय गारी लेके शोभा के पास आता है सोभा रेडी हो रही थी अभय - कब फोन किया था अभी भी रेडी होने मे लगी हो हद है

शोभा अभय को देख - चुप रहिये पहली बार मम्मी जी मासी बुआ सब से मिलने वाली हु तो ऐसे ही उनके सामने जाऊ हा
अभय - हा हा समझ गया बाबा सुनो ना एक बार करते है ना फिर मोक्का नही मिलेगा
शोभा अभय को देख सर्म से - आपकी बात तो सही है जी

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बस फिर किया था अभय शोभा की सारी उपर करके चुदाई करने लगता है शोभा दर्द मजे मे - उफ मा पति जी आपकी आदत बहोत बुरी है एक बार मे ही अंदर डाल देते है बहोत दर्द होता है
अभय चुदाई करते हुवे - उफ जान किया करू रुक नही पाता
23 मिनट बाद

शोभा फिर रेडी होती है रीना रेखा राज भी रेडी थे अभय भी सब को लेके आता है

सिला शोभा रीना रेखा राज को अपने रिस्तेदार परोसी केह के मिलवाती है शोभा पहली बार आसा अपनी सास को देखती है

शोभा मन मे आसा को देख - कितनी खूबसूरत है मेरी मम्मी जी माफ करना मम्मी जी आपका आशीर्वाद अभी नही ले सकती लेकिन जब समय आयेगा जरूरी लुगी
विजय धीरे से शोभा की पास आके - भाभी
शोभा विजय को देख मुस्कुराते हुवे - कैसे है आप देवर जी
विजय -मस्त आप बहोत खूबसूरत लग रही है
शोभा सर्म से - सुक्रिया
रीना रेखा आसा को देख मन मे - पापा की मा हमारी दादी तो बहोत खूबसूरत है

आसा शोभा रेखा रीना राज से मिलती है लेकिन आसा जानती नही थी शोभा उसकी दूसरी बहु है

शादी की तैयारी जोरों सोरों से सुरु हो जाती है लोगो से घर बाहर जगह भरी परी थी

रात 10 बजे

आगन् मे ही बिस्तर लगा था कियुंकी अशोक के रिस्तेदार और भी आये थे जगह भरी हुई थी सभी बैठ बाते कर रहे थे

अभय पुष्पा के गोद मे बैठ जाता है पुष्पा भी अभय को बाहों मे कस लेती है सुसमा हस्ते हुवे - अब आपकी गोदी मे बैठा है नही तो मेरी गोदी मे या अपने मा की
पुष्पा अभय को देख - मेरा भतीजा जो है
अभय - और आप मेरी प्यारी बुआ
पुष्पा इमोसनल होके - विनय होता तो
विनय की बात आते ही सब इमोसनल हो जाते है
पुष्पा इमोसनल होके आसा को देख - हम तो अंदाज़ा भी नही लगा सकते भाभी आपने क्या कुछ नही सहा
आसा के आखो मे आसु आ जाते है विनय को याद करके - बहोत मिस करती हु अपने विनय बेटे को
अभय - मा हम भी बहोत मिस करते है भैया को
अदिति इमोसनल होके - मे भी बहोत मिस करती हु जब भी उनकी याद आती है

अभय - अच्छे खुशी माहौल को इमोसनल मत करो आप दीदी कहा है
सुसमा कमरे मे होगी
अभय खरा होके - आता हु

अभय कमरे में आता है फोन पे थी अभय को देख फोन रख देती है अभय मुस्कुराते हुआ मिटल के पास बैठ - जीजा जी थे
मितल मुस्कुराते हुवे - और कोन होगा
अभय - मुझे लगा कोई और
मितल अभय के कान पकर - तेरी जैसी नही हु अच्छा हा अब बता वो कोन है
अभय दर्द मे - बताता हु कान छोरो
मितल कान छोर - बता अब
अभय - कैद से आने के बाद मे अपने दोस्त के घर सुबह 10 बजे गया तो आगन् मे मेरी दोस्त की बहन नंगी नहा के बाल साफ कर रही थी मेने देख लिया
मितल पूरी शोक सर्म से - किया फिर क्या हुआ
अभय मितल को देख - दीदी जवान था जवानी के कुछ साल कैद मे चले गए बाहर आया तो नंगी दोस्त की बहन को देखा तो आप समझ जाइये दिशा उस समय मेरी भाभी थी लेकिन जब भाभी को उनके मायके लेके गया तो रात हम अकेले थे और सब हो गया

मितल मुह मे हाथ रखे अभय को देखती रहती है
अभय फिर दोस्त की बहन जो शादी सुधा है जब भी जाता तो मुझे अजीब नजर से देखती मुझसे बाते करती मे समझ गया और दिशा को बताया तो दिशा मे कहा खुद चाहती हो तो कर लू मेने भी कर लिया

मितल और शोक होके अभय की बात सुन देखने लगती है

अभय - जब लेने उससे पूछा उसने कियु सब क्या तो उसने बताया उसके पति उसको खुश नही कर पाते है

अभय मितल को देख - तब से जब कभी वो आती है कर लेते है
मितल हैरान शोक सर्म से - अच्छा लेकिन भैया ये तो कोई बात नही हुई पति खुश नही कर पाता तो
अभय - जानता हु लेकिन दीदी खाना जिस्म की जरूरत पूरी ना हो तो जिस्म दिल दिमाग सन्त नही रहता

मितल नजरे नीचे किये सर्म से - पता नही खर जाने दी ये बाते और भी कोई है
अभय - नही
अभय मन मे - बहोत है लेकिन अभी नही बताऊंगा
अभय - दीदी वो मे
मितल अभय को देख - सोचना भी मत
अभय हैरान होके - दीदी
मितल - पढ़ी लिखी हु भाई कॉलेज मे कई लरके मेरे पीछे थे उनकी आखो मे देख उनकी बातो से मुझे पता लग जाता था उसके अंदर किया चल रहा है
अभय हैरान शोक होता है फिर नजरे नीचे कर - माफ करदो
मितल अभय के कंधे पे सर रख - लेकिन तेरी आखो मे मेरे लिये हवस नही प्यार है पर अभय हम रिश्ते मे भाई बहन है मेरी शादी भी हो रही है
अभय - जी समझ गया दीदी भाई बहन हुवे तो क्या हुआ लेकिन आप नही चाहती वो बात अलग है
मितल - हा कियुंकी ये गलत है
अभय - एक किस कर सकता हु दीदी बस एक किस
मितल अभय को देख - ठीक है एक किस बस
अभय मितल को बिस्तर पे लेता के ऊपर आके - सुक्रिया दी

अभय बिना देरी किये मितल के नर्म होठ को चूसने लगता है मितल को तो शोक लगता है ये एहसास अभय के किस करने का अभय के नीचे लेते अपने रस पिलाने का अलग एहसास था जो मितल फिल करके मदहोस् होने लगती है

kiss make out
मितल मन मे हेरानी से - ऐसा कैसे हो सकता है अरुण जी ने जब मुझे किस किया तब मुझे इतना मजा जोस इकसैटमेंट फिल नही हुआ लेकिन अभय के किस करने से मुझे इतना अच्छा मजा कियु आ रहा है अभय मेरे होठ जीब को बरे ही प्यार से चूस रहा है मुझे कुछ होने लगा है ये फीलिंग ये एहसास अलग है

अभय किस करके मितल को देख - दीदी सच कहुंगा आपके होठो का रस बहोत मिठा है थैंक्स दीदी सच ये है आप सही है मे बहोत कुछ करना चाहता था आपके साथ लेकिन जितना मिला उसमे भी खुश हु

अभय फिर चला जाता है लेकिन मितल अपने होठो पे उंगली रख जो हुआ अभय की बाते सोचने लगती है

अभय फिर आगन् मे ही मा मासी बाकी सब के सो जाता है


हल्दी बाकी रस्मे फिर शादी के रात मितल अरुण की शादी हो जाती है सुबह का समय बिदाई का समय

लोगो की भीर शादी के माहौल काम मे बिजी होने के कारण अभय किसी ले साथ कुछ कर नही पाया

लोगो की भीर थी गाव की औरते लरकिया लरके सब बिदाई देखने के लिये आये थे सारी लगी थी मितल अपनी मा सुसमा के गले लगे रो रही थी
सुसमा इमोसनल होके - मत रो बेटी को एक दिन जाना ही होता है
आसा मितल के सर पे हाथ रख - हा बेटा रो मत
मितल आसा के गले लग रोते हुवे - बुआ
आसा - मेरी प्यारी बच्ची
मितल अशोक दिशा बाकी सब से गले लगती है
अभय मितल के पास आके - मेकप् खराब हो जायेगा इतना भी क्या रोना जैसे फिर कभी आउंगी हि नही
अभय की बात सुन सब हसने लगते है मितल की भी हसी निकल जाती है
मितल अभय के गले लग - तु आयेगा ना मेरे ससुराल
अभय मितल को गले लगा के - ये भी कहने की बात है जरूर आऊगा वादा लेकिन आपको मेरे घर भी आना होगा
मितल मुस्कुराते हुवे - ठीक है वादा

मितल फिर गारी मे बैठ जाती है अरुण भी
अभय अरुण को देख - जीजा जी दीदी को प्यार से रखना नही तो मे जो दिखता हु वो मे हु नही समझ गये आप
अरुण डरते हुवे अभय का देख - जी जी साले साहब प्यार से राखुंगा आपकी दीदी को
मितल अभय को देख - कितना प्यार करता h मुझे मेरा भाई लेकिन कस पहले आता तो और समय साथ बिता पाते

सुसमा आसा अशोक सब इमोसनल होके मितल को विदा करते है मितल भी सब को देख इमोसनल होके बाय करती है

मितल चली जाती है अपनी नई लाइफ अपने पति के साथ नये घर मे सुरु करने के लिये

सुसमा आसु लिये - चली गई मेरी प्यार बच्ची
आसा सुसमा के गले लग - दीदी रो मत बेटी को जाना ही होता है
मीनाक्षी इमोसनल होके - उनके बिना अब मेरा दिल कैसे लगेगा मेरी प्यारी ननद चली गई
सब इमोसनल थे अदिति ये सब देख रही थी अच्छे से

अदिति ये सब अच्छे से देख रही थी

मितल चली गई थी शादी की थाकान् नींद की वजह से सब जी भर के नींद लेते है

शाम 7 बजे

अभय मिनिता रुमा ममता को बाहर छोरने आता है

अभय - आप सब जाओ मे कुछ दिन काम से जाने वाला हु लेकिन आते समय मिल के जाउंगा रह के भी
मिनिता रुमा ममता अभय के गले लग - ठीक है

तीनों चले जाते है अभय फिर सिर्यस् हो जाता है

सारे मेहान् चले गये थे पुष्पा भी कियुंकी खेत गाय घर छोर आये थे तो जाना तो पड़ेगा ही

शोभा रेखा रीना राज वही उसी घर मे चले जाते है

अभय खरा रहता है मुठी कस्ता है फिर अंदर आता है सब आगन् मे बैठे थे मीनाक्षी खाना बना रही थी

अभय आसा के पास बैठ - मा आप रुकेगी
आसा अभय को देख - कियु
अभय - मुझे एक दोस्त के याहा जाना परेगा उसकी मा की तबियत बहोत खराब है पिता नही है गरीब है लेकिन दूर रहता है कुछ दिन लग जायेंगे फिर जीत जीतू के यहा भी जाना है

सुसमा - तु जा दोस्त की मदद कर छोटी यही रुकेगी
आसा - नही दीदी जाना होगा मे अकेले नही हु मिनिता सिला सब भी है
अभय - मासी मा सही केह रही है एक काम करे मा को जाने दो कुछ दिन बाद आप चली जाना मिलने
अशोक सुसमा से - अभय बेटा सही केह रहा है जाने दो साली जी को
बाकी सब भी है समझो
सुसमा - ठीक है छोटी तुम सब जा सकती हो मे जल्दी ही आउंगी
आसा - हा दीदी ए सही रहेगा

अभय विजय को देख - कल सब को सुबह लेके चले जाना
विजय - जी भाई

कमरे मे खाना खाने के बाद दिशा अभय

दिशा - कुछ होने वाला है ना
अभय हैरान - नही तो
दिशा अभय का हाथ पेट पे रख - खाओ कसम
अभय जल्दी से हाथ हटा के - दिशा
दिशा - यानी मे सही थी देखिये जी आपके अलावा मम्मी जी का कोई नही है मे हमारा बच्चा ननद बाकी सब आपके बिना कैसे रह पायेंगे जी पायेंगे अगर आपको
दिशा इमोसनल हो जाती है
अभय दिशा को गले लगा के - वादा करता हु मे सही सलामत आऊगा
दिशा - आना ही होगा

तभी अदिति आते हुवे - भैया मे आपके साथ रहूगी
अभय - नही गुरिया मे तुझे नही ले जा सकता
अदिति - मे छोटी भाभी के साथ रहूगी आप आयेगे तो जीत जीतू के यहा भी जाना है मुझे
दिशा - रहने दीजिये ना
अभय - सोच के ठीक है

अदिति खुश होके अभय के गले लग जाती है


रात भी कुछ नही करता अभय कियुंकी दिमाग तो जंग मे लगा था सुबह होते ही आसा सभी तैयार होके जाने को रेडी थे

आसा सुसमा को गले लगा के - दीदी
सुसमा - छोटी मे आउंगी जल्दी ही
आसा - जी
मिनिता दिशा सिला तारा सब सुसमा अशोक को बाय करते है
आसा अभय से - गुरिया का ख्याल रखना जल्दी आ जाना
अभय - जी मा
फिर सब गारी मे बैठ जाते है अभय सब को देख बाय करते हुवे मन मे आप सब का प्यार मेरे साथ है तो मुझे कुछ नही होगा

दिशा पेट पे हाथ रख अभय को देखती है अभय दिशा को देख बाय करता है सब चले जाते है

सुसमा अभय के पास आके - कब जायेगा
अभय - हु कल सुबह
मीनाक्षी - रुक जाते ना
अभय - नही भाभी शादी की वजह से रूका ही तो था गुरिया तुम मासी के साथ रुकना मे आऊगा तो साथ लगेगे घर
अदिति - जी भाई

रात 9 बजे

अभय घर के बाहर विजय से बात करते हुवे - सब पहुँच गये ना
विजय - जी भैया
अभय - सुबह आ जाना न जगह पूरी टीम लेके लेकिन कुछ लोगो को घर मा सब के सुरक्षा के लिये लगा देना
विजय - जी भैया समझ गया जीत जीतू
अभय - वो सब भी xxx जगह आ रहे है बाकी टीम को लेके
विजय - समझ गया भैया
फोन कट

अभय मन मे - कल होगा आर पार की जंग

रात सुसमा अभय के साथ सोती है सुसमा का मन था तो अभय सुसमा की चुदाई कर देता हो अदिति और अदिति के साथ सो जाता है


सुबह होते ही अभय निकल xxx जगह आता है विजय जीत जीतू भी आते है सब एक दूसरे से गले मिलते है

अभय जीत जीतू विजय से - जानते हो ना जान भी जा सकती है
जीत जीतू विजय - जानते है लेकिन dp devil जीन्दा रहा तो कई लोगो की जान जायेगी कई औरते लरकिया की इजात लूट ली जायेगी हम मर भी गये तो गम नही हा परिवार मे सब को हमारे बिना जीना होगा

अभय भी कुछ नही केह पता

अभय - टीम रेडी है
जीत जीतू विजय - हा
अभय - चलो फिर

सेहर गाव से दूर पहरो के बीच जगल मे एक तरफ से अभय उसकी टीम उसकी तरफ से dp devil उसकी टीम एक दूसरे के और तेजी से बढ़ रहे थे जंगल मे जानवर पक्षी डर के भाग रहे थे

जंगल के बीच एक बरा साम मैदान था वही खूनी जंग होने वाली थी अभय अपनी टीम लेके उस खाली मैदान मे आता है अभय रुक जाता है पीछे अभय के टीम भी रुक जाती है

अभय आगे देखता है तेजी से dp devil मास्क पहने अपनी टीम के साथ अभय के सामने आके खरा हो जाता है

अभय की टीम dp devil की टीम को को पुरे गुस्से मे देख रहे थे dp devil की टीम भी

अभय dp devil भी एक दूसरे को गुस्से देख देख रहे थे

पहरो के बीच जंगल के बीच खाली मैदान मे अभय के पुरे लोग 4 से जयदा थे dp devil के भी यानी 900 के पास इसमें कितने मरेगे किसी को पता नही लेकिन ये साफ था वो जगह मैदान खून से रंग जाने वाली थी

अलगे update मे अभय dp devil के बीच खूनी जंग होगी

आज ले लिये इतना ही 🙏🙏🙏
बहुत ही सुंदर लाजवाब और शानदार जानदार मदमस्त अपडेट है भाई मजा आ गया
 
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