sunoanuj
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chapter 104
आज की सुबह अभय का अपनी मासी के घर होता है सुबह होते ही सभी औरते उठ के नहाने धोने मे लग जाते है
सुसमा की भी नींद खुलती है तो देखती है वो अभय से चिपकी है अभय उसे बाहों मे लिये आराम से हो रहा है अभय का एक पैर उसके मोटे जांघो पे है सुसमा अभय को प्यार से देखते हुवे मन मे - किस्मत भी अजीब खेल खेलती है जिस लरके से बस मे मिली बाते कर रही थी जिसके लिये मेरे दिल मे फीलिंग जागी तो मेरी छोटी का बेटा मेरा भांजा होगा सोच नही था
सुसमा अभय के होठो पे किस करते हुवे - अजीब उलझन मे फस गई हु
सुसमा भी उठ कर कमरे मे बाहर आती है 40 मिनट बाद कमरे मे कोई आता है और अभय को जगाने लगता है अभय नींद मे ही किसी का हाथ पकर जोर से खीचता है जो भी थी वो आउच करते बिस्तर पे गिरती है और अभय उसके उपर चढ़ जाता है
अभय आधी नींद पे था और जब आखे खोल देखता है तो अभय की फट जाती है अभय जोर से - भाभी आप
मिनाक्षी मुस्कुराते हुवे - मे नही तो कोन हा
अभय हकलाते हुवे - मुझे लगा अदिति है
मिनाक्षी मुस्कुराते हुवे - हर किसी को ऐसे ही हु
अभय मुस्कुराते हुवे - हर किसी को नही आप जैसी खूबसूरत औरत को
मिनाक्षी सर्म से - अब उठेगे मेरे उपर से
अभय मुस्कुराते हुवे - एक किस्सी देनी होगी
मिनाक्षी हैरान सर्म से लाल - नही बिक्कुल नही
अभय मुस्कुराते हुवे - बस एक छोटा सा प्लेस
मिनाक्षी अभय को देखती रहती है अभय - माफ करना भाभी आदत से मजबूर हु आप भी सोच रही होगी कैसा इंसान है आते ही इस तरह की हरकत करने लग गया
मिनाक्षी अभय को देख - नही ननद जी ने बताया मुझे आप किस के पीछे परे रहते है चाहे कोई भी हो
अभय हैरान होके - गुरिया ने
मिनाक्षी मुस्कुराते हुवे - हु ठीक है एक छोटी सी किस
अभय खुश होके - ठीक है
अभय अपना होठ मिनाक्षी के गुलाबी होठ पे पास ले जाने लगता है तो मिनाक्षी की सासे तेज होने लगती है अभय अपना होठ मिनाक्षी के होठ से सता देता है वैसे ही मिनाक्षी के पूरे बॉडी मे एक अजीब एहसास डोर जाता है पहली बार पति के अलावा किसी ने किस किया था अभय फिर मिनाक्षी के ऊपर से हट के नीचे खरा हो जाता है
मिनाक्षी जल्दी से खरी होके अभय को देख सर्म से - आप देवर जी बहोत बुरे है दूर रहना परेगा आप से, ये केह मिनाक्षी भाग जाती है
अभय मुस्कुराते हुवे - भाग के जायेगी कहा
अभय भी बाहर आता है मितल रेडी होके कमरे से बहार आती है अभय मितल को देख पास जाके गाल पे किस करते हुवे - गुड मोर्निंग मेरी प्यारी खूबसूरत दीदी
मितल मुस्कुराते हुवे अभय के गाल पे किस करते हुवे - गुड मोर्निंग मेरे हैंडसम भाई
सुसमा आते हुवे मुस्कुराके - वाह क्या गुड मोर्निंग विस की है dono भाई बहन ने
अभय सुसमा के गाल पे किस करते हुवे मुस्कुराके - गुड मोर्निंग मेरी खूबसूरत मासी
मितल हस्ते हुवे - मा अब बोलो बोलो
सुसमा अभय के गाल पे किस करते हुवे मुस्कुराके - गुड मोर्निंग मेरे हैंडसम भांजे
अदिति कमरे से रेडी होके आते हुवे - मे भी हु
अभय अदिति के पास जाके गाल पे किस करते हुवे - गुड मोर्निंग मेरी प्यारी गुरिया
अदिति खुश होके अभय के गाल पे किस करते हुवे - गुड मोर्निंग प्यारे भइया
मिनाक्षी खरी सब देख रही थी मितल अभय को देख - भाभी को गुड मोर्निंग विस नही करेगा
अभय मिनाक्षी को देख मुस्कुराते हुवे - हमारी गुड मोर्निंग विस अच्छे से हो गई है
मिनाक्षी अभय को देखते अभय की बात समझ शर्मा जाती है
फिर सब अपने काम पे लग जाते है 10 बजे खाना रेडी होता है सभी बैठे खाते है फिर बाते शुरू हो जाती है
सुसमा -बेटा तो तुम काजल बुआ के यहा आते रहते थे मिनिता jiska बेटा भी तेरे साथ किडनैप हो गया था
अभय - जी मासी उसके बाद ही हमारे बीच एक रिस्ता बन गया
मितल - अरे तो बुआ सब को भी बुलाओ ना
अभय - जी दीदी लेके आऊगा सब आयेगे आपकी शादी के चिंता मत करिये
मिनाक्षी मितल को देख - देखा किस्मत ने आपको जो चाहती थी सब दे दिया
मितल इमोसनल होके - हु अपने सही कहा भाभी
20 मिनट बाद
कमरे मे अभय अदिति को बाहों मे पकरे किस करने मे लगा हुआ था साथ मे दोनों भाई बहन एक दूसरे का रस चूसने पे लगे हुवे थे
2 मिनट बाद
अभय अदिति के एक चूचे उपर से ही कस के पकरते हुवे अदिति को देख - गुरिया कैसा लगा रात को जब मेने तेरे चूचे दबाये तो
अदिति दर्द मे अभय को देख सिसकिया लेते हुवे - भइया दर्द हो रहा है आप जोर से दबा रहे है
अभय हाथ हटा के - माफ करना गुरिया तेरे चूचे इतने बरे सॉफ्ट है दबाने मे बहोत मजा आता है
अदिति सर्म से लाल होके - भइया सर्म आती है लेकिन मुझे भी अच्छा लगता है
अभय कान मे धीरे से - सच
अदिति धीरे से - हा सच
अभय - गुरिया यही रहो मे बुआ के यहा जाता हु
अदिति सर्म से - जी भाई
अभय चला जाता है अदिति अपने चूचे सेहलते हुवे - उफ ये दर्द
अभय काजल के घर आता है काजल ममता के साथ एक कमरे मे बाते करता है फिर दोनों की मस्त चुदाई करने के बाद
अभय काजल ममता को देख - मे चाहता हु आप पीछे चली जाये मे रुमा दीदी को चोदने वाला हु
काजल - समझ गई लेकिन आराम से
ममता मुस्कुराते हुवे - आराम से भी देवर जी का लंड जायेगा तो भी ननद जी की फटेगी जरूर
काजल अभय हसने लगते है
होता वही है काजल ममता बच्चो को लेके पीछे चली जाती है अभय रुमा एक कमरे मे बैठे थे
अभय - दीदी आप को सब पता है बुआ भाभी को भी तो हम खुल के सब कर सकते है
रुमा शर्म से -ठीक है
अभय - हु
अभय रुमा को बिस्तर पे लेता के किस करने लगता है चूचे दबाने लगता है रुमा की सिसकिया निकलने लगती है
अभय खरा होके कपड़े निकालते हुवे - दीदी निकालो ना रहा नही जाता मुझे आपका नँगा जिस्म खजाना देखना है
रुमा सर्माते हुवे - ठीक है
रुमा जब उपर से पूरी नंगी होती है तो रुमा के मस्त बरे दूध वाले चूचे अभय के समाने आ जाते है जिसे देख अभय देखता रह जाता है
अभय रुमा के पास आते हुवे चूचे को देख - उफ दीदी आपकी चूचे तो बहोत बरे गोरे गजब के है
रुमा सर्म से - क्या सच मे तुझे मेरे चूचे बहोत अच्छे लगे
अभय रुमा को देख - बहोत जायदा दीदी
अभय दोनों हाथ दोनों पे रख रख अंगूठे से दोनों निपल को रुब् करने लगता है तो रुमा सिहर जाती है सिसकिया लेने लगती है
अभय रुमा के निपल रुब् करते हुवे - उफ दीदी आपके निपल उफ
रुमा सिसकिया लेते हुवे - उफ अभय मेरे भाई अच्छा लग रहा रहा है
अभय फिर नीचे बैठ रुमा के पेटीकोट निकाल देता है फिर काले पैंटी को भी निकाल देता है रुमा के मस्त काले बालों वाली बुर अभय के समाने आ जाती है जिसे अभय देखता रहता है रुमा बहोत जायदा ही सर्म से पानी पानी हो जाती है
अभय खरा होके रुमा को देख - दीदी लेत जाइये
रुमा बिस्तर पे लेत जाती है
अभय खरा रुमा के नंगे बॉडी को उपर से नीचे तक अच्छे से देखने लगता है रुमा की बॉडी सच मे बहोत गजब की थी गोरा बदन बरे चूचे पतली कमर और मोटे जांघो के बीच छोटे काले से घिरे बुर
अभय रुमा को देख - दीदी आपकी बॉडी उफ कमाल की है
रुमा सर्म से लाल पानी पानी होते जा रही थी पति के अलावा आज वो अभय के सामने नंगी थी
अभय रुमा के ऊपर आता है और रुमा को देख - मुझे दूध पीना है
रुमा सर्म से - पीले रोका किसने है
अभय भी झुक के एक चूचे पकर जोर से दबाता h तो निपल से दूध बाहर आने लगते है अभय तुरंत मुह में निपल लेके चूचे दबाते हुवे चूस चूस के दूध पीने लगता है अभय मन मे - उफ दीदी के चूचे के दूध का स्वाद बहोत मस्त h अब तक मेने ममता भाभी और अब दीदी के दूध पी रहा हु उफ ये एहसास मुझे जोस बढ़ा रहा है
रुमा बिस्तर पकरे सिसकिया लेते हुवे - उफ अभय मेरे भाई चूस चूस के पीले जितना पीना है आह तेरी दीदी के चूचे मे बहोत दूध आता है
4 मिनट बाद
अभय रुमा को देख - दीदी उफ आपके चूचे के दूध पीके मजा आया
रुमा सर्म से - हु
अभय - दीदी लंड चुसो ना उसके बाद आपके बुर का रस भी पीना है
रुमा हैरान होके - भाई बुर का रस छी
अभय हैरान होके - एक मिनट ये मत कहना जीजा जी आपके बुर नही चाटते
रुमा - गंदा होता है कियु चतेगे
अभय - अच्छा गंदा होता है तो आप लंड कियु चुस्ती है हा बोलिये
रुमा कोई जवाब नही दे पाती
अभय - कितना मजा आता है पता चल जायेगा
रुमा भी हु कर अभय का लंड मजे से चुस्ती है उसके बाद अभय रुमा के टांगे फैला के बुर के फाके फैला के जिब से फाको के बीच चाटने लगता है रुमा पूरी सिहर जाती है काप् जाती है रुमा बिस्तर पकरे जोर जोर से सिसकिया लेते हुवे - उफ अभय ये कैसा मजा है मुझे बहोत अच्छा लग रहा है उफ भाई चाटते रह चूस जोर से आह मुझे ये मजा कियु नही मिला पहले भाई उफ चुस्टे रह अपनी दीदी की बुर
अभय मजे से बुर चाटता है चुस्ता है बुर का रस पिता है एसी मे रुमा कपते हुवे झर जाती h
अभय रुमा के टाँगों के बीच बैठ लंड पे थूक लगा के बुर पे घिसता है फिर लंड छेद पे रख रुमा को देख - दीदी रेडी है लंड लेने के लिये
रुमा बिस्तर जोर से पकरे थोरा डरते हुवे - भाई धीरे घुसाना प्लेस
अभय रुमा को देख - ठीक है दीदी
अभय रुमा के ऊपर लेत किस करते हुवे एक धक्का मारता है फिर दूसरा रुमा की सासे रुक जाती है अभय का लंड रुमा की बुर फैलाते हुवे पुरा अंदर तक जाके गुस् जाता है अभय मन मे - उफ बहोत टाइट गर्म है आह ये एहसास उफ मजा आ गया यार दीदी की बुर मे लंड घुसा के उफ ये गर्मी बुर की
रुमा दर्द मे तरपने लगती आसु भर भर के निकलने लगते है अभय धक्का मारने लगता है रुमा को पकरे बाहों मे लिये अभय किस तोरता है तो रुमा दर्द मे रोते हुवे -मर गई मर गई भाई बहोत दर्द हो रहा है
अभय धक्का मारते हुवे - दीदी बस हो गया अब जायदा दर्द नही होगा
चुदाई चलती रहती है रुमा दर्द मे आह उफ मा करती रहती है लेकिन धीरे धीरे दर्द मे जायदा मजा आने लगता है फट फच् की आवाजे भी
अभय धक्के मारे जा रहा था धक्के के साथ रुमा के पूरी बॉडी चूचे मस्त हिले जा रहे थे रुमा दर्द मजे मे आह उफ करते जा रही थी
अभय धक्के मरते हुवे - उफ दीदी कसम से बहोत टाइट है आपकी बुर मजा आ रहा है उफ आपकी बुर मारने मे
रुमा सिसकिया लेते हुवे - आह भाई बहोत दर्द हो रहा है लेकिन मजा भी आ रहा है तेरा लंड बहोत बरा है मेरी बुर आह मा भाई करते रह
अभय लंड निकाल - दीदी घोरी बन जाओ
रुमा घोरी बन जाती है
अभय रुमा के गांड पे हाथ रख रुमा की मस्त गांड देखते हुवे - उफ दीदी आपकी गांड भी बहोत मस्त बरी है
अभय दो चार चाटे जोर से रुमा के गांड पे मरता है और गांड को जोर से दबाने मसलने लगता है
रुमा दर्द मे - उफ मर गई भाई बहोत जोर से मसल रहा है उफ
अभय लंड बुर के छेद पे रखता है और जोर से धक्का मरने घुसा देता है रुमा दर्द में -मर गई ऐसे जोर से मत घुसा दर्द होता है
अभय धक्के मरते हुवे -उफ दीदी घोरी बना के आपकी बुर मारने मे और भी मजा आ रहा है आपकी गांड भी मारुंगा किसी दिन
घर के पीछे ममता - मम्मी जी आपकी बेटी मेरी ननद भी चुद रही है एक और लिस्ट मे देवर जी के आ गई
काजल मुस्कुराते हुवे - पता नही कितने और जायेगी
कमरे मे अभय रुमा को नीचे लेटाये जोर जोर से धक्के मार रहा था रुमा दर्द मे रोते हुवे - भाई धीरे जोर से धक्का मत मार दर्द होता है
अभय - आह दीदी आने वाला है मेरा
अभय रुमा दोनों साथ मे झर जाते है
45 मिनट चुदाई चली
रुमा पसीने से भीगी जोर जोर से सासे लेते हुवे -मर गई बुर मे बहोत दर्द जलन हो रही है
अभय रुमा को देख - उफ मजा आ गया दीदी आपकी बुर मारके
रुमा अभय को देख - मजा तो मुझे भी बहोत आया ऐसी चुदाई मेरी किसी ने नही की तेरे जीजा तो जाने दो
अभय रुमा को बाहों मे लेके प्यार से - जीजा खुश नही पर पाते ना आपको
रुमा - हु जब मुझे पता चला तु मेरी मा भाभी तो बस मेने अंदर भी चाहत जाग गई लेकिन अब कोई पचतावा नही
अभय रुमा को किस करते हुवे -मे हु ना वादा है प्यार देता रहुंगा
रुमा अभय के गले लग - हा मुझे भी तेरा प्यार चाहिये
10 मिनट बाद
अभय काजल ममता के पास आता है
ममता मुस्कुराते हुवे - हो गया मेरी ननद जी की बुर फैला दी
अभय मुस्कुराते हुवे - बहोत मजा आया कसम से
काजल - मेरी बच्ची ठीक है ना बेटा
अभय - हा थक गई है दर्द जलन है आराम कर रही है अच्छा सुनो मासी ने आप सब को बुलाया है आप सब मेरे अपने है
काजल - जरूर आयेगे बाबू लेकिन साम को
ममता - हा पास मे ही तो है घर का काम कर आयेगे तब तक आपके भाई पापा जी भी आ जायेंगे
अभय - ठीक है तो मे चलता हु साम को आ जाना कल मा दिशा बाकी सब भी आ जायेंगे
काजल ममता - ठीक है
अभय मासी के घर जाते हुवे आसा को फोन करता है
आसा - हा लाला
अभय - सीधे सीधे बोलते है बुर देगी की नही
अभय की बात सुन आसा की बोलती बंद हो जाती है शोक भी
आसा मुस्कुराते हुवे - सीधे सीधे बोलते है नही दूंगी मा हु तो तेरी जिस बुर से निकाला है तुझे उसी मा की बुर मे अपना लंड घुसाना चाहता है बेसरम
अपनी मा की बात सुन अभय का लंड पुरा जोस मे खरा हो जाता है दोनों मा बेटे एक दूसरे की गंदी बाते सुन गर्म होने लग गये थे
अभय मुस्कुराते हुवे - बुर के बाल बरे होते है तो साफ करती रहती है जबकि बुर का मालिक है नही अरे मा आपकी बुर की छेद भी अब बहोत छोटी हो गई होगी
आसा - तो क्या हो गया मेरी बुर की छेद छोटी हो गई तो
अभय - कुछ नही लेकिन मे केहता हु अपना लंड दाल फैला देता हु
आसा मुस्कुराते हुवे - कोई जरूरत नही है समझ गया बेसरम
अभय हस्ते हुवे - ठीक है ठीक है लेकिन लंड मेरा हिलाना है याद है ना
अभय की बात सुन आसा सिहर जाती है शर्मा जाती है
अभय - अच्छा ये सब तो जब आयेगी उफ मजा आयेगा लेकिन अभी जरूरी बात मासी से बात की अपने
आसा - अरे अभी तो की दीदी से बहोत सारी बाते सच कहु दीदी से बात करके बहोत अच्छा लगा
अभय - हु अब मिलके खूब बाते करना मे केह रहा हु कल निकलना है तो आज सब को लेके शोपिंग चले जाना दीदी की शादी है तो कुछ ना कुछ देना परेगा ना सब को
आसा - लाला ये बात तो तूने सही कही साम को हम शोपिंग पे जायेंगे
अभय - हा मेने विजय को बोल दिया है लेके सब को जायेगा
आसा - ठीक है
फोन कट
अभय मन मे -कल बाकी सब भी आ जायेंगे और शोभा रीना रेखा राज भी चलो सब से बात कर लेता हु
अभय शोभा रेखा मधु सिला नीतिका मीका सब से बाते करते गाव घूमने लगता है
साम 3 बजे - अभय के घर
रीमा सिला मधु मिनिता कोमल सब रेडी होके हॉल मे बैठे हुवे थे
नितिका मीका नही आ सकती थी कियुंकी नितिका को छुट्टी नही मिली मीका इतने दिन के लिये मा को पढाई छोर जा नही सकती थी
सुमन भी अपने पति खेत गाय सब को छोर जा नही सकती थी लेकिन रीमा को जाने का पर्मिसन दे दिया था आज शोपिंग होने वाली थी कल निकलना जो था
आसा रीमा को देख - रीमा बेटी तुम आई खुशी हुई
रीमा - जी ऑन्टी भइया ने मा को कहा तब जाके मा मानी है
आसा - हु, आसा मिनिता सिला को देख, भाई जी नही आये
सिला मिनिता - दोनों एक साथ रहेगे लेकिन साथ नही चलेंगे
कमरे मे दिशा रेडी हो चुकी थी बाल मे कन्घी करते हुवे विजय को देख - रीमा चल रही है मजे ही मजे हु
विजय सर्म से - आप भी ना भाभी
दिशा - एक बात बताइये अपने अपने भइया का लंड देखा है
विजय - हा बहोत मोटा लम्बा है पहली बार जब मे जीत जीतू मे देखा तो हम पुरे शोक मे चले गये थे
दिशा हैरान होके - अच्छा कब कैसे देखा
विजय - अरे भाभी जैसे एक औरत दूसरे औरत के सामने कपड़े बदल लेती है या साथ मे नहा लेती है तो हम लरके भी हा हालत ऐसे बने तो
दिशा - समझ गई बहोत कुछ झेला है आपके भइया आप सब मे भी वैसे अपना लंड कितना बरा है दिखाइये जरा
विजय शोक मे सर्म से - भाभी नही ना
दिशा - दिखाइये
विजय भी दिशा की बात ताल नही सकता था विजय खरा होता है पैंट खोल नीचे कर देता है विजय का लंड दिशा के समने था
दिशा - ये क्या है सोया कियु है खरा कीजिये
विजय रीमा के बारे मे सोचता है और लंड खरा हो जाता है
दिशा विजय का लंड देख मुस्कुराते हुवे - अच्छा है भैया से छोटा पतला है लेकिन अच्छा है रीमा के बुर पे जाता होगा तो मजा बहोत आता होगा
विजय सर्म से लंड अंदर करते हुवे - आप भी ना
दिशा विजय के पास आके चिपक के - मासी की बेटी मितल दीदी की शादी है कई लरकिया ऑन्टी आयेगी आपके भइया कई बुर मे लंड डालेंगे पता नही लेकिन मे चाहती हु मेरा प्यारा देवर कम से कम 5 लरकी या ऑन्टी की बुर मे अपना लंड घुसाये समझ गये ना अगर नही क्या तो आपसे बात नही करुगी
विजय सर्म से - जी भाभी जरूर करुगा
दिशा - बहोत खुद
दिशा फिर आगे मूर आईने मे खुद को देखने लगती है
विजय दिशा के पीछे से कमर पकर डरते हुवे अपने से चिपका लेता है और गर्दन पे किस करने लगता है दिशा सिसकिया लेने लगती है
विजय दिशा के चूचे भी दबाने लगता है दिशा - उफ देवर जी
विजय फिर दिशा को छोर भाग जाता है कमरे मे
दिशा हस्ते हुवे - अभी भी डरते है
तभी अभय का फोन आता है
अभय - जान तुम सब निकले की नही
दिशा - जी बस निकलने वाले है
अभय - अच्छा है ये बताओ तुम देवर भाभी मे क्या चल रहा है
दिशा हस्ते हुवे - डरते है कही मे गुस्सा या बुरा ना मान जाऊ
अभय - समय तो खुल जायेगा अच्छा निकलो और याद से सब के लिये शोपिंग कर लेना पैसे का मत सोचना
दिशा मुस्कुराते हुवे - समझ गई पति जी
विजय मारिया दो गारी मे सभी को लेके निकल परते है मॉल मे शोपिंग शुरू हो जाती है लेकिन इस बार हर किसी के एकदम पास कोई ना कोई था
आसा के घटना के बाद अभय मे कई लोगो को लगा दिया था ताकि फिर किसी के साथ कोई कुछ कर ना सके
सुसमा अभय के मासी के घर - साम 4 बजे
मिनिता काजल ममता रुमा सब आये थे सुसमा मिनाक्षी मितल सब बाते करने मे लगे हुवे थे
सुसमा काजल से - तो ऐसे रिस्ता बना आप सब से
काजल - जी सायद किस्मत यही चाहती थी
सुसमा इमोसनल होके - मेरी छोटी ने बहोत कुछ सहा है जरूरत के वक़्त मे नही थी लेकिन आप सब थे जान खुशी हुई
काजल - हा भाभी मे बहोत कुछ सहा है कल सब आने वाले है
सुसमा - हु मे बेचैन हु अपनी छोटी से मिलने के लिये
अभय कमरे मे बिस्तर पे लेता मन मे - जीत जीतू आ नही पायेंगे जब शादी निपट जायेगी तो जाउंगा सब से मिलने
बाते करते ही अंधेरा हो जाता है काजल ममता रुमा घर चले जाते है
खाना बनाने का समय जो हो गया था
दूसरी तरफ आसा सभी शोपिंग करके आ गये थे
मिनाक्षी भी खाना बनाने लगती है सुसमा बाकी सब बाते करने मे लगे थे
अभय - मासी बुआ कब जायेगी
सुसमा - शादी के तीन दिन पहले
अभय - बुआ का नंबर दीजिये और हा जैसा कहा बुआ को मत बताना हमारे बरे मे
सुसमा अभय को नंबर देते हुवे मुस्कुराके - समझ गई बाबा
अभय अंदर लेता है और बाहर निकाल फोन लगा देता है
औरत - हेल्लो कोन
अभय - हेलो जी मुझे राकेश से बात करना है आप कोन
औरत - रोंग् नंबर यहा कोई राकेश नही है
अभय - माफ करना जी सायद गलत नंबर लग गया
औरत - कोई बात नही रखती हु
अभय - रुकिये आप का नाम क्या है
औरत थोरा गुस्से से - मे एक अंजान को अपना नाम कियु बताऊं
अभय - माफ करना किया है ना आपकी आवाज बहोत सुरीली मीठी है तो इस किये जानना चाहता था ये मधुर सुरीली आवाज किसकी है
अभय की बात सुन औरत एकदम हैरान शोक होती है इस तरह आज तक किसी ने तारीफ जो नही की थी
औरत -मेरा नाम पुष्पा है चलो रखो फोन
फोन कट
पुष्पा अभय के पापा की छोटी बहन अभय की बुआ बहोत ही जायदा खूबसूरत हॉट है 40 की है लेकिन फिगर बहोत गजब का है
पुष्पा के कान मे अभय की बाते गुज रही थी आप की आवाज बहोत मधुर है सुरीली है पुष्पा मन मे - ये कोन था आवाज से तो कोई जवान लरका लग रहा था क्या मेरी आवाज सच मे मधुर है हद है मे ये क्या सोचने लगी
वही अभय अपनी बुआ के मजे लेके मुस्कुराते हुवे - मेरी बुआ जब आयेगी तब प्यार करुगा अच्छे से तब तक ऐसे हि फोन पे बाते होते रहेगी
खाना रेडी था फिर सब एक साथ बैठ खाते है और बाते करते है फिर कमरे मे चले जाते है
अदिति मितल से बाते कर रही थी मिनाक्षी अभय के कमरे मे आते हुवे - देवर जी
अभय मिनाक्षी को देख उठ के बैठ - अरे भाभी मुझे लगा गई तो आयेगी नही भइया प्यार कर रहे होगे
मिनाक्षी अभय के पास बैठ सर्म से - सोचा थोरि बात करके जाउं
अभय - अच्छा क्या आपसे बाते करके अच्छा लगेगा
मिनाक्षी - वैसे देवर जी देवरानी आपका खिस्सा बताया नही अपने हु
अभय मुस्कुराते हुवे - जानना है तो बताता हु
मिनाक्षी - हा बताइये
अभय - एक दिन दोस्त के घर सुबह गया तो मेरी दोस्त की बहन नहा के नंगी आगन् मे खरी थी मेने देख लिया
मिनाक्षी शोक सर्म से मुह पे हाथ रखे - क्या फिर
अभय - कुछ नही हुआ पहली बार किसी लरकी को नंगे देखा था तो जवानी जोस मारने लगी दिशा उस समय मेरी भाभी थी मस्ती मजाक करते थे प्यार भी था लेकिन एहसास नही था जब भाभी को मायके लेके गया तो रात,,,,,,, ये सब फिर सब को पता चला फिर शादी हो गई
मिनाक्षी शोक मे - आप से बच के रहना पड़ेगा मुझे
मिनाक्षी खरी होके सर्म से लाल जाने लगती है तो अभय जल्दी से मिनाक्षी के पीछे आके पकर कमर पकर गर्दन मे किस करने लगता है मिनाक्षी एकदम से हैरान शोक हो जाती है लेकिन अभय की इस हरकत से मिनाक्षी मदहोस होने लगती है सिसकिया लेने लगती है
मिनाक्षी कपते हुवे - प्लेस देवर जी आह मत करिये ये गलत है
अभय तुरंत पीछे हट के - माफ करना भाभी
मिनाक्षी जोर जोर से सासे लेते हुवे अभय को देखती है फिर चली जाती है अभय बिस्तर पे बैठ - कही बुरा ना मान जाये भाभी
अभय आसा को फोन करता है
अभय - मा क्या कर रही h आप
आसा - अभी कमरे मे आई हु सब से बाते करते टाइम का पता नही चलता
अभय - हु ये तो है कल दोपहर को निकल जाना आप सब
आसा बिस्तर पे बैठ - समझ गई
अभय -मा इंतज़ार नही होता समझ रही है मा
आसा धीरे से - हु आ तो रही हु
अभय - हु मा मस्त बिकनी मे फोटो भेजो ना
आसा सर्म से - अच्छा रुक भेज देती हु
आसा ब्लाउस निकल ले बिस्तर पे लेत सीने से सारी हटा के एक फोटो अभय को भेज देती है
अभय जैसे ही फोटो देखता है मुह खुले आखे फटे रह जाते है लंड खरा होके झटके मरते गिला होने लगता है आसा ने फोटो इंगल से गजब की बिकनी मे फोटो भेजी थी
आसा ने मस्त गुलाबी बिकनी पहनी थी जिस इंगल से फोटो लिया था आसा के दोनों बरे बरे गोरे चूचे आधे से जायदा दिख रहे थे लेकिन अभय की नजर दोनों चूचे के बीच बनी दरार पे टिकी थी
अभय - उफ दोनों चूचे के बीच के ये दरार को देख दिल करता है अपना लंड घुसा के धक्का मारू, तभी अभय एकदम से अपने होठ कटते हुवे, मर गया
अभय भूल गया था आसा लाइन पे है और उसने मन मे नही खोल के बोला था
आसा अभय की बात सुन पुरे शोक मे जोर से चिल्लाते हुवे - नालायक बेसरम तु ये सब करेगा मेरे चूचे के साथ अपनी मा के चूचे के साथ आने दे मुझे तेरी खैर नही बहोत बिगर गया है तू
अभय डरते हुवे - मा माफ कर दो क्या करू आपके चूचे उसके बीच दरार देख समझिये ना
आसा - ना मार परेगी मुझे आने दे बस
फोन कट
अभय मन मे - लग गये
आसा जोर जोर से सासे लेते अपने चूचे उसके बीच के दरार को देख - क्या ऐसा भी करते है उफ मेरी बुर गीली हो गई
आसा को गुस्सा नही आया था वो तो सब गुस्से होने का नाटक कर रही थी लेकिन अभय की बात आसा को जोस के साथ के सोचने पे मजबूर कर दिया था
बेचारी आसा को क्या पता आज मे समय कैसे कैसे प्यार करते हो मजे लिये जाते है
अदिति अभय के पास आती है और अभय से चिपक लेत जाती है अभय अदिति को बाहों मे लेके - क्या मेरे साथ सोने वाली हो
अदिति - नही तो मासी सोयेगी आपके साथ मे तो बस
अभय अदिति के हाथ लंड रख अदिति के दोनों चूचे दबाते हुवे - गुरिया सच मे तेरे चूचे दबाने मे जो मजा आता है केह नही सकता
अदिति भी अभय के लंड को पैंट के ऊपर से मुठी के पकरे मसलते हुवे सिसकिया लेके सर्म से - भाई मुझे भी अच्छा लगता है लेकिन हम गलत तो नही कर रहे ना
अभय - तुझे मजा आता है ना मेरे ये सब करने से
अदिति सर्म से - पहले अजीब लगा लेकिन अब अच्छा लगता है
अभय - बस तो बाकी फिकर छोरो उफ मजा आ रहा है अच्छे से मसलो अपने भाई के लंड को गुरिया बुर मे कभी उंगली डाली है
अदिति सर्म से - नही भाई उपर उपर से किया है
अभय - हु बुर पे बाल है अभी
अदिति सर्म से - जी जी है
अभय - बरे या छोटे
अदिति सर्म से लाल होके - वो बरे है
अभय - अच्छा
दोनों भाई बहन पुरे गर्म हो गये थे बिना एक दूसरे के देखे बाते कर रहे थे
अभय - अपने भाई का लंड देखोगी
अभय की बात सुन अदिति की सासे दिल सब रुक जाता है काप् जाती है
अभय - बोलो ना गुरिया
अदिति होस मे आते हुवे कपते होठो से - सच कहु भइया तो मुझे भी, अदिति अभय के लंड मसलते हुवे, देखना है
अभय - क्या खुल के बोलो
अदिति सर्म से - आपका लंड भइया
अभय - ठीक है दिखाता हु
अभय पैंट चड्डी नीचे कर देता है अभय का लंड पुरा टाइट लोहे जैसा खरा नशे फटने जैसा हो गया था जाहिर है सामने उसकी सगी छोटी बहन थी जोस हाई था अभय का अदिति जैसे ही अपने भाई का मोटा लंबा लंड देखती है अदिति सिहर जाती है कप् जाती है
अदिति लंड देखते हुवे मन मे - इतना मोटा बरा
अभय - गुरिया कैसा लगा अपने भाई का लंड
अदिति कपते सर्म से लाल होके - जी जी बहोत मोटा बरा है
अभय - पकर के देखो और मजा आयेगा तुम्हे
अदिति थूक निगलते हुवे -जी भइया
अदिति अभय के लंड के पास बैठ धीरे से अपनी बुर को एक बार दबती है कियुंकी बुर पूरी गीली हो गई थी और अदिति को चिप चिपा फिल हो रहा था अदिति लंड को देखते हुवे मन मे - सोचा नही था एक दिन ऐसा भी पल आयेगा जब मे अपने भइया का लंड देखुंगी पकरुगी
अदिति कपते हाथो से अभय का लंड के टोपी को टच करती है फिर मुठी के जैसे ही पकरति है बहोत हाड गर्म गर्म फिल करके फिर सिहर जाती है सासे तेज दिल जोर जोर से धक धक करने लगता है अभय जैसे ही अपनी गुरिया के पाचो उंगली ला दबाव अपने लंड पे फिल करता है अभय को वो मजा आता है उसमे अभय खो जाता
अभय अदिति को देखता है फिर लंड को कैसे उसकी प्यारी गुरिया लंड पकरे हुवे है अभय - उफ गुरिया तूने मेरा लंड पकरा है आह बता नही सकता मुझे कितना अच्छा लग रहा है
अदिति सर्म से अभय को देखती है फिर लंड को अच्छे से देखते हुवे मन मे -तो यही लंड भाभी सब की बुर मे जाता है उफ तो लंड ऐसा दिखता है
अभय - गुरिया रहा नही जाता
अभय बिस्तर से नीचे आके खरा होके - गुरिया मेरे लंड को पकर हिलाओ जल्दी उफ
अदिति हैरान सर्म से अभय के पास खरी होके लंड पकर - भैया कैसे करू
अभय लंड पकर चमरे उपर नीचे करके दिखाते हुवे -उफ ऐसे करो गुरिया जल्दी
अदिति सर्म से अभय का लंड पकर के - जी भइया करती हु
अदिति अभय के लंड जो जोर जोर से हिलाने लगती है चमरे को उपर नीचे करके मुठ मारने लगती है अभय को बहोत जायदा मजा आने लगता है अभय अदिति के एक चूचे दबाते हुवे - उफ गुरिया मजा आ रहा है करती रहो उफ मा गुरिया आह गुरिया मेरी प्यारी गुरिया आह उफ करते अभय फच् के साथ पिचकारी मारते झर जाता है अभय का माल अदिति के हाथो पे भी गिर जाता है
अदिति जल्दी से भाग जाती है अभय - उफ आज तो बहोत मजा आया सब से जायदा उफ गुरिया तूने बहोत अच्छे से लंड हिलाया है
अभय सब साफ करके पैंट पहन लेत जाता है 5 मिनट बाद सुसमा आती है नाइटी मे अभय के साथ लेत जाती है दोनों एक दूसरे के आमने सामने चेहरा करके
अभय - मासी क्या सोचा अपने
सुसमा - बेटा लेकिन छोटी तु समझ ना किसी को पता चला तो
अभय - मासी प्यार करती है मुझसे
सुसमा - हा करती हु लेकिन अब रिस्ता है बीच मे
अभय - मासी वादा है कुछ नही होगा मे हु ना आप बहोत अच्छी है मासी पे पहली बार आपको देखते ही आप मुझे पसंद आ गई थी
सुसमा - ठीक है लाला लेकिन किसी को पता ना चले
अभय - वादा मासी फूफा नही करते ना सेक्स
सुसमा थोरा शर्मा जाती है फिर नॉर्मल होके - हु 6 साल से
अभय हैरान होके -क्या पर कियु
सुसमा - खरा होना बंद हो गया खरा होता भी है तो जायदा देर टिक नही पाते तो उन्होंने भी करना बंद कर दिया
अभय - ये बात है
अभय सुसमा के ऊपर आके प्यार से - लेकिन ये रात आपकी सब से खूबसूरत थोरा दर्द लेकिन सुकून वाली रात होगी सुबह उठेगी तो आप के चेहरे पे खुशी होगी एक चमक होगी तो इज़ाज़त है
सुसमा खुद को अभय के हवाले करते हुवे - लाला प्यार करने लगी हु भरोसा भी सब गलत सही भूल तुझे अपना सब देती हु
अभय - वादा है मेरा भी प्यार करता रहुंगा
अभय फिर किस करने लगता है सुसमा मन मे - सायद यही किस्मत चाहती थी इस लिये हम एक अंजान बनके मिले जब हमे पता चला तब तक प्यार हो चुका था
बस कमरे मे दर्द भरी आह उफ फट फच् की आवाजे गुजने लगती है
आज के लिये इतना ही![]()
Bahut hee shandaar update hai!













































































