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Erotica जोरू का गुलाम उर्फ़ जे के जी

komaalrani

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जोरू का गुलाम।

भाग २५९ तीज पार्टी का दिन -निधि पृष्ठ १६२९

१२,००० शब्दों से ज्यादा बड़ा सुपर मेगा अपडेट पोस्टेड

कृपया पढ़ें, लाइक करें और कमेंट जरूर करें
 
Last edited:

Chalakmanus

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कोमल जी

हफ्ते - 10 दिन !!!!!!!

मार ही देने का सोच लिया क्या ???

यहां एक - एक दिन कैसे निकल रहा है बता नहीं सकते।

कुछ तो रहम करो।

......... का दण्ड, फकीरों को क्यों ???

हम जैसे तो बिना नागा कमेंट कर रहे हैं और क्यों ना करें, आपके अप्डेट्स होते ही ऐसे हैं कि अपने आप दिल की बात बाहर आ जाती हैं।

उस पर कमेंट पर आपके रिप्लाई का भी इंतजार रहता है और आप कभी निराश भी नहीं करती।

प्लीज, रहम करें और जल्दी से अपडेट दे ही दे।

सादर
Ek dum sahi komal g .khet khaye gadha ,maar khaye jolha
 
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komaalrani

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HAPPY BIRTHDAY TO

Phagun ke din chaar

7th Feb.2024
 

komaalrani

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फागुन के दिन चार

भाग ५० रिपोर्ट पृष्ठ ४८८

अपडेट पोस्टेड, कृपयापढ़ें लाइक करें, कमेंट करें
 

komaalrani

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हमेशा की तरह, कहानी के शब्दों में वह प्रवाह और गहराई है जो पढ़ने वालों को तुरंत अपनी गिरफ्त में ले लेते है.. यह खंड पढ़ते हुए नज़रों के सामने एक जीवंत, साँस लेती हुई दुनिया का निर्माण हो जाता है, जहाँ हर पात्र, हर स्थिति अपनी एक विशिष्ट आभा लिए हुए है..

इस अध्याय में एम् का चरित्र और भी स्पष्ट हुआ है। उनकी योजनाएँ, सूक्ष्म दृष्टि और शत्रु से एक कदम आगे रहने की मानसिकता, बड़ी प्रभावशाली ढंग से उभरी है.. जिस तरह से आपने सुरक्षा, निगरानी और प्रतिनिगरानी के जटिल जाल को साधारण उदाहरणों (जैसे बरगद के पेड़ पर चुनरी बाँधना) के माध्यम से समझाया, वह अद्भुत रहा.. यह कौशल अधिकतर बड़े-बड़े उपन्यासकारों में होता है, जो जटिल से जटिल बात को सरल रूपक में पिरो देते हैं..

एम् द्वारा बनाए गए पाँच अड्डों का विवरण रोचक रहा, किस प्रकार एक साधारण सी दिखने वाली दुनिया के भीतर एक असाधारण, गुप्त संसार सक्रिय रहता है.. मलाड मानुष का चरित्र विशेष रूप से आकर्षक है.. वह जलेबी टाइप पहेली है, यह बिम्ब सटीक और चित्रात्मक है.. यहाँ आपने एक ऐसा पात्र गढ़ा है जो सतह पर एक फ्रंट मैन लगता है, परंतु जिसकी पकड़ और प्रभाव गहराई तक जाती है.. इस प्रकार के बहुआयामी, रहस्यमय पात्र हिंदी साहित्य की लम्बी परम्परा में मिलते रहे हैं, और आपने इस परंपरा को एक आधुनिक, तकनीकी संदर्भ में बखूबी आगे बढ़ाया है..

कथा का दूसरा भाग, जो कोमल के पति के दृष्टिकोण से है, उसमें आपने तनाव और रोमांच के बीच एक हल्के-फुल्के, मानवीय रिश्ते का समावेश किया है.. श्रेया रेड्डी का पात्र और उनके साथ का संवाद कथा को एक नया, जीवंत आयाम देता है.. यह रिश्ता इन पात्रों की मनोदशा और उनकी बहुआयामी जिंदगी को दर्शाता है.. ठीक वैसे ही जैसे अच्छे आख्यानों में पात्र केवल कथानक के साधन न होकर स्वयं में एक संसार होते हैं..

इस अध्याय में जो सबसे प्रशंसनीय बात है, वह है विवरणों का सन्तुलन.. तकनीकी शब्दावली और जटिल योजनाओं का विस्तार इस कुशलता से दिया हैं कि कहीं भी.. कुछ भी बोझिल नहीं लगता.. उलटा, वह कथा के रोमांच और गति को बनाए रखता है.. जीरो प्वाइंट पर हो रही घनघोर निगरानी का चित्रण, और फिर उसके समानान्तर एम् की प्रतिनिगरानी की तैयारियाँ, पढ़कर मज़ा आ गया..!

इस कड़ी ने कथा के सभी धागों को और मजबूती से पकड़े रखा है और आगे आने वाले तूफान का संकेत भी दिया है.. आने वाले चार दिन का जो आभास दिया गया है, वह अगले अध्यायों के लिए उत्सुकता जगा जाता है.. सब कुछ एक शतरंज के खेल जैसा प्रतीत हो रहा है, चाल और प्रति-चाल का सिलसिला चल रहा है और आप पाठकों को फ्रन्ट सीट पर बैठाकर पूरा मैदान दिखा रही हैं..

लेखन में ऐसी परिपक्वता केवल अनुभव और गहन अवलोकन से ही आती है..


अगली कड़ी की प्रतीक्षा रहेगी..
आपकी तारीफ़ की जितनी तारीफ़ करूँ कम है उत्तर में विलम्ब का कारण है की टिप्पणियां काम होती है तो रुक रुक कर काल क्रम के अनुसार मैं प्रतिक्रिया देती हूँ।

सबसे बड़ी बात, आपने कहानी के इस टर्न के मर्म को समझा और उसमें लगे प्रयास और मेहनत को स्वीकार किया। स्टॉक एक्सचेंज, कारपोरेट जासूसी ऐसे विषय मेरे लिए भी नए थे। पर इसके साथ हर प्रसंग में देह संबंधो की बात भी उबाऊ लगने लगती है, जैसे ब्ल्यू फिल्मो में आप पहले से बता सकते हैं की कौन कौन से पोज होंगे, किसके बाद क्या होगा और उससे ज्यादा उबाऊ कुछ नहीं हों सकता। कई बार यह लगता है की स्त्री पुरुष एक ऐसी स्थिति में सिर्फ इसलिए हैं की कैमरे से पिक्स साफ़ साफ़ आ जाएँ और वो मनोभावों को, रस को, आंनद को कहीं से भी नहीं दिखाते। उसी तरह आधी से अधिक कहानियों में यदि एक स्त्री और पुरुष होंगे तो देह संबंध बहुत जल्द हो जाएंगे। पर अगर यह बिना किसी भूमिका के होते हैं, एक यांत्रिक रूप में तो कोई रस मन में उत्पन्न नहीं करते।

इसलिए मैंने कहानी में यह ट्विस्ट देने की कोशिश की, और इससे कहानी का कैनवास भी थोड़ा बड़ा हो गया।

आप ऐसे रसिक पाठक हैं, जो इस कहानी पर आएँ, इसके लिए मैं और मेरी कहानी दोनों आपके आभारी हैं।

Thank U GIF by Lucas and Friends by RV AppStudios
Text Thank You GIF by BrittDoesDesign
 

komaalrani

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Ab lagta hai rusgullo ka number lagega.

Ye resort ka kya scene hai.

Sheya badi saali ka achha role nibha rahi hai.

Double meaning dialogue se maza aa jata hai.
रिसार्ट का प्रोग्राम अगले दिन का है , दिन में तीज प्रिंसेज और रात में दोनों रसगुल्लों के साथ दो रात एक दिन, एक रिसार्ट में जिससे उनके निचोड़े जाने का काम तसल्लीबख्श ढंग से हों जाए।

आज फागुन के दिन चार का अपडेट आ गया है। कोशिश करुँगी इसी हफ्ते इस का भी अपडेट दें दूँ।
 

komaalrani

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ढेरों शुभकामनाएँ :cake: 🎂
आभार धन्यवाद

फागुन के दिन चार का पचासवां भाग आज ही पोस्ट हुआ। यह एक अलग ढंग का उपन्यास है, इसका एक अन्य शीर्षक हों सकता है '
लव इन द टाइम ऑफ़ टेरर '

इसका काल क्रम २१ वी शताब्दी के शुरू के दशक हैं, दूसरे दशक की शुरुआत लेकिन फ्लैश बैक में यह कहानी २१ वीं सदी के पहले के दशक में भी जाती है.

कहानी की लोकेशन, बनारस और पूर्वी उत्तरप्रदेश से जुडी है, बड़ोदा ( वड़ोदरा ) और बॉम्बे ( मुंबई ) तक फैली है और कुछ हिस्सों में देश के बाहर भी आस पास चली आती है। मेरा मानना है की कहानी और उसके पात्र किसी शून्य में नहीं होने चाहिए, वह जहां रहते हैं, जिस काल क्रम में रहते हैं, उनकी जो अपनी आयु होती है वो उनके नजरिये को , बोलने को प्रभावित करती है और वो बात एक भले ही हम सेक्सुअल फैंटेसी ही लिख रहे हों उसका ध्यान रखने की कम से कम कोशिश करनी चाहिए।

लेकिन इसके साथ ही कहानी को कुछ सार्वभौम सत्य, समस्याओं से भी दो चार होना पड़ता है और होना चाहिए।

जैसा की नाम से ही स्पष्ट है कहानी फागुन में शुरू होती है और फागुन हो, बनारस हो फगुनाहट भी होगी, होली बिफोर होली भी होगी।

लेकिन होली के साथ एक रक्तरंजित होली की आशंका भी क्षितिज पर है और यह कहानी उन दोनों के बीच चलती है इसलिए इसमें इरोटिका भी है और थ्रिलर भी जीवन की जीवंतता भी और जीवन के साथ जुडी मृत्यु की आशंका भी। इरोटिका का मतलब मेरे लिए सिर्फ देह का संबंध ही नहीं है , वह तो परिणति है। नैनों की भाषा, छेड़छाड़, मनुहार, सजनी का साजन पर अधिकार, सब कुछ उसी ' इरोटिका ' या श्रृंगार रस का अंग है। इसलिए मैं यह कहानी इरोटिका श्रेणी में रख रही हूँ .लेकिन यह एक एरोटिक थ्रिलर है।

एक बार फिर से साथ देने के लिए, संबल के लिए बहुत बहुत आभार


Thanks Thank You GIF by Lumi
Thank You So Much GIF by Pudgy Penguins
 

komaalrani

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WAise M ne bhi bol diya hai ki rasgulle ka pura ras vo nikal legi ab dekhna hoga ki rasgulle ka chirharan kaha tak jata hai maza aeyga or mam please make little jelus to komal while his huaband is busy with other jab kahi jelusy ati hai to rishta or majbut ho jata hai
Next part and soon

:thanks: :thanks: :thanks: :thanks: :thanks: :thanks: :thanks:
 
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