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Erotica जोरू का गुलाम उर्फ़ जे के जी

komaalrani

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जोरू का गुलाम।

भाग २५९ तीज पार्टी का दिन -निधि पृष्ठ १६२९

१२,००० शब्दों से ज्यादा बड़ा सुपर मेगा अपडेट पोस्टेड

कृपया पढ़ें, लाइक करें और कमेंट जरूर करें
 
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komaalrani

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Komal ji apka lekhan atulniya hai..aap likhti hai to patra sajeev ho uthte hai..hum jaise padhne walo ka saubhagya hai ki aapka lekhan hume padhne ko mil raha hai..asha hai aap aage bhi khub likhti rahengi.

Ek lalchi fan.
Bahoot Bahoot dhanyvaad, bas ye guzarish hai ki baaki dono kahaniyon par bhi aap regular utsah vardhan karmnge to mera khud me utsaah jagega aur post jyada frequent aayengi
 
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komaalrani

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komaalrani

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komaalrani

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Mujhe kolmaliya ko jalan me jalte hue dekhna hai sajan ke oass sajaniya se jyada khubsurat ladkiya chaiye jise sajaniya ka dusra roop nikal kar smane aey aone sajan ke liye
aage aage dekhiye
 
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komaalrani

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Honestly, felt it in my bones. That silence. after hitting "Post reply' on our story thread especially when you’ve poured days and weeks of soul into a piece, is the loudest sound in the world.

I’m right there in the trenches with you. Especially, writing in the vernacular often feels like shouting into a void these days. It brings to mind that haunting line by Ghalib 'न सताइश की तमन्ना न सिले की परवा". In my opinion, we often write to exorcise our own ghosts, the act itself is about release of our repressed emotions. But let’s not pretend we are ascetics. As humans, we crave resonance. We are half in love with the idea of our words landing softly in someone else's mind. When they don't, it stings... that is what John Keats felt, when he wrote this, I guess.

There is, however, a pragmatic side to this that we have to stare down. We chose Devanagari to preserve the delicacy and authenticity of the narrative, and honestly, I wouldn't have done it any different. It keeps the soil on the roots. But we can't ignore that the digital attention span speaks Hinglish. An uncomfortable trade-off between artistic purity and accessibility. It is like offering a slow-cooked meal in an era of fast food, and on top of it, the script itself sometimes acts as a gatekeeper.

komaalrani ji, you possess that envious ability to carry multiple narrative arcs without ever dropping a thread, maintaining a linguistic flow that is as precise as it is beautiful. Just don't let the metrics hollow out your confidence. The depth of those 8 friends likely outweighs a thousand empty scrolls on a generic post. Quality has a way of enduring long after the algorithm moves on. Your words have weight.. let it settle. The right readers always find their way home.. or so should we hope..!!
You have made me speechless, and best answer will be plod along and post the next post. Thanks so much.
 

komaalrani

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कोमल जी

हफ्ते - 10 दिन !!!!!!!

मार ही देने का सोच लिया क्या ???

यहां एक - एक दिन कैसे निकल रहा है बता नहीं सकते।

कुछ तो रहम करो।

......... का दण्ड, फकीरों को क्यों ???

हम जैसे तो बिना नागा कमेंट कर रहे हैं और क्यों ना करें, आपके अप्डेट्स होते ही ऐसे हैं कि अपने आप दिल की बात बाहर आ जाती हैं।

उस पर कमेंट पर आपके रिप्लाई का भी इंतजार रहता है और आप कभी निराश भी नहीं करती।

प्लीज, रहम करें और जल्दी से अपडेट दे ही दे।

सादर
बस एक दो दिन और
 

komaalrani

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:bow: :bow:
बहुत सालो बाद आपके किसी पोस्ट पर कमेंट कर रहा हूँ! आज जब ज्यादातर पुराने लेखक/लेखिका या तो लिखना बंद कर चुके हैं या किंडल या वैसे ही दूसरे प्लेटफार्म पर लिख रहे हैं वही पर आपके दवारा अभी भी उसी ईमानदारी से लिखा जाना बहुत बड़ी बात है !
मैं आपके कहानिओ का तब से पाठक है जब आप याहू ग्रुप में लिखा करती थी और तब तो "मोहल्ला मोह्हबत वाला" जैसी कहानी लिखने की ही हिम्मत की जा सकती थी!

मैं आपका शुक्रगुजार हूँ क्युकी आपकी वजह से मैं Xossip पर तब सरफ़रोश जैसी लम्बी कहानी शुरू की थी जो फोरम के बंद होने के दो तीन पहले समय से पहले समेट कर बंद करना पड़ा था जिसमे तब भी 1oo से ऊपर रफ़ ड्राफ्ट लिखे पड़े थे ! आप ही समीक्षक थी जिसे मैंने शुरुआत में कुछ पार्ट्स लिख कर राय मांगी थी क्या मेरा लिखा लोग पढ़ेंगे ! आपके हौसला अफजाई की वजह से उस साल का रनर अप मसाला अवार्ड भी मिला। फिर से किसी फोरम पर शुरू नहीं कर पाया! एक प्लेटफार्म पर लिखा भी तो ७५ के बाद समय की कमी के कारण बंद करना पड़ा! आज के वक़्त में जब लोग लिखा काम पढ़ रहे हैं उस वक़्त आप अभी भी उसी जोश से जो लिख रही है उसे सलाम ! :roflbow:

इधर का तो पता नहीं पर पर पहले कई बार आपकी लिखी उपन्यांसो को अपना बता कर किंडल पर ऐसे दूसरे जगह बेच चुके हैं और सायद आज भी कंही न कंही बेच रहे होंगे !

भटकता भटकता इधर आ गया ! पता नहीं आप कैसे करती है, पर जब लगता है की आप एक खास शैली में बंध गयी है तभी आप ट्विस्ट दे देती है ! Xossip वाले वर्शन में शायद आप थ्रिलर मिक्स करना शुरू की थी और थ्रिलर वाला पार्ट ही इतना लम्बा था की एक सम्पूर्ण उयन्यास बन सकता था ! अब वो वर्शन उतना याद नहीं है सिवाए रीत के कारनामो के ! श्रेया को देख कर अच्छा लगा !
:love:
मैं वापस फिर आयूँगा, यह देखने श्रेया कैसे काम के बिच मस्ती करती है या मस्ती के साथ काम करती है! यह भी देखना दिलचस्प होगा की इस मस्ती में श्रेया का अपना काम कैसे प्रभाव डालता है , आखिर एक दबंग महिला जो घरेलु है या कहे खाट-कब्बडी में दबंगई करती घरेलु महिला या साधारण काम-काजी महिला में और श्रेया जो दबंग होने के साथ साथ कमांडेंट भी है उसकी भाषा और व्यवहार कैसा होता है, आशा करता हूँ की वो गुड्डी , रीत से अलग होगा ! और साथ में काम के दौरान जब वो अकेले होंगे तो सायद इस बार सिर्फ नितम्ब का जायज़ा लेने से कुछ आगे बढ़ेंगे ; क्या पता समोसा का आकार पता किया जाए या समोसा का प्लेट बेपर्दा हो या कम से कम दूर दूर दो कुर्सिओं पर बैठने की जगह श्रेया खुद हीरो के गोद में या हीरो को अपने गोद में बिठा कर कर विचार विमर्श करे ! आखिर इस तनाव भरे माहौल में उनको भी तो खुद को तरो-ताजा रखने के लिए रूटीन कार्य से कामदेव के प्रभाव वाले क़ाम में आ कर नए उत्साह से आगे बढ़ना चाहिए ! वैसे ही जरा कल्पनाओ के घोड़े दौड़ा रहा था !

:flowers2:एक बार फिर से आपको धन्यवाद यह विश्वास दिलाने के लिए की मैं कुछ लिख भी सकता हूँ ! आप आलरेडी कई थ्रेड्स पर क़ाम कर रही है इसलिए आपसे कुछ अनुरोध करना जुल्म है; फिर भी बिना कहे नहीं जा पायूँगा! कभी लेडी जेम्स बांड टाइप किरदार को लेकर एक इरोटिक थ्रिलर लिखे जिसमे आपके दूसरे रेगुलर किरदार जैसे गुड्डी, मंजू , शंध्या , गीता , चीनू , चंपा ना हो , हो तो श्रेया और रीत जैसी किरदार और दूसरे नए किरदार जिनके साथ मस्ती भी हो और ढेर सारा एक्शन भी ! आप कहेगी इसमें यह तो ठूस ठूस कर भरा है ; तो मेरा जैसा लालची कहेगा नहीं नया वाला जिसमे नया मज़ा हो ! सडक्शन जैसा आर्ट पर आपकी जैसे लेखनी ही न्याय कर सकती है! आप ही वैसा लिख सकती है जिसमे पतंगे रूपी नर रीत और श्रेया जैसे आग में सब जानते हुए भी अपनी मर्ज़ी से भष्म होने दौड़े आएंगे !


मैं अपना पुराना id xxxdev नहीं इस्तेमाल करता हूँ !
यादों के ढेर सारे पन्ने आपने एक साथ पलट दिए। इतने दिनों बाद आप सुध ली। बस यही कह सकती हूँ कभी कभार झाँक झुंक लिया करिये। आज ही अपडेट आएगा और फिर शुरू होगा एक बार फिर से एक लम्बा इन्तजार कमेंट्स का व्यूज का।
 
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komaalrani

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जोरू का गुलाम।

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