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ajay bhai

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chapter 2

सुबह 10 बज रहे थे साहिल सुमिता सब अपने कमरे मे रेडी होने मे लगे हुवे थे

साहिल रेडी भी हो चुका था आईने के सामने खरा सांत लेकिन मन उदास दिल मे दर्द लिये खरा था राधिमा को खोने के बाद साहिल के चेहरे से वो इस्माइल गायब हो गई थी मा पापा या किसी और के सामने साहिल हस्ता मुस्कुराता रहता लेकिन अंदर मे दर्द लिये रहता

सुमिता का भी सेम था दोनों मा बेटे की किस्मत मे दर्द ही दर्द सेहना लिखा है या कभी खुसिया भी आयेगी कोई नही जनता था

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सुमिता भी कमरे मे पेटीकोट मे खरी ब्लाउस निकाल रही थी पीछे गोरी चिकनी पीठ मस्त दिख रही थी सुमिता गहरी सोच मे डूबी हुई कपड़े निकलते हुवे पूरी नंगी हो जाती है बुर पे घने काले बाल गजब लग रहे थे

साहिल दरवाजे मे आके - मा कितना देर करोगी हद है मे तो रेडी भी हो गया

अंदर से सुमिता - कितना जल्दी मे हमेसा रहता है औरत को टाइम लगता ही है रेडी होने मे जब तेरी शादी होगी बीवी आयेगी तब बोलना उसे बरा आया

शादी बीवी ये शब्द साहिल को राधिमा की फिर से याद वो दर्द जगा देती है

साहिल राधिमा को बाहों मे लिये पेर के नीचे बैठा - राधिमा शादी करोगी मुझसे बनोगी मेरी बीवी

राधिमा अजीब नजर से थोरा गुस्से से साहिल को देख - मेने प्यार तुमसे कियु किया बोलो तुम भी ना साहिल बेवकूफ हो बहोत मेने तो कई सपने तुमहारे साथ सजाये है

साहिल मुस्कुराते हुवे - अच्छा उस सपने मे हमारे कितने बच्चे है
राधिमा बुरी तरह सर्म से लाल होते हुवे साहिल के सीने पे दोनों हाथो से मरते हुवे - छी कितने बेसरम हो तुम गंदे
साहिल हस्ते हुवे - अरे मेने गलत तो नही कहा

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तभी सुमिता बाहर आते हुवे साहिल को देख मुस्कुरा के - बता मे कैसी लग रही हु
साहिल होस मे आते हुवे सुमिता को उपर से नीचे तक देखते हुवे - बहोत खूबसूरत लग रही है
सुमिता सच मे बहोत खूबसूरत होत लग रही थी सारी मे
सुमिता मुह बना के साहिल को देख - कभी तो अच्छे से मेरी तारीफ कर दिया कर ये सरा मुह बना के कोन तारीफ करता है

साहिल - हद है मा ये सब बातें छोरो चलो चलते है
सुमिता - हा हा ठीक है

राघव तो 9 बजे ही अपने स्कूल पढाने चला गया था

साहिल बाइक निकलता है सुमिता पीछे बैठ जाती है एक हाथ साहिल के कंधे मे रख के

साहिल - चले
सुमिता - हु

साहिल निकल परता है अपने मा के घर जो 30 मिनट लगने वाले थे

सुमिता बाइक मे पीछे बैठी हुई थी लेकिन वहा जाके जो होने वाला था उसे सोच सुमिता बहोत डरी घबराये हुवे थी

सुमिता किस्मत मान किस्मत पे छोर देती है

सुमिता नजारे देखते हुवे - बेटा तेरी बेहन की उमर हो गई है कोई लरका देख शादी करनी परेगी उसके बाद तेरी

साहिल बाइक चलते नॉर्मल आवाज मे - दीदी की शादी कर दो पहले बाद मे मेरे बरे मे सोचना

सुमिता - कियु तुझे शादी नही करनी है
साहिल कुछ देर चुप रहने के बाद - मामी की तबियत खराब है कुछ लेके जाना है
सुमिता मन मे - फिर बाद को बदल दिया इस लरके ने
सुमिता - हा रास्ते मे कुछ फल ले लेगे

हरिपुर गाव - साहिल के मामा का घर

एक कमरे मे

तांगे फैलाओ ना यार अच्छे से पुरा अंदर नही जा पा रहा
अंजली रोते हुवे किसी को देख - नही प्लेस दर्द हो रहा है पुरा अंदर नही इतने मे कर लो
अंजान अंजली की दोनों टांगों को पकर फैलाने लगता है तो अंजली पूरी ताकत से अपने दोनों जांघों को सताये रखने की पूरी कोसिस करती है
अंजान अंजली को देखते हुवे थोरा गुस्से से - जांघे फैलाओ मेने कहा
अंजली सामने इंसान को गुस्से मे देख तांगे फैलाते हुवे रोते डरते हुवे चेहरे के साथ - प्लेस धीरे करना
अंजान - ठीक है समझ गया

वही साहिल सुमिता आधे रास्ते मे थे गाव का रास्ता था खेत ही खेत चारों तरफ थे सुमिता पीछे बैठी खेत की तरफ देखते जा रही थी तभी एक खेत आता है जिसे देख सुमिता सिहर काप् जाती है सासे उपर नीचे होने लगती है सुमिता के हाथ साहिल के कंघे पे कस जाते है दूसरा हाथ की मुठी कस जाती है

बाइक तेजी से उस खेत से होते आगे निकल जाता है लेकिन सुमिता की नजर उस खेत पे ही थी

खेत वाला रास्ता पार करते ही एक छोटा सा चौक आता है साहिल को एक फल वाला ठेले दिखाई देता है तो साहिल ठेले वाले के पास बाइक रोक देता है

सुमिता बाइक से नीचे उतर जाती है साहिल फल वाले से सेब केला अनार लेता है फिर साहिल सुमिता 10 मिनट मे पहुँच जाते है

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बाइक की आवाज सुन अंजली बाहर आती है साहिल अपनी मा को देख अंजली बहोत खुश होती है अंजली ने टाइट सूट सलवार पहनी हुई थी और अंजली के दोनों टाइट बरे गोरे चुचे अंदर दबे हुवे आधे तो साफ दिख रहे थे और उभार भी साफ देख कर अंदाज़ा लगाया जा सकता है कितने बरे चुचे होगे

अंजली थोरा लंगराते हुवे साहिल ले पास आके गले लगते हुवे - हा गया मेरा प्यारा भाई

साहिल भी अंजली के गले लगते हुवे - जी दीदी आ गये हम

कुनाल भी बाहर आते हुवे सुमिता साहिल को देख - आ गये चलो अंदर चलते है

साहिल कुनाल के पैर छुटे हुवे - मामा
राघव साहिल को गले लगाते हुवे - मेरा भांजे गले लगते है तू तो मेरा सेर है

कुनाल सुमिता को देखते हुवे -मेरी प्यारी बहना कैसी है
सुमिता - जी ठीक हु भाई

सभी एक कमरे मे जाते है जिस कमरे मे सुनीता लेती हुई थी

सुनीता सुमिता साहिल को देखते हुवे - ओ देखो तो कोन आया है
साहिल सुनीता को के पास बैठ - मामी कैसी है आप अभी
सुनीता साहिल को प्यार से देखते हुवे - ठीक हु बेटा बस थोरा बुखार है
सुमिता भी पास मे बैठते हुवे - भाभी जयादा तबियत खराब है तो होस्पिटल ले चलते है
सुनीता सुमिता को देखते हुवे - अरे नही पहले से बहोत अच्छी हु बस बुखार ही तो है

सुनीता साहिल से - बेटा बहोत हैंडसम होते जा रहा है लगता है हमे तेरे लिये कोई लरकी ढूंढने की जरूरत ही नही पड़ेगी

अंजली मुस्कुराते हुवे - और नही तो किया मेरा भाई इतना हैंडसम है की लरकिया खुद आयेगी
कुनाल - अरे यार ऐसा हुआ तो अच्छा ही है लेकिन मेने सोचा था मे अपने भांजे ले लिये लरकी ढूंढूंगा

सुमिता मुस्कुराते हुवे साहिल के सर पे हाथ फेरते हुवे प्यार से - मेरे बेटे की किस्मत मे जो लरकी लिखी होगी वो मिल ही जायेगी

साहिल अंदर ही अंदर दर्द भरी आवाज मे - नही मा मेरी किस्मत मे जो लरकी लिखी थी उसे किस्मत ने ही मुझसे छीन लिया है

साहिल नॉर्मल सब के सामने बैठ बातें करता है फिर 10 मिनट बाद सब को बातें करते छोर गाव घुमने निकल जाता है

साहिल के लाइफ से खुसिया चली गई थी बेजान की गाव ले पतले रास्ते से होते जा रहा था अपने मे खोया तभी कोई आवाज देते हुवे - देवर जी कई महीने बाद आये बिना मुझसे मिले जा रहे है ये उमीद तो आपसे नही थी

साहिल उस आवाज को सुनते ही मन मे - कहा फस गया यार

साहिल पीछे मूर उस औरत को मुस्कुराते हुवे देख - भाभी माफ करना मे तो सोचा गाव घूम लेता हु आते टाइम आपसे मिल लूंगा

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सामने खरी थी सारी मे एक 20 साल की खूबसूरत औरत जो साहिल को कातिल निगाहों से अदा से देखे जा रही थी
नाम है सुमन की शादी एक साल पहले हुई है

सुमन साहिल के पास आके मस्ती भरे अंदाज़ मे - उफ कैसे देवर है आप लोग भाभी के पीछे परे रहते है लेकिन एक आप है मुझपे ध्यान ही नही देते इंग्नोर कर देते है

साहिल सांत खरा मुस्कुराते हुवे सुमन को देख - आपका ध्यान ख्याल रखने के लिये भैया है मे नही

सुमन साहिल के एकदम पास खरी होके साहिल के आखो मे देखते हुवे - आपके भैया तो है लेकिन आप भी मेरा ख्याल रखेगे तो और मजा आयेगा मुझे

साहिल पीछे हटते हुवे - कितनी बेसरम है आप सर्म कीजिये
साहिल फिर तेजी से भाग जाता है

सुमन साहिल को भागते देख जोर जोर से हस्ते हुवे - कितना प्यारा मासूम है इस लिये तो आपसे मस्ती करने मे अलग ही मजा आता है भाग गये अगली बार जाने नही दुगी

साहिल घूमते घूमते गाव से गाव से निकल सांत एक पेर के नीचे बैठ फिर राधिमा के गम मे डूब जाता है राधिमा का मुस्कुराता चेहरा साहिल को बार बार याद आता ही रहता था लेकिन एक वो पल जब राधिमा खून से लतपथ साहिल के बाहों मे अपना दम तोर देती है वो मंजर साहिल को रात को सोने नही देता था जब से राधिमा गई साहिल ना खुश है ना चैन से सो पाता है

साहिल बहोत हैंडसम अच्छे साफ दिल का लरका है राधिमा के अलावा कभी भी किसी को प्यार या गंदी नजर से नही देखा

साम 3 बजे

सुमिता घर के बाहर खरी थी कोई आता है बाइक से और सुमिता को बैठा के लेके चला जाता है सुमिता डरी सहमी बैठी थी ऐसा लग रहा था अब वो रो देगी बाइक जो चला रहा था सुमिता को देख मुस्कुरा रहा था

8 मिनट बाद बाइक एक मेडिकल स्टोर के पास रुकती है

बाइक वाला सुमिता को देखते हुवे मुस्कुरा के - कोन सा कॉंडोम लू
सुमिता नजरे नीचे किये अपनी मुठी कसे कपते होठो से रोने वाली आवाज मे धीरे से - जो जो

बाइक वाला पैसे निकाल सुमिता के हाथो मे देते हुवे - हु जाओ लेके आओ खुद

सुमिता हैरान बाइक वाले को देख रोने सी आवाज मे - प्लेस मत करो ऐसा
बाइक वाला शैतानी मुस्कान देते हुवे सुमिता को देख - जाओ नही तो मे किसी और के पास चला जाउंगा

सुमिता बाइक वाले की बात सुन समझ पूरी तरह काप् डर जाती है
सुमिता डरते हुवे नजरे नीचे किये - नही नही मे जाती हु
बाइक वाला मुस्कुराते हुवे - बहोत खूब ये हुलिया सही करके जाओ

सुमिता खुद को नॉर्मल करती है ताकि कोई देख तो सब नॉर्मल लगे

सुमिता मेडिकल स्टोर को देखती है कुछ लोग खरे थे इस लिये सुमिता जा नही पा रही थी

बाइक वाला सब देख समझ रहा था लेकिन वो ये सब देख मजे ले रहा था

मेडिकल स्टोर से लोग चले जाते है जब कोई नही था तब सुमिता चलते हुवे मेडिकल स्टोर मे आती है पीछे खरा बाइक वाला अपने लंड को सेहलते हुवे - उफ अब मजा आयेगा सोचा था रात को अच्छे से लुगा लेकिन रहा नही गया

सुमिता मेडिकल स्टोर वाले के पास खरी थी सांत थोरा सर्म लिये बोलने की हिम्मत नही हो रही थी

स्टोर वाला सुमिता को देख - भाभी कुछ चाहिये आपको
सुमिता स्टोर वाले को देख फिर नजरे नीचे लरके हिम्मत करके धीरे से से - वो वो कॉंडोम चाहिये

स्टोर वाला सुन थोरा हैरान होता है और सुमिता को उपर से नीचे तक देखते हुवे मन मे - किया माल है यार कयामत है कोन किस्मत वाला है जो इसकी लेने वाला है उफ

स्टोर वाला - जी कोन सा दु कॉंडोम
सुमिता नजरे नीचे किये मुठी कसते हुवे - Durex
स्टोर वाला मन मे - उफ ये कॉंडोम जायेगा इसकी बुर मे अंदर तक उफ सोच रहा हु कैसी बुर होगी भाभी की
स्टोर वाला सुमिता को गोर से देखते हुवे धीरे से - भाभी जी नया एक कॉंडोम आया है वो देदु बहोत मजा आयेगा

स्टोर वाली की बात सुन सुमिता पूरी शोक हैरान होती है और गुस्से से स्टोर वाले को देख - जो बोला है जो दो ये लो पैसे , सुमिता पैसे सामने रख देती है
स्टोर वाला डर जाता है और जल्दी से Durex का पेकेट निकाल दे देता है सुमिता ले लेती है और गुस्से से बाहर बाइक वाले के पास आती है फिर बाइक वाला बिना देरी किये एक घर के कमरे मे सुमिता को लेके आता है

बाइक वाला सुमिता को पीछे से बाहों मे भरते हुवे - बहोत तरस रहा था अब आई हो
सुमिता खरी काप् रही थी रोने वैसा मुह बनाये खरी अपनी किस्मत को कोस रही थी

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बाइक वाला सुमिता के सारी सीने से हटा के अपना एक हाथ सुमिता के ब्लाउस के ऊपर से बरे एक चुचे पे रखते हुवे - आते वक़्त उस खेत को देखा ही होगा जिस खेत मे तेरी मस्त बुर मारी थी हु
सुमिता अपने चुचे पे बाइक वाले का हाथ फिल करते ही काप् जाती है आखो से आसु निकल आते है होठ बॉडी काप् रहे थे
30 मिनट बाद

सुमिता दर्द मे आसु लिये लंगराते हुवे बाहर आती है खुद को पूरी तरह सही करके

बाइक वाला सुमिता को बाइक पे बैठा के फिर घर के बाहर छोर चला जाता है

सुमिता दर्द मे थोरा लंगराते हुवे अंदर आती है तो साहिल आगन मे बैठा सुमिता को देख - मा कहा गई थी आप

सुमिता साहिल को देख उसकी बात सुन घबरा जाती है लेकिन जल्दी ही खुद को संभलते हुवे - अरे बेटा अपनी दोस्तो से मिलने गई थी

साहिल - अच्छा
सुमिता नजरे बचाते हुवे सुनीता के कमरे मे चली जाती है

रात 8 बजे

खाना खाने सब बैठे हुवे थे सुमिता के पास साहिल अजलि थी
दूसरी तरफ राघव सुनीता

कुनाल सुमिता से - छोटी अंजली की उमर हो गई है शादी कर देते है मेरी नजर मे एक लरका है किया कहती हो
सुमिता राघव को देख - भैया मुझे साहिल के पापा से बात करनी होगी शादी तो करनी ही है

अंजली चुप चाप खाना खाने मे लगी थी साहिल बेचारा भी अपने मे था
सुनीता कुनाल से - सुनिये आप खुद नंदुई जी से बात कर लेना ना
कुनाल खाना खाते हुवे - ठीक है ये सही रहेगा

खाना पीना होने के बाद साहिल सीधा अपने कमरे मे आके बिस्तर पे लेत फिर गम राधिमा की यादों मे चला जाता है

तभी अंजली आके साहिल के पास बैठ - कहा खोया हुआ है कोई गिर्लफ्रेंड की यादों मे तो नही

अंजली एकदम सही थी साहिल अपने प्यार की यादों मे खोया था लेकिन गम मे वो प्यार दुनिया छोर जा चुकी थी

साहिल अंजली को देख नॉर्मल आवाज मे - आप बनाओ बॉयफ्रेंड मुझे नही चाहिये

अंजली हैरान होके साहिल को देख - अच्छा जी झूठा
साहिल - सोने दो मुझे आप भी जाके सो जाओ
अंजली साहिल को गोर से देखते हुवे - भाई तु बदल गया है पहले खूब मस्ती करता था लेकिन अब

अंजली खरी होके एक बार साहिल को देखती है फिर चली जाती है

अंजली के जाने के बाद सुमिता नाइटी मे आती है और साहिल के पास बैठ साहिल को देख - बेटा कहा खोया रहता है मुझे हमेसा लगता है तू कुछ छुपा रहा है मुझसे

साहिल सुमिता को देख - आपको ऐसा कियु लगता है मा
सुमिता - बस फिल होता है मा हु तेरी
साहिल - ऐसी कुछ बात नही है
साहिल फिर दूसरी तरफ करवट लेके सोने लगता है
सुमिता साहिल को देख मन मे - बेटा मे सुरु से चाहती थी तू मेरे साथ मस्ती करे एक दोस्त की तरह लेकिन तू ऐसा नही है सुरु से मुझसे नॉर्मल हल्का बातें करते रहा है प्यार कैर बहोत करता ही लेकिन

सुमिता खरी होके एक नजर साहिल को देख जाते हुवे मन मे - मे चाहती हु तुम मेरे साथ वक़्त बिताओ बातें करो

सुमिता अकेला पन फिल हमेसा करती थी इस लिये चाहती थी उसका बेटा उसे समय दे बातें करे मस्ती करे

रात 11 बजे

अंजली कमरे मे लेती किसी से बातें करने मे लगी थी नंगी थी बुर मे उंगली किये जा रही थी

दूसरी तरफ सुमिता के ऊपर कोई लेता तेज धक्के मार रहा था सुमिता मुह बंद किये दर्द मे रोये जा रही थी तरप् रही थी

सुमिता उस इंसान को दूर धक्का देते हुवे - दर्द हो रहा है समझ नही आता आपको
वो आदमी गुस्से से सुमिता के बुर मे लंड घुसा के दोनों हाथ सुमिता को पकरे हुवे सुमिता को देख - सांत रह समझ गई


वही अंजली किसी से फोन पे - अमर जल्दी ही हमारी शादी होगी हम साथ रहेगे
अमर - मे तो बेताब हु मेरी जान तुमसे शादी करने के लिये
अंजली - बस अमर जल्दी ही हम एक होगे

सुबह होती है

साहिल सुनीता से जो बैठी थी खटिये पे - मामी दीदी नही आई
सुनीता - अरे वो आज आयेगी कल नही आ पाई कुछ वजह से
साहिल - अच्छा

अंजली खाना पास मे ही बैठी बना रही थी सुनीता भी आके साहिल के पास बैठ जाती है

कुनाल कमरे मे बाहर आके - अच्छा मे खेत होके आता हु

कुनाल चला जाता है

साम 3 बजे मौसम अच्छा था सुनीता अब ठीक थी सुमिता सुनीता खेत की तरफ घूमने जाते है बातें करते हुवे

सुनीता - नंदोई जी ठीक है ना अब करते है चुदाई आपकी
सुमिता सुनीता को बिना देखे नॉर्मल आवाज मे - कभी कभी
सुनीता - किया अभी भी पूरी तरह ठीक नही हुवे
सुमिता - हु

सुनीता रुक सुमिता को देख - जानती हु आप मुझसे गुस्से नफरत करती है आप सही भी है मे यही लायक हु लेकिन मे खुद को चालक समझती थी लेकिन मे खुद इस दलदल मे फस गई

सुमिता कुछ नही बोलती है लेकिन आखो मे गुस्सा साफ सुनीता के लिये दिख रहा था

सुनीता सुमिता फिर खेत मे चलते अंदर तक जाने लगते है

सुनीता - अब मुझे बुरा लगता है मेने आपके साथ जो किया गलत किया
सुमिता थोरा गुस्से मे - आपकी बातो मे आके मेने वो कदम उठाया मेरी बस से बरी गलती थी उस दिन मे खुद को रोक लेती आपकी बातो मे आके वो सब नही करती तो आज मे इतना सब नही सेहती मे ही पागल थी बेवकूफ थी गलती तो मेरी है जो मे खैर मे सब सेह रही हु मुझे बस इतना चाहिये मेरे बेटे को बता ना चले मेरे साथ किया हो रहा है ना मेरे पति बेटी को नही तो मे सब की नजर मे गिर जाउंगी उससे अच्छा मे मरना पसंद करुगी

सुनीता कुछ नही कहती चुप रहती है

थोरि देर चुपी के बाद सुनीता सुमिता के सामने खरी सुमिता के आखो मे देख - हा अपनी गलती मानती हु लेकिन ननद जी खाइये कसम अपने बेटे की और कहिये ये सच नही है कई बार आप खुद चुदने आई उस इंसान के नीचे लेटने आई अपनी प्यास भुजाने आई और तो और आप उस इंसान से पेग्नेंट भी हो गई लेकिन अपने समय रहते बच्चा गिरवा दिया बोलिये ये सच है या नही

सुमिता पूरी हिल जाती है नजरे नीचे किये - हा ये सच है, सुमिता फिर सुनीता को गुस्से से देख , लेकिन ये भी सच है आप की वजह से मे इस दलदल मे फसी हु नही तो आज मे जैसे भी जी रही होती बहोत खुश होती अब से तो बहोत खुश

सुनीता नजरे नीचे किये - आप सही है


साहिल आज फिर अकेले बैठा राधिमा को याद करके आसु बहा रहा था वही अंजली किसी के बिस्तर पे लेती तांगे फैलाये थी अंजली के उपर कोई लेता तेज धक्के मार रहा था

अंजली दर्द मे रोते हुवे - नही नही इतनी जोर से नही मर गई दर्द हो रहा हैं प्लेस दया करो मुझपे

खैर साम होती है घर के पीछे राघव सुमिता से अकेले मे बात कर रहा था सुमिता खरी सुनी रही थी

रात 9 बजे

साहिल के घर

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राघव कमरे मे किसी जवान लरकी के तांगे उठाये धक्के पे धक्के मारे जा रहा था लरकी दर्द मजे मे - आह सर दर्द हो रहा हो आह धीरे
राघव - उफ बेटी दर्द मे ही तो मजा है
राघव चुदाई करते हुवे - तेरी सील जब तोरी थी उफ मजा आ गया था


सुमिता साहिल के पीठ पीछे अकेले होने का फायेदा राघव अच्छे से उठा रहा था अपने घर मे जिस बिस्तर पे अपनी बीवी सुमिता को चोदता था उसी बिस्तर पे एक जवान लरकी को राघव चोद रहा था


साहिल के मामा के घर


रात 11 बज रहे थे एक कमरे मे दर्द रोने पायल की आवाजे गुज रही थी सुमिता की आवाज - मर गई प्लेस अंदर तक मत डालो मर जाउंगी

सुनीता -मजा भी तो आता है आपको दिखाती नही लेकिन ये आपकी बुर जो रस निकाल रही है बता रही है

तभी तेज धक्के के साथ दरवाजा खुलता है अंदर का सीन कुछ ऐसा था सुनीता नंगी बैठी थी बगल मे अंजली लेती थी नंगी

और सुमिता तांगे फिलाये थी बुर मे मोटा लम्बा लंड घुसा हुआ था सुमिता घोरी बनी थी उसके उपर कुनाल था

दरवाजा खुलते ही आवाज से कुनाल सुमिता सुनीता अंजली सब सामने देखते ही तो साहिल आखो मे आसु लिये गुस्से से कुनाल सुनीता को देख रहा था

वही सुमिता अंजली जम सी जाती है

सुमिता जो नही चाहती थी वही हो चुका था

आज के लिये इतना ही 🙏🙏🙏🙏🙏
 

Ek number

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सुबह 10 बज रहे थे साहिल सुमिता सब अपने कमरे मे रेडी होने मे लगे हुवे थे

साहिल रेडी भी हो चुका था आईने के सामने खरा सांत लेकिन मन उदास दिल मे दर्द लिये खरा था राधिमा को खोने के बाद साहिल के चेहरे से वो इस्माइल गायब हो गई थी मा पापा या किसी और के सामने साहिल हस्ता मुस्कुराता रहता लेकिन अंदर मे दर्द लिये रहता

सुमिता का भी सेम था दोनों मा बेटे की किस्मत मे दर्द ही दर्द सेहना लिखा है या कभी खुसिया भी आयेगी कोई नही जनता था

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सुमिता भी कमरे मे पेटीकोट मे खरी ब्लाउस निकाल रही थी पीछे गोरी चिकनी पीठ मस्त दिख रही थी सुमिता गहरी सोच मे डूबी हुई कपड़े निकलते हुवे पूरी नंगी हो जाती है बुर पे घने काले बाल गजब लग रहे थे

साहिल दरवाजे मे आके - मा कितना देर करोगी हद है मे तो रेडी भी हो गया

अंदर से सुमिता - कितना जल्दी मे हमेसा रहता है औरत को टाइम लगता ही है रेडी होने मे जब तेरी शादी होगी बीवी आयेगी तब बोलना उसे बरा आया

शादी बीवी ये शब्द साहिल को राधिमा की फिर से याद वो दर्द जगा देती है

साहिल राधिमा को बाहों मे लिये पेर के नीचे बैठा - राधिमा शादी करोगी मुझसे बनोगी मेरी बीवी

राधिमा अजीब नजर से थोरा गुस्से से साहिल को देख - मेने प्यार तुमसे कियु किया बोलो तुम भी ना साहिल बेवकूफ हो बहोत मेने तो कई सपने तुमहारे साथ सजाये है

साहिल मुस्कुराते हुवे - अच्छा उस सपने मे हमारे कितने बच्चे है
राधिमा बुरी तरह सर्म से लाल होते हुवे साहिल के सीने पे दोनों हाथो से मरते हुवे - छी कितने बेसरम हो तुम गंदे
साहिल हस्ते हुवे - अरे मेने गलत तो नही कहा

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तभी सुमिता बाहर आते हुवे साहिल को देख मुस्कुरा के - बता मे कैसी लग रही हु
साहिल होस मे आते हुवे सुमिता को उपर से नीचे तक देखते हुवे - बहोत खूबसूरत लग रही है
सुमिता सच मे बहोत खूबसूरत होत लग रही थी सारी मे
सुमिता मुह बना के साहिल को देख - कभी तो अच्छे से मेरी तारीफ कर दिया कर ये सरा मुह बना के कोन तारीफ करता है

साहिल - हद है मा ये सब बातें छोरो चलो चलते है
सुमिता - हा हा ठीक है

राघव तो 9 बजे ही अपने स्कूल पढाने चला गया था

साहिल बाइक निकलता है सुमिता पीछे बैठ जाती है एक हाथ साहिल के कंधे मे रख के

साहिल - चले
सुमिता - हु

साहिल निकल परता है अपने मा के घर जो 30 मिनट लगने वाले थे

सुमिता बाइक मे पीछे बैठी हुई थी लेकिन वहा जाके जो होने वाला था उसे सोच सुमिता बहोत डरी घबराये हुवे थी

सुमिता किस्मत मान किस्मत पे छोर देती है

सुमिता नजारे देखते हुवे - बेटा तेरी बेहन की उमर हो गई है कोई लरका देख शादी करनी परेगी उसके बाद तेरी

साहिल बाइक चलते नॉर्मल आवाज मे - दीदी की शादी कर दो पहले बाद मे मेरे बरे मे सोचना

सुमिता - कियु तुझे शादी नही करनी है
साहिल कुछ देर चुप रहने के बाद - मामी की तबियत खराब है कुछ लेके जाना है
सुमिता मन मे - फिर बाद को बदल दिया इस लरके ने
सुमिता - हा रास्ते मे कुछ फल ले लेगे

हरिपुर गाव - साहिल के मामा का घर

एक कमरे मे

तांगे फैलाओ ना यार अच्छे से पुरा अंदर नही जा पा रहा
अंजली रोते हुवे किसी को देख - नही प्लेस दर्द हो रहा है पुरा अंदर नही इतने मे कर लो
अंजान अंजली की दोनों टांगों को पकर फैलाने लगता है तो अंजली पूरी ताकत से अपने दोनों जांघों को सताये रखने की पूरी कोसिस करती है
अंजान अंजली को देखते हुवे थोरा गुस्से से - जांघे फैलाओ मेने कहा
अंजली सामने इंसान को गुस्से मे देख तांगे फैलाते हुवे रोते डरते हुवे चेहरे के साथ - प्लेस धीरे करना
अंजान - ठीक है समझ गया

वही साहिल सुमिता आधे रास्ते मे थे गाव का रास्ता था खेत ही खेत चारों तरफ थे सुमिता पीछे बैठी खेत की तरफ देखते जा रही थी तभी एक खेत आता है जिसे देख सुमिता सिहर काप् जाती है सासे उपर नीचे होने लगती है सुमिता के हाथ साहिल के कंघे पे कस जाते है दूसरा हाथ की मुठी कस जाती है

बाइक तेजी से उस खेत से होते आगे निकल जाता है लेकिन सुमिता की नजर उस खेत पे ही थी

खेत वाला रास्ता पार करते ही एक छोटा सा चौक आता है साहिल को एक फल वाला ठेले दिखाई देता है तो साहिल ठेले वाले के पास बाइक रोक देता है

सुमिता बाइक से नीचे उतर जाती है साहिल फल वाले से सेब केला अनार लेता है फिर साहिल सुमिता 10 मिनट मे पहुँच जाते है

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बाइक की आवाज सुन अंजली बाहर आती है साहिल अपनी मा को देख अंजली बहोत खुश होती है अंजली ने टाइट सूट सलवार पहनी हुई थी और अंजली के दोनों टाइट बरे गोरे चुचे अंदर दबे हुवे आधे तो साफ दिख रहे थे और उभार भी साफ देख कर अंदाज़ा लगाया जा सकता है कितने बरे चुचे होगे

अंजली थोरा लंगराते हुवे साहिल ले पास आके गले लगते हुवे - हा गया मेरा प्यारा भाई

साहिल भी अंजली के गले लगते हुवे - जी दीदी आ गये हम

कुनाल भी बाहर आते हुवे सुमिता साहिल को देख - आ गये चलो अंदर चलते है

साहिल कुनाल के पैर छुटे हुवे - मामा
राघव साहिल को गले लगाते हुवे - मेरा भांजे गले लगते है तू तो मेरा सेर है

कुनाल सुमिता को देखते हुवे -मेरी प्यारी बहना कैसी है
सुमिता - जी ठीक हु भाई

सभी एक कमरे मे जाते है जिस कमरे मे सुनीता लेती हुई थी

सुनीता सुमिता साहिल को देखते हुवे - ओ देखो तो कोन आया है
साहिल सुनीता को के पास बैठ - मामी कैसी है आप अभी
सुनीता साहिल को प्यार से देखते हुवे - ठीक हु बेटा बस थोरा बुखार है
सुमिता भी पास मे बैठते हुवे - भाभी जयादा तबियत खराब है तो होस्पिटल ले चलते है
सुनीता सुमिता को देखते हुवे - अरे नही पहले से बहोत अच्छी हु बस बुखार ही तो है

सुनीता साहिल से - बेटा बहोत हैंडसम होते जा रहा है लगता है हमे तेरे लिये कोई लरकी ढूंढने की जरूरत ही नही पड़ेगी

अंजली मुस्कुराते हुवे - और नही तो किया मेरा भाई इतना हैंडसम है की लरकिया खुद आयेगी
कुनाल - अरे यार ऐसा हुआ तो अच्छा ही है लेकिन मेने सोचा था मे अपने भांजे ले लिये लरकी ढूंढूंगा

सुमिता मुस्कुराते हुवे साहिल के सर पे हाथ फेरते हुवे प्यार से - मेरे बेटे की किस्मत मे जो लरकी लिखी होगी वो मिल ही जायेगी

साहिल अंदर ही अंदर दर्द भरी आवाज मे - नही मा मेरी किस्मत मे जो लरकी लिखी थी उसे किस्मत ने ही मुझसे छीन लिया है

साहिल नॉर्मल सब के सामने बैठ बातें करता है फिर 10 मिनट बाद सब को बातें करते छोर गाव घुमने निकल जाता है

साहिल के लाइफ से खुसिया चली गई थी बेजान की गाव ले पतले रास्ते से होते जा रहा था अपने मे खोया तभी कोई आवाज देते हुवे - देवर जी कई महीने बाद आये बिना मुझसे मिले जा रहे है ये उमीद तो आपसे नही थी

साहिल उस आवाज को सुनते ही मन मे - कहा फस गया यार

साहिल पीछे मूर उस औरत को मुस्कुराते हुवे देख - भाभी माफ करना मे तो सोचा गाव घूम लेता हु आते टाइम आपसे मिल लूंगा

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सामने खरी थी सारी मे एक 20 साल की खूबसूरत औरत जो साहिल को कातिल निगाहों से अदा से देखे जा रही थी
नाम है सुमन की शादी एक साल पहले हुई है

सुमन साहिल के पास आके मस्ती भरे अंदाज़ मे - उफ कैसे देवर है आप लोग भाभी के पीछे परे रहते है लेकिन एक आप है मुझपे ध्यान ही नही देते इंग्नोर कर देते है

साहिल सांत खरा मुस्कुराते हुवे सुमन को देख - आपका ध्यान ख्याल रखने के लिये भैया है मे नही

सुमन साहिल के एकदम पास खरी होके साहिल के आखो मे देखते हुवे - आपके भैया तो है लेकिन आप भी मेरा ख्याल रखेगे तो और मजा आयेगा मुझे

साहिल पीछे हटते हुवे - कितनी बेसरम है आप सर्म कीजिये
साहिल फिर तेजी से भाग जाता है

सुमन साहिल को भागते देख जोर जोर से हस्ते हुवे - कितना प्यारा मासूम है इस लिये तो आपसे मस्ती करने मे अलग ही मजा आता है भाग गये अगली बार जाने नही दुगी

साहिल घूमते घूमते गाव से गाव से निकल सांत एक पेर के नीचे बैठ फिर राधिमा के गम मे डूब जाता है राधिमा का मुस्कुराता चेहरा साहिल को बार बार याद आता ही रहता था लेकिन एक वो पल जब राधिमा खून से लतपथ साहिल के बाहों मे अपना दम तोर देती है वो मंजर साहिल को रात को सोने नही देता था जब से राधिमा गई साहिल ना खुश है ना चैन से सो पाता है

साहिल बहोत हैंडसम अच्छे साफ दिल का लरका है राधिमा के अलावा कभी भी किसी को प्यार या गंदी नजर से नही देखा

साम 3 बजे

सुमिता घर के बाहर खरी थी कोई आता है बाइक से और सुमिता को बैठा के लेके चला जाता है सुमिता डरी सहमी बैठी थी ऐसा लग रहा था अब वो रो देगी बाइक जो चला रहा था सुमिता को देख मुस्कुरा रहा था

8 मिनट बाद बाइक एक मेडिकल स्टोर के पास रुकती है

बाइक वाला सुमिता को देखते हुवे मुस्कुरा के - कोन सा कॉंडोम लू
सुमिता नजरे नीचे किये अपनी मुठी कसे कपते होठो से रोने वाली आवाज मे धीरे से - जो जो

बाइक वाला पैसे निकाल सुमिता के हाथो मे देते हुवे - हु जाओ लेके आओ खुद

सुमिता हैरान बाइक वाले को देख रोने सी आवाज मे - प्लेस मत करो ऐसा
बाइक वाला शैतानी मुस्कान देते हुवे सुमिता को देख - जाओ नही तो मे किसी और के पास चला जाउंगा

सुमिता बाइक वाले की बात सुन समझ पूरी तरह काप् डर जाती है
सुमिता डरते हुवे नजरे नीचे किये - नही नही मे जाती हु
बाइक वाला मुस्कुराते हुवे - बहोत खूब ये हुलिया सही करके जाओ

सुमिता खुद को नॉर्मल करती है ताकि कोई देख तो सब नॉर्मल लगे

सुमिता मेडिकल स्टोर को देखती है कुछ लोग खरे थे इस लिये सुमिता जा नही पा रही थी

बाइक वाला सब देख समझ रहा था लेकिन वो ये सब देख मजे ले रहा था

मेडिकल स्टोर से लोग चले जाते है जब कोई नही था तब सुमिता चलते हुवे मेडिकल स्टोर मे आती है पीछे खरा बाइक वाला अपने लंड को सेहलते हुवे - उफ अब मजा आयेगा सोचा था रात को अच्छे से लुगा लेकिन रहा नही गया

सुमिता मेडिकल स्टोर वाले के पास खरी थी सांत थोरा सर्म लिये बोलने की हिम्मत नही हो रही थी

स्टोर वाला सुमिता को देख - भाभी कुछ चाहिये आपको
सुमिता स्टोर वाले को देख फिर नजरे नीचे लरके हिम्मत करके धीरे से से - वो वो कॉंडोम चाहिये

स्टोर वाला सुन थोरा हैरान होता है और सुमिता को उपर से नीचे तक देखते हुवे मन मे - किया माल है यार कयामत है कोन किस्मत वाला है जो इसकी लेने वाला है उफ

स्टोर वाला - जी कोन सा दु कॉंडोम
सुमिता नजरे नीचे किये मुठी कसते हुवे - Durex
स्टोर वाला मन मे - उफ ये कॉंडोम जायेगा इसकी बुर मे अंदर तक उफ सोच रहा हु कैसी बुर होगी भाभी की
स्टोर वाला सुमिता को गोर से देखते हुवे धीरे से - भाभी जी नया एक कॉंडोम आया है वो देदु बहोत मजा आयेगा

स्टोर वाली की बात सुन सुमिता पूरी शोक हैरान होती है और गुस्से से स्टोर वाले को देख - जो बोला है जो दो ये लो पैसे , सुमिता पैसे सामने रख देती है
स्टोर वाला डर जाता है और जल्दी से Durex का पेकेट निकाल दे देता है सुमिता ले लेती है और गुस्से से बाहर बाइक वाले के पास आती है फिर बाइक वाला बिना देरी किये एक घर के कमरे मे सुमिता को लेके आता है

बाइक वाला सुमिता को पीछे से बाहों मे भरते हुवे - बहोत तरस रहा था अब आई हो
सुमिता खरी काप् रही थी रोने वैसा मुह बनाये खरी अपनी किस्मत को कोस रही थी

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बाइक वाला सुमिता के सारी सीने से हटा के अपना एक हाथ सुमिता के ब्लाउस के ऊपर से बरे एक चुचे पे रखते हुवे - आते वक़्त उस खेत को देखा ही होगा जिस खेत मे तेरी मस्त बुर मारी थी हु
सुमिता अपने चुचे पे बाइक वाले का हाथ फिल करते ही काप् जाती है आखो से आसु निकल आते है होठ बॉडी काप् रहे थे
30 मिनट बाद

सुमिता दर्द मे आसु लिये लंगराते हुवे बाहर आती है खुद को पूरी तरह सही करके

बाइक वाला सुमिता को बाइक पे बैठा के फिर घर के बाहर छोर चला जाता है

सुमिता दर्द मे थोरा लंगराते हुवे अंदर आती है तो साहिल आगन मे बैठा सुमिता को देख - मा कहा गई थी आप

सुमिता साहिल को देख उसकी बात सुन घबरा जाती है लेकिन जल्दी ही खुद को संभलते हुवे - अरे बेटा अपनी दोस्तो से मिलने गई थी

साहिल - अच्छा
सुमिता नजरे बचाते हुवे सुनीता के कमरे मे चली जाती है

रात 8 बजे

खाना खाने सब बैठे हुवे थे सुमिता के पास साहिल अजलि थी
दूसरी तरफ राघव सुनीता

कुनाल सुमिता से - छोटी अंजली की उमर हो गई है शादी कर देते है मेरी नजर मे एक लरका है किया कहती हो
सुमिता राघव को देख - भैया मुझे साहिल के पापा से बात करनी होगी शादी तो करनी ही है

अंजली चुप चाप खाना खाने मे लगी थी साहिल बेचारा भी अपने मे था
सुनीता कुनाल से - सुनिये आप खुद नंदुई जी से बात कर लेना ना
कुनाल खाना खाते हुवे - ठीक है ये सही रहेगा

खाना पीना होने के बाद साहिल सीधा अपने कमरे मे आके बिस्तर पे लेत फिर गम राधिमा की यादों मे चला जाता है

तभी अंजली आके साहिल के पास बैठ - कहा खोया हुआ है कोई गिर्लफ्रेंड की यादों मे तो नही

अंजली एकदम सही थी साहिल अपने प्यार की यादों मे खोया था लेकिन गम मे वो प्यार दुनिया छोर जा चुकी थी

साहिल अंजली को देख नॉर्मल आवाज मे - आप बनाओ बॉयफ्रेंड मुझे नही चाहिये

अंजली हैरान होके साहिल को देख - अच्छा जी झूठा
साहिल - सोने दो मुझे आप भी जाके सो जाओ
अंजली साहिल को गोर से देखते हुवे - भाई तु बदल गया है पहले खूब मस्ती करता था लेकिन अब

अंजली खरी होके एक बार साहिल को देखती है फिर चली जाती है

अंजली के जाने के बाद सुमिता नाइटी मे आती है और साहिल के पास बैठ साहिल को देख - बेटा कहा खोया रहता है मुझे हमेसा लगता है तू कुछ छुपा रहा है मुझसे

साहिल सुमिता को देख - आपको ऐसा कियु लगता है मा
सुमिता - बस फिल होता है मा हु तेरी
साहिल - ऐसी कुछ बात नही है
साहिल फिर दूसरी तरफ करवट लेके सोने लगता है
सुमिता साहिल को देख मन मे - बेटा मे सुरु से चाहती थी तू मेरे साथ मस्ती करे एक दोस्त की तरह लेकिन तू ऐसा नही है सुरु से मुझसे नॉर्मल हल्का बातें करते रहा है प्यार कैर बहोत करता ही लेकिन

सुमिता खरी होके एक नजर साहिल को देख जाते हुवे मन मे - मे चाहती हु तुम मेरे साथ वक़्त बिताओ बातें करो

सुमिता अकेला पन फिल हमेसा करती थी इस लिये चाहती थी उसका बेटा उसे समय दे बातें करे मस्ती करे

रात 11 बजे

अंजली कमरे मे लेती किसी से बातें करने मे लगी थी नंगी थी बुर मे उंगली किये जा रही थी

दूसरी तरफ सुमिता के ऊपर कोई लेता तेज धक्के मार रहा था सुमिता मुह बंद किये दर्द मे रोये जा रही थी तरप् रही थी

सुमिता उस इंसान को दूर धक्का देते हुवे - दर्द हो रहा है समझ नही आता आपको
वो आदमी गुस्से से सुमिता के बुर मे लंड घुसा के दोनों हाथ सुमिता को पकरे हुवे सुमिता को देख - सांत रह समझ गई


वही अंजली किसी से फोन पे - अमर जल्दी ही हमारी शादी होगी हम साथ रहेगे
अमर - मे तो बेताब हु मेरी जान तुमसे शादी करने के लिये
अंजली - बस अमर जल्दी ही हम एक होगे

सुबह होती है

साहिल सुनीता से जो बैठी थी खटिये पे - मामी दीदी नही आई
सुनीता - अरे वो आज आयेगी कल नही आ पाई कुछ वजह से
साहिल - अच्छा

अंजली खाना पास मे ही बैठी बना रही थी सुनीता भी आके साहिल के पास बैठ जाती है

कुनाल कमरे मे बाहर आके - अच्छा मे खेत होके आता हु

कुनाल चला जाता है

साम 3 बजे मौसम अच्छा था सुनीता अब ठीक थी सुमिता सुनीता खेत की तरफ घूमने जाते है बातें करते हुवे

सुनीता - नंदोई जी ठीक है ना अब करते है चुदाई आपकी
सुमिता सुनीता को बिना देखे नॉर्मल आवाज मे - कभी कभी
सुनीता - किया अभी भी पूरी तरह ठीक नही हुवे
सुमिता - हु

सुनीता रुक सुमिता को देख - जानती हु आप मुझसे गुस्से नफरत करती है आप सही भी है मे यही लायक हु लेकिन मे खुद को चालक समझती थी लेकिन मे खुद इस दलदल मे फस गई

सुमिता कुछ नही बोलती है लेकिन आखो मे गुस्सा साफ सुनीता के लिये दिख रहा था

सुनीता सुमिता फिर खेत मे चलते अंदर तक जाने लगते है

सुनीता - अब मुझे बुरा लगता है मेने आपके साथ जो किया गलत किया
सुमिता थोरा गुस्से मे - आपकी बातो मे आके मेने वो कदम उठाया मेरी बस से बरी गलती थी उस दिन मे खुद को रोक लेती आपकी बातो मे आके वो सब नही करती तो आज मे इतना सब नही सेहती मे ही पागल थी बेवकूफ थी गलती तो मेरी है जो मे खैर मे सब सेह रही हु मुझे बस इतना चाहिये मेरे बेटे को बता ना चले मेरे साथ किया हो रहा है ना मेरे पति बेटी को नही तो मे सब की नजर मे गिर जाउंगी उससे अच्छा मे मरना पसंद करुगी

सुनीता कुछ नही कहती चुप रहती है

थोरि देर चुपी के बाद सुनीता सुमिता के सामने खरी सुमिता के आखो मे देख - हा अपनी गलती मानती हु लेकिन ननद जी खाइये कसम अपने बेटे की और कहिये ये सच नही है कई बार आप खुद चुदने आई उस इंसान के नीचे लेटने आई अपनी प्यास भुजाने आई और तो और आप उस इंसान से पेग्नेंट भी हो गई लेकिन अपने समय रहते बच्चा गिरवा दिया बोलिये ये सच है या नही

सुमिता पूरी हिल जाती है नजरे नीचे किये - हा ये सच है, सुमिता फिर सुनीता को गुस्से से देख , लेकिन ये भी सच है आप की वजह से मे इस दलदल मे फसी हु नही तो आज मे जैसे भी जी रही होती बहोत खुश होती अब से तो बहोत खुश

सुनीता नजरे नीचे किये - आप सही है


साहिल आज फिर अकेले बैठा राधिमा को याद करके आसु बहा रहा था वही अंजली किसी के बिस्तर पे लेती तांगे फैलाये थी अंजली के उपर कोई लेता तेज धक्के मार रहा था

अंजली दर्द मे रोते हुवे - नही नही इतनी जोर से नही मर गई दर्द हो रहा हैं प्लेस दया करो मुझपे

खैर साम होती है घर के पीछे राघव सुमिता से अकेले मे बात कर रहा था सुमिता खरी सुनी रही थी

रात 9 बजे

साहिल के घर

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राघव कमरे मे किसी जवान लरकी के तांगे उठाये धक्के पे धक्के मारे जा रहा था लरकी दर्द मजे मे - आह सर दर्द हो रहा हो आह धीरे
राघव - उफ बेटी दर्द मे ही तो मजा है
राघव चुदाई करते हुवे - तेरी सील जब तोरी थी उफ मजा आ गया था


सुमिता साहिल के पीठ पीछे अकेले होने का फायेदा राघव अच्छे से उठा रहा था अपने घर मे जिस बिस्तर पे अपनी बीवी सुमिता को चोदता था उसी बिस्तर पे एक जवान लरकी को राघव चोद रहा था


साहिल के मामा के घर


रात 11 बज रहे थे एक कमरे मे दर्द रोने पायल की आवाजे गुज रही थी सुमिता की आवाज - मर गई प्लेस अंदर तक मत डालो मर जाउंगी

सुनीता -मजा भी तो आता है आपको दिखाती नही लेकिन ये आपकी बुर जो रस निकाल रही है बता रही है

तभी तेज धक्के के साथ दरवाजा खुलता है अंदर का सीन कुछ ऐसा था सुनीता नंगी बैठी थी बगल मे अंजली लेती थी नंगी

और सुमिता तांगे फिलाये थी बुर मे मोटा लम्बा लंड घुसा हुआ था सुमिता घोरी बनी थी उसके उपर कुनाल था

दरवाजा खुलते ही आवाज से कुनाल सुमिता सुनीता अंजली सब सामने देखते ही तो साहिल आखो मे आसु लिये गुस्से से कुनाल सुनीता को देख रहा था

वही सुमिता अंजली जम सी जाती है

सुमिता जो नही चाहती थी वही हो चुका था

आज के लिये इतना ही 🙏🙏🙏🙏🙏
Nice update
 

Naughtyrishabh

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chapter 2

सुबह 10 बज रहे थे साहिल सुमिता सब अपने कमरे मे रेडी होने मे लगे हुवे थे

साहिल रेडी भी हो चुका था आईने के सामने खरा सांत लेकिन मन उदास दिल मे दर्द लिये खरा था राधिमा को खोने के बाद साहिल के चेहरे से वो इस्माइल गायब हो गई थी मा पापा या किसी और के सामने साहिल हस्ता मुस्कुराता रहता लेकिन अंदर मे दर्द लिये रहता

सुमिता का भी सेम था दोनों मा बेटे की किस्मत मे दर्द ही दर्द सेहना लिखा है या कभी खुसिया भी आयेगी कोई नही जनता था

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सुमिता भी कमरे मे पेटीकोट मे खरी ब्लाउस निकाल रही थी पीछे गोरी चिकनी पीठ मस्त दिख रही थी सुमिता गहरी सोच मे डूबी हुई कपड़े निकलते हुवे पूरी नंगी हो जाती है बुर पे घने काले बाल गजब लग रहे थे

साहिल दरवाजे मे आके - मा कितना देर करोगी हद है मे तो रेडी भी हो गया

अंदर से सुमिता - कितना जल्दी मे हमेसा रहता है औरत को टाइम लगता ही है रेडी होने मे जब तेरी शादी होगी बीवी आयेगी तब बोलना उसे बरा आया

शादी बीवी ये शब्द साहिल को राधिमा की फिर से याद वो दर्द जगा देती है

साहिल राधिमा को बाहों मे लिये पेर के नीचे बैठा - राधिमा शादी करोगी मुझसे बनोगी मेरी बीवी

राधिमा अजीब नजर से थोरा गुस्से से साहिल को देख - मेने प्यार तुमसे कियु किया बोलो तुम भी ना साहिल बेवकूफ हो बहोत मेने तो कई सपने तुमहारे साथ सजाये है

साहिल मुस्कुराते हुवे - अच्छा उस सपने मे हमारे कितने बच्चे है
राधिमा बुरी तरह सर्म से लाल होते हुवे साहिल के सीने पे दोनों हाथो से मरते हुवे - छी कितने बेसरम हो तुम गंदे
साहिल हस्ते हुवे - अरे मेने गलत तो नही कहा

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तभी सुमिता बाहर आते हुवे साहिल को देख मुस्कुरा के - बता मे कैसी लग रही हु
साहिल होस मे आते हुवे सुमिता को उपर से नीचे तक देखते हुवे - बहोत खूबसूरत लग रही है
सुमिता सच मे बहोत खूबसूरत होत लग रही थी सारी मे
सुमिता मुह बना के साहिल को देख - कभी तो अच्छे से मेरी तारीफ कर दिया कर ये सरा मुह बना के कोन तारीफ करता है

साहिल - हद है मा ये सब बातें छोरो चलो चलते है
सुमिता - हा हा ठीक है

राघव तो 9 बजे ही अपने स्कूल पढाने चला गया था

साहिल बाइक निकलता है सुमिता पीछे बैठ जाती है एक हाथ साहिल के कंधे मे रख के

साहिल - चले
सुमिता - हु

साहिल निकल परता है अपने मा के घर जो 30 मिनट लगने वाले थे

सुमिता बाइक मे पीछे बैठी हुई थी लेकिन वहा जाके जो होने वाला था उसे सोच सुमिता बहोत डरी घबराये हुवे थी

सुमिता किस्मत मान किस्मत पे छोर देती है

सुमिता नजारे देखते हुवे - बेटा तेरी बेहन की उमर हो गई है कोई लरका देख शादी करनी परेगी उसके बाद तेरी

साहिल बाइक चलते नॉर्मल आवाज मे - दीदी की शादी कर दो पहले बाद मे मेरे बरे मे सोचना

सुमिता - कियु तुझे शादी नही करनी है
साहिल कुछ देर चुप रहने के बाद - मामी की तबियत खराब है कुछ लेके जाना है
सुमिता मन मे - फिर बाद को बदल दिया इस लरके ने
सुमिता - हा रास्ते मे कुछ फल ले लेगे

हरिपुर गाव - साहिल के मामा का घर

एक कमरे मे

तांगे फैलाओ ना यार अच्छे से पुरा अंदर नही जा पा रहा
अंजली रोते हुवे किसी को देख - नही प्लेस दर्द हो रहा है पुरा अंदर नही इतने मे कर लो
अंजान अंजली की दोनों टांगों को पकर फैलाने लगता है तो अंजली पूरी ताकत से अपने दोनों जांघों को सताये रखने की पूरी कोसिस करती है
अंजान अंजली को देखते हुवे थोरा गुस्से से - जांघे फैलाओ मेने कहा
अंजली सामने इंसान को गुस्से मे देख तांगे फैलाते हुवे रोते डरते हुवे चेहरे के साथ - प्लेस धीरे करना
अंजान - ठीक है समझ गया

वही साहिल सुमिता आधे रास्ते मे थे गाव का रास्ता था खेत ही खेत चारों तरफ थे सुमिता पीछे बैठी खेत की तरफ देखते जा रही थी तभी एक खेत आता है जिसे देख सुमिता सिहर काप् जाती है सासे उपर नीचे होने लगती है सुमिता के हाथ साहिल के कंघे पे कस जाते है दूसरा हाथ की मुठी कस जाती है

बाइक तेजी से उस खेत से होते आगे निकल जाता है लेकिन सुमिता की नजर उस खेत पे ही थी

खेत वाला रास्ता पार करते ही एक छोटा सा चौक आता है साहिल को एक फल वाला ठेले दिखाई देता है तो साहिल ठेले वाले के पास बाइक रोक देता है

सुमिता बाइक से नीचे उतर जाती है साहिल फल वाले से सेब केला अनार लेता है फिर साहिल सुमिता 10 मिनट मे पहुँच जाते है

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बाइक की आवाज सुन अंजली बाहर आती है साहिल अपनी मा को देख अंजली बहोत खुश होती है अंजली ने टाइट सूट सलवार पहनी हुई थी और अंजली के दोनों टाइट बरे गोरे चुचे अंदर दबे हुवे आधे तो साफ दिख रहे थे और उभार भी साफ देख कर अंदाज़ा लगाया जा सकता है कितने बरे चुचे होगे

अंजली थोरा लंगराते हुवे साहिल ले पास आके गले लगते हुवे - हा गया मेरा प्यारा भाई

साहिल भी अंजली के गले लगते हुवे - जी दीदी आ गये हम

कुनाल भी बाहर आते हुवे सुमिता साहिल को देख - आ गये चलो अंदर चलते है

साहिल कुनाल के पैर छुटे हुवे - मामा
राघव साहिल को गले लगाते हुवे - मेरा भांजे गले लगते है तू तो मेरा सेर है

कुनाल सुमिता को देखते हुवे -मेरी प्यारी बहना कैसी है
सुमिता - जी ठीक हु भाई

सभी एक कमरे मे जाते है जिस कमरे मे सुनीता लेती हुई थी

सुनीता सुमिता साहिल को देखते हुवे - ओ देखो तो कोन आया है
साहिल सुनीता को के पास बैठ - मामी कैसी है आप अभी
सुनीता साहिल को प्यार से देखते हुवे - ठीक हु बेटा बस थोरा बुखार है
सुमिता भी पास मे बैठते हुवे - भाभी जयादा तबियत खराब है तो होस्पिटल ले चलते है
सुनीता सुमिता को देखते हुवे - अरे नही पहले से बहोत अच्छी हु बस बुखार ही तो है

सुनीता साहिल से - बेटा बहोत हैंडसम होते जा रहा है लगता है हमे तेरे लिये कोई लरकी ढूंढने की जरूरत ही नही पड़ेगी

अंजली मुस्कुराते हुवे - और नही तो किया मेरा भाई इतना हैंडसम है की लरकिया खुद आयेगी
कुनाल - अरे यार ऐसा हुआ तो अच्छा ही है लेकिन मेने सोचा था मे अपने भांजे ले लिये लरकी ढूंढूंगा

सुमिता मुस्कुराते हुवे साहिल के सर पे हाथ फेरते हुवे प्यार से - मेरे बेटे की किस्मत मे जो लरकी लिखी होगी वो मिल ही जायेगी

साहिल अंदर ही अंदर दर्द भरी आवाज मे - नही मा मेरी किस्मत मे जो लरकी लिखी थी उसे किस्मत ने ही मुझसे छीन लिया है

साहिल नॉर्मल सब के सामने बैठ बातें करता है फिर 10 मिनट बाद सब को बातें करते छोर गाव घुमने निकल जाता है

साहिल के लाइफ से खुसिया चली गई थी बेजान की गाव ले पतले रास्ते से होते जा रहा था अपने मे खोया तभी कोई आवाज देते हुवे - देवर जी कई महीने बाद आये बिना मुझसे मिले जा रहे है ये उमीद तो आपसे नही थी

साहिल उस आवाज को सुनते ही मन मे - कहा फस गया यार

साहिल पीछे मूर उस औरत को मुस्कुराते हुवे देख - भाभी माफ करना मे तो सोचा गाव घूम लेता हु आते टाइम आपसे मिल लूंगा

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सामने खरी थी सारी मे एक 20 साल की खूबसूरत औरत जो साहिल को कातिल निगाहों से अदा से देखे जा रही थी
नाम है सुमन की शादी एक साल पहले हुई है

सुमन साहिल के पास आके मस्ती भरे अंदाज़ मे - उफ कैसे देवर है आप लोग भाभी के पीछे परे रहते है लेकिन एक आप है मुझपे ध्यान ही नही देते इंग्नोर कर देते है

साहिल सांत खरा मुस्कुराते हुवे सुमन को देख - आपका ध्यान ख्याल रखने के लिये भैया है मे नही

सुमन साहिल के एकदम पास खरी होके साहिल के आखो मे देखते हुवे - आपके भैया तो है लेकिन आप भी मेरा ख्याल रखेगे तो और मजा आयेगा मुझे

साहिल पीछे हटते हुवे - कितनी बेसरम है आप सर्म कीजिये
साहिल फिर तेजी से भाग जाता है

सुमन साहिल को भागते देख जोर जोर से हस्ते हुवे - कितना प्यारा मासूम है इस लिये तो आपसे मस्ती करने मे अलग ही मजा आता है भाग गये अगली बार जाने नही दुगी

साहिल घूमते घूमते गाव से गाव से निकल सांत एक पेर के नीचे बैठ फिर राधिमा के गम मे डूब जाता है राधिमा का मुस्कुराता चेहरा साहिल को बार बार याद आता ही रहता था लेकिन एक वो पल जब राधिमा खून से लतपथ साहिल के बाहों मे अपना दम तोर देती है वो मंजर साहिल को रात को सोने नही देता था जब से राधिमा गई साहिल ना खुश है ना चैन से सो पाता है

साहिल बहोत हैंडसम अच्छे साफ दिल का लरका है राधिमा के अलावा कभी भी किसी को प्यार या गंदी नजर से नही देखा

साम 3 बजे

सुमिता घर के बाहर खरी थी कोई आता है बाइक से और सुमिता को बैठा के लेके चला जाता है सुमिता डरी सहमी बैठी थी ऐसा लग रहा था अब वो रो देगी बाइक जो चला रहा था सुमिता को देख मुस्कुरा रहा था

8 मिनट बाद बाइक एक मेडिकल स्टोर के पास रुकती है

बाइक वाला सुमिता को देखते हुवे मुस्कुरा के - कोन सा कॉंडोम लू
सुमिता नजरे नीचे किये अपनी मुठी कसे कपते होठो से रोने वाली आवाज मे धीरे से - जो जो

बाइक वाला पैसे निकाल सुमिता के हाथो मे देते हुवे - हु जाओ लेके आओ खुद

सुमिता हैरान बाइक वाले को देख रोने सी आवाज मे - प्लेस मत करो ऐसा
बाइक वाला शैतानी मुस्कान देते हुवे सुमिता को देख - जाओ नही तो मे किसी और के पास चला जाउंगा

सुमिता बाइक वाले की बात सुन समझ पूरी तरह काप् डर जाती है
सुमिता डरते हुवे नजरे नीचे किये - नही नही मे जाती हु
बाइक वाला मुस्कुराते हुवे - बहोत खूब ये हुलिया सही करके जाओ

सुमिता खुद को नॉर्मल करती है ताकि कोई देख तो सब नॉर्मल लगे

सुमिता मेडिकल स्टोर को देखती है कुछ लोग खरे थे इस लिये सुमिता जा नही पा रही थी

बाइक वाला सब देख समझ रहा था लेकिन वो ये सब देख मजे ले रहा था

मेडिकल स्टोर से लोग चले जाते है जब कोई नही था तब सुमिता चलते हुवे मेडिकल स्टोर मे आती है पीछे खरा बाइक वाला अपने लंड को सेहलते हुवे - उफ अब मजा आयेगा सोचा था रात को अच्छे से लुगा लेकिन रहा नही गया

सुमिता मेडिकल स्टोर वाले के पास खरी थी सांत थोरा सर्म लिये बोलने की हिम्मत नही हो रही थी

स्टोर वाला सुमिता को देख - भाभी कुछ चाहिये आपको
सुमिता स्टोर वाले को देख फिर नजरे नीचे लरके हिम्मत करके धीरे से से - वो वो कॉंडोम चाहिये

स्टोर वाला सुन थोरा हैरान होता है और सुमिता को उपर से नीचे तक देखते हुवे मन मे - किया माल है यार कयामत है कोन किस्मत वाला है जो इसकी लेने वाला है उफ

स्टोर वाला - जी कोन सा दु कॉंडोम
सुमिता नजरे नीचे किये मुठी कसते हुवे - Durex
स्टोर वाला मन मे - उफ ये कॉंडोम जायेगा इसकी बुर मे अंदर तक उफ सोच रहा हु कैसी बुर होगी भाभी की
स्टोर वाला सुमिता को गोर से देखते हुवे धीरे से - भाभी जी नया एक कॉंडोम आया है वो देदु बहोत मजा आयेगा

स्टोर वाली की बात सुन सुमिता पूरी शोक हैरान होती है और गुस्से से स्टोर वाले को देख - जो बोला है जो दो ये लो पैसे , सुमिता पैसे सामने रख देती है
स्टोर वाला डर जाता है और जल्दी से Durex का पेकेट निकाल दे देता है सुमिता ले लेती है और गुस्से से बाहर बाइक वाले के पास आती है फिर बाइक वाला बिना देरी किये एक घर के कमरे मे सुमिता को लेके आता है

बाइक वाला सुमिता को पीछे से बाहों मे भरते हुवे - बहोत तरस रहा था अब आई हो
सुमिता खरी काप् रही थी रोने वैसा मुह बनाये खरी अपनी किस्मत को कोस रही थी

9
बाइक वाला सुमिता के सारी सीने से हटा के अपना एक हाथ सुमिता के ब्लाउस के ऊपर से बरे एक चुचे पे रखते हुवे - आते वक़्त उस खेत को देखा ही होगा जिस खेत मे तेरी मस्त बुर मारी थी हु
सुमिता अपने चुचे पे बाइक वाले का हाथ फिल करते ही काप् जाती है आखो से आसु निकल आते है होठ बॉडी काप् रहे थे
30 मिनट बाद

सुमिता दर्द मे आसु लिये लंगराते हुवे बाहर आती है खुद को पूरी तरह सही करके

बाइक वाला सुमिता को बाइक पे बैठा के फिर घर के बाहर छोर चला जाता है

सुमिता दर्द मे थोरा लंगराते हुवे अंदर आती है तो साहिल आगन मे बैठा सुमिता को देख - मा कहा गई थी आप

सुमिता साहिल को देख उसकी बात सुन घबरा जाती है लेकिन जल्दी ही खुद को संभलते हुवे - अरे बेटा अपनी दोस्तो से मिलने गई थी

साहिल - अच्छा
सुमिता नजरे बचाते हुवे सुनीता के कमरे मे चली जाती है

रात 8 बजे

खाना खाने सब बैठे हुवे थे सुमिता के पास साहिल अजलि थी
दूसरी तरफ राघव सुनीता

कुनाल सुमिता से - छोटी अंजली की उमर हो गई है शादी कर देते है मेरी नजर मे एक लरका है किया कहती हो
सुमिता राघव को देख - भैया मुझे साहिल के पापा से बात करनी होगी शादी तो करनी ही है

अंजली चुप चाप खाना खाने मे लगी थी साहिल बेचारा भी अपने मे था
सुनीता कुनाल से - सुनिये आप खुद नंदुई जी से बात कर लेना ना
कुनाल खाना खाते हुवे - ठीक है ये सही रहेगा

खाना पीना होने के बाद साहिल सीधा अपने कमरे मे आके बिस्तर पे लेत फिर गम राधिमा की यादों मे चला जाता है

तभी अंजली आके साहिल के पास बैठ - कहा खोया हुआ है कोई गिर्लफ्रेंड की यादों मे तो नही

अंजली एकदम सही थी साहिल अपने प्यार की यादों मे खोया था लेकिन गम मे वो प्यार दुनिया छोर जा चुकी थी

साहिल अंजली को देख नॉर्मल आवाज मे - आप बनाओ बॉयफ्रेंड मुझे नही चाहिये

अंजली हैरान होके साहिल को देख - अच्छा जी झूठा
साहिल - सोने दो मुझे आप भी जाके सो जाओ
अंजली साहिल को गोर से देखते हुवे - भाई तु बदल गया है पहले खूब मस्ती करता था लेकिन अब

अंजली खरी होके एक बार साहिल को देखती है फिर चली जाती है

अंजली के जाने के बाद सुमिता नाइटी मे आती है और साहिल के पास बैठ साहिल को देख - बेटा कहा खोया रहता है मुझे हमेसा लगता है तू कुछ छुपा रहा है मुझसे

साहिल सुमिता को देख - आपको ऐसा कियु लगता है मा
सुमिता - बस फिल होता है मा हु तेरी
साहिल - ऐसी कुछ बात नही है
साहिल फिर दूसरी तरफ करवट लेके सोने लगता है
सुमिता साहिल को देख मन मे - बेटा मे सुरु से चाहती थी तू मेरे साथ मस्ती करे एक दोस्त की तरह लेकिन तू ऐसा नही है सुरु से मुझसे नॉर्मल हल्का बातें करते रहा है प्यार कैर बहोत करता ही लेकिन

सुमिता खरी होके एक नजर साहिल को देख जाते हुवे मन मे - मे चाहती हु तुम मेरे साथ वक़्त बिताओ बातें करो

सुमिता अकेला पन फिल हमेसा करती थी इस लिये चाहती थी उसका बेटा उसे समय दे बातें करे मस्ती करे

रात 11 बजे

अंजली कमरे मे लेती किसी से बातें करने मे लगी थी नंगी थी बुर मे उंगली किये जा रही थी

दूसरी तरफ सुमिता के ऊपर कोई लेता तेज धक्के मार रहा था सुमिता मुह बंद किये दर्द मे रोये जा रही थी तरप् रही थी

सुमिता उस इंसान को दूर धक्का देते हुवे - दर्द हो रहा है समझ नही आता आपको
वो आदमी गुस्से से सुमिता के बुर मे लंड घुसा के दोनों हाथ सुमिता को पकरे हुवे सुमिता को देख - सांत रह समझ गई


वही अंजली किसी से फोन पे - अमर जल्दी ही हमारी शादी होगी हम साथ रहेगे
अमर - मे तो बेताब हु मेरी जान तुमसे शादी करने के लिये
अंजली - बस अमर जल्दी ही हम एक होगे

सुबह होती है

साहिल सुनीता से जो बैठी थी खटिये पे - मामी दीदी नही आई
सुनीता - अरे वो आज आयेगी कल नही आ पाई कुछ वजह से
साहिल - अच्छा

अंजली खाना पास मे ही बैठी बना रही थी सुनीता भी आके साहिल के पास बैठ जाती है

कुनाल कमरे मे बाहर आके - अच्छा मे खेत होके आता हु

कुनाल चला जाता है

साम 3 बजे मौसम अच्छा था सुनीता अब ठीक थी सुमिता सुनीता खेत की तरफ घूमने जाते है बातें करते हुवे

सुनीता - नंदोई जी ठीक है ना अब करते है चुदाई आपकी
सुमिता सुनीता को बिना देखे नॉर्मल आवाज मे - कभी कभी
सुनीता - किया अभी भी पूरी तरह ठीक नही हुवे
सुमिता - हु

सुनीता रुक सुमिता को देख - जानती हु आप मुझसे गुस्से नफरत करती है आप सही भी है मे यही लायक हु लेकिन मे खुद को चालक समझती थी लेकिन मे खुद इस दलदल मे फस गई

सुमिता कुछ नही बोलती है लेकिन आखो मे गुस्सा साफ सुनीता के लिये दिख रहा था

सुनीता सुमिता फिर खेत मे चलते अंदर तक जाने लगते है

सुनीता - अब मुझे बुरा लगता है मेने आपके साथ जो किया गलत किया
सुमिता थोरा गुस्से मे - आपकी बातो मे आके मेने वो कदम उठाया मेरी बस से बरी गलती थी उस दिन मे खुद को रोक लेती आपकी बातो मे आके वो सब नही करती तो आज मे इतना सब नही सेहती मे ही पागल थी बेवकूफ थी गलती तो मेरी है जो मे खैर मे सब सेह रही हु मुझे बस इतना चाहिये मेरे बेटे को बता ना चले मेरे साथ किया हो रहा है ना मेरे पति बेटी को नही तो मे सब की नजर मे गिर जाउंगी उससे अच्छा मे मरना पसंद करुगी

सुनीता कुछ नही कहती चुप रहती है

थोरि देर चुपी के बाद सुनीता सुमिता के सामने खरी सुमिता के आखो मे देख - हा अपनी गलती मानती हु लेकिन ननद जी खाइये कसम अपने बेटे की और कहिये ये सच नही है कई बार आप खुद चुदने आई उस इंसान के नीचे लेटने आई अपनी प्यास भुजाने आई और तो और आप उस इंसान से पेग्नेंट भी हो गई लेकिन अपने समय रहते बच्चा गिरवा दिया बोलिये ये सच है या नही

सुमिता पूरी हिल जाती है नजरे नीचे किये - हा ये सच है, सुमिता फिर सुनीता को गुस्से से देख , लेकिन ये भी सच है आप की वजह से मे इस दलदल मे फसी हु नही तो आज मे जैसे भी जी रही होती बहोत खुश होती अब से तो बहोत खुश

सुनीता नजरे नीचे किये - आप सही है


साहिल आज फिर अकेले बैठा राधिमा को याद करके आसु बहा रहा था वही अंजली किसी के बिस्तर पे लेती तांगे फैलाये थी अंजली के उपर कोई लेता तेज धक्के मार रहा था

अंजली दर्द मे रोते हुवे - नही नही इतनी जोर से नही मर गई दर्द हो रहा हैं प्लेस दया करो मुझपे

खैर साम होती है घर के पीछे राघव सुमिता से अकेले मे बात कर रहा था सुमिता खरी सुनी रही थी

रात 9 बजे

साहिल के घर

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राघव कमरे मे किसी जवान लरकी के तांगे उठाये धक्के पे धक्के मारे जा रहा था लरकी दर्द मजे मे - आह सर दर्द हो रहा हो आह धीरे
राघव - उफ बेटी दर्द मे ही तो मजा है
राघव चुदाई करते हुवे - तेरी सील जब तोरी थी उफ मजा आ गया था


सुमिता साहिल के पीठ पीछे अकेले होने का फायेदा राघव अच्छे से उठा रहा था अपने घर मे जिस बिस्तर पे अपनी बीवी सुमिता को चोदता था उसी बिस्तर पे एक जवान लरकी को राघव चोद रहा था


साहिल के मामा के घर


रात 11 बज रहे थे एक कमरे मे दर्द रोने पायल की आवाजे गुज रही थी सुमिता की आवाज - मर गई प्लेस अंदर तक मत डालो मर जाउंगी

सुनीता -मजा भी तो आता है आपको दिखाती नही लेकिन ये आपकी बुर जो रस निकाल रही है बता रही है

तभी तेज धक्के के साथ दरवाजा खुलता है अंदर का सीन कुछ ऐसा था सुनीता नंगी बैठी थी बगल मे अंजली लेती थी नंगी

और सुमिता तांगे फिलाये थी बुर मे मोटा लम्बा लंड घुसा हुआ था सुमिता घोरी बनी थी उसके उपर कुनाल था

दरवाजा खुलते ही आवाज से कुनाल सुमिता सुनीता अंजली सब सामने देखते ही तो साहिल आखो मे आसु लिये गुस्से से कुनाल सुनीता को देख रहा था

वही सुमिता अंजली जम सी जाती है

सुमिता जो नही चाहती थी वही हो चुका था

आज के लिये इतना ही 🙏🙏🙏🙏🙏
Bhai
Mai bhavuk ho gaya
 

ajay bhai

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chapter 3

साम के वक़्त जब सुमिता सुनीता खेत घूमने गये थे उस वक़्त ऐसे ही नही गये थे दोनों को किसी ने बुलाया था और बुलाने वाला वही बाइक वाला था

सुनीता सुमिता एक मक्के के खेत के अंदर बैठे थे आस पास कोई नही था सुनीता सुमिता को देख - यही इसी खेत मे हम कर दो बार चुदे है कितनी खराब किस्मत है हमारी हम एक जवान लरके के चंगुल मे फस गये है और वो लरका हमारी चुदाई जोरों से करता है और हम चाह कर भी कुछ नही कर पाते

सुमिता चुप थी सांत थी किस्मत को बार बार कोस रही थी सुनीता सुमिता को देखते हुवे - आप लरके से भी पेग्नेंट हो गई थी यकीन नही होता और अपने भाई से भी दो बार पेग्नेंट

सुमिता सुनीता को थोरा गुस्से से देख - जखम पे नकम् अच्छे से लगा रही है आप भाभी

सुनीता - माफ करना लेकिन मेने सच तो कहा आप खुद
सुनीता गुस्से से - बस भाभी बहोत हो गया ये मत भूलिये मे इस दलदल मे आपकी वजह से हु

सुनीता चुप हो जाती है

तभी वही लरका जो 18 का जवान था बता अंदर आता है सुनीता सुमिता को देख मुस्कुराते हुवे दोनों के पास बैठ जाता है

लरका परोस का था सुमिता सुनीता अच्छे से जानते है ये लरका किसका बेटा है लेकिन सुमिता सुनीता कैसे इस लरके के जाल मे फसे और कई बार ये लरका सुमिता सुनीता को चोद चुका है सब आगे पता चल जायेगा

लरके मा नाम है अरुण

अरुण दोनों को देख - चलो सुरु करते है

सुमिता सुनीता सिहर जाती है

लरका पहले सुनीता की चुदाई करना सुरु करता है खेत मे आह उफ मा सिसकिया की आवाजे गुजने लगती है

फिर बरी सुमिता की आती है लरका लंड बुर के छेद पे रख सुमिता को देख - उफ मस्त माल है आप ऑन्टी
सुमिता डरी सहमी अरुण को देखती रहती है एक तेज धक्का और सुमिता दर्द मे चीख परती है

फिर सुमिता दर्द मे मर गई प्लेस अरुण बेटा धीरे दर्द हो रहा है प्लेस बेटा धीरे करो मर गई मा

1 घंटे बाद सुमिता सुनीता घर लौटने लगते है बातें करते हुवे

सुनीता सुमिता से - बहोत मोटा है ना अरुण का लंड
सुमिता सुनीता को देखती है गुस्से से सुनीता फिर चुप हो जाती है


अब रात के सीन पे आते है साहिल अंदर आ चुका था

सुमिता घोरी बनी थी कुनाल धक्के मार रहा था सुमिता की बुर पानी निकाले जा रही थी लेकिन जब साहिल अंदर आता है आवाज होती हो तो कुनाल पा सब पीछे देखते है अभी भी कुनाल का मोटा लंड सुमिता की मस्त मोती बुर के अंदर घुसा था किसी बेटे को अपनी का को इस तरह देखना कितना दर्द भरा होता

साहिल को देखते ही कुनाल पीछे होता है फक के साथ मोटा लंड सुमिता के बुर से निकल जाता है जो पुरा गिला था सुमिता घोरी बनी पीछे साहिल को देख जम गई थी साहिल की नजर अपनी मा की बुर पे जाती है जो पानी निकाल रही थी बुर फैल गया था छेद अंदर लाल लाल गुदा साफ दिख रहा था

अंजली भी अपने भाई को देख जम जाती है कुनाल सांत था सुनीता डरी थी

सुमिता अंजली होस मे आते ही जल्दी से खुद को डक लेते है सुमिता साहिल को देख कपते रोते हुवे - बेटा

साहिल सुमिता को देख - वाह मा भाई के सामने नंगी चुदवा रही है मेरे आते ही अपनी बॉडी को धक लिया बहोत खूब

सुमिता सर्म डरते रोते हुवे साहिल के पास आके - प्लेस बेटा मेरी बात

तभी कुनाल बीच मे आते साहिल से - भांजे जो देखा अपने तक रख तुझे भी मजे मिलेंगे लेकिन किसी को अपने बाप को बताने की कोसिस की तो तेरा वो हाल करुगा जिसे भूल नही पायेगा

साहिल डरते हुवे कुनाल को देख - मामा प्लेस मारना मत मा कुछ बोलो ना तुम

सुमिता कुनाल को देख - भाई प्लेस साहिल किसी को नही बताएगा
कुनाल साहिल के कंधे पे हाथ रख - तब ठीक h चल तुझे जिसके साथ मजे करने h कर ले

साहिल सुमिता को देख डरते हुवे - मा के साथ
सुमिता पूरी शोक हैरान होती है फिर नजरे नीचे किये धीरे से - ठीक है
कुनाल हस्ते हुवे - बहोत अच्छे भांजे तेरी मा है ही गजब की उफ मजा आ जाता है

कुनाल सुमिता को देख - छोटी खाजना dikhao अपने बेटे को छुपा के कियु रखा है

सुमिता कुनाल को देखती है फिर साहिल को देखते हुवे अपने उपर से चादर हटा देती है सुमिता अब पूरी साहिल के सामने नंगी थी

साहिल सुमिता को देख - एक सवाल किया आप अपनी मर्जी से मामा के साथ सब कर रही है

सुमिता कुनाल को देखती है फिर नजरे नीचे किये - नही और हा भी
कुनाल गुस्से से सुमिता को देख - किया कहा
सुमिता डरते हुवे कुनाल को देख - आप की
सुमिता आगे कुछ बोलती कुनाल एक चाटा सुमिता को मारने जाता है तभी साहिल एक जोर का लात कुनाल के पेट पे मरता है कुनाल दर्द मे नीचे गिरता है

सब देख शोक हो जाते है कुनाल भी पेट पकरे दर्द मे शोक मे कुनाल को देखता है

साहिल कुनाल के पास जाके नीचे बैठ कुनाल के बाल पकर् कुनाल को देख नॉर्मल आवाज मे - मामा जानते है आप मेरा एक और रूप है जो मेने किसी को नही दिखाया जिसे दिखाया वो मेरे पास भी नही आते आपको लगा मे भोला मासूम हु डरा के मुह बंद कर दोगे है ना

हा दोस्तो साहिल सुरु से सब की नजर मे भोला मासूम बन के रहा है लेकिन बुरे लोगो के किये साहिल मौत से कम नही

साहिल अपने मामा के फेस पे मुक्के पे मुक्के मरते हुए - तेरी तेरी वजह से मेरी मा बहन इतना सब सहते आ रही है सिर्फ तेरी वजह से
साहिल मारते जाता है और कुनाल दर्द मे चीखने चिल्लाने लगता है

सुमिता अंजली डरी शोक देखते रह जाते है

जब साहिल कुनाल अपने मामा की हालत खराब कर देता है तो खरा होके पीछे से चाकू निकलता है जिसे देख सब काप् जाते है कुनाल डर के मारे मुत देता है

साहिल कुनाल को देखता है कुनाल दर्द मे - नही नही भांजे नही माफ कर दे मत मार मे मामा हु तेरा

साहिल गुस्से मे - तु मामा नही कमीना है तुझे मारना होगा
साहिल जैसे ही कुनाल को मरने वाला होता है बीच मे सुमिता आते हुवे डरी रोते हुवे साहिल को देख - मत मार बेटे जितनी गलती तेरे मामा की है उतनी मेरी भी है

साहिल अपनी मा को देखता है फिर एक जगह कुर्सी पे बैठ सब को देख - अच्छे से जनता हु किसकी कितनी गलती है और इस एक साल मे किया क्या हुआ है

सब के सब शोक साहिल को देखते है

सुमिता कपते होठो से - तुझे कैसे पता
साहिल सुमिता को देख - मुझे इतना पता है जितना आप सब को नही पता है

साहिल सुनीता कुनाल को देख - ये दोनों की वजह से आप फसी मामा मामी ने आपको मिल के मजबूर किया ताकि आप मामा के नीचे आ जाए आपके अंदर एक प्यास थी और आप फस गई अपने भाई के नीचे आ गई एक वजह और थी आपको मामा के नीचे आने की जो आपने किसी को नही बताया

सुमिता हैरान कपते हुवे - कोन सी
साहिल - पापा
सुमिता ये सुनते ही हिल जाती है

साहिल - आपको कई बार एहसास हुआ आप गलत कर रही है आप पीछे हटना चाहा लेकिन मामा मामी अपनी बातो मे फसा के आपको फिर मजबूर कर देते थे

तब आया अरुण फिर आप दोनों उसके जाल मे फस गये

कुनाल हैरान शोक सुमिता सुनीता को देख - किया बोल रहा ही साहिल

कुनाल को नही पता था अरुण सुमिता सुनीता को चोद रहा है उसके पीछे

साहिल अंजली को देख - आपसे भी ये उमीद नही थी दीदी जिस लरके से आप प्यार करती ही वो कितना बरा कमीना है
अंजली नजरे नीचे कर लेती है

साहिल सभी को देखते हुवे - मेरा एक दोस्त है अशोक एक दिन वो सिग्रेट पी रहा था उसने मुझे दिया पीने को मेने मना कर दिया लेकिन उसने जोर दिया तो एक बार पीने से किया होगा सोच मेने पी लिया उसके बाद अशोक हमेसा मुझे सिग्रेट पीने को बोलता और मे ना चाहते पी लेता उसका नतीजा मुझे आदत लग गई फिर मे रोज खुद खरीद के सिग्रेट पीने लगा

सब हैरान शोक साहिल की बातें सुन रहे थे

साहिल - फिर मेरी लाइफ मे आई राधिमा मेरा प्यार एक दिन उससे मुझे सिग्रेट पीते देख लिया बहोत गुस्सा की मुझे कसम दी तब जाके मे सिग्रेट छोर पाया उसमे किसकी गलती थी अशोक या मेरी

साहिल सुमिता को देख - बताओ मा
सुमिता कपते हुवे - दोनों की और ये बात मेरे लिये थी और तुम सही हो

सुमिता फिर रोने लगती है

साहिल अपने दोनों हाथो को देखते हुवे - किस्मत को मुझसे दया नही आई जिसे मे बहोत प्यार करता था जिसके साथ शादी करके अपनी लाइफ गुजरना चाहता था वो मेरा प्यार राधिमा मेरे हाथो मे ही उससे दम तोर दिया

साहिल कहते हुवे रो परता है

सब फिर हैरान शोक होते है जयदा सुमिता अंजली दोनों को भी बता नही था साहिल किसी से प्यार करता है

सुमिता जल्दी से जाके नंगी साहिल के गले लग रोते हुवे - तु भी इतना सब सहते आ रहा है मुझे पता नही था बेटा

साहिल सुमिता को दूर करके कुनाल सुनीता को देख - लेकिन इन दोनों को मारना होगा

कुनाल सुनीता डरते हुवे - नही नही मत मारो

साहिल गुस्से मे पागल होके तेजी से जाके कुनाल के सीने मे चाकू मरता है फिर सुनीता के दिल मे चाकू लगा था दोनों तुरंत खतम हो जाते है

सुमिता अंजली पथर् बने खरे देखते रह जाते है

साहिल चाकू फेक कुर्सी पे जाके आराम से बैठ जाता है सुमिता साहिल के पास घुटने पे बैठ रोते हुवे - तूने ये किया क्या
साहिल सुमिता को देख - बुरा लग रहा है कही इस लिये तो रही आपका यार चला गया तो मजे कैसे करुगी

सुमिता जोर से चीखते रोते हुवे - बस कर बेटा बस कर मुझे सिर्फ तेरी परवाह है तूने दोनों को मार दिया तुझे जेल होगी मे कैसे जीयुगी तेरे बिना

अंजली कपते रोते - भाई किया क्या तूने मार डाला हा मा मेरी भी उतनी गलती थी लेकिन मार देना

सुमिता रोते हुवे - किया हो गया ये सब मे अगर उस दिन खुद को रोक लेती तो ये सब नही होता

सुमिता साहिल को देख - बेटा भाग जा यहा से कही दूर चला जा
साहिल - और आप दोनों का किया सांत मा सांत खेल अभी बाकी है

साहिल सुमिता को देख - आप के जिस्म को कई लोगो ने नोचा है सच है ना मा

सुमिता हैरान शोक साहिल को देख रोते हुवे कपते होठो से - तुझे सब कैसे पता है

साहिल सुमिता को देख - गलती मामा मामी है आप को दलदल मे लेके आई जिसका नसा आपके उपर चढ़ गया और आप जैसे मे अशोक की वजह से सिग्रेट पीने का लत लगा गलती तो आपकी भी है
खैर

साहिल अंजली को देख - आपके पेट मे बच्चा है मामा का सही
अंजली शोक मे साहिल को देखती है सुमिता भी शोक मे अंजली को देखती है

अंजली रोते कपते - तुझे सब पता है कैसे कैसे भाई कैसे

साहिल सुमिता अंजली को देखते हुवे - समझ लो सुरु से लेके आप दोनों मेरा प्यार राधिमा के साथ जो सब हुआ मेने सब देखा है मुझे इतना सब पता है जितना आप दोनों को नही पता

सुमिता अंजली हैरान कंफ्यूज साहिल को देखते रहते है

साहिल - मा बताओ मान लो मुझे समय के पीछे जाने का मोक्का मिला तो आप किया चाहेगी मे करू बोलिये

हालत को समझ सुमिता आसु लिये - मे चहुंगी जब मेने गलत कदम उठाये उस समय तु मुझे रोक ले बचा ले अंजली राधिमा को भी

साहिल सुमिता को देखते हुवे - हु लेकिन आप दोनों को सजा तो मिलेगी बोलो किया सजा दु आप दोनों को

सुमिता अंजली - जो तु चाहे
साहिल - ठीक है समय के पीछे जाके मे सब रोकुगा फिर आप दोनों को पता के चोदुगा अपने बच्चो की मा बनाऊँगा मंजूर है

सुमिता अंजली पहले शोक हैरान होते है
सुमिता साहिल को देख - पागल वाली बातें मत कर कोई समय के पीछे नही जा सकता
साहिल - अगर गया तो
सुमिता अंजली साहिल को देख - अगर गया तो हमे तेरी सजा मंजूर है
साहिल - कितनी अजीब बात है सजा दुगा लेकिन उस समय याद नही रहेगा आप को या किसी को

साहिल खरा होके कपड़े निकलते हुवे - इस लिये सजा अभी दूँगा समय के पीछे जाके भी

साहिल नँगा होता है साहिल का 12 इंच लम्बा 6 इंच मोटा लंड देख अंजली सुमिता कप् जाते है

साहिल सुमिता को लेता लेता है सुमिता कुछ नही कहती साहिल सुमिता के टाँगे फैला के बुर के छेद पे लंड रख सुमिता को देख - घुसा दूँगा तो आप मुझसे नफरत करेगी ना
सुमिता आसु लिये साहिल को देख - बिल्कुल नही कियुंकी तु मेरा बेटा है
साहिल बुर के अंदर लंड धीरे से घुसते हुवे सुमिता को देखते हुवे - मा बेटे मे ये सब नही होता
सुमिता दर्द मे साहिल को देख - पर मा खुद चाहे तो सब हो सकता है
साहिल सुमिता को देख - मेरी रंडि बनेगी या औरत
सुमिता दर्द मे आसु लिये - तु जो मुझे बना के रखे मंजूर है मुझे
साहिल एक जोर का धक्का मारता है सुमिता जोर से चीख परती है आखे फैल जाती है मुह खुले दर्द मे आवाज भी नही निकल पाती
अंजली सब देख डर से काप् जाती है

1 घंटे बाद

साहिल सुमिता को अंजली को देख -मे इतना बुरा नही हु समय के पीछे जाके मे आप दोनों को अपने प्यार मे गिरा के अपना बनाऊँगा आप दोनों को बहोत प्यार दूँगा

सुमिता अंजली लंगरते हुवे साहिल के पास आके प्यार से देख - पागल तो नही हो गया क्या बातें किये जा रहा है

साहिल - पागल नही हु ये 100 सच है इसी लिये मामा मामी को मारा लेकिन समय के पीछे जाके मे मामी को रंडि बनाऊँगा और जिन लोगो ने आपके साथ गलत किया है सब की मा चोद दूँगा


साहिल सुमिता अंजली को देख - आप दोनों को अभी जो किया या हुआ कुछ याद नही रहेगा चलता हु समय के पीछे

साहिल - दोस्त पोटल खोलो मुझे उस समय मे भेज दो जब ये सारा कांड होना सुरु हुआ था

साहिल के अंदर से एक आवाज आती है
आवाज - ठीक है दोस्त याद रखना मे तेरे साथ नही रहुंगा लेकिन तुम मुझे वही जहा मे तुम्हे मिला लेने आ जाना

साहिल - वादा है दोस्त
सुमिता अंजली हैरान पुरे शोक थे दोनों को लग रहा था साहिल सच मे पागल हो गया है

तभी एक पोटल खुलता है जिसे देख सुमिता अंजली को यकीन नही होता

साहिल सुमिता अंजली को देख - जाते हुवे इतना ही किया आप दोनों को मजा आया
सुमिता अंजली हैरान शोक मे साहिल पोटल को देखते हुवे - बहोत
साहिल मुस्कुराते हुवे पोटल के अंदर जाने लगता तो

सुमिता - रुको बेटा
साहिल पीछे सुमिता को देख - जी मा
सुमिता नजरे नीचे कर - मुझे गलत तो नही तुमने सब देख लिया खुद तो तुमने देखा होगा मे कैसे
साहिल बीच मे - नही मा आप तो मेरी प्यारी मा है अच्छी मा रहेगी
सुमिता आसु बहाते हुवे खुश होके - जा रहे हो समय के पीछे तो राधिमा को बचा लेना उसे फिर पा लो तो इस बार हमसे छुपाना मत सीधा मिलवाने लेके आना
साहिल - हु
अंजली - भाई वैसे राधिमा के साथ
साहिल - रेप हुआ था वो भी आप लोगो की तरफ मुझसे सब छुपा रही थी जिस कमीने ने मेरी राधिमा की इज़त लूटी उसे मार दिया मे उसे जान से मार दूँगा
सुमिता - नही बेटा किसी को जन से मत मारना चाहे कोई भी हो उसे तरपाना दर्द देना जितना तुमने सहा हमने राधिमा ने साहा है

साहिल - समझ गया मा
राधिमा साहिल के पास आके होठों पे किस करते हुवे - ये मा तेरे सामने खरी है जो मैली है लेकिन जो तुझे मिलेगी मैली नही होगी

साहिल सुमिता को गले लगा के रोते हुवे - मा आप जैसी है मेरी मा है
अंजली भी गले लग रोते हुवे - भाई अब जा बदल दे ( किस्मत की लकीर को )

साहिल फिर बाय बोल पोटल मे घुस जाता है

रात 2 बजे साहिल चिल्लाते हुवे उठाता है तो खुद को बिस्तर पे पता है साहिल समय के पीछे आ गया था लेकिन साहिल को विश्वास नही हो रहा था उसे सब सपना लग रहा था जैसे वो लम्बा सपना देख उठा हो

साहिल खुद को देखता है जो कपड़े पहने थे उसे देख शोक होता है फिर जल्दी से फोन लेके देखता है तो date तारीख देख और शोक होता है साहिल कमरे को देखता है बात आता है तब जाके साहिल को यकीन होता है वो समय के पीछे आ गया है एक साल पीछे

साहिल घुटने पे बैठ रोने लगता है कुछ देर रोने के बाद साहिल मुठी कसटे हुवे - अब वो सब नही होने दूँगा मा दीदी राधिमा मेरा प्यार सब को मे बचाऊँगा

अब चलते है थोरा पीछे आखिर साहिल को इतना सब कैसे पता चला एक साल मे किया हुआ था

जब कमरे मे कुनाल अपनी बहन साहिल की बुर मरने मे लग था तो वही साहिल राधिमा की याद मे बैठे रो रहा था

राधिमा एक अनाथ थी उसका कोई नही था जब साहिल उसके लाइफ मे आया तो राधिमा को लगा एक जीने की वजह मिल गई राधिन मासूम चंचल मस्ती करने वाली लरकी थी

साहिल भी राधिमा को पाके बहोत खुश था दोनों ने कई सपने देखे थे लेकिन सब किस्मत को मंजूर नही था और राधिमा चल बसी

साहिल जब दर्द मे राधिमा को याद करके रो रहा था तब एक आवाज साहिल से कहती है

आवाज - बस कर यार कितना रोता है मेरे कान फट जाते है नींद उर जाती है

साहिल एक अंजनि आवाज सुन डरते हुवे रोना भूल के चारों तरफ देख - कोन कोन हो तुम

आवाज - मे हु तेरे अंदर
साहिल अपनी बॉडी को छुटे हुवे डरते हुवे - मेरे अंदर लेकिन कैसे तुम भूत कोई आत्मा तो नही

आवाज - डरना बंद कर हा अभी मे आत्मा ही हु

साहिल - तो तो मेरे अंदर कैसे आये
आवाज - भूल गया वो पिकनिक गुफा रॉसनी

साहिल याद करते हैरान होके - वो रोसानि तुम हो
आवाज - हा
साहिल - तो तुम हो कोन
आवाज - अच्छा सवाल है सुनो मे god का दूत हु मे पथर् दिल का था कोई छोटा मोटा god मेरे गोद से मिलने आते तो मे जाने नही देता था
इस लिये god ने मुझे सजे के तोर पे उस गुफा मे छोर गये और बोले जब मे बदल जाउंगा मुझे लेने आयेगे

साहिल थोरा सांत होके - अच्छा ये बात है
आवाज - हु तेरे अंदर आने के बाद मेने तेरा दर्द प्यार देखा तेरी मा दीदी कितना सेह रही है सब देखा तो मे हिल गया

साहिल हैरान होके - एक मिनट मेरी मा दीदी किया सेह रही है
आवाज - बहोत कुछ जो तुझे नही पता तेरे पीछे किया हो रहा है देखेगा सब बोल है हिम्मत

साहिल शोक मे कपते हुवे - ठीक है दिखाओ
आवाज - याद रख जो देखेगा तेरे लिये बहोत दर्द भरा होगा पर तुझे देखना होगा ताकि तु किस्मत को बदल सके

साहिल हैरान - मतलब
आवाज पहले देख आखे बन्द कर
साहिल आखे बंद करता है फिर 10 मिनट मे साहिल जो कुछ हुआ सब देख लेता है

साहिल चिल्लाते हुवे आखे खोलके - मा दीदी राधिमा

साहिल फुट फुट के रोने लगता है

साहिल - कियु कियु आखिर कियु मेरी मा दीदी राधिमा के साथ ही ऐसा कियु हुआ

आवाज - सांत साहिल किस्मत जो लिखा होता है वही होता है लेकिन अब मेरी बात ध्यान से सुन मे तुझे उसी समय मे पीछे भेज दूँगा ताकि तुम सब रोक सको और अपनी मा दीदी राधिमा को बचा सको

साहिल रोते हुवे - किया सच मे
आवाज - सच मुझे लगता है मेरे god ने ही सब सोच किया इस लिये हम मिले अब जा जाके अपनी मा को बचा फिर मे तुझे पीछे भेज दुगा

बस यही हुआ था साहिल ने सब देख लिया था जो उस समय वो देख नही सकता था फिर साहिल अंदर गया बाकी किया हुआ आप सब को बता ही है

अब साहिल पीछे आ गया था पास्ट मे आ गया था

साहिल खरा होता ही एक गहरी सास लेते हुवे आसमान को देखते हुवे - अब समय आ गया है ( किस्मत की लकीर ) को बदलने का

एक साल पहले - पास्ट

कहानी अब पास्ट मे चलेगी जब सुमिता अजली राधिमा के साथ गलत होना सुरु हुआ था जब पास्ट खतम होगा तब साहिल वाला सीन चलेगा कैसे साहिल किस्मत को बदलता है
 
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