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ajay bhai

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कई लोग मानते है ( किस्मत की लकीर ) मे जो लिखा होता है वही होता है कई लोग ये भी मानते है किस्मत की लकीर को इंसान बदल सकते है

सवाल ये है किया ऐसा सच मे हो सकता है जवाब हा भी ना भी

उपर वाले ने हम इंसान को बनाया दिमाग ताकत सब दिया ताकि इंसान अपनी किस्मत खुद लिख सके लेकिन हर कोई अपनी किस्मत नही बदल पता कियुंकी बुरी किस्मत जब इंसान को पूरी तरह जकर् लेती है तो वो एक ऐसे दलदल मे फस जाता है जहा इंसान कोसिस करते रहता है बाहर निकलने का लेकिन निकल नही पता

ऐसे मे दो चीजे होती है वो इंसान जो दलदल मे फसा है कोसिस करते करते हार मान ले अपनी मौत का इंतज़ार करे या कोई आके उस इंसान की मदद करे और उसकी किस्मत की लकीर को बदल दे

किस्मत की लकीर को बदलने के लिये उस इंसान मे वो ताकत दम पावर होना चाहिये हर कोई अपनी किस्मत बदल सकता तो पूरी दुनिया मे जयदा गरीब लोग है जो पूरी जिंदगी कमाते खाते गुजर जाते है जो गरीब लोग अपनी किस्मत बदल नही लेते पर कुछ ही किस्मत को बदल पाते है - या उपर वाला किसी पे दया कर उसकी ( किस्मत की लकीर ) को बदल दे

ये कहानी कुछ ऐसी ही है एक दलदल मे फसी बुरी किस्मत की मारी की है चलो देखते है किया होता है उसके साथ उस दलदल से बाहर निकल पति है या नही


कहानी - Adultery + Incest

इमोसनल 🥺 रोमांस 💏 एक्शन 👊 फैंटेसी


introduction


51f-Y0wj-RGTL-AC-UF894-1000-QL80
साहिल - 18 साल का लरका बहोत मासूम हैंडसम पुरा फिट कोई कमी नही मा बहन का लाडला बाप का भी एक लौटा बेटा है पुरा फिट अच्छी बॉडी मासूम प्यारा है

HBQAs-Wob-QAA854a
सुमिता 42 - साहिल की मा बहोत ही जयदा खूबसूरत पुरे गाव मे सुमिता की खूबसूरती के चर्चे होते रहते है खूबसूरत चेहरा प्यारी आखे गुलाबी होठ दो बरे बरे तरबूज के किया ही कहने पतली गोरी चिकनी कमर जब चलती है तो आगे से जयदा पीछे का सीन सब देखने वालो के होस उर जाते है 42 की है पर मजाल है उसे देख कोई केह सके वो 42 की है

images (2) 1774812257463
राघव 44 - साहिल के पापा टीचर है गाव की सरकारी स्कूल मे पढाने जाते है इस भाई साहब से पुरा गाव जलता है गालिया देते है सब यही कहते है इस लंगूर को अंगूर कैसे मिल गये राघव भी कम हैंडसम नही है लेकिन उमर दिखने लगी है जबकि सुमिता जवान ही दिखती है

HEjm-TThb-MAAAi-J4
अंजली 19 - इसके भी चर्चे कम नही है पता नही कितने लरके अंजली को पाने के लिये लाइन मे लगे कोसिस करते रहते है अंजली सुमिता दोनों मा बेटी एक साथ गाव मे निकलते है लोग यही कहते किया कोई इतनी खूबसूरत मा बेटी भी हो सकती है


smart-indian-man-white-middle-aged-fit-t-shirt-studio-shot-293265933
कुनाल 43 - सुमिता का बरा भाई साहिल का मामा बाकी कहानी मे सब पता चलते जायेगा

G-Rm-ZAya-QAA8-OMs
सुनीता 42 - सुमिता की भाभी साहिल की मामी खूबसूरती मे ये भी कम नही है उपर से नीचे तक फटाका है बाकी कैसी है कहानी मे पता चलता जायेगा

G9-Jg-Gkqa-YAEBJv-X
माधुरी 21 - सुनीता कुनाल की एक लौटी बेटी बस उसके बाद माधुरी मा नही बन पाई शादी सुधा है 18 की थी शादी कर दी गई अभी 2 साल का एक बेटा है खूबसूरत है अपनी मा की तरह


बाकी के कई किरदार आयेगे और जाते रहेगे आते रहेगे कहानी जैसे जैसे आगे बढ़ेगी वैसे वैसे

दोस्तो इस कहानी को मे कई महीने से दिमाग मे लिये बैठा था अब जाके निकाल रहा हु मे इस स्टोरी को मेरी बाकी स्टोरी से और अच्छे से रियल लॉजिक डिटेल से लाने वाला हु बस आप सब का साथ प्यार मिलता रहे

आप सब को पता होगा जो मेरी स्टोरी पढ़ते आये है फिर भी बता देता हु पहला update आज रात 10 से 11 तक आ जायेगी बाकी एक दिन छोर उसी टाइम रात 10 से 11 के बीच आती रहेगी
मिलते है 🙏🙏🙏🙏
 

Mass

Well-Known Member
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Congrats for this new story. Hope ye bhi tumhaari pichli story ki tarah majedaar aur kaamuk hogi. All the best!!

Look forward to regular updates जैसे तुमने अपनी पिछली कहानी में दिया था.

ajay bhai
 

sunoanuj

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कई लोग मानते है ( किस्मत की लकीर ) मे जो लिखा होता है वही होता है कई लोग ये भी मानते है किस्मत की लकीर को इंसान बदल सकते है

सवाल ये है किया ऐसा सच मे हो सकता है जवाब हा भी ना भी

उपर वाले ने हम इंसान को बनाया दिमाग ताकत सब दिया ताकि इंसान अपनी किस्मत खुद लिख सके लेकिन हर कोई अपनी किस्मत नही बदल पता कियुंकी बुरी किस्मत जब इंसान को पूरी तरह जकर् लेती है तो वो एक ऐसे दलदल मे फस जाता है जहा इंसान कोसिस करते रहता है बाहर निकलने का लेकिन निकल नही पता

ऐसे मे दो चीजे होती है वो इंसान जो दलदल मे फसा है कोसिस करते करते हार मान ले अपनी मौत का इंतज़ार करे या कोई आके उस इंसान की मदद करे और उसकी किस्मत की लकीर को बदल दे

किस्मत की लकीर को बदलने के लिये उस इंसान मे वो ताकत दम पावर होना चाहिये हर कोई अपनी किस्मत बदल सकता तो पूरी दुनिया मे जयदा गरीब लोग है जो पूरी जिंदगी कमाते खाते गुजर जाते है जो गरीब लोग अपनी किस्मत बदल नही लेते पर कुछ ही किस्मत को बदल पाते है - या उपर वाला किसी पे दया कर उसकी ( किस्मत की लकीर ) को बदल दे

ये कहानी कुछ ऐसी ही है एक दलदल मे फसी बुरी किस्मत की मारी की है चलो देखते है किया होता है उसके साथ उस दलदल से बाहर निकल पति है या नही


कहानी - Adultery + Incest

इमोसनल 🥺 रोमांस 💏 एक्शन 👊 फैंटेसी


introduction


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साहिल - 18 साल का लरका बहोत मासूम हैंडसम पुरा फिट कोई कमी नही मा बहन का लाडला बाप का भी एक लौटा बेटा है पुरा फिट अच्छी बॉडी मासूम प्यारा है

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सुमिता 42 - साहिल की मा बहोत ही जयदा खूबसूरत पुरे गाव मे सुमिता की खूबसूरती के चर्चे होते रहते है खूबसूरत चेहरा प्यारी आखे गुलाबी होठ दो बरे बरे तरबूज के किया ही कहने पतली गोरी चिकनी कमर जब चलती है तो आगे से जयदा पीछे का सीन सब देखने वालो के होस उर जाते है 42 की है पर मजाल है उसे देख कोई केह सके वो 42 की है

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राघव 44 - साहिल के पापा टीचर है गाव की सरकारी स्कूल मे पढाने जाते है इस भाई साहब से पुरा गाव जलता है गालिया देते है सब यही कहते है इस लंगूर को अंगूर कैसे मिल गये राघव भी कम हैंडसम नही है लेकिन उमर दिखने लगी है जबकि सुमिता जवान ही दिखती है

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अंजली 19 - इसके भी चर्चे कम नही है पता नही कितने लरके अंजली को पाने के लिये लाइन मे लगे कोसिस करते रहते है अंजली सुमिता दोनों मा बेटी एक साथ गाव मे निकलते है लोग यही कहते किया कोई इतनी खूबसूरत मा बेटी भी हो सकती है


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कुनाल 43 - सुमिता का बरा भाई साहिल का मामा बाकी कहानी मे सब पता चलते जायेगा

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सुनीता 42 - सुमिता की भाभी साहिल की मामी खूबसूरती मे ये भी कम नही है उपर से नीचे तक फटाका है बाकी कैसी है कहानी मे पता चलता जायेगा

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माधुरी 21 - सुनीता कुनाल की एक लौटी बेटी बस उसके बाद माधुरी मा नही बन पाई शादी सुधा है 18 की थी शादी कर दी गई अभी 2 साल का एक बेटा है खूबसूरत है अपनी मा की तरह


बाकी के कई किरदार आयेगे और जाते रहेगे आते रहेगे कहानी जैसे जैसे आगे बढ़ेगी वैसे वैसे

दोस्तो इस कहानी को मे कई महीने से दिमाग मे लिये बैठा था अब जाके निकाल रहा हु मे इस स्टोरी को मेरी बाकी स्टोरी से और अच्छे से रियल लॉजिक डिटेल से लाने वाला हु बस आप सब का साथ प्यार मिलता रहे

आप सब को पता होगा जो मेरी स्टोरी पढ़ते आये है फिर भी बता देता हु पहला update आज रात 10 से 11 तक आ जायेगी बाकी एक दिन छोर उसी टाइम रात 10 से 11 के बीच आती रहेगी
मिलते है 🙏🙏🙏🙏

नई कहानी के लिए आपको बहुत बहुत शुभकामनाएँ! 👏🏻👏🏻👏🏻🌷🌷🌷
 

sunoanuj

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अगले भाग की प्रतीक्षा रहेगी !
 

rajdon9933

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कई लोग मानते है ( किस्मत की लकीर ) मे जो लिखा होता है वही होता है कई लोग ये भी मानते है किस्मत की लकीर को इंसान बदल सकते है

सवाल ये है किया ऐसा सच मे हो सकता है जवाब हा भी ना भी

उपर वाले ने हम इंसान को बनाया दिमाग ताकत सब दिया ताकि इंसान अपनी किस्मत खुद लिख सके लेकिन हर कोई अपनी किस्मत नही बदल पता कियुंकी बुरी किस्मत जब इंसान को पूरी तरह जकर् लेती है तो वो एक ऐसे दलदल मे फस जाता है जहा इंसान कोसिस करते रहता है बाहर निकलने का लेकिन निकल नही पता

ऐसे मे दो चीजे होती है वो इंसान जो दलदल मे फसा है कोसिस करते करते हार मान ले अपनी मौत का इंतज़ार करे या कोई आके उस इंसान की मदद करे और उसकी किस्मत की लकीर को बदल दे

किस्मत की लकीर को बदलने के लिये उस इंसान मे वो ताकत दम पावर होना चाहिये हर कोई अपनी किस्मत बदल सकता तो पूरी दुनिया मे जयदा गरीब लोग है जो पूरी जिंदगी कमाते खाते गुजर जाते है जो गरीब लोग अपनी किस्मत बदल नही लेते पर कुछ ही किस्मत को बदल पाते है - या उपर वाला किसी पे दया कर उसकी ( किस्मत की लकीर ) को बदल दे

ये कहानी कुछ ऐसी ही है एक दलदल मे फसी बुरी किस्मत की मारी की है चलो देखते है किया होता है उसके साथ उस दलदल से बाहर निकल पति है या नही


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साहिल - 18 साल का लरका बहोत मासूम हैंडसम पुरा फिट कोई कमी नही मा बहन का लाडला बाप का भी एक लौटा बेटा है पुरा फिट अच्छी बॉडी मासूम प्यारा है

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सुमिता 42 - साहिल की मा बहोत ही जयदा खूबसूरत पुरे गाव मे सुमिता की खूबसूरती के चर्चे होते रहते है खूबसूरत चेहरा प्यारी आखे गुलाबी होठ दो बरे बरे तरबूज के किया ही कहने पतली गोरी चिकनी कमर जब चलती है तो आगे से जयदा पीछे का सीन सब देखने वालो के होस उर जाते है 42 की है पर मजाल है उसे देख कोई केह सके वो 42 की है

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राघव 44 - साहिल के पापा टीचर है गाव की सरकारी स्कूल मे पढाने जाते है इस भाई साहब से पुरा गाव जलता है गालिया देते है सब यही कहते है इस लंगूर को अंगूर कैसे मिल गये राघव भी कम हैंडसम नही है लेकिन उमर दिखने लगी है जबकि सुमिता जवान ही दिखती है

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अंजली 19 - इसके भी चर्चे कम नही है पता नही कितने लरके अंजली को पाने के लिये लाइन मे लगे कोसिस करते रहते है अंजली सुमिता दोनों मा बेटी एक साथ गाव मे निकलते है लोग यही कहते किया कोई इतनी खूबसूरत मा बेटी भी हो सकती है


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कुनाल 43 - सुमिता का बरा भाई साहिल का मामा बाकी कहानी मे सब पता चलते जायेगा

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सुनीता 42 - सुमिता की भाभी साहिल की मामी खूबसूरती मे ये भी कम नही है उपर से नीचे तक फटाका है बाकी कैसी है कहानी मे पता चलता जायेगा

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माधुरी 21 - सुनीता कुनाल की एक लौटी बेटी बस उसके बाद माधुरी मा नही बन पाई शादी सुधा है 18 की थी शादी कर दी गई अभी 2 साल का एक बेटा है खूबसूरत है अपनी मा की तरह


बाकी के कई किरदार आयेगे और जाते रहेगे आते रहेगे कहानी जैसे जैसे आगे बढ़ेगी वैसे वैसे

दोस्तो इस कहानी को मे कई महीने से दिमाग मे लिये बैठा था अब जाके निकाल रहा हु मे इस स्टोरी को मेरी बाकी स्टोरी से और अच्छे से रियल लॉजिक डिटेल से लाने वाला हु बस आप सब का साथ प्यार मिलता रहे

आप सब को पता होगा जो मेरी स्टोरी पढ़ते आये है फिर भी बता देता हु पहला update आज रात 10 से 11 तक आ जायेगी बाकी एक दिन छोर उसी टाइम रात 10 से 11 के बीच आती रहेगी
मिलते है 🙏🙏🙏🙏
Congratulations for new story
We loved your writing skills
Thanks for entertaining us
 

Napster

Well-Known Member
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कई लोग मानते है ( किस्मत की लकीर ) मे जो लिखा होता है वही होता है कई लोग ये भी मानते है किस्मत की लकीर को इंसान बदल सकते है

सवाल ये है किया ऐसा सच मे हो सकता है जवाब हा भी ना भी

उपर वाले ने हम इंसान को बनाया दिमाग ताकत सब दिया ताकि इंसान अपनी किस्मत खुद लिख सके लेकिन हर कोई अपनी किस्मत नही बदल पता कियुंकी बुरी किस्मत जब इंसान को पूरी तरह जकर् लेती है तो वो एक ऐसे दलदल मे फस जाता है जहा इंसान कोसिस करते रहता है बाहर निकलने का लेकिन निकल नही पता

ऐसे मे दो चीजे होती है वो इंसान जो दलदल मे फसा है कोसिस करते करते हार मान ले अपनी मौत का इंतज़ार करे या कोई आके उस इंसान की मदद करे और उसकी किस्मत की लकीर को बदल दे

किस्मत की लकीर को बदलने के लिये उस इंसान मे वो ताकत दम पावर होना चाहिये हर कोई अपनी किस्मत बदल सकता तो पूरी दुनिया मे जयदा गरीब लोग है जो पूरी जिंदगी कमाते खाते गुजर जाते है जो गरीब लोग अपनी किस्मत बदल नही लेते पर कुछ ही किस्मत को बदल पाते है - या उपर वाला किसी पे दया कर उसकी ( किस्मत की लकीर ) को बदल दे

ये कहानी कुछ ऐसी ही है एक दलदल मे फसी बुरी किस्मत की मारी की है चलो देखते है किया होता है उसके साथ उस दलदल से बाहर निकल पति है या नही


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साहिल - 18 साल का लरका बहोत मासूम हैंडसम पुरा फिट कोई कमी नही मा बहन का लाडला बाप का भी एक लौटा बेटा है पुरा फिट अच्छी बॉडी मासूम प्यारा है

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सुमिता 42 - साहिल की मा बहोत ही जयदा खूबसूरत पुरे गाव मे सुमिता की खूबसूरती के चर्चे होते रहते है खूबसूरत चेहरा प्यारी आखे गुलाबी होठ दो बरे बरे तरबूज के किया ही कहने पतली गोरी चिकनी कमर जब चलती है तो आगे से जयदा पीछे का सीन सब देखने वालो के होस उर जाते है 42 की है पर मजाल है उसे देख कोई केह सके वो 42 की है

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राघव 44 - साहिल के पापा टीचर है गाव की सरकारी स्कूल मे पढाने जाते है इस भाई साहब से पुरा गाव जलता है गालिया देते है सब यही कहते है इस लंगूर को अंगूर कैसे मिल गये राघव भी कम हैंडसम नही है लेकिन उमर दिखने लगी है जबकि सुमिता जवान ही दिखती है

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अंजली 19 - इसके भी चर्चे कम नही है पता नही कितने लरके अंजली को पाने के लिये लाइन मे लगे कोसिस करते रहते है अंजली सुमिता दोनों मा बेटी एक साथ गाव मे निकलते है लोग यही कहते किया कोई इतनी खूबसूरत मा बेटी भी हो सकती है


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कुनाल 43 - सुमिता का बरा भाई साहिल का मामा बाकी कहानी मे सब पता चलते जायेगा

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सुनीता 42 - सुमिता की भाभी साहिल की मामी खूबसूरती मे ये भी कम नही है उपर से नीचे तक फटाका है बाकी कैसी है कहानी मे पता चलता जायेगा

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माधुरी 21 - सुनीता कुनाल की एक लौटी बेटी बस उसके बाद माधुरी मा नही बन पाई शादी सुधा है 18 की थी शादी कर दी गई अभी 2 साल का एक बेटा है खूबसूरत है अपनी मा की तरह


बाकी के कई किरदार आयेगे और जाते रहेगे आते रहेगे कहानी जैसे जैसे आगे बढ़ेगी वैसे वैसे

दोस्तो इस कहानी को मे कई महीने से दिमाग मे लिये बैठा था अब जाके निकाल रहा हु मे इस स्टोरी को मेरी बाकी स्टोरी से और अच्छे से रियल लॉजिक डिटेल से लाने वाला हु बस आप सब का साथ प्यार मिलता रहे

आप सब को पता होगा जो मेरी स्टोरी पढ़ते आये है फिर भी बता देता हु पहला update आज रात 10 से 11 तक आ जायेगी बाकी एक दिन छोर उसी टाइम रात 10 से 11 के बीच आती रहेगी
मिलते है 🙏🙏🙏🙏
बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनायें भाई नयी कहानी के लिये
अन्य कहानी की तरहा ये कहानी भी जबरदस्त होगी
प्रथम अध्याय की प्रतिक्षा रहेगी
 
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netsunil

मैं काग़ज़ बेरंग.. तू रंगरेज़ मेरे अल्फ़ाज़ों का
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MUBARAK HO BHAI NAI STORY KE LIYE
 

ajay bhai

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( update 1 )


YTDown com You Tube Dhire Dhire Aap Mere 4K Song Aamir Khan Media 5v P9d3NC618 002 720p
लरकी - धीरे धीरे आप मेरे दिल के मेहमा हो गये पहले जा फिर जाने जाना हो गये
लरका - धीरे धीरे आप मेरे दिल के मेहमा हो गये पहले जा फिर जाने जाना हो गये

YTDown com You Tube Dhire Dhire Aap Mere 4K Song Aamir Khan Media 5v P9d3NC618 002 720p (2)
लरकी - ये है कर्म आपका तुमने मुझे चुन लिया
लरका - अब चाहे कुछ ना कहो मेने सब सुन लिया

YTDown com You Tube Dhire Dhire Aap Mere 4K Song Aamir Khan Media 5v P9d3NC618 002 720p (1)
लरका लरकी - धीरे धीरे आप मेरे दिल ले मेहमा हो गये पहले जा फिर जाने जाना हो गये धीरे धीरे आप मेरे दिल के मेहमा हो गये हो धीरे धीरे आप मेरे दिल ले मेहमा हो गये


लरका - राधिमा प्लेस प्लेस आखे खोली रखो मे तुम्हे कुछ नही होने दूँगा कोई है प्लेस हेल्प करो प्लेस कोई तो हेल्प करो
कुछ मिनट बाद एक जोरदार दर्द भरी चीख गुज उठती है


लरका राधिमा के ग्रावे पे लेता हुआ था जैसे वो राधिका को बाहों मे लिये उसके उपर प्यार से लेता उसके दिल की धर्कन् सुन रहा हो
लरके का आखे बंद था जैसे वो हर बिताये प्यारे पल मे खोया हो

लरके की आखे खुलती है कियुंकी बारिस होने लगी थी हल्की हल्की बारिस की बूँदे लरके के फेस पे गाल पे गिर रहे थे

लरका घुटने पे बैठ राधिमा के ग्रावे को देखता ही रहता है होठ काप् रहे थे दिल रो रहा था आखो मे बेपनाह दर्द साफ दिख रहा था कुछ बोलना कहना चाहता था लेकिन ना बॉडी ना होठ साथ दे रहे थे

लरका बरी मुश्किल से खुद को संभाले खरा होता है लेकिन नजर अभी भी राधिमा की ग्रावे पे थी लरके के आखो से भर भर के आसु निकल रहे थे लरके के दर्द को देख आसमान भी रो रहा था

राधिमा हस्ते हिलखिलते हुवे नाचते झूमते लरके को देख - साहिल जानते हो तुम बहोत किस्मत वाले हो जो में तुम्हे मिली

साहिल खरा मुस्कुराते राधिमा को प्यार भरी नजरो से देखते हुवे - अच्छा हु सोचने दो जरा

राधिमा साहिल की सोचने वाली बात सुन मुह फुलाते रूठ के नाराजगी से साहिल को देखते हुवे - किया तुम्हे सोचना पर रहा है ठीक है रहो अकेले मे जा रही हु बाय

राधिमा रूठ के बरबाराते हुवे गुस्से मे जाने लगती है साहिल ये देख हसने लगता है और तेजी से दोर के जाके पीछे से राधिका को पकर लेता है राधिका सिहर जाती है पूरी सांत भी हो जाती है जो सुकून खुशी साहिल के बाहों मे राधिमा को मिलती थी राधिमा उसमे खो जाती थी चेहरा सर्म से लाल लेकिन फेस पे मुस्कान थी

Types-Of-Love-In-Relationship-jpg
साहिल राधिमा को बाहों मे कसते हुवे अपना सर राधिमा के सर से सताते हुवे प्यार से - हा किस्मत वाला हु जो तुम मुझे मिली राधिमा
राधिमा सर्म लाल चेहरा के साथ - अच्छा जी पहले तो सोचने मे लगे थे


तभी एक जोरदार बिजली करकती है जिसकी वजह से साहिल यादों से बाहर आता है

साहिल राधिमा के ग्रावे को देखता है फिर पीछे मूर जाने लगता है सीने मे दर्द लिये साहिल कुछ कदम आगे जाते रुक जाता है फिर पीछे मूर राधिमा के ग्रावे को देखते हुवे कपते दर्द भरी आवाज मे - काश काश मे ( किस्मत की लकीर ) को बदल सकता काश मेरे अंदर वो पावर होती तो मे, आगे साहिल कुछ बोल नही पाता


सीलीपुर गाव

बहोत की खूबसूरत गाव है गाव की लाइफ कैसी होती है मुझे बताने की जरूरत नही है

बारिस हल्की फुल्की होके चली जाती है फिर बदल साफ हो जाते है जैसे वो साहिल के दर्द मे सामिल होने आया हो

एक घर जो इट का बना था छत थी 4 कमरे कोई हाई फाई घर नही था लेकिन गाव मे किसी का घर इट का है ये बरी बात होती है
गाव मे सब कोई यही चाहते है की कभी उसका भी घर घास फुस की गजह इट का हो

घर के बाहर एक बाबा कंधे पे झोला लिये आवाज लगा रहा था ताकि कोई आये और कुछ खाने पीने को दे 2 मिनट बाद भी जब कोई नही आता ना किसी की अंदर से आवाज आती है तो बाबा जाने लगता है

बाबा कुछ कदम चले ही थे की एक आवाज आती है प्यारी मीठी आवाज जो बाबा को रुकने के लिये बोल रही थी बाबा आवाज सुन रुक जाते है और पीछे मूर कर देखते है

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एक खूबसूरत औरत सर पे सारी रखे हाथो कुछ खाने पीने की चीजे लिये खरी थी औरत मुस्कुराहट लिये बाबा के पास आके खरी होके - बाबा मे तो आपके लिये कुछ खाने पीने का समान ले रही थी और आप है की बिना लिये जा रहे थे ये तो अच्छी बात नही है

बाबा के चेहरे मे औरत की बात सुन मुस्कुराहट आ जाती है

औरत कोई और नही सुमिता थी

बाबा सुमिता को देख तो रहे थे लेकिन चेहरे को नही देख रहे थे
बाबा मुस्कुराते हुवे - माफ करना बेटी आवाज तो लगाई थी रुका भी था किया है ना कई लोग घर मे होते हुवे भी कुछ ना बोलते ना देते है

सुमिता - मेरे दरवाजे से कोई खाली हाथ जा ही नही सकता भले ही हम अमीर नही लेकिन जितना हो सके जरूर दुगि

बाबा मुस्कुराते हुवे अपने झोले को लेके खोलते हुवे - समझ गया बेटी समझ गया अब जब भी आऊंगा रुकुगा देर तक अब खुश

सुमिता झोले मे खाने पीने का समान रखते मुस्कुराते हुवे - हा अब खुश
सुमिता खाने पीने का समान खोले मे रखने के बाद झुक के बाबा के पैर छूके - आशीर्वाद दीजिये बाबा अपनी बेटी को

इतना इंजत समान् बहोत कम ही लोग बाबा को देते थे नही तो जयदा तर लोग ढोगी बाबा ठग बाबा कहके भगा देते थे

बाबा बहोत खुश होते है सुमिता के नेक दिली साफ दिल मन को देख

बाबा सुमिता के सर पे हाथ रख - हमेसा खुश रहो बेटी

आशीर्वाद लेने के बाद सुमिता खुश होके खरी होती है बाबा सुमिता से बहोत खुश थे इस लिये बाबा देखना चाहते थे सामने खरी सुमिता के चेहरे को बाबा एक वजह से किसी का चेहरा नही देखते लेकिन सुमिता ने मजबूर कर दिया था

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बाबा जैसे ही सुमिता के चेहरे को देखते है बाबा की आखे जैसे ही सुमिता की आखो से मिलती है बाबा शोक मे चले जाते है
वो चेहरे पे खुशी इस्माइल थी जो चेहरा मुस्कुरा रहा था उसके पीछे जो दर्द सुमिता सहते आ रही थी उसे बाबा एक पल मे ही सुमिता की आखो से नजरे मिलते ही देख लेते है

बाबा सांत खरा सुमिता को देखता रहता है सुमिता बाबा को ऐसे देखते देख - बाबा किया हुआ
बाबा होस मे आते अपने आखो को मलते हुवे - कुछ नही बेटी किस्मत की लकीर के आगे किसकी चलती है

सुमिता कंफ्यूज होके - बाबा आपके कहने का मतलब
बाबा सुमिता को देखते हुवे - इस मुस्कुराहट चेहरे के पीछे जो दर्द तुम छुपाते सहते आ रही हो ना वो सब मे साफ देख सकता हु बेटी

बाबा की बातें सुनते ही सुमिता पूरी शोक मे हिल जाती है आखे थोरि फैल जाती है माथे मे सिकन् बॉडी कपने लगती है

सुमिता कपते होठो से बाबा को देख - बाबा आप ये किया बोल रहे है
बाबा सुमिता के दर्द फिल करते हुवे - जो तुमने सुना बताओ जो मेने कहा वो सच है या नही

बाबा के इतना कहते ही सुमिता समझ जाती है सामने खरा बाबा कोई मामूली बाबा नही है

सुमिता फुट परती है आखो से आसु निकलने लगते है सुमिता आस पास देखती है फिर जल्दी से आसु साफ करने लगती है

बाबा दया भाव से सुमिता को देखते हुवे - बेटी
सुमिता बाबा को देख - बाबा आप कोई मामूली बाबा नही लगते मुझे जब आप ने सब देख ही लिया है तो किया मेरी किस्मत की लकीर मे खुसिया अच्छे पल लिखे है

बाबा निरास होते हुवे नजरे नीचे करते हुवे - माफ करना बेटी ये सच है मे किसी की आखो मे देखते ही उसका पास्ट पर्जेंट देख लेता हु लेकिन ये शक्ति मेरे किये एक श्रप् है

सुमिता - पर कैसे बाबा ये शक्ति तो किस्मत को बदल सकती है
बाबा सुमिता को देखते हुवे - नही बेटी मे कुछ नही कर सकता खास कर उन लोगो के लिये जिसकी किस्मत इतनी बुरी तरह किसी को जकर् के रखा हो

सुमिता का दिल बैठ जाता है उमीद टूट जाती है सुमिता इस उमीद मे जीते आ रही थी किसी दिन तो वो उस दलदल से निकलेगी लेकिन बाबा की बातें सुन वो उमीद भी चली गई

तभी साहिल वहा पे आता है अपनी मा बाबा को देखता है साहिल सीधा बाबा के पैर छूके आशीर्वाद लेके सुमिता के पास खरा हो जाता है
सुमिता साहिल को देख - आ गया मेरा बेटा, सुमिता बाबा को देखते हुवे, बाबा ये मेरा एक लौटा बेटा है साहिल

बाबा अपनी नजर साहिल के नजर से जैसे ही मिलाते है बाबा को अब तक के बरा झटका शोक लगता है बाबा की आखे पूरी फैल जाती है

बाबा को यू शोक हैरान देखता देख सुमिता साहिल दोनों हैरान कंफ्यूज बाबा को देखते रहते है

बाबा जल्दी से खुद को नॉर्मल सांत करते हुवे साहिल को देख मन मे - ये ये कैसे हो सकता है जो हो चुका है जो घटना घट चुकी है कोई उसे कैसे बदल सकता है कोई किस्मत की लकीर को कैसे बदल सकता है ये तो उपर वाले ही कर सकता है पर ये लरका इसके अंदर एक एक पावर शक्ति छुपी है जो पास्ट पर्जेंट को बदल के रख सकती है लेकिन ये पावर इसे मिली कैसे और तो और इस लरके को खुद नही पता उसके एक शक्ति है

बाबा फिर सुमिता साहिल को देखते हुवे मन मे - मा भी दर्द सहते आ रही है बेटा भी लेकिन एक दूसरे के सामने कैसे मुस्कुरा रहे है एक दूसरे से अपना दर्द छुपा रहे है सच मे दोनों मा बेटे के बीच बेपनाह प्यार है

सुमिता - बाबा कहा खो गये आप
बाबा होस मे आके देखता है तो साहिल जा रहा था घर के अंदर

बाबा सुमिता को देखते हुवे - बेटी जो मेने कहा उसे भूल जाओ तुम्हारी किस्मत की लकीर को कोई पूरी तरह बदल देगा समय आने पे अच्छा मे चलता हु

बाबा जाने लगते है सुमिता बाबा को जाते देखती रहती है और बाबा के बोले लास्ट बातें सुमिता को सोच मे डाल देती है लेकिन टुटा उमीद फिर जाग गया था

बाबा चलते हुवे सोचे जा रहे थे

बाबा मन मे - यकीन नही होता किया देखा मेने उस लरके साहिल के अंदर किस्मत को बदलने की ताकत है लेकिन उसे अभी तक एहसास नही हुआ है जब उसे पता चलेगा तो

बाबा आसमान की तरफ देखते हुवे एक गहरी सासे लेते हुवे - सब उपर वाले की मर्ज़ी से होता है जो होने वाला है उसे तो हम बदल भी सकते है लेकिन जो हो चुका है उसे बदलना नमुमकींन है लेकिन ये लरका दोनों कर सकता है समय आयेगा तो जल्दी ही उसे एहसास हो जायेगा


साहिल अपने कमरे मे बिस्तर पे लेता फोन मे राधिमा की फोटो देखते हुवे इमोसनाल होके यादों मे खोया था तभी किसी के कमरे मे आने की आहत सुन साहिल जल्दी से फोन बंद करके चेहरे को नॉर्मल कर लेता है जब दर्द दुख छुपा लेता है

सुमिता कमरे मे आती है और साहिल के पैर के पास बैठ साहिल को देखते हुवे - ये कोई समय है बिस्तर पे लेटने सोने का हा बोल

साहिल मुस्कुराते हुवे सुमिता को देख - किया मा आप भी ना कोई जब चाहे बिस्तर पे लेत सो सकता है

सुमिता - तु बिगरता जा रहा है अच्छा सब छोर बाजार चलते है खरीदारी करनी है
साहिल उठ के बैठ - ठीक है बाबा चलते है
सुमिता खरी होते हुवे - मुह मत लटका जब कहती हु चलने को मुह लटका लेता है

15 मिनट बाद साम 4 बजे


सुमिता साहिल रेडी होके सरक किनारे खरे हो जाते है एक रिक्सा आके रुकती है रिस्का पुरा खाली था

रिस्का वाला सुमिता साहिल को देख -जाना है कही
साहिल - मार्केट जाना है
रिस्का वाला - बैठो फिर

सुमिता साहिल बैठ जाते है मार्केट 10 मिनट का रास्ता था थोरि दूर जाते ही रिस्का रुकती है चार लरके थे दो पीछे दो आगे बैठ जाते है रिस्का निकल परती है

एक लरका जो सुमिता के के बगल मे खरा था उसकी जांघे सुमिता की मोती जांघों से चिपकी हुई थी लरका सुमिता की मोती नर्म जांघों की गर्मी फिल करके पागल हो गया था उस लरके का लंड पुरा टाइट खरा हो जाता है लरका जन बुझ के धीरे से और सुमिता से चिपक जाता है जांघे भी और सुमिता की जांघों से चिपका के सुमिता को तिर्चि नजर से उपर से नीचे तक देखते हुवे मन मे - साला मा कसम किया माल है यार जांघों मे इतनी गर्मी है तो इस ऑन्टी की बुर मे कितनी गर्मी होगी उफ मोती नर्म गर्म जांघों की गर्मी फिल करके मेरा लंड खरा हो रहा है

लरका सुमिता के चुचे पे नजर डालते हुवे मन मे - ऑन्टी के चुचे भी कितने बरे है यार कैसे खरे है सारी मे दोनों बरे आम छुपे हुवे है कास सारी नही होती तो और अच्छे से देख पाता

सुमिता जब भी बाहर निकलती है सारी से सीने को कमर पेट को धक के ही निकलती है

साहिल तो आराम से बैठा बाहर देखने मे लगा था साहिल सांत था कियुंकी साहिल राधिका की यादों मे खोया था

वही रिस्का मार्केट आ चुकी थी लरका हिम्मत करके एक हाथ सुमिता के मोटे जांघों पे रख देता है वैसे ही सुमिता चौक सिहर काप् जाती है वही लरका पागल हो जाता है सुमिता के मोटे जांघों के गर्मी नर्म फिल करके लरके का लंड झटके मरने लगता है

सुमिता कपते सिहरते हुवे लरके को देखती है लरका मुस्कुराते हुआ सुमिता को देख धीरे से कान मे - ऑन्टी आपकी जांघे बहोत मोती नर्म गर्म है

सुमिता पूरी शोक मे हिल जाती है और जल्दी से लरके के हाथ को अपने जांघों से हटा देती है तभी रिस्का रुकती है सभी लरके उतर जाते है साहिल भी यादों से बहार आता है सुमिता साहिल भी उतर जाते है साहिल रिस्के वाले को पैसे देने लगता है

वही जो लरका था सुमिता को देख मुस्कुराते जा रहा था सुमिता को बहोत गुस्सा आता है लेकिन कुछ नही कहती

सभी करके मार्केट मे घुमने चले जाते है सुमिता भी साहिल के साथ मार्केट मे जाने लगती है

सुसमा अंदर ही अंदर बहोत दुखी थी अपनी किस्मत को लेके

साहिल मार्केट को देखते हुवे - जब से दीदी मामा के यहा गई है आप मुझे ही साथ मे खिच लाती है अपने साथ

सुमिता साहिल को देखते हुवे - कियु अपनी मा के साथ मार्केट में आना अच्छा नही लगता तुझे

साहिल सुमिता को देख - अरे ऐसा तो नही कहा मेने
सुमिता मुह बना के - तेरे कहने का यही मतलब था चल मे खरीदारी कर लेती हु तु जाके घूम ले
साहिल दोनों पॉकेट मे हाथ डालते हुवे - ठीक है जल्दी करना
साहिल जाने लगता है सुमिता साहिल को जाते देख - हद है थोरि देर हो जायेगी तो किया हो जायेगा

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सुमिता चलते चलते आस पास देखते जाती हो फिर सुमिता एक सब्जी वाले के पास बैठ बैगन उठाने लगती है सुमिता थोरि झुकी हुई थी जिसकी वजह से पीछे सुमिता के बरे गांड थोरा उठे मस्त दिख रहे थे गोल मटोल बरे बरे तरबूज जैसे गोल उपर से नीचे तक बॉडी की बनावट भी अच्छे से देखा जा सकता था

सुमिता सब्जी वाले से - भैया कैसे दिये
सब्जी वाला सुमिता को देख - भाभी आपके किये वही भाव है
सुमिता मुस्कुराते हुवे - चलो हमेसा आपके पास से सब्जी ली जाने का कुछ तो फायदा हुआ

सुमिता बैगन आलू लेती है फिर आस पास देखते हुवे चलने लगती है सुमिता जब चल रही थी पीछे सुमिता के बरे गांड मस्त हिल रहे थे कुछ लरके बूढ़े की नजर सुमिता के हिलते गांड पे ही टिकी थी

सुमिता जितनी खरीदारी करनी थी कर लेती है

सुमिता चारों तरफ देखते हुवे मन मे - कुछ फल ले लेती हु

सुमिता अपनी नजर चारों तरफ दोराती है तो सुमिता को सामने कई फल बेचने वाले दिख जाते है सुमिता चलते हुवे एक फल वाले के पास खरी हो जाती है

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आम संतरे बिक रहे थे सुमिता कुछ अच्छे संतरे चुन के उठाने लगती है सारी सीने से सरक के सुमिता के कंधे पे आ गया था जिसकी वजह से सुमिता के गोरे भरे चिकने पीठ साफ देखने लगते है आते जाते लोग एक नजर सुमिता को उपर से नीचे तक जरूर देखते जाते थे


वही साहिल मार्केट घूम रहा था चेहरे पे कोई खुशी नही थी सिर्फ दर्द यादे थी

तभी कोई राधिमा कहके आवाज लेता है जिसे सुनते ही साहिल जल्दी से आवाज की तरफ मूर के देखता है

एक अंकल अपनी बेटी को आवाज दे रहे थे लरकी कुछ समान ली रही थी और वो लरकी अपने पास खरे पापा कोई देखते हुवे कहती है - बस पापा आ रही हु

साहिल लरकी की तरफ देखता है लरकी का फेस साहिल देख नही पाता लेकिन पीछे से साहिल को देख ऐसा लग रहा था जैसे राधिमा खरी हो साहिल का दर्द फिल जाग जाता है सीने मे दिल मे दर्द होने लगता है साहिल इमोसनल हो जाता है

तभी साहिल के कंधे मे कोई हाथ रखते हुवे - चले बेटा
साहिल जल्दी से खुद को नॉर्मल मुस्कुराते हुवे पीछे सुमिता को देख - देर कर ही दी आपने

सुमिता साहिल के कान पकर - तो किया हो गया अब चल

सुमिता साहिल कर आते है सुमिता खाना बनाने मे लग जाती है वही साहिल खेत किनारे एक पुलिये पे बैठा राधिमा को याद कर दर्द मे बैठा था

अंधेरा होने लगा था राघव घर आता है आगन मे सुमिता रोटी बना रही थी राघव को सुमिता देखते हुवे - 4 बजे छुट्टी होती है आपकी लेकिन अब आये है आप

राघव खटिये मे बैठते हुवे सुमिता को देख - अरे मेरी जान रास्ते मे दोस्त मिल जाते है बातें करते करते हो जाती है देरी तुम हो की रोज सुनाती रहती हो

सुमिता गुस्से नाराजगी से राघव को देख - अच्छा मे गुस्सा करती रहती है हा

राघव जल्दी से सुमिता के पीछे से बाहों मे कस लेता है और गाल पे किस करते हुवे प्यार से - हा गुस्सा तो करती हो लेकिन प्यार भी बहोत करती हो चलो ना कमरे मे आज बहोत मन है

सुमिता बहोत शर्मा जाती है

सुमिता राघव को दूर करते हुवे सर्म से - हटो जी इस उमर मे बच्चो जैसी हरकत बंद करिये बेटा बेटी जवान हो गये है खोले मे ऐसे मुझे मत पकरा कीजिये ना कुछ बोला कीजिये बच्चे देख सुन लेगे तो

राघव खटिये पे बैठते हुवे हस के - समझ गया बाबा आगे से ध्यान रखुंगा लेकिन बताओ तो रात करने दोगी ना सच मे बहोत मन है

सुमिता सर्म से लाल चेहरे लिये राघव को बिना देखे रोटी बेलते हुवे धीरे से - हु जब दिल करता है मे रोकती थोरि हु आपको

राघव खुश होके - मजा आयेगा तुम्हारी
सुमिता जल्दी से राघव को देख - बस आगे नही बेसरम होते जा रहे है

सुमिता रोटी बनते हुवे मन मे - हद है इस उमर के आके मस्ती गंदी बातें करनी होती है इनको

रात 8 बजे

खाना लग गया था साहिल राघव सुमिता बैठे थे

राघव साहिल को सुनाने मे लगा था

राघव साहिल से - नालायक कमीने 10 वि पास करके पढाई छोर कर किया रहा है एक मजबूर बाप अपने बेटे को पढ़ा नही पाता तो समझ आता है लेकिन तेरा बाप तुझे पढाना चाहता है तो पढ़ने के बजाये गाव घूमता रहता है

साहिल नजरे नीचे किये सब सुनता रहता है कुछ नही बोलता
सुमिता राघव से - देखिये जी खाना खाते वक़्त कुछ मत बोला कीजिये कितनी बार आपको कहा है मेने

राघव सुमिता को देख थोरा गुस्से मे - तुम चुप रहो सुमिता पढाई कितनी जरूरी है तुझे भी अच्छे से पता है मे बस यही चाहता हु ये नालायक पढ़ लिख के कुछ बन जाये हमारे जाने के बाद कम से कम ये अपनी लाइफ जी तो पायेगा कुछ बनके

साहिल जोर से गुस्से मे राघव सुमिता को देखते हुवे - बस कीजिये पापा अभी आप मा जवान है कही नही जा रहे समझ गये अभी आप दोनों कई साल जियेंगे

साहिल इतना केह खाना छोर कमरे मे चला जाता है

राघव सुमिता हैरान देखते रह जाते है

सुमिता राघव को देखते हुवे - बहोत प्यार करता है मुझे आपको इस लिये गुस्सा हो गया आपकी बातो से

राघव थोरा इमोसनल होके सुमिता को देख - जनता हु किया मे उसे प्यार नही करता मेरा लाल है वो मेरा सब कुछ किया करू सुमिता साहिल पहले से बहोत बदला हुआ लगता है मुझे

सुमिता राघव को देखते हुवे - सच कहु तो मुझे भी ऐसा ही लगता है पर उसके पीछे की वजह नही जानती

साहिल लेता हुआ छत को देखे जा रहा था कुछ देर बाद सुमिता दूध ग्लास मे लेके आती है और साहिल की पास बैठ बाल सेहलते हुवे - चल दूध पीले नाराज नही होते तेरे पापा तेरे भले के लिये कहते है

साहिल उठ के बैठ ग्लास लेके नजरे नीचे किये - जनता हु मा
सुमिता साहिल को गोर से देखते हुवे - बेटा तु बदला सा नजर आता है कुछ बात हुई है तो बता मुझे

साहिल हैरान घबरा जाता है लेकिन खुद को संभालते हुवे - नही तो
सुमिता फिर कुछ नही कहती साहिल दूध पीने लगता है दूध पीके ग्लास रख देता है

तभी साहिल का फोन बजता है

साहिल फोन उठा के - हा दीदी बोलिये
अंजली - छोटे कल आ रहा है ना मा पापा को लेके
साहिल - दीदी आ तो रहा हु लेकिन पापा नही आ पायेंगे छुट्टी नही मिली उनको
अंजली - ठीक है तो मा को लेके आ जाओ मामी की तबियत ठीक नही है

कुनाल की आवाज आती है

कुनाल - कैसा है भांजे तेरी मामी की तबियत थोरि खराब है सुमिता को लेके आजा कुछ दिन के लिये छोटी कहा है

साहिल - पास मे ही बैठी है
कुनाल - छोटी मेरी बहन आ रही है ना
सुमिता - जी भैया आउंगी लेकिन साहिल के पापा अकेले कैसे रहेगे
कुनाल - अरे उनकी छोरो कई बार तुम आती हो तो रह लेते है खाना बनाना कपड़े धोना सब कर लेते है माधुरी भी आ रही है कल

अंजली - भाई मा कल आ रही है ना
सुमिता - ठीक है
फोन कट

सुमिता खरी होके गिलास लेके साहिल को देख - सोजा पापा कि बात का बुरा मत मानना

सुमिता बाहर आती है वैसे ही कपने लगती है जोर जोर से ससे लेने लगती है अपनी मुठी कस लेती है सुमिता के चेहरे पे डर दर्द दुख था

सुमिता आसमान मे तारों को देखते हुवे दर्द भरी आवाज मे - जहा से सब सुरु हुआ जहा मे जाना नही चाहती जिसका मे चेहरा देखना नही चाहती जिस गाव जिन लोगो से दूर रहना चाहती हु कियु तुम मुझे वही भेज रहे हो कियु


सुमिता बरी मुश्किल से खुद को सांत करती है नॉर्मल फेस चेहरे पे मुस्कान किये कमरे मे आती है

राघव लेता सुमिता को देख - उफ जान जल्दी करो ना

सुमिता बिस्तर पे लेत जाती है तांगे फैला के नाइटी उठा देती है बालों से भरी फूली उभरी बुर राघव के सामने थी

राघव सुमिता को देखते हुवे - ये जंगल किया कर रहा हो हु बताओ
सुमिता राघव को देखते हुवे सर्म से लाल होके - कल साफ कर लुगी

राघव लंड निकाल थूक लगाते हुवे सुमिता के उपर लेत एक हाथ से लंड बुर पे सेट करते हुवे सुमिता को देख - साफ कर लेना

राघव लंड सेट करने के बाद दोनों हाथो को सुमिता के सर के बदल मे रख सुमिता को देखते हुवे धीरे से लंड अंदर घुसाने लगता है लंड बुर फैलाते हुवे पुरा अंदर तक घुस जाता ही सुमिता दर्द मे सिसक परती है अपने दोनों हाथो से राघव को पकर दर्द भरी आवाज मे - आह दर्द हो रहा है
राघव धीरे धीरे गांड आगे पीछे करते हुवे चुदाई करने लगता है साथ मे सुमिता के गले पे गाल पे चुचे पे किस करने लगता है सुमिता राघव को बाहों मे कस के पकरे आह उफ मा सिसकिया लिये जा रही थी
सुमिता के दोनों पैर हवा मे थे जो राघव के धक्के से हिल रहे थे जिसकी वजह से पायल छन की आवाजे भी गुज रही थी
सुमिता के चेहरे पे दर्द था वो तरहा मचल रही थी अपने चेहरे को इधर उधर किये जा रही थी

राघव पुरा सुमिता के उपर लेत तेज धक्के मरने लगता है

सुमिता को और दर्द होने लगता है सुमिता राघव के बाजू पकरे दर्द मे - धीरे करिये ना दर्द हो रहा है
राघव धक्के मारते हुवे सुमिता के दोनों हाथ मजबूती से पकर और तेज धक्के मरने लगता है

सुमिता दर्द मे आसु लिये तरप् के दर्द मे लेती रहती फट फच् फट फट पायल की छन् छन सुमिता की दर्द भरी आह उफ सिसकिया की आवाज कमरे से बाहर तक आ रही थी

10 मिनट बाद

राघव सुमिता की चुदाई करके लेत जाता है वही सुमिता उठ के आसु साफ करके बाहर घर के पीछे जाके पिसाब करती है सुई सुई सुई की आवाज मस्त गुज लगती है

सुमिता पिसाब करने के बाद आके लेत जाती है निंद उर गई थी अपने भाई अपने मायके जाने की सोच कर ही

तो वही सुमिता के ससुराल मे कुछ अलग ही चल रहा था जो सुमिता को अंदाज़ा भी नही था



आज के लिये इतना ही 🙏🙏
 
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