दिया अभी जल ही रहा था, वो मुझसे नज़रें मिला कर लजा गईं, उन्होंने जल्दी से एक हाँथ से दिया बुझा दिया, और मेरी बनियान को पकड़कर उतारने लगी तो मैंने झट से ही उसे उतार फेंका और रजाई ओढ़कर हम दोनों अमरबेल की तरह एक दूसरे से लिपट गए, उनकी मोटी मोटी चूचीयाँ और तने हुए निप्पल अपने नंगे बदन पर महसूस कर मैं मदहोश होता जा रहा था, कितनी नरम और गुदाज थी उनकी चूचीयाँ, मैंने कुछ देर उन्हे चूमा और जब चढ्ढी के अंदर से ही अपने खड़े लंड से उनकी नंगी बूर पर हल्का हल्का धक्के मारे तो वो और लजा गयी, अब दालान में बिल्कुल अंधेरा था, मैंने धीरे से उनका हाँथ पकड़ा और अपनी चढ्ढी के अंदर ले गया वो समझ गयी, उन्होंने शर्माते हुए खुद ही मेरे लोहे के समान कठोर हो चुके 8 इंच के लंड को जैसे ही पकड़ा उनके मुँह से हल्का सा सिसकी के साथ निकला "इतना बड़ा", मैंने बोला- सिर्फ मेरी अम्मा के लिए।
वो मुझसे कस के लिपट गयी और फिर मेरे कान में बोली- कभी किसी को पता न लगे, तेरे बाबू को पता लगा तो अनर्थ हो जाएगा।
मैं- आपको मेरे ऊपर विश्वास है न अम्मा।
माँ- बहुत, अपने से भी ज्यादा
मैंने उनके होंठों को चूम लिया और उन्होंने मेरा साथ दिया, मेरे कठोर लंड को सहलाते हुए वो सिसकने लगी और मेरी चढ्ढी को पकड़कर हल्का सा नीचे करते हुए उसे उतारने का इशारा किया, मैंने झट से चढ्ढी उतार फेंकी और अब मैं रजाई के अंदर बिल्कुल नंगा था। उन्होंने सिसकते हुए अपनी दोनों टांगें हल्का सा मोड़कर फैला दिया, जैसे ही मेरा दहाड़ता हुआ लंड उनकी दहकती हुई बूर से टकराया वो बड़ी मादकता से सिसक उठी, मेरा लंड उनकी बूर पर जहां तहां टकराने लगा और दोनों की ही सिसकी निकल जा रही थी, मैंने अपने लंड को उनकी रसीली बूर की फांकों के बीच रगड़ना शुरू कर दिया, मुझसे रहा नही जा रहा था और उनसे भी नही, बार बार लंड भग्नासे से टकराने से वो बहुत उत्तेजित हो चुकी थी, मैंने एक हाँथ से अपने लंड को पकड़ा, उनकी चमड़ी खोली और जैसे ही उनकी रिसती हुई बूर के छेद पर रखा उन्होंने मेरे कान में धीरे से बोला-धीरे धीरे अरविंद…...बहुत बड़ा है ये।
मैं- बाबू से भी
उन्होंने लजाकर मेरी पीठ पर चिकोटी काटते हुए बोला- हाँ…..बेशर्म
मैंने उन्हें चूम लिया और बूर की छेद पर रखकर हल्का सा दबाया तो लंड फिसलकर ऊपर को सरक गया, मारे उत्तेजना के मैं थरथरा सा रहा था वही हाल माँ का भी था, लेकिन मेरे अनाड़ी पन की वजह से मां को बहुत दर्द हुआ पर मां आवाज को दबा गई, मां भी जल्दी से जल्दी वो मेरा लंड अपनी बूर की गहराई में लेना चाह रही थी और मैं भी उनकी बूर में जड़ तक लंड उतारना चाह रहा था पर आज ये जीवन में पहली बार था मेरे लिए, मारे उत्तेजना के मैं कांप सा रहा था, अपनी ही माँ को चोदना ये सोचकर ही चरम उत्तेजना होती थी तो आज की रात तो मैं ये साक्षात कर रहा था, एक दो बार लंड ऊपर की ओर सरक जाने के बाद अम्मा ने अपने दोनों पैर मेरी कमर पर लपेट लिय और एक हाँथ नीचे ले जाकर मेरे तड़पते कठोर लंड को पकड़कर एक बार अच्छे से सहलाया और फिर अपनी बूर की छेद पर रखकर उसको सही रास्ता दिखाते हुए दूसरे हाँथ से मेरी गाँड़ को हल्का सा दबाकर लंड घुसाने का इशारा किया तो मैंने एक तेज धक्का मारा, लन्ड इस बार गच्च से आधा बूर में चला गया, जिस से मां को बहुत ज्यादा दर्द हुआ और वो कराहते हुए बोली-आहह मोरी मैया मर गई मां,बेटा मैंने बोला था ना "धीरे धीरे" अब लंड बूर में घुस चुका था, उन्होंने हाँथ वहां से हटाकर सिसकते हुए मुझे आगोश में भर लिया, मैं कुछ देर ऐसे ही आधा लंड बूर में घुसाए उनपर चढ़ा रहा, आज पहली बार पता लग रहा था कि वाकई में हर मर्द को बूर चोदने की हसरत क्यों तड़पाती रहती है, क्यों इस बूर के लिए वो मरता है, क्या जन्नत का अहसास कराती है ये बूर, कितनी नरम थी अम्मा की बूर अंदर से और बिल्कुल किसी भट्टी की तरह उत्तेजना में धधक रही थी, कुछ पल तो मैं कहीं खो सा गया, अम्मा मेरी पीठ को सहलाती रही, फिर मैंने एक तेज धक्का और मारा और इस बार मेरा लंड पूरा जड़ तक अम्मा की बूर में समा गया, वो एक तीखे दर्द से कराह उठी, मुझे खुद अहसाह हो रहा था कि मेरा लंड उनकी बूर की कुछ अनछुई मांसपेशियों को चीरता हुआ उनके गर्भाशय से जा टकराया था, वो मुझसे बुरी तरह लिपटी हुई थी, और तेज तेज आंखे बंद किये कराह रही थी, अब रुकना कौन चाह रहा था, मैंने रजाई अच्छे से ओढ़ी और उन्होंने कराहते हुए अपने को मेरे नीचे अच्छे से व्यवस्थित किया और फिर मैंने धीरे धीरे लंड को अंदर बाहर करते हुए अपनी सगी माँ को चोदना शुरू कर दिया, वो मस्ती में सिसकते कराहते हुए मुझसे लिपटती चली गयी, इतना मजा आएगा ये कभी कल्पना भी नही की थी, जितना कुछ कभी सोचा था उससे कहीं ज्यादा मजा आ रहा था।