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Thriller कातिल रात

Raj_sharma

यतो धर्मस्ततो जयः ||❣️
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Ragini ne gundi ka band bajwa diya !
Sayad technical hi problem thi jo police ki madad leni padi nahi to akele hi sab dekh leti !

Dekhte hai yeh kadamtaal kya dikhata hai?
Kabhi-2 police ki madad leni bhi chahiye, varna gunde uski.. mera matlab hai usko maar dete😎
Pistol thi sabke pas :dazed:
Thank you very much for your valuable review and support bhai :thanks:
 

Ajju Landwalia

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#20

"पुलिस को क्यो शामिल किया हैं" सौम्या ने फिर से मुझ से पूछा।

"हमे पता नही है कि कितने लोग वहां तुम्हारे स्वागत में फूलों का हार लेकर खड़े है, भिड़ने को तो मैं सभी से अकेली भीड़ जाऊंगी, लेकिन उन हालात में तुम अकेली पड़ जाओगी, कम से कम पुलिस के एक दो लोग तुम्हारी हिफाजत के लिए रहेंगे तो मैं बेफिक्र होकर उन लोगो का बैंड बजा पाऊंगी, और फिर गोली बारी में उनके दो चार लोग मार भी दिए तो सब कानूनी दायरे में आ जायेगा और हम पर कोई उसका दोषारोपण नही करेगा" मैने अपनी नीति सौम्या को समझाई।

सौम्या ने एक बार फिर मेरी ओर मुरीद नजरो से देखा।

हमारी गाड़ी अभी होटल सिद्धार्थ के गोलचक्कर पर ही थी कि शर्मा जी का नंबर मेरे मोबाइल पर चमकने लगा था।

"जी सर!" मैं फोन उठाते ही अदब से बोली।

"अभी तकरीबन एक घँटे में स्पेशल ब्रांच की टीम तुम्हारे पास पहुँच जाएगी, वे लोग सभी सादी वर्दी में होंगे, जो स्पेशल ऐसे ही मुठभेड़ के लिए विशेष ट्रेनिग लिए होते है, मैंने उस टीम के हेड इंस्पेक्टर प्रदीप भारद्वाज को तुम्हारा नंबर दे दिया है, वो अब तुम्हारे संपर्क में रहेगे" शर्मा जी ने मुझे बोला।

"ठीक है सर! मैं राजेन्द्र प्लेस के पेट्रोल पंप पर उन लोगो का इंतजार कर रही हूँ, उनके आने के बाद हम आगे की प्लानिंग बनाते हैं" मैने शर्मा जी को बोला।

"आल द बेस्ट रागिनी, हमारी बेस्ट टीम वहां आ रही है, चिन्ता करने की कोई जरूरत नही हैं" ये बोलकर शर्मा जी ने फोन रख दिया।

"यार सच मे किसी भी चीज़ को प्लान करने में तुम्हारे दिमाग का कोई जवाब नही है, यू आर द बेस्ट रागिनी" सौम्या की आवाज से ही उसकी खुशी झलक रही थी।

"सौम्या वो तो गुरु थोड़ी सी लापरवाही से इस वक़्त थाने में बैठे हुए है, नही तो उनसे बढ़िया प्लान तो मैं भी नही कर पाती" मैंने अपने गुरू या यूं कहिए कि श्री श्री 1008 गुरु घण्टाल रोमेश की शान में कसीदे पड़े।

"यार तुम दोनो ही बेस्ट हो, तुम दोनो शादी क्यो नही कर लेती हो, तुम्हारे बच्चे भी बहुत इंटेलिजेंट और बहादुर होंगे" सौम्या ने मुस्कराते हुए बोला।

"क्यो मै ऐसे आज़ाद घुमते हुए तुम्हे अच्छी नही लग रही हूँ" मैंने सौम्या की बात पर ऐतराज जताया।

"अरे यार क्यो अपनी जिंदगी की वाट लगा रही हो, मुझें पता है कि रोमेश भी तुम्हे पसंद करता है, बस वो तुम्हारी मार्शल आर्ट से डरकर तुम्हे प्रपोज नही करता है" सौम्या अब थोड़ी सी टेंशन फ्री होकर मेरी टांग खिंचाई में लगी हुई थी।

"गुरु और मुझ से डरेंगे, वो डरते किसी से नही है, बस वे मेरी रिस्पेक्ट करते है, और मैं उनकी उनसे भी ज्यादा रिस्पेक्ट करती हूँ" अभी मैं सौम्या की बकलोली का जवाब दे ही रही थी कि मेरे फोन पर एक अंजान नंबर बज उठा। मैने तुरन्त फोन उठाया।

"रागिनी जी ! मैं इंस्पेक्टर प्रदीप भारद्वाज बोल रहा हूँ, स्पेशल ब्रांच से, आप हमें कहाँ पर मिलेगी" उधर से लाइन पर प्रदीप भारद्वा ज थे।

"जी सर मैं राजेन्द्र प्लेस के पेट्रोल पंप पर एक गाड़ी में हूँ" मैने उन्हें बताया।

"ठीक है हम पंद्रह मिनट में आपके पास पहुंच रहे है, फिर मिलकर बात करते है" ये बोलकर प्रदीप जी ने फोन काट दिया।

फोन कटते ही सौम्या फिर से शरारती नजरो से मेरी ओर देखने लगी थी।

सौम्या भी आज मेरी और गुरु की शादी करवाकर ही मानने वाली थी, जबकि मेरे दिमाग मे इस वक़्त धीरज बवानिया के गुर्गे घूम रहे थे, जिन्हें अगले आधे घँटे में हमे ठिकाने लगाने की शुरुआत करनी थी।

इंस्पेक्टर प्रदीप भारद्वाज अपने दिए हुए वक़्त के मुताबिक ही ठीक पंद्रह मिनट में उस पेट्रोल पंप पर पहुंचकर मेरे मोबाइल पर अपना नंबर चमका दिए थे।

मैंने फोन बजते ही अपनी निगाहों को अपने आसपास घुमाया तो एक गाड़ी को पेट्रोल पंप से पहले ही खड़ा हुआ पाया।

मैंने अपना हाथ निकालकर उस गाड़ी की तरफ हिलाया। मेरे हाथ का इशारा मिलते ही वो गाड़ी कुछ ही पल में हमारी गाड़ी के बराबर में आ खड़ी हुई थी, और प्रदीप भारद्वाज जी हमारी गाड़ी में पिछली सीट पर आ चुके थे।

"आप मे से रागिनी कौन है" प्रदीप जी ने बैठते ही पूछा।

मैने अपना हाथ ऐसे उठाया जैसे कोई विधार्थी कक्षा में सवाल का जवाब देते हुए उठाता है।

मेरे ऐसे हाथ उठाये जाने से प्रदीप जी के चेहरे पर हल्की सी मुस्कान खिल गई।

"इसका मतकब आप सौम्या जी है, और उन गैंगस्टर के गुर्गों से आपको खतरा है" प्रदीप जी, सौम्या से मुखातिब होते हुए बोले।

"जी" सौम्या ने बहुत संक्षेप में जवाब दिया।

"रागिनी जी ! वे लोग इधर उधर छितराये हुए होंगे, या आसपास कहीं छुपे हुए होंगे, सवाल ये है कि उन्हें बाहर कैसे निकाला जाए" प्रदीप जी ने मेरी ओर देखते हुए बोला।

"जहाँ तक मेरी जानकारी है, वे लोग सिर्फ इसलिए यहाँ पर तीन दिन से घात लगाए हुए बैठे है, की वे सौम्या को देखते ही इस पर गोलियो की बौछार कर सके, इसलिए उन लोगो को बिल से बाहर निकालने के लिए मैं सौम्या को उन लोगो के सामने करने का खतरा मोल नही ले सकती हूँ" मैंने सपष्ट लहजें में बोला।

"आपकीं बात बिल्कुल सही है, ऐसी सिचुएशन में तो मैं भी सौम्या जी को लेकर कोई जुआ नही खेलूंगा, अब इसमे हमारे पास बस एक ही तरीका बचता है कि हम उस एरिया की निगरानी करे और जो भी संदिग्ध नजर आता हैं, उसे पकड़कर पूछ्ताछ करे" प्रदीप जी अपनी जगह सही बोल रहे थे।

"मेरे दिमाग में एक आइडिया है, मैं इस गाड़ी को लेकर पार्किंग में जाती हूँ, अगर वे ज्यादा ही उतावले हुए तो वे गाड़ी पर ही गोली चला सकते है, अगर मुझे गाड़ी से उतरने का वक़्त मिलता है तो हो सकता है कि मेरी शक्ल देखकर एका एक गोली न चलाए, उसके बाद अगर कोई मुझे अकेली जानकर मेरे सामने आता है तो मैं उनसे निबट लूँगी" मैने अपना प्लान बताया।

"लेकिन इस प्लान में तो तुम्हारी जान को भी खतरा है रागिनी जी" प्रदीप जी ने मेरी ओर देखकर चिंतित स्वर में बोला।

"जान को खतरा तो हर समय रहता है सर! अभी पैट्रोल पर खड़े है, अगर यहाँ आग लग जाये तो सभी की जान खतरे में आ जाएगी, वैसे मैं खुद को बचाना जानती हूँ, आप चिन्ता मत कीजिये, अगर एक साथ पांच सात गोली भी मेरी ओर लपकती है तो वो मुझे छू भी नही पाएगी" मैंने आत्मविश्वास भरे स्वर मे बोला।

"नही ! मैं तुम्हारी जान को भी खतरे में नही डाल सकती रागिनी, अगर ऐसी बात है तो मैं खुद जाउंगी, आप मुझे कवर करना बस, बाकी ऊपरवाले की मर्जी, जो होगा देखा जाएगा" सौम्या ने निर्भीक स्वर में बोला।

"अगर कुछ हो ही गया तो फिर तुम देखने के लिए रहोगी नही न मेरी बन्नो, अपना तो ये रोज का काम है, आज फिर से ये काम सही, अब तुम जाकर पुलिस की गाड़ी में जाकर बैठो, तुम्हारी गाड़ी में ये फायदा है कि कोई बिना नजदीक आये, मुझे निशाना नही बना पायेगा, और जो हमारे नजदीक आता है तो उसे हम दूर जाने लायक छोडते नही हैं" मैने मुस्कराकर सौम्या को बोला।

सौम्या ने मजबूर नजरो से मेरी ओर देखा, और गाड़ी से उतरकर साथ वाली गाड़ी में जाकर बैठ गई।

"मैं इसी गाड़ी में पीछे छुपकर बैठ जाता हूँ, अगर कोई गाड़ी के नजदीक आकर हमला करता है तो, हम दो तरफ से उन्हें घेर सकते है" प्रदीप भारद्वाज भी जाबांज किस्म के पुलिस अधिकारी थे।

"ठीक है सर! जो लोग पैदल हमे कवर कर रहे होंगे, उन्हें बोलिये की जैसे ही कोई हमारी गाड़ी की ओर बढ़ता है, उन्हें तुरन्त अपने गन पॉइंट पर ले ले" मैने प्रदीप जी को बोला।

"ठीक है" ये बोलकर प्रदीप जी ने फोन मिलाकर तुरंत दूसरी गाड़ी में बैठे हुए अपने साथी को पूरे प्लान के बारे में समझाया।

उनके फोन रखते ही उस गाड़ी से उतरकर चार पुलिसकर्मी उतरकर अगली रचना सिनेमा वाली बिल्डिंग की ओर तेज कदमो से बढ़ गए।

सौम्या जिस गाड़ी में थी, वो गाड़ी वही खड़ी रही, उसमे दो पुलिस कर्मी सौम्या के साथ ही बैठें हुए थे। मुझे प्रदीप जी ने इशारा किया और मैंने गाड़ी को आगे बढ़ा दिया और उन पैदल पुलिसकर्मियों को पीछे छोड़ते हुए रचना सिनेमा के पास जाकर गाड़ी को रोक दिया।

"इसकी पार्किंग का रास्ता पिछले दरवाजे से है, इन लोगों को पैदल इधर से जाने दो, हम लोग घूमकर उधर से प्रवेश करते है" प्रदीप जी ने चारों ओर निगाह दौड़ाने के बाद बोला।

मैने प्रदीप जी के बोलते ही वही से गाड़ी को यूटर्न दिया और अगली रेड लाइट से गाड़ी को लेफ्ट टर्न देकर पहले कट से ही गाड़ी को नीचे उतरती चली गई, क्या कि वो सड़क किसी पहाड़ी की तरह से नीचे जा रही थी।

मैंने गाड़ी को पार्किंग के गेट से अंदर किया, और गाड़ी को बिना रोके ही अंदर की तरफ दौडा दिया, मेरे साथ साथ प्रदीप जी की चौकन्नी निगाहे भी चारो तरफ देखती हुई जा रही थी।

अधिकतर आफिस की छुट्टी हो जाने की वजह से इस वक़्त पार्किंग में खाली जगह की बहुतायत थी, मैंने उसके बावजूद गाड़ी को दीवार के साथ इस प्रकार से लगाया कि आपातकाल में हमे गाड़ी और दीवार के बीच की खाली जगह का फायदा मिल सके।

वे सभी पुलिसकर्मी हमसे पहले ही छोटे रास्ते से पार्किंग के अंदर पहुंच चुके थे। वे सभी पार्किंग में आते ही इधर उधर छितरा चुके थे।

तभी एक गाड़ी तेज रफ्तार से हमारी ओर आई और बिल्कुल हमारी गाड़ी के नजदीक आकर उन्होने अपनी गाड़ी के ब्रेक लगाए।

तभी उस गाड़ी का दरवाजा खुला। लेकिन मेरी नजर उनकी गाड़ी के अंदर हो रही हरकत पर पड़ चुकी थी, उस गाड़ी में कुल जमा चार लोग थे, जिनके हाथो में अब पिस्टल आ चुकी थी।

मैंने अपनी तरफ का दरवाजा एक सेकेण्ड के सौवें हिस्से से भी कम समय मे खोला और गाड़ी से उतरकर गाड़ी और दीवार के बीच मे लेट गई।

लेकिन तब तक एक गोली चल चुकी थी जो कि मेरी साइड का शीशा तोड़ती हुई मेरे ऊपर से गुजर कर दीवार में धंस कर अपना दम तोड़ चुकी थी।

मैं किसी छिपकली की मानिंद गाड़ी के नीचे घुसी और गाड़ी के नीचे से ही पहले तो उस गाड़ी के दोनो टायरों में गोली मारी। तब तक ऊपर भी गोली बारी शुरू हो चुकी थी।

शायद उन पुलिस कर्मियों ने उस गाड़ी को चारों तरफ से घेर लिया था, मैं वापिस पलटी और अपनी गाड़ी और दीवार के बीच मे खड़ी होकर एक साथ अपने पिस्टल के ट्रिगर को दबाती चली गई।

मैने देखा कि प्रदीप जी भी गाड़ी से बाहर आकर उधर ही गोलिया बरसा रहे थे।

पूरी पार्किंग में अफरा तफरी का माहौल था, हर कोई अपनी गाड़ियों में सिर नीचे करके बैठा हुआ था। कमाल की बात ये थी कि उनकी तरफ से सिर्फ एक एक राउंड फायरिंग के बाद ही खामोशी छा चुकी थी।

तभी प्रदीप जी ने हाथ उठाकर फायरिंग रोकने का इशारा किया।

"पार्किंग का मेन गेट बंद करवाओ, और एक आदमी अंदर वाले गेट से किसी को भी बाहर न जाने दे" प्रदीप जी ने चीखते हुए अपने मातहतों को आदेश दिया।

उनका आदेश पाते ही दो लोग एकदम विपरीत दिशा में दौड़ गए।

मैं अभी तक अपनी पिस्टल को उसी गाड़ी की दिशा में करके खड़ी हुई थी। कुल जमा चार मिनट में सब खत्म हो चुका था।

"गुड जॉब ब्रेवो गर्ल" तभी प्रदीप जी ने मेरी ओर अपने अंगूठे से थम्सअप का निशान दिखाते हुए बोला।

उसके बाद बाकी दोनो पुलिसिये फूंक फूंक कर कदम रखते हुए उस गाड़ी के पास पहुंचकर अंदर झांकने लगे।

"सर! चारो लोग मारे जा चुके है" उनमें से एक पुलिसिये ने हमारी ओर देखते हुए बोला।

उसकी बात सुनते ही मैं और प्रदीप जी गाड़ी के पीछे से निकलकर उस गाड़ी की ओर बढ़ गए।

गाड़ी में चारों ही बन्दे जवान उम्र के लड़के थे, जिन्होने इतनी सी उम्र में ही जिंदगी जीने का गलत तरीका अख्तियार कर लिया था, और आज मौत ने भी उनके साथ भी गलत सलूक ही किया था।

"मैं अपने सीनियर को आपरेशन के सफल होने की जानकारी दे दूं, और फोरेंसिक वालो को भी बुला लू, क्यो कि पुलिस मुठभेड़ की रिपोर्ट सबसे ज्यादा इस देश के मीडिया और मानवाधिकार वालो को देनी पड़ती है" प्रदीप जी ने मुस्कराते हुए कहा।

"कोई नही सर! हमले की शुरुआत उन लोगों ने की थी, ये सबूत तो यहां चारो और बिखरे पड़े है" मैंने प्रदीप जी को बोला।

"ठीक है, आप सौम्या जी को भी यहां के हालात के बारे में जानकारी दे दो, अभी इन लोगो की भी शिनाख्त करनी है कि मरने वाले कौन कौन हैं" प्रदीप जी ने मुझें बोला तो मैं सौम्या को फोन मिलाने लगी।

वहां फैले हुए रायते को समेटने में दो घँटे का वक़्त और लग गया था। एहतियातन हमने सौम्या को न अभी उसके आफिस जाने दिया था और न ही वहां पार्किंग में ही आने दिया था।

पार्किंग में मौजूद लोगों की चेकिंग में ही काफी समय जाया हो गया था। लेकिन जो सबसे खास बात थी, इस मुठभेड़ में खुद धीरज बवानिया मारा गया था।

जिन चार लाशो को अभी कुछ देर पहले ही पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया था, उनमे से एक लाश धीरज की भी थी।

धीरज बवानिया, चंदन, संध्या, कुमार गौरव की मौत के बाद भी अभी तक देविका और मेघना मेरी पहुंच से बाहर थी।

उन चारों लाशो की जेब से उनकी जो आइडेंटिटी बरामद हुई थी, वो इंस्पेक्टर प्रदीप भारद्वाज के पास ही थी।

धीरज के घर का पता मैंने ले लिया था, लेकिन अभी उसके उस ठिकाने की तलाश मुझे करनी थी, जहां से धीरज अपनी सारी गैरकानूनी गतिविधियों को संचालित करता था।

"चलिये अब यहां से निकलते है रागिनी जी, हमे पिछले गेट से जाना पड़ेगा, क्यो कि बाहर तो मीडिया का जमावड़ा लगा हुआ है" प्रदीप जी ने मुझे बताया।

"अभी ये सौम्या की गाड़ी क्या यही रहेगी" मैने गाड़ी की ओर इशारा करते हुए कहा।

"गाड़ी को यही रहने दीजिए, सुबह मंगवा लेना गाड़ी को, मैं आप लोगो को घर तक छुड़वा देता हूँ, वैसे इस मुठभेड़ में धीरज के मरने से सौम्या के ऊपर जो खतरा मंडरा रहा था, वो तो खत्म हो गया है, क्यो कि जब गैंग का सरगना ही मारा गया तो, नीचे वाले तो खुद ही अंडरग्राउंड हो जायेगे" प्रदीप जी ने एकदम सही बात बोली थी।

"ठीक है! फिर तो आपकीं राय ही ठीक है, लेकिन अभी हमें घर ही छोड़ दीजिए" मैंने प्रदीप जी को बोला।

"ठीक है फिर आइए मेरे साथ" ये बोलकर प्रदीप जी पिछले गेट की ओर बढ़ गए।

मैं भी उनके साथ कदमताल मिलाती हुई चल पड़ी।


जारी रहेगा_____✍️

Bahut hi umda update he Raj_sharma Bhai

Ragini ne gazab ki planning ke sath sabhi ka safaya kar diya.........

Ab gang members ki taraf se to saumya safe he..........

Lekin devika aur meghna abhi tak gaya he.......

Keep rocking Bro
 

Raj_sharma

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Bahut hi umda update he Raj_sharma Bhai

Ragini ne gazab ki planning ke sath sabhi ka safaya kar diya.........

Ab gang members ki taraf se to saumya safe he..........

Lekin devika aur meghna abhi tak gaya he.......

Keep rocking Bro
Kitne din gayab rahti hai yahi dekhna hai? 😎 sath bane rahiye, thank you very much for your valuable review and superb support bhai :hug:
 

Raj_sharma

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